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प्रवासी मजदूरों का हरसंभव सहायता कर रही योगी सरकार को आपके सहयोग की जरूरत – ये रहा बैंक डिटेल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने भी कोरोना से लड़ने को आम जन से सहयोग माँगा है। योगी आदित्‍यनाथ ने भी ‘मुख्यमंत्री पीड़ित सहायता कोष’ की शुरुआत की है। इस राहत कोष में लोग मदद के लिए राशि भेज सकते हैं। मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है।

मुख्‍यमंत्री ने ट्वीट के माध्‍यम से कहा, “कोरोना वायरस महामारी से संघर्ष में सरकार व समाज की सम्मिलित शक्ति की आवश्यकता है। मेरी आप सभी से अपील है कि ‘मुख्यमंत्री पीड़ित सहायता कोष’ द्वारा पीड़ितों की सहायता व उन्हें राहत प्रदान करने हेतु अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग करें और हम सभी के इस महासंघर्ष को शक्ति प्रदान करें।”

जो लोग उत्‍तर प्रदेश सरकार की ओर से जारी ‘मुख्यमंत्री पीड़ित सहायता कोष’ में मदद करना चाहते हैं वह Central Bank of India के खाता संख्‍या 1378820696 पर अपनी मदद भेज सकते हैं। इस कोष में जमा की गई राशि आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80 G के तहत पूर्ण रूप से कर रहित यानी कि टैक्स फ्री होगी। इस संबंध में मुख्यमंत्री के विशेष सचिव सुरेंद्र सिंह द्वारा रविवार (मार्च 29, 2020) को पत्र जारी किया गया। 

यूपी मुख्यमंत्री द्वारा जारी पत्र

पत्र में उन्होंने कहा है कि इस संकट की घड़ी में प्रदेश सरकार सभी नागरिकों को आर्थिक मदद पहुँचा रही है। संक्रमित व संदिग्ध मरीजों के नि:शुल्क इलाज के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए भी आवश्यक प्रबंध किए जा रहे हैं। मानवीय संवेदनाओं का उत्कृष्ट व अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए अनेक औद्योगिक, व्यापारिक व सामाजिक संगठन मदद के लिए आगे आए हैं। प्रदेश सरकार इनके सहयोग व योगदान के लिए कृतज्ञ है। उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय में मुख्यमंत्री पीड़ित सहायता कोष नामक कोष है। इसमें जनता या स्वैच्छिक संस्थाओं द्वारा दिया गया दान/ चंदा जमा होता है। इसका उपयोग पीड़ितों की सहायता व राहत प्रदान करने में किया जाता है। 

उन्होंने दान देने के लिए बैंक का खाता नंबर व अन्य जानकारियाँ भी दीं हैं। इस पीड़ित सहायता कोष का सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में खाता संख्या 1378820696 है। खाते का नाम CHIEF MINISTER’S DISTRESS RELIEF FUND और ब्रांच का नाम C.B.I. CANTT. ROAD, LUCKNOW है। इसका IFSC कोड CBINO281571 और ब्रांच कोड 281571 है। इसके साथ ही जो लोग विदेशों में रह रहे हैं, वो अगर इस राहत कोष में दान देना चाहते हैं तो उसके लिए SWIFT CODE भी जारी किया है। विदेशी लोग SWIFT CODE- CBININBBLKO का इस्तेमाल कर मदद कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को कोष का आम लोगों में व्यापक प्रचार-प्रसार करने का आग्रह किया है।

उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) ने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ने के लिए मुख्यमंत्री पीड़ित सहायता कोष में 1 लाख रुपए का दान दिया है। इसके साथ ही महामारी के रूप में फैल चुके कोरोना संक्रमण से जंग में बड़ा दिल दिखाते हुए तमाम प्रदेशवासी आगे आए हैं। उन्होंने इस आपदा में व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक सहयोग सरकार को दिया है। गरीब-मजदूरों, किसान, वृद्ध और महिलाओं को भरण पोषण भत्ता देने के साथ ही सभी कोरोना संक्रमित मरीजों का नि:शुल्क इलाज करा रही सरकार ने इस सहयोग को काफी अहम माना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सहयोग देने वालों का आभार जताया है।

रेल यात्रा, नमाज, 2 शादी फंक्शन, फिर हॉस्पिटल से भागा: एक मरीज के कारण मेरठ व नागपुर में मच सकती है तबाही

कोरोना वायरस ने उत्तर प्रदेश में अपने रंग दिखाने शुरू कर दिए हैं। अकेले रविवार (मार्च 29, 2020) को मेरठ शहर में कोरोना के 8 मरीज मिले, जिससे वहाँ हड़कंप मच गया है। पहले माना जा रहा था कि सिर्फ़ 3 कालोनियों तक ही संक्रमण सिमटा हुआ है लेकिन अब पूरे शहर में ये ख़तरा फ़ैल गया है। 24 स्वास्थ्य केंद्रों को काम पर लगा दिया गया है, ताकि वो अपने-अपने इलाक़ों में कोरोना वायरस के मरीजों का पता लगा सकें। साथ ही पुलिस और नगर निगम की भी मदद ली जा रही है। पुलिस का कहना है कि खुर्जा निवासी और मुंबई से लौटे एक शख्स ने पूरे शहर में कोरोना को फैलाने का काम किया है।

अभी तक शहर में कुल 13 लोग हैं, जो कोरोना के संक्रमण से पीड़ित हैं। अंदेशा जताया गया है कि एक दर्जन और मरीज सामने आ सकते हैं, जिनका पता लगाया जा रहा है। ये मरीज शहर के विभिन्न क्षेत्रों में घुमते रहे हैं। एक मरीज तो 20-21 मार्च को हापुड़, मोतीमहल और चुंगी में हुई दो शादियों में पहुँचा था। इसके बाद उसने तहसील कॉलनी और जाकिर कॉलनी जाकर वहाँ नमाज पढ़ा। वहाँ के मौलवी की भी जाँच की गई है, जो सामान्य मिला है। पूरे शहर को सर्विलांस पर लेकर काम किया जा रहा है। मरीजों से पूछताछ की जा रही है कि वो कहाँ-कहाँ घूमे।

उक्त मरीज जब मेरठ आ रहा था, तो रास्ते में ही उसकी तबियत बिगड़ गई थी और उसे बुखार होने लगा था। बुखार से काँपते हुए उसने नागपुर में 5 घंटे रुक कर ट्रेन बदली थी। महाराष्ट्र सरकार को पत्र लिख कर उसकी यात्रा के बारे में सूचित कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से सफर करने वाले उस यात्री के बारे में कहा जा रहा है कि उसने नागपुर में भी कई लोगों में संक्रमण फैलाया होगा। रविवार को वो हॉस्पिटल से भाग निकला, जिसके बाद उसे घर से उठा कर लाया गया। इलाज के बाद उस पर एफआईआर भी दर्ज की जाएगी। उसने अपने परिवार के लोगों को भी संक्रमित कर दिया है। फ़िलहाल अन्य संक्रमित मरीजों को हॉस्पिटल में रखा गया है और उनकी स्थिति सामान्य है।

इन मरीजों को तभी छोड़ा जाएगा, जब 24 घंटे के भीतर 2 बार उनकी जाँच होगी और दोनों बार रिपोर्ट नेगेटिव आए। एहतियातन हर मरीज की तीन बार जाँच की जाएगी। उन्हें पौष्टिक भोजन दिया जा रहा है। अब तक 3533 घरों की पड़ताल की जा चुकी है। कुल 20,751 लोगों को कवर किया जा चुका है। विभाग कोरोना के लक्षणों के बारे में हर छोटी जानकारी ले रहा है। वह वार्ड से क्यों भागा, इस सम्बन्ध में उसने कुछ नहीं बताया है।

इससे पहले हमने मेरठ जिलाधिकारी के हवाले से बताया था कि संक्रमित व्यक्ति का मेरठ में ससुराल है। वह अपनी पत्नी के साथ महाराष्ट्र से मेरठ आया था। शुक्रवार को मेरठ मेडिकल अस्पताल में उसके कोरोना पॉजिटिव की पुष्टि हुई थी। इसके बाद संपर्क में रह रही पत्नी और 3 सालों को भी शुक्रवार को भर्ती कराया गया। अब उसकी पत्नी और तीन सालों के भी कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई है। 

मेरठ लॉकडाउन: मवाना और सरधना के मस्जिदों में छिपे थे 19 विदेशी मौलवी, प्रशासन को धोखा देने के लिए बाहर से बंद था ताला

कोरोना वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश में संक्रमण का आँकड़ा 80 के पार पहुँच चुका है। बीते 24 घंटे में मेरठ से इसके 13 मामले आए हैं। संक्रमण की मार झेल रहे मेरठ में लॉकडाउन के बीच जहाँ लोगों को घर में ही रहने की अपील की जा रहा है। वहीं जिले की दो मस्जिदों में 19 विदेशी नागरिकों के मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है के ये विदेशी नागरिक जमात के संग 17 और 21 मार्च को मेरठ पहुँचे थे। ये सभी धर्म प्रचारक बताए जा रहे हैं।

ये विदेशी मौलवी इंडोनेशिया, केन्या, सूडान और जिबूती समेत अन्य देशों से हैं। हैरान कर देने वाली बात ये है कि ये सभी लॉकडाउन के दौरान मस्जिद में ही रह रहे थे और इन्हें शरण देने वालों ने भी पुलिस को जानकारी देना मुनासिब नहीं समझा। एलआईयू की जाँच के बाद मामले का खुलासा करते हुए फिलहाल इन्हें क्‍वारंटाइन कर दिया गया है। इसके साथ ही इनकों शरण देने वालों के खिलाफ FIR भी दर्ज कर ली गई है।

दरअसल, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में हो रहे विरोध-प्रदर्शन के बाद से मवाना में विदेशी लोगों के होने की सूचना मिल रही थी। तभी से यहाँ खुफिया विभाग सक्रिय था और फिर वहाँ पर कोरोना के लगातार बढ़ रहे केसों को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। पुलिस के साथ ही एलआईयू के अधिकारी भी चप्पे-चप्पे पर नजर रख रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान पुलिस और एलआईयू की टीम को जानकारी मिली थी कि सरधना और मवाना क्षेत्र की मस्जिदों में कुछ विदेशी नागरिक रह रहे हैं। इसके बाद सीओ यूएन मिश्रा, इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी की अगुवाई में पुलिस टीम ने दबिश दी। जहाँ वो लोग आराम फरमाते हुए मिले।

दैनिक जागरण के मेरठ संस्करण में प्रकाशित खबर

फिर पुलिस की टीम ने कार्रवाई करते हुए मवाना स्थित बिलाल मस्जिद में देर रात 10 और सरधना में आजाद नगर स्थित मस्जिद में 9 विदेशी मौलवियों को पकड़ा। इनके कागजात और पासपोर्ट कब्जे में ले लिए गए हैं। ये सभी 17 मार्च से यहाँ रह रहे हैं। पुलिस ने इनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। बिलाल मस्जिद में यह जमात 17 मार्च को सूडान और केन्या से आई थी। किसी को पता न चले, इसलिए मस्जिद के बाहर ताला लगा रखा था। इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी ने बताया कि सभी 10 विदेशी जमातियों को उसी मस्जिद के अलग-अलग कमरों में आईशोलेट कर दिया गया है। थर्मल स्क्रीनिंग में सभी सामान्य पाए गए हैं। फिर भी एहतियात के तौर पर उनका कोरोना सैंपल सोमवार को लिया जाएगा। मस्जिद के इमाम मौलाना शौकत व अन्य से भी पूछताछ की गई।

इसी तरह पुलिस ने मेरठ के मवाना क्षेत्र स्थित एक मस्जिद से 9 विदेशी मौलवियों को पकड़ा, जो इंडोनेशिया के रहने वाले हैं। ये सभी जमाती 21 मार्च को यहाँ पहुँचे थे और तभी से यहाँ ही रह रहे थे। दारोगा राजवीर सिंह ने विदेशी जमातियों की सूचना नहीं देने पर मस्जिद के मोहतमिम हारून व इमरान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। इसके साथ ही इन जमातियों के परीक्षण के लिए स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी गई है।

इसके साथ ही मवाना में दारोगा नरेंद्र सिंह ने शहर काजी मौलाना नफीस, एडवोकेट असलम, नईम सौफी समेत अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस ने आईपीसी की धारा 188, 269, 270 व 14 विदेशी अधिनियम, महामारी एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। शहर काजी मौलाना नफीस ने बताया कि विदेश से जमात आती हैं। दुनिया में जो भी जमात चलती है सबसे पहले मरकज निजामुद्दीन दिल्ली में आती है। वहाँ से ही निजाम बनाकर जमातों को भेजते हैं। पूरा रिकार्ड रहता है। फिलहाल पुलिस इनके मंसूबों के बारे में पता लगाने में जुटी है।

धर्म-प्रचार के लिए राँची की मस्जिद में छिपे हुए थे 19 विदेशी सहित 24 लोग: पुलिस ने गिरफ्तार कर क्वारंटाइन सेंटर भेजा

कोरोना वायरस को लेकर भारत में स्थिति दिनोंदिन गंभीर होती जा रही है। इससे पहले ख़बर आई थी कि पटना की एक मस्जिद में कई विदेशी छिपे हुए थे। अब राँची में पुलिस ने 19 विदेशी नागरिकों को क्वारंटाइन किया है। हिन्दपीढ़ी क्षेत्र में छिपे हुए मिले ये सभी ब्रिटिश नागरिक हैं। ये सब स्थानीय ‘बड़ी मस्जिद’ में रुके हुए थे। इन विदेशी नागरिकों के साथ-साथ पुलिस ने दिल्ली व राँची के दो-दो और हैदराबाद के एक युवक को भी आइसोलेशन में शिफ्ट किया गया है। कुल 24 लोग थे।

पूछताछ में सभी विदेशी नागरिकों ने बताया है कि वो सभी तबलीग जमात के लिए राँची आए थे। कुछ लोगों ने इसकी सूचना डीसी को दी, जिसके बाद उन्हें शिकंजे में लिया गया। इन सभी को हिरासत में लेकर क्वारंटाइन किया गया है। साथ ही एक मेडिकल टीम ने इन सबकी जाँच भी की है। इससे पहले राँची के बुंडू में पुलिस ने चीनी नागरिक समेत 11 विदेशी नागरिकों को क्वारंटीन के लिए भेजा था। डीएसपी को सूचना मिली थी कि चीन और अन्य देश के कुछ मौलवी तमाड़ के रणगाँव के पास एक मस्जिद में रुके हैं, जिसके बाद ये कार्रवाई की गई थी।

इन विदेशी नागरिकों में पोलैंड, अफ्रीका, मलेशिया और इंग्लैंड सहित कई देशों के लोग थे। सबसे ज्यादा मलेशिया से 8 लोग थे। इन सभी को खेलगाँव में स्थित आइसोलेशन सेंटर में भेजा गया है। देर रात 12 बजे के बाद इन्हें पुलिस ने शिकंजे में लिया। ये सभी मजहबी प्रचार के लिए मस्जिद में छिपे हुए थे। जिला प्रशासन इस बारे में और जानकारी पता लगा रहा है।

झारखण्ड में अभी तक कोरोना वायरस का एक भी मरीज सामने नहीं आया है लेकिन पुलिस एहतियातन पूरी सतर्कता बरत रही है। सभी स्कूल-कॉलेजों को बंद कर दिया गया है और शैक्षिक संस्थानों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वो इस अवधि में बच्चों के अभिभावकों से फी व किसी अन्य प्रकार का शुल्क न लें। ऐसा करने पर कड़ी कार्रवाई की बात कही गई है। पूरे देश में अब तक कोरोना वायरस के 1190 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 102 ठीक हुए हैं और 29 की जान चली गई है।

पहले बुलाया और जहाँ से चले थे, बसों में ठूँस फिर वहीं पहुँचाया: केजरीवाल के धोखे से बिलख-बिलख कर रोए प्रवासी मजदूर

हजारों लोगों के लिए घर पहुँचने की आस बना आनंद विहार का इलाका अब सुनसान हो गया है। पुलिस ने पूरे इलाके से लोगों को हटा दिया है। अब वहाँ पर केवल सूनी सड़कें, खाली बस स्टेशन ही दिखाई पड़ रहा है। असल में इलाके को खाली कराने की तैयारी रविवार की दोपहर 12 बजे के आसपास ही शुरू हो गई थी। वहाँ पर प्रशासन का पूरा अमला पहुँच गया था और लाउडस्पीकर से लोगों को इलाका खाली करने के निर्देश दिए जा रहे थे। खाली कराने की दोपहर बाद शुरू हुई प्रक्रिया तीन बजे तक पूरी कर ली गई और पूरा इलाका सुनसान हो गया

बता दें कि भारत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का एक संघ है, जहाँ शक्ति केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच बँटी होती है। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों का काम होता है कि वह केंद्र सरकार के साथ मिलकर राज्य की जनता के लिए काम करे। जब किसी प्रकार की आपदा-विपदा आती है तो यह जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। लेकिन अभी कोरोना के समय में दिल्ली की हालत कुछ और ही है। दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐसी तबाही मचाई, जिसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। केजरीवाल ने न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि बिहार के लोगों की भी जान खतरे में डाल दी है।

दिल्ली सरकार ने बस अड्डे पर लोगों को इकट्ठा करने के बाद फिर से उन्हें वहीं पर पहुँचा दिया, जहाँ से ये काफी जद्दोजहद करके यहाँ पर आए थे। कई लोग दिल्ली के दूरदराज के इलाकों से वहाँ पर पैदल पहुँचे थे, तो वहीं सैकड़ों लोग फरीदाबाद, गुरुग्राम, मानेसर, बल्लभगढ़ से आनंद विहार तक पहुँचे थे। केजरीवाल सरकार ने इन गरीब मजदूरों को पहले तो यहाँ पर इकट्ठा किया और फिर उन्हें बिना ये बताए कि वो उन्हें कहाँ ले जा रहे हैं, बस के अंदर बैठाकर दिल्ली-एनसीआर के ही अलग-अलग इलाकों में ले जाकर छोड़ दिया। जब उन लोगों को ये पता चला कि गाँव भेजने का आश्वासन दिलाकर यहाँ लाने के बाद उन्हें फिर से वहीं भेजा जा रहा है, जहाँ से पैदल चलकर वो इतनी दूर आए, उनको रोना आ गया। कई लोग तो बिलख-बिलख कर रो पड़े कि केजरीवाल ने उन्हें दिलासा तो गाँव भेजने का दिलाया था, लेकिन फिर से उसे वहीं पर लाकर पटक दिया।

दरअसल अरविंद केजरीवाल ने कोरोना जैसी विपदा के समय में भी अपनी गंदी राजनीति नहीं छोड़ी और दिल्ली में रह रहे उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों के मन में ऐसी भय और घर जाने का लालच दिया कि देखते ही देखते UP और दिल्ली के बॉर्डर पर हजारों की तादाद में अपने घर जाने वाले जमा हो गए।

देश में लॉकडाउन लगा हुआ है और दिल्ली ने तो केंद्र सरकार से भी पहले लॉकडाउन लगा दिया था लेकिन फिर भी ऐसा माहौल बनाया गया, जिससे दिल्ली में काम करने वाले सभी, गरीब से लेकर पढ़ने वाले तक घर जाने की चाहत में आ गए। बताया गया कि दिल्ली में इन लोगों के बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए गए और केजरीवाल सरकार के अधिकारियों ने उनसे कहा कि बॉर्डर पर उनको घर ले जाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई है। यूपी सरकार ने बयान जारी कर कहा है कि इन लोगों के दिल्ली सरकार ने बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए। लॉकडाउन के दौरान उन्हें भोजन, दूध नहीं मिला जिस कारण भूखे लोग सड़कों पर उतरे।

यहाँ तक कि दिल्ली सरकार के अधिकारी बक़ायदा एनाउंसमेंट कर अफ़वाह फैलाते रहे कि यूपी बॉर्डर पर बसें खड़ी हैं, जो उन्हें यूपी और बिहार ले जाएँगी। इसके बाद बहुत सारे लोगों को मदद के नाम पर डीटीसी की बसों से बॉर्डर तक पहुँचाकर छोड़ दिया गया। दिल्ली से गाजियाबाद तक बच्चों को गोद में लिए व सामान सिर पर लादे लोगों की कतारें लगी रहीं। माहौल ऐसा हो चुका था कि अगर एक भी कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति होता तो यह महामारी देश के 2 सबसे बड़े आबादी वाले राज्य में तबाही मचा सकते थे। कई दावे किए गए थे जिसमें यह कहा गया था कि दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने कोरोना वायरस की स्थिति सँभालने के लिए बढ़िया काम किया है। लेकिन ऐसा क्या हुआ कि इतने सारे प्रवासी एक साथ दिल्ली छोड़कर जाने को मजबूर हुए?

बड़ी संख्या में पलायन की खबरें 24 मार्च से ही आने शुरू हुए, तब से लेकर अगले 4 दिनों तक किसी भी तरह के का कोई कदम वापस जाने वालों के लिए नहीं उठाया गया। इसके उलट अफवाह फैलाई गई कि उन्हें घर छोड़ने वाली बसें उनका इंतजार कर रही हैं। जब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने स्थिति को और बिगड़ने नहीं दिया और भीड़ को देखते हुए तुरंत बसों को लगाया तब केजरीवाल यह कहते फिर रहे हैं कि वो दिल्ली छोड़कर न जाएँ और यह भी दावा कर रहे है कि दिल्ली में पूरे इंतजाम कर लिए गए हैं।

जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को यह खबर मिली तो उन्होंने 1000 बसें लगाकर सभी प्रवासियों को गंतव्य तक पहुँचाने की व्यवस्था की। शुक्रवार व शनिवार रात भर बसों से लोगों को उनके जिले पहुँचाया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद इसकी मॉनिटरिंग करते रहे। रात में ही मजदूरों और बच्चों के लिए भोजन का इंतजाम भी कराया गया। साथ ही दिल्ली से आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग भी की गई और यह सुनिश्चित किया गया कि जो स्वस्थ होगा, उसे निगरानी में घरों को भेजा जाएगा। जिसमें कोरोना के लक्षण पाए जाते हैं, उन्हें जिलों के वार्डों में क्वारंटाइन किया जाएगा।

बावजूद इसके केजरीवाल के मंत्री योगी सरकार के बारे में अफवाह फैलाते रहे। आम आदमी पार्टी के विधायक राघव चड्डा ने तो यह आरोप लगा दिया कि दिल्ली से जाने वाले लोगों को योगी जी पुलिस से पिटवा रहे हैं। हालाँकि जब लोगों ने खरी-खोटी सुनाना शुरू किया तो ट्वीट डिलीट कर भाग गए। उनके खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज कर लिया गया है। अरविंद केजरीवाल के इस दोहरी राजनीति के लिए लोगों ने ट्विटर पर जमकर कोसा और खरी-खोटी भी सुनाई।

जिस दिल्ली को इन प्रवासियों की ऐसे आपदा के समय मदद करनी चाहिए, वैसे समय में केजरीवाल ने उल्टा DTC बसें लगा कर UP बार्डर पार पहुँचा दिया और उन्हें वापस जाने पर मजबूर कर दिया। यह सभी को पता है कि कोरोना के समय में कहीं भी आना जाना किसी खतरे से खाली नहीं है लेकिन फिर भी इस तरह से राजनीति कर अरविंद केजरीवाल ने फिर से अपना रंग दिखा दिया है। इस तरह से अरविंद केजरीवाल ने अपनी गंदी राजनीति को चमकाने के लिए लाखों लोगों की जिंदगी के साथ खेलकर उसे दाँव पर लगा दिया। उल्लेखनीय है कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान पूर्वांचल के लोगों को लक्ष्य बनाकर इन्हीं दो मुद्दों, बिजली-पानी पर ही विशाल बढ़त के साथ जीत हासिल की थी।

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कोरोना इफेक्ट: सुपर पावर अमेरिका के हाथ से क्या निकल रही स्थिति? 2 हफ्तों में होगी 1-2 लाख मौत!

कहते हैं कि प्रकृति के प्रकोप के आगे सबसे मजबूत इमारत भी धराशायी हो जाती है। कुछ यही हो रहा है विश्व के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के साथ। जहाँ कोरोना के कारण हालत बद से बदतर हो रहे हैं। मौत का आँकड़ा बढ़ रहा है। एंबुलेंस इस तरह भाग रही है-जैसे मानो कभी 9/11 के समय दौड़ी थी। देश के राष्ट्रपति भी बिगड़ते हालातों को देखकर चेतावनी दे चुके हैं कि उनके देश में आने वाले 2 हफ्तों में सबसे ज्यादा मौत होंगी। और हो सकता है कि ये आँकड़ा 2 लाख तक पार कर जाए।

जी हाँ। 2हफ्तों में 2 लाख के पार। वो भी तब जब अमेरिका ने इस वायरस को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए। विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अनुमान की जानकारी खुद ट्रंप के सलाहकारों ने दी है। दरअसल, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एलर्जी ऐंड इन्फेक्शन डिजिज के निदेशक डॉ. एंथनी फौसी के अनुमान के आधार पर ये बात कही गई है। जो कि बेहद डराने वाला है। उनका कहना है कि अगले कुछ दिनों में अमेरिका में लाखों लोग कोरोना की चपेट में आ जाएँगे और यह वायरस 1 से 2 लाख लोगों की मौत का कारण बन सकता है।

अब, सलाहकारों की इस चेतावनी के बाद ट्रंप ने कड़े कदम की अवधि को बढ़ाना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वह सोशल डिस्‍टेसिंग की गाइडलाइन को 30 अप्रैल तक बढ़ा रहे हैं। उन्होंने व्‍हाइट हाउस में संवाददाता सम्‍मेलन में कहा कि अमेरिका इस संकट से 1 जून तक उबर जाएगा। मगर, इससे पहले दो शीर्ष जन स्वास्थ्य सलाहकारों और कोरोना वायरस पर व्हाइट हाउस कार्यबल के सदस्यों- डॉ. देबोरा बिक्स और डॉ एंथनी फॉसी की सलाह के आधार पर उन्हें सामाजिक मेलजोल से दूरी संबंधी उपायों की अवधि 30 अप्रैल तक बढ़ानी होगी।

ट्रंप ने कोरोना वायरस पर अपनी दूसरी रोज गार्डन प्रेसवार्ता में कहा, “उनका कहना है कि जिन बचाव उपायों को हम लागू कर रहे हैं वे काफी हद तक संक्रमण के नए मामलों और असमय हो रही मौतों की संख्या घटा सकते हैं।”

उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूँ कि अमेरिका के लोग यह जानें कि आपके नि:स्वार्थ एवं साहसिक प्रयास देश में कई जानें बचा रहे हैं। आप बदलाव ला रहे हैं। लेकिन अनुमान दर्शाते हैं कि दो हफ्तों में मृत्यु दर बेहद ऊँचाई पर पहुँच जाएगी।” उन्होंने कहा कि सामाजिक दूरी को लेकर नए दिशा-निर्देशों की घोषणा एक अप्रैल को की जाएगी। ट्रंप ने कहा, “हम उम्मीद कर सकते हैं कि एक जून तक हम इस संकट से पार पा लेंगे।” 

गौरतलब है कि रविवार रात तक अमेरिका में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या करीब 14,0000 हो गई थी और मृतकों की संख्या 2,475 पर पहुँच गई थ। न्‍यूयॉर्क शहर में ही इस महामारी से एक हजार से ज्‍यादा लोग मारे गए हैं। इस महामारी को रोकने के लिए ट्रंप ने हाल ही में अरबों डॉलर के पैकेज पर हस्‍ताक्षर किया था।

सऊदी अरब से आकर निजामुद्दीन की मस्जिद में छिपे थे 70 कोरोना संदिग्ध जमाती: सभी को किया गया आइसोलेट, जाँच जारी

पटना, राँची और कोयंबटूर के बाद अब दिल्ली के निजामुद्दीन के पास के मस्जिद से 50 से 70 कोरोना संदिग्ध मरीजों को पकड़ा गया है। ये सभी कोरोना संदिग्ध दुबई की यात्रा करके आए थे और निजामुद्दीन की मस्जिद में छिप गए थे। 

इन 50 से 70 संदिग्धों को कल देर रात डीटीसी बस से लाकर लोकनायक अस्पताल के आइसोलेशन वॉर्ड में भर्ती किया गया। इन कोरोना संदिग्धों को पहले राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया था, मगर वहाँ पर पहले से ही सारी बेड भरी हुई थी, तो फिर पुलिस ने इन्हें लोकनायक अस्पताल में भर्ती करा दिया। अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि ये सभी लोग निजामुद्दीन इलाके के किसी मस्जिद में रुके हुए थे। ये सभी जमात के लिए आए हुए थे। इसमें से कई लोग तो सऊदी अरब आदि देशों से भी थे। अभी फिलहाल सभी की जाँच की जा रही है। जाँच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही इस बात का खुलासा हो पाएगा कि ये सभी कोरोना पॉजिटिव हैं या नहीं।

गौरतलब है कि हाल ही में पटना की एक मस्जिद में भी कई लोग छिपे थे। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया था तब पुलिस उन्हें वहाँ से ले गई थी। बता दें कि पटना के कुर्जी इलाके में स्थित दीघा मस्जिद में तकरीबन 12 विदेशी लोगों को छिपाकर रखा गया था। इस बात का पता चलते ही आसपास के मोहल्ले में ये खबर फैल गई और लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस भी फौरन इलाके में पहुँची और 12 विदेशियों को अपनी कस्टडी में ले लिया और क्वारंटाइन कर दिया गया।

इनसे पूछताछ में पता चला था कि सभी तजाकिस्तान के निवासी हैं और पटना में धार्मिक प्रचार प्रसार के लिए आए थे। दीघा थानेदार मनोज कुमार सिंह ने बताया था कि एहतियातन जाँच के लिए सभी को एम्स भेजा गया। ये सभी चार महीने पूर्व धार्मिक प्रचार के लिए भारत आए थे और सोमवार (मार्च 16, 2020) की सुबह नमाज के लिए दीघा मस्जिद गए थे।

ये सभी विदेशी पहले दिल्ली, फिर मुंबई में थे। इसके बाद 4 मार्च को पटना पहुँचे थे। लेकिन यहाँ इन्हें अपने काम (मजहब प्रचार) को करने के लिए अशोक राजपथ पर नूरी मस्जिद स्थित तबलिगी जमायत मुख्यालय जाना था। क्योंकि, वहीं से इन्हें किस मस्जिद में भेजना है, ये तय होता था।

ThePrint ने लॉकडाउन बढ़ाने को लेकर फैलाई अफवाह, पोल खुलते ही सोशल मीडिया पर पड़ रही गाली

देश भर में 21 दिन के लॉकडाउन के कारण निम्न वर्ग के लोगों में कितनी घबराहट है- ये हमने आनंद विहार पर इकट्ठा हुई भीड़ के रूप में पिछले दिनों देखा। हर किसी को अपने रोजगार और अपने रहने की चिंता है। ऐसे में सरकार उनकी परेशानियाँ खत्म करने के लिए बहुत प्रयास कर रही है। लेकिन ये बात सच है कि इस समय उन्हें उम्मीद से ज्यादा अफवाहें प्रभावित कर रही हैं और ये अफवाहें उनमें डर का माहौल बना रही है, जिसके कारण वे पैदल ही अपने घर लौटने पर आतुर हैं।

हालाँकि, इन अफवाहों को उनके मन से दूर करने का काम मीडिया का है। लेकिन क्या हो अगर मीडिया ही उन्हें भड़काए और कहे कि ये स्थिति अभी आगे बढ़ सकती है? जी हाँ। इस संकट की घड़ी में ये काम दि प्रिंट ने किया है। 21 दिन का लॉकडाउन सुनकर जहाँ लोग घर लौटने के लिए अस्त-व्यस्त हो गए हैं, वहीं दि प्रिंट ने एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के रूप में दावा किया है कि उनकी स्थिति सिर्फ़ 21 दिन नहीं, बल्कि आगे भी ऐसी रह सकती है यानी लॉकडाउन आगे बढ़ सकता है।

अब जैसा कि समाचार का हर पक्ष पढ़कर उस पर यकीन करने वाले लोग जानते हैं कि अभी तक सरकार की ओर से कुछ भी और किसी भी तरह की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है फिर भी दि प्रिंट के ऐसे एक्सक्लूसिव प्रयास भ्रम के माहौल में ‘हो सकता है, संभावना है’ – जैसी हेडलाइन से डर का माहौल बना रहे हैं। मगर, इनके इस अजेंडे को इस बार प्रसार भारती ने खुद खारिज किया है और कैबिनेट सेक्रेट्री ने भी सामने आकर खुद इस खबर की सच्चाई पर सरकार का मत साफ किया है।

प्रसार भारती ने दि प्रिंट की इस खबर को शेयर करते हुए बताया है कि ये फेक न्यूज है। उनका कहना है कि प्रसार भारती इस खबर को लेकर लगातार कैबिनेट के संपर्क में है और कैबिनेट ने इसे लेकर हैरानी जताई है। कैबिनेट का साफ कहना है कि अभी तक उनके पास इस तरह का कोई प्लान नहीं है कि वे लॉकडाउन को एस्टेंड करने वाले हैं।

प्रसार भारती के खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर इस खबर को लेकर दि प्रिंट की थू-थू हो रही है। हर कोई उन्हें उनके इस कारनामे के लिए शर्मिंदा होने को बोल रहा है। कुछ लोग केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को भी इस पर टैग कर रहे हैं और पूछ रहे हैं कि आखिर वो कब जाकर इन झूठी अफवाह फैलाने वाले मीडिया पोर्टल के ख़िलाफ़ एक्शन लेंगे और इन पर उचित कार्रवाई होगी। वहीं कुछ शेखर गुप्ता को इन हरकतों से बाज आने को रह रहे हैं और प्रसार भारती के जवाब को सीधा थप्पड़ बता रहे हैं।

27.5 लाख खातों में ट्रांसफर किए ₹611 करोड़: CM योगी ने दिहाड़ी मजदूरों के लिए खोला दिल

कोरोना लॉकडाउन के कारण बुनियादी जरूरतों की जद्दोजहद से जूझ रहे मजदूरों को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ी सौगात दी है। ताजा खबर के अनुसार सीएम योगी ने मनरेगा के तहत राज्य के 27.5 लाख श्रमिकों के बैंक खातों में सीधे 611 करोड़ रुपए भेजे हैं। इसके अलावा उन्होंने योजना सम्मेलन के माध्यम से कुछ श्रमिकों से बातचीत भी की है। साथ ही उन्हें योजना से अवगत कराया है। इसी दौरान उन्होंने मजदूरों से कहा कि आपको घबराने की कोई जरूरत नहीं है। आप लोगों को तीन महीन का राशन-पानी मुफ्त में दिया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा इस राहत की खबर के बाद मजदूरों ने सीएम योगी को धन्यवाद दिया है।

गौरतलब है कि इससे पहले योगी सरकार ने गरीबों के खाते में 1000-1000 रुपए ट्रांसफर कराए थे और अब ये बड़ी राहत देकर उन्होंने साबित कर दिया है कि लॉकडाउन में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के साथ प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार दिहाड़ी मजदूरों तथा गरीबों के साथ खड़ी है। प्रदेश में सरकार लगातार जनता से अनुरोध कर रही है कि वह पैसे कमाने के लिए घरों से बाहर न निकलें। सरकार की तरफ से प्रति श्रमिक महीना में 2250 रुपया प्रदान किया जा रहा है।

बता दें कि कोरोना वायरस से संक्रमण पर रोक लगाने के प्रयास करने के साथ ही यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पलायन रोकने के लिए अन्य राज्यों से सटी सीमाओं पर विशेष इंतजाम किए हैं। वहीं लॉकडाउन की स्थितियों में अपनी दिहाड़ी के लिए जूझ रहे मजदूरों को बड़ी राहत दी है। इसके अलावा उन्होंने यूपी से बाहर दिल्ली में रह रहे लोगों का ख्याल रखने के लिए राजधानी के सीएम केजरीवाल को पत्र भी लिखा है। उन्होंने केजरीवाल को आश्वासन दिया है कि वो दिल्ली के हर व्यक्ति का ख्याल रखेंगे और उन्हें उम्मीद है कि दिल्ली सरकार भी यूपी प्रवासियों के लिए स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं अन्य जरूरतों को मुहैया कराएगी।

खबरों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस से संक्रमण के 82 मामलों के सामने आने के बाद सरकार अब पूरी तरह से हरकत में है। हर तरफ लॉकडाउन का सख्ती से पालन कराने के साथ सरकार गरीबों को भोजन उपलब्ध कराने के प्रयास में भी लगी है। मेडिकल कॉलेज से लेकर आयुर्विज्ञान संस्थानों में भी मेडिकल किट के साथ अन्य दवा भी उपलब्ध कराई जा रही है। संक्रमितों के साथ संदिग्धों को भी उपचार दिया जा रहा है।

डॉक्टर की पर्ची दिखाकर लॉकडाउन में भी ले सकते हैं शराब, Online बिक्री पर भी विचार कर रही राज्य सरकार

केरल में कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के कारण शराब की बिक्री बंद होने से राज्य के विभिन्न हिस्सों से आत्महत्या के मामले सामने आ रहे हैं। इसके बाद मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने आबकारी विभाग को डॉक्टरों की पर्ची के बाद लोगों को शराब देने का निर्देश दिया है। बता दें कि शराब नहीं मिलने से परेशान होकर रविवार को केरल में दो लोगों की आत्महत्या का मामला सामने आया था।

केरल सरकार ने आबकारी विभाग को ऐसे लोगों को नशामुक्ति केंद्रों में नि:शुल्क उपचार देने के लिए कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शराब की ऑनलाइन बिक्री पर भी विचार कर रही है क्योंकि अचानक शराब न मिलने से सामाजिक समस्याएँ पैदा हो सकती हैं।

देश में कोरोना संक्रमण मामलों की संख्या बढ़कर हजार के करीब पहुँच गई है। बढ़ते मामलों और कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए देश में 21 दिनों का लॉकडाउन जारी है। भारत में कोरोना ने सबसे ज्यादा कहर महाराष्ट्र के बाद केरल में बरपाया है। केरल में अब तक कोरोना संक्रमण मामले बढ़कर 213 हो गई है, जबकि शनिवार को ही राज्य से कोरोना से पहली मौत का मामला सामने आया था। 

लॉकडाउन के चलते राज्य में शराब की दुकानें बंद है, जिससे एक अलग ही तरह की त्रासदी खड़ी हो गई है। शराब नहीं मिलने से परेशान होकर केरल में दो लोगों ने आत्महत्या कर ली। पुलिस ने बताया कि 32 वर्षीय सुनीश ने शराब न मिलने से परेशान होकर नदी में कूदकर जान दे दी तो वहीं नोफाल ‘आफ्टर शेव’ लोशन पी लिया, जिससे उसकी जान चली गई। परिवार वालों का कहना है कि एक साल पहले विदेश से लौटने के बाद वह नियमित रूप से शराब का सेवन कर रहा था। पुलिस ने कहा कि उसे शराब ना मिल पाने के बाद उसने आफ्टर शेव लोशन पिया। इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उसमे दम तोड़ दिया।

बता दें कि केरल में पहले भी कई मौकों पर शराब पर पाबंदी लगती रही है लेकिन यह पहली बार है जब देशव्यापी लॉकडाउन के कारण राज्य में शराब पर पूरी तरह से पाबंदी लग गई है। बताया जा रहा है कि केरल सरकार ने शराब को आवश्यक वस्तु की श्रेणी में रखते हुए लॉकडाउन के दौरान इसकी बिक्री जारी रखने को कहा था, लेकिन विपक्ष के दबाव में उन्हें यह फैसला वापस लेना पड़ा। इसके बाद राज्य में शराब की सारी दुकानें बंद कर दी गईं।

राज्य सरकार ने पहले सूचित किया था कि जिन लोगों में शराब का सेवन न करने के कारण बैचेनी होती हैं, वे जिलों में नशामुक्ति केंद्रों का उपयोग कर सकते हैं। केरल में राज्य द्वारा संचालित बेवरेजेस कॉरपोरेशन आउटलेट सहित शराब की दुकानों को लॉकडाउन के बाद बंद कर दिया गया।