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‘वायर’ बना लायर: फैलाया झूठ, केस दर्ज होने पर ‘प्रपंची जात भाई’ ऑल्टन्यूज कूदा बचाव में

कोरोना पर योगी सरकार के ख़िलाफ़ एक फर्जी खबर चलाने के मामले में कल द वायर पर केस दर्ज होने के बाद स्वघोषित फैक्ट चेकर प्रतीक सिन्हा इस पर बौखला उठा। फर्जी फैक्ट चेकर ने अपने जात भाई का बचाव करते हुए पहले सरकार और न्यूज एजेंसी ANI पर सवाल उठाए और फिर प्रेस स्वतंत्रता को इससे जोड़ दिया।

गौरतलब है कि द वायर के ख़िलाफ़ केस दर्ज करने से पहले योगी सरकार ने प्रोपेगेंडा वेबसाईट ‘दी वायर’ के संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन को चेतावनी देते हुए कहा था कि वह अपनी फर्जी खबर को डिलीट करें, वरना इस पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन इसके बावजूद भी द वायर ने ऐसा नहीं किया।

इसके बाद, फर्जी खबर को वेबसाइट से न हटाने पर योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने ट्वीट करते हुए लिखा- “हमारी चेतावनी के बावजूद इन्होंने अपने झूठ को ना डिलीट किया, ना माफ़ी माँगी। कार्यवाही की बात कही थी, FIR दर्ज हो चुकी है, आगे की कार्यवाही की जा रही है। अगर आप भी योगी सरकार के बारे में झूठ फैलाने की सोच रहे हैं, तो कृपया ऐसे ख़्याल दिमाग़ से निकाल दें।”

उल्लेखनीय है कि सिद्धार्थ वरदराजन के ‘द वायर’ ने न सिर्फ़ एक गलत जानकारी दी बल्कि चेतावनी के बावजूद उसे नहीं हटाया। जिसका सीधा अर्थ है कि वो एक गलती मात्र नहीं थी बल्कि ऐसी खबरों का प्रयोग प्रोपेगेंडा के लिए किया जा रहा था। इस खबर को पैदा किया गया क्योंकि निज़ामुद्दीन मरकज के कारण पूरे देश में मौलवियों और तबलीगी जमात पर थू-थी हो रही है।

अब हालाँकि, ये बात सब जानते (सेकुलर गिरोह के लोगों को छोड़कर) हैं कि द वायर का अजेंडा हमेशा से एक ही दिशा में केंद्रित रहा है। इसीलिए सरकार की चेतावनी के बाद भी वे इसे नजर अंदाज करते रहे। मगर, अब जब सरकार ने उनके ख़िलाफ़ कड़ा एक्शन ले लिया तो ऐसे में एक स्वघोषित फैक्टचेकर का, अपने ‘जात भाई’ के बचाव में आना, लाजमी है।

एएनआई द्वारा द वायर पर दर्ज हुए केस की जानकारी देने वाले पोस्ट पर प्रतीक ने अपनी नफरत निकाली। सिन्हा ने लिखा, “एएनआई ने कई बार गलत रिपोर्ट की। लेकिन फिर भी इसके संपादक को पीएम स्पेशल विडियो कॉन्फ्रेंस में बुलाते रहे। इसके अलावा कई अन्य मीडिया संगठन हैं, जिन्हें पीएम के साथ कॉन्फ्रेंस में बुलाया गया। अब क्या ये महामारी एक अनियोजित लॉकडाउन के प्रभाव को कवर करने के लिए प्रेस की स्वतंत्रता पर और अंकुश लगाएगी?”

बता दें कि स्वघोषित फैक्टचेकर की कई करामातों में से सबसे ताजातरीन जामिया के दंगाई छात्रों के हाथ के पत्थर को पर्स/वॉलेट बताना शामिल है। उसी शृंखला में ये आदमी मतिभ्रष्ट हो कर यह नहीं कह रहा कि ‘वायर’ ने जो लिखा वो झूठ है, बल्कि उसका जोर इस पर है कि मामला कैसे दर्ज हो गया। यहाँ ऑल्टन्यूज यह बताना चाह रहा है कि अभी कोरोना के समय, जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मीडिया वाले झूठ न फैलाएँ, वरदराजन का प्रपंच फैलाना गलत नहीं है, लेकिन हाँ झूठ पकड़े जाने पर पुलिस द्वारा मामला दर्ज करना अभिव्यक्ति को दबाने जैसा है।

तबलीगी मरकज से निकले 72 विदे‍शियों सहित 503 जमातियों ने हरियाणा में मारी एंट्री, मस्जिदों में छापेमारी से मचा हड़कंप

दिल्ली निजामुद्दीन में हुए मजहबी सम्मेलन के बाद विभिन्न राज्यों के लिए रवाना हुए जमातियों ने पूरे देश में हड़कंप पैदा कर दिया है। एक तरफ तो पूरा देश कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहा है, लेकिन इस समय कोरोना से जंग लड़ने के लिए प्रदेश सरकारों ने जमातियों को खोज निकालने का अभियान शुरू कर दिया है, जिससे कि कोरोना से जारी जंग को जीता जा सके। कुछ ऐसा ही अब उत्तर प्रदेश के बाद हरियाणा में हो रहा है, क्योंकि हरियाणा सरकार को जानकारी मिली है कि दिल्ली में हुए तबलीगी मरकज के बाद 72 विदेशियों के साथ 500 से अधिक जमातियों ने प्रदेश में एंट्री की है।

दरअसल, मंगलवार तक हरियाणा सरकार के पास ऐसे करीब 200 लोगों के राज्‍य में एंट्री की सूचना थी, लेकिन बुधवार को पता चला कि यह संख्या 503 हो गई है। बताया जा रहा है कि ये लोग निजामुद्दीन से हरियाणा के अलग-अलग जिलों में प्रवेश कर गए हैं। इनमें अधिकतर तमिलनाडु के जमाती शामिल हैं साथ ही इनके साथ 72 लोग विदेशी भी हैं। इस जानकारी के बाद राज्य में हड़कंप मच गया है। हरियाणा सरकार ने ऐसे सभी लोगों का पता लगाकर उन्हें क्वारंटीन करने का आदेश दिया है।

हरियाणा सरकार के आदेश के बाद से ही पुलिस और स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की टीमें प्रदेश की मस्जिदों में छापेमारी करके उन लोगों की तलाश में जुट गई हैं, जो दिल्ली मजहबी सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद प्रदेश में इस्लाम के प्रचार के लिए आए हैं। हालाँकि, राज्य सरकार ने कुछ विदेशियों की पहचान कर ली है, लेकिन फिलहाल जिलावार सूची सार्वजनिक करने से सरकार बच रही है। वहीं स्वास्थ्य विभाग को चिंता सता रही है कि अगर एक भी विदेशी कोरोना पॉजीटिव पाया जाता है तो वह पूरे राज्य में महामारी को फैला सकता है।

एक जानकारी के मुताबिक हरियाणा के अकेले अंबाला छावनी में 44 से अधिक नागरिक हैं जो निजामुद्दीन से पहुँचे हैं। वहीं हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने बताया कि सभी की मेडिकल जाँच की जाएगी। उन्होंने बताया कि सभी 503 लोगों के बारे में पूरी जानकारी मिल चुकी है, लेकिन उनकी जानकारी को पुख्ता करने के लिए गृह विभाग अपने ढंग से काम करने में जुटा हुआ है। इन जमातियों में 72 लोग विदेशी भी हैं, जबकि अधिकतर दूसरे राज्यों के हैं। अनिल विज ने इस बात से इन्‍कार किया कि इन सभी 503 लोगों की मंशा राज्य में किसी तरह का षड्यंत्र करने अथवा साजिश की थी, लेकिन लॉकडाउन के बावजूद मजहब के प्रचार प्रसार के काम के लिए हरियाणा में घुसकर उन्होंने बड़ी मूर्खता की है।

फैक्ट चेक: क्या तबलीगी मरकज की नौटंकी के बाद चुपके से बंद हुआ तिरुमला तिरुपति मंदिर?

निजामुद्दीन स्थित मरकज में मार्च के माह हुए तबलीगी जमात के आयोजन से कोरोना वायरस के संक्रमण का जो खतरा अब देशभर में मंडरा रहा है, उसने कई लेफ्ट-लिबरल ‘विचारकों’ को अपने हिस्से का काम थमा दिया है। यह संभव ही नहीं है कि एक मजहब की कारस्तानी के उजागर होते ही मीडिया का एक ख़ास वर्ग समाज के एक ख़ास वर्ग के पक्ष में ‘तथ्य’ जुटाने का प्रयास ना करे। ऐसा ही एक नया प्रयास निजामुद्दीन स्थित मरकज में आयोजित जलसे के बाद देखने को मिल रहा है।

क्या है मामला

मरकज बंद करने के फ़ौरन बाद सोशल मीडिया पर एक खबर यह कहकर फैलाई गई कि आंध्रप्रदेश में स्थित तिरुमाला के भगवान वेंकेटेश्वर मंदिर को तबलीगी जमात मामला के जलसे के सामने आने के बाद बंद किया गया है। यह खबर फैलाने वालों में सबसे प्रमुख नाम है साक्षी जोशी का। साक्षी जोशी के ट्विटर अकाउंट पर उपलब्ध जानकारी से पता चलता है कि वो डॉग लवर होने के साथ ही बीबीसी में भी काम कर चुकी हैं और वर्तमान में न्यूज़ 24 टीवी चैनल में एंकर हैं।

साक्षी जोशी ने इण्डिया टुडे की एक लिंक साझा करते हुए अपने ट्वीट में लिखा है- “चलो इन्होंने भी एहसान कर दिया आखिरकार मंदिर बंद करके। देखा होगा #TablighiJamaat टारगेट पर है। हम चुपके से बंद करके निकल लेते हैं। किसी को पता नहीं चलेगा। लेकिन पूजा अब भी नहीं रुकेगी। एकांत में चलती रहेगी। क्यों?”

क्या है सच्चाई

दरअसल, साक्षी जोशी ने इण्डिया टुडे की जिस लिंक को शेयर किया है, उसमे बताया गया है कि तिरुमला तिरुपति मंदिर में 128 वर्ष में पहली बार श्रद्धालुओं के आगमन पर प्रतिबन्ध लगा है। जबकि जिस मंदिर के तबलीगी जमात मामले के बाद बंद होने का दावा पूर्व बीबीसी कर्मी ने किया है, वह 19 मार्च को ही बंद कर दिया गया था। यही नहीं, 11 मार्च से ही इसमें विदेशी नागरिकों और प्रवासी भारतीयों को परामर्श जारी करते हुए कह दिया गया था कि वे भारत पहुँचने के 28 दिनों तक मंदिर में नहीं आएँगे। इसके साथ ही, 19 मार्च को ही यह घोषणा कर दी गई थी कि मंदिर में पूजा एवं अनुष्ठानों को 31 मार्च तक के लिए रद्द कर दिया जाएगा।

सोशल मीडिया पर लॉकडाउन के दौरान अफवाह और फर्जी खबर फैलाने को लेकर पुलिस और प्रशासन काफी सख्त है। @attomeybharti ने दिल्ली पुलिस को टैग करते हुए लिखा है कि क्या दिल्ली पुलिस इसे फर्जी खबर फैलाने के लिए गिरफ्तार करेगी? इसके साथ ही न्यूज़ 24 को टैग करते हुए लिखा है कि क्या गैर जिम्मेदाराना व्यवहार के लिए चैनल इसे निकालेगा?

इंदौर: कोरोना वायरस संदिग्ध की जाँच करने गई मेडिकल टीम पर ‘मुस्लिम भीड़’ ने किया पथराव, पुलिस पर भी हमला

एक तरफ पूरा देश कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहा है तो वहीं दूसरी ओर कुछ इस्लाम के मानने वाले लोग कोरोना से जंग लड़ने वाली मैडीकल टीम से ही दो-दो हाथ करने में लगे हुए हैं। कुछ ऐसी ही खबर मध्य प्रदेश के इंदौर से आई है, जहाँ कोरोना की जाँच करने गई डॉक्टरों की टीम पर लोगों ने पथराव कर दिया।

जानकारी के मुताबिक इंदौर के टाटपट्टी बाखल और सिलावट पुरा में कोरोना वायरस की जाँच के लिए गई डॉक्टरों की टीम पर गली में पहले से मौजूद लोगों ने पथराव किया, जिसके बाद डॉक्टरों की टीम को वहाँ से जान बचाकर भागना पड़ा। इतना ही नहीं जब सूचना पर पुलिस फोर्स मौके पर पहुँची तो आरोपितों ने महिलाओं को आगे कर दिया और फिर घरों की छतों से पुलिस और डॉक्टरों की टीम पर फिर से पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान वहाँ लगी बैरिकेडिंग को भी उपद्रवियों ने तोड़ दिया। इसके बाद पुलिस फोर्स ने तत्काल पूरे इलाके को सील कर दिया।

वहीं दूसरी ओर बड़वानी जिले में भी मेडिकल जाँच और कुछ लोगों की तलाश करने गई सीएमएचओ की टीम का लोगों ने विरोध कर दिया। इसके बाद मेडीकल टीम को मजबूरन वहाँ से लौटना पड़ा। मध्य प्रदेश का इंदौर शहर सबसे अधिक कोरोना महामारी की चपेट में है, जहाँ मंगलवार को एक ही दिन में 20 नए मामले सामने आए, जिनमें 11 महिलाएँ और शेष बच्चे शामिल थे। साथ ही मध्य प्रदेश में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या 6, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 87 हो गई है। उधर निजामुद्दीन मरकज से लौटे जमातियों की प्रदेश में लगातार तलाश करके उन्हें आइसोलेट किया जा रहा है।

आपको बता दें कि इससे पहले, बिहार और गुजरात से भी पुलिस अधिकारियों पर मुस्लिमों की भीड़ द्वारा हमले और पथराव करने की खबरें सामने आई थीं। दरअसल, बिहार के मधुबनी में एक मस्जिद में सामूहिक नमाज की शिकायत मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँची थी, जिस पर स्थानीय लोगों ने हमला कर दिया। लोगों ने पहले तो पुलिस पर जमकर पथराव किया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस के मुताबिक मस्जिद में 100 से अधिक बाहर के जमाती मौजूद थे, जोकि मौका पाकर पहले ही वहाँ से निकल गए।

गौरतलब है कि तबलीगी जमात द्वारा दिल्ली के निज़ामुद्दीन क्षेत्र में आयोजित मजहबी सम्मेलन के बाद कोरोनो वायरस के कई दर्जन मामले नए सामने आए हैं। इसके बाद पूरे देश में कोरोना के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। इसे लेकर पूरे देश में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं सभी राज्य ऐसे लोगों के खिलाफ तलाशी अभियान चलाए हुए हैं, जो दिल्ली के मजहबी सम्मेलन में शामिल हुए थे। वहीं दिल्ली सरकार ने सभी लोगों को निजामुद्दीन से निकालकर क्वारंटाइन कर दिया है। गौरतलब है कि एक तरफ पूरा देश कोरोना के खिलाफ जंग लड़ने वाले लोगों के लिए ताली-थाली बजाकर अभिवादन कर रहा है तो दूसरी ओर कुछ इस्लाम को मानने वाले लोग इसी टीम का विरोध ही नहीं बल्कि मौका मिलने पर हमलावर भी हो रहे हैं।

योगी सरकार के खिलाफ फर्जी खबर फैलानी पड़ी महँगी: ‘द वायर’ पर दर्ज हुई FIR

लेफ्ट-लिबरल मीडिया की प्रोपेगंडा की आजादी के दिन शायद अब पूरे हो चुके हैं। कोरोना की महामारी के दौरान भी बीजेपी सरकार विरोधी एजेंडा में मशगूल दी वायर का सामना इस बार उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार से हुआ है और लगता नहीं है कि इस बार वो आसानी से भाग निकलेंगे। कम से कम सीएम योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार का ट्वीट तो यही सन्देश देता है।

कोरोना पर योगी सरकार के खिलाफ चलाई एक फर्जी खबर के सम्बन्ध में योगी सरकार ने प्रोपेगंडा वेबसाईट ‘दी वायर’ के संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन को चेतावनी देते हुए कहा था कि वह अपनी फर्जी खबर को डिलीट करें वरना इस पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन इसके बावजूद भी फर्जी खबर न हटाने पर योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने ट्वीट करते हुए लिखा- “हमारी चेतावनी के बावजूद इन्होंने अपने झूठ को ना डिलीट किया ना माफ़ी माँगी। कार्यवाही की बात कही थी, FIR दर्ज हो चुकी है आगे की कार्यवाही की जा रही है। अगर आप भी योगी सरकार के बारे में झूठ फैलाने के की सोच रहे है तो कृपया ऐसे ख़्याल दिमाग़ से निकाल दें।”

दरअसल, ‘द वायर’ के संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बारे में फेक न्यूज़ फैलाई थी। तबलीगी जमात को बचाने के लिए ‘द वायर’ ने फेक न्यूज़ चलाते हुए लिखा कि जिस दिन इस इस्लामी संगठन का मजहबी कार्यक्रम हुआ, उसी दिन सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि 25 मार्च से 2 अप्रैल तक अयोध्या प्रस्ताविक विशाल रामनवमी मेला का आयोजन नहीं रुकेगा क्योंकि भगवान राम अपने भक्तों को कोरोना वायरस से बचाएँगे।

‘द वायर’ और उसके संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन ने फैलाया झूठ

समस्या यह थी कि हाल ही में सोशल मीडिया पर तमाम ऐसे मौलानाओं के बयान सामने आ रहे हैं जिनमें दावा किया जा रहा है कि अल्लाह मजहब विशेष को कोरोना वायरस से बचा लेगा। अपनी तकरीर में दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज के मौलाना साद ने भी अपने समर्थकों से कहा कि वो डॉक्टरों और सरकार की सलाह न मानें क्योंकि मिलने-जुलने और एक-दूसरे के साथ बैठ कर खाने से कोरोना नहीं होगा। ऐसे कई मौलानाओं के बयानों को ढकने के लिए ‘द वायर’ ने फेक न्यूज़ चला तो दी लेकिन वो पकड़ा गया। ‘द वायर’ ने अपने लेख में ऐसा दावा किया और उसके संपादक वरदराजन ने इस लेख को शेयर भी किया। लेकिन, उनकी पोल खुलते देर न लगी।

यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने सिद्धार्थ वरदराजन की ये चोरी पकड़ ली और उन्हें जम कर फटकार लगाई। उन्होंने ‘द वायर’ और उसके संस्थापक पर झूठ फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी ने कभी कोई ऐसी बात कही ही नहीं है, जैसा कि लेख में दावा किया गया है। उन्होंने सिद्धार्थ को चेताया कि अगर उन्होंने अपनी इस फेक न्यूज़ को तुरंत डिलीट नहीं किया तो कार्रवाई की जाएगी और उन पर मानहानि का मुकदमा भी चलाया जाएगा। साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए ये भी कहा कि कार्रवाई के बाद वेबसाइट के साथ-साथ केस लड़ने के लिए भी सिद्धार्थ वरदराजन को डोनेशन माँगना पड़ जाएगा।

बिहार के एक गाँव में मस्जिद की जाँच करने पहुँची पुलिस पर हमला, देखें Video

Note: इस खबर में त्रुटिवश हमने गलत विडियो लगा दिया था। एक पाठक ने इस ओर हमारा ध्यान दिलाया, अब उसे हटा दिया गया है। इस घटना से संबंधित सही विडियो नीचे जोड़ा जा रहा है। हम ऐसे जागरुक पाठक का धन्यवाद करते हैं।

दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के इज्तिमा में शामिल लोगों के कोरोना संक्रमित होने की बात सामने आने के बाद से पूरे देश में हड़कंप मचा हुआ है। इस घटना के बाद देश के अलग-अलग राज्यों में जमात के मरकज से निकले लोगों की तलाश की जा रही है, ताकि उनकी जॉंच की जा सके। इसी कड़ी में एक मस्जिद में जमात के लोगों के ठहरे होने और सामूहिक नमाज की सूचना मिलने पर बिहार पुलिस जॉंच के लिए पहुॅंची तो उस पर समुदाय विशेष की भीड़ ने हमला कर दिया।

घटना मधुबनी जिले के अंधराठाढ़ी ब्लॉक के गीदड़गंज गाँव की है। पुलिस को मंगलवार की शाम निशाना बनाया गया था। इस घटना के कई विडियो सामने आए हैं। इनमें औरतें और बच्चें भी भीड़ में शामिल दिख रहे हैं। विडियो में काफी शोरगुल के बीच मैथिली में गोली चलाए जाने और पुलिसकर्मियों के गाड़ी छोड़ कर भागने की बात कहते लोगों को आप सुन सकते हैं। एक शख्स पीएम मोदी का भी नाम ले रहा है।

मीडिया रिपोर्टों में हमलावर मदना पंचायत के पूर्व मुखिया और राजद प्रखंड अध्यक्ष के समर्थक बताए गए हैं। गीदड़गंज मदना पंचायत में ही आता है। जिस मस्जिद में जॉंच के लिए पुलिस टीम पहुॅंची थी वह राजद के इस नेता के घर के पास ही है। वही इसकी देखरेख भी करते हैं। बताया जाता है कि इस उपद्रव का फायदा उठाकर जमात के लोग फरार हो गए।

हिंसक भीड़ ने पुलिस की जीप को पास की तालाब में पलट दिया। गोली चलाए जाने की भी खबर है। बीडीओ, थानेदार सहित कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इस मामले में 15 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर की गई है। चार लोगों को गिरफ्तार किए जाने की सूचना है। इस पूरी घटना को पूर्व नियोजित बताया जा रहा है, क्योंकि लोगों ने छतों पर पहले से पत्थर जमा कर रखे थे।

जमात के लोगों की तलाश में लगी पुलिस के कार्य में समुदाय विशेष के लोगों की तरफ से व्यवधान डाले जाने की घटना देश के अन्य राज्यों से भी सामने आई है। गुजरात के अहमदाबाद के गोमतीपुर में पुलिस पर पत्थरबाजी की गई। इसी तरह छत्तीसगढ़ के भिलाई में एक मस्जिद में चार महिलाओं सहित आठ लोग छिपे मिले। पश्चिम बंगाल के मिदनापुर के रहने वाले ये लोग मरकज से निकलने के बाद यहॉं पनाह लिए हुए थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम जब इनकी जॉंच करने पहुॅंची तो इन्होंने हंगामा खड़ा कर दिया। पुलिस को भी गुमराह करने की कोशिश की।

तबलीगी जमात वालों ने अस्पताल के क्वारंटाइन में भी डॉक्टरों पर थूका, बदतमीजी जारी है

तबलीगी जमात निजामुद्दीन के 167 लोग कल 5 बसों में तुगलकाबाद क्वारंटाइन सेंटर ले जाए गए। इनमें से 70 लोगों को डीजल शेड ट्रेनिंग स्कूल हॉस्टल क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया और 70 को आरपीएफ बैरक क्वारंटाइन सेंटर में ले जाया गया था।

लेकिन उत्तर रेलवे के CPRO दीपक कुमार का कहना है कि ये लोग सुबह से किसी की नहीं सुन रहे थे और खाने की चीजों की अनुचित माँग कर रहे थे। उन्होंने क्वारंटाइन सेंटर में कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार किया। यही नहीं, उन्होंने वहाँ पर मौजूद डॉक्टरों समेत अन्य काम करने वाले सभी लोगों पर थूकने लगे। वे हॉस्टल बिल्डिंग में भी घूमते रहे।

कुछ देर पहले ही एक अन्य खबर में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के ताहिरपुर में स्थित राजीव गाँधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में उस समय अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया जब कोरोना वायरस से संदिग्ध एक मरीज ने क्वारंटाइन किए जाने पर अस्पताल की खिड़की से कूदकर जान देने की कोशिश की। यह मरीज निजामुद्दीन मरकज के तबलीगी जमात में शामिल होने के लिए आया था।

उत्तर रेलवे सीपीआरओ दीपक कुमार ने कहा कि इस घटना के बाद यह डीएम साउथ ईस्ट दिल्ली को उन्हें नियंत्रित करने या उन्हें किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए आवश्यक सुरक्षा की व्यवस्था करने के लिए कह है। साथ ही, 5.30PM पर 4 दिल्ली पुलिस के सिपाही और 6 सीआरपीएफ के जवानों के साथ पीसीआर वैन को क्वारंटाइन केंद्रों पर तैनात किया गया है।

मजनू-का-टीला गुरुद्वारे में फँसे सिखों को एक स्कूल में किया गया शिफ्ट, मनजिंदर सिंह सिरसा ने की थी सरकार से अपील

कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए देश में घोषित किए गए लॉकडाउन के बीच 28 मार्च से उत्तरी दिल्ली के मजनू-का-टीला गुरुद्वारा में फँसे सिखों को दिल्ली सरकार ने नेहरू विहार के एक स्कूल में शिफ्ट करने का फैसला किया है। साथ ही सरकार ने फैसला लिया है कि सभी लोगों को क्वारंटाईन करके जाँच के लिए उनके सैंपल लिए जाएँगे।

वहीं मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक ट्वीट कर जानकारी देते हुए बताया कि गुरुद्वारा मजनू का टीला साहिब में दिल्ली की अलग-अलग जगहों से इकट्ठा हुए पंजाब के लोगों में से 205 को दिल्ली सरकार ने नेहरू विहार के एक स्कूल में शिफ़्ट कर दिया है, हमने दिल्ली और पंजाब सरकार से विनती की थी कि इन लोगों को उनके घरों तक पहुँचाया जाए।

दरअसल, दिल्ली के मजनू का टीला इलाक़े में फँसे हुए लोगों की कुछ तस्वीरों को पोस्ट करते हुए पत्रकार आदित्य राज कौल ने एक ट्वीट किया था और अकाली दल, भाजपा और कॉन्ग्रेस- तीनों ही दलों से सवाल पूछा था कि वो किस चीज का इन्तजार कर रहे हैं? कौल ने बताया कि मजनू का टीला स्थित गुरुद्वारा में सिख समुदाय के क़रीब 400 लोग फँसे हुए हैं। पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा के बाद से ही ये लोग वहाँ फँसे हुए हैं। क़ौल ने कहा कि न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकार ने उनको सही जगह पहुँचाने की व्यवस्था की है।

दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमिटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा था कि वो दोनों मुख्यमंत्रियों से हाथ जोड़ कर आग्रह करते हैं कि मजनू का टीला में फँसे लोगों को निकालें। उन्होंने बताया कि उनमें से कई लोगों को सर्दी-बुखार भी है और कई खाँस भी रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन सबकी मेडिकल जाँच करानी ज़रूरी है लेकिन बार-बार आग्रह करने के बावजूद कैप्टेन अमरिंदर सिंह कोई जवाब नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा प्रबंधन कमिटी उन सभी के खाने-पीने का ध्यान रख रही है और उन्हें सारी सुविधाएँ दी जा रही हैं लेकिन उन्हें वहाँ से निकाला जाना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है, जिसके लिए दिल्ली व पंजाब की सरकारों को व्यवस्था करनी चाहिए।

‘राम’ को इलाहबाद चुनाव में उताकर कॉन्ग्रेस ने किया था वोटर की धार्मिक भावनाओं से खेलने का प्रयास

21 दिनों के लॉकडाउन के दौरान आजकल दूरदर्शन चैनल पर 80 के दशक के मशहूर धारावाहिक रामायण और महाभारत एक बार फिर चर्चा का विषय हैं। लेकिन इसके साथ ही इन धारावाहिक के बनने के पीछे की राजनीति और कॉन्ग्रेस की मंशा पर भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं। खास बात यह है कि जिस चर्चा को हवा कॉन्ग्रेस के ही वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने दी थी, उसे अब अंजाम तक बाकी लोग पहुँचा रहे हैं।

हाल ही में दूरदर्शन चैनल पर रामानंद सागर द्वारा निर्मित रामायण के प्रसारण की घोषणा के बाद कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ट्विटर पर कहा था कि रामायण धारावाहिक बनाने के लिए राजीव गाँधी ने ही रामानन्द सागर को कहा था। जिस पर उनकी खूब खिंचाई भी हुई थी। हो सकता है कि दिग्विजय सिंह सच ही कह रहे हों क्योंकि दूरदर्शन का ही एक पुराना वीडियो सामने आने से यह स्पष्ट हो जाता है कि किस प्रकार से कॉन्ग्रेस ने निरंतर देश के मनोरंजन के साधनों से लेकर हर ऐसी चीज को कॉन्ग्रेस के पक्ष में इस्तेमाल किया, जिसका वो राजनीतिक लाभ उठा सकते थे।

दूरदर्शन पर 1988 में प्रकाशित इस इंटरव्यू में वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, चौधरी अजीत सिंह और पत्रकार विनोद दुआ मौजूद हैं चर्चा के दौरान कॉन्ग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद कह रहे हैं- “वीपी सिंह जी जब मुम्बई में थे तो वो कई दिन से उन्हें अपनी तरफ घुमाने का प्रयास कर रहे थे। कई दफा उनके पास आदमी भेजे गए कि आप इलाहाबाद आकर हमारे लिए कैम्पेन करिए। और जब उन्होंने कैम्पेन करने से इनकार कर दिया तब वीपी सिंह ने बयान दिया था कि ये राम नहीं रावण है। और इस चीज को मानकर वो वहाँ उनके खिलाफ प्रचार करने आए थे।”

1988 के इस वीडियो में चुनावी चर्चा में बताया जा रहा है कि कॉन्ग्रेस ने अरुण गोविल, जिन्होंने कि रामायण सीरियल में राम का किरदार निभाया था, की लोकप्रियता को अपने पक्ष में भुनाने का प्रयास किया था। इस चर्चा में प्रयागराज (तब – इलाहाबाद) लोकसभा उपचुनाव में कहा जा रहा है – “राम के किरदार निभाने वाले अरुण गोविल को इलाहाबाद भेजा जाए। उनकी क्या छवि थी? क्या वोटर ऐसे झाँसों में आ जाता है? और ऐसे ही प्रेरित होकर वोट दे देगा कॉन्ग्रेस को?”

इस वक्तव्य में गुलाम नबी आजाद यह स्वीकारते हुए देखे जा सकते हैं कि कॉन्ग्रेस ने रामायण के पात्र का इस्तेमाल एक कलाकार के रूप में नहीं बल्कि ‘राम’ के रूप में करना चाहती थी ताकि लोग वीपी सिंह के खिलाफ मतदान कर सकें। कॉन्ग्रेस के लिए प्रचार करते समय रामायण के पात्र ने यह कहते हुए प्रचार किया था कि भगवान राम का नाम लेकर कॉन्ग्रेस को वोट करें।”

दरअसल, यह तब का किस्सा है जब विश्वनाथ प्रताप सिंह के कॉन्ग्रेस से बाहर आने का दौर था। वह दौर जिसमे वी पी सिंह ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा देकर इलाहाबाद से फिर से चुनाव लड़ा था, जिसमे कॉन्ग्रेस ने तब के ‘राम’ अरुण गोविल को उनके खिलाफ खड़ा कर दिया था। देखा जाए तो आज के समय सेक्यूलरिज़्म का लिबास ओढ़ने वाली कॉन्ग्रेस ने भारतीय राजनीति में ‘राम’ की असली एंट्री इस समय की थी।

यह सब उस समय घटित हो रहा था जब शाह बानो केस में मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण राजीव गाँधी को अपनी छवि कमजोर होती नजर आई थी। राम और रामायण को इसी भरपाई के उद्देश्य से कॉन्ग्रेस ने इस्तेमाल करने की कोशिश की थीं।

रामायण के पुनः प्रसारण पर अरुण गोविल की अपील – घर पर रहिए और मोदी की बात मानिए

रामायण में भगवान राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल ने एक छोटे से वीडियो के जरिए लोगों से 21 दिन तक अपने घरों में रहने, अपने हाथ साफ करने और कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव की सलाह दी है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देशवासियों को इस समय पीएम मोदी के दिशानिर्देश का पालन करना चाहिए।

हाय री लॉकडाउन! स्वयंभू पत्रकार सबा नकवी के घर में दो दिन नहीं जलेगा चूल्हा

हिंदुओं के लिए घृणा फैलाने वाली और अपने कट्टरपंथी विचारों के लिए पहचाने जाने वाली सबा नकवी लॉकडाउन के कारण परेशानी में हैं। उन्हें चिंता है कि आने वाले 2 दिन वो कुछ नहीं बना पाएँगी। यहाँ बनाने का मतलब खाने से है। दरअसल, उनके घर की गैस खत्म हो गई है। आप सोचेंगे इतना घरेलू मामला है और ऑपइंडिया को इसकी जानकारी कैसे? तो बता दें इस मुश्किल दौर में आई इस आपदा के बारे में सबा ने खुद अपने ट्विटर्स को जानकारी दी है।

सबा ट्विटर पर लिखती हैं, “मैसेज के माध्यम से खाना पकाने की गैस का ऑर्डर स्वीकार नहीं हो रहा है। क्या सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित हुई है या एजेंसियाँ ​​ठीक से काम नहीं कर रहीं।” बता दें सबा के पास भारत गैस है और उनका कहना है कि इस परेशानी के कारण वो 2 दिन खाना नहीं बना पाएँगी।

अब हालाँकि, किसी भी आम यूजर के लिए ये आम परेशानी हो सकती है कि उसके घर में गैस खत्म हो गई और किसी कारणवश बुक भी नहीं हो पा रही। लेकिन चूँकि ये मामला सबा नकवी से जुड़ा है, तो इसमें झोल निश्चित हैं। खुद सोचिए, लॉकडाउन के समय में सबको कुछ न कुछ परेशानियाँ हो रही हैं। मगर, इन परेशानियों से जूझने के लिए सरकार पर्याप्त इंतजाम करवा रही है और लगातार बता रही है कि आखिर क्या क्या सुविधाएँ इस लॉकडाउन में प्रभावित नहीं होंगी। इन सुविधाओं में एक सुविधा गैस सिलिंडर की भी है।

सबा नकवी का ये ट्वीट देखते ही ट्विटर पर कई यूजर्स ने अपनी प्रतिक्रिया दी। दिलचस्प ये दिखा कि उनके पर जवाब देने वाला लगभग हर यूजर उन्हें अच्छे से जानते थे, इसी कारण वे उनकी इस परेशानी का समाधान बताने से ज्यादा उनकी खिल्ली उड़ा रहे थे। इससे भी हास्यास्पद ये है कि खिल्ली उड़ाने वालों को सबा नकवी से ज्यादा लाइक रीट्वीट मिल रहे थे। उदहारण देखिए, अंकित जैन नाम के यूजर ने उनके इस ट्वीट पर लिखा बिरयानी चाहिए तो शाहीन बाग से मँगवा लो। अब खबर बनाने तक सबा के ट्वीट को 1.7K लाइक और 266 रीट्वीट मिले थे। जबकि अंकित जैन को 487 रीट्वीट और 4.2K लाइक। दरअसल, लोगों का पूछना है कि स्वघोषित पत्रकार नकवी को फेक स्टोरी पकाने के लिए गैस चाहिए। या फिर एजेंडा चलाने के लिए।

अब रही बात, सबा नकवी की समस्या के समाधान की। तो बता दें ये कोई परेशानी नहीं है। ये वही पुरानी आदतों का नतीजा है, जो इस समय में भी मामूली सी बात का बतंगड़ बनाना चाहता है। इस बात का सबूत ये है कि देश में कई लोग (सबा को छोड़कर) ऐसे हैं जिन्हें गैस ऑर्डर करने में कोई परेशानी नहीं आ रही। नीचे तस्वीरों में तस्वीरों में इसके दो उदाहरण हैं।

तस्वीर साभार: डॉ कपिल परमार का ट्विटर
तस्वीर साभार: प्लैकार्ड नाम से मशहूर मधुर का ट्विटर

इसके अलावा, ये एक और प्रमाण है, जो दर्शा रहा है कि लॉकडाउन के समय में न केवल गैस बुक हो रही हैं। बल्कि अगले ही दिन इनकी डिलिवरी भी हो रही है। इसलिए फॉलोवर्स के मन में ऐसी स्थिति बताकर डर का माहौल बनाने की कोशिश न केवल व्यर्थ हैं, बल्कि ये भी बताती हैं कि वो लॉकडाउन के दिनों में वाकई खाली हो चुकी हैं।

अब रही बात इस बिंदु की कि ऊपर दी तस्वीरें इंडियन गैस और एचपी गैस की हैं और सबा तो भारत गैस के बारे में बात कर रहीं हैं। तो ये समझने की बात है कि लॉकडाउन के समय में थोड़ी बहुत दिक्कतें सबको झेलनी पड़ रही होंगी। इसलिए, अगर मान भी लिया जाए कि किसी कारण वश उन्हें परेशानी हो रही है, उनके इलाके में सप्लाई नहीं हो रही है और वह बात का बतंगड़ नहीं बना रही हैं। तो भी आम आदमी के पास इसका एक उपाय होता है कि इस मुश्किल की घड़ी में अपने आस पास वालों से संसाधन जुटाकर काम चलाएँ और फिर अपनी परेशानी का हल खोजे। मगर हाँ, इस पूरी प्रक्रिया के लिए इंसान के संबंध अपने आसपास वालों से अच्छे होने चाहिए। तो सवाल ये भी है कि अगर सबा नकवी ये कह रही है कि उनके घर में गैस सिलिंडर न आने से 2 दिन खाना नहीं बनेगा, तो क्या वे इतनी भी सामाजिक नहीं है कि उनके पड़ोसी उनकी मदद करें?

सोशल मीडिया पर लोगों का पूछना है कि अगर उन्होंने वाकई गैस ऑर्डर की है, तो पर्ची दिखाएँ। क्योंकि उन्हें वे एक अपवाद लग रही हैं। जितने लोगों ने इसपर प्रतिक्रिया दी है सबका यही कहना है कि उन्होंने लॉकडाउन में जब भी गैस बुक की उसके कुछ दिन बाद गैस उन्हें डिलिवर हो गई। लोगों का साफ मानना है कि सबा झूठ ही बोल रही हैं। बता दें एक यूजर का ये भी कहना है कि उनके घर में गैस की पाइप लाइन हैं। अगर वो चाहें तो वे सबके सामने उसकी फोटो अपलोड कर सकते हैं।