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RSS के ‘सेवा विभाग’ में सेवारत 4.79 लाख कार्यकर्ताओं ने अब तक तैयार किए 7 करोड़ भोजन पैकेट, 1.10 करोड़ को दिया राशन

देश में लगातार बढ़ते कोरोना मरीजों की संख्या की रोकथाम के लिए पूरे देश में लॉकडाउन जारी है, इसी बीच विभिन्न समस्याओं के जूझ रहे देशवासियों की सेवा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) दिन-रात लगा हुआ है। लॉकडाउन के बीच देश भर में चलाए जा रहे सेवा कार्यों के आँकड़े एक बार फिर संघ द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किए गए हैं।

RSS के प्रमुख विभागों में से एक प्रचार विभाग द्वारा चलाए जा रहे ‘प्रेरणा’ केन्द्र की ओर से सोशल मीडिया पर संघ के कार्यों को लेकर कुछ प्रमुख आँकड़ें पेश किए गए हैं। संघ कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए सेवा कार्यों के यह आँकड़े 20 मई, 2020 तक हैं।

शेयर किए गए आँकड़ों के मुताबिक संघ की प्रेरणा से चलने वाले सेवा विभाग के 4,79,949 कार्यकर्ताओं ने पूरे देश में 85,701 स्थानों पर विभिन्न प्रकार से सेवा के कार्य किए हैं, जिन्होंने 27,98,091 प्रवासी मजदूरों को सीधे सहायता पहुँचाई है।

लॉकडाउन के बीच लगाए गए रक्तदान शिविरों के माध्यम से इन लाखों सेवारत कार्यकर्ताओं ने 39,851 यूनिट रक्त दान किया है। महामारी के बीच खाद्य सामग्री के संकट से जूझ रहे 1,10,55,450 जरूरतमंदों को राशन की किट वितरित की गई हैं। 62,81,117 मास्क वितरित किए गए हैं।

साथ ही इस दौरान लोगों को संघ कार्यकर्ताओं द्वारा कोरोना से बचने के उपाय भी बताए गए हैं। राशन वितरण के साथ ही पूरा भारत में 7,11,46,500 भोजन के पैकेट वितरित किए गए हैं। इतना ही नहीं 1,31,443 लोगों को अस्थाई निवास में रोका गया है।

वहीं आँकड़ों के मुताबिक सेवा विभाग द्वारा 1,36,867 घुमन्तु लोगों की सहायता की गई है। इस बीच 13,30,330 अन्य प्रांतों के लोगों को भी सहायता पहुँचाई गई है।

आपको बता दें कि देश में जारी लॉकडाउन के समय से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक और दायित्ववान कार्यकर्ता सेवा विभाग के माध्यम से विभिन्न सेवा कार्यों में लगे हुए हैं। इससे पहले पश्चिम बंगाल में आए चक्रवाती तूफान अम्फान के तबाही मचाने के बाद संघ के कार्यकर्ता सेवा करते हुए और संघ की गणवेश में रास्तों से मलबा हटाते हुए देखे गए थे। ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं।

इससे पहले मुंबई में फँसे बांग्लादेशियों की मदद करने से पुलिस ने इंकार कर दिया था। इस बीच उन लोगों की सहायता RSS के कार्यकर्ताओं ने की थी। इसे लेकर पश्चिम बंगाल के एक एनजीओ ने RSS की तारीफ की है।

इतना ही नहीं इससे पहले भी ‘सेवा भारती’ द्वारा लगातार जरूरतमंदों की की जा रही मदद को लेकर भारतीय कप्तान विराट कोहली ने सेवा भारती के कदमों की सराहना की थी।

इसका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वो कोरोना वायरस महामारी के बीच दिल्ली और देश भर में संकट में फँसे लोगों की मदद करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संगठन ‘सेवा भारती’ के प्रयासों की तारीफ करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

व्यंग्य: रामायण काल के फेकन्यूज और धोबीकुमार की खोज में निकले हनुमान को क्या मिला?

राजनीति में 300 पृष्ठों के भ्रष्टाचार के प्रमाणों के साथ युगपुरुष प्रकट हुए तो उनके साथ क्रन्तिकारी पत्रकारों का समूह जुटा जिन्होंने मिथ्या समाचार को राजनैतिक समझ का स्थान दिया और ‘ईज़ इट ट्रू’ के फुँदने का उपयोग करके राजनैतिक आरोप लगाने की। युगपुरुष के सिंहासन पर आरूढ़ होने के साथ ही इन क्रन्तिकारी पत्रकारों की उपयोगिता उसी प्रकार समाप्त हो गई जैसी विवाहोपरांत शेरवानी की होती है। जैसे लौट के बुद्धू घर को आता है, ये भी पत्रकारिता के गाँव को लौटे और अब न्यू मीडिया में इनका दैनिक जीवन प्रातः काल में किसी आउटरेज की निर्मिति करना है। 

तुर्की का हिंसक ड्रामा एरतोगुल जहाँ इन्हें रोमांचित करता है, रामायण का पुनःप्रसारण इन्हें आतंकित करता है। जिस रामायण ने इनके कैशोर्य में प्रसारित होकर इन्हें आतंकवादी नहीं बनाया था, वही धारावाहिक इन्हें लगता है वर्त्तमान युग में युवाओं को पथभ्रमित कर देगा। जैसे सरकार के विरोध में ये भारत का विरोध करने लगे हैं, धारावाहिक के विरोध में ये रामायण का विरोध करने लगे हैं और रामायण के माध्यम से हिन्दू धर्म का विरोध करने लगे हैं जो सोशल मीडिया पर प्रसिद्धि के सरल, सस्ता एवं टिकाऊ मार्ग है। इसी श्रृंखला में आज इनके एक पत्रकार श्रीराम एवं महर्षि वाल्मीकि से पूछते हैं कि वह उत्तरकाण्ड जिसके रामायण के भाग होने पर ही संदेह है उसमें उल्लिखित शम्बूक वध का और सीता के अयोध्या से निष्काषन क्या उत्तर है? अच्छा ही हुआ कि ऐसे पत्रकार रामायण काल में नहीं हुए, या संभव है हुए हों। पढ़ें इस लेख में:

राजधर्म में स्वयं को व्यस्त रखें श्रीराम का दुख लक्ष्मण से देखा न जाता था। उन्होंने जानकी के विरह से दुःखित श्रीराम की स्थिति देख कर मामले की तह तक जाने का विचार किया और बजरंग बली को बुला भेजा।

बजरंग बली जेएनयू की मेस के ऑडिट से लौटे ही थे कि उन्हें लखन का संदेश मिला। वैसे तो हनुमान जी के पास अपना खुद का स्टाफ़ था, परंतु जेएनयू की मेस का ऑडिट उन्हें स्वयं ही करना होता था। जेएनयू का छात्रसंघ किसी अन्य ऑडिटर को वहाँ प्रवेश नहीं देता था। हनुमान जी की लाल देह और लाल लंगोट साथ ही मज़बूत गदा उन्हें वहाँ प्रवेश दिला पाती थी।

हनुमान जी लक्ष्मण जी के समक्ष प्रस्तुत हुए बोले- प्रभु, प्रणाम धरते हैं। प्रणाम को भी धरा जाते देख कर लक्ष्मण किष्किन्धा के बजरंगबली के उत्तरप्रदेशीकरण के प्रति निश्चिंत हुए और उनका यह विश्वास प्रबल हो गया कि उनके प्रश्नों के उत्तर अब बजरंगबली अवश्य दे सकेंगे, क्योंकि जिन प्रश्नों के उत्तर कहीं नहीं होते वे उत्तर प्रदेश में होते हैं। उत्तर प्रदेश जो उन दिनों अयोध्या था, आज भी ऐसे कई प्रेतरूपी उत्तरों का घर है, जिनके प्रश्नों का अभी निर्माण नहीं हुआ है।

इस प्रकार निश्चिंत हो कर लखन बोले, “हे बजरंगी, आप की गुप्तचर सेना लंका से माँ सीता को ढूँढ लाई, परंतु आपने एक प्रश्न का उत्तर नहीं ढूँढा। जब से आप वित्त मंत्रालय से अटैच हुए हैं आपकी गुप्तचरीय शक्तियों में कमी देखी गई है।”

बजरंगबली बोले, “प्रभु, वित्त मंत्रालय का एक-एक नोटिस स्वयं समझने हेतु मुझे गहन अध्ययन करना पड़ता है। मैं इन दिनों वित्त मंत्रालय के नोटिसों पर शोध कर के एक वृहद् टीकाकृत भाष्य लिख रहा हूँ। आगामी समय में श्रीराम की कृपा से आप मुझे डॉक्टर हनुमान के नाम से जानेंगे और मैं भी कभी राहुल जी को इंटरव्यू देता हुआ देखा जाऊँगा।”

लक्ष्मण चिंतित हो गए। बोले- “हे हनुमान, अब आपको जेएनयू का ऑडिट कम करना होगा, वहाँ के वातावरण का आप पर कुप्रभाव हो रहा है। वह छोड़े, मेरे प्रश्न का उत्तर दें। माँ सीता को मैं प्रभु के आदेशानुसार महर्षि वाल्मीकि आश्रम में छोड़ तो आया हूँ, परंतु एक प्रश्न मुझे बहुत चिंतित करता है। वह धोबी कौन था जिसने माता के चरित्र पर प्रश्न उठाया, जिसके परिणामस्वरूप आज भ्राता श्रीराम अकेले हैं? यह सत्य आप ढूँढ कर मुझे सूचित करें।”

बजरंगबली ने आदेश स्वीकार किया और जाँच में जुट गए। सप्ताह भर बाद, हनुमान प्रकट हुए और बोले, “हे प्रभु, यह तो विचित्र कथा निकली। मैंने उस गुप्तचर से पूछताछ की जिसने यह धोबी वाली बात प्रभु तक पहुँचाई थी। पता चला कि उस गुप्तचर ने धोबी को कभी देखा ही नहीं था।”

लक्ष्मण ने पूछा, “तो फिर यह प्रसंग कहाँ से आया?” तो बजरंगबली ने इसका जवाब देते हुए कहा, हे देव, उस गुप्तचर को डिजिटल न्यूज़ पढ़ने का शौक है। उसने एक वरिष्ठ पत्रकार की रिपोर्ट पढ़ी थी। उस रिपोर्ट का शीर्षक था- क्या सीता की अग्निपरीक्षा भरोसेमंद एजेंसी से कराई गई थी? क्या उस पर अयोध्यावासी विश्वास कर सकते हैं? – पूछते हैं धोबीश्रेष्ठ।”

सवाल अब भी वही था। “परंतु कौन थे यह धोबीश्रेष्ठ?”

बजरंगबली कहते हैं, “हे देव, जाँच में पता चला कि यह वरिष्ठ पत्रकार प्रत्येक दिवस ऐसे ही किसी काल्पनिक पात्र को सामने कर के प्रश्न पूछते हैं। ऐसे प्रश्नसूचक फेकन्यूज से यह मिथ्याभाषण के अभियोग से बचे रहते हैं। सूत्रों के अनुसार यह कला उन्होंने राजनीति के अनुभव के समय सीखी है, जब इनके भूतपूर्व स्वामी ‘ईज इट ट्रू’ का फुदना बाँध कर कुछ भी फेंकते रहते थे। अपने स्वामी की सेवा से निष्कासित होने के बाद भी इनका इस कला में और भूतपूर्व स्वामी में कुमार विश्वास बना हुआ है। उन्होंने उसी ‘ईज इट ट्रू’ को ‘पूछते हैं फ़लाना ढिमकाना’ का स्वरूप देकर ‘अलेजेडली’ को पीछे छोड़ दिया है।”

लक्ष्मण फिर से पूछते हैं, “परंतु धोबीकुमार कौन थे?”

हनुमान जी सीधे खड़े होकर एड़ियाँ जोड़कर बोले, “लक्ष्मण सर, जो चित्र लेख पर धोबीश्रेष्ठ के नाम से लेख पर चिपकाया गया था, वे जाँच में लंका के राजधोबी निकले। हमने केस दर्ज करने की प्रयास किया तो फ़ोटो को सांकेतिक बता कर पत्रकार वर्ग ने हमें केस वापस लेने को बाध्य किया। दरअसल इस केस में कोई धोबी है ही नहीं, यह पत्रकारों की कपोल कल्पना है।”

लक्ष्मण कहते हैं, “परंतु हे हनुमान, हम कुछ तो कर सकते होंगे?” बजरंगबली ने कहा, “हम भाग्य को धन्यवाद दे सकते हैं कि लंका युद्ध के समय वहाँ पत्रकार नहीं थे, वरना वे रावण को गणितज्ञ बता कर हमारा अयोध्या लौटना तक दूभर कर देते।” लक्ष्मण लंबी साँस ले कर चुपचाप टहलने लगे।

मोदी 2.0: सत्ता में ना रहने की फिरौती दंगों के रूप में लेने वाले विरोधियों के बीच एक साल

सत्ता-परस्तों के तमाम संघर्ष, विरोध और आरोपों के बाद आखिरकार मई 23, 2019 को जनता ने अपने चहेते नेता को प्रचंड बहुमत के साथ एकबार फिर चुन लिया था। जहाँ आम चुनाव नतीजों के शुरूआती रुझान इतने इकतरफे नजर नहीं आ रहे थे, और लोगों की आशंका 240-250 के बीच सिमटने लगी थी, वहीं दिन होते-होते जनता का मूड एकदम स्पष्ट हो गया कि उन्होंने सदियों पुरानी सामंतशाही को एक बार फिर नकार कर प्रजातंत्र को चुन लिया है।

हालाँकि, तब भी पत्रकार-विशेष जमात के एकमात्र स्वघोषित तारनहार ‘प्राइम टाइम पत्रकार’ ने आखिर तक भी उम्मीद नहीं छोड़ी और पूरा दिन बस इस एक इन्तजार में काट दिया कि कहीं से तो कोई उम्मीद की किरण फूट पड़े, और नरेंद्र मोदी का विजयरथ किसी प्रकार तो झूठा साबित किया जा सके।

कॉन्ग्रेस पोषित जमात-ए-पत्रकारिता की सभी आशाएँ अंत में ध्वस्त हुईं और नतीजे ये हुए की नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ तो ली ही, साथ में अमित शाह ने गृह मंत्री का पद सम्भाला। यहाँ से देश के प्रगतिशील-विचारक वर्ग का असल चैलेंज शुरू हुआ था। जहाँ पहले कार्यकाल में लोग यही अंदाजा लगाते रहे कि नरेन्द्र मोदी की जीत विपक्ष की हार का नतीजा है, वहीं 2019 के आम चुनाव के नतीजों ने उनकी कल्पनाओं पर तुषारापात कर दिया।

नए कार्यकाल में मानो नरेंद्र मोदी और उनकी सेना ने नए आत्मविश्वास और ऊर्जा को एकदम तय दिशा दे डाली, और एक के बाद एक ऐसे बड़े फैसले लिए गए , जिस न्याय के लिए इस देश के बहुसंख्यकों को आजादी के बाद भी पीढ़ियों तक इन्तजार करना पड़ा था।

इन्तजार भी कोई लम्बी दूरी नहीं थी, लेकिन उनकी आस्था, उनके विचार और उनकी परम्परा को जिस तरह से अपने ही देश में हीन साबित करने का प्रयोजन वामपंथी बौद्धिक आतंकवादियों ने उनके साथ किए, उसके साथ आखिरकार न्याय होता नजर आने लगा।

इसका सबसे बड़ा उदाहरण घाटी से अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निष्क्रीय किया जाना था। हिन्दुओं की आस्था के सबसे बड़े स्तम्भ अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि से ‘विवाद’ शब्द को सुप्रीम कोर्ट ने बीती बात बता दिया और कहा गया कि इस भूमि पर राम मंदिर ही बनेगा।

ऐसे ही तमाम फैसले मोदी 2.0 में लिए गए, जिन्हें लेकर विपक्ष, खासकर अवार्ड वापसी गैंग आदि ने सरकार की नाकामयाबी बताकर कटाक्ष करता आया था, सबका निराकरण किया गया। यानी, अब प्रलाप के लिए बहुत जगह नहीं बची थी। इस बीच विपक्षियों का ऑड-इवन की तर्ज पर EVM हैक होना, ना होना, ‘सुप्रीम कोर्ट का बिका होना, ना बिका होना’, सब अपनी सहूलियत के अनुसार जारी रहा।

अचानक नागरिकता संशोधन कानून ने मानो विरोध करने को ही अपना रोजगार बताने वाले लोगों के डूबते करियर में प्राणवायु फूँक दी और स्वरा भास्कर से लेकर कुणाल कामरा जैसे लोगों के अच्छे दिन आए। उन्हें कॉन्ग्रेस ने फिर पुकारा कि डूबते विपक्ष को डूबते सहारे की जरूरत है और फिर से सोशल मीडिया पर सुनियोजित नेरेटिव तैयार किए जाने लगे।

इस तरह से एक दिन दिल्ली में शाहीनबाग खड़ा कर दिया गया। तीन माह विरोधियों को मानो वो सब मिल गया जिस फिरौती को वो जनता से खुद को वोट ना देने के बदले वसूल करती है। बड़े स्तर पर सत्ता विरोधी आंदोलनों को हवा देने की खूब कोशिश की गई। सड़क पर कॉन्ग्रेस पोषित उपद्रवी और मीडिया में बौद्धिक आतंकी अपनी पोजीशन लिए रहे। छात्रों को मोहरा बनाया जाने लगा। जिन लोगों ने दारा शिकोह पर पत्थरबाजी की थी, उनके बचे हुए चंद समर्थकों को फिर अपनी प्रतिभा चमकाने का अवसर मिला।

इस सबके बीच दक्षिणपंथ के प्रतीकों को लज्जित, अपमानित करने के प्रपंच हर स्तर पर जारी रहे। जिसका ताजा सबूत श्रीराम जन्मभूमि पर मिल रहे अवशेषों के विरोध के रूप में नजर आ रहा है।

गोमूत्र और गंगाजल को कोरोना के इलाज से जोड़कर दुर्भाग्यपूर्ण बयान कॉन्ग्रेस-समर्थित फैक्ट चेकर्स और नेता देते देखे जा रहे हैं। विपक्ष के दुर्भाग्य का सबसे हालिया उदाहरण तो कोरोना वायरस के संक्रमण के दौरान देखने को मिला है, जब महज सरकार के कह देने से डॉक्टर और कोरोना वारियर्स के प्रति कृतज्ञता की बातों को मजाक में लिया गया।

आज भी सारा देश देख रहा है कि कॉन्ग्रेस और सत्ता-विरोधियों के लिए मजदूर हों या छात्र, सब अपनी राजनीति भुनाने के बहाने हैं। हमने देखा कि कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी जैसे दलों ने सुनियोजित तरीकों से जामिया से लेकर दिल्ली को जलने पर मजबूर किया। जिस एक धर्मनिरपेक्षता के मुखौटे के नीचे कॉन्ग्रेस ने वर्षों तक देश पर राज किया, वह स्पष्ट रूप से बेनकाब हो चुका है। लोग समझ गए हैं कि कॉन्ग्रेस की धर्मनिरपेक्षता महज मुस्लिमों का वोट जुटाने का साधन है।

इन विरोधी दलों ने आलिशान भवनों में रहकर लोगों को सड़कों पर उतारा। शासन-प्रशासन और व्यवस्थाओं के खिलाफ लोगों को अकारण आक्रोशित करने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी, जिसका नतीजा दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगे थे।

आज फिर कॉन्ग्रेस वही षड्यंत्र चलने का प्रयास कर रही है। लेकिन वो यह भूल गई है कि अब संचार और संवाद के तन्त्र नेहरू को पहली सलामी देकर अपनी कलम नहीं उठाते। वह सत्य की अपनी परिभाषा लिखने के लिए अतीत से कहीं ज्यादा स्वतंत्र हैं।

हिन्दुओं को आखिरकार महसूस होना शुरू हुआ कि उनके अधिकार भी अल्पसंख्यकों जितने ही आवश्यक हैं। वरना नेहरूवादी सभ्यता ने कभी किसी को यह महसूस तक नहीं होने दिया कि हिन्दुओं के विषय भी कहे और सुने जा सकते हैं, या फिर उन्हें भी गरिमामय जीवन जीने का अधिकार है।

कॉन्ग्रेस आज भी मजदूरों-श्रमिकों के विषयों को अपने मतलब के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। किसानों पर वामपंथियों ने जमकर साहित्य लिखा। सदियों से सो रहे शायरों की आत्मा भी अचानक किसानों की शान और बिवाइयों पर नज्म लिखकर सोनिया गाँधी का ट्विटर अकाउंट टैग करते देखी जाने लगीं।

ऐसा नहीं है कि मोदी सरकार ने भारत की हर समस्या और चुनौती को जड़ से खत्म कर दिया हो, लेकिन यह भी सत्य है कि कम से कम उन्होंने समस्याओं को स्वीकार कर इसके निराकरण की जिम्मेदारी उठाई हैं। सदियों तक शासन और उसके दरबारी लेखकों ने अच्छी हिंदी और अच्छी व्याकरण में दरबारी साहित्य लिखकर लोगों को कभी उनकी समस्या को समझने ही नहीं दिया वरना आजादी के बाद से एक लम्बे अरसे तक संस्थानों और संसाधनों के इस्तेमाल और अय्याशियों में ही इस देश का इतिहास गुलजार नजर आता रहा

फिलहाल देश ही नहीं बल्कि सारा विश्व कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ रहा है। और यह भी सत्य है कि यदि कुछ समुदाय विशेष इसमें सरकार का साथ देते तो शायद भारत की स्थिति आज अन्य देशों के मुकाबले कहीं बेहतर होती।

बावजूद इसके, सीमित संसाधनों के साथ, भारत के सक्षम नेतृत्व ने हर क्षेत्र पर अपनी भूमिका को साबित किया है। विश्व की बड़ी शक्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता को सराहा है। अमेरिका से लेकर ब्रिटेन तक आज भारत की ओर आशा की नजरों से देख रहे हैं। वरना हम देख चुके हैं कि जिन लोगों के हाथों में इस देश की शासन व्यवस्था रही, उन्होंने देश में दंगे भड़काकर अपनी छुट्टियाँ थाईलैंड और ननिहाल में गुजारी हैं।

मोदी की जीत, उनका समर्थन और भारत की जनता का किसी नेता पर अभूतपूर्व विश्वास सिर्फ और सिर्फ यही संदेश देते हैं कि मतदाता अब अपने निर्णय लेना जानते हैं और वो उसी के साथ न्याय करेंगे, जो उनके साथ न्याय करेगा। जबकि, परिवारवाद में लिप्त विपक्ष, मोदी का विकल्प तलाशने के लिए अभी भी इंदिरा की नाक में अपनी समस्या का समाधान ढूँढ रहा है।

जो कल अर्थव्यवस्था को वापस पटरी पर लाएँगे, सरकार ने आज उनका ख्याल रखा है: निर्मला सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फेसबुक के माध्यम से जनता को मोदी सरकार द्वारा लिए गए क़दमों के बारे में बताया। सीतारमण ने कहा कि कोरोना लॉकडाउन के बीच सरकार ने महिलाओं का सबसे ज्यादा ध्यान रखा है और ये सुनिश्चित किया कि उन्हें कुकिंग गैस की कमी न हो। साथ ही बुजुर्गों को भी डायरेक्ट ट्रांसफर के माध्यम से सहायता पहुँचाई गई। भाजपा नेता नलिन कोहली ने इस दौरान सीतारमण से सवाल पूछे।

सीतारमण ने बताया कि सरकार का ध्यान किसी एक सेक्टर पर नहीं है बल्कि सभी सेक्टरों पर बराबर ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान इस पर है कि गरीबों तक ये चीजें पहुँच रही है या नहीं। उन्होंने देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा मे जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब देश को अब ऐसा बनाना पड़ेगा, जिससे यहाँ अधिक से अधिक उत्पादन हो और बाहर भी चीजें भेजी जा सकें।

सीतारमन ने कहा कि इस आर्थिक पैकेज को कुछ इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इससे उनलोगों को तुरंत मदद मिले, जो अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने मे अहम भूमिका निभाएँगे। उनके लिए सरकार ने आडिटीऑनल कैपिटल कि व्यवस्था कि है। उन्होंने कहा कि उद्योग जगत को पहले ही भरोसा दे दिया गया था कि सरकार आर्थिक व्यवस्था मे जान फूँकने के लिए मदद करने को तैयार है।

लिक्विडिटी के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा कीए जा रहे प्रयासों को भी सीतारमन ने सराहा और कहा कि तुरंत मदद की दिशा मे सकारात्मक प्रयास किये जा रहे हैं।

निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत को तकनीकी व्यवस्था का बहुत लाभ मिला है। तकनीक के कारण ही डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से करोड़ों लोगों को तुरंत राहत पहुँचाई गई। लॉकडाउन के तुरंत बाद पीएम गरीब कल्याण पैकेज की घोषणा की गई। वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार का लक्ष्य था कि देश का कोई गरीब भूखा ना रहे।

केजरीवाल सरकार ने सिक्किम को बताया अलग राष्ट्र: पूर्वोत्तर राज्य के मुख्य सचिव ने पत्र लिख जताई आपत्ति

दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल सरकार ने ‘सिविल डिफेंस कॉर्प्स’ के लिए वालंटियर्स की भर्ती के लिए अख़बारों में आवेदन प्राकशित करवाया था। इसमें सिक्किम को नेपाल और भूटान के साथ एक अलग देश के रूप में दिखाया गया है। सिक्किम के मुख्य सचिव एससी गुप्ता ने इस पर आपत्ति जताई है। उन्होंने एक पत्र के माध्यम से दिल्ली सरकार के इस रवैये पर आपत्ति जताई और लिखा कि ये दुखदाई है। यहाँ तक खुद सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने भी ट्वीट कर इस आपत्ति जताई है और जल्द से जल्द सुधार करने के लिए कहा है।

गुप्ता ने अपने आधिकारिक पत्र में लिखा कि ये एक बेहद ही नुकसानदायक क़दम है। उन्होंने कहा कि सिक्किम के लोग इस महान राष्ट्र का हिस्सा होने को लेकर गौरव महसूस करते हैं। बता दें कि मई 16, 1975 को सिक्किम भारतीय गणराज्य का 22वाँ राज्य बना था। आईएएस अधिकारी गुप्ता ने इस पत्र के साथ-साथ दिल्ली सरकार द्वारा दिए गए एडवर्टाइजमेंट की कॉपी भी संलग्न की और दिल्ली के मुख्य सचिव को प्रेषित किया।

मुख्य सचिव ने इस आपत्तिजनक विज्ञापन को जल्द से जल्द वापस लेने की अपील की है। साथ ही एक ऐसी विज्ञप्ति जारी करने की अपील की गई है, जिससे सिक्किम के लोगों की भावनाओं को ठेस न पहुँचे। बता दें कि इस विज्ञापन के सार्वजनिक होने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों ने केजरीवाल सरकार के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया था।

लद्दाख में LAC पर भारत और चीनी सैनिकों के बीच बढ़ा तनाव, आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे ने किया दौरा

सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने शुक्रवार (22मई,20) को लद्दाख का दौरा किया। ये दौरा बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से भारत और चीन के बीच सीमा पर अतिक्रमण को लेकर तनाव चल रहा है। सेना प्रमुख ने भारतीय सेना की तैयारियों का निरीक्षण भी किया।

जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के साथ बॉर्डर पर उत्तरी कमांड के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल वायके जोशी भी मौजूद थे। इसके अलावा इन दोनों के साथ हालात का जायजा लेने के लिए 14 कॉर्प्स कमांडर लेफ्टिनेंट हरिंदर सिंह भी थे। हालाँकि, इस दौरे को लेकर आर्मी की तरफ से कोई जानकारी नहीं दी गई। लेकिन कहा जा रहा है कि चीन के पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर जवाब देने के लिए कहा गया है।

सूत्रों ने बताया कि भारतीय थल सेना ने पैंगोंग त्सो झील और गलवान घाटी, दोनों जगहों पर चीनी सैनिकों के बराबर ही अपने सैनिकों की तैनाती की है। क्योंकि पिछले दो हफ्तों में चीन ने पैंगोंग त्सो के पास अत्यधिक सैनिक बल को तैनात किया था और लद्दाख में गलवान नदी पर अस्थाई टेंट भी स्थापित किया था।

यह भी माना जा रहा है कि चीनी सैनिकों ने पैंगोंग त्सो झील के किनारे भी स्थिति संभाली हुई है और क्षेत्र में भारतीय बलों को डराने के लिए मोटरबोट के साथ आक्रामक गश्त भी कर रहे हैं।

कथित तौर पर, चीनी पिछले साल बनी दरबूक-श्योक-दौला बेग ओल्डी (डीबीओ) सड़क को निशाना बना सकते हैं, जो सब सेक्टर नॉर्थ (एसएसएन) के लिए एक जीवन रेखा है। हालाँकि, भारतीय सेनाओं ने आक्रामक मोबिलिशन के साथ चीनी सैनिकों को ये करने से रोक लगा दिया है।

जाहिर है, चीन गालवान क्षेत्र में सड़क और पुल के निर्माण से नाखुश है, जो हाल ही में भारत द्वारा गश्त करने और स्थानीय आबादी की मदद के लिए कार्य शुरू किया गया है।

बता दें कि 5-6 मई को सिक्किम के नाकु ला सेक्टर में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हाथापाई हुई। जिसमें दोनों तरफ के सैनिकों को मामूली चोटें भी आई थी। इसके बाद दोनों ही देशों ने सीमा पर अतिरिक्त जवानों को तैनात किया है, जिसमें लद्दाख में गलवान घाटी प्रमुख है। इस तनाव को कम करने के लिए इस हफ्ते में पाँच दौर की वार्ता हुई, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका।

पुलवामा में नायब तहसीलदार नजीर अहमद वानी के घर में बने आतंकी ठिकाने को सेना ने किया ध्वस्त, मामला दर्ज

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले से एक आँखें खोल देने वाल सच सामने आया है, जहाँ एक नायब तहसीलदार के घर के अंदर आतंकी ठिकाना पाया गया। इसकी जानकारी मिलते ही सुरक्षाबलों ने इसे तत्काल ध्वस्त कर दिया और नायब तहसीलदार नजीर अहमद वानी के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी।

पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक पुलिस को सूचना मिली कि आतंकियों ने अपना एक ठिकाना जिला पुलवामा में अवंतीपोर के साथ सटे वायलू राजपोरा में बना रखा है। इसकी जानकारी मिलते ही सीआरपीएफ ने सेना के जवानों के साथ मिलकर शुक्रवार (22 मई, 2020) की रात करीब 10 बजे पूरे इलाके की घेराबंदी करते हुए तलाशी अभियान शुरू कर दिया।

तलाशी के दौरान पता चला कि वायलू गाँव की एक दुकान में आतंकियों ने अपना ठिकाना बना रखा था। इसी बीच पता चला कि यह ठिकाना नायब तहसीलदार नजीर अहमद वानी की दुकान के नीचे बना हुआ था।

हालाँकि, तलाशी के दौरान ठिकाने से कोई हथियार या अवैध सामग्री नहीं मिली, लेकिन सुरक्षाबलों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आतंकी ठिकाने को ध्वस्त कर दिया। वहीं पुलिस ने नायब तहसीलदार नजीर अहमद वानी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

अब सुरक्षा एजेंसियाँ तहसीलदार से लगातार मामले को लेकर पूछताछ कर रही हैं। वहीं पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है। इसे लेकर पुलिस ने कुछ स्थानों पर दबिश भी दी है।

बताया जा रहा है कि नायब तहसीलदार नजीर अहमद वानी का एक भाई आतंकी था, जो 1996 में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था। इतना ही नहीं इसका एक अन्य करीबी रिश्तेदार लियाकत भी हिजबुल का नामी आतंकी था, जो कि दो साल पहले ही सुरक्षाबलों के साथ हुई मुठभेड़ में मारा गया था।

आपको बता दें कि शुक्रवार (22 मई, 2020) को सुरक्षाबलों ने अंसार गजवा-तुल-हिंद और हिजबुल मुजाहिदीन के दो आतंकियों को भी गिरफ्तार किया था।

गौरतलब है कि इससे पहले 21 मई, 2020 को पुलवामा के प्रिचू में आतंकियों ने पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त पेट्रोल पार्टी पर अचानक से फायरिंग शुरू कर दी थी, जिसमें पुलिसकर्मी अनुज सिंह और मोहम्मद इब्राहिम को गोली लगी थी। दोनों घायल पुलिसकर्मियों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ अनुज सिंह वीरगति को प्राप्त हो गए थे।

आतंकी हमले की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में जवानों ने इलाके की घेराबंदी कर सर्च अभियान चलाया था।

वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने पेश की भारतीय एकता की मिसाल, रमजान में क्वारंटाइन 500 मुस्लिमों को परोस रहा है सहरी-इफ्तारी

माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा क्वारंटाइन किए गए मुस्लिमों को रमजान के इस पवित्र महीने में सहरी और इफ्तारी दिया जा रहा है। कटरा के आशीर्वाद भवन में रह रहे 500 मुस्लिमों को सहरी और इफ्तारी प्रदान की जा रही है।

श्राइन बोर्ड के सीईओ रमेश कुमार ने बताया कि रमजान के पवित्र महीने के बीच बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों से प्रवासी लोगों को जम्मू-कश्मीर वापस लाया गया है। ये प्रवासी मजूदर जम्मू और उधमपुर ट्रेन के जरिए पहुँच रहे हैं। इन्हें कटरा स्थित आशीर्वाद भवन में क्वारंटाइन किया गया है। जिसमें 500 लोगों को रखने की क्षमता है। है। क्वारंटाइन किए गए लोगों में बहुत से ऐसे हैं, जो रोजा रखते हैं।

ऐसे में रात भर जागकर कर्मचारी उनकी सहरी और इफ्तारी की व्यवस्था करते हैं। वहीं बाकी लोगों को नाश्ता, लंच और डिनर उपलब्ध करवाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मार्च में ही आशीर्वाद भवन को क्वारंटाइन सेंटर में तब्दील कर दिया गया था।

बता दें कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए 18 मार्च को माता वैष्णो देवी की यात्रा को स्थगित कर दिया गया था। कटरा में श्राइन बोर्ड के कई भवन हैं, जहाँ पर श्रद्धालु रुकते हैं। यहाँ पर सारी व्यवस्थाएँ मौजूद होने के कारण उन भवनों को क्वारंटाइन सेंटर में तब्दील कर दिया गया है।

सीईओ के मुताबिक अब तक श्राइन बोर्ड ने लॉकडाउन में लोगों को खाना उपलब्ध करवाने के लिए 80 लाख रुपए खर्च किए हैं। वहीं कोरोना से लड़ाई में 1.5 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं।

पूरे देश में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या 1.25 लाख के पार पहुँच गई है। इस वायरस ने देश में अब तक 3752 लोगों की जान ली है। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर भी इससे अछूता नहीं है। यहाँ अब तक 1,489 मामले सामने आ चुके हैं। इसमें से 20 मरीजों की मौत हुई है, जबकि 720 मरीज ठीक हो चुके हैं। जम्मू संभाग के रियासी जिले में अब तक कोरोना के चार मामले सामने आए हैं। इसी जिले में त्रिकुटा पर्वत पर माता वैष्णो देवी का मंदिर स्थित है।

पाक एयरलाइंस के पायलट ने हादसे से पहले क्यों कहा- मेडे..मेडे…मेडे, विमान के क्रैश होने से क्या है सम्बन्ध, सुनें ऑडियो

शुक्रवार (22मई,20) को पाकिस्तान के कराची में पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) का एक यात्री विमान लैंडिंग से कुछ सेंकेंड पहले क्रैश हो गया। इस हादसे में 97 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और सिर्फ़ 2 ही लोगों की जान बची है।

घटना के कुछ सेकंड पहले पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल को प्लेन में खराबी की बात बताई थी। साथ ही पायलट लगातार एक शब्द बोल रहा था- मेडे… मेडे (Mayday)। इस शब्द को शायद आप लोगों ने भी पहली बार सुना होगा। आखिर पायलट दुर्घटना से पहले क्या बताना चाह रहा था।

ऑडियो में आप सुन सकते है कि पायलट कह रहा है, “हमारे इंजन खराब हो चुके है” इसके बाद कंट्रोल रूम पूछता है, “क्या आप बेली-लैंडिंग के लिए तैयार हैं? 2:05 पर दोनों रनवे लैंडिंग के लिए उपलब्ध हैं।” इसके बाद पायलट बोलता है- “मेडे..मेडे..मेडे..” इसके ही कुछ देर बाद विमान क्रैश हो जाता है।

क्या मेडे (Mayday) कोई खुफिया कोड है? जाहिर सी बात है कि इसका अभी चल रहे महीने यानी (May) ‘मे’ से कोई लेना-देना नहीं है। क्या अंतिम बातचीत के दौरान कंट्रोल रूम से कोई संदेश देना चाहता था? आइए विस्तार से जानते हैं इसके बारे में:

मेडे (Mayday) का मतलब

दरअसल, MAYDAY एक फ्रेंच शब्द है। इस शब्द का मतलब होता है मदद करो, हम मुसीबत में हैं और हमारी जान खतरे में है। रेडियो से संपर्क के दौरान डिस्ट्रेस कॉल यानी मुसीबत में होने की जानकारी देने के लिए मेडे..मेडे..का इस्तेमाल किया जाता है। इमरजेंसी सिचुएशन में तीन बार इस शब्द को जोर-जोर से बोला जाता है।

बता दें इस मेडे (Mayday) शब्द का निर्माण इसलिए किया गया ताकि किसी भी इमरजेंसी सिचुएशन में आसानी और जल्दी से बोला जा सके और दुनियाभर के पायलट बिना समय गवाएँ इसका इस्तेमाल कर सके। इस शब्द का चयन इसलिए हुआ क्योंकि किसी भी शोरगुल में इसे अलग से सुना जा सकता है। इससे पहले इमरजेंसी सिचुएशन में SOS शब्द यानी Save Our Souls शब्द का प्रयोग होता था।

ऑडियो में पायलट एक और शब्द का इस्तेमाल करता है, वो है बेली- लैंडिंग। जहाँ कंट्रोल रूम द्वारा पूछा जाता है कि क्या आप बेली- लैंडिंग के लिए तैयार है। लेकिन जब तक पायलट बेली-लैंडिंग कराता उससे पहले हादसा हो गया।

क्या है बेली-लैंडिंग

प्लेन के लैंड होने के लिए उसके निचले हिस्से में लैंडिंग गियर लगे होते हैं। उनके खुलने के साथ ही प्लेन उनके सहारे रनवे पर लैंड करता है। हालाँकि, गियर के न खुलने की स्थिति में प्लेन के निचले हिस्से के सहारे ही लैंडिंग की कोशिश की जाती है ताकि वह एकदम से जमीन पर क्रैश होकर न गिर जाए। कराची क्रैश के केस में भी ऐसी रिपोर्ट्स सामने आई हैं कि प्लेन के लैंडिंग गियर खुल नहीं सके और यह मकानों पर जा गिरा।

जानकारी के अनुसार विमान पूँछ के बल लैंड करता है तो विमान के अगले हिस्से को कम नुकसान पहुँचता है यदि विमान अगले हिस्से के बल लैंड करता है तो अधिक नुकसान होता है। यदि बीच के बल लैंड करता है तो वो टूटकर अलग हो जाता है। साथ ही आग लगने का भी खतरा अधिक होता है।

मे-डे की ही तरह दुनियाभर में आपातकाल की सूचना देने के लिए कुछ अन्य शब्द भी प्रचलित हैं। जैसे पैन-पैन। यह फ़्रेंच शब्द ‘पेने’ से लिया गया है जिसका मतलब होता है ‘ब्रेकडाउन’। आम तौर पर इसका इस्तेमाल किसी मैकेनिकल या मेडिकल ज़रूरत के समय किया जाता है।

पैन-पैन कोड

पैन-पैन का सिर्फ़ तभी इस्तेमाल होता है, जब परेशानी बड़ी तो हो लेकिन इतनी भी नहीं कि किसी की जान पर बन आई हो। जैसे कि अगर कोई पायलट पैन-पैन कोड का इस्तेमाल करता है और दूसरा पायलट मेडे-मेडे कोड का इस्तेमाल करता है तो पहले मेडे वाले पायलट की मदद की जाएगी।

केरल: लॉकडाउन में चर्च बंद, अंदर शादीशुदा महिला के साथ आपत्तिजनक हालत में मिला पादरी

कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए देश में जारी लॉकडाउन के दौरान सभी धार्मिक स्थल बंद हैं। इसी का फायदा उठाकर केरल की एक चर्च से शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहाँ की एक कैथोलिक चर्च के पादरी को एक महिला के साथ शुक्रवार (22 मई, 2020) को आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ा गया।

खबरों के मुताबिक मामला केरल के इडुक्की जिले में कट्टप्पना के वेल्लायमकुडी के एक कैथोलिक चर्च का है, यहाँ रहने वाले पादरी जेम्स मंगलसीरी को एक महिला के साथ लोगों ने आपत्तिजनक स्थिति में रंगे हाथों पकड़ लिया।

दरअसल लॉकडाउन के नियमों के मुताबिक सभी धार्मिक स्थलों के बंद होने का बाद भी एक महिला को अक्सर चर्च के अंदर जाते देखा गया। इसे लेकर आस-पास के लोगों को शक हुआ। शुक्रवार को महिला के आने के कुछ देर बाद कुछ लोगों ने चर्च में प्रवेश किया।

चर्च के अंदर पादरी जेम्स मंगलसीरी को महिला के साथ नग्न अवस्था में पाया गया। इसे लेकर चर्च में हंगामा खड़ा हो गया। इस दौरान महिला के साथ नग्न अवस्था में पादरी के लिए गए फोटो कुछ देर बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। फोटो वायरल होते ही स्थानीय पुलिस हरकत में आ गई और मामले की जाँच में जुट गई।

बताया जा रहा है कि फोटो एक दुकानदार द्वारा लीक किया गया था। लेकिन पूछताछ में दुकानदार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। जानकारी के मुताबिक महिला शादीशुदा और दो बच्चों की माँ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि चर्च के पादरी का आसपास की बस्तियों में रहने वाली और भी कई महिलाओं के साथ अवैध संबंध है।