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‘दिल्ली अब आना ही नहीं है हमको, जब तक ये केजरीवाल बदल नहीं जाएगा’: मजदूरों का छलका दर्द, देखें Video

लॉकडाउन के दौरान दिल्ली में फँसे विभिन्न राज्यों के मजदूरों ने केजरीवाल सरकार द्वारा की गई तथाकथित व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। बेबस मजदूरों का कैमरे के सामने जब दर्द छलका तो सबसे पहले उनकी जुबान से एक ही बात निकली, “अब दिल्ली तभी आएँगे, जब केजरीवाल हटेगा।”

दिल्ली बीजेपी महासचिव कुलजीत सिंह चहल द्वारा ट्विटर पर शेयर किए गए वीडियो में लॉकडाउन के दौरान दिल्ली में फँसे कुछ मजदूर अपनी व्यथा सुनाते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो के शुरुआत में ही एक मजदूर कहता है, “दिल्ली अब आना ही नहीं है हमको, जब तक कि ये केजरीवाल बदल नहीं जाएगा या फिर अच्छी तरह से व्यवस्था नहीं करेगा, हम आ नहीं सकते।”

पीड़ित मजदूर ने आगे कहा, “हम खाना लेने जा रहे हैं तो पुलिस लाठीचार्ज कर रही है और खाना लेने जाते हैं तो 100-100 लोगों की लाइन लगी रहती है और खाना समाप्त हो जाता है तो कहते हैं कि जाओ कल आना। हम सुबह नौ बजे से लाइन में लगे रहते हैं और फिर भी खाना नहीं मिलता। अब क्या बच्चों को खिलाएँ और हम खाएँ।”

इतना ही नहीं मजदूर ने आरोप लगाया कि केजरीवाल गरीबों के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। बड़े-बड़े अमीर लोग अपने घरों पर (सामान) रख रहे हैं और नाम कर रहे हैं कि गरीब आदमी को खिला रहे हैं। बेवजह का नाम कमा रहे हैं, केजरीवाल कुछ काम नहीं कर रहे हैं।

मजदूर ने बेहद दुखी मन से आगे कहा, “केजरीवाल ने हम लोगों को बेहद परेशान कर दिया है, हम बहुत दुखी हैं। अब यह दुख सीमा से बाहर हो चुका है। अब हम दिल्ली तभी आएँगे कि जब पूरी तरह से लॉकडाउन हट जाएगा या फिर ये दिल्ली में केजरीवाल की जगह कोई और आ जाएगा।”

मजदूर ने बताया हमें महोबा जाना है, तीन जगहों से हमें लौटाया गया। हमें लगा केजरीवाल सहायता कर रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। मजदूर मर रहा है। जाने के लिए पास लेकर जाते हैं तो उसे फाड़ दिया जाता है। सफर के लिए दो-दो रोटी दी जाती है। वह भी बच्चों को देखकर। हमारे लिए तो कुछ भी नहीं है। हमारे पास पैसा भी नहीं है। पूरा एक दिन हो गया निकले हुए। केजरीवाल अगर हमारी सहायता करना चाहते हैं, तो वह हमें महोबा पहुँचाने की व्यवस्था करें।

आपको बता दें कि यह कोई पहली बार नहीं कि जब दिल्ली में फँसे मजदूरों ने केजरीवाल सरकार को लचर व्यवस्थाओं के लिए दुत्कारा हो। इससे पहले भी दिल्ली से बिहार के पूर्णिया के लिए पैदल निकले प्रवासी मजदूरों ने बताया था कि वह दो दिनों से भूखे हैं। कोई रोजगार नहीं है तो पैदल घर जा रहे हैं। उनका कहना था कि जब भूखे-प्यासे यहाँ मरना ही है, तो रास्ते में ही मर जाएँगे।

महाराष्ट्र में पालघर के बाद नांदेड़ में साधु रुद्र पशुपति महाराज की हत्या, आरोपित तेलंगाना बॉर्डर के पास गिरफ्तार

महाराष्ट्र के नांदेड़ में एक साधु और उसके एक सेवादार की हत्या के मामले में पुलिस ने साईंनाथ लंगोटे नाम के आरोपित को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने साधु के हत्यारे को तेलंगाना सीमा के पास गिरफ्तार किया है।

आरोपित की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने बताया कि हत्या का उद्देश्य लूट करना था। पुलिस अधीक्षक विजय कुमार मगर ने बताया कि आरोपित साईनाथ लिंगड़े एक हिस्ट्रीशीटर है और इसके ऊपर 10 साल पुराना हत्या का मुकदमा भी चल रहा है। आरोपित पर पहले भी छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।

विजयकुमार मगर ने आगे कहा, “मृतक साधु और हत्या का आरोपित एक ही समुदाय के हैं। हत्या के मामले में कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं है।” आरोपित भी उसी गाँव का रहने वाला है जिस गाँव में साधु रहते थे।

बता दें कि शनिवार (मई 23, 2020) देर रात नांदेड़ जिले में लिंगायत समाज के साधु रुद्र पशुपति महाराज की हत्या कर दी गई। रुद्र पशुपति महाराज के साथ ही बदमाशों ने उनके एक और सहयोगी भगवान राम शिंदे की भी हत्या कर दी। साधु का शव उनके आश्रम में मिला था, जबकि भगवान राम का शव रविवार (मई 24, 2020) सुबह ला परिषद स्कूल के पास मिला था। बताया जा रहा है कि साधु की गला रेतकर हत्या की गई है। फिलहाल जाँच जारी है।

बताया जा रहा है कि पशुपति महाराज की हत्या करने के बाद आरोपित साईंनाथ साधु की लाश कार में रखकर बाहर निकलने की फिराक में था। लेकिन कार गेट में फँस गई और सेवादार जग गए तो वह शव को वहीं छोड़कर फरार हो गया।

पुलिस इस एंगल की भी जाँच कर रही है कि आरोपित शव लेकर क्यों भाग रहा था। प्राथमिक पूछताछ में आरोपित ने बताया है कि उसने लूटपाट के इरादे से वारदात को अंजाम दिया। इसके अलावा इस एंगल से भी जाँच की जा रही है कि क्या गाँव वालों की साधु के साथ कोई रंजिश थी?

गौरतलब है कि इससे पहले पालघर में 70 साल के कल्पवृक्षनाथगिरी और 35 साल के सुशीलगिरी नाम के 2 साधु और उनके 32 साल के ड्राईवर नीलेश तेलगडे की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस दौरान वहाँ मौजूद पुलिस मूकदर्शक बनी रही। जानकारी के मुताबिक दोनों साधु लॉकडाउन के दौरान गुजरात में अपने गुरु की महासमाधी में शामिल होने जा रहे थे।

घरेलू उड़ानों से पहले सरकार ने जारी की गाइडलाइन, राज्यों में नियमों के मुताबिक यात्रियों को रहना होगा क्वांरटाइन

देश में जारी लॉकडाउन के बीच कल सोमवार यानि 25 मई, 2020 से शुरू होने वाली घरेलू उड़ानों से पहले केन्द्र सरकार ने विमान यात्रियों के लिए कुछ गाइड लाइन जारी की हैं, लेकिन विमान यात्रियों को क्वारंटाइन किए जाने के आखिरी फैसले को केन्द्र सरकार ने राज्य सरकारों के ऊपर छोड़ दिया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से रविवार (24 मई, 2020) को जारी किए 12 बिंदुओं के दिशा निर्देशों के मुताबिक अगर किसी यात्री में कोरोना के लक्षण नहीं पाए जाते हैं तो उसे क्वारंटाइन नहीं किया जाएगा। ऐसे यात्रियों को सीधे घर भेज दिया जाएगा, लेकिन इन यात्रियों को अपने घर पर ही खुद को 7 दिनों तक आइसोलेट रखना होगा।

मंत्रालय द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों में यह भी साफ किया गया है कि विमान यात्रियों को क्वारंटाइन करने और आइसोलेशन किए जाने को लेकर राज्य अपने स्थितियों के मुताबिक फैसला ले सकते हैं। यानि कि आखिरी फैसला राज्य सरकारों का ही होगा।

दिशा-निर्देशों के मुताबिक यात्रियों को विमान से उतरकर एयरपोर्ट एग्जिट गेट पर थर्मल स्क्रीनिंग से गुजरना होगा। इस दौरान सभी यात्रियों को अपने मोबाइल में ‘आरोग्य सेतु ऐप’ डाउनलोड करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा यात्रियों को मास्क पहनकर रहना और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का भी पूरी तरह से पालन करना होगा।

आपको बता दें कि विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शनिवार (23 मई, 2020) को कहा था, “घरेलू विमान में यात्रा कर रहे यात्रियों के पास आरोग्य सेतु ऐप होना अनिवार्य है और इसका स्टेटस ग्रीन है तो यह पासपोर्ट की तरह होगा। कोई व्यक्ति क्यों क्वारंटाइन चाहेगा।”

दरअसल, कोरोना की रोकथाम के लिए देश भर में करीब दो महीनों से विमान सेवाएँ पूरी तरह से बंद हैं। लॉकडान 4.0 में सरकार ने डील देते हुए 25 मई से घरेलू विमान सेवा को फिर से शुरू करने की घोषणा की है। इसे लेकर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने हवाई यात्रा पर जाने वाले यात्रियों के सामने कुछ शर्तें भी रखी हैं। इन शर्तों को मानना सभी यात्रियों के लिए अनिवार्य होगा। शर्तों को पूरा करने वाले यात्रियों को ही यात्रा पर जाने की इजाजत दी जाएगी।

वर्तमान स्थिति की बात करें तो राज्यों ने विमान यात्रियों को लेकर अलग-अलग नियम बनाए हुए हैं, जिसके मुताबिक महाराष्ट्र में प्रत्येक यात्री के उतरने पर स्क्रीनिंग के बाद उन्हें बड़े होटलों में 14 दिनों के अनिवार्य रूप से क्वारंटाइन में भेजा जाएगा। हालाँकि, अभी तक महाराष्ट्र सरकार ने घरेलू उड़ानों की अनुमति नहीं दी है। उसने कहा है कि 31 मई तक किसी भी प्रकार की उड़ानों की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इतना ही नहीं पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ सरकार ने भी घरेलू उड़ानों को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं किया है। यहाँ असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वहीं दिल्ली पहुँचने वाले प्रत्येक यात्री को 14-दिन के क्वारंटाइन से गुजरना होगा। भले ही उनमें कोरोना वायरस के लक्षण न हों, लेकिन ये जरूरी होगा।

अगर बात करें अन्य राज्यों की तो पंजाब, राजस्थान, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, असम, बिहार, झारखंड व जम्मू-कश्मीर में विमान यात्रियों को अनिवार्य रूप से 14 दिन के लिए क्वारंटाइन किया जाएगा।

RSS ने सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन पर प्रवासी मजदूरों के बीच बाँटे 14,000 से अधिक फूड पैकेट

देश कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहा है। लॉकडाउन के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) इस दौरान अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह से निभा रहा है। संघ के स्वयंसेवक जरूरतमंदों को भोजन, पानी, दवा और अन्य आवश्यक सामानों की आपूर्ति कर रहे हैं।

इसी के तहत हैदराबाद के सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन पर आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने रविवार (मई 24, 2020) को दूसरे प्रदेशों से अपने घर लौट रहे राहगीरों एवं प्रवासी मजदूरों के बीच 14,000 से अधिक फूड पैकेट्स वितरित किए। इसके साथ ही स्वयंसेवकों ने स्टेशन की साफ-सफाई भी की।

स्वयंसेवकों ने बताया कि काफी दूरदराज से प्रवासी मजदूर अपने प्रदेश की ओर लौट रहे हैं जो कई दिनों से भूखे-प्यासे हैं। उन्हें खाना नहीं मिला रहा है। ऐसी स्थिति में संघ आगे आकर के इनकी सेवा कर रहा है। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य निस्वार्थ भाव से प्रवासी मजदूरों की सेवा करना है। 

इससे पहले शनिवार (मई 23, 2020) को स्वयंसेवकों ने सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन पर प्रवासी मजदूरों के के बीच 8900 लंच पैकेट्स, 3000 पानी की बोतल, 2000 मास्क और 4300 बिस्किट के पैकेट बाँटे।

वहीं आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने रविवार को मध्य प्रदेश के बुरहानपुर रेलवे स्टेशन पर प्रवासी मजदूरों के लिए ठंडे पानी की व्यवस्था की। राजस्थान के कोटा में स्वयंसेवकों ने इम्युनिटी सिस्टम मजबूत करने के लिए 1500 से अधिक लोगों को ‘काढ़ा’ बाँटा।

23 मई को RSS के प्रचार विभाग द्वारा चलाए जा रहे ‘प्रेरणा’ केन्द्र की ओर से सोशल मीडिया पर संघ के कार्यों को लेकर कुछ आँकड़े पेश किए गए थे। संघ कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए सेवा कार्यों के यह आँकड़े 20 मई, 2020 तक के थे।

शेयर किए गए आँकड़ों के मुताबिक संघ की प्रेरणा से चलने वाले सेवा विभाग के 4,79,949 कार्यकर्ताओं ने पूरे देश में 85,701 स्थानों पर विभिन्न प्रकार से सेवा के कार्य किए हैं, जिन्होंने 27,98,091 प्रवासी मजदूरों को सीधे सहायता पहुँचाई है।

संघ ने देश के सुदूर इलाक़ों में भी मदद पहुँचाई है। म्यांमार, बांग्लादेश सीमा और पाकिस्तान सीमा पर भी लोगों को मदद पहुँचाई जा रही है। गौरतलब है कि दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काफ़ी काम कर रहा है और लगातार जनसेवा में लगा हुआ है। संघ के संगठन ‘सेवा भारती’ ने पूरी दिल्ली में ग़रीबों को खाना खिलाने से लेकर बेसहारा लोगों को ज़रूरी संसाधन मुहैया कराने के लिए दिन-रात एक किया हुआ है। 

संघ न सिर्फ़ लोगों के खाने-पीने का प्रबंध कर रहा है, बल्कि उनके स्वास्थ्य का भी ध्यान रख रहा है। संघ ने अब तक 50,48,088 परिवारों को राशन किट मुहैया कराया है। इतनी बड़ी संख्या में परिवारों तक पहुँचना ये बताता है कि आरएसएस देश के दूर-दराज इलाक़ों में भी कमान थामे हुए है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जगह-जगह पर ब्लड डोनेशन कैम्प भी आयोजित कर रहा है। संघ कार्यकर्ता बढ़-चढ़ कर रक्तदान कर रहे हैं। अब तक 22,446 स्थानों पर ब्लड डोनेशन कैम्पस आयोजित किए गए हैं। लोगों को कोरोना से बचाव के लिए मास्क और सैनिटाइजर्स भी वितरित किए गए हैं। अब तक 44,54,555 मास्क ज़रूरतमंदों के बीच बाँटे जा चुके हैं।

गुजरात: रानी रूपमती मस्जिद के पीछे अवैध बूचड़खाने पर छापा, 1,500 किलोग्राम मांस जब्त, 12 तस्कर गिरफ्तार

अहमदाबाद मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात पुलिस ने शाहपुर में एक अवैध बूचड़खाने पर छापा मार 12 तस्करों को पकड़ा। साथ ही कुरैशी चौक से लगभग 1,500 किलोग्राम मांस भी जब्त किया। यह अवैध बूचड़खाना अहमदाबाद में रानी रूपमती मस्जिद के पीछे स्थित था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने शनिवार (23मई 2020) को अवैध बूचड़खाने से 75 मवेशियों को बचाया है। शनिवार को शाहपुर पुलिस की एक टीम लॉकडाउन ड्यूटी पर ‘तरखुणिया बगीचा’ में वाहनों की जाँच कर रही थी। तभी एक मोटरसाइकिल सवार ने चेक पोस्ट पार करने की कोशिश की और रानी रूपमती मस्जिद की गली की ओर भाग निकला। मामले को संदिग्ध देखते हुए पुलिस ने तुरंत उसका पीछा किया।

रानी रूपमती मस्जिद को पार करते ही पुलिस ने वहाँ खड़े पिकअप ट्रकों में कई मवेशियों को देखा और उन ट्रकों के पास चार भी लोग भी खड़े थे। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें मवेशियों के परिवहन के लिए परमिट पास दिखाने को कहा। उनके पास कोई परमिट पास नहीं था।

मवेशियों को ले जाने वाले चार लोगों की पहचान उस्मान गनी कुरैशी, रफीक कुरैशी, घोष कुरैशी और मोहम्मद कुरैशी के तौर पर की गई है। पूछताछ में इन लोगों ने बताया कि कुछ लोग पहले ही कई मवेशियों को बूचड़खाने में ले गए थे। मवेशियों की तलाश में पुलिस ने बूचड़खाने में छापा मारा।

उपरोक्त वीडियो में मवेशियों के शव खून से सने बूचड़खाने के बीच देखा जा सकता हैं। पुलिस अधिकारियों ने मौके से कुछ मवेशियों को भी बचाया। शाहपुर पुलिस के इंस्पेक्टर आरके अमीन ने बताया, “आरोपियों पर आईपीसी के साथ-साथ पशु संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्हें कोरोनोवायरस परीक्षण के लिए भेजा गया है और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।”

मूर्ख और हिजड़े प्रवासी भारतीयों को कीलों से वहीं ठोक दो जहाँ ये हैं: अब्दुल रहमान इलियास

आंध्र प्रदेश सरकार में विभिन्न पदों पर स्थापित रह चुके अब्दुल रहमान इलियास ने प्रवासी भारतीयों के लिए अपशब्दों का प्रयोग किया है। उसने भारतीय प्रवासियों को मूर्ख और हिजड़ा बताया। उसके लिंक्डइन प्रोफाइल की मानें तो इलियास 2016-17 मे चंद्रबाबू नायडू कि सरकार के दौरान राज्य मे एग्रीबिजनेस एडवाइजर के रूप मे पदस्थापित था। वो खुद को इस सेक्टर का एक्सपर्ट के रूप मे प्रचारित करता है।

अब्दुल रहमान इलियास ने अपने फ़ेसबुक पेज पर लिखा कि अब लोगों को पता चल रहा है कि घृणास्पद मानसिकता कितनी खतरनाक है। उसने आरोप लगाया कि वो 2015 से ही इस्लामोफोबिया को पनपते हुए देख रहा है, जिसमें लोग इस्लाम और इसके समर्थकों को लेकर एक बनी-बनाई धारणा लेकर चल रहे हैं। उसने दावा किया कि हिंदुओं को इस्लामी शब्दावली का ज्ञान ही नहीं और उसे लेकर हल्ला मचाए रहते हैं।

बकौल इलियास, ‘काफिर, हलाला, गजवा-ए-हिन्द, सूअर और मोहम्मद’- इन शब्दों को लेकर बिना इसका मतलब समझे हंगामा मचाया जाता है। उसने लिखा कि हिन्दू ऐसा समझते हैं कि ये पूरा देश उनका ही है और वो इसके ठेकेदार बन कर बैठ जाते हैं, खुद को हिन्दू समाज का प्रवक्ता मान लेते हैं। साथ ही उसने प्रवासी भारतीयों के बारे मे कहा कि वो मजहब के लोगों को गाली देते हैं और समझते हैं कि भाजपा, संघ या मोदी उनके रक्षक हैं।

उसने भड़काऊ बयान देते हुए लिखा कि अब समय आ गया है जब इन ‘हिजड़ों और बेहूदों’ को वो जहाँ हैं, उन्हें वहीं कील से ठोक दिया जाए। उसने कहा कि कई देश समुदाय विशेष के साथ आ रहे हैं लेकिन इससे भारत कि बदनामी भी हो रही है। बकौल इलियास, भारत मे बहुसंख्यकवाद हावी हो गया है और लोगों ने एक-दूसरे के साथ मिलजुल कर रहना अस्वीकार कर दिया है। लोगों ने उसके भड़काऊ बयान का विरोध किया।

अंत मे उसने ये भी लिखा कि देश कि बदनामी हो तो हो, समुदाय का विरोध करने वालों को सबक सिखाया जाना चाहिए क्योंकि सबसे पहली प्राथमिकता यही है। ‘द प्रिन्ट’ कि ख़बर शेयर करते हुए उसने ये बातें लिखीं। अंत मे उसने लिखा कि समुदाय का विरोध करने वालों को ऐसा मारो कि जोर का लगे। अब्दुल रहमान इलियास ने ये भी अपील कि थी कि लोग शराब कि दुकानों मे तोड़फोड़ मचाएँ।

एक और ‘पालघर’: नांदेड़ में 2 साधुओं की हत्या, अनशन पर गाँव वाले, कहा – हत्यारे को पकड़ो, फिर होगा अंतिम संस्कार

महाराष्ट्र में पालघर के बाद अब नांदेड़ जिले में लिंगायत समाज के साधु की हत्या का मामला सामने आया है। मृतक साधु का नाम रुद्र पशुपति महाराज बताया जा रहा है। इस घटना के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। नांदेड़ अधीक्षक विजयकुमार मगर ने कहा कि देर रात नांदेड़ के उमरी में लिंगायत समुदाय के एक साधु का शव उनके आश्रम में पाया गया।

जानकारी के मुताबिक, रुद्र पशुपति महाराज के साथ ही बदमाशों ने उनके एक और सहयोगी की भी हत्या कर दी है। दूसके मृतक का नाम भगवान राम शिंदे बताया गया है। मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुँचकर दोनों के शव कब्जे में ले लिए हैं और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिए हैं।

वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साधु की हत्या पर गाँव वालों ने अनशन कर दिया है। उनका कहना है कि हत्यारे के पकड़े जाने के बाद ही इन दोनों का अंतिम संस्कार होगा।

बताया जा रहा है कि साधु की हत्या साईनाथ राम नाम के शख्स ने की है। पुलिस के मुताबिक आरोपित भी लिंगायत समाज का ही है और मृतक भगवान राम शिंदे आरोपित का साथी था।

कैसे हुई हत्या?

आरोपित साईनाथ शनिवार रात दरवाजा खोलकर आश्रम में दाखिल हुआ, क्योंकि कहीं भी दरवाजा तोड़ने के निशान नहीं हैं। दरवाजा अंदर से खुला है, यह कैसे खुला फिलहाल इस बारे में स्पष्ट नहीं है। पशुपति महाराज की हत्या करने के बाद आरोपित साईनाथ साधु की लाश कार में रखकर बाहर निकलने की फिराक में था। लेकिन कार गेट में फँस गई। इस दौरान छत पर सो रहे आश्रम के दो सेवादार जाग गए। उन्हें जब तक सारी बात समझ में आती आरोपित भागने लगा। सेवादारों ने आरोपित का पीछा किया, लेकिन वह भाग निकला।

सुबह एक और मृत शरीर मिला

रविवार (मई 24, 2020) सुबह जिला परिषद स्कूल के पास भगवान राम शिंदे की डेड बॉडी मिली। भगवान राम शिंदे भी लिंगायत समाज से हैं। उनकी हत्या साईनाथ ने की या किसी और ने, पशुपति महाराज की हत्या से पहले या बाद में, तमाम सवालों पर पुलिस फिलहाल जाँच कर रही है।

बताया जा रहा है कि साधु की गला रेतकर हत्या की गई है। नांदेड़ के आश्रम में लिंगायत समुदाय के साधु की हत्या ने फिर महाराष्ट्र की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हत्या के बाद एक बार फिर बीजेपी ने उद्धव सरकार के नेतृत्व पर सवाल खड़े किए हैं।

बीजेपी नेता और प्रवक्ता राम कदम ने कहा, “महाराष्ट्र में एक महीने के अंतराल में ही एक बार फिर साधु की हत्या कर दी गई। पहली बार हुई साधुओं की हत्या को अफवाह करार देने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने बचने की कोशिश की थी, लेकिन सच तो यह है कि महाराष्ट्र सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है। जिस तरह से राज्य में साधु-संतों की हत्या हो रही है, उससे साफ है कि राज्य में साधु सुरक्षित नहीं हैं।”

गौरतलब है कि इससे पहले पालघर में 70 साल के कल्पवृक्षनाथगिरी और 35 साल के सुशीलगिरी नाम के 2 साधु और उनके 32 साल के ड्राईवर नीलेश तेलगडे की पीच-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस दौरान वहाँ मौजूद पुलिस मूकदर्शक बनी रही। जानकारी के मुताबिक दोनों साधु लॉकडाउन के दौरान गुजरात में अपने गुरु की अंतिम यात्रा में शामिल होने जा रहे थे।

दलित महिलाओं को दी गाली, किया हमला: AIMIM और TRS नेताओं के खिलाफ लगा SC/ST एक्ट

तेलंगाना में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के ख़िलाफ़ एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। विधायक अहमद बिन अब्दुल्ला बलाला के ख़िलाफ़ आईपीसी की सम्बंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि उन्होंने एक दलित महिला के साथ खिलवाड़ किया और सार्वजनिक रूप से उसे अपमानित किया। यह घटना मई 7, 2020 की है। हालाँकि, विधायक ने आरोपों को नकार दिया है।

घटना के दौरान मालकपट के विधायक अहमद बलाला बलाला कमला नगर गए थे। वहाँ एआईएमआईएम के एक कार्यकर्ता के ख़िलाफ़ एक दलित लड़की के यौन शोषण का आरोप लगा था, जिसकी सूचना मिलने पर वो वहाँ पहुँचे थे। इसी दौरान बलाला ने भाजपा एससी मोर्चा की सेक्रेटरी श्रुति व अन्य महिला कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया। उन्होंने महिलाओं को गाली भी दी।

भाजपा नेता श्रुति ने आरोप लगाया है कि जब वो पीड़िता के पास पहुँची थीं तो बलाला ने उनकी जाति को लेकर उन्हें अपशब्द कहे। श्रुति भाजपा की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण की बेटी हैं। आईपीसी की धारा-509 (एक महिला के सम्मान को शब्दों या हरकतों की वजह से ठेस पहुँचाना) और एससी-एसटी (प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीज) 3(1) के तहत चादरघाट पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया।

भाजपा एससी मोर्चा की नेशनल सेक्रेटरी श्रुति की शिकायत के बाद मामला दर्ज किया गया। इंस्पेक्टर पी सतीश ने कहा कि इस सम्बन्ध में 9 मई को मामला दर्ज कराया गया। वहीं दूसरी तरफ तेलंगाना की सत्ताधारी पार्टी टीआरएस के नेता मानचिरेड्डी किशन रेड्डी पर भाजपा की एक दलित जनप्रतिनिधि के लिए अपशब्दों का प्रयोग करने का आरोप लगाया। मंडल प्रजा समिति के कोप्पू सुकन्या ने मामला दर्ज कराया था।

सुकन्या ने एक शिलान्यास समारोह के दौरान प्रोटोकॉल पर आपत्ति जताई थी, जिसके बाद टीआरएस नेता ने उन्हें अपशब्द कहे। टीआरएस नेता ने सुकन्या पर हमला भी बोल दिया। सुकन्या को फिलहाल एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके अलावा एक असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस के ख़िलाफ़ भी मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा एक सर्कल इंस्पेक्टर पर भी विधायक की मदद करने का आरोप लगा है। ये मामला रचाकोंडा पुलिस स्टेशन का है।

रवीश ने 2 दिन में शेयर किए 2 फेक न्यूज! एक के लिए कहा: इसे हिन्दी के लाखों पाठकों तक पहुँचा दें

एनडीटीवी के पत्रकार रवीश कुमार ने 2 दिन में फेसबुक पर दो बार फेक न्यूज़ शेयर किया। दोनों ही बार फैक्ट-चेक होने के कारण उनकी पोल खुल गई। उन्होंने टाइम मैगजीन के कवर की तस्वीर शेयर की, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीर दिख रही है और साथ ही लिखा है- ‘Time To Go’, अर्थात जाने का समय आ गया है। रवीश ने इसे शेयर करते हुए तंज कसा और पूछा कि किसके बारे में लिखा हुआ है?

हालाँकि, फेसबुक ने उनका फैक्ट-चेक कर दिया, जिसमें ये तस्वीर फर्जी निकली। टाइम मैगजीन ने अपने किसी संस्करण के कवर पर ऐसी कोई तस्वीर बनाई ही नहीं है और न ही ऐसा कुछ लिखा है। फेसबुक ने आधिकारिक फैक्ट-चेक में इसे ‘फॉल्स इन्फॉर्मेशन’, यानी ग़लत सूचना पाया। भनक लगते ही रवीश कुमार ने जल्दी से अपने इस फेसबुक पोस्ट को डिलीट कर के डैमेज कंट्रोल का प्रयास किया।

रवीश ने टाइम मैगजीन का नकली कवर पिक शेयर किया

जहाँ तक टाइम मैगजीन के नकली कवर की बात है, ‘रायटर्स’ ने अपने फैक्ट-चेक में पाया कि राष्ट्रपति ट्रम्प इससे पहले कई बार इसके कवर पर दिख चुके हैं लेकिन अभी तक इस तरह का कवर पिक टाइम मैगजीन ने कभी डिजाइन नहीं किया। कुछ इससे मिलते-जुलते डिजाइन का कवर आया था लेकिन उस पर न तो ट्रम्प की फोटो थी और न ही ये वाक्य लिखा हुआ था। टाइम की वेबसाइट पर भी इसका कोई जिक्र नहीं है।

फेसबुक के फैक्ट-चेक में खुली रवीश कुमार की पोल

इसके अलावा रवीश ने एक और फेक न्यूज़ शेयर की। ये प्रोपेगंडा पोर्टल ‘द वायर’ की ख़बर है, जिसमें दावा किया गया है कि अहमदाबाद में विवादित वेंटिलेटर्स बनाने वाले भाजपा नेताओं के क़रीबी हैं। उस कम्पनी के प्रोमोटर के बारे में रवीश ने पत्रकार रोहिणी सिंह के हवाले से लिखा कि उसके घर में होने वाले वैवाहिक कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आते-जाते हैं। उन्होंने इस फेक न्यूज़ को हिंदी के लाखों पाठकों तक पहुँचाने की अपील की।

रोहिणी सिंह की ये ख़बर फेक साबित हो चुकी है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि गुजरात सरकार अहमदाबाद में उसी कम्पनी से 5000 वेंटिलेटर्स ख़रीद रही है, जिस पर अहमदाबाद के अस्पतालों को गड़बड़ ब्रीथिंग मशीन सप्लाई करने का आरोप है। पीआईबी के फैक्ट-चेक में पता चला कि ये वेंटिलेटर्स उचित गुणवत्ता वाले हैं और इन्हें ख़रीदा नहीं बल्कि डोनेट किया गया था। गुजरात सरकार ने भी इसकी पुष्टि की है।

रोहिणी सिंह की फर्जी ख़बर को रवीश ने किया शेयर

वहीं रोहिणी सिंह की लिखी ‘द वायर’ की फर्जी ख़बर की बात करें तो उसके दावे के उलट पाया गया कि अहमदाबाद के अस्पतालों के लिए सप्लाई किए गए वेंटिलेटर्स भी ठीक से काम कर रहे हैं और उनमें कोई गड़बड़ी नहीं है। सिविल हॉस्पिटलों के लिए ख़रीदे गए इन उपकरणों के बारे में ‘द वायर’ में झूठ लिखा है, ऐसा पीआईबी ने खुलासा किया। सिंह ने दावा किया था कि इन मशीनों को गुजरात सरकार ने आक्रामक रूप से प्रमोट किया।

राजस्थान के ‘सबसे जाँबाज’ SHO विष्णुदत्त विश्नोई की आत्महत्या: एथलीट से कॉन्ग्रेस MLA बनी कृष्णा पूनिया पर उठी उँगली

राजस्थान में एक एसएचओ की हत्या के बाद सियासत गरमा गई है। आरोप है कि कॉन्ग्रेस विधायक कृष्णा पूनिया के दबाव में आकर राजगढ़ पुलिस थाने के एसएचओ विष्णुदत्त विश्नोई ने आत्महत्या कर ली। वे एक हत्याकांड की जाँच कर रहे थे, जिस कारण उन्हें रात के 3 बजे थाने आना पड़ा था। इसके बाद वो थाने स्थित क्वार्टर के कमरे में सोने चले गए थे। शनिवार (मई 23, 2020) सुबह 9 बजे भी वो बाहर नहीं निकले तो शक हुआ।

उनके कुक कन्हैयालाल ने इसकी सूचना थाने को दी। जब दरवाजा तोड़ा गया तो विश्नोई फंदे से लटके मिले। कमरे में दो सुसाइड नोट मिले। एक एसपी को सम्बोधित था तो दूसरा माता-पिता को। सुसाइड नोट में विश्नोई ने लिखा है कि उनके चारों तरफ इतना दबाव बना दिया गया था कि वो झेल नहीं सके। उन्होंने ख़ुद के तनाव में होने की बात कही। वकील को मैसेज भेज कर उन्होंने लिखा कि उन्हें गन्दी राजनीति के भँवर में फँसा दिया गया है।

इसी मैसेज में उन्होंने बताया था कि वे रिटायर होना चाहते हैं। उन्होंने लिखा था कि थाना भवन के निर्माण में उन पर 3.5 करोड़ रुपए का गबन का आरोप मढ़ा जा रहा है। जैसे ही ये चीजें वायरल हुईं, थाने के बाहर नेताओं और आमजनों का जमघट लग गया। नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और बसपा के पूर्व विधायक मनोज नांग्याल अलग-अलग स्थानों पर धरने पर बैठ गए। सीबीआई जाँच की माँग करते हुए काफ़ी देर तक पुलिस को शव भी नहीं उठाने दिया गया।

सांसद राहुल कस्वां सहित कई अन्य नेताओं ने आरोप लगाया है कि एक ईमानदार छवि का अधिकारी इस तरह से आत्महत्या कर ले तो उसके पीछे ज़रूर राजनितिक दबाव रहा होगा। वहीं कृष्णा पूनिया ने कहा है कि विश्नोई से 5-7 बार बैठक में ही उनकी मुलाकात हुई थी। विधायक ने बताया कि उन्होंने विश्नोई के बारे में सुन रखा था, लेकिन कभी अकेले में मुलाक़ात नहीं हुई।

विश्नोई के मित्र वकील गोवर्धन सिंह ने कहा कि अगर वे मैसेज मिलने के तुरंत बाद राजगढ़ चले गए होते तो शायद ये घटना नहीं होती। उन्होंने कहा कि वे ख़ुद को कभी माफ़ नहीं कर पाएँगे। उन्होंने कहा कि ये दिखने में भले आत्महत्या लगे, लेकिन ये सोच-समझ कर की गई हत्या है। इसकी सच्चाई सीबीआई जाँच के बिना सामने नहीं आएगी। 21 साल से सेवारत विश्नोई वरिष्ठ अधिकारियों के भी चहेते थे।

विश्नोई के बारे में ये भी कहा जा रहा है कि वो अपने थाने के कुछ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किए जाने से नाराज़ थे। आरोप है कि विधायक पूनिया ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से बात कर ऐसा कराया था। अब तक 13 थानों में रह चुके विश्नोई की आत्महत्या के मामले में लॉरेंस विश्नोई गैंग का नाम भी सामने आ रहा है, क्योंकि वो जिस मर्डर केस की जाँच कर रहे थे, उसके तार इसी गैंग से जुड़े थे।

वहीं डीजीपी भूपेंद्र सिंह ने कहा है कि उनकी नज़र में विष्णुदत्त राज्य के शीर्ष 10 एसएचओ में शामिल थे। बकौल डीजीपी, पुलिसकर्मियों के लिए राजनीतिक, सामाजिक और आपराधिक दबाव आम बात है, जो भर्ती होते ही शुरू हो जाता है। उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रों के वरिष्ठ अधिकारी सिफारिश करते थे कि अपराध को नियंत्रित करने के लिए उनके इलाक़े में विष्णुदत्त की पोस्टिंग की जाए।

चूरू के राजगढ़ में भी अपराध नियंत्रण के लिए ही विष्णुदत्त की पोस्टिंग की गई थी। डीजीपी भूपेंद्र सिंह का कहना है कि वहाँ उन्होंने अच्छा काम किया था, लेकिन आत्महत्या के पहले कैसी परिस्थितियाँ बनीं, ये जाँच का विषय है। उन्होंने कहा कि विष्णुदत्त विश्नोई ऐसे अधिकारियों में से थे, जो हमेशा ईमानदारी से काम करते थे। उन्होंने कहा कि किसी भी अनुसन्धान के दौरान दोनों पक्ष दबाव बनाने के लिए तिकड़म आजमाते हैं और पुलिस को निष्पक्ष कार्रवाई करने की चुनौती रहती है।

दैनिक भास्कर में प्रकाशित रिपोर्ट

राजगढ़ में इस घटना के बाद चौक-चौराहे पर ड्यूटी करते पुलिसकर्मी भी रोते हुए नज़र आए। उन्होंने कहा कि अब पुलिस नौकरी करना मुश्किल हो गया है, क्योंकि वर्दी पर राजनीति हावी हो रही है। विश्नोई को दबंग और कर्मठ अधिकारी के रूप में सबने याद किया। लोगों की माँग है कि उनके सुसाइड नोट को सार्वजनिक किया जाए और उसके आधार पर ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाए। वे अपने पीछे एक बेटे और एक बेटी को छोड़ गए हैं। दोनों ही छात्र हैं।

विष्णुदत्त विश्नोई, राजस्थान
राजस्थान में पुलिस इंस्पेक्टर विष्णुदत्त विश्नोई के सुसाइड पर उठे सवाल

विष्णुदत्त रोज अपने माता-पिता से बातचीत करने के बाद ही ड्यूटी के लिए निकलते थे। वे ख़ुद अकेले रहते थे और पत्नी एवं दोनों बच्चों को उन्होंने पढ़ाई के लिए बीकानेर छोड़ रखा था। एक कॉन्स्टेबल ने बताया कि वो शुक्रवार को तनाव में लग रहे थे। एक अन्य पुलिसकर्मी से पूछने पर पता चला था कि वे मर्डर केस को लेकर तनाव में हैं। दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि विष्णुदत्त विश्नोई ऐसे अधिकारी थे जिनकी पोस्टिंग पब्लिक डिमांड पर होती थी। जब उनका तबादला होता था तो वहॉं के लोग इसके विरोध में आंदोलन करने लगते थे।