दिल्ली हिंदू विरोधी दंगे के दौरान जाफराबाद इलाके में गोली चलाने वाले शाहरुख की गिरफ्तारी के बाद अब उसकी पिस्टल भी बरामद कर ली गई है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दिल्ली में शाहरुख के घर से पिस्टल और तीन कारतूस बरामद किए हैं। बता दें कि दिल्ली हिंसा के दौरान शाहरुख ने पुलिस कॉन्स्टेबल दीपक दहिया पर भी पिस्टल तानी थी। वहीं छानबीन के दौरान पुलिस ने शाहरुख का एक दूसरा मोबाइल फोन भी बरामद किया है। इससे पहले पुलिस ने उसकी कार और एक फोन भी बरामद किया था। दिल्ली पुलिस ने बरामद की गई सभी चीजों की जाँच के लिए फोरेंसिक लैब में भेज दिया है।
गोली चलाने के बाद से ही शाहरुख फरार चल रहा था, लेकिन पुलिस ने 3 मार्च को उसे शामली के कैराना बस स्टॉप से गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने उसे कोर्ट में पेश किया, जहाँ उसे 4 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया था। रिमांड पर लेने के बाद पुलिस ने शाहरुख की वो कार भी बरामद कर ली थी, जिसमें वो फरार हुआ था। इसके अलावा क्राइम ब्रांच की टीम उसे शामली भी लेकर गई थी। पुलिस उसे उन-उन जगहों पर भी लेकर गई, जहाँ पर वो फरार होने के दौरान रुका था।
शाहरुख ने 24 फरवरी को दिल्ली हिंसा के दौरान जाफराबाद इलाके में 8 राउंड फायरिंग की थी। फायरिंग करते हुए यह शख्स फिर भीड़ में गायब हो गया था। कार से वह सीधा नई दिल्ली में कनाट प्लेस स्थित एक पार्किंग में पहुँचा। वहाँ पुलिस से बचने के लिए वह कई घंटे तक कार के भीतर ही सोता रहा। जब उसे विश्वास हो गया कि पुलिस अब दंगों में पूरी तरह फँस चुकी होगी, तो वो पंजाब चला गया।
शाहरुख की गिरफ्तारी के बाद एसीपी अजित कुमार सिंगला ने बताया था कि वह पानीपत, कैराना, अमरोहा, बरेली में छिपते हुए शामली पहुँचा था। उसने जिस पिस्तौल से गोलीबारी की थी, उसके दो कारतूस जब्त हो चुके हैं। अभी एक कारतूस के बारे में उसने बताया है कि वो कहीं गिर गया। उन्होंने तब बताया था कि पिस्तौल बरामद नहीं हुई है। उनके अनुसार शाहरुख ने जिस पिस्तौल से गोली चलाई है, वो बिहार के मुंगेर में बनी है।
शाहरुख ने पूछताछ के दौरान बताया था कि उसने दो साल पहले अपने एक दोस्त से पिस्टल खरीदी थी। वो बस रौब झाड़ने के लिए पिस्टल का इस्तेमाल किया करता था और उसने इसीलिए इसे खरीदा था। शाहरुख ने पुलिस को बताया कि जब प्रदर्शन चल रहे थे और पत्थरबाजी हो रही थी, तभी वह तैश में आ गया और खुद को गोली चलाने से रोक नहीं पाया। फिलहाल शाहरुख चार दिन की पुलिस रिमांड पर है और उसे शनिवार (मार्च 7, 2020) को कोर्ट में पेश किया जाएगा।
दिल्ली दंगों के दौरान कई न्यूज चैनल और वेब पोर्टल ऐसे थे, जिन्होंने एकतरफा खबरें दिखाईं और भड़काऊ रिपोर्टिंग कीं। सरकार ने अब उन चैनलों पर लगाम कसना शुरू कर दिया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने पिछले महीने दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान सभी निजी सेटेलाइट टीवी चैनलों को परामर्श जारी कर उनसे हिंसा फैलाने या राष्ट्रविरोधी दृष्टिकोण को बढ़ावा देने वाली सामग्री के प्रति सावधानी बतरने को कहा था, लेकिन दो चैनल नहीं माने और दंगों के दौरान पक्षपातपूर्ण और गैरजिम्मेदार रिपोर्टिंग की। जिसके बाद सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इन दोनों चैनलों के प्रसारण पर 48 घंटों के लिए बैन लगा दिया है। ये दोनों ही चैनल केरल के हैं और इनके नाम हैं- एशियानेट न्यूज टीवी और मीडिया वन टीवी लाइव।
Ministry of Information and Broadcasting suspends broadcast of two Kerala based news channels for 48 hrs for their reporting of #DelhiViolence which was allegedly communally insensitive. pic.twitter.com/RAyGyzb2bs
मंत्रालय ने केबल टीवी नेटवर्क (विनियम) अधिनियम, 1995 के कार्यक्रम संहिता के उल्लंघन का हवाला देते हुए चैनल को दो अलग-अलग आदेश शुक्रवार को (मार्च 6, 2020) जारी किए। यह प्रतिबंध शुक्रवार की शाम 7.30 बजे से अगले 48 घंटे तक के लिए लगाया गया है। दोनों चैनलों को जारी आदेशों में उस रिपोर्टिंग का जिक्र किया गया है, जो नियमों के खिलाफ हैं और जब स्थिति काफी संवेदनशील थी। आदेश में कहा गया कि ऐसे में इस तरह की रिपोर्टिंग देश भर में साम्प्रदायिक द्वेष को भड़का सकती है।
दोनों प्रतिबंधित चैनलों पर आरोप है कि दिल्ली दंगों के दौरान रिपोर्टिंग में किसी विशेष समुदाय के पूजा स्थल पर हमले की खबर दिखाई गई है और उस पर एक समुदाय का पक्ष लिया गया। केंद्र सरकार ने अपने आदेश में कहा कि चैनलों ने दिल्ली हिंसा में पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग की थी। उनकी रिपोर्टिंग सीएए के समर्थकों द्वारा की गई हिंसा पर आधारित थी। इन चैनलों ने आरएसएस और दिल्ली पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए थे। चैनल ने हिंसा के लिए दिल्ली पुलिस और आरएसएस को जिम्मेदार ठहराते हुए आलोचना की थी।
आदेश में आगे कहा गया है कि एशियानेट ने अपनी रिपोर्ट में दिखाया कि दंगाइयों ने आने-जाने वाले लोगों को रोका और फिर उनके धर्म के आधार पर उन पर हमला किया। इसके साथ ही इसमें दिखाया गया कि हिंदू बहुल इलाके में मुस्लिमों के घरों को जलाया गया और दंगाइयों ने ‘जय श्री राम’ और आजादी के नारे साथ एक-दूसरे के ऊपर फायरिंग की। एशियानेट ने अपनी रिपोर्ट में यह भी दिखाया कि दुकानों, घरों और वाहनों को जलाए जाने के बाद भी केंद्र सरकार की तरफ से कार्रवाई नहीं की गई।
CL Thomas, Editor in Chief, MediaOne TV: I&B Ministry’s ban on MediaOne channel is unfortunate and condemnable. This is a blatant attack on free and fair reporting.MediaOne will fight legally against this unprecedented and undemocratic action by I&B ministry. #Kerala
मीडिया वन न्यूज के एडिटर इन चीफ सीएल थॉमस ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा, “मीडिया वन न्यूज चैनल पर I&B मंत्रालय का प्रतिबंध दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। यह स्वतंत्र और निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर एक जबरदस्त हमला है। मीडिया वन I&B मंत्रालय के इस अलोकतांत्रिक कार्रवाई के खिलाफ कानूनी रूप से लड़ाई लड़ेगी।” बता दें कि मीडिया वन न्यूज का स्वामित्व माध्यमम ब्रॉडकास्टिंग लिमिटेड के पास है, जो जमात-ए-इस्लामी द्वारा समर्थित है।
गौरतलब है कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने परामर्श जारी कहते हुए कहा था, “यह दोहराया जाता है कि सभी टीवी चैनलों को सलाह है कि वे किसी भी ऐसी सामग्री को लेकर सावधानी बरतें, जिनसे हिंसा भड़क सकती है। जो कानून व्यवस्था के विरूद्ध हो या जो राष्ट्रविरोधी दृष्टिकोण को बढ़ावा देता हो। टीवी चैनलों को धर्म या समुदाय पर हमला करने वाली सामग्री से भी परहेज करने का परामर्श दिया जाता है। उल्लंघन करने पर उनके ऊपर कारवाई की जाएगी।” बता दें कि साल 2016 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने संवेदनशील विवरण साझा करने का आरोप लगाते हुए पठानकोट एयर बेस पर आतंकी हमले की रिपोर्टिंग के लिए NDTV इंडिया पर एक दिन का प्रतिबंध लगा दिया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा आयोजित के ग्लोबल बिज़नेस सम्मेलन में कहा कि इकोनॉमिक हो या सोशल, आज देश परिवर्तन के एक बड़े दौर से गुजर रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बीते कुछ वर्षों में भारत वैश्विक आर्थिक व्यवस्था का भी मजबूत अंग बना है।
दिल्ली में ग्लोबल बिजनेस समिट 2020 में PM मोदी ने कोरोना वायरस के बढ़ते हुए मामलों से शुरू करते हुए कहा- “हमारी सहयोग की भावना को टेस्ट करने के लिए उसे और मजबूत करने के लिए हर युग में नई-नई चुनौती सामने आती हैं। जैसे आज ‘COVID-19′ के रूप में एक बहुत बड़ा चैलेंज दुनिया के सामने है।” पीएम मोदी ने कहा कि विचारों के इस प्रवाह में कॉमन थ्रेड ‘Collaborate To Create’ (सृजन के लिए सहयोग), सतत विकास का विजन आज की आवश्यकता भी है और भविष्य का आधार भी।
पीएम मोदी ने बिजनेस से में कहा कि एक दौर ऐसा था जब एक खास वर्ग की भविष्यवाणी के अनुसार ही चीजें चला करती थीं और जो राय उसने दे दी, वही आखिरी समझी जाती थी। लेकिन टेक्नोलॉजी के विकास से और बातचीत के लोकतंत्रीकरण से अब आज समाज के हर वर्ग के लोगों के विचार मायने रखते हैं।
एक दौर ऐसा था जब एक खास वर्ग के Predictions के अनुसार ही चीजें चला करती थीं। जो राय उसने दे दी, वही फाइनल समझा जाता था। लेकिन Technology के विकास से और Discourse के ‘Democratization’ से, अब आज समाज के हर वर्ग के लोगों की Opinion Matter करती है: PM @narendramodi
गुड गवर्नेंस के विषय पर पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार के लिए यह सिर्फ सुविधा का नहीं बाकि आस्था का मामला है।
हमारे लिए राष्ट्र निर्माण, देश का विकास, Good Governance, Convenience का विषय नहीं, बल्कि हमारा Conviction है। Conviction To Do The Right Things, Conviction To Break The Status Quo: PM @narendramodi
उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि हमने चीफ ऑफ़ डिफेंस (Chief of Defence Staff) बना कर स्थिति को बदला और हमारी सेनाओं में बेहतर तालमेल को सुनिश्चित किया। उन्होंने कहा कि हम कई दशकों से सीडीएस की नियुक्ति की बात सुनते आ रहे थे, लेकिन हमने ये काम कर के दिखाया।
हमने Chief of Defence Staff (CDS ) बनाकर Status Quo बदला और हमारी सेनाओं में बेहतर Synergy और Collaboration को सुनिश्चित किया: PM @narendramodi
पीएम मोदी ने कहा कि आर्थिक हो या सामाजिक, आज देश परिवर्तन के एक बड़े दौर से गुजर रहा है। बीते कुछ वर्षों में भारत ग्लोबल इकनॉमी सिस्टम का और भी मजबूत अंग बना है। लेकिन अलग-अलग कारणों से अंतरराष्ट्रीय स्थितियाँ ऐसी हैं कि ग्लोबल इकनॉमी कमजोर और कठिन हालत में है।
अपने भाषण में उन्होंने कहा कि 2019 में देश में करीब 48 बिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया और ये ग्रोथ 16% से ज्यादा रही है। उन्होंने बताया कि इसी तरह भारत में पिछले साल 19 बिलियन डॉलर का प्राइवेट इक्विटी और वेंचर केपिटल इंवेस्टमेंट आया और इसमें भी वृद्धि 53% से ज्यादा की वृद्धि रही।
2019 में देश में करीब 48 Billion Dollar का Foreign Direct Investment आया। ये ग्रोथ रही 16 परसेंट से ज्यादा। इसी तरह भारत में पिछले साल 19 Billion Dollars का Private Equity And Venture Capital Investment आया। इसमें भी ग्रोथ रही 53 परसेंट से ज्यादा: PM @narendramodi
सड़क परिवहन मंत्रालय की कार्य क्षमता पर प्रकाश डालते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सतत विकास के मॉडल के अंतर्गत ही अलग-अलग सेक्टरों पर, अलग-अलग क्षेत्रों में इसके परिणाम स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। 6 साल पहले देश में हाइवे निर्माण की रफ्तार प्रति दिन करीब 12 किलोमीटर हुआ करती थी, जबकि आज ये 30 किलोमीटर प्रति दिन के आसपास है।
अलग-अलग सेक्टरों पर, अलग-अलग क्षेत्रों में इसके परिणाम स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। 6 साल पहले देश में Highways Construction की Speed, per day करीब 12 किलोमीटर थी। आज ये 30 किलोमीटर के आसपास है: PM @narendramodi
इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह भी एक अनुभव रहा है जिस क्षेत्र में प्राइवेट सेक्टर को प्रतिस्पर्धा करने की छूट दी जाती है, वो तेजी से आगे बढ़ता है। इसलिए हमारी सरकार अर्थव्यवस्था के ज्यादा से ज्यादा सेक्टर्स को निजी क्षेत्र के लिए खोल रही है।
ये भी एक अनुभव रहा है जिस क्षेत्र में प्राइवेट सेक्टर को Compete करने की छूट दी जाती है, वो तेजी से आगे बढ़ता है। इसलिए हमारी सरकार अर्थव्यवस्था के ज्यादा से ज्यादा सेक्टर्स को Private Sector के लिए खोल रही है: PM @narendramodi
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत पाँच ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य तक पहुँचे इसके लिए हमारी सरकार काम कर रही है। हम लेबर रिफॉर्म्स की दिशा में भी लगातार काम कर रहे हैं। इसके अलावा कॉर्पोरेट टैक्स की ओर ध्यान दिलाते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत उन प्रमुख देशों में शामिल है जहाँ कोर्पोरेट टैक्स सबसे कम है इसी कारण विदेशी निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने रेलवे में हुए सुधारों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि हमने रेलवे क्षेत्र में एक नए काम की शुरुआत की है। पहली बार ट्रेन देर होने पर पैसा वापसी की शुरुआत हुई है। तेजस एक्सप्रेस से हमने इसकी शुरुआत की है।
उन्होंने कहा कि छह साल पहले हमारे एयरपोर्ट्स करीब 17 करोड़ यात्रियों को हैंडल करता था, अब 34 करोड़ से ज्यादा को हैंडल कर रहे हैं। छह वर्ष पहले हमारे मुख्य पोर्ट्स पर कार्गो हैंडलिंग 550 मिलियन टन के आसपास थी, अब ये बढ़कर 700 मिलियन टन के आसपास पहुँच गई है।
वैसे तो होली का त्यौहार देश-विदेश में हर वर्ष अपने-अपने तरीके से मनाया जाता है, लेकिन ब्रज की होली का महत्व कुछ अलग ही है। ब्रज में बसे मथुरा, वृंदावन, बरसाना और नंदगाँव में मनाई जाने वाली होली की प्रसिद्धि कुछ इस कदर है कि यहाँ की होली देखने के लिए हर वर्ष लाखों लोग देश-विदेश से एकत्र होते हैं। तो अब आपको भी लिए चलते हैं। ब्रज की होली के रंग में वह भी अपनों के संग, चलिए।
वैसे तो फाल्गुन माह लगते ही ब्रज में होली के त्यौहार की शुरूआत हो जाती है, लेकिन सबसे ज्यादा अपनी ओर आकर्षित करने वाली और अनूठी होली बरसाना की लड्डू मार और लट्ठ मार है। तो हम भी कहाँ पीछे रहने वाले थे। मंगलवार को बरसाना राधा रानी के मंदिर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने पहुँच कर लड्डू मार होली का शुभारंभ कर दिया था। इसके बाद प्रदेश की सबसे बड़ी ‘माताजी गोशाला’ में पहुँचे योगी आदित्यनाथ ने गोवंशों के लिए खोले गए अस्पताल का शुभारंभ किया। उनके बरसाना से रवाना होते ही दूर दराज से पहुँच रहे लोगों की भीड़ जुटना शुरू हो जाती है। कोई बरसाना में मौजूद मंदिरों के दर्शन कर रहा था तो कोई मंदिरों में खेले जाने वाली लड्डू मार होली का आनंद ले रहा था। यही क्रम देर रात तक चलता रहा।
राधा-रानी मंदिर में दर्शन करने के बाद गुलाल उड़ाते श्रद्धालु
बुधवार का दिन लट्ठ मार होली का था। सुबह से ही राधा-रानी मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते में श्रद्धालुओं का ताँता लगा हुआ था। किसी के हाथ में गुलाल था तो किसी के हाथ में कान्हा की मूर्ति थी और हर किसी की जुबान पर था तो वह बस एक ही रट राधे-राधे, राधे-राधे। बरसाने में सबसे अधिक ऊँचाई पर स्थित राधा रानी मंदिर में दर्शन करने वालों की भीड़ एक के बाद एक हजारों की संख्या में जुट चुकी थी। सभी को मंदिर के कपाट खुलने का इंतजार था। इससे पहले कोई ध्यान मुद्रा में था तो कोई नाचते-गाते राधा रानी के प्यार में डूबा हुआ था। घड़ी में साढ़े आठ बजते ही एक जोरदार जयकारा लगता है, बोलिए… राधा रानी सरकार की जय। इसी के साथ मंदिर के कपाट खुल जाते हैं। चारों ओर से फूल- माला, मिठाई गुलाल की बरसात होने लगती है। इसी के साथ ढ़ोल नगाड़ों के साथ नृत्य होने लगता है।
बरसाना के मान मंदिर में कान्हा की मूर्ति के साथ झूमते श्रद्धालू
मंदिर से राधा-रानी के दर्शन कर श्रद्धालु राधे-रानी की परिक्रमा करने में जुट गए। रास्ते में जगह-जगह हुरियारों के झुंड पिचकारी लिए सखियों पर चला रहे थे और गलियों में जमकर गुलाल उड़ा रहे थे। यह क्रम करीब 2 बजे तक जारी रहा। इसके बाद नंदगाँव से दुरियारों का बरसाने पहुँचने का सिलसिला शुरू हो जाता है और उधर बरसाने की हुरियारिन हाथों में लाठी लेकर घरों से निकलकर नजदीकी तिराहे और नुक्कड़ों पर एकत्र होने लगती है। हर एक पल बरसाने की गलियाँ लट्ठमार होली देखने के लिए भरती चली जाती है। छतों से गुलाल की बारिश हो रही है और गलियों में बिखरी ब्रज की रज को हर कोई स्पर्श करने को आतुर है।
नंदगाँव से बरसाना पहुँचे हुरियारों को देखते ही लट्ठ लेकर बेसब्री से इंतजार कर रहीं बरसाने की हुरियारिन उन पर टूट पड़ती है। हुरियारे एक के बाद एक हाथों में डाल लेकर अपनी रक्षा कर रहे हैं और हुरियारिन कभी हल्की लाठी मारकर प्रेम का संदेश देती हैं तो कभी मजबूती से लाठी चलाकर महिला सशक्तीकरण का अहसास कराती है। देर शाम होते ही मौसम भी हुरियारों के साथ होली खोलने लगता है और हल्की बूदों के साथ बरसात शुरू हो जाती है। लट्ठ मार होली के दौरान हुई बरसात ने रंग में भंग नहीं डाला बल्कि छतों से उड़ रहे गुलाल में मिलकर बरसात की बूंदों ने हर एक गली को रंग दिया, जिसमें हर कोई हुरियारा लोटपोट नज़र आया।
सूरज के ढलते ही यह सिलसिला थमने लगता है और नंदगाँव से आने वाले हुरियारे बरसाना से विदा लेते ही अपने गाँव को लौटने लगते हैें। इसके अगले दिन नंदगाँव में लट्ठमार होली खेली जाती है।
बरसाना में लट्ठमार होली खेलने के बाद नंदगाँव लौटते हुरियारे
अभी तक आपको यदि लगता था कि मीडियाकारों की सबसे बुरी नौकरी तैमूर के डायपर को कवर करना था, तो आपको न्यूज़लॉन्ड्री के फास्ट ट्रैक कोर्ट न्यायाधीश पतझड़ कुमार से मिलना चाहिए। पतझड़ कुमार मीडिया घरानों की रिपोर्ट्स में कुल लिखे गए शब्दों की गिनती करते हैं और बताते हैं कि कौन मीडिया कहा जा सकता है और कौन नहीं।
पतझड़ कुमार को जो जिम्मेदारी सौंपी गई है वह बेहद घिनौनी है, उसे घात लगाकार बैठे रहना होता है, और किसी भी तरह से साबित करना होता है कि कौनसा मीडिया किस गली-मोहल्ले से गुजर रहा है। इसके लिए उन्हें जेबखर्च से अपने रिक्शा का खर्चा खुद उठाना होता है। कम से कम पतझड़ कुमार की वेबसाइट के दयनीय हालात तो यही साबित करते हैं।
newslaundry
दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्टिंग से एक ओर जहाँ ऑपइंडिया पीड़ितों का हाल दुनिया के सामने लाने में कामयाब रहा, वहीं दूसरी ओर मीडिया में सदियों से मठाधीशी जमाए एक वर्ग ऐसा भी था, जिस पर यह सब देखकर तुषारापात हुआ कि समाज के जिस वर्ग को अनदेखा करते हुए वह हमेशा अपने प्रोपेगैंडा की रोटियाँ सेंकता रहा, उनकी बात सामने लाने वाले कुछ लोगों ने मोर्चा संभाल लिया है।
वरना अब तक यही देखा जाता था कि किस तरह से दंगों के दौरान हिन्दुओं के साथ हो रहे अत्याचारों के बजाय कोई वामपंथी मीडिया फ्रेंडली कहानी को ही दंगों का मूल बिंदु बना दिया जाता था। इस तरह की कहानी को ‘वायरल’ करने के लिए अनुराग कश्यप जैसे बॉलीवुड निर्देशक तो मौजूद रहते ही थे।
ऑपइंडिया द्वारा की गई हिन्दू विरोधी दंगों की ग्राउंड रिपोर्टिंग ने तथाकथित फैक्ट चेकर्स को ही नहीं बल्कि वामपंथी मीडिया गैंग की कुछ घातक टुकड़ियों, जो अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए भी मशक्कत कर रहे हैं, को भी परेशान किया है। यही कारण है कि वामपंथ के इन वॉच डॉग्स को ‘फैक्ट चेक’ जैसे अपने झुनझुने के साथ बाहर आने को मजबूर किया है।
न्यूज़लॉन्ड्री जैसे तथाकथित मीडिया गिरोह के रिपोर्टर, पतझड़ कुमार (बदला हुआ नाम) का पहला दावा है कि ऑपइंडिया कि ग्राउंड रिपोर्ट, ग्राउंड रिपोर्ट न होकर ‘तथाकथित ग्राउंड रिपोर्ट’ है क्योंकि इसमें शब्द कम हैं। पतझड़ कुमार की मानें तो ग्राउंड रिपोर्ट वह होती है, जिसमें रवीश कुमार जैसे लोग अपना दंगा साहित्य का लप्रेक ठूँसकर उसे मारपीट कर, ठोक-पीटकर कम से कम एक हजार शब्दों तक पहुँचाने की कोशिश करते हैं।
अक्सर संपादक द्वारा मार्च के महीने में ‘देख लिए जाने’ की धमकी के अंतर्गत मीडिया का एक बड़ा वर्ग ऐसे हालातों में अपनी रिपोर्ट्स में अपने रिपोर्टर्स को फैज़ से लेकर अल्ताफ राजा तक के गानों को लिखने की धमकी देते हुए भी नजर आते हैं। तनख्वाह कटने के भय से पतझड़ कुमार ने चार शब्द अतिरिक्त जोड़ते हुए इसमें अपना दर्द करूण रस में व्यक्त करते हुए लिखा है कि ऑपइंडिया ने अपनी ग्राउंड मात्र 346 शब्दों में व्यक्त की है। वास्तव में किसी रिपोर्ट में जब आप अंदर से पूरी तरह से आश्वस्त हों कि आपके पास खंडन करने के लिए कुछ नहीं है, तभी सारा ध्यान मैटर छोड़कर शब्द गिनने पर केंद्रित हो जाता है।
न्यूज़लॉन्ड्री की पड़ताल का ‘बड़ा खुलासा’ इस स्क्रीनशॉट में खुद देख सकते हैं –
पतझड़ कुमार का दूसरा बड़ा दावा (पतझड़ कुमार के अनुसार, पड़ताल) यह है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में मुस्लिम भीड़ द्वारा मंदिर में की गई तोड़फोड़ पर ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट झूठी है। पतझड़ कुमार का कहना है कि ऑपइंडिया ने मंदिर में पुजारी से बात नहीं की, जबकि स्वयं न्यूज़लॉन्ड्री की मानसिक विष्ठा में यह जिक्र कहीं भी नहीं किया गया है कि पुजारी दंगों के समय वहाँ मौजूद ही थे। और यह ‘स्थानीय लोग’ ही थे, जिन्होंने दंगाइयों के इस पूरे कृत्य की जानकारी ऑपइंडिया के साथ शेयर की थी।
न्यूज़लॉन्ड्री का दर्द यह जरूर हो सकता है कि स्थानीय नागरिकों, जिनसे कि ऑपइंडिया ने बातचीत की, उनमें से किसी ‘अब्दुल’ या ‘मोहम्मद’ को मंदिर का पुजारी नहीं बताया गया है। सबसे ज्यादा निराशाजनक बात न्यूज़लॉन्ड्री के इस ‘बड़े खुलासे’ में यह थी कि उसने इस बात का कहीं भी जिक्र नहीं किया है कि उसने यह रिपोर्ट ‘भाँग’ खाने के बाद तैयार की है।
ख़ास बात यह है कि न्यूज़लॉन्ड्री द्वारा शेयर किए गए वीडियो में पुजारी खुद कहते नजर आ रहे हैं कि वो करीब साढ़े छ घंटों तक पत्थरबाजी और पेट्रोल बम की घटनाओं के बीच अपने ही घर में बंधक बने रहे। यहाँ पर आप जानते हैं कि पेट्रोल बम और पत्थरों के ढेर आम आदमी पार्टी नेता ताहिर हुसैन के घर से बरामद हुए, यह बात साबित भी हो चुकी है। यह मंदिर ताहिर हुसैन के घर के सामने गली नंबर-5 में एक-दो मकान छोड़कर है, मंदिर से पहले पड़ने वाले ‘अरोड़ा फर्नीचर’ को भी ताहिर हुसैन के घर से आने वाली दंगाइयों की भीड़ ने पहले लूटा फिर जला कर खाक कर दिया।
भाँग खाने के बाद न्यूज़लॉन्ड्री की सनसनीखेज रिपोर्ट
न्यूज़लॉन्ड्री ने जिस पुजारी का बयान अपनी मानसिक विष्ठा में लिखा है, उसमें पुजारी गोकुल चन्द्र शर्मा ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह दंगों के समय कमरे में बंद रहे। इसके बाद की सभी बातें ‘संदेह’ के रूप में ही उन्होंने न्यूज़लॉन्ड्री के किसी सूँघकर फैक्ट चेक करने वाले सज्जन से की है। पुजारी ने कहा है कि पेट्रोल बम फेंके गए, जब वो कमरे में बंद थे। अगर माहौल इतना ही गंगा-जमुनी था, तो फिर पुजारी को अपने बेटे, दो बेटियों और पत्नी को ‘कहीं’ क्यों भेजना पड़ा, यह जिक्र कहीं भी नहीं किया गया है।
न्यूज़लॉन्ड्री की तथाकथित ‘पड़ताल’ से लिया गया स्क्रीनशॉट
सबसे बेहतरीन इस प्रकरण में न्यूज़लॉन्ड्री यह कर सकती थी कि वह मंगल ग्रह पर जाकर साबित कर आती कि वहाँ किसी भी तरह का कोई दंगा नहीं हुआ है और ऑपइंडिया अपनी ग्राउंड रिपोर्ट्स में झूठ कह रहा है। लेकिन उसने एक ऐसे मंदिर के पुजारी से पड़ताल करनी जरुरी समझी, जो खुद कह रहा है कि जब छतों पर आगजनी की जा रही थी, पेट्रोल बम फेंके जा रहे थे, तब वो 6 घंटों तक कमरे में बंद रहा और उसने अपने बेटे, बेटी और पत्नी को डर के कारण कहीं छुपा दिया है। लेकिन इस पूरी बातचीत में खुलासा क्या है, इसके लिए शायद अभी न्यूज़लॉन्ड्री को अन्य जानकारों की मदद लेनी होगी।
इस पर सबसे हास्यास्पद बात यह है कि न्यूज़लॉन्ड्री ने जिस पुजारी की बात पर अपनी छाती पीटने का प्रयास किया है, उसी के शब्दों में ‘शायद’ ‘हो सकता है’ ‘हुआ होगा’ जैसे कई अलंकरण इस्तेमाल किए गए हैं, जबकी ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान जिन लोगों से ऑपइंडिया ने बातचीत की, वो सभी लोग अपनी आँखों से देखी हुई घटनाओं के बारे में पूरी तरह से आश्वस्त थे। और वही बातें बिना किसी ‘दंगा साहित्य’ के कलेवर में लपेटकर सामने भी रखी गईं।
न्यूज़लॉन्ड्री की ‘पड़ताल’ से लिया गया स्क्रीनशॉट
न्यूज़लॉन्ड्री की इस विरोधाभासी विष्ठा के ठीक अगले पैराग्राफ में लिखा गया है कि मंदिर के पुजारी ने मंदिर में हमले की बात से मना किया, जबकि ‘संभावित’ शार्ट टर्म मेमोरी लॉस जैसी समस्याओं से ग्रसित न्यूज़लॉन्ड्री के पतझड़ कुमार ने अपने ठीक एक पैराग्राफ पहले ही लिखा है कि मंदिर के पुजारी ने कहा कि मंदिर की छतों पर पेट्रोल बम से हमला किया गया जिस कारण बाहर रखे कपड़े और तिरपाल जल गया
न्यूज़लॉन्ड्री के पतझड़ कुमार के ‘खुलासे’ में सबसे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण जानकारी यह थी कि उनके अनुसार, मंदिर की जाँच करने जाने के बावजूद भी वो हर वाक्य से पहले ‘शायद’ और ‘संभव है’ जैसे शब्दों से वो अपनी बवासीर का इलाज करते हुए देखे गए हैं। यदि वह हमारी सलाह लेते तो हम यह जरूर कहते कि किसी भी प्रकार की बवासीर और भगंदर के इलाज की सबसे उपयुक्त जगह हकीम लुकमान दवाखाना होता है, ना कि मंदिर का कोई पुजारी। पूज्य नेहरू के समय भी हकीम लुकमान ही ऐसे रोगों के विशेषज्ञ हुआ करते थे और आज भी, इसलिए उन्हें ‘जस्ट फॉर अ चेंज’ जैसी चीजों के नामा पर ऐसे खतरनाक प्रयोगों से बचना चाहिए।
आप सोचिए, ऑपइण्डिया की टीम इन दंगों के दौरान ही ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए दंगा पीड़ित इलाकों में उतरी थी, वहीं दूसरी ओर न्यूज़लॉन्ड्री और ऑल्ट न्यूज़ जैसे पत्थर को बटुआ साबित करने वाले लोग दंगों के बाद, सब कुछ शांत हो जाने के भी दस दिन बाद घटनास्थल से अपनी सुविधानुसार कुछ घटनाओं को ले आते हैं और उन्हें ‘फैक्ट चेक’ का नाम देते हैं।
आखिरकार न्यूज़लॉन्ड्री अपने चिरपरिचित वामी शगल पर लौटते हुए वही लाइने लिखते हैं, जिस एक लाइने से सैकड़ों लिब-लेफ्ट विचारकों’ को सेकंड भर में स्खलन हो आता है ,यह लाइन है- ‘मंदिर की रक्षा मुस्लिमों ने की।’
खैर, न्यूज़लॉन्ड्री एक बार खुद ही स्वयं पर चुटकुला बनाते हुए नजर आता है। यदि न्यूज़लॉन्ड्री के कारोबार पर नजर डालें तो आपको कारोबार की जगह ‘औकात’ जैसी चीजें नजर आती हैं। हालाँकि, औकात जैसे शब्दों का प्रयोग निंदनीय है लेकिन जिस तरह से ये मीडिया गिरोह हिन्दुओं के साथ हुई बर्बरता को अपने ‘फैक्ट चेक’ से छुपाने का प्रयास करते नजर आ रहे हैं, इससे बेहतर विशेषण शायद ही कोई और बचता हो।
न्यूज़लॉन्ड्री की वेबसाइट ट्रैफिक देखने से पता चलता है कि इनकी खबरों को पढ़ने वाले लोगों की संख्या इनके पूरे स्टाफ से भी कम है। ऐसे में मीडिया के नाम पर जीवंत चुटकुला बन चुके न्यूज़लॉन्ड्री की इस ‘पड़ताल’ को कितनी गंभीरता से लिया जाना चाहिए वह हम सभी जानते हैं।
फिर भी, अरविन्द केजरीवाल के साथ तस्वीरें सामने आने के बाद खबरों की धुलाई करने का दावा करते हुए रोजाना अपने अखरोट छिलवाने वाले न्यूज़लॉन्ड्री के फाउंडर जरूर इस बात पर ध्यान दें कि उनकी पहली लड़ाई अपने अस्तित्व से है। ऑपइंडिया की लोकप्रियता से बौखलाने से पहले उसे अपनी पत्रकारिता के मानक रवीश कुमार जैसों की गोद से उतरकर उनसे पूछना चाहिए कि अनुराग मिश्रा का क्या हुआ? उन्हें क्रूरता से चार सौ बार चाकू गोदकर मार दिए गए आईबी अधिकारी अंकित शर्मा के घरवालों से बयान लेने जाना चाहिए। अगर वो इन लोगों के परिवार वालों को ढूँढने में सहायता चाहते हैं तो खुलकर हमसे सम्पर्क करें, हम उन्हें पीड़ितों के परिवारों तक ले जाने को तैयार हैं।
सस्ते दैनिक इंटरनेट से तैयार किए जा रहे न्यूज़लॉन्ड्री जैसे इंटरनेट आतंकी ग्राउंड रिपोर्ट में इस्तेमाल किए गए शब्दों को गिनने से पहले अपने अस्तित्व पर एक नजर डालकर जरूर अपना आँकलन करे। उसे देखना चाहिए कि जिनका पूरा अस्तित्व ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट्स को गलत साबित करना रह गया हो, और अब उनके नाम को इस्तेमाल कर अपनी प्रासंगिकता बचाए रखना चाहता हो, क्या वह इस काबिल भी है कि मृतक दिलबर नेगी के परिवार से बात कर सके? वही बीस साल का दिलबर नेगी जिसको आग में झोंकने से पहले दंगाइयों ने उसके हाथ-पैर काट डाले थे।
दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल के घर जाकर भी इन फैक्ट चेकर पतझड़ कुमारों को एक रिपोर्ट तैयार करनी चाहिए और ऑपइंडिया की तरह ही पूरी हिम्मत के साथ लिखना चाहिए कि रतनलाल को मारने वाली गोली किसी मोहम्मद शाहरुख़ की ही बन्दूक से निकली होगी या उन पत्थरों में से ही कोई एक पत्थर हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की जान लेने को निकला था, जो ताहिर हुसैन के घर से बरामद हुए। जो चाँदबाग में चले।
लेकिन आसमानी गुलेलों और पेट्रोल बम की पड़ताल करना न्यूज़लॉन्ड्री जैसों के लिए अपने अन्नदाताओं को निराश करने वाली बात होगी। इसलिए अपने अन्नदाताओं के खिलाफ जाकर पतझड़ कुमार को कोई कदम नहीं उठाना चाहिए, ऐसा न हो कि उनके खिलाफ जाते ही भारत में बेरोजगारी के आँकड़ों में पतझड़ कुमार भी योगदान करते हुए नजर आएँ।
फिर भी, सबसे पहली प्राथमिकता पतझड़ कुमार को अपनी मानसिक भगंदर को देनी चाहिए, इसके लिए उन्हें ग्राउंड रिपोर्टिंग में इस्तेमाल किए गए शब्द गिनकर नहीं बल्कि हकीम लुकमान के पास जाना चाहिए, ज़ुबैर के पास नहीं, वो ‘पिंचर’ बनाता है और पुरानी पिंचर ट्यूब बदलता है। हकीम का काम आज भी लुकमान ही करता है। और हाँ ,जलो मत, बराबरी करो।
चलते-चलते शिव मंदिर पर क्या हुआ था, उससे सम्बंधित कई बयान हमारे पास मौजूद हैं, कुछ ने वीडियो पर बोला, कुछ के ऑडियो हैं। और कुछ के हम दिखा नहीं सकते क्योंकि वे अभी भी डरे हुए हैं और उन्होंने अपनी पहचान छिपाने की बात कई बार दोहराई है।
यूपी में बढ़ती जनसंख्या को थामने के लिए योगी सरकार आने वाले दिनों में कठोर कदम उठा सकती है। मीडिया में आई रिपोर्ट्स के अनुसार, योगी सरकार 2 बच्चों से ज्यादा होने पर दम्पत्ति को सरकारी समाज कल्याण स्कीमों से बाहर का रास्ता दिखाने के साथ-साथ उन्हें पंचायत चुनाव लड़ने से भी रोकने का नियम बनाने पर विचार कर रही है।
खबर के अनुसार यूपी के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने बुधवार (मार्च 04, 2020) को कहा था कि वो विभिन्न राज्यों की जनसंख्या नीति का अध्ययन कर रहे हैं और उन में से जो उनके लिए सबसे बेहतर होगी, उसे देश के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश के लिए लेकर आएँगे।
स्वास्थ्य मंत्री ने आगे बताया था कि जनसंख्या नीति के लिए ड्राफ्टिंग का काम एक विशेषज्ञ समूह को सौंपा गया है। यूपी में अंतिम बार जनसंख्या नीति वर्ष 2000 में बनाई गई थी। इस समूह के डॉ बद्री विशाल ने जनसंख्या के उत्तर-दक्षिण डिवाइड पर जोर डालते हुए बताया कि जहाँ उत्तर के राज्य इस जनसंख्या नियंत्रण के मामले में संघर्ष करते दिखते हैं, वहीं भारत के दक्षिणी राज्यों ने इस विषय पर बढ़त हासिल की हुई है वो अपनी जनसंख्या रोकने में कामयाब हुए हैं।
उन्होंने कहा, “कई सारे राज्य विशेषकर राजस्थान और मध्य प्रदेश, जो हमसे आबादी में कहीं कमतर हैं, ने भी इस प्रकार की योजनाओं को लागू किया हुआ है जो ज्यादा बच्चों को जन्म देने को हतोत्साहित करती हैं। इन दोनों राज्यों में जिनके दो से ज्यादा बच्चे हैं, उन्हें पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं है, हम भी इस नियम को अपनाने के पक्षधर हैं।”
मीडिया में चल रहीं खबरों के अनुसार यूपी सरकार राज्य में हो रहे जनसंख्या विस्फोट को थामने के लिए दो कदम उठा सकती है- पहला, दो से ज्यादा बच्चों वाले दम्पत्तियों को राज्य सरकार की वेलफेयर स्कीम्स से बाहर किया जा सकता है, और दूसरा ऐसे दम्पत्तियों को राज्य की नौकरियों से भी वंचित किया जा सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यूपी में कुल प्रजनन दर 3 है, जो कि भारत की औसत कुल प्रजनन दर 2.3 के मुकाबले काफी ऊँची मानी जाती है। कुल प्रजनन दर (टोटल फर्टिलिटी रेट-टीएफआर) किसी महिला के प्रजनन समयकाल यानी 15 वर्ष से 49 वर्ष के दौरान उसके द्वारा बच्चों को जन्म देने की संभावित संख्या है। उच्च टीएफआर वाले देश के 145 जिलों में से अकेले यूपी के 40% जिले शामिल हैं।
यूपी सरकार ने राज्य के लिए 2015 तक औसत प्रजनन दर लक्ष्य को 2.1 तक लाना तय किया था, किन्तु इस लक्ष्य को केवल राज्य के नगरीय क्षेत्रों के संदर्भ में प्राप्त किया जा सका जबकि ग्रामीण क्षेत्र इस लक्ष्य से कहीं दूर ठिठके नजर आते हैं। इस बार की नीति में मुख्यतः ग्रामीण इलाकों पर ध्यान केंद्रित किये जाने की संभावना हैं। यूपी की वर्तमान आबादी लगभग 22 करोड़ है जो प्रत्येक दस वर्ष में 20% की गति से बढ़ रही है।
जनसंख्या नियंत्रण की जरूरत को प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने अगस्त 15, 2020 को दिए भाषण में रेखांकित किया था। स्वतन्त्रता दिवस पर लाल किले से भाषण देते वक्त मोदी ने समाज का एक छोटा हिस्सा जो अपने परिवार को छोटा रखता है, वह देशभक्त है, जिसे सम्मान की नजरों से देखे जाने की जरूरत है। 19 फरवरी को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी जनसंख्या नियंत्रण की जरूरत पर बल देते हुए कहा था कि बढ़ती बेरोजगारी का संबंध बढ़ती जनसंख्या से है।
दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों में गिरफ्तार आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन को आज 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आईबी के अंकित शर्मा की नृशंस हत्या के मामले में मुख्य आरोपित ताहिर हुसैन को दिल्ली पुलिस ने आज शुक्रवार को कड़कड़डुमा कोर्ट में जज के घर पेश किया था, जिन्होंने आरोपित को 7 दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया।
दिल्ली दंगों में मुख्य भूमिका निभाने वाले पार्षद ताहिर हुसैन को गुरुवार को उस समय दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया जब वह राउज एवेन्यू कोर्ट में सरेंडर करने की तैयारी में था। पुलिस अब तक ताहिर हुसैन के दो मोबाइल की तलाश कर रही है, जो अभी तक नहीं मिल सके हैं।
गौरतलब है कि ये वही ताहिर हुसैन है जिसकी चाँद बाग़ स्थित बिल्डिंग को मुस्लिम जिहादी भीड़ ने आस पड़ोस के हिन्दू घरों और गलियों पर हमले के लिए इस्तेमाल किया था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार 25 फरवरी को दिल्ली की हिन्दू विरोधी इस जिहादी हिंसा के दौरान आईबी के अंकित शर्मा को ताहिर हुसैन की इसी बिल्डिंग में खींच कर ले जाया गया था, जिनका शव बाद में चाँदबाग़ के नाले से मिला था।
आईबी के अंकित शर्मा को 4-6 घंटों तक 400 बार चाक़ू गोद गोद कर मारा गया था जिनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों तक ने कहा था कि ऐसी क्षत-विक्षत लाश उन्होंने कभी नहीं देखी। इस क्रूर अमानुषिक हत्याकांड और यातना को अंजाम देने में कम से कम 6 लोगों के शामिल होने की बात डॉक्टर बताते हैं। उन्होंने कहा है कि अंकित शर्मा को 6 लोगों ने लगातार 2 से 4 घंटे तक 400 बार चाकुओं से गोदा होगा। साथ ही, उनकी आँत को शरीर से बाहर निकाल दिया था। फोरेंसिक डॉक्टरों ने कहा कि इस तरह से यातना का शिकार और क्षत-विक्षत बॉडी उन्होंने अपने जीवन में कभी नहीं देखा।
इससे पहले, अंकित शर्मा को AAP के पार्षद ताहिर हुसैन के गुंडे घसीट कर ले गए और मार डाला। उनके पिता रवींद्र शर्मा ने बेटे की मौत के लिए आम आदमी पार्टी के ताहिर हुसैन को जिम्मेदार बताया है। अंकित आईबी में कार्यरत थे। उनके पिता भी दिल्ली पुलिस में बतौर हेड कॉन्स्टेबल कार्यरत हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि केजरीवाल के निगम पार्षद ताहिर हुसैन के घर से लगातार बमबारी और पत्थरबाजी होती रही।
चारा घोटाले के देवघर ट्रेजरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राजद प्रमुख लालू यादव से 3 अप्रैल तक जवाब देने को कहा है। लालू यादव को इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट से जमानत मिली थी जिसके बाद सीबीआई (CBI) ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव को नोटिस भेज जवाब दाखिल करने को कहा है, इससे लालू यादव की चुनौतियाँ बढ़ सकती है।
रिपोर्ट्स के अनुसार देवघर ट्रेजरी केस में आधी सजा काट लेने के आधार पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को 12 जुलाई 2019 को झारखंड हाईकोर्ट से 50-50 हजार रूपए के दो निजी मुचलके पर जमानत मिली थी। झारखंड हाईकोर्ट के वकील प्रभात कुमार ने बताया कि सीबीआई की जमानत के खिलाफ अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव को नोटिस भेजा है, जिस पर उन्हें 3 अप्रैल तक जवाब दाखिल करना है।
इस केस में सीबीआई कोर्ट से लालू यादव को साढ़े 3 साल की सजा और 10 लाख रुपए का जुर्माने भरने का हुक्म दिया था। देवघर ट्रेजरी केस के अलावा चारा घोटाले के तीन दूसरे मामले में भी राजद प्रमुख लालू यादव सजा काट रहे हैं। लालू यादव फ़िलहाल राँची स्थित रिम्स में अपना इलाज करवा रहे हैं।
लालू यादव को लेकर दो और तरह की खबरें भी आज सुर्खियाँ बटोरती रहीं। पहली जिसमें कोरोना वायरस से डर के कारण लालू यादव के टहलना बंद करने का जिक्र है जबकि आमदिनों में वो गलियारे में टहला करते थे और दूसरी खबरें जिसमें झारखंड में अपनी मन माफिक सरकार आने के बाद उनके द्वारा जेल के नियम कानून को ताक पर रखकर राजनीतिक दरबार लगाने की खबरें भी शामिल है। जिससे उनकी सुरक्षा नियमों की भी धज्जियाँ उड़ रही हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव और तेजस्वी यादव की बेरोजगारी यात्रा को लेकर लालू से मिलने गुरुवार को रिम्स में कई लोगों के पहुँचने की खबर आई, जो जेल के नियम कानून के खिलाफ है। ध्यातव्य है कि लालू यादव रिम्स में किडनी की गंभीर बीमारी समेत लगभग 12/13 बिमारियों का इलाज करवा रहे हैं।
शिवसेना के तीन पदाधिकारियों को मुंबई पुलिस ने तीन साल पुराने एक मामले में नवी मुंबई से गिरफ्तार किया है। तीनों की गिरफ्तारी ऐसे समय में की गई है कि जब महाराष्ट्र की मौजूदा सरकार में शिवसेना भी गठबंधन का एक प्रमुख हिस्सा है और साथ ही शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के सीएम हैं। दरअसल 2017 में कश्मीर घाटी में अमरनाथ मंदिर से लौट रहे हिंदू तीर्थयात्रियों पर आंतकी हमला किया गया था, जिसके बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन किए गए थे।
दरअसल, 10 जुलाई 2017 को, 60 तीर्थयात्रियों को लेकर एक बस जम्मू और कश्मीर से होते हुए अमरनाथ यात्रा से लौट रही थी। करीब 8:30 बजे जब बस अमरनाथ जिले के बटेंगू पहुँची तभी इस्लामी आतंकवादियों के एक समूह ने बस पर हमला कर दिया था और अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी थी। इसमें आठ यात्रियों की मौत हो गई और कुछ अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद जैसे ही पता चला था कि आतंकवादी पाकिस्तानी थे, ऐसे ही देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे।
इसी के बाद भारत में अराजकता पैदा करने वाले नापाक तत्वों को पाकिस्तान के लगातार समर्थन मिलने के खिलाफ शिवसेना ने भी नवी मुंबई में विरोध प्रदर्शन किया था। वाशी में छत्रपति शिवाजी महाराज चौक पर शिव सैनिकों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी झंडे भी जलाए गए थे। उस समय, शिवसेना नेता विजय माने, समीर बागवान और गणपत शेलार के खिलाफ विरोध दर्ज करने पर एक शिकायत भी थाने में दर्ज की गई थी। इसके बाद आरोप है कि तीनों ने कथित तौर पर अदालत की सुनवाई में लगातार चूक की, जिसके बाद उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया।
हालांकि, वाशी पुलिस ने गुरुवार को अचानक कार्रवाई शुरू कर दी और तीनों पदाधिकारियों को वाशी में उनके संबंधित आवास से गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब महाराष्ट्र राज्य में नगर निगम चुनावों से पहले एक बड़ी राजनीतिक कार्रवाई कर रहा है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि शिवसेना के पदाधिकारियों के खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई का न्यायपालिका के साथ कम और राज्य में राजनीति के साथ अधिक संबंध है।
एक ओर अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि विवाद को निपटाने में जहाँ सालों लग गए, वहीं अब राम मंदिर सांप्रदायिक सौहार्द की भी मिसाल बनता जा रहा है। इस कड़ी में एक नाम आजमगढ़ जिले के रहने वाले मोहम्मद इस्लाम का सामने आया है। दरअसल, मोहम्मद इस्लाम राम मंदिर के निर्माण में सहयोग के रूप में प्राचीन अष्टधातु का सिक्का देंगे। यह सिक्का कोई मामूली सिक्का नहीं बल्कि पौराणिक महत्त्व का है, जो कि मोहम्मद इस्लाम को घर की खुदाई में मिला था। इस सिक्के पर भगवान राम, सीता के साथ हनुमान का चित्र है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, मोहम्मद इस्लाम जल्द ही अयोध्या जाकर महंत नृत्यगोपाल दास को यह पौराणिक महत्व वाला सिक्का भेंट करने जा रहे हैं। साथ ही मोहम्मद इस्लाम चाहते हैं कि यह सिक्का बेचकर जो भी धन इकठ्ठा हो, उससे एक ही ईंट सही, लेकिन राम मंदिर में जरूर लगवाई जाए।
इस बारे में उन्होंने बृहस्पतिवार को डीएम अयोध्या में इस विषय में बातचीत की है। आजमगढ़ के डीएम एनपी सिंह ने बताया कि सिक्के को लेकर मोहम्मद इस्लाम उनसे मिले थे। इस बारे में डीएम अयोध्या से बात हो गई है, मोहम्मद इस्लाम वहाँ जाकर सिक्का सौंप सकते हैं। यह सिक्का उन्हें उनके पुराने मकान की खुदाई के दौरान मिला था।
मोहम्मद इस्लाम कहते हैं, “हमने भगवान और अल्लाह को अपने निजी स्वार्थ के लिए धर्म के आधार पर बाँट दिया है। यह मंदिर हिंदू और मुस्लिम दोनों के सहयोग से बनेगा तो देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में सौहार्द का संदेश जाएगा।”
पत्नी ने बेच दिया था एक सिक्का
निजामाबाद तहसील क्षेत्र के मजभीटा गाँव निवासी मुंशी सैयद मोहम्मद इस्लाम आजमगढ़ शहर के सीताराम मोहल्ले में रहते हैं। यह बात नवंबर 30, 2019 की है, जब इस्लाम अपने पुराने पैतृक कच्चे मकान को ढहाकर वहाँ नया मकान बनवाने के लिए खुदाई करा रहे थे। खुदाई करवाते समय अष्टधातु से बने हुए दो प्राचीन सिक्के मिले। इस पर भगवान श्रीराम, सीता और हनुमान का चित्र अंकित है।
मोहम्मद इस्लाम ने इस सिक्के का महत्व समझते हुए उसे संभालकर रखा। हालाँकि, उनकी पत्नी कनीज फातिमा दिसंबर माह में उसमें से एक सिक्का लेकर बाजार गईं और एक सुनार की दुकान पर दिखाया। सुनार ने सिक्के के बदले उसे तीन लाख रुपए के गहने दिए। करीब एक सप्ताह पूर्व ही उन्होंने मोहम्मद इस्लाम को इस बारे में बताया। इसके बाद इस्लाम बचा हुआ एक सिक्का अयोध्या में बनने वाले भगवान राम के मंदिर में उपयोग के लिए देने की तैयारी में है।