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‘ट्रम्प के पैंट खोलते ही घुटनों पर भारत माता’: गालीबाज कॉमरेड नाम्बियार के पीछे पड़ी मुंबई पुलिस, अकाउंट लॉक

‘कॉमरेड’ अरुण नाम्बियार (Arun Nambiar) को सोशल मीडिया पर जहर उगलना महँगा पड़ा। ट्विटर पर ‘कॉमरेड’ अरुण के कुछ ऐसे पोस्ट के स्क्रीनशॉट सामने आए हैं, जिनमें उसने भारत (भारत माता के रूप में) से लेकर मृतक पुलिस अधिकारियों तक पर भद्दे ट्वीट और फेसबुक पोस्ट किए हैं।

अप्रैल 07, 2020 को किए गए एक ऐसे ही ट्वीट में ‘कॉमरेड’ अरुण नाम्बियार ने लिखा है- “तो ट्रम्प के अपनी पैंट की चेन खोलते ही भारत माता अपने घुटनों पर झुक गई?”

यह ट्वीट अरुण नाम्बियार ने डोनाल्ड ट्रम्प के भारत से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की माँग करने के बाद किया है। निश्चित तौर पर यह ट्वीट भारत माता के प्रतीक के रूप में उसके उपहास करने के उद्देश्य से किया गया था।

सत्ता और विचारधारा के विरोध में ये इतने आगे निकल चुके हैं कि अब उन्हें यह भी ध्यान नहीं रहता कि दिन-रात नफरत में डूबने का उन पर अब नकारात्मक असर होने लगा है। नतीजा यह होता है कि अपने भीतर के जहर को जब तक वो सोशल मीडिया पर चार लोगों के बीच नहीं उड़ेलते, तब तक उन्हें तसल्ली भी नहीं होती।

ट्विटर यूजर @NagpurKaRajini ने कॉमरेड अरुण नाम्बियार के इस ट्वीट के साथ गृह मंत्रालय के अलावा मुंबई पुलिस को टैग करते हुए इस पर संज्ञान लेने की अपील करते हुए लिखा कि यह एकाउंट आदतन गालीबाज है और इस पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।

मुंबई पुलिस ने इस पर संज्ञान लेते हुए जवाब में लिखा है कि उन्होंने इस बारे में सोशल मीडिया लैब और साइबर पुलिस स्टेशन को आवश्यक कार्रवाई करने के लिए निर्देश दे दिए हैं। फिलहाल ‘कॉमरेड’ अरुण नाम्बियार ने अपना ट्विटर अकाउंट लॉक कर लिया है ताकि कोई उसके ट्वीट देख न सके।

अरुण नाम्बियार की हरकतों को देखकर उसके सोशल मीडिया अकाउंट से उसके कुछ पुराने पोस्ट भी सामने आ रहे हैं। दिवाकर कोठारी ने ऐसे ही कुछ स्क्रीनशॉट्स पोस्ट किए हैं। इनमें से अगस्त 2016 के एक फेसबुक पोस्ट में अरुण नाम्बियार ने बिहार में भाजपा नेता अशोक जायसवाल की गोली से मौत पर लिखा था- “बिहार से अच्छी खबर- दानापुर के अशोक जायसवाल की गोली लगने से मौत।”

दिसम्बर 2019 को किए गए एक ट्वीट में अरुण नाम्बियार ने लिखा है- “बहुत सोचने के बाद मैंने अपने टॉयलेट का नाम ‘राम’ रखने का फैसला लिया है।”

एक अन्य ट्वीट में पेरियार के समर्थन में कॉमरेड नाम्बियार ने लिखा है कि अगर किसी उत्तर भारतीय ने पेरियार की मूर्ती को छूने की कोशिश की तो सबसे पहले भारत का झंडा झुकेगा।

800 साल पुराने गोरखनाथ मंदिर को 18वीं सदी के नवाब ने दी थी भूमि दान- आरफा खानम का झूठा दावा वायरल

कोरोना की वैश्विक महामारी के बीच कुछ लेफ्ट-लिबरल मीडिया गिरोह इस बात से खफ़ा हैं कि उन्हें ‘प्रेस की स्वतंत्रता’ के नाम पर लॉकडाउन के दौरान प्रपंच और झूठ फैलाने से रोका जा रहा है। इसी का प्रतिकार करने के लिए अब खीझ और झुंझलाहट में बैठे ‘दी वायर’ की प्रोपेगेंडा पत्रकार आरफा खानम का एक ऐसा ट्वीट वापस चर्चा का विषय है, जिसमें वो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ झूठ फैलाते हुए देखी गई हैं।

2019 में किए गए इस ट्वीट में सनसनी-प्रिय पत्रकार आरफा का दावा था कि गोरखनाथ मठ, जिसके कि योगी आदित्यनाथ महंत हैं, उसकी जमीन किसी मुस्लिम नवाब आसफ़ुद्दौला (Asaf-ud-Daula)ने ही दान दी थी। ख़ास बात यह है कि झूठ और बेबुनियाद होने के बावजूद यह ट्वीट डिलीट करना तो दूर, इसे वापस चर्चा का विषय बनाया जा रहा है।

वामपंथी मीडिया गिरोह की ही एक टुकड़ी ‘दी वायर’ की प्रोपेगेंडा पत्रकार आरफा ख़ानम ने इस ट्वीट के जरिए यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को टारगेट करते हुए लिखा –

“योगी के गोरखपुर स्थित इमामबाड़ा, जिसकी जमीन पर गोरखनाथ मंदिर (जिसके महंत योगी आदित्यनाथ हैं) है, उसकी जमीन एक मुस्लिम शासक नवाब आसफ़ुद्दौला (Asaf-ud-Daula) ने ही दी थी। उसने इस इमामबाड़ा के लिए भी जमीन दी थी। भारत घृणा से भरे हुए नेताओं के दावों के इतर बहुत विस्तृत है।”

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इस ट्वीट के साथ ही आरफा खानम शेरवानी (Arfa Khanum Sherwani) ने अपनी एक तस्वीर भी पोस्ट की है, जो कि आश्चर्यजनक रूप से फोटोशॉप नहीं है।

आरफा खानम का यह झूठ जन्म लेता, इस से पहले यह सवाल उठता है कि आखिर अट्ठारहवीं सदी के आसफ़ुद्दौला ने एक ऐसे मंदिर के लिए भूमि दान किस तरह से दे दी, जिसका इतिहास आठ सौ वर्ष पुराना है?

गोरखनाथ मंदिर का इतिहास, मुस्लिम आक्रान्ताओं ने ही किया था हमला

आरफा खानम के भारत की विभिन्नता के दावे के विपरीत वास्तविकता मंदिर के रिकॉर्ड से पता चलती है। इसमें पता चला है कि गोरखपुर गोरखनाथ मंदिर की संरचना और आकार समय की अवधि के साथ-साथ तब्दील हो गया था। जिसके पीछे कारण यह था कि सल्तनत और मुगल काल के शासन के दौरान मुस्लिम आक्रान्ताओं द्वारा इस मंदिर को नष्ट करने के कई प्रयास किए गए थे।

तथ्य यह है कि नवाब द्वारा दान देना तो दूर, गोरखनाथ मंदिर को दो बार मुस्लिम आक्रान्ताओं द्वारा नष्ट किया गया था। सबसे पहले इसे अलाउद्दीन खिलजी ने 14वीं सदी में नष्ट कर दिया, जिससे यह साबित होता है कि यह मंदिर 18वीं शताब्दी से भी पहले का है। इसके बाद में इसे 18वीं सदी में भारत के इस्लामी शासक औरंगजेब ने नष्ट किया था। इसके बावजूद भी ये जगह अभी भी अपनी पवित्रता के लिए, उसके महत्व के लिए जानी जाती है, अपनी पवित्र आभा रखती है।

अपनी ही वेबसाइट नहीं खोलती हैं आरफा

प्रोपेगेंडा रचने से पहले आरफा खानम कम से कम यह तो कर ही सकती थी कि अपना ही वामपंथी पूर्वग्रहों से सनी हुई वेबसाइट ‘दी वायर’ खोलकर एक बार गोरखनाथ मंदिर का इतिहास देख लेती। क्योंकि कुछ बातों को दी वायर भी प्रकाशित कर चुका है।

ऐसे में इस बड़ी भूल के लिए दी वायर के वरिष्ठ पत्रकार चाहें तो मार्च के महीने वाली फ़ाइल दोबारा खोलकर आरफा खानम के कुछ नंबर काट सकते हैं लेकिन इस एक बात का फायदा आरफा खानम को यकीनन मिल सकता है कि वह तो आजकल एक झूठी खबर फैलाने के आरोप के मामले में खुद नपे हुए हैं।

लेकिन एक ऐसा पोर्टल, जिसके संपादक सिद्धार्थ वरदराजन से लेकर हर जर्नलिस्ट तक रोजाना फेक न्यूज़ के कारोबार में संल्पित हों, वहाँ मनगढ़ंत कहानियाँ बनाने पर दंड नहीं बल्कि पारितोषिक का प्रावधान होता होगा। शायद होता ही होगा!

‘ट्रू इंडोलोजी’ के ट्विटर अकाउंट ने भी आरफा खानम के इस दावे को झूठ साबित करते हुए जॉर्ज ब्रिग्स की किताब “गोरखनाथ और कनफटा योगियों” का जिक्र करते हुए बताया है कि गोरखनाथ मंदिर का इतिहास नवाबों से भी बहुत पुराना है। यह माना जाता है कि इसकी स्थापना स्वयं गोरखनाथ द्वारा की गई थी। और यह यह बहुत पहले से ही मौजूद था।

ट्रू इंडोलोजी ने लिखा है कि नवाब आसफ़ुद्दौला द्वारा दान दी गई जमीन पर बनाना तो दूर, गोरखपुर इमामबाड़ा खुद एक ध्वस्त किए गए मंदिर की भूमि पर बनाया गया था। कनिंघम के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के आधार पर, सीता राम गोयल ने अपनी पुस्तक ‘हिंदू मंदिरों’ में इमामबाड़ा को प्राचीन मंदिर स्थलों की श्रेणी में सूचीबद्ध किया है।

फिलहाल एक भी ऐसा साक्ष्य या शिलालेख नहीं है, जिसमें बताया गया हो कि किसी नवाब ने गोरखपुर मंदिर के लिए भूमि दान की थी। हालाँकि, इस दावे के लिए एकमात्र ‘स्रोत’ एक हाल ही में रचा गया स्थानीय मिथक है, जो नवाब गुरु गोरखनाथ से मिला था। लेकिन, यह गलत है क्योंकि गोरखनाथ उस नवाब से सैकड़ों साल पहले के थे और कालचक्र में जाने जैसा कोई यंत्र अभी तक विकसित हुआ नहीं है।

फिलहाल ‘दी वायर’ को सिर्फ एक तथ्य से वास्ता रखना चाहिए और वो ये कि इस समय उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा ‘दी वायर’ के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन पर एफआईआर दायर की गई है जिसमें उन पर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक ट्वीट करने और जनता के बीच अफ़वाह और शत्रुता फैलाने के मामले में आरोप दर्ज हैं। इस मामले में उन्हें 14 अप्रैल को अयोध्या पुलिस के सामने पेश होना होगा।

भारत शब्द को कलंकित करने की तरफ बढ़ चुका है वामपंथ, वैश्विक स्तर पर लिखे जाने लगे हैं लेख

मैं शर्त लगाता हूँ कि विश्व के कुछ भागों में हिन्दूफ़ोबिया निश्चय ही आवश्यक वस्तुओं/सेवाओं की श्रेणी में शामिल होगा। क्योंकि ऐसा लगता है कि वैश्विक अभिजात्य वर्ग बगैर इसके निर्बाध आपूर्ति के जी नहीं सकता। वो भी तब जबकि पूरे विश्व में लॉकडाउन का माहौल है।

अब जब कि उनके पास अतिरिक्त समय है, अभिजात्य वर्ग को खुद के दिमाग और अपने दर्शकों के लिए “थॉट क्राइम” के नए उदाहरणों का अविष्कार करना होगा। उनके लिए चीन सरकार को दोषी ठहराने की सख्त मनाही है। तो अब वैश्विक उदारवादी खेमे के पास नैतिक विरोध के लिए विकल्प ही क्या है, सिवाय इण्डिया के।

बस, दुनिया के सबसे आसान टारगेट, 100 करोड़ हिन्दू हैं ही। सबूत चाहिए तो अटलांटिक में आतिश तासीर की जहरीली कलम से लिखा लेख पढ़िए।

The Atlantic में लिखा आतिश तासीर का लेख

इस बार निशाने पर “भारत” शब्द है, जिसे “गैर समावेशी” घोषित करने की माँग की गई है। इसके पीछे जो कारण दिया गया है वह है ‘भारत’ का एक संस्कृत शब्द होना और ‘इंडिया’ के लिए भारतीय भाषाओं में ‘भारत’ का उपयोग किया जाना।

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आतंकियों की भाषा बोल रहा है TIME में लिखने वाला आतिश, हिन्दुओं के लिए खुल कर उगल रहा है ज़हर

आश्चर्य की बात है कि उदारवादी विश्व ने इस बात को जानने में इतना समय कैसे लगा दिया कि भारतीय अपने दैनिक जीवन में कितना बड़ा पाप कर रहे हैं। आखिर इस हिन्दूफ़ोबिक शैली ने कितने बेमिसाल जवाहरात दिए हैं, जिनमें साड़ी से लेकर रसम, सांभर, हनुमान स्टीकर्स और दीया तक की आलोचना शामिल है! दूसरे शब्दों में भारत से संबंधित वह प्रत्येक वस्तु जिसे पश्चिम में लोग कम जानते हैं, वह एक आसान लक्ष्य होता है, जिसे मानवता के विरुद्ध भयावह षड्यंत्र के रूप में प्रचारित किया जा सकता है। “भारत” शब्द पर हमला करना सिर्फ समय की बात थी।

हमें इस बात को स्थापित करने में बिलकुल भी वक्त नहीं गँवाना है कि “भारत” शब्द पर आतिश तासीर का यह हमला कितना बेहूदा और बचकाना है। राष्ट्रगान में भी इंडिया को “भारत” ही बताया गया है। यहाँ तक कि भारतीय संविधान का प्रारम्भ ही “इंडिया, जो कि भारत है” से शुरू होता है। लेकिन पॉइंट यह है कि पश्चिम में बहुत कम लोग इस शब्द से परिचित होंगे, जो इसे हिन्दूफ़ोबिया का मुख्य लक्ष्य बनाता है।

आगे क्या आने वाला है, यह देखना बिलकुल मुश्किल नहीं है। संयोग से आतिश तासीर ने मेरे ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए ‘भारत’ की तुलना ‘नाजी जर्मनी’ से कर डाली।

आतिश तासीर ‘भारत ‘की तुलना नाजी जर्मनी से करता हुआ

(नोट: जर्मन कभी अपने देश को “जर्मनी” कहकर सम्बोधित नहीं करते। इसकी जगह वो हमेशा ‘ड्यूशलैंड’ कहते हैं। अथवा जैसा कि इसे आतिश कह सकता है- एक शब्द जिसे दुनिया की नजर से बचा कर प्रयोग किया जा रहा। लेकिन फिर एक पश्चिमी देश को कलंकित करना आसान नहीं, या आसान है?)

भारत शब्द को कलंकित करने का स्टेज तैयार हो गया है, बिलकुल ‘हिंदुत्व’ की तरह, जिसे इस हद तक बदनाम कर दिया गया कि उदारवादियों ने खुलेआम “हिंदुत्व की कब्र खुदेगी” के नारे लगाने शुरू कर दिए और किसी को यह अपमानजनक भी नहीं लगा। किसी को इस नारे में नाजीवाद प्रतिध्वनित होता नहीं सुनाई पड़ता।

ठीक यही भारत शब्द के साथ होने वाला है। हमारे बीच के टुच्चे लोग (लेकिन शातिर और वामपंथी) सबसे पहले इस नए ट्रेंड को पकड़ेंगे। वो इस शब्द से कन्नी काटना शुरू कर देंगे। धीरे-धीरे वो हमारे प्रतिरोध पर विजय प्राप्त कर लेंगे। और अंततः यह ऐसा टैग हो जाएगा, जिससे ज्यादातर आम हिन्दू भागना शुरू कर देगा।

अगर तथ्यों की बात करें तो भारत शब्द पहले भी निशाने पर रहा है। लगभग 4 साल पहले “भारत तेरे टुकड़े होंगे” वाले वाकये के बाद 3 युवा नेताओं के नाम लोगों के दिमाग में बस गया, जिसमें से दो उमर खालिद और शेहला राशीद ‘एक सच्चे मजहब’ के बढ़चढ़ कर बचाव करने वालों के रूप में उभरे तो तीसरा कन्हैया कुमार ‘हिंदुत्व’ के खिलाफ योद्धा के रूप में स्थापित हुआ। यहाँ यह बताना जरूरी है कि ये तीनों कथित नास्तिक और कम्युनिस्ट हैं।

शायद अब आपको समझ आ सकता है कि भारतीय सेक्युलरिज्म हमें किस तरफ ले कर जा रहा है।

यहाँ हिन्दू राइट और लेफ्ट दोनों के लिए एक सबक है। हिन्दू राइट के लिए यह एक मौका है कि वह समझे कि किस तरह लेफ्ट हमेशा हमारी टर्फ पर आकर खेलता है और ये सच है कि हिन्दू राइट हमेशा उसे पीछे धकेल देता है लेकिन उसका एजेंडा एक हद तक पूरा हो जाता है। वो हमेशा ऐसे ही निर्विकार लेबल्स को ढूँढते हैं फिर उसको लेकर एक विवाद खड़ा कर देते हैं। परिणामस्वरूप शब्दों के विवाद से बचने वाला सामान्य वर्ग का एक बड़ा हिस्सा इन लेबल्स से दूर हो जाता है। और इस तरह ये जीत जाते हैं।

2016 में “भारत तेरे टुकड़े होंगे” सुनकर देश का आम जनमानस आहत हुआ। उसने यह दर्शाया भी लेकिन इसके बावजूद भी लेफ्ट अपने एजेंडे पर काम करता रहेगा और शायद 2026 में इसी नारे को सुनकर आम लोगों के मन में 2016 की तरह गुस्सा नहीं पैदा हो। ठीक वैसे ही जैसे “हिंदुत्व की कब्र खुदेगी” पर 2020 में कोई आक्रोश नहीं दिखा।

विकल्प सिर्फ एक है कि लेफ्ट के प्रिय लेबल्स पर हमला किया जाए। जैसे कि ‘लिबरल’ और ‘सेक्युलर’, लेफ्ट पर इन लेबल्स का दुरूपयोग करने का आरोप लगाने की जगह राइट को इन लेबल्स पर ही अपने हमले तेज करने चाहिए।

दूसरा सबक है भारतीय लेफ्टिस्ट्स के लिए। मैंने एक सिम्पल प्रयोग किया और ‘चायनीज वायरस’ के साथ ‘Atlantic’ शब्द गूगल किया, जिसमें तासीर का यह आर्टिकल छपा है।

The Atlantic result for ‘Chinese virus’

पिछले एक महीने में 5 आर्टिकल लिखे गए हैं, जो पूरी तरह से या कुछ भागों में इस बात की शिकायत करते दिखते हैं कि चायनीज वायरस कहना क्यों गलत है। यह वही पब्लिकेशन है, जो अब भारत शब्द को कलंकित कर रहा है। मालूम होता है कि लिबरल्स को हमेशा इस बात की चिंता रहती है कि किसी पूरे राष्ट्र को कलंकित न किया जाए, जब तक कि पीड़ित भारतीय नहीं होते!

मैं इंडियन लेफ्ट को याद दिलाना चाहता हूँ कि 2014 में सोनिया गाँधी खुद टीवी पर आकर लोगों से मोदी के खिलाफ वोट कर अपनी भारतीयता दिखाने की अपील की थीं। उस समय भारत एक अच्छा, पवित्र नाम था।

2016 आते-आते लेफ्ट विंग का दृष्टिकोण भारत को लेकर बदल गया। वे वामपंथी ही थे जो ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ की बात कर रहे थे। 2020 में वो भारत शब्द को नाजी बताने लगे हैं, उसे नाजी के साथ वाले कॉलम में ठेल चुके हैं। क्या आपको दिखाई पड़ता है कि यह किस तरफ जा रहा है?

हिन्दू नाम वाले भारतीय लेफ्टिस्ट्स को समझना होगा कि आज या कल वैश्विक लेफ्ट तुम पर भी हमलावर होंगे। वो तुमसे भी उतनी ही नफरत करते हैं, जितनी मुझसे। वो समय ज्यादा दूर नहीं है, जब वो किसी ऐसे लेबल को पिक करेंगे, उसे कलंकित करेंगे जो तुम्हारे नजदीक होगा, तुम्हें प्रिय होगा! शायद तुम्हारी मातृभाषा, तुम्हारा नाम या जो भी उसका मतलब होता हो, वो उसे पैशाचिक बना देंगे। उनका मंतव्य हिन्दू संस्कृति के हर निशाँ को मिटा देना और इस भारत भूमि को इतिहास रहित उजाड़, बंजर बना देना है। जैसा कि फैज कहता है, “बस नाम रहेगा… का”

लॉकडाउन में दुकानें खुली, खुले में ताश: रोकने पहुँची पुलिस पर लाठी-डंडे और पत्थर से हमला

लॉकडाउन के बीच पुलिस पर हमले थम नहीं रहे हैं। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के मथुरा का है। शनिवार (अप्रैल 11, 2020) को मथुरा जिले में लॉकडाउन का उल्लंघन कर दुकान खोलने व एक स्थान पर कई लोगों को जमा होकर ताश खेलने की सूचना पर पहुँची पुलिस टीम पर लोगों ने लाठी-डंडे से हमला कर दिया। 

पुलिस ने जवाबी कार्रवाई शुरू की तो उन पर पथराव कर दिया गया। पुलिस ने किसी तरह से भीड़ पर काबू पाया और पथराव करने के आरोप में 10 लोगों को गिरफ्तार किया। मथुरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव ग्रोवर ने शनिवार को बताया कि लॉकडाउन के नियमों के उल्लंघन की सूचना पर भीमनगर गाँव पहुँची पुलिस पर पथराव किया गया। 

उन्होंने बताया कि गाँव में न केवल दुकानें खुली हुई थीं, बल्कि लोग खुले में ताश खेल रहे थे। दुकानों के सामने भीड़ लगी थी और सोशल डिस्टेंसिंग का खुला उल्लंघन किया जा रहा था। पुलिस के मना करने पर वहाँ मौजूद कुछ लोगों ने न केवल पथराव किया बल्कि लाठी-डंडे से भी पुलिस पर हमला किया।

ग्रोवर ने बताया कि पुलिस पर हमले की सूचना पर पहुँचे अतिरिक्त बल ने सख्ती दिखाकर 10 लोगों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि नामजद 28 एवं 24 गैर नामजद भागने में सफल रहे। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। इस हमले में एक पुलिसकर्मी को चोट भी आई है।

जैसे ही इसकी सूचना पुलिस प्रशासन को हुई, तुरंत पुलिस फोर्स हरकत में आ गई। क्षेत्राधिकारी जितेंद्र सिंह के साथ मौके पर पहुँची फोर्स ने 10 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस पहुँची तो लोगों का कहना था कि वो कब तक घरों में कैद रहें। फिलहाल वहाँ पर कानून-व्यवस्था को बहाल कर दिया गया है। क्षेत्राधिकारी लोकेश सिंह भाटी, जितेंद्र सिंह, एसडीएम राहुल यादव ने फोर्स के साथ क्षेत्र में कॉम्बिंग की और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की ग्रामीणों से अपील की। 

उल्लेखनीय है कि इससे पहले मेरठ के जली कोठी क्षेत्र में पुलिस के ऊपर हमले की खबर सामने आई थी। मेरठ के देहलीगेट थाना स्थित कोरोना वायरस संक्रमण हॉटस्पॉट जली कोठी क्षेत्र में पुलिस जैसे ही सील करने पहुँची, वहाँ स्थानीय लोगों ने पथराव शुरू कर दिया था। काफ़ी जबरदस्त पत्थरबाजी हुई थी। सिटी मजिस्ट्रेट को भी चोटें आईं। असामाजिक तत्वों के इस अचानक हमले से इलाक़े में हड़कंप मच गया। उन्हें खदेड़ने के लिए कई थानों की पुलिस फोर्स बुलानी पड़ी थी। सिटी मजिस्ट्रेट को इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। बता दें कि जिस क्षेत्र में पत्थरबाजी हुई, वहाँ 3 जमाती कोरोना पॉजिटिव मिले हैं।

कोरोना संक्रमण से लड़ने में आगरा मॉडल सबसे कारगर: यूपी ने दूसरे राज्यों को भी दिखाई राह

कोरोना वायरस से लड़ने में सफल रहे उत्तर प्रदेश के आगरा मॉडल की चहुँओर चर्चा हो रही है। अब यह मॉडल पूरे देश को राह दिखाने को तैयार है। आगरा की लड़ाई तभी शुरू हो चुकी थी, जब देश में लॉकडाउन हुआ भी नहीं था। रात के 2 बजे जैसे ही एक व्यक्ति के कोरोना पॉजिटिव होने की सूचना आई, 1248 टीमें बना कर पूरे जिले में कोरोना के लक्षण वाले लोगों और उनके संपर्क में आने वालों को ट्रेस करने का अभियान शुरू किया गया। केंद्र सरकार ने भी अपनी डेली ब्रीफिंग के दौरान आगरा मॉडल का जिक्र किया। अब दूसरे राज्य भी इससे सीख रहे हैं। उच्च-स्तरीय बैठकों में इसकी चर्चा हो रही है।

आगरा में कोरोना के मामले तब आए थे, जब एक व्यक्ति ऑस्ट्रिया से लौटा और उसके साथ दिल्ली के मयूर विहार का भी एक व्यक्ति था, जो दिल्ली का पहला कोरोना पॉजिटिव मामला था। ऑस्ट्रिया से उक्त व्यक्ति जैसे ही आगरा आया, यहाँ भी संक्रमण शुरू हो गया। हालाँकि, उसके एयरपोर्ट पर हुए टेस्ट की पुष्टि रिपोर्ट आ गई थी और तभी आगरा का प्रशासन हरकत में आ गया। इसके बाद कॉम्बिंग अभियान शुरू हुआ और उक्त व्यक्ति के घर के तीन किलोमीटर के रेडियस को सील कर दिया गया। दो-दो सदस्यों वाली 259 टीमें बनाई गईं। कुछ ही दिनों में 1.63 लाख घरों तक जाकर 1000 सैम्पल इकट्ठे किए गए।

एसएन मेडिकल कॉलेज को अधिकारियों ने अपना बेस बनाया था। एक टीम एक दिन में लगभग 100 घरों तक जाती थी। सारे छोटे अस्पतालों में भी डॉक्टरों को बिठाया जाने लगा, ताकि जिन्हें भी कोरोना के लक्षण दिखाई दें, उन्हें मेडिकल टेस्ट के लिए ज्यादा दूर न जाना पड़े। ‘कमान एंड कण्ट्रोल सेंटर’ को वॉररूम बना कर जिला प्रशासन और सरकार के बीच सामंजस्य बिठा कर काम किया गया। इसमें फ्रंटलाइन कर्मचारियों का ख़ासा योगदान रहा। जिला प्रशासन ने नक़्शे पर चिह्नित किया कि कहाँ-कहाँ पॉजिटिव मामले मिले हैं और एक टास्क फोर्स का गठन किया गया। हर हॉटस्पॉट के 5 किलोमीटर के आसपास के क्षेत्र को कन्टेनमेंट जोन में बदल दिया गया।

इन सभी क्षेत्रों में ‘अर्बन प्राइमरी हेल्थ केयर’ को लगाया गया और 1248 टीमें तैनात की गईं। आशा कर्मचारियों से सेवा ली गई, जिन्होंने 9 लाख लोगों की घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की। जिला, प्रखंड और ग्रामीण स्तर पर ‘रैपिड एक्शन टीम’ बनाई गई, जिससे कम्युनिटी ट्रांसफर को रोकने में मदद मिली। सबसे पहले तो सिटी की सीमा को सील कर दिया गया। इसके बाद जिले के सभी एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर चेकपोस्ट स्थापित किए गए। प्राइवेट गाड़ियों को रोका जाने लगा और आसपास के जिलों से भी अनुरोध किया गया कि वो अपनी-अपनी सीमाओं को सील कर दें। आगरा में फ़िलहाल कोरोना के मरीजों की संख्या 106 है, जिनमें 52 जमाती हैं। जिलाधिकारी ने बताया:

“चिह्नित किए गए क्षेत्रों में हमने नई रणनीति के तहत काम शुरू करने का निर्णय लिया है। इन क्षेत्रों में डॉक्टरों की टीम जाकर स्क्रीनिंग करेगी। स्क्रीनिंग के दौरान किसी तरह का लक्षण पाए जाने पर उसे एंबुलेंस से सीधे जिला अस्पताल लाया जाएगा। इसके बाद उसका नमूना लिया जाएगा। इस प्रक्रिया के लिए सभी कर्मचारियों को पीपीई किट दे दी गई है। इन इलाकों के पर्यवेक्षण के लिए सभी अपर मजिस्ट्रेट एसडीएम और सीओ की ड्यूटी लगाई गई है। इसके पीछे उद्देश्य है कि उनके रहते ज्यादा से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग हो पाए।”

आगरा में हर एरिया का एक माइक्रोप्लान बनाया गया था। कुल 2500 लोगों की पहचान की गई जिन्हें कफ, सर्दी, बुखार जैसे लक्षणों की शिकायत थी। इनमें से 36 लोगों की ट्रेवल हिस्ट्री थी। सबकी मेडिकल जाँच की गई। अभी तक आगरा में 33 हॉटस्पॉट क्षेत्र थे। इसमें शनिवार (अप्रैल 11, 2020) की सुबह 5 क्षेत्र और चिह्नित किए गए। बाद में 9 कम कर 29 कर दिए गए। इस तरह अब आगरा के 29 हॉटस्पॉट इलाकों में स्क्रीनिंग का काम शुरू किया गया। 

पंजाब में ASI का हाथ काटने का मामला: अब तक 9 गिरफ्तार, गन और पेट्रोल बम भी मिले

पंजाब के पटियाला में रविवार (अप्रैल 12, 2020) सुबह लॉकडाउन का उल्लंघन करने के चलते रोके जाने पर निहंग सिखों के एक समूह ने पुलिस पर हमला कर दिया। हमले में कई पुलिसकर्मी घायल हुए। साथ ही एम सहायक उप निरीक्षक (ASI) का हाथ कट गया है। हमला तलवार से किया गया था। 

मामले में कार्रवाई करते हुए पंजाब पुलिस ने अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। पटियाला के एसएसपी मनदीप सिंह ने बताया कि इनके पास से हथियार, बंदूक और पेट्रोल बम बरामद किये गए हैं।

मामले की जाँच पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह खुद नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा है, “नाका ड्यूटी पर पुलिस पर आज हमला किया गया। इसमें एक ASI का हाथ कट गया और 6 घायल हो गए। पुलिस ने अपराधियों को हिरासत में ले लिया है। मैंने पंजाब पुलिस को निर्देश दिया है कि जो भी कानून तोड़े उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।”

इसके अलावा मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा है, “मुझे पंजाब पुलिस पर गर्व है, SI बिककार सिंह स्थिति को सँभाले हुए हैं। एएसआई हरजीत सिंह की पीजीआई-चंडीगढ़ में प्लास्टिक सर्जरी की जा रही है, हम उनके सफल सर्जरी के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।”

वहीं पंजाब के वरिष्ठ अधिवक्ता (एडवोकेट) एचएस फूलका ने आरोपितों को कड़ी सजा देने की माँग की है। फूलका ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मैंने पंजाब के डीजीपी से अनुरोध किया है कि 2 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल की जाए। 10 दिनों के भीतर ट्रायल पूरा किया जाए। आरोपित को आजीवन कारावास दिया जाना चाहिए। इससे पूरे देश में एक संदेश जाएगा।”

पटियाला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मनदीप सिंह सिद्धू ने बताया था कि निहंग सिखों का एक समूह गाड़ी में सवार होकर सब्जी मंडी पहुँचा। जब उनसे कर्फ्यू पास दिखाने के लिए कहा गया तो उन्होंने सब्जी मंडी स्टाफ के साथ झगड़ा किया। बैरिकेड तोड़ गाड़ी भगाने की कोशिश की। पुलिस ने उनकी गाड़ी को घेर लिया। इससे गुस्साए निहंगों ने तलवार लेकर पुलिस पर हमला कर दिया।

उन्होंने बताया कि हमले के बाद ये लोग भाग कर बलबेरा के पास एक गुरुद्वारे में छिप गए। पुलिस ने उनका पीछा किया। गुरुद्वारे से आरोपितों ने कथित तौर पर फायरिंग भी की और पुलिसवालों को वहाँ से चले जाने के लिए कहा।

मजहब विशेष वाले धमका रहे, महिलाओं को डरा रहे… गाँव छोड़ना होगा, पुलिस हमेशा नहीं रहेगी: मृत लोटन के परिवार का दर्द

28 वर्षीय लोटन निषाद की हत्या हुए एक सप्ताह हो गया है। उन्होंने तबलीगी जमात की हरकतों पर चर्चा की थी, जिसकी ‘सज़ा’ उन्हें मौत के रूप में मिली। दलित लोटन की ‘गलती’ सिर्फ यह थी कि उन्होंने बातचीत में यह कह दिया था – तबलीगी जमातियों ने पूरे भारत में कोरोना वायरस फैलाया, अगर जमाती नहीं होते तो देश में कोरोना के काफ़ी कम मामले होते। इस ‘गलती’ के लिए उनके सिर में गोली मारी गई थी।

लोटन के भाई बिरजू के बयान पर सादिक, शेबू, ज़ाकिर, नूर अख्तर, फरहान, शादाब और नौशाद सहित कई अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था, जिनमें से कुछ अभी भी फरार हैं। ये घटना 5 अप्रैल को बख्सी मोढ़ा गाँव में हुई थी, जो उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्थित है।

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बिरजू ने ‘स्वराज्य’ की स्वाति गोयल शर्मा से बातचीत करते हुए बताया कि गाँव में पुलिस बल की तैनाती है, जिससे शांति तो है लेकिन माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। 38 वर्षीय बिरजू ने बताया कि उसका परिवार लगातार डर के साए में जी रहा है। पीड़ित परिवार ये सोच रहा है कि अगर पुलिस बल गाँव से चले गए तो फिर उनके साथ क्या किया जाएगा, कोई नहीं जानता। गाँव के मुस्लिम स्थानीय निषाद समाज के लोगों को लगातार धमकाने में लगे हुए हैं, जिससे डर का माहौल बन गया है।

निषाद समाज के लोग जब अपने खेतों में काम करने जाते हैं, तब स्थानीय मुस्लिम उन्हें धमकाते हैं और सुरक्षा हटते ही परिणाम भुगतने की चेतावनी देते हैं। महिलाओं को भी धमकियाँ दी जाती हैं। पीड़ित परिवार ने पुलिस में बयान दिया है और उसी आधार पर कार्रवाई हो रही है, इसीलिए मुस्लिम नाराज़ हैं।

बिरजू का कहना है कि उनका परिवार तभी तक सुरक्षित है, जब तक गाँव में पुलिस है। बिरजू ने कहा-“दुश्मनी बढ़ ही गई है। अब जाना ही पड़ेगा। हम 3-4 महीनों में गाँव छोड़ देंगे। दूसरा कोई विकल्प नहीं बचा है। पुलिस तो आज है, कल नहीं रहेगी।

बिरजू का कहना है कि उनका परिवाए आसपास के किसी निषाद बहुल गाँव में जाएगा। हालाँकि, उस गाँव में भी उनकी जाति प्रभावी है और हिन्दुओं की जनसंख्या 70% है लेकिन मुस्लिम प्रधान होने की वजह से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

बिरजू नाइट गार्ड के रूप में काम करते हैं। जिसके लिए उनके पास एक लाइसेंसी बन्दूक भी थी, लेकिन फिलहाल पुलिस ने उसे ले लिया है। इससे उनकी चिंता और बढ़ गई है। जब तक उन्हें उनकी बन्दूक वापस नहीं मिल जाती, वो नौकरी पर भी नहीं जा सकते। बिरजू कहते हैं कि ये नौकरी उनके परिवार की आजीविका का एकमात्र माध्यम है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप के बाद मृतक लोटन के परिवार को 5 लाख रुपए मिले हैं और आरोपितों के खिलाफ ‘नेशनल सिक्योरिटी एक्ट’ के तहत कार्रवाई की जाएगी। बिरजू के पिता की काफ़ी पहले मृत्यु हो चुकी है और बिरजू ने ही लोटन को पाल-पोष कर बड़ा किया था।

बता दें कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में रविवार (अप्रैल 05, 2020) सुबह करेली थाना क्षेत्र के बक्शी मोड़ा में गोली मारकर एक युवक की हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद घटनास्थल से भाग रहे हमलावर को भीड़ ने पकड़कर पुलिस को सौंप दिया था। बाद में अन्य नामजदों को भी गिरफ़्तार किया गया था।

PM रिलीफ फंड की वेबसाइट बना ₹52 लाख उड़ाए, नूर हसन और मोहम्मद इफ्तेखार गिरफ्तार

वैश्विक महामारी कोरोना से लड़ने में जहाँ पूरा देश लगा है, वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने इस आपदा को ठगी का जरिया बना लिया है। ये लोग मदद करनेवालों को भी चूना लगा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला झारखंड के हजारीबाग से सामने आया है। यहाँ कुछ लोगों ने पीएम केयर रिलीफ फंड डॉट कॉम नाम की फर्जी वेबसाइट बनाकर उसमें दान की अपील की और इसी बहाने 52.58 लाख रुपए उड़ा लिए।

इनमें दो आरोपित सगे भाइयों नूर हसन और मोहम्मद इफ्तेखार को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड परमेश्वर साव फरार है। इनलोगों ने पीएम केयर रिलीफ फंड डॉट कॉम नाम से फर्जी वेबसाइट बनाया। कोरोना संक्रमण से बचाव और लॉकडाउन से पीड़ित लोगों की मदद के लिए दान की अपील की। वेबसाइट में जिस अकाउंट का उल्लेख किया गया, उसमें खाताधारक का भी नाम पीएम केयर लिखा गया था। 

जानकारी के मुताबिक हजारीबाग मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के लाखे निवासी सगे भाइयों नूर हसन और मोहम्मद इफ्तेखार (पिता मोहम्मद सिराजुद्दीन) और ओरिया निवासी परमेश्वर कुमार ने पंजाब नेशनल बैंक की बड़ी बाजार शाखा में 13 जनवरी और यूनियन बैंक में 31 मार्च को दो फर्जी खाते खुलवाए थे। 

हजारीबाग के 200 लोगों ने पीएनबी में 34 लाख 87 हजार और यूनियन बैंक में 17 लाख 701 रुपए मदद के तौर पर जमा किए थे। यह राशि ठग अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर लेते थे। लगातार फंड के दूसरे खातों में ट्रांसफर किए जाने से बैंकों को शक हुआ। पंजाब नेशनल बैंक बड़ी बाजार शाखा के मैनेजर सुजीत कुमार सिंह और यूनियन बैंक शाखा अन्नदा चौक के मैनेजर अमित कुमार ने जब दोनों खाता को सर्च किया, तो दोनों खाताधारक सगे भाई निकले।

इसके बाद दोनों बैंकों के प्रबंधकों ने 9 अप्रैल को सदर थाने में इसकी सूचना दी। इस खाते के वास्तविक धारक के पते पर जब पुलिस गई तो ठगी का मामला सामने आया। पुलिस ने दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर जेपी कारा जेल भेज दिया। इनसे पूछताछ में मुख्य सरगना के रूप में मुफस्सिल थाना क्षेत्र के ओरिया निवासी परमेश्वर साव का नाम सामने आया है, जो फरार है। 

पुलिस ने उनकी निशानदेही पर परमेश्वर साव के घर पर छापामारी कर गुरुवार की सुबह एक कार और उसमें भारी मात्रा में रखे बैंक पासबुक, चेक बुक, एटीएम कार्ड सहित कई दस्तावेज बरामद किए। गिरफ्तार भाइयों का कहना है कि परमेश्वर साव ने ही इनसे दोनों बैंकों में अकाउंट खुलवा कर उनका पासबुक अपने पास रख लिया था। इसके बदले में इन दोनों को कुछ निर्धारित राशि दी जाती थी।

कोरोना फैलाने आए थे 3, हरवे-हथियार संग सड़क पर 2000: अलीगढ़ में थूक लगा नोट फेंक गए बाइक सवार

कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ने के साथ अफवाहें भी खूब फैल रही है। इन अफवाहों को लेकर पुलिस को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस लोगों से लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाने में जुटी है, लेकिन कुछ लोगों द्वारा फैलाए गए अफवाह की वजह से ये सारी चीजें धरी की धरी रह जाती है। ऐसा ही मामला सामने आया है झारखंड के भोरंगाडीह गाँव से।

राँची से सटे भोरंगाडीह गाँव में शनिवार (अप्रैल 11, 2020) देर शाम अफवाह उड़ी कि कुछ लोग कोरोना फैलाने की नीयत से घूम रहे हैं। सूचना मिलते ही आसपास के गॉंवों के करीब 2000 लोग पारंपरिक हरवे-हथियार लेकर सड़क पर उतर गए। ग्रामीणों ने तीन अज्ञात लोगों को कोरोना फैलाने का आरोप लगाते हुए पकड़ लिया। 

दैनिक जागरण के रॉंची संस्करण में प्रकाशित खबर

इसके बाद मौके पर पहुँची पुलिस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए उन तीनों को अपने साथ ले गई। हालाँकि इस दौरान पुलिस को ग्रामीणों के विरोध का भी सामना करना पड़ा। सबसे ज्यादा चिंताजनक बात ये रही कि भीड़ और हंगामे के बीच किसी ने सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान नहीं रखा।

वहीं उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में तहसील इगलास के बिझेरा गॉंव में थूक लगे नोट फेंके जाने का मामला सामने आया है। जहाँ ग्रामीणों का कहना है कि रविवार (अप्रैल 12, 2020) को दो बाइक सवार आए। उन्होंने अपना मुँह ढक रखा था। पहले तो उन्होंने सौ-सौ के पाँच नोटों पर थूक लगाया और फिर उसे वहाँ पर फेंक कर भाग गए। बाइक सवार को ये हरकतें करते हुए वहाँ खेत में काम कर रही एक महिला ने देख लिया। महिला ने जब इस बारे में ग्रामीणों को बताया तो हड़कंप मच गया। ग्रामीणों का कहना है कि युवकों ने संक्रमण फैलाने के मकसद से नोट पर थूक लगाकर फेंका। सूचना मिलने पर मौके पर पहुँची पुलिस ने आरोपित के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन देकर ग्रामीणों को शांत कराया। पुलिस ने नोटों को अपने कब्जे में ले लिया है।

ऐसी ही एक घटना झारखंड के नामकुम से सामने आई है। वहाँ शनिवार को सड़क पर 500 के चार नोट गिरे मिले। इसके बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना पाकर पहुँची पुलिस नोट को लेकर चली गई। लोगों ने आशंका जताई कि किसी ने नोट पर थूक कर कोरोना संक्रमण फैलाने के इरादे से फेंक दिया होगा। हालाँकि फिलहाल पुलिस की जाँच में ऐसा कुछ निकल कर सामने नहीं आया है। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जाँच में ये गलती से नोट गिरने जैसा लग रहा है। मगर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। जाँच की जा रही है। अगर किसी ने जान-बूझकर ऐसा किया होगा, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के 250 हॉटस्पॉट का ताल्लुक तबलीगी जमातियों से, पुलिस ने माँगी Gully Warriors की मदद

तेलंगाना में लगभग 130 कोरोना वायरस हॉटस्पॉट (लगभग 90%) तबलीगी जमात के सदस्यों से जुड़े हैं, जो 13 मार्च से 15 मार्च के बीच दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में आयोजित मजहबी सभा में शामिल हुए थे। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश में लगभग 120 हॉटस्पॉट तबलीगी जमात के सदस्यों और उनके सहयोगियों से जुड़े हुए हैं। द संडे गार्डियन ने ये रिपोर्ट की है।

तेलंगाना के स्वास्थ्य मंत्री इटेला राजेंदर ने कहा कि राज्य जमातियों के न रहने से चीनी वायरस से मुक्त होगा। जमातियों से जुड़े लगभग 15 हॉटस्पॉट हैदराबाद में हैं, जबकि बाकी 115 राज्य के अन्य जिलों में हैं। सभी कोरोनावायरस पॉजिटिव मरीजों का इलाज हैदराबाद के 3 अस्पतालों में किया जा रहा है। पुलिस और मेडिकल स्टाफ की 1300 टीमों की एक टास्क फोर्स को ऐसे 130 कंटेनमेंंट ज़ोन में तैनात किया गया है।

ICMR दिशानिर्देशों के अनुसार, बुखार, खाँसी और सर्दी के लक्षणों वाले लोगों का परीक्षण कोरोना वायरस कंटेनमेंट ज़ोन में किया जाएगा। इससे पहले यह लैब केवल साँस की बीमारियों वाले मरीज के साथ विदेशी मरीज और उनके संपर्क में आने वाले संक्रमित रोगियों का परीक्षण कर रही थीं। यदि ऐसे क्षेत्र से कोरोना वायरस के नए मामले सामने आते हैं, तो हॉटस्पॉट्स में लॉकडाउन बढ़ाया जाएगा।

दरअसल इन इलाकों को इसलिए निरगानी में रखा गया है, क्योंकि यहाँ से संक्रमित लोगों के खिलाफ काफी शिकायतें मिली थीं, ये लोग संक्रमण फैलाने के लिए जानबूझकर इधर-उधर घूमते रहते थे। इन समूहों की पहचान करने से पुलिस और सरकार को लॉकडाउन को बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिली। इससे लोगों को होने वाली असुविधा से निपटना काफी आसान हो गया।

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इसके साथ ही पुलिस ने युवा लड़कों और लड़कियों के ग्रुप ‘Gully Warriors’ की मदद माँगी है, जिन्होंने पुलिस को उन बदमाशों की सूचना दी थी, जो प्रतिबंधित क्षेत्रों से बाहर निकलते थे।

बताया जा रहा है कि हैदराबाद के मेयर बोंथू राम मोहन ने ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए आवश्यक वस्तुओं की डोर-टू-डोर डिलीवरी के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने फिर से इस बात को दोहराते हुए कहा था, “किसी भी चिकित्सा आपातकाल के लिए यहाँ के लोगों को एम्बुलेंस सेवाओं के लिए 100 या 104 डायल करना चाहिए।”

इसके अलावा मुस्लिम बहुल इलाकों में बड़े पैमाने पर पुलिस की तैनाती की गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मस्जिदों में शुक्रवार की नमाज अदा करने के लिए कोई भी अपने घरों से बाहर न निकले।

दिल्ली में कोरोना वायरस के 712 मामले भी जमातियों से जुड़े हैं। वे राजधानी में 11 अप्रैल तक कुल 1069 मामलों में से दो तिहाई के लिए भी जिम्मेदार हैं। नए 128 मामलों में से लगभग 77% निजामुद्दीन मरकज से जुड़े हैं।

बता दें कि दिल्ली सरकार ने तबलीगी जमात से संबंधित चीनी वायरस के मामलों को “Special Operations” के रूप में पुनर्वर्गीकृत किया है। वहीं तमिलनाडु सरकार ने भी इससे पहले जमातियों को “single source” के रूप में संदर्भित करना शुरू कर दिया था।