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कोरोना वायरस: बचाव के लिए लोग लगा रहे सिर पर पानी की कैन, इटली में किस करने पर भी लग सकता बैन

कोरोना वायरस का कहर विश्व के 70 देशों तक पहुँचने के बाद अब भारत में भी अपने पैर पसारते दिख रहा है। ताजा जानकारी के अनुसार भारत में अभी तक कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के 29 मामले आए हैं। इनमें से 3 का इलाज हो चुका है। बाकियों का इलाज जारी है। कई संगठन और संस्थान अपन-अपने स्तर पर इससे बचाव के तरीके ढूँढ रहे हैं। साथ ही आम नागरिकों में भी इससे बचने के लिए अभियान चलाया जा रहा है और मैसेज, सोशल मीडिया, विज्ञापनों के जरिए उन्हें सचेत किया जा रहा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने आज संसद में भी कोरोना वायरस पर बात की और इसपर जानकारी दी। उन्होंने कोरोना वायरस पर जानकारी देते हुए कहा कि ईरान में फँसे भारतीय लोगों को भारत निकालने की कोशिश कर रहा है। सरकार लगातार ईरान से संपर्क बनाए हुए है। ईरान में अभी तक कोरोना वायरस के 2,922 मामले सामने आए हैं और 92 लोगों की मौत हुई है।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि भारत ने डब्ल्यूएचओ की सलाह से बहुत पहले 17 जनवरी से आवश्यक तैयारी और कदम उठाने शुरू कर दिया था। 4 मार्च तक, भारत में कोरोना वायरस के 29 सकारात्मक मामले सामने आए हैं। अब सभी अंतरर्राष्ट्रीय यात्रियों की स्क्रीनिंग होगी। 28,529 लोगों को निगरानी में रखा गया है। उन्होंने जानकारी देते हुए यह भी कहा, “मैं रोजाना स्थिति की समीक्षा कर रहा हूँ। मंत्रियों का एक समूह भी स्थिति की निगरानी कर रहा है।”

गौरतलब है कि WHO के अनुसरा, चीन में बाहर अभी तक कोरोना वायरस के 2,100 मामले सामने आए हैं और संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 12,600 हो गई हैं। इनमें मरने वाले 214 हैं। भारत में जो 29 मामले आए हैं, उमें 2 की हालत बेहद गंभीर हैं। अमेरिका में इसके 129 मामले सामने आए हैं, जबकि बुधवार तक मरने वालों की संख्या 11 है। इसी तरह इटली में कुल मामले 3,089 है और मरने वालों की संख्या 107 है। चीन के कारण सबसे प्रभावित इलाका दक्षिण कोरिया है। यहाँ संक्रमित लोगों की कुल संख्या 6,000 है, जिनमें 35 की मौत हो गई।

इन्हीं सब मामलों को देखते हुए भारत में सुरक्षा संबंधी कदम उठाए जा रहे हैं। कहीं आईसोलेशन रूम तैयार हो रहा है, तो कही विदेश से आए नागरिकों को बिन मेडिकल सर्टिफिकेट प्रवेश देने पर रोक लगाई जा रही है। संसद तक में सुरक्षाकर्मचारी और सांसद लोग मास्क, डिस्पोजल ग्लव्स आदि पहने दिख रहे हैं।

उधर, यूके में कोरोना वायरस से बचने के लिए लोग क्रिएटिव तरीके अपनाते नजर आ रहे हैं। जैसा कि बताया जा रहा है कि कोरोना से बचने के लिए अपने मुँह को ढक कर रखें, बीमार लोगों के संपर्क या फिर भीड़ के संपर्क में आने से बचें, तो इन्हीं सब को ध्यान में रखते हुए लोग अपने चेहरे पर प्लास्टिक का डिब्बा डालकर घूम रहे हैं। अपने मुँह नाक और त्वचा को कोरोना से बचाने के लिए लोग गैस मास्क लगा रहे हैं। चेहरे को टेस्को बैग से कवर करके चल रहे हैं। बरसाती ओढ़कर खुद को सुरक्षित कर रहे हैं।

डेलीमेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक तो, बचाव के लिए लोग सिर्फ़ यहीं तक सीमित नहीं है। बतौर मास्क यहाँ लोग बैंडेज से लेकर तरबूज का खोखा भी लोग मुँह पर बाँध रहे हैं और डिस्पोजल ग्लास, समेत चेहरा ढकने वाली हर सामग्री का प्रयोग कर रहे हैं। उधर इटली में भी सरकार कोरोना वायरस के बढ़ते केसों को देख सख्त हो गई हैं। देश में 107 मौत के मामले सामने आने के बाद उन्होंने स्कूल कॉलेजों को बंद कर दिया हैं और अब प्रशासन किस बैन करने पर विचार कर रही है। साथ ही लोगों को हिदायत दे रही है कि वे एक दूसरे से हाथ मिलाने, हग करने पर या किसी भी प्रकार का फिजिकल कॉन्टेक्ट आने से बचें।

दिक्कत कपिल मिश्रा से नहीं ‘इकलौते दीन’ का प्रभुत्व नहीं मानने वाले हर काफिर से है

जिस तरह की बजबजाती नाली में अमेरिकी नागरिक सिद्धार्थ वरदराजन का नक्सली पोर्टल ‘द वायर’ तब्दील हो चुका है, वैसे में बड़े-बूढ़ों की तो सलाह होती कि इस गंदगी से बच के निकल जाना ही भले आदमी के लिए सही है- क्योंकि जब आप नाली के शूकर से मल्लयुद्ध करते हैं तो आखिरी वार चाहे जो करे, जीत मल-मूत्र, विष्ठा में आपको लिथाड़ने के कारण शूकर की ही मानी जाती है। लेकिन अफ़सोस की बात यह है कि यह आम समय नहीं है। वायर हिन्दुओं के कत्लेआम की ज़मीन तैयार करने का जो कीचड़ सालों से तैयार कर रहा था, वह अब भभक-भभक कर समाज में फ़ैलने लगा है। हिन्दू इससे संक्रमित हो रहे जिहादियों के हाथों मरने लगे हैं। इसलिए कीचड़ में उतरना, जानवर को जानवरों वाली ज़हरीली ज़ुबान में ही जवाब देना बहुत ज़रूरी है- आत्मरक्षा के लिए, एज़ अ राइट टू सेल्फ़-डिफेंस।

ऐसी ही हिन्दुओं से कातिलाना घृणा की गंध मारता ज़हर उगला है खुद को एम्स में हड्डियों का डॉक्टर और इसी विषय का प्रोफ़ेसर बताने वाले डॉ. शाह आलम खान ने। इसमें नाम के लिए संबोधित भले भाजपा नेता कपिल मिश्रा हैं, लेकिन लेख पढ़कर साफ़ समझ में आ जाएगा कि असल में यह लेख सभी हिन्दुओं को संबोधित है। खीझ उतारी है कि हज़ार साल से रीढ़विहीन हो रेंग रहे, पिछले 5 साल में ‘हिंदूवादी’ सरकार से भी केवल ‘आखिर कुछ करते क्यों नहीं’ चीख ही पा रहे, इन काफिरों में इतनी जान कहाँ से आ गई कि बाबर और तैमूर की औलाद होने का दम भरने वाली, देश में दार-उल-इस्लाम कायम करने के लिए जिहाद कर रहीं नस्लों के आगे अकड़ कर खड़े हो जाएँ!

चूँकि असली निशाना सभी काफ़िर हैं, इसलिए व्यक्तिगत तौर पर कपिल मिश्र को नापसंद करने के बावजूद इसका जवाब देना एक unapologetic काफ़िर के तौर पर मेरे लिए ज़रूरी है।

‘मिश्र’ उपनाम ‘खान’ से भी खराब है?

पहला हमला डॉ. खान करते हैं कपिल मिश्रा की जाति पर। बताते हैं, “मिश्रा जातिसूचक है, इसलिए मैं इसे स्वीकार नहीं करूँगा। मैं तुझे कपिल ही कहूँगा।” अब जाति-व्यवस्था क्या थी और क्या नहीं, यह मुख्य मुद्दा (जिहादी डॉ. की काफ़िरों से घृणा) से ध्यान हटा देगा, इसलिए इसे जाने देता हूँ। (पढ़ने के इच्छुक इस विषय पर मेरे अन्य लेख ऑपइंडिया पर और मुझसे कहीं ज़्यादा जानकार लोगों की टिप्पणियाँ, देख सकते हैं)

लेकिन, अगर जाति के ख़िलाफ़ एक-एक नुक्ताचीनी को सही मान भी लिया जाए, तो भी क्या ‘मिश्रा’ उपनाम का इतिहास, ब्राह्मणों के कथित जातिवाद का इतिहास ‘खान’ उपनाम वालों के इतिहास से भी काला है? क्या मिश्रा नाम के किसी व्यक्ति ने चंगेज़ खान, हलाकू खान, कुबलाई खान, या फिर याह्या खान, मोहम्मद अयूब खान, खिज्र खान, आसिफ़ खान आदि से भी ज्यादा हत्याकाण्ड, बलात्कार, बलात्कार के बाद हत्या किए हैं या उन्हें शह दी है? अगर हाँ, तो सबूत दिखाइए। अगर नहीं, तो शर्म करिए इतना घिनौना और हिंसक इतिहास लिए उपनाम लगा कर कपिल मिश्रा के बहाने हिन्दुओं पर नाम के इतिहास को लेकर हमला करने के लिए।

दिक्कत कपिल मिश्रा से नहीं, उन्हें वोट देने वाले काफ़िरों से

जैसा कि मैंने पहले भी कहा था कि डॉ. खान की असली दिक्कत कपिल मिश्रा नहीं, उन्हें वोट देने की हिमाकत करने वाले ‘गलीज़’ काफ़िर हैं। इसलिए ज़्यादा समय भूमिका बाँधने में बर्बाद किए बिना खान काफ़िरों पर हमला शुरू कर देते हैं। कपिल मिश्रा के बहाने काफ़िरों को शर्म करने की हिदायत देते हैं। बताया जाता है कि काफ़िर कपिल की हार 11 हज़ार मतों से कहीं बड़ी होनी चाहिए थी, न जाने कौन से नामुराद 40% काफ़िर पैदा हो गए जो कपिल मिश्रा को वोट दे आए।

धिम्मी बनकर, ‘मीठे’ बनकर, अपने हाथों अपना बंध्याकरण कर लेने वाले काफ़िरों को ‘शांतिप्रिय समाज’ बताकर उनके मुकाबले में अपने लिए खड़े होने वाले, कलमा पढ़ने से इनकार कर पाकिस्तान-बांग्लादेश-अफ़गानिस्तान से भाग आए सह-काफ़िरों को पनाह देने (और उनके साथ बलात्कार और हत्या करने वाले समुदाय को वही सुविधा न देने के लिए इनकार करने) वालों को असंतुलित, आग उगलता दानव बनाया जाता है। डॉ. शाह आलम खान काफ़िरों से कितनी नफ़रत करते हैं, इस बात को उनके लेख का एक उदाहरण साफ़-साफ़ दिखाता है। वे वहाँ बलात्कृत हो रहे, मारे जा रहे, पुरखों की सम्पत्ति लुटवा रहे, अपने मन्दिर तुड़वा रहे काफ़िरों पर लांछन लगाते हुए कहते हैं कि उनके माँ-बाप ने तो पाकिस्तान में ही रहना स्वीकार कर लिया था, जबकि डॉ. खान के पुरखे पाकिस्तान नहीं गए।

मैं इस कुतर्क की परतों को नोंच-नोंच कर उसकी खाल उधेड़ने के पहले चाहूँगा कि आप ज़रा रुकें, एक गहरी साँस लें और इस व्यक्ति की जिहादी कुंठा, नफ़रत और क्रूरता के इतने नंगे प्रदर्शन पर एक मिनट गौर करें। जिस समय कोई इंसान मज़हबी प्रताड़ना का शिकार होकर, बलात्कृत होकर या उससे बचने के लिए, घर के एक-आध लोगों के क़त्ल हो जाने के बाद या उससे बचने के लिए, घर-बार, व्यवसाय, शिक्षा, पहचान छोड़ कर भागता हुआ कहीं शरण लेना चाहे और वहाँ शरण देने वालों में से कोई ऐसा, जो उसी मज़हबी विचार का पालन करता है जिससे वह शरणार्थी जान बचाकर भागा है, उससे उसके पुरखों के बारे में जाँच पड़ताल शुरू कर दे, तो यह व्यवहार क्या इंसानियत के किसी घटिया रूप की भी श्रेणी के लायक है?

अब इस कुतर्क पर आएँ तो पहली बात अधिकांश शरणार्थी (और पाकिस्तान के हिन्दुओं का बहुसंख्य) अनुसूचित जाति से आते हैं। पत्रकारिता के समुदाय विशेष के हिसाब से तो अनुसूचित जाति में पैदा हो भर जाने से व्यक्ति वंचित, पीड़ित, प्रताड़ित बन जाता है। तो वंचित, पीड़ित, प्रताड़ित व्यक्ति अगर पीछे छूट गए तो अपनी गरीबी, अपने शोषित होने के चलते छूटे होंगे। टिकट खरीदने और सुरक्षित निकल पाने का पैसा न होने के कारण छूटे होंगे। या अपनी मर्जी से, ताकि पहला पीरियड आते ही उनके परिवार की लड़की का बलात्कार कर उसे निकाह के मुलम्मे में आजीवन सेक्स-गुलाम बनाया जा सके, इसलिए जानबूझकर पीछे रह गए होंगे? पुरखों के अपराधों के लिए आज की पीढ़ी को सज़ा देने की बात अगर डॉ. शाह आलम खान चाहते ही हैं तो अपने इलाके में (चाहे वे देश के जिस भी इलाके से आते हों, क्योंकि इस देश का इस्लामी इतिहास काफ़िरों के खून से इतना सना है कि कोई ऐसा टुकड़ा नहीं होगा ज़मीन का जिसे किसी मोमीन ने काफ़िर से रक्त से न सींचा हो) पिछले 1200 साल में हुए काफ़िरों के कत्लेआम से शुरू करना चाहिए।

अपना रास्ता माँगना हर किसी का संवैधानिक अधिकार है

डॉ. शाह आलम खान काफ़िर कपिल से पूछते हैं कि उसे एक राजनीतिक हस्ती के तौर पर दार-उल-इस्लाम की, ‘तेरा मेरा रिश्ता क्या’ की जंग लड़ रहे अल्लाह के बन्दों को हटाने के लिए दिल्ली पुलिस को हिदायत देने का क्या हक़ है। लेकिन वह यह या तो काफ़िरों से नफ़रत में भूल जाते हैं या नज़रअन्दाज़ कर देते हैं कि काफ़िर कपिल हिंदुस्तान का एक नागरिक भी है। उसे जाफराबाद मेट्रो स्टेशन इस्तेमाल करने का भी हक है, जो उसके टैक्स और किराए के पैसे से बना और चलता है। वे यह भी भूल जाते हैं कि अगर काफ़िर कपिल को ऐसा लगा कि उसके टैक्स के पैसे से तनख्वाह पा रही दिल्ली पुलिस अपना काम ठीक से नहीं कर रही थी, जाफराबाद और चाँदबाग में शाहीन बाग़ की तरह एक और दार-उल-इस्लाम बनने दे रही थी (जहाँ किसी काफ़िर के साथ वह भी होता जो काफ़िरों गुंजा कपूर और दीपक चौरसिया के साथ हुआ, और वह भी जो आईबी के अंकित शर्मा के साथ हुआ) तो काफ़िर कपिल का पूरा हक था पुलिस को यह कहने का कि इसे खाली कराए। यह हक़ (डॉ. शाह आलम खान के) दुर्भाग्य से संविधान फ़िलहाल काफ़िरों को भी देता है।

लोकतंत्र की मौज काफ़िरों के दम पर ही है। काफ़िरों से नफ़रत का ऐसा रूह कँपा देने वाला प्रदर्शन करने के बाद डॉ. खान काफ़िर कपिल को ज्ञानवाचन करते हुए बताते हैं कि दुनिया में केवल हिंदुस्तान के ही मुस्लि ऐसे हैं जो “72 साल से लोकतंत्र का सम्मान करते आ रहे हैं।” यह न केवल काफ़िरों की लोकतांत्रिक प्रकृति का बेजा अधिग्रहण करने की कोशिश है, बल्कि CAA के विरोध के भी विरोध में है।

पहली बात तो यह कि अगर दुनिया में लगभग 50 इस्लामी प्रभुत्व के देश हैं और किसी में लोकतंत्र मजबूत नहीं रहा तो यह इस्लामी प्रभुत्व की प्रकृति के बारे में क्या कहता है? साथ ही डॉ. खान को खुद से यह भी सवाल पूछना चाहिए कि उन 50 देशों के मुस्लिम और भारत के मुस्लिम कोई अलग-अलग कुरान और सुन्ना मानते हैं क्या? भारत में वही हनाफ़ी-सलाफ़ी-बरेलवी-देवबंदी-शिया-सुन्नी-खोजा-हज़रा-अहमदिया हैं जो दुनिया में हैं, या हमने कोई अलग प्रजाति विकसित की है, जिसकी कुरान, जिसका हज़रत, जिसका ईमान बाकी मुस्लिमों से अलग है? क्योंकि अगर दुनिया का इस्लाम और भारत का इस्लाम समान है तो ज़ाहिर बात है कि भारत का लोकतंत्र इस्लाम नहीं रखे हुए है (वरना वही इस्लाम पूरी दुनिया में डॉ. खान के ही शब्दों के हिसाब से, लोकतंत्र के साथ बेमेल न होता)।

भारत को लोकतान्त्रिक इसका हिन्दू होना रखे है, इसका हिंदुत्व रखे है। इस्लाम की बहुसंख्या में लोकतंत्र का क्या हाल होता, यह देखने के लिए केवल 5 अगस्त, 2019 के पहले के कश्मीर तक देखने की ज़रूरत है। काफ़िरों को अपने जूते के नीचे बनाए रखने, बराबर में न आने देने की माँग और इच्छा ही 370 का, 35-A का, विशेष दर्जे का, पाकिस्तान के साथ मिल जाने की खुली धमकी का स्रोत थे। अगर डॉ. खान को लगता है कि भारत के आज के मुस्लिम सच में दुनिया के मुस्लिमों से अलग, काफ़िरों से और लोकतंत्र से प्रेम करने वाली कोई अनूठी प्रजाति हैं तो उन्हें यह बताना चाहिए कि ऐसे में CAA का विरोध कर इस लोकतान्त्रिक, काफ़िर-प्रेमी दुर्लभ मजहबी प्रजाति का वह लोकतंत्र-विरोधी, काफ़िरों से नफ़रत करने वाले कठमुल्ले समुदाय विशेष से घालमेल क्यों करना चाहते हैं?

दुश्मन कपिल मिश्रा नहीं, काफ़िर होना है

डॉ. खान और उनके जैसे हर जिहादी की असली दिक्कत न कपिल मिश्रा हैं, न ही CAA। यहाँ तक कि मोदी भी नहीं। असली दिक्कत है काफ़िरों से उनकी नफ़रत। उन्हें हिकारत भरी नज़रों से देखने और अपने जूतों तले रौंदने की 1200 साल पुरानी आदत। आज का काफ़िर इसके आगे और झुकने से इनकार कर रहा है। ‘इकलौते दीन’ का प्रभुत्व मानने या इसके आगे दोयम दर्जे का हो जाने से इनकार कर रहा है। यही नहीं अपने आस-पास के दार-उल-इस्लामों में प्रताड़ित काफ़िरों की तरफ़ हाथ बढ़ा कर अपने सामाजिक हाथ मजबूत कर रहा है। ऐसे में डॉ. खान जैसे लोगों को वह सामाजिक दबदबा फ़िसलता नजर आ रहा है जिसे सदियों से केवल अपना मानने के संस्कार उनके अंदर तक, कांस्टेबल अंकित शर्मा को 400 बार चाकुओं से गोदने वालों के इतने अंदर तक पैवस्त हैं कि जब उसके बिना दुनिया देखनी पड़ रही है तो अंदर की पाशविक वृत्ति खौल कर सड़कों पर निकल रही है और लोगों के सिरों में ड्रिल घोंप रही है।

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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कॉन्ग्रेस के 7 सांसदों को किया निलंबित, स्पीकर पर कागज फेंकने का है आरोप

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बृहस्पतिवार को कॉन्ग्रेस के सात सांसदों को निलंबित कर दिया है। निलंबित होने वालों में गौरव गोगोई, टीएन प्रतापन, डीन कुरीयकोसे, आर उन्नीथन, मणिकम टैगोर, बेनी बेहान और गुरजीत औजला हैं। कॉन्ग्रेस के इन सातों सांसदों को लोकसभा की मर्यादा तोड़ने के लिए निलंबित कर दिया गया है।

सात कॉन्ग्रेस सांसदों- गौरव गोगोई, टीएन प्रथापन, डीन कुरीकोस, आर उन्नीथन, मणिकम टैगोर, बेनी बेहान और गुरजीत सिंह औजला को दुराचार के आरोप में बजट सत्र के बाकी सत्र के लिए लोकसभा से निलंबित कर दिया गया है।

गौरतलब है कि लोकसभा में मंगलवार को कुछ सदस्यों के व्यवहार से आहत अध्यक्ष ओम बिरला बृहस्पतिवार को भी लगातार दूसरे दिन सदन में नहीं आए। बताया गया है कि ओम बिरला सदन में सदस्यों के बर्ताव से बहुत क्षुब्ध हैं और इस वजह से सदन में नहीं आ रहे हैं। बृहस्पतिवार (मार्च 05, 2020) सुबह 11 बजे जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्षी सदस्य दिल्ली हिंसा पर तुरंत चर्चा कराने और गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की माँग को लेकर नारे लगाते हुए आसन के करीब आ गए।

इस पर पीठासीन उपाध्यक्ष भर्तृहरि महताब ने कहा कि वह पीठ की तरफ से सदन को बताना चाहते हैं कि कुछ सदस्यों के बर्ताव से अध्यक्ष महोदय बहुत दु:खी हैं और इसी वजह से वह सदन में नहीं आ रहे हैं। सदन में अध्यक्ष को जिस तरह से चुनौती दी जा रही है वह दुखद है और उससे दु:खी होना अध्यक्ष का अधिकार है।

अध्यक्ष कुछ सदस्यों के व्यवहार को लेकर बहुत दु:खी हैं और यही कारण है कि वह सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं हो रहे हैं। उल्लेखनीय है कि दिल्ली हिंसा पर तत्काल चर्चा कराने की विपक्ष की माँग को लेकर मंगलवार को हुए भारी हंगामे के दौरान सदस्यों ने कागज फाड़कर अध्यक्ष के आसन की ओर फेंक दिए थे तथा विपक्ष और सत्ता पक्ष के सदस्यों के बीच जबरदस्त धक्का-मुक्की हुई।

निलंबित AAP पार्षद ताहिर हुसैन को दिल्ली पुलिस ने किया गिरफ्तार, IB ऑफिसर की हत्या सहित दंगे कराने का है आरोप

उत्तर पूर्व दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के कई मामलों में आरोपित आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया है। कुछ ही देर पहले ताहिर ने राऊज एवेन्यू कोर्ट में सरेंडर करने जा रहा था। ताहिर हुसैन पर आइबी कांस्टेबल अंकित शर्मा की हत्या में शामिल होने के साथ-साथ, हिंसा भड़काने, साजिश रचने समेत कई अन्य मामले दर्ज किए गए हैं।

इससे पहले ताहिर ने आज तक के साथ बातचीत में खुद को बेकसूर बताया था। आई बी अधिकारी अंकित शर्मा की मौत के सवाल पर ताहिर हुसैन ने कहा कि ये तो जाँच का विषय है। उसने कहा कि 24 तारीख की शाम को ही वो वहाँ से निकल गया था और पुलिस ने बिल्डिंग को अपने हैंडओवर में ले लिया था। फिर वहाँ पर सामान कहाँ से पहुँचा, ये तो पुलिस की तहकीकात में सामने आएगा। उसका कहना था कि उस समय वहाँ पर न तो वो था और न ही उसके परिवार का कोई सदस्य। इसके साथ ही उसने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया।

बता दें इससे पहले दिल्ली पुलिस ने ताहिर की खोज में ताबड़तोड़ छापेमारी की। इसी क्रम में दिल्ली पुलिस की एक टीम ने बुधवार (मार्च 4, 2020) को यूपी के अमरोहा में छापेमारी की। पुलिस के पहुँचने पर रिश्तेदार के घरों पर ताला लगा हुआ मिला। जिसके बाद पुलिस ने पड़ोसियों से पूछताछ की। लोगों ने बताया कि मकान में चार दिन से ताला लगा हुआ है। इसके बाद दिल्ली पुलिस ताहिर के पुश्तैनी गाँव पोरारा पहुँची। 

ताहिर हुसैन के खिलाफ इस वक्त कई मामलों में शिकायत दर्ज है। दिल्ली हिंसा में मारे गए अंकित की हत्या के मामले में दिल्ली पुलिस ने पिता के बयान पर ताहिर हुसैन के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस ने धारा 302, धारा 365, धारा 201 और धारा 34 के तहत एफआईआर दर्ज की है। आम आदमी पार्टी ने भी फजीहत होते देख ताहिर हुसैन को पार्टी से निलंबित कर दिया है। 

मामले की जाँच में जुटी क्राइम ब्रांच की एसआईटी ने ताहिर के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी करने की तैयारी कर ली थी। इसकी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी। ताहिर के पासपोर्ट की डिटेल खँगाली जा रही है। ताहिर की तलाश में जुटी एसआईटी ने दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 14 स्थानों पर उसकी तलाश में छापेमारी की। एसआईटी ने बताया कि ताहिर 2 मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करता है। मगर उसके फरार होने के साथ ही दोनों नंबर बंद आ रहे हैं।

24 तारीख को 12 बजे तक की कॉल डिटेल्स खँगाली गई, तो पता चला कि ताहिर हुसैन 24 फरवरी की रात 12 बजे के आस-पास तक चाँदबाग के उसी घर में मौजूद था। वहीं जाँच मे यह बात भी सामने आ रही है कि ताहिर ने 24 तारीख को (हिंसा के दिन) दिन भर में करीब 150 कॉल किए थे। जाँच में जुटी पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह कॉल उसने किसको किया था, ऐसे आरोप लग रहे हैं कि उसने दंगे के दौरान कुछ दबंग और प्रभावशाली नेताओं के संपर्क में भी था। अब पुलिस उन नंबरों की डिटेल खँगाल रही है, जिस पर ताहिर ने कॉल किया था।

‘AAP नेता मोहम्मद अतहर: DCP अमित शर्मा और रतनलाल पर हमला करने वाली भीड़ का अगुआ’

गत दिनों दिल्‍ली में हुई हिंसा के बाद नए वीडियो सोशल मीडिया के जरिए सामने आ रहे हैं। इन वीडियो में बुर्का और टोपी पहने हुए भीड़ को पुलिस पर पत्थरबाजी करते हुए देखा जा सकता है। सोशल मीडिया पर लोग आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि शायद इन्हीं में से किसी एक पत्थरबाजी में दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल ने अपनी जान गँवाई होगी।

ऐसा ही एक वीडियो सामने आया है, जिसमें जिसमें एक बड़ी भीड़ डीसीपी (DCP) पर पथराव करती हुई नजर आ रही है। दिल्‍ली पुलिस ने भी इस वीडियो को सही करार दिया है। यह वीडियो 24 फरवरी का बताया जा रहा है, जिसमें भीड़ पुलिस पर पथराव करती हुई देखी जा रही है। वीडियो चांदबाग़ का बताया जा रहा है। बीजेपी नेता संबित पात्रा ने भी इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा है कि यह वही जगह है जहाँ दिल्‍ली पुलिस के हेड कांस्‍टेबल रतन लाल को मारा गया था।

वीडियो में स्पष्ट देख सकते हैं कि डीसीपी अमित शर्मा भीड़ के बीच फँसे हुए हैं, जिसके बाद कई पुलिसकर्मी वहाँ पहुँचते हैं और वो डीसीपी अमित शर्मा को पत्थरबाजों और भीड़ के चंगुल से बचाते हैं। चाँद बाग हिंसा में एसीपी अनुज भी घायल हुए थे।

इस वीडियो में भीड़ द्वारा चाँद बाग इलाके में डीसीपी अमित शर्मा के साथ की गई मारपीट साफ देखी जा सकती है। यह वीडियो 24 फरवरी का है, जिसमें भीड़, डीसीपी अमित शर्मा को बुरी तरह से पीटते हुए नजर आ रही है और पुलिस पर पत्थरबाजी कर रही है।

वहीं, बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने भी शेयर करते हुए लिखा है- “ये हैं मोहम्मद अथर (मोहम्मद अतहर), आम आदमी पार्टी चाँदबाग का नेता। DCP अमित शर्मा पर जानलेवा हमला व कॉन्सटेबल रतनलाल जी की हत्या करने वाली भीड़ को यही लाया था। पहली फ़ोटो में इसके व्हाट्सएप स्टेटस में लिखा है- ‘मोदी योगी खूनी है।’ जनता कह रही हैं इसको भगाने में दुर्गेश पाठक और संजय सिंह शामिल है।”

दिल्ली पुलिस के एसीपी अनुज की ओर से इस वीडियो के बारे में कहा गया है कि यह घटना 24 तारीख की है। उन्होंने कहा कि वजीराबाद रोड पर अचानक भीड़ पहुँच गई थी, इसके बाद वो निजी साधन से यमुना विहार गए जहाँ डीसीपी बेहोश होकर डिवाइडर के पास गिरे हुए थे। एसीपी ने कहा कि उस भीड़ में सब दंगाई थे।

गौरतलब है कि दिल्ली हिंसा को लेकर पुलिस ने अब तक कई लोगों को गिरफ्तार किया और एफआईआर दर्ज की है। पुलिस उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई संवेदनशील इलाकों पर बराबर निगरानी कर रही है। कुछ दिन पहले ही पुलिस ने मोहम्मद शाहरुख नाम के उस लड़के को भी गिरफ्तार कर लिया, जिसकी आठ राउंड फायरिंग के बाद पुलिसकर्मी दीपक दहिया पर पिस्टल ताने हुए फोटो सामने आई थी। पुलिस ने उसे शामली से गिरफ्तार किया था।शाहरुख के पिता पर ड्रग पैडलर होने का केस चल रहा है।

दक्षिण भारत के जंगलों में ठिकाना, ट्रेनिंग से लेकर बम-बारूद सब तैयार: सामने आया ISIS का जिहाद प्लान

राष्‍ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने आतंकवाद से जुड़े एक मामले में 10 लोगों से पूछताछ की है। यह मामला आतंकी संगठन इस्‍लामिक स्‍टेट (ISIS) के साथ मिलकर भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश से जुड़ा है। एजेंसी ने बुधवार (मार्च 4, 2020) को यह जानकारी दी। इसके मुताबिक ये सभी 10 लोग 3 मार्च तक के लिए 6 दिनों की NIA की हिरासत में थे।

NIA के एक अधिकारी ने बताया कि ये लोग भारत में हिंसक जिहाद छेड़ना चाहते थे और इसलिए उन्होंने दक्षिण भारत के जंगलों को अपना ठिकाना बनाया था। पूछताछ के दौरान साजिश में इन लोगों की संलिप्तता के बारे में सबूत जुटाए गए जिन्हें चेन्नई स्थित विशेष एनआईए अदालत में पेश किया जाएगा।

NIA द्वारा जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति

NIA ने जिन लोगों से पूछताछ की है, उसमें मोहम्मद हनीफ खान, मोहम्मद इमरान खान, मोहम्मद जैद, ए अब्दुल रहीम, लियाकत अली, एजाज पाशा, हुसैन शरीफ, अनबर्सन, पचैयाप्पन और राजेश का नाम शामिल है। इन लोगों के खिलाफ तमिलनाडु पुलिस ने आईपीसी की धारा 465, 468, 471 और 120 बी के तहत एफआईआर दर्ज किया था। इसके अलावा आरोपितों के खिलाफ UA(P)A के धारा 13 के साथ ही कई अन्य एक्ट के तहत फर्जी पहचान पत्र हासिल करने के लिए मामला दर्ज किया है।


NIA द्वारा जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति

NIA के एक प्रवक्ता ने बताया कि ये लोग ISIS के सदस्य ख्वाजा मोहिदीन और उनके सहयोगियों के साथ साजिश रच रहे थे, जो भारत में ISIS के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए गैरकानूनी गतिविधियाँ करते हैं।

जाँच से पता चला है कि पचैयाप्पन, राजेश, अनबर्सन और अब्दुल रहीम ने फर्जी पहचान पर सिम खरीदा। इनसे लियाकत अली ने सिम लेकर ख्वाजा मोईदीन को उपलब्ध कराया था। मोहम्मद हनीफ खान, मोहम्मद इमरान खान, मोहम्मद जैद, एजाज पाशा और हुसैन शरीफ ने भारत में हिंसक जिहाद छेड़ने की साजिश में ख्वाजा मोईदीन की मदद की थी। इसके लिए उन्होंने दक्षिण भारत के जंगलों को अपना ठिकाना बनाया था और हथियार एवं सामग्री खरीदी थी।

NIA के एक अधिकारी ने बताया कि जाँच में यह भी पता चला है कि मोहम्मद हनीफ खान और इमरान खान ने मोइदीन को उसके सहयोगियों अब्दुल समद और सैयद अली को पिछले साल 12 दिसंबर को भारत के बाहर ले गया था। इसके बाद मोईदीन और उसके साथी जिहाद छेड़ने के इरादे से भारत लौट आए। लेकिन 8 जनवरी को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

एनआईए ने कहा कि मोहम्मद जैद ने भारत में आतंकवादी हमलों को अंजाम देने के लिए डार्क वेब में एन्क्रिप्टेड ईमेल और मैसेंजर प्लेटफॉर्म के जरिए कम्युनिकेट किया था। इसमें पाशा ने मोहिदीन की मदद की। महबूब पाशा ने पिस्तौल और गोला-बारूद की अवैध रूप से खरीददारी की। शरीफ ने बेंगलुरू के अपने घर में हिंसक इस्लामिक जिहाद के लिए सामान इकट्ठा किया था।

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‘फैसला सड़कों पर होगा’: भड़काऊ भाषण पर SC पहुँची दिल्ली पुलिस, हर्ष मंदर का एक और Video आया सामने

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में लोगों को उकसाने को लेकर तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर पर शिकंजा कसता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले कल (मार्च 4, 2020) बीजेपी नेताओं के खिलाफ हर्ष मंदर की याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए उनसे सफाई मॉंगी। इसके बाद दिल्ली पुलिस भी एक्शन में आ गई। दिल्ली पुलिस के डीसीपी (लीगल सेल) ने मंदर के भड़काऊ भाषण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर दिया। दिल्ली पुलिस ने मंदर पर सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना का आरोप लगाया। इस बीच, मंदर का एक और विडियो सामने आया है।

पुलिस ने अपने हलफनामे में अपील करते हुए कहा है भड़काऊ भाषण देते समय मंदर को पता था कि उनका बयान कोर्ट की अवमानना है। इसके बावजूद उन्होंने ये सब किया। दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने और उनकी याचिका असाधारण जुर्माने के साथ खारिज करने की अपील की है।

हलफनामे के साथ दिल्ली पुलिस ने मंदर की भड़काऊ स्पीच को पेन ड्राइव में उपलब्ध करवाया। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 6 मार्च को होगी। हलफनामे में कहा गया, “हर्ष मंदर एक भाषण दे रहे हैं जो न केवल हिंसा को उकसा रहा है, बल्कि गंभीर अवमानना ​​भी है क्योंकि भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के खिलाफ लोगों की एक विशाल सभा में अपमानजनक टिप्पणी है।”

गौरतलब है कि जिस विडियो को लेकर मंदर घिरे हैं वह जामिया का है। इसमें मंदर सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करती भीड़ को उकसाते साफ तौर पर देखे जा सकते हैं। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए मंदर कहते हैं, “ये लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में नहीं जीती जाएगी, क्योंकि हमने सुप्रीम कोर्ट को देखा है- एनआरसी के मामले में, कश्मीर के मामले में, अयोध्या के मामले में। उन्होंने (सुप्रीम कोर्ट) इंसानियत, समानता और सेक्युलरिज्म की रक्षा नहीं की है।” वे आगे कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में हम कोशिश जरूर करेंगे। लेकिन इसका फैसला न संसद में होगा, न सुप्रीम कोर्ट में होगा, बल्कि ये फैसला सड़कों पर होगा।

इसके अलावा बता दें, हर्ष मंदर की जामिया पर रिकॉर्ड की गई विडियो के अलावा एक अन्य वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी है। इस विडियो में भी हर्ष मंदर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना करते नजर आ रहे हैं। 2 मिनट के स्लॉट पर मंदर को सीएए/एनआरसी/एनपीआर को भयावह आदि कहते सुना जा सकता है। उन्हें इस वीडियों में अयोध्या मामले, कश्मीर मामले का हवाला देकर कोर्ट के न्याय पर संदेह उठाते और अल्पसंख्यकों के साथ नाइंसाफी का इल्जाम लगाते देखा जा सकता है।

वे कहते हैं, “न्यायपालिका में सुप्रीम कोर्ट की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है। लेकिन जिस तरह उसने कश्मीर मामले में जवाब दिया। अलीगढ़ और जामिया में पीटे जा रहे छात्रों की याचिकाओं पर प्रतिक्रिया दिखाई। अयोध्या मामले में फैसला दिया। जाहिर है कि हाल के वर्षों न्यायपालिका अल्पसंख्यकों के हितों की सुरक्षा करने में नाकाम रही है।”

इसके बाद इस विडियो में भी हर्ष मंदर को भीड़ को सड़कों पर उतरने के लिए उकसाते देखा जा सकता है और ये भी कहते सुना जा सकता है कि सीएए के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरकर ये जो जंग लड़ी जा रही हैं और जिस प्रकार लड़ी जा रही है, ये हम सब के लिए प्रेरणा है।

बता दें, इस विडियो में हर्ष मंदर ने महात्मा गाँधी के सविनय अवज्ञा का भी जिक्र किया। उन्होंने किसी समय में ब्रिटिशों के ख़िलाफ़ चलाए गए अभियान को भारत सरकार के ख़िलाफ़ चलाने के लिए लोगों को उकसाया। साथ ही एनआरसी आते ही मुस्लिम और गैर-मुस्लिमों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, इस पर बात की। साथ ही सेंसस का बॉयकॉट करने की भी अपील की।

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नाबालिग दलित से गैंगरेप, समीर खान और समी की तलाश: अश्लील विडियो बना मॉंगे ₹60 लाख

झारखंड के गढ़वा से दो झकझोर देने वाली घटनाएँ सामने आई है। जिले के मेराल थाना क्षेत्र के एक गाँव में दलित परिवार की नाबालिग बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है। घटना दो मार्च की है। दूसरी घटना में एक युवती का अश्लील विडियो बनाकर उसके पिता से 60 लाख रुपए मॉंगे गए। पैसे नहीं देने पर तीन युवकों ने विडियो वायरल करने की धमकी दी।

मेराल पुलिस ने दलित पीड़िता के बयान पर प्राथमिकी दर्ज करते हुए बुधवार (मार्च 4, 2020) को सदर अस्पताल में उसकी मेडिकल जाँच कराई। साथ ही कोर्ट में 164 सीआरपीसी के तहत पीड़िता का बयान दर्ज कराया। पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने मेराल के टिकुलडीहा निवासी समीर खान और समी खान को आरोपित बनाते हुए विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। जानकारी मिलने के बाद मुख्यालय डीएसपी दिलीप खलखो ने मौके पर पहुँचकर पीड़िता से घटना की जानकारी ली।

जानकारी के अनुसार पीड़िता एक सरकारी स्कूल में छठी कक्षा की छात्रा है। उसने पुलिस को बताया कि उसके पिता की मौत हो चुकी है। इस कारण वह अपने मामा के यहाँ रहकर पढ़ाई कर रही है। वह दो मार्च को दोपहर में नदी किनारे स्थित खेत की ओर जा रही थी। यहाँ पहले से ही घात लगाए बैठे समीर खान व समी खान ने उसे पकड़ लिया। इसके बाद एक पेड़ की ओट में ले जाकर डरा-धमका कर दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। पीड़िता ने घर आकर परिजनों को घटना की जानकारी दी। पीड़िता के परिजनों ने इस घटना की जानकारी पहले पूर्व सांसद मनोज भुइयां को दी। इसके बाद मनोज भुइयां ने गढ़वा एसपी को फोन कर आरोपितों को पकड़ने की माँग की। घटना के बाद से ही दोनों आरोपित फरार बताए जा रहे हैं। गिरफ्तारी को लेकर पुलिस की छापेमारी जारी है।

दूसरी घटना गढ़वा में आसिफ आलम, मोहम्मद कैफ और राजा मंसूरी उर्फ अलताफ राजा ने 13 फरवरी को एक युवती का अश्लील विडियो बना लिया था। इसके बाद तीनों युवकों ने युवती के पिता से पैसा वसूलने की योजना बनाई। 2 मार्च को आसिफ आलम ने युवती के पिता को मोबाइल पर उसकी बेटी का अश्लील विडियो व फोटो भेजकर 60 लाख रुपए की माँग की। साथ ही धमकी दी कि अगर पैसा नहीं मिला तो विडियो सोशल मीडिया व इंटरनेट पर अपलोड कर देगा। आखिर में पाँच लाख रुपए में डील हुई।

पुलिस अधीक्षक अश्विनी कुमार सिन्हा ने बताया कि युवकों को पैसा लेने भंडरिया थाना क्षेत्र में अड़ा महुआ के पास सोमवार को बुलाया गया था। युवती के पिता ने ब्लैकमेलर को जान मारने की नीयत नियत से चार गाड़ियों में 16 लोगों के साथ डंडा, चाकू आदि से लैस होकर पहुँचे। वहाँ तीनों बदमाश आसिफ आलम, कैफ और अलताफ राजा पहले से मौजूद था। युवती के पिता ने अपने लोगों के साथ मिलकर उनकी जमकर धुनाई की और फिर उनका अपहरण कर भंडरिया के रास्ते पिपरी होते हुए छत्तीसगढ़ जाने लगे। इसकी सूचना गढ़वा एसपी अश्विनी सिन्हा को समय रहते मिल गई और उन्होंने समय पर पहुँचकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। तीनों आरोपितों पर रंगदारी, ब्लैकमेल करने और अश्लील विडियो वीडियो बनाने के मामला दर्ज किया गया और युवती के पिता समेत 16 लोगों पर हत्या की नीयत से अपहरण करने का केस दर्ज किया गया है।

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बुर्का पहनी महिलाएँ बरसा रहीं पत्थर, दंगाई दाग रहे गोली: उस भीड़ का Video जिसने ली रतनलाल की जान

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के कई विडियो सोशल मीडिया में तैर रहे हैं। बुधवार (मार्च 4, 2020) को एक नया विडियो सामने आया। विडियो में दंगाई भीड़ दिल्ली पुलिस पर लाठी और पत्थर से हमला करती नजर आ रही है। दावा किया जा रहा है कि इसी भीड़ ने दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की जान ली और इसी भीड़ के आतंक के कारण डीसीपी अमित शर्मा घायल हुए।

सोशल मीडिया पर इस विडियो को चाँदबाग इलाके का बताया जा रहा है, जिसे 24 फरवरी को शूट किया गया। विडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस की कार्रवाई के बाद पहले वहाँ मौजूद भीड़ आगे की तरफ भागती है। लेकिन तभी दूसरी ओर से आई उपद्रवियों की भारी भीड़ पुलिस पर हमला कर देती है। भीड़ में शामिल बुर्का धारी महिलाएँ भी पुलिस पर हमला करते हुए नजर आती हैं। ध्यान से सुनने पर विडियो में गोली चलने की आवाजें भी सुनी जा सकती है।

उल्लेखनीय है कि इस विडियो के सामने आने से पहले एसीपी अनुज कुमार ने उस भीड़ की हिंसा के बारे में बताया था। उन्होंने भी कहा था, “24 तारीख की सुबह साढ़े 11 बजे और 12 बजे के आसपास की बात है। मेरी और रतनलाल और बाकी कर्मचारियों की ड्यूटी चाँदबाग मजार से 80-100 मीटर आगे थी। 23 को वहाँ पर वजीराबाद रोड को जाम किया गया था, जिसे देर रात को खुलवाया गया था। उस रास्ते को क्लियर रखने के निर्देश मिले थे।”

उन्होंने आगे बताया था कि उस दिन धीरे-धीरे काफी लोग जमा हो गए थे। महिलाएँ फ्रंट पर थीं। वजीराबाद रोड के पास जब वे आने लगे। तो हमने उन्हें समझाया। मगर वे लगातार आगे बढ़ते रहे। एसीपी अनुज ने भीड़ का हिंसक रूप याद करते हुए यहाँ तक बताया था कि उन्हें उस दिन यमुना विहार की तरफ भागकर अपनी जान बचानी पड़ी थी, क्योंकि अगर वह चांदबाग मजार की ओर जाते तो सीधे मार दिए जाते।

कई ख़बरों के मुताबिक, इसी हिंसा में आईपीएस अमित शर्मा बुरी तरह जख्मी हुए और उन्हें बचाने के लिए कॉन्स्टेबल रतनलाल बलिदान हो गए। इसी दिन मोहम्मद शाहरुख को भीड़ से निकलकर पुलिस पर गोली ताने देखा गया और फिर इसके अगले ही दिन अंकित शर्मा की निर्मम हत्या की खबर मीडिया में वायरल हो गई। यानी साफ है कि इन दंगों में हिंसक भीड़ के निशाने पर सिर्फ़ हिंदू नहीं थे, बल्कि वे सुरक्षा अधिकारी भी थे, जो लोगों के बचाव में या फिर उन्हें शांत करने सड़कों पर उतरे।

बता दें, इस हिंसा के मद्देनजर दिल्ली पुलिस अभी तक 531 केस दर्ज कर चुकी है। जिनमें से 47 केस आर्म एक्ट के तहत दर्ज किए गए हैं। फिलहाल, कई दंगाइयों के साथ-साथ दिल्ली पुलिस को इस समय ताहिर हुसैन की तलाश है। इस पूरी हिंसा में सरगना के तौर पर नाम उछलने के बाद पुलिस जगह-जगह उसकी धर पकड़ के लिए दबिश दे रही है। लोगों का आरोप है कि इस हिंसा में ताहिर की बहुत बड़ी भूमिका रही।

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दिल्ली दंगों पर बात करते हुए मेजर गौरव आर्या ने कहा कि दिल्ली दंगों ने इस्लामिक कट्टरता का वो घृणित चेहरा बेनकाब किया, जिसे वो अब तक विक्टिम कार्ड खेलते हुए छुपाते फिर रहे थे। इससे पहले कश्मीर में भी संविधान बचाने के नाम पर होते आए रैलियों में कट्टरपंथी सुरक्षा बलों पर पत्थर बरसाते आए हैं तो वहीं 90 के दशक में आईबी से जुड़े लोगों को चुन-चुन कर निशाना बनाया गया।

वहीं डिफेंसिव ऑफेंस के फाउंडर वैभव सिंह ने कहा कि एंटी-सीएए प्रोटेस्ट तो एक छलावा भर था। असल में ये एक इस्लामिक प्रोटेस्ट था, जिसमें शामिल लोगों ने हिन्दुओं के प्रतीकों को अपमानित करने से लेकर देश तोड़ने तक की बातें की। झूठ फैलाकर जगह-जगह सुरक्षाबलों पर हिंसा करने के लिए उकसाया गया और दिल्ली में दंगे करवाने के लिए जमीन तैयार की गई।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक कर के देखें।