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मुस्लिम बेटी-अम्मी ने मौलाना के साथ मिल पिता पर ही करवा दिया POCSO केस, प्रताड़ित बाप-बेटे ने अपनाया हिंदू धर्म: मीडिया ने मौलवी को ‘धर्मगुरु’ बता फैलाया भ्रम

राजस्थान के अजमेर में मुस्लिम बाप-बेटे ने इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया है। इस्लाम में रहते हुए पिता का नाम शफीक खान (बदला हुआ नाम) और बेटे का अकरम खान (बदला हुआ नाम) था। शफीक ने अपना नाम शुभम अग्रवाल और बेटे ने अपना नाम अमन अग्रवाल कर लिया है। दोनों पड़ोसी मौलाना से तंग थे। मौलाना इनकी पत्नी और बेटी को उकसाकर इनके खिलाफ कई गंभीर आरोप लगवाए थे।

दोनों पिता-पुत्र मूल रूप से अजमेर के खानपुरा के रहने वाले हैं। वे अजमेर के सुभाष नगर में फिलहाल रह रहे हैं। लगभग 45 साल के शफीक का कहना है कि वह पिछले 30 साल से फोटोग्राफी का काम कर रहे हैं और अपनी पत्नी, बेटा और बेटी साथ रहते थे। उनका कहना है कि पड़ोसी मौलाना ने उनकी बेटी और बीवी को अपने वश में कर लिया और उनके ही खिलाफ दोनों को उकसा रहा है।

शफीक ने आरोप लगाया है कि उन्हें और उनके बेटे को मौलाना द्वारा पिछले तीन साल से प्रताड़ित किया जा रहा है। मौलाना ने पीड़ित की बेटी को बहका कर उसके खिलाफ 14 अगस्त 2024 को रामगंज थाने में पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) में मुकदमा दर्ज करवा दिया। मौलाना पीड़ित की बीवी के जरिए भी लगातार प्रताड़ित कर रहा था। आखिरकार पीड़ित ने बीवी से तलाक लेने का निर्णय लिया।

शुभम अग्रवाल बने पीड़ित शफीक का कहना है कि 27 अगस्त 2024 को अपनी बीवी को 2 लाख रुपए दिए और तलाक लिया। इसके बावजूद मौलाना के बहकावे में बीवी और बेटी पीड़ित को लगातार प्रताड़ित करते रहे। उनका कहना है कि इस संबंध में उन्होंने अपने समुदाय के लोगों से मदद माँगी, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की। इसके बाद पिता-पुत्र ने हिंदू समुदाय के लोगों से मदद माँगी।

जब हिंदू समुदाय के लोगों से इन्हें हर तरह की मदद मिली तो दोनों ने इस्लाम मजहब त्यागकर हिंदू धर्म अपनाने का निर्णय लिया। इसके बाद वे दोनों ने क्रिश्चियन गंज स्थित मंदिर के पुजारी से संपर्क किया और हिंदू धर्म अपनाने की बात कही। इसके बाद पुजारी ने पूजा-पाठ, हवन और पूरे विधि-विधान से दोनों को हिंदू धर्म में घरवापसी करवाई। दोनों ने कोर्ट के जरिए भी धर्म परिवर्तन कर लिया।

दोनों का हिंदू धर्म में स्वागत करने वाले अजमेर के मंदिर के पुजारी ने बताया कि दोनों पिता-पुत्र काफी समय से परेशान थे और दोनों हिंदू धर्म अपनाना चाहते थे। आखिरकार सोमवार (13 जनवरी) को पूजन हवन करके उन्होंने सनातन धर्म अपना लिया। पुजारी का कहना है कि दोनों ने स्वेच्छा से हिंदू धर्म अपनाया है। दोनों को सनातन धर्म के बारे में काफी जानकारी पहले से ही है।

हिंदू धर्म अपनाने वाले बाप-बेटे का कहना है कि उनका हिंदू धर्म से पहले से जुड़ाव रहा है। अब वे स्वेच्छा से हिंदू धर्म में आ गए हैं। दोनों ने हिंदू समाज से उन्हें अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “मेरा हिंदू समाज से भी निवेदन है कि मुझे और मेरे बेटे को हिंदू धर्म में स्वीकार करें। हमने कोर्ट के जरिए भी धर्म बदल लिया है। अगर मेरी कोई गलती हो तो मुझ पर कार्रवाई की जाए।”

मीडिया ने मौलाना को धर्मगुरु लिखकर संशय पैदा करने की कोशिश की

शफीक और अकरम नाम के दोनों बाप-बेटे अपने पड़ोसी मौलाना से परेशान थे। हालाँकि, मुख्यधारा की मीडिया संस्थानों ने मौलाना को धर्मगुरु बताकर समाज में भ्रम पैदा करने की कोशिश की। इस पूरे खबर को पढ़कर एक बार संशय होता है कि वे हिंदू धर्मगुरु से परेशान थे, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल उलट है। इस तरह हिंदू धर्म को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

दैनिक जागरण ने आरोपित को मौलाना लिखने की जगह उसे हिंदू धर्मगुरु लिखा है। कहीं भी मौलवी जैसे मौलाना मजहबी उलेमा के लिए इस्तेमाल होने वाले शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया है। वहीं, दैनिक भास्कर ने इस्लामी धर्मगुरु भी नहीं लिखा। उसने लिखा कि दोनों बाप-बेटे ‘पड़ोसी धर्मगुरु’ से परेशान थे। इससे लगता है कि वे किसी हिंदू से परेशान थे।

180+ लोगों के हत्यारे आतंकियों को ‘न्याय’ दिलाने के लिए हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस पहुँचे कोर्ट, सबको बताया ‘मासूम’: उम्रकैद की सजा काट रहे आतंकी

ओडिशा हाई कोर्ट में चीफ जस्टिस रहे डॉ एस मुरलीधर अब वकील बन चुके हैं। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में वकील के तौर पर मुंबई लोकल ब्लास्ट के दो दोषी 2 आतंकियों के लिए केस लड़ना चालू किया है। मुरलीधर ने कहा है कि 180 से अधिक लोगों की जान लेने वाले मुंबई लोकल ब्लास्ट मामले में जाँच पक्षपाती तौर पर हुई है और दोषियों के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। उन्होंने यह दलीलें ब्लास्ट के दो दोषियों मुजम्मिल अताउर रहमान शेख और ज़मीर अहमद लतीफुर रहमान शेख के पक्ष में दी हैं। उन्होंने इन दोनों को मासूम बताया है।

मुंबई लोकल ट्रेन में ब्लास्ट करने वाले मासूम: मुरलीधर

वकील मुरलीधर ने सोमवार (13 जनवरी, 2025) को इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट में अपनी दलीलें पेश की। मुरलीधर ने दावा किया कि ऐसे मामलों में पुलिस दबाव में जाँच करती है और कई बार आतंक के आरोपित जेल से सालों बाद छूटते हैं। मुरलीधर ने दावा किया कि मुंबई लोकल ब्लास्ट मामले में दोषी 17 वर्षों से बंद हैं और उनके जीवन के महत्वपूर्ण साल निकल चुके हैं। मुरलीधर ने दावा किया कि मुंबई लोकल ब्लास्ट मामले में दोषी ठहराए गए सभी लोग ‘निर्दोष’ और मासूम हैं।

वकील मुरलीधर ने यह भी दावा किया कि इस मामले में जाँच एजेंसियों के पास कोई पक्का सबूत नहीं है। उन्होंने कहा कि जाँच एजेंसियाँ पहले भी फेल हो चुकी हैं लेकिन कोर्ट अभी इसे ठीक कर सकती है और इन्हें रिहा कर सकती है। उन्होंने मीडिया को भी ऐसे मामलों में दोषी ठहराया। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ऐसे मामलों में पकड़े गए लोगों को पहले ही दोषी मान लेती है और इसके बाद जाँच गड़बड़ होती है। वकील मुरलीधर ने दावा किया कि हमारे पास तमाम ऐसे केस हैं।

वकील मुरलीधर ने कोर्ट में कहा, “गवाहों और आरोपितों के बयान और सबूत मौजूद हैं कि उन्हें गवाही देने के लिए मजबूर किया गया था। आरोपितों के परिवार और रिश्तेदारों को भी पीटा गया और प्रताड़ित किया गया। उदाहरण के लिए, पूरे पंचनामा में सबूत झूठे थे। आरोप है कि इन लोगों ने बम बनाने के लिए RDX का इस्तेमाल किया, लेकिन इस बात का कोई सबूत नहीं है कि आरडीएक्स कौन लाया, बम बनाने में उनकी किसने मदद की।”

180+ लोगों की गई थी जान

मुंबई लोकल ब्लास्ट मामले में यह केस वकील मुरलीधर मुजम्मिल अताउर रहमान शेख और ज़मीर अहमद लतीफुर रहमान की तरफ से लड़ रहे हैं, जिन्हें एक अदालत उम्रकैद की सजा सुना चुकी है। इनमें से एक बंगलुरु और एक मुंबई का रहने वाला है। इस मामले में उनके साथ 10 और लोग दोषी ठहराए गए थे। इनमें से 5 को फांसी जबकि 7 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इन्होने अपनी इस सजा के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील की हुई है।

यह ब्लास्ट 11 जुलाई, 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए थे। इनमें 7 ट्रेनों को निशाना बनाया गया और था सब में प्रेशर कुकर और IED वाले बम रखे गए थे। यह बम शाम को तब फटे जब लोग अपने घरों को वापस लौट रहे थे। इस ब्लास्ट में 187 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हुए थे। यह 26/11 के पहले देश के सबसे बड़े सीरियल ब्लास्ट थे। इन ब्लास्ट के बाद पुलिस और ATS ने 13 लोग पकडे थे जिसमें से 12 को सजा सुनाई गई थी।

जज रहते हुए सवालों के घेरे में रहे मुरलीधर

साल 2022 में फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री ने भीमा कोरेगाँव मामले में तब दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस रहे एस मुरलीधर पर पक्षपाती होने का आरोप लगाया था। उनका ये आरोप जस्टिस मुरलीधर के गौतम नवलखा की ट्रांजिट रिमांड और हाउस अरेस्ट को रद्द करने फैसले पर था।

हालाँकि, बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, 6 दिसंबर 2022 को विवेक अग्निहोत्री ने जस्टिस मुरलीधर के खिलाफ किए गए कॉमेंट्स पर बगैर शर्त दिल्ली हाईकोर्ट से माफी भी माँगी थी। इस आरोप पर दिल्ली हाईकोर्ट ने अग्निहोत्री और भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व निदेशक एस गुरुमूर्ति के खिलाफ 2018 में अवमानना का केस किया था।

गौरतलब है कि पुणे पुलिस ने भीमा कोरेगाँव मामले में अगस्त 2018 में नवलखा को दिल्ली से हिरासत में लिया था और उन्हें घर में नजरबंद करने के लिए महाराष्ट्र ले जाने के लिए ट्रांजिट रिमांड ली थी। उस साल अक्टूबर में जस्टिस मुरलीधर ने इस ट्रांजिट रिमांड को रद्द करते हुए नवलखा को हाउस अरेस्ट से रिहा करने का आदेश दिया था। बता दें कि जस्टिस मुरलीधर साल 2021 में उड़ीसा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने थे और 7 अगस्त, 2023 को रिटायर हुए थे।

AAP का भ्रष्टाचार: INDI गठबंधन वाले कॉन्ग्रेस ने ही ‘कट्टर ईमानदार’ का सर्टिफिकेट किया कैंसल, कोर्ट ने भी फटकारा

आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद को कट्टर ईमानदार कहते हैं। वो अपनी पार्टी को ईमानदारी का पर्याय बताते हुए उसे ईमानदारी का सर्टिफिकेट देते हैं, लेकिन इंडी गठबंधन में शामिल उनकी सहयोगी पार्टी कॉन्ग्रेस के ही नेता ने उनके ईमानदारी के ‘सर्टिफिकेट’ को कैंसिल कर दिया है। कॉन्ग्रेस नेता ने आम आदमी पार्टी पर भ्रष्टाचार के आरोपों को न सिर्फ दोहराया है, बल्कि साफ कहा है कि सरकारी एजेंसियों की कार्रवाईयों के चलते शराब नीति के घोटाले से आने वाला पैसा बंद हो गया है, इसलिए दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी को जनता से मदद माँगनी पड़ रही है।

तेलंगाना कॉन्ग्रेस नेता किरण कुमार चमाला ने AAP की ईमानदारी पर सीधा सवाल उठाते हुए पूछा कि आप अब क्यों क्राउडफंडिंग का सहारा ले रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने साउथ लॉबी और तेलंगाना की MLC के कविता के साथ मिलकर दिल्ली की शराब नीति में भ्रष्टाचार किया था। उनका दावा है कि जब तक केंद्र सरकार ने इस गड़बड़ी पर चोट नहीं की, तब तक AAP ने शराब नीति के जरिए पैसे बनाए।

चमाला ने कहा, “दिल्ली CM आतिशी अब चुनावों के लिए 40 लाख रुपये जुटाने के लिए जनता से क्राउडफंडिंग माँग रही हैं। उन्हें यह बताना चाहिए कि जब तक ‘साउथ ग्रुप’ सक्रिय था, तब तक उनकी पार्टी ने शराब घोटाले से कमाई की। अब जब भ्रष्टाचार की पोल खुल गई है, तो उन्हें जनता से मदद माँगनी पड़ रही है।”

केंद्र सरकार की कार्रवाई के बाद शराब घोटाले की कमाई बंद हो गई, जिससे आम आदमी पार्टी की असलियत सामने आ गई। तेलंगाना कॉन्ग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली की शराब नीति से हासिल किए पैसों के जरिए गोवा चुनाव लड़ा और नतीजा यह है कि वहाँ बीजेपी की सरकार है।

एक तरह से ये केंद्र सरकार की तारीफ ही है कि उसने भ्रष्टाचार पर गहरा चोट किया है और शराब की कमाई को बंद कर दिया। कॉन्ग्रेस नेता का ये बयान आम आदमी पार्टी को बुरी तरह से एक्सपोज करता है कि उसका भ्रष्टाचार बंद हो गया तो उसे क्राउडफंडिंग की राह पकड़नी पड़ी।

बता दें कि शराब घोटाले से आतिशी का सीधा कनेक्शन रहा है, क्योंकि घोटाले से जुड़े लोगों की वो रिश्तेदार हैं। ऑपइंडिया ने अपने लेख में बताया था कि आतिशी की बहन रोजा बसंती की शादी पत्रकार भूपेंद्र चौबे से हुई है, जो ‘इंडिया अहेड न्यूज़’ में बड़े पद पर थे और चैनल का सारा काम वही देख रहे थे। बकौल कपिल मिश्रा, आतिशी के जीजा वाले इस चैनल को हवाला के माध्यम से शराब घोटाले का 17 करोड़ रुपया पहुँचाया गया। ‘India Ahead News’ चैनल में कमर्शियल हेड के रूप में तैनात रहे अरविंद कुमार सिंह को CBI ने शराब घोटाले में गिरफ्तार भी किया था। जून 2021 से लेकर जनवरी 2022 तक हवाला के जरिए हुए पैसों के लेनदेन में उन्हें जाँच एजेंसी ने शामिल बताया था।

अरविंद कुमार सिंह चैनल में प्रोडक्शन कंट्रोलर भी थे। गोवा में AAP का चुनाव प्रचार देख रही कंपनी ‘Chariot Media’ के खाते में 17 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए जाने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। CBI ने आरोप लगाया था कि हवाला नेटवर्क के जरिए ये पैसे भेजे गए थे। 14 फरवरी, 2022 को गोवा में विधानसभा चुनाव हुए थे। दिल्ली के शराब घोटाले में हुआ ये था कि एक नई शराब नीति बना कर ‘साउथ लॉबी’ यानी, दक्षिण भारत की कुछ शराब कंपनियों को फायदा पहुँचाया गया और बदले में करोड़ों रुपए की घूस ली गई।

AAP को मिली घूस की रकम 100 करोड़ रुपए बताई गई थी। कविता के करीबी अरुण पिल्लई ने ‘साउथ लॉबी’ की तरफ से बैठकों में हिस्सा लिया था। वहीं Indospirit के मालिक समीर महेन्द्रू ने भी घूस में करोड़ों रुपए दिए थे। इस पूरे खेल में कोरोना के दौरान नुकसान दिल्ली की जनता का हुआ, अरविंद केजरीवाल अपने आवास ‘शीशमहल’ को सुख-सुविधाओं से लैस करने में व्यस्त रहे।

दिल्ली हाई कोर्ट की फटकार

अब दिल्ली हाई कोर्ट ने शराब घोटाले और शीशमहल के मामले को लेकर दिल्ली सरकार को फटकार भी लगाई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी सरकार पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की 14 रिपोर्ट्स विधानसभा में पेश नहीं की गईं। इनमें से दो रिपोर्ट्स लीक हो चुकी हैं, जिनमें केजरीवाल के सरकारी बंगले पर करोड़ों रुपये खर्च और शराब नीति से सरकारी खजाने को 2000 करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात सामने आई है।

जस्टिस सचिन दत्ता की बेंच ने दिल्ली सरकार की ईमानदारी पर सवाल उठाते हुए कहा, “आपने विधानसभा सत्र बुलाने में कदम पीछे खींच लिए। इससे आपकी ईमानदारी पर संदेह होता है।” कोर्ट ने यह भी कहा कि CAG रिपोर्ट को समय पर पेश करना सरकार की जिम्मेदारी थी।

‘सर्टिफिकेट’ अब भी दिखाएगी आम आदमी पार्टी या…

आम आदमी पार्टी की ‘कट्टर ईमानदारी’ पर न केवल राजनीतिक विरोधी, बल्कि सहयोगी दल भी सवाल खड़े कर रहे हैं। कोर्ट की फटकार और भ्रष्टाचार के आरोपों ने पार्टी की छवि को बड़ा झटका दिया है। मौजूदा समय में आम आदमी पार्टी के लिए यह बड़ी दुविधा वाली बात हो गई है कि वो जनता के बीच क्या मुँह लेकर जाए? ‘कट्टर ईमानदारी’ वाला सर्टिफिकेट खारिज होने के बाद क्या वो इसे महज एक राजनीतिक नारा बताकर अपना पलड़ा झाड़ ले? या बेशर्मों की तरह वो अपने सर्टिफिकेट पर डटी रहे। ऐसे में आम आदमी पार्टी को ECI और CAG की रिपोर्ट्स को सामने लाना इसलिए भी जरूरी है ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके और ‘अगर’ कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है, तो इस मुद्दे पर भी दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

1.5 लाख दलित-मुस्लिम वोटर, पंचायत चुनाव हारा हुआ सपा सांसद का बेटा और ‘राम मंदिर के बाद भी हारी भाजपा’: अयोध्या के मिल्कीपुर उपचुनाव में जानिए BJP की रणनीति

2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों ने पूरे देश को चौंकाया। अधिकांश एग्जिट पोल में 300 पार दिखने वाली भाजपा 240 सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी। इसके बाद उसने TDP और जेडीयू समेत बाकी NDA दलों के सहयोग से सरकार बनाई। लेकिन इस लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नतीजा फैजाबाद लोकसभा सीट का रहा।

लोगों ने अचरज जताया कि हिन्दुओं की सदियों पुरानी राम मंदिर की अभिलाषा पूरी होने के बाद भी आखिर भाजपा को यह परिणाम क्यों मिला। इस हार को लेकर कई तरह के विश्लेषण पेश किए गए। आम बोलचाल में अब अयोध्या कही जाने वाली यह सीट भाजपा समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अवधेश प्रसाद के हाथों हारी थी। अवधेश प्रसाद को इससे पहले दिल्ली की राजनीति में कोई नहीं जानता था। इस जीत ने अवधेश का कद कई गुना बड़ा कर दिया। अवधेश प्रसाद कोई नए नेता नहीं है।

वह सांसद बनने के पहले अयोध्या जिले की ही मिल्कीपुर सुरक्षित विधानसभा सीट से विधायक थे। अवधेश प्रसाद के संसद पहुँचने पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने उन्हें ट्रॉफी की तरह प्रस्तुत किया। भाजपा अब इस हार का हिसाब पूरा करने का मौक़ा पा चुकी है।

कानूनी पचड़े के चलते फँसा था चुनाव

अवधेश प्रसाद की जीत से खाली हुई विधानसभा सीट मिल्कीपुर पर फरवरी, 2025 में उपचुनाव होगा। अभी तक यह उपचुनाव एक कानूनी पचड़े की वजह से लटका हुआ था। इस सीट पर अवधेश प्रसाद की विधानसभा में जीत के विरुद्ध भाजपा प्रत्याशी ने ही याचिका डाली हुई थी, उन्होंने यह वापस ले ली थी। इसके बाद अब उपचुनाव का ऐलान हो गया है।

हरियाणा और झारखंड विधानसभा चुनाव के साथ हुए उत्तर प्रदेश के उपचुनाव में भाजपा गठबंधन ने 9 में से 7 सीटें हाल ही में जीती थीं। इसके बाद भाजपा का जोश हाई है और वह मिल्कीपुर भी जीतने के दावे कर रही है। मिल्कीपुर का उपचुनाव हाई प्रोफाइल हो चुका है।

यहाँ 5 फरवरी, 2025 को मतदान होगा जबकि 8 फरवरी को नतीजे आएँगे। समाजवादी पार्टी ने चुनाव तारीखों से कहीं पहले इस सीट पर अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद को टिकट देने का ऐलान कर दिया था। इस सीट पर भाजपा ने अभी अपना उम्मीदवार नहीं दिया है। कयास हैं कि भाजपा मकर संक्रांति के बाद यहाँ नाम की घोषणा करेगी।

भाजपा जल्द करेगी प्रत्याशी का ऐलान

भाजपा की तरफ से बाबा गोरखनाथ, रामू प्रियदर्शी, चन्द्रभान पासवान समेत कई लोग लाइन में हैं। बाबा गोरखनाथ 2017 में यहाँ से विधायक रहे थे और 2022 में उन्हें अवधेश प्रसाद से हार मिली थी। उनका भी दावा टिकट को लकर मजबूत है। उनके अलावा भाजपा के एक और पूर्व विधायक और संगठन का बड़ा चेहरा रामू प्रियदर्शी भी मैदान में हैं।

इन दोनों के अलावा चंद्रभान पासवान, चन्द्रकेश पासवान समेत कई और लोग भी लाइन में हैं। इस पर फैसला जल्द होने की उम्मीद है। इसके बाद ही चुनाव किस तरफ जाएगा, इस पर फैसला होगा। मिल्कीपुर दलित बहुल सीट है और आरक्षित भी है। ऐसे में भाजपा भी जमीन पर सारी चीजों का जायजा लेने के बाद ही प्रत्याशी तय करना चाहती है।

स्थानीय पत्रकार नितेश सिंह बताते हैं, “बाबा गोरखनाथ का आधार पहले से बना हुआ है लेकिन उनका अंदरखाने कुछ विरोध भी है। हालाँकि, उनकी दावेदारी से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा रामू प्रियदर्शी सभी बेंचमार्क पर खरे उतर रहे हैं। अभी काफी मुश्किल है बताना कि पार्टी किसे चुनेगी।”

सीट दलित बहुल लेकिन निर्णायक वोट सवर्णों का

मिल्कीपुर विधानसभा में लगभग 1.2 लाख वोटर दलित हैं। इनमें से भी सबसे अधिक वोट पासी समाज के लोगों का है। पासी समाज से ही अवधेश प्रसाद आते हैं। दलित वोटरों के अलावा ब्राम्हण, ठाकुर और बाकी सवर्ण वोटर भी यहाँ बड़ी संख्या में हैं। उनका कुल वोट भी लगभग 1 लाख है। मुस्लिम वोट यहाँ 30,000 है।

सपा मुस्लिम और दलित वोट के गठजोड़ से ही यहाँ जीतने की फिराक में हैं। इससे पहले अवधेश प्रसाद भी इसी फार्मूले के तहत जीतते आए हैं। उन्हें कुछ समर्थन सवर्ण भी देते रहे हैं। लेकिन इस बार मामला अलग है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अवधेश प्रसाद की जो पकड़ जमीन पर है, वह उनके बेटे अजीत प्रसाद की नहीं है।

अजीत प्रसाद जिला पंचायत का चुनाव तक हार चुके हैं। पत्रकार नितेश सिंह कहते हैं, “अजीत प्रसाद में वो विनम्रता नहीं है जो अवधेश प्रसाद में थी। वह प्रचार में तो लगे हुए हैं लेकिन सपा में अंदरखाने हुई लड़ाई उन्हें नुकसान कर सकती है। हालाँकि, अखिलेश यादव का सीधा आशीर्वाद उन्हें हासिल है।”

सभी उम्मीदवार दलित समाज से होने के चलते सवर्ण किसे समर्थन देता है, यह चुनाव में X फैक्टर बन सकता है। चुनावी विश्लेषकों का कहना है कि 2017 में बाबा गोरखनाथ को सवर्णों का समर्थन हासिल था लेकिन 2022 में यह समर्थन अवधेश प्रसाद को रहा। ऐसे में उनका वोट निर्णायक हो सकता है।

विश्लेषक बताते हैं कि सवर्णों का वोट किधर जाएगा, इसको लेकर फैसला भाजपा के उम्मीदवार का नाम सामने आने के बाद होगा। वह यह भी कहते है यहाँ सवर्ण भाजपा की तरफ से कोई अलग चेहरा चाहते हैं, इसके बाद वह पूरी तौर पर समर्थन को तैयार हैं।

भाजपा 2 बार जीती है मिल्कीपुर

मिल्कीपुर ऐसी विधानसभा सीट है जिस पर बीते तीन दशक में भाजपा, बसपा, सपा और कम्युनिस्ट पार्टी सभी जीते हैं। हालाँकि, पिछले 10 विधानसभा चुनाव और उपचुनाव में इस सीट पर सपा 6 बार जीती है। भाजपा यहाँ 2017, 1991 जबकि बसपा 2007 में चुनाव जीती थी। हालाँकि, अब यहाँ सीधी लड़ाई भाजपा और सपा में ही है। 2017 विधानसभा चुनाव में बाबा गोरखनाथ ने 28000 वोटों के अंतर से अवधेश प्रसाद को हराया था। 2022 के विधानसभा चुनाव में वह लगभग 13000 वोटों से हारे थे। इस बार वह फिर टिकट पाने के मैदान में हैं।

मंत्री से लेकर संगठन तक भाजपा ने झोंकी ताकत

भाजपा फ़ैजाबाद लोकसभा सीट पर मिली हार का बदला इस सीट पर जीत से लेना चाहती है। यह बदला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि उसके सामने उन्हीं अवधेश प्रसाद के बेटे हैं, जिन्होंने उन्हें मात दी है। भाजपा इस चुनाव के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती। उसने यहाँ अपने 6 मंत्री लगाए हुए हैं।

इसके अलावा प्रदेश अध्यक्ष से लेकर क्षेत्रीय अध्यक्ष और बाकी संगठन के लोग भी जुटे हुए हैं। यह हर गाँव के प्रधान, VDC, नगर पंचायत के प्रतिनिधि और प्रभावशाली लोगों से मिलकर माहौल सेट कर रहे हैं। यहाँ तक कि लोगों की समस्याओं को सं कर वहीं पर उनका निवारण करवाया जा रहा है।

चुनाव में सीधा दखल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी है। उन्होंने भी यहाँ के भाजपा पदाधिकरियों के साथ बैठक की है। उनका बीते कुछ माह में यहाँ दौरा भी हो चुका है। प्रत्याशी की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री योगी की रैली भी यहाँ आयोजित किए जाने के कयास लगाए जा रहे हैं।

भाजपा चुनाव में हर गाँव से वोट बटोरने के लिए लगातार अपना संगठन मजबूत कर रही है। गाँवों में उसके कार्यकर्ता जा रहे हैं। जैसे ही प्रत्याशी घोषित किया जाता है, जनसंपर्क भी तेजी से चालू किया जाएगा। भाजपा इस सीट को जीतकर अयोध्या में मिली हार पर मिट्टी डालना चाहती है।

‘राजसी’ और ‘अमृत स्नान’ कैसे बन गया मुगल काल में ‘शाही स्नान’: हिन्दू धर्मग्रंथों से जानिए महाकुंभ के बारे में, योगी सरकार ने मूल सनातन परंपरा को फिर से किया स्थापित

भारत की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति में कुंभ पर्व का महत्व अनादि काल से है। इसे न केवल धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है, बल्कि यह सनातन धर्म की महान परंपरा और अध्यात्म की जीवंतता का प्रतीक भी है। महाकुंभ 2025 की शुरुआत 13 जनवरी 2025 को प्रयागराज के संगम तीर्थ पर हुई। लाखों श्रद्धालुओं के लिए यह पर्व उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है। कुंभ मेले के दौरान विभिन्न तिथियों पर किए जाने वाले पवित्र स्नान को विशेष महत्व दिया गया है। लेकिन ‘राजसी स्नान’ या ‘अमृत स्नान’ के स्थान पर ‘शाही स्नान’ नाम का चलन कैसे शुरू हुआ, यह एक गहन ऐतिहासिक चर्चा का विषय है।

हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, कुंभ में स्नान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। महाभारत, पुराणों और वेदों में भी इसका उल्लेख मिलता है। कुंभ स्नान को ‘अमृत स्नान’ कहा जाता था क्योंकि यह अमृत प्राप्ति की उस महान कथा से जुड़ा है, जिसमें समुद्र मंथन के दौरान देवताओं और दैत्यों के बीच अमृत कलश को लेकर संघर्ष हुआ था। मान्यता है कि अमृत की कुछ बूंदें हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक में गिरीं और इन्हीं स्थानों पर कुंभ पर्व का आयोजन होता है।

मुगल काल का प्रभाव और ‘शाही स्नान’ की उत्पत्ति

हम ‘शाही स्नान’ नाम के पीछे का इतिहास जानने की कोशिश कर रहे थे। इसी बीच हमारी मुलाकात विशेषज्ञ संस्कृत शिक्षक और क्लास-1 अधिकारी विशालभाई राज्यगुरु से हुई। ऑपइंडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, मुगल काल से पहले भी कुंभ स्नान होता रहा है और इसका विशेष महत्व भी था। उन्होंने कहा कि आज जिसे हम ‘शाही स्नान’ कहते हैं, उसमें ‘स्नान’ शब्द ही हमारी प्राचीन परंपरा से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि शाही शब्द मुगलों की देन है।

भारत में इस्लामी शासन, विशेषकर मुगल काल में, भारतीय परंपराओं और भाषाओं पर गहरा प्रभाव पड़ा। इस काल में फारसी और उर्दू भाषाओं का प्रचार हुआ, जिससे कई पारंपरिक शब्दों को बदल दिया गया। कुंभ के पवित्र स्नान को भी इस बदलाव का शिकार होना पड़ा।

विशालभाई राज्यगुरू ने आगे कहा कि मुगल काल में फारसी और उर्दू भाषा को ज्यादा प्राथमिकता दी जाती थी। ऐसे में हमारी मूल परंपरा एवं संस्कृति को देश के अन्य भागों में भी प्रचारित कर भ्रष्ट करने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि उस समय नागा साधु और अन्य संत रथ, हाथी और घोड़ों के साथ भव्य ठाट-बाट में कुंभ स्थल पर पहुँचते थे। यह दृश्य राजा-महाराजाओं के दरबार जैसा होता था। मुगलों ने इस भव्यता को देखकर इसे ‘शाही’ कहा, जो फारसी में रॉयल्टी का पर्याय है। इसी संदर्भ में कुंभ के पवित्र स्नान को ‘शाही स्नान’ नाम दिया गया।

धर्मग्रंथों में स्नान के प्राचीन नाम

17वीं-18वीं शताब्दी में काशीनाथ उपाध्याय द्वारा रचित संस्कृत ग्रंथ ‘धर्मसिंधु’ में कुंभ के स्नान को ‘अमृत स्नान’ और ‘राजसी स्नान’ के रूप में वर्णित किया गया है। यह ग्रंथ हिंदू धर्मशास्त्र और परंपराओं का प्रामाणिक स्रोत माना जाता है। इसमें कहीं भी ‘शाही स्नान’ का उल्लेख नहीं मिलता।

धर्मसिंधु ग्रंथ का प्रथम पृष्ट

‘धर्मसिंधु’ का उल्लेख गीताप्रेस गोरखपुर के ‘धर्मशास्त्रांक’ पुस्तक के पृष्ठ संख्या 423-24 पर भी है।

‘धर्मशास्त्रांक’-पृष्ठ संख्या 423-24

‘धर्मसिंधु’ के अनुसार, कुंभ स्नान का उद्देश्य केवल आत्मशुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति है। इसका नामकरण भी इसी आध्यात्मिक महत्व पर आधारित था। मुगल काल के बाद ही इस पवित्र अनुष्ठान को ‘शाही स्नान’ कहा जाने लगा, जो मूल रूप से उस समय की भाषाई और सांस्कृतिक परिस्थितियों का परिणाम था।

धर्मशास्त्रांक

‘शाही’ से ‘अमृत’ तक की यात्रा

मुगल काल में शुरू हुई यह परंपरा आधुनिक भारत तक जारी रही। इस नाम का साधु-संतों ने लंबे समय तक विरोध किया। उनका कहना था कि ‘शाही स्नान’ शब्द हमारी प्राचीन परंपरा और सनातन संस्कृति का अपमान है। दरअसल, शाही स्नान नाम को बदलने के लिए कई बार माँगें उठीं, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में इसे नजरअंदाज किया गया।

ऐसे में योगी सरकार ने इस परंपरा का मूल सम्मान वापस लाने के लिए कदम उठाया। योगी सरकार की तरफ से साधु-संतों से सुझाव माँगे गए, जिन्होंने ‘अमृत स्नान’ और ‘राजसी स्नान’ जैसे नाम सुझाए। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने साधु-संतों की सिफारिशों पर विचार कर इसे ‘अमृत स्नान’ नाम दिया।

योगी सरकार की पहल और साधु-संतों की संस्तुति से इस पवित्र अनुष्ठान को उसका मूल नाम ‘अमृत स्नान’ और ‘राजसी स्नान’ वापस मिला है। यह कदम न केवल सनातन परंपरा को पुनर्स्थापित करने का प्रयास है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का भी एक बड़ा उदाहरण है।

(यह लेख मूल रूप से गुजराती में लिखा गया है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

आकार घोड़े के नाल जैसा, लेकिन टनल का नाम Z मोड़: जिसके बनने में कर्मचारी से लेकर डॉक्टर तक ने दिया बलिदान, जानिए उसकी अहमियत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (13 जनवरी 2025) को गांदरबल में जेड मोड़ टनल का शुभारंभ करके जम्मू-कश्मीर को एक और सौगात दी। यह टनल श्रीनगर-लेह हाइवे NH-1 पर स्थित है और इसकी कुल लंबाई 6.4 किलोमीटर है। ऑल वेदर कनेक्टिविटी वाले इस टनल में डबल लेन है, जो श्रीनगर को सोनमर्ग से जोड़ेगी। इस पीएम मोदी ने कहा कि ‘ये मोदी है। वादा करता है तो निभाता है’।

लगभग 3 घंटे के सफर को सिर्फ 20 मिनट में पूरा कराने वाली इस टनल का पीएम मोदी ने निरीक्षण किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री, उमर अब्दुल्ला और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद थे। उमर अब्दुल्ला ने पीएम मोदी की जमकर प्रशंसा की और कहा कि वो जो कहते हैं, वो करके दिखाते हैं।

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की लद्दाख की एक और बहुत पुरानी डिमांड आज पूरी हो गई है। इससे सोनमर्ग के साथ करगिल और लेह के लोगों की जिंदगी भी बहुत आसान होगी। उन्होंने टनल बनाने वाले श्रमिकों की भी तारीफ की। पीएम ने कहा कि टनल बनाने वाले श्रमिक न डिगे और ना ही घर लौटे। उन्होंने अपने जीवन को संकट में डालकर कठिन परिस्थितियों में काम किया। इस प्रोजेक्ट में जान गँवाने वाले 6 श्रमिकों और एक डॉक्टर को भी उन्होंने याद किया। आतंकियों ने इनकी हत्या कर दी थी।

प्रधानमंत्री ने कहा, “अपने पुराने मुश्किल दिनों को पीछे छोड़कर हमारा कश्मीर धरती का स्वर्ग होने की अपनी पहचान वापस पा रहा है। आज लोग रात के समय लाल चौक पर आइसक्रीम खाने जा रहे हैं।” उन्होंने कहा, “चिनाब ब्रिज की इंजीनियरिंग देखकर दुनिया हैरत में है। यहाँ कुछ दिन पहले पैसेंजर ट्रेन का भी ट्रायल हुआ है। यहाँ के प्रोजेक्ट्स 42,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के हैं, जिन पर काम चल रहा है।”

यह टनल घोड़े के नाल के आकार की है। हालाँकि, इस सुरंग के बनने से पहले यहाँ की सड़क अंग्रेजी के जेड ‘Z’ अक्षर के आकार की है। इसलिए वहां बनने वाले सुरंग का नाम ही जेड-मोड़ सुरंग कर दिया गया। जेड मोड़ टनल बन जाने के बाद गगनगीर से सोनमर्ग के बीच एक घंटे की दूरी अब 15 मिनट में पूरी होगी। वहीं, दुर्गम पहाड़ी वाले इस इलाके को पार करने में लगने वाली 3 से 4 घंटे का समय सिमट कर 30 से 45 मिनट रह गया है।

टनल में गाड़ियों की गति 30 किलोमीटर प्रति घंटा से बढ़कर 70 किलोमीटर प्रति घंटा कर दी गई है। इस टनल के बन जाने से चीन सीमा पर सैनिकों को हर मौसम में रसद पहुँचाना भी आसान हो गया है। इसके साथ लद्दाख एवं कारगिल में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। बर्फबारी देखने के साथ-साथ घुमने के लिहाज से भी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर्यटकों का पसंदीदा जगह है। इसके कारण स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

समुद्र तल से 2600 मीटर यानी 5652 फीट की ऊँचाई पर यह टनल 12 साल में बनकर तैयार हुई है। साल 2012 में इसे बनाने का काम बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) को दिया गया था। हालाँकि, बाद में इसे निजी कंपनी को काम सौंप दिया गया। यह PPP मॉडल पर तैयार किया गया है। इस प्रोजेक्ट में कुल 2700 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इसमें से 36 करोड़ रुपए भूमि अधिग्रहण और इंन्फ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग में लगे।

यह टनल न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग (NAT) तरीके से बनाई गई है। इस प्रक्रिया में टनल खोदने के साथ-साथ ही उसका मलबा भी निकाला जाता है और वहाँ टनल का दिवार तैयार किया जाता है। इससे भूस्खलन की आशंका नहीं रहती है। जेड मोड़ टनल के आगे बन रही जोजिला टनल साल 2028 में बनकर पूरी हो जाएगी। इससे बालटाल (अमरनाथ गुफा), कारगिल और लद्दाख को ऑल वेदर कनेक्टिविटी मिलेगी।

मेरठ में काले जादू के नाम पर राशिद खान ने 17 साल की हिंदू लड़की को फाँसा, लाखों की नकदी-जेवर लेकर फरार: मेनस्ट्रीम मीडिया ने ‘तांत्रिक’ बताकर फैलाया भ्रम

मेरठ के किठौर क्षेत्र के एक गाँव में काला जादू करने वाले मुस्लिम ‘आलिम’ राशिद खान पर 17 साल की नाबालिग हिंदू लड़की को बहला-फुसलाकर भगाने का आरोप है। ग्रामीणों और परिजनों का कहना है कि राशिद खान ने लड़की को काला-जादू के बहाने अपने जाल में फँसाया और लाखों की नकदी, जेवरात और कीमती सामान लेकर फरार हो गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘आलिम’ राशिद खान पहले से ही आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है और हत्या के मामले में जेल जा चुका है। आरोपित के छह बच्चे हैं, लेकिन फिर भी उसने नाबालिग को फँसाने और अपने साथ ले जाने की शर्मनाक हरकत की। पीड़ित परिवार ने बताया कि लड़की 10 जनवरी 2025 की रात 4 बजे घर से लापता हुई। वो अपने साथ 59,3000 रुपये नकद, 8 तोले सोने के जेवर और कीमती कपड़े भी साथ लेकर गई है।

परिजनों और भाजपा नेता प्रताप सिंह ने एसपी ऑफिस में प्रदर्शन कर पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने माँग की कि 24 घंटे के भीतर लड़की बरामद की जाए।

इस बीच, गुर्जर समाज के समाजसेवी नागेन्द्र गुर्जर ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर राशिद की जानकारी देने वाले को 50 हजार का ईनाम देने की घोषणा की है। नागेंद्र गुर्जर ने कहना है कि जिंदा या मुर्दा, कोई भी व्यक्ति राशिद को लाएगा, उसे 50 हजार का ईनाम देंगे। राशिद ने गुर्जर समाज की नाबालिग बेटी पर हाथ डालकर बहुत गलत काम किया है।

इस बीच, पुलिस ने राशिद के परिवार के तीन सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है और दावा किया है कि आरोपित की जल्द गिरफ्तारी होगी। एसपी राकेश कुमार ने बताया कि पुलिस को कुछ अहम सुराग मिले हैं और लड़की को जल्द ही सुरक्षित बरामद किया जाएगा।

मेनस्ट्रीम मीडिया ने बताया ‘तान्त्रिक’, हिंदुओं पर तानी बदनामी की तलवार

इस पूरे मामले को देखें तो आरोपित राशिद खान, जो कि मुस्लिम है, उसे मेनस्ट्रीम मीडिया ने ‘तान्त्रिक’ बताया है। ‘तान्त्रिक’ शब्द आम तौर पर हिंदू व्यवस्था के तहत इस्तेमाल होता है। ऑपइंडिया ने पाया है कि कम से कम 5 हिंदी मीडिया आउटलेट्स ने अपनी हेडलाइन्स में ‘तान्त्रिक’ शब्द का इस्लेमाक दिया। आजतक ने तो सीधे उसे तान्त्रिक ही कहा, ये बताए बगैर कि आरोपित मुस्लिम है।

आजतक की खबर का स्क्रीनशॉट

दैनिक भास्कर ने भी अपने समाचार में तान्त्रिक शब्द का इस्तेमाल किया है, और उसने भी ये बताना जरूरी नहीं समझा कि आरोपित कौन है।

भास्कर के समाचार का स्क्रीनशॉट

ईटीवी भारत ने अपने समाचार में आरोपित का नाम तो शामिल किया, लेकिन उसे तान्त्रिक ही बताया।

ईटीवी के समाचार का स्क्रीनशॉट

टीवी9 भारतवर्ष ने ये तो बताया है कि आरोपित मुस्लिम है, लेकिन उसने भी तान्त्रिक शब्द इस्तेमाल करने से परहेज नहीं किया।

लाइव हिंदुस्तान ने अपने समाचार में ‘तान्त्रिक’ शब्द का तो इस्तेमाल किया, लेकिन आरोपित मुस्लिम है, ये बताना जरूरी नहीं समझा।

लाइव हिंदुस्तान के समाचार का स्क्रीनशॉट

बता दें कि लगातार ऐसी हरकतें करता रहा है, जिसमें जादू-टोना करने वाले इस्लामी आलिमों को तान्त्रिक बता दिया जाता है। ये साफ तौर पर हिंदुओं को बदनाम करने की कोशिश लगती है।

बहरहाल, इस पूरे मामले में ग्रामीणों ने पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगाया और कहा कि मुस्लिम बाहुल्य गाँव में उनकी सुरक्षा पर हमेशा खतरा बना रहता है। वहीं, सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर नाराजगी जाहिर की जा रही है। समाज में शांति बनाए रखने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की माँग जोर पकड़ रही है। फिलहाल, गाँव में शांति बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

‘महाकुंभ मेला क्षेत्र में अस्पताल में लगी भीषण आग’: इस्लामी कट्टरपंथी और वामपंथी वायरल वीडियो शेयर करके फैला रहे झूठ, जानें पूरी सच्चाई

उत्तर प्रदेश में प्रयागराज महाकुंभ 2025 का आज सोमवार (13 जनवरी 2025) को विधिवत शुरुआत हो गई। हिंदुओं के सबसे बड़े इस धार्मिक आयोजन में देश-दुनिया के करोड़ों लोग पहुँच रहे हैं और अपनी आध्यात्मिक यात्रा को पूरा कर रहे हैं। सरकार इसे भारत की सांस्कृतिक एवं विरासत तौर पर प्रस्तुत कर रही है। हालाँकि, समाज में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो कुंभ को बदनाम करने में लगे हुए हैं।

सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक टेंट के पास धुँआ निकलते हुए दिख रहा है और फायर ब्रिगेड के कर्मचारी इससे निपटने के प्रयास में लगे हुए हैं। इस वीडियो को वायरल करके दावा किया जा रहा है कि महाकुंभ मेला क्षेत्र के हॉस्पिटल में लगी भीषण आग है।

एडवोकेट नाजनीन अख्तर नाम की एक X (पूर्व में ट्विटर) यूजर ने इसे शेयर किया और ऐसा ही दावा किया। सायमा अख्तर नाम की एक अन्य यूजर ने लिखा, “महाकुंभ मेला क्षेत्र के हॉस्पिटल में लगी भीषण आग।” सैयद हसन इमाम जैदी ने भी वीडियो को शेयर कर यही दावा किया।

प्रयागराज महाकुंभ को बदनाम करने के लिए इस तरह के झूठे दावे किये जा रहे हैं। सुदर्शन न्यूज के पत्रकार सागर कुमार ने यह दावा किया है। उन्होंने इस तरह के दावे करने वाले लोगों के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस से एक्शन लेने की भी माँग की है।

सागर कुमार ने अपने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा, “कैसे जिहादी कुंभ को बदनाम करने पर लगे हुए है। मॉक ड्रिल को देखिए कैसे बताया जा रहा है। उत्तर प्रदेश पुलिस नज़नीन अख़्तर के ख़िलाफ़ सख़्त से सख़्त कार्यवाही की जाए।”

पौष पूर्णिमा के पहले स्नान के साथ ही कुंभ के आधिकारिक शुरुआत के साथ ही इस वीडियो को वायरल करने की गति बढ़ गई है। हालाँकि, यह वीडियो पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर वायरल की जा रही है। सोशल मीडिया इंस्टाग्राम पर एमपी कवरेज नाम के हैंडल ने 3 जनवरी 2025 को लिखा था, “प्रयागराज, महाकुंभ मेला क्षेत्र के अस्पताल में आज सुबह लगी भीषण आग 8 लोग घायल होने की सूचना।”

सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर भी 4 जनवरी को ऐसा ही दावा किया गया था।

इसके बाद 6 जनवरी 2025 को भी ऐसा ही दावा किया गया था।

पत्रकार ने इसे मॉक ड्रिल बताया है, जिसे आग लगने की घटना के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि इस में कुछ लोग घायल भी हुए हैं। बता दें कि कुंभ में आग लगने की घटना साल 2013 में हुई थी, जब यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। इसमें 6 महिलाओं और 3 बच्चों सहित लगभग दो दर्जन कल्पवासी घायल हो गए थे। उस समय कुंभ मेले का प्रबंधन आजम खान के हाथ में था।

माथे पर तिलक, तन पर भगवा और मन में उत्साह: महाकुंभ में विदेशी श्रद्धालुओं का लगा तांता, रूसी महिला बोली- ‘मेरा भारत महान’, ब्राजील का युवक बोला- ‘मैं मोक्ष पाने आया’

प्रयागराज में आयोजित हो रहे महाकुंभ का पौष पूर्णिमा के मौके पर सोमवार (13 जनवरी, 2025) से आरम्भ हो गया। सुबह से ही प्रयागराज में अलग-अलग घाटों पर लाखों की भीड़ ने आस्था की डुबकी लगाना चालू कर दिया। भारतीयों के साथ इस पर्व में विदेशी श्रद्धालु भी शामिल हुए। कुछ ने इसे मोक्ष प्राप्ति का रास्ता बताया तो कई इतने बड़े आयोजन को देख कर आश्चर्यचकित रह गए। एक विदेशी महिला श्रद्धालु ने आस्था के इस सैलाब को देख कर ‘मेरा भारत महान’ कहा।

प्रयागराज के अलग-अलग घाटों में सुबह 3 बजे से ही स्नान चालू हो गया था। सुबह 9:30 बजे तक ही 60 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने स्नान कर लिया था। इसमें बड़ी संख्या उनकी भी रही जो विश्व के दूसरे हिस्सों से आए थे। एक रूसी महिला श्रद्धालु ने यहाँ स्नान करने के बाद कहा, “मेरा भारत महान… मैं रूस से यहाँ आई हूँ। मैं यूरोप में काम करती हूँ, हम महाकुंभ में पहली बार शामिल हो रहे हैं। भारत अद्भुत है। हम काफी उत्साहित हैं और यहाँ पर असल भारत दिख रहा है, यहाँ जो कुछ मुझे महसूस हो रहा है, मैं उसे शब्दों में नहीं बता सकती।”

ब्राजील से आए एक श्रद्धालु ने कहा, “मैं योग करता हूँ और मैं मोक्ष की तलाश में हूँ। भारत विश्व की धर्म की राजधानी है। मैं पहले वाराणसी गया था और अब यहाँ आया हूँ। यहाँ पानी जरूर ठंडा है, लेकिन मेरा मन भावों के चलते एकदम गर्मजोशी में है। जय श्री राम।”

इटली से आए श्रद्धालु ने प्रयागराज में महाकुंभ आयोजन में की गई व्यवस्था की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि अगर अच्छा प्रबंध ना होता तो इसका आयोजन असंभव होता। दक्षिण अफ्रीका से आए भगवा वेश वाले एक श्रद्धालु ने कहा, “यह अद्भुत है। सारी सड़कें साफ़ है। लोग हमें सहयोग कर रहे हैं। हम तिलक लगाते हैं क्योंकि हम सनातनी है। हम इसे पढ़ाते हैं और विश्व में इसका प्रचार भी करते हैं। हम यहाँ 1 जनवरी, 2025 को आए थे। उसके बाद वाराणसी पहुँचे और फिर हम यहाँ आए हैं।”

प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस, प्रशासन और रेलवे समेत तमाम विभागों ने अलग-अलग इंतजाम किए हैं। प्रयागराज महाकुंभ में लगातार पुलिस कंट्रोल रूम से मॉनिटरिंग चल रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने शाही स्नान के दिनों पर बसों में किराया मुफ्त कर दिया है। 7000 बसें प्रयागराज के लिए चलाई जा रही हैं। पुलिस और बाकी सुरक्षा एजेंसियों के 40000 जवान यहाँ तैनात हैं। इसके अलावा एक विशेष एप भी तैयार किया है।

दुबई के ‘खबरबाज’ ने हिन्दुओं के महासंगम पर फैलाई फर्जी जानकारी, महाकुंभ को कहा- ‘BJP का कार्यक्रम’: भारत विरोधी ‘रायटर्स’ के चलते बना मूर्ख, जानें सच्चाई

सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर हर खबर सनसनी के रूप में प्रस्तुत करने के चक्कर में दुबई के एक खबरबाज ने महाकुंभ को लेकर झूठ फैलाया। दुबई से बैठ कर दुनिया-जहान की खबरें चलाने वाले एक ऐसे ही खबरबाज मारियो नॉफल ने प्रयागराज में आयोजित हो रहे हिन्दुओं के समागम महाकुंभ को भाजपा समर्थित आयोजन बता डाला। उसने महाकुंभ से जुड़े भारी-भरकम आँकड़े देते-देते दावा किया कि हजारों करोड़ से आयोजित होने वाला यह मेला राजनीति से जुड़ा है।

मारियो ने एक्स पर महाकुंभ के विषय में किए गए ट्वीट में बताया कि कैसी व्यवस्थाएँ इस आयोजन के लिए की गई हैं। उसने बताया कि महाकुंभ में 40 करोड़ से अधिक लोग आएँगे, इसके लिए 4000 हेक्टेयर का शहर बसाया गया है। इसके बाद मारियो ने बताया कि 98 विशेष ट्रेनें और 40000 पुलिसकर्मियों का इंतजाम किया गया है। हालाँकि, इसके बाद उसने गलत जानकारी दी। मारियो ने लिखा, “इस आयोजन की लागत 765 मिलियन डॉलर (लगभग ₹6300 करोड़) है और इसे भाजपा समर्थित हिंदू विरासत के आयोजन के रूप में देखा जा रहा है।”

हिन्दुओं के इस महाआयोजन को लेकर मारियो की गड़बड़ समझ के पीछे भारत और हिन्दू विरोधी संस्थान रायटर्स है। उसकी ही रिपोर्ट में असल में यह दावा किया कि यह आयोजन भाजपा का है। रायटर्स ने एक रिपोर्ट में लिखा, “एक सफल महाकुंभ से भाजपा का अपने हिंदू वोटर के लिए भारत के धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों को वापस लेने और महिमामंडित करने का रिकॉर्ड चमकेगा, इसका वादा पीएम मोदी और CM आदित्यनाथ ने तब से किया है जबसे उनकी हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी 2014 में राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता में आई है।”

यानी रायटर्स के अनुसार भाजपा महाकुंभ को अपने लिए इस्तेमाल कर रही है और मात्र हिन्दुओं में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए यह आयोजन करती आ रही है। जबकि असल बात यह है कि महाकुंभ का आयोजन हर 12 वर्ष में 4 शहरों- हरिद्वार, नासिक, उज्जैन और प्रयागराज में होता है। यहाँ करोड़ों लोग इकट्ठा होते हैं, ऐसे में उनकी सुरक्षा और मेले का प्रबंधन की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है। इसके लिए उस राज्य सरकार को केंद्र सरकार भी सहायता देती है। भाजपा के अलावा जो भी पार्टी सत्ता में होगी, उसे यह आयोजन करवाना होगा।

ऐसे में रायटर्स का यह दावा करना कि भाजपा इसका इस्तेमाल कर रही है और यह आयोजन उसके द्वारा करवाया जा रहा है, पूरी तौर से गलत है। यह रायटर्स जैसे बाकी मीडिया संस्थानों की भारत और हिन्दू विरोधी छवि को और पक्का करता है। कुंभ का आयोजन किसी पार्टी से जुड़ा ना होकर हिन्दू विश्वास और पुराणों में लिखी कथाओं पर आधारित है। यह उन्हीं चार जगह पर हो होता है, जहाँ समुद्र मंथन के बाद अमृत की बूँदे गिरी थीं। इसके पीछे कथाएँ भी हैं। जब राजनीति और राजनीतिक दलों का जन्म भी नहीं हुआ था, तब से कुंभ चला आ रहा है।