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भगवान परशुराम को बताया ‘आतंकी’ और ‘बलात्कारी’: कॉन्ग्रेस नेता गिरफ़्तार

दक्षिण गोवा के बेनॉलिम में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ़ आयोजित रैली में हिंदुओं की धार्मिक भावनाएँ भड़काने के आरोप में गोवा की क्राइम ब्रांच ने कॉन्ग्रेस नेता रामकृष्ण जालमी को गिरफ्तार किया। जालमी पर आरोप लगा कि उन्होंने भगवान परशुराम का नाम लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में क्राइम ब्रांच के एसपी पंकज कुमार सिंह ने कहा कि उन्हें जालमी के ख़िलाफ़ मापुसा के हिंदू युवा सेना ने शिकायत दर्ज कराई थी। जिन्होंने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि जालमी ने भगवान परशुराम पर अभद्र टिप्पणी की। पुलिस के मुताबिक, उन्होंने शिकायत के आधार पर कॉन्ग्रेस नेता को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही उनपर IPC की धारा 259A और 153 A के तहत मामला दर्ज हुआ है।

हिंदू युवा संगठन का कहना है कि भगवान परशुराम, भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं और हिंदू समुदाय में पूजनीय है। जालमी ने भगवान परशुराम को आतंकी और बलात्कारी बताया। जिससे हिंदू समुदाय के सदस्यों में गुस्सा व्याप्त है।

गौरतलब है कि हिंदू भावनाओं को ठेस पहुँचाने के अतिरिक्त हेट स्पीच के कारण होने वाली किसी भी घटना को रोकने के लिए हिंदू सेना ने जालमी के ख़िलाफ़ जल्द से जल्द एक्शन लेने की माँग की। साथ ही शिकायत में इस बात का भी उल्लेख किया कि इस वाकये के कारण हिंदू समुदाय को बहुत पीड़ा हुई है और इस भाषण के ख़िलाफ वो अलग-अलग मंच से अपना गुस्सा व्यक्त कर रहे हैं। इसलिए किसी भी साम्प्रदायिक तनाव को रोकने के लिए एफआईआर जरूर दर्ज होनी चाहिए।

यहाँ बता दें, भगवान परशुराम श्री हरि विष्णु के अंशावतार हैं और 8 चिरंजीवियों में से एक हैं। मान्यता है कि वे आज भी जीवित हैं और युग के अंत में जब भगवान कल्कि रूप लेंगे तब वही उन्हें गुरु बनकर शिक्षा देंगे। हिंदू धर्म में भगवान परशुराम को महान और न्यायप्रिय देवता माना गया है। इसके अलावा उन्हें क्षत्रियों का संहारक भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने कई बार धुष्ट क्षत्रियों से धरती को मुक्त कराया है।

मुस्लिम आरक्षण पर रार: शिवसेना ने NCP नेता के बयान को नकारा, कहा- मुस्लिम तुष्टिकरण नहीं होगा

महाराष्ट्र में शिवसेना ने मुस्लिमों को आरक्षण दिए जाने के किसी भी प्रस्ताव से इनकार कर दिया है। बता दें कि पिछले दिनों अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा था कि राज्य में 5 फीसदी मुस्लिम आरक्षण वापस लाने के लिए सरकार कानूनी सलाह ले रही है और जल्द ही इसे लागू किया जाएगा, लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि शिवसेना ने आरक्षण दिए जाने को लेकर पल्ला झाड़ लिया है। शिवसेना ने इस मामले में किसी भी प्रस्ताव को खारिज कर दिया है

विश्व हिंदू परिषद ने शनिवार (फरवरी 28, 2020) को एक ट्वीट कर महाराष्ट्र सरकार के धार्मिक आधार पर आरक्षण देने के फैसले पर सवाल उठाया था। विश्व हिंदू परिषद ने मुस्लिमों को आरक्षण देने पर चिंता जताते हुए कहा था, “शिवसेना से मुस्लिम तुष्टिकरण की उम्मीद नहीं की जा सकती।” रविवार (मार्च 1, 2020) की सुबह शिवसेना ने ट्वीट का जवाब देते हुए कहा, “इस तरह का फैसला विचाराधीन नहीं है।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों नवाब मलिक ने कहा था, “हाई कोर्ट ने सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में मुस्लिम समुदाय को 5 फीसदी आरक्षण को हरी झंडी दी थी। पिछली सरकार के कार्यकाल में इस संबंध में कोई एक्शन नहीं लिया गया। इसलिए हमने हाई कोर्ट के आदेश को कानून के रूप में अमल करने का ऐलान किया है।”

इसके बाद विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने आरक्षण  के मुद्दे पर कहा था कि मुस्लिमों के लिए ये असंवैधानिक है और इससे अन्य पिछड़ा वर्ग और मराठा आरक्षण प्रभावित होगा। फडणवीस ने कहा था, “हमें जानना चाहिए कि किन मुद्दों पर शिव सेना ने समझौता कर सरकार बनाने के लिए अपनी विचारधारा का परित्याग कर दिया है।” भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि अगर मुस्लिमों को अतिरिक्त आरक्षण दिया गया तो अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिल सकेगा।

गौरतलब है कि साल 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले जून महीने में राज्य की तत्कालीन कॉन्ग्रेस-एनसीपी गठबंधन सरकार ने मुस्लिमों के लिए 5 फीसदी के आरक्षण की व्यवस्था की थी और इस संबंध में अध्यादेश भी जारी किया था। मगर इसके बाद हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना गठबंधन की सरकार सत्ता में आ गई। नई सरकार ने मराठा आरक्षण बरकरार रखा, लेकिन मुस्लिमों के लिए आरक्षण पर कोई कदम नहीं उठाया। 

खुद के शोरूम से हटा ली सभी बाइक… फिर लगाई अपनी ही दुकान में आग: दंगों से पहले Vs बाद की ग्राउंड रिपोर्ट

मस्जिदों से लोगों को सावधान और सतर्क रहने के लिए आह्वान कर दिया गया था। इसके बाद हर कोई अपने बेहतर इंतजाम में जुट गया। कोई अपनों को एक से दूसरी जगह पहुँचा रहा था, तो कोई अपने कीमती सामान को सुरक्षित स्थान पर ले जा रहा था तो कोई अपने को सुरक्षित रखने के लिए हथियारों को सहेजने में लगा हुआ था। यह सब इंतजाम किसी प्राकृतिक आपदा से निपटने, चोरी-डकैती या फिर किसी आतंकी हमले की पूर्व सूचना से बचने के लिए नहीं बल्कि दिल्ली के प्रमुख इलाकों में सीएए विरोध के नाम पर हिंदू विरोधी हिंसा फैलाने के लिए लिए कट्टरपंथियों द्वारा किए जा रहे थे।

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों के बीच से आई अब तक की तस्वीरों से एक बात तो साफ़ हो गई है कि दंगा फैलाने और हिंदुओं को निशाना बनाने के लिए महीनों से तैयारियाँ की जा रहीं थीं। कुछ ऐसी ही तैयारी की गई दंगा प्रभावित क्षेत्र चाँद बाग और जाफराबाद के बीच स्थित बृजपुरी क्षेत्र के एक बाईक शोरूम में। यहाँ स्थित हीरो के शोरूम से उसके मालिक ने दंगाइयों द्वारा हिंसा फैलाने से पहले ही अपनी बाइकों को निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुँचा दिया और इसके बाद खुद ही उसमें तोड़फोड़ करके स्वयं को पुलिस और मीडिया के सामने पीड़ित दिखाने की जुगत में लगा रहा।

सोमवार को शुरू हुई हिंसा के सातवें दिन हम बृजपुरी इलाके में दंगा पीड़ितों से मिलते हुए आगे बढ़ रहे थे। इसी बीच हमें एक बड़ी और चौंकाने वाली जानकारी मिली। यह जानकारी किसी चलते-फिरते व्यक्ति से नहीं बल्कि उस व्यक्ति से मिली, जो उस शोरूम के पास में दुकान चलाता है और दिन के 12 घंटे दुकान पर रहकर आस-पास की हर एक गतिविधि पर नजर भी रखता है। चश्मदीद के मुताबिक, “रविवार को मुस्लिम महिलाओं का सीएए विरोध के नाम पर धरना शुरू हो गया था। इसके बाद से सब अपनी आगे की तैयारी में लग गए थे। सोमवार को चाँद बाग से हिंसा शुरू हो गई। मुस्लिम पहले हिंदुओं की दुकानों को लूट रहे थे फिर उनमें आग लगा रहे थे।”

बृजपुरी में रहने वाले चश्मदीद आगे बताते हैं, “इतना ही नहीं इन सबको पता था कि आगे क्या होने वाले वाला है। हमारे बराबर में एक मात्र मुस्लिम व्यक्ति का बाइक का शोरूम है, जिसमें सैकड़ों बाइकें बेचने के लिए रहती थीं, लेकिन इलाके में हिंसा फैलने से पहले ही 26 फरवरी को सुबह 5 बजे ही सभी बाइकों को शोरूम से निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुँचा दिया गया। इसके बाद स्वयं ही दंगाइयों ने खुद को पीड़ित दिखाने के लिए पहले तो शोरूम में तोड़फोड़ की और फिर काउंटर को शोरूम से बाहर निकालकर उसमें आग लगा दी।”

वह कहते हैं कि शाहीन बाग तो केवल दिखावे के लिए था, असली तैयारी तो हिंदुओं के खिलाफ यहाँ (जाफराबाद-करावलनगर में) की गई, क्योंकि एक दिन के अंदर न तो बम बनते हैं और न ही एक दिन के अंदर छतों पर इतने ईंट-पत्थर इकट्ठे होते हैं। दंगा शात होने के बाद एमसीडी की करीब 30 से 40 गाड़ियों को मलवा लेकर जाते हुए मैंने खुद अपनी आँखों से देखा है। यह वही मलवा है, जो दंगाईयों द्वारा ईंट-पत्थर के पूर में सड़कों पर फेंका गया था। चश्मदीद ने यह भी पुख्ता किया कि हिंदू बाहुल्य क्षेत्र में दूसरे मजहब के किसी भी व्यक्ति को एक खरोंच तक नहीं आई, लेकिन दुखद कि मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में हमारा एक भी हिंदू भाई सुरक्षित नहीं रह सका।

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अंकित शर्मा के परिवार को 1 करोड़, सरकारी नौकरी: CM केजरीवाल ने ताहिर हुसैन पर साधी चुप्पी

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली दंगों में ताहिर हुसैन के गुंडों द्वारा मारे गए आईबी के अंकित शर्मा के परिवार को 1 करोड़ रुपए बतौर मुआवजा देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि साथ ही पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जाएगी। हालाँकि, अपनी पार्टी के नेता और निगम पार्षद ताहिर हुसैन पर केजरीवाल ने पूरी तरह चुप्पी साधे रखी और कुछ नहीं कहा। दूसरी तरफ़ संसद में भगवंत मान और संजय सिंह सरीखे आप नेता भाजपा को दंगाइयों का सम्मान करने वाला बताते हुए विरोध प्रदर्शन करते नज़र आए।

बता दें कि अंकित शर्मा की लाश चाँदबाग़ स्थित एक नाले से मिली थी। उसी नाले से 3 और शव भी बरामद किए गए थे, जिन्हें मार कर फेंक दिया गया था। मुख्यमंत्री अभी तक पीड़ित परिवार से मिलने नहीं पहुँचे हैं और न आम आदमी पार्टी के नेताओं में ताहिर के समर्थन और विरोध के लिए एकमत नहीं है। जहाँ पार्टी ने सस्पेंड कर दिया है, विधायक अमानतुल्लाह ख़ान ने उनका समर्थन किया है।

अंकित शर्मा की पोस्टमॉर्टम के मुताबिक, उनके शरीर का एक भी हिस्सा ऐसा नहीं था जिसमें चाकू के गहरे घाव न हों। डॉक्टर ने लिखा था कि 400 से ज़्यादा बार उन्हें चाकुओं से गोदा गया। अरविन्द केजरीवाल ने मुआवजे की घोषणा करते हुए कहा:

“अंकित शर्मा IB के जाँबाज़ अधिकारी थे। दंगो में उनका नृशंस तरीक़े से क़त्ल कर दिया गया। देश को उन पर नाज़ है। दिल्ली सरकार ने तय किया है कि उनके परिवार को 1 करोड़ की सम्मान राशि और उनके परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी देंगे। भगवान उनकी आत्मा को शांति दें।”

इस क्रूर अमानुषिक हत्याकांड और यातना को अंजाम देने में कम से कम 6 लोगों के शामिल होने की बात सामने आई थी। डॉक्टरों ने कहा था कि अंकित शर्मा को 6 लोगों ने लगातार 2 से 4 घंटे तक 400 बार चाकुओं से गोदा होगा। साथ ही, उनकी आँत को शरीर से बाहर निकाल दिया था। फोरेंसिक डॉक्टरों ने बताया था कि इस तरह से यातना का शिकार और क्षत-विक्षत बॉडी उन्होंने अपने जीवन में कभी नहीं देखा।

प्रत्यक्षदर्शी प्रदीप वर्मा ने ऑपइंडिया को बताया था कि आम आदमी पार्टी के निगम पार्षद ताहिर हुसैन के घर के पीछे उसके कई गुंडे जमा थे। अंकित उनसे हाथ-पाँव जोड़ कर विनती कर रहे थे कि वो पत्थरबाजी न करें। तभी दंगाई भीड़ अचानक से आगे बढ़ी और उन्होंने मिल कर अंकित की पिटाई शुरू कर दी। इसके बाद उन्हें पकड़ के घसीटते हुए ताहिर हुसैन की इमारत के भीतर ले जाया गया और हत्या कर दी गई थी।

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J & K: ऐतिहासिक सिटी चौक बना ‘भारत माता चौक’, सर्कुलर रोड चौक का नाम हुआ ‘अटल जी चौक’

केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर में अहम बदलाव शुरू हो गए हैं। केंद्र सरकार के कई कानूनों को लागू करने के बाद अब जम्मू के दो चौक का नाम बदला गया है। जम्मू नगर निगम (जेएमसी) ने शहर के ऐतिहासिक सिटी चौक का नाम बदलकर ‘भारत माता चौक’ कर दिया है और सर्कुलर रोड चौक का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की याद में ‘अटल जी चौक’ कर दिया है।

बीजेपी के नेतृत्व वाले जम्मू नगर निगम की आम सभा ने इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर दिया। हर साल सिटी चौक पर गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराया जाता है। इसलिए बीजेपी के नेता कई सालों से इस चौक का नाम बदलकर भारत माता चौक करने की माँग कर रहे थे। बीजेपी की वरिष्ठ नेता और जेएमसी की उप महापौर पूर्णिमा शर्मा ने बताया, “मैंने करीब चार महीने पहले आम सभा में एक प्रस्ताव रखा था, जिसमें जनता की माँग पर ‘सिटी चौक’ का नाम बदलकर ‘भारत माता चौक’ रखने की माँग की गई थी।” उन्होंने कहा कि उस प्रस्ताव को पारित कर दिया गया और सिटी चौक का नाम बदलकर भारत माता चौक कर दिया गया है।

डिप्टी मेयर पूर्णिमा शर्मा के निर्देश पर इन चौराहों पर बोर्ड लगा दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि जल्द कुछ और चौराहों के नाम भी बदल दिए जाएँगे। नगर निगम की जनरल हाउस की बैठक में दो दिन पहले ही तवी नदी पर बने चौथे पुल के नजदीक भगवती नगर चौक का नाम बदल कर बाबा अमरनाथ जी चौक रखने का फैसला लिया गया है और यहाँ पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की साढ़े आठ फुट ऊँची प्रतिमा लगाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल चुकी है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जम्मू-कश्मीर में 37 केंद्रीय कानून को लागू करने की मंजूरी दी थी। इसमें भारतीय दंड संहिता और अपराध प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) समेत कई अहम कानून शामिल हैं।

गन लाइसेंस घोटाले में CBI ने 2 IAS ऑफिसरों को किया गिरफ्तार, जाँच जारी

सीबीआई ने फर्जी गन लाइसेंस मामले में रविवार (मार्च 1, 2020) को दो पूर्व IAS ऑफिसर राजीव रंजन और सेवानिवृत्त केएएस इतरत हुसैन रफीकी को गिरफ्तार किया। दोनों के ख़िलाफ़ फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कुपवाड़ा जिले में डीसी रहने के दौरान बड़ी संख्या में गैर प्रांतीय लोगों को सशस्त्र लाइसेंस जारी करने के आरोप में कार्रवाई की गई ।

जानकारी के मुताबिक, सीबीआई ने 17 मई 2018 को 2012 से 2016 तक अलग-अलग जिलों के डीसी की ओर से भारी संख्या में हथियार लाइसेंस जारी किए जाने का मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद इस मामले में जाँच के दौरान रंजन और रफीकी की कथित भूमिका सामने आई थी। रंजन और रफीकी क्रमश: 2015 से 2016 और 2013 से 2015 तक कुपवाड़ा के जिलाधिकारी के पद पर रहे थे।

खबरों के अनुसार, अभी इस मामले पर कुछ अन्य अधिकारियों के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की जा सकती है। इसमें 2012 से 2016 तक बारामुला, राजौरी, उधमपुर, डोडा, और रामबन जिले में डीसी रह चुके अधिकारी प्रमुख रूप से शामिल हैं।

गौरतलब है कि इस संबंध में पिछले साल 10 जुलाई को जाँच एजेंसी ने जम्मू, कठुआ, उधमपुर और श्रीनगर में 11 जगहों पर एक साथ छापा मार कर मामले से जुड़े दस्तावेज बरामद किए थे। जिनके आधार पर गत वर्ष 30 दिसंबर को सीबीआई ने आईएएस अधिकारी यशा मुदगल, कुमार राजीव रंजन, इतरत हुसैन रफीकी, मोहम्मद सलीम, मोहम्मद जुनैद खान, एफसी भगत, फारूक अहमद खान और जहाँगीर अहमद के घरों पर छापा मार कर तलाशी ली थी। इस घोटाले के खुलासे में 4.29 लाख लाइसेंस जारी करने की बात जाँच में सामने आई थी। इसमें 90 फीसदी लाइसेंस दूसरे राज्य के लोगों को जारी किए गए। इसके अतिरिक्त शोपियाँ, राजोरी, कुपवाड़ा उधमपुर, बारामूला डोडा और रामबन जिले में सबसे अधिक लाइसेंस जारी किए गए।

यहाँ बता दें, इससे पहले सीबीआई ने कुछ दिन पहले ही इस मामले के संबंध में राहुल ग्रोवर को गिरफ्तार किया था। ग्रोवर पर आरोप है कि वो हथियार डीलरों और अफसरों के साथ मिलकर जम्मू कश्मीर से पूरे देश में मान्य शस्त्र लाइसेंस खरीदने का काम करता था।

ग्रोवर को राजस्थान पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते ने इसी आरोप में 2017 को गिरफ्तार किया था। जिसके बाद उसे एक साल बाद जमानत मिली थी। ग्रोवर पर उपभोक्ताओं को हथियार लाइसेंस के नवीनीकरण या नए लाइसेंस देने की सुविधा देने का आरोप है।

बच्चों के लिए दूध लेने निकले थे प्रेम सिंह: दंगाइयों ने मार डाला, 3 बेटियों के सिर से उठ गया पिता का साया

राजधानी दिल्ली में भड़की हिंसा से ना जाने कितने लोग बेघर हो गए। कईयों की दुकानों, गाड़ियों, घरों में आग लगा दी गई। कई के परिवार उन से अलग हो गए। इस हिंसा ने लोगों से उनके अपने छीन लिए। हिंसा ने कई घरों के ऐसे चिराग बुझा दिए जो परिवार में इकलौते कमाने वाले थे। ऐसी कई कहानियाँ अब धीरे-धीरे सामने आ रही हैं। इन्हीं में से एक हैं- प्रेम सिंह की कहानी। मंगलवार (फरवरी 25, 2020) को बृजपुरी इलाके में भड़की हिंसा में मरने वाले प्रेम सिंह भी अपने परिवार का एकमात्र सहारा थे। वह रिक्शा चलाकर गुजारा करते थे। मंगलवार सुबह दूध लेने के लिए निकले प्रेम सिंह की इस्लामी दंगाइयों ने हत्या कर दी।

नवभारत टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक प्रेम सिंह दिल्ली में रिक्शा चलाकर परिवार का भरण पोषण करते थे। उसकी मौत से परिवार में सदमे में है। पत्नी सुनीता गुरु तेग बहादुर अस्पताल के बाहर गोद में बच्चे को लिए अपने पति के शव का इंतजार कर रही हैं। वो कहती हैं कि उन्हें इस बारे में कुछ भी नहीं पता। उन्हें पड़ोसियों ने बताया कि दंगाइयों ने उनके पति की हत्या कर दी। सुनीता के साथ हॉस्पिटल के शवगृह के बाहर इंतजार कर रही उनकी पड़ोसी निशा ने बताया कि प्रेम सिंह का शव वेलकम पुलिस थाने के पास से बरामद हुआ था और शव की पहचान प्रेम सिंह की बहन सविता ने किया था।

पत्नी सुनीता का रो-रोकर बुरा हाल है। बूढ़ी माँ बेटे का शव देख बदहवास है। प्रेम सिंह घर में इकलौते कमाने वाले थे। प्रेम सिंह उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के रजपुरा गाँव के रहने वाले थे। वह 6 महीने पहले ही रोजगार की तलाश में गाँव से दिल्ली आए थे। कोई रोजगार नहीं मिला तो रिक्शा चलाने लगे थे। वह बृजपुरी इलाके में पत्नी, बच्चे, माँ और भाई-बहन के साथ किराए के एक मकान में रहते थे। प्रेम सिंह की तीन बेटियाँ हैं। बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया है। बच्चों के लिए दूध लाने के लिए निकले प्रेम दंगाइयों का शिकार हो गए और उनकी पत्नी इंतजार करती रह गई। पत्नी के आँसू नहीं रुक रहे। उनकी समझ में नहीं आ रहा कि वो तीनों बेटियों की परवरिश कैसे करेगी।

इसी तरह मुस्तफाबाद इलाके के रिक्शा चालक मोइनुद्दीन भी इस हिंसा का शिकार हुए। दंगाइयों ने हिंसा के दौरान उसके घर और रिक्शा को आग लगा दी। वो अब नाले के बगल में सोने को मजबूर हैं। मोइनुद्दीन अपने चार बच्चों और पत्नी के साथ खुशी से रह रहे थे, लेकिन 23 फरवरी को दंगे भड़कने के बाद रातों-रात उनके लिए सब कुछ बदल गया। उनकी पत्नी और चार बच्चे तब से लापता है। अब वह एक नाले के बगल में एक दुकान के बाहर खुले में सोने के लिए मजबूर हैं। उन्हें भोजन और पैसे के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

मोइनुद्दीन नम आँखों से कहते हैं, “मुझे अपने परिवार का पता नहीं है। जब स्थिति तनावपूर्ण होने लगी थी, तो मैंने अपनी पत्नी को बच्चों के साथ सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए कहा था। तब से मेरे बच्चों और पत्नी का कुछ पता नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, “हर कोई मेरी कहानी जानता है, मैंने पुलिस को सब कुछ बता दिया है लेकिन उन्होंने कहा कि स्थिति सामान्य होने के बाद वो देखेंगे कि क्या किया जा सकता है। कई लोग यहाँ अपने परिवार के सदस्यों की तलाश कर रहे हैं। जिस दिन दंगे शुरू हुए  मैं 2,000 रुपए का राशन लाया था, अब सब कुछ समाप्त हो गया है।”

चश्मदीद प्रदीप वर्मा का बयान जिन्होंने चाकू से गोदकर मारे गए IB अधिकारी को आखिरी बार देखा था

दिल्ली में नाले से बरामद हुए 3 और शव: 2 भागीरथी विहार, 1 गोकुलपुरी से – इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात

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‘₹डी की बेटी को घर से उठा लेंगे’, ‘कभी हमारा ले लो’: तनवीर हुसैन, अरशद खान

नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ विरोध प्रदर्शन करके खुद को बेचारा, बेसहारा, बेबस दिखाने वाले अल्पसंख्यक समुदाय की हकीकत दिल्ली दंगों में साफ दिखी। उत्तर-पूर्वी दिल्ली की सड़कों पर इन लोगों ने जमकर कहर बरपाया। हर जगह चुन-चुनकर इन्होंने उन लोगों को निशाना बनाया, जो या तो हिंदू थे या फिर मोदी समर्थक। इस बीच न सिर्फ सड़क बल्कि सोशल मीडिया पर भी ये ट्रेंड जारी रहा। फेसबुक पर एक महिला को विशेष समुदाय के दो युवक तनवीर हुसैन और अरशद खान ने इतना तंग कर डाला कि उन्हें कोलकाता पुलिस से मदद की गुहार लगानी पड़ी। महिला का नाम रुद्राणी मुखर्जी है।

रुद्राणी के अनुसार, एक फेसबुक पोस्ट पर तनवीर और अरशद नाम के दो मुस्लिम युवक उन्हें किडनैप कर रेप करने की धमकी देने लगे। हालाँकि उन्होंने लंबी बहस के बाद दोनों को ब्लॉक कर दिया। लेकिन बाद में दोनों उन्हें फिर से मैसेंजर पर धमकियाँ देने लगे। जिसके कारण उन्होंने खुद के बचाव के लिए पुलिस से मदद की गुहार लगाई और आशा की कि पुलिस उनकी मदद करेगी।

डरे हुए लोगों का स्क्रीनशॉट

रुद्राणी ने तनवीर हुसैन और अरशद से हुई बातचीत के स्क्रीनशॉट भी अपनी टाइमलाइन पर डाले। इनमें देख सकते हैं कि तनवीर हुसैन नाम का शख्स रुद्राणी से पहले गरीब को खाना ख़िलाने को लेकर सवाल उठाता है, लेकिन जब रुद्राणी उसी की भाषा में उसे जवाब दे देती हैं तो तनवीर उनसे गाली गलौच करने लगता है।

धीरे-धीरे बात बढ़ जाती है और अरशद खान भी महिला यूजर को ब्लॉक किए जाने की धमकी दे देता है। इसके बाद तनवीर, अरशद को साथ देखकर महिला के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें घर से उठाने की बात करता है और लगातार उन्हें गाली देता रहता है। दोनों युवकों की अभद्र भाषा महिला द्वारा शेयर किए स्क्रीनशॉट्स में देखी जा सकती है।

बता दें कि रुद्राणी ने कोलकाता पुलिस से मदद माँगने के अलावा एक और पोस्ट सोशल मीडिया पर लिखा है। उन्होंने अपने पोस्ट में सेक्युलरिज्म से बीमार लोगों को चेताया है और संदेश दिया है, “इस तरह भारत का अल्पसंख्यक डर में है। आज ये धमकी मुझे मिली है। कल आपको मिलेगी। कल आपको या आपके घर की किसी महिला को मिलेगी। सतर्क रहिए। सेक्युलरिज्म सिर्फ़ तब तक ठीक है, जब तक ये लोग अपनी लिमिट क्रॉस न करें। मैं निजी तौर पर निशाना बनाई गई और ये दिख रहा है। अगर इसे देखकर भी आपको डर नहीं लग रहा तो पता नहीं क्या देखकर लगेगा।”

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‘हमने चूड़ियाँ नहीं पहनी हैं, हमें मालूम है अमन-ओ-अमान कैसे जाएगा’: AIMIM विधायक मो इस्माइल के जहरीले बोल

ट्रम्प का ध्यान खींचने के लिए रची गई थी दिल्ली दंगों की साज़िश: उमर खालिद के इस भाषण से हुआ खुलासा

दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों का सबसे भीषण रूप 24-25 फरवरी को देखने को मिला। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में मजहबी भीड़ का कहर बरपा। कई हिन्दुओं की दुकानें फूँक दी गईं, कईयों के घर जला डाले गए और कई मारे भी गए। हिंसा भड़कने के बाद वामपंथियों के गिरोह विशेष ने भाजपा नेता कपिल मिश्रा पर आरोप लगाने शुरू कर दिए, जिन्होंने जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर बैठे उपद्रवियों को हटाने की माँग की थी अथवा विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। कपिल शर्मा की आड़ में वारिस पठन, शरजील इमाम, मोहम्मद शाहरुख़, ताहिर हुसैन और हाजी युनुस जैसों की करतूतों को ढका गया।

इन दंगों को भड़काने के लिए पहले से साजिश रची जा रही थी। जेएनयू के छात्र नेता उमर खालिद के एक भाषण का विडियो आया हैं, जो दंगों से पहले का है। ये विडियो यूट्यूब पर 17 फरवरी को अपलोड हुआ था। उस समय देश की जनता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत दौरे को लेकर उत्साहित थी। उमर खालिद द्वारा महाराष्ट्र के अमरावती में भाषण दिया गया था। अगर आप इसे सुनेंगे तो आपको पता चल जाएगा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के दौरे के समय ही दंगे कराने की योजना थी ताकि इंटरनेशनल मीडिया का अटेंशन लिया जाए और प्रशासन को परेशान किया जाए।

इस भाषण में उमर खालिद कहता दिख रहा है कि गुजरात में झुग्गी-झोपड़ियों को छिपाया जा रहा है ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति ये सब देख न लें। इस विडियो में लोगों को भड़काते हुए जेएनयू का छात्र नेता उमर खालिद कहता है:

“हम वादा करते हैं। 24 फरवरी को जब डोनाल्ड ट्रम्प भारत आएँगे तो हम उनको बताएँगे कि हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री और यहाँ की सरकार देश को बाँटने का काम कर रही है और राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के उसूलों की धज्जियाँ उड़ा रही है। हम उन्हें बताएँगे कि हिंदुस्तान की जनता यहाँ की सरकार के ख़िलाफ़ लड़ रही है। ये लड़ाई लम्बी है, कभी मायूस मत होइएगा। 50 दिनों में हमने जज्बा पाया है। पिछले 7 साल से हिंदुस्तान के मुस्लिमों के ऊपर काफ़ी जुल्म किए गए हैं। मॉब-लिंचिंग की घटनाएँ आम हो गई हैं। तब हमें डर लगता था, हम सड़कों पर निकल कर नहीं आते थे। अयोध्या जजमेंट और अनुच्छेद 370 हटाने का भी विरोध नहीं हुआ तो ये अहंकारी बन गए।”

इस पूरे भाषण में उमर खालिद ने लोगों से आह्वान किया कि वो कुछ ऐसा करेंगें, जिससे डोनाल्ड ट्रम्प की यात्रा के दौरान ये लगे कि देश की जनता यहाँ की सरकार के ख़िलाफ़ ‘लड़ रही है।’ ये उमर खालिद का अकेला विडियो नहीं है, जिससे ये चीजें साफ़ हुई हैं। ऐसे कई इस्लामी नेताओं और वामपंथियों के जहरीले भाषणों से पता चलता है कि वो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को बदनाम करना चाहते थे, जिसके परिणामस्वरूप कई जानें गईं।

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दिल्ली में हुई भयानक हिंसा सीधे-सीधे एक तरफ इशारा करती है कि एक बड़े नरसंहार की तैयारी थी। चाहे ताहिर हुसैन के घर पर इकट्ठा बम और एसिड का जखीरा हो या मुस्तफाबाद में बड़ी बड़ी स्टील की प्लेट्स की आड़ में निकली दंगाइयों की भीड़ या फिर फिरोज खान के यहाँ निकला 60000 लीटर तेजाब हो या जाफराबाद, सीलमपुर, मुस्तफाबाद बाद में हुई सुनियोजित हिन्दू नेताओं की हत्याएँ – स्पष्ट था कि किन लोगों को मारना है, किनकी दुकान और घर जलाने हैं, उनकी मार्किंग पहले से की गई थी। दुकानों पर CAA विरोधी नारे ऐसे लिखे गए थे कि किसे नहीं जलाना है, उसकी पहचान हो जाए।

दो हफ्ते पहले से समुदाय विशेष के इलाकों में ईंटों के ढेर ऑर्डर करके मँगवाए गए थे। जनवरी से बार-बार दिल्ली पुलिस के द्वारा अवैध हथियारों का जखीरा पकड़ा जा रहा था। इन्हीं इलाकों से चार महीने पहले आतंकवादी भी पकड़े गए थे। दिसंबर में जामिया में अमानतुल्ला खान, सीलमपुर में अब्दुर्रहमान और जामा मस्जिद में शुएब इकबाल ने खुलेआम दंगाई भीड़ का नेतृत्व किया था। इन तीनों पर FIR दर्ज है और तीनों को केजरीवाल ने टिकट भी दिया।

उमर खालिद खुलकर एलान कर चुके थे कि ट्रम्प के सामने सड़कों पर बवाल करना है। मुस्तफाबाद के हिन्दू परिवार बताते हैं कि कैसे विधायक हाजी यूनुस दंगाइयों की मदद कर रहे थे। ट्रम्प के दिल्ली आने वाले दिन जामिया के स्टूडेंट्स ने नई दिल्ली में बड़े प्रदर्शन की घोषणा कर रखी थी। मालवीय नगर के हौजरानी में सुबह से बड़े-बड़े इस्लामिक जुलूस निकाल जा रहे थे। जाफराबाद, चाँद बाग, खुरेजी, इंद्रलोक, निज़ामुद्दीन, हौजरानी और शाहीन बाग में सड़के बंद करके मजहबी भीड़ खुलेआम खड़ी थी। दिल्ली के तीस हजारी, फिल्मिस्तान में लगभग 50,000 कट्टरपंथी सुबह से इकट्ठा होकर सड़कों पर घूम रहे थे।

भीड़ थी, हथियार थे और घेराव था। सब तैयार था लेकिन एक गड़बड़ हो गई। एक दिन पहले दोपहर एक बजे कपिल मिश्रा ने मौजपुर में आने की घोषणा कर दी। तीन बजे वहाँ सड़क बंद होने व बढ़ते तनाव से त्रस्त हिन्दू जनता इकट्ठा होने लगी। जाफराबाद और कबीरनगर की मजहबी भीड़ बेकाबू हो गई। जो कत्लेआम देर रात शुरू होने थे, उसका वेट किए बगैर जाफराबाद और कबीर नगर की हथियारों से लैस भीड़ मौजपुर में टूट पड़ी।

टीवी पर खबर चली और बाकी इलाकों में भी पथराव शुरू हो गए। लोग चौकन्ने हो गए और मोहल्लों में इकट्ठा होकर गश्त करने लगे।

जिस प्रकार से चांद बाग में CAA के विरोध में धरने पर बैठी मजहबी भीड़ ने भजनपुरा में पेट्रोल पंप में आग लगाई, वो अगर पंप की टंकियों तक पहुँच जाती तो कम से कम आधे किलोमीटर तक सब कुछ ख़त्म हो जाता।

जनता चौकन्नी हो चुकी थी, पुलिस तैनात और दंगाई एक्सपोज हो चुके थे। इन सबके बावजूद जिस तरह से अंकित शर्मा की निर्ममता से हत्या हुई, वो बताता है कि हत्यारे आतंकी सोच से भरे हुए थे। शायद जाने-अनजाने में कपिल मिश्रा ने मौजपुर में जो हिम्मत दिखाई, उससे एक बड़ी साजिश कामयाब नहीं हो पाई।

कपिल मिश्रा के एक कदम से एक बड़ा नरसंहार होने से बच गया।

NOTE: लेखक अपना नाम प्रकाशित नहीं करवाना चाहते हैं।

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