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चाचा-भतीजे में रार, डूबेगी ठाकरे सरकार: CAA-NRC-NPR पर शरद पवार से अलग चले अजित, NCP में फूट!

महाराष्ट्र में पहली बार शिवसेना ने कॉन्ग्रेस और NCP के साथ मिलकर सरकार बनाई। जब से ये बेमेल सरकार बनी है, तब से सभी दलों में किसी न किसी मसले पर आपसी तकरार देखने को मिलती रहती है। बड़ी मुश्किल में कॉन्ग्रेस और एनसीपी में विभागों का बँटवारा हो पाया। इसके अलावा नागरिकता संशोधन कानून पर शरद पवार और कॉन्ग्रेस की विचारधारा से विपरीत उद्धव ठाकरे राय प्रकट कर चुके हैं। उन्होंने CAA का समर्थन करते हुए कहा था कि इससे किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। इसे शरद पवार ने उनका निजी नजरिया बताकर खारिज कर दिया था। हालाँकि ठाकरे ने एनआरसी को लागू करने से मना कर दिया था।

अब उपमुख्यमंत्री अजित पवार और शरद पवार के बीच इसको लेकर मतभेद देखने को मिल रही है। अजित पवार खुलकर सीएए के समर्थन में आ गए हैं, जबकि उनके चाचा शरद पवार इस कानून का विरोध कर रहे हैं। अजित पवार ने CAA, NRC और NPR के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पास करने की माँग को भी दरकिनार कर दिया है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा में बिहार की तरह सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने की आवश्यकता नहीं है। मुंबई में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते उन्होंने कहा कि इस कानून से किसी को घबराने की कतई जरूरत नहीं है और जो लोग इसे लेकर भ्रम की स्थिति पैदा करने में लगे हैं, उनकी बातों में आने की जरूरत नहीं है।

अजित पवार ने कहा, ‘‘शरद पवार एवं अन्य नेताओं ने भरोसा दिलाया है कि महाराष्ट्र में किसी भी व्यक्ति को इससे किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी। किसी की नागरिकता नहीं जाएगी।” गौरतलब है कि शरद पवार ने पिछले वर्ष दिसंबर में कहा था कि महाराष्ट्र को आठ अन्य राज्यों की ही तरह CAA को लागू करने से इनकार करना चाहिए।

एनसीपी नेता नवाब मलिक ने भी पिछले माह कहा था कि एनआरसी महाराष्ट्र में लागू नहीं होगा। वहीं कॉन्ग्रेस ने सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव लाने की माँग की थी। अब इसको लेकर चाचा-भतीजे के बीच राजनीतिक जंग छिड़ गई है। बता दें कि राजनीतिक रूप से शरद पवार और अजीत पवार के बीच मतभेद कई बार उजागर हो चुके हैं।

‘हमने चूड़ियाँ नहीं पहनी हैं, हमें मालूम है अमन-ओ-अमान कैसे जाएगा’: AIMIM विधायक मो इस्माइल के जहरीले बोल

महाराष्ट्र के मालेगाँव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के विधायक मो इस्माइल ने सरेआम शांति भंग करने के लिए भड़काऊ बयान दिया। एक वायरल विडियो में विधायक मुफ्ती मोहम्मद इस्माइल को कहते देखा जा सकता है कि अगर वो अमन-ओ-अमान बाकी रखना जानते हैं तो यह भी जानते हैं कि ये कैसे जाएगा। अपने इस जहरीले बयान देने के बाद उन्होंने इस पर सफाई भी दी और बताया कि उन्होंने ये बातें अपने शहर के संदर्भ में कहीं थीं। महाराष्ट्र या भारत के संदर्भ में नहीं। मतलब! मतलब शहर महाराष्ट्र या भारत से बाहर है? बताया नहीं उन्होंने।

वायरल विडियो में इस्माइल को कहते सुना जा सकता है, “मेरा सवाल है डिपार्टमेंट से, अगर शहर में गोली चलती है और किसी को गोली लगती है, तो कोई केस क्यों दर्ज नहीं किया गया? FIR क्यों दर्ज नहीं की गई? क्या शहर के लोग बेवकूफ हैं? शहर के लोगों को पता नहीं चलता कि गोली चलती है और एफआईआर दर्ज नहीं होती? साहब हम भी समझते हैं कि क्या हालात हैं… अगर इस तरह होता रहा तो शहर की अवाम खामोश नहीं बैठेगी।”

आगे AIMIM नेता बोलते है, “…अगर बात हम पर आएगी तो हम अमन-ओ-अमान रखना जानते हैं, तो ये कैसे जाएगा, ये भी हमें पता है। हमने कोई चूड़ियाँ नहीं पहनी हैं, हमारी शराफत है कि हम आज तक खामोश हैं और शहर के अंदर गुंडागर्दी चल रही है।”

इसके बाद मोहम्मद इस्लमाइल 2009 के इलेक्शन की बात करते नजर आते हैं। वे कहते हैं, “2009 का चुनाव हारने के बाद लोगों के कारखानों में आग लगाई गई, लोगों को मारा-पीटा गया। लोगों से पैसे छीने गए। 2019 के इलेक्शन हारने के बाद क्या कुछ हो रहा है, सब आपके सामने है।”

गौरतलब है कि मालेगाँव में दिए अपने इस बयान पर चारों तरफ से घिरने के बाद इस्माइल ने इस पर आज सफाई भी दी। उन्होंने कहा कि यह बयान उन्होंने महाराष्ट्र या भारत के लिए नहीं बल्कि शहर के संदर्भ में दिया था।

इस्माइल ने कहा, “इसे मैंने अपने शहर के संदर्भ में कहा था। यह महाराष्ट्र या भारत से जुड़ा हुआ नहीं है। फायरिंग जो हमारे लोगों (एआईएमआईएम के रिजवान खान के घर पर) के करीब हुई, उस पर मैंने यह बात कही थी। इस संदर्भ में मैंने कहा कि हम शांति बनाए रखने में विभाग की मदद करते हैं, अगर हम ऐसा करना छोड़ दें तो शांति बाधित होगी।”

यहाँ बता दें कि मोहम्मद इस्माइल के इस बयान से पहले AIMIM के एक अन्य नेता के बयान पर काफी बवाल हुआ था। उन्होंने ओवैसी के मंच से एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि हम 15 करोड़ हैं, लेकिन 100 करोड़ पर भारी हैं।

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‘भाईजान’ की लाश को 24 घंटे घर में रखा, मुआवजे की घोषणा होते ही कराया पोस्टमॉर्टम: ग्राउंड रिपोर्ट

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सीएए विरोध के नाम पर समुदाय विशेष की महिलाओं को धरने पर बिठाया जाता है। ताकी अपने समुदाय को शांति प्रिय समुदाय के तौर पर प्रदर्शित किया जा सके। लेकिन सिर्फ मुखौटा था। इस शांति पूर्वक धरने की आड़ में हिंदुओं के ख़िलाफ एक ऐसी रणनीति तैयार की जाती है, जिसकी भनक कानों-कान क्षेत्र में रहने वाले लोग और 24 घंटे पहरा देने का दावा करने वाली दिल्ली पुलिस तो क्या किसी खुफिया विभाग को भी नहीं लग सकी। इसी का परिणाम रहा कि गहरी नींद में सोते हुए और कट्टरपंथियों की साजिश से कई अनजान हिंदू मौत के मुँह में चले गए। आप दंगे की शुरुआत देखिए… दोपहर की अजान में क्षेत्रीय विधायक शामिल होते हैं और इसके बाद मस्जिद में हजारों की संख्या में मौजूद इस्लामी भीड़ हाथों में हथियार लिए सीधे हिंदुओं पर धावा बोल देती है।

‘हिंदू इलाके में शांति मार्च… फिर मस्जिद में मीटिंग और 400 लीटर पेट्रोल से हमला’ – बुरे फँसे AAP विधायक हाजी युनूस

आश्चर्य इस बात का कि जिन लोगों ने महीनों तक हिंदुओं पर हमला करने की साजिश रची, आज वही खुद को पीड़ित साबित करने में लगे हुए हैं। जब बात पीड़ित बनने की आई तो दंगाइयों ने तनिक भी देर नहीं की और अपने ही घर में 24 घंटे से रखी लाश को निकालकर पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवा दिया। क्यों? क्योंकि खुद को पीड़ित साबित करते हुए केजरीवाल सरकार से 10 लाख रुपए का मुआवजा जो लेना था। एक नहीं, ऐसी अनेक कहानियाँ हैं उस दंगा प्रभावित क्षेत्र से, जिन्हें दंगाइयों ने खुद ही बुना और खुद ही रच डाला।

एक ऐसी ही कहानी है दिल्ली के दंगा प्रभावित क्षेत्र जाफराबाद की। बीते सोमवार को सीएए विरोध के नाम पर चाँद बाग से शुरू हुई हिंसा के सातवें दिन हम दंगा पीड़ितों से बात करते हुए मृतक राहुल ठाकुर के घर पहुँचे। हम घटना के बारे में जानकारी ले ही रहे थे कि तभी मृत राहुल ठाकुर के परिजनों को सांत्वना देने आए पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति ने दावा करते हुए बताया, “सोमवार को सुबह से ही चाँद बाग और करावल नगर क्षेत्र में हिंसा भड़क चुकी थी। इसके बाद दोपहर को मुस्तफाबाद इलाके में मौजूद मस्जिद में हजारों की संख्या में मुस्लिम अजान के नाम पर इकट्ठा होते हैं, जिसमें क्षेत्रीय विधायक हाजी यूनुस भी भाग लेते हैं। अजान होते ही विधायक तो अपनी गाड़ी लेकर मस्जिद से निकल जाते हैं। इसके बाद मस्जिद से निकलते ही हजारों की भीड़ पहले तो तेजाब की फैक्ट्री और शराब के ठेके को लूटती है और फ़िर हाथों में लाठी-डंडे, ईंट-पत्थर, सरिया, रॉड, तमंचे आदि हथियार लिए हिंदुओं को निशाना बनाते हुए उस हमला बोल देती है।”

चश्मदीद आगे बताते हुए कहते हैं, “हज़ारों दंगाइयों की भीड़ की चपेट में आकर एक मजहबी दंगाई की भी मौत हो जाती है। लेकिन आश्चर्य देखिए! दंगाई उसे उठाकर अस्पताल नहीं ले जाते बल्कि उसे अपने घर पर ले जाते हैं। 24 घंटे तक घर में दंगाई युवक का शव रखा रहता है। जैसे ही केजरीवाल सरकार ने दंगों में मारे गए लोगों को मुआवजा देने की घोषणा की, वैसे ही एंबुलेंस को बुलाकर घर में रखी लाश को अस्पताल भिजवा दिया। इसके बाद पोस्टमॉर्टम कराकर शव को दफन कर दिया जाता है।”

अब ऐसे में सवाल ये खड़ा होता है कि जब महीनों से हिंदुओं के ख़िलाफ साजिश रची जा रही थी, उसे अंजाम देने के लिए बड़े पैमाने पर तैयारी भी की गई तो आख़िर वही समुदाय दंगे का पीड़ित कैसे हो सकता है। इसके उलट दूसरी ओर हिंदू बाहुल्य इलाके बृजपुरी में स्थित एक मस्जिद को कोई खरोंच तक नहीं आई और वहीं उसी इलाके में मौजूद शिव मंदिर को दंगाइयों ने अपना निशाना ही नहीं बनाया बल्कि शिव मंदिर पर पथराव करते हुए उसमें तोड़फोड़ भी की। घटना के बाद हर रोज दंगाइयों की खुलती पोल से एक बात तो साफ़ हो गई है कि दंगाई इलाके से हिंदुओं को जड़ से खत्म करना चाहते थे। मतलब साफ है कि यह ‘जंग’ सीएए के खिलाफ कभी थी ही नहीं, बल्कि हिंदुओं के ख़िलाफ थी।

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PM मोदी के पुतले में लगाई आग, बुझाने आए पुलिस वालों को कॉन्ग्रेसियों ने लात-घूँसों से पीटा: विडियो वायरल

छत्तीसगढ़ में रविवार (मार्च 1, 2020) को प्रधानमंत्री का पुतला फूँकने से रोके जाने पर NSUI कार्यकर्ताओं ने पुलिकर्मियों को पीटा। सूचना मिली कि आयकर विभाग की छापेमारी का विरोध कर रहे NSUI कार्यकर्ता पहले बेटी-बचाओ चौक पर पहुँचे, और फिर वहाँ उन्होंने पुतले में आग लगाई। जब पुलिसकर्मियों ने ऐसा करते कार्यकर्ताओं को देखा तो वो पुतला छीनकर आग बुझाने लगे। बस इसके बाद क्या? कॉन्ग्रेस का छात्र संगठन भड़क गया।

नतीजतन वहाँ मौजूद NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश पांडेय ने पहले पुलिस कर्मी को धक्का मारकर गिरा दिया। फिर उसके साथियों ने पुलिस कर्मियों से हाथापाई शुरू कर दी। देखते ही देखते घटना की वीडियो वायरल हो गई। बाद में पुलिस ने शिकायत के आधार पर राकेश समेत अन्य लोगों के ख़िलाफ़ मामले को दर्ज किया। साथ ही
उच्चाधिकारियों ने तत्काल इन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी कर इन पर कड़ी कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए।

वीडियो में कार्यकर्ता, सुरक्षा की दृष्टि से तैनात पुलिस कर्मियों को एक के बाद एक लात घूँसों से पीटते देखे गए। इतना ही नहीं वीडियो में प्रदेश उपाध्यक्ष पुलिस कर्मी द्वारा NSUI कार्यकर्ताओं की पिटाई की बात कहते भी दिखे।

एक मीडिया पोर्टल के अनुसार, पत्रकारों से हुई बातचीच में राकेश पांडे ने अपने किए अपराध पर कोई अफसोस व्यक्त नहीं किया, बल्कि उल्टा पुलिस पर ही इल्जाम लगाने लगे। उन्होंने कहा, “हमारे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अच्छा काम कर रहे हैं एवं केंद्र की सरकार उन पर लांछन लगाने के लिए जगह-जगह आयकर विभाग के छापे डलवा रही है। आज के हुए पुतला दहन में पुलिस वालों ने मेरे साथ धक्का-मुक्की की, जिसमें मेरे बाल जल गए हैं एवं उंगली में हल्की सी चोट आई है। हम शांतिपूर्ण तरीके से अपना प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन पुलिस प्रशासन का यह रवैया हमें पसंद नहीं आया।”

यहाँ बता दें कि पूर्व सीएस, आईएएस अफसर, कारोबारी और मुख्यमंत्री की उप सचिव के घर आयकर के छापों का कॉन्ग्रेस विरोध कर रही है। इसी विरोध के मद्देनजर उन्होंने प्रधानमंत्री का पुतला फूँका। मगर, आग लगते ही पास मौजूद पुलिस कर्मियों ने पुतला छीन कर पानी डाल आग बुझा दी। इसी बात से नाराज प्रदेश उपाध्यक्ष ने आरक्षक विजय ध्रुव, फैड्रिक कुजूर की लात घूँसों से पिटाई कर दी।

प्रदेश उपाध्यक्ष को पुलिस पर हाथ छोड़ता देख, अन्य कार्यकर्ताओं ने भी पुलिसवालों पर हाथ उठााए। बाद में कोतवाली पुलिस ने आरक्षक विजय ध्रुव की लिखित शिकायत पर एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश पांडेय एवं अन्य पर आईपीसी की धारा 186, 353, 332 एवं 34 के तहत अपराध दर्ज किया। अब पुलिस के साथ मारपीट करने वालों की गिरफ्तारी के लिए दबिशें दी जा रही है।

नाबालिग छात्रा से रेप कर गर्भवती कर देने वाले केरल के पादरी को पोप फ्रांसिस ने किया बर्खास्त

केरल के 52 वर्षीय कैथोलिक पादरी रॉबिन वडक्कमचेरी (Robin Vadakkumchery) को वेटिकन चर्च ने बर्खास्‍त कर दिया है। यह पादरी नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण का दोषी है। न्यूज़ एजेंसी आइएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार, पोप फ्रांसिस ने पादरी रॉबिन वडक्कमचेरी के अपराधों की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए जीरो टॉलरेंस की नीति के मुताबिक यह कार्रवाई की।

ज्ञातव्य है कि रोबिन वडक्कुमचेरी को नाबालिग लड़कियों के साथ दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के तीन अलग-अलग मामलों में 20 सालों की कैद की सजा सुनाई जा चुकी है। ‘द मंथावडी (वायनाड जिले में) डायोसिस के अधिकारियों ने प्रेस को बताया कि वेटिकन ने यह कदम इस संदर्भ में निर्धारित पूरी प्रक्रिया के अनुसार उठा, रॉबिन वडक्कमचेरी (Robin Vadakkumchery) को पुरोहिती यानी सभी प्रार्थना कर्तव्यों और अधिकारों से बर्खास्‍त करने का फैसला किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चर्च के अधिकारियों के हवाले से बताया जा रहा कि पोप ने यह निर्णय पिछले साल पांच दिसंबर को ही ले लिया था लेकिन फैसले के कागजात अब जाकर जेल में बंद पादरी को सौंपे गए हैं। यह पादरी वडक्कमचेरी कन्नूर में चर्च के अधीन चलने वाले उस स्कूल का मैनेजर भी था, जिस स्कूल में 11वीं क्‍लास की पी‍ड़‍ित छात्रा पढ़ती थी।

इस पादरी को 27 फरवरी, 2017 की रात को कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास से उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब वह देश छोड़ने की जुगत में था।

स्कूली बच्चों के बीच काम करने वाली एक चाइल्ड लाइन एजेंसी (Child Line agency) ने पादरी के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी। यह पूरा मामला तब सामने आया जब साल 2017 में सात फरवरी को चर्च द्वारा संचालित अस्पताल में इस रेप पीड़‍िता किशोरी ने बच्चे को जन्म दिया था, जिसके बाद पादरी पर कार्रवाई को लेकर दबाव बढ़ गया था। हालाँकि, उसने बचने की काफी कोशिशें की।

सोचिए कि पादरी ने खुद को इस मामले में बचाने के लिए किस कदर ‘कोशिश’ की होगी कि पीड़ित छात्रा के पिता ने ही खुद रेपिस्ट होने की बात पुलिस के सामने कबूल कर ली थी। हालाँकि बाद में वो सुनवाई के दौरान टूट गया, जिसके बाद इस पादरी का डीएनए टेस्ट करवाया गया, जो पीड़िता के बच्चे से मैच कर गया। इस साक्ष्य के आधार पर अदालत ने पादरी को नाबालिग के साथ रेप का दोषी करार दिया था।

पादरी को पिछले साल फरवरी में दोषी ठहराया गया था। पॉक्सो अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया गया था। फि‍लहाल, सिरो-मालाबार चर्च का पूर्व पादरी रॉबिन मंथावडी में जेल की सजा काट रहा है।

15 साल का नितिन जो चाउमिन लाने गया था… न खा सका, न खिला सका: दिल्ली हिंदू विरोधी दंगे की क्रूरता

दिल्ली में हुए दंगों में उपद्रवियों ने किसी को नहीं बख्शा। बड़े बुजुर्ग से लेकर बच्चों तक को इस हिंसा में निशाना बनाया गया। 8वीं कक्षा में पढ़ने वाला नितिन भी इसी दरिंदगी का शिकार हुआ और अपनी जान से हाथ धो बैठा।

नितिन की गलती सिर्फ़ इतनी थी कि अपने घर के आसपास के माहौल को शांत देख उसने घर से बाहर पैर तो रखा, लेकिन दंगाइयों से अपनी जान बचा पाने में असफल रहा। उसे गोली लगी या पत्थर… किसी को कुछ नहीं पता। लेकिन जब उसे अस्पताल ले जाया गया तब वो जिंदा था, मगर सिर में चोट इतनी गहरी थी कि वो 3-4 घंटे में ही जिंदगी की जंग हार गया।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना गोकुलपुरी इलाके की है। यहाँ नितिन के पिता राम सुगारक बताते हैं कि 26 फरवरी को उनका बेटा घर से चाऊमिन लेने निकला था। उस समय दोपहर के करीब 2:30 बजे थे।

उनके अनुसार, “घर से मुश्किल से 100 मीटर की दूरी पर उस दिन नितिन चाऊमिन लेने गया था। तब तक वहाँ हिंसा नहीं थी। मगर पड़ोसियों ने हमें बताया कि जैसे ही नितिन ने घर से बाहर कदम रखा, पता नहीं अचानक क्या हुआ… पत्थरबाजी, गोलीबारी, आँसूगैस के गोले छोड़े जाने लगे।”

नितिन के पिता बताते हैं कि करीब आधे घंटे बाद उन्हें कॉल आया कि नितिन मिल नहीं रहा है। वो घर आए, उसे खोजने की कोशिश की, लेकिन वो नहीं मिला। फिर मालूम हुआ कि पुलिस नितिन को जीटीबी अस्पताल ले गई है।

इसके बाद नितिन के पिता अस्पताल पहुँचे। उन्होंने देखा कि नितिन के सिर पर चोट आई थी। लेकिन तब तक वो जिंदा था। डॉक्टरों ने उसे बचाने की बहुत कोशिश की। मगर करीब 3-4 घंटे तक जिंदगी से लड़ने के बाद 15 साल के बच्चे ने दम तोड़ दिया। इसके बाद शनिवार को उसका शव परिवार को सौंपा गया।

गौरतलब है कि 24-25 फरवरी को हुई हिंसा के कारण अब तक 45 लोगों की जानें जा चुकी हैं। स्थिति को सामान्य करने की पूरी कोशिश की जा रही है। लेकिन कुछ अराजक तत्व अभी भी अफवाह फैलाने की कोशिशें कर रहे हैं। इसलिए दिल्ली के लगभग हर इलाके में एहतियातन पुलिस की चौकसी बढ़ा दी गई है और अफवाहों का खंडन कर शांति बहाली की अपील की जा रही है।

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‘हमारी बेटियों को नंगा करके भेजा दंगाइयों ने, कपड़े उतारकर अश्लील हरकतें की’ – करावल नगर ग्राउंड रिपोर्ट

अफवाहों का अड्डा बना DU के अंग्रेजी विभाग का WA ग्रुप: पाठन कार्य बाधित करने की साजिश

दिल्ली यूनिवर्सिटी में कुछ छात्र जबरन कक्षाओं को बंद करा कर पठन-पाठन का कार्य बाधित करने में लगे हुए हैं। एमए अंग्रेजी विभाग में तरह-तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं, ताकि छात्रों को क्लास से दूर रखा जाए। इस विभाग के छात्रों के व्हाट्सप्प ग्रुप का डिस्प्ले पिक्चर भी बदल कर ‘बायकाट क्लासेज’ रख दिया गया है। ग्रुप में कक्षाओं का बहिष्कार करने की अपील की जा रही है। ग्रुप में कुछ बाहरी तत्वों को भी जोड़ा गया है, जो बाकी छात्रों को क्लास जाने के ख़िलाफ़ भड़काने में लगे हुए हैं। उन्हें दबाव बनाने के लिए लाया गया है। यहाँ तक कि परीक्षाओं को भी बाधित करने का कुचक्र रचा जा रहा है।

साथ ही धरना-प्रदर्शनों की साजिश भी रची जा रही है। ग्रुप में दावे किए जा रहे हैं कि दिल्ली जल रही है और मुस्लिमों को चुन-चुन कर निशाना बनाया जा रहा है। छात्र कह रहे हैं कि उन्हें इसके लिए कुछ करना चाहिए। जो चुप हैं, उन पर आरोप लगाया जा रहा है कि वो डर रहे हैं और उन्हें सरकार के ख़िलाफ़ बोलने को कहा जा रहा है। तरह-तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि फलाँ नगर में फायरिंग हुई है, चिलाँ क्षेत्र में तनाव व्याप्त हो गया है। जब क्लास अटेंड करने की बात आई तो एक लड़की ने कहा कि क्लासेज की बात ही क्यों की जा रही है, क्लास से अनुपस्थित रहो।

एक मुस्लिम छात्रा ने अपने सहपाठियों को डाँटते हुए ग्रुप में लिखा कि जो लोग क्लास अटेंड करना चाहते हैं, वो असंवेदनशील हैं। उसने यह भी दावा किया कि वो एक मुस्लिम होकर यात्रा करने या बाहर निकलने में सुरक्षित महसूस नहीं करती है। साथ ही उसने बाकि छात्रों को हड़काते हुए लिखा कि जिस दिन ये सब उनके साथ होगा, उस दिन पता चलेगा। क्लास का बहिष्कार करने के लिए पोस्टर तक तैयार किया गया और राजनीति से दूर रह कर पढ़ाई करने वाले छात्रों से कहा गया कि वो भी उनका साथ दें। इस ग्रुप के कई स्क्रीनशॉट्स हमारे पास आए हैं, जिनसे पता चलता है कि पढ़ाई की जगह ग्रुप में कुछ और ही हो रहा है।

एक मुस्लिम छात्रा ने तो यहाँ तक लिखा कि ऐसे समय में क्लास और परीक्षाओं की बातें करना हैरानी भरा है और इससे उसे व्यथा हो रही है। उसने दावा किया कि उसके कई सम्बन्धी मुश्किल परिस्थितियों में फँसे हुए हैं और इस स्थिति में पढ़ाई की बातें नहीं होनी चाहिए। साथ ही ये भी दावा किया गया कि एक शिक्षक ने कहा है कि सिलेबस समय पर पूरी न की जाए तब कोई कोई दिक्कत वाली बात नहीं है। पढ़ाई-लिखाई के बदले छात्रों से आह्वान किया गया कि वो विभाग के दफ्तर के सामने धरना दें।


इस ग्रुप के 27 स्क्रीनशॉट हमारे पास हैं, छात्रों की निजता के कारण नाम छुपाने के लिए सबको नहीं डाला जा सकता है

मुस्लिम छात्रों ने दावा किया कि दिल्ली में केंद्र सरकार मुस्लिमों पर हमले करवा रही है। क्लासेज को बायकाट करने के पीछे तरह-तरह के अजीबोगरीब तर्क दिए गए। एक छात्र ने पूछा जब दिल्ली की सड़कों पर लोग मारे जा रहे हैं, ऐसे में सामान्य दिनों की तरह क्लास करना कैसे संभव हो पाएगा? नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली के जहाँगीरपुरी में हमले की अफवाह फैलाई गई थी, जिसका डीसीपी ने खंडन किया। इस ग्रुप के वामपंथी छात्रों ने डीसीपी के बयान को ही ग़लत ठहरा दिया।

मेरे भाई को जिहाद ने मारा है, एक-एक मस्जिदों व मदरसों की तलाशी ली जाए: दलित दिनेश के भाई

दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में जान गँवाने वालों में एक दिनेश कुमार खटीक का नाम भी शामिल है। दिनेश कुमार खटीक के भाई सुरेश से हमारी बातचीत हुई और उन्होंने साफ़ कहा कि उनके भाई की जान जिहाद ने ली है- इस्लामी कट्टरपंथियों के जिहाद ने। उन्होंने कहा कि पूरे मुस्तफाबाद ने उनके भाई को मार डाला। मुस्तफाबाद से उनका तात्पर्य मुस्लिम बहुल क्षेत्र से था। उनके भाई के बयानों की चर्चा हम करेंगे और परिजनों के बारे में भी आपको बताएँगे लेकिन सबसे पहले जानते हैं कि दिनेश की मौत कैसे हुई। दरअसल, उस दिन उस क्षेत्र की सभी दुकानें बंद थीं। ये घटना 26 फ़रवरी की है।

दिनेश कुमार खटीक के दो बच्चे हैं। एक डेढ़ साल का बेटा है जबकि एक बेटा 7 साल का है। वो अपने दोनों बच्चों के लिए दूध लेने निकले थे और दुकानें बंद होने के कारण वो दूर निकल गए। इसी दौरान वो फैसल फ़ारूक़ के राजधानी स्कूल के बगल से गुजरे। जब वो वहाँ से गुजर रहे थे, तब दंगाई मजहबी भीड़ गोलीबारी और पत्थरबाजी के साथ-साथ पेट्रोल बम से भी हमले कर रही थी। तभी दंगाइयों की एक गोली आकर दिनेश के सिर में लगी और उनकी मौत हो गई। वकील मोनिका अरोड़ा ने भी पीड़ित परिवार को मुआवजा और न्याय दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाई है।

जब ऑपइंडिया की टीम मृतक दिनेश के घर पहुँची, तब वहाँ माहौल बड़ा ही गमगीन था। वहाँ कुछ लोग आए हुए थे, जो पीड़ितों के बयानों को नोट कर रहे थे। वो ख़ुद को कोर्ट की कमिटी बता रहे थे। उनसे बात करते हुए सुरेश ने कहा कि उनकी सरकार से यही माँग है कि एक-एक मदरसे और मस्जिद की तलाशी ली जाए, ताकि आगे से मजहबी दंगाई भीड़ खतरनाक हथियारों को जमा नहीं कर सके। सुरेश ने ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान भी ये बात दोहराई। वहाँ उपस्थित अन्य लोगों ने ऑपइंडिया को बताया कि पीड़ित हिन्दुओं के सिर, आँख और गले तक में गोलियाँ मारी गई हैं।

उन्होंने बताया कि लोहे से बने हथियार जमा कर के रखे गए थे, जिनसे हिन्दुओं के सिर पर वार किया जा रहा था। लोग अभी भी डरे हुए हैं। प्रेम नगर और प्रेम विहार की जनता ने हमसे अपना दुःखड़ा सुनाते हुए बताया कि उनका भरोसा पुलिस-प्रशासन पर से उठ चुका है, इसीलिए वो रात-रात भर जाग कर अपने जान-माल की रक्षा करने को विवश हैं। ख़ासकर घर की महिलाओं की सुरक्षा के लिए उन्हें ऐसा करना पड़ रहा है। सुरेश ने हमसे बात करते हुए बहुत बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हिन्दुओं के घर में लाठी-डंडे और चाकू तक मिले तो पुलिस उन्हें जेल में ठूँस देती है जबकि समुदाय विशेष के घर में हथियार जमा कर के रखे जाते हैं और उनका बाल भी बाँका नहीं होता।

जिस दिन दिनेश कुमार खटीक को गोली लगी थी, उस दिन मजहबी दंगाइयों ने हालात ऐसे पैदा कर के रखे थे कि उन्हें हॉस्पिटल भी नहीं ले जाया जा सका। बदहवास बूढ़े पिता अपने घर की बालकनी में सुध-बुध खोए से बैठे हुए हैं। उनकी एक ही चिंता है कि अब दिनेश की पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण कैसे होगा? बेटे की मौत के गम को जैसे उन्होंने अपने बहू व पोते-पोतियों के लिए पी लिया हो। मृतक के भाई ने हमसे बात करते हुए आगे बताया:

“24 फ़रवरी से ही मुस्तफाबाद के शिव विहार क्षेत्र में दंगे शुरू हो गए थे। दूसरे मजहब के लोग लगातार आकर हिन्दुओं की दुकानों को लूट रहे थे। हिन्दुओं के घरों को नुकसान पहुँचाया गया और दुकानें जला दी गईं। इधर सारी दुकानें बंद थीं, इसीलिए खाने-पीने का सामान और बच्चों के लिए दूध लेने मेरे भाई बाहर गए, तभी उनकी हत्या हुई। राजधानी स्कूल की छत पर से काफ़ी दूर-दूर तक निशाना लगाया जा रहा था। वहाँ समुदाय विशेष के लोगों की 2-4 और भी इमारतें हैं, जिन पर सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम जमा थे। 4 लोग मारे गए हैं। ये जिहाद है, और कुछ भी नहीं। इस्लामी कट्टारवादियों द्वारा भड़काऊ भाषण दिए जाते हैं।”

सुरेश खटीक ने बताया कि उनके घर में एक डंडा तक भी नहीं है। सुरेश ने बताया कि उन्होंने पुलिस को बताया है कि जैसे हिन्दुओं के घर से लाठी या चाकू मिलने पर कार्रवाई की जाती है, वैसी ही दूसरे मजहब के लोगों पर भी की जाए। उनका कहना है कि मस्जिदों और मदरसों में छापेमारी हो, ताकि आगे से ऐसी घटना को होने से रोका जा सके। उन्होंने पूछा कि आखिर इतने हथियार उनके पास आते कहाँ से हैं? मदरसों और मस्जिदों ही नहीं, बल्कि एक-एक मुस्लिम के घरों में भी छापेमारी होनी चाहिए।

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हिन्दू विरोधी दंगों को मुस्लिम नरसंहार साबित करने की कोशिश! बरखा दत्त का प्रोपेगेंडा हुआ फुस्स

विवादास्पद पत्रकार बरखा दत्त दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों की रिपोर्टिंग को लेकर फिर से चर्चा में हैं। जैसा कि उनसे उम्मीद भी थी ही, उन्होंने इन दंगों की रिपोर्टिंग करते समय जमीनी वास्तविकता और तथ्यों को परखने की जगह अपना सारा ध्यान गंगा जमुनी तहजीब का ज्ञान उड़ेलने में खर्च कर दिया।

बरखा दत्त ने अपनी सालों से सींची गई प्रोपेगेंडा पत्रकार की भूमिका का बखूबी निर्वाह करते हुए इस हिन्दू विरोधी दंगों की रिपोर्टिंग में भी जानबूझकर हिन्दू विक्टिम्स को दरकिनार किया और सारा फोकस मुस्लिम पीड़ितों पर ही बनाए रखा, जिससे इन दंगों को मुस्लिम नरसंहार साबित किया जा सके, जबकि जमीनी वास्तविकता ठीक इससे उलट है।

लेकिन उनका यह प्रोपेगेंडा सोशल मीडिया यूजर्स के सामने पल भर में धराशाई होते दिखा, जब उन पर चारों तरफ से इस इकतरफा रिपोर्टिंग को लेकर सवाल आने शुरू हो गए। लोगों ने उनसे पूछना शुरू कर दिया कि क्यों वो दंगे की बलि चढ़े हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल और मुस्लिम फ़सादियों की बर्बरता के शिकार हुए आईबी के अंकित शर्मा के यहाँ नहीं गईं?

लोगों ने उनसे यहाँ तक कहा कि अंकित शर्मा के साथ हुई बर्बरता पर भी रिपोर्ट कर दीजिए लेकिन बरखा जी ने अच्छी विदेशी क्वालिटी का तेल दोनों कानों में भरा हुआ था शायद…

सोशल मीडिया के तमाम जायज सवालों और कुछ लोगों की अपीलों के बावजूद भी बरखा हिन्दू पीड़ितों से मिलने अब तक नहीं जा सकी हैं। यह देखना दुखद तो है ही, पर अब आश्चर्यजनक नहीं लगता क्योंकि यह वही ब्रिगेड है जिसने नागरिकता कानून और एनआरसी पर महीनों मुस्लिमों को भड़काया, उन्हें सड़क पर उतारा। इस ब्रिगेड से कोई रवीश कह देता है, “किसी ने बताया कि वो शाहरुख़ नहीं अनुराग मिश्रा है” ऐसे स्वनामधन्य पत्रकारों से और आशा भी क्या की जा सकती है?

लेकिन जो आपको याद रखना है उसे अच्छे से अपने दिलो दिमाग में बैठा लीजिए – दिल्ली का दंगा, हिन्दू विरोधी दंगा था, जिसमें हिन्दुओं की सिर्फ हत्या नहीं हुई, उनकी हत्याएँ बेरहमी के साथ की गईं, जिसके लिए महीनों से तैयारी चल रही थी, पेट्रोल इकट्ठा किया जा रहा था, ईंट बोरियों में भर-भर कर छतों तक पहुँच रही थी।

AAP विधायक अमानतुल्लाह खान ने किया भड़काऊ ट्वीट, अग्निशमन विभाग ने बताया फर्जी

दिल्ली हिंसा के बाद अब तरह-तरह से अफवाहें भी फैलाईं जा रही हैं। दिल्ली पुलिस ऐसे लोगों पर नजर बनाए हुए है, जो सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाहें फैला रहे हैं। अब ऐसा ही एक फेक ट्वीट आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान ने किया है। अमानतुल्ला खान ने घर में आग लगाने का वीडियो ट्वीट कर नया बवाल खड़ा कर दिया है। उन्होंने रविवार (मार्च 1, 2020) तड़के एक ट्वीट करते हुए कहा कि दिल्ली के सोनिया विहार में स्थित अंबे चौहान मोहल्ला में दंगाइयों ने एक घर को आग के हवाले कर दिया है।

अमानतुल्लाह ने ट्वीट करते हुए लिखा, “अंबे एन्क्लेव चौहान मोहल्ला सोनिया विहार दिल्ली -110094 में अभी अभी एक गरीब और कमजोर के घर को दंगाइयों ने आग के हवाले कर दिया। आखिर दिल्ली कब जलना बन्द होगी।” इस ट्वीट के साथ अमानतुल्लाह ने एक वीडियो भी लगाया है, जिसमें घर को जलते हुए दिखाया गया है।

हालाँकि, अग्निशमन विभाग ने इसका खंडन करते हुए कहा कि इस घर में दंगों के दौरान आग नहीं लगी। अग्निशमन विभाग ने बताया कि आग लगने की सूचना मिली थी, जिसके बाद दमकल की 5 गाड़ियाँ रवाना की गईं। आग की इस घटना का हिंसा से कोई लेना-देना नहीं है। दिल्ली पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है।

वहीं अमानतुल्लाह खान के इस ट्वीट पर बीजेपी नेता और दिल्ली प्रदेश प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “पुलिस और पड़ोसियों के अनुसार अमानतुल्लाह झूठ बोल रहा है। आग शॉर्ट सर्किट से लगी है। अमानतुल्लाह दिल्ली में फिर से आग लगाने की कोशिश कर रहा है। दिल्ली पुलिस को अमानतुल्लाह को तुरंत गिरफ्तार करना चाहिए।”

बता दें कि इससे पहले पहले जामिया में हुई हिंसा के दौरान भी दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी एक फेक ट्वीट करते हुए कहा था कि पुलिसकर्मी पेट्रोल डालकर बस को आग के हवाले कर रहे हैं। अब अमानतुल्लाह ने इस फेक ट्वीट से लोगों को उकसाने का काम किया है।  

वहीं अमानतुल्लाह खान हिंसा के आरोपित AAP पार्षद ताहिर हुसैन का भी खुलकर बचाव कर रहे हैं, जो हिंसा के बाद से ही फरार चल रहा है। ताहिर हुसैन की  फैक्ट्ररी की छत से बड़ी संख्या में तेजाब, पेट्रोल बम और ईंट-पत्थर मिले थे। हिंसा केस में फरार AAP पार्षद ताहिर हुसैन की तलाश में दिल्ली पुलिस जुटी है। ताहिर के पुश्तैनी घर अमरोहा में भी पुलिस पहुँची है। आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन पर आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा की हत्या के केस में गंभीर आरोप हैं।