Home Blog Page 4963

अमेरिका जितना अमीर नहीं हम… लेकिन हमारे पास इस्लाम है: कोरोना से जंग पर इमरान का लॉकडाउन से साफ मना

कोरोना का संक्रमण इस समय हर देश को प्रभावित कर रहा है और हर देश की जनता इससे पीड़ित है। मगर, बावजूद इसके पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का रवैया देखकर लग रहा है कि वे अब भी इस बीमारी को गंभीरता से नहीं ले रहे। कल मुल्क को संबोधित करते हुए उनका एक विडियो सामने आया। वि़डियो में उन्होंने कोरोना वायरस को आधार रखकर अपने देशवासियों से बात की। यहाँ उन्होंने चीन की तारीफ करने से अपने बात की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि चीन एक ऐसा मुल्क है, जिसने लॉकडाउन करके इस समस्या से निजात पा लिया और अगर उनके देश (पाकिस्तान) में भी ऐसी हालात होते तो वो शहर बंद कर देते। मगर, इससे कुछ नहीं होगा।

एक ओर जहाँ पूरा विश्व लॉकडाउन को अंतिम विकल्प की तरह मान रहा है, वहीं पाक पीएम इस कॉन्सेप्ट को ही खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि ये उपाय उनके देश के लिए सही नहीं है। उनकी परेशानी ये है कि अगर लॉकडाउन होगा तो करीब 8-9 करोड़ लोग दो वक्त की रोटी नहीं खा पाएँगे। वे कहते हैं कि अगर वे देश के लोगों को खाना उपलब्ध नहीं करा सकते, तो यह लॉकडाउन सफल नहीं हो सकता।

इसके बाद इमरान खान करीब पाँच मिनट तक अपनी देश की जनता को यही समझाते नजर आए कि वो लॉकडाउन क्यों नहीं कर रहे। इस बीच उन्होंने हिंदुस्तान का उदाहरण दिया और कहा यहाँ हालत ऐसे हैं कि पहले लॉकडाउन लगा दिया गया, बाद में प्रधानमंत्री जनता से माफी माँग रहे हैं। इस दौरान इमरान अपनी जनता को ये बताते नजर आए कि पाकिस्तान और अमेरिका में कितना फर्क है।

इस गंभीर समय में भी जब हर किसी का मानना है कि धर्म, मजहब से ऊपर उठकर इस वायरस के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी जानी चाहिए, तब इमरान खान अपने देशवासियों को मजहब का हवाला देते हैं, इमान का पाठ पढ़ाते हैं। वे उन्हें उन इस्लामिक देशों के बारे में बताते हैं, जो सबसे ज्यादा खैरात देते हैं। इसके बाद इस लड़ाई को लड़ने के लिए वो जागरूक करने से ज्यादा अपने देश के युवाओं पर विश्वास जताते हैं और कहते हैं कि अब इन दोनों ताकतों (इमान और युवा) का उन्हें इस्तेमाल करना है ताकि कोरोना से लड़ा जा सके। वे कहते हैं कि अब युवा ही उनकी कमियों को पूरा करेगी। इसके लिए वे युवाओं की टाइगर फोर्स की घोषणा करते हैं। वे बताते हैं कि अब यही युवा कभी सेना के साथ मिलकर तो कभी प्रशासन के साथ मिलकर उनकी मदद करेंगे।

अब इमरान खान की सबसे हैरान करने वाली बात सुनिए। एक ओर जहाँ विश्व जल्द से जल्द इसके हर आयामों को अवलोकन करने के लिए प्रयासरत हैं। वहाँ इमरान खान इतने फिक्रमंद हैं कि वो कहते हैं कि उनकी एक टीम जो पीएमओ में बैठी है, वो यही डेटा एनालाइज कर रही है और एक हफ्ते के अंदर उन्हें सब पता चल जाएगा। आज भारत ने जिस कार्य को हर नागरिक के कंधे पर सौंपा है और कई संस्थाएँ खुद जागरूकता फैलाने का जिम्मा उठा रही हैं, वहीं पाकिस्तान में इसके लिए अलग से फोर्स बनी है। खुद सोचिए उस देश के लोग क्या जागरूक होंगे, जिनके प्रधानमंत्री पहले खुद कहते हैं कि कई घरों में 7-8 लोग साथ में रहते हैं। मगर थोड़ी देर बाद कहते हैं कि जरूरी नहीं स्वास्थ्य सुविधाएँ ली जाएँ। हम चाहें तो घर में रहकर भी ठीक हो सकते हैं।

अपनी बात को जोर देते हुए इमरान खान ये भी कहते हैं कि ये कोरोना वायरस केवल बुजुर्गों और बीमारों पर हमला करता है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। जबकि वास्तविकता ये है कि कोरोना हर वर्ग और हर श्रेणी के लोगों के लिए खतरनाक है। क्योंकि ये संक्रामक है। हाँ, इससे लड़ेंगे कैसे ये हम पर और हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम पर निर्भर करता है। लेकिन इमरान खान की बातें सुनकर लगता है कि उन्होंने विश्वव्यापी प्रकोप पर जानकारी भी कम जुटाई है। वे खुद बताते हैं कि उनकी टीम अब भी आँकड़ों का अवलोकन करने में ही जुटी है ताकि कोरोना के कारण पीड़ित मरीजों की संख्या में उछाल जान सके।

वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह अपने मुल्क में पीएम राहत कोष की घोषणा करते हैं। लेकिन यहाँ भी हमेशा की तरह अपने गैर जिम्मेदारी दिखाते हुए कहते हैं कि इस अकॉउंट में हर कोई पैसे डाल सकता है। मगर ये परसों से खुलेगा और तब लोग जितना चाहें उसमें उतना दान कर सकते हैं। उनसे पैसों को लेकर कोई सवाल नहीं पूछा जाएगा। बल्कि वो चाहेंगे तो उन्हें टैक्स रिलीफ दिया जाएगा। इसके बाद वे इसी पैसे से अपने देश की जनता की मदद करेंगे।

स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान का उल्लेख करते हुए इमरान खान कहते हैं कि जो भी व्यापारी अपने मजदूरों को इस मुश्किल की घड़ी में वेतन देने से मना नहीं करेंगे, उन्हें वे सस्ते दरों पर लोन देगा। अब इसके बाद एक और हास्यास्पद बात- प्रधानमंत्री इमरान खान इस विडियो में चैरिटी का भी तरीका समझाते हैं और कहते हैं कि इसके लिए उन्होंने फेसबुक पर इंतजाम किया है, वे वहाँ रजिस्टर करें। जिसके बाद एनालाइज करके बताएँगे कि किसे कहाँ कौन सी चीज की जरूरत है।

सलमान के 38 वर्षीय भतीजे की मौत, लीलावती अस्पताल में थे भर्ती: मीडिया रिपोर्ट में कोरोना की बात, परिवार ने नकारा

कोरोना वायरस के कहर के बीच बॉलीवुड जगत से एक बेहद बुरी खबर सामने आई है। ये खबर बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान से संबंधित है। बॉलीवुड एक्टर सलमान के भतीजे अब्दुल्लाह खान का निधन हो गया है।

खबरों के अनुसार उनके फेफड़ों में संक्रमण था। उन्हें साँस की दिक्कत होने के कारण दो दिन पहले ही लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया था। मौत की खबर सुनते ही सलमान का परिवार सदमे में है। सलमान खान ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अब्दुल्ला के साथ अपनी तस्वीर शेयर कर शोक जाहिर किया है। उन्होंने लिखा, “हमेशा तुम्हें प्यार करूँगा।”

View this post on Instagram

Will always love you…

A post shared by Salman Khan (@beingsalmankhan) on

जानकारी के मुताबिक, अब्दुल्ला को हेल्थ से जुड़ी परेशानियों के बाद कुछ दिनों पहले ही हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया था। अब्दुल्ला इंदौर से थे और उनका मुंबई से इंदौर आना-जाना होता रहता था। चूँकि इंदौर में कोरोना का संक्रमण चरम पर है, इसलिए कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उनके कोरोना जाँच की भी बात की गई है। लेकिन इंडिया टुडे की रिपोर्ट में सलमान के परिवार के सूत्रों के हवाले से इसे (कोरोना जाँच या संक्रमण) नकार दिया गया है।

बता दें कि अब्दुल्ला, सलीम खान की छोटी बहन का बेटा था। वे भले ही बॉलिवुड इंडस्ट्री से नहीं थे, लेकिन उन्हें कई बार सलमान के कुछ वीडियोज में देखा गया है। इसके साथ ही अब्दुल्लाह को भी सलमान की तरह हमेशा फिट रहने की हैबिट थी।

योगी ने किया गौतम बुद्ध नगर के डीएम का तबादला, शुरू की विभागीय जाँच, कोरोना संबंधी तैयारियों में पाई थी चूक

योगी के नॉएडा दौरे के बाद प्रदेश सरकार ने गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी बृजेश नारायण सिंह से जिले का चार्ज लेकर उन्हें राजस्व विभाग भेज दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गौतम बुद्ध नगर के नए जिलाधिकारी अब एशियन पैरालंपिक बैडमिंटन में गोल्ड मेडल जीत चुके सुहास एल वाई होंगे। याद रहे कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच आज सोमवार को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गौतम बुद्ध नगर पहुँचे थे जहाँ उन्होंने जिले के अधिकारियों को जमकर लताड़ लगाई थी। जिसके बाद बी.एन सिंह ने सरकार से तीन महीने की छुट्टी माँगी थी, जो पत्र मीडिया में लिक हो गया था। जिस पर तुरंत कार्यवाही करते हुए योगी ने न केवल बीएन सिंह को गौतम बुद्ध नगर से स्थानांतरित कर दिया बल्कि उनके खिलाफ विभागीय जाँच के भी आदेश जारी कर दिए।

यूपी के नॉएडा में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या प्रदेश में सबसे ज्यादा है। जिसके कारण आज योगी ने खुद नॉएडा आकर जिले की तैयारियों की समीक्षा की। कोरोना के खिलाफ तैयारियों और राज्य सरकार के निर्देशों के पालन में हुई हीलाहवाली के बाद उन्होंने डीएम बीएन सिंह समेत सभी अधिकारियों से सख्ती से बात की। योगी ने कहा- आप काम कम करते हैं और शोर ज्यादा करते हैं।

जिसके बाद गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी बीएन सिंह ने योगी से कहा कि वह गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी नहीं रहना चाहते हैं, उन्हें व्यक्तिगत कारणों के चलते छुट्टी दे दी जाए। प्रदेश के मुख्य सचिव ने डीएम को स्थानांतरित करने पर कहा, “गौतम बुद्ध नगर में कोरोना वायरस को लेकर तैयारियों की समीक्षा में पाया गया कि जिलाधिकारी के स्तर पर समन्वय में काफी कमी रही, पॉजिटिव पाए गए लोगों को क्वारंटाइन करने में भी कमी पाई गई, जिसके कारण पॉजिटिव मामले बढ़े हैं।” मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि डीएम बीएन सिंह के खिलाफ विभागीय जाँच अलोक टंडन करेंगे।

योगी ने सवाल किए कि जब दो महीने पहले कंट्रोल रूम शुरू करने का आदेश था तो अब तक कंट्रोल रूम शुरू क्यों नहीं किया गया। इन आरोपों पर जब डीएम ने सफाई देनी चाही तो सीएम योगी ने भड़कते हुए कहा कि यह सब बकवास बंद करिए अपना, आप लोगों ने बकवास कर कर के माहोल सब खराब कर दिया है। याद रहे कि उत्तर प्रदेश में गौतम बुद्ध नगर कोरोना संक्रमित मामलों की संख्या के संदर्भ में सबसे आगे है।

मंदिर और सेवा भारती के कम्युनिटी किचेन को ‘आज तक’ ने बताया केजरीवाल का, रोज 30 हजार लोगों को मिल रहा खाना

‘आजतक’ ने एक बार फिर से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का महिमामंडन करने के लिए एक मंदिर के योगदान को छिपा दिया। दरअसल, आजतक ने एक मंदिर द्वारा चलाए जा रहे कम्युनिटी किचेन को ‘केजरीवाल का कम्युनिटी किचेन’ कह कर न सिर्फ़ प्रचारित किया बल्कि इस उपलब्धि के लिए दिल्ली सरकार की ही पीठ थपथपाई। नीचे संलग्न किए गए ट्वीट में आप आजतक की वो ख़बर देख सकते हैं, जिसमें मंदिर के कम्युनिटी किचेन के लिए केजरीवाल की वाहवाही की गई है:

आजतक ने लिखा कि कोरोना वायरस से बचाव के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए गए 21 दिनों के लॉकडाउन के बाद अपने गाँव को पलायन करने वाले मजदूरों और गरीबों की भारी भीड़ बॉर्डर पर रोजाना देखने को मिलती है। इन्ही मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए दिल्ली सरकार ने पूरा जोर लगा दिया है। इसके बाद लिखा गया कि केजरीवाल सरकार मजदूरों के रहन-सहन के इंतजाम में जुटी है और ऐसे ही एक कम्युनिटी किचेन को झंडेवालान में चलाया जा रहा है।

जबकि सच्चाई ये है कि इस कम्युनिटी किचेन को ‘झंडेवालान मंदिर कमिटी’ और समाजसेवा संगठन ‘सेवा भारती’ मिल कर चला रही है। इसीलिए आजतक ने बाद में हेडिंग को बदल दिया और ‘कैसा है केजरीवाल का कम्युनिटी किचेन’ की जगह ‘कैसा है मंदिर का कम्युनिटी किचेन’ कर दिया। साथ ही लेख के भीतर भी लिख दिया गया कि पलायन करने वाले मजदूरों के रहने-खाने के इंतजामों में कई गैर सरकारी संस्थान भी सरकार की मदद के लिए आगे आ रहे हैं।

सेवा भारती का बयान

‘सेवा भारती’ ने भी साफ कर दिया है कि इस कम्युनिटी किचेन को चलाने में उसे सिर्फ़ झंडेवालान मंदिर का सहयोग प्राप्त है और उसके अलावा किसी का भी सहयोग नहीं मिला है। वहाँ प्रतिदिन 30,000 लोगों को खाना खिलाया जा रहा है।

बता दें कि इस आपदा के समय देश भर के मंदिर आगे आकर न सिर्फ़ वित्तीय सहयोग कर रहे हैं बल्कि ग़रीबों तक समुचित संसाधन पहुँचाने में भी लगे हुए हैं। कई समाजिक संगठन भी जनसेवा में रत हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी लगातार इसी काम में लगा हुआ हैं। जबकि अरविन्द केजरीवाल की पार्टी के नेता आरोप-प्रत्यारोप खेल रहे हैं और मीडिया इससे इतर दिल्ली सरकार के महिमामंडन में लगा है। साथ ही मंदिरों के योगदान को भी जानबूझ कर छिपाया जा रहा है।

केरल में विकराल होती नई समस्या: आत्महत्याओं का सिलसिला जारी, कोरोना ने 1 तो शराबबंदी ने लिए 9 जान

कोरोना महामारी के चलते 21 दिनों के घोषित देशव्यापी लॉकडाउन ने केरल में एक दूसरी ही त्रासदी को जन्म दे दिया है, जहाँ शराब की दुकानें बंद होने के कारण होतीं आत्महत्याओं का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा। केरल में अब तक कोरोना संक्रमण के चलते जहाँ सिर्फ एक मौत हुई है वहीं शराब न मिलने के कारण नौ लोगों की जानें जा चुकीं हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन नौ में से सात लोगों ने जहाँ आत्महत्या की है, तो एक-एक जान क्रमशः कार्डियक अरेस्ट और आफ्टर शेव लोशन पीने के कारण गई है। केरल में अब तक 234 COVID-19 केसेस में से सिर्फ एक की मौत हुई है। लेकिन हर तरह की शराब की दुकानों, बार, होटल्स, देशी दारु की दुकानों आदि को बंद किए जाने से राज्य एक अलग ही संकट में फँसता दिख रहा है। केरल में प्रति व्यक्ति अल्कोहल की खपत देश में सबसे ज्यादा है।

शुक्रवार को त्रिशूर के सनोज और कोच्चि के मुरली ने शराब न मिलने से पैदा हुए अवसाद के कारण आत्महत्या कर ली थी। दारू न मिलने के कारण प्रदेश में शुरू हुआ आत्महत्याओं का दौर इन्हीं दो दुर्भाग्यपूर्ण मौतों के साथ शुरू हुआ। जिसके बाद शनिवार को कन्नूर के विजिल, कोल्लम के बीजू और सुरेश तथा कोच्चि के वासु के सुसाइड की खबर आई। जबकि तिरुवनंतपुरम के कृष्णनन कुट्टी ने रविवार को आत्महत्या कर ली।

शराब बंदी की जाए या नहीं, इस पर हफ्तों तक पशोपेश में रहने के बाद केरल की वामपंथी सरकार ने पिछले हफ्ते ही बार और राज्य सरकार से लाइसेंस प्राप्त शराब की दुकानों को बंद किया था। जिसके बाद राज्य के अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा पर, जो कि पहले से ही कोरोना संक्रमण के चलते दबाव में है- आजकल शराब के लती लोगों में, शराब न मिल पाने के कारण आई मानसिक समस्याओं से भी जूझ रही है।

जिसके कारण पी.विजयन सरकार ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए कई गाइडलाइन्स जारी की हैं। जिनके अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को कहा गया है कि वे इस तरह शराब की लत से संबंधित अवसाद के ज्यादातर मामलों को देखें जिससे बड़े अस्पतालों में इनके कारण बोझ न बढ़े। इसके साथ-साथ राज्य के मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की नोडल अधिकारी किरण पी.एस ने बताया कि प्रत्येक जिला अस्पताल में 10-20 बेड शराब की लत छुड़वाने के लिए आए मरीजों के लिए तैयार रखने होंगे।

इसके अलावा पी विजयन ने शनिवार को यह भी कहा है कि शराब के आदी लोगों को डॉक्टर के पर्चे पर सरकार दारू उपलब्ध करवाएगी।

87 साल की ख़ालिदा बेगम ने हज के लिए बचाए 5 लाख ‘सेवा भारती’ को दान किए, पेश की मिसाल

जम्मू की 87 साल की खालिदा बेग़म नामक बुजुर्ग महिला ने हज के लिए बचा कर रखे गए 5 लाख रुपयों को सेवा भारती को दान किया। स्वर्गीय एमएस खान की पत्नी ख़ालिदा बेगम कोरोना वायरस के कारण पैदा हुई कठिन परिस्थिति तथा जम्मू-कश्मीर समेत पूरे भारत में चलाए जा रहे सेवा भारती के कार्यक्रमों से पूरी तरह वाकिफ थीं। कोरोना वायरस महामारी के चलते जब उनका हज का प्लान कैंसिल हो गया तब उन्होंने उस पैसे को सामाजिक कार्यों में लगाने के लिए सेवा भारती को सौंप दिया।

सेवा भारती को दिया 5 लाख का चेक

यहाँ यह बताना भी उचित रहेगा कि ख़ालिदा जिया जम्मू-कश्मीर की उन पाँच महिलाओं में शामिल थीं जिन्होंने सबसे पहले राज्य में कॉन्वेन्ट शिक्षा हासिल की थीं। खालिदा प्रसिद्ध कर्नल पीर मुहम्मद खान की बहू हैं जो रॉयल आर्मी में काम करने के बाद पंडित प्रेम नाथ डोगरा की मृत्यु के बाद जम्मू-कश्मीर जनसंघ के अध्यक्ष भी बने थे। खालिदा के पिता कर्नल अब्दुल रहीम खान भी अपने समय की जानी मानी हस्ती थे।

हालाँकि, बढ़ती उम्र के चलते बेशक उनकी गतिविधियाँ कम हो गईं हैं इसके बाद भी वे अपने रूचि के क्षेत्रों तथा सामाजिक सरोकार पर निगाह बनाए रखती हैं। खलिदा के बेटे रिटायर्ड आईपीएस फारुख खान जो फ़िलहाल जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर के सलाहकार के तौर पर काम कर रहे हैं, के नाम जम्मू-कश्मीर पुलिस में काम करते वक्त की कई उपलब्धियाँ दर्ज हैं।

दफनाई नहीं, जलाई जाएगी कोरोना के कारण मृत मरीज की लाश: BMC का आदेश हुआ वापस

कोरोना वायरस से मरने वाले सभी मरीजों के मृत शरीर को जलाया जाएगा, चाहे वो किसी भी धर्म के हों। उन्हें दफनाया नहीं जाएगा। ‘म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ ग्रेटर मुंबई’ ने ऐसा आदेश दिया है। बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने म्युनिसिपल कमिश्नर को ये अधिकार दिया है कि कोरोना वायरस से उपजी आपदा के मद्देनज़र वो ज़रूरी निर्णय ले सकते हैं। वो अपने क़ानूनी दायरे में रह कर वो सभी फ़ैसले ले सकते हैं, जिससे कोरोना वायरस का प्रसार रुके। इसी क्रम में उन्होंने घोषणा की है कि किसी भी मृत कोरोना मरीज को सिर्फ़ जला कर ही उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

कमिश्नर प्रवीण परदेशी ने कोरोना के फैलाव को रोकने के आलोक में ये निर्णय लिया। कहा गया है कि नजदीकी श्मशान में मृत शरीर को ले जाकर वहाँ उनका अंतिम संस्कार किया जाए। सलाह दी गई है कि इस प्रक्रिया के दौरान मृत शरीर को छूने वाली रस्मों से बचा जाए। जितने भी कब्रिस्तान हैं, वो सघन आबादी वाले इलाक़ों में हैं और वहाँ अंतिम संस्कार के दौरान कोरोना के फैलने का ख़तरा है। लाश को प्लास्टिक में पैक करके फिर दफनाना उनको डिकम्पोज होने में देरी पैदा करता है और इसीलिए बीमारियों के फैलने का ख़तरा बना रहता है।

साथ ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में 5 से ज्यादा लोगों के जुटने पर भी पाबंदी लगा दी गई है। श्मशान का कर्मचारी मास्क और ग्लव्स इत्यादि का इस्तेमाल कर के पूरी सावधानी के साथ लाश का अंतिम संस्कार करेगा। अगर कोई दफनाने की ही जिद पर अड़ा है तो उसे मुंबई म्युनिसिपल्टी की सीमा से बाहर जाकर ऐसा करना होगा। इस सम्बन्ध में आदेश जारी कर दिया गया है। ऊपर संलग्न किए गए लेटर में आप कमिश्नर का आदेश पढ़ सकते हैं।

अपडेट: 21:30, 30/03/2020

कथित आदेश को, नई जानकारी के अनुसार, वापस ले लिया गया है।

₹25 करोड़ का डोनेशन, खोल दिए 4 योगग्राम: कोरोना आपदा के बीच मदद के लिए आगे आए बाबा रामदेव

बाबा रामदेव ने ‘पतंजलि आयुर्वेद’ की तरफ़ से पीएम केयर्स फण्ड में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए 25 करोड़ रुपए का योगदान दिया है। बाबा रामदेव ने कहा कि जब भी कोई राष्ट्रीय आपदा आती है तो पतंजलि व उसके लाखों कार्यकर्ता मानवसेवा के लिए तत्पर रहते हैं। उन्होंने पतंजलि को 100% चैरिटी वाला संस्थान बताते हुए गुवाहाटी, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश और हरिद्वार में स्थित योगग्राम को इस आपदा में राहत कार्य हेतु समर्पित करने की घोषणा की। बाबा रामदेव ने ट्विटर पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा:

“विश्व के सर्वश्रेष्ठ योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में पतंजलि ने विश्वस्तरीय संस्थान राष्ट्रसेवा व मानवसेवा के लिए समर्पित किए हैं। इनमें पतंजलि योगपीठ, पतंजलि आयुर्वेद, पतंजलि योगग्राम, पतंजलि विश्वविद्यालय व पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट शामिल हैं। पतंजलि ने 25 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता पतंजलि योगपीठ की ओर से प्रधानमंत्री राहतकोष में सहयोग के रूप में कंट्रीब्यूट करने के लिए हाथ आगे बढ़ाया है, क्योंकि पतंजलि का तो संकल्प ही है प्रोस्परिटी फॉर चैरिटी है।”

बाबा रामदेव ने बताया कि उनके संस्थान में कोरोना वायरस को लेकर लगातार रिसर्च चल रहा है और इस सम्बन्ध में पेपर भी प्रकाशित किए गए हैं। उन्होंने लोगों को कम खाने की सलाह दी ताकि इस आपदा के समय में कोई भी ग़रीब भूखा न रहे। उन्होंने दावा किया कि चिकित्सा, शिक्षा और अनुसन्धान में पतंजलि ने अब तक हज़ारों करोड़ की सहायता की है। इससे पहले बाबा रामदेव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पीएम मोदी के साथ भी बैठक की। प्रधानमंत्री ने उनके अलावा अन्य कई बड़े संगठनों के लोगों से बातचीत कर उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली।

हाल के दिनों में जब राशन वगैरह ख़रीदने में लोगों को कहीं-कहीं परेशानी का सामना करने की ख़बर आई है, बाबा रामदेव ने कहा कि पतंजलि के सभी उत्पाद यथावत मिलते रहेंगे और सारी स्वास्थ्य सुविधाएँ भी चालू रहेंगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पतंजलि के स्टोर्स खुले रहेंगे। उन्होंने बताया कि उनके संस्थान के कई लोग लगातार जनसेवा में लगे हुए हैं और लोगों का सहयोग कर रहे हैं।

दुनिया को तबाह करना चाहता था चीन: डॉक्टर ने खोली पोल तो मिली जान से मारने की धमकी, अब हैं लापता

चीन के वुहान सेंट्रल हॉस्पिटल में इमरजेंसी डिपार्टमेंट की निदेशक आई फेन कोरोना वायरस महामारी से निपटने में चीनी अधिकारियों की आलोचना के बाद गायब हो गई हैं। वह पहली इंसान थीं, जिन्होंने इस महामारी की तरफ आगाह किया था। फिलहाल आई फेन कहाँ है, किसी को भी इसके बारे में पता नहीं है। उन्होंने दिसंबर में ही अपने सहयोगियों और वरिष्ठ डॉक्टरों को इस वायरस को लेकर सचेत किया था, लेकिन उन्हें फटकार लगा दी गई और इस बारे मेंं कुछ भी बोलने से मना कर दिया।

मगर अब जब इतने लोगों की मौत हो चुकी है तो आई फेन चुप न रह सकीं और एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने चीन के सरकारी तंत्र का खुलासा करते हुए अधिकारियों की कड़ी आलोचना की है। दो हफ्ते पहले ही आई फेन ने चीन की मौगजीन रेनवू से बातचीत में चीनी सरकार की पोल-पट्टी खोली थी। अब चीनी सरकार इंटरनेट पर से उस वीडियो को हटाने के लिए काफी जद्दोजहद कर रही है।

इंटरव्यू में डॉ फेन ने कहा, “अगर मुझे यह पता होता कि यह विषाणु इतने लोगों की जान ले लेगा तो मैं चुप नहीं बैठती। मैं पूरी दुनिया में ये बात सभी को बताती। जिस भी माध्यम से कह पाती मैं ये जानकारी सभी को देती। फिर चाहे मुझे कोई जेल में ही क्यों न डाल देता। मैं किसी चीज की परवाह नहीं करती।”

डॉ फेन के मुताबिक, 30 दिसंबर को प्रयोगशाला में पता चला कि यह विषाणु ‘SARS Coronavirus’ जैसा है। डॉ फेन ने रिपोर्ट की तस्वीर लेकर अपने वरिष्ठों और सरकारी अधिकारियों को भेजी। शाम तक यह तस्वीर वुहान के सभी डॉक्टरों के पास पहुँच गई। डॉक्टर ली वेनलियांग ने इसे सोशल मीडिया पर डालकर दुनिया भर को बताया कि नया कोरोना विषाणु फैल रहा है। उसी रात में अस्पताल प्रबंधन का मैसेज आया कि डॉक्टर फेन आप इस बीमारी के बारे में किसी को नहीं बताएँगी। फिर दो दिन बाद उन्हें अस्पताल के अनुशासनात्मक निरीक्षण समिति के प्रमुख ने बुलाकर ‘अफवाह फैलाने’ के लिए फटकार लगाई और साथ ही धमकी दी कि अगर उन्होंने इसके बारे में किसी को बताया तो अंजाम बहुत बुरा होगा। इसके बाद स्टाफ को वायरस से संबंधित किसी भी फोटो या मैसेज को शेयर करने से मना किया गया था।

डॉ फेन ने सभी सरकारी अधिकारियों को बताने की कोशिश की, लेकिन उनकी बात किसी ने नहीं सुनी। उन्होंने कहा, मुझे पता था कि इसका प्रसार एक संक्रमित इंसान के संपर्क में आने से दूसरे को होगा। चीनी अधिकारियों के इसके पुष्टि करने के एक दिन बाद ही 21 जनवरी को इमरजेंसी विभाग में आने वाले मरीजों की संख्या पहले ही दिन में 1,523 तक पहुँच गई थी, जो कि सामान्य दिनों की तुलना में तीन गुना ज्यादा थी।

आगे चीनी डॉक्टर ने कहा कि वो दिन कभी नहीं भूल सकती जब एक पिता को उनके 32 वर्षीय बीमार बेटे की मौत के बाद डॉक्टर उनको डेथ सर्टिफिकेट दे रहे थे, और वह टकटकी लगाए डॉक्टरों को देख रहे थे। इसी तरह एक बुजुर्ग पिता तो इतने बीमार थे कि वो कार से ही नहीं निकल पाए, जब तक वो वहाँ पर गई बुजुर्ग की मौत हो चुकी थी।

बता दें कि डॉ आई फेन से पहले वुहान सेंट्रल हॉस्पिटल के डॉक्टर ली वेनलियांग ने भी कोरोना वायरस के बारे में चीनी सरकार पर आरोप लगाए थे। उन्हें भी चीनी अधिकारियों ने धमकी दी थी कि वे इस बात का जिक्र किसी से भी न करें। हालाँकि, बाद में डॉक्टर ली की कोरोना वायरस से मौत हो गई। मगर उनकी मृत्यु पर उनके कुछ करीबी लोगों ने शंका जताई है। उनके अनुसार ये प्राकृतिक मौत नहीं बल्कि हत्या है। डॉक्टर ली वेनलियांग की मौत के बाद चीनी अधिकारियों ने उनके परिवार के लिए माफीनामा जारी किया, जिसमें उनके जीवित रहने के दौरान उनके साथ किए गए व्यवहार के लिए माफी माँगी गई थी।

कोरोना वायरस ने 3200 नहीं, 42 हजार की ली है जान, 24 घंटे जलाई जा रही है शव: रिपोर्ट्स में स्थानीय लोगों का दावा

चीन के वुहान में कोरोना वायरस के कारण मरने वालों की संख्या पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इस बीच विदेशी मीडिया पोर्टल पर एक चौंकाने वाली खबर आई है। जिसके अनुसार वहाँ के स्थानीय लोगों ने चीनी अधिकारियों के दिए बयान के उलट दावा किया है। दरअसल, इनका कहना है कि वहाँ वास्तविकता में 42 हजार लोग कोरोना के कारण मरे हैं। जबकि चीनी अधिकारियों का कहना है कि 30 मार्च तक सिर्फ़ 3200 लोगों की मौत इस वायरस से हुई है और 81000 के करीब इससे संक्रमित हुए है।

डेलीमेल की रिपोर्ट के मुताबिक, हुबेई प्रांत के अधिकारियों के उलट स्थानीयों ने बताया कि दर्शाए गए आँकड़ों से अधिक निवासी अपने घरों में बिन जाँच के ही मर गए। स्थानीयों के अनुसार चीनी अधिकारियों ने जो दावा किया है। वो गलत है। 42 हजार लोगों की मौत का आँकड़ा चीन सरकार द्वारा जारी किए गए 3304 लोगों की मौत के आँकड़े से करीब दस गुना ज्यादा है। 

वुहान निवासियों का कहना है कि चीन के 7 शहरों में अलग-अलग फ्यूनरल होम से हर दिन 500 परिवारों को कोरोनावायरस से मरने वाले लोगों के अस्थि कलश सौंपे जा रहे हैं। यानी हर दिन 3500 लोगों को अस्थि कलश दिए जा रहे हैं। वहीं, हांकू, वुचांग और हनयांग में लोगों को कहा गया है कि उन्‍हें 5 अप्रैल तक अस्थि कलश दिए जाएँगे। इसी दिन किंग मिंग महोत्‍सव शुरू होने जा रहा है जिसमें लोग अपने पूर्वजों की कब्र पर जाते हैं।

तो, अगर इस तरह से अनुमान लगाएँ तो मालूम पड़ेगा 12 दिनों में 42 हजार अस्थि कलश वितरित किए जाएँगे। जबकि इससे पहले की रिपोर्ट में कहा गया था कि हांकू में ही केवल दो बार में 5000 हजार अस्थि कलश मृतकों के परिवार को दिए गए थे। 

गौरतलब है ये खबरें ऐसे समय पर आई हैं जब करीब दो महीने के लॉकडाउन के बाद जनता को छूट दी गई और जिन लोगों के पास ग्रीन हेल्‍थ सर्टिफिकेट है, उन्‍हें जाने की अनुमति दी गई है।

स्थानीय पूछ रहे हैं सवाल

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वुहान के रहने वाले झांग कहते हैं कि चीन सरकार की ओर से दिया गया मौतों का आधिकारिक आँकड़ा सही नहीं है क्‍योंकि लाशों को जलाने वाले 24 घंटे काम कर रहे हैं। उन्‍होंने सवाल किया कि अगर इतनी कम मौतें हुई हैं तो अंतिम संस्‍कार करने वालों को 24 घंटे काम क्‍यों करना पड़ रहा है।

वहीं, वुहान के रहने वाले माओ ने कहा कि संभवत: अधिकारी धीरे-धीरे मौतों का सही आँकड़ा जारी कर रहे हैं। यह जानबूझकर है या बिना जानबूझकर, मालूम नहीं। लेकिन शायद ऐसा इसलिए है ताकि लोग धीरे-धीरे वास्‍तविकता को स्‍वीकार कर लें।

सूत्रों का दावा- कोरोना से मरने वाली संख्या इटली-अमेरिका को भी कर गई पार

इधर, हुबेई प्रांत के एक सूत्र ने कहा कि कई लोग तो बिना आधिकारिक रूप से इलाज के ही अपने घरों में मर गए। उन्‍होंने कहा कि एक महीने में ही 28 हजार लोगों का अंतिम संस्‍कार किया गया। इस बीच अगर चीन के आधिकारिक आँकड़ों को मानें तो इटली और अमेरिका अब चीन से भी आगे न‍िकल चुके हैं। इटली में 10 हजार लोगों की मौत हो गई है जबकि 97 हजार लोग संक्रमित हैं।