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रामायण और महाभारत दो युग की कहानियाँ, पर जन्म से लेकर युद्ध तक कई गाथा एक सी

रामायण और महाभारत का महाकाव्य हम सभी भारतीयों के जीवन के साथ-साथ नैतिक विचारों और धार्मिक मान्यताओं को भी प्रभावित करते हैं। दो अलग-अलग युग की गाथाएँ होने के बावजूद दोनों में कई समानताएँ हैं। यह जान आपको आश्चर्य तो नहीं हुआ होगा। बहुत सारी चीजें आपको पहले से ही ज्ञात है। लेकिन शायद ही आपने दोनों महाकाव्यों की तुलना की हो।

सबसे पहले हम बात करते हैं रामायण और महाभारत की नाय‌िकाओं देवी सीता और देवी द्रौपदी की। इन दोनों के बीच सबसे बड़ी समानता ये है क‌ि दोनों ही अयोन‌िजा हैं। यानी दोनों ने ही माँ के गर्भ से जन्म नहीं ल‌िया है। देवी सीता भूम‌ि से प्रकट हुई हैं जिनको भूसुता भी कहते हैं, तो द्रौपदी अग्न‌ि से उत्पन्न हुई हैं और इनको अग्निसुता कहा जाता है। अगर नायकों की बात करें तो रामायण और महाभारत के नायक भी द‌िव्य पुरुष थे। महाभारत और रामायण की कथा के अनुसार राम और पांडव भी अयोन‌िज थे। जहाँ भगवान राम का जन्म पुत्रकामेष्ठि यज्ञ से हुआ था तो महाभारत के नायक पांडव देवताओं के वरदान स्वरूप जन्मे थे।

थोड़ा और आगे बढ़ते हैं तो नायकों के व‌िवाह में भी समानता दिखाई देती है। स्वयंवर तो हुआ ही था और साथ ही धनुष का वर्णन भी आपको दोनों विवाह में दिखेगा। रामायण में भगवान राम ने सीता से व‌िवाह के ल‌िए धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई थी, तो महाभारत में नायक अर्जुन ने द्रौपदी से व‌िवाह करने के ‌ल‌िए धनुष-बाण से मछली की आँख को भेदा था। पवन पुत्र का संदर्भ आपको दोनों महाकाव्यों में मिलेगा। रामायण में वे हनुमान कहलाते हैं और महाभारत में भीम। ये तो आपको ज्ञात ही है कि हनुमान और भीम दोनों ही गदा युद्ध में कुशल थे।

स्वयंवर के समय राम ऋष‌ियों की सहायता के ल‌िए वन में थे तो पांडव भी लाक्षागृह से बच न‌िकलने के बाद वन में भटक रहे थे। भगवान श्री राम को चौदह साल का वनवास म‌िला था तो महाभारत के नायक पांडवों को द्युत क्रीड़ा में हारने के बाद तेरह वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास म‌िला था। इस तरह दोनों नायकों को कुल चौदह साल तक घर से न‌िकलकर वनों में भटकना पड़ा था। रामायण में चौदह वर्ष के वनवास के दौरान सीता का हरण हो जाता है तो महाभारत में भी नाय‌िका द्रौपदी का वनवास के समय अपहरण हो जाता है। भाइयों से स्नेहपूर्ण संबंध की गाथा दोनों महाकाव्यों में है। माँ अलग-अलग होने पर भी राम का अपने भाइयों से बहुत स्नेह था। पांडवों की भी दो माँ थीं, लेकिन आपस में बेहद स्नेह था।

रामायण में युद्ध की शुरुआत देवी सीता का अपहरण करने के अपराध में खलनायक रावण के व‌िरुद्ध की गई तो महाभारत में पांडवों ने द्रौपदी के अपमान का बदला लेने के ल‌िए प्रत‌िज्ञा ली और इसी कारण युद्ध लड़ा गया। रामायण में मंथरा और महाभारत में शकुनि दोनों वे कारण थे जिनके कारण परिवार में मतभेद हुए जो युद्ध का कारण बने। राम की सुग्रीव से तो पांडवों की मत्स्यनरेश विराट से मित्रता होने में भी रामायण और महाभारत में आप समानता देख सकते हैं।

समानताओं में साथ-साथ रामायण और महाभारत में कुछ असमानताएं भी हैं पर वो कहानी किसी और दिन…

तबलीगी जमात का मुखिया मौलाना साद फरार, वायरल ऑडियो में कहा- मरने के लिए मस्जिद से अच्छी जगह नहीं

दिल्ली के निजामुद्दिन स्थित मरकज में इकट्ठा इस्लामिक भीड़ का खुलासा होने के बाद आज सुबह 3:30 बजे इसे खाली करा लिया गया। पुलिस ने मौलाना साद, डॉ जीशान, मुफ्ती शहजाद, मोहम्मद सैफी युनूस और मो सलमान के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की। पुलिस ने बताया कि संख्या ज्यादा होने के कारण जगह को खाली कराने में 5 दिन लगे। वहीं ये भी मालूम हुआ कि 28 मार्च को पुलिस द्वारा नोटिस मिलने के बाद से इस कार्यक्रम को आयोजित करने वालों में से एक मोहम्मद साद फरार है। पुलिस इनकी तलाश में जुटी है।

गौरतलब है कि मरकज़ का मामला उजागर होने के बाद वहाँ पर मौजूद लोग खुद को लॉकडाउन के कारण फँसा होने की बात कह रहे हैं। लेकिन इसी बीच तबलीगी जमात के मुखिया मोहम्मद साद की एक ऑडियो वायरल हुई है। जो इस पूरे कार्यक्रम की मंंशा और कार्यक्रम के खत्म होने के बाद भी भीड़ के वहीं रुके रहने पर संदेह खड़े कर रही है। दरअसल, मोहम्मद साद के फरार होने के बाद सामने आई ऑडियो में वे कोरोना का जिक्र कर रहे हैं और कह रहे हैं कि मरने के लिए मस्जिद से अच्छी जगह नहीं हो सकती। 

वैसे तो वायरल ऑडियो में मरकज के चीफ मौलाना साद कई बातें कहते सुनाई दे रहे है जो उन्हें कोरोना के कारण बने माहौल में नहीं कहनी चाहिए। मगर, इसमें ध्यान देने वाली बात है कि इस दौरान वहाँ कुछ लोग पीछे से खाँस भी रहे हैं। जिसपर कोई ध्यान नहीं दे रहा।

मौलाना साद ऑडियो में कहते सुनाई देते हैं कि ये ख्याल बेकार है कि मस्जिद में जमा होने से बीमारी पैदा होगी, मैं कहता हूँ कि अगर तुम्हें यह दिखे भी कि मस्जिद में आने से आदमी मर जाएगा तो इससे बेहतर मरने की जगह कोई और नहीं हो सकती।

वायरल ऑडियो में साद आगे कहते हैं कि अल्लाह पर भरोसा करो, कुरान नहीं पढ़ते अखबार पढ़ते हैं और डर जाते हैं, भागने लगते हैं। साद आगे कहते हैं कि अल्लाह कोई मुसीबत इसलिए ही लाता है कि देख सके कि इसमें मेरा बंदा क्या करता है। साद आगे कहते हैं कि कोई कहे कि मस्जिदों को बंद कर देना चाहिए, ताले लगा देना चाहिए क्योंकि इससे बीमारी बढ़ेगी तो आप इस खयाल को दिल से निकाल दो।

यहाँ बता दें कि मौलाना साद का पूरा नाम मौलाना मुहम्मद साद कंधलावी है। वह भारतीय उपमहाद्वीप में सुन्नी समुदाय के सबसे बड़े संगठन तबलीगी जमात के संस्थापक मुहम्मद इलियास कंधलावी के पड़पोते हैं। जो जमात का मुखिया बनने से लेकर पैगंबर मुहम्मद के बयान के ख़िलाफ़ दिए बयान के कारण विवादों में रह चुके हैं।

2017 की फरवरी महीने में दारुल उलूम देवबंद ने तबलीगी जमात से जुड़े लोगों को फतवा जारी कर कहा कि साद कुरान और सुन्ना की गलत व्याख्या करते हैं। देवबंद का यह फतवा मौलाना साद के भोपाल सम्मेलन में दिए गए बयान के बाद आया था जिसमें उन्होंने कहा कि (निजामुद्दीन) मरकज मक्का और मदीना के बाद दुनिया का सबसे पवित्र स्थल है। जिसे दारुल उलूम के मौलाना ने पैगंबर मुहम्मद के ख़िलाफ़ बताया था।

भूल-सुधार: त्रुटिवश इस रिपोर्ट में कुछ समय के लिए मौलाना साद की जगह, मीडिया में चलती भ्रमित करने वाले तस्वीरों के कारण, किसी और व्यक्ति की तस्वीर लगा दी गयी थी। उसे अब सुधार लिया गया है। हमें इसका खेद है और इसका उद्देश्य किसी भी व्यक्ति की छवि को क्षति पहुँचाना नहीं था।

कोरोना वायरस से इस जंग में नायक कौन, योगी या केजरीवाल?

दिसंबर 2019 में चीन ने संपूर्ण विश्व को वुहान वायरस (कोविड 19) रूपी महामारी से ग्रसित कर दिया। चीन दुनिया को शुरू में ये बताता रहा कि ये बीमारी ‘मानव से मानव’ में संक्रमित नहीं होती है। अर्थात लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। ऐसा नहीं है कि चीन ने ये पहली बार किया। 2002 में जब सार्स महामारी चीन में फैली तब भी उसने ऐसा ही किया था। वुहान वायरस का संक्रमण पूरे विश्व में फैलने में कुछ महीने लगे और इसने संपूर्ण मानवता को अपने चपेट में ले लिया। भारत भी इस बीमारी से अछूता नहीं है।

मोदी सरकार ने विदेशों में फॅंसे अपने नागरिकों को देश वापस लाकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का पूर्ण प्रयास किया और विभिन्न देशो से लाखों लोग देश वापस लाए गए। देश में वुहान वायरस से रोगियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विभिन्न कदम उठाए जाने लगे। इनमें सर्वप्रथम एक दिन का जनता कर्फ्यू लगाया गया था। इसका मकसद था कि लोग सामाजिक दुराव (सोशल डिस्टेंसिंग) के द्वारा इस वायरस के फैलाव को रोकने में सफल हो सकें। इसका एक अन्य उद्देश्य था कि शाम के 5 बजे थाली और ताली के द्वारा अपने जीवन कि बाज़ी लगाकर लोगों को बचाने और आवश्यक सेवाएँ प्रदान करने वाले लोगो को देश धन्यवाद ज्ञापित कर सके।

देश का छद्म बुद्धिजीवी वर्ग हमेशा कि तरह इस बार भी मोदी सरकार की आलोचना करने में जुटा रहा। सबसे पहले खुद उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को कूटनीतिक क्षमता दिखाते हुए विदेशों में फॅंसे अपने लोगों को वापस लाना चाहिए। जब लोग वापस लाए गए तो उन्हीं लोगों ने यह कहना शुरू किया कि मोदी सरकार सिर्फ अमीर लोगों की चिंता कर रही है। इसी तरह 22 तारीख के कर्फ्यू का भी मज़ाक बनाया गया। कहा गया कि एक दिन के बंद से वुहान वायरस का संक्रमण सरकार कैसे रोक सकती है। प्रधानमंत्री मोदी ने खुद 25 मार्च को वुहान वायरस के संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए 21 दिन के देशव्यापी स्वास्थ्य आपातकाल की घोषणा करते हुए पूरे देश में लॉकडाउन लागू कर दिया।

21 के दिन के लॉकडाउन के दौरान सभी राज्य सरकारों से उम्मीद थी कि वो इसका पालन सख्ती के साथ करवाएँगे, जिससे वायरस के संक्रमण को रोका जा सके। सभी राज्य सरकारें अपने स्तर पर वुहान वायरस के खिलाफ लड़ने में तन्मयता के साथ जुटे भी हुए हैं। वहीं, दिल्ली की केजरीवाल सरकार इस लॉकडाउन को भी अपने लिए राजनीतिक अवसर के रूप में देख रही है। इस 21 दिनों के लॉकडाउन के दौरान स्वाभाविक रूप से गरीब, दिहाड़ी मजदूर, श्रमिक और अन्य छोटे-मोटे काम करके जीवन-यापन करने वाले लोगों को समस्याओं का सामना करना ही पड़ता। परन्तु उन्हें उनकी दैनिक जरूरत की वस्तुएँ प्रदान कर लॉकडाउन का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करना केंद्र के साथ सभी राज्य सरकारों का दायित्व था।

दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने जिस तरह से गैर जिम्मेदाराना व्यवहार गरीबों के साथ किया वो चौंकाने वाला है। ऐसे समय में जब देश में महामारी फैलने का खतरा मॅंडरा रहा हो, दूसरे राज्य से आए कामगारों को दिल्ली छोड़कर जाने के लिए प्रोत्साहित करना लोकतंत्र की आत्मा की हत्या करने के समान है। केजरीवाल ने खुद ट्वीट कर कहा कि दिल्ली में खाने-रहने की व्यवस्था है पर जो लोग जाना चाहते हैं उनके लिए डीटीसी बसों कि व्यवस्था कि गई है। वहीं उप मुख्यमंत्री सिसोदिया ने ट्वीट किया कि लोगों को उनके राज्यों तक वापस जाने के लिए दिल्ली कि 100 डीटीसी बसों की व्यवस्था की गई है जो दिल्ली से लगी उत्तर प्रदेश की सीमाओं तक उन्हें छोड़ेगी। उसके आगे वहॉं से उत्तर प्रदेश की 200 बसें उन्हें उनके गंतव्य स्थान तक ले जाएगी।

दिल्ली से प्रवासन के लिए विवश करने वाली आम आदमी पार्टी के विधायक राघव चड्ढा ने झूठ की पराकाष्ठा पार करते हुए ट्वीट किया कि जो लोग दिल्ली से उत्तर प्रदेश जा रहे हैं उन्हें योगी आदित्यनाथ के आदेश पर पीटा जा रहा है। उनसे कहा जा रहा है कि तुम लोग दिल्ली गए ही क्यों थे। अब आगे से जाने नहीं देंगे। बाद में उन्होंने यह ट्वीट डिलीट कर दिया। लेकिन इस ट्वीट के लिए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। उपरोक्त बयानों के अलावा ऐसे वीडियो भी आए हैं जिसमें ये देखा गया कि रात में माइक से प्रचार कर कहा जा रहा था कि जो लोग अपने घर वापस जाना चाहते हैं उनके लिए बसों का इंतजाम योगी सरकार ने आनंद विहार बस स्टैंड पर किया है। इसके परिणामस्वरुप 28-29 मार्च को दिल्ली नोएडा सीमा पर हजारों की भीड़ इकठ्ठा हो गई थी। यह लॉकडाउन के मकसद को खत्म करने की एक बड़ी साजिश थी।

सोचने वाली बात ये है कि जब दिल्ली सरकार को लोगों को मूलभूत सुविधाएँ प्रदान करना चाहिए था वो ऐसे समय में राजनीति करने में लगी हुई है। कुछ लोगो ने अपने प्रदेश वापस पहुॅंच कर बताया कि दिल्ली से जबरन भगाने के लिए उनके बिजली-पानी तक के कनेक्शन काट दिए गए। वे मजबूर होकर दिल्ली छोड़ दें जिससे दिल्ली सरकार के ऊपर भार काम पड़े और उनके बड़े-बड़े वादों की पोल ना खुले। आश्चर्य की बात ये है कि दिल्ली से उन्हीं लोगों को भगाने की कोशिश की गई, जिन्होंने केजरीवाल को तीन बार दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया। ऐसा नहीं है कि केजरीवाल और उनके मंत्री इस तरह की तुच्छ हरकत पहली बार कर रहे हैं। कुछ महीने पहले खुद केजरीवाल ने एक भाषण में कहा था कि उत्तर प्रदेश और बिहार से लोग आते हैं और यहाँ कि सभी सुविधाओं का लाभ उठाकर वापस चले जाते है। उन्हें दिल्ली आने से रोकना पड़ेगा, जिससे वही सुविधाएँ दिल्ली वालों को मिल सके। इस तरह कि सोच वाले व्यक्ति से और क्या आशा की जा सकती है।

इसके विपरीत इन कठिन परिस्थितियों में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय राजनीति में एक मिसाल पेश की है। यह अन्य राज्यों के एक मिशाल है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश की सरकार ने तो शुरू से केंद्र सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर वुहान वायरस (कोविड 19) के खिलाफ लड़ाई जारी रखी हुई है। उन्होंने संवेदना के आधार पर एक-एक कर ऐसे निर्णय लिए जो गरीब, दिहाड़ी मज़दूर और कमज़ोर तबके के लोगों के लिए इस लॉकडाउन के दौरान अति आवश्यक हैं या होंगी। उन्होंने गरीबों के लिए स्वास्थ्य, खाद्यान्न, निश्चित धनराशि और अन्य मूलभूत सुविधाएँ प्रदान करने के लिए आपातकालीन राजस्व की घोषणा भी की और अब उसका प्रबंध भी कर रहे हैं। प्रदेशवासियों के लिए आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित हो इसके लिए योगी सरकार ने डोर स्टेप डिलिवरी की व्यवस्था की है।

दिल्ली सरकार के फैलाए गए अराजकता के खिलाफ भी योगी सरकार ने प्रभावी तरीके से काम किया है। योगी सरकार ने सर्वप्रथम ऐसे लोगों को उनके गंतव्य तक छोड़ने का ऐलान किया था जो लॉकडाउन के नियमों की अवहेलना, अनजाने में करते हुए उत्तर प्रदेश की सीमा में पैदल ही चल पड़े थे। ऐसे कुछ समाचार बढ़ा-चढ़ा कर दिखाए जाने लगे जिससे मोदी सरकार को बदनाम किया जा सके। वुहान वायरस के खिलाफ छिड़ी लड़ाई अब दिहाड़ी मज़दूर, श्रमिक और प्रवास कर रहे कुछ लोगों की कहानियों के नीचे दबकर रह गई थी।

लोग प्रवास क्यों कर रहे हैं? इससे बड़ा मुद्दा ये हो गया कि केंद्र सरकार गरीबों के बारे में कुछ नहीं सोचती, गरीब विरोधी है। कोविड 19 की जगह यही विषय वाद-विवाद का केंद्रबिंदु बन गया। परन्तु योगी सरकार ने एक बार फिर आगे आकर इस मुद्दे को भी हल कर दिया। जो बसें शुरू में कुछ लोगों के लिए थी वो बाद में सभी लोगों को उनके राज्यों, जिलों तक पहुॅंचाने का काम करने लगी। दिल्ली सरकार को ये भी ठीक नहीं लगा तो वो लोगो में भ्रम पैदा करने में जुट गई और कहा कि ये लॉकडाउन 21 दिनों का ना होकर जून 2020 तक चलेगाए इसलिए जिसको भी अपने प्रान्त, जिला या गॉंव जाना हो वे डीटीसी की बसों से आनंद विहार बस स्टैंड तक जाए जहॉं पर उत्तर प्रदेश की सरकार उनके लिए बसों का इंतज़ाम कर रही है। इसके फलस्वरूप वहॉं लोगों की इतनी भीड़ इकठ्ठा हो गई कि सोशल डिस्टेंसिंग का अर्थ ही खो गया। ये साज़िश इसलिए रची गई ताकि योगी सरकार को केंद्र में रखकर उसकी आलोचना की जा सके।

योगी ने इसका भी हल निकालते हुए यमुना एक्सप्रेसवे पर बने अपार्टमेंटस को सरकारी कब्जे में लेते हुए, ऐसे तमाम दिल्ली से आए प्रवासियों को शरण दिया जो बेघर थे या अपने घर वापस जा रहे थे। इस दौरान ऐसे सभी लोगों के लिए खाने-पीने के साथ-साथ, स्वास्थ्य सुविधा भी उपलब्ध करवाई गई है। ऐसे सभी लोगो को यहाँ 14 अप्रैल तक रखा जायेगा और उनका कोरोना टेस्ट भी किया जाएगा। इसके बाद ही इन लोगों को उनके गॉंव, जिले और राज्यों में भेजा जाएगा जिससे संक्रमण आगे ना फैले और इन लोगो का भी ध्यान रखा जा सके। उत्तर प्रदेश सरकार ने तो एक कदम बढ़ाते हुए विभिन्न राज्यों में मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले व्यक्तियों की सहायता हेतु राज्यवार वरिष्ठ प्रशानिक एवं पुलिस अधिकारियों की तैनाती की है जो लॉकडाउन के दौरान वहॉं रह रहे प्रवासियों की मदद करेंगे। योगी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री को लिखे अपने एक पत्र में ये भी कहा कि वे दिल्ली के तमाम ऐसे लोगों भी ध्यान रखेंगे जो उत्तर प्रदेश में रह रहे हैं। ऐसे दूर-दृष्टया जनकल्याणकारी सरकार की जितनी भी तारीफ की जाए कम होगा। योगी जी ने सिद्ध किया कि वे एक क्षेत्र के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य ना कर, मानवता के आधार पर कार्य करते हैं।

वुहान वायरस का संक्रमण रोकने के लिए जरूरी है कि केंद्र सरकार के सभी प्रयास सफल रहें। इसके लिए राज्य सरकारों को बिना किसी छल-कपट के एकजुट होकर काम करना होगा। तभी अपने लोगों के जीवन की रक्षा की जा सकती है। ईश्वर ना करें, इटली, जर्मनी, स्पेन और अमेरिका जैसे हालात भारत में पैदा हो, जहॉं आज मरीजों और मृतकों की संख्या हज़ारो में हैं। यदि ऐसा कुछ भी हुआ तो इसकी जिम्मेदारी केजरीवाल जैसी सरकारों की ही होगी।

तबलीगी जमात को बचाने के लिए ‘द वायर’ ने चलाया CM योगी का झूठा बयान: दर्ज हो सकता है केस, मिली फटकार

जहाँ एक तरफ़ पूरी दुनिया कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ रही है, ‘द वायर’ जैसे प्रोपेगेंडा पोर्टल्स इस आपदा काल में भी अपना उल्लू सीधा करने में लगे हुए हैं। ताज़ा मामला ‘द वायर’ के संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन का है, जिसने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बारे में फेक न्यूज़ फैलाई है। तबलीगी जमात को बचाने के लिए तड़पते ‘द वायर’ ने फेक न्यूज़ चलाया कि जिस दिन इस इस्लामी संगठन का मजहबी कार्यक्रम हुआ, उसी दिन सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि 25 मार्च से 2 अप्रैल तक अयोध्या प्रस्ताविक विशाल रामनवमी मेला का आयोजन नहीं रुकेगा क्योंकि भगवान राम अपने भक्तों को कोरोना वायरस से बचाएँगे।

‘द वायर’ और उसके संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन ने फैलाया झूठ

दरअसल, दिक्कत ये है कि तमाम ऐसे मौलानाओं के बयान आ रहे हैं कि अल्लाह समुदाय विशेष को कोरोना वायरस से बचा लेगा। अपनी तकरीर में दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज के मौलाना साद ने भी अपने समुदाय के लोगों से कहा कि वो डॉक्टरों और सरकार की सलाह न मानें क्योंकि मिलने-जुलने और एक-दूसरे के साथ बैठ कर खाने से कोरोना नहीं होगा। ऐसे कई मौलानाओं के बयानों को ढकने के लिए ‘द वायर’ ने फेक न्यूज़ चला तो दिया लेकिन वो पकड़ा गया। ‘द वायर’ ने अपने लेख में ऐसा दावा किया और उसके संपादक वरदराजन ने इस लेख को शेयर भी किया। लेकिन, उनकी पोल खुलते देर न लगी।

‘द वायर’ ने अपने लेख के माध्यम से फैलाया फेक न्यूज़

यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने सिद्धार्थ वरदराजन की ये चोरी पकड़ ली और उन्हें जम कर फटकार लगाई। उन्होंने ‘द वायर’ और उसके संस्थापक पर झूठ फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी ने कभी कोई ऐसी बात कही ही नहीं है, जैसा कि लेख में दावा किया गया है। उन्होंने सिद्धार्थ को चेताया कि अगर उन्होंने अपनी इस फेक न्यूज़ को तुरंत डिलीट नहीं किया तो कार्रवाई की जाएगी और उन पर मानहानि का मुकदमा भी चलाया जाएगा। साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए ये भी कहा कि कार्रवाई के बाद वेबसाइट के साथ-साथ केस लड़ने के लिए भी सिद्धार्थ वरदराजन को डोनेशन माँगना पड़ जाएगा।

बता दें कि दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात की 6 मंजिला इमारत में जमा हुए ढाई हजार लोगों में से अब तक 95 से भी अधिक समुदाय विशेष के लोगों को कोरोना वायरस होने की ख़बर है। वो विभिन्न राज्यों में कई अन्य लोगों के भी संपर्क में आए हैं, जिनके संक्रमण का शिकार बनने की आशंका है। निजामुद्दीन में रुके लोगों में अधिकतर विदेशी थे, जो वीजा नियमों का उल्लंघन करते हुए देश में रुके हुए थे।

…अगर आप हिंदू हैं तो भूख से मरिए, कोरोना बाद में मारेगा: वायरल विडियो से समझें पाकिस्तान की हकीकत

कोरोना के कहर के बीच भी पाकिस्तान ने अपने मुल्क में अल्पसंख्यक समुदायों के साथ अत्याचार और भेदभाव करने वाले रवैये को बरकरार रखा है। खबर आई है कि वहाँ एक ओर प्रधानमंत्री इमरान खान कोरोना से लड़ने के लिए इस्लाम को बड़ी ताकत मान रहे हैं, तो दूसरी ओर राहत कार्य में जुटा उनका प्रशासन हिंदुओं और इसाइयों को दाने-दाने के लिए तरसा रहा है।

एएनआई न्यूज एजेंसी ने पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों की हालत बयां करने वाली एक विडियो जारी की है। इस विडियो में एक व्यक्ति अपनी और अपने समुदाय के लोगों की पीड़ा बताते नजर आ रहा है। हम देख सकते हैं कि विडियो में व्यक्ति लाचार होकर बता रहा है कि सिंध प्रांत में प्रशासन ने हिंदू-ईसाई समुदाय के लोगों को राशन देने से मना कर दिया है। उनकी मदद नहीं की जा रही है। उन्हें खाना नहीं दिया जा रहा है।

व्यक्ति कहता है, ”हम भी यहीं के बाशिंदे हैं। हम भी पाकिस्तानी हैं। तो हमारा भी ख्याल करना चाहिए। जैसे सब लोगों के साथ कॉपरेट करते हैं। हमारे साथ भी करना चाहिए। हमारे पास भी छोटे-छोटे बच्चे हैं। हम भी गरीब लोग हैं। यहाँ के रहने वाले। मगर फिर हमारे साथ कोई कॉपरेट क्यों नहीं करता। दूसरे लोगों को दिया जाता है। हमें नहीं दिया जाता। ये गलत है न!”

पाकिस्तानी हिंदू-ईसाई समुदाय के इस सदस्य के मुताबिक, कोरोना इस समय सबके लिए तबाही बना हुआ है। ये किसी धर्म-मजहब को नहीं देखता। लेकिन फिर भी पाकिस्तानी प्रशासन उनके साथ कोई कॉपोरेट नहीं करता। बस बहुसंख्यक आबादी की मदद करता है।

गौरतलब है कि कोरोना के बढ़ते प्रभाव के कारण इमरान खान ने 30 मार्च को अपने देश की जनता को संबोधित किया था। मगर यहाँ उनकी बातों में गंभीरता बिलकुल नजर नहीं आई थी। उन्होंने इस बातचीत में अपने लोगों को न घर में रहने की गुहार लगाई थी, बल्कि लॉकडाउन के पूरे कॉन्सेप्ट को ही खारिज कर दिया था। इमरान खान ने इस दौरान देशवासियों को मजहब का हवाला दिया था और इमान का पाठ पढ़ाया था। इसके बाद वे अपने मुल्क के लोगों को उन इस्लामिक देशों के बारे में बताते नजर आए थे, जो सबसे ज्यादा खैरात देते हैं। फिर इस लड़ाई को लड़ने के लिए जनता को जागरूक करने से ज्यादा अपने देश के युवाओं पर विश्वास जताया था और कहा था कि अब इन दोनों ताकतों (इमान और युवा) का उन्हें इस्तेमाल करना है ताकि कोरोना से लड़ा जा सके।

मजनू का टीला गुरुद्वारा में फँसे हुए हैं 400 सिख: नहीं सुन रहे केजरीवाल और कैप्टेन, कोरोना फैलने का ख़तरा

कोरोना वायरस पूरी दुनिया में तबाही मचा रहा है। भारत में लॉकडाउन के बावजूद दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात द्वारा ढाई हजार लोगों को जमा कर मजहबी कार्यक्रम करने से कोरोना के मामलों में उछाल आया है। दिल्ली में ही मजनू का टीला इलाक़े में कई लोग फँसे हुए हैं, जो अपने घरों से दूर हैं। मजनू का टीला गुरूद्वारे में कई सिख फँसे हुए हैं। ऐसे में कोरोना वायरस के फैलने का ख़तरा है। पत्रकार आदित्य राज कौल ने वहाँ घिरे लोगों की तस्वीरें ट्वीट की हैं। साथ ही उन्होंने अकाली दल, भाजपा और कॉन्ग्रेस- तीनों ही दलों से सवाल पूछा है कि वो किस चीज का इन्तजार कर रहे हैं?

दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमिटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल और पंजाब के उनके समकक्ष कैप्टेन अमरिंदर सिंह से इन लोगों को पंजाब वापस पहुँचाने के लिए व्यवस्था करने को कहा है। उन्होंने कहा है कि अगर इनमें से किसी एक को भी कोरोना हुआ तो इससे हज़ारों को फैलने का ख़तरा है। कौल ने बताया कि मजनू का टीला स्थित गुरुद्वारा में सिख समुदाय के क़रीब 400 लोग फँसे हुए हैं। पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा के बाद से ही ये लोग वहाँ फँसे हुए हैं। क़ौल ने कहा कि न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकार ने उनको सही जगह पहुँचाने की व्यवस्था की है।

सिरसा ने कहा कि वो दोनों मुख्यमंत्रियों से हाथ जोड़ कर आग्रह करते हैं कि मजनू का टीला में फँसे लोगों को निकालें। उन्होंने बताया कि उनमें से कई लोगों को सर्दी-बुखार भी है और कई खाँस भी रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन सबकी मेडिकल जाँच करानी ज़रूरी है लेकिन बार-बार आग्रह करने के बावजूद कैप्टेन अमरिंदर सिंह कोई जवाब नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा प्रबंधन कमिटी उन सभी के खाने-पीने का ध्यान रख रही है और उन्हें सारी सुविधाएँ दी जा रही हैं लेकिन उन्हें वहाँ से निकाला जाना सबसे जयादा ज़रूरी है, जिसके लिए दिल्ली व पंजाब की सरकारों को व्यवस्था करनी चाहिए।

मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि उन्होंने 29 मार्च को 2 बसों से मजनू का टीला गुरूद्वारे में फँसे कई लोगों को उनके घरों तक पहुँचाया था। लेकिन, उसके बाद दोनों राज्य सरकारों का सहयोग न मिलने के कारण 400 लोग वहीं रह गए और उन्हें घर नहीं पहुँचाया जा सका। दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने बताया कि मजनू का टीला में पाकिस्तान से आए हुए हिन्दुओं के लिए भी राशन-पानी की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने इस सम्बन्ध में मनजिंदर सिरसा से बातचीत की। वहाँ रह रहे सभी हिन्दुओं के खाने-पीने की व्यवस्था गुरुद्वारा प्रबंधन कमिटी करेगी। लॉकडाउन के बाद भी ऐसा किया जाता रहेगा।

अभी तक पंजाब या दिल्ली सरकार की तरफ़ से इस सम्बन्ध में कोई बयान नहीं आया है। केजरीवल या कैप्टेन की तरफ़ से सोशल मीडिया पर भी कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया गया है। मजनू का टीला में फँसे सिखों के खाने-पीने की तो व्यवस्था कर दी गई है लेकिन सबसे ज़रूरी है उनका मेडिकल टेस्ट कर के उनके घर पहुँचाया जाना, ताकि भीड़ न जुटे और इतने लोगों के एक साथ रहने की नौबत न आए।

तबलीगी की तबाही: महाराष्ट्र, कर्नाटक जैसे राज्यों में भी गए मरकज में जुटे विदेशी, 1 दिन में कोरोना के 227 नए मामले

दिल्ली का निजामुद्दीन भारत में कोरोना वायरस का नया हॉटस्पॉट बन गया है। वहाँ मजहबी कार्यक्रमों में शामिल हुए ढाई हजार लोगों की पहचान में मुश्किलें आ रही है। तमिलनाडु के इरोड जिला प्रशासन ने कहा है कि जो भी लोग वहाँ पर शामिल हुए थे, उन सभी को ख़ुद से आगे आकर कोरोना वायरस की जाँच करानी चाहिए। जिले के 4 ऐसे इलाक़े हैं, जहाँ समुदाय विशेष की जनसंख्या ज्यादा है। उन चारों इलाक़ों में पुलिस ने घेराबंदी कर दी है। दिक्कत ये है कि तबलीगी जमात में शामिल हुए उन्हीं लोगों की जानकारियाँ पता चली हैं, जो ट्रेन या बस से गए थे। जमात की इरोड शाखा को कहा गया है कि वह सभी लोगों के नाम जुटाएँ और पुलिस को दें।

झारखंड में पिछले एक सप्ताह में 37 लोग निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल होकर लौटे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने आदेश दिया है कि इन सभी की जाँच की जाए। दिल्ली पुलिस ने झारखंड पुलिस को 46 लोगों की सूची दी है, जो तबलीगी जमात के कार्यक्रम में गए थे। राँची के हिन्दपीढ़ी के एक मस्जिद से भी 24 लोगों को बरामद किया गया था, ऐसे में वहाँ इस ख़बर के बाद हड़कंप मचा हुआ है। राँची के अलग-अलग भाग से अब तक 28 विदेशी पकड़े जा चुके हैं।

कर्नाटक सरकार ने बताया है कि 62 इंडोनेशियाई और मलेशियाई लोग तबलीगी जमात की इमारत में जमे हुए थे और उन्होंने कर्नाटक का भी दौरा किया था। उनमें से 12 लोगों को चिह्नित कर लिया गया है और उन्हें क्वारंटाइन सेंटर भेज दिया गया है। राज्य का गृह मंत्रालय पूरे मामले पर नज़र रख रहा है। महाराष्ट्र के अहमदनगर में भी 34 ऐसे लोगों को चिह्नित किया गया है। इनमें से 29 विदेशी हैं। इनमें से 14 के जाँच परिणाम आ गए हैं और 2 कोरोना वायरस पॉजिटिव पाए गए हैं। उन दोनों के अलावा 3 अन्य लोग भी संक्रमित हुए हैं, जो उनके संपर्क में आए।

केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि तबलीगी ने जो भी किया, वो तालिबानी आतंकवाद से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे आपराधिक कृत्यों को माफ़ नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तबलीगी जमात ने कई अन्य लोगों की जान पर भी संकट खड़ा कर दिया है। नकवी ने कहा कि ऐसे लोगों और संगठनों के ख़िलाफ़ सख्त क़दम उठाए जाने चाहिए, जो सरकार के आदेशों की अवहेलना करते हैं। इधर दिल्ली में पूरे निजामुद्दीन क्षेत्र को सैनिटाइज्ड करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस और साउथ दिल्ली के निगम कर्मचारी मिल कर सैनिटाइजर का स्प्रे करने में लगे हुए हैं।

7 लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर भी दर्ज की गई है। मंगलवार (मार्च 31, 2020) को देश भर में कोरोना संक्रमण के 227 नए मामले आए, जिनमें से अधिकतर तबलीगी जमात से जुड़े हुए हैं। झारखंड और असम में भी अब संक्रमण के पहले मामले की पुष्टि हुई है। दोनों के तार निजामुद्दीन के मरकज से जुड़े हुए हैं।

निजामुद्दीन की मरकज से निकल भिलाई की मस्जिद में 4 महिलाओं समेत 8 छिपे थे, हेल्थ टीम पहुँची तो किया हंगामा

दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तब्लीगी जमात के मरकज से निकल देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुॅंचे लोगों की तलाश की जा रही है। इसी कड़ी में पता चला है कि छत्तीसगढ़ से भी 100 से ज्यादा लोग जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। राज्य सरकार ने इनकी पहचान कर लिए जाने का दावा किया है। इनमें 32 को क्वारंटाइन और 69 को होम आइसोलेशन में रखा गया है।

ऐसे आठ लोग मरकज से निकलकर भिलाई के सुपेला स्थित नूर मस्जिद में छिपे थे। ये सात मार्च को भिलाई पहुॅंचे थे। जानकारी मिलने के बाद जब स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुॅंची तो इनलोगों ने हंगामा किया। इसके बाद पुलिस ने सख्ती दिखाई और सभी लोगों को क्वारंटाइन सेंटर ले गई। मस्जिद में छिपे लोगों में चार महिलाएँ थी।

खबरों के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ जब पुलिस मौके पर पहुँची तो सभी लोग मस्जिद में मौजूद थे। पूछताछ के दौरान इन्होंने गुमराह करने की कोशिश की। पहले बताया कि 3-4 फरवरी को निजामुद्दीन में हुई जमात में शामिल हुए थे। बाद में कहा कि 12 फरवरी को उसमें गए थे। साथ ही कहा कि हमने खुद को सेल्फ क्वारंटाइन किया था। इनकी पहचान शेख मेहर, शेख अताउद्दीन, मीर समजद अली, इस्माइल शेख, अनसुरा बीबी, आसमा बीबी, अंजू बीबी और खुदने बीबी के रूप में हुई है। ये सभी पश्चिम बंगाल के मिदनापुर के हैं।

इधर, बिलासपुर की जामा मस्जिद में नौ विदेशी मिले हैं जो खाड़ी देश से आए थे। सभी को आइसोलेशन में रखा गया है। उनके सैंपल जाँच के लिए एकत्र किया गया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इन मामलों की जानकारी देते हुए बताया कि बालोद से 15, बिलासपुर से एक और अंबिकापुर से 5 लोगों के बारे में जानकारी मिली है। अब इन्हें ढूँढकर इनकी जाँच करवाने की प्रक्रिया जारी है। उल्लेखनीय है कि भिलाई मामले में जैसे पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम को लोगों का विरोध झेलना पड़ा, उसी प्रकार का विरोध निजामुद्दीन में पुलिस प्रशासन को झेलना पड़ा था और संदिग्धों को अस्पताल ले जाने आई एंबुलेंस को लौटना पड़ा था।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमित 8 मामले अब तक सामने आए हैं। इनमें सबसे अधिक राजधानी रायपुर में 4 व राजनांदगांव, दुर्ग, बिलासपुर और कोरबा में एक-एक पॉजिटिव मिले हैं। 

तबलीगी जमात की वजह से Pak में भी कोरोना संक्रमण : मरकज की इमारत को ही बनाया क्वारंटाइन सेंटर

पाकिस्तान के पंजाब में स्थित रायविंड सिटी में पूरी तरह लॉकडाउन का ऐलान कर दिया गया है। मुल्क में कोरोना वायरस के संक्रमण के बड़े ख़तरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने ये ऐलान किया। शहर की सारी दुकानों को बंद कर दिया गया है। असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर अदनान राशिद ने बताया कि क्षेत्र में कोरोना वायरस से स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है, इसी आलोक में ये निर्णय लिया गया है। शुरुआत में इस लॉकडाउन को 3-4 दिनों तक ही रखा गया है। सम्भावना है कि ये अवधि बाद में बढ़ा दी जाएगी। पंजाब के गृह विभाग ने बताया है कि रायविंड में कोरोना वायरस के कई मामले मिलने के बाद स्वास्थ्य मामलों पर कैबिनेट बैठक हुई, जहाँ ये निर्णय लिया गया।

पाकिस्तान में कोरोना वायरस के कारण अब तक 30 लोगों की मौत हो चुकी है और 2000 से भी ज्यादा लोग संक्रमित पाए गए हैं। बता दें कि रविवार (मार्च 5, 2020) को तबलीगी जमात के एक व्यक्ति ने पुलिस अधिकारी अशरफ अली माखी को चाकुओं से गोद डाला था। तबलीगी का सदस्य क्वारंटाइन सेंटर से भाग रहा था और इसी क्रम में उसने एसएचओ माखी पर धड़ाधड़ चाकुओं से वार किया। अधिकारी को जल्दी-जल्दी में लय्याह स्थित डीएचक्यू हॉस्पिटल में दाखिल किया गया, जहाँ उनकी हालत स्थिर बनी हुई है।

रायविंड स्थित मरकज में ठहरे 35 लोगों की स्क्रीनिंग की गई थी, जिनमें से 27 कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। लाहौर स्गिटर रायविनफ़ में इस्लामी संगठन तबलीगी जमात ने एक मजहबी कार्यक्रम का आयोजन किया था, जिसमें कम से कम 1200 लोग शामिल हुए थे। इसमें भाग लेने के लिए आए लोग तब वहीं पर रह गए जब कार्यक्रमों को कैंसिल कर दिया गया और सरकार ने लॉकडाउन का ऐलान किया। मरकज को सील कर उसे क्वारंटाइन सेंटर बना दिया गया।

मार्च के शुरुआती हफ्ते में भी तबलीगी जमात ने लाहौर में 1.5 लोगों का एक जलसा आयोजित किया था। यह सब कोरोना वायरस के ख़तरों के बावजूद किया गया। इसमें शामिल आए लोगों ने साथ खाना खाया और उनमें से अधिकतर साथ सोए। इस कारण पाकिस्तान में कोरोना वायरस के मामलों में अचानक से इजाफा होना शुरू हो गया। बता दें कि भारत में भी इसी जमात के कारण कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज की 6 मंजिला इमारत में 2500 लोग कई दिनों तक ठहरे रहे और वहाँ मजहबी कार्यक्रमों को भी नहीं रोका गया, जिससे देश भर में कोरोना के कई नए मामले आए हैं।

बिहार के मधुबनी की मस्जिद में थे जमाती! सामूहिक नमाज रोकने पहुँची पुलिस टीम पर हमला

बिहार की एक मस्जिद में सामूहिक नमाज रुकवाने पहुॅंची पुलिस टीम पर हमला करने की घटना सामने आई है। मामला मधुबनी जिले का अंधराठाढ़ी ब्लॉक के गीदड़गंज गाँव का है। यहॉं समुदाय विशेष के लोगों ने पुलिस पर मंगलवार (31 मार्च 2020) शाम को हमला कर दिया। पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ जमाती मस्जिद में ठहरे हैं। पुलिस कार्रवाई करने पहुँची तो स्थानीय लोगों ने उन पर पत्थरबाजी और फायरिंग की। पुलिस टीम को करीब एक किलोमीटर दूर तक खदेड़ा गया। कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी खबर है। पुलिस जीप को हमलावरों ने तालाब में पलट दिया। बताया जाता है कि उपद्रव का फायदा उठा कर मस्जिद में ठहरे जमाती भाग निकले। घटना के बाद से इलाके में तनाव बना हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अंधरठाढ़ी थाना की मदना पंचायत के गीदड़गंज में सामूहिक रूप से शाम को मजहबी कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा था। पुलिस को भी सूचना मिली थी कि मदना के पूर्व मुखिया एवं राजद प्रखंड अध्यक्ष के घर के पास स्थित मस्जिद में विदेश से आए कुछ लोग हैं। इसकी देखरेख पूर्व मुखिया ही करते हैं।

एसपी सत्यप्रकाश का कहना है कि सूचना मिलने पर पुलिस लोगों से लॉकडाउन का उल्लंघन न करने की अपील करने पहुँची थी। मगर वहाँ के लोगों ने थराव कर दिया। पुलिस ने इन लोगों के ख़िलाफ़ नामजद एफआईआर दर्ज कर ली है। फिलहाल सभी फरार हैं। सभी को गिरफ्तार करके जेल भेजा जाएगा। किसी को भी लॉकडाउन के नियम का उल्लंघन नहीं करने दिया जाएगा। बता दें, एसपी ने गाँव में गोली चलाने पर कोई बात नहीं की। लेकिन, झंझारपुर एसडीपीओ ने ग्रामीणों द्वारा गोली चलाने की पुष्टि की।

जानकारी के मुताबिक, गीदड़गंज गाँव में एक ही समुदाय के लोग रहते हैं। पुलिस पर हमले के बाद इनमें कई फ़रार हैं। बताया जा रहा है कि घटना वर्तमान मुखिया ओजेरा खातून के घर के बगल में घटी। जिसने हमला किया वे पूर्व मुखिया का खास और हिस्ट्रीशीटर है। पुलिस पर हमला करने वालों में मोहम्मद मुसवा एवं अन्य लोगों का नाम निकलकर सामने आया है। पुलिस के अनुसार, जिस दौरान उन पर हमला हुआ उस समय वे  किसी तरह से वहाँ जान बचाकर भागे। मगर, स्थिति थमने पर जब झंझारपुर डीएसपी सहित पुलिस दोबारा मौके पर गई तो मस्जिद में रुके लोग फरार हो गए थे।

स्थानीय खबरों की मानें, तो गीदड़गंज गाँव में दो गुट हैं। एक वसीम का। दूसरा कमरुजुम्मा का। वसीम के गुट ने जमातियों की सूचना पुलिस को दी थी। मगर कमरुजुम्मा के गुट ने उन पर हमला कर दिया। इस हमले में सीओ भी घायल हो गए। अभी तक हमले को देखकर इस पूरी घटना को पूर्व नियोजित बताया जा रहा है, क्योंकि लोगों की छतों पर बड़े-बड़े पत्थर रखे थे।