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PM मोदी की विदाई करवा रहा था मार्क जुकरबर्ग, लताड़ पड़ते ही META लगा गिड़गिड़ाने: कहा- अनजाने में हुई गलती के लिए माफ करें, भारत हमारे लिए महत्वपूर्ण देश

फेसबुक और इंस्टाग्राम के स्वामित्व वाली कंपनी मेटा ने भारत से माफी माँगी है। मेटा ने अपने सीईओ मार्क जुकरबर्ग के बयान पर सार्वजनिक रूप से यह माफी माँगी है। मेटा ने कहा है कि भारत उसके लिए काफी महत्वपूर्ण है। मेटा की यह माफी उसे आईटी मामलों की संसदीय समिति द्वारा तलब किए जाने के ऐलान के बाद आई है।

मेटा की तरफ से उसके भारत के पब्लिक पॉलिसी के मुखिया शिवनाथ ठुकराल ने यह माफी एक्स (पहले ट्विटर) पर माँगी। उन्होंने अश्विनी वैष्णव के जुकरबर्ग की आलोचना वाले ट्वीट के नीचे इससे सम्बन्धित जवाब दिया है। उन्होंने मार्क जुकरबर्ग के बयान को लापरवाह और अनजाने में दिया गया बताया है।

शिवनाथ ठुकराल ने लिखा, “माननीय मंत्री अश्विनी वैष्णव जी, मार्क का यह कहना कि 2024 के चुनावों में कई मौजूदा पार्टियाँ दोबारा सरकार में नहीं लौटीं, कई देशों के संदर्भ में ठीक है लेकिन भारत के लिए नहीं। हम अनजाने और लापरवाही के चलते हुई इस गलती के लिए माफ़ी चाहते हैं। भारत मेटा के लिए महत्वपूर्ण है और हम इसके इनोवेटिव भविष्य के केंद्र में होने की आशा करते हैं।”

इससे पहले संचार और आईटी मामलों की स्थायी संसदीय समिति के मुखिया निशिकांत दुबे ने इस मामले में मंगलवार (14 जनवरी, 2025) को मेटा को तलब करने का ऐलान किया था। निशिकांत दुबे ने लिखा था, “मेरी कमिटी ग़लत जानकारी फ़ैलाने के लिए मेटा को बुलाएगी। किसी भी लोकतांत्रिक देश की ग़लत जानकारी उसकी छवि को धूमिल करती है। इस गलती के लिए भारतीय संसद से तथा यहाँ की जनता से उस संस्था को माफ़ी माँगनी पड़ेगी।”

इस मामले को लेकर आईटी मामलों के केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी आपत्ति जताई थी। उन्होंने एक ट्वीट में भारत में हुए चुनावों की कुछ जानकारी देते हुए जुकरबर्ग के बयान पर निराशा जताई थी। अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि मेटा के मुखिया का ही गलत जानकारी देते हुए देखना एकदम निराशाजनक है। 

गौरतलब है कि मेटा मुखिया जुकरबर्ग हाल ही में जो रोगन के पॉडकास्ट में गए थे। उनका यह पॉडकास्ट 10 जनवरी, 2025 को रिलीज हुआ था। इस पॉडकास्ट के दौरान ही उन्होंने कंटेंट मॉडरेशन, सरकार पर भरोसा, COVID-19, एल्गोरिदम, सरकारी प्रभाव जैसे मुद्दों पर बात की थी। इसी बीच उन्होंने दावा किया था कि कोविड महामारी के बाद कई देशों की सरकारे गईं और इसी में भारत का उदाहरण दिया। जुकरबर्ग की गलत बयानी के ऊपर भारत में काफी आलोचना हुई थी।

वागशीर, नीलगिरी, सूरत… एक ही दिन में PM मोदी ने भारतीय नौसेना को दिया ट्रिपल फोर्स: जानिए ‘मेक इन इंडिया’ जहाज-पनडुब्बी की ताकत, खामोशी से निपट जाएँगे चीन-पाकिस्तान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुंबई में नौसेना के तीन नए युद्धपोत-पनडुब्बियों को देश को लोकार्पित किया है। इनमें से एक फ्रिगेट, एक डिस्ट्रॉयर और एक पनडुब्बी है। यह तीनों भारत में बनाए गए हैं। पीएम मोदी ने इस मौके को आत्मनिर्भर भारत के लिए महत्वपूर्ण दिन बताया है और साथ ही देश की नौसैनिक विरासत को भी याद किया है।

बुधवार (15 जनवरी, 2025) को पीएम मोदी मुंबई के डॉकयार्ड में पहुँचे। यहाँ उन्होंने फ्रिगेट INS नीलगिरी, डिस्ट्रॉयर INS सूरत और पनडुब्बी INS वागशीर को लोकार्पित किया और देश को संबोधित भी किया। पीएम मोदी ने इस दौरान छत्रपति शिवाजी महाराज के नौसेना के योगदान का जिक्र किया।

पीएम मोदी ने कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज ने नौसेना को नया सामर्थ्य और विजन दिया था। आज उनकी इस पावन धरती पर 21वीं सदी की नेवी को सशक्त करने की तरफ हम एक बड़ा कदम उठा रहे हैं।” उन्होंने इन युद्धपोतों के निर्माण से मेक इन इंडिया को मिले बल को भी सराहा। उन्होंने भारत को एक भरोसेमंद साथी करार दिया है।

उन्होंने कहा, “ये पहली बार हो रहा है, जब एक डिस्ट्रॉयर, एक फ्रिगेट और एक सबमरीन को एक साथ कमीशन किया जा रहा है। गर्व की बात कि ये तीनों मेड इन इंडिया हैं… मेक इन इंडिया पहल न केवल भारत की सेनाओं की क्षमता को बढ़ा रही है बल्कि आर्थिक तरक्की के नए रास्ते भी खोल रही है।

पीएम मोदी ने जो युद्धपोत देश को सौंपे हैं, इनसे अब भारत की समुद्र में ताकत बढ़ेगी। यह तीनों ही युद्धपोत नई तकनीक से बनाए गए हैं और इनमें लगाए गए अधिकांश सिस्टम भारतीय हैं। इन तीनों युद्धपोत के लिए अलग-अलग प्रोजेक्ट चल रहे हैं।

INS वागशीर

पीएम मोदी ने स्कॉर्पीन क्लास की छठी और अंतिम पनडुब्बी INS वागशीर को देश को सौंपा। यह पनडुब्बी प्रोजेक्ट-75 के तहत बनाई गई है और डीजल-इलेक्ट्रिक तकनीक पर चलती है। INS वागशीर कलवरी क्लास की पनडुब्बी है। INS वागशीर वाले पूरे प्रोजेक्ट की लागत ₹28 हजार करोड़ से अधिक की है। इस पनडुब्बी को मुंबई के मझगाँव डॉकयार्ड में ही बनाया गया है।

यह पनडुब्बी फ्रांसीसी कंपनी नवल ग्रुप के साथ मिलकर बनाई गई हैं। 67 मीटर लंबी इस पनडुब्बी का पानी के भीतर पता लगाना काफी मुश्किल काम है। 2000 टन डिस्प्लेसमेंट वाली यह पनडुब्बी 18 मिसाइल या फिर टारपीडो साथ लेकर चलती है। इस पनडुब्बी में 6 लॉन्चिंग ट्यूब्स हैं, जिनसे यह मिसाइल या टारपीडो दागे जा सकते हैं।

इस पनडुब्बी पर अत्याधुनिक राडार और सेंसर भी लगे हैं। इससे पहले इसी क्लास की पाँच और पनडुब्बी भारतीय नौसेना को मिल चुकी हैं। भारत सरकार ने ऐसी ही तीन और पनडुब्बी खरीदने का निर्णय लिया है। यह तीनों भी भारत में ही बनाई जाएँगी। इनके लिए मार्च, 2025 तक सौदे को अंतिम रूप दिए जाने का कयास है।

INS नीलगिरी

पीएम मोदी ने नीलगिरी क्लास के पहले फ्रिगेट युद्धपोत को भी देश को सौंपा है। यह लगभग 6500 टन विस्थापन वाली और 150 मीटर लंबी पहली नीलगिरी क्लास फ्रिगेट है। यह प्रोजेक्ट-17A के तहत बनाई गई है। इसे भारतीय नौसेना ने ही डिजाइन किया है। यह प्रोजेक्ट ₹45000 करोड़ की लागत से बनाया जाना है।

इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत 6 फ्रिगेट बनाई जाएँगी। 60 किलोमीटर/घंटे की रफ़्तार वाली फ्रिगेट नीलगिरी अपने साथ 32 बराक और 8 ब्रह्मोस मिसाइल लेकर चल सकती है। इसके अलावा यह 72 रॉकेट, कई तोपों और 1 हेलिकॉप्टर से भी लैस होगी। इसे भी मझगाँव डॉकयार्ड ही बना रहा है। इस प्रोजेक्ट में लगभग 75% सिस्टम भारतीय लग रहे हैं।

INS सूरत

पीएम मोदी ने INS सूरत को भी नौसेना को सौंपा है। यह विशाखापत्तनम क्लास का चौथा डिस्ट्रॉयर युद्धपोत है। INS सूरत को लगभग ₹9000 करोड़ की लागत से बनाया गया है। इसे भी नौसेना ने खुद ही डिजाइन किया है। इसके प्रोजेक्ट को P15B का नाम दिया गया है।

लगभग 7500 टन विस्थापन वाले INS सूरत में 32 बराक और 16 ब्रह्मोस मिसाइल होंगी। इस पर 300 नौसैनिकों के तैनात रहने की व्यवस्था है। इस पर भारतीय और इजरायली राडार लगाए गए हैं। इसके साथ ही इस जहाज पर 2 INS ध्रुव हेलिकॉप्टर भी तैनात किए जा सकेंगे। यह युद्धपोत कोलकाता क्लास के युद्धपोतों का नया रूप हैं।

इन सभी युद्धपोतों के आने से भारतीय नौसेना का अरब और हिन्द सागर समेत भारतीय समुद्र की रक्षा आसान हो सकेगा। नौसेना लम्बे समय से युद्धपोतों की कमी से जूझ रही है। नौसेना को हाल के कुछ वर्षों में चीन और पाकिस्तान के साथ ही समुद्री डाकुओं और लुटेरों के खतरों से लड़ना पड़ा है। यह युद्धपोत चीन और पाकिस्तान पर हमला कर उनको भारी नुकसान पहुँचा सकते हैं।

भारत के नक्शे से गायब कर दिया POK-अक्साई चिन, मोइनुद्दीन चिश्ती को बताया ‘हिंदुस्तान का बादशाह’: ठाणे में इस्लामी कमेटी ने उर्स पर की ‘बदमाशी’

महाराष्ट्र के ठाणे शहर में ‘गरीब नवाज मोइनुद्दीन चिश्ती कमेटी’ के खिलाफ एक गंभीर मामला सामने आया है। इस्लामिक कमेटी ने एक बड़ा पोस्टर लगाया, जिसमें भारत के नक्शे से छेड़छाड़ की गई है और विकृत नक्शे को लगाया गया था। पोस्टर में जानबूझकर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और अक्साई चिन को भारत के नक्शे से हटा दिया गया। ये दोनों क्षेत्र भारत के अभिन्न हिस्से हैं और इस तरह की हरकत देश की संप्रभुता और एकता पर सीधा हमला है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, थाणे पुलिस में स्थानीय संगठन ‘स्वाभिमान संगठन’ ने ये शिकायत दर्ज कराई है। संस्था के सचिव ने ठाणे पश्चिम के पदवाल नगर इलाके में स्थित राजितराम तिवारी बीजेपी जनसंपर्क कार्यालय के पास एक बड़े फ्लेक्स बोर्ड को देखा। इस बोर्ड पर मोइनुद्दीन चिश्ती को ‘हिंदुस्तान का बादशाह’ बताया गया था। साथ ही, इस पर एक मस्जिद की तस्वीर और भारतीय झंडा भी दिखाया गया। उन्होंने कहा कि यह पोस्टर न केवल भारत की एकता और अखंडता के खिलाफ है, बल्कि यह इस्लामिक शासन की अवधारणा को भी बढ़ावा देने की कोशिश करता है।

जानकारी के मुताबिक, ये फ्लेक्स बोर्ड 5 जनवरी 2025 को कथित ‘सरकार गरीब नवाज और सरकार मुलान वाले बाबा’ के उर्स के मौके पर लगाया गया था। कमेटी ने इस बैनर की तस्वीरें अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी पोस्ट की थीं। हालाँकि, विवाद बढ़ने के बाद पोस्ट को डिलीट कर दिया गया। लेकिन इससे संबंधित अन्य पोस्ट्स से पुष्टि होती है कि विवादित बैनर इलाके में लगाए गए थे।

इसी तरह के पोस्टर्स शहर के अन्य हिस्सों में भी लगाए गए थे। ऑपइंडिया के पास ऐसे बैनरों की तस्वीरें भी हैं। पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, यह कार्रवाई जानबूझकर की गई और इससे देश के नागरिकों को अपमानित किया जा रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह घटना राष्ट्र की संप्रभुता, एकता और अखंडता के लिए खतरा है।

पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए श्रीनगर पुलिस स्टेशन, ठाणे में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस अब इस्लामिक कमेटी के सदस्यों के खिलाफ जाँच कर रही है। इस घटना ने स्थानीय नागरिकों और राष्ट्रप्रेमी संगठनों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।

महिलाओं के लिए ‘जंगलराज’ से कम नहीं वामपंथियों का केरल मॉडल: 29000+ बच्चे यौन उत्पीड़न का शिकार, रेप 62% बढ़ा, बाल आयोग बोला- रिपोर्टिंग से बढ़े नंबर

केरल मॉडल का ढिंढोरा पीटने वाले वामपंथियों के राज में बच्चे सुरक्षित नहीं हैं। केरल में हर साल बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न के हजारों मामले सामने आ रहे हैं। हाल ही में केरल की एक दलित लड़की का मामला सामने आया, जिससे पाँच साल के भीतर 60 से अधिक लोगों ने रेप किया। यह राज्य में यौन शोषण जैसी घटनाओं की भयावहता का केवल एक उदाहरण है। सरकारी आँकड़े ही बता रहे हैं कि 2016 से 2024 के बीच केरल में 29000 से अधिक बच्चे यौन उत्पीड़न का शिकार हो चुके हैं। छेड़छाड़ के मामलों की संख्या कहीं बड़ी है।

POCSO के 8 साल में 29 हजार से ज्यादा मामले

बच्चों को यौन उत्पीड़न से बचाने के लिए लाए गए कानून के तहत दर्ज किए गए मामलों में केरल 2016 के बाद से खुद के ही रिकॉर्ड तोड़ रहा है। 2016 ही वह साल है जब राज्य में वामपंथियों को सत्ता वापस मिली थी। केरल के स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB) के अनुसार, 2016 में केरल में POCSO के मामले 2131 थे जो 2023 में बढ़ कर 4641 हो गए।

साल 2024 के 11 महीनों में ही यह आँकड़ा 4100 के पार पहुँच चुका था। अंतिम आँकड़े में केरल के नया शर्मनाक रिकॉर्ड बनाने की आशंका है। चिंता जताई गई है कि यह संख्या 4500 के पार होगी। नीचे ग्राफ से समझा सा सकता है कि स्थिति कितनी भयावह है।

केरल रेप यौन उत्पीड़न
केरल में बढ़ते POCSO मामले (2024 का आँकड़ा नवम्बर तक का है)

केरल में बच्चों के यौन उत्पीड़न में कई मामलों में उनके घरवाले ही अपराधी हैं। हाल ही केरल की एक अदालत ने एक ऐसे मामले में सजा सुनाई जहाँ एक अब्बा ने ही अपनी 13 साल की बच्ची का जबरन कई महीने तक रेप किया और उसे गर्भवती करके खाड़ी देश को भाग गया।

बच्ची की अम्मी ने पहले उसका साथ दिया लेकिन बाद में वह भी अपने शौहर के साथ हो गई। इस पीड़िता को गर्भपात और मानसिक तनाव से भी गुजरना पड़ा। इस मामले में अदालत ने दोषी पिता को उम्रकैद की दो सजा सुनाई और लाखों का जुर्माना भी लगाया।

कई मामलों में ट्यूशन, कॉलेज और बाकी शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से भी नाबालिगों के साथ यौन उत्पीड़न और रेप की घटनाएँ सामने आती हैं। वामपंथी सरकार में कानून व्यवस्था लगातार बिगड़ती गई है। एक रिपोर्ट बताती है कि सिर्फ नाबालिग लड़कियाँ ही नहीं बल्कि लड़के भी यौन उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं।

केरल में प्रवासियों के बच्चों के साथ भी ऐसी घटनाएँ हो रही हैं। जुलाई, 2023 में ऐसे ही एक मामले में अशफाक आलम नाम के एक युवक ने एक बच्ची का अपहरण करके उसका रेप किया था और हत्या करके शव नाले में फेंक दिया था।

बच्चों के खिलाफ बाकी अपराधों में भी बढ़ोतरी

केरल में बच्चों के साथ सिर्फ यौन उत्पीड़न ही नहीं बाकी अपराधों में भी बढ़त हुई है। SCRB के आँकड़ों के अनुसार, 2016 में बच्चों के खिलाफ केरल में कुल 2879 अपराध हुए थे। 2024 आते-आते इनकी संख्या 4727 हो चुकी थी।

2016 में केरल के भीतर नाबालिगों के अगवा किए जाने या फिर अपहरण होने की 154 घटनाएँ हुई थीं। यह संख्या 2019 तक 260 पहुँच गई। 2024 में यह आँकड़ा कुछ नीचे आया है। 2016-24 के बीच राज्य में 1793 बच्चों के अपहरण के मामले सामने आ चुके हैं।

छेड़खानी-रेप के मामले भी बढ़ना जारी

केरल में सिर्फ बच्चे ही नहीं बल्कि महिलाएँ भी नहीं सुरक्षित हैं। इसकी गवाही भी SCRB आँकड़े दे रहे हैं। 2016 से 2024 के बीच केरल में रेप के मामलों में 62% की बढ़ोत्तरी हुई है। 2016 में केरल में रेप के 1656 मामले सामने आए थे।

यह संख्या 2024 के 11 महीनों में ही 2636 हो चुकी है। साल दर साल इन मामलों में होती बढ़ोतरी ये दिखाती है कि राज्य में महिला सुरक्षा की क्या स्थिति है और अपराधियों में पुलिस का कितना इकबाल है।

केरल रेप यौन उत्पीड़न
केरल में रेप के मामले भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं

केरल में रेप की समस्या इतनी गंभीर हो चुकी है कि हाल ही में यहाँ की फिल्म इंडस्ट्री को लेकर भी एक रिपोर्ट ने सबको चौंकाया था। इस रिपोर्ट के बाद मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के नामों पर यौन शोषण के आरोप लगे थे। इनमें डायरेक्टर, एक्टर और फिल्म प्रोड्यूसर समेत तमाम लोग बेनकाब हुए थे।

यह समस्या केरल में सिर्फ एक वर्ग की नहीं है। कुछ मामले ऐसे भी हुए हैं, जहाँ सत्ताधारी पार्टी से जुड़े लोगों ने ही बलात्कार जैसी घटनाओं को अंजाम दिया। केरल में सिर्फ यही एक समस्या नहीं है। आँकड़े के अनुसार, 2016-2024 के बीच छेड़खानी के भी 39 हजार से अधिक मामले राज्य में सामने आए।

केरल बाल संरक्षण आयोग क्या बोला?

केरल बाल अधिकार संरक्षण आयोग (KESCPCR) बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न के बढ़ते मामलों को दूसरे नजरिये से देखता है। आयोग की सदस्य N सुनंदा ने ऑपइंडिया से बातचीत में दावा किया कि राज्य में POCSO के मामलों की रिपोर्टिंग तेजी से बढ़ी है।

उन्होंने कहा कि POCSO के मामले को रिपोर्ट करना जरूरी है और हम यह लागू कर रहे हैं, इसलिए ही मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि घर से नाबालिगों के भागने के मामले भी POCSO में आते हैं, ऐसे में यह भी आँकड़ा बढ़ाते हैं।

N सुनंदा ने कहा कि आजकल लोग परिवार के झगड़ों में भी इस कानून का इस्तेमाल कर रहे हैं, यह भी एक कारण आँकड़ा बढ़ने का हो सकता है। आयोग यह मामले कम करने के लिए क्या कर रहा है, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि वह लोग ऐसे बच्चों और परिवारों का एक डाटाबेस तैयार कर रहे हैं, जो यौन अपराधों का शिकार हो सकते हैं।

उनके इस रुख का समर्थन राज्य की विपक्षी पार्टी भाजपा की प्रदेश महिला मोर्चा की मुखिया निवेदिता सुब्रमण्यम नहीं करती। ऑपइंडिया से बात करते हुए सुब्रमण्यम ने कहा कि अगर व्यवस्थाएँ इतनी ही ठीक हैं तो लगातार जघन्य मामले क्यों आते जा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऐसे मामलों में उन्हीं लोगों की सुनवाई होती है, जो सत्ताधारी कम्युनिस्टों के नजदीकी हैं।

उन्होंने यह भी प्रश्न उठाया कि अगर ज्यादा मामले अच्छी रिपोर्टिंग की वजह से सामने आ रहे हैं, तो फिर उनमें कार्रवाई क्या हो रही है और कितने लोग जेल भेजे जा रहे हैं। निवेदिता सुब्रमण्यम ने यह भी आरोप लगाया कि जिन मामलों में कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े लोग आरोपित होते हैं, उनमें समझौते का दबाव बनाया जाता है।

मुस्लिम महिला ने फर्जी हिंदू नाम से बनाया आधार कार्ड, सेक्स के नाम पर फँसाने लगी लोगों को: मीडिया रिपोर्ट में कॉन्ग्रेसी नेता का कनेक्शन

मध्य प्रदेश के शाजापुर में हनीट्रैप का मामला सामने आया है, जिसमें रानू मंसूरी (असली पिता का नाम शकूर खान) नाम की मुस्लिम महिला ने कथित तौर पर एक नेता को अपना शिकार बना डाला। इस मामले में उसने नकद और चेक के माध्यम से वसूली की। रानू मंसूरी ने मधु के नाम से फर्जी आधार बना रखा था, ताकि वो हिंदू पहचान के साथ रसिक मिजाज युवकों को हुस्न में फंसाकर अपना शिकार कर सके। इस काम में उसका साथ देता था इंदर गुर्जर, जो अभी फरार बताया जा रहा है।

शाजापुर पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, शाजापुर में हनी ट्रैंप गेंग की मुख्य सरगना रानू मंसूरी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि 9 जनवरी 2025 को शरद (परिवर्तित नाम) निवासी शाजापुर ने कोतवाली पुलिस को शिकायत की। पीड़ित ने बताया कि 25 दिसंबर 2024 से एक महिला रानू मंसूरी उसे अपने पास जरूरी काम के सिलसिले में बुला रही थी। महिला रानू मंसूरी के बुलाने पर वो 4 जनवरी 2025 को उसके पास पहुँचा। जहाँ महिला ने उससे एकांत में बात करने के लिए कहा और उसे पुष्प कमल होटल में ले गई। होटल में महिला ने उसे नशीला पदार्थ खिलाया और आपत्तिजनक वीडियो बना लिया। इस घटनाक्रम के नाम पर वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसे एक व्यक्ति ब्लैकमेल कर रहा है।

शिकायत पाने के बाद पुलिस ने एक टीम का गठन किया। पुलिस ने सोमवार (13 जनवरी 2025) को रानू मंसूरी (26 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान उसके पास से फर्जी आधार कार्ड भी मिला। आधार कार्ड में उसका नाम मधु (पिता-दिनेश अग्रवाल) और पता इंदौर दर्ज है।

पूछताछ में रानू मंसूरी ने बताया कि वो सुल्तानपुर बेरछा के रहने वाले इंदर गुर्जर के साथ मिलकर यह काम करती थी। उसका साथी इंदर गुर्जर ही शिकार की तलाश करता था। इसके बाद रानू मंसूरी शिकार को अपने हुस्न के जाल में फंसाकर अश्लील वीडियो बनाती थी और फिर दोनों शिकार को ब्लैकमेल कर उगाही करते थे। पुलिस ने रानू के पास से 2 लाख रुपए नकद, 3 लाख रुपए का चेक, 9 मोबाइल फोन और एक हिडन कैमरा भी बरामद किया है। पुलिस फिलहाल इंदर गुर्जर की तलाश कर रही है।

हनीट्रैप का लिंक कॉन्ग्रेस से?

नई दुनिया ने अपनी प्रिंट रिपोर्ट में बताया है कि पीड़ित भी कॉन्ग्रेसी नेता है और रानू मंसूरी के साथ हनीट्रैप करने वाला इंदर गुर्जर भी।

नई दुनिया अखबार की कटिंग

वहीं, स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में पीड़ित की पहचान शाजापुर कॉन्रेस अध्यक्ष शरद शिवहरे के तौर पर की गई है, जबकि इंदर गुर्जर को कॉन्ग्रेस जिला उपाध्यक्ष का प्रतिनिधि बताया जा रहा है।

बहरहाल, इस पूरे मामले में ऑपइंडिया ने स्थानीय पुलिस ने संपर्क किया। स्थानीय थाने ने रानू मंसूरी की गिरफ्तारी और हनी ट्रैप गैंग के भंडाफोड़ की बात कही, लेकिन पीड़ित के नाम या अन्य जानकारियों को लेकर चुप्पी साध ली।

फिलहाल, इस मामले में ऑपइंडिया की पड़ताल जारी है। जैसे ही नामों की पुष्टि होती है, पूरी जानकारी के साथ एक बार फिर से खबर को अपडेट किया जाएगा।

संभल में जमीन हिंदुओं की, कब्जा था मुस्लिम का… 46 साल बाद हिंदू परिवारों को मिला मालिकाना हक: 1978 के दंगों में कत्लेआम के बाद हुआ था पलायन

साल 1978 के दंगों में अपनी जमीन से बेदखल हुए तुलसीराम के परिवार को 46 साल बाद न्याय मिला है। संभल प्रशासन ने मंगलवार (14 जनवरी 2025) को तुलसीराम के परिवार को 10,000 वर्गफुट जमीन का कब्जा दिलाया। माली समाज के तुलसीराम की 1978 के दंगों में हत्या कर दी गई थी और उनके तीन बेटे और परिवार को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा था। इस जमीन पर मौजूदा समय में जन्नत निशा नाम का स्कूल चलाया जा रहा था। हालाँकि अब ये जमीन तुलसीराम के वंशजों को मिल गई है। यह कार्रवाई राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन की देखरेख में हुई, जिसमें भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, संभल की एसडीएम वंदना मिश्रा और एएसपी श्रीश चंद्र ने मंगलवार को राजस्व रिकॉर्ड का सर्वे कर जमीन की वास्तविक स्थिति का निर्धारण किया। जाँच में पुष्टि हुई कि 15,000 वर्गफुट में से 10,000 वर्गफुट जमीन तुलसीराम के परिवार की है। प्रशासन ने ऑन द स्पॉट कार्रवाई करते हुए तुलसीराम के पोते अमरीश कुमार और उनके परिवार को जमीन पर कब्जा दिलाया।

दस्तावेजों में हेरफेर करने वालों पर होगी कार्रवाई

इस दौरान जन्नत निशा स्कूल के संचालक डॉ. मोहम्मद शाहवेज ने दावा किया कि उनके अब्बू डॉ. जुबैर ने यह जमीन 1976 में खरीदी थी, यानी दंगों से पहले। हालाँकि, जब प्रशासन ने उनसे दस्तावेज माँगे, तो वे संतोषजनक सबूत पेश करने में असफल रहे। अधिकारियों ने पाया कि जमीन के रिकॉर्ड में कई गड़बड़ियाँ थीं, जिनमें एक हिस्सा फायर स्टेशन के रूप में दिखाया गया था। एसडीएम वंदना मिश्रा ने कहा कि दस्तावेजों में जानबूझकर हेरफेर की गई है और इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

तुलसीराम के पोते ने कहा- ‘प्रशासन ने हमें न्याय दिलाया’

तुलसीराम के पोते अमरीश कुमार ने इस न्याय को अपनी वर्षों की लड़ाई का नतीजा बताया। उन्होंने कहा, “मेरे दादा को दंगों में मार दिया गया और हमारी जमीन छीन ली गई। जब हम लौटने की कोशिश करते थे, तो हमें बताया जाता था कि यह जमीन अब हमारी नहीं रही। आज प्रशासन ने हमें न्याय दिलाया है।”

इस परिवार से जुड़ी आशा देवी ने कहा, “हमने अपनी जमीन के साथ-साथ अपना मंदिर भी खो दिया था। दंगों के बाद हमें न केवल अपनों की मौत का दर्द सहना पड़ा, बल्कि अपनी पहचान भी खोनी पड़ी। यह पहली बार है जब किसी ने हमारी बात सुनी है।” बता दें कि संभल में दंगों की पृष्ठिभूमि में करोड़ों की जमीनों पर कब्जे कर लिए गए, जो संभल के प्रमुख इलाकों में स्थित है। अब प्रशासन के इस कदम को इलाके में अवैध कब्जों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

बता दें कि विधानसभा में सीएम योगी आदित्यनाथ ने संभल दंगों का जिक्र किया तो पीड़ित परिवारों ने प्रशासन को शिकायती पत्र देकर जमीन पर मालिकाना हक पाने की गुहार लगाई। इसके बाद सक्रिय हुए प्रशासन ने 46 साल बाद परिवारों को 10 हजार स्क्वायर फीट जमीन पर कब्जा दिलाया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि दंगों के बाद हिंदू परिवारों को अपनी संपत्ति छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था। प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया कि तुलसीराम के परिवार को कब्जा दिलाने के बाद सुरक्षा प्रदान की जाए, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। प्रशासन ने साफ किया है कि अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा और हर शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा।

दोनों तरफ से पकड़ा हाथ, घोटाले में नेहा कक्कड़ को उठाकर ले गई ‘मर्द पुलिस’… सिंगिंग करियर भी खत्म: वायरल हो रही तस्वीरों का जानिए सच

बॉलीवुड गायिका नेहा कक्कड़ को पुलिस गिरफ्तार कर ले गई। उनका गायिकी का करियर समाप्त हो गया और वह भी इतना दुखद। यही दावा एक कथित न्यूज वेबसाइट ने किया। इसके साथ ही एक नेहा कक्कड़ की एक फोटो भी पुलिसवालों के साथ वायरल हुई।

नेहा कक्कड़ के पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने की यह खबर कुछ पेज ने चलाई। इस खबर के साथ नेहा कक्कड़ की एक फोटो भी लगाई गई। इसमें नेहा कक्कड़ जैसी शक्ल वाली महिला एक साड़ी पहने हुए है। महिला का हाथ दो पुलिसकर्मियों ने पकड़ रखा है।

फोटो में नेहा कक्कड़ जैसी दिखने वाली वाली महिला रो रही है। इसी के साथ खबर लिखी है। “ये पूरे भारत के लिए काफी दुखद दिन है, अलविदा नेहा कक्कड़!” इसी खबर को शयर करते हुए लिखा गया है कि उनके गायिकी के करियर का अंत हो गया और यह पूरे भारत के लोगों के लिए दुखद खबर है। इसी खबर में दावा था कि नेहा कक्कड़ को विदेशी मुद्रा के लेनदेन मामले में गिरफ्तार किया गया है।

असल में यह तस्वीर झूठी है और यह खबर भी झूठ है। नेहा कक्कड़ ना ही गिरफ्तार हुई हैं और ना ही उनका करियर खत्म हो रहा है। जो तस्वीर उनकी बता कर वायरल की जा रही है, वह फेस स्वैपिंग नाम की तकनीक के सहारे बनाई गई है। यानी यह तस्वीर भी फर्जी है।

नेहा कक्कड़ के खिलाफ वर्तमान में ऐसा कोई मामला नहीं चल रहा है कि उन्हें गिरफ्तार किया जाए। इसके अलावा यह खबर और किसी मीडिया में नहीं आई। ऐसे में साफ़ हो जाता है कि यह खबर पूरी तरीके से झूठी है। असल में जिस वेबसाइट पर यह खबर डाली गई है वह फर्जी है और ठगी वाले एक एप का प्रचार करती है।

इसमें फोटो और खबर AI के माध्यम से बनाई गई थी। हालाँकि, यह कोई पहला मामला नहीं है जब AI का इस्तेमाल किसी नामचीन हस्ती के सहारे ठगी के लिए किया गया हो। इससे पहले सचिन तेंदुलकर और रतन टाटा तक का इस्तेमाल यह ठग कर चुके हैं।

कभी कार तो कभी अस्पताल… केरल में दलित खिलाड़ी से 5 बार गैंगरेप, 13 साल की उम्र से शुरू हुआ यौन शोषण: 5 साल में 62 ने नोंचा, 44 गिरफ्तार

केरल के पथानमथिट्टा जिले में दलित समुदाय की एक लड़की के साथ पिछले 5 सालों तक हुए रेप और गैंगरेप की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। लड़की ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि 13 साल की उम्र से अब तक 62 लोगों ने उसके साथ रेप किया। इस मामले में अब तक 44 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पीड़ित लड़की एक एथलीट है, जिसका कम से कम 5 बार गैंगरेप भी किया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह चौंकाने वाला मामला तब सामने आया जब पीड़िता के शिक्षकों ने उसके व्यवहार में बदलाव देखा और इस बारे में चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) को सूचना दी। काउंसलिंग के दौरान पीड़िता ने अपनी आपबीती सुनाई, जिसके बाद पुलिस को इस घटना की जानकारी दी गई।

इस मामले की जाँच के लिए एक विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया गया है। इस टीम का नेतृत्व डिप्टी एसपी पी एस नंदकुमार कर रहे हैं, जबकि जाँच की निगरानी खुद डीआईजी एस अजीता बेगम कर रही हैं। डीआईजी ने बताया कि अब तक इस मामले में 30 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इस मामले में जिन 58 आरोपितों की पहचान की जा चुकी है, उनमें से 44 को गिरफ्तार किया जा चुका है।

डीआईजी एस अजीता बेगम ने कहा, “2 आरोपित विदेश भाग चुके हैं। उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर और रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। बाकी 13 आरोपितों की तलाश जारी है। हम वैज्ञानिक और सटीक जाँच करेंगे और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”

हैरान करने वाली वहशियों की कारस्तानी

पुलिस के अनुसार, पीड़िता ने बताया कि उसका शोषण 13 साल की उम्र से शुरू हुआ। आरोपितों में से कई उससे पथानमथिट्टा के एक प्राइवेट बस स्टैंड पर मिले और उसे अलग-अलग जगहों पर ले जाकर उसका यौन शोषण किया।

पीड़िता ने बताया कि उसके साथ कम से कम पाँच बार गैंगरेप हुआ। इनमें से एक घटना कार के अंदर हुई, जबकि एक अन्य घटना जनवरी 2024 में पथानमथिट्टा के जनरल अस्पताल के अंदर हुई।

इसी क्रम में साल 2023 में जब वह 12वीं कक्षा में पढ़ रही थी, तब इंस्टाग्राम के जरिए उससे जुड़े युवक ने उसे रन्नी स्थित एक रबर प्लांटेशन में ले जाकर तीन अन्य लोगों के साथ उसका गैंगरेप किया।

जाँच के दौरान पुलिस को पता चला कि पीड़िता अपना खुद का कोई मोबाइल फोन प्रयोग नहीं करती। वह अपने पापा के फोन से बात करती थी। इसी फोन में पीड़िता ने अपना यौन शोषण करने वाले 40 आरोपितों के नंबर सेव कर रखे हैं। सबसे दुखद पहलू यह रहा कि पीड़िता के कोच और ट्रेनर भी इस अपराध में शामिल हो गए। दर्ज करवाए गए बयान में पीड़िता ने अपने कुछ रिश्तेदारों के नाम भी बताए हैं जो उसके यौन शोषण में शामिल रहे। 

पुलिस ने बताया कि इस मामले की जाँच के लिए 30 से अधिक अधिकारियों की एक टीम बनाई गई है, जिसमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। डीआईजी अजीता बेगम ने कहा, “सबरीमला यात्रा खत्म होने के बाद इस टीम में और अधिक अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। सभी दोषियों को कानून के कठघरे में लाया जाएगा।”

समुद्री यात्रा पर निकले, जहाज टूटा तो निर्जन टापू पर 30 साल रहे अकेले… घर लौटते ही 3 साल में हो गई इटली के शख्स की मौत

इटली के बुदेली द्वीप पर 3 दशक तक अकेले रहने वाले शख्स की समाज में वापस आने के 3 साल बाद मौत हो गई। वह 2021 में ही समाज के बीच रहने के लिए लौटा था। वह इस निर्जन द्वीप पर बिना बाहर की दुनिया से सम्पर्क किए रहता था और यहाँ की देखभाल भी करता था। इस शख्स का नाम मौरो मोरांडी था।

मोरांडी की बीते 2025 की शुरुआत के दिनों में मौत हुई। बुदेली के द्वीप पर मोरांडी 1989 में पहुँचे थे। निकले तो वह एक लम्बी समुद्री यात्रा पर थे लेकिन उनका जहाज इस द्वीप के पास ही टकरा कर नष्ट हो गया था। इसके बाद जब यहाँ पहुँचे तो उन्हें पता चला कि अब तक द्वीप की देखभाल करते आया शख्स रिटायर होना चाहता है।

मोरांडी ने इसके बाद तय किया कि वह बुदेली पर ही रहेंगे और इसकी देखभाल करेंगे। उन्होंने अपनी नाव बेच दी और यहाँ के 1 कमरे वाले एक अपार्टमेंट में रहने लगे। यह द्वीप एकदम निर्जन है और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यहाँ पर फौजें रुका करती थीं।

मोरांडी बुदेली में रहने के दौरान इसके रास्ते साफ़ किया करते थे। वह यहाँ समुद्र तट की भी सफाई करते थे और गर्मियों की छुट्टियों में आने वाले पर्यटकों को इस जगह के इतिहास और यहाँ के पर्यावरण के बारे में भी समझाते थे। मोरांडी यहाँ इसलिए बसे थे क्योंकि वह पूँजीवाद, राजनीति और ऐसे ही मुद्दों से कहीं दूर भागना चाहते थे।

बुदेली में उन्हें एक और द्वीप से नाव से खाना पहुँचाया जाता था। उनके घर में बिजली देने के लिए एक सोलर सिस्टम भी लगा दिया गया था। उन्होंने यहाँ अपना पूरा संसार बसा लिया था। उन्हें इंटरनेट की भी सुविधा मिली हुई है। वह इसका इस्तेमाल भी करते थे। उनका इंस्टाग्राम पर भी एक अकाउंट था, जिस पर उनके 70,000 फॉलोवर थे।

मोरांडी को रॉबिनसन क्रूसो का नाम दे दिया गया था। रॉबिनसन एक क्रूसो एक अंग्रेजी किताब का मुख्य पात्र है। किताब में जहाज़ डूब जाता है और वह वेनेजुएला और त्रिनिदाद के तटों के पास एक निर्जन द्वीप पर 28 साल व्यतीत करता है। मोरांडी की कहानी भी कुछ ऐसी ही थी।

मोरांडी का इस इलाके की पर्यावरण की देखभाल करने वाले ला माडालेना राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारियों से लम्बी लड़ाई चली थी। वह मोरांडी को यहाँ से निकालना चाहती थी। 2021 में उसने उन्हें यहाँ से वापस इटली में भेज दिया था। इसके बाद मोरांडी ने बताया था कि सामान्य समाज में रहने से उन्हें दिक्कत हो रही है। अब 85 वर्ष की उम्र में उनकी मौत हो गई है।

‘दलित व्यक्ति का प्रसाद जिन-जिन लोगों ने खाया, सबको समाज से कर दिया बहिष्कार’: भीम-मीम गैंग ने फैलाई फर्जी खबर, जानिए सच्चाई

मध्य प्रदेश के छतरपुर के एक गाँव से खबर आई कि वहाँ दलित व्यक्ति का प्रसाद खाने के बाद 20 परिवारों का बहिष्कार कर दिया गया है। बहिष्कार करने वाला व्यक्ति गाँव का सरपंच संतोष तिवारी है। दरअसल, 13 जनवरी 2025 को इस तरह के दावों के साथ कई सोशल मीडिया पोस्ट वायरल किए गए। हालाँकि, पुलिस ने इस तरह की किसी घटना से इनकार करते हुए इसे आपसी विवाद बताया है।

एक्स यूजर ‘द दलित वॉयस’ ने अपने पोस्ट में लिखा, “दलित व्यक्ति के हाथों से प्रसाद खाने के लिए हिंदुओं द्वारा 20 परिवारों को बहिष्कृत कर दिया गया। यह घटना मध्य प्रदेश के छतरपुर की है।” हालाँकि, इस पोस्ट में दावे का समर्थन करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं दिए गए थे। इसी तरह के पोस्ट अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है।

नाद्या नाम के एक अन्य यूजर ने अपने X पोस्ट में लिखा, “21वीं सदी का भारत कुछ ऐसा ही है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के अतरार गाँव में एक दलित व्यक्ति से प्रसाद लेने के कारण लगभग 20 परिवारों को सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है।” इसने प्रोपेगेंडा वेबसाइट मकतूब मीडिया का हवाला दिया है, जिसमें कहा गया था कि ‘उच्च जाति’ के परिवारों का बहिष्कार किया गया था।

इस खबर को लेकर मकतूब मीडिया ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, “जब खबर फैली कि उच्च जाति के परिवारों ने एक दलित से प्रसाद स्वीकार किया है तो सरपंच ने कथित तौर पर सभी लोगों के खिलाफ सामाजिक बहिष्कार की घोषणा कर दी। इन परिवारों को शादी-विवाह सहित सभी सामाजिक समारोहों से बाहर रखने की घोषणा की गई है।”

हालाँकि, आर्या अन्वीक्षा और डॉक्टर नेहा दास सहित कई एक्स (पूर्व में ट्विटर) यूजर्स ने इन दावों का खंडन किया और वायरल इस फर्जी खबरों को खारिज करने के लिए सबूत पेश किए। इस तरह की फर्जी खबरें खुद को अंबेडकरवादी बताने वाले लोगों साझा की हैं। दरअसल, जिस मामले को वायरल किया किया जा रहा है वह अगस्त 2024 का बताया जा रहा है।

दरअसल, यह फर्जी खबर छतरपुर जिले के अतरार गाँव के एक दलित व्यक्ति द्वारा लगाए गए आरोपों से उपजी है। उसने अपनी शिकायत में दावा किया था कि उसके द्वारा बाँटे गए प्रसाद को खाने के कारण उसे और पाँच अन्य परिवारों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। हालाँकि, पुलिस ने इन दावों का खंडन किया और कहा कि यह गाँव के दो समूहों के बीच राजनीतिक विवाद का मामला है।

अहिरवार समाज (अनुसूचित जाति) से ताल्लुक रखने वाले जगत अहिरवार नाम के व्यक्ति ने 7 जनवरी को छतरपुर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने कहा था कि अगस्त 2024 में उसने स्थानीय हनुमान मंदिर में प्रसाद में लड्डू चढ़ाया और उसे वहाँ खड़े लोगों में बाँट दिया। इसके बाद गाँव के सरपंच संतोष तिवारी ने उसके परिवार और प्रसाद खाने वाले पाँच अन्य लोगों को बहिष्कृत कर दिया।

अहिरवार ने दावा किया है कि इन परिवारों को अब शादियों और अन्य सामुदायिक कार्यक्रमों सहित सामाजिक समारोहों में आमंत्रित नहीं किया जाता है। अहिरवार ने सरपंच संतोष तिवारी पर जातिगत विभाजन का इस्तेमाल कर बहिष्कार लागू करने का आरोप लगाया और कहा, “हमें सदियों पुराने जातिगत पूर्वाग्रह के कारण बुनियादी सामुदायिक संपर्क से वंचित किया जा रहा है।”

पुलिस ने आरोपों को नकारा, बताया राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता

हालाँकि, पुलिस ने इन आरोपों को नकार दिया है। पुलिस के उप-विभागीय अधिकारी (SDPO) शशांक जैन ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा, “हमने ग्रामीणों से बात करके मामले की जाँच की, लेकिन इस तरह के बहिष्कार का कोई सबूत नहीं मिला।” पुलिस ने कहा कि यह घटना दो समूहों के बीच राजनीतिक दुश्मनी का नतीजा लगती है, जो स्थानीय चुनावों में कड़ी टक्कर से उपजी है।

एसडीओपी जैन ने कहा कि आरोप पूर्व सरपंच अहिरवार और मौजूदा सरपंच तिवारी का समर्थन करने वाले प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच जारी तनाव से प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, सरपंच तिवारी ने भी बहिष्कार की घटना से साफ तौर पर इनकार किया। तिवारी ने कहा, “ये आरोप निराधार और राजनीति से प्रेरित हैं। अहिरवार सरपंच का चुनाव हार गए हैं। यह मुझे बदनाम करने की एक चाल है।”

दिलचस्प बात यह है कि इस मामले पर मीडिया रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि जिन परिवारों का कथित तौर पर बहिष्कार किया गया है, वे दलित और उच्च जाति दोनों समुदायों से हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की रिपोर्ट में कहा गया, “यह प्रसाद ब्राह्मणों सहित विभिन्न जातियों के 20 से अधिक ग्रामीणों को दिया गया था। जैसे ही यह बात फैली कि उच्च जाति के व्यक्तियों ने एक दलित से प्रसाद स्वीकार किया है, सरपंच ने कथित तौर पर इन सभी परिवारों का सामाजिक बहिष्कार करने का आदेश दिया।”