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संकट की इस घड़ी में Pak हिंदुओं की कौन कर रहा मदद? RSS के कार्यकर्ता लगे हैं सेवा में, देखें तस्वीरें

लॉकडाउन के दिनों में जब काम और मेहनताना की कमी के कारण हर मजदूर अपने राज्य में पलायन करने को एक विकल्प मान रहा है। वहीं, पाकिस्तान से आए हिंदू वो बेसहारों का जत्था है, जो अपनी आस सिर्फ़ सरकार से लगाए बैठी है। ऐसे समय में जब सीएए के कारण सेकुलरों ने उन्हें भारत का निवासी मानने से पूरी तरह से खारिज कर दिया और उन पर ध्यान देना भी उचित न समझा, उस समय आरएसएस के सदस्य इनके लिए मददगार साबित हुए। 

अब आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने किस तरह पाकिस्तानी हिंदुओं से मिलकर उनका हाल जाना, उन्हें राशन मुहैया कराया, इसी दरियादिली और सेवाभाव की कुछ तस्वीरें नीचे मौजूद हैं। ये सभी तस्वीरें आदर्श नगर की हैं।

राशन देते आरएसएस के सदस्य
मुहैया कराया गया राशन
राशन
राशन लेने के लिए लगी लाइन
राशन देते आरएसएस के सदस्य

गौरतलब है कि आरएसएस इस समय सिर्फ़ पाकिस्तानी हिंदुओं को ही नहीं बल्कि जगह-जगह अपनी सेवा गरीबों को प्रदान कर रही है। पिछले दिनों स्वंयसेवकों ने जनता के बीच जाकर उन्हें सुरक्षा के लिए जागरूक किया था और उन्हें मास्क-टोपी मुहैया कराया था। इसके बाद उन्होंने लॉकडाउन के कारण पैदा हुई परेशानी को खत्म करने के लिए खाद्य सामग्री वितरित करने का भी काम किया और पलायन करने वालों में 10 लोगों को समझा-बुझा कर उनके स्थान पर ही रोके रखने में कामयाब हुए। आरएसएस ने आदर्श नगर के अलावा नया गाँव में भी लद्दाखी छात्रों को 200 किलो आटा पहुँचाकर मदद की है। असम में भी ये कार्य जारी है और मुंबई में भी इस आपदा से लड़ने के लिए आरएसएस प्रबंध करने में जुटा है।

कॉन्ग्रेस विधायक के खिलाफ FIR दर्ज, मुफ्त राशन देने के नाम पर भीड़ इकट्ठा करने का आरोप

कोरोना वायरस की चपेट में आने से लोगों को बचाने के लिए पीएम मोदी ने देश भर लॉकडाउन किया है। वो लगातार लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग की अपील कर रहे हैं, लेकिन कई लोग ऐसे हैं जो सब कुछ जानकर भी अनसुना कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहाँ बिलासपुर कॉन्ग्रेस विधायक शैलेष पांडेय ने धारा 144 लागू होने के बावजूद भीड़ को इकट्ठा किया। जिसके बाद पुलिस ने सरकारी आदेश का उल्लंघन करने के मामले में कॉन्ग्रेस विधायक शैलेश पांडे के खिलाफ FIR दर्ज कर लिया है। उन्होंने बिलासपुर में मुफ्त राशन देने की घोषणा की जिसके बाद उनके घर के बाहर भीड़ इकट्ठा हो गई।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ओपी शर्मा ने कहा, “हमें जानकारी मिली थी कि बड़ी संख्या में लोग आवश्यक वस्तुओं को लेने के लिए विधायक के आवास पर एकत्र हुए हैं। वहाँ पर लगभग एक हजार लोग थे। यह राज्य सरकार द्वारा लगाई गई धारा 144 का उल्लंघन है। भारतीय दंड संहिता की धारा 188 और 279 के तहत कार्रवाई की जाएगी।”

कोरोनोवायरस के प्रसार को रोकने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य में धारा 144 लगाई हुई है। अपने ऊपर लगे आरोपों पर सफाई देते हुए पांडे ने कहा, “जब मैं अपने आवास पर पहुँचा तो वहाँ बहुत बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा थी। मैंने पुलिस को फोन करके भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कहा। मैं बस जरुरतमंद लोगों की मदद करने की कोशिश कर रहा था, इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उस वक्त पुलिस ने भीड़ को रोका क्यों नहीं? यह अपराध कैसे हो सकता है? मैंने लोगों को आने के लिए नहीं कहा था।”

विधायक का कहना है कि लोग वहाँ पर इसलिए आए क्योंकि कर्फ्यू में ढील दी गई। पुलिस को लोगों को रोकना चाहिए था। उन्होंने इस घटना के पीछे भाजपा का हाथ होने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि पुलिस ने यह कार्रवाई क्यों की? दरअसल लॉकडाउन के बीच विधायक शैलेष पांडेय लोगों की मदद के लिए खाना बाँट रहे थे, जिससे उनके आवास पर भारी भीड़ एकत्रित हो गई। खाना वितरित करते समय सोशल डिस्टेंसिंग का भी ख्याल नहीं रखा गया। इसीलिए सिविल लाइन पुलिस ने मौके पर पहुँच कर उन पर धारा 279 और 188 के तहत केस दर्ज कर लिया।

यह सच है कि लॉकडाउन का सबसे बुरा असर गरीबों और दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा है। इसके बावजूद सोशल डिस्टेंसिंग की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। सरकार उनके लिए सारी सुविधाएँ उपलब्ध करवा रही है। ऐसे हालात में कॉन्ग्रेस विधायक लोगों को डोर-टू-डोर सर्विस दे सकते थे। इसके अलावा जो भी लोग इकट्ठा हुए थे उनको एक मीटर की दूरी बनाकर राशन बाँटा जा सकता था। कोरोना वायरस जैसी खतरनाक बीमारी, जिसका अभी तक कोई इलाज नहीं निकला है, समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इसे रोकने के लिए अपनी भागीदारी निभानी होगी। वरना वो समाज का नुकसान तो करेंगे ही, खुद को भी नहीं बचा पाएँगे।

मोतीलाल नेहरू ने अपने पास बिठाकर लिखवाई थी तुलसीदास से रामचरितमानस, दिग्विजय सिंह की जानकारी अधूरी!

अभी इस घटना को बहुत समय नहीं हुआ है, जब हमने आपके सामने फैक्ट चेकर वेबसाइट फॉल्ट न्यूज़ से सत्यापित करने के बाद यह रहस्यमयी खुलासा किया था कि स्वयं श्री जवाहरलाल नेहरू ने ही आजादी के दौरान बाहुबली रॉकेट की छुच्छी में आग लगाई थी। इस खुलासे के ठीक एक साल बाद आज हम आपके सामने प्रसिद्ध ग्रन्थ रामायण के बारे में एक बड़ा तथ्य लेकर आए हैं, जिसके लिए समस्त राष्ट्र वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का आभारी है।

दूरदर्शन चैनल पर रामायण धारावहिक के पुनः प्रसारण के बाद लोकप्रिय नेता दिग्विजय सिंह ने आदत से मजबूर होकर ट्वीट कर बताया कि रामानंद सागर ने यह धारावहिक तत्कालीन प्रधानमंत्री और राहुल गाँधी के स्वर्गीय पिता राजीव गाँधी के कहने पर बनाया था, लेकिन यह जानकारी अधूरी है। दअरसल दिग्विजय सिंह यह तथ्य सबके सामने रखना भूल गए कि रामचरितमानस गोस्वामी तुलसीदास को पंडित जवाहरलाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू ने अपने पास बिठाकर लिखवाई थी।

कुछ फैक्ट चेकर्स अभी भी रामचरितमानस की उस प्रति की तलाश में हैं, जो मोतीलाल नेहरू ने स्वयं तुलसीदास से लिखवाई थी किन्तु कोरोना वायरस के कारण देशभर में चल रहे लॉकडाउन से घरों में कैद होने की वजह से फैक्ट चेकर समुदाय उसे ढूँढ पाने में नाकामयाब रहा है।

जब हमने दिग्विजय सिंह के ट्वीट का ‘रिवर्स फैक्ट’ चेक किया तो पाया कि उन्होंने अमुक कारणों से मोतीलाल नेहरू के योगदान को राजीव गाँधी के योगदान से कम करने के लिए यह तथ्य सार्वजनिक नहीं किया।

हनुमान नहीं बल्कि जवाहर को याद दिलाया था जामवंत ने भूला हुआ बल

मोतीलाल नेहरू ने ही गोस्वामी तुलसीदास को उन सभी जगहों के बारे में बताया, जहाँ-जहाँ भगवान राम अपने वनवास के दौरान गए थे। मोतीलाल नेहरू ने अपनी एक अप्रकाशित जीवनी में इस बात का जिक्र किया था कि वास्तव में जामवंत ने समुद्र किनारे जिस व्यक्ति को उनका बल याद दिलाया था, वह रामभक्त हनुमान नहीं बल्कि मोतीलाल नेहरू के पुत्र जवाहरलाल नेहरू थे। इसके बाद ही वो एडविना माउण्टबेटन के साथ क़्वालिटी समय बिताने के बजाए स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े थे।

मोतीलाल नेहरू की इस अप्रकाशित जीवनी में और भी कई बड़े खुलासे होने बाकी थे लेकिन इसके प्रकाशित न होने के कारण यह सामने नहीं आ सकी और ये राज भी उन्हीं के साथ चले गए। जिस कारण दिग्विजय सिंह नेहरू भक्तिधारा के ज्यादा गीत नहीं गा सके।

मारीच नहीं था स्वर्ण मृग

उल्लेखनीय है कि मोतीलाल नेहरू के नेतृत्व में तुलसीदास द्वारा लिखी गई इस रामचरितमानस में यह भी खुलासा किया गया है कि रावण ने जिस स्वर्ण मृग को सीता माता के पास भेजा था, वह मारीच नहीं बल्कि दिग्विजय सिंह नाम का कोई असुर सेनापति था, जिसका आभास होने पर ही भगवान राम ने उसे असली तीर मारा था।

जर्मनी के वित्तमंत्री ने की आत्महत्या, मुंबई के डॉ आलीम ने पूछा – इंडियन FM किधर है? कई कट्टरपंथियों ने दिया साथ

अपने देश की अर्थव्यवस्था से परेशान होकर और कोरोना संकट को देखते हुए अनिश्चित भविष्य की चिंताओं के कारण जर्मनी के वित्त मंत्री के आत्महत्या कर लेने की खबर वाकई झकझोर देने वाली है। सोशल मीडिया पर कल जब ये खबर आई कि जर्मनी के हेस प्रांत (Hesse region) के वित्त मंत्री थॉमस शेफर ने सुसाइड कर ली है, उस समय सब लोग सकते में रह गए। हर किसी के मन में उन्हें लेकर बहुत सवाल उठे। किसी ने उन्हें निराश मन के साथ श्रद्धांजलि दी, तो किसी ने इसे गलत अंत बताया। मगर, इसी बीच एक जिहादी मानसिकता ने इस खबर पर भी अपने भीतर के जहर को परोस दिया और आत्महत्या की खबर पर पूछ डाला कि भारतीय वित्त मंत्री कहाँ हैं?

देश में रहकर वरिष्ठ पद पर आसित एक नेता को लेकर ऐसी टिप्पणी करने वाले ‘जिहादी’ का नाम आलीम सिद्दकी है। आलीम पेशे से खुद को डॉक्टर लिखता है और है भी। लेकिन अफसोस, मानसिकता बिलकुल कट्टरपंथियों वाली है। एक देश के वित्त मंत्री की मौत पर ऐसा ट्वीट करना और उनके समकक्ष भारतीय वित्त मंत्री को रख कर आत्महत्या (परोक्ष रूप से) के लिए सवाल पूछना – उसकी इसी मानसिकता का परिचायक है। 

डिएक्टिवेट ट्विटर अकॉउंट

यहाँ बता दें कि आलीम ने एनडीटीवी के ट्वीट पर अपनी ये इच्छा जाहिर की थी। लेकिन, जैसे ही अन्य यूजर्स ने उसे इस पर घेरना शुरू किया और उसके ट्वीट का स्क्रीनशॉट वायरल होना शुरू हुआ, उसने फौरन अपना अकॉउंट डिएक्टिवेट कर दिया और मुजरिमों की तरह ट्विटर से फरार हो गया।

डॉ आलीम सिद्दकी का लिबरेट पर अकॉउंट

ट्विटर अकाउंट डिएक्टिव करके वो सोचा कि मुसिबत टल गई, ईज्जत बच गई। लेकिन तकनीकी रूप से मूर्ख डॉक्टर को गूगल पर मौजूद अपने अन्य अकाउंट की जानकारी शायद नहीं थी। जैसे लिंक्डइन और लिबरेट पर, जहाँ इस ऑर्थोपेडिक सर्जन की सारी जानकारी मौजूद है।

आलीम के अलावा एनडीटीवी के ट्वीट पर कुछ और भी कट्टरपंथी लोग अपनी जेहादी मानसिकता का प्रमाण देते दिखाई पड़े। एक अबरार नाम का यूजर भी आलीम की तरह लिखता है, “अपना टाइम कब आएगा?? अपने वाले का आइ मीन।”

वहीं इमरान अशरफ नाम का यूजर जो खुद को प्राउड इंडियन और सेकुलर बताता है, वो इस खबर को पढ़कर लिखता है कि हमारा वित्त मंत्री तो हमें मार डालेगा।

इसी तरह आसिफ तारिक नाम का यूजर तो साफ-साफ लिखता है कि अब ये समय निर्मला ताई का है कि वो इस दुनिया को छोड़ दें।

इसके बाद सदफ खानुम इस ट्वीट पर पूछती हैं कि अपना फाइनेंस मिनिस्टर कहाँ है और आबिद खान लिखता है कि हमारे वित्त मंत्री को इससे सीखना चाहिए।

अब सोचिए, जहाँ इस मानसिकता के लोग ऐसी संकट की घड़ी में भी अपनी नफरत परोसने से बाज नहीं आते हों, वहाँ पर आलीम जैसों के पद और शिक्षा पर क्यों न सवाल उठे। सोशल मीडिया पर इस समय आलीम के ख़िलाफ़ एक्शन लेने की माँग जोर-शोर से हो रही है।

लोग उसके मरीजों का रिव्यू भी शेयर कर रहे है और बता रहे हैं कि कैसे उसी के मरीज उसे उसके घटिया बर्ताव के लिए दुत्कारते हैं और कहते हैं कि उसे अपने मरीजों से बात तक करनी नहीं आती।


2 IAS अधिकारी निलंबित, 2 को कारण बताओ नोटिस: दिल्ली लापरवाही मामले में गृह मंत्रालय की कड़ी कार्रवाई

कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन के दौरान दिल्ली में लापरवाही बरतने पर केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने चार नौकरशाहों पर कार्रवाई की है। इनमें से दो अधिकारियों को निलंबित और दो को कारण बताओ नोटिस दिया गया है। इन नौकरशाहों पर आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत बनाए गए आपतकालीन दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने और लॉकडाउन के दौरान इस अधिनियम को लागू करने में गंभीर खामियों के पाए जाने की वजह से कार्रवाई की गई है।

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक अतिरिक्त मुख्य सचिव (परिवहन) और प्रधान सचिव (वित्त) को त्वरित प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। ये डिविजनल कमिश्नर का पद भी संभालते थे। इसके अलावा अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह एवं भूमि इमारत) और सीलमपुर के सब डिविजनल मेजिस्ट्रेट को कारण बताओ नोटिस दिया गया है। मंत्रालय का कहना है कि यह अधिकारी प्रथम दृष्टया सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम रहे हैं।

गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार के चार अधिकारियों के खिलाफ कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए कर्तव्यों के निर्वहन में खामियाँ पाए जाने के चलते अनुशासनात्मक कार्यवाही की है।

गृह मंत्रालय ने अपने एक आदेश में कहा है कि यह पाया गया कि ये अधिकारी कोरोना वायरस के प्रसार की रोकथाम के संबंध में आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत गठित राष्ट्रीय कार्यकारी समिति के अध्यक्ष द्वारा जारी निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार थे, लेकिन वो ऐसा करने में नाकाम रहे हैं। ये अधिकारी कोरोना वायरस से निपटने के लिए लॉकडाउन प्रतिबंध के दौरान सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहे हैं।

गृह मंत्रालय ने जिन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है, उनमें अतिरिक्त मुख्य सचिव (परिवहन) रेणु शर्मा और प्रधान सचिव (वित्त) राजीव वर्मा शामिल हैं। आदेश में कहा गया है कि ये अपने दायित्व को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाने में विफल रहे। इसके साथ ही इनके खिलाफ जुर्माना लगाने पर भी विचार किया जा रहा है।

बता दें कि केंद्रीय कैबिनेट सचिव और केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने लॉकडाउन के दौरान हो रहे उल्लंघन को लेकर शनिवार की देर शाम और आज सुबह राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशक के साथ लगातार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करके आवश्यक दिशा निर्देश दिए थे। दिशा निर्देशों में कहा गया था कि जिले के डीएम और एसपी को इन निर्देशों के पालन के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार बनाया जाना चाहिए जो आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जारी किए गए हैं।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (मार्च 24, 2020) को देशभर में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन की घोषणा की। लॉकडाउन का ऐलान करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से जहां हैं वहीं रहने की अपील की थी। पीएम मोदी ने कहा था कि इस खतरनाक वायरस का अभी तक कोई इलाज नहीं खोजा गया है। इसलिए लॉकडाउन और एक दूसरे से दूरी ही सबसे सफल उपाय है। मगर शनिवार (मार्च 28, 2020) को शहरों से लोगों के पलायन के चलते लॉकडाउन फेल होता दिखा। दिल्ली के सीमावर्ती इलाकों में भारी भीड़ देखी गई। इस दौरान सोशल डिस्टेंस नहीं होने से कोरोना का खतरा भी और बढ़ गया है। दिल्ली के सभी बार्डर पर शनिवार को अफरा-तफरी का माहौल दिखा।

24 गाँव पूरी तरह सील, 26000 लोगों को किया गया क्वारन्टाइन: एक अकेले ‘सुपर स्प्रेडर’ से संक्रमण का खतरा

पंजाब के 24 गाँवों के लगभग 26,000 लोगों को उनके घरों के भीतर क्वारन्टाइन किया गया है, क्योंकि संदेह है कि ये सभी उस 70 वर्षीय बलदेव सिंह नामक व्यक्ति के सम्पर्क में आए थे, जिनके नाम पंजाब के पहले कोरोना संक्रमण के चलते हुई मौत दर्ज है।

बलदेव सिंह नवांशहर जिले के पथलावा नामक गाँव में स्थित गुरूद्वारे में ग्रन्थी थे, जो एक धार्मिक समारोह में भाग लेने के लिए, पड़ोस के गाँव के रहने वाले अपने दो सहयोगियों के साथ, जर्मनी और इटली की यात्रा पर गए थे। सिंह 7 मार्च को कोरोना वायरस से संक्रमित होकर भारत वापस आए। इसके बाद 18 मार्च को उनकी बंगा स्थित सिविल हॉस्पिटल में कोरोना संक्रमण के चलते मौत हो गई।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में अब तक सामने आए 38 कोरोना पॉजिटिव मामलों में से 28 सीधे तौर पर इसी “सुपर स्प्रेडर” (ऐसा संक्रमित व्यक्ति, जो वायरस के बहुत तेजी से फैलने में सहायक होता है) बलदेव सिंह से जुड़े हुए हैं। अब तक सिंह के परिवार के 14 सदस्य कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, जिनमें उनके तीनों बेटे, बेटी, बहू और 6 नाती/पोते शामिल हैं। बलदेव सिंह के साथ विदेश गए बाकी दोनों आदमियों के भी पारिवारिक सदस्य कोरोना संक्रमित निकले हैं।

इन तीनों आदमियों को भारत लौटने पर सेल्फ आइसोलेशन में रहने की सलाह दी गई थी, जिसकी धज्जियाँ उड़ाते हुए ये आम दिनों की तरह छुट्टा सांड बन घूमते रहे। यहाँ तक कि बलदेव सिंह ने आनंदपुर साहिब में 10-12 मार्च के बीच आयोजित हुए होला मोहल्ला पर्व में भी शिरकत की, जिसमें इस साल तकरीबन 20 लाख लोगों के शामिल होने का अनुमान है।

वह लोगों के घरों में अरदास करवाने भी जाते रहे थे। कुल मिलाकर नवांशहर जिले के 18 गाँवों और होशियारपुर जिले के 6 गाँवों को पूरी तरह सील कर दिया गया है। नवांशहर नगर के डिप्टी कमिश्नर विनय बबलानी ने बताया कि वे एक-एक कर के गाँवों को सील कर रहे हैं और सभी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए गाँवों में बिजली, पानी और दूसरी जरूरत के सामानों की आपूर्ति सुनिश्चित किए हुए हैं।

होशियारपुर जिले के एक अधिकारी के अनुसार जिले के जिन 6 गाँवों को सील किया गया है, उनमें 250 परिवारों के लगभग 1200 लोग रहते हैं। एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि सिंह के प्रत्यक्ष सम्पर्क में आने वाले 700 लोग इन टोटल क्वारन्टाइन किए गए लोगों में शामिल हैं। इन सील किए गए गाँवों में से लगभग 333 लोगों के स्वैब नमूने भी लिए गए है कोरोना जाँच के लिए, क्योंकि इनमें कोरोना के लक्षण पाए जाने का शक है।

सस्ते सौदे में कोरोना से जंग… लेकिन देर करेंगे तो समस्या विकराल होती जाएगी

बच्चों की परीक्षाएँ स्थगित हो गईं क्योंकि हमें इससे भी बड़ी परीक्षा देने के लिए बाध्य होना पड़ा। पाठशालाएँ बंद हो गईं क्योंकि ज़िंदगी की पाठशाला कुछ ऐसा पाठ लेकर हमारे सम्मुख उपस्थित है, जिसे पढ़ना उनके लिए भी बाक़ी था, जो अब तक दूसरों को पढ़ाते या अनुशासित करते आए थे। ऐसा पहली बार हुआ है। हो सकता है कि ऐसी विकट स्थितियाँ तब भी आई हों जब दुनिया ने दो विश्वयुद्ध देखे, लेकिन तब विश्व दो खेमों में बँटा हुआ था और हर एक खेमे के अन्दर अपने-अपने फायदों को देखने वाले कुछ छोटे-छोटे समूह भी थे लेकिन इस बार सम्पूर्ण मानवता एक गुट का हिस्सा है और शत्रु है एक विश्वव्यापी महामारी, जिससे किसी की संधि तब तक संभव नहीं जब तक वो स्वयं उसका प्रवर्तक न हो। यानी जैविक हथियार की सुगबुगाहट के अलावा सम्पूर्ण मानवता इसके खिलाफ एकजुट है। सचमुच एक बड़ी परीक्षा है, जिसमें कुछ छोटे-छोटे सवाल पूछे गए हैं जैसे- अपने हाथों को अच्छी प्रकार कैसे धोएँ? कैसे किफायत से चीजों का प्रयोग करें? क्या मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है? खुश और संतुष्ट रहने के लिए हम खुद के अतिरिक्त और किन-किन चीजों पर निर्भर करते हैं? अच्छे विद्यार्थी सदा परीक्षा में उत्तीर्ण हो जाते हैं और कुछ असावधान विद्यार्थी असफल रह जाते हैं, लेकिन कई मामलों में ये परीक्षा आम परीक्षाओं से अलग है- यहाँ अपेक्षाकृत छोटे सवालों में ही हम मात खा जाते हैं और जो परीक्षार्थी अनुत्तीर्ण होने वाले हैं, उनकी असफलता आम परीक्षाओं की तरह मात्र उनका व्यक्तिगत नुकसान नहीं करेगी बल्कि उसका असर बाक़ी लोगों तक भी जाएगा।

हममें से प्रत्येक ने कितनी ही बार ये चाहा होगा कि काश हम फिर से बच्चे बन जाएँ। अब वो समय आ गया है कि हम बच्चों की तरह ही छोटी-छोटी बातें मानें, छोटी-छोटी चीजों में अपनी खुशियाँ ढूँढें, खुद को एंजॉय करें, परिवार के साथ समय बिताएँ। इस समय एक आज्ञाकारी बच्चा ही इस गंभीर समस्या का समझदारी भरा समाधान कर सकता है। अतिरिक्त होशियारी या तिकड़म जो बाल-मन के खिलाफ है, उससे काम नहीं चलने वाला बल्कि वो हम पर उलटा पड़ सकता है।

अपेक्षित चीजें करने में अक्सर कठिन होती हैं लेकिन जब वो आसान होती हैं, क्या तब हम उन्हें ठीक से करते हैं? नहीं। मतलब जागरूकता सबसे कठिन चीज़ है चाहे वो बिल्कुल छोटी-छोटी चीजों के बारे में ही क्यों न हो। मन के हिसाब से नहीं बल्कि ज़रूरत के हिसाब से काम या विश्राम करना कठिन है। और अगर हम इसे कठिन मान भी लें तो क्या कठिन कार्यों को करने की अनुमति सिर्फ सीमाओं-अस्पतालों में ही है? घर पर नहीं? सच बात तो ये है कि आसान या कठिन मानना इसे न करने का बहाना नहीं हो सकता। घर पर बने रहकर खुद को सुरक्षित रखना अगर आसान है तो करें, अगर कठिन है तो अवश्य करें क्योंकि इससे न केवल कोरोना से बचाव होगा बल्कि कठिन कार्यों को करने से उत्साह और खुशी भी मिलती है। इस समय सामाजिक दूरी बनाए रखना ही सामाजिक प्राणी मनुष्य का सबसे बड़ा कर्त्तव्य है। जब हमें तन से दूर रहने के लिए कहा गया तब हम मन से निकट आए, जनता कर्फ्यू के दिन शाम पाँच बजे हममें से न जाने कितने लोगों ने पहली बार अपने पड़ोसियों को उनकी बालकनी में देखा होगा। स्पष्ट है कि ये दूरी हमें समीप लाने के लिए है और ये निष्क्रियता हमें फिर से सबल बनाने के लिए ज़रूरी है। इसलिए खुद को घर पर ही बनाए रखें और अपने हाथों को स्वच्छ रखें। इस छोटी-सी बात को समझने में हम जीतनी देर लगाएँगे, ये समस्या उतनी ही विकराल होती जाएगी।

ये तो हुई परीक्षा की बात, लेकिन ये परिस्थितियाँ न केवल हमारी परीक्षा ले रही हैं बल्कि हमें बहुत कुछ सिखा भी रही हैं। अक्सर यही होता है कि जब हम किसी चीज़ को औपचारिक तरीकों से नहीं सीखते तो फिर लगती है परिस्थिति मैडम की आपातकालीन क्लास। परिस्थिति मैडम बड़ी सख्त हैं, जो उनकी बात नहीं मानता वो नुकसान भी उठाता है। तो हमें बस इतना करना है कि परिस्थितियाँ हमें जो कुछ सिखा रही हैं, उन शिक्षाओं को हमें जाया नहीं होने देना है। बाक़ी पाठशालाओं की तरह ही जीवन की पाठशाला में भी हमें सभी विषयों में चयन की सुविधा उपलब्ध नहीं है। कुछ विषय अनिवार्य होते हैं चाहे आप उन्हें पढ़ना चाहें या नहीं लेकिन ज़िंदगी अपना पाठ पढ़ाती है। आम भाषा में इसे सबक कहते हैं। यद्यपि अधिकतर लोग लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं लेकिन इसका सबके द्वारा एक साथ पालन न किया जाना इसे कहीं नहीं पहुँचाएगा और निश्चित रूप से इसकी अवधि को बढ़ाएगा। अगर ये स्थिति लम्बी खिंची तो समस्या हो जाएगी। इस बात को ध्यान में रखते हुए अब हमें किफायत बरतना भी सीखना होगा, चाहे आर्थिक दृष्टि से हम कितने ही सबल क्यों न हों। लाखों की संख्या में मजदूरों का संक्रमित क्षेत्रों से असंक्रमित क्षेत्रों की ओर पलायन और इसके संभावित परिणाम इसे कितना भयावह बनाने वाले हैं ये देखना अभी बाक़ी है। ऐसी हालत में यथास्थिति स्थायी नहीं है। बर्फ के पिघलने के दौरान यानी उसकी अवस्था परिवर्तन के समय तो तापमान स्थिर ही रहता है जबकि ऊष्मा लगातार दी जाती है, लेकिन ऐसा सिर्फ उसके गलनांक तक पहुँचने से पहले तक ही संभव है। इसलिए हमें लगातार बदलती परिस्थितियों की गुप्त ऊष्मा को पहचानना होगा।

इंसानों की जान के अलावा दुनिया भर के समृद्धिशाली देशों की अर्थव्यवस्था को करारा झटका मारने वाली यह परिस्थिति, हमें कुछ अन्य शाश्वत नियमों की सीख भी देती है जैसे कि शक्तिशाली देश जब संसाधनहीनता की स्थिति में पहुँचते हैं तो दूसरों के लिए खतरा बन जाते हैं, क्योंकि अंतत: भैंस तो लाठी वाला ही हाँक कर ले जाता है। जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं के आगे वैश्विक हित, अन्तरराष्ट्रीय सद्भाव-सामंजस्य और यहाँ तक कि शक्ति संतुलन की कवायदें भी धराशाई हो जाती हैं क्योंकि भूखे पेट का एकमात्र तर्क रोटी ही है, येन केनापि प्रकारेण। आज भले ही हमें ये बातें दूर लगती हों लेकिन कुछ महीनों का लॉकडाउन (अगर हमारी लापरवाही इसे इतना लंबा खींच दे तो) सब कुछ स्पष्ट दिखा देगा। इसलिए ज़रूरी है कि हम कम से कम समय में सोशल डिस्टेंसिंग की ज़रूरी अवधि को पूर्ण सफल बनाएँ क्योंकि आगे की कठिनाइयाँ दोनों दृष्टियों से बहुत खराब हैं- एक तो ये कि जिन लोगों को वर्त्तमान के शिथिल कर्फ्यू का पालन करना भी भारी पड़ रहा है, क्या उन्हें भविष्य में आपातकाल जैसा प्रतिबन्ध झेलना आसान लगेगा? और दूसरा कोरोना का जंगल की आग की तरह फ़ैलने का रिकॉर्ड। इन दोनों स्थितियों में से किसी का भी सामना करने की बजाय हमारा अभी सँभल जाना बहुत ही सस्ता सौदा है। सस्ती कीमतों पर ही महँगा सुकून खरीद लें वर्ना बाद में जान को दाँव पर लगाकर भी कुछ हासिल नहीं हो पाएगा। आखिर अपनी गलती पर आहें भरने के लिए भी साँसों की ज़रूरत होती है और आप जानते हैं कोरोना इसकी इजाजत नहीं देता। इसलिए हमें एक सनकी इंसान की तरह सभी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए खुद को, अपने परिवार को और देश-दुनिया को सुरक्षित रखना होगा।

संभलिए, मान जाइए, घर पर रह कर जंग लड़ने के इस आसान से अवसर को गँवा कर बड़ी जंग मत हारिए। सारा विश्व इस साझी समस्या का शिकार है और इस रूप में ही सही, सम्पूर्ण मानवता अब एक परिवार की तरह नज़र आ रही है। यानी मजबूरियाँ हमें ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ तक ले आई हैं, अब हमें अपने प्रयासों से इसे ‘सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:’ की ओर ले जाना है।

लेखिका: डॉ. अमिता

‘4 समोसा भिजवा दो’ – लॉकडाउन में UP पुलिस से मँगवाए समोसे, खा तो लिया लेकिन करवाया गया नाली साफ

21 दिन के लॉकडाउन के दौरान पुलिस और प्रशासन किस तत्परता से लोगों की मदद के लिए हर समय तैयार हैं, यह हम सोशल मीडिया और समाचारों में निरंतर देख और सुन रहे हैं। लेकिन महामारी के समय भी कुछ लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आते हैं और बिना किसी बात की परवाह किए अपने पागलपन का उदाहरण देते नजर आते हैं।

ऐसा ही एक वाकया आज ट्विटर पर रामपुर, उत्तर प्रदेश के डीएम ने शेयर किया है। दरअसल, एक व्यक्ति ने पुलिस कण्ट्रोल रूम में अनावश्यक कॉल कर के पुलिस को बुलाकर चार समोसे भिजवाने की माँग की। लेकिन शायद वो यह बात भूल गया कि यह उत्तर प्रदेश पुलिस है।

रामपुर के डीएम ने ट्वीट करते हुए लिखा है- “4 समोसा भिजवा दो… चेतावनी के बाद आखिर भिजवाना ही पड़ा। अनावश्यक माँग कर कंट्रोल रूम को परेशान करने वाले व्यक्ति से सामाजिक कार्य के तहत नाली सफाई का कार्य कराया गया।”

पुलिस ने कॉल कर रहे शख्स को समोसे तो दी ही लेकिन इसके बदले में उससे सामाजिक कार्य के तहत नाली साफ़ करवाई गई। ताकि कम से कम उसे आगे से इस बात का ध्यान रहे कि उसे पुलिस कण्ट्रोल रूम में अनावश्यक रूप से कॉल नहीं करना है – कम से कम चार समोसे मँगवाने के लिए तो फोन नहीं ही करना है 🙂

उल्लेखनीय है कि देश में कोरोना वायरस के प्रकोप से बचाव के लेकर 21 दिन तक चलने वाले लॉकडाउन का सबसे अधिक असर गरीबों और बेसहारा लोगों पर पड़ा है। ऐसे में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात पुलिस का मानवीय चेहरा सबके सामने आया है। पुलिस सिर्फ गरीबों के लिए खाना ही उपलब्ध नहीं करवा रही है बल्कि व्हाट्सएप पर जरुरतमंदों को दवाई और राशन भी उपलब्ध करवा रही है। कानून व्यवस्था का ध्यान रखने के साथ-साथ पुलिस बेसहारा लोगों की मदद को भी सामने आई है और गरीबों को भोजन और सूखा राशन उपलब्ध करा रही है। ऐसे में कुछ शरारती तत्व अगर पुलिस कण्ट्रोल रूम फोन कर के चार समोसे मँगवाता है तो शायद उसके लिए नाले साफ़ करवाने से बेहतर कोई सजा नहीं हो सकती है।

दिल्ली के शाहीन बाग में फर्नीचर की दुकान में लगी भीषण आग, आसपास अफरा-तफरी का माहौल

दिल्ली स्थित शाहीन बाग इलाके में एक फर्नीचर की दुकान में भीषण आग लगी है। आग बुझाने के लिए दमकल कर्मियों की चार गाड़ियाँ मौके पर पहुँच चुकी हैं और काम जारी है। इस मामले में अधिक जानकारी की प्रतीक्षा है।

अग्निशमन विभाग के कर्मचारी आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि शाहीन बाग में सात नंबर ठोकर पर यह आग लगी है। आग लगने से आसपास अफरा-तफरी का माहौल है। हालाँकि, अभी तक आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है।

पलायन या षड्यंत्र? ये देश को तबाह करने की साजिश नहीं तो और क्या है? दो लाख लोग इकट्ठा कैसे हो गए?

हम लोगों के जॉब की प्रकृति ही है कि हमें लोगों के पास जाकर पूछना होता है। हालात चाहे कैसे भी क्यों न हों, हमें उनका हाल बयान करना होता है चाहे वो कैसा भी क्यों न महसूस कर रहे हों। जब 2 लाख लोग अपने घरों से निकले तो बातें होने लगीं कि केंद्र सरकार लॉकडाउन को कम्युनिकेट नहीं कर पाई और सरकार ने ढील दी है। मैं यह नहीं मानता। अगर झुग्गी में बैठी महिला पीएम मोदी के जनता-कर्फ्यू के सन्देश से घण्टी-थाली बजाती है, तो मैं नहीं मानता कि सरकार लॉकडाउन का सन्देश उन तक पहुँचाने में नाकामयाब रही हो।

आदमी अफवाह के कारण पैदल चलना शुरू कर देता है। दिल्ली सरकार की हेल्पलाइन काम नहीं कर रही थी, लोगों के पास भागने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। 2 लाख में से अगर गिने-चुने लोग भी ऐसे हैं, जिनके लक्षण दिख नहीं रहे, लेकिन सम्भावना है कि वो संक्रमित हों, तो सोचिए कि अरविन्द केजरीवाल का यह कारनामा कितनी बड़ी आपदा पैदा करने जा रहा है।

दिल्ली में रह रहे 15 लाख लोग इस दौरान एयरपोर्ट से आए हैं। ये लोग बस, मेट्रो, एयरपोर्ट, रेल, सब जगह पहुँचे होंगे। आनंद विहार में लोग लाइन लगाकर खड़े हैं, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग कहाँ है? यह वायरस हर दूसरे संक्रामक वायरस की तरह ही फैलता है। और इसके अन्य क्या लक्षण हो सकते हैं, उनके बारे में कोई जानकारी अभी तक उपलब्ध नहीं है।

ऐसे में दिल्ली का सीएम लोगों को जाने दे रहा है। रवीश कुमार जैसे लोग प्रपंच किए जा रहे हैं। एक ओर नोएडा का डीएम कहता है कि गरीबों से किराया ना लें, दूसरी तरफ दिल्ली में डीटीसी बसें भर-भरकर लोगों को बॉर्डर पहुँचाती रही।

अरविन्द केजरीवाल को जिन गरीबों ने सत्ता दिलाई, उन्हें ही इस्तेमाल किए गए कंडोम की तरह फेंक दिया गया। यह राय अरविंद केजरीवाल को कौन दे रहा है? 2 लाख मजदूर अफवाहों से घबराकर सड़क पर आ गए। दिल्ली सरकार ने उनकी खाने-रहने जैसी व्यवस्थाओं को लेकर कोई आश्वसन नहीं दिया।

क्या दिल्ली सरकार के पास कोई जानकारी नहीं है कि गरीब लोग किस जगह रहते हैं? वहीं यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ 26 तारीख को दो-दो प्रेस रिलीज जारी करते हैं। उन्होंने रात में जगाकर अपने अधिकारियों को कहा कि इन लोगों के स्वास्थ्य और ठहरने की व्यवस्था की जाए और उसके बाद कहा कि स्वास्थ्य संबंधी जाँच के बाद ही इनके जाने की व्यवस्था की जाए। केजरीवाल दिल्ली को न्यू यॉर्क और लन्दन बनाने की बात करता है और आपदा के आते ही सबसे पहले दो लाख लोगों को वापस अपने घर जाने को मजबूर कर देता है।

आरएसएस के अभियान जारी हैं, एक महिला विधायक हैं जो मशीन से मास्क बना रही हैं, और अरविन्द केजरीवाल तब अफवाहें फैला रहे थे कि UP सरकार बसें भेज रही हैं। वो तो पढ़ा-लिखा था, 2012 में किस तरह के लोग इसके समर्थन में थे, हमें याद है। खुद को IIT से पासआउट कहने वाला यह आदमी किस तरह के निर्णय लेता है? अगर 2 लाख में से 5 आदमी भी संक्रमित हैं तो आप परमाणु बम के समान विस्फोटक तैयार कर रहे हैं।

कुछ आँकड़े हैं, जिन्हें जानने के बाद आप खुद इसका विश्लेषण देख सकेंगे। दिल्ली सरकार ने कहा कि दिल्ली के पास विश्वस्तरीय सुविधाएँ हैं, और कहा कि यहाँ लोगों के आने की गति बढ़ी है। लेकिन ध्यान देने की बात यह है कि हर शेल्टर होम में यह गति नहीं बढ़ी।

शेल्टर होम के जो आँकड़े दिए गए वो झूठे थे, केजरीवाल को अंदाजा था कि उनके पास इस जनता को हैंडल करने की क्षमता नहीं है। बिहार का दुर्भाग्य यह है कि वह छाती ठोककर कहता है कि बिहार के लोग हर जगह जाकर कूड़ा बीनते हैं। जो घण्टा हम पहले लालू राज में बजाते रहे, वही अब हम नीतीश राज में बजा रहे हैं।

इस पर विस्तृत चर्चा देखिए इस लिंक पर –