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15 साल के राहुल का चेहरा दंगाइयों ने तेजाब से झुलसाया, पूछ रहा- अब कैसे दूँगा बोर्ड का एग्जाम

किसी के ऊपर तेजाब गिर जाए, यह सोचकर ही रूह काँप उठती है। दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों के दौरान तेजाब का भी बतौर हथियार इस्तेमाल किया। AAP के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन की बिल्डिंग की छत पर भी तेजाब के पाउच मिले हैं। बताया जाता है कि दंगाइयों को तेजाब की सप्लाई शिव विहार इलाके के एक फैक्ट्री से की गई थी, जिसका मालिक फिरोज खान है। सबसे ज्यादा हिंसा इसी इलाके में हुई और दंगाइयों ने बच्चों को भी नहीं बख्शा। उनके ऊपर भी तेजाब और अन्य हथियारों से हमला किया गया। शिव विहार इलाके में 15 साल के राहुल गिरी के ऊपर दंगाइयों ने तेजाब उड़ेल दिया था। इससे उसका चेहरा बुरी तरह से झुलस गया है।

दंगाइयों के दहशत का आलम इस कदर हावी है कि राहुल को बेहतर इलाज के लिए उसके माँ-बाप अस्तपाल ले जाने से भी डर रहे। राहुल अपना दर्द बयाँ करते हुए कहता है कि उसका बोर्ड का एग्जाम आने वाला है। अगर वो ठीक नहीं हुआ तो फिर परीक्षा कैसे देगा। दंगाइयों ने ना सिर्फ उसका चेहरा जलाया, बल्कि उसके भविष्य पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।

नवभााारत टाइम्स में प्रकाशित खबर

राहुल 25 फरवरी की शाम दुकान से कुछ सामान लेने के लिए गया था। तभी दंगा भड़क गया। वह डरकर अपनी जान बचाने के लिए एक टंकी के नीचे छुप गया था। लेकिन दंगाइयों ने उसे वहाँ भी नहीं छोड़ा और उसके ऊपर तेजाब से भरी बोतल फेंक दी। पर दंगाइयों के डर से फिर भी राहुल वहाँ से नहीं निकला। जब दंगाई वहाँ से चले गए, इसके बाद वो अपने घर पहुँचा। राहुल की माँ पूजा गिरी ने बताया कि दंगे की डर की वजह से वो अपने बच्चे को बड़े डॉक्टर के पास नहीं ले जा सकी। पूजा ने बताया कि उन्होंने राहुल के झुलसे चेहरे को घर में ही धोया और पास के ही एक डॉक्टर से इलाज करवा रही हैं। 

इसी तरह शिव विहार निवासी नरेन्द्र कुमार के ऊपर भी तेजाब फेंक दिया गया था। उन्होंने NBT को बताया कि 25 फरवरी की शाम जोरहीपुर से एक शादी समारोह से लौट रहे थे। कॉलोनी में पहुँचे तो देखा कि माहौल बुहत खराब है। नरेन्द्र कुमार ने बताया, “मैं अपने घर पहुँचने ही वाला था कि तभी मेरे चेहरे पर किसी ने छत से तेजाब फेंक दिया। घर में छोटे-छोटे बच्चे हैं और इलाके का माहौल काफी खराब है। इसकी वजह से मैं बाहर इलाज कराने के लिए नहीं जा पा रहा हूँ।”

बता दें कि दिल्ली के नॉर्थ-ईस्ट इलाके में हिंसा की शुरुआत शिव विहार से ही हुई थी और फिरोज खान की इस फैक्ट्री के बाहर 24 फरवरी की रात में हंगामा भी हुआ था। इलाके के लोगों का आरोप है कि जब हिंसा हुई, तब फैक्ट्री के अंदर से गैलन में भरकर तेजाब और केमिकल बाहर भेजा गया था। फैक्ट्री के अंदर गैलन में तेजाब रखा हुआ था, जिस पर ‘गंगाजल’ लिखा हुआ है। फिरोज यह फैक्ट्री, दीपक बैंड दुकान की आड़ में चलाता था।

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दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों की एकतरफा रिपोर्टिंग: BBC का निमंत्रण प्रसार भारती के CEO ने ठुकराया

दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों की वामपंथी मीडिया संस्थानों और प्रोपेगेंडा पोर्टलों ने एकतरफा रिपोर्टिंग की। उन्होंने दंगाइयों को बचाने के लिए हिंदुओं को निशाना बनाते हुए खबरें परोसी। इन संस्थानों में एक प्रमुख नाम बीबीसी का भी है। एकपक्षीय रिपोर्टिंग के लिए इन संस्थानों की न केवल पाठक थू-थू कर रहे हैं बल्कि अन्य स्तर भी उनका बहिष्कार होने लगा है। मिली जानकारी के अनुसार प्रसार भारती के सीईओ शशि शेखर वेम्पती ने इसी वजह से बीबीसी का निमंत्रण ठुकरा दिया है। बीबीसी ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम ‘बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्स वूमेन ऑफ द ईयर अवॉर्ड नाइट’ में शामिल होने का न्योता भेजा था।

बीबीसी के निमंत्रण को अस्वीकार करते हुए प्रसार भारती के सीईओ शशि शेखर वेम्पती का जवाब

BBC को भेजे पत्र में वेम्पती ने कहा है कि दिल्ली दंगों की बीबीसी की एकपक्षीय पत्रकारिता को देख उन्होंने यह फैसला किया है। पत्र में उन्होंने बीबीसी की योगिता लिमये की विडियो न्यूज रिपोर्ट का भी हवाला दिया है। इस रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस को एकपक्षीय दिखाया गया है। लेकिन उस दंगाई भीड़ का जिक्र नहीं है जिसने दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की जान ली। डीसीपी पर हमला किया। आईबी के अंकित शर्मा की निर्मम हत्या का भी कोई जिक्र नहीं किया गया।

वेम्पती ने पत्र में बीबीसी की एकतरफा पत्रकारिता के लिए आलोचना करते हुए कहा है कि बतौर पब्लिक ब्रॉडकास्टर बीबीसी को देश की संप्रभुता का आदर करना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई है कि बीबीसी आगे से इस बात का ध्यान रखेगी।

गौरतलब है कि प्रसार भारती के CEO द्वारा बीबीसी का इस तरह बहिष्कार करने से पहले भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने प्रोपेगेंडा पोर्टल द प्रिंट को साक्षात्कार देने से मना कर दिया था। उन्होंने द प्रिंट को जवाब देते हुए कहा था, “तुम्हारा न्यूज़ पोर्टल ‘द प्रिंट’ एक पक्षपाती फेक न्यूज़ फैक्ट्री है। बावजूद इसके कि तुमलोग मेरे ख़िलाफ़ लगातार एक घृणास्पद अभियान चला रहे हो, मुझे चारों ओर से भारी समर्थन मिल रहा है। ज़मीन पर तुम जहाँ भी लोगों से बात करोगे वहाँ से मेरे लिए समर्थन आएगा लेकिन ‘द प्रिंट’ जैसी फेक न्यूज़ फैक्ट्री को ये पसंद नहीं। मुझे ज़रूरत ही नहीं है कि अपना समर्थन साबित करने के लिए तुम्हारे पोर्टल में लेख प्रकाशित करवाऊँ। दिल्ली की जनता ने तुम्हारे प्रोपेगेंडा को नकार दिया है। तुम जाकर इस पर लेख लिखो कि मोहम्मद शाहरुख़ बचपन में कितना क्यूट था। तुम लिखो कि कैसे ‘बुरे हिन्दुओं’ ने ताहिर हुसैन को एक आतंकवादी बनने के लिए मजबूर कर दिया।”

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ताहिर हुसैन के निशाने पर पहले से थे IB के अंकित शर्मा, हत्या के वक्त बांग्लादेशी आतंकी भी थे मौजूद!

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगे के दौरान आईबी के अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। अंकित के शरीर के हर हिस्से पर चाकू मारे गए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट बताती है कि उन्हें 400 से अधिक बार गोदा गया था। इस मामले में आप के निलंबित पार्षद ताहि​र हुसैन की भूमिका संदिग्ध है। चश्मदीदों के अनुसार ताहिर के गुंडे उन्हें घसीटकर उसके घर ले गए थे।

अब जो तथ्य उभरकर सामने आ रहे हैं उससे लगता है कि अंकित शर्मा पहले से ही ताहिर और उसके गुंडों के निशाने पर थे। उनकी हत्या के पीछे बांग्लादेशी आतंकियों के शामिल होने के संकेत मिल रहे हैं। सबसे पहले भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने इस ओर इशारा किया था। अब एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जब अंकित की हत्या की गई उस वक्त वहॉं बांग्लादेशी आतंकियों के लोकेशन मिले हैं।

अंकित शर्मा की हत्या की जाँच में जो अब तक जो तथ्य सामने निकल कर आ रहे हैं, वे गहरी साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि यह महज दंगे में हुई मौत नहीं थी, बल्कि एक ‘टार्गेट कीलिंग’ थी। यानी अंकित को जानबूझकर निशाना बनाया गया था। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ी जोड़ रही है।

TOI में 5 मार्च 2020 को प्रकाशित खबर

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक अंकित 25 फरवरी को शाम 5 बजे के करीब ऑफिस से लौटे थे और अपने दोस्तों के साथ बाहर गए थे। उनके साथ उनका दोस्त कालू और कुछ और कुछ अन्य लोग भी थे, जो कि पुलिया के एक तरफ खड़े थे। तभी दूसरी तरफ से पथराव हुआ और अंकित सामने ही खड़े थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को बताया कि अंकित को पत्थर लगी और वह फिसलकर गिर गए। इसके बाद दूसरी तरफ से तीन-चार लोग आए और उन्होंने अंकित को दबोच लिया। फिर उन्हें खींचते हुए दूसरी तरफ ले गए। वहाँ के लोगों का कहना था कि ‘हैरानी की बात है कि उन्होंने अंकित के अलावा किसी को टच नहीं किया।’

अंकित को किसी सुनसान जगह (शायद एक घर में) ले जाया गया, क्योंकि उसके बाद उन्हें किसी ने नहीं देखा। वहाँ उनके कपड़े उतार दिए गए और उनके साथ नृशंसता की गई। फिर उनका शव फिर नाले में फेंक दिया गया। उनका शव अगले दिन 26 फरवरी को नाले से मिला था। उनके शव पर सिर्फ अंडरगारमेंट थे।

घटनाक्रम, प्रथम दृष्टया मिली जानकारी, कुछ बयानों और डॉक्टरों की शुरुआत राय को देखते हुए लगता है कि अंकित की हत्या किसी मकसद से की गई थी। आईबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “घटनाक्रम संकेत देते हैं कि हत्यारे कुछ संदेश देना चाहते थे। हम जो देख रहे हैं यह उससे कहीं बड़ा है।” अंकित के शव पर चोटों की संख्या स्पष्ट नहीं है, वहीं पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टरों ने पुलिस को बताया कि उनके शरीर पर कम से कम चाकू से मारने के 54 गहरे घाव थे।

जाँचकर्ताओं ने कहा कि मामले की जाँच अब टार्गेट कीलिंग को ध्यान में रखकर भी की जा रही है। उन्होंने कहा, “सच्चाई यह है कि अंकित का अपहरण हुआ और दूर ले जाया गया। उन्हें घटनास्थल पर नहीं मारा गया जिसने संदेह पैदा किया है। जब घटनाक्रम सामने आया तभी इस बात को बल मिला है। शव जिस हालत में मिला है उससे प्रतिशोध स्पष्ट झलकता है। भीड़ द्वारा किसी व्यक्ति को इस तरह नहीं मारा जाता।”

यह पूछने पर कि क्या पुलिस को कोई सुराग मिला है, इस पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि वे प्रत्यक्षदर्शियों की सहायता से अंकित को खींचकर ले जाने वाले शख्स की पहचान करने में जुटे हैं। उन्होंने कहा, “इलाके के टेक्निकल सर्विलांस के आधार पर सबूत का इंतजार किया जा रहा है। हम बांग्लादेशी आतंंकियों के ग्रुप को ट्रेस कर रहे हैं जिनका लोकेशन उस वक्त वहाँ पाया गया था।”

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने भी आशंका जताई थी कि ताहिर हुसैन के आतंकियों से रिश्ते हैं और इसकी जाँच के कारण ही अंकित शर्मा की हत्या की गई। उन्होंने 28 फरवरी को ट्वीट करते हुए कहा था, “सरकार को यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा कहीं बांग्लादेशी आतंकियों के साथ ताहिर हुसैन के संबंधों के तार तो नहीं ढूँढ रहे थे और इसीलिए उनकी हत्या ताहिर के इशारे पर कर दी गई। अंकित की हत्या अगर बांग्लादेशी आतंकियों के साथ ताहिर के संबंधों पर नजर रखने के लिए हुई है तो यह बेहद गंभीर मामला है।”

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दिल्ली में मुस्लिमों को मार रहे हैं, मस्जिदों को तोड़ रहे हैं: उबर ड्राइवर ने ​हिंदू महिला को किया प्रताड़ित

अंतरराष्ट्रीय मीडिया में हिंदुओं के ख़िलाफ़ परोसी जा रही नफरत अब बड़े स्तर पर अपना असर दिखाने लगी है। सोशल मीडिया पर लोग खुलकर अपने ऐसे अनुभव साझा कर रहे हैं जब उन्हें अपने हिंदू होने के नाते या हिंदुओं को डिफेंड करने के नाते कट्टरपंथी सोच का शिकार होना पड़ा। बुधवार को ऐसा ही कड़वा अनुभव यूएस की एक साइकेट्रिस्ट एवं साइकोथेरेपिस्ट शीनी अंब्राडर ने शेयर किया। हालाँकि डॉ. शीनी का ये निजी अनुभव नहीं है। उन्होंने एक हिन्दू महिला के साथ हुई घटना को शेयर किया है।

डॉ. शीनी ने अपने पोस्ट में पीड़िता का नाम नहीं बताया। लेकिन शीनी के पोस्ट से ये बात मालूम होती है कि पीड़िता हिंदू है। पीड़िता का फेसबुक पोस्ट, जिसे डॉ. शीनी ने शेयर किया, उसमें वह एक उबर ड्राइवर की बदसलूकी के बारे में बताती नजर आईं, जिसे उन्हें हिंदू होने और हिंदुओं का बचाव करने के कारण झेलना पड़ा।

महिला बताती है कि जब उसने उबर बुक की तो ड्राइवर ने पहले सुनिश्चित किया कि वे भारतीय हैं। इसके बाद उसने दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों के बारे में बात करनी शुरू की। वह इस बात पर जोर देकर बताने लगा कि भारत में मुस्लिमों को हिन्दू मार रहे हैं। हिन्दू मस्जिदों को तोड़ रहे हैं।

पीड़िता के मुताबिक, इतना सब सुनने के बाद उसने ड्राइवर को समझाने की पूरी कोशिश की दिल्ली दंगों के बारे में उनकी सोच सही नहीं है। क्योंकि इन दंगों में दो समुदाय के लोगों का नुकसान हुआ, दोनों तरफ के लोग घायल हुए और दोनों को मारा गया। मगर, ड्राइवर ये सब सुनने के बाद महिला से नाराज हो गया। वह महिला की बात सुनकर चुप होने की बजाय उसपर गुस्सा निकालने लगा और थोड़ी देर में उसने महिला को और महिला की बहन को अपनी कैब से उतरने को बोल दिया।

ड्राइवर का ऐसा रवैया देखकर महिला ने फौरन पुलिस को बुलाया जिसके बाद वह शांत हुआ। मगर पीड़िता ने इस घटना को महसूस करने के बाद इसके पीछे अतंरराष्ट्रीय मीडिया की एकतरफा पत्रकारिता को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने इस घटना को बिंदु में रखते हुए पोस्ट लिखा और आरोप लगाया कि दिल्ली दंगों पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की एकतरफा पत्रकारिता से विदेशों में हिंदूफोबिया बढ़ रहा है। लोग हिंदुओं के ख़िलाफ़ गलत धारणा बना रहे हैं।

गौरतलब है कि दिल्ली में बीते दिनों हमने सीएए के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन के नाम पर हिंदू विरोधी हिंसा देखी। मगर, वामपंथी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इसमें भी हिंदुओं को दोषी बता दिया। इस बीच मुस्लिम भीड़ सड़कों पर अल्लाह हू अकबर और नारा ए तकबीर कहती आगजनी, पत्थरबाजी को अंजाम देती रही। लेकिन इस मीडिया का ध्यान जय श्री राम के नारों पर आ टिका और देखते ही देखते यहाँ हर मुमकिन प्रयास और उदहारणों के जरिए हिंसक भीड़ की बर्बरता को हिंदुओं का नाम लेकर समझाने की कोशिश हुई। नतीजतन उबर ड्राइवर जैसे लोग तैयार हुए, जिन्होंने हिंदुओं को पीड़ित श्रेणी में सुनकर उनपर संवेदना जताने की बजाय अपना गुस्सा जाहिर किया और उनका पक्ष लेने वाली महिला को कैब से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

विकिपीडिया का एडिटर जो मुस्लिम दंगाइयों को बचाने में लगा है: दिल्ली दंगे से लेकर ‘चौकीदार चोर है’ तक

दिल्ली दंगा ग्राउंड रिपोर्ट: छतों से एसिड बरसा रही थीं मुस्लिम औरतें, गुलेल से दाग रहे थे पेट्रोल बम

‘रोड जाम करना ही पड़ेगा’: दिल्ली हिंसा पर वामपंथी प्रोपेगंडा पोर्टलों ने यूँ फैलाया ज़हर, दंगाइयों का किया बचाव

बकरी चोरी आरोपित आजम खान के कार्यकाल में हुई थी 1300 गड़बड़ नियुक्तियाँ: CM योगी ने सारी रद्द की

उत्तर प्रदेश सरकार ने अखिलेश यादव की पूर्ववर्ती सपा सरकार में तत्कालीन नगर विकास मंत्री आजम खान के विभाग द्वारा संचालित जल निगम में हुई 1,300 कर्मचारियों की नियुक्ति निरस्त कर दी है। इन भर्तियों में गड़बड़ी का आरोप है।

रिपोर्ट के अनुसार, जल निगम के अपर मुख्य अभियंता आईके श्रीवास्तव की ओर से सोमवार को जारी आदेश में कहा गया है कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में जल निगम में भर्ती किए गये 122 सहायक इंजीनियरों, 853 जूनियर इंजीनियरों और 325 लिपिकों की नियुक्ति को विशेष जाँच दल (SIT) और विभाग की रिपोर्ट के आधार पर रद्द करते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त किया जाता है।

हालाँकि, इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि लिपिकों को अब तक दिए गए वेतन-भत्ते आदि की वसूली नहीं की जाएगी। धोखाधड़ी के मामले में जेल में बंद भू-माफिया और बकरी चोरी के आरोपित मोहम्मद आजम खान पिछली सरकार में नगर विकास विभाग के मंत्री थे और वर्ष 2016-17 में हुई इन भर्तियों के समय जल निगम उन्हीं के विभाग के अधीन था।

इन परीक्षाओं में असफल रहे अभ्यर्थी ने अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए अदालत की शरण ली थी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन भर्तियों में अनियमितता की शिकायतें मिलने के बाद योगी सरकार ने 2017 में SIT का गठन किया था। अधिकारी ने बताया कि योगी सरकार ने सहायक इंजीनियरों की सेवाएँ पहले ही समाप्त कर दी थीं, लेकिन उन्हें उच्चतम न्यायालय से राहत मिल गई थी। नए आदेश में सभी की सेवाएँ समाप्त कर दी गई हैं। उन्होंने बताया कि परीक्षा कराने वाली एजेंसी के खिलाफ भी जाँच कराई जाएगी।

कौन है वो नेता जिसने उड़ा दी है CM कमलनाथ की नींद: मध्य प्रदेश में बड़ा सियासी हलचल

मध्य प्रदेश की राजनीति में एक नाम बार-बार सुर्ख़ियों में आ रहा है। वो भाजपा नेता हैं। न तो वो पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हैं और न ही फायरब्रांड नेता कैलाश विजयवर्गीय। उनके नाम है नरोत्तम मिश्रा। मिश्रा ग्वालियर के डबरा से वो 1990 में पहली बार विधायक बने। इसके बाद 1998 और 2003 में भी वो यहाँ से विधायक बने। इसके बाद ग्वालियर के दतिया से उन्होंने विधानसभा चुनावों में हैट्रिक लगाई। वो 2008, 2013 और 2018 में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वो शिवराज सिंह चौहान के तीनों कार्यकाल में विभिन्न महत्वपूर्ण मंत्रालयों का प्रभार संभाल चुके हैं।

नरोत्तम मिश्रा ने दावा किया है कि मध्य प्रदेश के 15-20 कॉन्ग्रेस विधायक भाजपा से संपर्क में हैं। उनके इस बयान के बाद ख़ुद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ सकते में हैं। वो भाजपा पर विधायकों की ख़रीद-फरोख्त के आरोप लगाए हैं। मिश्रा का कहना है कि विधायक जनता का काम नहीं करवा पा रहे हैं और इसीलिए उनमें अपनी ही पार्टी के प्रति असंतोष व्याप्त है। कॉन्ग्रेस अभी भी दावा कर रही है कि राज्य में उसकी सरकार पर कोई संकट नहीं है लेकिन मिश्रा का कहना है कि कई विधायक लगातार उनके संपर्क में हैं और जनता के प्रति जवाबदेही पूरी न कर पाने का कारण वो कॉन्ग्रेस से नाराज़ हैं।

मध्य प्रदेश में मंगलवार (मार्च 3, 2020) को 10 कॉन्ग्रेस विधायकों के पाला बदलने की चर्चा चलने लगी। अगर सही में ऐसा होता है तो इसके बाद कमलनाथ सरकार गिरनी तय है। पूर्व-मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया था कि भाजपा ने कॉन्ग्रेस के और कुछ निर्दलीय विधायकों को दिल्ली ले जाने के लिए फ्लाइट बुक कराया है। हालाँकि, बाद में दावा किया गया कि उनके 6 विधायक वापस लौट आए हैं। अगर 10 विधायक भाजपा के पाले में आ जाते हैं उसके पास 117 का संख्याबल हो जाएगा और वो आराम से सरकार बना लेगी क्योंकि बहुमत के लिए 116 का आँकड़ा चाहिए होता है।

कमलनाथ ने बजट पास कराने और डिप्टी स्पीकर का चुनाव कराने का जिक्र करते हुए दावा किया है कि ये दोनों घटनाएँ ये साबित करती हैं कि कॉन्ग्रेस के पास पूर्ण बहुमत है। लेकिन, ग्वालियर स्थित जीवाजी यूनिवर्सिटी से अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत करने वाले नरोत्तम मिश्रा के दावों से उनकी नींद उड़ी हुई है। शिवराज का ये कहना कि दिग्विजय सिंह कमलनाथ को डराने के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं, ने मुख्यमंत्री को और भी चिंता में डाल दिया है। मध्य प्रदेश में 3 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं, ऐसे में लोकसभा चुनाव हार चुके दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया राज्यसभा जाने की फ़िराक़ में हैं।

2 विधायकों का निधन होने के बाद अभी मध्य प्रदेश की 288 सदस्यीय विधानसभा में फ़िलहाल कॉन्ग्रेस के 114 विधायक हैं और वो निर्दलीयों के समर्थन से सरकार चला रही है। 4 निर्दलीय, दो बसपा और एक सपा विधायक के सहारे कमलनाथ की सरकार चल रही है। बसपा का एक विधायक पार्टी से निलंबित किया जा चुका है। भाजपा के पास 107 विधायक हैं और कॉन्ग्रेस के पास 121 विधायकों का समर्थन है।

चूल्हे और समान लूट कर दंगाइयों ने चाय की दुकान फूँक डाली: न्याय के लिए दर-दर भटक रहे सूरज

ताहिर हुसैन के गुंडों ने दिल्ली के हिन्दू-विरोधी दंगों के दौरान न केवल कई लोगों की हत्या कर दी और कइयों को घायल किया बल्कि कई हिन्दुओं की दुकानों और घरों को भी नुक़सान पहुँचाया। ताहिर हुसैन के गुंडों ने स्थानीय दुर्गा फ़कीरी मंदिर में भी तोड़फोड़ मचाई। सबसे ज्यादा नुकसान उन ग़रीबों का हुआ, जो छोटे-छोटे व्यवसाय करके अपना गुजारा चलाते हैं। उन दुकानों में से एक ‘जतिन टी स्टॉल’ भी है, जिसमें भारी तबाही मचाई गई। दूकान के काउंटर को भी तोड़-फोड़ कर नष्ट कर दिया गया।

ये दुकान आम आदमी पार्टी के निलंबित निगम पार्षद ताहिर हुसैन के घर से थोड़ा सामने आगे जाने पर ये चाय, बिस्कुट, पान-मसाला की दुकान आती है। यहाँ दुकान में एक भी सामान नहीं बचा है। सब कुछ लूट लिया गया और फिर जला कर ख़ाक कर दिया गया। गैस चूल्हा से लेकर बाकी सभी चीजें या तो लूट कर ले गए या फिर जला डाली गईं। दुकान के मालिक सूरज जी ने बताया कि उस दिन दंगाइयों ने ताहिर हुसैन की इमारत की तरफ़ से भारी पत्थरबाजी की थी।

सूरज अपना सामान छोड़ कर भाग खड़े हुए। उन्होंने बताया कि उन्हें 50 हज़ार रुपए से भी अधिक का नुकसान हुआ है। उनके दुकान से टेबल-कुर्सी, बिस्किट, बीड़ी-माचिस-गुटखा- एक-एक चीज वहाँ से लूट कर ले गए। इसके बाद दुकान को फूँक डाला गया। हालाँकि, सूरज दंगाइयों की पहचान के बारे में कुछ भी बोलने से मना करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें दंगाइयों की पहचान मालूम नहीं है।

वहाँ टी स्टॉल के बगल में स्थित रजाई-गद्दों की एक दुकान को भी जला डाला गया। वहाँ स्थित एक ग़रीब की ठेले को भी आग के हवाले कर दिया गया। सूरज जी अपनी चाय की दुकान जलाए जाने के बाद से लगातार भटक रहे हैं और उन्हें अब न्याय की उम्मीद है। उनका कोई ठिकाना नहीं है और घर चलाने के लिए जो एकमात्र व्यवसाय था, वो तबाह हो गया। दिल्ली दंगों में ऐसे कई पीड़ित हैं, जिनका सबकुछ लुट गया।

‘उनके’ डर से बच्चों के साथ घर में दुबके रहते हैं, रात भर नींद नहीं आती: महिलाओं ने सुनाया अपना दर्द – ग्राउंड रिपोर्ट

‘बता…तुझ पर पेट्रोल डालें या गाड़ियों पर’ जब दंगाइयों ने रखी हिन्दू दुकानदार की जान बख्शने की शर्त: ग्राउंड रिपोर्ट

ताहिर हुसैन के गुंडे आए, लूटी अमन ई-रिक्शा वर्कशॉप, कर दिया पूरी दुकान खाक, 30 लाख का नुकसान: ग्राउंड रिपोर्ट

नमस्ते: बेंजामिन नेतन्याहू ने दी इजराइल के लोगों को कोरोना से निपटने के लिए भारतीय तरीका अपनाने की सलाह

विश्व में बढ़ते हुए कोरोना वायरस के ख़ौफ़ के बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने आज अपने नागरिकों से अभिवादन के लिए भारतीय तरीका अपनाने की सलाह दी है। नेतन्याहू ने कहा है कि कोरोना वायरस से लड़ने के लिए भारतीय तरीका यानी, नमस्ते कहना सबसे बेहतर है।

दरअसल, अभिवादन के समय गले मिलना, हाथ मिलाना, चुम्बन, आदि कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा संक्रमित करने वाले तरीके हैं। अब तक दुनियाभर में हजारों लोगों की मौत इस वायरस की वजह से हो चुकी है। हालाँकि तमाम लोग ऐसे भी हैं जो ठीक हो कर अपने घर वापस जा चुके हैं। लेकिन इसका खौफ कम होता नहीं दिख रहा है। भारत में भी कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ताजा जानकारी के मुताबिक गुरुग्राम में डिजिटल पेमेंट ऐप पेटीएम के एक कर्मचारी के भी कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है।

पेटीएम के उस कर्मचारी ने सोमवार को ही दफ्तर ज्वॉइन किया था। फिलहाल वह दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती है, जहाँ उसका इलाज चल रहा है। उसे आज ही अस्पताल लाया गया था। पेटीएम का वह कर्मचारी पेटीएम गुरुग्राम ऑफिस का बताया जा रहा है।

भारत और इजराइल की दोस्ती बेहद स्वाभाविक है। गत 15 अगस्त को ही एक ट्वीट में बेंजामिन नेतन्याहू ने पीएम मोदी और सभी भारतीयों को आजादी की बधाई देते हुए सभी को ‘नमस्ते’ कहा था। 23 सेकंड के वीडियो में बेंजामिन नेतन्याहू ने पीएम मोदी और भारतीयों को संबोधित करते हुए आजादी की बधाई दी थी।

नक्सलियों ने की अपने पूर्व साथी की हत्या, आत्मसमर्पण के बाद पुलिस की करता था गुप्त सैनिक बनकर मदद

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों ने एक खूनी वारदात को अंजाम दिया है। दरअसल, सुकमा में नक्सलियों ने अपने एक पुराने साथी की हत्या कर दी है। जिले के तोंगपाल इलाके में माओवादियों ने एक गोपनीय सैनिक को मौत के घाट उतार दिया है। घटना की पुष्टि एसपी शलभ सिन्हा ने की है।

सुकमा जिले के पुलिस अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि जिले के कुकानार थाना क्षेत्र में पालेम गाँव के करीब नक्सलियों ने हुँगा कावासी की धारदार हथियार से हत्या कर दी है। जानकारी के मुताबिक, इस घटना में मृत गोपनीय सैनिक कवासी हुँगा जैमर गाँव का निवासी बताया जा रहा है। उसने हाल ही में नक्सलवाद का दामन छोड़कर आत्मसमर्पण किया था और पुलिस के लिए गोपनीय सैनिक के रूप में कार्य कर रहा था।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार (मार्च 04, 2020) रात कवासी पालेम गाँव में स्थानीय मेला में शामिल होने गया था। इस दौरान घात लगाए बैठे नक्सलियों ने उसे घेर लिया और उसे अपने साथ नजदीकी जंगल में ले गए। बुधवार सुबह जब उसका शव मिलने पर ग्रामीणों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी।

आत्मसमर्पण कर चुके साथियों को ढूँढकर मार रहे हैं नक्सली

गौरतलब है कि गत शुक्रवार व शनिवार (फरवरी 28-29, 2020) की रात नक्सलियों ने चिंतलनार थाना क्षेत्र के मुकरम और तोंगपाल थाना क्षेत्र के कोलोमकोंटा में अपने ही दो पूर्व साथी मुचाकी हड़मा और माड़वी हुर्रा की हत्या कर दी थी।

एक अन्य घटना में सुकमा जिले के पोलमपल्ली के अतुलपारा में सोमवार-मंगलवार की रात आत्मसमर्पित नक्सली पोड़ियामी मंगड़ू की डंडे से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। मंगलवार सुबह मंगड़ू का शव घर से कुछ ही दूरी पर पुलिस ने बरामद किया। मंगड़ू की हत्या नक्सलियों ने की या फिर आपसी रंजिश में हुई पुलिस इस बात की पड़ताल में जुट गई है। एसपी शलभ सिन्हा ने नक्सली हत्या की बात से इंकार करते हुए मामले की पड़ताल जारी होने की बात कही।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हुँगा कवासी की हत्या की घटना की जानकारी मिलने के बाद क्षेत्र के लिए पुलिस दल रवाना किया गया और घटना के लिए जिम्मेदार नक्सलियों की खोज शुरू की गई। कवासी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

नीरज प्रजापति के लिए ऑपइंडिया ने जुटाए ₹32 लाख: CAA समर्थन रैली में मुस्लिम भीड़ ने मार डाला था

नीरज प्रजापति का नाम याद है? लोहरदगा में 23 जनवरी को सीएए के समर्थन में आयोजित हुई रैली पर मुस्लिमों के हमले में घायल होने के बाद नीरज प्रजापति की मृत्यु हो गई थी। लोहरदगा सदर अस्पताल, राँची ऑर्किड हॉस्पिटल और फिर रिम्स में उनका इलाज चला, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। वो देवी-देवताओं की मूर्तियाँ व अन्य पेंटिंग्स बना कर अपना व परिवार का गुजर-बसर करते थे। बेटे की मृत्यु की ख़बर सुन कर नीरज के पिता को भी गहरा सदमा लगा था, जिसके बाद उन्हें रिम्स के आईसीयू में भर्ती कराया गया था।

चूँकि, परिवार की माली हालत ठीक नहीं है और दिवंगत नीरज द्वारा बनाई गई माँ सरस्वती की प्रतिमाएँ बिक नहीं पाईं, ऑपइंडिया ने परिवार की मदद के लिए क्राउडफंडिंग अभियान चलाया। दिवंगत नीरज राम प्रजापति की पत्नी के बैंक अकाउंट डिटेल को जारी किया गया और सार्वजनिक रूप से हमनें जनता से अपील करते हुए कहा कि वे अपनी-अपनी क्षमतानुसार सहयोग करें। नीरज प्रजापति की एक 9 साल की बेटी है और 3 वर्ष का बेटा है, जिनके भरण-पोषण हेतु लोगों द्वारा सहयोग स्वरूप दी गई राशि का अहम योगदान होगा।

ऑपइंडिया के संपादक अजीत भारती ने एक वीडियो के जरिए लोगों को दिवंगत नीरज के परिवार की व्यथा बताई और उनकी पत्नी दिव्या कुमारी के बैंक अकाउंट डिटेल्स सार्वजनिक करते हुए सहयोग की अपील की। परिवार काफ़ी ग़रीबी में जी रहा था और नीरज की पत्नी के पास अपना पैन नंबर तक नहीं था। बाद में परिजनों ने मिल कर उनका पैन अकाउंट बनवाया।

हालाँकि, इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को कोई बदल नहीं सकता लेकिन नीरज प्रजापति के परिवार, ख़ासकर बच्चों की शिक्षा-दीक्षा और रहन-सहन के लिए वित्त की ज़रूरत थी। सरकार ने मुआवजा देने से इनकार कर दिया तो ऑपइंडिया के प्रयासों के बाद जनता ने अब तक लगभग 32.5 लाख रुपए का सहयोग किया है। इसमें से 11.4 लाख रुपए क्राउडकैश के जरिए जुटाए गए, जबकि बाकी धनराशि लोगों ने दिवंगत नीरज की पत्नी के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किया। परिवार ने इसके लिए जनता का धन्यवाद किया है।

ऑपइंडिया भी इस सहयोग के लिए जनता का आभार प्रकट करता है। अभी हालिया दिल्ली दंगों में आपने देखा ही होगा कि मुस्लिम भीड़ द्वारा मारे गए हिन्दुओं के परिवारों की कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही है। नीरज प्रजापति का मामला तो मीडिया के भी नहीं उठाया और उन्हें झारखण्ड की हेमंत सोरेन सरकार ने कोई मदद नहीं मिली। उलटा उन पर दबाव बनाया गया कि वो सीएए समर्थन रैली में मुस्लिम भीड़ द्वारा मारे जाने की बात मीडिया में न बोलें।