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‘राम’ को इलाहबाद चुनाव में उताकर कॉन्ग्रेस ने किया था वोटर की धार्मिक भावनाओं से खेलने का प्रयास

21 दिनों के लॉकडाउन के दौरान आजकल दूरदर्शन चैनल पर 80 के दशक के मशहूर धारावाहिक रामायण और महाभारत एक बार फिर चर्चा का विषय हैं। लेकिन इसके साथ ही इन धारावाहिक के बनने के पीछे की राजनीति और कॉन्ग्रेस की मंशा पर भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं। खास बात यह है कि जिस चर्चा को हवा कॉन्ग्रेस के ही वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने दी थी, उसे अब अंजाम तक बाकी लोग पहुँचा रहे हैं।

हाल ही में दूरदर्शन चैनल पर रामानंद सागर द्वारा निर्मित रामायण के प्रसारण की घोषणा के बाद कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ट्विटर पर कहा था कि रामायण धारावाहिक बनाने के लिए राजीव गाँधी ने ही रामानन्द सागर को कहा था। जिस पर उनकी खूब खिंचाई भी हुई थी। हो सकता है कि दिग्विजय सिंह सच ही कह रहे हों क्योंकि दूरदर्शन का ही एक पुराना वीडियो सामने आने से यह स्पष्ट हो जाता है कि किस प्रकार से कॉन्ग्रेस ने निरंतर देश के मनोरंजन के साधनों से लेकर हर ऐसी चीज को कॉन्ग्रेस के पक्ष में इस्तेमाल किया, जिसका वो राजनीतिक लाभ उठा सकते थे।

दूरदर्शन पर 1988 में प्रकाशित इस इंटरव्यू में वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, चौधरी अजीत सिंह और पत्रकार विनोद दुआ मौजूद हैं चर्चा के दौरान कॉन्ग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद कह रहे हैं- “वीपी सिंह जी जब मुम्बई में थे तो वो कई दिन से उन्हें अपनी तरफ घुमाने का प्रयास कर रहे थे। कई दफा उनके पास आदमी भेजे गए कि आप इलाहाबाद आकर हमारे लिए कैम्पेन करिए। और जब उन्होंने कैम्पेन करने से इनकार कर दिया तब वीपी सिंह ने बयान दिया था कि ये राम नहीं रावण है। और इस चीज को मानकर वो वहाँ उनके खिलाफ प्रचार करने आए थे।”

1988 के इस वीडियो में चुनावी चर्चा में बताया जा रहा है कि कॉन्ग्रेस ने अरुण गोविल, जिन्होंने कि रामायण सीरियल में राम का किरदार निभाया था, की लोकप्रियता को अपने पक्ष में भुनाने का प्रयास किया था। इस चर्चा में प्रयागराज (तब – इलाहाबाद) लोकसभा उपचुनाव में कहा जा रहा है – “राम के किरदार निभाने वाले अरुण गोविल को इलाहाबाद भेजा जाए। उनकी क्या छवि थी? क्या वोटर ऐसे झाँसों में आ जाता है? और ऐसे ही प्रेरित होकर वोट दे देगा कॉन्ग्रेस को?”

इस वक्तव्य में गुलाम नबी आजाद यह स्वीकारते हुए देखे जा सकते हैं कि कॉन्ग्रेस ने रामायण के पात्र का इस्तेमाल एक कलाकार के रूप में नहीं बल्कि ‘राम’ के रूप में करना चाहती थी ताकि लोग वीपी सिंह के खिलाफ मतदान कर सकें। कॉन्ग्रेस के लिए प्रचार करते समय रामायण के पात्र ने यह कहते हुए प्रचार किया था कि भगवान राम का नाम लेकर कॉन्ग्रेस को वोट करें।”

दरअसल, यह तब का किस्सा है जब विश्वनाथ प्रताप सिंह के कॉन्ग्रेस से बाहर आने का दौर था। वह दौर जिसमे वी पी सिंह ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा देकर इलाहाबाद से फिर से चुनाव लड़ा था, जिसमे कॉन्ग्रेस ने तब के ‘राम’ अरुण गोविल को उनके खिलाफ खड़ा कर दिया था। देखा जाए तो आज के समय सेक्यूलरिज़्म का लिबास ओढ़ने वाली कॉन्ग्रेस ने भारतीय राजनीति में ‘राम’ की असली एंट्री इस समय की थी।

यह सब उस समय घटित हो रहा था जब शाह बानो केस में मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण राजीव गाँधी को अपनी छवि कमजोर होती नजर आई थी। राम और रामायण को इसी भरपाई के उद्देश्य से कॉन्ग्रेस ने इस्तेमाल करने की कोशिश की थीं।

रामायण के पुनः प्रसारण पर अरुण गोविल की अपील – घर पर रहिए और मोदी की बात मानिए

रामायण में भगवान राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल ने एक छोटे से वीडियो के जरिए लोगों से 21 दिन तक अपने घरों में रहने, अपने हाथ साफ करने और कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव की सलाह दी है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देशवासियों को इस समय पीएम मोदी के दिशानिर्देश का पालन करना चाहिए।

हाय री लॉकडाउन! स्वयंभू पत्रकार सबा नकवी के घर में दो दिन नहीं जलेगा चूल्हा

हिंदुओं के लिए घृणा फैलाने वाली और अपने कट्टरपंथी विचारों के लिए पहचाने जाने वाली सबा नकवी लॉकडाउन के कारण परेशानी में हैं। उन्हें चिंता है कि आने वाले 2 दिन वो कुछ नहीं बना पाएँगी। यहाँ बनाने का मतलब खाने से है। दरअसल, उनके घर की गैस खत्म हो गई है। आप सोचेंगे इतना घरेलू मामला है और ऑपइंडिया को इसकी जानकारी कैसे? तो बता दें इस मुश्किल दौर में आई इस आपदा के बारे में सबा ने खुद अपने ट्विटर्स को जानकारी दी है।

सबा ट्विटर पर लिखती हैं, “मैसेज के माध्यम से खाना पकाने की गैस का ऑर्डर स्वीकार नहीं हो रहा है। क्या सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित हुई है या एजेंसियाँ ​​ठीक से काम नहीं कर रहीं।” बता दें सबा के पास भारत गैस है और उनका कहना है कि इस परेशानी के कारण वो 2 दिन खाना नहीं बना पाएँगी।

अब हालाँकि, किसी भी आम यूजर के लिए ये आम परेशानी हो सकती है कि उसके घर में गैस खत्म हो गई और किसी कारणवश बुक भी नहीं हो पा रही। लेकिन चूँकि ये मामला सबा नकवी से जुड़ा है, तो इसमें झोल निश्चित हैं। खुद सोचिए, लॉकडाउन के समय में सबको कुछ न कुछ परेशानियाँ हो रही हैं। मगर, इन परेशानियों से जूझने के लिए सरकार पर्याप्त इंतजाम करवा रही है और लगातार बता रही है कि आखिर क्या क्या सुविधाएँ इस लॉकडाउन में प्रभावित नहीं होंगी। इन सुविधाओं में एक सुविधा गैस सिलिंडर की भी है।

सबा नकवी का ये ट्वीट देखते ही ट्विटर पर कई यूजर्स ने अपनी प्रतिक्रिया दी। दिलचस्प ये दिखा कि उनके पर जवाब देने वाला लगभग हर यूजर उन्हें अच्छे से जानते थे, इसी कारण वे उनकी इस परेशानी का समाधान बताने से ज्यादा उनकी खिल्ली उड़ा रहे थे। इससे भी हास्यास्पद ये है कि खिल्ली उड़ाने वालों को सबा नकवी से ज्यादा लाइक रीट्वीट मिल रहे थे। उदहारण देखिए, अंकित जैन नाम के यूजर ने उनके इस ट्वीट पर लिखा बिरयानी चाहिए तो शाहीन बाग से मँगवा लो। अब खबर बनाने तक सबा के ट्वीट को 1.7K लाइक और 266 रीट्वीट मिले थे। जबकि अंकित जैन को 487 रीट्वीट और 4.2K लाइक। दरअसल, लोगों का पूछना है कि स्वघोषित पत्रकार नकवी को फेक स्टोरी पकाने के लिए गैस चाहिए। या फिर एजेंडा चलाने के लिए।

अब रही बात, सबा नकवी की समस्या के समाधान की। तो बता दें ये कोई परेशानी नहीं है। ये वही पुरानी आदतों का नतीजा है, जो इस समय में भी मामूली सी बात का बतंगड़ बनाना चाहता है। इस बात का सबूत ये है कि देश में कई लोग (सबा को छोड़कर) ऐसे हैं जिन्हें गैस ऑर्डर करने में कोई परेशानी नहीं आ रही। नीचे तस्वीरों में तस्वीरों में इसके दो उदाहरण हैं।

तस्वीर साभार: डॉ कपिल परमार का ट्विटर
तस्वीर साभार: प्लैकार्ड नाम से मशहूर मधुर का ट्विटर

इसके अलावा, ये एक और प्रमाण है, जो दर्शा रहा है कि लॉकडाउन के समय में न केवल गैस बुक हो रही हैं। बल्कि अगले ही दिन इनकी डिलिवरी भी हो रही है। इसलिए फॉलोवर्स के मन में ऐसी स्थिति बताकर डर का माहौल बनाने की कोशिश न केवल व्यर्थ हैं, बल्कि ये भी बताती हैं कि वो लॉकडाउन के दिनों में वाकई खाली हो चुकी हैं।

अब रही बात इस बिंदु की कि ऊपर दी तस्वीरें इंडियन गैस और एचपी गैस की हैं और सबा तो भारत गैस के बारे में बात कर रहीं हैं। तो ये समझने की बात है कि लॉकडाउन के समय में थोड़ी बहुत दिक्कतें सबको झेलनी पड़ रही होंगी। इसलिए, अगर मान भी लिया जाए कि किसी कारण वश उन्हें परेशानी हो रही है, उनके इलाके में सप्लाई नहीं हो रही है और वह बात का बतंगड़ नहीं बना रही हैं। तो भी आम आदमी के पास इसका एक उपाय होता है कि इस मुश्किल की घड़ी में अपने आस पास वालों से संसाधन जुटाकर काम चलाएँ और फिर अपनी परेशानी का हल खोजे। मगर हाँ, इस पूरी प्रक्रिया के लिए इंसान के संबंध अपने आसपास वालों से अच्छे होने चाहिए। तो सवाल ये भी है कि अगर सबा नकवी ये कह रही है कि उनके घर में गैस सिलिंडर न आने से 2 दिन खाना नहीं बनेगा, तो क्या वे इतनी भी सामाजिक नहीं है कि उनके पड़ोसी उनकी मदद करें?

सोशल मीडिया पर लोगों का पूछना है कि अगर उन्होंने वाकई गैस ऑर्डर की है, तो पर्ची दिखाएँ। क्योंकि उन्हें वे एक अपवाद लग रही हैं। जितने लोगों ने इसपर प्रतिक्रिया दी है सबका यही कहना है कि उन्होंने लॉकडाउन में जब भी गैस बुक की उसके कुछ दिन बाद गैस उन्हें डिलिवर हो गई। लोगों का साफ मानना है कि सबा झूठ ही बोल रही हैं। बता दें एक यूजर का ये भी कहना है कि उनके घर में गैस की पाइप लाइन हैं। अगर वो चाहें तो वे सबके सामने उसकी फोटो अपलोड कर सकते हैं।

सफदरजंग हॉस्पिटल के दो रेजिडेंट डॉक्‍टर कोरोना पॉजीटिव, दिल्ली में अब तक पाँच डॉक्टर पाए गए संक्रमित

देश में लॉकडाउन के बीच कोरोना के खिलाफ देश वासियों की जंग जारी है। ऐसे में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के दो डाक्टरों के कोरोना पाॉजीटिव पाए जाने की खबर ने हड़कंप मचा दिया है। जानकारी के मुताबिक कोरोना पॉजिटिव पाए गए दोनों अस्‍पताल में रेजिडेंट डॉक्‍टर हैं। इसी के साथ दिल्ली में कोरोना पॉजीटिव पाए जाने वाले डॉक्टरों की संख्या 5 हो गई है, जिसनें स्वास्थ्य विभाग के साथ दिल्ली सरकार को भी चिंता में डाल दिया है।

जानकारी के मुताबिक कोरोना पॉजीटिव पाए गए दोनों डॉक्टर्स में से एक पुरुष डॉक्टर हैं, जो कि कोरोना यूनिट में ही ड्यूटी कर रहे थे और एक अन्य रेजिडेंट डॉक्टर है, जोकि बायोकेमिस्ट्री विभाग की 3-वर्षीय पीजी छात्रा है। वहीं अधिकारियों के अनुसार कोरोना पॉजिटिव पाई गई महिला डॉक्टर की पिछली ट्रेवल हिस्ट्री भी पाई गई है।

इससे पहले एक मामला दिलशाद गार्डन स्थित दिल्‍ली स्‍टेट कैंसर हॉस्पिटल से भी सामने आया था, जहाँ से एक कैंसर विशेषज्ञ डॉक्‍टर को कोराना पॉजिटिव पाया गया था। हालाँकि, संक्रमित डॉक्‍टर की कोई ट्रैवल हिस्‍ट्री भी नहीं मिली थी। इसके बाद कैंसर अस्‍पताल में आने वाले मरीजों के बारे में पता लगाया जा रहा है। वहीं अस्पताल के पूरे स्टाफ सहित उनके परिजनों को भी क्वारंटाइन कर दिया गया है। कैंसर हॉस्पिटल का मामला होने के कारण इसे बेहद गंभीर माना जा रहा है यही कारण है कि दिल्ली सरकार ने तत्काल कैंसर हॉस्पिटल को बंद कर दिया गया है, साथ ही इस अस्पताल को पूरी तरह से सैनेटाइज किया जा रहा है।

इससे पहले नॉर्थईस्ट दिल्ली के एक मोहल्ला क्लीनिक के डॉक्टर को कोरोना पॉजीटिव पाया गया था। इसके बाद बाबरपुर इलाके के मोहल्ला क्लीनिक के भी डॉक्टर को जाँच के बाद कोरोना संक्रमित पाया गया, जिसके बाद तत्काल दोनों डॉक्टरों से 14 दिन में मिलने वाले मरीजों की हिस्ट्री को निकालकर सभी को आइसोलेशन में भेज दिया गया। आइसोलेट किए गए सभी लोगों के लगातार टेस्ट किए जा रहे हैं।

देश की राजधानी में पाँच डॉक्टरों के कोरोना पॉजीटिव पाया जाना चिंताजनक भी है और डरा देने वाला भी। ऐसे समय में डॉक्टरों का कोरोना पॉजीटिव पाया जाना बेहद परेशान करने वाला है कि जिन हाथों में कोरोना की रोकथाम करने की जिम्मेदारी है वही हाथ कोरोना के शिकार हो रहे हैं। देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना से मरने वालों की संख्या दो, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 120 हो गई है।

बिहार में गोली, गुजरात में पत्थरबाज़ी: मरकज से निकले लोगों की तलाश कर रही पुलिस पर भीड़ का हमला

कोरोना वायरस के संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए देश में 21 दिनों का लॉकडाउन है। इस दौरान देश की कई मस्जिदों में विदेशी मौलवियों के छिपे होने के मामले सामने आए हैं। संक्रमण से बचाव का सबसे कारगर उपाय सोशल डिस्टेंसिंग है। बावजूद अलग-अलग शहरों में सामूहिक रूप से नमाज अदा करने के मामले सामने आ चुके हैं। दिशा-निर्देशों और नियम-कायदों की धज्जियॉं उड़ाकर मजहबी जुटान हो रहा है। इसका सबसे ताजा उदाहरण दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज में हुआ इज्तिमा है।

मरकज से निकले कई लोग संक्रमित पाए गए हैं। तेलंगाना में ऐसे छह लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इसके बाद देश के हर राज्य में यहॉं से निकले लोगों की पहचान हो रही है ताकि उनकी जॉंच की जा सके और संक्रमण पर काबू पाया जा सके। लेकिन इस काम में समुदाय विशेष की भीड़ बाधक बनती दिख रही है।

इसी कड़ी में गुजरात के अहमदाबाद स्थित गोमतीपुर में भीड़ द्वारा पुलिस पर पत्थरबाजी की घटना सामने आई है। गोमतीपुर में पुलिस उन लोगों की तलाश में गई थी, जिन्होंने तबलीगी जमात के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। बता दें कि दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित 6 मंजिला इमारत मरकज़ में ढाई हज़ार लोगों का जमावड़ा लगा था। तमिलनाडु और तेलंगाना सहित कई राज्यों में बड़े पैमाने पर ऐसे कोरोना मरीज मिले हैं, जो मरकज़ में होने वाले मजहबी कार्यक्रम का हिस्सा थे और संक्रमित हो गए। आशंका है कि उन्होंने अन्य राज्यों जाकर कई अन्य लोगों को भी संक्रमित कर दिया। हर राज्य में वैसे लोगों की खोज जारी है, इसी क्रम में गुजरात में भी पुलिस सर्च अभियान में पहुँची थी। गुजरात में सोमवार (मार्च 30, 2020) को कोरोना वायरस के कारण 2 लोगों की मौत हो गई। सोमवार को ही राज्य में कोरोना वायरस से संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले भी सामने आए। 10 संक्रमित मरीज ऐसे हैं, जिन्हें कैसे संक्रमण हुआ इसका पता भी नहीं लग पाया है। यानी इन 10 मरीजों के संक्रमण का सोर्स अज्ञात है।

इससे पहले बिहार के मधुबनी जिले में समुदाय विशेष की भीड़ ने पुलिस पर हमला किया था। पुलिस टीम एक मस्जिद में जमात के लोगों के होने और सामूहिक नमाज रुकवाने के लिए पहुॅंची थी। लेकिन भीड़ ने उसे करीब एक किमी तक खदेड़ा। पत्थरबाजी की। फायरिंग की। पुलिस के जीप तालाब में पलट दी। लोग इतने हिंसक थे कि थानेदार और बीडीओ को जान बचा कर भागना पड़ा। पुलिस ने 15 लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की है, जिनमें से 4 को गिरफ़्तार भी कर लिया गया है।

पुलिस को ये भी लग रहा है कि मधुबनी की अंधारठाढ़ी के गीदड़गंज स्थित उस मस्जिद में कुछ विदेशी भी छिपाए गए हो सकते हैं। वहाँ कोई ऐसा व्यक्ति नहीं मिला जो निजामुद्दीन के मरकज़ में गया हो। एसपी सत्य प्रकाश ने बताया कि सीमावर्ती जिला होने के कारण वहाँ ज्यादातर नेपाल से लोग आए हुए हैं। पुलिस को सूचना मिली थी कि एक स्थानीय राजद नेता के घर पर कुछ विदेशियों को रखा गया है और वही उनकी देखभाल भी कर रहा है।

पुलिस पर फायरिंग करने वाला भी उसी राजद नेता का खास है। जिस तरह से पत्थरबाजी हुई, उससे साफ़ पता चलता है कि मस्जिद व घरों की छत्तों पर बड़े-बड़े पत्थर रखे हुए थे। इसी तरह छत्तीसगढ़ के भिलाई की एक मस्जिद से चार महिलाओं समेत आठ लोग मिले हैं। पश्चिम बंगाल के मिदनापुर के रहने वाले ये लोग भी मरकज से निकलकर इस मस्जिद में छिपे थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम के पहुॅंचने पर ये हंगामा करने लगे। पुलिस को भी शुरुआत में गुमराह करने की कोशिश की।

इसी तरह महाराष्ट्र के सोलापुर में भी पुलिस पर पत्थरबाजी की गई। पुलिस को लोगों को समझाना पड़ा कि प्रशासन किसी भी मजहब के ख़िलाफ़ नहीं है, वो तो लोगों के हित के लिए ही काम कर रहा है। एसपी को ख़ुद वीडियो जारी कर समझाना पड़ा कि सोशल डिस्टेनसिंग का पालन कराना या करना किसी मजहब के ख़िलाफ़ नहीं है।

इसी तरह 28 मार्च को असम के बोंगाईगाँव में पुलिस पर पत्थरबाजी की गई। पुलिस सोशल डिस्टेनसिंग को ध्यान में रखते हुए पुलिस बड़ा बाजार क्षेत्र में दुकानों को बंद कराने गई थी। बोंगाईगाँव समुदाय विशेष बहुल जिला है। एसपी ने बताया कि दुकानों को बंद कराने समय अचानक से कुछ लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। पत्थर चलाने वालों में अधिकतर नाबालिग थे। पुलिस को वहाँ जान बचाने के लिए फायरिंग तक करनी पड़ी थी।

निज़ामुद्दीन मरकज का मकसद क्या था? जानिए किस राज्य में कितने पहुँचे, विदेशी मौलवी कहाँ-कहाँ छिपे थे

कोरोना का पहला केस चीन के वुहान शहर से पिछले साल नवंबर माह में ही सामने आ गया था, इसके बाद यह वायरस अधिक तेजी से चीन से निकलकर दूसरे देशों तक पहुँच गया और इस वायरस को भारत में आने में भी देर नहीं लगी। हालाँकि, इस वायरस के भारत में आने से पहले ही सरकार ने कई तरह की तैयारियाँ और बहुत सी गाइडलाईन देश वासियों के लिए जारी कर दी थीं।

इसका परिणाम मार्च के माह तब दिखाई दिया कि जब देश के सभी बड़े नेताओं ने होली के त्यौहार से दूरी बना ली थी। इन सब के बाद भी दिल्ली के निजामुद्दीन में मजहबी सम्मेलन का आयोजन किया जाता है। गौर करने वाली बात यह कि दिल्ली में 50 से अधिक लोगों के एकत्र होने की पाबंदी के बाद भी मजहबी सम्मेलन में 2000 से अधिक लोग देश-विदेश से एकत्र हो जाते हैं।

अब आपको बताते हैं देश भर में फैले जमातियों के खुलासे की शुरूआत कब और कहाँ से होती है। सबसे पहली खबर बिहार के पटना से आती है, जहाँ लोगों ने पटना के कुर्जी इलाके की दीघा मस्जिद में 12 विदेशी मुल्लों (मुल्ला शब्द का प्रयोग मजहबी शिक्षकों को लिए होता है) के होने की सूचना दी। सूचना पर पहुँची पुलिस ने 23 मार्च को हिरासत में लेकर सभी को क्वारंटाइन कर दिया। ये सभी तजाकिस्तान से भारत में इस्लाम का प्रचार करने के लिए आए थे। जानकारी के मुताबिक, ये सभी विदेशी पहले दिल्ली, फिर मुंबई में थे। इसके बाद 4 मार्च को पटना पहुँचे थे। 

इसके बाद झारखंड की राजधानी राँची के एक जिले में स्थित मस्जिद से 11 विदेशी मौलवियों को पुलिस प्रशासन ने हिरासत में लिया था। तमाड़ जिले स्थित राड़गाँव मस्जिद में छिपे इन 11 विदेशी मौलवियों में से 3 मौलवी चीन से, जबकि 4-4 किर्गिस्तान और कजाकिस्तान से थे। दरअसल, कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते कहर के बाद कुछ स्थानीय लोगों ने इन्हें एक मस्जिद में देखा और शक होने पर पुलिस प्रशासन को जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस ने सभी विदेशी मौलवियों के पासपोर्ट को जब्त कर लिया। अब तक राँची के अलग-अलग भाग से 28 विदेशी पकड़े जा चुके हैं।

इसके बाद मेरठ जिले की कई मस्जिदों से दूसरे प्रदेश या फिर दूसरे देशों के जमातियों को छापेमारी के दौरान हिरासत में लिया, साथ ही सभी को क्वारंटाइन किया। इसके तहत मेरठ के काशी में एक मौलाना के घर से पकड़े गए 14 जमातियों को पुलिस ने हिरासत में लिया, जोकि एक एक मस्जिद से निकलने के बाद एक मौलाना के घर में छिपे हुए थे, जिसमें नेपाल, बिहार, दिल्ली और महाराष्ट्र के निवासी बताए जा रहे हैं।

वहीं पुलिस ने मेरठ के मवाना स्थित बिलाल मस्जिद से 30 मार्च को 10 और सरधना में आजाद नगर स्थित मस्जिद में 9 विदेशी मौलवियों को पकड़ा, जो इंडोनेशिया के रहने वाले थे। इन सभी के कागजात और पासपोर्ट कब्जे में ले लिए गए। ये सभी 17 मार्च से यहाँ रह रहे हैं। पुलिस ने इनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। बिलाल मस्जिद में यह जमात 17 मार्च को सूडान और केन्या से आई थी। किसी को पता न चले, इसलिए मस्जिद के बाहर ताला लगा रखा था।

वजीराबाद की जामा मस्जिद में 12 विदेशी नागरिक मौजूद थे। इसको लेकर मस्जिद के मौलवी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इसी तरह भरत नगर की मस्जिद से आठ विदेशी मिले हैं। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के 5 मस्जिदों से 48 विदेशी मिले हैं। बताया जा रहा है कि इन विदेशी नागरिकों ने भी निजामुद्दीन में तबलीगी मरकज के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। छत्तीसगढ़ से भी 100 से ज्यादा लोग जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। राज्य सरकार ने इनकी पहचान कर लिए जाने का दावा किया है। इनमें 32 को क्वारंटाइन और 69 को होम आइसोलेशन में रखा गया है।

बिहार मधुबनी जिले के अंधराठाढ़ी ब्लॉक के गीदड़गंज गाँव की एक मस्जिद में मंगलवार (31 मार्च 2020) को सामूहिक नमाज रुकवाने पहुॅंची पुलिस टीम पर स्थानीय लोगों ने हमला कर दिया। दरअसल, पुलिस को सूचना मिली थी कि 100 से अधिक जमाती मस्जिद में ठहरे हुए हैं। पुलिस कार्रवाई पर स्थानीय लोगों ने पत्थरबाजी और फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। इस दौरान मस्जिद में ठहरे जमाती भाग निकलने में कामयाब हो गए। घटना के बाद से इलाके में तनाव बना हुआ है।

उधर निजामुद्दीन में कानून को ताक पर रख हुए मजहबी सम्मेलन के बाद वहाँ छिपे जमातियों को पुलिस प्रशासन ने 36 घंटे चलाए गए अभियान के बाद पूरी तरह से खाली करा लिया, दिल्ली सरकार के मुताबिक 6 मंजिला इमारत से 2361 लोगों को बाहर निकाला गया है, जिनमें से 617 जमातियों को संदिग्ध अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि शेष सभी को क्वारंटाइन किया गया है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने द हिंदू को बताया कि दक्षिण दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में तबलीगी जमात के मुख्यालय अलमी मरकज बंग्लेवाली मस्जिद में इस महीने की शुरुआत में देश भर से लगभग 8,000 लोग शामिल हुए थे, जिसमें 16 देशों के इस्लामी प्रचारकों ने हिस्सा लिया था। इनमें से 800 इंडोनेशियाई प्रचारकों को भारत ब्लैकलिस्ट करने जा रहा है, ताकि भविष्य में वे देश में प्रवेश न कर सकें।

वहीं एबीपी की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक इनमें से 10 जमातियों की मौत हो चुकी है, जिनमें 6 तेलंगाना, 1 जम्मू-कश्मीर के भी जमाती शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक मरकज में शामिल होने वाले 55 लोग हैदराबाद, 45 कर्नाटक, 15 केरल, 109 महाराष्ट्र, 5 मेघालय, 107 मध्यप्रदेश, 15 ओडिशा, 9 पंजाब, 19 राजस्थान, 46 राँची, 501 तमिलनाडु, 34 उत्तराखंड, 156 उत्तर प्रदेश, 73 पश्चिम बंगाल, 456 असम से थे। इसके साथ ही कार्यक्रम मे 281 विदेशी शामिल हुए थे, जिनमें से 1 जिबूती, 1 किर्गिस्तान, 72 इंडोनेशिया, 71 थाईलैंड और 34 श्रीलंका, 19 बांग्लादेश, 3 इग्लैंड, 1 सिंगापुर, 4 फिजी, 1 फ्रांस, 2 कुवैत के विदेशी थे। (हालाँकि, राज्यवार आँकड़े थोड़े अलग भी हो सकते हैं, क्योंकि अलग-अलग जगहों पर राज्यों से जाने वाले लोगों, और जिनकी पहचान हो गई है, उनकी संख्या में अंतर है। अतः इसे ही अंतिम और सही संख्या न माना जाए।)

अब सवाल खड़ा होता है कि दिल्ली मजहबी सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद ये जो जमाती पूरे देश में फैले इन्होंने जागरूकता के नाते पहले अपनी जाँच क्यों नहीं कराई और जब ये लोग दूर क्षेत्रों की मस्जिदों में पहुँचे या वहाँ रुके भी तो इस दौरान वहाँ के स्थानीय लोगों ने इसके संबंध में पुलिस प्रशासन को क्यों अवगत नहीं कराया?

दरअसल, इसके पीछे की एक बड़ी वजह यह भी है कि जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद से भारत की पाकिस्तान से बातचीत बंद है और इसके चलते पाकिस्तान के जमातियों को भारत आने के लिए वीजा भी नहीं मिल पा रहा है। इसके बाद से भारत में अपना काम करने के लिए पाकिस्तान इन देशों के जमातियों को भारत में भेज रहा है, जिन देशों के जमाती पर्यटन वीजा पर भारत में पकड़े गए हैं।

अब गौर करने वाली बात यह है कि भले ही ये जमाती इस्लाम का प्रचार करने का दावा करते हों, लेकिन हकीकत तो यह है कि ये लोग धर्मांतरण और मजहब के नाम पर कट्टरता पैदा करने के लिए मस्जिदों में शरण लेते हुए घूमते हैं। जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान की जमात सबसे ज्यादा कट्टर और मजबूत है, बताया तो यह भी जाता है कि भले ही पाकिस्तान भुखमरी के कगार पर हो, लेकिन यहाँ के जमातियों के पास भरपूर पैसा है।

सवाल यह भी है कि यह लोग आखिर चाहते क्या हैं? क्योंकि देश के कोने-कोने में स्थित मस्जिदों या मौलानाओं के घर में छिपे इन जमातियों के बारे में स्थानीय लोग आखिर चेतावनी के बाद भी पुलिस प्रशासन को क्यों नहीं बता रहा और यहाँ तक कि उत्तर प्रदेश की मस्जिदों में हो रही लगातार छापेमारी के बाद से तो समुदाय विशेष वालों ने जमातियों को घरों में छिपाना शुरू कर दिया है।

गौर करने वाली बात यह कि ये लोग वाकई में कोरोना जैसी बीमारी से अनजान हैं या फिर कि इनके अंदर भरी गई कट्टरता का ही यह परिणाम है कि अल्लाह के घर में (मस्जिद) कोरोना कुछ नहीं बिगाड़ सकता। मरकज़ के मौलवी साद की बात मानें तो उसने तो साफ कह दिया कि बीमारी में मस्जिद आना चाहिए, कोरोना से अगर अल्लाह के फरिश्ते नहीं बचा सकते तो डॉक्टर कैसे बचा लेगा, ये इस्लाम और इसके समर्थकों के खिलाफ एक साजिश है, ये प्रोग्राम बनाया गया है।

एक तरफ व्यक्ति को लक्षण आते ही वह तुरंत अस्पताल या फिर डॉक्टर के पास जा रहा है और दूसरी ओर ऐसे जमाती जानबूझकर पूरे देश के कोने-कोने में फैल रहे हैं और अधिक से अधिक लोगों से मिलने की कोशिश भी कर रहे हैं। इसका जवाब शायद आपको यहाँ मिल जाए कि हाल ही में फ्रांस ने अपने देश में विदेशी इमामों के प्रवेश को प्रतिबंधित कर दिया था। साथ ही फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा था कि इस निर्णय के बाद देश में आतंकी घटनाओं में कमी आएगी।

दिल्ली: कोरोना से जंग में स्वास्थ्यकर्मी, सफाईकर्मी की गई जान तो परिवार को मिलेंगे ₹1 करोड़

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कोरोना संकट से लड़ने वाले सभी स्वास्थ्य कर्मियों और सफाई कर्मियों के लिए बड़ी घोषणा की है। दिल्ली सीएम ने ऐलान किया है कि यदि कोरोना से जंग के दौरान किसी हेल्थ सेक्टर के कर्मी की जान गई तो उसके परिवार को दिल्ली सरकार 1-1 करोड़ रुपए की सहायता राशि देगी। बता दें उपराज्यपाल के साथ हुई बैठक के बाद केजरीवाल ने ये बड़ा ऐलान किया।

सीएम केजरीवाल ने ये बड़ी घोषणा करते हुए कहा, “चाहे वह सफाई कर्मचारी हो, डॉक्टर हो या फिर नर्स, कोरोना के खिलाफ जंग में अगर उनकी जान चली जाती है तो उनका सम्मान करते हुए उनके परिवार को 1 करोड़ रुपए दिए जाएँगे। चाहे वे प्राइवेट हॉस्पिटल के हों या सरकारी इससे फर्क नहीं पड़ेगा।”

गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली के एलजी अनिल बैजल ने कोरोना से लड़ने की तैयारियों पर सीएम अरविंद केजरीवाल, मुख्य सचिव और दिल्ली पुलिस कमिश्नर से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बात की। उन्होंने स्वास्‍थ्य इंतजामों का हाल जाना, आइसोलेशन में रह रहे लोगों की संख्या के साथ ही लॉकडाउन के दौरान की स्थिति को भी समझा। एलजी अनिल बैजल ने इस दौरान दिल्ली में मौजूद कोरोना हॉटस्पॉट के साथ ही अन्य इलाकों को सेनेटाइज करने के लिए और फायर ब्रिगेड की मदद से डिसइंफेक्टेंट का छिड़काव करने को कहा। साथ ही उन्होंने आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों को भी उचित कार्रवाई करने के आदेश दिए।

बता दें,दिल्‍ली के एलजी अनिल बैजल, सीएम अरविंद केजरीवाल अन्य अधिकारियों के साथ हर दिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक कर राजधानी के हाल पर चर्चा कर रहे हैं और जरूरी कदम उठाने संबंधी निर्देश जारी कर रहे हैं। ताजा अपडेट के मुताबिक इस समय दिल्ली में कोरोना के 23 नए मामले आए हैं। इसके साथ ही यहाँ कोरोना पॉजिटिव लोगों का आँकड़ा 120 पहुँच गया है। पूरे भारत में इस समय कोरोना के 1590 मरीज हैं और इससे मरने वालों में 47 लोग शामिल हैं।

ऐसे खाली हुआ निजामुद्दीन का मरकज: रात के 2 बजे एक्शन में आए NSA डोभाल, फिर ढीला पड़ा मौलाना

जब निजामुद्दीन मरकज के मुखिया मौलाना साद ने दिल्ली पुलिस द्वारा बार-बार कहने के बावजूद इमारत को खाली करने से इनकार कर दिया, तब राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल वहाँ पहुँचे। दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एनएसए डोभाल से कहा कि वे जाकर मामले को सॅंभालें। दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की बात न मानने वाला मौलाना अजीत डोभाल के पहुँचते ही फटाफट बिल्डिंग खाली कराने को राजी हो गया। डोभाल मार्च 28-29 को रात दो बजे निजामुद्दीन स्थित मरकज पहुँचे थे।

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की ख़बर के अनुसार, अजीत डोभाल ने वहाँ पहुँच कर मौलाना से कहा कि वो यहाँ रह रहे सभी लोगों को बाहर निकालें, ताकि उनका मेडिकल टेस्ट किया जा सके। इसके बाद उन सबकी क्वारंटाइन की व्यवस्था की गई। तेलंगाना के करीमनगर में कोरोना के 9 मरीज मिलने के बाद से ही अमित शाह की इस पूरी घटना पर नज़र थी और डोभाल को काम पर लगा दिया गया था। वे सभी 9 लोग इंडोनेशियाई थे। उन सभी के तार निजामुद्दीन स्थित मरकज से जुड़े थे। ये घटना 18 मार्च की ही है।

पुलिस व अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने मरकज की घटना पर गृह मंत्रालय को इसके अगले ही दिन अलर्ट भेज दिया था और सारी सूचना से अवगत करा दिया था। मार्च 27-29 को मरकज़ ने सिर्फ़ 167 लोगों को ही क्वारंटाइन किए जाने की अनुमति दी। जब डोभाल ने मोर्चा सॅंभाला, तब जाकर पूरी इमारत खाली कराने के लिए वह राजी हुआ। पिछले कुछ वर्षों में डोभाल ने न सिर्फ़ तबलीगी जमात बल्कि देश-विदेश के अधिकतर मुस्लिम आन्दोलनों और संगठनों से अच्छे रिश्ते बनाए हैं। भारत के लिए राष्ट्रीय रणनीति बनाते समय वो उलेमाओं से भी बात करते रहे हैं और उन सभी के मन की बात की टोह लेते रहते हैं।

अब गृह मंत्रालय ऑपरेशन के फेज-2 पर काम कर रहा है। इसके तहत भारत में छुट्टी मनाने के नाम पर आए सभी विदेशियों को ट्रेस कर उनका मेडिकल टेस्ट कराया जाएगा और उन्हें क्वारंटाइन किया जाएगा। साथ ही वीजा नियमों के उल्लंघन की भी जाँच की जाएगी। दिल्ली स्थित मरकज़ में 216 विदेशी नागरिक थे लेकिन देश के विभिन्न हिस्सों में ये आँकड़ा 800 हो जाता है। इनमें से अधिकतर इंडोनेशिया, मलेशिया और बांग्लादेश के निवासी हैं। जनवरी से लेकर अब तक 2000 विदेशी तबलीगी जमात के मरकज़ के कार्यक्रम में शिरत कर चुके हैं। लॉकडाउन के बावजूद उनका कार्यक्रम लगातार चल रहा था।

लगभग उन सभी ने भारत में वीजा नियमों का उल्लंघन किया है क्योंकि वो आए तो थे टूरिस्ट वीजा पर लेकिन यहाँ आकर अपने मजहब के लिए मिशनरी का काम कर रहे थे। इनमें से कइयों से सरकार ने ‘मिशनरी वीजा’ का निवेदन करने को कहा लेकिन किसी ने भी ऐसा नहीं किया। उन विदेशियों के अलावा उनके संपर्क में आने वाले लोगों को भी ट्रेस करने की मुहिम जारी है। मौलाना साद के पूर्वज मौलाना इलियास कांधलवी ने ही तबलीगी जमात की 1926 में स्थापना की थी। कहा जाता है कि इनलोगों ने बाबर के ख़िलाफ़ राणा सांगा का साथ दिया था, लेकिन फिर ये इस्लामी राज्य की स्थापना के लिए लग गए।

कैसे लें अपने बैंक से तीन महीनों तक EMI में छूट, किन बातों का रखना है ख्याल, जानिए सब-कुछ

कोरोना वायरस (COVID-19) के संक्रमण और देशव्यापी 21 दिन के लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था से लेकर रोजमर्रा का जनजीवन बड़े स्तर पर प्रभावित हुआ है। इसी कारण आम आदमी की सुविधा का ध्यान रखते हुए हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। RBI ने सभी बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्‍तीय संस्‍थाओं (NBFC) और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के साथ अन्‍य वित्‍तीय संस्‍थानों को टर्म लोन की किस्‍त तीन महीने तक टालने (Moratorium on Term Loans) के लिए कहा है।

गत शुक्रवार (मार्च 27, 2020) को आरबीआई (RBI) ने कहा था कि कंपलीट लॉकडाउन के चलते कारोबार ठप पड़ गए हैं। जिसके बाद आरबीआई के निर्देश पर कई अग्रणी बैंकों ने अपने खाताधारकों और ग्राहकों को तीन महीने तक लोन की EMI से छूट देने की घोषणा की है। EMI भरने में यह राहत मार्च 01, 2020 और मई 31, 2020 के बीच आने वाली किस्तों पर प्रभावी रहेगी। यानी, अगर ग्राहकों ने मार्च के महीने का पेमेंट कर दिया है तो फिर केवल दो महीने (अप्रैल, मई) की EMI अभी नहीं चुकाने की छूट मिलेगी।

आरबीआई का आदेश

RBI ने अपने बयान में कहा है- “सभी कॉमर्शियल, क्षेत्रीय, ग्रामीण, एनबीएफसी और स्‍मॉल फाइनेंस बैंकों को किस्‍त के भुगतान पर 3 महीने का मोरैटोरियम (लोन अदा करने में मोहलत) देने की अनुमति दी जाती है। यह वैसे सभी लोन के लिए प्रभावी होगी जिनकी ईएमआई 31 मार्च को जानी है।”

ध्यान देने योग्य बातें

आरबीआई ने यह फैसला उन लोगों को ध्यान में रखकर लिया है, जिनका कैश फ्लो लॉकडाउन के कारण रूक गया है। ऐसे लोग बाद में कैश फ्लो शुरू होने पर बकाए का भुगतान कर पाएँगे। इन 3 महीनों के दौरान अगर ये ईएमआई नहीं भी चुका पाते हैं तो ऐसे ग्राहकों की क्रेडिट हिस्ट्री पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

तीन माह की मोहलत का अर्थ कर्जमाफी नहीं

हालाँकि, एक जरुरी बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि इन तीन महीनों में अगर वो EMI या क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान नहीं करते हैं, तो उन्हें इस अवधि का ब्याज देना होगा। हालाँकि, इस वजह से उनके लोन चुकाने की अवधि तीन महीने के लिए बढ़ जाएगी। सबसे जरूरी बात यह है कि EMI पर ग्राहकों को सिर्फ तीन माह की मोहलत मिली है, ना की लोन चुकाने से माफी!

मोरेटोरियम (तीन माह की मोहलत) से जुड़े कुछ मामलों में स्पष्टीकरण नहीं होने की वजह से इस विकल्प को चुनने वाले ग्राहकों पर ब्याज कैसे और कब लगेगा, यह फिलहाल बैंकों पर निर्भर है, और बैंक ने अभी तक इस सम्बन्ध में कोई जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई हैं।

आरबीआई के इस फैसले से बैंकों के ग्राहकों को इन 3 महीनों के दौरान होम लोन, ऑटो लोन आदि की EMI देने में राहत मिल गई है। इसके अलावा अगर कोई कारोबारी वर्किंग कैपिटल पर लोन की EMI नहीं चुका पाता है तो उसे डिफॉल्ट नहीं माना जाएगा। कई बैंक तीन माह की यह राहत स्वतः दे रहे हैं, तो कई बैंक ग्राहक के माँग पर यह लाभ उपलब्ध करा रहे हैं। साथ ही, जिन ग्राहकों की EMI हर माह ECS के माध्यम से कटती है, ऐसे ग्राहक अगर चाहते हैं कि उनकी EMI अगले दो माह तक न कटे, तो उन्हें यह ध्यान रखना होगा ​कि उस खाते में पैसा न रहे।

आरबीआई के निर्देश के बाद कुछ सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों ने अपने ग्राहकों को 3 महीने का मोरेटोरियम ऑफर करने का एलान किया है। इनमें एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, इंडियन बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब एंड सिंध बैंक, कैनरा बैंक, यूको बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक और आईडीबीआई आदि शामिल हैं। SBI समेत कई बैंकों ने ट्विटर और अपनी वेबसाईट के जरिए इसकी जानकारी दी है।

कैसे ले सकते हैं लाभ?

बैंक अपने ग्राहकों को यह सुविधा दे तो रहे हैं लेकिन इसका फायादा उठाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। सर्वप्रथम यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप जिस बैंक के ग्राहक हैं उसने आपके मासिक EMI पर खुद ही रोक लगा दी है या वह ऐसा आपकी कॉल या रजिस्ट्रेशन के बाद ऐसा करेगा?

उदाहरण के तौर पर देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI के अनुसार, सभी टर्म लोन पर किश्त अपने आप (बिना ग्राहक की पहल के) तीन महीने के लिए टल जाएँगे। ग्राहकों को इसके लिए बैंक में आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी।

ऐसे में कोई ग्राहक इस दौरान अगर अपनी ईएमआई का भुगतान करता है तो भी ठीक और यदि नहीं करता है, तब भी बैंक उस पर किसी प्रकार का दंड आरोपित नहीं करेगा और ग्राहक को डिफॉल्टर घोषित नहीं किया जाएगा जाएगी। लेकिन अगर 1 मार्च 2020 से पहले का कोई डिफ़ॉल्ट और ओवर ड्यू है तो वह चुकाना होगा। पुराने बकाए का भुगतान नहीं टाला जाएगा, इस भुगतान न करने पर पेनाल्टी लगेगी।

आरबीआई द्वारा तीन माह के लोन भुगतान की मोहलत से जुड़ी अन्य जानकारियाँ इस लिंक पर भी उपलब्ध हैं

नोट : किसी भी प्रकार के ऋण और EMI सम्बन्धी जानकारी के बारे में एक बार किसी CA, अपने बैंक की वेबसाइट या बैंक कर्मचारी से जानकारी अवश्य लें, क्योंकि अभी तक बैंक द्वारा EMI की अवधि और इसे टालने की सूरत में आरोपित होने वाले ब्याज पर स्पष्ट रूप से कोई घोषणा नहीं की गई है

चीनी फिर से खाने लगे चमगादड़, पूरी दुनिया में वुहान वायरस फैला खोला गोश्त का बाजार

चीन को लेकर एक तथ्य विश्वविख्यात है- वो ये कि वहाँ पर जानवर की किसी भी प्रजाति को खाने से पहले दो बार नहीं सोचा जाता। वुहान में कोरोना वायरस फैलने के पीछे भी उनकी यही आदत जिम्मेदार है। आज चमगादड़ खाने के कारण फैले इस वायरस ने पूरे दुनिया के कोने-कोने में तबाही मचा रखी है। हर ओर इससे सैंकड़ों की तादाद में लोग आए दिन मर रहे हैं। अमेरिका ने तो चीन की हरकतों के कारण इस संक्रमण को वुहान का वायरस तक बतलाया है। बावजूद ये त्रासदी फैलाने के बाद चीन शांत नहीं बैठा है। 

खबर है कि वहाँ कोरोना संक्रमण पर काबू पाते ही चीन की वेट मार्केट दोबारा से शुरू हो गई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, वहाँ चमगादड़, बतख और कुत्तों का मीट बिकना प्रारंभ हो गया है। बता दें, आमतौर पर वेट मार्केट का पर्याय एक बाजार से होता है, जहाँ माँस-मछली आदि बिकते हैं। मगर, चीन के संदर्भ में इस शब्द की परिभाषा अलग है, क्योंकि चीन में जंगली जानवरों की बिक्री धड़ल्ले से की जाती हैं।

अब हालाँकि, चीन में कहा जा रहा है कि कोरोना का प्रकोप शांत हो गया है। लेकिन इस मार्केट के दोबारा खुलने से खतरे का आसार बढ़ सकते हैं। चूँकि, वैज्ञानिकों का मानना है कि दुनिया भर में फैला कोरोना वायरस चमगादड़ से आया है। जो मनुष्य जाति को अपना शिकार बनाने के पहले कई जानवरों पर हमला कर चुका है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इसी मार्केट के कारण हुबई प्रांत में रहने वाली 55 वर्षीय महिला कोरोना की चपेट में आई थी। इसके बाद ये वायरस अन्य लोगों में पहुँचा। इसलिए इसी मार्केट को महामारी फैलने की वजह माना जा रहा है। मेल ऑन संडे की पत्रकार के अनुसार, ये मार्केट उसी तरह चालू है जैसे कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से पहले चल रहा था। 

जानकारी के अनुसार, चीनी प्रशासन ने इस वेट मार्केट के आसपास सुरक्षा के कड़े इंताजम कर दिए हैं, ताकि कोई भी शख्स खून से सनी जमीन और जानवरों को काटने की तस्वीरें न ले सके। यहाँ बता दें WHO ने अपने बयान में भी 12 जनवरी को इस बात का जिक्र किया था कि वुहान के इस सी फ़ूड मार्केट के कारण ही महामारी फैली है।

गौरतलब है कि इस समय इस मार्केट को शुरू कर चीन कोरोना के प्रकोप से निजात पाने का जश्न मना रहा है। उसे इस बात से कोई मतलब नहीं है कि उसकी इन्हीं आदतों के कारण विश्व में हाहाकार मचा हुआ है। उनकी अपनी मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि चीन से महामारी खत्म हो गई है, इसलिए वे इस बाजार दुबारा चालू कर रहे हैं।

इस समय चीन की इस मार्केट में खुलेआम पिंजरे में बंद करके कुत्ते, बिल्ली, बतख, खरगोश का माँस बिक रहा है। इसके अलावा यहाँ चमगादड़, केकड़े और छिपकलियाँ भी बेची जा रही हैं। इन्हें यहाँ पारंपरिक दवाइयों की तरह इस्तेमाल किया जाता है।

कोरोना वायरस के कारण वहाँ की सरकार ने भले ही केवल 3200 लोगों के मरने का दावा किया है। मगर स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि यहाँ 42,000 से ज्यादा मौते हुई हैं। बता दें इस समय विश्व में 8.8 लाख लोग कोरोना पॉजिटिव आए हैं। इनमें से 1,88,578 केस अमेरिका से हैं, जहाँ मरने वालों की संख्या 3,890 हो गई है। इसके अलावा इस चीनी वायरस के कारण सबसे ज्यादा मौतें 12, 428 के आँकड़े के साथ इटली में दर्ज हुई हैं।

ख्वाजा फखरुद्दीन चिश्ती दरगाह में दुआ पढ़ने के लिए जुटी 100 लोगों की भीड़, पुलिस से झड़प के बाद लाठीचार्ज

इधर दिल्ली के निजामुद्दीन का मामला थमा भी नहीं था कि उधर राजस्थान में एक दरगाह पर 100 लोग दुआ करने के लिए जुट गए। अजमेर के सरवाड स्थित एक दरगाह के पास मंगलवार (मार्च 31, 2020) को बड़ी संख्या में लोग दुआ पढ़ने के लिए जुट गए, जिन्हें तितर-बितर करने के लिए पुलिस को बल-प्रयोग करना पड़ा। पूरे देश में अभी लॉकडाउन चल रहा है और कहीं भी किसी भी धार्मिक, समाजिक या फिर राजनीतिक आयोजन या भीड़ जुटाने की अनुमति नहीं है।

पुलिस ने इस मामले में 3 लोगों को गिरफ़्तार भी किया है। उन सब पर लॉकडाउन की अवहेलना करने का आरोप लगाया गया है। सरवाड स्थित ख्वाजा फखरुद्दीन चिश्ती दरगाह पर हरेक साल चादर चढ़ाए जाने की परंपरा रही है। जहाँ हर राज्य की पुलिस अपने-अपने प्रदेशों में ये पता करने में जुटी है कि वहाँ कोई ऐसा व्यक्ति तो नहीं जिसने निजामुदीन में तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शिरकत की हो- राजस्थान में इस तरह से भीड़ जुटना वहाँ की पुलिस के लिए नया सिरदर्द बन गया है।

पुलिस ने बताया कि अजमेर में चादर चढ़ाने के लिए 5 लोगों को अनुमति दी गई थी लेकिन वहाँ भारी भीड़ जुटा ली गई। जब पुलिस ने वहाँ जुटी भीड़ को हटने को कहा और कोरोना से बचाव के लिए हुए लॉकडाउन की याद दिलाई तो लोग उलटा पुलिस के साथ ही भिड़ गए। पुलिस से वहाँ उपस्थित समुदाय विशेष के लोग झड़प करने लगे। इसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज कर के लोगों को वहाँ से भगाना पड़ा। जमालुद्दीन अंसारी, हुसैन ख़ान, सैयद नवाब कुरैशी, मोहम्मद मिराज शेख और अजहरुद्दीन शेख समेत अन्य लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया है। इन सब पर राजस्थान एपिडेमिक डिजीजेज एक्ट लगाया गया है।

‘राजस्थान पत्रिका’ के अजमेर संस्करण में छपी ख़बर

अजमेर के एसपी कुँवर राष्ट्रदीप ने बताया कि दरगाह की दीवार फाँद-फाँद कर लोग जबरदस्ती अंदर घुस गए थे। बुधवार को मोईनुद्दीन चिश्ती की छठी की दुआ के लिए अनुमति दे दी गई है लेकिन भीड़ नहीं जुटने दी जाएगी। अंजुमन सदर सैयद मोईन हुसैन चिश्ती ने बताया कि इस बार छठी की रस्म के साथ-साथ विशेष दुआ भी माँगी जाएगी, ताकि जल्द से जल्द कोरोना वायरस संक्रमण आपदा का खात्मा हो।