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माँ सलमा ने लगाई गुहार, बेटी शीबा तक खाना पहुँचा रहा RSS: लॉकडाउन में प्रयागराज से इंदौर की कहानी

वैसे तो लॉकडाउन में RSS पूरे देश में लोगों की जम कर सेवा कर रहा है लेकिन मध्य प्रदेश के इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता सभी के लिए मिसाल पेश कर रहे। इंदौर में संघ और सेवा भारती के कार्यकर्ता कोरोना वायरस के संक्रमण से उपजी आपदा और लॉकडाउन के बीच पीड़ितों के घरों तक राशन-पानी पहुँचाने के काम में तत्पर हैं। इसी क्रम में प्रयागराज के एक मुस्लिम परिवार ने भी आपदा के समय RSS से मदद माँगी। इंदौर में फँसी छात्रा तक सारी सामग्रियाँ और मदद संघ ने तुरंत पहुँचाई, जिसके बाद मुस्लिम परिवार ने संघ को धन्यवाद दिया।

संघ उक्त छात्रा तक सुबह-शाम खाना पहुँचा रहा है। मदद के लिए छात्रा की माँ ने गुहार लगाई थी, जो पेशे से डॉक्टर हैं। माँ ने परिचितों के जरिए संघ कार्यालय में सम्पर्क कर के मदद माँगी थी। उनकी बेटी शीबा सिद्दीकी इंदौर के एक कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई कर रही हैं। देश भर में 24 मार्च से ही केंद्र सरकार ने लॉकडाउन कर रखा है, ताकि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोका जा सके। शीबा भी इंदौर से अपने घर नहीं लौट पाईं। शीबा ने कलक्टर से गुहार लगाई थी कि उन्हें उनके घर जाने दिया जाए।

28 मार्च को उन्हें घर जाने की अनुमति मिल भी गई थी और इसके अगले ही दिन वो रवाना होने वाली थीं लेकिन कलक्टर बदल जाने के कारण शीबा का ये प्लान धरा का धरा रह गया। वो चिकित्सक नगर में रहती हैं। शीबा के कमरे में खाने-पीने का कोई सामान नहीं बचा था। उन्होंने अपनी माँ सलमा सिद्दीकी को ये बात बताई, जिन्हें अपनी बेटी के लिए चिंता होने लगी। शीबा किसी तरह सुबह कॉलेज और शाम को मेस में खा कर गुजारा कर रही थीं। इसी बीच सलमा के कुछ परिचितों ने उन्हें संघ का सम्पर्क नंबर दिया। स्वयंसेवक छात्र की सुरक्षा का भी ध्यान रख रहे हैं, जिससे परिजन निश्चिंत हैं।

संघ कार्यालय ने सारी जानकारी लेने के बाद सलमा को छत्रसाल नगर के नगर कार्यवाह गिरीश शर्मा से सम्पर्क करवाया। इसके बाद स्वयंसेवकों ने छात्रों तक सारी आवश्यक समाग्रियाँ पहुँचाई। अगर प्रयागराज की बात करें तो वहाँ भी संघ ने कुल 400 बस्तियों को चिह्नित कर के वहाँ काम करना शुरू किया है। वैसे तो संघ तीन हफ़्तों से राहत-कार्य में लगा है लेकिन अब उन इलाक़ों पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है, जहाँ शासन-प्रशासन को भी पहुँचने में दिक्कतें आ रही हैं।

‘नई दुनिया’ के इंदौर संस्करण में प्रकाशित ख़बर

हाल ही में मध्य प्रदेश की सीमा से सटे प्रयागराज के 275 गाँवों में संघ ने ज़रूरतमंदों की पूरी सूची तैयार की और उन सभी तक मदद पहुँचाई। इस काम में सेवा भारती को भी लगाया गया। राहत-कार्य में सोशल और फिजिकल डिस्टेन्सिंग का भी पालन किया जा रहा है। प्रयागराज में ऐसे 913 केंद्र खोले गए हैं, जहाँ से सामग्रियाँ भेजी जाती हैं। अकेले प्रयागराज में 2500 से ज्यादा स्वयंसेवकों को लगाया गया है। अब तक कुल 1.5 लाख लोगों तक राशन पहुँचाया जा चुका है।

अर्नब गोस्वामी ने एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया से दिया इस्तीफा, कहा- अब इस संस्था में फेक को फेक कहने का दम नहीं

रिपब्लिक टीवी (Republic TV) के संस्थापक अर्नब गोस्वामी (Arnab Goswami) ने आज लाइव शो के दौरान ही एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया से त्यागपत्र दे दिया। अर्नब गोस्वामी ने अपने इस्तीफे के लिए एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के गिरते हुए मूल्यों को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा कि एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने व्यक्तिगत पूर्वग्रहों के लिए नैतिकता से समझौता किया है।

अर्नब गोस्वामी अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए शेखर गुप्ता (Shekhar Gupta) का भी जिक्र किया। अर्नब ने कहा ने कहा कि वह काफी लंबे वक्त से एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के सदस्य हैं लेकिन अब यह मात्र कुछ लोगों का समूह है जिनमें फेक खबरों को फेक कहने का दम नहीं है।

अर्नब गोस्वामी ने लाइव टीवी शो में जिस वक्त इस्तीफा दिया, उस वक्त चैनले पर 16 अप्रैल को महाराष्ट्र के पालघर में हुई मॉब लिचिंग की घटना पर बहस हो रही थी। जिसमें भीड़ ने मिलकर तीन लोगों की पीट-पीटकर मॉब लिंचिंग कर उन्हें मार दिया। मृतकों में दो साधु और एक ड्राइवर थे।

अर्नब ने शेखर गुप्ता पर साधा निशाना

लाइव शो में ही अर्नब गोस्वामी कोरोना वायरस महामारी के दौरान फेक न्यूज के खिलाफ नहीं बोलने के लिए एडिटर्स गिल्ड के अध्यक्ष शेखर गुप्ता की भूमिका पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए अर्नब ने कहा, “शेखर गुप्ता, आप पहले मुझसे सुनिए… एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की जो भी विश्वसनीयता बची है, वो फेक न्यूज पर आपकी अपमानजनक चुप्पी से बर्बाद हो गई है। ये एक स्वयं सेवी संस्था हुआ करती थी। मैं लम्बे समय से एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया का सदस्य रहा हूँ और मैं, लाइव टीवी पर ही, एडिटोरियल एथिक्स पर इस संगठन के समझौते और केवल व्यक्तिगत हितों के लिए काम करने वाला संगठन होने के लिए, इससे इस्तीफा दे रहा हूँ। शेखर गुप्ता! मैं आप पर आरोप लगाता हूँ कि आपने इस तरह की घटनाओं पर बात न कर के पत्रकारिता की नैतिकता से समझौता किया है।”

सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया

अर्नब के इस्तीफ़ा देते ही ट्विटर पर #EditorsGuildOfIndia ट्रेंड करने लगा और लोगों ने अर्नब के इस फ़ैसले की जमकर सराहना की।

दूसरे मजहब के 5 लोगों ने किया हिन्दू का अंतिम संस्कार: TOI के फेक न्यूज़ से परिवार सदमे में, बेटे और भाई ने ख़बर को नकारा

मीडिया के एक बड़े वर्ग में ये चूल मची रहती है कि वो ऐसी कहानियाँ तलाशे, जिसमें खास मजहब ने हिन्दुओं की मदद की हो। जब ऐसी काहनी नहीं मिलती है तो फिर ख़ुद से ही बना दी जाती है। इसी तरह तेलंगाना के एक परिवार के बारे में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (TOI) में फेक न्यूज़ छपी कि वहाँ एक हिन्दू की मौत होने के बाद दूसरे मजहब के लोगों ने मिल कर उसे कन्धा दिया और उसके अंतिम संस्कार की भी व्यवस्था की। खैरताबाद के 50 वर्षीय वेणु महाराज की 16 अप्रैल को एक हॉस्पिटल में मृत्यु हो गई थी। इस लेख को कोरेस्पोंडेंट प्रीति विश्वास ने लिखा था, जो अख़बार के हर संस्करण में छपा। हैदराबाद में इसे पहले पन्ने पर जगह दी गई।

हैडिंग में लिखा गया कि समुदाय विशेष के 5 लोगों ने मिल कर एक हिन्दू की लाश को कंधा दिया और उसका अंतिम संस्कार किया। मृतक पेशे से ऑटो ड्राइवर था, जिसकी मौत टीबी के कारण हुई थी। अख़बार में यहाँ तक दावा किया गया कि दूसरे मजहब वालों ने पीड़ित परिवाए और अंतिम संस्कार में भाग लेने आए सम्बन्धियों के लिए भोजन की भी व्यवस्था की। अब सच्चाई सामने आई है। पता चला है कि पीड़ित परिवार झूठी ख़बर के कारण सदमे में है और ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई पर विचार कर रहा है।

मृतक के परिवार ने TOI की ख़बर को नकारा

एक स्थानीय पत्रकार ने भी इस बात की पुष्टि की है। मृतक के भाई विनोद ने भी बताया कि ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ में उनका जो बयान छपा है, उन्होंने ऐसा कुछ कहा ही नहीं है। टीओआई ने विनोद के हवाले से लिखा था कि उनके भाई की मौत के बाद घर-परिवार को देखने वाला कोई नहीं था। ‘स्वराज्य मैगजीन’ की स्वाति गोयल शर्मा से बात करते हुए विनोद ने बताया कि उनके भाई की मौत 16 अप्रैल को शाम 5 बजे हुई। इसके कुछ घंटों बाद मृत शरीर को घर लाया गया। इस बारे में विनोद ने आगे बताया:

“उस दिन महमूद अहमद नामक व्यक्ति भी हमसे मिलने आया, जो मेरे मृत भाई का दोस्त था। कुल 5 लोग हमारे घर आए। एक के अलावा बाकियों को मैं पहचानता भी नहीं था। उनका व्यवहार अच्छा था। उन्होंने हमें खाने के कुछ पैकेट्स भी दिए, हमें सांत्वना दी और फिर चले गए। अगले दिन हमने उन सबको श्मसान घाट पर देखा। जब हमारे पक्ष के कुछ लोग अर्थी उठा रहे थे तो उन्होंने ही पूछा कि क्या वो मदद कर सकते हैं? हमें नहीं पता था कि ऐसा करते हुए उनकी तस्वीरें ली जा रही हैं। ऐसी स्थिति में किसी को नहीं पता होता कि आसपास क्या सब हो रहा है?”

इसके बाद उनमें से एक ने विनोद को फोन दिया और कहा कि लाइन पर एक पत्रकार है, जो उनसे बात करना चाहता है। उसने ये भी दावा किया कि उनसे बात करने पर सरकार से कुछ मदद मिलेगी। इसके बाद विनोद ने जल्दी-जल्दी में पत्रकार से बातचीत की। दो दिनों बाद जब टीओआई में रिपोर्ट छपी तो परिवार को गुस्सा आया। उन्होंने कहा कि वो अपने समुदाय के बीच हँसी के पात्र बन गए हैं। उन्होंने कहा कि उनका परिवार बड़ा है और लॉकडाउन की वजह से सिर्फ़ 20 लोग जुटे थे, ऐसा कुछ नहीं था कि परिवार में लोगों की कमी थी।

TOI के फेक न्यूज़ से परिवार सदमे में: दूसरे समुदाय ने नहीं किए अंतिम संस्कार

विनोद ने बताया कि झूठी रिपोर्ट पढ़ने के बाद लोग उनसे पूछ रहे हैं कि क्या उनके पास अर्थी उठाने के लिए 4 लोग भी नहीं थे कि उन्होंने दूसरे मजहब से मदद माँगी? मृतक के भाई विनोद ने अपने बचत में से 35,000 रुपए ख़र्च किए लेकिन उन्हें इस बात का दुःख है कि समुदाय विशेष की वाहवाही के लिए ये सब प्रपंच रचा गया। मृतक के बेटे सचिन ने भी बताया कि बस्ती के लोगों ने उनके परिवार की हर तरह से मदद की। 5 लोगों ने उनके पिता के दोस्त होने की बात कह के अर्थी को कंधा दिया और इसका फोटो पत्रकारों को दे दिया। सचिन ने कहा कि टीओआई में पड़ोसियों द्वारा साथ न देने की बात एकदम ग़लत है।

2 साल पहले ही सचिन की माँ की भी मृत्यु हो गई थी। अब फेक न्यूज़ की वजह से पूरा परिवार सदमे में है। सचिन ने कहा कि अंतिम संस्कार में उनकी बस्ती के लोगों ने परिवार की मदद की है, दूसरे मजहब वालों ने नहीं। जबकि पत्रकार प्रीती विश्वास ने यहाँ तक दावा कर दिया कि उन्हीं लोगों ने परिवार को पुलिस की अनुमति दिलाई, उनके खाने-पीने की व्यवस्था की और अंतिम संस्कार भी किया। साथ ही उन्होंने दावा किया कि उन्हीं लोगो ने मकान मालिक से भी बात कर के उन्हें समझाया। इस पूरे मामले में घाघ TOI की पोल खुलती नज़र आ रही है।

इसी तरह एक बार ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने ख़बर परोसी थी कि बिहार के नवादा में दो महादलितों की लिंचिंग कर दी गई। बता दें कि नवादा में महादलित महिला की हत्या में जो लोग दोषी थे, वो उसी समुदाय से ताल्लुक रखते थे जिस समुदाय की मृतक थी। अर्थात, सभी आरोपित महादलित थे। इसी तरह ओलम्पिक पदक विजेता शटलर पीवी सिंधु ने अपने शब्द तोड़-मरोड़ कर पेश करने के लिए टाइम्स ऑफ़ इंडिया के पत्रकार को लताड़ लगाई थी। 

अरुणाचल प्रदेश: लॉकडाउन में BRO ने 27 दिन में नदी पर बना दिया ब्रिज, चीन सीमा से सटे गाँव तक पहुँचेगी खाद्य सामग्री

अरुणाचल प्रदेश के सुबनसिरी नदी पर देश में जारी लॉकडाउन के बीच बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने मात्र 27 दिनों में डेपोरिजो पुल बनाकर एक नई मिशाल कायम की है। इसके बाद अब भारत चीन सीमा से सटे गाँव तक खाद्य सामग्री, दवाईयाँ जैसी जरूरी वस्तुएँ पहुँचाना अब आसान हो जाएगा। इतना ही नहीं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किए गए पुल के उद्घाटन के बाद सरकार ने इसे आम लोगों के लिए खोल दिया है।

दरअसल सुबनसिरी नदी पर बनाए गए 430 फीट लंबे पुल का सोमवार को अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खाँडू ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पुल का उद्घाटन किया। इसके बाद यह पुल भारत-चीन सीमा पर लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) तक 40 टन वजनी वाहनों को पहुँचाने में मददगार साबित होगा। इतना ही नहीं पुल की क्षमता को देखते हुए अब सैन्य सामग्री भी LAC तक आसानी से भेजी जा सकेगी।

वहीं पुल की आवश्यकता को देखते हुए सरकार ने BRO को पुल बनाने के लिए दो महीने का समय दिया गया था, लेकिन BRO की टीम ने देश में जारी लॉकडाउन के बीच ही रात-दिन कार्य करके इसे मात्र 27 दिन में ही पूरा कर दिया। 17 मार्च से शरू हुआ निर्माण कार्य 14 अप्रैल को पूरा हो गया। खास बात यह कि पुल निर्माण के दौरान पूरी टीम ने लॉकडाउन के सभी नियमों का पालन भी किया। पुल के निर्माण का कार्य 23 बीआरटीएफ ने किया।

आपको बता दें कि दापोरिजो पर पुल बनाना आसान नहीं था। यहाँ पर लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के दो विवाविद एरिया आसफिला और माजा हैं। वहीं दापोरिजो पर एक पुराना पुल था जो 1992 में बना था, लेकिन वह पूरी तरह से जर्जर हो चुका था। इसके ऊपर से सिर्फ 9 टन का भार ही गुजर सकता था। यह पुल मुख्य रूप से पूरे अरुणाचल प्रदेश को दो मुख्य मार्गों लीकाबली-बसर-बामे-दापोरिजो और ईटानगर-जीरो-रागा-दापोरिजो को जोड़ता था।

वहीं BRO द्वारा किए गए इस कार्य पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी ट्वीट कर BRO की तारीफ की और लिखा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में BRO बहुत अच्छा काम कर रहा है। मैं महानिदेशक BRO और उनकी पूरी टीम को उनके सराहनीय कार्य के लिए बधाई देता हूँ।

गौरतलब है कि भारत-चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश में असफिला क्षेत्र को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। 8 अप्रैल 2018 को चीन ने भारतीय सेना द्वारा अरुणाचल प्रदेश के असफिला क्षेत्र में पेट्रोलिंग पर आपत्ति जताई थी और इस क्षेत्र पर अपना हक जताया था। चीन ने कहा था कि भारत द्वारा इस क्षेत्र में की जा रही पेट्रोलिंग अतिक्रमण है। यह क्षेत्र चीन का हिस्सा है।

हालाँकि, भारतीय सेना ने इस दावे को खारिज कर दिया था। भारत ने कहा था कि असफिला अरुणाचल प्रदेश के सुबनसिरी क्षेत्र का हिस्सा है, और हम यहाँ लगातार पेट्रोलिंग करते आ रहे हैं।

‘महाराष्ट्र के गृह मंत्री माओवादियों के लिए करते हैं काम, NCP हो पूरे भारत में बैन’ – पालघर लिंचिंग पर विजय कृष्ण का आरोप

शिवसेना नेता विजय कृष्ण ने पालघर में साधुओं की लिंचिग के मामले में लाइव डिबेट के दौरान पार्टी से इस्तीफा देने का खुलासा किया। ये वाकया हुआ अर्नब गोस्वामी के चैनल रिपब्लिक टीवी के 10 बजे वाले शो में। दरअसल शो में पालघर लिंचिंग पर डिबेट चल रहा था, जिसमें शिवसेना नेता ने भी हिस्सा लिया था। 

डिबेट के दौरान उन्होंने न सिर्फ इस शर्मनाक घटना के लिए शिवसेना को और राज्य के मुख्यमंत्री को लताड़ा, बल्कि उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया कि शरद पवार की पार्टी एनसीपी और महाराष्ट्र में शिवसेना के सहयोगी को पूरे भारत में बैन कर देना चाहिए। इस दौरान उन्होंने आदित्य ठाकरे के अहंकार पर भी जमकर बोला। 

विजय कृष्ण ने कहा कि आदित्य ठाकरे ने ट्विटर पर लिखा था कि उनका विचार कोई मायने नहीं रखता है और न ही शिवसेना के विचारों को दर्शाता है। इसलिए उन्होंने एक सप्ताह पहले ही शिवसेना से इस्तीफा दे दिया था।

विजय कृष्ण ने कहा कि आदित्य ठाकरे को लगता है कि शिवसेना उनकी निजी संपत्ति है। इसके साथ ही उन्होंने टीवी पर यह भी घोषणा की कि अब वह इस ‘महा विकृत अघाड़ी’ के खिलाफ हैं। बता दें कि विजय कृष्ण ने ‘महा विकास अघाड़ी’ का नाम बदलकर ‘महा विकृत अघाड़ी’ कर दिया और इस बात पर जोर दिया कि महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस और एनसीपी के साथ शिवसेना का गठबंधन ‘विकास’ के लिए नहीं बल्कि ‘विकृति’ के लिए हुआ है।

विजय कृष्णा ने चौंकाने वाले खुलासे भी किए। उन्होंने कहा कि शरद पवार ने वरवारा राव आदि जैसे शहरी नक्सलियों के खिलाफ एल्गार परिषद के मामलों को रोकने के लिए उद्धव ठाकरे से संपर्क किया। इसका खुलासा करते हुए उन्होंने कहा कि वह गिरफ्तार होने से डरते नहीं हैं। साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र के गृह मंत्री के इस्तीफे की भी माँग की। उनका कहना था कि वह माओवादियों के लिए काम करते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि शरद पवार और उनकी पार्टी वरवरा राव और गौतम नवलखा जैसे शहरी नक्सलियों को ‘गाँधीवादी’ मानते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पालघर में इन साधुओं की लिंचिंग के पीछे भी एक साजिश है, जिसे उजागर करने की आवश्यकता है और इसका नवलखा जैसे शहरी नक्सलियों से कोई कनेक्शन है। उसे गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

फिर उन्होंने महाराष्ट्र सरकार को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि सरकार हिंदुओं को कलंकित कर रही है और वह अपने द्वारा दिए गए बयानों को लेकर गिरफ्तार होने के लिए भी तैयार हैं।

राहत इंदौरी ने राशन के लिए लगाई गुहार तो मदद के लिए आगे आए तजिंदर बग्गा: शायर ने कहा- बहुत शुक्रिया आपका

प्रसिद्ध शायर डॉक्टर राहत इंदौरी अक्सर अपने मोदी-विरोधी रुख के कारण जाने जाते हैं। शायद ही ऐसा कोई कार्यक्रम हो, जहाँ वो ‘किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है’ या ‘तेरी जुबान कतरना बहुत ज़रूरी है’ जैसे शेर न पढ़ते हों। इधर जब उन्हें अपने एक परिचित तक मदद पहुँचानी थी तो उन्होंने दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा से गुहार लगाईं, जिन्होंने उनके निवेदन को न सिर्फ़ सहर्ष स्वीकार किया बल्कि इंदौर के विधायक रमेश मेंदोला से बात कर के मदद सुनिश्चित किया। गदगद इंदौरी ने उन्हें धन्यवाद भी दिया है।

राहत इंदौरी ने की अपील

हुआ यूँ की राहत इंदौरी ने ट्वीट किया कि उनके पास सचिन कोडिया और विजय चौरसिया का फोन आया है। ये दोनों इंदौर स्थित शांतिनाथ पुरी के हवा बंगल में रहते हैं, जो साईं मंदिर के पास है। ये दोनों वहाँ परिवार सहित रहते हैं। इंदौरी ने उन दोनों का नंबर भी ट्वीट किया और मध्य प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष सुदर्शन गुप्ता को टैग किया। राहत इंदौरी ने बताया कि ये दोनों ही पीड़ित व उनका परिवार काफ़ी परेशान है। परिवार में बच्चे भी हैं और राशन उपलब्ध नहीं है। उन्होंने राशन उपलब्ध कराने की गुहार लगाई।

तजिंदर बग्गा ने जैसे ही इस ट्वीट को देखा, वो हरकत में आ गए। उन्होंने इंदौर के विधायक रमेश मेंदोला को टैग करते हुए राहत इंदौरी की मदद करने का निवेदन किया। रमेश के एक सहयोगी ने तुरंत पीड़ित परिवार के फोन नंबर पर कॉल कर के उनसे बातचीत की और फिर उन्हें उचित मात्रा में राशन उपलब्ध कराया। उन्होंने बातचीत का स्क्रीनशॉट भी ट्वीट किया, जिसमें दिख रहा है कि 1:15 मिनट तक पीड़ित से बातचीत हुई। इसके बाद राहत इंदौरी ने दोनों नेताओं को टैग कर के उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने लिखा- ‘बहुत-बहुत शुक्रिया आपका।

बीच में एक व्यक्ति ने ये भी पूछा कि राहत इंदौरी तो ख़ुद सक्षम हैं, वो ऐसे लोगों की मदद कर सकते हैं। इस पर इंदौरी ने कहा कि वो सक्षम तो हैं लेकिन लॉकडाउन की वजह से पीड़ितों तक पहुँच नहीं पा रहे हैं, इसीलिए उन्होंने जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई है। बता दें कि ट्विटर पर सक्रिय तजिंदर बग्गा न सिर्फ़ सपने क्षेत्र में लोगों तक मदद पहुँचा रहे हैं बल्कि वो देश भर में जनप्रतिनिधियों और भाजपा कार्यकर्ताओं से सम्पर्क कर के पीड़ितों की मदद कर रहे हैं। अब तक उन्होंने सैकड़ों ऐसे लोगों की मदद की है। उन्होंने दिल्ली दंगों के बाद भी पीड़ितों की मदद की थी।

बग्गा ने दिल्ली के हरि नगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था लेकिन उन्हें हार मिली थी। हारने के बावजूद उन्होंने वादा किया था कि वो अपने ‘घोषणापत्र’ में लिखी बातों को पूरा करेंगे। इसके बाद लोगों ने उनकी जम कर सराहना की थी। कोरोना आपदा के बीच लगातार लोगों की मदद में लगे तजिंदर बग्गा की विपक्ष के नेतागण भी सराहना कर रहे हैं। सभी उन्हें टैग कर के अपनी समस्याएँ बताते हैं।

पाकिस्तान ने 4,000 आतंकियों को किया वॉच लिस्ट से बाहर, मुंबई हमले के मास्टर माइंड का नाम भी शामिल

पाकिस्तान ने अपनी निगरानी सूची से लगभग 4,000 आतंकवादियों के नामों को हटा दिया है। एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टार्टअप ने खुलासा किया है कि कि इस लिस्ट से उन लोगों के नाम भी हटाए गए हैं, जो 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के प्रमुख योजनाकार थे।

रिपोर्ट्स के अनुसार इनमें लश्कर का ऑपरेशन कमांडर जकी उर रहमान का नाम भी शामिल है। ये वही जकी उर रहमान है, जो 26/11 मुंबई आतंकी हमले का मास्टर माइंड था। अनुमान लगाए जा रहे हैं कि पाकिस्तान ने यह करनामा FATF की आगामी समीक्षा में ब्लैक लिस्ट होने के डर से किया है।

पाकिस्तान को FATF द्वारा ब्लैक लिस्ट होने का भय

दुनियाभर में आतंकियों को भेजने के मामले में पाकिस्तान के पुराने इतिहास के कारण ही आतंकी फंडिंग के लिए वैश्विक निगरानी संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को ग्रे सूची में रखा है। अब एफएटीएफ को जून में पाकिस्तान की प्रगति का फिर से मूल्यांकन करना है।

एफएटीएफ ने पाकिस्तान को चार महीने की मोहलत दी थी। उसने पाकिस्तान को 27 प्रतिबंधों वाली एक सूची सौंपी थी, जिसमें से ग्रे लिस्ट से बाहर होने के लिए पाकिस्तान ने 27 में से केवल 14 बिंदुओं का पालन किया। एफएटीएफ ने कहा था कि यदि पाकिस्तान को ग्रे सूची से बाहर निकलना है तो उसे इन 27 प्रतिबंधों को लागू करना ही होगा। अगर पाकिस्‍तान 27 बिंदुओं को पूरा करने में असफल रहता है तो एफएटीएफ उसे ब्लैक लिस्ट में डाल सकता है।

न्यूयॉर्क के एक स्टार्टअप कैसेलम ने दावा किया है कि पाकिस्तान सरकार भले ही कितना आतंकवाद विरोधी होने का दावा किया हो लेकिन पिछले डेढ़ साल में ग्लोबल टेरेरिस्ट वॉचलिस्ट से 3800 से ज्यादा आतंकियों के नाम हटा दिए हैं। पाकिस्तान ने न तो अभी तक किसी को इसकी जानकारी दी है और न ही हटाने से पहले किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था से इसकी चर्चा की गई थी।

बताया जा रहा है कि इमरान खान ने भी सत्ता में आने के बाद से अभी तक 1800 कुख्यात आतंकियों का नाम इस वॉच लिस्ट से हटा दिया है। अमेरिकी सरकार में पूर्व पॉलिसी एडवाइजर रह चुके पीटर पैटेटस्‍की के अनुसार, अंतरराष्‍ट्र‍ीय मानक यह है कि अगर वॉच लिस्‍ट से आतंकवादियों का नाम हटाया जाता है तो तुरंत उसकी सूचना वित्‍तीय क्षेत्र को देनी होती है। जबकि पाकिस्‍तान ने संदिग्‍ध आतंकवादियों के नाम हटाते समय ऐसा नहीं किया है।

पालघर मॉब लिंचिंग: अखिल भारतीय संत समिति ने की CBI जाँच की माँग, कहा- महाराष्ट्र के गृहमंत्री पर भरोसा नहीं

महाराष्ट्र के पालघर में जूना अखाड़े के दो संन्यासियों की मॉब लिंचिंग पर अखिल भारतीय संत समिति ने केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखा है। पत्र लिखकर अखिल भारतीय संत समिति ने पालघर मॉब लिंचिंग की सीबीआई जाँच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पत्र में हत्या के पीछे बड़ी साजिश की आशंका जताई गई है। यह पत्र अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्र नंद सरस्वती ने लिखा है।

अखिल भारतीय संत समिति महाराष्ट्र के पालघर जिले के गडचिंचले गाँव में जूना अखाड़े के दो संतों की निर्मम हत्या पर दुखी है। इस घटना से पूरे विश्व का हिंदू समाज मर्माहत है लेकिन घटना के समय और परिस्थितियों को लेकर संघ समिति के मन में कई सवाल है। क्योंकि गुजरात और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित गडचिंचले का पूरा इलाका क्रिस्टो क्रिश्चियन एवं नक्सलियों के कारण कुख्यात माना जाता है।

क्षेत्र में दो पूज्य संतों और उनके ड्राइवर की निर्मम हत्या का होना महाराष्ट्र के अंदर कानून व्यवस्था पर प्रश्न खड़े करता है। इसलिए माननीय गृह मंत्री भारत सरकार से आग्रह है कि संत समिति द्वारा सुझाए बिंदुओं पर केंद्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई द्वारा जाँच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करवाने की कृपा करें।

उन्होंने कहा कि जूना अखाड़े के संत कल्पवृक्ष गिरि, सुशील गिरि उत्कृष्ट कोटि के संत थे। उन्हें जिस तरह से पुलिस की मौजूदगी में पीट-पीट कर मौत के घाट उतारा गया, वह अमानवीय व क्रूरता की इंतहा है। यह घटना महाराष्ट्र पुलिस की विफलता का आइना है। ऐसे में इसकी जाँच स्थानीय एजेंसी से कराए जाने का कोई तुक नहीं है। इनके अलावा अन्य संतों ने दोषियों को फाँसी देने की माँग की है।

पालघर मॉब लिंचिंग पर महाराष्ट्र के गृहमंत्री पर भरोसा नहीं

पत्र में आगे लिखा गया है कि अखिल भारतीय संत समिति जूना अखाड़े के साथ खड़ी है वो चाहे जो भी निर्णय ले। महाराष्ट्र सरकार ने न्याय पूर्ण कार्रवाई नहीं की तो अखिल भारतीय संत समिति देशभर में आंदोलन खड़ा करेगी। संपूर्ण मामले में महाराष्ट्र के मंत्री अनिल देशमुख की भूमिका संदिग्ध है। इसलिए विश्वास नहीं कर सकते क्योंकि घटना को एक ही समुदाय का मामला बताते हुए ट्वीट करना एकपक्षीय है। इसलिए मामले की सीबीआई जाँच कराने की कृपा करें।

बता दें कि गुरुवार (अप्रैल 16, 2020) को मॉब लिंचिंग कर हत्या की घटना का वीडियो 3 दिन बाद रविवार को वायरल हुआ, जिसके बाद लोगों को सच्चाई पता चली थी। पालघर मॉब लिंचिंग का ये वीडियो दिल दहला देने वाला है। उस वीडियो को देख कर कोई भी काँप उठे। इस वीडियो में दिख रहे एक संदिग्ध व्यक्ति की पहचान को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने जानकारी माँगी थी। पता चला है कि वो शरद पवार की पार्टी का आदमी है। उसका नाम काशीनाथ चौधरी बताया गया। लेकिन, मीडिया का एक बड़ा वर्ग इस पर चुप है।

अनाज के अभाव में बिहार के बच्चे खा रहे मेंढक, Scroll ने किया दावा: फर्जी साबित हुई रिपोर्ट

बिहार के जहानाबाद में कुछ बच्चे खाना न मिलने के कारण लॉकडाउन में मेंढक खाने को मजबूर हैं। वामपंथी मीडिया पोर्टल स्क्रॉल ने ‘newsd’ नाम के यूट्यूब चैनल की एक वीडियो शेयर करते हुए यह दावा किया। जिसके बाद वहाँ के जिलाधिकारी ने खुद इस दावे की जाँच की और इन अफवाहों का खंडन करके स्क्रॉल के प्रोपगेंडे को ध्वस्त किया।

बिहार सरकार के सूचना और जनसंपर्क विभाग ने जानकारी साझा की कि वीडियो द्वारा किए गए दावों की जाँच करने पर, यह पाया गया कि बच्चों के घरों में पर्याप्त भोजन इकट्ठा था और इनमें से किसी के पास मेंढक पकड़ने या खाने का कोई कारण नहीं था। उन्होंने कहा कि इस वीडियो को कुछ लोगों ने जिला प्रशासन की छवि धूमिल करने के लिहाज से बनाया था।

इस स्पष्टीकरण के बाद पीआईबी फैक्ट चेक की टीम ने भी स्क्रॉल द्वारा शेयर की गई वीडियो को फर्जी और असत्यापित बताया। इसके अलावा बिना तथ्यों की जाँच परख के निराधार दावे करने पर पीआईबी ने लिखा, “स्क्रॉल- एक प्रमुख मीडिया चैनल ने जहानाबाद में बच्चों के मेंढक खाने को लेकर झूठा दावा किया कि उनके पास खाने को कुछ नहीं है। इसके बाद वीडियो वायरल हुआ। मगर डीएम जहानाबाद की जाँच में ये दावा झूठा पाया गया और ये भी पता चला कि इन बच्चों के घरों में खाने को पर्याप्त सामग्री थी।”

बता दें कि डीएम की ओर से की गई पड़ताल के बाद स्क्रॉल को अपनी रिपोर्ट को अपडेट करना पड़ा और उन्होंने ये भी बताया कि उनके झूठ का पर्दाफाश डीएम की पड़ताल के बाद हुआ।

गौरतलब है कि इससे पहले एनडीटीवी ने भी अरुणाचल प्रदेश को लेकर एक ऐसी झूठी खबर फैलाई थी। अपनी खबर में एनडीटीवी ने दावा किया था कि वहाँ पर लोग सांप का शिकार करके उसे खाने पर मजबूर हैं क्योंकि उनके पास चावल खाने को नहीं है। उन्होंने अपनी बात को सही साबित करने के लिए सोशल मीडिया पर कई वीडियो भी पोस्ट की, जिसमें वहाँ के अनुसूचित जनजाति के लोग 12 फीट का किंग कोबरा लेकर पोज दे रहे हैं। इस वीडियो को लेकर दावा किया कि उन्होंने किंग कोबरा का खाने के लिए शिकार किया।

एनडीटीवी ने किंग कोबरा के शिकारियों को लेकर फैलाया भ्रम

बाद में केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने इस खबर के लिए एनडीटीवी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि किंग कोबरा एक संरक्षित प्रजाति है और उसका सेवन करने के लिए कोई जनजाति उसका शिकार नहीं करती। इसके अलावा रिजिजू व अरुणाचल सरकार ने एनडीटीवी पर झूठी खबर फैलाने का भी आरोप लगाया। साथ ही स्पष्ट किया कि वहाँ चावल की कोई कमी नहीं है।

मालेगाँव में मातम मनाने कब्रिस्तान निकली 600 की भीड़, उधर अपने पिता के अंतिम संस्कार में नहीं गए CM योगी

महाराष्ट्र में लॉकडाउन का पालन कराने में सरकार बुरी तरह विफल रही है। चाहे वो पालघर में साधुओं की हत्या का मामला हो या फिर मुंबई के बांद्रा में हज़ारों लोगों का जुटना। अब मालेगाँव से ख़बर आई है, जहाँ जनाजे के लिए 500-600 लोगों की भीड़ जुट गई। ये सभी लोग कब्रिस्तान जा रहे थे। बता दें कि सरकार का आदेश है कि किसी भी प्रकार के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में 5 से ज्यादा लोग नहीं होने चाहिए, बावजूद इसके मालेगाँव में 500 से ज्यादा लोगों की भीड़ जुट गई। पुलिस ने रास्ते में ही उन सबको रोका और भीड़ को किसी तरह तितर-बितर किया। बावजूद इसके 25-30 लोग कब्रिस्तान पहुँच गए।

ये घटना मालेगाँव के आज़ादपुर क्षेत्र की है। पुलिस ने जब इतनी बड़ी भीड़ को देखा तो कहा गया कि 20 लोगों को अंदर जाने की इजाजत दी जा सकती है। महाराष्ट्र पुलिस का दावा है कि इसके बाद अधिकतर लोग अपने घर चले गए, जबकि 20 लोगों को ही सिर्फ़ कब्रिस्तान में जाने की इजाजत दी गई। हालाँकि, ये संख्या अधिक होने की बात भी कही जा रही है। पुलिस सब-इंस्पेक्टर अभिजीत जाधव ने बताया कि एक जनाजा कब्रिस्तान की ओर जा रही थी, जिसमें 500 या 600 की तादाद में लोग मातम मनाने जा रहे थे।

उन्होंने आगे बताया कि पुलिस ने हाथ जोड़ कर उनसे विनती करने हुए कहा कि आपलोग इतनी ज्यादा तादाद में मातम मनाने न जाएँ क्योंकि कोरोना वायरस के संक्रमण का ख़तरा है और अभी पूर्ण लॉकडाउन भी है। उन्होने कहा कि लोगों ने पुलिस की विनती मान ली और फिर ज्यादातर लोग वापस घर लौट गए। भीड़ जहाँ से गुजर रही थी, वहाँ पास में ही रहमानी मस्जिद भी है। पुलिस ने मालेगाँव के लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि वो जनता के लिए हमेशा खड़ी है और ऐसे ही उनका सहयोग करते रहें।

ये सब तब हो रहा है, जब देश के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक नई मिसाल पेश की है। सोमवार (अप्रैल 20, 2020) को जब उनके पिता आनंद सिंह बिष्ट के निधन की ख़बर आई, वो यूपी के कोविड-19 टीम के साथ बैठक कर रहे थे। 89 वर्षीय बीमार पिता के निधन के बावजूद उन्होंने बैठक नहीं रोकी। बैठक ख़त्म होने के बाद ही उन्होंने घर-परिवार से बातचीत की। सीएम योगी ने लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए और यूपी में अपनी मौजूदगी की महत्ता के कारण अपने पिता के अंतिम-संस्कार में भी भाग नहीं लेने का फ़ैसला लिया।

आज़ादपुर में रहमानी मस्जिद के पास से निकली भीड़ (वीडियो साभार: इंडिया टीवी)

इसके लिए उन्होंने बाकायदा अपनी माँ को पत्र लिख कर क्षमा-याचना की। योगी आदित्यनाथ ने अपने परिवार से यह भी अपील की है कि अंतिम-संस्कार में 5 से ज्यादा लोग न जुटें। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन ख़त्म होते ही वो अपने परिवार से मिलेंगे और अपनी माँ के दर्शन करेंगे। जब देश का इतना बड़ा नेता इस तरह के आदर्श के मानक स्थापित कर रहा है, तब भी मालेगाँव जैसी घटनाओं का होना ये बताता है कि समाज का एक ख़ास वर्ग बार-बार एक ही ग़लती करने और सरकारी दिशानिर्देशों की धज्जियाँ उड़ाने में अभ्यस्त हो चुका है।