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नरेंद्र मोदी को फेक न्यूज फैलाकर हराएँ: शेखर गुप्ता के द प्रिंट ने विपक्ष को बताए गुर

पिछले कुछ समय में फर्जी खबरों को फैलाने में मुख्यधारा मीडिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि फेक न्यूज फैलाने के पीछे उनका मुख्य उद्देश्य द्वेष के अतिरिक्त कुछ नहीं हेता। द प्रिंट ने आज इसी बात को साबित करते हुए अपनी वेबसाइट पर एक लेख प्रकाशित किया है। जिसका लब्बोलुबाब यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हराने के लिए विपक्ष फेक न्यूज फैलाए।

इस लेख में मुख्यत: इस बात पर जोर दिया गया कि लिबरलों को/विपक्षियों को नरेंद्र मोदी के खिलाफ़ छिड़ी जंग में किस प्रकार फेक न्यूज को बढ़ावा देना चाहिए। इस लेख में अपनी बातों को सही ठहराने के लिए द प्रिंट ने अमेरिकी थिंक-टैंक रैंड कॉर्पोरेशन के लिए लिखे गए क्रिस्टोफर पॉल और मिरियम मैथ्यूज के एक लेख का हवाला दिया है।

प्रिंट के लेख में तर्क दिया गया कि पूरे विश्व में आज झूठ को तेजी से फैलाना प्रोपेगेंडा फैलाने का सबसे शक्तिशाली उपकरण बनता जा रहा है। इसलिए जो लोग इस प्रोपेगेंडा को हराना चाहते हैं, उन्हें अपने झूठ को आग की तरह फैलाना होगा। जैसे हिंदी में कहते हैं कि लोहा ही लोहे को काटता है। जब जनता के मत को फर्जी खबरों और झूठों से बरगलाया जा रहा है, उस समय विपक्ष फैक्ट चेक करके पूरा खेल नहीं जीत सकता।

बता दें, इस लेख में हालाँकि, अपनी सारी बातें द प्रिंट ने सकारात्मक रूप से दर्शाने की कोशिश की है। लेकिन वास्तविकता में उनका क्या मतलब है इस बात को अच्छे से समझा जा सकता है।

द प्रिंट का ये लेख इतने बिंदुओं पर नहीं खत्म होता। लेख में अंत तक आते-आते अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रतिबंध लगाने व राजनैतिक विरोधियों पर कार्रवाई करने का आह्वान की बात शामिल कर ली जाती है। साथ ही इस लेख में विपक्षियों को सुझाव दिया जाता है कि वे अपने विरोधियों के झूठ की श्रृंखला पर प्रहार करें।

लेखक चरणबद्ध तरीके से समझाता है कि कैसे विपक्षियों को हराया जा सकता है। वह कहता है कि अगर विपक्षी शासित राज्य अपने राज्यों में फर्जी खबरों और सांप्रदायिक घृणा फैलाने वालों पर शिकंजा नहीं कस रहे तो वह बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं।

अब ये ध्यान देने वाली बात है कि ‘हेट स्पीच’ का मतलब जरूरी नहीं एक व्यक्ति के लिए जो हो, वहीं दूसरे व्यक्ति के लिए भी हेट स्पीच कहलाए। दरअसल, हर व्यक्ति अपने मतों के हिसाब से किसी की बातों को हेट स्पीच कहता है और सरकार भी अपना राजनैतिक पलड़ा देखते हुए इसकी परिभाषा तय करता है।

उदाहरण के लिए अर्नब गोस्वामी के केस में यही हुआ। जहाँ कॉन्ग्रेस पॉर्टी ने सोनिया गाँधी पर सवाल उठाए जाने को कम्यूनल वॉयलेंस यानी साम्प्रदायिक हिंसा करार दे दिया। साथ ही जहाँ-जहाँ कॉन्ग्रेस शासित राज्य थे, वहाँ उन पर शिकायत दर्ज हो गई और कार्रवाई की माँग उठने लगी। आज शेखर गुप्ता का द प्रिंट अपने इस लेख के जरिए जिन बातों को तर्कों में गढ़कर समझा रहा है, उसका निष्कर्ष यही है कि कैसे राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में नरेंद्र मोदी के समर्थकों को दबाया जाए।

यहाँ स्पष्ट तौर पर बता दें कि मुख्यधारा मीडिया जो पिछले समय से फर्जी की खबरें फैला रहा है, वे केवल राजनीति के एक धड़े को फायदा फहुँचाने के लिए है। जाहिर है वो धड़ा भाजपा का नहीं है। इस काम में पिछले कुछ समय में शेखर गुप्ता का द प्रिंट सबसे आगे रहा है और अब तो इसके पीछे की वजह भी साफ हो गई है।

द प्रिंट तमाम झूठ फैलाने के बाद अपनी नैतिक श्रेष्ठता पर इतना आश्वस्त है कि लेख से ऐसी बातें बताने की कोशिश कर रहा है कि विपक्ष के पास राजनैतिक उद्देश्यों को हासिल करने के लिए फेक न्यूज फैलाने की आज़ादी है और वे इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

याद दिला दें, द प्रिंट के लिए इस लेख को लिखने वाले शिवम विज वही पत्रकार हैं, जिन्होंने एक समय में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को व्हॉइटवॉश करने की कोशिश की थी। अब इस लेख को पढ़कर भी यही लगता है कि मीडिया गिरोह में शिवम से लेकर शेखर गुप्ता तक के लिए फर्जी न्यूज फैलाना तब तक उचित है, जब तक इसका उपयोग नरेंद्र मोदी और हिंदुत्व को हराने के लिए किया जाए।

मेरठ: कोरोना हॉटस्पॉट में 2 दिन से चल रहा था जलसा, 150 लोग थे मौजूद, यूसुफ बादशाह सहित 5 गिरफ्तार

लॉकडाउन के बावजूद मेरठ के कोरोना हॉटस्पॉट में दो दिन से जलसा चल रहा था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसमें करीब 150 लोग शामिल थे। छापा पड़ते ही ज्यादातर लोग फरार हो गए। पॉंच लोग गिरफ्तार किए गए हैं।

जलसे की जानकारी मिलने पर गुरुवार रात छापेमारी की गई। पुलिस को देख जलसे में भगदड़ मच गई। मौके से पुलिस ने पाँच लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

जानकारी के मुताबिक लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करते हुए मेरठ शहर के जली कोठी इलाके में दो दिनों से जलसे का आयोजन किया जा रहा था। इसकी जानकारी गुरुवार (14 मई, 2020) देर रात एक व्यक्ति ने डीएम और एडीएम सिटी को फोन पर दी।

एडीएम सिटी ने अजय कुमार तिवारी ने अपने गनर से साथ जलसे पर छापा मारा। बाद में एडीएम ने एसपी सिटी को सूचना दी तो पुलिस हरकत में आ गई।

मौके पर पहुँचे एडीएम को जलसे की व्यवस्था देख रहे यूसुफ बादशाह ने पहले तो यह कहकर गुमराह करने की कोशिश की कि केवल 20-25 लोग मौजूद हैं। बादशाह की बात पर संदेह होने पर एडीएम सिटी उस घर के अदंर दाखिल हो गए, जहाँ पर जलसा हो रहा था।

इस बीच घर के अंदर चल रहे जलसे 150 से अधिक लोगों को देख एडीएम दंग रह गए। पुलिस के पहुँचते ही भगदड़ मच गई और अधिकांश लोग दीवार कूदकर फरार हो गए। यूसुफ बादशाह सहित पाँच लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इन सभी के खिलाफ थाना देहली गेट में लॉकडाउन का उल्लंघन सहित कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

दरअसल जिस जली कोठी इलाके में दावत का आयोजन किया जा रहा था, वहाँ से थाना चंद कदमों की दूरी पर ही है। इतनी भीड़ जुटने के बावजूद थाना पुलिस इससे बेखबर थी। इतनी बड़ी लापरवाही का संज्ञान लेते हुए एसएसपी अजय साहनी ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ जाँच बिठा दी है।

जलसे के लिए बल्लियाँ लगाकर रास्ता रोक दिया गया। युसूफ बादशाह ने एडीएम से पहले तो कहा कि उसने इसके लिए पुलिस से इजाजत ली है, लेकिन वह बाद में अपने बयान से पलट गया।

आपको बता दें कि 11 अप्रैल को मेरठ के देहली गेट थाना स्थित कोरोना वायरस संक्रमण हॉटस्पॉट जली कोठी क्षेत्र को सील करने पहुँची पुलिस टीम पर स्थानीय लोगों ने पथराव कर दिया था। इस दौरान काफ़ी जबरदस्त पत्थरबाजी भी हुई थी, जिसमें सिटी मजिस्ट्रेट को भी चोटें आईं थीं।

इतना ही नहीं उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए कई थानों की पुलिस फोर्स को बुलाना पड़ा था। दरअसल इस इलाके में अभी तक 13 कोरोना पॉजिटिव के केस सामने आ चुके हैं।

‘आजकल हर कोई विशेषज्ञ बन गया है’: लॉकडाउन में दायर वे याचिकाएँ जिन पर SC बिफरा, फटकारा, जुर्माना लगाया

कोरोना वायरस के कारण लागू हुए देशव्यापी लॉकडाउन के बीच खुली शराब की दुकानों को बंद कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका को आज अदालत ने खारिज कर दिया। अदालत ने ऐसी बेकार की अर्जी डालने पर याचिकाकर्ता पर 1लाख रुपए का फाइन लगाया है। 

न्यायधीश एल नागेश्वर राव, एसके कौल और बीआर गवई की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि ये सब केवल पब्लिसिटी के लिए किया जा रहा है।

SC ने कहा, ”ये याचिकाएँ काम की कमी के कारण दाखिल की गई हैं। हम इन याचिकाओं से निपट नहीं सकते। इन मुद्दों से निपटने के लिए व्यवस्था है। ये याचिकाएँ केवल प्रचार के लिए हैं।  याचिकाकर्ता ने अदालत से शराब की दुकानों को बंद करने के लिए कहा, क्योंकि सरकार द्वारा किसी भी तरह सामाजिक दूरी का पालन नहीं किया जा रहा है।”

गौरतलब है कि ये पहला मामला नहीं है जब सरकार ने लॉकडाउन के दौरान आई ऐसी निराधार माँग वाली याचिका (जिनपर सरकार काम कर रही है या जिनका कोई औचित्य नहीं है) पर प्रतिक्रिया देते हुए उसे निरस्त किया हो। इससे पहले भी कुछ ऐसे मामले आए हैं, जब सुप्रीम कोर्ट को याचिकाकर्ता को फटकार लगानी पड़ी और सबक देने के लिए फाइन लगाना पड़ा।

प्रवासी मजदूरों को लेकर दायर याचिका पर SC

लॉकडाउन के दौरान मजूदरों की घर वापसी और हादसे में उनकी मौत पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार यानी आज अपनी प्रतिक्रिया दी और मामले पर सुनवाई करने से साफ मना कर दिया। कोर्ट ने वकील आलोक श्रीवास्तव की याचिका पर उन्हें फटकार लगाते हुए कहा कि उनकी याचिका पूर्ण रूप से अखबार की रिपोर्ट पर आधारित थी।

बता दें, इस याचिका में औरंगाबाद की घटना का हवाला देकर कहा गया कि सरकार मजदूरों को उनके राज्य भेजने तक आश्रय स्थान व खाने-पीने का इंतजाम करे। इस पर सॉलिस्टर तुषार मेहता ने कहा कि सरकार मजदूरों को भेजने का प्रबंध कर रही है। लेकिन लोग सब्र रखकर अपनी बारी का इंतजार नहीं कर रहे।

कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा, “हर वकील कागज पर घटनाओं को पढ़ता है और हर विषय के बारे में जानकार हो जाता है। आपका ज्ञान पूरी तरह से अखबार की कटिंग पर आधारित है और फिर आप चाहते हैं कि यह कोर्ट तय करे। राज्य को इस पर फैसला करने दें। कोर्ट इस पर क्यों फैसला करे या सुने? हम आपको स्पेशल लॉकडाउन पास देंगे। क्या आप खुद जाकर सरकारी आदेशों को लागू करवा सकते हैं?”

मास्क और सैनिटाइजर को GST फ्री करने की याचिका

पिछले महीने  कोरोना वायरस संक्रमण के बीच मास्क और सैनिटाइजर को जीएसटी फ्री करने की याचिका पर अदालत ने याचिकाकर्ता को फटकारा था। 

दरअसल, इस मामले में याचिकाकर्ता ने कोर्ट से माँग की थी कि मामले को गंभीरता से लेते हुए इन दोनो उत्पादों से जीएसटी हटा लेना चाहिए ताकि आम नागरिकों को इस महामारी की स्थिति में किफायती दामों पर मिल सके।

मगर,  कोर्ट ने एडवोकेट को फटकार लगाते हुए कहा, “आप एडवोकेट हैं और इस समय आपके पास कोई काम नहीं है, इसका मतलब ये नहीं है कि कुछ भी याचिका दायर कर देंगे।”

जब SC ने कहा- सब विशेषज्ञ बन गए हैं

पुलिस को पीपीई देने की माँग, उनके वेतन में कटौती न करने की माँग और बोनस के रूप में प्रोत्साहन राशि देने की माँग वाली याचिका को भी इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने 5 मई को खारिज किया था। इस याचिका को रिटायर्ड पुलिस अधिकारी भानुप्रताप बर्गे ने दायर किया था।

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था, “आजकल हर कोई कोविड 19 का विशेषज्ञ बन गया है। बेहतर हो आप संबंधित राज्य सरकारों के सामने अपना सुझाव रखिए। अगर कोई राज्य वाकई पुलिसकर्मियों का वेतन काट रहा है, तो वहाँ की सरकार को ज्ञापन दीजिए। हाईकोर्ट में याचिका लगाइए।”

नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम फ्री करने की माँग SC ने ठुकराई

इसी प्रकार, पिछले महीने सरकार ने एक याचिका और खारिज की थी। याचिकाकर्ता अपनी इस याचिका में फोन कॉल, इंटरनेट, डीटीएच के साथ नेटफ्लिक्स के वीडियो भी मुफ्त में उपलब्ध कराने की माँग की थी। इसे देखने के बाद कोर्ट ने याचिका दायर करने वाले वकील मनोहर प्रताप पर खासी नाराजगी दिखाई और कहा, “यह किस तरह की याचिका है? क्या आप कुछ भी दाखिल कर देंगे?”

पीएम फंड को अवैध बताने वाली याचिका पर भी अदालत ने गुस्सा दिखाया

पीएम केयर्स फंड को अवैध बताने वाले याचिका को देखने के बाद भी कोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाई थी। इस याचिका में इलाहाबाद के शाश्वत आनंद समेत 4 वकीलों ने आरोप लगाया था कि इसे बिना किसी कानूनी प्रावधान के शुरू किया गया है। इसलिए इसमें सारा जमा पैसा राष्ट्रीय आपदा राहत कोष में स्थांतरित किया जाए।

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा था, “आपकी याचिका राजनीति से प्रेरित लग रही है, या तो आप इसे वापस लीजिए या हम आप पर जुर्माना लगाते हैं।”

 ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ शब्द पर आपत्ति जताने वाली याचिका खारिज

कोरोना से बचने के लिए प्रचलन में आए सोशल डिस्टेंसिंग शब्द पर आपत्ति जताते हुए याचिकाकर्ता शकील कुरैशी की माँग पर चौंक पड़े। दरअसल, इस याचिकाकर्ता के वकील ने इस शब्द के इस्तेमाल को भेदभाव भरा बताया और कहा कि इससे अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव हो सकता है।

इसे सुनने के बाद अदालत ने कहा,  “आप इसमें भी अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक का मुद्दा ढूँढ लाए? भला बीमारी से बचने के लिए किए जा रहे हैं उपाय पर आपको क्या आपत्ति है?” इसके अलावा इस याचिका पर सुनवाई से मना करते हुए याचिकाकर्ता पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया।

कोरोना महामारी के बीच दलित, मुस्लिमों, नॉर्थ-इस्ट वालों से भेदभाव 

देश में कोविड 19 की महामारी के बीच दलित, मुस्लिम, उत्तर-पूर्व भारत के लोगों से इलाज में भेदभाव किया जा रहा है। जजों ने याचिका पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह का कोई तथ्य सामने नहीं आया है। वकीलों ने घर बैठे याचिका तैयार कर दी है।

कोर्ट सवालिया लहजे में पूछा कि किस आधार पर ये दलीलें दी जा रही हैं? उन्होंने कहा कि ऐसी आशंकाओं से निपटने के लिए सरकार के पहले से दिशा-निर्देश, एडवाइजरी हैं।

लॉकडाउन में किराए का सवाल उठा रहे वकील को फटकार

कोरोना महामारी के समय में किराए पर रह रहे लोगों से किराए न माँगने के गृह मंत्रालय के आदेश का पूरी तरह पालन कराने हेतु एक याचिका दायर हुई। इस याचिका को देखकर कोर्ट ने पहले वकील को फटकार लगाई। फिर कहा, “हमारा काम सरकार के आदेश को लागू करवाना नहीं है। सरकार ने शिकायत के लिए हेल्पलाइन बना रखी है। जिसे समस्या हो वहाँ शिकायत कर सकता है। कुछ वकीलों के पास इन दिनों काम नहीं है, तो कोविड 19 पर ही कोई न कोई याचिका दाखिल कर दे रहे हैं। आप जैसों पर जुर्माना लगना चाहिए।”

म्यांमार ने भारत को सौंपे नॉर्थ-ईस्ट के 22 उग्रवादी: NSA अजीत डोभाल के प्रयासों ने दिखाया रंग

म्यांमार की सेना ने नॉर्थ-ईस्ट के 22 उग्रवादी भारत को सौंपे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के नेतृत्व में संचालित ऑपरेशन के कारण यह मुमकिन हो पाया है।

यह पहला मौका है जब म्यांमार ने पूर्वोत्तर के उग्रवादियों को सौंपने के भारत सरकार के अनुरोध पर काम किया है।डोभाल अरसे से इस दिशा में सक्रिय थे।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 22 उग्रवादियों को म्यांमार की सेना ने भारत को सौंप दिया है। विशेष विमान से इन्हें भारत लाया गया। अब ये उग्रवादी मणिपुर और असम की पुलिस को सौंप दिए जाएँगे।

जानकारी के मुताबिक 22 विद्रोहियों में से 12 मणिपुर में चार विद्रोही समूहों से जुड़े हुए हैं। ये उग्रवादी UNLF, PREPAK (Pro), KYKL और PLA से हैं। बाकी 10 एनडीएफबी (एस) और केएलओ जैसे असम में सक्रिय समूहों से जुड़े हैं।

डोभाल के अभियान से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि ऐसा पहली बार हुआ कि जब म्यांमार सरकार ने नॉर्थ-ईस्ट के विद्रोही समूहों के नेताओं को सौंपने के भारत के अनुरोध पर काम किया है। यह दोनों देशों के बीच बढ़ते खुफिया और रक्षा सहयोग के कारण संभव हुआ है। वहीं सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि म्यांमार सरकार के लिए यह एक बड़ा कदम है और दोनों देशों के बीच गहराते संबंधों का यह एक परिणाम भी है।

दरअसल म्यांमार के साथ भारत की 1,600 किलोमीटर की सीमा लगती है। लेकिन म्यांमार की सेना द्वारा ऑपरेशन करने पर सहमति बनने के बाद पिछले कुछ वर्षों से उग्रवादी समूह दवाब में हैं। पिछले साल, म्यांमार की सेना ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा प्रदान की गई इंटेलिजेंस सूचना के आधार पर अभियान चलाया था। इन अभियानों में 22 विद्रोहियों को म्यांमार सेना ने सागिंग क्षेत्र में पकड़ा था।

आपको बता दें कि इससे पहले गृहमंत्री अमित शाह ने असम में शांति बहाल को लेकर 34 साल पुराने विवाद को सुलझाया था, जिसके तहत 6 उग्रवादी संगठनों ने सरकार के सामने घुटने टेक दिए थे। इसके लिए त्रिपक्षीय करार पर हस्ताक्षर किए गए थे।

दलितों ने पीटा, मूत्र पीने को किया मजबूर: मध्य प्रदेश के शिवपुरी में 19 साल के युवक ने की आत्महत्या

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में 19 साल के विकास शर्मा ने आत्महत्या कर ली। कथित तौर पर दलित समुदाय की दो महिलाओं समेत तीन लोगों ने बेरहमी से उसकी पिटाई की थी। उसे मूत्र पीने को मजबूर किया था।

घटना बुधवार (13मई 2020) को शिवपुरी जिले के साजोर गाँव में घटी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक की पहचान विकास शर्मा के तौर पर की गई है। दलित समुदाय के तीन लोगों के हमले के बाद उसने अपने घर में फाँसी लगा ली। पुलिस को मौके से सुसाइड नोट और वीडियो क्लिप मिली है।

कथित तौर पर, विकास ने मोबाइल पर मरने की बात कहते हुए एक वीडियो भी शूट की और सुसाइड नोट में घटना के बारे में बताया है। इसके मुताबिक वह पास के मंदिर में चढ़ाने के लिए एक हैंडपंप पर जल लेने गया था। जब वह पानी भर रहा था, तब पास खड़े तीन दलितों- मनोज कोली, तारावती कोली और प्रियंका कोली के बर्तन पर कुछ बूँदें गिर गईं।

इस पर क्रोधित हो तीनों ने विकास को बालों से पकड़कर खींचा और उसके साथ मारपीट की। तीनों ने विकास के लौटे को उठाया और उसमें पेशाब कर उसे जबरदस्ती पीने के लिए मजबूर किया। इससे आहत विकास ने आत्महत्या कर ली।

शिवपुरी के सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस राजेश सिंह चंदेल के मुताबिक, सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन पर आत्महत्या के लिए भड़काने और जानबूझकर चोट पहुँचाने के लिए धारा 306 और 323 के तहत केस दर्ज किया गया है।

आत्महत्या की इस घटना के बाद ब्राह्मण समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल ने शिवपुरी जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। मध्य प्रदेश के सीएम को संबोधित ज्ञापन में पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपए मुआवजा देने की माँग की गई है।

गरीब नवाज नगर में मास्क न पहनने पर हुए विवाद में मुंबई पुलिस पर धारधार हथियार से हमला, 3 घायल

मुंबई पुलिस पर गुरुवार (मई 14, 2020) को धारधार हथियार से हमले का मामला सामने आया। घटना मध्य मुंबई के एंटप हिल इलाके के नजदीक गरीब नवाज नगर में घटी। यहाँ विवाद की शुरुआत मास्क नियम का पालन कराने को लेकर हुई।

खबरों के अनुसार, मुंबई के गरीब नवाज नगर इलाके में दो गुट आपस में फेस मास्क पहनने को लेकर भिड़े हुए थे। पर, जैसे ही पुलिस व राज्य रिजर्व पुलिस बल ने मौके पर पहुँचकर बीच बचाव करना शुरू किया, तो एक ग्रुप ने पुलिस पर ही धारदार हथियार से हमला कर दिया। पूरी घटना में 3 पुलिसकर्मी घायल हो गए।

इस मामले पर मुंबई पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी प्रणय अशोक ने बताया कि घटना में 3 पुलिसकर्मी घायल हुए है। दोनों पक्षों के बीच फेसमास्क को लेकर विवाद शुरू हुआ। इसी कड़ी में पुलिसबल पर धारदार हथियार से हमला किया गया है। इस मामले में आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। आगे जाँच के आधार पर कार्रवाई होगी।

गौरतलब है कि इस घटना से पहले कोरोना महामारी से बचाव हेतु नियमों का पालन कराने वाली पुलिस पर अलग-अलग राज्यों से हमले की कई घटना सामने आई हैं। पिछले महीने राजस्थान के टोंक के कसाई मोहल्ला में एक ऐसी ही घटना हुई थी। 

उस समय कोरोना प्रभावित अल्पसंख्यक इलाकों में गश्त करने गई पुलिस पर लाठी-डंडे और तलवार से निशाना बनाया गया था। इस दौरान भी तीन पुलिसकर्मी जख्मी हुए थे। हमला उस वक्त हुआ था, जब मेडिकल टीम कोरोना से जान गॅंवाने वाले एक शख्स के परिजनों को क्वारंटाइन करने पहुँची थी। इलाके के लोगों ने मेडिकल टीम को घेर लिया और पथराव किया था। इस घटना में डॉक्टर समेत कई स्वास्थ्यकर्मी घायल हुए थे। पुलिस ने 17 लोगों को गिरफ्तार किया था।

इसके अलावा पश्चिम बंगाल के हावड़ा में भी लॉकडाउन का पालन कराने गई पुलिस पर हमला हुआ था। इस वाकये में भी दो से तीन पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इस घटना में पुलिस पर वार सिर्फ़ इसलिए हुआ था क्योंकि उन्होंने सड़क पर घूम रहे लोगों को घर जाने के लिए कह दिया था।

लाउडस्पीकर से अजान नहीं, दूसरों को सुनने के लिए मजबूर करने का अधिकार किसी को नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

लाउडस्पीकर से अजान और गाजीपुर जिले में डीएम द्वारा लॉकडाउन के दौरान अजान पर लगाई गई पाबंदी को लेकर इलाहबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने माना है कि लाउडस्पीकर से अजान पर प्रतिबंध वैध है, क्योंकि यह इस्लाम का हिस्सा नहीं है।

अदालत ने कहा है कि किसी भी मस्जिद से लाउडस्पीकर से अजान करना दूसरे लोगों के अधिकारों में दखल देना है। दूसरों को सुनने के लिए मजबूर करने का अधिकार किसी को नहीं है।

शुक्रवार (15 मई, 2020) को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मस्जिद से अजान पर बड़ा फैसला देते हुए कहा कि अजान इस्लाम का हिस्सा है, लेकिन लाउडस्पीकर से अजान देना इस्लाम का हिस्सा नहीं हो सकता। इसके लिए कोर्ट ने तर्क दिया कि लाउडस्पीकर के आने से पहले मस्जिदों से मानव आवाज में अजान दी जाती थी। मानव आवाज में मस्जिदों से अजान दी जा सकती है।

वहीं बसपा सांसद अफजाल अंसारी की याचिका पर फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने गाजीपुर के डीएम के आदेश को रद्द कर दिया और मस्जिदों से लाउडस्पीकर के बिना अजान को मँजूरी दे दी। अदालत ने कहा कि मस्जिदों में अजान कोरोना की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं है।

हालाँकि कोर्ट ने कहा कि अजान के समय लाउडस्पीकर के प्रयोग से वह सहमत नहीं है। इसके लिए कोर्ट ने मस्जिदों से लाउडस्पीकर से अजान पर रोक को भी वैध माना है। साथ ही कोर्ट ने जिला प्रशासन से रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की इजाजत नहीं देने को कहा है।

न्यायमूर्ति शशिकान्त गुप्ता तथा न्यायमूर्ति अजित कुमार की खंडपीठ ने अफजाल अंसारी व फर्रूखाबाद के सैयद मोहम्मद फैजल की याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाते हुए मुख्य सचिव को आदेश का सभी जिलाधिकारियों से अनुपालन कराने का निर्देश दिया है।

दरअसल याचिकाकर्ता ने लाउडस्पीकर से मस्जिद से रमजान माह में अजान की अनुमति न देने को धार्मिक स्वतंत्रता के मूल अधिकारों का उल्लंघन करने को लेकर मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिख इस मामले में दखल देने माँग की थी। इस याचिका को मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर ने स्वीकार कर लिया था साथ ही सरकार से इस पर पक्ष रखने को कहा था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुनाया।

₹20 लाख करोड़ की तीसरी किस्त में किसानों, खेती से जुड़े कामों के लिए ₹1 लाख करोड़ की घोषणा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आर्थिक पैकेज की तीसरी किश्त की घोषणा कर रही हैं। पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा COVID-19 वायरस के कारण अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान की भरपाई के ​लिए 20 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज के ऐलान के बाद वित्त मंत्री ने प्रेस वार्ता के जरिए इसकी विस्तृत जानकारी दी है।

आज की वार्ता का मुख्य विषय किसान हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र के लिए 11 ऐलान किए जाएँगे। वित्त मंत्री ने कहा कि वो आज 11 उपायों की घोषणा करेंगी, जिनमें से 8 बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने, क्षमता और बेहतर लॉजिस्टिक के निर्माण से संबंधित हैं, जबकि बाकी 3 शासन और प्रशासनिक सुधारों से संबंधित होंगे।

प्रमुख बातें इस प्रकार हैं

  • लॉकडाउन अवधि के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 74,300 करोड़ रुपए से अधिक की खरीद की गई; पीएम किसान निधि में 18700 करोड़ रुपए का हस्तांतरण किया गया।
  • लॉकडाउन में 74300 करोड़ के कृषि उत्पादन खरीदे गए।
  • किसान बीमा योजना के तहत 6400 करोड़ का क्लेम दिया गया, 560 लाख लीटर दूध खरीदा गया है। 2 महीने में पीएम किसान योजना के तहत किसानों को 18,700 करोड़ रुपए दिए गए।
  • लॉकडाउन अवधि के दौरान दूध की माँग 20-25% कम हो गई। 2020-21 में डेयरी सहकारी समितियों को 2% प्रति वर्ष दर से ब्याज उपदान प्रदान करने की नई योजना लाई गई है। इस योजना में 5000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त नकदी से 2 करोड़ किसानों को लाभ होगा।
  •  कृषि की मजबूती और भंडारण की सुविधा के लिए 1 लाख करोड़
  • प्रधानमंत्री मत्सय संपदा योजना: 20 हजार करोड़ रूपए के लिए योजना, मछुआरे भाई-बहन को समुद्री और अंतरदेशीय मत्सय पालन में बल मिले।
  • 11 हजार करोड़ रूपए मत्सय पालने के लिए मिलेंगी। 9 हजार करोड़ रुपए आधारभूत ढाँचे के लिए इस्तेमाल किए जाएँगे।
  • अगले पाँच साल में 70 लाख टन मछली उत्पादन होगा।
  • 55 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। नाव और मछुआरों का बीमा होगा।
  • भारत में पशुधन को बढ़ाने के उद्देश्य से (भैंस, भेड़, बकरी और सुअर) 100% टीकाकरण के लिए 13,343 करोड़ रूपए के कुल परिव्यय के साथ ‘राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम’ की शुरूआत की गई है।
  • 15,000 करोड़ रुपए के प्रावधान के साथ सरकार ने पशुपालन अवसंरचना विकास निधि की घोषणा की।

‘हम मोदी को मारेंगे’: इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज से डिस्चार्ज हुए परिवार के 6 साल के बच्चे ने लगाया नारा

एक वीडियो सामने आया है। इसमें एक बच्चा ‘हम मोदी को मारेंगे’ का नारा लगाता सुनाई पड़ रहा है। वीडियो इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज का बताया जा रहा है। यह तब शूट किया गया जब कोरोना संक्रमण का इलाज कराकर एक परिवार अस्पताल से डिस्चार्ज हुआ था। नारा लगाने वाला बच्चा इसी परिवार का बताया जाता है।

जिस इंडेक्स मेडिकल कॉलेज (Index Medical College) की यह घटना है, वहाँ बतौर अतिथि कोरोना से डिस्चार्ज होने वाले मरीजों का उत्साहवर्धन करने के लिए पूर्व विधायक डॉ राजेश सोनकर भी उपस्थित थे।

ऑपइंडिया से बात करते हुए पूर्व विधायक और भाजपा नेता राजेश सोनकर ने कहा कि इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के हॉस्पिटल से ठीक हो चुके कोरोना मरीजों को 13 मई को घर भेज गया था। उन्होंने बताया कि ये सभी लोग तबलीगी जमात से जुड़े थे।

इस मौके पर अस्पताल का स्टाफ, मैनेजमेंट, पूर्व विधायक और भाजपा नेता राजेश सोनकर डिस्चार्ज हुए मरीजों का हौसला बढ़ाने के लिए वहाँ मौजूद थे। जिस वक़्त सभी लोग सभी ताली बजाकर संक्रमण मुक्त हुए लोगों का हौसला बढ़ा रहे थे तभी उस परिवार के एक 6 साल के बच्चे ने जोर से नारा लगाते हुए कहा कि हम मोदी को मारेंगे।

पूर्व विधायक ने बताया कि डिस्चार्ज किए गए मरीज समुदाय विशेष से ताल्लुक रखते हैं और विभिन्न राज्यों से थे। बच्चे ने जैसे ही मोदी को मारने का नारा लगाया मोबाइल की रिकॉर्डिंग बंद कर दी गई।

हालाँकि, बच्चे के चिल्लाने की आवाज मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड हो चुकी थी और अब यह सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

भाजपा नेता राजेश सोनकर ने बच्चे के मुँह से ये बात सुनकर उसे और उसके परिवार को समझाने का भी प्रयास किया कि इस प्रकार की दुर्भावना गलत है। राजेश सोनकर ने कहा कि मोदी सरकार और राज्य सरकार मिल-जुलकर कोरोना वायरस से लड़ाई में समाज के हर वर्ग को हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध करा रही है। ऐसे में समुदाय विशेष के लोगों का यह व्यवहार दुखद है।

उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ मौजूद उनके अभिभावकों के चेहरे पर ग्लानि के बजाए हँसी थी और उन्होंने बच्चे को चुप कराने का भी प्रयास नहीं किया।

ट्विटर पर भी सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत पटेल उमराव ने यह वीडियो शेयर करते हुए लिखा है –

“2019 में सरकार द्वारा दी गई कुल छात्रवृत्ति में से 80% मुस्लिम बच्चों को दी गई। 88 लाख मुस्लिम, 8.26 ईसाई बच्चे, 5.45 लाख सिख और 5.2 लाख हिन्दू बच्चों को स्कॉलरशिप दी गई है। परिणाम में सरकारी अस्पताल से कोरोना का इलाज कराकर निकले परिवार का बच्चा कह रहा है- हम मोदी को मारेंगे।”

उल्लेखनीय है कि इंदौर मध्य प्रदेश का कोरोना संक्रमण से सर्वाधिक पीड़ित शहर है। यहॉं से पुलिस और मेडिकल टीम पर हमले और बदसलूकी की भी घटनाएँ सामने आ चुकी है। बावजूद इसके शासन-प्रशासन इस महामारी पर नियंत्रण करने का प्रयास कर रही है और काफी हद तक सफल भी रही है।

BJP सांसद ने कहा- ममता के आदेश पर पुलिस आयुक्त करना चाहता है हत्या, राज्यपाल को लिखी चिट्ठी

बैरकपुर के बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह ने बंगाल की CM ममता बनर्जी पर आरोप लगाया है कि उनके इशारे पर संयुक्त पुलिस आयुक्त अजय ठाकुर ने क्रॉस-फायरिंग के बहाने उनकी और उनके परिवार की हत्या का प्रयास किया।

बैरकपुर के भाजपा सांसद अर्जुन सिंह ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को लिखे पत्र में लिखा है कि संयुक्त पुलिस आयुक्त अजय ठाकुर ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देशों के तहत क्रॉस-फायरिंग के बहाने 14 मई को उनकी और उनके परिवार की हत्या का प्रयास किया।

भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि पुलिस अफसर उनके दफ्तर में अपनी टीम के साथ पहुँचे और वहाँ सब उथल-पुथल कर दिया।

उन्होंने लिखा– “लगभग 7:30 बजे, वह अपने 35 साथियों के साथ पहुँचे और मेरे कार्यालय में और मेरे आस-पास संदिग्ध तरीके से घूमने लगे, जब मेरे सुरक्षा अधिकारी प्रभारी ने उन्हें रोका, तो उन्होंने कहा कि वह नोटिस सर्व करने आए हैं।

BJP सांसद अर्जुन सिंह ने राज्यपाल को लिखी चिट्ठी

अर्जुन सिंह ने मई 14, को ट्वीट करते हुए लिखा, “मुझे नोटिस देने आए थे या एनकाउंटर करने? 8 गाड़ियों में पुलिस भरकर! मेरे घर पर आकर नोटिस लिखना ये कौन सा तरीका है नोटिस देने का? दीदी का डर अब उनकी हरकतों से झलक रहा है। और डरें क्यों नहीं, उनका सिंहासन जो अब जाने वाला है।”

अर्जुन सिंह ने कहा कि वो मरने से कभी नहीं डरते और आगामी दिनों में ममता बनर्जी के ऐसे अधिकारियों को कानून के तहत दंडित किया जाएगा।

इस मामले में कैलाश विजयवर्गीय ने भी ट्वीट करते हुए लिखा है, “पुलिस है या सुपारी डॉन? पश्चिम बंगाल पुलिस भाजपा के एक सांसद की जान की दुश्मन बनी हुई है। करीब सालभर से कई तरह के हथकंडे अपनाकर बैरकपुर के जॉइंट सीपी अजय ठाकुर उनके पीछे पड़े हैं। यदि हमारे सांसद के साथ कुछ भी अनिष्ट होता है, तो इसके जिम्मेदार अजय ठाकुर होगें!”

अर्जुन सिंह पर किया गया था बम से हमला

नागरिकता संशोधन कानून (CAB) के खिलाफ पश्चिम बंगाल में हिंसक प्रदर्शन के दौरान भी बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह की गाड़ी के नजदीक बम फेंका गया था।

इस हमले में सांसद बाल-बाल बच गए, लेकिन एक अन्य शख्स जख्मी हो गए थे। बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह ने इस हमले के लिए टीएमसी के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया था।