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दिल्ली दंगों में ‘अपनी’ महिलाओं के लिए निर्देश: खौलता तेल, एसिड की बोतलें, पेट्रोल जमा करो… चार्जशीट दायर

दिल्ली में हिन्दू विरोधी दंगों के मामले में क्राइम ब्रांच ने कड़कड़डूमा कोर्ट में चार्जशीट दायर कर दी है। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और पार्षद ताहिर हुसैन पर ना सिर्फ दंगों को फंड करने का आरोप लगाया है बल्कि उसे इन दंगों का मास्टरमाइंड बताया है।

चार्जशीट में पार्षद ताहिर हुसैन समेत 15 लोगों को आरोपित बताया गया है। पुलिस ने एक हजार तीस पन्नों के चार्जशीट में पार्षद ताहिर हुसैन के भाई शाह आलम को भी आरोपित बनाया है। ताहिर हुसैन ने लोगों से बात की थी और उसी वक्त तय किया गया था कि जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दिल्ली आएँगे, तब दिल्ली में हिंसा कराई जाएगी। हालाँकि, पुलिस ने इस चार्जशीट में उमर खालिद को आरोपित नहीं बनाया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ताहिर हुसैन के साथ, उसके भाई शाह आलम सहित 15 और अभियुक्तों को उन दंगों में शामिल होने के लिए नामित किया गया है, जिसमें 53 लोगों ने अपनी जान गँवाई। ताहिर हुसैन, शाह आलम और गुलफाम के भाइयों को कथित तौर पर आगजनी के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।

पुलिस के अनुसार, हिंसा कराने के लिए ताहिर ने एक करोड़ 30 लाख रुपए खर्च किए थे। दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा कि हिंसा से पहले आरोपित ताहिर हुसैन ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरकिता रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल लोगों से बातचीत की थी। ताहिर ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद से भी बात की थी और सब कुछ उसके नियंत्रण में था।

पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि हिंसा के वक्त आरोपित ताहिर हुसैन अपनी छत पर था।

भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने भी ट्वीट में कुछ पन्ने साझा करते हुए लिखा है – “ये पढ़िए – दिल्ली पुलिस की चार्जशीट पिंजरा तोड़ की लड़कियाँ दंगो से पहले खास इलाकों में कैसे मैसेज कर रही हैं – घरों में तेजाब, खौलता तेल रखिए – छतों पर ईंट और पत्थर रखिए। ताहिर हुसैन ने 22 फरवरी को पिस्टल इश्यू करवाई थी, दंगो की भयानक तैयारी की गई थी।”

इस चार्जशीट में जिक्र किया गया है कि आरोपितों के मोबाइल में व्हाट्सऐप द्वारा भेजे गए कुछ संदेश, जिनसे उनके दिल्ली दंगों में हाथ होने का प्रमाण मिलता है, इस प्रकार थे –

  1. घर में गर्म खौलते हुए पानी और तेल का इंतजाम करें।
  2. बिल्डिंग की सीढ़ियों पर तेल, शैंपू या सर्फ डाल दें।
  3. लाल मिर्च गर्म पानी में या पाउडर के रूप में प्रयोग करें।
  4. दरवाजों को मजबूत करें, जल्द से जल्द ग्रिल या लोहे के गेट लगवाएँ।
  5. तेजाब की बोतलें घर में रखें।
  6. बालकनी व छत पर ईंट और पत्थर रखें।
  7. कार व बाइक से पेट्रोल निकाल कर रखें।
  8. लोहे के दरवाजों में स्विच से करंट का इस्तेमाल करें।
  9. एक इमारत से दूसरी इमारत में जाने के लिए रास्ते का इंतजाम करें।
  10. बिल्डिंग के सारे मर्द हजरात एक साथ इमारत ना छोडें, कुछ लोग महिला सुरक्षा के लिए रुकें।

ताहिर हुसैन पर आईबी के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या समेत दिल्ली में हिंसा फैलाने का आरोप है। इसके साथ ही यह भी आरोप है कि ताहिर हुसैन के घर की छत से ही लोगों पर हमला किया जा रहा था।

IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या

चाँदबाग़ वही इलाका है, जहाँ आईबी अधिकारी अंकित शर्मा एक नाले में मृत पाए गए थे और यह क्षेत्र दंगों में सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। अंकित शर्मा के परिवार ने और प्रत्यक्षदर्शियों ने ताहिर हुसैन पर सीधे तौर पर इस निर्मम हत्या का आरोप लगाया था।

अंकित के पिता रविन्द्र शर्मा ने प्रशासन से तारिक हुसैन की आपराधिक रिकॉर्ड की जाँच कराने का आह्वान करते हुए कहा था कि ताहिर हुसैन ने अपने आवास पर गुंडों को इकट्ठा किया था। ये सभी ताहिर की छत से लगातार फायरिंग कर रहे थे और नीचे खड़े लोगों पर छत से पेट्रोल बम भी फेंक रहे थे, जिससे इलाके में रहने वाले लोगों में तनाव और डर का माहौल पैदा हुआ। 

दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के दौरान ताहिर हुसैन की छत से ईंट, पत्थर, तेजाब के पैकेट, डंडे और अन्य हथियार बरामद हुए थे। ताहिर के घर के नीचे से पहले से लगाया गया गुलेल भी मिला था। इसके साथ ही पेट्रोल बम और बोतल भी बरामद किए गए थे।

एक अन्य चार्जशीट जाफ़राबाद इलाके में हुए दंगों के सिलसिले में दायर की गई थी। पिंजरा तोड़ के कार्यकर्ता पहले से ही इन इलाकों में दंगे भड़काने के मामले में जाँच का सामना कर रहे हैं। हाल ही में, शुक्रवार को दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने नताशा नरवाल को कड़े गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया और उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के कर्मचारी अंकित शर्मा की निर्मम हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया पूर्व AAP नेता ताहिर हुसैन पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों में मुख्य अभियुक्त पाया गया था। दिल्ली के दंगों में उनकी भूमिका के उजागर होने के बाद, सीएए विरोधी प्रदर्शनों के साथ उनके संबंध भी बाद में सामने आए थे।

उल्लखनीय है कि चश्मदीदों के दिल्ली दंगों के दौरान अनुसार ताहिर हुसैन की इमारत में करीब तीन हजार दंगाई जमा थे जिन्होंने हिंदुओं को निशाना बनाया।  दंगों में अपनी भूमिका सामने आने के बाद ताहिर फरार हो गया था।

पाकिस्तान में 6 हथियारबंद युवकों ने 13 वर्षीय हिंदू लड़की का अपहरण कर रात भर बेरहमी से किया गैंगरेप

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक खासकर हिंदुओं का उत्पीड़न थमने का नाम नहीं ले रहा है। हिंसा और जबरन धर्मांतरण की खबरें लगातार सामने आती रहती हैं। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के पीरबक्स जरवार गाँव में 13 वर्षीय हिंदू लड़की के साथ 6 हथियारबंद युवकों ने बर्बरता से गैंगरेप किया। यह घटना सिंध प्रांत के मीरपुरखास में दिलबर खान पुलिस स्टेशन के अंतर्गत की है।

पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन ने बताया कि 6 हथियारबंद लोग 13 वर्षीय हिंदू लड़की के घर में जबरन घुस गए। इसके बाद उन्होंने परिवार के लोगों के साथ मारपीट करके लड़की को अगवा करके ले गए। इसके बाद उन दरिंदों ने रात भर हिंदू लड़की के साथ बेरहमी से बलात्कार किया। इधर लड़की के परिजन उसे ढूँढते रहे, मदद के लिए गुहार लगाते रहे।

अल्पसंख्यकों के खिलाफ क्रूरता पाकिस्तान के आतंकवादी राज्य में बेरोकटोक जारी है। इनके अत्याचार के कई उदाहरण हैं, खासकर हिंदुओं और सिखों के खिलाफ हाल ही में कई मामले रिपोर्ट किए गए हैं।

अक्टूबर 2019 में, एक हिंदू लड़की का कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया और उसे इस्लाम में परिवर्तित कर दिया गया। बाद में हिंदू पीड़िता की अपहरणकर्ता से जबरन शादी करा दी गई।

यह भयावह खबर नम्रता चंदानी की हत्या के ठीक एक महीने बाद आई, जो पिछले साल सितंबर में अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाई गई थी। वह बेड पर पड़ी हुई थी, जिसके गले में रस्सी बँधी हुई थी, जबकि उसका कमरा अंदर से बंद था। कॉलेज प्रशासन ने इसे आत्महत्या मानकर टालने की कोशिश की। हालाँकि, उसकी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने खुलासा किया था कि सितंबर 2019 में उसके हॉस्टल के कमरे में बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी।

इससे पहले, एक हिंदू स्कूल के प्रिंसिपल के खिलाफ ईश निंदा के आरोप के बाद मुस्लिम दंगाइयों ने हिंदू मंदिरों, दुकानों और अल्पसंख्यकों के घरों में तोड़फोड़ की थी। हालाँकि, बाद में यह पता चला कि हिंदुओं पर हमला एक बाल अपहरण की घटना को कवर करने के लिए एक पूर्व नियोजित घटना थी। स्कूल के प्रिंसिपल ने कट्टरपंथी इस्लामवादी नेता मियाँ मिट्ठू के सहयोगियों द्वारा अपहरण की गई एक हिंदू लड़की को शरण देने के इस्लामवादियों के प्रयासों को विफल कर दिया था।

दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगों में ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट का ’10 बार जिक्र’, गृह मंत्रालय को सौंपी गई फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट

गत फरवरी माह में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में ‘कॉल फार जस्टिस’ संस्था की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने गृहमंत्री अमित शाह को अपनी रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें कि ऑपइंडिया द्वारा की गई ग्राउंड रिपोर्ट्स को आधार बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि देश की राजधानी दिल्ली में हुए इन हिन्दू विरोधी दंगों में 53 लोग मारे गए थे।

‘कॉल फार जस्टिस’ नामक संस्था की ओर से गठित ‘फैक्ट फाइंडिंग टीम’ ने गत शुक्रवार (मई 29, 2020) को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वर्ष 2019 में वर्षों से अनसुलझे तीन तलाक, आर्टिकल-370 और राम जन्मभूमि जैसे मुद्दों का हल निकलना कई कट्टरपंथी ताकतों को रास नहीं आया। जिसके बाद हिंसा का खेल हुआ।

इस फैक्ट फाइंडिंग टीम ने दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगे के पीछे पिंजरा तोड़, जामिया को-ऑर्डिनेशन कमेटी, पीएफआई आदि संगठनों का हाथ बताया है। इसमें इस बात का भी जिक्र किया गया है कि इन कट्टरपंथी संगठनों ने साजिश के तहत दिल्ली को दंगों को आग में झोंका। साथ ही, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस नेताओं के सीएए (नागरिकता संशोधन कानून) पर फैलाए झूठ ने आग में घी डालने का काम किया।

इस रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि दिल्ली में घटित हिन्दू-विरोधी दंगों के पीछे दो बड़े कारण – नागरिकता कानून विरोधी प्रदर्शन को 120 करोड़ की फंडिंग और बाहर से आए समुदाय विशेष के 7,000 लोग थे, जिनकी उम्र 15 से 35 साल की रही होगी।

एनजीओ ‘कॉल फॉर जस्टिस’ के सदस्यों ने ‘टुकडे-टुकडे गैंग‘, और ‘कट्टरपंथी समूह’ जैसे – पिंजरा तोड़, जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी, पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) और AAP के स्थानीय राजनेताओं को दोषी ठहराया है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छानबीन में पता चला है कि एंटी सीएए प्रोटेस्ट की फंडिंग पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पार्टी ने की थी और नागरिकता कानून विरोधी प्रोटेस्ट के लिए PFI के 73 बैंक खातों में 120 करोड़ रुपए जमा होने से गहरी साजिश के संकेत मिलते हैं।

‘कॉल फार जस्टिस’ संस्था की फैक्ट फाइंटिंग टीम में मुंबई हाईकोर्ट के पूर्व जज अंबादास जोशी, पूर्व IPS विवेक दुबे, रिटायर्ड IAS एमएल मीना, एम्स के पूर्व डायरेक्टर तीरथ दास डोगरा, सामाजिक कार्यकर्ता नीरा मिश्रा, वकील नीरज अरोरा शामिल थे। इस संस्था के ट्रस्टी चंद्रा वाधवा ने बताया कि गृहमंत्री अमित शाह को यह रिपोर्ट सौंप दी गई है।

इस कमेटी में शामिल टीडी डोगरा ने अपने करीब चार दशक से अधिक के करियर में सीबीआई और दिल्ली पुलिस के लगभग सभी हाई प्रोफाइल मामलों में मदद की है जिनमें – इंदिरा गाँधी की हत्या, 2002 के गुजरात दंगे, इशरत जहाँ मुठभेड़, बटला एनकाउंटर और आरुषि तलवार हत्या जैसे मामले भी शामिल हैं।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट के वकील नीरज अरोड़ा, राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (NPA) और सीबीआई अकादमी के साथ साइबर लॉ और साइबर अपराध पर काम कर चुके हैं।

ऑपइंडिया की ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ हैं आधार

अरोड़ा ने कहा कि तथ्य-खोज रिपोर्ट द्वारा किए गए सभी दावे प्रामाणिक समाचार स्रोतों पर आधारित हैं, जिनसे पुष्टि की जा सकती है। साथ ही, शेखर गुप्ता की वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाईट ‘दी प्रिंट’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में सबसे ज्यादा बार समाचार वेबसाइट ‘ऑपइंडिया’ की ग्राउंड रिपोर्ट्स को आधार बनाया गया है, जिसे 70 पेज की रिपोर्ट में 20 बार वर्णित किया गया है।

यहाँ पर दी प्रिंट ने एक भूल अवश्य की है कि फैक्ट फाइंटिंग टीम द्वारा ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट्स का जिक्र तो किया गया है लेकिन 20 नहीं बल्कि 10 बार। ऑपइंडिया के ग्राउंड रिपोर्ट को परोक्ष रूप से झूठा बताने के चक्कर में ‘कंट्रोल एफ’ मारती वामपंथन यह भूल गई कि ऑपइंडिया कीवर्ड ‘यूआरएल’ में भी है, जिसके कारण वह 10 को 20 लिख गए।

यानी, यदि लिखा गया है कि ‘XYZ’ को गोली लगी। ‘XYZ’ मर गया। ‘XYZ’ का पोस्टमॉर्टम हुआ तो दी प्रिंट के अनुसार कुल तीन ‘XYZ’ मरे। लेकिन शेखर गुप्ता के नेतृत्त्व से ऐसी तथ्यात्मक गलतियों की उम्मीदें की जा सकती हैं।

सोशल मीडिया पर दी प्रिंट की रिपोर्टर ने ऑपइंडिया की रिपोर्ट का जिक्र किए जाने को लेकर हैरानी भरे ट्वीट किए हैं। क्योंकि वामपंथी प्रोपेगेंडा मशीनरी के पास अब एक मात्र आखिरी रास्ता यही रह गया है कि वह आश्चर्य व्यक्त कर अपनी उपस्थिति दर्ज करा सके।

कारण यह है कि ‘ऑपइंडिया’ उन दो या तीन संस्थाओं में से एक थी, जिन्होंने फैसल फारूक की छत, ताहिर हुसैन की बिल्डिंग, क्षतिग्रस्त इलाकों में लगी आग, पीड़ितों के परिजनों के बयान आदि रिकॉर्ड कर लगातार ग्राउंड रिपोर्टिंग की थी। हमारी लगातार और विस्तृत रिपोर्टिंग को गृह मंत्रालय को सौंपी गई फैक्ट फ़ाइंडिंग टीम ने आधार बनाया है।

अब ऐसे में दी प्रिंट और उनके दल द्वारा महज ये लिख देने से कुछ साबित नहीं होता कि अमित शाह को सौंपे रिपोर्ट में ‘ऑपइंडिया’ का जिक्र बीस बार किया गया है या दस बार, बल्कि ‘दी प्रिंट’ जैसे प्रपंचियों के लिए बेहतर यह होता कि वो हमारे एक भी रिपोर्ट को झूठा साबित कर देते।

ऐसा नहीं है कि ऐसी कोशिशें नहीं की गईं, लेकिन ऑपइंडिया ने दिल्ली में हुए इन हिन्दू विरोधी दंगों का जो सच प्रत्येक पीड़ित के पास जाकर मीडिया में सामने रखा, उसकी संवेदनशीलता और उसकी वास्तविकता को झूठ साबित कर पाना वामपंथ के ‘दंगा साहित्यकारों’ के लिए नामुमकिन हो गया।

सत्य का वह पहलू, जिसे मीडिया अपनी हरकतों से छुपाते आता था, उसे ऑपइंडिया ने ग्राउंड रिपोर्ट्स में सामने रखा। यह ऑपइंडिया ही था, जिसने दिखाया कि हिंदू-विरोधी दंगों के दौरान किस घर की छत पर क्या था? हमने बताया कि अंकित शर्मा को ताहिर हुसैन के घर में कौन खींच कर ले गए। हमने बताया कि शादी वाले घर पर सिलिंडर को ब्लास्ट करने के इरादे से आग लगाई गई। छतों पर रखे पेट्रोल बम, एसिड की बोतलें और गुलेल बताती हैं कि वहाँ क्या हुआ था।

इन सभी तथ्यों को जाँच का आधार बनाए जाने पर एकदम स्पष्ट हो जाता है कि मीडिया के किस वर्ग को सबसे ज्यादा तकलीफ हो सकती है।

मुंबई के KEM अस्पताल के डॉक्टरों ने ठाकरे सरकार को लिखा खुला खत, कहा- मुझे डर है, हम सभी उम्मीद खो देंगे

देश भर में कोरोना मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। देश में सबसे ज्यादा मरीज महाराष्ट्र से सामने आए हैं। पिछले 24 घंटे में महाराष्ट्र में 2361 नए कोरोना के मामले सामने आए, वहीं 76 लोगों की मौत हो गई। इसके साथ महाराष्ट्र में अब तक 2362 लोगों की मौत कोरोना से हो चुकी है। महाराष्ट्र में कुल मरीजों की संख्या 70,013 पहुँच गई है।

मुंबई में 40 हजार से अधिक मरीज हैं। देश में कोविड-19 से सबसे ज्यादा प्रभावित मुंबई के अस्पतालों में मरीजों की हालत बेहद खराब है। बेड और ऑक्सीजन की कमी के साथ साथ इनकी देखभाल के लिए नर्सें और स्वास्थ्यकर्मियों की भी कमी है। इसकी वजह से डॉक्टरों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

अब, मुंबई के बड़े अस्पताल किंग एडवर्ड मेडिकल कालेज (KEM) के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक खुला पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने बताया कि वो किस तरह की कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

अपने पत्र में उन्होंने शिफ्ट को छोटी करने और कोरोना पॉजिटिव मेडिकल स्टाफ के लिए अलग से वार्ड की माँग की है। पत्र में लिखा गया है, “केईएम अस्पताल में हमारे पास क्लास 4 के कर्मचारियों और स्टाफ नर्सों की भारी कमी है। डॉक्टर बुरी तरह से बोझ तले दब गए हैं और इससे उनका मनोबल प्रभावित हो रहा है।” डॉक्टरों ने इस पत्र के साथ एक वीडियो भी संलग्न किया है, ताकि यह दिखाया जा सके कि वो किस तरह की कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं।

वीडियो में मरीजों का इलाज करते हुए केवल तीन डॉक्टरों को दिखाया गया है , जिन पर 35 मरीजों की देखभाल की जिम्मेदारी है। डॉक्टरों की शिकायत है कि न तो मरीजों की देखभाल के लिए कोई नर्स मौजूद है और न ही फ्लोर साफ करने के लिए कर्मचारी।

वीडियो शूट करते हुए डॉक्टर कहता है, अब लोग सरकारी अस्पताल में मरीजों की दुर्दशा देखेंगे… भारत स्वास्थ्य पर अपने GDP की इतनी कम राशि खर्च करता है, जबकि यह एक अनिवार्यता है।”

सहयोगी डॉक्टर का कहना है, “रोगी पहले से ही बीमार है और मैं असहाय महसूस कर रहा हूँ। मैं कुछ नहीं कर सकता। मैं किसी व्यक्ति को अपनी आँखों के सामने मरने नहीं दे सकता। मेरी मदद करने वाला कोई नहीं है, केवल तीन सहकर्मी… सिर्फ तीन डॉक्टर और 35 मरीज, वे कभी भी मर सकते हैं। और हम उन सभी को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। यह अमानवीय और अनैतिक है। मैं नौजवानों से अनुरोध करता हूँ कि वे आएँ और मदद करें। अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी भी मरीजों को नहीं छू रहे हैं।”

डॉक्टर ने आगे बताया कि उन्होंने अस्पताल के अधिकारियों से इस बारे में शिकायत की, लेकिन उन्होंने अनसुना कर दिया। डॉक्टरों ने पत्र में लिखा है, “हमने उच्च अधिकारियों के सामने इस मामले को उठाने की कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। पिछले कई हफ्तों से यह स्थिति गंभीर है और यह बद से बदतर होती जा रही है। अगर अभी भी कुछ नहीं किया गया तो फिर मुझे डर है कि हम सभी उम्मीद खो देंगे।”

गौरतलब है कि केईएम अस्पताल के कर्मचारियों ने 10 दिन में दूसरी बार सोमवार (जून 1, 2020) को सुविधाओं को लेकर प्रदर्शन किया। अस्पताल में सुविधाओं के अभाव में नर्सों ने ये प्रदर्शन किया। नर्सों का कहना है कि अस्पताल में उन्हें कोविड वॉर्ड में एक-एक महीने तक ड्यूटी करनी पड़ रही है और उन्हें क्वारंटाइन फैसिलिटी में भी नहीं भेजा जा रहा है। नर्सों ने ये भी दावा किया कि उन्हें एक पीपीई किट 8 घंटे तक पहननी पड़ती है जो कि मुंबई के मौसम के हिसाब से लगभग नामुमकिन है। यही नहीं उन्होंने कहा कि वहाँ पंखे भी नहीं हैं। उन्होंने कोरोना पॉजिटिव स्टाफ के लिए अलग से वार्ड की माँग की है।

‘नाजायज संतान थे पाँचों पांडव, कुंती और माद्री के अन्य मर्दों से थे सम्बन्ध’: ‘दबंग दुनिया’ को लीगल नोटिस

अधिवक्ता आशुतोष जे दूबे ने ‘दबंग दुनिया’ नामक मीडिया संस्थान के ख़िलाफ़ क़ानूनी नोटिस तैयार किया है। ‘दबंग दुनिया’ ने महाभारत काल में पांडवों की माँ (2 की सौतेली माँ) कुंती का अपमान किया है। उसने महाभारत की अनोखी कथाओं के नाम पर ये झूठ परोसा है। इस लेख में दावा किया गया है कि तब महिलाएँ एक से ज्यादा पुरुषों के साथ सम्बन्ध रखती थीं और ऐसे ही उनकी कई संतानें पैदा होती थीं। साथ ही पांडव बंधुओं को ‘नाजायज संतान’ करार दिया गया है।

अधिवक्ता दूबे ने अपनी शिकायत में लिखा है कि महाभारत में ऐसा कहीं नहीं लिखा हुआ है और इसीलिए मीडिया संस्थान ने ये लेख प्रकाशित कर के हिन्दुओं की भावनाओं को आहत किया है। साथ ही उन्होंने असली कहानी याद दिलाई है, जिसके अनुसार दुर्वासा ऋषि ने कुंती की सेवा से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया था कि वो जिस भी देवता का आह्वान करेंगी, उनके आशीर्वाद से उन्हें उनकी ही तरह पुत्र की प्राप्ति होगी।

इसके बाद धर्मराज, इंद्र और वरुण से उन्हें क्रमशः युधिष्ठिर, अर्जुन और भीम के रूप में तीन पुत्र प्राप्त हुए। बाद में कुंती ने ये मन्त्र माद्री को सिखाया, जिससे उन्हें भी दोनों अश्विनीकुमारों से नकुल एवं सहदेव नामक पुत्र मिले। जबकि इस लेख में पाँचों पांडवों को कुंती की ही ‘नाजायज़ संतान’ बताया गया है। साथ ही मूल महाभारत की कथा से भी छेड़छाड़ की गई है। प्रतीत होता है कि बिना पुस्तक पढ़े ही लेख लिख दिया गया है।

वकील आशुतोष जे दूबे ने लिखा है कि इस तरह से ‘दबंग दुनिया’ ने करोड़ों हिन्दुओं की आस्था का अपमान किया है। साथ ही उन्होंने संस्थान को लीगल नोटिस भी भेजा है। अपने लेख में उल-जलूल स्रोत को आधार बनाते हुए ‘दबंग दुनिया’ ने लिखा है:

“कुंती ने भी विवाह से पूर्व व विवाह के बाद अलग संबंध बनाए थे। विवाह के बाद पाण्डु के कमजोर पुरुष साबित होने पर इन्होंने पति की इच्छा व सहमति से तीन अन्य पुरुषों से अपनी शारीरिक आवश्यकता, प्रेम संतुष्टि व वंशवृद्धि के लिए प्रेम संबंध स्थापित किया और युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन को जन्म दिया था। इसी तरह से पाण्डु की दूसरी पत्नी ने बच्चों के जन्म के लिए किसी अन्य मर्द से संबंध स्थापित किए, तब नकुल और सहदेव का जन्म हुआ था। तो क्या यहाँ पर यह सोचना सही है कि पाँचों ही पांडव नाजायज संतान थे?”

साथ ही इसमें पाण्डु के ‘कमजोर’ होने की बात लिखी गई है, जो ग़लत है। असल में उन्हें एक ऋषि का श्राप था, जिस कारण वो अपनी पत्नियों के साथ सहवास करते ही मृत्यु को प्राप्त हो जाते, इसीलिए कुंती और माद्री ने देवताओं का आह्वान किया। वकील दूबे ने इस लेख को वास्तविकता से परे फेक न्यूज़ करार दिया है। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर इस लेख का स्क्रीनशॉट और लिंक भी शेयर किया, ताकि अन्य लोग इस प्रोपेगंडा से वाकिफ हो सकें।

आजकल हिन्दू देवी-देवताओं और धार्मिक भावनाओं का मजाक लगातार बनाया जा रहा है। हाल ही में कॉमेडियन आलोकेश ने हनुमान चालीसा का मजाक उड़ाया था। एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्होंने माफ़ी माँग ली। इसी तरह जी मीडिया के एक शो ‘गॉडमैन‘ में हिन्दू धर्म को ग़लत दिखाया गया था, जिसे शिकायत के बाद प्लेटफार्म से हटा दिया गया। अनुष्का शर्मा की ‘पाताल लोक‘ और एकता कपूर की सीरीज में भी देश व धर्म का अपमान किया गया है।

मेवात के हिन्दूविहीन गाँव: रेप, गैंगरेप, धर्मांतरण की वो घटनाएँ जिसने इसे ‘मिनी पाकिस्तान’ नाम दिया है

कोरोना संकट के बीच हरियाणा का मेवात एकदम से सुर्खियों में आ गया है। कारण है पूर्व जस्टिस पवन कुमार की अगुवाई वाली 4 सदस्यीय टीम की जाँच की रिपोर्ट। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मेवात धीरे-धीरे दलितों के लिए कब्रिस्तान बनता जा रहा है। जहाँ बच्चियों से रेप, महिलाओं का अपहरण, दलित पुरुषों से मारपीट, उनकी बेहरमी से हत्या और धर्मपरिवर्तन बेहद आम बात हो गई है।

अब जैसा कि हमारी पिछली रिपोर्ट में हमने आपको पूर्व न्यायाधीश पवन कुमार से ऑपइंडिया की बातचीत में निकले मुख्य बिंदुओं के आधार पर मेवात के हालातों की चर्चा की। वहीं, आज हम पिछली कुछ घटनाओं का जिक्र करके मेवात में उन अपराधों से संबंधी कुछ वाकए पेश कर रहे हैं, जो वास्तविकता में मेवात पर नहीं, लोकतंत्र पर सवाल खड़ा करती हैं।

इन घटनाओं का जिक्र करने से पहले आपको याद दिला दें कि पूर्व जस्टिस कुमार ने मेवात में दलितों की स्थिति पर हमसे स्पष्ट शब्दों में एक बयान दिया था। वह ये कि मेवात में इस समय दलितों की जो स्थिति है, वैसी तो शायद पाकिस्तान में जो हिंदू बचे हैं, उनकी भी स्थिति न हो।  इस बयान का जिक्र उन घटनाओं के जिक्र से पहले इसलिए भी करवाया है ताकि हमें अंदाजा रहे कि पूर्व न्यायाधीश ने मेवात में पीड़ितों से मिलने के बाद और उनकी आपबीती जानने के बाद कौन सी आपराधिक मानसिकता वाले लोगों के ख़िलाफ़ ये बयान दिया था।

1. साल 2017 में हरियाणा का मेवात मॉडल स्कूल चर्चा में आया था। उस समय इस स्कूल पर आरोप लगा था कि यहाँ पर हिंदू छात्रों को धर्म परिवर्तन और नमाज पढ़ने के लिए दबाव बनाया जाता है। इतना ही नहीं, ऐसा करने से मना करने पर यहाँ पर छात्रों को मारने-पीटने का मामला भी सामने आया था। पूरे मुद्दे के तूल पकड़ने के बाद जिलाधिकारी ने टीचर मोइनुद्दीन और वार्डन आरिफ को सस्पेंड कर दिया था। वहीं एक अन्य अध्यापक का इस मामले के उजागर होने के बाद तबादला किया गया था।

स्कूल प्रशासन से जुड़े इन लोगों पर आरोप लगाने वाले एक पीड़ित छात्र ने इस संबंध में बताया था कि उसे नमाज पढ़ने के लिए मेवात मॉडल स्कूल के हॉस्टल में थप्पड़ खाने पड़े। वहीं उसके साथ अन्य दो लड़कों को भी ऐसा व्यवहार झेलना पड़ा।

2. साल 2018 में एक 16 साल की लड़की ने मेवात जिले के नूँह में आत्महत्या कर ली। पड़ताल हुई तो पता चला कि इस आत्महत्या से पहले 8 लड़कों ने उसका अपहरण करके कुछ दिन पहले रेप किया था। ऐसे घृणित कुकर्म को अंजाम देकर वह उसे खून से लथपथ हालात में उसके घर के बाहर छोड़ गए। पड़ताल में यह भी पता चला कि आरोपित गाँव के रसूखदार परिवार से थे। जिन्होंने रेप की शिकायत दर्ज होते ही पीड़िता के परिवार पर केस वापस लेने का दबाव बनाना शुरू कर दिया था।

3.साल 2018 में ही मेवात के नगीना खंड गाँव मोहालका से दलित परिवार पर जानलेवा हमला करने की बात सामने आई थी। जाँच में मालूम चला था कि गाँव में रहने वाले किशन के परिवार पर इस्लाम नाम का युवक लंबे समय से धर्म परिवर्तन का दबाव डाल रहा था। लेकिन जब किशन के परिवार ने इससे इंकार किया तो इस्लाम, तौफीक, मोसिम, अतरु, असमीना ने उसके परिवार पर लाठी डंडों व सरिया से जानलेवा हमला कर दिया और जातिसूचक शब्दों से संबोधित कर उन्हें अपमानित भी किया।

4. ऐसे ही से 2 साल पहले एक दलित लड़की के धर्म परिवर्तन, रेप, अपहरण का भी मामला आया था। जिसमें जाँच से मालूम हुआ था कि परिवार से नाराज होकर एक लड़की अपने घर से निकली और बाद में लापता हो गई। परिजनों ने उसके गुमशुदगी की रिपोर्ट भी कराई। लेकिन उसका कुछ मालूम नहीं चला। बाद में खोजबीन हुई तो पता चला कि एक फरजाना नाम की महिला उसे अपने साथ ले गई थी। यहाँ उसने लड़की को न केवल मुस्लिम नाम दे दिया था। बल्कि कथित तौर पर उसे नमाज पढ़वाकर गौंमास भी खिलाया और बाद में इस्लाम नाम के व्यक्ति को 40 हजार में बेचने की कोशिश की। मगर, बाद में परिस्थितियाँ ऐसी बनी कि मामला पुलिस तक पहुँचा और बच्ची ने दबाव में आकर सबकुछ बता दिया। ( रिपोर्ट के अनुसार घटना में पीड़िता मेवात की ही दलित थी और फरजाना उसे स्टेशन पर मिली थी। )

5. हरियाणा के मेवात में साल 2018 में ही एक नाबालिग से साथ दुष्कर्म की चौंकाने वाली घटना सामने आई थी। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो नूँह के भंडका में घटी इस घटना में पुलिस ने 14 वर्षीय लड़की के घर में घुसकर उसके साथ रेप करने के आरोप में असलम को गिरफ्तार किया था। जबकि बाकी दोनों उस समय तक पकड़ में नहीं आए थे। बच्ची के पिता ने बताया था कि उनकी बच्ची घर में सोई हुई थी। तभी असलम और दो अन्य लड़के आए और मुँह में कपड़ा डालकर उसका रेप करने लगे। जब लड़की के पिता घर में आए तो उन्होंने असलम को रेप करते देखा और फिर शोर मचाकर उसे पकड़वा दिया।

6.साल 2019 में मेवात की जमीन पर लव जिहाद का मुद्दा चर्चाओं में आया था। इस दौरान मालूम चला था कि जेहाद के नाम पर एक महिला पर हमला हुआ। वहाँ दो मुस्लिम युवकों आकिल खान और राशिद ने पहले लड़की का अपहरण किया। फिर उसपर जादू-टोना करवाया और बाद में धर्म परिवर्तन करवा दिय़ा। इस घटना के सामने आने के बाद शहर में जगह-जगह तनाव बढ़ता दिखा था और प्रदर्शनकारियों ने गुरुग्राम अलवर नेशनल हाइवे को 11 घंटे तक जाम कर दिया था।

7. इसके बाद साल 2020 की फरवरी में मेवात के तावडू स्थित एक गाँव में एक शादीशुदा महिला के साथ कई महीनों तक गैंगरेप की घटना सामने आई थी। महिला ने दरिंदों के चंगुल से छूटने के बाद पाँच युवकों पर अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया था। इस दौरान पीडि़ता ने कहा था कि उसे नशीले पदार्थ देकर गैंगरेप होता था और विरोध करने जाने से मारने की धमकी व अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकिया मिलती थीं।

8. कुछ समय पहले बकरी के साथ बलात्कार का मामला गर्माया था। ये कुकर्म भी हरियाणा की धरती पर स्थित मेवात के मरोधा गाँव में अंजाम दिया गया था। जिसके बाद इस मामले के संबंध में जाफर खान और साहुकार खान की गिरफ्तारी हुई थी। जबकि रेप करने वाले कुल 8 लोग थे।

9. सबसे हाल का मामला देखिए, बीते दिनों हरियाणा के मेवात जिला स्थित पुन्हाना में मुक्तिधाम आश्रम के प्रमुख महंत रामदास महाराज के साथ मुस्लिम बहुल इलाके में कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर बदसलूकी, मारपीट और जान से मारने की नीयत से हमला करने का मामला सामने आया था। महंत के समर्थन में आए हिंदूवादी संगठनों ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया था कि बुधवार (अप्रैल 29, 2020) की सुबह महंत रामदास महाराज पर आरोपितों ने तथाकथित धार्मिक भावनाओं के आहत होने को निशाना बनाते हुए अभद्र धार्मिक टिप्पणियाँ की। साथ ही इलाके के सभी साधु-संतों को पुन्हाना से भगा देने की धमकी भी दी थी।

महंत रामदास महाराज जब इस हमले के बाद किसी तरह जान बचाकर पुलिस के पास पहुँचे तो पुलिस ने कथित तौर FIR दर्ज करने से इनकार कर दिया। ऑपइंडिया ने इस मामले में जब पुलिस का पक्ष जानने की कोशिश की तो पुन्हाना थाना SHO ने इस मामले में किसी भी जानकारी के लिए हेडक्वार्टर से बात करने कहा था। उन्होंने कहा था कि उन्हें इस प्रकार की किसी घटना की जानकारी नहीं है।

मेवात को लेकर खड़ा हो रहा प्रश्न बहुत पुराना है

गौरतलब है कि कई हिंदूवादी संस्थाएँ अब तक हरियाणा के मेवात को लेकर प्रश्न खड़ा कर चुकी है। न केवल आरएसएस और विहिप के कार्यकर्ता इस संबंध में समय दर समय जानकारी साझा करते रहते हैं। बल्कि कई अन्य संस्थाएँ भी मेवात में बढ़ते अरपराधों को व हिंदुओं-दलितों पर हो रहे अत्याचारों के ख़िलाफ़ मुखर होकर बोलना शुरू कर दिया है।

हिंदू जनजागृति समिति की साल 2013 की एक रिपोर्ट बताती है कि मेवात में घटित होने वाली ये घटनाएँ आज-कल की बात नहीं हैं। बल्कि लंबे समय से यहाँ पर मुस्लिम बहुसंख्यक लोगों का वो रवैया बरकरार है जिसके कारण कई कार्यकर्ता इसे छोटे पाकिस्तान कहने पर मजबूर हुए।

दरअसल, 2013 की इस रिपोर्ट में है कि जिस प्रकार पाकिस्तान में हिंदुओं, दलितों को प्रताड़ित किया जाता है। वैसा ही मेवात में होता है। समिति के अनुसार, मेवात की स्थिति में और बांग्लादेश की स्थिति में कोई खासा अंतर नहीं है। बांग्लादेश में पहले 30% हिन्दू थे, लेकिन आज 8% हैं। इसी प्रकार मेवात में भी हिंदुओं की संख्या को उंगलियों पर गिना जा सकता है। वहीं मेवात में हिंदू लड़की का अपहरण, दलितों पर अत्याचार, श्मशान घाटों पर कब्जा आदि धड़ल्ले से हो रहे हैं।

समिति की सात साल पुरानी रिपोर्ट इस बात का उल्लेख करती है कि मेवात में तबलीगी जमात के लोग लोकल मुस्लिमों को लव जिहाद, जिहाद और धर्मांतरण के लिए उकसाते हैं। इसके साथ ही इस रिपोर्ट में एक घटना का जिक्र है, जहाँ वीर सिंग अपने ससुर के मुस्लिम धर्म अपनाने पर बयान देते हुए बताते हैं कि उनके ससुर को कुछ समय पहले मुस्लिम बनाया गया और बाद में उन्हें 4 महीने के लिए बाहर भेज दिया गया। मगर, जब वह वापस लौटे तो उन्होंने हिंदू धर्म अपनाया, जिसके कारण उन्हें जान से मारने की धमकियाँ मिलने लगीं।

हालत ये हो गई कि उन्हें छिपकर रहना पड़ा। लेकिन तब भी उनकी बीवी और बच्चो को परेशान किया जाता था। उनपर आरोप लगाया गया कि उन्होंने कुरान फाड़ी, जोकि बाद में गलत साबित हुआ। इसके अलावा जब उनकी बेटी की शादी होने लगी, तो कुछ मुस्लिम विवाह स्थल पर पहुँच गए और कहने लगे कि ये शादी नहीं होगी क्योंकि लड़की के पिता ने इस्लाम कबूल कर लिया है और अब इसकी शादी नहीं निकाह होगा, वो भी मुस्लिम के साथ। हालाँकि, बाद में लड़की की माँ ने इसपर बहुत आपत्ति जताई और अंत में पुलिस संरक्षण में विवाह संपन्न हो पाया।

इतना ही नहीं, इस रिपोर्ट में हिंदू लड़की के जबरन धर्म परिवर्तन पर बात करते हुए कहा गया कि मुस्लिम पुरुष हिंदू लड़की से शादी करता है तो लड़की का धर्मांतरण होता है। पर ऐसी ही स्थिति जब उलट होती है यानी हिंदू लड़का जब मुस्लिम लड़की से शादी करता है, तो उसपर मुस्लिम बहुल आबादी दबाव बनाती है कि उसे धर्म परिवर्तन करना पड़ेगा। जब लड़का दबाव को मानने से इंकार करता है तो उसपर हमला होता है।

उदाहरण के लिए नगीना में रहते हुए एक विशाल जैन नाम के लड़के को मुस्लिम लड़की से प्यार हुआ तो उसे वसीम अहमद बनवा दिया गया और उसके पिता को धमकी दी जाती रही। साथ हीं नगीना में हिदुओ को ये कहकर धमकाया गया कि मुस्लिम लड़की के बदले हिंदू लड़की उठाई जाएगी। इस घटना से कई हिंदुओं ने अपनी बच्चियाँ स्कूल में भेजनी बंद कर दी थी।

बता दें, हिंदू जनजागृति समिति की रिपोर्ट मेवात को पाकिस्तान बनने से बचाओ और पवन कुमार की जाँच टीम द्वारा रिपोर्ट का निष्कर्ष इस बात को स्पष्ट करता है कि वहाँ पर मुस्लिम कट्टरपंथ का फैलाव बहुत पहले से है। बस फर्क ये है कि रिपोर्ट में मेवात में हिंदुओं के दमन की चर्चा है और पूर्व न्यायाधीश की जाँच रिपोर्ट में दलितों के दमन का उल्लेख है।

एक बार फिर से याद दिला दें कि ऑपइंडिया से बातचीत में पूर्व न्यायाधीश ने ये बात हालिया संदर्भ में बताई थी कि मेवात के 500 गाँवों में 103 गाँव हिंदूविहीन हो गए हैं और 84 गाँवों में 4-5 परिवार शेष है।

उत्तराखंड में ईसाई धर्मांतरण: पहले बाँटा जीसस भजन, फिर दिया चावल-मुर्गी… अब बना रहे घरों की छत पर चर्च

उत्पत्ति और उद्धार की कहानियाँ, वो कॉमिक्स और चित्रण, जिनमें बताया जाता था कि किस तरह परमपिता परमेश्वर अपने चेलों की चंगाई कर दिया करते थे… भजन संग्रह और आरती की किताबें! मैं बचपन में अक्सर सोचा करता था कि आखिर गाँव के पास ही देवदार के घने जंगलों में घूमने और छुट्टियाँ बिताने के उद्देश्य से पहुँचे ‘अंग्रेज’ इन किताबों के गट्ठरों को साथ लेकर क्यों पहुँचते हैं?

शाम के समय हम अपने दोस्तों के साथ सैलानियों के इन झुंडों को देखने जाया करते थे। ये तब की बात है, जब मसूरी से ही तकरीबन 50-60 ‘अंग्रेज’ अपना सामान पीठ पर लादकर हमारे गाँव की ओर घूमने आया करते थे। सड़कें और यातायात के साधन तब मसूरी तक ही सीमित थे और वहाँ से पैदल ही यह दूरी तय करनी होती थी।

तब की मेरी समझ कहती थी कि शायद ब्रितानी फितरत के लोग ऐसी जगहों को छुट्टियों के लिए सबसे ज्यादा पसन्द करते हैं, जो मुख्यधारा के जनजीवन से एकदम कटी हुई है। जहाँ पर प्रकृति अपने मौलिक स्वरूप में मौजूद है, ‘अंग्रेज’ लोग ऐसी ही जगहों को चुनते होंगे।

सघन देवदार के जंगलों के बीच प्राचीन टूरिस्ट लॉज के पास लगे इनके तंबुओं के बाहर हम इनके खेल देखते, तो ये फुटबॉल जैसी किसी गेंद को लेकर दौड़ते थे। हम यह जानते थे कि कम से कम यह फुटबॉल तो नहीं हुआ करता था।

पास में ही इनके दूसरे समूह गाँव के लोगों से कुछ बातचीत करते नजर आए थे। इस बातचीत में परमेश्वर की बातें थीं। लोगों को अपने साथ दोहराने को एक गीत जैसा कुछ दिया जाता जो शायद कुछ ऐसा था –

“हे यहोवा, मैं गहन कष्ट में हूँ। सो सहारा पाने को मैं तुम्हें पुकारता हूँ। मेरे स्वामी, तू मेरी सुन ले। मेरी सहायता की पुकार पर कान दे।”

जो लोग मिला-मिलाकर अक्षर जोड़ पाने में सक्षम होते उन्हें वो किताबें पकड़ा देते और बाकी लोगों को पोस्टर थमा देते और हम बच्चों को कॉमिक्स। इनमें बताया गया था कि किस तरह गर्भवती मरियम को लेकर यूसुफ़ के मन के वहम को फरिश्तों ने दूर किया और आखिरकार भेड़ और गड़रियों के बीच बेथलहम में एक रात लोगों के उस रखवाले ने जन्म लिया था।

ये कहानियाँ एकदम नई होने के साथ-साथ इतनी आश्चर्यजनक और लुभावनी नजर आती थीं कि जिन घरों में गीता और रामचरितमानस के अलावा कभी किसी शादी विवाह की चिट्ठियों के कागज तक नहीं मिलते थे, वहाँ लोग इन्हें रखकर एक दूसरे को सुनाने लगे।

हालाँकि भाग्यवश और जिज्ञासा से कुछ समझदार लोग यह भी सवाल पूछते कि परमपिता परमेश्वर के पुत्र जीसस कैसे हो सकते हैं? जबकि भगवान राम के तो बस लव और कुश ही दो बेटे थे? या शिव के तो गणेश और कार्तिकेय, दो पुत्र थे और जीसस जैसी बात तो कहीं लिखी ही नहीं गईं। फिर शिव अपने बेटे का नाम जीसस भी नहीं रखते… आखिर में यह सब एक हास्य पर समाप्त हो जाता।

समय बीतता गया, जैसे-जैसे यह जनजातीय क्षेत्र तरक्की करने लगा, विदेशियों के आने-जाने के किस्से भी कम होते गए। अब उनमें से एकाध लोग ही कभी-कभार आते लेकिन लंबे समय तक यहाँ गाँव के आसपास रहकर दिन गुजारते, वो अच्छी हिंदी बोलने लगे थे। गाँव के लोग उसे ‘डेविड’ कहते और वो भी अच्छे से जानता था कि गाँव में कौन प्रधान है, कितने सवर्ण और साथ ही यह भी कि कितने तथाकथित निचली जाति के लोग कहाँ रहते हैं।

वर्ष 2013 की आपदा के बाद से बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला। बड़े स्तर पर अचानक से इन विदेशियों के दल सक्रिय हो गए। राशन और मदद की आड़ में दलितों के गाँव में बड़ी मात्रा में धर्मांतरण होने लगे। जो काम अब तक गोपनीय रूप से हुआ आ रहा था, अब वह मदद के बहाने खुलकर किया जाने लगा। डॉक्टर्स की टीम गाँव में हेल्थ चेकअप करती और हर जरूरतमंदों के साथ-साथ अनावश्यक रूप से भी बेवजह लोगों को दवाइयों के भंडार वितरित किए जाने लगे। लोग कहते कि किसी ‘वर्ड बैंक’ ने ये दवाएँ भेजी हैं, जिन्हें सरकारी अस्पताल दो जन्म तक नहीं ला सकेंगी।

धीरे-धीरे ऐसी भी घटनाएँ सामने आईं, जब दलितों के बच्चों और बेटियों को नौकरी और मोटरसाइकिल देकर उन्हें ईसाई बना दिया गया। अब इनके निशाने पर प्रत्यक्ष रूप से अनुसूचित जाति के लोग आ गए। गाँव के लोगों को लालच देकर उन्हें जीसस की आरतियाँ बाँटी जा रही हैं। उनके घरों में हिन्दू देवी-देवताओं की जगह योहोवा की आरती और जीसस के भजन टँगे हैं।

आस्था का चावल और हर सप्ताह जबरन भेजी जाने वाले मुर्गा-बकरियों से सौदा किया जाने लगा। ईसाई मिशनरियों को कोरोना की महामारी ने मानो एक और बड़ी रेड मारने का अवसर दे दिया। पास के ही एक गाँव में, जहाँ पर अनुसूचित जाति रहती है, सप्ताह में दो दिन कम से कम राशन बाँटी जाती है। इसमें यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि प्रत्येक घर में रोज मीट और माँस पक रहा हो।

अब इस गाँव में कुछ लोगों को पकड़कर उन्हें इतना पैसा दिया गया है, जिससे वो अपने लिए घर और उसके ऊपर चर्च तैयार करें। इसी तर्ज पर उत्तराखंड राज्य के लगभग हर गाँव में रहने वाली अनुसूचित जाति को ईसाईयों ने निशाना बनाया है। गाँव के गाँव का ईसाईकरण किया जा रहा है, जिसे लेकर स्थानीय लोग भी बहुत ज्यादा जागरूक नहीं हैं। सवाल यह है कि यदि ईसाई मिशनरी दुनिया से भूख और गरीबी को खत्म करना चाहते हैं, तो फिर उसके लिए उन्होंने सिर्फ अनुसूचित जाति को ही क्यों चुना है? इससे भी बड़ा सवाल यह है कि क्या अनुसूचित जाति से होने का अर्थ गरीब होना है?

इसका जवाब तो एकदम ना है। क्योंकि जिस क्षेत्र से मैं सम्बन्ध रखता हूँ, वह एक जनजातीय क्षेत्र है। हम सभी लोगों की आवश्यकताएँ एक-दूसरे परिवार से पारंपरिक रूप से जुड़ी हुई हैं। सआदत हसन मंटो का कहना था कि भूखे आदमी का मजहब रोटी होता है, यही बात स्वयं विवेकानंद ने सौ वर्ष पूर्व कह दी थी। स्वामी जी ने कहा था कि दरिद्र नारायण का कोई धर्म नहीं होता। बेशक दरिद्र नारायण का कोई धर्म नहीं होता।

लेकिन सदियों से जो जनजातीय इलाके अपने पुरखों की जमीन पर हल जोतकर उस पर फसल उगाते आ रहे थे, अचानक से उन्हें चावल और बकरियाँ परोसकर उन्हें पंगु और लाचार बना देने वाले ईसाइयों ने गरीबों को क्यों चुना? इस क्षेत्र में कई पीढ़ियों से ब्राह्मण, राजपूत, दलित, लोहार, बढ़ई… यानी समाज का लगभग हर वर्ग अपनी आवश्यकताओं के लिए एक-दूसरे पर निर्भर रहता आया था। लेकिन हुआ यह कि ईसाई मिशनरियों ने समाज के इस ताने बाने को ही तोड़ दिया।

खेतों में हल चलाने से लेकर फसल बोने, काटने आदि की जिम्मेदारी निभाने वाला यह अनुसूचित वर्ग अब अपनी उपजाऊ जमीन को भी बंजर कर चुका है। ईसाइयों ने किसानों को जीसस की आरती पढ़ाकर उन्हें ‘दलित’ बना दिया। काश्तकार के मन में इस विचार का बीजारोपण किया जाने लगा कि वह निचली जाति का है। यही नहीं, सबसे बड़ा हमला उनकी आस्था पर करते हुए कहा कि उन्हें ऐसी महाभारत पर गर्व नहीं होना चाहिए, जो अपने भाइयों से युद्ध करना सिखाती है।

लेकिन अब इन अनुसूचित गाँवों का तालमेल पूरी तरह से खंडित नजर आता है। जो लोग अपने स्वरोजगार की ओर भी बढ़ रहे थे, उन्होंने अपना काम उस हर सप्ताह बंटने वाली मुफ्त की राशन के लिए छोड़ दिया है। कुछ ही साल पहले स्कूल जाने वाले विद्यार्थी, जो पुलिस या फौज में जाना चाहते थे, वो अब ईसाई मिशनरियों से चर्च बनाने के लिए ‘फंड’ की माँग करने लगे हैं।

यह सब सिर्फ उत्तराखंड की ही कहानी नहीं है। ऐसे कई उदाहरण सामने आते रहे हैं जब ईसाइयों ने आदिवासी इलाकों और दलितों की आबादी को राशन के बहाने ईसाई बना दिया। यह एक सुनिश्चित योजना के साथ होता आया है। लेकिन सबसे करीब से इसे मैंने अपने क्षेत्र में महसूस किया कि किस तरह से इतने वर्षों तक बेहद सावधानी से और अलग-अलग चरण में एक जनजातीय क्षेत्र के तालमेल को खंडित कर दिया गया।

इस कारण धर्म के अलावा और भी कई पारस्परिक सम्बन्ध टूटते चले गए। बात सिर्फ धर्म तक सीमित नहीं थी, बल्कि अब ऐसे विद्यालय तैयार किए जाने लगे हैं जो मुख्य बाजार से बहुत दूर के गाँव के लोगों को पढ़ाते हैं। इन स्कूलों की शिक्षा प्रणाली और सिलेबस, सब कुछ समझ से परे जरूर है, लेकिन बहुत व्यवस्थित और नियमबद्ध हैं।

फिर भी ग्रामीण लोग सिर्फ ‘अंग्रेजी स्कूल’ के नाम पर और लुभावनी प्रणाली के आधार पर बच्चों को इन स्कूलों में भेज रहे हैं। इसके लिए सिर्फ ईसाइयों को दोष दिया जाना भी अतार्किक ही है, क्योंकि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के नाम पर चली आ रही खाना-पूर्ति किसी से छुपी हुई नहीं है। सरकारी विद्यालयों में सिर्फ भर्ती कर दिए जाने के नाम पर अकुशल, बेहद अव्यवहारिक और सतही ज्ञान वाले शिक्षकों के कारण अपने बच्चों को कोई उन विद्यालयों में भेजना भी नहीं चाहता।

इसका नतीजा यह होता है कि जो सांस्कृतिक गौरव अब तक कम से कम हाल की पीढ़ियों तक जीवित था, समय के साथ वह भी इस सांस्कृतिक ईसाईकरण के साथ नष्ट होता चला जाएगा।

‘भारतीय अपने अधिकारों से अनजान हैं’: विनोद दुआ ने अमेरिका की तरह ही दंगे करने के लिए लोगों को उकसाया

विवादित पत्रकार और मी टू के आरोपित विनोद दुआ ने सोमवार (जून 1, 2020) को अपने डेली शो में भारतीयों को उसी तरह से हिंसा और दंगा करने के लिए उकसाया, जैसा कि फिलहाल अमेरिका में हो रहा है। बता दें कि अमेरिका में एक अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस के हाथों हुई हत्या के बाद दंगे और हिंसा अब भी जारी हैं।

वीडियो की शुरुआत में विनोद दुआ कहते हैं, “हमारे यहाँ धर्म को लेकर नफरत है और उधर नस्ल को लेकर नफरत है।” वीडियो में 9 मिनट तक वो ये कहते नजर आते हैं कि कैसे एक अश्वेत आदमी की हत्या के खिलाफ ‘विरोध’ करने के लिए भीड़ सड़कों पर उतरी।

विनोद दुआ ने आगे कहा, “अमेरिका में 40 शहरों में कर्फ्यू हैं। लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। उनमें से कुछ हिंसक भी हो गए। अमेरिका में सड़कों पर प्रदर्शनकारियों की बड़ी मौजूदगी ने उनके अंदर की सहानुभूति और मानवता का परिचय दिया है।” फिर आह भरते हुए वो कहते हैं, “लेकिन भारतीय अपने अधिकारों से अनजान हैं।”

अमेरिकी दंगों से प्रेरणा लेते हुए, उन्होंने कहा कि जब प्रवासी श्रमिकों को अपने मूल गाँव जाने के लिए हजार किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था, तो भारतीय नागरिक समाज ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

विरोध प्रदर्शन के नाम पर सड़कों पर उतरी हिंसक भीड़ को सही ठहराने को लिए विनोद दुआ ने दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट करने वालों को ‘मानवाधिकार के धर्मयोद्धा’ की संज्ञा दी। उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया कि ट्रम्प को बेसमेंट में शिफ्ट हो जाना चाहिए।

आगे विनोद दुआ ने इस बात का हवाला देते हुए कि कैसे अमेरिका में लोगों ने राष्ट्रपति को राष्ट्रपति भवन में ही बंधक बना दिया है, उन्होंने कहा, “हम यहाँ भी ऐसे लोगों को देखना चाहेंगे। हमारे पास 130 करोड़ लोग हैं। अमेरिका के पास इतनी आबादी भी नहीं है।” इसके साथ ही शो के अंत में भी वो इसी बात को दोहराते नजर आए कि भारत में लोग अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार के खिलाफ अपने आक्रोश को प्रदर्शित करने में विफल रहे।

बता दें कि पिछले दिनों 46 वर्षीय अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की मिनिपोलिस में पुलिस अधिकारी के हाथों मौत हो गई। कथित तौर मिनिपोलिस में पुलिस अधिकारी ने फ्लॉयड की गर्दन पर लगभग 9 मिनट तक अपना घुटना रखा। जॉर्ज फ्लॉयड इस दौरान घुटना हटाने की गुहार लगाता रहा। उसने यह भी कहा कि वह साँस नहीं ले पा रहा है। लेकिन पुलिस अधिकारी नहीं पिघला और फ्लॉयड की मौत हो गई। इसके बाद लोगों का गुस्सा पुलिस के प्रति भड़क गया और हिंसक रुप ले लिया।

शनिवार को यह विरोध प्रदर्शन पूरे देश में फैल गया। जिसके कारण कई शहरों में कर्फ्यू लगा दिया गया। फिलाडेल्फिया में प्रदर्शनकारियों ने मियामी में राजमार्ग यातायात को बंद करने के दौरान एक मूर्ति को गिराने की कोशिश भी की।

हिंसा और दंगे के दौरान ANTIFA से जुड़े वामपंथियों और दंगाइयों ने एक बेघर इंसान के पास जो भी था, उसे जला दिया। इसका वीडियो भी सामने आया था, जिसमें आप देख सकते है कि किस तरह दंगाइयों ने बेघर इंसान के गद्दे को आग में डाल दिया जिसके बाद लाचार और बेबस गद्दे का मालिक राख में बदलती अपनी चीजों को किसी तरह बचाने की असहाय कोशिश करता है। वीडियो में सुना जा सकता है कि वह आदमी अपने सामानों को जलता हुआ देख किस तरह चिल्लाते हुए कह रहा है – “मैं यहाँ रहता हूँ।” दंगे को दौरान ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ के नारे भी लगाए गए।

देश विरोधी इस्लामी संगठन PFI को BMC ने दी बड़ी जिम्मेदारी, फडणवीस ने CM उद्धव से पूछा- क्या आप सहमत हो?

शिवसेना शासित बृहन्मुम्बई महानगरपालिका (BMC) ने आतंकी संगठन ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI)’ को मान्यता दी है। पूर्व-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने BMC द्वारा PFI को मान्यता देने पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को निशाने पर लिया है। फडणवीस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वो इस फ़ैसले से अचंभित हैं। उन्होंने कहा कि PFI को देश और समाज विरोधी गतिविधियों के लिए जाना जाता है। उसे मजहब विशेष के मृत कोरोना मरीजों के शवों को दफनाने की जिम्मेदारी दे दी गई है।

फडणवीस ने इससे सम्बंधित दस्तावेज शेयर करते हुए उद्धव से पूछा कि क्या वो इससे सहमत हैं? उन्होंने पूछा कि अगर मुख्यमंत्री इससे सहमत नहीं हैं तो क्या वो इस मामले में एक्शन लेंगे? साथ ही उन्होंने कुछ ख़बरों को शेयर करके बताया कि PFI कैसा संगठन है और BMC द्वारा इसे मान्यता देना क्यों ग़लत है। दरअसल, ये सब एक पत्र को लेकर शुरू हुआ जो BMC ने मजहब विशेष के मृत शरीर को दफनाने को लेकर जारी किया है।

इस पत्र में सभी अस्पतालों के इंचार्जों को निर्देश दिया है कि अगर समुदाय विशेष के किसी मरीज की कोरोना की वजह से मौत होती है तो वो ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ (PFI) के उन पदाधिकारियों से संपर्क करेंगे, जिनकी सूची BMC ने जारी की है। BMC ने अपने निर्देश में PFI के 4 नेताओं के नाम जारी किए हैं- सईद चौधरी, इक़बाल ख़ान, सईद अहमद और सादिक़ कुरैशी। साथ ही इन सभी का मोबाइल नंबर भी पत्र में उपलब्ध कराया गया है।

दूसरे मजहब के कोरोना मरीजों की मौत होने के बाद उन्हें दफनाने के लिए BMC ने PFI की स्पेशल टास्क फोर्स को लगाया है। यानी, एक तरह से BMC ने इस तरह की एक बड़ी जिम्मेदारी उस PFI के कंधे पर डाल दी है, जिस पर दिल्ली दंगो सहित, CAA विरोधी दंगो जैसे तरह-तरह के आरोप लगते रहे हैं।

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों को लेकर दिल्ली पुलिस कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों जैसे पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI), जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी (JCC) पिंजरा तोड़ और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़ी ‘स्टूडेंट एक्टिविस्ट्स’ की भी भूमिका थी। दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा इस मामले के संबंध में गिरफ्तार किए गए 9 लोगों के व्हाट्सएप चैट, भाषणों और कथित तौर पर पीएफआई और विदेशों से प्राप्त धन की जाँच की थी।

दो PFI कार्यकर्ताओं को कोरोना वायरस के संबंध में देश में प्रधानमंत्री व गृहमंत्री के ख़िलाफ़ नफरत भरे मैसेज फैलाने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था।

दिल्ली BJP के अध्यक्ष पद से हटाए गए मनोज तिवारी, पार्टी ने आदेश गुप्ता को सौंपी कमान

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने सांसद मनोज तिवारी को हटाकर आदेश गुप्ता को दिल्ली का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है। मनोज तिवारी को पद से क्यों हटाया गया इसके पीछे की वजह फिलहाल साफ नहीं है। मगर बताया जा रहा है। मनोज तिवारी का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा था जिसके चलते यह फैसला लिया गया है।

पार्टी की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि आदेश कुमार गुप्ता को दिल्ली बीजेपी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू होगी। आदेश गुप्ता उत्तरी दिल्ली नगर निगम का महापौर रहे हैं। वर्तमान में वे पटेल नगर से पार्षद हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह द्वारा जारी किया गया पत्र

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक मंगलवार (जून 2, 2020) को पार्टी संगठन में दो महत्वपूर्ण फेरबदल किए गए हैं। दिल्ली और छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्षों में बदलाव किया गया है। दिल्ली में जहाँ मनोज तिवारी को हटाकर आदेश कुमार गुप्ता को नई जिम्मेदारी दी गई है, वहीं छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय को अध्यक्ष पद की कमान सौंपी गई है।

मनोज तिवारी ने नए दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष आदेश गुप्ता को बधाई देते हुए ट्विटर पर लिखा, “दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के रूप में इस 3.6 साल के कार्यकाल में जो प्यार और सहयोग मिला, उसके लिए सभी कार्यकर्ता, पदाधिकारी, व दिल्लीवासियों का सदैव आभारी रहूँगा। जाने अनजाने कोई त्रुटि हुई हो तो क्षमा करना। नए प्रदेश अध्यक्ष भाई आदेश गुप्ता को असंख्य बधाइयाँ।”

आदेश कुमार गुप्ता की पहचान जमीनी नेता के रूप में होती है। माना जा रहा है कि बीजेपी ने यह चेहरा व्यापारी वर्ग को खुश करने के लिए आगे किया है। मनोज तिवारी को हटाकर बीजेपी ने जमीनी और दिल्ली से जुड़े नेता को अध्यक्ष बनाया है, जिसकी माँग काफी वक्त से चल रही थी। आदेश गुप्ता एक वक्त में ट्यूशन पढ़ाकर अपना घर चलाते थे। ऐसी अटलें हैं कि आदेश गुप्ता को दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपने के बाद बीजेपी अब अपना पूरा फोकस एमसीडी चुनाव पर करने वाली है।

गौरतलब है कि मनोज तिवारी को पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ सोमवार (जून 1, 2020) को लॉकडाउन के नियम का उल्लंघन करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। वे दिल्ली में कोविड-19 को नियंत्रित करने में अरविंद केजरीवाल सरकार की नाकामी के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए राजघाट पर जमा हुए थे। इससे पहले भी मनोज तिवारी पर लॉकडाउन तोड़ने के आरोप लगे थे।