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क्या दिल्ली में फिर से दंगे करवाना चाहती थी AAP? जिस नाबालिग ने भेजे बम धमकी के 400+ ईमेल उसके माता-पिता का NGO अफजल गुरु समर्थक: BJP ने केजरीवाल से भी बताए लिंक

दिल्ली पुलिस ने मंगलवार (14 जनवरी 2025) को खुलासा किया कि पिछले कुछ महीनों से दिल्ली के स्कूलों को बम धमकियों वाले फर्जी ईमेल भेजने के मामले में उन्होंने आरोपी की पहचान कर ली है। स्पेशल सीपी (लॉ एंड ऑर्डर) मधुप तिवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इन धमकियों के पीछे एक नाबालिग का हाथ है, जिसने कुल 400 फर्जी ईमेल भेजे हैं। ये ईमेल दिल्ली के स्कूलों में अव्यवस्था फैलाने और पढ़ाई-लिखाई को बाधित करने का कारण बने। दिल्ली पुलिस के इस खुलासे के बाद बीजेपी ने आम आदमी पार्टी पर हमला बोला और कहा कि दिल्ली में चुनाव से पहले दंगे कराने की कोशिश होती है। BJP ने अरविंद केजरीवाल से भी मामले में सवाल पूछा है।

मधुप तिवारी ने कहा, “हमारी टीम ने 12 फरवरी 2024 से इन ईमेल की जाँच शुरू की थी। ये ईमेल स्कूलों में छुट्टियाँ कराने, परीक्षा स्थगित कराने और डर का माहौल बनाने का कारण बने। हमने शुरुआत में ईमेल सर्विस प्रोवाइडर्स से डेटा माँगा, लेकिन आरोपित ने वीपीएन का इस्तेमाल किया था, जिससे जाँच में दिक्कतें आई। 8 जनवरी 2025 को भेजे गए एक ईमेल से हमें टेक्निकल विंडो मिला और हमने ईमेल भेजने वाले व्यक्ति को ट्रेस कर लिया।”

दिल्ली पुलिस ने बताया कि उसने अपनी जाँच में पाया गया कि ईमेल भेजने वाला एक नाबालिग है, जिसने 400 से अधिक फर्जी ईमेल भेजे। पुलिस ने उसके लैपटॉप और मोबाइल की फोरेंसिक जाँच की, जिससे यह खुलासा हुआ कि वह अकेला ऐसा नहीं कर सकता था। उसके परिवार की जाँच करने पर पता चला कि उसके माता-पिता एक एनजीओ चलाते हैं, जिसका एक राजनीतिक दल से गहरा संबंध है। यह एनजीओ अफजल गुरु की फाँसी का विरोध करने वाले एक सिविल सोसाइटी समूह का हिस्सा भी रहा है।

स्पेशल सीपी (लॉ एंड ऑर्डर) मधुप तिवारी ने कहा, “जाँच में हमने पाया कि नाबालिग ने इन ईमेल को खुद भेजा, लेकिन हमें संदेह है कि इसके पीछे एक व्यापक साजिश हो सकती है। यह एनजीओ कई संवेदनशील मुद्दों पर एक विशेष राजनीतिक दल का समर्थन करता है और अफजल गुरु की फाँसी पर सवाल उठाता रहा है। हम डिजिटल सबूतों की गहराई से जाँच कर रहे हैं और राजनीतिक कनेक्शन के एंगल को भी देख रहे हैं।”

बीजेपी ने आम आदमी पार्टी से माँगा जवाब

इस मामले के खुलासे के बाद बीजेपी ने आम आदमी पार्टी पर तीखे आरोप लगाए। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि यह घटना बताती है कि कैसे आम आदमी पार्टी और उससे जुड़े एनजीओ देश के बच्चों के मन में जहर भर रहे हैं। उन्होंने कहा, “आतिशी के माता-पिता ने अफजल गुरु की दया याचिका पर हस्ताक्षर किए थे। यह एनजीओ उसी मानसिकता का हिस्सा है। हमें आम आदमी पार्टी से जवाब चाहिए कि क्या उनका इन गतिविधियों से कोई संबंध है। अगर नहीं है, तो वे स्पष्ट बयान दें।”

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि मैं अरविंद केजरीवाल से अपील करता हूँ कि वे सामने आएँ और आप को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन लोगों के साथ उनका क्या संबंध है। अगर नाबालिग यह सब कर रहे हैं, तो ऐसे NGO देश के बच्चों के दिमाग में किस तरह का जहर घोल रहे हैं?

त्रिवेदी ने यह भी कहा कि आप पार्टी के विधायकों पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाने में मदद करने के आरोप पहले ही लग चुके हैं। उन्होंने कहा, “दिल्ली सरकार के खिलाफ सबूतों की कड़ी जुड़ती जा रही है। क्या यह एनजीओ भी आप पार्टी की योजनाओं का हिस्सा है? अगर नहीं, तो अरविंद केजरीवाल और उनके सहयोगी इस पर सफाई दें।”

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, “यह महज संयोग नहीं है कि जब भी दिल्ली में विधानसभा चुनाव होते हैं, दंगे करके माहौल बिगाड़ने की कोशिश होती है। हम उत्तर पूर्वी दिल्ली और शाहीन बाग में हुए दंगों को नहीं भूले हैं। अब एक नाबालिग के जरिए एक एनजीओ का नाम सामने आ रहा है और अफजल गुरु से कनेक्शन, इसमें आप और अरविंद केजरीवाल शामिल हैं।” बता दें कि 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगे हुए थे, जिसमें आम आदमी पार्टी से जुड़ा रहा ताहिर हुसैन मास्टरमाइंड था। वो उस समय आम आदमी पार्टी पार्टी के टिकट पर पार्षदी का चुनाव भी जीता था।

राजनीतिक संबंधों की जाँच जारी

पुलिस का कहना है कि इस मामले में अभी जाँच चल रही है। उन्होंने बताया कि आरोपित ने 7 अलग-अलग मौकों पर धमकी भरे ईमेल भेजे, जिनमें एक बार 250 स्कूलों को एक साथ बम की धमकी दी गई थी। नाबालिग को खुद भी याद नहीं है कि उसने कितनी बार ऐसे ईमेल भेजे। दिल्ली पुलिस ने यह भी जानकारी दी कि पिछले साल मई से दिसंबर तक दिल्ली के स्कूलों, अस्पतालों, एयरपोर्ट और एयरलाइंस को कुल 50 बार बम की धमकियाँ दी गईं। हर बार ये धमकियाँ फर्जी निकलीं, लेकिन उन्होंने प्रशासन और आम लोगों को परेशानी में डाला।

दिल्ली पुलिस के इस खुलासे के बाद सवाल यह है कि क्या इन फर्जी धमकियों के पीछे कोई बड़ा षड्यंत्र है और क्या राजनीतिक दलों और एनजीओ की मिलीभगत का इसमें कोई रोल है। पुलिस अब एनजीओ और उसके राजनीतिक संबंधों की गहराई से जाँच कर रही है।

भारत से माफी माँगेगी फेसबुक-इंस्टाग्राम चलाने वाली मेटा? संसदीय समिति ने किया तलब, जुकरबर्ग ने कहा था- हार गई मोदी सरकार

फेसबुक और इंस्टाग्राम के स्वामित्व वाली कंपनी मेटा को अब संसद तलब करेगी। मेटा को उसके CEO मार्क जुकरबर्ग के भारत की सरकार को लेकर हालिया बयान के चलते तलब किया जाएगा। मार्क जुकरबर्ग ने हाल ही में दावा किया था कि कोविड महामारी के बाद अधिकांश सरकारें सत्ता से चली गईं। इसमें उन्होंने भारत का भी नाम लिया था। इसके बाद भारत में इसको लेकर कड़ी प्रतिक्रिया हुई थी। अब संसद की आईटी मामलों की स्थायी समिति इस मामले में कार्रवाई करने जा रही है।

संचार और आईटी मामलों की स्थायी संसदीय समिति के मुखिया निशिकांत दुबे ने इस मामले में मंगलवार (14 जनवरी, 2025) को मेटा को तलब करने का ऐलान किया है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विट्टर) पर यह जानकारी दी है। निशिकांत दुबे ने कहा, “मेरी कमिटी ग़लत जानकारी के लिए मेटा को बुलाएगी। किसी भी लोकतांत्रिक देश की ग़लत जानकारी उसकी छवि को धूमिल करती है। इस गलती के लिए भारतीय संसद से तथा यहाँ की जनता से उस संस्था को माफ़ी माँगनी पड़ेगी।”

उन्होंने या ऐलान देश के आईटी मामलों के केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मार्क जुकरबर्ग के बयान पर जवाब के बाद दिया। अश्विनी वैष्णव ने इस मामले पर कहा, “दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में, भारत ने 2024 के चुनावों में 64 करोड़ से अधिक मतदाताओं के साथ चुनाव सम्पन्न करवाए। भारत के लोगों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाले NDA में अपने विश्वास की पुष्टि की। जुकरबर्ग का यह दावा कि 2024 के चुनावों में भारत सहित अधिकांश मौजूदा सरकारें कोविड के बाद हार गईं, तथ्यात्मक रूप से गलत है।”

केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मेटा के मुखिया का ही गलत जानकारी देते हुए देखना एकदम निराशाजनक है। गौरतलब है कि मेटा मुखिया जुकरबर्ग हाल ही में जो रोगन नाम के पॉडकास्ट में गए थे। उनका यह पॉडकास्ट 10 जनवरी, 2025 को रिलीज हुआ था। इस पॉडकास्ट के दौरान ही उन्होंने कंटेंट मॉडरेशन, सरकार पर भरोसा, COVID-19, एल्गोरिदम, सरकारी प्रभाव जैसे मुद्दों पर बात की। इसी बीच उन्होंने दावा किया कि कोविड महामारी के बाद कई देशों की सरकारे गईं और इसी में भारत का उदाहरण दिया।

इस मामले में में मेटा ने भी बाद में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। ना ही मेटा ने अपने CEO के बयान को लेकर माफी माँगी। अब मेटा को भारत में संसदीय समिति ने तलब कर लिया है।

आयुष बनकर महाकुंभ में यति नरसिंहानंद के कैंप के बाहर घूम रहा था अयूब अली, संतों ने पकड़ा: डासना मंदिर में भी पहचान छिपा घुसपैठ कर चुके हैं मुस्लिम

गाजियाबाद के डासना मंदिर के महंत एवं जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद के प्रयागराज महाकुंभ कैंप से अयूब नाम के एक संदिग्ध को पकड़ा गया है। कहा जा रहा है कि अयूब ने अपना नाम आयुष बताकर मेला क्षेत्र में प्रवेश किया था। पुलिस अयूब को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वह नरसिंहानंद के कैंप के बाहर क्यों घूम रहा था।

अयूब मंगलवार (14 जनवरी 2025) को यति नरसिंहानंद के कैंप के आसपास घूम रहा था। उसकी गतिविधियाँ संदिग्ध लगीं तो अखाड़े के संतों ने उसे पकड़ लिया। इस दौरान अयूब ने अपना नाम आयुष बताया और कहा कि वह नरसिंहानंद से मिलने के लिए आया हुआ है। शंका हुई तो संतों ने पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की तो उसने अपना असली नाम अयूब अली बताया।

उसने बताया कि वह उत्तर प्रदेश के एटा के अलीगंज का रहने वाला है। उसके अब्बा का नाम शाकिर अली है और उसके दो भाई एवं तीन बहनें हैं। उसने बताया कि वह कुंभ में घुमने के लिए अकेला आया हुआ था। उसने यह भी कहा कि उसे किसी ने भेजा नहीं है। उसने यह भी कहा, “मुझे मालूम नहीं था कि यहाँ आना अलाऊ नहीं है।” वह कानपुर से ट्रेन में बैठकर गोरखपुर गया और वहाँ से प्रयागराज पहुँचा था।

इस घटना के बाद नरसिंहानंद ने कहा कि महाकुंभ में उनकी हत्या हो सकती है। इसकी साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा, “कुछ महीने पहले ही गाजियाबाद स्थित मेरे डासना मंदिर के बाहर 10,000 मुस्लिमों की भीड़ ने हमला किया था। मेरी लगातार रेकी की जा रही है। बेंगलुरु में रहने वाला जुबैर भी धमकी दे चुका है। उसी ने मंदिर पर हमला कराया था।”

नरसिंहानंद ने कहा कि उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से दो गनर मिले हुए हैं। उन्होंने कहा, “महाकुंभ में मुझे सबसे ज्यादा खतरा है। मेरी कभी भी हत्या हो सकती है।” उन्होंने हिंदुओं से 4-5 बच्चे पैदा करने की अपील करते हुए कहा कि भारत में मुस्लिमों की वजह से हिंदू आबादी को खतरा पैदा हो गया है। हिंदुओं की आबादी तेजी से घट रही है और मुस्लिमों की बढ़ रही है।

पहले भी उनके मंदिर से पकड़ा चुके हैं मुस्लिम

उत्तर पुलिस ने 3 अक्टूबर 2024 को डासना मंदिर में घुसने की कोशिश करने के आरोप में तीन मुस्लिमों को पकड़ा था। इन लोगों ने अपना नाम हिंदू बताया था। हालाँकि, उनकी पहचान राहुल, नानक और वजीर खान के रूप में हुई थी। ये सभी मथुरा जिले के रहने वाले थे। तीनों ने हिंदू नामों का इस्तेमाल किया और मंदिर में घुसने के लिए खुद को रामलीला टीम का हिस्सा होने का दावा किया था।

वहीं, मई 2023 में 2 नाबालिग लड़कियों के साथ एक संदिग्ध मंदिर में घुसने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया था। संदिग्ध का नाम मोहसिन बताया गया था। यह बात भी सामने आई थी कि मोहसिन के साथ 2 लड़कियाँ थीं, जिनमें से एक हिन्दू समाज से है। इसी लड़की के आधार कार्ड पर एंट्री करने की कोशिश की गई थी। दूसरी नाबालिग लड़की मुस्लिम है। नरसिंहानंद ने रेकी करने का आरोप लगाया था।

इससे पहले अक्टूबर 2021 में भी एक मुस्लिम बच्चे ने डासना मंदिर में घुसने की कोशिश की थी। उसे नरसिंहानंद ने खुद पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था। नरसिंहानंद ने दावा किया था कि यह बच्चा उनकी रेकी करने के लिए आया था। इसका नाम अनस बताया गया था। नरसिंहानंद ने कहा था कि मुस्लिम के बच्चे ट्रेंड कातिल हैं।

वहीं, जून 2021 में मंदिर में कथित तौर पर पुजारी नरसिंहानंद की हत्या करने आए दो लोगों को पकड़ा गया था। उससे पहले मार्च 2021 में डासना मंदिर के महंत नरसिंहानंद और उसके साथी ने आसिफ नाम के एक मुस्लिम लड़के को मंदिर में घुसते हुए पकड़ा था। इसके बाद मंदिर के पुजारियों ने उसकी पिटाई कर दी थी। इस घटना के बाद नरसिंहानंद की हत्या का एलान करते कई वीडियो सामने आए थे।

ऑस्ट्रेलिया से हार के बाद ‘लेडीज टूर’ पर कैंची, पत्नी-गर्लफ्रेंड को 14 दिन ही साथ रख सकेंगे टीम इंडिया के खिलाड़ी: एक ही बस से सब करेंगे सफर, गंभीर के मैनेजर पर भी एक्शन

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने हालिया हार के बाद टीम की प्रदर्शन क्षमता को बेहतर बनाने के लिए कुछ कड़े नियम बनाए हैं। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के खिलाफ लगातार हार के बाद शनिवार (11 जनवरी 2025) को मुंबई में बीसीसीआई की समीक्षा बैठक में ये निर्णय लिए गए। इस बैठक में कप्तान रोहित शर्मा, मुख्य कोच अजित अगरकर और बीसीसीआई के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैठक के बाद बीसीसीआई ने खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब विदेशी दौरों के दौरान खिलाड़ियों के परिवार की उपस्थिति सीमित कर दी गई है। यदि दौरा 45 दिनों से अधिक लंबा है, तो खिलाड़ी के परिवार केवल 14 दिनों के लिए उनके साथ रह सकते हैं। छोटे दौरों के लिए यह सीमा सात दिनों की होगी। बीसीसीआई का मानना है कि खिलाड़ियों के साथ परिवार की लंबी उपस्थिति उनके प्रदर्शन को प्रभावित करती है, इसलिए यह सख्त कदम उठाया गया है।

इसके अलावा, सभी खिलाड़ियों को अब टीम बस से ही यात्रा करनी होगी। पहले कुछ खिलाड़ी निजी वाहनों या अन्य साधनों से सफर करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। चाहे खिलाड़ी कितना भी बड़ा हो, उसे टीम बस का ही उपयोग करना होगा। बीसीसीआई का कहना है कि यह कदम टीम की एकता को बनाए रखने के लिए उठाया गया है। बता दें कि बीते वर्ल्ड कप के दौरान कप्तान रोहित शर्मा पर ओवरस्पीडिंग के आरोप लगे थे और उनका चालान भी कटा था।

सहयोगी स्टाफ के कार्यकाल को लेकर भी नई नीति बनाई गई है। अब किसी भी स्टाफ का कार्यकाल दो साल तक सीमित होगा। प्रदर्शन के आधार पर इसे एक साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। यही नहीं, बीसीसीआई की ओर से गौतम गंभीर के निजी मैनेजर गौरव अरोड़ा पर भी सख्ती बरती गई है। अब मुख्य कोच के निजी मैनेजर टीम होटल में नहीं रुक सकेंगे और न ही वीआईपी बस में सफर कर पाएँगे।

खिलाड़ियों के अतिरिक्त खर्चों को लेकर भी सख्ती बरती गई है। अब हवाई यात्रा के दौरान अगर किसी खिलाड़ी का सामान तय सीमा (150 किलोग्राम) से अधिक होगा, तो उसका खर्च खुद खिलाड़ी को उठाना होगा। बीसीसीआई ने स्पष्ट किया है कि ऐसे नियम लागू करने का उद्देश्य खिलाड़ियों के प्रदर्शन को सुधारना और टीम के भीतर एकजुटता बनाए रखना है।

इन सख्त दिशा-निर्देशों से यह साफ है कि बीसीसीआई अब प्रदर्शन में कोई भी कमी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। टीम के भीतर अनुशासन और एकता लाने के लिए ये फैसले लागू किए गए हैं।

कभी चाकू तो कभी पेट्रोल बम लेकर आते थे पाकिस्तानी, 1000+ बार किया रेप: ब्रिटेन के ग्रूमिंग गैंग ने शराब-कबाब से फँसाया, पीड़िता को कहते थे- गोरी मेम-कु&या

एक ब्रिटिश लड़की का पाकिस्तानी आदमियों के ग्रूमिंग गैंग ने 1000 से अधिक बार रेप किया। उसको गालियाँ दी गई। उसे ‘गोरी मेम’ कह कर प्रताड़ित किया गया। उसके साथ हुई इस घटना के बाद पाकिस्तानियों ने घर पर भी हमला किया। उसकी पीड़ा की यह कहानी ब्रिटेन के एक न्यूज चैनल ने अपनी एक डाक्यूमेंट्री में शामिल की है।

ग्रेट ब्रिटेन न्यूज को एक डाक्यूमेंट्री के लिए इस लड़की एमिली (बदला हुआ नाम) ने अपनी कहानी बताई। ग्रेट ब्रिटेन न्यूज ने एमिली की यह पीड़ा एक एक्टर के माध्यम से सुनाई है। एमिली बताती है, “मैं कॉलेज के दौरान एंड्रिया नाम की एक लड़की से मिली जिसने मुझे एक पाकिस्तानी से मिलवाया। यह पाकिस्तानी एक कबाब की दुकान पर काम करता था।”

एमिली ने आगे बताया, “इसके बाद हम लगातार कबाब की इस दुकान पर जाने लगे। यहाँ हमें वह मुफ्त में कबाब खिलाते थे और शराब भी पिलाते थे। इसके अलावा वह मुफ्त में सिगरेट भी पिलाते थे। हम तब किशोर थे और ऐसी मुफ्त की पार्टी को पसंद करते थे। मैं तब 14 साल की थी।”

एमिली ने इसके बाद गैंगरेप के विषय में बताया “इसके बाद मुझे एंड्रिया एक और जगह ले गई जहाँ यह कबाब वाले पाकिस्तानी मिले। यहाँ 5-6 लोगों ने मेरा रेप किया। मुझे इस दौरान अलग-अलग शहर में ले जाया गया और रेप किया गया। मेरी माँ को इस दौरान इस बारे में कुछ नहीं पता था।”

एमिली ने इसके बाद कहा, “वो लोग यही बॉयफ्रेंड वाला मॉडल अपनाते थे। मुझे उन लोगों ने धमकाया, मेरा शीलभंग किया… वह मुझे गोरी लड़की, कु#या जैसी गालियाँ देते थे। मेरे घर एक आदमी चाकू लेकर भेजा गया और पेट्रोल बम भी लेकर कोई पहुँचा। मेरा 1000 से ज्यादा बार रेप हुआ और पता नहीं कितने लोगों ने मेरा यौन शोषण किया।”

यह घटना यूनाइटेड किंगडम के टेलफोर्ड शहर में हुई। इस शहर में पाकिस्तानियों की बड़ी संख्या है। टेलफ़ोर्ड शहर में 2022 में ग्रूमिंग गैंग के बारे में हुई एक जाँच ने सबको चौंकाया था। इस रिपोर्ट में सामने आया था कि यहाँ 1000 से अधिक बच्चों और बच्चियों का यौन शोषण सालों तक चलता रहा।

बच्चों का यह यौन शोषण 1980 से ही चल रहा था और पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग लगातार इन बच्चियों को निशाना बनाते थे। इस रिपोर्ट में यह भी सामने आया था कि पीड़ितों को ही यहाँ दोषी ठहरा दिया जाता था ताकि किसी पर मुस्लिम विरोधी होने का ठप्पा ना लगे।

टेलफ़ोर्ड में 13 वर्षीय बच्ची लूसी का अजहर अली नाम ने लगातार रेप किया था और बाद में उसका घर जला दिया था। इस आग में गर्भवती लूसी, उनकी बड़ी बहन सारा और माँ की मौत हो गई थी। यह टेलफ़ोर्ड में ग्रूमिंग का बड़ा मामला बना था।

गौरतलब है कि बीते कुछ दिनों से यूनाइटेड किंगडम में लगातार पाकिस्तानियों द्वारा ब्रिटिश बच्चियों की ग्रूमिंग का मामला चल रहा है। इसको लेकर एलन मस्क ने भी कार्रवाई की माँग की है। हालाँकि, यहाँ की किएर स्टार्मर की सरकार ने ग्रूमिंग मामलों में जाँच से मना कर दिया है और संसद में भी इस प्रस्ताव को गिरा दिया है।

ताहिर हुसैन ने हिंदू विरोधी दंगों के लिए दिया था पैसा: दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में बताया ‘मास्टरमाइंड’, विधानसभा चुनावों के लिए जमानत माँग रहा है AIMIM का प्रत्याशी

दिल्ली दंगों के सरगना ताहिर हुसैन ने विधानसभा चुनावों में AIMIM के उम्मीदवार के रूप में नामांकन करने के लिए हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत की माँग की है। दिल्ली पुलिस ने मंगलवार (14 मंगलवार) को ताहिर हुसैन की इस माँग का दिल्ली हाई कोर्ट में विरोध किया। इसके बाद जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने फैसले को सुरक्षित रख लिया। वह अपने चैंबर में फैसला सुनाएँगी।

ताहिर हुसैन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रिबेका जॉन पेश हुईं और उन्होंने नामांकन दाखिल करने से लेकर चुनाव प्रचार तक के लिए 16 जनवरी से 9 फरवरी तक अंतरिम जमानत की माँग की। वहीं, दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश हुए एडीशनल सॉलीसिटर ऑफ इंडिया (ASG) चेतन शर्मा और SPP रजत नायर ने इस बेल का विरोध किया। नायर ने कहा कि ताहिर हुसैन समाज के लिए खतरा हैं।

शर्मा ने कहा कि नामांकन, स्क्रूटनी और बैंक अकाउंट खोलने के लिए हिरासती परोल दी जा सकती है। हालाँकि, उन्होंने चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत देने का सख्त विरोध किया। ASG ने कहा कि ताहिर हुसैन ने वीभत्स काम किया है। उन्होंने तर्क दिया कि चुनाव लड़ने का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि नामांकन किया जा सकता है, लेकिन चुनाव प्रचार के लिए जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

शर्मा ने तर्क दिया कि ट्रायल अपने अंतिम चरण है। चुनाव प्रचार के दौरान ताहिर हुसैन इस दौरान गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में चार गवाह पहले ही पलट चुके हैं। शर्मा ने आगे कहा कि ताहिर हुसैन दंगों का मुख्य साजिशकर्ता, सरगना और फंडिंग करना वाला है। वह UAPA और PMLA सहित तीन मामलों में जेल में हैं।

ASG शर्मा ने कहा, “यूएपीए और ईडी मामलों में जेल नियम है और जमानत अपवाद है। यहाँ हम इस तथ्य के बावजूद हिरासत पैरोल के लिए तैयार हैं कि चुनाव लड़ना मौलिक अधिकार नहीं है। हम मान रहे हैं कि नामांकन दाखिल करने में उनकी सुविधा के लिए हिरासत पैरोल दी जानी चाहिए। दूसरों की तरह वह भी चुनाव लड़ सकते हैं। वे भी जीते हैं। लोग जेल में बैठकर जीते हैं।”

वहीं, ताहिर हुसैन की ओर से रिबेका जॉन ने कहा कि PMLA मामले में वह हिरासत की आधी से ज़्यादा अवधि काट चुके हैं और उन्हें अभी तक दोषी भी नहीं ठहराया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि ताहिर हुसैन को 11 एफ़आईआर में बरी किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

दरअसल, दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में हाईकोर्ट के समक्ष अंतरिम जमानत याचिका दायर की गई है। अंकित शर्मा की हत्या करने के बाद उनके शव को नाले में फेंक दिया गया था। बता दें कि इससे पहले 3 दिसंबर को ट्रायल कोर्ट ने ताहिर हुसैन को जमानत देने से इनकार कर दिया था।

CM आतिशी ने चुनाव प्रचार के लिए किया सरकारी वाहन का इस्तेमाल, AAP ने पीएम मोदी और अमित शाह का AI वीडियो बनाकर किया शेयर: मुख्यमंत्री और पार्टी के खिलाफ FIR दर्ज

दिल्ली में विधानसभा चुनावों को लेकर आचार संहिता लागू है। इस बीच आचार संहिता का उल्लंघन करने पर आम आदमी पार्टी और उसके नेताओं पर दो अलग-अलग FIR की गई हैं। पहली FIR मुख्यमंत्री आतिशी के खिलाफ दर्ज कराई गई है। उन पर चुनाव प्रचार के दौरान सरकारी वाहन इस्तेमाल करने का आरोप है। वहीं, भाजपा का फर्जी वीडियो शेयर करने को लेकर BJP ने केस दर्ज कराया है।

आदमी आदमी पार्टी (AAP) की नेता और दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी के खिलाफ रिटर्निंग ऑफिसर ने शिकायत दी है। शिकायत में कहा गया है कि उन्होंने सरकारी वाहन का राजनीतिक उद्देश्य से इस्तेमाल कर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया है। जाँच में पता चला कि लोक निर्माण विभाग (PwD) के अधिकारी संजय कुमार ने सीएम को यह वाहन दी थी। इसके बाद उनके खिलाफ 7 जनवरी को FIR दर्ज की गई।

FIR में कहा गया है, “दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना के खिलाफ आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने और अपने राजनीतिक उद्देश्य के लिए सरकारी वाहन का उपयोग करने की शिकायत मिली है। सामान्य प्रशासन विभाग, जीएनसीटीडी के दिनांक 07.01.2025 के पत्र में कहा गया है कि चुनावों के दौरान चुनाव प्रचार या चुनाव संबंधी यात्रा के लिए आधिकारिक वाहन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।”

FIR की कॉपी में आगे कहा गया है, “इसके अनुसार, सरकारी वाहन संख्या DL-IL-AL1469 का राजनीतिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जाना आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है और जीएडी के उपरोक्त पत्र में निहित निर्देशों का उल्लंघन है। यह बीएनएस की धारा 223 के संदर्भ में उक्त अधिकारी (संजय कुमार, कार्यकारी अभियंता, दक्षिण पूर्व सड़क डिवीजन 2) के खिलाफ कार्रवाई को आमंत्रित करता है।”

कालकाजी से AAP उम्मीदवार आतिशी के खिलाफ दिल्ली के गोविंदपुरी थाने में FIR दर्ज की गई है। बताया जा रहा है कि लोक निर्माण विभाग की गाड़ी से कालकाजी स्थित आतिशी के चुनाव कार्यालय में चुनाव प्रचार की सामग्री पहुँचाई गई थी। बता दें कि भाजपा ने कालकाजी सीट से अपने पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी को मैदान में उतारा है।

वहीं, दूसरी FIR आम आदमी पार्टी के खिलाफ दर्ज की गई है। यह FIR दिल्ली भाजपा ने नॉर्थ एवेन्यू थाने में दर्ज करवाई है। भाजपा का आरोप है आम आदमी पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के खिलाफ कई आपत्तिजनक ट्वीट किए हैं। इनमें फोटो और वीडियो बनाने के लिए AI तकनीक का सहारा लिया गया और आपत्तिजनक वीडियो बनाए गए।

शिकायत मिलने के बाद दिल्ली पुलिस मामले की जाँच कर रही है। दिल्ली पुलिस आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया विभाग के लोगों से पूछताछ कर सकती है। इसके साथ ही AAP के सोशल मीडिया हैंडल चलाने वाले व्यक्ति से पूछताछ हो सकती है। दिल्ली पुलिस पता लगाने की कोशिश करेगी कि ये जो सारे वीडियो एवं पोस्ट किसके कहने पर डाले गए हैं। उसके अनुसार पुलिस एक्शन लेगी। 

ईसाई-मुस्लिम महिला साथ में, जिस हिन्दू का त्यो​हार वही किनारे: सोशल मीडिया यूजर्स भड़के, जूते पहन पोंगल मनाने पर उदयनिधि स्टालिन को घेरा

हिन्दू त्यौहार पोंगल को भी ‘सेक्युलर’ किए जाने का प्रयास चल रहा है। पोंगल मनाने में बुरका और क्रॉस वाली महिलाओं को तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने साथ रखा। उन पर आरोप है कि इस दौरान हिन्दू महिला को किनारे खड़ा कर दिया गया। अच्छी फसल और सूर्य की पूजा के इस त्यौहार पर अन्न पकाते समय उदयनिधि ने जूते उतारना भी मुनासिब नहीं समझा, यह कहते हुए लोगों ने सोशल मीडिया पर प्रश्न उठाए हैं।

मंगलवार (14 जनवरी, 2024) को सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही देश भर में त्योहार मनाया जा रहा है। उत्तर भारत में जहाँ इसे खिचड़ी और मकर संक्रांति के नाम से तो दक्षिण भारत में पोंगल के नाम से लोग मना रहे हैं। यह तमिलनाडु का एक बड़ा त्योहार है। इस त्योहार में पारंपरिक तौर पर मिट्टी के बर्तन में लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाया जाता है। सूर्य देव, इंद्र, गाय-बैल और खेती-किसानी से जुड़े प्रतीकों की पूजा की जाती है।

इसी मौके पर यह त्यौहार मनाने तमिलनाडु के सीएम स्टालिन की एक फोटो वायरल हुई है। इसमें वह जूते पहने हुए हिजाब वाली महिला के बीच एक लड़की को प्रसाद परोस रहे हैं। उनके इस दौरान यह जूते पहनने पर लोगों ने प्रश्न उठाए हैं। कुछ लोगों ने हिजाब वाली महिलाओं को इसमें शामिल करना पोंगल त्योहार को सेक्युलर बनाने की कोशिश और हिन्दुओं का अपमान बताया है।

CM स्टालिन के बेटे उदयनिधि की भी एक फोटो पर ऐसे ही प्रश्न उठे हैं। इसमें वह गले क्रॉस पहने एक महिला और बुर्के वाली एक महिला के साथ पोंगल के बर्तन में प्रसाद बनाते दिख रहे हैं। संभवतः एक हिन्दू महिला किनारे खड़ी है। इसके अलावा उन्होंने जूते भी पहन रखे हैं।

उनका यह फोटो सामने आने के बाद कई लोगों ने प्रश्न उठाए। टीवी एंकर सुमंत रमन ने लिखा, “ना आग, ना बर्तन में कुछ पक रहा, जूते पहने हुए और (संभवतः) हिंदू महिला को हिंदू त्योहार के लिए किनारे पर धकेला जा रहा है। द्रविड़वाद में जो कुछ भी गलत है, उसे दिखाती बेहतरीन तस्वीर। क्या इन आयोजनों का प्रबंध करने वाले लोग बेहतर फोटो सेशन का काम नहीं कर सकते? नई PR एजेंसी लेने का समय आ गया है।”

एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर इसे फैंसी ड्रेस कॉम्पटीशन बताया।

वहीं कुछ लोगों ने यह दावा किया कि पोंगल हिन्दू त्योहार नहीं है। हालाँकि, यह दावा सही नहीं लगता क्योंकि पोंगल में सूर्य को देव मान कर पूजा की जाती है। हिन्दुओं के वेद भी सूर्य पूजा की बात कहते हैं। वहीं इस्लाम में अल्लाह के अलावा और किसी की आराधना नहीं हो सकती। तमिल साहित्य, जिसे संगम साहित्य भी कहते हैं, उसमें भी पोंगल का जिक्र है। हालाँकि, इसका स्पष्ट नाम नहीं लिखा गया लेकिन इससे जुड़ी कई बातें भी लिखी हैं।

पोंगल से जुड़ी भगवान कृष्ण के गोवर्धन उठाने और भगवान इन्द्र की भी कहानी है। इसके अलावा पोंगल से ही भगवान शिव और नंदी की कथा भी जुड़ी है। ऐसे में यह हिन्दू त्योहार ही है। हिन्दुओं की ही मान्यता गाय, सूर्य और फसलों की पूजा करने की है। दूसरी बात यदि यह हिन्दू त्योहार ना होता तो बाकी मुस्लिम-ईसाई देशों में भी मनाया जाता।

AAP ने कोर्ट में कहा – दिल्ली के लोगों को आयुष्मान भारत योजना नहीं देंगे: दिल्ली आरोग्य कोष योजना को बताया बेहतर

दिल्ली में केंद्र की आयुष्मान भारत योजना को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने इस योजना को लागू करने से साफ इनकार करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में हलफनामा दायर किया है। सरकार का कहना है कि आयुष्मान भारत योजना को लागू करना पहले से प्रभावी दिल्ली आरोग्य कोष (DAK) योजना को कमजोर करने जैसा होगा।

दिल्ली सरकार ने तर्क दिया है कि उसकी योजना अधिक व्यापक और प्रभावशाली है। आयुष्मान भारत योजना केवल दिल्ली की सीमित आबादी को लाभ पहुँचाएगी, जबकि DAK योजना हर नागरिक को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराती है।

AAP सरकार ने अदालत को बताया कि केंद्र की प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) दिल्ली की केवल 12-15% आबादी को कवर करती है। इसके विपरीत, दिल्ली आरोग्य कोष योजना पूरे राज्य की जनता को लाभान्वित करती है। इस योजना के तहत मरीजों को राजधानी के किसी भी सूचीबद्ध निजी अस्पताल में मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है। सरकार ने कहा कि उनकी योजना पारदर्शी है और इसका प्रभाव ज्यादा दूरगामी है। DAK योजना न केवल दिल्लीवासियों को लाभ पहुँचाती है, बल्कि पड़ोसी राज्यों से इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भी राहत देती है।

दिल्ली सरकार ने हलफनामे में इस बात पर जोर दिया कि राजधानी के सरकारी अस्पतालों का नेटवर्क बेहद मजबूत है। दिल्ली के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में इलाज करवाने वाले 30% से अधिक मरीज उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और बिहार जैसे पड़ोसी राज्यों से आते हैं। सरकार का दावा है कि यह आंकड़ा दिखाता है कि दिल्ली के अस्पतालों में दी जा रही स्वास्थ्य सेवाएँ, अन्य राज्यों में आयुष्मान भारत योजना के तहत उपलब्ध सुविधाओं से कहीं बेहतर हैं।

AAP सरकार ने इस याचिका को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज करने का आग्रह किया है। सरकार ने कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनावों में भाजपा केवल 10% सीटें जीत पाई थी, फिर भी वह अपनी नीतियों को जबरदस्ती थोपने की कोशिश कर रही है। सरकार का कहना है कि स्वास्थ्य नीति बनाना राज्य का विषय है और केंद्र की योजना को लागू करना दिल्ली के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करने जैसा है।

दिल्ली सरकार ने यह भी कहा कि आयुष्मान भारत योजना पुरानी 2011 की जनगणना के आधार पर बनाई गई है, जो वर्तमान समय की जरूरतों के अनुसार अप्रासंगिक हो चुकी है। इस योजना के तहत बहुत से जरूरतमंद लोग लाभ से वंचित रह सकते हैं, जबकि DAK योजना ऐसी किसी सीमा से परे है और ज्यादा समावेशी है।

दिल्ली के भाजपा सांसदों ने हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है। इसमें उन्होंने अदालत से माँग की है कि दिल्ली सरकार को आयुष्मान भारत योजना को लागू करने का निर्देश दिया जाए। भाजपा सांसदों का कहना है कि यह योजना पूरे देश में लागू हो चुकी है और दिल्ली के नागरिकों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए।

बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने पिछले महीने दिल्ली सरकार और केंद्र को निर्देश दिया था कि वे 5 जनवरी तक आयुष्मान भारत योजना को लागू करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करें। कोर्ट ने कहा था कि जब 33 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश इस योजना को लागू कर चुके हैं, तो दिल्ली में इसे न लागू करना उचित नहीं है।

प्रोफेसर अजहर का काम था पढ़ाना, भेजने लगा हिंदू लड़की को गंदे-गंदे मैसेज, बुलाता था कमरे पर… सहेली मुस्लिम छात्रा का भी है एंगल: हुआ गिरफ्तार-सस्पेंड

गुजरात के वडोदरा की महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी (एमएसयू) में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ हिंदी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अजहर ढेरीवाला को एक हिंदू छात्रा का यौन उत्पीड़न करने की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

प्रोफेसर अजहर ढेरीवाला पर आरोप है कि वो लंबे समय से एक हिंदू छात्रा को परेशान कर रहा है। पीड़ित लड़की की सहेली के मुताबिक, प्रोफेसर व्हाट्सएप पर अश्लील संदेश भेजता थे, घर तक पीछा करता था, और छात्रा को कमरे में आने का दबाव डालता था। यही नहीं, उसने छात्रा को धमकी दी कि अगर उसकी बात नहीं मानी गई, तो परीक्षा में उसके नंबर काट लिए जाएँगे।

मामला तब खुला जब पीड़िता की सहेली शनिवार (11 जनवरी 2025) को अपनी माँ के साथ सयाजीगंज पुलिस स्टेशन पहुँची और शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस को दिए गए बयान में सहेली ने बताया कि प्रोफेसर अजहर ढेरीवाला न केवल पीड़िता को, बल्कि उसे भी मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था। प्रोफेसर ने कई बार पीड़िता की जानकारी जुटाने और उसे राजी करने के लिए दबाव डाला।

इतना ही नहीं प्रोफेसर छात्रा का घर तक पीछा भी करता था। प्रोफसर ने छात्रा को धमकी भी दी थी कि अगर उसने प्रोफेसर की बात नहीं मानी तो एग्जाम में उसके मार्क्स कट कर देगा। इस मामले में छात्रा ने विश्वविद्यालय में शिकायत भी की थी, जिसके बाद प्रोफेसर को सस्पेंड कर दिया गया था। यही नहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन उसके ऑफिस को सील कर दिया था। हालाँकि उसके बाद भी वह फोन करके छात्रा को परेशान करने लगा, जिसके बाद छात्रा ने पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई।

शिकायत दर्ज कराने के दौरान पीड़िता की सहेली ने पुलिस को कई सबूत सौंपे हैं, जिनमें अश्लील संदेश, कॉल रिकॉर्डिंग और प्रोफेसर द्वारा किए गए दबाव के अन्य प्रमाण शामिल हैं। इस मामले में पुलिस ने पीड़िता की पहचान गोपनीय रखी है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह मामला केवल यौन उत्पीड़न तक सीमित है या इसमें अन्य आपराधिक पहलू भी शामिल हैं। फिलहाल पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जाँच शुरू कर दी है। और इन सबूतों के आधार पर पुलिस ने प्रोफेसर को गिरफ्तार कर लिया है।

इस बीच, आरोपित प्रोफेसर डॉ अजहर ढेलीवाला ने कहा है कि उसके ऊपर लगाए गए आरोप पूरी तरह से झूठे हैं। वहीं, उसकी और छात्राओं के बीच बातचीत का कथित ऑडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें वो छात्राओं को डर और लालच के दम पर अपने कमरे पर आने के लिए कह रहा है।

पीड़ित लड़की की माँ ने कहा कि वह पुलिस में इसलिए आए हैं क्यों उस लड़की के पास पारिवारिक सपोर्ट कम है। इसलिए वो खुद अपनी बेटी की सहेली के लिए पुलिस स्टेशन पहुँची।