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सैनिटाइजेशन प्रक्रिया को टाइम्स पत्रकार समझता है इंसानों के लिए जहर, लोगों ने विडियो भेजकर लगाई क्लास

कोरोना के फैलते प्रकोप ने सबके भीतर एक डर भर दिया है। बस सरकार इसी डर को उनके अंदर से खत्म करके उन्हें इससे लड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। सरकार अपनी तरफ से सुरक्षा बनाए रखने की हर कोशिश कर रही है। मगर मीडिया जगत के कुछ अफवाहकार (पत्रकारों की एक ब्रीड) नई-नई अफवाहों को रचकर उन्हें कमजोर बना रहे। अभी थोड़े समय पहले ये काम दि प्रिंट ने किया और प्रसार भारती के हस्तक्षेप से उनकी फजीहत हुई। अब ये काम टाइम्स ऑफ इंडिया के कंवरदीप नामक पत्रकार सॉरी अफवाहकार ने किया। मगर सोशल मीडिया पर ही यूजर्स ने ही उन्हें सच्चाई का आइना दिखा दिया।

कंवरदीप ने बरेली में हो रहे सैनेटाइजेशन के कार्य की एक विडियो शेयर की। और उस पर यूपी पुलिस, बरेली ट्रैफिक को टैग करके लिखा कि आप किसे मारने की कोशिश कर रहे हैं। कोरोना को या फिर इंसानों को? कंवरदीप दावा करते हैं कि प्रवासियों को जबरन बरेली में प्रवेश देने से पहले रसायनिक पदार्थ में नहलाया जा रहा है।

अब आप ये विडियो देखेंगे और कैप्शन पढ़ेंगे तो आपका भी दिल पसीजेगा और यूपी पुलिस के प्रति गुस्सा उमड़ेगा। मगर, इससे पहले कि कंवरदीप की आधी-अधूरी जानकारी का आप शिकार हों, आपको बता दें कि जैसा वो दर्शाने की कोशिश कर रहे हैं, हकीकत उससे थोड़ी उलट है। वास्तविकता में जो विडियो में दिख रहा है, उसका उद्देश्य लोगों को सैनेटाइज करना था। मगर, जब मामले ने तूल पकड़ा तो बरेली डीएम ने इस पर जाँच के आदेश दिए।

और रही बात कवंरदीप के एंगल की, तो बता दें कि यह जाँच का आदेश जान पर खतरा मामले से संबंधित नहीं है क्योंकि इस तरह के केमिकल का कई जगहों पर प्रयोग किया जाता है। इनसे कोई हानि नहीं होती है। कई औद्योगिक विभाग भी इसे प्रयोग में लाते हैं। इसलिए जाँच का आदेश भीड़ को खुले में बैठाने को लेकर या फिर अति सक्रियता के चलते उनके साथ इस तरह के व्यवहार करने से संबंधित है न कि लोगों को डिसइंफेक्ट करने को लेकर और उनकी जान के खतरे में डालने को लेकर।

गौरतलब है कि आज कोरोना से लड़ने के लिए बड़ी तादाद में लोगों को डिसइंफेक्ट करने की प्रक्रिया का अनुसरण करना एक आवश्यकता है ताकि आगे इसे फैलने से रोका जा सके। इसके अलावा एक खास जानकारी- जिस रसायन के प्रयोग को कंवरदीप जहर समान बता रहे हैं, उसका प्रयोग पानी को डिसइंफेक्ट करने के लिए किया जाता है। मगर, जिन्हें प्रोपगेंडे को ही रफ्तार देनी है, उन्हें इन बातों से क्या सरोकार?

अमित मालवीय ने केरल का वीडियो शेयर किया और पूछा की इसे लेकर हाय-तौबा क्यों नहीं? सिर्फ इसलिए कि वहाँ अपने मतलब की सरकार है?

अब, मिर्चा गालिब नाम के ट्विटर यूजर इन्हीं तथ्यों पर कंवरदीप के अजेंडे को ध्वस्त करते हैं और विडियो से दर्शाते हैं कि कैसे डाइल्यूटेड कैल्शियम हाइपोक्लोराइट सॉल्यूशन की मदद से केबिन को और लोगों सैनेटाइज करने की प्रक्रिया की जा रही है।

यूजर, कंवरदीप की आधी जानकारी को गंभीर मामला मानते हैं और कहते हैं कि अब वाकई देश को पढ़े-लिखे पत्रकारों की आवश्यकता है। आजकल कम बुद्धि के लोग भी पत्रकार बन जाते हैं और फिर ऐसी तबाही मचाने का इंतजार करते हैं। यह एक ऐसा जिम्मेदार पेशा है, जिसे मूर्ख चला रहे हैं।

वहीं, स्पैमिंदर भारती (ट्विटर यूजर) भी कंवलदीप जैसे पत्रकारों के मंदबुद्धि होने की बात को उजागर करते हैं और कहते हैं कि सिर्फ़ थोड़ी सी सुर्खियों के लिए ये लोग पैनिक क्रिएट करते हैं। मगर ये जानने की जरूरत है कि कैमिकल सॉल्यूशन एक कीटाणुनाशक है। जिसे पूरे विश्व भर को संक्रमण रहित बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। वे अपनी बात को प्रमाणित करते हुए कई उदहारण भी देते हैं और इंडोनेशिया, चीन, तथा फिलीपिन जैसे देशों की खबरों को शेयर करते हैं।।

मजदूरों के पलायन पर केजरीवाल को केंद्र का पत्र, लिखा- लॉकडाउन लागू कराने के लिए है पूरी ताकत, फिर भी नहीं किया

कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली से प्रवासियों के भारी पलायन को लेकर उपराज्यपाल अनिल बैजल ने दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल को एक चिट्ठी लिखी है। खबरों के मुताबिक इस चिट्ठी में उन्होंने इस पलायन पर नाराजगी जताई है। वहीं इसके पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी लॉकडाउन के बीच हुए पलायन पर केजरीवाल से गहरी चिंता व्यक्त कर चुके हैं। मगर, उप राज्यपाल अनिल बैजल ने इस बार कड़े शब्दों में पत्र लिखते हुए केजरीवाल से कहा है कि लॉकडाउन को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए दिल्ली सरकार के पास सभी शक्तियाँ थीं, फिर भी ऐसा नहीं हो सका।

गौरतलब है कि इससे पहले गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया था कि गृह मंत्री अमित शाह के उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करने के बाद रविवार शाम पत्र भेजा गया। इस बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल को स्पष्ट निर्देश देने के लिए कहा गया कि किसी भी प्रवासी मजदूर के पलायन को अनुमति नहीं दी जाए। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने खुद दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल से इसको लेकर बात की।

खबरों के अनुसार, केंद्र इस बात से नाराज है कि दिल्ली सरकार ने प्रवासियों को बसों के जरिए सीमा पर छोड़ दिया। जिसके मद्देनजर गृह सचिव अजय भल्ला ने दिल्ली के मुख्य सचिव को इस मामले में लापरवाही के लिए दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को सस्पेंड करने का आदेश दिया है।

प्रवासियों की भारी भीड़ के बाद केंद्र ने राज्यों से कहा है कि वे अस्थायी शरण केंद्र बनाकर पहले 14 दिन तक इन लोगों को ‘क्वारंटाइन’ करें और इसके बाद ही उन्हें आगे रवाना करें। गृह मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि इसे पूरी तरह से टालना चाहिए था। उन्होंने कहा कि सरकार को चिंता है कि पलायन से देश को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

अधिकारी ने बताया कि दिल्ली सरकार के पास लॉकडाउन लागू कराने की पूरी छूट थी और उनके पास इससे जुड़ी सभी शक्तियाँ भी थीं। अधिकारी ने कहा कि भविष्य के लिए उप-राज्यपाल अनिल बैजल ने दिल्ली सरकार से कहा है कि वह सभी मजदूरों को सही तरीके से रखें। जरूरत पड़ने पर उन्हें शेल्टर होम में शिफ्ट किया जाए, जहाँ पर सभी मूलभूत सुविधाएँ हों। इसके अलावा बैजल ने यह भी बताया है कि केंद्र के आदेश के अनुसार लॉकडाउन के दौरान किसी के भी रुपए न काटे जाएँ और उन्हें पूरा भुगतान किया जाए।

अल्लाह के घर का दरवाजा बंद नहीं होगा, जुल्मों का नतीजा है कोरोना: मौलवी ने समझाने आई पुलिस को लौटाया

कोरोना वायरस के ख़तरे को देखते हुए कई मंदिरों ने अपने दरवाजे बंद कर लिए हैं ताकि लोगों की भीड़ न जुटे और इस महामारी का फैलाव बंद हो। कई मंदिरों ने सरकार को वित्तीय सहायता दी है तो कई समाजसेवा के माध्यम से राहत कार्य करने में लगे हुए हैं। ऐसे में एक जगह का वीडियो आया है, जहाँ पुलिस ने एक मस्जिद में जाकर मौलवी से आग्रह किया कि वो मस्जिद के माइक से कोरोना के ख़तरों के प्रति लोगों को आगाह करें। पुलिस का कहना था कि मस्जिद के अनाउंसमेंट को काफ़ी लोग सुनते हैं, ऐसे में इससे लोग जागरूक होंगे।

जब मौलवी से पुलिस ने कोरोना के ख़तरों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मस्जिद से अनाउंस करने को कहा तो मौलवी ने पहले तो दावा किया कि वो अपने स्तर से जो सही समझ रहा है, वो कर रहा है। फिर उसने उलटा पुलिस से ही सवाल दागा कि आपलोग 15-20 आदमी एक साथ आए हैं, अगर यहाँ हम भी भीड़ जुटा लें तो क्या परेशानी है? उसने दावा किया कि अगर आपलोगों को कोरोना नहीं होगा तो हमलोगों को भी नहीं होगा। वो उलटा पुलिस-प्रशासन के लोगों को ही सिखाता रहा।

प्रशासन का कहना था कि मौलवी माइक से अनाउन्स करें कि सभी लोग अपने घरों से ही अल्लाह को याद करें और नमाज अदा करने के लिए मस्जिद में न आएँ, ताकि भीड़ न जुटे। इटली तक का भी उदाहरण दिया गया, जहाँ इस वैश्विक महामारी ने तबाही मचाई है। मौलवी ने दावा किया कि पूरे साल तो नमाज होती है, जब तब कण्ट्रोल हो जाता है तो अब कैसे नहीं होगा? साथ ही उसने मस्जिद आने वाले लोगों को रोकने से भी इनकार कर दिया।

पुलिस ने मौलाना को समझाया कि पहले कुछ दिनों में तो किसी को कोरोना हो भी तो इसके लक्षण पता नहीं चलते, इसीलिए ये पता करना मुश्किल हो जाता है कि कौन संक्रमित है और कौन नहीं। मौलवी ने दावा किया कि अल्लाह का घर बंद नहीं होगा और मस्जिद में आने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं रोका जाएगा। साथ ही मौलाना के साथियों ने भी दावा किया कि मौलाना लगातार लोगों में जागरूकता फैलाते हुए कह रहे हैं कि वो मोहल्ले में इकट्ठे न हों, भीड़ न जुटाएँ। उसने दावा किया कि वो डेटोल वगैरह से सफाई भी करवा रहे हैं।

मौलाना ने प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर ज़रूरत से ज्यादा बंद का इस्तेमाल हुआ तो वो सबके लिए भारी हो जाएगा। मौलाना ने यह भी दावा किया कि कमजोरों पर जो जुल्म हुआ है, वही सब पर भारी पड़ रहा है। उसने पुलिस का सहयोग करने से इनकार कर दिया और उन्हें मस्जिद से बेरंग लौटना पड़ा।

रवीश है खोदी पत्रकार, BHU प्रोफेसर ने भोजपुरी में विडियो बनाके रगड़ दी मिर्ची (लाल वाली)

प्रोपेगेंडा पत्रकार रवीश कुमार ने दूरदर्शन पर रामायण का फिर से प्रसारण किए जाने पर विरोध जताया है। बीएचयू के प्रोफेसर कौशल किशोर मिश्र ने उनके इस प्रोपेगेंडा का उन्हीं की भाषा में मुँहतोड़ जवाब दिया है। चूँकि रवीश कुमार ने भी भोजपुरी में वीडियो बना कर प्रोपेगेंडा फैलाया था, प्रोफेसर किशोर ने भी भोजपुरी में उन्हें जवाब देते हुए पूछा कि रामायण पर काहे बिनबिनाएल बानी? मतलब, आप रामायण के कारण क्यों चिढ़े हुए हैं? प्रोफेसर ने कहा कि रामायण दिखाया जा रहा है तो इस पर रवीश कुमार को मिर्ची क्यों लग रही है? उन्होंने समझाया कि भारत की जनसंख्या 130 करोड़ है, क्या सभी सड़क पर ही हैं?

उन्होंने कहा कि इतना बड़ा लॉकडाउन का निर्णय लिया गया है, ऐसे में सरकार को समय दिया जाना चाहिए ताकि समुचित व्यवस्था हो सके, इसमें बिलबिलाने की क्या ज़रूरत है? प्रोफेसर ने कहा कि वो जनता हैं और उन्होंने रामायण दिखाने की माँग की है। रामायण, महाभारत और चाणक्य जैसे सीरियल टीवी पर बार-बार दिखाए जाने चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि जब लॉकडाउन के कारण लोग अपने घरों में बैठे हुए हैं, ऐसे में उन्हें मनोरंजन के लिए कुछ न कुछ तो चाहिए होगा न?

उन्होंने रवीश को समझाया कि आप प्रकाश जावड़ेकर और अन्य पत्रकारों को गाली क्यों दे रहे हैं? उन्होंने कहा, “देश भर में हजारों पत्रकार हैं, क्या वो सभी आपके हिसाब से बुरे हैं? क्या एक आप ही पत्रकार बचे हैं पूरे भारत में? कुल रवीश कुमार ही पत्रकार हैं?” प्रोफेसर कौशल किशोर ने रवीश कुमार को सलाह देते हुए कहा कि वो थोड़ी सकारात्मक बातें भी करें। जब प्रधानमंत्री देश की जनता की परेशानी के लिए क्षमा माँग रहे हैं, ऐसे में रवीश क्या कहते हैं कि देश की सारी जनता मर जाए? उन्होंने पूछा कि रवीश आखिर बाकी सभी पत्रकारों को गालियाँ क्यों बकते रहते हैं?

प्रोफेसर ने कहा कि रवीश कुमार को इस समय देश का साथ देना चाहिए। जबकि रवीश अभी अमेरिका और जर्मनी से तुलना करने में लगे हैं। और सच्चाई यह है कि भारत की जनसंख्या 130 करोड़ है और यहाँ तुलनात्मक रूप से कम क्षति हुई है। उन्होंने रवीश से कहा कि वो खूब प्रश्न पूछें लेकिन सुझाव भी दें क्योंकि सिर्फ़ सवाल पूछना ही एक पत्रकार का कार्य नहीं है बल्कि समस्या का समाधान करना भी एक पत्रकार का काम है। उन्होंने रवीश से अपील करते हुए कहा कि वो अपनी भाषा बदलें और देश का साथ दें, देश को बचाने में योगदान दें।

BHU के प्रोफेसर कौशल किशोर ने रवीश कुमार की ली क्लास

प्रोफेसर कौशल किशोर ने कहा कि बजाए सुझाव देने के, रवीश कुमार ऊटपटांग बातें कर रहे हैं। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस देश को बचाने में लगे हैं, तब रवीश को भी अपनी तरफ से कोशिश करनी चाहिए। ऊपर संलग्न किए गए वीडियो में आप भी देख सकते हैं कैसे प्रोफेसर कौशल किशोर ने रवीश कुमार के प्रोपेगंडा का भोजपुरी भाषा में अच्छी तरह से सभ्य भाषा का प्रयोग करते हुए जवाब दिया है।

भीड़ में छींक कर कोरोना फैलाने के लिए उकसाने वाला मुजीब मोहम्मद निकला कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक का फैन

बेंगलुरु के इन्फोसिस में काम करने वाला मुजीब मोहम्मद, जिसे पुलिस ने पिछले दिनों गिरफ्तार किया था, वो कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक का बड़ा प्रशंसक निकला। बता दें कि पुलिस ने मुजीब को कोरोना वायरस फैलाने के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। डेक्कन हेराल्ड की खबर के मुताबिक मुजीब ने अपनी फेसबुक पोस्ट के माध्यम से लोगों से अपील की थी कि आओ घर से बाहर निकलो, कोरोना को फैलाने में हाथ मिलाएँ और पब्लिक के बीच मुँह खोल कर छींकें जिससे कि यह कोरोना वायरस और फैल सके। इसके बाद उसे कंपनी से भी निकाल दिया गया।

मुजीब के खिलाफ आईपीसी की धारा 153A, 505, 270 और 109 के तहत कार्रवाई की गई। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि मुजीब मोहम्मद ने सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक को फॉलो कर रखा है, वो उसके भाषण को देखता और उसे लाइक और शेयर भी करता है। पुलिस अधिकारी ने दावा किया कि ऐसे पोस्ट करना उसकी आदतों में शुमार है, जो अन्य समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करती है। मुजीब मोहम्मद ने अपनी एक अन्य फेसबुक पोस्ट में लिखा है, “मेरी बंदूक कुत्तों को मारने के लिए तैयार है।”

बता दें कि हाल के दिनों में जाकिर नाइक कई कट्टरपंथियों का प्रेरणास्रोत है। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने पिछले साल अक्टूबर में कहा था कि संदिग्ध आईएसआईएस लिंक के लिए भारत में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा गिरफ्तार किए गए 127 लोगों में से अधिकांश आतंकवादी कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक के भाषणों से प्रेरित थे, जो कि फिलहाल मलेशिया में रह रहा है।

मुजीब मोहम्मद के पोस्ट को लेकर ट्विटर यूजर्स की प्रतिक्रिया बेहद आक्रामक और गुस्से से भरी थी। कुछ लोगों ने इसे जहाँ जिहाद का एक फॉर्म बताया, तो कुछ ने इसके जरिए मीडिया गैंग की पुअर हेडमास्टर संस थ्योरी को याद किया। लोगों ने इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की थी।

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस को लेकर इस तरह की नफरत फैलाने वाली बात कहने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी चरमपंथी इस्लामिस्ट्स राणा अयूब ने भी कोरोना के संबंध में पूरे देश को बद्दुआ देते हुए कहा था कि जो देश इतना नैतिक रूप से पतित हो चुका हो उसका कोरोना भी क्या करेगा? जिस पर मीडिया गैंग की भी तरफ से काफी तीखी प्रतिक्रिया आई थी। लेकिन बरखा दत्त की जिहादिनों ने जिसका समर्थन किया था।

21 साल के भारतीय युवक का चीनी सेना ने किया अपहरण: अंतरराष्ट्रीय नियमों की उड़ाई धज्जियाँ, भारतीय एजेंसियाँ सख्त

अरुणाचल प्रदेश की द तागिन कल्चरल सोसाइटी ने राज्य के गवर्नर को दिए मेमोरेंडम में आरोप लगाया है कि राज्य के अपर सुबनसिरी जिले में मैकमोहन लाइन के पास असपिला सेक्टर से 21 साल के युवक को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने अगवा कर लिया है। तोगले सिंग्कम और उसके दोस्त गाम्शी चादर और रोन्या नाडे तागिन समुदाय के ना कबीले से सम्बद्ध जमीन से परम्परागत जड़ी बूटी और मछली पकड़ने गए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तागिन सोसाइटी ने राज्यपाल को दिए अपने मेमोरेंडम में कहा- 19 मार्च की दुर्भाग्यशाली सुबह जब तीनों दोस्त मछली पकड़ने में व्यस्त थे, चीनी सैनिकों ने उन्हें घेर लिया और बंदूख की नोंक पर तोंगले का अपहरण कर लिया, जबकि बाकी दोनों भागने में कामयाब रहे। मेमोरेंडम में कहा गया कि उसने वास्तविक नियंत्रण रेखा या कोई भी अंतर्राष्ट्रीय रेखा नहीं लाँघी थी, जबकि चीनी सैनिक इस पार घुस कर आए और अमानवीय तरीके से उसे अपह्रत कर के ले गए, जो अंतर्राष्ट्रीय नियमों की धज्जियाँ उड़ाना है।

याद रहे कि मैकमोहन लाइन ही तिब्बत को अरुणाचल प्रदेश से अलग करती है। और जिस प्रकार चीन दूसरे देशों के क्षेत्रों को अपना कहने में माहिर है उसी प्रकार वह भारत के इस उत्तर पूर्वी राज्य को भी अपना बताता रहता है। मेमोरेंडम के अनुसार इस अगवा किए गए युवक के दोस्तों ने लौट कर इस घटना की जानकारी इसके परिजनों को दी, जिसके बाद उन्होंने 23 मार्च को नाचो पुलिस स्टेशन में जाकर इसकी रिपोर्ट लिखवाई।

इस मामले पर सुबनसिरी के एसपी तारु गूसर ने पीटीआई को बताया है कि मामले की छानबीन के लिए नाचो थाने के इंचार्ज को घटना स्थल पर भेजा गया है। वहीं सेना के पूर्वी कमाण्ड के कोलकाता स्थित मुख्यालय में मौजूद अधिकारियों ने बताया कि वे उस क्षेत्र में तैनात सैन्य कर्मियों से इस मामले की जानकारी जुटा रहे हैं। मेमोरेंडम मिलने की पुष्टि गवर्नर कार्यालय ने कर दी है।

तागिन कल्चरल सोसाइटी ने गवर्नर से प्रार्थना की है कि वो इस मामले को केंद्र के सामने उठाएं और शीघ्रतापूर्वक सिंग्कम की रिहाई सुनिश्चित करें। यह भी कहा गया है कि तागिन समुदाय सीमावर्ती इलाकों में रहता है, जिसका जीवन इस तरह की घटनाओं से बेहद दुष्प्रभावित हो जाता है। यह कथित अपहरण ऐसे समय हुआ है जब पूरी दुनिया चीनी वायरस से बेहाल हो रखी है। जबकि विश्व का ध्यान अभी भी कोरोना संक्रमण पर है, चीन खराब चिकित्सा उपकरण बेंचने और अमानविक गतिविधियों को बढ़ाने में लगा है।

लाल सलाम की फट गई डफली, जिस अंबानी-अडानी को देते थे गाली… वही उद्योगपति आज कर रहे देश की मदद

वामपंथी अक्सर कॉर्पोरेट हस्तियों को गालियाँ देते हैं। यहाँ तक कि पीएम मोदी पर भी निशाना साधने के लिए अम्बानी-अडानी से उनके कथित नजदीकी संबंधों का हवाला दिया जाता है। ये सच है कि पीएम मोदी के अधिकतर कॉर्पोरेट हस्तियों के साथ अच्छे सम्बन्ध हैं क्योंकि जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तभी से वो राज्य में निवेश के लिए देश-विदेश के उद्योगपतियों के साथ बैठकें करते रहे हैं। ‘वाइब्रेंट गुजरात’ से लेकर तमाम तरह के कार्यक्रमों के जरिए उद्योगपतियों को गुजरात में निवेश के लिए बुलाया जाता था। उस दौरान नरेंद्र मोदी चीन वगैरह की भी यात्रा करते थे और वहाँ से भी बिजनेस डील हुआ करते थे।

भारत में टाटा-बिरला और अम्बानी जैसे कई ऐसे बड़े उद्योगपति हैं, जिनका परिवार दशकों से देश के विकास में योगदान देता रहा है। सरकारें बदलीं और देश पर अलग-अलग समय में कई आपदाएँ आईं, जहाँ इन लोगों ने जो भी सरकार रही, देश की मदद की है। वामपंथी कॉर्पोरेट हस्तियों का ऐसे विरोध करते हैं, जैसे उन्होंने पैसे लूट लिए हों। किसी ने अगर कोई कम्पनी खड़ी की है तो उसके पीछे उसकी मेहनत और दिमाग होता है। अगर वामपंथियों को लगता है कि अम्बानी-अडानी ने उनके पैसे लूट लिए हैं तो वो केस करें। यही लोग तो संविधान-संविधान की रट लगाते रहते हैं। वो अलग बात है कि संविधान के नियमों का पालन करते हुए बने क़ानून को नहीं मानते।

देश कोरोना वायरस के महासंकट से जूझ रहा है। रतन टाटा ने इसे अब तक का सबसे बड़ा संकट करार दिया है। देश में मरीजों की संख्या 1200 के पार हो गई है, जिनमें से 29 को अपनी जान गँवानी पड़ी है। महाराष्ट्र (215) और केरल (202) इस संक्रमण से सबसे ज्यादा जूझ रहे हैं। ऐसे समय में घर में खाली बैठे वामपंथियों के पास एक ही काम बचा है- जहाँ-तहाँ से जो भी मिले, उसकी आलोचना करते रहो और नकारात्मकता फैलाते रहो। कोई अम्बानी को गाली दे रहा है, कोई मोदी को तो कोई बीसीसीआई को।

टाटा परिवार ने इस संकट की घड़ी में 1500 करोड़ रुपए की मदद कर के देशहित में अपना योगदान किया है। ऐसा नहीं है कि उसने सिर्फ़ वित्तीय मदद देकर इतिश्री कर ली है बल्कि टाटा फाउंडेशन के लोग भी लोगों की मदद करने में लगे हुए हैं। मेडिकल कर्मचारियों के लिए उपकरणों की व्यवस्था की जा रही है क्योंकि कोरोना से लड़ने वालों का सबसे ज्यादा सुरक्षित रहना ज़रूरी है। टाटा ने 5 सूत्रीय कार्यक्रम बना कर काम शुरू कर दिया है। क्या किसी ने टाटा को इसके लिए मजबूर किया? नहीं। उन्होंने स्वेच्छा से अपने धन का देशहित में इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है। वो सिर्फ़ बकैती नहीं कर रहे।

इसी तरह रिलायंस ने कुछ ही दिनों में देश का पहला ‘कोरोना वायरस डेडिकेटेड अस्पताल’ तैयार कर दिया। अपने अन्य अस्पतालों में कोरोना के इलाज और लोगों को क्वारंटाइन करने की व्यवस्था की। ऐसे समय में वित्त से भी ज्यादा ज़रूरी संसाधन है क्योंकि देश-विदेश का व्यापार ठप्प पड़ा हुआ है। ऐसे में रिलायंस ने प्रतिदिन एक लाख मास्कों का उत्पादन करने का फ़ैसला लिया। देश भर में ग़रीबों को अलग-अलग स्थानों पर खाना खिलाने का उपक्रम भी रिलायंस द्वारा चलाया जा रहा है। हाँ, अम्बानी को गाली देने वाले ज़रूर अपने घर का एसी ऑन कर के उनके ख़िलाफ़ लेख लिख रहे होंगे।

इसी तरह आनंद महिंद्रा ने भी अपनी 100% सैलरी कोरोना से लड़ने के लिए देने का निर्णय लिया है। साथ ही उन्होंने महिंद्रा हॉलिडे रिसॉर्ट्स को क्वारंटाइन सेंटर्स के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। साथ ही वो उन छोटे व्यापारियों की भी मदद करेंगे, जिन पर इस आपदा का सबसे ज्यादा असर हुआ है। इसी तरह वेदांता लिमिटेड के अनिल अग्रवाल ने 100 करोड़ रुपए की मदद का ऐलान किया है। साथ ही उन्होंने दिहाड़ी मजदूरों की व्यथा का जिक्र करते हुए उनकी भी मदद करने की घोषणा की। इसके अलावा अल्कोहल ब्रांड ‘Diageo India’ ने 3 लाख लीटर सैनिटाइजर उपलब्ध कराने की घोषणा की। जब बाजार में सैनिटाइजरों की कमी है, ऐसे में ये मदद कारगर सिद्ध होगी। इसके सीईओ आनंद कृपालु ने बताया कि ऐसे समय में उनकी कम्पनी सैनिटाइजर की उपलब्धता के लिए दिन-रात एक कर देगी।

‘हीरो साइकल्स’ ने भी 100 करोड़ रुपए के कंटिंजेंसी फण्ड की घोषणा की है। ऐसे समय में कॉर्पोरेट जगत की हस्तियों को गाली देने वाले वामपंथी क्या कर रहे हैं? वो विदेशी पोर्टलों में लेख लिख कर उन लोगों को बदनाम कर रहे हैं, जो असल में लोगों की मदद कर रहे हैं। डफली बजाने से अगर कोरोना से लड़ाई लड़ ली जाती तो शायद आज जेएनयू के वामपंथी ब्रिगेड से ही सबसे ज्यादा डॉक्टर और वैज्ञानिक निकलते। अगर प्रोपेगेंडा पोर्टलों में लेख लिखने से कोरोना भाग जाता तो राणा अयूब, सदानंद धुमे और बरखा दत्त जैसे लोगों ने अब तक वैक्सीन का अविष्कार कर लिया होता। प्रमुख बात ये है कि अगर आप सच में देशहित में काम करने वालों का सम्मान नहीं कर सकते तो कम से कम उनका विरोध करने का अधिकार तो आपको नहीं है।

गौतम अडानी ने भी 100 करोड़ रुपए पीएम केयर्स फंड में देने की घोषणा की है। आज जब देश संकट से जूझ रहा है, तब जिसके पास जो है उससे ही मदद की जानी चाहिए, आरोप-प्रत्यारोप नहीं होना चाहिए। आपके पास संसाधन हो सकता है, वित्त हो सकता है या फिर श्रमबल हो सकता है- आप तीनों से मदद कर सकते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित कई संगठनों के लोग राहत कार्य में लगे हैं लेकिन वामपंथी चुन-चुन कर उन्हें ही गालियाँ देते रहे हैं, जिन्होंने मौका पड़ने पर देश की मदद की है, आगे बढ़ कर जनता के दुःख को मिटाने का काम किया है।

पादरी ने कोरोना को सुनाया मौत का फरमान, ईश्वरीय उपचार के लिए TV स्क्रीन छूने को बोला: देखें मजेदार Video

अमेरिका के ईसाई धर्म प्रचारक पादरी केनेथ कोपलैंड जिसे लोगों को बेवकूफ बना कर ठगने के लिए जाना जाता है, ने घोषणा की कि वुहान कोरोना वायरस को गॉड ने ‘समाप्त’ कर दिया है। एक भीड़ को सम्बोधित करते हुए कोपलैंड ने जीसस के नाम पर COVID-19 को सजा देने का ऐलान किया। हास्यास्पद रूप से कोपलैंड ने वुहान वायरस को सम्बोधित करते हुए कहा- मैं तुम्हारे खिलाफ जजमेंट देता हूँ, ऐ शैतान, ऐ विध्वंसक, ऐ हत्यारे, भाग जा यहाँ से। भाग जा इस राष्ट्र से। मैं तेरे खिलाफ निर्णय देता हूँ।

ईसाई धर्म प्रचारक केनेथ कोपलैंड ने आगे इस वायरस के लिए तुरंत वैक्सीनेशन की भी माँग की। कोपलैंड कहता है, “मैं तुम्हें अँधेरा कहता हूँ। तुमने मुझे क्रोधित किया है। जिस तरह गॉड ने ईडन के बगीचे में तुम्हारे सिर पर पैर रख तुम्हें आदेश दिया था उसी तरह मैं तुम्हें आदेश देता हूँ कि अपने पेट के बल लेट कर घिसटो। ये समाप्त हो गया। ये खत्म हो गया। और संयुक्त राज्य अमेरिका फिर से स्वस्थ और अच्छा हो गया है।”

मंच पर मौजूद कोपलैंड के सहयोगी ने इसके बाद कहना शुरू कर दिया कि कोरोना COVID-19 की रूह अब खत्म हो चुकी है। उसने कहा “अब ये मर चुका है, ये खत्म हुआ।”, जिस पर कोपलैंड ने अपनी सहमति दी। कोपलैंड का सहयोगी यहीं नहीं रुका। उसने आगे कहा कि इस वायरस ने अपनी इच्छाशक्ति खो दी है और यह अप्रासंगिक हो चुका है। जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए कोपलैंड ने अपनी घड़ी पर नजर डाली और कहा,”हाँ ठीक 12 बजे दोपहर, 29 मार्च को इस वायरस का खात्मा हो गया है।”

कोरोना वायरस को “समाप्त” कर देने के बाद वो सब एक सुर में, “ईश्वर की प्रशंसा करो, जीसस को शुक्रिया कहो” चिल्लाने लगे। जबकि वर्ल्डमीटर ( Worldometer ) के हिसाब से अमेरिका में 29 से 30 मार्च के बीच 333 नए कोरोना संक्रमण के केस सामने आए।

पहली बार ऐसा नहीं है कि कोपलैंड ने कोई अजीबोगरीब बयान दिया है। इस महीने के शुरुआत में भी उसने टेलीविजन के माध्यम से ही कोरोना वायरस को ठीक करने का दावा किया था। उसने अपने दर्शकों से कहा था कि ईश्वरीय उपचार पाने के लिए बस अपनी टेलीविजन स्क्रीन को ही छू लें।

यूएस बेस्ड मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कोपलैंड एक धोखेबाज और फ्रॉड है, जो जादू के जरिए उपचार करने का दावा करता है। इस पर ये भी आरोप है कि इसने 2006 के हैती भूकंप पीड़ितों के लिए फंडिंग करने का झूठ कहा था। ये कोरोना वायरस को लेकर भी लगातार भ्रामक जानकारियाँ फैला रहा है।

सैफ के कारण पत्नी, उसका भतीजा, साली समेत 10 लोग हुए संक्रमित: बिहार में बढ़ा कोरोना के सामुदायिक संक्रमण का ख़तरा

कतर से लौटे मुंगेर के जिस 38 वर्षीय युवक सैफ की एम्स पटना में गत 22 मार्च को मौत हुई थी, उसके संपर्क में आने वालों में 10 लोग अब तक कोरोना संक्रमित निकल चुके हैं। इन कोरोना पॉजिटिव मामलों में सैफ की पत्नी, उसका भतीजा और साली के अलावा मुंगेर स्थित अस्पताल के 4 और पटना स्थित शरणम् अस्पताल के भी तीन कर्मचारी शामिल हैं, जिन अस्पतालों में सैफ का इलाज हुआ था।

सैफ के मामले में हुई घोर लापरवाही के कारण पहले से ही इस बात की आशंका बनी हुई थी कि कहीं ये बिहार में सामुदायिक संक्रमण की वजह न बन जाए। अब जबकि सैफ के सम्पर्क में रहे 10 लोगों के कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि हो चुकी है, बिहार के शासन-प्रशासन के माथे पर बल पद चुके हैं। इन नए मामलों के आने के बाद से वहाँ का स्वास्थ्य विभाग अब इस जाँच-पड़ताल में लगा है कि इन 10 कोरोना संक्रमित लोगों के सम्पर्क में कौन-कौन आया था। जाँच का दायरा बढ़ता जा रहा है। हालाँकि, इन 10 संक्रमित व्यक्तियों के सम्पर्क में आए लोगों में से अब तक जितने व्यक्तियों की जाँच करवाई गई है वे सभी कोरोना निगेटिव निकले हैं।

कल रविवार को पटना के उस शरणम अस्पताल की महिला कर्मी की माँ, बहन तथा दो भाइयों के नमूने जाँच को लिए गए, उसके परिवार के अन्य सदस्यों के नमूने जाँच के लिए सोमवार को लिए जाएंगे। याद रहे कि इस शरणम अस्पताल में ही सैफ को मुंगेर से लाकर भर्ती करवाया गया था। इस बीच मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक तरफ जहाँ बिहार में कोरोना के सामुदायिक संक्रमण की आशंकाएँ बढ़ती जा रही हैं, वहीं लोगों की लापरवाही और गैर जिम्मेदार रवैये में कोई परिवर्तन आता नहीं दिख रहा। यहाँ तक कि कोरोना से संक्रमित व्यक्ति उन लोगों की भी ठीक-ठीक जानकारी नहीं दे रहे जिनसे बीते दिनों वे सम्पर्क में आए थे।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक जिन 15 व्यक्तियों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है वे भी जाँच पड़ताल में सहयोग नहीं कर रहे जिस कारण स्वास्थ्य विभाग को अन्य संभावित कोरोना संक्रमित व्यक्तियों तक पहुँचने में काफी मुश्किलें आ रही हैं। बतौर उदाहरण पटना के जिस युवक में कोरोना का संक्रमण पाया गया था उसके परिवार के सदस्यों के नमूने तुरंत एकत्र कर लिए गए थे लेकिन उसके सम्पर्क में रहे दूसरे 6 लोगों को ढूंढ़ने में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को पाँच दिन लग गए। जाहिर है यदि इनमें से कोई कोरोना पॉजिटिव निकला तो वह बीते दिनों कितनों से मिला होगा!!

पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के आइसोलेशन वार्ड में रविवार को आठ नए कोरोना संक्रमित आशंकितों को भर्ती किया गया। वर्तमान में इस अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में कुल 22 लोग भर्ती हैं। इसके अलावा सात लोगों के नमूने जाँच के लिए भेजे गए हैं। देर से आने के कारण एक आशंकित का नमूना सोमवार को जांच के लिए भेजा जाएगा। इसी तरह पटना के इंदिरा गाँधी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के वायरोलॉजी लैब में अब तक 64 नमूनों की जाँच की गई जिनमें से 4 में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है।

लॉकडाउन के बीच बमबारी: वार्ड पार्षद शम्स इकबाल और आलम अंसारी के खिलाफ FIR दर्ज

एक तरफ जहाँ पूरा देश कोरोना वायरस के महामारी से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ सोमवार (मार्च 30, 2020) को कोलकाता में दो वार्ड पार्षदों के खिलाफ मापीट करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। जानकारी के मुताबिक शहर के वार्ड नंबर 134 और 137 की सड़कों पर पूरी रात तक भयंकर लड़ाई चली। जब मामला काफी आगे बढ़ गया तो फिर स्थानीय लोगों ने मजबूरन इसकी शिकायत पुलिस से की। जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की।

कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि वार्ड नंबर 134 के पार्षद शम्स इकबाल और वार्ड नंबर 137 के पार्षद रहमत आलम अंसारी के खिलाफ मारपीट और लॉकडाउन का उल्लंघन करने का मामला दर्ज किया गया है। इन पार्षदों के समर्थकों को एक-दूसरे पर बमबारी करते और यहाँ तक कि गाली-गलौज करते हुए भी देखा गया था।

पुलिस ने बताया कि हिंसा के सिलसिले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है और स्थिति अब शांतिपूर्ण है। जब भी चुनाव का समय नजदीक होता है, अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र में हिंसा होते हुए पाया गया है। हालाँकि यह काफी चिंताजनक घटना है, क्योंकि ये ऐसे समय में हुआ है, जब पूरा देश कोरोना जैसी महामारी से निपटने के लिए प्रयासरत है। देश में 47 नए केस सामने आने के बाद अभी तक कुल कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 1071 हो गई है, जबकि 29 लोगों की मौत हो चुकी है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (मार्च 24, 2020) को देशभर में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन की घोषणा की। लॉकडाउन का ऐलान करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से जहां हैं वहीं रहने की अपील की थी। पीएम मोदी ने कहा था कि इस खतरनाक वायरस का अभी तक कोई इलाज नहीं खोजा गया है। इसलिए लॉकडाउन और एक दूसरे से दूरी ही सबसे सफल उपाय है। इसके बावजूद कई लोग ऐसे हैं जो सब कुछ जानकर भी अनसुना कर रहे हैं। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इसे रोकने के लिए अपनी भागीदारी निभानी होगी। वरना वो समाज का नुकसान तो करेंगे ही, खुद को भी नहीं बचा पाएँगे।