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एक घंटे, कैमरे पर, सिर्फ मुस्लिम पर चुटकुले, पैसे जो तुम चाहो: भगवान पर चुटकुले बनाने वाले कॉमेडियन को खुला ऑफर

मनोरंजन इंडस्ट्री में ख़ुद को कॉमेडियन बता कर हिन्दू देवी-देवताओं पर सस्ते चुटकुले मारने वालों की भरमार आ गई है। इनमें से एक नाम वीर दास का भी है, जो कई बॉलीवुड फिल्मों में भी एक्टिंग कर चुके हैं। वीर दास अक्सर सोशल मीडिया के माध्यम से दक्षिणपंथी विचारधारा के लोगों को भला-बुरा कहता रहता है। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि नेटफ्लिक्स पर उनके कई ऐसे चुटकुले पड़े हैं, जो भगवान पर हैं।

दरअसल, ये सब शुरू हुआ वीर दास द्वारा ज्ञान देने से। उन्होंने आलोचकों से कहा कि वो उनके चुटकुलों को पसंद करते हैं या नहीं, ये उनकी अपनी व्यक्तिगत प्रतिक्रिया हो सकती है। लेकिन, साथ ही उन्होंने कहा कि जिन्होंने न कभी कोई चुटकुला लिखा, न इसमें अपना करियर बनाया और न कभी स्टेज पर खड़े होकर परफॉर्म किया, वो कृपया सलाह न दें कि कॉमेडी कैसे की जाती है। ये अलग बात है कि ख़ुद वीर दास राजनीति से लेकर हर विषय पर रोज ज्ञान देते हैं।

इस पर पूर्व शिवसेना नेता रमेश सोलंकी ने उन्हें लताड़ा। उन्होंने वीर दास को चुनौती दी कि बस एक बार वो इस्लाम या पैगम्बर मोहम्मद पर चुटकुला कर के दिखा दें, उनका ‘वीर अलग और दास अलग’ हो जाएगा। सोलंकी ने पूछा कि क्या वीर दास के पास ऐसा करने का दम है? उन्होंने इसे ‘ओपन चैलेन्ज’ के रूप में लेने को कहा। वीर दास ने इस पर इस्लाम या पैगम्बर की बातें करना तो दूर, उलटा हिन्दुओं को चिढ़ाने के अंदाज में प्रतिक्रिया दी।

वीर दास ने रमेश सोलंकी को ऑनलाइन एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स का सब्सक्रिप्शन लेने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने दावा किया कि वहाँ हर ‘भगवान’ पर उनके जोक्स मिलेंगे। वीर दास ने इस दौरान जानबूझ कर ‘भगवान’ शब्द का प्रयोग किया, जो हिन्दू देवी-देवताओं के लिए प्रयोग किया जाता है। उन्होंने सोलंकी का चैलेन्ज लेने से भी मना कर दिया और दावा किया कि वो मुफ़्त में न तो जोक्स मारते हैं और कोई चैलेन्ज लेते हैं।

पैसे की बात आने पर ‘अनटायरिंग इंडियन’ नामक ट्विटर हैंडल ने वीर दास की इस बात को स्वीकार किया और कहा कि वो उन्हें पैसे देने के लिए तैयार है। ‘अनटायरिंग इंडियन’ ने वीर दास से कहा कि वो कैमरे के ओपन हाउस कॉमेडी के लिए अपना शुल्क बताएँ, शर्त ये होगी कि उन्हें सिर्फ़ मुसलामानों पर ही चुटकुले मारने होंगे। उसने पूछा कि आप कितने रुपए लेंगे, ये बताएँ या अपने मैनेजर को टैग करें, ये शो आयोजित किया जाए।

वीर दास ने अब तक इसका कोई जवाब नहीं दिया है। बता दें कि आजकल कॉमेडियनों द्वारा हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाए जाने का ट्रेंड बन गया है। कॉमेडियन आलोकेश ने हनुमान चालीसा को लेकर जोक मारा था, जिस पर रमेश सोलंकी ने ही शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद उन्होने एक वीडियो बना कर माफ़ी माँग ली। ऑनलाइन सीरीज में भी हिन्दुओं की भावनाओं को ताक पर रखा जाता है, जिसके कारण विरोध हो रहा है।

तेजी से अलीबाग की तरफ बढ़ रहा चक्रवाती तूफान निसर्ग: रायगढ़, ठाणे, मुंबई, पालघर में भारी बारिश की संभावनाएँ

चक्रवाती तूफान निसर्ग (Cyclone Nisarga) अब मुंबई से केवल 200 किलोमीटर दूर है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार चक्रवात ‘निसर्ग’ आज दोपहर से शाम तक में मुंबई से करीब 94 किमी की दूरी पर स्थित अलीबाग के पास टकराएगा।

जिसके कारण भारी तबाही की आशंका को देखते हुए मुंबई और गुजरात में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है। बताया जा रहा है इस तूफान से पालघर और रायगढ़ स्थिति केमिकल और परमाणु संयत्र पर भी मुसीबत आ सकती है।

IMD मुंबई की वैज्ञानिक शुभांगी भूटे ने इस संबंध में चेतावनी देते हुए बताया है कि निसर्ग तूफान इस समय चक्रवाती तूफान बन गया है। इसके कारण हवा की रफ्तार 100-120 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी। उनके अनुसार पूरे रायगढ़, ठाणे, मुंबई, पालघर में भारी बारिश की संभावनाएँ हैं।

वहीं, स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने भी इस मामले पर कहा, निसर्ग तूफान एक गंभीर चक्रवात में तब्दील हो गया है। सुबह 5:30 बजे यह अलीबाग से 165 और मुंबई से 215 किलोमीटर दूर है। लोग अपने घरों में ही रहें। उन्होंने कहा कि मछुआरे समुद्र की ओर न जाएँ। 

6 घंटे में 13 किमी प्रति घंटे के साथ आगे बढ़ रहा निसर्ग

मौसम विभाग के ताजा अनुमान के मुताबिक निसर्ग पिछले 6 घंटों के दौरान 13 किमी प्रति घंटे की गति के साथ उत्तरी महाराष्ट्र तट की ओर बढ़ा। यह अलीबाग से 155 किमी दक्षिण-दक्षिण पश्चिम और मुंबई से 200 किमी दक्षिण-दक्षिण पश्चिम में केंद्रीत है।

NDRF की टीमें तैनात

साइक्लोन निसर्ग (Cyclone Nisarg) की वजह से महाराष्ट्र में एनडीआरएफ की 20 टीमों को तैनात किया गया। मुंबई में आठ टीमें, रायगढ़ में 5 टीमें, पालघर में 2, ठाणे में 2, रत्नागिरी में 2 और सिंधुदुर्ग में 1 टीम को तैनात किया गया है।

वहीं महाराष्ट्र-गुजरात में कुल मिलाकर 33 टीमें तैनात हुई हैं। इधर, नौसेना के मुंबई स्थित पश्चिम कमान ने भी अपनी सभी टीमों को अलर्ट जारी कर दिया है। दोनों राज्यों से अब तक 40 हजार लोगों को सुरक्षित स्थान पहुँचाया गया है और बाकी तटीय इलाकों से लोगों को निकालने का काम भी जारी है।

साभार: ANI

महाराष्ट्र समेत गुजरात, केंद्र शासित प्रदेश दमन व दीयू और दादर नगर हवेली में लोगों की सुरक्षा की चाक चौबंद व्यवस्था की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को आश्वासन दिया है कि वह महाराष्ट्र, गुजरात, दमन दीव, दादरा और नगर हवेली को सभी तरह से सहायता करेंगे। 

105 से 110 KM प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएँ- महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि चक्रवात निसर्ग के बुधवार को दक्षिण गुजरात और उत्तरी महाराष्ट्र के तट से होकर गुजरने का अनुमान है। उस समय 105 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएँ चल सकती हैं।

दक्षिण गुजरात और तटीय महाराष्ट्र में इस दौरान अत्यधिक भारी बारिश का भी पूर्वानुमान है। वहीं, तेज हवाओं से सैकड़ों पेड़, बिजली के खंभों और दूरसंचार टावर उखड़ने की आशंका है।

अम्फान से थोड़ा कमजोर है निसर्ग चक्रवात

गौरतलब है कि इससे पहले मौसम विज्ञान विभाग ने कहा था कि अरब सागर के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र और गहरा हो गया है। चक्रवात निसर्ग के बुधवार को देर शाम तक उत्तर महाराष्ट्र और दक्षिण गुजरात तटों तक पहुँचने का अनुमान है।

हालाँकि, अम्फान के मुकाबले निसर्ग थोड़ा कमजोर है, लेकिन आपदा प्रबंधन दल फिर भी इसके लिए भी कमर कस चुके हैं। NDRF के दल दोनों राज्यों में तटीय इलाकों से लोगों को निकालने का काम कर रहे हैं। वे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने और जागरूक करने का काम कर रहे हैं।

निसर्ग के कारण हो सकती है 24 घंटों में भारी बारिश के आसार

बता दें, समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार मौसम विभाग ने कहा है कि अगले कुछ घंटों में मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में भी बारिश के आसार हैं। विभाग के अनुसार तटीय कर्नाटक और मराठावाड़ा में भी बारिश के अनुमान हैं। इसके अलावा अगले 24 घंटों में मुंबई समेत महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में भारी बारिश के आसार हैं। 

हलाल का चक्रव्यूह: हर प्रोडक्ट पर 2 रुपए 8 पैसे का गणित* और आतंकवाद को पालती अर्थव्यवस्था

हलाल, बायकाट हलाल, हलाल सर्टिफाइड, हलालोनॉमिक्स और हलाल सम्बंधित कई सारे शब्द और लेख आज कल आपको सोशल मीडिया पर देखने को मिल जाएँगे। आखिर ये सब है क्या? कुछ ऐसे ही सवाल मेरे मन में उठे जब 26 अप्रैल 2020 को मेरे एक मित्र ने आईटीसी कंपनी द्वारा निर्मित आशीर्वाद आटे के पैकेट का चित्र मुझे भेजा।

इस चित्र में 100% वेजिटेरियन लोगो के ठीक पास एक हरे रंग का लोगो था, जिसमें शायद उर्दू में कुछ लिखा हुआ था, और मेरे मित्र ने लिखा, “लो अब तो आटा भी हलाल सर्टिफाइड”। लेकिन किसी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले मैंने उस चित्र को अपने एक दूसरे मित्र को फॉरवर्ड किया और जवाब में मेरे उस मित्र ने इस बात की पुष्टि की, कि वह चित्र हलाल सर्टिफिकेशन का लोगो है। ज्यादा जानकारी के लिए उसने मुझे संगम टॉक्स के यूट्यूब चैनल पर सरदार रवि रंजन सिंह की हलालोनॉमिक्स पर वीडियो देखने के लिए कहा।

तकरीबन एक घंटे की वीडियो देखने के बाद मेरे मन में कुछ सवाल उठे जिनको रवि रंजन सिंह ने पहले से ही एक दूसरी वीडियो में संबोधित कर दिया था। फिर क्या था आने वाले कुछ दिनों में मुझे जब भी हलाल या हलाल सर्टिफिकेशन सम्बन्धी कोई भी वीडियो देखने को मिलती या कोई लेख पढ़ने को मिलता, मैं पढ़ते चला गया और उन्हीं वीडियोज, लेखों द्वारा प्राप्त हुई जानकारी और मेरे द्वारा की गई रिसर्च को मैं यहाँ सरल भाषा में कुछ खंडों में लिखने जा रहा हूँ।

हलाल मांस पे चर्चा

प्रश्न: हलाल मांस क्या है?

उत्तर: सरल भाषा में कहें तो हलाल मांस एक निश्चित नियमों के द्वारा जानवरों को मारने का एक तरीका है। जिस जानवर को मारा जाना है, उसका सिर मक्का/काबा की तरफ होना चाहिए और इस्लामिक प्रार्थना बिस्मिल्लाह का उच्चारण मारने के समय अनिवार्य है। यहाँ जानवर को एक ही झटके में नहीं मारा जाता, बल्कि यह एक धीमी प्रक्रिया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वध केवल मुस्लिम कसाई द्वारा ही किया जा सकता है।

प्रश्न: झटका मांस क्या है?

उत्तर: झटका का अर्थ है कि जानवर को एक ही वार द्वारा तुरंत मार दिया जाता है, जैसा कि नाम से पता चलता है “एक ही झटके में”। इस मामले में जानवर के सिर को किसी विशेष दिशा में करने या किसी भी तरह की प्रार्थना का उच्चारण करने का कोई विशिष्ट नियम नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई भी वध कर सकता है।

प्रश्न: इससे क्या फर्क पड़ता है? बहुत से लोग हलाल खाते हैं और मैंने तो किसी को मांस के स्वाद या गुणवत्ता के बारे में शिकायत करते हुए नहीं देखा।

उत्तर: वैसे मैं मांसाहारी नहीं हूँ इसलिए मैंने ऊपर बताई गई किसी भी श्रेणी के मांस को कभी नहीं चखा। अगर मैं मांसाहारी होता भी तब भी यह आवश्यक नहीं होता कि जो आपको स्वादिष्ट लगे वो मुझे भी लगे, क्यूंकि स्वाद सबका अपना-अपना होता है।

मैं उत्पाद की गुणवत्ता पर टिप्पणी करने के लिए एक पोषण विशेषज्ञ या किसी भी प्रकार का वैज्ञानिक विशेषज्ञ भी नहीं हूँ, हालाँकि यह झटका कसाई समुदाय पर एक बड़ा प्रभाव डालता है।

जैसा कि पहले प्रश्न के उत्तर में उल्लेख किया गया है, केवल एक मुस्लिम ही हलाल वध सकता है, अगर सभी हलाल खाने लगे तो सभी गैर-मुस्लिम कसाई व्यवसाय से बाहर हो जाएँगे और उनमें से अधिकांश पहले से ही हो चुके हैं।

प्रश्न: यदि हर कोई झटका खाना शुरू कर दे तो क्या यह मुस्लिम कसाई को व्यवसाय से बाहर नहीं करेगा?

उत्तर: बिल्कुल नहीं। वे अभी भी अपने विशेष ग्राहक समूह के लिए हलाल मांस का उत्पादन कर सकते हैं, झटका मांस की माँग गैर-मुस्लिम कसाई को व्यवसाय में रखेगी।

प्रश्न: एक शाकाहारी होने के नाते आपको इसमें इतनी दिलचस्पी क्यों है? अब ये मत कहिएगा कि आप ने अचानक से एक कर्मठ कार्यकर्ता बनने और उन कसाईयों के अधिकारों के लिए लड़ने का फैसला किया है।

उत्तर: बहुत अच्छा सवाल है। इस विषय में मेरी रूचि इसलिए बढ़ी है क्योंकि “हलाल” शब्द का अर्थ इससे कहीं अधिक गहरा है।

हलाल सर्टिफिकेशन समितियाँ

हलाल सिर्फ और सिर्फ मांस तक सीमित नहीं है। जैसा कि मैंने पहले बताया आटा भी हलाल सर्टिफाइड होता है। अब आप पूछेंगे वह कैसे? बड़ा ही सरल उत्तर है, इसमें भी वही धारणा है।

जब खेती के उपयोग में आने वाली भूमि, गेहूँ उगाने वाला किसान, गेहूँ की कटाई करने वाले मजदूर से लेकर मण्डियों तक पहुँचाना, फिर उसकी बस्तों में पैकिंग, बाद में उसे पीस कर आटे में परिवर्तित करना, वापस पैक कर के बाजार में ग्राहकों तक पहुँचाने का हर काम जब एक समुदाय विशेष के लोग ही करें, तब वह हलाल है, ऐसा मेरा मानना है।

यह पढ़ने और सुनने में बहुत ही हास्यास्पद लग रहा होगा क्यूँकि यह भारत में संभव नहीं है, वर्तमान समय में। इसीलिए यहाँ एंट्री होती है भारत में मौजूद हलाल सर्टिफिकेशन समितियों की। इनमें से कुछ के नाम मैंने नीचे दिए हैं।

  1. Jamiat Ulama-E-Hind – http://halalhind.com/
  2. Jamiat Ulama-i-Hind Halal Trust – https://www.jamiathalaltrust.org/
  3. Halal India – https://halalindia.co.in/
  4. Global Islamic Shariah Services  – https://www.halalcertificationindia.com/
  5. Halal Certification Services India Private Limited (HCS) – https://halalcertificate.in/
  6. Halal Council of India – https://halalcouncilofindia.com/
Halal Board Logos

हलाल इंडिया के कार्यकारी निदेशक मोहम्मद जिन्ना हलाल सर्टिफिकेशन के बारे में कहते हैं कि यह एक स्वच्छ आपूर्ति श्रृंखला और अनुपालन को दर्शाता है जो सोर्सिंग से लेकर निष्पक्ष व्यापार प्रथाओं तक सब कुछ कवर करता है। उत्पाद किसी भी रसायन और अल्कोहल से मुक्त होना चाहिए, पशु व्युत्पन्न (जानवरों की चर्बी या कीड़ों से रंगा हुआ), हलाल सौंदर्य प्रसाधन भी दूध डेरिवेटिव और मोम से मुक्त होने चाहिए और उनका परीक्षण पशुओं पर नहीं होने चाहिए”।

मैं उनके इस कथन के बारे में भी इस लेख के अंत में चर्चा करूँगा।

हलाल का गणित

यह हलाल सर्टिफिकेशन समितियाँ भारत में मौजूद सभी छोटी-बड़ी कंपनियों के उत्पादों को हलाल सर्टिफिकेशन दे रही हैं, एक शुल्क के बदले। उदाहरण के रूप में कॉरनिटोज कंपनी ही ले लीजिए।

कॉरनिटोज के भारत में कुल 59 उत्पाद हैं, जो आप उनकी वेबसाइट पर देख सकते हैं। यह सभी उत्पाद जमीअत उलमा-इ-हिन्द हलाल ट्रस्ट द्वारा सर्टिफाइड हैं और प्रमाण स्वरुप आपको जमीअत उलमा-इ-हिन्द हलाल ट्रस्ट का लोगो सारे उत्पादों के पैकेट्स पर दिख जाएगा। अब कॉरनिटोज कंपनी को प्राप्त हुए इस सर्टिफिकेशन के पीछे छुपे गणित पर एक नज़र डालते हैं।

जमीअत उलमा-इ-हिन्द हलाल ट्रस्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध फीस चार्ट के मुताबिक कॉरनिटोज को रजिस्ट्रेशन के लिए 20000.00 रुपए का भुगतान करना पड़ता है। उसके पश्चात प्रत्येक उत्पाद को सर्टिफाई करने के लिए 500.00 रुपए अलग से।

कुल 59 उत्पादों के पैकेट पर हलाल लोगो छापने के लिए 20000.00 रुपए और कन्साइनमेंट सर्टिफिकेशन के लिए 29500.00 रुपए, ऑडिट करने वालों के लिए 5000.00 रुपए (5 ऑडिटर्स के लिए) और इस सब के ऊपर 18% GST, यानी 18720.00 रुपए और जोड़ दें। तो कुल मिलकर हो गए 122720.00 रुपए। इसके बाद वार्षिक रिन्यूअल के समय 52510.00 रुपए और कोई भी नया उत्पाद सर्टिफाई करवाने के लिए 500.00 + 18% GST

अब दिखने में यह राशि कुछ ज्यादा बड़ी नहीं लगती, बड़ी लगे भी तो क्या, इस राशि का भुगतान तो कॉरनिटोज कर रही है, तो इसमें मुझे या आपको क्या फर्क पड़ता है?

यहाँ ये ध्यान में रखना बहुत आवश्यक है कि ऐसे सभी शुल्कों को MRP में जोड़ कर गाहकों से ही वसूला जाता है। तो चलिए उसका भी गणित देख लेते हैं।

अगर कॉरनिटोज ने हर उत्पाद के पूरे वर्ष में 1000 यूनिट बनाए तो कुल मिला कर हो गए 59000 यूनिट और कॉरनिटोज द्वारा दी गई 122720.00 रुपए की राशि को 59000 में बाँट दें तो किसी भी एक उत्पाद को खरीदने वाले ग्राहक के हिस्से में आए 2 रुपए 8 पैसे।

यहाँ काफ़ी रीडर्स मुझे जमकर गालियाँ देंगे और बाकी का लेख बिना पढ़े चले जाएँगे क्यूँकि मैंने सिर्फ 2 रुपए 8 पैसे के लिए उनका समय नष्ट किया। लेकिन पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त…

हलाल का जाल

अगर बात सिर्फ कॉरनिटोज तक ही सीमित रहती तो शायद किसी को फर्क नहीं पड़ता, परन्तु ऐसा नहीं है। भारत में मौजूद हर दूसरी छोटी-बड़ी कंपनी हलाल सर्टिफाइड हो चुकी है और बाकि भी होने के कगार पर हैं।

इसका अर्थ ये हुआ कि ऐसी हर एक कंपनी प्रत्येक वर्ष इन हलाल बोर्ड्स को एक बड़ी राशि का भुगतान कर रही है। इनमें से कुछ कम्पनियाँ जिनके बारे में मुझे पता चला उनके नाम और उनके द्वारा दी जाने वाली राशि का एक अनुमानित आँकड़ा मैं नीचे लिख रहा हूँ। यह आँकड़ा ऊपर प्रयोग किए गए गणित और फीस चार्ट के आधार पर है।

RegistrationRenewal
Patanjali794140.00388220.00
ITC613600.00297950.00
Haldiram’s879100.00430700.00
Bhikharam Chandmal643100.00312700.00

इनके इलावा भी और बहुत सारी कंपनियाँ हैं, उदाहरण के लिए:

Britannia, Parle, Hamdard, Hindustan Unilever Limited, Tata Chemicals Limited, India Gelatine and Chemicals Limited, Glaxo Smith Kline Consumer Healthcare, Iba, Banjara’s, Emami, Cavin-Kare, Morgain Group, Tejas Naturopathy, Indus Cosmeceuticals, Maja Healthcare, VCare Pharcos etc.

ये सभी कंपनियाँ हलाल सर्टिफाइड तो हैं परन्तु अपने उत्पादों पर अभी तक हलाल का लोगो नहीं छाप रहीं। यहाँ आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि एक आम व्यक्ति के रोजमर्रा के जीवन में प्रयोग में आने वाली हर एक वस्तु हलाल सर्टिफाइड है और अब ये राशि 2 रुपए 8 पैसे से बढ़ कर कहीं ज़्यादा हो चुकी है, जो आप दे रहे हैं वो भी बिना जाने।

इस प्रकार भारत में मौजूद ये चुनिन्दा हलाल सर्टिफिकेशन समितियाँ प्रत्येक वर्ष बड़ी ही आसानी से करोड़ों या शायद अरबों रुपए की आय का लाभ उठा रही हैं।


हलाल की माँग

एक सवाल ये भी उठता है कि आखिर इन सारी कंपनियों को ज़रूरत क्या थी हलाल सर्टिफिकेशन लेने की? ज़्यादातर भारतीय कंपनियाँ अपने उत्पादों को विदेशों में निर्यात करती हैं। जब इन कंपनियों को किसी इस्लामिक देश में निर्यात करना होता है तब हलाल सर्टिफिकेशन लेना अनिवार्य है और यहीं से शुरुआत हुई उनके हलाल सर्टिफिकेशन की।

इस बात को ये कंपनियाँ बड़े गर्व से बतातीं हैं जब उसी समुदाय विशेष के लोग उनसे पूछते हैं। इसके चलते इन्हें थोड़ी-बहुत आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा, शायद इसीलिए हर एक हलाल सर्टिफाइड कंपनी ने अपने उत्पादों पर अभी तक हलाल का लोगो छापना चालू नहीं किया या जिन्होंने छापना चालू किया था, उन्होंने बंद कर दिया जैसे कि अशीर्वाद आटा।

अगर मैं भारत में मौजूद फ़ास्ट फ़ूड सेंटर्स , रेस्टोरेंट्स या होटल्स की बात करूँ जो हलाल परोसते हैं तो उनके मुताबिक केवल 5-7% ग्राहक ही आकर पूछते हैं कि उनके यहाँ हलाल परोसा जाता है कि नहीं, बाकि 93-95% ग्राहकों को ना तो कोई फर्क पड़ता है और ना ही उन्होंने कभी ये पूछा।

सिर्फ इसी 5-7% ग्राहकों को बनाए रखने के लिए उन्होंने हलाल परोसना शुरू किया। लेकिन अगर इस देश के प्रधानमंत्री ताली या थाली बजाने को कहें, या दीप प्रज्वलित करने का निवेदन करें तो लोगों को लगता है कि उन्हें हिन्दू धर्म या मान्यताओं से जुड़े कार्य करने पर मजबूर किया जा रहा है।

यहाँ मैं ये भी बता दूँ कि एक होटल या रेस्टोरेंट को भी अलग से हलाल सर्टिफिकेशन लेना पड़ता है, सिर्फ हलाल सर्टिफाइड विक्रेताओं से खाद्य सामग्री लेना पर्याप्त नहीं है।


हलाल का पैसा

अब सवाल ये उठता है कि ये हलाल का पैसा जाता कहाँ है?

यहाँ रवि रंजन सिंह अपने सम्बोधन में कहते हैं कि इसका एक हिस्सा जिहाद में जाता है। यहाँ आपको जिहाद की बहुत सारी परिभाषाएँ मिल जाएँगी और ज्यादातर अच्छी ही मिलेंगी, तो जरा एक नज़र उस पर भी डाल लेते हैं।

जिन कंपनियों के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स इस्लामिक कन्ट्रीज में मौजूद हैं, उन्हें हलाल सर्टफिकेशन लेने के लिए एक निश्चित राशि दान करनी पड़ती है किसी चैरिटेबल संगठन को, लेकिन अपनी पसंद की नहीं। यहाँ भी हलाल समितियों द्वारा दी गई चैरिटेबल संगठनों की सूची को ही इस्तेमाल में लाया जाता है। मज़े की बात ये है कि संयुक्त राष्ट्र ने इनमें से कुछ चैरिटेबल संगठनों को आतंकवादी समूह घोषित किया हुआ है।

रवि रंजन सिंह
https://www.youtube.com/watch?v=uFW-X_VYvZU

लेकिन ये तो हुई विदेशों की बात। भारत में ऐसा होता है कि नहीं, इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। अगर आपको है तो नीचे दिए कमेंट्स सेक्शन में ज़रूर बताएँ।

भारत में हलाल सर्टिफिकेशन के नाम पर ली गई राशि को जमीअत उलेमा-इ-हिन्द कहाँ खर्च करती है, इसके बारे में बताते हैं स्वराज्य के वरिष्ठ संपादक अरिहंत पवरिया जी। 19 दिसम्बर 2019 को प्रकाशित हुए अपने लेख में वो बताते हैं कि किस प्रकार जमीअत उलेमा-इ-हिन्द आतंकवाद के मामलों में आरोपी एक समुदाय विशेष के लोगों को लगातार कानूनी समर्थन प्रदान करता है और इस बात की पुष्टि वह स्वयं अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित की गई सूची से करते हैं। यह सूची उर्दू में है, इसलिए इसके अनुवाद के लिए आप अरिहंत पवरिया जी का पूरा लेख पढ़ें।

ये तो हुई एक हलाल समिति की बात, लेकिन भारत में मौजूद बाकी सारी हलाल समितियाँ अपनी आय का क्या करती हैं, क्या उसके बारे में किसी को कुछ पता है?

PM CARES Fund में कितना पैसा जमा हुआ और उसे कहाँ खर्च किया गया, ये सबको जानना है, लेकिन ये हलाल समितियाँ सर्टिफिकेशन के नाम पर जो पैसा लेती हैं, वो कहाँ जाता ये कोई पूछेगा?

और अगर पूछ भी लिया तो क्या वो कुछ बताएँगे?

या जैसे एंटोनिया माइनो ने पालघर में हुई साधुओं की निर्मम हत्या पर चुप्पी साधी हुई है, वैसे ही वो भी चुप्पी साध लेंगे।


हलाल पर प्रश्न

अंत में हलाल क बारे में मेरे मन में कुछ प्रश्न हैं, जो मैं आपके सामने रख रहा हूँ। अगर किसी के पास उत्तर हो तो जरूर बताएँ:

  1. अगर हलाल सर्टिफिकेशन के माध्यम से हलाल समितियों का काम सिर्फ उत्पादन की गुणवत्ता के स्तर को और ऊपर लेकर जाना है या ये तय करना है कि उनमें किसी विशिष्ट रसायनों का उपयोग ना हुआ हो, तो क्या इसकी याचिका Food Safety and Standards Authority of India aka FSSAI से नहीं की जा सकती थी?
  2. जिस देश ने अल्पसंख्यकों के विकास, रोजगार, उनकी धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए न जाने कितनी लाभकारी योजनाएँ चलाईं, देश के संविधान में ना जाने कितने प्रावधान जोड़े, क्या वहाँ उनके खान-पान से सम्बंधित FSSAI थोड़ी सी अतिरिक्त जाँच नहीं करती?
  3. जिस प्रकार हर साल FSSAI अपनी वेबसाइट पर वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित करती है, जिसमें उनकी आय से लेकर उनके खर्च किए गए एक-एक रुपए का पूरा हिसाब होता, क्या ये हलाल समितियाँ भी अपनी वार्षिक आय का हिसाब इस देश के नागरिकों को देंगी?
  4. UK में सैकड़ों शरिया अदालतें हैं और उसी को कुछ दिन पहले AIMIM पार्टी ने भारत में भी प्रचलित करने की कोशिश की, ठीक उसी तरह क्या ये हलाल समितियाँ भी FSSAI के लिए एक चुनौती है?

हलाल के बारे लिखने और बताने के लिए और भी काफी कुछ रह गया है, जो मैं इस लेख के अगले भाग में बताऊँगा। अंत में जिन्होंने अपना मूल्यवान समय निकालकर मेरे इस लंबे लेख को पढ़ा उनका बहुत-बहुत आभार। कृपया थोड़ा कष्ट और करें और इस लेख को दूसरों के साथ शेयर करें।

ट्रम्प आएगा तब कुछ बड़ा होगा, तैयार रहो- ताहिर हुसैन ने उमर खालिद से कहा: चार्जशीट में खुलासा

दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों के मामले में पुलिस ने चार्जशीट दायर कर दी है, जिसमें आम आदमी पार्टी के (अब निलंबित) पार्षद ताहिर हुसैन को मुख्य आरोपित बनाया गया है। ये दंगे नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में फ़रवरी के अंतिम सप्ताह में हुए थे। दिल्ली पुलिस का कहना है कि दंगे कराने के लिए ताहिर हुसैन ने करोड़ों ख़र्च किए थे। इस दौरान वह जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद से लगातार संपर्क में था। वो खालिद सैफी से भी सम्पर्क में था।

सैफी शाहदरा के खुरेजी खास में हुए दंगों का आरोपित है। क्राइम ब्रांच की एसआईटी ने कड़कड़डूमा कोर्ट में ये खुलासे किए। इस मामले में ताहिर और उसके भाई शाह आलम सहित 15 आरोपित हैं। ताहिर हुसैन ने दंगों से पहले एक लाइसेंसी पिस्टल रिलीज करवाया था, जिसका उसने इस्तेमाल किया। उसके पास 75 गोलियों का कोई हिसाब नहीं है। जनवरी के दूसरे हफ्ते में उसने 1.1 करोड़ रुपए फर्जी सेल कम्पनियों को ट्रान्सफर किया था और बाद में उसने इसे कैश में वापस लिया।

मीनू फैब्रिकेशन, एसपी फाइनैंशल सर्विस, यूद्धवी इंपेक्स, शो इफेक्ट एडवर्टाइजिंग और इसेंस सेलकॉम- ये वो शेल कम्पनियाँ हैं, जिन्हें ताहिर हुसैन ने रुपए ट्रान्सफर किए थे। ताहिर हुसैन के घर में कई सीसीटीवी कमरे हैं लेकिन आश्चर्य की बात ये है उनमें फ़रवरी 2020 में 23 तारीख से लेकर 28 तारीख तक का कोई फुटेज ही उपलब्ध नहीं है। ताहिर ने दंगों से पहले खजुरी खास थाने में जमा अपनी पिस्टल क्यों रिलीज करवाई, इसका उसके पास कोई जवाब नहीं।

ताहिर हुसैन को कुल 10 केसों में आरोपित बनाया गया है। उसके नाम पर 100 कार्टेज इशू कराए गए थे, जिनमें से 16 कहाँ गए और इनका क्या इस्तेमाल किया गया- इसका कोई हिसाब नहीं है। ताहिर हुसैन के मोबाइल लोकेशन से पता चला है कि दंगों से पहले ही वो सैफी और खालिद से मिला था। साथ ही उस पूरे इलाके में हुसैन का ही इकलौता घर है, जिसे दंगाइयों ने छुआ भी नहीं। इससे पता चलता है कि दंगों में उसकी बड़ी भूमिका थी।

साथ ही ताहिर हुसैन पुलिस कस्टडी से भागने के लिए 10 दिनों तक छिपा रहा। वो पुलिस से भागता रहा। इसका भी उसके पास कोई जवाब नहीं है। इसके बाद वह सीधा मीडिया के सामने प्रकट हुआ। उसके घर के बाहर 12 ऐसी बोतलें मिली थीं, जिनमें संदिग्ध द्रव्य भरा हुआ था और उनकी गर्दनों को कपड़े से बाँधा गया था। ताहिर हुसैन का छत पर डंडा लिए वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसे ऑपइंडिया ने भी रिपोर्ट किया था। उस वीडियो को भी सबूतों में इकट्ठा किया गया है।

ताहिर हुसैन की छत पर गुलेल, ईंट-पत्थर, पेट्रोल बम और अन्य हथियार जैसी सामग्रियाँ मिली थीं, जो इस बात की ओर इशारा करती हैं कि इन दंगों के पीछे गहरी साजिश थी, जो कई दिनों से रची जा रही थी। ताहिर की लाइसेंसी पिस्टल को जब्त कर लिया गया था। इस पिस्टल को उसने विधानसभा चुनाव से पहले जमा कराई थी। स्पेशल सेल ताहिर पर यूएपीए के तहत कार्रवाई कर रहा है। आईबी में कार्यरत रहे अंकित शर्मा की हत्या का मामला भी उस पर चल रहा है।

ताहिर हुसैन ने उमर खालिद से कहा था कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत आने वाले हैं, तब कुछ बड़ा होने वाला है, जिसके लिए सबको तैयार रहना है। उसने अपने समर्थकों को ‘बड़े एक्शन’ के लिए तैयार रहने को कहा था। उसने सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच भी रुपए बाँटे थे। आरोपित रिफायत ने पुलिस को बताया है कि कुछ महिलाएँ थीं, जो सभी को भड़का रही थीं और कह रही थीं कि किसी को भी हटना नहीं है।

देवांगना, नताशा, गुलफिशा, रुमशा सहित कई महिलाओं के नाम इसमें आए हैं, जो ‘पिंजरा तोड़’ जैसे संगठनों से ताल्लुक रखती हैं। इस दौरान रिफाकत ने भी भीड़ को लाठी-डंडा चलाने और फायरिंग करने के लिए उकसाया था। इस चार्जशीट में जिक्र किया गया है कि आरोपितों के मोबाइल में व्हाट्सऐप द्वारा भेजे गए कुछ संदेश, जिनसे उनके दिल्ली दंगों में हाथ होने का प्रमाण मिलता है, इस प्रकार थे –

  1. घर में गर्म खौलते हुए पानी और तेल का इंतजाम करें।
  2. बिल्डिंग की सीढ़ियों पर तेल, शैंपू या सर्फ डाल दें।
  3. लाल मिर्च गर्म पानी में या पाउडर के रूप में प्रयोग करें।
  4. दरवाजों को मजबूत करें, जल्द से जल्द ग्रिल या लोहे के गेट लगवाएँ।
  5. तेजाब की बोतलें घर में रखें।
  6. बालकनी व छत पर ईंट और पत्थर रखें।
  7. कार व बाइक से पेट्रोल निकाल कर रखें।
  8. लोहे के दरवाजों में स्विच से करंट का इस्तेमाल करें।
  9. एक इमारत से दूसरी इमारत में जाने के लिए रास्ते का इंतजाम करें।
  10. बिल्डिंग के सारे मर्द हजरात एक साथ इमारत ना छोडें, कुछ लोग महिला सुरक्षा के लिए रुकें।

कई प्रत्यक्षदर्शियों ने भी बताया है कि वो दंगे भड़का रहा था। पुलिस ने उस वीडियो को भी सबूत के तौर पर लिया है, जिसमें ताहिर हुसैन के गुंडे पेट्रोल बम फेंकते दिख रहे हैं। ताहिर हुसैन का दावा था कि वो ख़ुद दंगे की जद में आ गया था और उसने बार-बार पुलिस के नंबर पर फोन कर के मदद माँगी थी। जबकि दो दंगाई उसके परिसर से ही गिरफ़्तार किए गए थे। कुछ आरोपितों की भी मोबाइल फोन की जाँच होनी बाकी है।

गर्भवती हथिनी को धोखे से खिलाए पटाखे, नदी में खड़े-खड़े हो गई मौत: पीड़ा के बावजूद किसी को नहीं पहुँचाया नुकसान

केरल में एक प्राणी के साथ ऐसा अत्याचार किया गया कि सुन कर किसी का भी कलेजा काँप उठे। एक गर्भवती मादा हाथी को धोखे से अनानास में पटाखे रख कर खिला दिया गया, जो उसके मुँह में ही फट गया। अत्यंत पीड़ा और असहनीय दर्द के कारण गर्भवती मादा हाथी नदी के पानी में जाकर खड़ी हो गई और वहीं उसकी मौत हो गई। ये घटना मल्लपुरम के पलक्कड़ की है। पीड़िता हथिनी ‘साइलेंट वैली नेशनल पार्क’ की थी, जिसे कुछ स्थानीय असामाजिक तत्वों ने मार डाला।

दरअसल, उस इलाक़े में जंगली भालुओं के लिए पटाखों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसी क्रम में कुछ लोगों ने अनानास में उन पटाखों को भर दिया, जो कभी भी ब्लास्ट हो सकता था। इसके बाद धोखे से मादा हाथी को वो खिला दिया गया। निर्दोष जीव इंसानों के इस छल को नहीं समझ पाया और उसने खाने में देर नहीं लगाई। इसके बाद उसके मुँह में पटाखे फूटने के कारण वो असह्य पीड़ा से इधर-उधर भागने लगी।

जंगल के अधिकारियों को आशंका थी कि मादा हाथी इस पीड़ा के कारण स्थानीय इलाक़ों में तबाही मचा सकती है और लोगों को नुकसान पहुँचा सकती है लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। मादा हथिनी इधर-उधर भागती रही लेकिन उसने गाँव में किसी को भी नुकसान नहीं पहुँचाया और न ही तोड़फोड़ मचाई। बाद में वह नदी में शांत खड़ी रही, ऐसे जैसे वो सोच रही हो कि उसे अपनी चिंता नहीं, पेट में पल रहे उस बच्चे की चिंता है जो कुछ महीनों बाद बाहर आता।

मई 27, 2020 की इस घटना में मादा हाथी की वेल्लीयर नदी में खड़े-खड़े मृत्यु हो गई। दरअसल, हथिनी नदी में इसलिए खड़ी थी ताकि उसके मुँह और जीभ को पानी से कुछ राहत मिले। इस घटना को नीलांबुर के सेक्शन फारेस्ट ऑफिसर मोहन कृष्णन ने जनता के साथ साझा किया। हाथी को बचाने के लिए जो रैपिड एक्शन टीम गई थी, उसका नेतृत्व वही कर रहे थे। उन्होंने भावुक होकर मलयाली में फेसबुक पर लिखा:

“वो 20 महीने बाद अपने बच्चे को जन्म देने वाली थी। उसे भूख लगी थी, उसे क्या पता था कि क्रूर इंसानों के जिस भोजन को वो उनका प्यार समझ कर ग्रहण करेगी, वो सिर्फ़ एक छलावा है, जो दोहरी जिंदगियों का भक्षक बन जाएगा। मेरे सामने अब भी उसका चेहरा घूम रहा है। उसने पानी में ही कब्र बना ली। अब हम उसे लेकर जा रहे हैं, दफनाने के लिए। वो उसी ज़मीन के नीच हमेशा के लिए सोएगी, जहाँ उसने बचपन से हँसा-खेला था। मैं और क्या कर सकता हूँ? स्वार्थी मानव जाति की तरफ से उसे कहता हूँ- बहन, क्षमा करो।”

फारेस्ट ऑफिसर मोहन कृष्णन का फेसबुक पोस्ट (मलयाली में)

मोहन कृष्णन के इस वायरल फेसबुक पोस्ट को ख़बर लिखे जाने तक क़रीब 5500 लोगों ने शेयर किया है। घायल मादा हाथी को इलाज हेतु ले जाने के लिए सुरेंद्रन और नीलकंठन नामक दो हाथियों को लाया गया था लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ क्योंकि वो नदी में ही मर चुकी थी। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, हथिनी की मौत दम घुटने से हुई। उसके फेंफड़ों और वायु-नली में पानी घुसने के कारण उसे साँस लेने के लिए ऑक्सीजन नहीं मिल पाया।

त्रिशूर के असिस्टेंट फॉरेस्ट वेटरनरी डॉक्टर डेविड अब्राहम ने ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस‘ से कहा कि उन्होंने अपने करियर में 250 हाथियों का पोस्टमॉर्टम किया है लेकिन पहली बार ऐसा हुआ जब उन्हें इतनी पीड़ा हुई। उन्होंने बताया कि वो हथिनी के अजन्मे बच्चे को, भ्रूण को हाथों में लेकर देख सकते थे। पहले किसी को भी पता नहीं था कि वो गर्भवती है, ये पोस्टमॉर्टम के समय ही पता चला। एक अन्य डॉक्टर ने बताया कि इससे पहले भालुओं को भी इसी तरीके से मारा जाता रहा है। कोरोना आपदा के बीच ऐसी ख़बरें दुःखद हैं।

इसी साल अप्रैल में पठानपुरम में एक हाथी की इसी तरीके से हत्या कर दी गई थी। जंगल के अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने इंटेलिजेंस नेटवर्किंग और बाउंड्री पेट्रोलिंग में वृद्धि की है क्योंकि ये घटना पार्क के बीच में, बफर जोन में हुई है। इस मामले में जाँच जारी है, ताकि दोषियों की पहचान हो सके। कुछ लोगों का कहना है कि अपने खेतों और बगीचे को नुकसान होने के डर से लोग जंगली जानवरों को मार डालते हैं।

…शुक्र मनाओ कैंपस बंद है, वरना जला डालते: अमेरिकी हिंसा से प्रेरित जामिया के छात्र, FB पर कर रहे बातचीत

जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद विरोध प्रदर्शन के हिंसक प्रदर्शन में तब्दील होने से अमेरिका जलने लगा है। ऐसे समय में भारत में जामिया के छात्र मिनियापोलिस जैसा प्रदर्शन करने की इच्छा जाहिर करते हुए यहाँ दोबारा से हिंसा भड़काने की कोशिशों में जुट गए हैं। कैसे? आइए जानें।

दरअसल, अभी हाल में जामिया यूनिवर्सिटी ने आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में जामियाटाइम्स1 नामक इंस्टाग्राम अकॉउंट को शो कॉज नोटिस भेजा। जिसके बाद इसी नोटिस को लेकर विश्वविद्यालय में इतिहास से स्नातकोत्तर की पढ़ाई करने वाले एक छात्र नौशाद अहमद रजा ने वीसी से लेकर चीफ प्रॉक्टर की आलोचना की।

साथ ही पोस्ट में लिखा कि संघ के दलालों शुक्र मनाओ कैंपस बंद है। इसके बाद नदीम इकबाल खान व जामिया के एक अन्य छात्र ने इस मुद्दे पर लिखा कि एक बार प्रॉक्टर ऑफिस फूँकना पड़ेगा।

इसके बाद एक फेसबुक पोस्ट में जामिया की छात्रा व AISA की कार्यकर्ता गोहर आइशा ने अपने फेसबुक पर इसे शेयर करते हुए शो कॉज नोटिस की निंदा की। जिस पर नौशाद ने खुलेआम ये कमेंट किया कि कैंपस अगर खुला रहता तो इनकी औकात नहीं थी शो कॉज नोटिस देने की।

इस रिप्लाई पर कमेंट करते हुए गोहर जामिया की वीसी नज्मा अख्तर पर उंगली उठाती हैं और तंज कसते हुए कहती हैं कि लॉकडाउन का फायदा कैसे उठाना है, ये नज्मा आपा ने दिल्ली पुलिस से सीखा है। जिस पर नौशाद कमेंट करते हुए कहता है कि नज्मा आपा तो गवर्नर बनकर मानेगी। यहाँ तक बातें आते ही गौहर कहती हैं कि यदि ऐसा हुआ तो फिर हम भी मिनियापोलिस के नागरिकों से कम नहीं होंगे। 

यहाँ बता दें कि कुछ समय पहले जामियाटाइम्स1 ने जामिया प्रशासन के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक शब्द बोले थे। जब इस पूरे मामले में ऑपइंडिया ने एक जामिया के छात्र से बात की तो उसने बताया कि दरअसल ये छात्र चाहते हैं कि जो परीक्षाएँ ऑनलाइन होने वाली हैं, उन्हें कैंपस में करवाया जाए, ताकि ये लोग यहाँ वापस लौट सकें और अपना प्रोटेस्ट शुरू कर सकें।

अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद प्रदर्शन के नाम पर वामपंथियों का उत्पात जारी है। वहाँ इस समय चीजों की तोड़फोड, लूटपाट, सार्वजनिक सम्पत्ति को नुकसान और आगजनी जैसी घटनाएँ हो रही हैं। इसलिए गौरतलब रहे कि गौहर जो कमेंट की प्रतिक्रिया में प्रदर्शन की ओर इशारा कर रही है, उससे उनका मतलब क्या है?

याद दिला दें कि पिछले साल 15 दिसंबर के बाद से देश के कोने-कोने में हुआ एंटी सीएए प्रोटेस्ट लगभग हर जगह हिंसक होते दिखा था। ऐसे में जामिया के छात्रों ने भी इस प्रदर्शन के नाम पर काफी हिंसा फैलाई थी, जिसके कारण दिल्ली पुलिस ने अभी हाल में यूएपीए के तहत वहाँ के कुछ छात्रों को गिरफ्तार किया।

इसी प्रकार दिल्ली में गत फरवरी में हुए हिंदू विरोधी दंगों का आलम भी यही था। ध्यान हो अगर तो उस समय डोनॉल्ड ट्रंप भारत आए थे। ऐसे में एक ओर जहाँ आधा देश ट्रंप के सामने देश की छवि बनाने का प्रयास कर रहा था। वहीं, कट्टरपंथी समूह व सेकुलरवादी विरोध प्रदर्शनों को दंगों का रूप दे रहे थे। इस दौरान जाफराबाद, मौजपुर, चांदबाग जैसे कई इलाकों में हिंदुओं पर जानवरों की तरह हमला किया जा रहा था।

नवाजुद्दीन सिद्दीकी की भतीजी ने चाचा पर लगाया यौन उत्‍पीड़न का आरोप, कहा- बड़े पापा ने भी मेरी कभी नहीं सुनी

हाल में अपने तलाक के कारण सुर्खियों में आने वाले नवाजुद्दीन सिद्दीकी एक बार फिर पारिवारिक कारणों से चर्चा में हैं। खबर है कि उनकी भतीजी ने उनके छोटे भाई मीनाज पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इस मामले में दिल्ली के जामिया नगर पुलिस थाने में FIR दर्ज हुई है, जिसमें उन्होंने अपने साथ हुईं यातनाओं के बारे में बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नवाज की भतीजी ने इस संबंध में बात की और कहा,

“उस वक्त मेरी उम्र 9 साल थी, जब मेरे चाचा ने मेरे साथ गलत काम करने और मुझ पर बुरी नीयत रखने की शुरुआत कर दी थी। वो अक्सर मुझे गलत तरह से छूने की कोशिश किया करते थे। जब चाचा ने इस तरह की हरकतें शुरू कीं, तो पहले मुझे कुछ समझ नहीं आया करता था, पर वो सब बहुत अजीब लगता था। जब मैं इस बारे में पापा या दादी को बताती तो वो यकीन नहीं करते। बाद में जब मैं बड़ी हुई तो मुझे एहसास हुआ कि यह अलग तरह का टच था।”

नवाज की भतीजी बताती हैं, “जाने क्यों उस समय घर का कोई भी सदस्य मेरी बात नहीं मानता था। बुरे बर्ताव व मारपीट के चलते मेरी माँ मुझे और पापा दोनों को छोड़कर चली गईं थीं। बड़े होने के दौरान सबने मुझे बहुत नजरअंदाज किया और पापा ने तो कभी मेरा ख्याल नहीं रखा और न ही यौन शोषण की बात पर कभी मेरा साथ दिया।”

पीड़िता कहती हैं कि साल 2017 में उसके चाचा ने सभी हदें पार करते हुए उसके साथ यौन संबंध बनाने के लिए जबरदस्ती भी की। उस दौरान जब पीड़िता ने विरोध किया तो उसके साथ बुरी तरह से मारपीट भी हुई, जिसके कारण उसे काफी चोटें आईं। पीड़िता ने एबीपी से बातचीत में बताया है कि इन चोटों की तस्वीरें आज भी उनके पास सबूत के तौर पर मौजूद हैं। जब उनके साथ यह घटना घटी, तब वह 18 साल की हो चुकी थीं।

मीडिया से बात करते हुए पीड़िता इस बात को कहती हैं कि चाचा की हरकतों को लेकर उन्होंने अपने बड़े पापा यानी नवाजुद्दीन से बात की थी। लेकिन वह उसे ये समझा देते थे कि ऐसा नहीं कहते, वो तुम्हारे चाचा हैं, वो तुम्हारे साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं? तुम ये सब मत सोचा करो। इसके बाद साल 2017 की घटना के बारे में भी उन्हें बताया। मगर, उन्होंने कहा, “तुम्हारी मम्मी भी झूठी थी और तुम भी झूठी हो। हम तुम्हारा विश्वास कैसे कर लें?”

यहाँ बता दें कि कई प्रताड़नाएँ झेलने के बाद कुछ समय पहले पीड़िता ने घर वालों के ख़िलाफ़ जाकर लव मैरेज कर ली थी। जिसके बाद उसके घर वाले उससे नाराज हो गए। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उनकी शादी के बाद नवाज के परिवार वालों ने पीड़िता के सास-ससुर पर झूठा केस दायर कर दिया, जिसमें नवाजुद्दीन सिद्दीकी स्वयं भी शामिल थे। पीड़िता की अपने बड़े पापा नवाज से शिकायत है कि अगर वो चाहते तो, इस मसले‌ में दखल देकर मामले को सुलझा सकते थे। मगर उन्होंने इसमें भी उनकी मदद कभी नहीं की।

पीड़िता कहती हैं, “अगर वे (पापा और बड़े पापा) उस समय सख्‍ती दिखाते तो यह सब कुछ न होता। उन्‍होंने मुझ पर कभी विश्‍वास नहीं किया। अब भी हर 6 महीने पर मेरे पिता केस फाइल करते हैं और मुझे यकीन है कि मेरी शिकायत के बाद भी वह कुछ न कुछ करेंगे। हालाँकि, इसके लिए मुझे अपने पति का अब काफी सपॉर्ट मिला है। शारीरिक हिंसा के सभी सबूत मेरे पास हैं, जो मैंने अपने पति को भेजे थे।”

मशहूर अभिनेता की भतीजी का ये भी कहना है कि उन्हें नवाज से कभी सपोर्ट नहीं मिला। लेकिन एक बार जब उन्होंने (नवाज ने) उससे पूछा कि जिंदगी में क्या करना चाहती हो, तो पीड़िता ने उन्हें आपबीती बताई थी। साथ ही ये भी कहा था कि वो मेंटली डिस्टर्ब महसूस करती हैं। लेकिन नवाज ने ये सब सुनकर बस ये कह दिया कि ऐसा कुछ नहीं है।

पीड़िता के अनुसार, उनको लगता था कि नवाजुद्दीन उनकी बातों को समझेंगे। क्योंकि वे एक अलग सोसायटी का हिस्सा हैं और अलग मानसिकता के इंसान हैं। लेकिन उन्होंने भी समय आने पर यही कहा – “चाचा हैं, वे ऐसा नहीं कर सकते।”

अपडेट: नवाजुद्दीन सिद्दीकी के भाई शम्स नवाब सिद्दीकी ने अपने भाई का बचाव करते हुए ट्वीट किया है।

शम्स ने लिखा कि कोई कैसे कानून का मजाक बनाते हुए एक ही घटना के बारे में अलग-अलग स्टेटमेंट देकर रिपोर्ट करवा सकता है जबकि पहले से ही मामला किसी दूसरी हाई कोर्ट में दर्ज है।

50 लाख डाउनलोड्स के बावजूद गूगल ने ‘Remove China Apps’ को हटाया, Tik-Tok की रेटिंग भी की थी बहाल

इंटरनेट जगत की दिग्गज कम्पनी गूगल ने ‘Remove China Apps’ नामक उस मोबाइल एप्लीकेशन को प्ले स्टोर से हटा दिया है, जिसका प्रयोग फोन में से चीनी एप्स को हटाने के लिए किया जा रहा था। ‘Remove China Apps’ का इस्तेमाल लोग चीनी एप्स को अनइंस्टॉल करने के लिए कर रहे थे। भारत में चीनी प्रोडक्ट्स के बॉयकट की बात चल रही है और लोग उसके प्रोडक्ट्स का प्रयोग कर के उसे राजस्व नहीं देना चाहते।

अभी तक गूगल ने ये स्पष्ट नहीं किया है कि ‘Remove China Apps’ को प्ले स्टोर से क्यों हटाया गया। बता दें कि गूगल का प्ले स्टोर एंड्राइड एप्लीकेशंस के आधिकारिक बाजार की तरह है, जहाँ से एप्स को डाउनलोड किया जाता है और ख़रीदा जाता है। वहीं ‘Remove China Apps’ का लोग इसीलिए प्रयोग कर रहे थे, क्योंकि ये फोन में उपस्थित सभी चाइनीज एप्स की क्षण भर में पहचान कर के उसे अनइंस्टॉल कर देता था।

इससे पहले गूगल ने टिक-टॉक के प्रतिद्वंद्वी एप ‘मित्रों’ को प्ले स्टोर से हटा दिया था। गूगल ने इसे ‘स्पैम’ और ‘मिनिमल फंक्शनलिटी पॉलिसी’ वाला एप्लीकेशन बताया था, जिसके कारण इसे हटाया गया। गूगल का कहना था कि ‘मित्रों’ एप में कुछ भी ओरिजिनल नहीं है और ये दूसरे एप्लीकेशंस से फीचर्स कॉपी कर के नियमों का उल्लंघन करता है। इस एप को ‘रेपेटिटिव कंटेंट्स’ की श्रेणी कर इसे प्ले स्टोर से निकाल बाहर किया गया।

गूगल ने चाइनीज सोशल मीडिया एप्लीकेशन टिक-टॉक की रेटिंग को भी प्ले स्टोर पर रिस्टोर कर दिया था। दरअसल, हुआ यूँ था कि लोग यूट्यूब बनाम टिक-टॉक की लड़ाई में टिक-टॉक से खफा थे और इसकी रेटिंग को करीब 20 लाख लोगों ने 1.1 पर पहुँचा दिया था। गूगल ने इसे स्पैम की कैटेगरी में दाल दिया और टिक-टॉक की रेटिंग को फिर से 4.4 कर दिया। कई लोग इस फैसले से आक्रोशित थे और उन्होंने गूगल से पुछा था कि क्या उनकी भावनाओं के लिए उसके मन में कोई सम्मान नहीं है?

वहीं ‘Remove China Apps’ को जयपुर में स्थित ‘OneTouch Apps Lab’ द्वारा डेवेलप किया गया था, ताकि लोगों की चीनी एप्स को अपने फोन से निकाल बाहर फेंकने में मशक्कत न करनी पड़े। सोशल मीडिया पर लोगों ने इसका ख़ूब प्रचार किया था। एप के डेवलपर्स ने पिछले दो सप्ताह में मिले प्यार के लिए जनता को धन्यवाद दिया है। साथ ही उसने लोगों को टिप्स दिया है कि वो गूगल पर किसी भी एप का नाम लिख कर ‘Origin Country’ टाइप करें, पता चल जाएगा कि वो किस देश का एप है।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, तकनीकी विशेषज्ञों ने बताया था कि ‘Remove China Apps’ का प्रयोग एकदम सुरक्षित है और इससे कोई हानि नहीं होती। ये एप फोन को स्कैन कर के उसके सारे एप्लीकेशंस की सूची की तुलना अपने डेटाबेस में डाले गए चाइनीज एप्स से करता है और मैच होते ही उस एप्लीकेशन को अनइनस्टॉल कर दिया जाता है। विशेषज्ञों का ये भी कहना है कि ये व्यक्तिगत डेटा से छेड़छाड़ नहीं करता। इसे 50 लाख से भी अधिक लोगों ने डाउनलोड किया था।

‘गुलाम सोच वाले बॉलीवुड सेलेब्स’ – अमेरिकी हिंसा पर आँसू, पालघर साधुओं की मौत पर चुप्पी – कंगना ने लताड़ा

ट्विटर पर अन्य बॉलीवुड सेलेब्रेटीज को #blacklivesmatter का बढ़ चढ़कर सपोर्ट करता देख अभिनेत्री कंगना रनौत ने एक प्रश्न उठाया है। उन्होंने पालघर साधुओं की लिंचिंग के मामले का हवाला देते हुए पूछा है कि आखिर ये सब लोग उस समय चुप क्यों थे?

पिंकविला को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने इस मामले में हैरानी जताते हुए कहा कि #blacklivesmatter अभियान में जिस तरह से बॉलीवुड सेलेब्स की प्रतिक्रिया आ रही है। मुमकिन है ये सब आजादी से पहले की गुलाम सोच वाले जीन के कारण हो।

कंगना रनौत ने बॉलीवुड सेलेब्स द्वारा चुनिंदा मुद्दों पर राय रखने की रवायत पर भी इस इंटरव्यू में तंज कसा। उन्होंने कहा कि वैसे भी जिसका नाम ही हॉलीवुड से लिया गया है, वहाँ लोग केवल विदेशी मुद्दों के बारे में ही सोचेंगे।

कंगना कहती हैं कि बॉलीवुड के लोगों को शर्म आनी चाहिए कि पालघर का किस्सा जो महाराष्ट्र का ही था, जहाँ पूरा बॉलीवुड का कुनबा रहता है, उस बारे में किसी ने बात नहीं की। एक शब्द नहीं बोला।

कंगना ने इस साक्षात्कार में यह भी कहा कि ये शर्म की बात है कि हमारे बॉलीवुड सेलिब्रिटी वैसे तो बहुत सुरक्षित होकर चलते हैं। लेकिन जैसे ही ऐसा समय आता है, वह मौके का फायदा उठाने से नहीं चूकते। इससे उन्हें 2 मिनट का फेम हासिल भले ही होता है लेकिन मुहीम ‘सफेद लोग’ ही चलाते हैं।

कंगना ने इस इंटरव्यू में पर्यावरण के मुद्दों पर काम कर रही भारतीय बुजुर्ग औरतों व छोटे बच्चों पर भी ध्यान आकर्षित करवाया। उन्होंने कहा, “आप पर्यावरण के मुद्दों पर इन लोगों को एक गोरी लड़की के लिए लड़ते हुए देख लेंगे, लेकिन भारत में भी बुजुर्ग औरतें व छोटे बच्चे बिना किसी मदद और सपोर्ट के बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। इनमें से कुछ को पद्मश्री जैसा सम्मान भी मिला है। मैं हैरान होती हूँ उनकी कहानियाँ पढ़कर, लेकिन उन्हें ये इंडस्ट्री कभी गौर नहीं करती।”

कंगना ने तंज कसते हुए कहा कि शायद साधू या आदिवासी लोग बॉलीवुड वालों और उनके फैंस के लिए ज्यादा फैंसी नहीं हैं इसलिए वो उनकी ओर ध्यान नहीं देते।

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों अमेरिका में जॉर्ड फ्लॉयड की मौत के बाद कई जगह पर इस समय प्रदर्शन जारी है। दुनिया के कई कोनों में इस घटना के ख़िलाफ़ आवाज उठ रही है और अश्वेतों पर होते अत्याचारों को खत्म करने की माँग हो रही है। वहीं बॉलीवुड में बॉलीवुड स्टार करीना कपूर खान, प्रियंका चोपड़ा, करण जौहर, दिशा पाटनी समेत कई सेलिब्रिटीज भी बीते दिनों सोशल मीडिया के जरिए अमेरिका में चल रहे आंदोलन को समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में बॉलीवुड सेलेब्स की ऐसी सक्रियता देखखर कंगना ने यह तीखे सवाल किए हैं।

पालघर साधु लिंचिंग मामला

बता दें कि कुछ समय पहले महाराष्ट्र के पालघर के दहानु तालुका के एक आदिवासी बहुल गडचिंचले गाँव में सैकड़ों लोगों की भीड़ द्वारा जूना अखाड़ें के दो संतों और उनके ड्राइवर की पुलिस के सामने ही बड़ी बेरहमी से पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी

घटना अप्रैल 16, 2020 के देर रात को घटी थी। इस घटना के बाद संत समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त हो गया था कि कैसे महाराष्ट्र पुलिस के सामने दो महात्माओं और उनके ड्राइवर की इस तरह से हत्या कर दी जाती है और पुलिस मूक दर्शक बनी रहती है।

लेकिन, तथाकथित सेकुलिज्म का परचम लहराने वाले अनुराग कश्यप जैसे लोग, बावजूद इन सबके सिर्फ़ ये कहते नजर आए थे कि इन मामले को साम्प्रदायिक रंग न दिया जाए। जबकि बाकी सेलेब्स ने इस मुद्दे पर चुप्पी साधी हुई थी।

पूरी होगी ‘ममता दीदी’ की इच्छा, 2021 में बंगाल में आएगी BJP की सरकार: अमित शाह

पूरा देश इन दिनों कोरोना वायरस से जूझ रहा है। लेकिन, ‘कोरोना काल’ में भी देश में राजनीति जमकर हो रही है। इस महामारी को लेकर केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच मामला गर्माता जा रहा है। दोनों सरकारों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कोरोना संक्रमण रोकने में नाकाम रही ममता बनर्जी ने कुछ दिनों पहले गुस्से में कहा था कि अगर केंद्र को इतनी समस्या है, तो गृह मंत्री अमित शाह ही बंगाल में आकर सरकार चला लें। 

वहीं, अब गृह मंत्री अमित शाह ने पलटवार करते हुए कहा कि ‘ममता दीदी’ को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने न्यूज 18 नेटवर्क समूह के एडिटर इन चीफ राहुल जोशी से खास बाचतीत में कहा, “उनकी (ममता बनर्जी) यह इच्छा जरूर पूरी होगी और 2021 में भाजपा बंगाल में सरकार बनाएगी। मैं तो वहाँ सरकार नहीं चला सकता, मैं सांसद हूँ, लेकिन ममता दीदी की इच्छा जल्द पूरी होगी।”

वहीं, स्पेशल ट्रेनों को रोके जाने पर अमित शाह ने ममता बनर्जी पर निशान साधा। उन्होंने कहा कि ममता ने बंगाल की जनता के साथ जो किया है, जनता उसे कभी नहीं भूलेगी। दरअसल, ममता बनर्जी ने प्रवासी श्रमिकों की ट्रेन को ‘कोरोना एक्सप्रेस’ कहा था। इस पर किए गए सवाल पर गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि हमारी बंगाल से कोई लड़ाई नहीं है। 1200 से ज्यादा ट्रेनें यूपी गईं। 1000 से ज्यादा ट्रेनें बिहार गईं, लेकिन बंगाल में 100 ट्रेनें भी नहीं गईं। अगर बंगाली घर जाना चाहते हैं तो उनका गुनाह क्या है? उन्होंने कहा कि वह जानते हैं कि बंगाल की जनता इस बात को हमेशा याद रखेगी।

अमित शाह ने जानकारी देते हुए बताया कि कोरोना संकट के समय 1 करोड़ 10 लाख से ज्यादा लोगों को उनके घर पहुँचाया गया है और कई लोग क्वारंटाइन समय की अवधि को पूरा कर परिवार के साथ हैं। हमने अपनी तरफ से प्रवासियों के लिए कई तरह से व्यवस्था की जिससे उन्हें परेशानी न हो। लेकिन, जिन लोगों को कमी निकालनी हैं वह तो निकालेंगे ही।

इस दौरान गृह मंत्री ने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी एक योजना लेकर घूम रहे हैं। इस योजना के तहत वह सभी के अकाउंट में पैसा डालने की बात करते हैं। हालाँकि, जनता ने उनकी इस योजना को नकार दिया है। मोदी सरकार ने किसानों, वरिष्ठ नागरिकों, विधवाओं के अकाउंट में डीबीटी के तहत सीधे रुपए भेजे हैं।

गौरतलब है कि केन्द्र सरकार शुरू से कहते आ रही है कि COVID-19 को लेकर ममता सरकार लगातार लापरवाही बरत रही है। बंगाल की वास्तविकता जानने के लिए केन्द्र ने एक टीम भी भेजी थी। टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि राज्य सरकार इस महामारी को गंभीरता से नहीं ले रही है और यह वायरस यहाँ काफी तेजी से फैल रहा है।