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हॉटस्पॉट में सपा MLA इकराम कुरैशी ने बाँटा राशन, कहा- भीड़ इकट्ठा हो जाए तो मैं क्या करूँ

लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन कर राशन बॉंटने के आरोप में सपा विधायक हाजी इकराम कुरैशी और उनके बेटे के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। वे मुरादाबाद देहात से विधायक हैं। सोशल डिस्टेंसिंग को दरकिनार कर उनके कार्यालय में राशन लेने के लिए भीड़ इकट्ठा हो गई थी।

आरोप है कि मुरादाबाद में सपा विधायक इकराम क़ुरैशी और उनके पुत्र उबैद इकराम क़ुरैशी ने राशन बाँटने के
दौरान सोशल डिस्टेंसिग का धज्जियाँ उड़ाई। लोग एक-दूसरे चिपक कर खड़े थे। धक्का-मुक्की हो रही थी और उन सबने मास्क भी नहीं लगा रखा था।

राशन के साथ MLA ने कथित तौर पर पैसे भी बाँटे। इससे भीड़ और बेकाबू हो गई। देखते देखते लोगों में छीना-झपटी शुरू हो गई। आपको बता दें यह इलाका हॉटस्पॉट जोन के अंतर्गत आता है। यहाँ से कई कोरोना पॉजिटिव केस आ चुके है और अभी भी लगातार आ रहे हैं।

पत्रकारों ने विधायक से इस बदइंतजामी को लेकर सवाल पूछा तो वे भड़क उठे। उन्होंने कहा कि हर साल अलविदा के जुम्मे पर सामान बाँटता चला आ रहा हूँ। हो जाए तो मैं क्या करूँ?

शुक्रवार 22 मई को रोडवेज चौकी इंचार्ज बिजेंद्र सिंह राठी की तरफ से विधायक इकराम कुरैशी और उनके पुत्र उबैद कुरैशी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। इनके द्वारा सोशल सोशल डिस्टेंसिग का पालन न करने, लॉकडाउन का उल्लघंन करने, भीड़ जमा करने आदि पर थाना गलशहीद पर समय 23.02 बजे मुअसं 252/20 धारा 188/269/270 भादवि व 3 महामारी अधिनियम तथा 51 वी आपदा प्रबन्धन अधिनियम पंजीकृत किया गया।

मस्जिद में जुटे थे 100 से अधिक नमाजी, पुलिस पर पथराव: औरतों ने भी की बदसलूकी, गाली-गलौच

झारखंड के बोकारो स्थित पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के नारायणपुर मस्जिद में अलविदा जुम्मे की नमाज अदा करने को लेकर जमकर बवाल हुआ। मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए 100 से अधिक लोगों के जुटान की सूचना पर पहुँची पुलिस पर नमाजियों ने हमला और पत्थरबाजी की।

पुलिस ने लॉकडाउन का हवाला देकर लोगों से सामूहिक रूप से नमाज अदा नहीं करने को कहा। इस बात पर वहाँ मौजूद नमाजी भड़क गए और पीसीआर पर पत्थरबाजी कर दी। इसके बाद पुलिस को अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा। गाड़ी चालक सहित तीन पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए।

पुलिस को देखते ही नमाजियों ने वैन पर हमला बोल दिया। वैन चालक मुकेश को खींचकर उन्हें पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। उपद्रव बढ़ने लगा तो अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा। इस दौरान महिलाओं ने भी पुलिस से अभद्र व्यवहार और गाली-गलौच की।

किसी तरह से हालात पर काबू पाने के बाद नारायणपुर गाँव में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। पुलिस ने ग्रामीणों के साथ बैठक कर लोगों से शान्ति बनाए रखने की भी अपील की। इसी के साथ पिंड्राजोरा पुलिस ने वाहन पर हमला करने वाले आरोपितों की पहचान शुरू कर दी है। बोकारो एसपी ने कहा की फिलहाल मामला पूरी तरह शांत है और माहौल बिगाड़ने वालों को जेल भेजा जाएगा।

गौरतलब है कि बोकारो में महज एक दिन पहले ही कोरोना के पाँच नए मरीज सामने आए हैं। बावजूद इसके कुछ लोगों द्वारा इस तरह से मजमा लगाकर सरकारी और प्रशासनिक प्रयासों को विफल करने की कोशिश की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि झारखंड स्थित बोकारो कोरोना वायरस की शुरुआत से ही संवेदनशील रहा है। अप्रैल माह में भी बोकारो जिले के चंद्रपुरा प्रखंड स्थित पिपराडीह गाँव की मस्जिद में रह रहे 14 लोगों को प्रशासन की ओर से क्वारंटाइन सेंटर भेज दिया गया था।

चंद लोगों की बयानबाजी 130 करोड़ भारतीयों की राय नहीं: इस्लामोफोबिया पर मालदीव ने पाक को धोया

भारत पर इस्लामोफोबिया के पाकिस्तानी आरोपों का मालदीव ने करारा जवाब दिया है। ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) की वर्चुअल मीटिंग में पाक ने यह मुद्दा उठाया था।

मालदीव ने कहा कि सोशल मीडिया पर चंद लोग और अलग-थलग पड़े समूहों की हरकतों या बयानबाजी को 130 करोड़ भारतीयों की राय नहीं समझा जा सकता। साथ ही इस्लामोफोबिया को लेकर दक्षिण एशिया के किसी एक देश को निशाना बनाने को लेकर OIC को आगाह भी किया।

संयुक्त राष्ट्र में मालदीव की स्थायी प्रतिनिधि थिलमीजा हुसैन ने कहा कि भारत के संदर्भ में इस्लामोबिया का आरोप लगाना तथ्यात्मक रूप से गलत होगा।

उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और बहु-सांस्कृतिक समाज है। यहाँ 20 करोड़ से अधिक मुस्लिम रह रहे हैं। ऐसे में इस्लामोफोबिया का आरोप लगाना तथ्यात्मक रूप से गलत होगा। हुसैन ने कहा कि दक्षिण एशियाई क्षेत्र में धार्मिक सद्भाव के लिए ऐसा करना हानिकारक होगा। इस्लाम भारत में सदियों से मौजूद है और यह देश का 14.2 फीसद आबादी के साथ भारत में दूसरा सबसे बड़ा धर्म है।

उल्लेखनीय है कि हाल के दिनों में पाकिस्तान के कई सोशल मीडिया हैंडल ने भारत में मुस्लिमों के लिए ‘कोई जगह नहीं’ होने की बात का दुष्प्रचार शुरू किया है। पाकिस्तान ने भारत में इस्लामोफोबिया बढ़ने का दावा भी किया है। भारत इसे पाकिस्तान द्वारा भारत और अरब बिरादरी के रिश्तों में खटास डालने की साजिश के रूप में देखता है।

थिल्मिजा हुसैन ने कहा कि दुनिया ने घृणा, पूर्वाग्रह और नस्लवाद की संस्कृति में एक खतरनाक वृद्धि देखी है। राजनीतिक और अन्य विचारधाराओं/ एजेंडों को बढ़ावा देने के लिए हिंसा का इस्तेमाल किया गया है। मालदीव दुनिया में कहीं भी इस तरह के कार्यों के खिलाफ मजबूती से खड़ा है, जिसमें राजनीतिक या किसी अन्य एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए इस्लामोफोबिया, ज़ेनोफ़ोबिया या किसी भी तरह की हिंसा को बढ़ावा देना शामिल हो।

उन्होंने कहा कि मालदीव OIC में ऐसी किसी कार्रवाई का समर्थन नहीं करेगा, जो भारत के खिलाफ हो। मालदीव ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत ने सऊदी अरब, यूएई, अफगानिस्तान, फिलिस्तीन और मॉरीशस जैसे कुछ सबसे बड़े OIC सदस्यों के साथ मजबूत एलायंस बनाया है। हुसैन ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया है।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच जब भारत ने चीन के वुहान में फँसे अपने छात्रों को वहाँ से निकाला, तो मालदीव के भी 7 नागरिकों को निकाला था। इसके साथ ही भारत ने सहायता के लिए दवाएँ और मेडिकल टीम भी भेजी थी। इसके लिए मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने भारत का आभार व्यक्त करते हुए कहा था कि मालदीव सौभाग्यशाली है कि उसे भारत की सहायता मिली है।

भारत दौरे पर आए मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति और मौजूदा स्पीकर मोहम्मद नशीद नागरिकता संशोधन क़ानून पर अपनी राय देते हुए कहा था कि उन्हें भारत के लोकतंत्र पर है और यह भारत का आंतरिक मामला है। उन्होंने कहा था, “नागरिकता संशोधन बिल की पूरी प्रक्रिया को संसद के दोनों सदनों से मँजूरी मिली है और मैं उस दौरान ख़ुद भारत की संसद में मौजूद था।”

इसके साथ ही उन्होंने भारत को अल्पसंख्यकों के लिए स्वर्ग बताया था। मालदीव ने अनुच्छेद 370 पर भी भारत का साथ देते हुए इसे भारत का आंतरिक मुद्दा बताया था और दखल देने से साफ़ इनकार कर दिया था।

कराची में 107 लोगों के साथ गिरने वाला विमान चीनी माल, 10 साल उड़ाने के बाद पाकिस्तान को दिया था

पाकिस्तान के कराची में जिन्ना अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके में शुक्रवार (22 मई, 2020) को पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) का विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में 107 लोग सवार थे। इनमें 99 यात्री और आठ क्रू मेंबर थे।

कुछ मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है यह विमान चीन से पाकिस्तान आया था। 10 साल इस विमान का इस्तेमाल किए जाने के बाद उसे पाकिस्तान को सौंप दिया गया था। हादसे में कितने लोगों की मौत हुई है यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार सिंध के स्वास्थ्य अधिकारी कम से कम 57 लोगों की मौत की पुष्टि कर चुके हैं।

जानकारी के मुताबिक पीके-8303 लाहौर से चलने के बाद कराची में लैंड करने वाला था। लेकिन मालिर में मॉडल कॉलोनी के पास जिन्ना गार्डन इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसके बाद पूरे रिहायशी इलाके में अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि फ्लाइट के कप्तान ने राडार से गायब होने से पहले एयर ट्रैफिक को सूचित किया कि उसे लैंडिंग गियर की समस्या है।

सीएए सूत्रों ने कहा कि हादसे का शिकार होने से एक मिनट पहले ही उसका विमान से संपर्क टूट गया था। घटना पर प्रधानमंत्री इमरान खान ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए संबंधित एजेंसियों को मामले की जाँच के आदेश दिए हैं।

पाकिस्तान ट्रिब्यून के मुताबिक पीआईए की फ्लाइट पीके-8303 में दुर्घटना के समय 99 यात्री और क्रू के आठ सदस्य सवार थे। बताया जा रहा है कि इस दुर्घटना में चार मकान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। हालाँकि मकान में कितने लोग मौजूद थे, इसकी जानकारी अभी तक नहीं हो सकी है।

राहत कार्य में जुटे पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि क्षतिग्रस्त घरों से अब तक कम से कम चार शव बरामद किए जा चुके हैं। सीएए ने कहा कि पाकिस्तान सेना और वायु सेना ने अपनी टीमों को बचाव और राहत कार्यों के लिए भेजा है। पाकिस्तान के स्वास्थ्य और जनसंख्या कल्याण मंत्री ने घटना के बाद कराची के सभी बड़े अस्पतालों में आपातकाल की घोषणा की है।

दरअसल, इस विमान का चीन के ईस्टर्न एयरलाइंस ने वर्ष 2004 से लेकर 2014 तक प्रयोग किया था। इसके बाद यह विमान अक्टूबर 2014 से पीआईए के बेड़े में शामिल हो गया। इस विमान की आयु 16 वर्ष बताई जा रही है।

सोनिया गाँधी की खास रहीं IAS के दावे पर द वायर ने गढ़ा झूठ: PIB ने वेंटिलेटर रिपोर्ट पर कारस्तानी पकड़ी

द वायर की रिपोर्टों का विश्वसनीयता से कोई सरोकार नहीं होता। अहमदाबाद वेंटिलेटर मामले में भी उसने अपना यह ट्रैक रिकॉर्ड कायम रखा है। इस संबंध में प्रोपेगेंडा पोर्टल की रिपोर्ट में परोसे गए झूठ की पोल खुद पीआईबी ने फैक्टचेक कर खोली है।

दरअसल, बीते दिनों खराब वेंटिलेटर्स को लेकर अहमदाबाद चर्चा का विषय रहा था। इसके बाद द वायर की पत्रकार रोहिणी सिंह ने इस मामले पर एक रिपोर्ट लिखी। रिपोर्ट का लब्बोलुआब ये था कि खराब वेंटिलेटर बनाने वाली कंपनी के प्रमोटर भाजपा नेताओं के करीबी हैं।

रिपोर्ट में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया था कि गुजरात सरकार ने जिस कंपनी द्वारा ‘दस दिनों’ में कोविड मरीज़ों के लिए वेंटिलेटर्स बनाने का दावा किया था, उसके राज्य के डॉक्टरों ने मानकों पर खरा न उतरने की बात कही है। यह भी दावा किया गया था कि इस कंपनी के प्रमोटर्स उसी उद्योगपति परिवार से जुड़े हैं, जिन्होंने साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनका नाम लिखा सूट तोहफ़े में दिया था।

पूरी रिपोर्ट को सोनिया गाँधी की करीबी व वर्तमान में राज्य की प्रमुख स्वास्थ्य सचिव जयंती रवि के बयान के आधार पर इस तरह से गढ़ा गया कि ये सवाल खड़ा हुआ कि क्या खराब वेंटिलेटर का ऑर्डर सरकार ने दिया था? क्या इसके लिए राशि पीएम केयर्स फंड से दी गई थी?

रिपोर्ट में ये एंगल भी रखा गया कि अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल में 100 मेड इन इंडिया वेंटिलेटर्स सप्लाई करने को लेकर ज्योति सीएनसी ऑटोमेशन लिमिटेड के कार्य को सरकार ने बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रचारित किया था, वो वास्तविकता में मरीजों के अनुकूल ही नहीं थी। लेकिन, चूँकि कंपनी के प्रमुख मैनेजिंग डायरेक्टर पराक्रम सिंह जडेजा मुख्यमंत्री विजय रुपानी के करीबी थे, इसलिए ये सब सरकार द्वारा किया गया।

इसी रिपोर्ट के संज्ञान में आने के बाद पीआईबी ने फैक्ट चेक किया है। पीआईबी ने पत्रकार रोहिणी सिंह के इस दावे को खारिज किया है कि अहमदाबाद सिविल अस्पताल में खराब पाए गए वेंटिलेटर घटिया और खरीदे गए थे।

पीआईबी ने बताया है कि गुजरात सरकार के अनुसार, जिन वेंटिलेटर्स को खराब बताया गया, वो खरीदे नहीं गए थे। असल में ये दान में दिए गए थे, जो आवश्यक चिकित्सा मानकों पर खरे उतरते थे।

इस पर, द वायर के संपादक एस वरदराजन ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। अपने ट्वीट में उन्होंने रोहिणी सिंह की स्टोरी को सही साबित करने के लिए पीआईबी को कहा है कि क्या बस यही उनका फैक्टचेक है? वरदराजन ने खुद अपने ट्वीट में माना है कि पूरी रिपोर्ट में दावा जयंती रवि के बयान के आधार पर किया गया था।

गौरतलब है कि IAS अधिकारी डॉ. जयंती रवि कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गॉंधी की खास रहीं हैं। साल 2004 में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने उन्हें अपने राष्ट्रीय सलाहकार परिषद में नियुक्त किया था। बीते दिनों गुजरात सरकार ने स्वास्थ्य विभाग की प्रिंसिपल सेक्रेट्री डॉ. जयंती रवि को कोरोना के गंभीर संकट को देखते हुए किनारे लगा दिया था। उनपर अपनी पति के कंपनी की ऐप को प्रमोट करने का भी आरोप लगा था।

ममता बनर्जी की डर्टी पॉलिटिक्स: PM मोदी के ₹1000 करोड़ की ‘अग्रिम सहायता’ पर बोला झूठ, देखें Video

अम्फान तूफान हुई भारी तबाही का जायजा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (मई 22, 2020) पश्चिम बंगाल गए थे। उन्होंने हवाई सर्वेक्षण कर प्रभावित इलाकों का जायजा लिया। ममता बनर्जी समेत राज्य अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। फिर, हालातों को देखते हुए बंगाल को दोबारा खड़ा करने के लिए ₹1000 करोड़ के राहत पैकेज का ऐलान किया।

पीएम मोदी के इस त्वरित फैसले की तारीफ देश भर में हुई। लेकिन, ममता बनर्जी ने बैठक समाप्त होने के कुछ देर बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिए राहत पैकेज पर सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि PM ने 1 हजार करोड़ रुपए का राहत पैकेज घोषित जरूर किया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि उनके द्वारा दिया गया 1 हजार करोड़ रुपए एडवांस हैं या पैकेज है।

अब ममता बनर्जी के इस आरोप में कितनी सच्चाई है, इसका पर्दाफाश बैठक के एक वीडियो से हो जाता है। इसमें नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल सरकार को चक्रवात के कारण हुए विनाश से निपटने में मदद करने के लिए 1000 करोड़ रुपए की “अग्रिम सहायता” प्रदान करेगा।

बैठक की वीडियो में 4:15 मिनट पर हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कहते सुन सकते हैं कि उन्होंने एडवांस शब्द का प्रयोग जोर देकर किया। उन्होंने कहा, “भारत सरकार चक्रवात से प्रभावित राज्य की बहाली, पुनर्निर्माण और पुनर्वास में मदद करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार को 1000 करोड़ रुपए की अग्रिम वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।”

प्रधानमंत्री की घोषणा के समय बगल में ही बैठी थीं ममता बनर्जी

इसके अलावा ये भी गौर करने वाली बात है कि जिस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ऐलान में अग्रिम सहायता (एडवांस असिस्टेंस) शब्द कहा, उस समय बंगाल मुख्यमंत्री उनसे कुछ ही दूरी पर ही बैठी थीं। यह हम वीडियो में भी स्पष्ट देख सकते हैं। इसके अलावा पीएमओ इंडिया के ट्विटर हैंडल से भी इसी बात को जस का तस शेयर किया गया और उसमें भी एडवांस शब्द लिखा हुआ है।

बावजूद इसके बंगाल की मुख्यमंत्री ने बैठक खत्म होने के बाद प्रेस से बातचीत में बचकाना बयान दिया, या यूँ कहें कि ओछी राजनीति करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगा दिया कि उन्होंने राहत पैकेज की घोषणा करते हुए अस्पष्टता रखी।

ममता बनर्जी द्वारा प्रेस को दिए इंटरव्यू की वीडियो में हम 2:03 मिनट पर देख सकते हैं कि वह कह रही हैं, “पीएम मोदी ने इमरजेंसी फंड से 1 हजार करोड़ रुपए देने का एलान किया। लेकिन यह नहीं बताया कि यह एडवांस होगा या पैकेज। पीएम ने कहा कि इस पर बाद में विचार होगा, लेकिन यह एडवांस होना चाहिए। मैंने उनसे कहा कि आप जो भी हमें देंगे, वो आपका फैसला है, हम विस्तार से बता देंगे।”

यूपी में प्रियंका गाँधी को चाहिए बिजली बिल माफ, राजस्थान में जुर्माना वसूलने की तैयारी में कॉन्ग्रेस सरकार

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखा था। इसमें कोरोना वायरस महामारी के चलते गरीबों और मध्यम वर्ग के लोगों को राहत देने के लिए सरकार को कुछ सुझाव दिए गए थे। उन्होंने गरीब किसानों और छोटे व मध्यम उद्योगों के बिजली बिलों को माफ करने का अनुरोध किया था।

पत्र के माध्यम से प्रियंका ने योगी से गरीबों और मध्यम वर्ग को मिलने वाले होम लोन पर भी ब्याज माफ करने को कहा था। 14 मई को लिखे पत्र में प्रियंका गाँधी ने कहा था कि ये लोग राज्य अर्थव्यवस्था की रीढ हैं।

प्रियंका गाँधी ने पत्र के माध्यम से कहा था कि कोरोना वायरस के कारण समाज का हर वर्ग बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इन लोगों की मदद करना सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि कॉन्ग्रेस ने अपने ही शासित राज्य में लॉकडाउन से परेशान लोगों को राहत देना उचित नहीं समझा।

इससे साफ होता है कि कॉन्ग्रेस नेतृत्व के साथ राजस्थान सरकार का उद्देश्य जनता को भ्रमित करना और इस दौरान परेशानी से जूझ रहे लोगों पर राजनीति करना मात्र है। जानकारी के मुताबिक राजस्थान में लॉकडाउन के दौरान बिजली बिल जमा नहीं करवाने वाले उपभोक्ताओं को अब तीन महीने का बिजली बिल एक साथ भरना पड़ेगा। अगर 31 मई तक बिल जमा नहीं करवाया तो पूरे तीन महीने की बिलिंग राशि पर 2 फीसदी पेनाल्टी देनी होगी। इतना ही नहीं बकाया राशि पर जून के पहले सप्ताह से बिजली कनेक्शन काटने शुरू कर दिए जाएँगे।

इस संबंध में जयपुर डिस्कॉम प्रबंधन ने सभी इंजीनियरों को निर्देश दे दिए गए हैं। जयपुर डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक एके गुप्ता का कहना है कि कोरोना महामारी के चलते अप्रैल व मई में जारी होने वाले कृषि व 150 यूनिट तक प्रतिमाह उपभोग वाले घरेलू बिल भुगतान को 31 मई तक स्थगित किया गया था। इन्हें माफ नहीं किया था।

घरेलू व कृषि उपभोक्ता 31 मई तक बिल राशि का भुगतान करके 5% राशि के बराबर रिबेट आगामी माह में प्राप्त कर सकते हैं। बता दें कि राज्य सरकार ने अप्रैल के पहले सप्ताह में 31 मई तक बिजली बिल स्थगित किए थे। कृषि व 150 यूनिट मासिक से कम खर्च वाले उपभोक्ताओं को 31 मई तक बिल जमा नहीं करवाने की छूट दी थी।

नई टैरिफ व गर्मी में बिजली उपभोग ज्यादा होने के कारण अप्रैल व मई में बिजली बिल करीब 25 फीसदी ज्यादा राशि के मिल रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान लोग घर पर रहे, इससे बिजली का उपभोग भी बढ़ गया।

लॉकडाउन कठिनाइयों के बीच जयपुर में कई लोगों ने आरोप लगाया है कि उन्हें बिजली का बढ़ा हुआ बिल मिला है और उनकी शिकायतें नहीं सुनी गईं। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार लोगों ने शिकायत की कि पहले जितना भुगतान लिया जाता था इस बार उससे लगभग दो गुना-तीन गुना बिजली बिल का भुगतान लिया जा रहा है।

दरअसल राजस्थान सरकार ने इससे पहले घोषणा की थी कि कोरोना वायरस महामारी के चलते जारी लॉकडाउन के कारण राज्य में बिजली बिल दो महीने के लिए टाल दिए जाएँगे।

यह राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार की कंगाली और अमानवीयता: यूपी से बस किराया लेने पर मायावती

प्रवासी मजदूरों को घर पहुँचाने को लेकर राजनीतिक पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कोटा से छात्रों के लिए बस उपलब्ध कराने को लेकर यूपी सरकार को राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा भेजे गए 36.36 लाख के बिल पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने नाराजगी व्यक्त की है।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने ट्वीट कर कहा, “राजस्थान की कॉन्ग्रेसी सरकार द्वारा कोटा से करीब 12000 युवा-युवतियों को वापस उनके घर भेजने पर हुए खर्च के रूप में यूपी सरकार से 36.36 लाख रुपए और देने की जो माँग की है, वह उसकी कंगाली व अमानवीयता को प्रदर्शित करता है। दो पड़ोसी राज्यों के बीच ऐसी घिनौनी राजनीति अति-दुखद है।”

आपको बता दें कि कॉन्ग्रेस नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार ने कुछ बसों का किराया वसूलने के लिए यूपी सरकार को 36 लाख रुपए का बिल भेजा है। दरअसल कोटा में फँसे छात्रों को लाने के लिए पिछले महीने राजस्थान सरकार ने यूपी सरकार को 70 बसें उपलब्ध कराईं थीं। इसी को लेकर अब राजस्थान सरकार ने यूपी सरकार से 36,36,664 रुपए का भुगतान करने की माँग की है।

राजस्थान कॉन्ग्रेस पर कटाक्ष करते हुए मायावती ने पूछा, “कॉन्ग्रेसी राजस्थान की सरकार एक तरफ कोटा से यूपी के छात्रों को अपनी कुछ बसों से वापस भेजने के लिए मनमाना किराया वसूल रही है, दूसरी तरफ अब प्रवासी मजदूरों को यूपी में उनके घर भेजने के लिए बसों की बात करके जो राजनीतिक खेल खेल कर रही है, यह कितना उचित व कितना मानवीय है?”

प्रवासी मज़दूरों को उनके घरों तक सुरक्षित पहुँचाने के लिए उनके भुगतान को लेकर लंबे-लंबे दावे करने वाली कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी के लिए यह एक बड़ी ही शर्मिंदगी की बात है। इतना ही नहीं इससे पहले राजस्थान में कॉन्ग्रेस नेतृत्व वाली सरकार ने जयपुर-पटना श्रमिक स्पेशल ट्रेन के लिए प्रवासी मज़दूरों से भुगतान लेने की बात कही थी।

टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट के मुताबिक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रवासियों मजदूरों से अपने घर वापस जाने को लेकर उनसे पैसा लेने की बात स्वाकीर की थी, जबकि अधिकांश राज्य सरकारों ने अपने सरकारी खजाने से प्रवासी मजदूरों की यात्रा का भुगतान किया था। केवल तीन राज्य केरल, राजस्थान, और महाराष्ट्र ऐसे थे, जिन्होंने प्रवासी मजदूरों से उनकी यात्रा का चार्ज वसूल किया था।

बोकारो और बहराइच की मस्जिद में जुटे नमाजी: पुलिस पर हमला, महिलाओं ने भी बरसाए पत्थर

उत्तर प्रदेश के बहराइच और झारखंड के बोकारो में सामूहिक नमाज के लिए मस्जिद में जमा होने और पुलिस को निशाना बनाने की घटना सामने आई है। कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए सामूहिक नमाज पर पाबंदी है। बावजूद इस तरह की घटनाएँ सामने आती रहती है।

बहराइच की एक मस्जिद में शुक्रवार (22 मई, 2020) को सामूहिक रूप से अलविदा-जुमा की नमाज अदा की गई। सूचना पर पहुँची पुलिस टीम पर नमाजियों ने हमला कर दिया। दो पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए।

झारखंड के बोकारो जिले की एक मस्जिद में सामूहिक नमाज को रोकने लिए पहुँची पुलिस की गाड़ी पर नमाजियों ने हमला कर दिया। गाड़ी चालक सहित तीन लोग घायल हो गए। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक बहराइच जिले के हुजुरपुर थाना क्षेत्र के गाँव कटका की छौंकन मस्जिद में शुक्रवार को रमजान की अलविदा नमाज अदा करने बड़ी संख्या में लोग एकत्र होने लगे। मस्जिद के पास ड्यूटी पर तैनात सिपाही रामप्रवेश और विनय कुमार ने इन लोगों को लॉकडाउन का हवाला देकर रोकने की कोशिश की।

इसी बात को लेकर लोग पुलिसकर्मियों से उलझ गए और देखते ही देखते पुलिसकर्मियों पर पथराव शुरू कर दिया, लोगों की इस भीड़ में महिलाएँ भी शामिल थीं। इस दौरान किसी तरह दोनों पुलिसकर्मियों ने मौके से भागकर अपनी जान बचाई और घटना से आला अधिकारियों को अवगत कराया। पुलिस पर हमले की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में फोर्स गाँव में पहुँच गया।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मौके से 13 आरोपितों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद एसपी विपिन मिश्रा, एएसपी और सीओ ने घटनास्थल का जायजा लिया। एसपी विपिन मिश्रा के मुताबिक पुलिस पर पथराव करने के आरोप में 13 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें 4 महिलाएँ भी शामिल हैं। माहौल को देखते हुए फिलहाल गाँव में पुलिस फोर्स के साथ पीएसी तैनात कर दी गई है।

दूसरी घटना झारखंड के बोकारो जिले से है, जहाँ शुक्रवार(22 मई, 2020) दोपहर को नारायणपुर की एक मस्जिद में सामूहिक नमाज अदा करने के लिए करीब 100 की संख्या में लोग एकत्र हो गए। इसकी जानकारी मिलते ही पिंड्राजोरा की पुलिस मौके पर पहुँच गई।

पुलिस लोगों को समझा ही रही थी कि इसी बीच कुछ लोगों ने पुलिस के पीसीआर वैन पर पथराव कर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया, जिसमें पीसीआर वैन के चालक सहित तीन लोग मामूली रूप से घायल हो गए। माहौल को बिगड़ता देख मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल को बुलाया पड़ा। वहीं मौके पर पहुँचे चास एसडीपीओ भगवान दास और चास बीडीओ संजय शांडिल्य ने घटनास्थल का जायजा लिया।