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अब नहीं ढकी जाएगी ‘भारत माता’, हिन्दुओं के विरोध से झुका प्रशासन: मिशनरियों ने किया था प्रतिमा का विरोध

तमिलनाडु के कन्याकुमारी में भारत माता की प्रतिमा को लेकर विवाद खड़ा हो गया था, जिसके बाद उसे ढक दिया गया था। जिला प्रशासन की इस कार्रवाई से लोगों में रोष व्याप्त हो गया था। पूर्व सांसद और भाजपा नेता तरुण विजय ने जानकारी दी है कि अब भारत माता की प्रतिमा पर से कवर हटा दिया गया है, और इस तरह से हिन्दुओं की जीत हुई है। उन्होंने बताया कि कन्याकुमारी के कलक्टर ने प्रतिमा के कवर को हटाने का आदेश दिया है।

उन्होंने जानकारी दी कि भारत माता के लिए लड़े जा रहे युद्ध को हमने जीत लिया है। रविवार (मई 24, 2020) देर रात ही कलक्टर ने आदेश दिया कि भारत माता की प्रतिमा को पहले की तरह यथावत रखा जाए। सोमवार को सुबह 10 बजे इस आदेश के आलोक में कार्यक्रम भी आयोजित किया गया है। साथ ही ‘भारत माता पूजन’ का भी कार्यक्रम किया जाएगा। तरुण विजय ने पुलिस से क़ानून तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की।

सोशल मीडिया में लोगों ने इस आदेश का जश्न मनाते हुए कहा कि अगर जनता ठान ले तो कुछ भी असंभव नहीं है, बस एक होकर आवाज़ उठाने की देरी है। बता दें कि ये वाकया इस्साकि अम्मान मंदिर का है, जहाँ कुछ मिशनरियों के दबाव में आकर जिला प्रशासन द्वारा भारत माता की प्रतिमा ढकने की बात कही जा रही थी। चेन्नई में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए ‘इंदु मक्कल कच्ची’ ने भारत माता की तस्वीरों का वितरण किया।

संस्था के अध्यक्ष अर्जुन सम्पत ने कहा कि भारत माता सम्पूर्ण देशवासियों की माँ है। उन्होंने ईसाईयों पर राष्ट्रहित के मुद्दों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से भाजपा नेताओं सहित कई संस्थाओं ने अपील की थी, जिसके बाद इसे अनकवर करने का फ़ैसला लिया गया। उस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि वो 200 वर्ष पुराना है। वो ज़मीन एक प्राइवेट प्रॉपर्टी है और वहाँ तिरंगे की साड़ी में लिपटी भारत माँ की प्रतिमा स्थापित की गई थी।

बता दें कि हाल ही में जब अभिनेता अक्षय कुमार ने पीएम केयर्स फंड में 25 करोड़ रुपए की धनराशि दान की थी, तब उन्होंने कहा था कि ये उनकी माँ की तरफ़ से भारत माता के लिए हैं, जिन्होंने उन्हें इतना कुछ दिया है। इसी वर्ष मार्च में जम्मू कश्मीर के सिटी चौक का नाम बदल कर ‘भारत माता चौक’ कर दिया गया था। हालाँकि, लिबरल गैंग ‘भारत माता की जय’ बोलने वालों को गुंडा तक भी कहता रहा है।

‘CM ढोंगी ने बलात्कारी को रिहा करा दिया’: अलका लाम्बा ने फैलाई फर्जी ख़बर, कुलदीप सेंगर की बेटी ने कराई FIR

अलका लाम्बा और विवादों का पुराना नाता रहा है। वो अक्सर उल-जलूल बयान देकर सुर्ख़ियों में बनी रहती हैं। अब जेल में बंद पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर की बेटी ने कॉन्ग्रेस नेता अलका लाम्बा के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।

कुलदीप सेंगर फिलहाल उन्नाव रेप केस मामले में सज़ा काट रहे हैं। उनकी बेटी ऐश्वर्या ने अलका लाम्बा के उन्नाव पुलिस के समक्ष खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।

अलका लाम्बा पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से एक भ्रामक ट्वीट किया। उनकी देखादेखी एक अन्य व्यक्ति ने भी इसी तरह का ट्वीट किया। अलका लाम्बा ने कुलदीप सेंगर के रिहा होने की झूठी ख़बर पर प्रतिक्रिया दी थी।

उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए ‘ढोंगी’ शब्द का प्रयोग किया और कहा कि जिन बलात्कारियों पर उनका, साक्षी महाराज का अमित शाह और पीएम मोदी का आशीर्वाद हो, उन्हें रिहा होने से कोई नहीं रोक सकता है।

अलका लाम्बा ने लिखा था कि बलात्कारियों को कोई भी अदालत ज्यादा दिन तक सलाखों के पीछे नहीं रख सकती, अगर उन पर भाजपा नेताओं का हाथ हो। इसके बाद उन्होंने न्यायपालिका को भला-बुरा कहते हुए लिखा कि हाईकोर्ट के जज ने ये फ़ैसला देकर बस अपनी जान बचाई है।

साथ ही अलका लाम्बा ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को ‘बलात्कारी नेता की रिहाई की मुबारकबाद’ दी। अलका लाम्बा ने जिसकी ट्वीट को आधार बना कर ये बातें कहीं, उसने अपना ट्वीट डिलीट कर लिया।

लेकिन, अलका लाम्बा ने न तो ट्वीट डिलीट किया और न ही इस पर किसी प्रकार की माफ़ी माँगी। कुलदीप सेंगर को हाईकोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने की ख़बर फर्जी थी, जिसे अलका लाम्बा ने आगे बढ़ाया।

ऐश्वर्या ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि हाईकोर्ट में उनके पिता की अपील पर 1 जून को सुनवाई होगी लेकिन उससे पहले ही जानबूझ कर भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा कर के मीडिया और अदालत पर दबाव बनाया जा रहा है। जमानत याचिका डाली ही नहीं गई है।

इस ट्वीट को आईटी एक्ट का उल्लंघन करने के साथ-साथ सेंगर परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप भी ऐश्वर्या ने लगाया है। ऐश्वर्या ने इसे मानहानि और आपराधिक कृत्य करार दिया। उन्होंने एसपी विक्रांतवीर को शिकायत पत्र सौंपा था, जिसके आधार पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है। अलका लाम्बा के अलावा कॉन्ग्रेस नेता धरणा पटेल ने भी कुछ इसी तरह का ट्वीट कर के भ्रम फैलाया।

इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता अलका लाम्बा ने कहा था कि अगर कॉन्ग्रेस ने 2002 में ही ‘दोनों को नाप दिया होता’ तो आज भारत को ये दिन नहीं देखने पड़ते। लोगों ने कहा था कि वो पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की बात कर रही हैं। बता दें कि 2002 की बात कर वे गुजरात दंगों का जिक्र कर रही थीं।

स्वतंत्र भारत का पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक दिलाने वाले बलबीर सिंह सीनियर का निधन

भारतीय हॉकी टीम को तीन गोल्ड मेडल जिताने वाले हॉकी के दिग्गज बलबीर सिंह सीनियर का चंडीगढ़ में सोमवार (25 मई, 2020) सुबह निधन हो गया। वे 95 वर्ष के थे। बलबीर पिछले दो साल से फेफड़े की बीमारी से जूझ रहे थे।

बलबीर सिंह ने 1948 में लंदन ओलंपिक में अर्जेंटीना के खिलाफ डेब्यू किया था। उन्होंने ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ फाइनल मैच में दो गोल किए थे, जिसमें स्वतंत्र भारत का पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक दर्ज किया गया था। साथ ही 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में भारत को स्वर्ण पदक जीतने में अहम भूमिका निभाई थी।

उन्हें 1956 मेलबर्न ओलंपिक में भारत का कप्तान नियुक्त किया गया था, जहाँ उन्होंने उद्घाटन समारोह में भारत का झंडा बुलंद किया था। 1957 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया, यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय हॉकी खिलाड़ी थे।

नई दिल्ली में आयोजित 1982 के एशियाई खेलों में मशाल भी बलबीर सिंह ने जलाई थी। देश के महानतम एथलीटों में से एक बलबीर सीनियर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति द्वारा चुने गए आधुनिक ओलिंपिक इतिहास के 16 महानतम ओलंपियनों में शामिल थे। हेलसिंकी ओलिंपिक में नेदरलैंड्स के खिलाफ 6-1 से मिली जीत में उन्होंने पाँच गोल किए थे और यह रिकॉर्ड अभी भी बरकरार है।

इस महीने की शुरुआत में कार्डियक अरेस्ट से पीड़ित होने के बाद उन्हें मोहाली के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ उनका इलाज चल रहा था। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें ब्रोन्कियल निमोनिया और तेज बुखार के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसके बाद वह 12 मई से वेंटिलेटर पर थे। इसका असर उनके विभिन्न अंगों पर भी पड़ रहा था। उन्होंने सुबह 6:17 बजे अंतिम साँस ली।

कुरैशी मुहल्ला में प्रतिबंधित माँस को लेकर गोलीबारी, हिंदपीढ़ी में 1.8 क्विंटल बीफ: 6 गिरफ्तार, राँची में छापेमारी

कोरोना संकट के बीच छिप-छिपाकर प्रतिबंधित माँस बेचने का कारोबार जारी है। ऐसे में झारखंड की राजधानी राँची से दो मामले सामने आए हैं। एक डोरंडा इलाके के कुरैशी मुहल्ले का है और दूसरा हिंदपीढ़ी इलाके के कंटेंटनमेंट जोन मंगल चौक के पास का है।

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, एक ओर जहाँ डोरंडा के कुरैशी इलाके में प्रतिबंधित माँस बेचने के कारण गोलबारी की घटना सामने आई है। वहीं दूसरी ओर मंगल चौक के पास पुलिस ने 6 लोगों को 1.80 क्विंटल बीफ के साथ गिरफ्तार किया है।

जानकारी के अनुसार, डोरंडा के कुरैशी नगर में रविवार (मई 24, 2020) की रात प्रतिबंधित माँस बेचने की खबर का पता लगने के बाद विवाद बढ़ा और दो पक्षों में झड़प हो गई।

इस बीच एक व्यक्ति ने पिस्टल निकालकर गोली चला दी, जो फैजल नाम के युवक के गर्दन पर जा लगी और जिसके कारण वह गंभीर रूप से घायल हो गया। फैजल की स्थिति देखते हुए उसे फौरन रिम्स में भर्ती कराया गया, जहाँ उसका इलाज जारी है।

घटना की सूचना पाते ही डोरंडा थाने की पुलिस कुरैशी मोहल्ला पहुँची और पूरे मामले की छानबीन की। खबरों की मानें तो इस मामले में, पुलिस को गोली चलाने वाले युवक का पता चल चुका है, अब उसकी तलाश में छापेमारी की जा रही है।

हिंदपीढ़ी इलाके में 6 खुराफाती गिरफ्तार

दूसरी ओर, हिंदपीढ़ी इलाके के कंटेंटमेंट जोन मंगल चौक के पास जहाँ केवल आवश्यक खाद्य वस्तुओं को घरों तक ले जाने की इजाजत दी गई है। वहाँ से खबर है कि वहाँ कुछ लोग सब्जी बेचने की आड़ में ऑटो से बीफ बेचने जा रहे थे।

मगर, इलाके में जगह-जगह तैनात पुलिस को उनकी हरकतें देखकर उन पर शक हुआ और जब जाँच की गई तो बाँस की टोकरी में रखी गई सब्जी के नीचे से प्लास्टिक में बीफ निकला। जिसे देखते हुए पुलिस ने इन्हें धर दबोचा।

आगे की पड़ताल में पुलिस को इनके पास से 1.80 क्विंटल बीफ बरामद हुआ। जिसके बाद 6 आरोपितों को पकड़कर जेल भेज दिया गया।

सभी आरोपितों की पहचान मो शोएब, मो शाहिद, मो साजिद हसन, मो दानिश व मो मुश्ताक तथा मो फैजान के रूप में हुई। इनके ख़िलाफ़ इस मामले में हिंदपीढ़ी थाना में मंगल चौक पर प्रतिनियुक्त मजिस्ट्रेट राम प्रकाश साहू ने प्राथमिकी दर्ज कराई है।

दैनिक जागरण की खबर के अनुसार, हिंदपीढ़ी थाना प्रभारी ज्ञानरंजन सिंह ने बताया कोरोना कंटेनमेंट जोन में आवश्यक खाद्य पदार्थ राशन सब्जी व अन्य सामान लाने की इजाजत दी गई है। इसके आड़ में कुछ प्रतिबंधित माँस के तस्कर प्रतिबंधित माँस पार करने की फिराक में रहते हैं, ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

‘दोबारा कहूँगा, राजीव गाँधी हत्यारा था’ – छत्तीसगढ़ में दर्ज FIR के बाद भी तजिंदर बग्गा ने झुकने से किया इनकार

कुछ दिनों पहले भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने विपक्ष शासित राज्यों में अभिव्यक्ति की आज़ादी पर लगातार हो रह हमले पर चिंता जताई थी। अब छत्तीसगढ़ में दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा के ख़िलाफ़ एफआईआर हुई है। तजिंदर बग्गा ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी को सिखों का हत्यारा बताया था। राजीव गाँधी के खिलाफ उनकी इस टिप्पणी के लिए कॉन्ग्रेस शासित छत्तीसगढ़ के काँकेर में एफआईआर दर्ज कराई गई।

कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया कि बग्गा ने राजीव गाँधी पर अपमानजनक टिप्पणी की है और साथ हुई सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास किया है। काँकेर यूथ कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पंकज वाधवानी ने तजिंदर बग्गा के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराया। इसकी सूचना ‘यूथ कॉन्ग्रेस’ ने सोशल मीडिया के माध्यम से दी। कॉन्ग्रेस ने साथ ही उन्हें ‘नफरत का वायरस’ करार दिया और कहा कि ऐसे किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

तजिंदर बग्गा ने कॉन्ग्रेस की इस घुड़की से डरने से इनकार कर दिया और स्पष्ट कहा कि वो अपने बयान पर कायम हैं। उन्होंने लिखा, “राजीव गाँधी एक हत्यारा थे। मैं ये बात दोबारा कह रहा हूँ।” दरअसल, ये सब शुरू हुआ भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा के एक ट्वीट से, जिसमें राजीव गाँधी को 3000 मौतों के लिए जिम्मेदार बताया गया था। तजिंदर बग्गा ने कहा कि वो संबित की इस बात से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते हैं क्योंकि राजीव गाँधी ने 3000 नहीं बल्कि 5000 लोगों को मरवाया।

बाद में संबित पात्रा ने भी तजिंदर बग्गा की इस बात को स्वीकार किया। दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधन कमिटी के अध्यक्ष मजिंदर सिंह सिरसा का भी समर्थन बग्गा को मिला। वाधवानी ने अपनी शिकायत में लिखा है कि बग्गा का बयान विभिन्न वर्गों के बीच शत्रुता को बढ़ाने वाला है और देश में अशांति पैदा करने वाला है। तजिंदर बग्गा ने 1984 में हुए सिख नरसंहार की पीड़ा को याद करते हुए राजीव गाँधी के लिए उक्त बातें कही थीं।

अब उन्होंने अपनी ट्विटर का प्रोफाइल पिक्चर भी बदल दिया है। उन्होंने दिल्ली में अगस्त 2018 में एक होर्डिंग लगवाया था, जिसमें राजीव गाँधी को ‘मॉब लिंचिंग का जनक’ बताया गया था। उन्होंने उसी होर्डिंग की तस्वीर को अपना ट्विटर प्रोफाइल पिक्चर लगाया है और कहा है कि वो सच बोलने से पीछे नहीं हटेंगे। सोशल मीडिया पर उन्हें विभिन्न तबके के लोगों ने समर्थन दिया और उनके समर्थन में टॉप ट्रेंड कराया।

बता दें कि तजिंदर बग्गा हरि नगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याशी रह चुके हैं। हारने के बावजूद उन्होंने अपने घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करने का संकल्प लिया था। जहाँ क्षेत्र के वर्तमान विधायक से लोग निराश हैं, बग्गा कोरोना वायरस लॉकडाउन के बीच उनकी मदद कर रहे हैं। देश के विभिन्न इलाक़ों में लोगों तक राशन पहुँचाने के लिए उन्होंने दिन-रात एक कर दिया। इससे उनकी ख़ूब वाहवाही हुई है। उन्होंने दिल्ली दंगा के पीड़ितों की भी मदद के लिए रुपए जुटाए थे।

महाराष्ट्र के पूर्व CM और ठाकरे सरकार के मंत्री अशोक चव्हाण कोरोना पॉजिटिव, राज्य के दूसरे मंत्री वायरस के शिकार

महाराष्ट्र में आए दिन कोरोना पॉजिटिव के मामले तेज़ी से बढ़ते नज़र आ रहें है। अब महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के मंत्रिमंडल में पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर, अशोक चव्हाण 24 मई 2020 यानी रविवार को कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, ड्राइवर के संपर्क में आने से उनमें संक्रमण फैला है। पूर्व मुख्यमंत्री चव्हाण अक्सर मुंबई और मराठवाड़ा के बीच लगातार यात्रा करते रहे। टेस्ट पॉजिटिव मिलने के फौरन बाद उन्‍हें इलाज के लिए नांदेड से मुंबई लाया गया है।

अशोक चव्हाण के कोरोना वायरस से पॉजिटिव होने पर कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुन मोढवाडिया ने ट्वीट कर उनके स्वस्थ होने की कामना की है।

उद्धव सरकार के ये दूसरे मंत्री हैं, जो कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इससे पहले मंत्री जितेंद्र अव्हाड़ कोरोना संक्रमित पाए गए थे और उनके साथ 14 निजी स्टाफ भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे।

बता दें कि कोरोना वायरस के लक्षणों के बारे में जानने के बावजूद महाराष्ट्र के हाउसिंग मंत्री और एनसीपी नेता जितेंद्र आव्हाड ने इसे छिपाया था। उन्होंने ख़ुद इसका खुलासा किया है। कोरोना के शुरुआती लक्षण सामने आने के बावजूद जितेंद्र आव्हाड अपने विधानसभा क्षेत्र मुम्ब्रा में फ़ूड डिस्ट्रीब्यूशन प्रोग्राम में हिस्सा लेते रहे। जितेन्द्र आव्हाड ने बताया कि उन्होंने सोचा था कि उन्हें कुछ नहीं होगा। उन्होंने एक बड़ी भीड़ जुटा कर फ़ूड पैकेट्स बाँटना जारी रखा था। अब उन्होंने कहा कि उन्हें इसका पछतावा है और ऐसा नहीं करना चाहिए था।

दरअसल आव्हाड एक पुलिस अधिकारी के संपर्क में आए थे, जो बाद में कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इस अधिकारी ने मुंब्रा क्षेत्र में तबलीगी जमात के सदस्यों को पकड़ने के लिए एक अभियान चलाया था। इसके तहत 13 बांग्लादेशी और 8 मलेशियाई नागरिकों को पकड़ा गया था।

इतना ही नहीं पुलिस अधिकारी के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद मुंब्रा पुलिस स्टेशन के 90 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों को होम क्वारंटाइन किया गया था।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण की वजह से महाराष्ट्र की हालात काफ़ी खराब है। रविवार (24 मई, 2020) को महाराष्ट्र में कोरोना के मरीजों की संख्या 50 हजार के पार पहुँच गई। राज्य में कुल संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 50,231 तक पहुँच गई। वहीं मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 1635 हो गया है।

पिंजरा तोड़ की दोनों सदस्य जमानत पर बाहर आईं, दिल्ली पुलिस ने फिर कर लिया गिरफ्तार: इस बार हत्या का है मामला

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों को भड़काने के आरोप में पिंजरा तोड़ संगठन की 2 सदस्य देवांगना कालिता और नताशा नरवाल को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने फिर गिरफ्तार कर लिया है।

ये गिरफ्तारी उन्हें रविवार (मई 24, 2020) को बेल मिलने के कुछ देर बाद दोबारा हुई। अब उन्हें 2 दिन की हिरासत में लिया गया है। इस संबंध में जफर अब्बास ने ट्वीट करके जानकारी दी है। रविवार को हुई दोनों महिलाओं की गिरफ्तारी किसी हत्या से संबंधित है।

इससे पहले इनके ख़िलाफ़ पुलिस ने आईपीसी की धारा 147, 149, 353, 283, 323,332, 307, 302, 427, 120-b, 188 के तहत मामला दर्ज किया था।

क्राइम ब्रांच की स्पेशल इनवेंस्टिगेशन टीम ने दोनों महिलाओं को हत्या, हत्या के प्रयास, दंगे और आपराधिक साजिश के आरोपों के तहत गिरफ्तार किया था।

पुलिस टीम ने इनकी गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के लिए कोर्ट से 14 दिनों की पुलिस हिरासत की माँग की थी। मगर, कोर्ट ने हर पक्ष की दलीलें सुनते हुए दोनों महिला सदस्यों को 2 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले पिंजरा तोड़ की दोनों महिला सदस्यों को शनिवार को गिरफ्तार किया गया था। इन पर आरोप था कि इन्होंने 22 फरवरी की शाम को नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए स्थानीय निवासियों को भड़काया और उन्हें जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर इकट्ठा होने के लिए कहा।

लेकिन, रविवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट अजीत नारायण ने यह कहते हुए उन्हें बेल दे दी कि केस फाइल और एफआईआर देखने के बाद यह लगता है कि धारा 353 मेंटेनेबल नहीं लगती है।

उन्होंने कहा कि केस के फैक्ट्स बताते हैं कि आरोपित केवल सीएए और एनआरसी का विरोध कर रही थीं और वे किसी भी हिंसा में शामिल नहीं थीं। आरोपितों की समाज में अच्छी पकड़ है और वे काफी पढ़ी-लिखी भी हैं। वे पुलिस के साथ जाँच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं।

बता दें कि कुछ प्रबुद्ध सामाजिक वर्ग के लोगों और ‘पिंजरा तोड़’ जैसे कथित सामाजिक संगठनों के कारण दिल्ली यमुना के आसपास रहने वाले लोग ख़ासी परेशानी में थे। वहाँ के सभी स्थानीय लोग पीड़ित और दुःखी महसूस कर रहे थे। चारों तरफ़ भगदड़ का माहौल था। ये संगठन और कथित प्रबुद्ध जन प्रतिदिन हिंसा भड़काने के काम में लगे रहते थे और उन्होंने ही जाफराबाद मेन रोड को ही जाम करवा दिया था। जिससे राहगीरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

दरियागंज दिल्ली गेट पर इसी ‘पिंजरा तोड़’ के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने पुलिस के साथ झड़प की थी लेकिन इनमें से किसी एक को भी गिरफ़्तार नहीं किया गया था। वो सभी हिंसक हरकतें कर के भाग खड़े हुए थे। फँस गए स्थानीय लोग। स्थानीय लोगों में से कई आज भी पुलिस केस और अदालती कार्रवाइयों का सामना कर रहे हैं।

जिन लोगों ने राम को भुलाया, आज वे न घर के हैं और न घाट के: मीडिया संग वेबिनार में CM योगी

देश में जारी लॉकडाउन के बीच उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने रविवार (24 मई, 2020) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान राम मंदिर को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में योगी ने कहा कि हमारे लिए राम और रोटी दोनों महत्वपूर्ण हैं। जिन लोगों ने राम को भुलाया, आज वे न घर के हैं और न घाट के।

रविवार को ‘सजगता से सफलता’ विषय पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पत्रकारों से बात करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा एक सप्ताह में कोरोना के कारण उपजी स्थिति पर हम नियंत्रण पा लेंगे। मई माह के अंत तक स्थिति में और सुधार आ जाएगा। आज उत्तर प्रदेश की स्थित पूरे देश में दूसरे राज्यों की अपेक्षा बेहतर है।

मुख्यमंत्री ने कोरोना महामारी पर बात करते हुए कहा कि इस समय पूरा विश्व कोरोना महामारी की चपेट में है। लेकिन समय से और सही फैसलों के कारण आज भारत की स्थिति काफी सुरक्षित है। यह सब देश के सक्षम नेतृत्व के कारण संभव हो सका है।

सीएम योगी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का बहुत स्पष्ट उद्घोष रहा है कि सज्जनों के साथ शास्त्र की भाषा का प्रयोग करना और दुर्जनों के साथ शस्त्र की भाषा का प्रयोग करना चाहिए। हम इस पर ही ज्यादा विश्वास रखते हैं। जो लोग कानून का गला घोटना चाहते हैं, हम उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हैं।

शासन की योजनाएँ सभी के लिए हैं, लेकिन तुष्टिकरण किसी के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने राजनितिक लाभ के लिए अनावश्यक भत्ते दिए थे, जिन्हें हमने खत्म किया है। हमें बड़ी लड़ाई लड़नी है तो कड़े कदम उठाने ही पड़ेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक सवाल के जवाब में कहा, “हमारे लिए राम और रोटी दोनों महत्वपूर्ण हैं। राज्य सरकार ने इस कार्य को बखूबी निभाया है। जिन लोगों ने राम को भुलाया है, उनकी दशा आज सभी देख रहे हैं। वे घर के हैं न घाट के हैं।” पिछले दिनों मंदिर निर्माण के लिए समतल की जा रही जमीन के दौरान भूमि से मंदिर होने के कुछ अवशेष मिले थे।

इसे लेकर शिवसेना से राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा था कि यह समय राम मंदिर, भारत-पाकिस्तान करने का नहीं, बल्कि कोरोना महामारी के खिलाफ जंग लड़ने का है। सीएम योगी ने कहा कि अपने खून पसीने से महाराष्ट्र को सींचने वाले कामगारों को शिवसेना और कॉन्ग्रेस की सरकार से सिर्फ छलावा ही मिला। लॉकडाउन में उनसे धोखा किया, उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया और घर जाने को मजबूर किया। इस अमानवीय व्यवहार के लिए मानवता मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को कभी माफ नहीं करेगी।

सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश सरकार फेक न्यूज को लेकर बहुत सख्त है। इसको हर हाल में रोकना हमारी प्राथमिकता है। पहले नोटिस दिया जाता है और आगे की कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा कि जो लोग गरीबों को लेकर बड़े-बड़े नारे लगाते हैं, उन्हीं के कारण श्रमिकों का पलायन हुआ। इस वक्त प्रदेश में 23 लाख से अधिक कामगार आ चुके हैं।

उन्होंने कहा कि इस समय हमारी प्राथमिकता प्रवासी कामगार को स्वास्थ्य सुविधा और रोजगार देना है। इतना ही नहीं हम प्रत्येक कामगार व श्रमिक को राशन किट, राशन कार्ड और होम क्वारंटाइन के दौरान एक हजार रुपए का भरण-पोषण भत्ता भी उपलब्ध करा रहे हैं।

केजरीवाल सरकार जो बता रही उससे तीन गुना ज्यादा दिल्ली में कोरोना से मरे: MCD नेताओं ने आँकड़े छिपाने का लगाया आरोप

कोरोना वायरस के कहर से जूझती दिल्ली सरकार पर दिल्ली नगर निगम (MCD) के भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने बड़ा आरोप लगाया है। इन नेताओं ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार द्वारा घोषित किए जा रहे कोरोना वायरस के मौत के आँकड़ों और श्मशान-कब्रगाहों से मिली संख्या में ‘भारी अंतर’ है।

इसके विपरीत, दिल्ली सरकार ने आँकड़ों में हेर-फेर के लिए अस्पतालों को दोषी ठहराया था। अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि स्वास्थ्य अधिकारी समय पर सूचना नहीं देते हैं। इसको लेकर प्रदेश सरकार ने नए दिशा-निर्देश भी जारी किए।

इससे पहले कोरोना वायरस की वजह से हुई मौत को लेकर अस्पताल द्वारा दिए जा रहे आँकड़े और दिल्ली सरकार के हेल्थ बुलेटिन में काफी अंतर पाया गया था।

NMCD में स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन जयप्रकाश ने दावा किया कि इलाके में 21 मई तक कोरोना वायरस पॉजिटिव 282 लोगों का स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल के तहत या तो अंतिम संस्कार किया गया है या उन्हें दफनाया गया है। यानी उनके इलाके में अब तक 282 लोगों की मौत कोरोना वायरस के चलते हुई है।

उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस मरीजों के 270 शवों का निगम बोध में अंतिम संस्कार किया गया। 11 शवों को मंगोलपुरी के कब्रिस्तान में दफन किया गया। वहीं 1 कोरोना संक्रमित का शव रोहिणी के एक ईसाई कब्रिस्तान में लाया गया।

उन्होंने कहा, “केजरीवाल सरकार को डर है कि अगर जनता को मौत के असल आँकड़े पता चल गए तो यह उनके दावों की हवा निकाल देंगे कि दिल्ली में कोरोना वायरस के हालात नियंत्रण में हैं।”

वहीं, दक्षिण दिल्ली नगर निगम में सदन के नेता कमलजीत सहरावत ने भी दावा किया कि असलियत में मौत का आँकड़ा काफी ज्यादा है। सहरावत के अनुसार पंजाबी बाग शमशान घाट में 232 कोरोना मरीजों के शवों को लाया गया था, जबकि 68 डेड बॉडी कोरोना संदिग्धों के थे। इसके अलावा 76 शवों को ITO कब्रिस्तान में दफनाया गया और एक शव को मदनपुर खादर में दफनाने के लिए ले जाया गया।

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने नीतियों का मसौदा तैयार करने से पहले SDMC के अधिकारियों से कोई परामर्श नहीं लिया। चेयरमैन भूपेंद्र गुप्ता ने मामले की जाँच की माँग की है।

दिल्ली सरकार के ‘आधिकारिक आँकड़ों’ यानी 21 मई को जारी हेल्थ बुलेटिन के मुताबिक राजधानी में तब तक 194 लोगों की मौत कोरोना वायरस के चलते हुई थी। शनिवार (मई 23, 2020) को जारी हेल्थ बुलेटिन में यह संख्या बढ़कर 231 पहुँच गई थी।

जय प्रकाश ने आरोप लगाया कि अगर NMCD और SMCD से मिले आँकड़ों को मिला लिया जाए, तो 21 मई तक ही यह संख्या 591 पहुँच जाती है, जो कि दिल्ली सरकार द्वारा किए जा रहे मौत के आँकड़ों का तीन गुना है। आम आदमी पार्टी की सरकार अपना चेहरा बचाने के लिए मौत के आँकड़ों को कम बता रही है।

इससे पहले, एक समाचार चैनल द्वारा अपलोड किए गए एक वीडियो में स्वास्थ्य अधिकारियों को मृतक के शरीर को कोरोना वायरस प्रोटोकॉल के अनुसार दफन करते देखा गया था। दफनाने के लिए गड्ढा खोदने के लिए एक जेसीबी मशीन भी लगाई गई थी।

ग्राउंड रिपोर्टर मिलन शर्मा ने बताया था कि ITO कब्रिस्तान के रिकॉर्ड के मुताबिक वह 96वाँ शव था, जिसे वहाँ दफनाने के लिए ले जाया गया था। इस तरह कोरोना वायरस से हुई मौतों को लेकर दिल्ली सरकार के आधिकारिक आँकड़े और जमीनी हकीकत में भारी अंतर दिख रहा है।

हम सब डरे हैं, MLA झूठी शिकायत करती हैं: विष्णुदत्त विश्नोई की आत्महत्या के बाद पूरे थाने ने माँगा ट्रांसफर

राजस्थान के राजगढ़ थाने के एसएचओ विष्णुदत्त विश्नोई की आत्महत्या का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। थाने के पुलिसकर्मियों द्वारा बीकानेर रेंज के आईजी को लिखा एक पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। पत्र में डरे होने की बात कहते हुए पुलिसकर्मियों ने सामूहिक तबादले की गुहार लगाई है।

पत्र में सादुलपुर की विधायक और उनके कार्यकर्ताओं पर पुलिसकर्मियों की उच्च अधिकारियों से झूठी शिकायतें करने का आरोप लगाया गया है। कहा गया है कि इसके कारण ही हाल में थाने में तैनात कुछ लोगों को लाइन हाजिर किया गया था।

पत्र में लिखा गया है कि राजगढ़ थाने में तैनात सभी लोग डरे हुए और इस घटना से दुखी हैं। उनका मनोबल टूट गया है। इसलिए उन सभी का कहीं और सामूहिक तबादला कर दिया जाएग।

गौरतलब है कि सादुलपुर से कॉन्ग्रेस की कृष्णा पुनिया विधायक हैं। विश्ननोई सुसाइड केस में उन पर लगातार उँगली उठ रही है। हालॉंकि उन्होंने इसके लिए बीजेपी की ओछी राजनीति को जिम्मेदार बताया है। पूनिया ने उन्होंने विश्नोई की कॉल डिटेल निकाल पूरे मामले की जॉंच की मॉंग की है।

विश्नोई चुरू जिले के राजगढ़ थाना प्रभारी थे। शनिवार की सुबह अपने सरकारी क्वार्टर में फंदे से लटके मिले थे। कहते हैं कि उनकी पोस्टिंग पब्लिक डिमांड पर होती थी। जब किसी इलाके में अपराध बेकाबू हो जाता था तो विश्नोई को वहॉं भेजा जाता था। जाहिर है ऐसे अधिकारी की आत्महत्या की खबर से हर किसी को हैरान होना था और वे हुए भी।

विश्नोई दो सुसाइड नोट छोड़कर गए हैं। इनमें से एक में अपने जिले की एसपी तेजस्विनी गौतम को उन्होंने लिखा है, “आदरणीय मैडम। माफ करना। प्लीज, मेरे चारों तरफ इतना प्रेशर बना दिया गया कि मैं तनाव नहीं झेल पाया। मैंने अंतिम साँस तक मेरा सर्वोत्तम देने का राजस्थान पुलिस को प्रयास किया। निवेदन है कि किसी को परेशान नहीं किया जाए। मैं बुजदिल नहीं था। बस तनाव नहीं झेल पाया। मेरा गुनहगार मैं स्वयं हूँ।”

दूसरा सुसाइड नोट उन्होंने अपने माता-पिता के नाम से लिखा था। इसमें लिखा है, “आदरणीय मॉं-पापा। मैं आपका गुनाहगार हूँ। इस उम्र में दुख देकर जा रहा हूॅं। उमेश, मन्कू और लक्की मेरे पास कोई शब्द नहीं है। आपको बीच मझधार में छोड़कर जा रहा हूँ। पता है ये कायरों का काम है। बहुत कोशिश की खुद को सॅंभालने की, पर शायद गुरु महाराज ने इतनी सॉंस दी थी। उमेश दोनों बच्चों के लिए मेरा सपना पूरा करना। संदीप भाई पूरे परिवार को सॅंभाल लेना प्लीज। मैं खुद गुनाहगार हूॅं। आप सबका विष्णु।”

यही नहीं फंदे पर लटके पाए जाने से एक दिन पहले विश्नोई ने एक परिचित के साथ व्हाट्सएप पर चैटिंग की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें गंदे पॉलिटिक्स में फॅंसाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन करने की बात भी कही थी।

वायरल हो रही विश्नोई की व्हाट्सएप चैटिंग

विश्नोई की आत्महत्या मामले में लॉरेंस गैंग का नाम सामने आ रहा है। कहा जा रहा है कि विश्नोई जिस मर्डर केस की तहकीकात में जुटे थे उसके तार इसी गैंग से जुड़े थे। इसी जॉंच के सिलसिले में वे आत्महत्या से पहले रात के तीन बजे थाने भी गए थे।

पोस्टमार्टम के बाद विश्नोई का शव रविवार को श्रीगंगानगर जिले स्थित उनके पैतृक गॉंव ले जाया गया। भारत माता की जय और विष्णुदत्त अमर रहे, जैसे नारों के बीच उनका अंतिम संस्कार हुआ। गहलोत सरकार ने मामले की जॉंच सीआईडी (क्राइम ब्रांच) के एसपी विकास शर्मा को सौंपी। बावजूद इसके सीबीआई जॉंच की मॉंग उठ रही है।