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हिन्दू महिलाएँ दूर से आकर नाले में भरती हैं केजरीवाल का ‘फ्री पानी’, मुस्लिमों के लिए टंकी: ग्राउंड रिपोर्ट

नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों के दौरान ऑपइंडिया की टीम जब ग्राउंड जीरो पर कवरेज के लिए पहुँची, तब वहाँ हमें हिन्दुओं की दुर्दशा के बारे में ज्ञात हुआ। शिव विहार चौक से थोड़ी ही दूर एक नाले पास हमें वो सच्चाई दिखी, जो दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार के दावों को खोखला साबित करती है। शिव विहार, गोविन्द विहार और महालक्ष्मी इन्क्लेव सहित आसपास के इलाक़ों के क़रीब 20 हज़ार हिन्दू पिछले 8 सालों से (कुछ के मुताबिक 20 वर्षों से) एक ऐसी परेशानी का सामना कर रहे हैं, जिसे शब्दों में बयाँ करना मुश्किल है लेकिन हम यहाँ आप तक एक-एक डिटेल पहुँचाएँगे।

एक बड़ा सा नाला। नाले के बीच से गोविन्द विहार की एक गली की तरफ जाती हुई सड़क। उस सड़क के दोनों तरफ उस बड़े से नाले का मुँह खुलता है। शाम के 6 बजते ही वहाँ एक जमावड़ा लगता है। महिलाओं का, बच्चों का और कुछ युवकों का। कुछ पास से आए होते हैं तो कुछ दूर से। सब अपने हाथों में बाल्टी, कंटेनर या डब्बे लेकर आए होते हैं, जिनमें वो पानी भरते हैं। उस नाले में खुलता है दो पाइपों का मुँह, जिनसे पानी सीधा नाले में ही गिरता है। वहाँ महिलाओं को बैलेंस बना कर पानी भरना पड़ता है।

देखिए इन हिन्दुओं का दर्द: प्रतिदिन गंदे नाले में झुक कर भरते हैं पानी

थोड़ा सा इधर-उधर हुआ तो वो महिलाएँ गिर सकती हैं, नाले में। जब लोग वहाँ पानी भर रहे होते हैं, तो उनका आधा कंटेनर या बर्तन उस नाले में डूबा होता है, जिसमें मल-मूत्र सहित न जाने क्या-क्या गंदगियाँ रहती होंगी। ये दृश्य उन हिन्दुओं पर तरस खाने को मजबूर कर देता है। अगर आप दिल्ली से दूर देश के किसी अन्य हिस्से में रहते हैं और आपके इलाक़े में पानी की कमी नहीं है तो ये दृश्य आपको दो सीख देता है। पहला ये है कि पानी का महत्व समझें। दूसरा ये कि अगर ‘फ्री पानी’ बोल कर कोई नेता चुनाव जीत जाता हो तो इसका मतलब ये नहीं है कि उसने पानी की व्यवस्था सुधार दी है। वो झूठ बोल कर लोगों को ठग रहा भी हो सकता है।

आप सोच रहे होंगे कि हम यहाँ बार-बार हिन्दुओं की बातें क्यों कर रहे हैं? हम यहाँ ‘आम जनता’ क्यों नहीं लिख रहे? यही तो पेंच है। करावल नगर का वो इलाक़ा मुस्तफाबाद में आता है। वहाँ के नव-निर्वाचित विधायक हैं आम आदमी पार्टी के हाजी यूनुस। दिल्ली की सत्ताधारी दल के उस नेता के बारे में लोग कहते हैं कि हालिया हुए दंगों में उनका भी हाथ है और वो ताहिर हुसैन का नजदीकी है। हाजी यूनुस से लोग नाराज़ नज़र आए और कहा कि उसे मुस्लिम ध्रुवीकरण कर के जीत हासिल की है और अब वो हिन्दू मतदाताओं से ‘बदला’ ले रहा है, क्योंकि उसका सोचना है कि उसे हिन्दुओं ने वोट नहीं दिया।

हमने देखा कि उस गंदे नाले के पास एक भी मुस्लिम व्यक्ति पानी भरने नहीं आया था। हमें वहाँ उपस्थित लोगों से ये सवाल पूछा? उन्होंने बताया कि मुस्लिम बस्तियों में पानी की व्यवस्था अच्छे तरीके से की गई है और उन्हें टैंकर भी उपलब्ध कराए जाते हैं। उनके इलाक़ों में टंकी लगी हुई है। कर्फ्यू लगे होने और माहौल तनावपूर्ण होने के कारण हम मुस्लिम बहुल मोहल्लों में इसकी पुष्टि करने तो नहीं गए, लेकिन आसपास के अन्य लोगों ने भी बताया कि उनके लिए पानी की व्यवस्था दुरुस्त रूप से की गई है।

हमें क्या क्या पता चला: आम आदमी पार्टी के विधायक हाजी यूनुस ने मुस्लिम इलाक़ों में पानी की उपलब्धता की बेहतर व्यवस्था की है। 20 हज़ार के क़रीब हिन्दू नाले के पास जाकर पानी भरने को विवश हैं। इस दौरान महिलाओं के नाले में गिरने का ख़तरा लगा रहता है। लोग दूर-दूर से वहाँ पानी भरने आते हैं।

इसके अलावा अन्य बातें भी हैं, जो चौंकाने वाली हैं। उस नाले में लगी पाइपों में भी पानी बस दिन भर में एक घंटे के लिए आता है। अगर उस एक घंटे में आपने पानी नहीं भरी तो आपको पूरे 1 दिन बिना पानी के रहना होगा। यानी, एक परिवार को 1 दिन बगैर पानी के रहना होगा या फिर कहीं और से पानी का इंतजाम करना होगा, अगर उन्होंने उस 1 घंटे में पानी नहीं भरा तो। ऐसे फ्री पानी का क्या फायदा? ऐसा नहीं है कि वहाँ के हिन्दुओं की पिछले 8 सालों से लगातार यही स्थिति है। जब भाजपा के जगदीश प्रधान यहाँ से विधायक थे तो ऐसा हाल नहीं था।

महिलाएँ बताती हैं कि जगदीश प्रधान जब यहाँ से विधायक बने, तब वो बिना जाति-धर्म का भेदभाव किए हुए अपने दफ्तर के बाहर टैंकर लगवा दिया करते थे। वहाँ से हिन्दू और मुस्लिम, दोनों धर्मों के लोग पानी भर लिया करते थे। जगदीश प्रधान अब विधायक नहीं हैं। लेकिन, इलाक़े के लोग उन्हें याद करते हुए कहते हैं कि उनके हारते ही अब हिन्दुओं को फिर नाले में झुक कर पानी भरना पड़ रहा है। जब ऑपइंडिया की टीम वहाँ पहुँची, तो उन्हें उम्मीद जगी कि मीडिया अब उनकी आवाज़ उठाएगी। सब यही पूछा रहे ये ख़बर कब आएगी?

इसी उम्मीद को लेकर हम ये ख़बर आप तक पहुँचा रहे हैं। सत्ताधारी दल के विधायक पर तो पक्षपात का आरोप है ही, भाजपा और कॉन्ग्रेस के नेताओं को भी वहाँ जाकर लोगों से बात करनी चाहिए और उस नाले के पास पानी भरने से हिन्दुओं को मुक्ति दिला कर उनके लिए चुस्त-दुरुस्त व्यवस्था करनी चाहिए। हमने 2 विडियो के साथ-साथ तस्वीरों को भी संलग्न किया है, जिसमें वो महिलाएँ और आम जन अपना दुख-दर्द सुना रहे हैं। आप भी सुनिए, आवाज़ उठाइए।

दिल्ली दंगा ग्राउंड रिपोर्ट: छतों से एसिड बरसा रही थीं मुस्लिम औरतें, गुलेल से दाग रहे थे पेट्रोल बम

बहू-बेटियों की इज्जत बचाने के लिए हिन्दू खा रहे थे गोली और पत्थर: शिव विहार ग्राउंड रिपोर्ट

हिन्दू घृणा से लेकर मुस्लिम भीड़ का आतंक, दिल्ली दंगों की जो बातें आपसे छिपाई गई

ग्राउंड रिपोर्ट: बृजपुरी मस्जिद की तरफ से आए दंगाई और राहुल को मार दी गोली…

दिल्ली के कई इलाकों में सीएए विरोध के नाम पर अंजाम दिए गए हिन्दू विरोधी दंगों के बाद एक बड़ा ग्रुप दंगाइयों को ही पीड़ित साबित करने में जुटा है। इनमें विपक्षी दल, लिबरल, वामपंथी और मीडिया का समुदाय विशेष भी शामिल है। इस बीच असली हिंदू पीड़ितों की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ है। पीड़ित घरों में मातम छाया हुआ है। यह कहानी हर एक उस हिंदू परिवार की है, जिस किसी ने अपने को खोया या फिर किसी दूसरे का जीवन में कमाया हुआ सब कुछ बर्बाद हो गया। कुछ ऐसी ही कहानी है बृजपुरी में रहने वाले राहुल ठाकुर की जिनको दंगाइयों ने मार डाला।

हम शनिवार को बृजपुरी स्थित राहुल ठाकुर के घर पहुँचे। घर के बाहर सांत्वना देने के लिए आसपड़ोस के लोग जुटे हैं। अपना सिर झुकाए गमगीन बैठे पिता को घर के बाहर, तो कमरे के अंदर बैठी कुछ महिलाएँ राहुल की माँ को संभाल रहीं थीं। हमने घटना के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की तो वहाँ बैठे घटना के चश्मदीद अपनी आँखों देखी हमें बताने लगे। चश्मदीद, “सोमवार को चाँदबाग से शुरू हुई हिंसा एक के बाद दूसरे इलाकों में मजहबी भीड़ के साथ फैलती चली जा रही थी, जो कि करावल नगर होते हुए खजूरी, जाफराबाद और शिव विहार तक जा पहुँची। चारों और ईंट-पत्थरों की आवाज हुई तो हर कोई अपने घरों से बाहर की ओर यह देखने के लिए निकला कि आखिर हो क्या रहा है।”

चश्मदीद के मुताबिक, “हम सब गली के बाहर निकले। हमारे साथ राहुल भी था कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर हो क्या रहा है। इतने में ही देखा कि बृजपुरी मस्जिद की ओर से हजारों की संख्या में इस्लामी भीड़ हाथों में ईंट-पत्थर, हथियार लिए हमारी ओर चली आ रही है। हम अपने को संभाल पाते इससे पहले ही पता चला कि हमारे बगल में खड़े राहुल को एक गोली आकर लगी और वह पेट पकड़े जमीन पर गिर गया। सामने से मजहबी भीड़ को देख हमने आनन-फानन में राहुल को गोद में उठाया और पीछे वाले रास्ते से अस्पताल ले गए। कुछ देर चले उपचार के बाद डॉक्टरों ने राहुल को मृत घोषित कर दिया।”

इस बात की जानकारी दरवाजे पर बैठकर राहुल के घर आने का इंतजार रही माँ ममता देवी को जैसे ही हुई ऐसे ही वह दहाड़ मार-मार कर रोने लगीं और पूरे परिवार में कोहराम तो गली में मातम छा गया। राहुल के पिता आरपीएफ में हैं और पंजाब में तैनात हैं। उन्हें जैसे ही बेटे की मौत की खबर मिली पैरों तले जमीन खिसक गई और उनके मुँह से बस एक ही बात निकली “उसको क्या जरूरत थी घर से बाहर जाने की।”

बाहर बैठे लोगों से बात करने के बाद हमने राहुल की माताजी जी से मिलने की इच्छा जाहिर की। हमने कमरे में प्रवेश करने के लिए अपने जूते उतारे ही थे कि सामने बैठी राहुल की माताजी भरे हुए गले से जोर से बोलीं, “कमरे के अंदर आओ तो मेरे बेटे राहुल को लेकर ही आना, नहीं तो वापस चले जाना” इतना कहते ही ममता देवी फफक पड़ीं। इतनी भारी आवाज और उसमें छिपे दर्द और गुस्से को सुन एक बार तो मैं भी सिहर सा गया और दूर से ही माता जी तो प्रणाम कर वापस लौट लिया, क्योंकि जिस राहुल को वह मेरे साथ देखना चाहती थी, वह मेरे पास नहीं बल्कि भगवान के पास था, जिसे मजहबी भीड़ ने उनसे छीन लिया था।

राहुल की मौत के बाद परिजनों को सांत्वना देते आसपास के लोग

बृजपुरी की गली नंबर 6 में रहने वाले 23 वर्षीय मनीष सिंह उर्फ राहुल ठाकुर SSC की तैयारी कर रहे थे। दो भाइयों में राहुल दूसरे नंबर पर थे। राहुल की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। बड़े भाई अभिषेक का रो-रोकर बुरा हाल है। राहुल की मौत के बाद से वे घर से बाहर तक नहीं निकले हैं और न किसी से बात करने को तैयार हैं।

जो हिंदू लड़की करती थी दुआ सलाम, उसी की शादी को जला कर राख कर डाला: चाँद बाग ग्राउंड रिपोर्ट

‘हमारी बेटियों को नंगा करके भेजा दंगाइयों ने, कपड़े उतारकर अश्लील हरकतें की’ – करावल नगर ग्राउंड रिपोर्ट

पहले से जमा कर रखे थे पत्थर, हिंदुओं पर हमले के लिए बहू-बेटियों को भी दे रहे थे लाठी: महिला चश्मदीद

हिन्दू घृणा से लेकर मुस्लिम भीड़ का आतंक, दिल्ली दंगों की जो बातें आपसे छिपाई गई

देश की राजधानी का एक हिस्सा जल रहा है। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में 42 मौतों की पुष्टि हो चुकी है। 250 से भी अधिक घायल हुए हैं। यहाँ हम आपको अब तक के घटनाक्रम की पूरी जानकारी देंगे। सबसे पहले एक सवाल से शुरू करते हैं कि कोई आपके घर का दरवाजा 3 महीने से ब्लॉक कर रखे तो आप क्या करेंगे? दिल्ली के शाहीन बाग़ में ऐसा ही हो रहा था। सीएए विरोध के नाम पर पिकनिक मना रही मुस्लिम महिलाओं के कारण लाखों लोगों को परेशानी हुई, लगातार कई हफ़्तों तक। उन्हें दफ्तर पहुँचने में देरी होती थी, बच्चे घंटों स्कूल जाने-आने समय अटके रहते थे और लोगों का उधर से गुजरना मुश्किल था। लेकिन, मीडिया के अनुसार पीड़ित हिन्दुओं को गुस्साने का भी अधिकार नहीं है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रविवार (फरवरी 23, 2020) को अहमदाबाद पहुँचे। देश के लिए गर्व का क्षण था कि वहाँ दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम का उद्घाटन हुआ। लेकिन, कट्टर इस्लामी लोगों के लिए ये तबाही मचाने का सबसे अच्छा मौका था, क्योंकि वे इंटरनेशनल मीडिया के अटेंशन के भूखे रहते हैं। उन्होंने जफराबाद को नया शाहीन बाग़ बनाने की कोशिश तेज कर दी। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने रोज प्रताड़ना सह रही जनता की तरफ़ से आवाज़ उठाई और कहा कि दिल्ली पुलिस ने अगर उपद्रवियों को शांत नहीं किया तो वे भी विरोध करने के लिए सड़कों पर उतरेंगे।

शरजील इमाम, वारिस पठान और इमरान प्रतापगढ़ी जैसे मुस्लिम नेताओं के भड़काऊ बयानों को ढकने के लिए मीडिया के एक बड़े वर्ग ने कपिल मिश्रा का सहारा लिया। यहाँ तक कि पुलिस पर गोलीबारी करते बेख़ौफ़ विचरते मोहम्मद शाहरुख़ को भी भगवाधारी साबित करने का कुत्सित प्रयास किया गया, लेकिन उसकी पहचान सामने आ जाने के बाद कपिल मिश्रा पर हमले और तेज़ कर दिए गए क्योंकि मोहम्मद शाहरुख़ को छिपाना जो था। पुलिसकर्मी दीपक दहिया को इन दंगों के ख़िलाफ़ सबसे बड़ा चेहरा बनना चाहिए था। आपने देखा कैसे वो उस बेख़ौफ़ अपराधी के सामने निडर होकर खड़े थे।

सोमवार (फरवरी 25, 2020) को नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के 5 मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया। ये सभी दिल्ली मेट्रो की ‘पिंक लाइन’ पर थे। इसके बाद एक भीड़ ने गोकुलपुरी में एक टायर मार्किट को फूँक दिया। इस्लामी दंगाइयों की गोली लगने से तीन छोटे-छोटे बच्चों के पिता कॉन्स्टेबल रतनलाल वीरगति को प्राप्त हो गए और डीसीपी अमित शर्मा गंभीर रूप से घायल हो गए। डीसीपी ने बताया है कि अगर उस दिन वे बच के न निकलते तो उनकी भी लिंचिंग कर दी जाती। मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक उच्च-स्तरीय बैठक में स्थिति की समीक्षा की।

इस बीच मीडिया और लिबरलों का प्रोपेगेंडा चलता रहा। ‘ब्लू टिक’ वाले विभिन्न सोशल मीडिया हैंडल्स से कपिल मिश्रा पर दंगों का इल्जाम डाला गया। मोहम्मद शाहरुख़, वारिस पठान और शरजील इमाम जैसों की बात तक नहीं की गई। मामला हाईकोर्ट में गया और वहाँ भी भाजपा नेताओं के बयानों की क्लिप चली। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दिल्ली पुलिस का बचाव किया और कहा कि वो एसिड अटैक झेल रहे हैं, पिकनिक नहीं मना रहे।उन्होंने कहा कि दोनों तरफ के कई विडियो आए हैं, जिसकी जाँच होगी। बुधवार को ट्रंप वापस चले गए। उसके बाद उसी रात राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल ने जिम्मेदारी संभाली।

इसके बाद इस दंगे का ऐसा सच सामने आया, जिसने सब को हिला कर रख दिया। आईबी के अंकित शर्मा को ताहिर हुसैन के गुंडों ने मार डाला। चाँदबाग के नाले से उनका शव मिला। ताहिर हुसैन की बिल्डिंग का विडियो सामने आया। उसकी इमारत में करीब 3000 दंगाई जमा थे। उन्होंने लगातार आसपास के हिन्दुओं पर बमबारी और पत्थरबाजी की। यही लोग अंकित शर्मा सहित 4 लोगों को घसीटते हुए ले गए थे। दरिंदगी का आलम ये था कि अंकित की हत्या करते समय उनके शरीर पर लगातार 4 घंटे तक 6 दरिंदों ने 400 बार चाकुओं से वार किया। ताहिर हुसैन की फोटो सामने आई, जिसमें वो हाथ में डंडा लिए अपनी छत पर खड़े होकर गुंडों को निर्देशित करता हुआ दिखा।

ताहिर के बचाव में कई लिबरल उतर आए। उसने दावा किया कि उसे फँसाया जा रहा है लेकिन वो उन्हीं कपड़ों में सफाई देने आ गया, जिन कपड़ों में वो गुंडई कर रहा था। उसकी फैक्ट्री और घर सील कर लिया गया। जावेद अख्तर बौखला गए। इसी तरह शिव विहार में फैसल फ़ारूक़ के ‘राजधानी स्कूल’ को ‘अटैक बेस’ बनाया गया और वहाँ भी हिन्दुओं पर गोलीबारी, बमबारी और पत्थरबाजी हुई, जिनमें कई जानें गईं। उसके बगल के डीआरपी स्कूल को जला दिया गया, जो एक हिन्दू का था। फिर भी राजधानी स्कूल में तबाही की ख़बरें चलीं, जबकि वो दंगाइयों का पनाहगार बना था, जहाँ कई दिनों से साजिश रची जा रही थी और हथियार जमा किए जा रहे थे। पत्थर और बम दूर तक फेंकने के लिए गुलेल का इस्तेमाल किया गया।

अंकित शर्मा के साथ विनोद कुमार की हत्या भी सुर्खियाँ बनीं। ब्रह्मपुरी के निवासी विनोद कुमार को उनके बेटे के सामने इसलिए मार डाला गया, क्योंकि उनकी बाइक के स्टिकर पर ‘जय श्री राम’ लिखा था। उनके बेटे ने बताया कि 40 मुस्लिमों की भीड़ इस्लामी टोपी पहने आई और उन्होंने ‘अल्लाहु अकबर’ व ‘नारा-ए-तकबीर’ चिल्लाते हुए हमला बोल दिया। इसी तरह जौहरीपुर के विवेक जब अपनी दुकान में बैठे हुए थे, दंगाई मुस्लिम भीड़ आई और उन्होंने उसकी सिर में ड्रिल कर दिया। उनके सिर में लोहा घुसाए जाने के बाद उनकी सर्जरी हुई। जाफराबाद व आसपास के इलाक़ों के हिन्दुओं को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा। लोगों ने वो सारी चीजें त्याग दीं, जिनसे प्रतीत हो कि वो हिन्दू हैं, जैसे- ॐ का टैटू, हाथ में कलावा या बाइक पर धार्मिक स्टीकर।

मीडिया ने इस दौरान ख़ूब फेक न्यूज़ चलाया। कहीं कोई हिन्दू मरा, इसको कवर करने की बजाय ये खोजा जाने लगा कि कहाँ किसी हिन्दू ने किसी मुस्लिम को थप्पड़ मार दिया। हिन्दू इस पूरे दंगे के दौरान या तो आत्मरक्षा के लिए संघर्ष करते रहे या फिर घरों में दुबके रहे। इस स्थिति में भी उन्होंने कई मुस्लिमों की जान बचाई। सुरक्षा बलों के खाने-पीने का ध्यान भी हिन्दुओं ने रखा, क्योंकि नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में फ़िलहाल कर्फ्यू लगा हुआ है और भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात हैं।

अब हम बात करेंगे कि आखिर ये दंगे भड़के क्यों? ये तो हम देख ही चुके हैं कि तैयारी काफ़ी पहले से थी और पत्थर, पेट्रोल बम व असलहों के रूप में हथियार कई दिनों से जमा किए जा रहे थे।

सीएए के विरोध में आंदोलन शुरू हुआ था, जिसमें राम मंदिर, तीन तलाक़ और अनुच्छेद 370 पर केंद्र सरकार के मजबूर फ़ैसलों के ख़िलाफ़ उग्र मुस्लिमों को भड़काया गया। नागरिकता तो एक की भी नहीं गई, जानें कई चली गईं। यूपी में कई शहरों में पुलिस और दंगाइयों की मुठभेड़ हुई थी, जिनमें 250 से भी अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। योगी सरकार के सख्त एक्शन के बाद दंगाइयों ने दिल्ली का रुख किया और यहाँ माहौल बनाया जाने लगा। शाहीन बाग़ में भारत का कटे-छँटे नक़्शे चस्पां किए गए। देशभर में सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान एक के बाद एक सेलेब्रिटीज ने आकर भड़काऊ भाषण दिए और ‘फक हिंदुत्व’ जैसे आपत्तिजनक पोस्टर्स लहराए गए।

हाथ में तिरंगा लेकर और मुँह से राष्ट्रगान गाकर भारत के टुकड़े-टुकड़े करने की बात की गई, जिसे मीडिया ने गाँधीवादी आंदोलन बताया। जहाँ गाँधी को ही फासिस्ट कहा गया, वो गाँधीवादी आंदोलन कैसे? हिन्दुओं ने अपना गुस्सा दबाए रखा, बार-बार उन्हें अपमानित किया जाता रहा। स्वस्तिक का अपमान तो जैसे उनका ट्रेंड ही बन गया। मीडिया के एक बड़े वर्ग ने अपने स्टूडियो में बैठ कर दंगाइयों का रोज बचाव किया और उन्हें एहसास दिलाया कि वे जो कर रहे हैं, एकदम सही है। पीड़ित हिन्दुओं को ही उलटा बदनाम किया गया। इससे दंगाइयों को शह मिली।

अब बात करते हैं दिल्ली दंगों की कुछ दर्दनाक कहानियों की, जिसे हर हिन्दू को जाननी चाहिए क्योंकि इससे सच्चाई आपके कानों तक पहुँचेगी और भविष्य में सतर्कता के लिए भी ये काम आएगी। जैसे, प्रीति नामक एक महिला ने अपने बच्चों की जान बचाने के लिए दोनों छोटे-छोटे बच्चों को छत से नीचे फेंक दिया। मौजपुर में जम्मू कश्मीरी न्यूज़ पोर्टल के एक पत्रकार को गोली मार दी गई। पूरे प्रकरण की साजिश का गहरा स्तर देख कर विशेषज्ञों और ख़ुफ़िया एजेंसियों ने अंदेशा लगाया कि इसके पीछे पीएफआई और आईएसआई का हाथ हो सकता है। जाफराबाद में दंगाइयों ने स्कूल बस को निशाना बनाया। घोंडा के विकास ने बताया कि उनके मोहल्ले में 400 मुस्लिमों ने धावा बोला।

करावल नगर में तो हिन्दू बेटियों के साथ अश्लील हरकत की गई और उन्हें नंगा कर दिया गया। शिव विहार में इसी कारण हिन्दू गोली और पत्थर खाते हुए भी डटे रहे, ताकि दंगाई उनके घरों में न घुस पाएँ। ऑपइंडिया ने अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग में पाया कि मुस्लिम महिलाओं ने भी सुरक्षा बलों व हिन्दुओं पर छतों के ऊपर से एसिड अटैक किया। अभी तक मीडिया, लिबरलों और सेक्युलर लोगों का गैंग इसे ‘मुस्लिम विरोधी दंगा’ साबित कर के वास्तविकता को पलटने में लगा हुआ है। उनसे सावधान रहें!

बच गई ‘नो CAA, नो NRC’ लिखी दुकानें, बाकी को कर दिया ख़ाक: सामने आया दिल्ली दंगों का ‘ट्रेंड’

दिल्ली के उत्तर-पश्चिम जिले में हुए हिन्दू विरोधी दंगों की साजिश कितनी सुनियोजित और पुख्ता थी, इस बात के सबूत लगातार सामने आते जा रहे हैं। इन दंगों में हिन्दुओं की बर्बर हत्या, नालों से मिलती लाशों, दुकानों, मकानों, स्कूल, मंदिर पर हुए हमले और आगजनी की खबरों के साथ साथ रोज नए-नए साक्ष्य सामने आ रहे जो साफ़ तौर पर इस दंगे के पूर्व नियोजित होने की तरफ संकेत करते हैं।

दिव्य कुमार सोती ने ‘कैपिटल टीवी’ की एक ग्राउंड रिपोर्ट से जुड़ा विडियो ट्वीट किया है, जो कुछ ऐसा ही इशारा करते हुए कुछ सवाल छोड़ जाता है।

इस विडियो में आप देख सकते हैं कि किस तरह ‘NO NRC, NO CAB’ या ‘No CAA’ लिखी हुई दुकानें आगजनी से बच जाती हैं और ठीक उनके बगल में मौजूद हिन्दुओं की दुकानें जिन पर ऐसा नहीं लिखा होता, चुन-चुन कर फूँक दी जाती हैं। यह अकेला ऐसा “संयोग” इस दंगे के दौरान देखने में नहीं आया है।

ऑपइंडिया की रिपोर्ट में हमने पहले भी स्थानीय लोगों के हवाले से बताया था कि जब हम शिव विहार स्थित भगवान शिव चौक’ पहुँचे थे तो वहाँ ईंट-पत्थर इस तरह बिखरे हुए थे, जैसे वो दंगों का केंद्रबिंदु रहा हो। वहाँ अब सुरक्षा-व्यवस्था के तगड़े बंदोबस्त हैं। इसके बाद हम आगे शिव विहार चौक पहुँचे थे जहाँ एक मुस्लिम के स्वामित्व वाले राजधानी स्कूल से चारों तरफ हमले किए गए। वहीं हिन्दुओं का डीआरपी स्कूल ख़ाक में मिला दिया गया। बकौल लोकल हिन्दू, राजधानी स्कूल में क़रीब 300 दंगाई गुंडे जमा थे।

चौक पर एक व्यक्ति ने बताया था कि रोड के उस तरफ़ मुस्लिमों के घर हैं, जो महफूज हैं। यह व्यक्ति अपनी जली हुई दुकान देखने आया था। उन्होंने बताया कि इसके बावजूद हिन्दुओं ने कई मुस्लिम महिलाओं को सुरक्षित उनके घरों तक पहुँचाया, जो दोनों पक्षों के संघर्ष में फँस गई थी। इधर हिन्दू सबकी मदद करते रहे, उधर मुस्लिम भीड़ गुलेल से पत्थर फेंकती रही और पेट्रोल बम बरसाती रही।

यह सब घटनाएँ संयोग नहीं हो सकतीं। दिल्ली का यह हिन्दू विरोधी दंगा हिन्दुओं एक नरसंहार ही था, जो सुनियोजित षड्यंत्र और बर्बर हत्याओं के रूप में स्पष्ट तौर पर नजर आता है।

UP के 2 करोड़ किसानों को सालभर में मिले ₹12000 करोड़: बुंदेलखंड में PM मोदी ने रखी एक्सप्रेसवे की नींव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 296 किलोमीटर लंबे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की आधारशिला रखी। उन्होंने कहा कि यह एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड को विकास के रास्ते पर ले जाएगा। करीब 15 हजार करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला यह एक्सप्रेसवे यहॉं रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। उन्होंने कृषक उत्पादन संगठन (एफपीओ) का शुभारंभ भी किया। साथ ही बताया कि पूरे उत्तर प्रदेश के करीब दो करोड़ किसान परिवारों के खाते में सालभर में करीब 12 हजार करोड़ रुपए जमा हुए हैं।

उन्होंने कहा, “चित्रकूट समेत उत्तर प्रदेश के 2 करोड़ कृषक परिवारों तक 12000 करोड़ रुपए की सीधे मदद पहुँचाई गई है। आप कल्पना कर सकते हैं 12000 करोड़ रुपए। वह भी मात्र साल भर में। बिना बिचौलियों के लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे पहुँचाए गए हैं।” प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक साल पहले डिफेन्स कॉरिडोर और अब 15000 करोड़ रुपए की लागत से तैयार होने वाला यह बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे तथा एफपीओ, यह सब न केवल बुंदेलखंड को विकास के राह पर लाएँगे, बुंदेलखंड देश बदलने को तैयार हो रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी दोपहर करीब डेढ़ बजे चित्रकूट में पहुँचे। सबसे पहले चित्रकूट धाम की ऐतिहासिकता की प्रदर्शनी को देखा और फिर इसके बाद मंच पर पहुंचे। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कार्यक्रम में नानाजी देशमुख के ‘ग्रामोदय से राष्ट्रोदय’ के संकल्प का भी स्मरण किया।मोदी के भाषण के दौरान पंडाल में भारत माता की जय और जय श्रीराम के जयकारे गूँजते रहे। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने इस दौरे के दौरान प्रयागराज में दिव्यांग जनों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयोजित हुए एक ‘मेगा कैंप’ में उनकी सहायता के लिए जरूरी सामग्री और टूल्स भी वितरित किए। इस तरह के मेगा कैम्प्स की तारीफ़ करते हुए उन्होंने कहा, “पिछली सरकारों के समय ऐसे कैम्प्स बिरले ही नजर आते थे, लेकिन पिछले 5 सालों में हमारी सरकार के दौरान ऐसे 9000 कैम्प्स देश के विभिन्न भागों में आयोजित किए गए हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक 16 सूत्री कार्यक्रम बनाया गया है। सरकार का प्रयास है कि किसान को उसके खेत के कुछ किलोमीटर के दायरे में ही एक ऐसी व्यवस्था मिले, जो उसे देश के किसी भी मार्केट से जोड़ दे और आने वाले समय में ये ग्रामीण हाट कृषि अर्थव्यवस्था के नए केंद्र बनेंगे।”

NDTV के पत्रकार की डेस्क पर आतंकी ओसामा बिन लादेन? वायरल हो रही तस्वीर

ओसामा बिन लादेन दुनिया में अब तक के सबसे खूँखार आतंकियों में से गिना जाता है। वैश्विक आतंकी संगठन अलकायदा के सरगना रहे लादेन ने ही ‘वर्ल्ड ट्रेड सेंटर’ में ऐसी तबाही मचाई थी कि अमेरिका ने कई सालों तक उसकी तलाश की और उसे मार गिराया। क्या आप ऐसा सोच सकते हैं कि इतने दुर्दांत आतंकी की तस्वीर कोई अपने घर में टाँगेगा? अच्छा, क्या आप ये सोच सकते हैं कि उसका गुड्डा या डॉल कोई अपने दफ्तर या घर में रखे? आपने लाफिंग बुद्धा या गणेश जी की छोटी मूर्तियाँ लोगों के डेस्क पर देखी होगी, अब लादेन का डॉल देखिए।

ऐसा हम नहीं कह रहे, सोशल मीडिया में लगातार वायरल हो रही तस्वीरों में ऐसा दावा किया जा रहा है। आप ख़ुद देखें और तय करें। दरअसल, ‘गँजहों की गोष्ठी’ के लेखक साकेत सूर्येश ने ट्विटर पर ये तस्वीर शेयर की। तस्वीर में दिख रहा है कि एनडीटीवी के पत्रकार विष्णु सोम के टेबल पर ऐसा डॉल रखा हुआ है, जिसकी शक्ल आतंकी ओसामा बिन लादेन से मिलती-जुलती है। ओसामा को अमेरिका ने पाकिस्तान में मार गिराया था। अब सोशल मीडिया पर शेयर हो रहा है कि एनडीटीवी पत्रकार के डेस्क पर उसकी मूर्ति रखी हुई है।

ऊपर हमने वो विडियो भी शेयर किया है, जिसमें दिख रहा है कि विष्णु सोम की डेस्क पर ओसामा बिन लादेन का डॉल रखा हुआ है। ऐसा सोशल मीडिया पर शेयर हो रही तस्वीरों और विडियो का दावा है। अभी तक एनडीटीवी या विष्णु सोम ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है। वैसे एनडीटीवी ऐसी कई ख़बरें चलाता रहा है, जिनसे पाकिस्तान को मदद मिलती रही है। ओसामा भी अरसे तक पाकिस्तान में ही छिपा हुआ था। नीचे संलग्न की गई तस्वीर में आप देख सकते हैं कि एनडीटीवी की डेस्क पर क्या रखा हुआ है:

विष्णु सोम की डेस्क पर आतंकी ओसामा की मूर्ति?

हालाँकि, लोग ये नहीं समझ पा रहे हैं कि अगर ये तस्वीरें सच्ची है तो कोई ओसामा बिन लादेन की मूर्ति या डॉल अपने घर या दफ्तर में रखेगा ही क्यों? वो तो एक आतंकी था, जिसने कई जानें ली और दुनिया भर में कहर मचाया। अब देखना पड़ेगा कि कथित फैक्ट-चेक वाले इसका बचाव करने के लिए क्या हथकंडे अपनाते हैं।

CAA विरोधी उठाते हैं खर्चा: ओवैसी के मंच से ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने वाली अमूल्या

वामपंथी कार्यकर्ता अमूल्या लियोना ने खुलासा किया है कि वो एक पेड प्रोटेस्टर है। बता दें कि ये वही अमूल्या है, जिसने पिछले दिनों नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ बेंगलुरु में आयोजित AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी की रैली में मंच से ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए थे। फिलहाल वो देशद्रोह के आरोप में जेल में बंद है। लियोना ने पुलिस को बताया कि पिछले साल दिसंबर में सीएए के खिलाफ आंदोलन शुरू होने के बाद से सीएए के विरोध में रैली आयोजित करने वाले आयोजक उसका खर्च उठा रहे हैं।

अमूल्या के गिरफ्तारी के ठीक बाद उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। फिलहाल अमूल्या से कर्नाटक पुलिस की विशेष टीम पूछताछ कर रही है। पुलिस ने दावा किया कि दिसंबर में सीएए लागू होने के बाद से विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने को लेकर अमूल्या ने अपने और प्रदर्शन में भाग लेने वाले अन्य प्रदर्शनकारियों पर लगभग 2 लाख रुपए खर्च किए।

अमूल्य ने पुलिस को बताया कि सीएए विरोधी आयोजकों ने उसके टिकट बुक कराए और साथ ही उसके दौरे को भी प्रायोजित किया। इतना ही नहीं उसके लिए भाषण भी आयोजक ही तैयार करते थे। पुलिस ने बताया, “वह मंगलुरू में विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए गई थी। उसके टिकट आयोजकों ने बुक किए गए थे। इसी तरह विभिन्न आयोजकों ने राज्यों में उसके दौरे को प्रायोजित किया।” अमूल्या के मुताबिक वह पैसे खर्च करती थी और आयोजक राशि की भरपाई करते थे। अमूल्य का दावा है कि उसके भाषणों का एक बड़ा हिस्सा आयोजकों द्वारा तैयार किया गया था। भाषण में वो अपनी तरफ से कुछ ही लाइन्स जोड़ती थी। हालाँकि उसका कहना है कि पाकिस्तान समर्थित नारे लगाना उसका अपना आइडिया था।

अमूल्या लियोना की गिरफ्तारी से एक महीने पहले उसे एक यूट्यूब चैनल पर इंटरव्यू देते हुए देखागया था, जिसमें वह देशद्रोही, भारत-विरोधी एजेंडे का समर्थन करने के लिए वामपंथियों के मोडस ऑपरेंडी को समझा रही थी।

इस इंटरव्यू में उसने खुलासा किया था कि एक कंटेंट राइटर टीम होती है, जो उसके जैसे लोगों के लिए स्क्रिप्ट लिखने का काम करती है और फिर उन्हें वो स्क्रिप्ट देकर जाकर वही बोलने के लिए कहा जाता है जो कि उसमें लिखा होता है। उसने इंटरव्यू में कहा था, “मैं मीडिया के कारण इसका चेहरा बन गई हूँ, लेकिन इसके पीछे एक सलाहकार समिति, एक कंटेट टीम, वरिष्ठ कार्यकर्ता, मेरे माता-पिता और एक बहुत बड़ा छात्र समूह है जो काम कर रहा है। मैं सिर्फ इसका चेहरा हूँ लेकिन वे वही हैं जो वास्तव में कड़ी मेहनत कर रहे हैं, असली नायक वही हैं।”

बता दें कि अमूल्या की गिरफ्तारी के बाद संजीव मराडी नामक इस व्यक्ति ने मीडिया के सामने राज्य सरकार से अमूल्य नामक इस “छात्र एक्टिविस्ट” को जमानत पर न छोड़ने की अपील करते हुए कहा था कि इसे जमानत पर न छोड़ा जाए अन्यथा हम इसका एनकाउंटर करेंगे या जो भी ऐसा करेगा उसको 10 लाख रुपए इनाम देंगे।

तब ब्रिटिश थे, अब कॉन्ग्रेस है: बंगाल विभाजन से दिल्ली दंगों तक यूँ समझें ‘मजहब’ वालों का किरदार

साल 1905 में बंगाल विभाजन की योजना बनाई गई, तो हिन्दुओं और मुस्लिमों दोनों ने मिलकर इसका विरोध किया था। लेकिन गवर्नर जनरल एवं वायसराय कर्जन के बंगाल दौरे ने मुस्लिम समुदाय के दृष्टिकोण को बदल दिया। कर्जन ने मुस्लिम समुदाय को भड़काया कि बंगाल विभाजन उनकी राजनैतिक गतिविधियों के लिए फायदेमंद साबित होगा। इसके लिए ब्रिटिश सरकार ने समुदाय विशेष के लोकप्रिय नेता ढाका के नवाब सलीमुल्लाह को भी राजी कर लिया था। इस घटना का जिक्र वर्तमान संदर्भों में महत्वपूर्ण है। ब्रिटिश सरकार ने पहले समुदाय विशेष को भड़काया और फिर धार्मिक तुष्टिकरण को अपनी सत्ता की चाबी बनाया था।

आज किरदारों में थोड़ा फेरबदल हो गया है लेकिन उद्देश्य वही है। ब्रिटिश सरकार की जगह कॉन्ग्रेस आ चुकी है। ज्यादा पीछे जाने की जरूरत नहीं है, साल 2018 में कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने एक ट्वीट किया, “भारत में अल्पसंख्यकों के सारे अधिकार खत्म कर दिए जाएँगे।” ऐसे अनेक उदाहरण सार्वजनिक है जो कि कर्जन की नीतियों के समान है, जिसमें समुदाय विशेष को भड़काया जाता है। फिर धार्मिक तुष्टिकरण से चुनावों में ध्रुवीकरण किया जाता है। इसी साल कर्नाटक की एक चुनावी रैली में गुलाम नबी आजाद ने कहा था, “मुस्लिमों को बड़ी तादाद में एकजुट होकर कॉन्ग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करना चाहिए।”

यह संभव है कि समुदाय विशेष की व्यक्तिगत रुचि कॉन्ग्रेस में हो सकती है, इसमें चौकाने वाला ऐसा कोई तथ्य नहीं है! लोकतंत्र है, कोई भी व्यक्ति किसी भी दल अथवा प्रत्याशी को अपनी इच्छा के अनुसार वोट कर सकता है। वास्तव में, यह इतना भी आसान नहीं है जितना दिखाई दे रहा है। इसके जवाब के लिए इतिहास का फिर से रुख करते हैं।

कर्जन की उपरोक्त साजिश ने भारत विभाजन का पहला अध्याय ही लिखा था। कर्जन के बाद मिंटो को भारत का गवर्नर जनरल एवं वायसराय बनाया गया। उसने इस चिंगारी को आग में बदल दिया और भारत विभाजन की नींव रख दी। दरअसल, 30 दिसंबर, 1906 को ढाका में कई मुस्लिम नेता इकट्ठे हुए। उन्होंने प्रस्ताव पारित किया कि बंगाल विभाजन योजना का पूरा ‘फायदा’ उठाया जाएगा। समुदाय विशेष को भड़काना और धार्मिक तुष्टिकरण से वोट हासिल करने का खेल पिछले 7 दशकों से हमारे सामने है। यह स्थिति तब खतरनाक होने लगती है, जब इन मौकों को महत्वाकांक्षाओं के लिए भुनाया जाने लगता है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के शाहीन बाग का भी इस्तेमाल विरोध-प्रदर्शन के बजाय देश-विरोधी बयानों एवं योजनाओं के लिए किया गया था। यहाँ कट्टरपंथी छात्र शरजील इमाम ने कहा था कि हमारा लक्ष्य असम और उत्तर-पूर्व को शेष भारत से अलग करना है। एक शताब्दी पहले भी बंगाल से असम और उत्तर-पूर्व के हिस्सों को अलग करने के लिए साम्प्रदायिक हिंसा फैलाई, तनाव का माहौल बनाया और कट्टर भाषण दिए गए थे। इसलिए दिल्ली सहित उत्तर-पूर्व भारत में हिंसा, दंगे और तनाव को मात्र संयोग समझकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस प्रारूप को समझने के लिए एक बार उसी इतिहास में जाना होगा।

शिमला में वायसराय मिंटो से 1 अक्टूबर, 1906 को आगा खान के नेतृत्व में समुदाय विशेष के 36 लोगों का एक दल मुलाकात करने पहुँचा। यहाँ इन लोगों ने शरीयत की माँगों के साथ अपने लिए अलग संवैधानिक प्रतिनिधित्व की माँग रखी। मिंटो ने भी समुदाय विशेष के प्रति अपनी सहमति जताई। मिंटो पाँच सालों तक भारत का वायसराय रहा। इस दौरान दुसरे मजहब वालों को अलग एक राष्ट्र के तौर पर देखा जाने लगा। हिन्दुओं के खिलाफ दंगे और हिंसा ने विकराल रूप ले लिया। मुस्लिम लीग और मोहम्मद अली जिन्ना का अस्तित्व सामने आया। आखिरकार, 1947 में भारत का साम्प्रदायिक विभाजन स्वीकार कर लिया गया।

यही क्रम आज फिर से स्थापित किया जा रहा है। कॉन्ग्रेस जैसे राजनैतिक दल पहले समुदाय विशेष को भड़काते हैं, फिर तुष्टिकरण को सत्ता का जरिया बनाते हैं। इसके बाद मुस्लिम नेता ऐसे मौके का नाजायज ‘फायदा’ उठाने के लिए पहले अलग संविधान, फिर अलग देश की माँग करने लगते हैं। इस सौदेबाज़ी में सांप्रदायिक दंगे एवं हिंसा के साथ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) की भूमिका भी जुड़ जाती है। इतिहासकार आरसी मजूमदार अपनी पुस्तक ‘हिस्ट्री ऑफ फ्रीडम मूवमेंट इन इंडिया’ में लिखते हैं कि यूनिवर्सिटी के संस्थापक सैयद अहमद ने मुस्लिम राजनीति को हिंदू विरोधी बना दिया था।

सैयद का असर बेहद तीव्र था। इसका एक उदाहरण साल 1908 में मिलता है। उस वक्त के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर जियाउद्दीन अहमद ने अब्दुल्ला शुहरावर्दी को एक पत्र लिखा, “मैं जानता हूँ कि मिस्टर कृष्ण वर्मा ने इंडियन होम रूल सोसायटी की स्थापना की है और आप भी उसके उपाध्यक्षों में से एक है। आपको वाकई में लगता है कि भारत में होम रूल से मुस्लिमों को कोई फायदा होगा? इसमें कोई संदेह नहीं है कि होम रूल एकदम अलीगढ़ योजना के विरुद्ध है। मुझे लगता है कि अलीगढ़ योजना ही मुस्लिमों की योजना है।”

ब्रिटिश भारत में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय हिंदुओं के खिलाफ प्रचार का मुख्य केंद्र बन गया था। यहाँ से एक ‘अलीगढ़ इंस्टीट्यूट गजट’ नाम का समाचार-पत्र प्रकाशित होता था। इसमें आमतौर पर हिन्दुओं के राजनैतिक एवं सामाजिक विचारों के खिलाफ जहर उगला जाता था। एक के बाद एक लेख प्रकाशित किए जिनके केंद्र में द्वि-राष्ट्रवाद का सिद्धांत शामिल था। धीरे-धीरे यहाँ के छात्रों के मन में भर दिया कि ‘उनके लिए भारतीय संसदीय व्यवस्था अनुपयुक्त है और इसके स्वीकृत होने की स्थिति में, बहुसंख्यक हिन्दूओं का वहाँ उस तरह राज होगा जो किसी मुस्लिम सम्राट का भी नहीं था’। अब इसमें कोई छुपा तथ्य नहीं है कि भारत विभाजन के जिम्मेदार जितने भी मुस्लिम नेता थे, उनकी शिक्षा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हुई थी।

अभी पिछले दिनों देशभर में भी नागरिकता संशोधन कानून पर विरोध-प्रदर्शन हुए, जिसमें इस विश्वविद्यालय के छात्र भी शामिल थे। वास्तव में, यह विरोध कानून को लेकर नहीं बल्कि भारत की संप्रभुता के खिलाफ था। क्योंकि इस यूनिवर्सिटी का इतिहास ही ऐसा रहा है। कुछ दिनों पहले विश्वविद्यालय में नारे लगाए गए, “हिंदुत्व की कब्र खुदेगी-एएमयू की छाती पर, सावरकर की कब्र खुदेगी-एएमयू की छाती पर, बीजेपी की कब्र खुदेगी-एएमयू की छाती पर, ब्राहमणवाद की कब्र खुदेगी-एएमयू की छाती पर”। ख़बरें तो यह भी है कि वहाँ पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगाए जाते हैं, जम्मू-कश्मीर की आज़ादी की माँग होती है और मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीरों को संजो कर रखा जाता है।

एक सामान्य बात है कि यह कब्र खोदना क्या होता है? शिक्षा और कब्र खोदने का आपसी सम्बन्ध क्या है? विश्व में हजारों विश्वविद्यालय हैं, लेकिन ऐसी शिक्षा कही नहीं दी जाती। ब्रिटिश भारत में हिन्दुओं के खिलाफ सीधे नारे लगाए जाते थे, लेकिन आज मीडिया के दौर में यह संभव नहीं है। इसलिए यह एक आसान रास्ता निकाला गया कि हिंदुत्व, भाजपा, सावरकर और ब्राहमण की आड़ में उस सोच को फिर से प्रचारित किया जाए, जिसने एएमयू की छाती पर कब्र यानी पाकिस्तान के लिए जमीन खोदी थी।

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गोली नहीं खाना चाहते हो तो हमारी सीमाओं से दूर रहो: सांसद ने घुसपैठियों को चेताया

दुनिया भर में अवैध घुसपैठियों को लेकर बहस छिड़ी हुई है। सीरिया व अन्य मुस्लिम मुल्कों से लाखों की संख्या में घुसपैठियों ने यूरोप सहित कई क्षेत्रों में पाँव रखे हैं, जिनसे वहाँ के स्थानीय निवासियों में आक्रोश है। जहाँ एक तरफ़ दुनिया भर के मानवाधिकार संगठन अपील करते हैं कि इन्हें शरण दी जाए, कई लोगों का ये भी कहना है कि इससे उनके देशों में अपराध बढ़ेगा। इसी क्रम में यूरोपियन संसद के सदस्य डोमिनिक टारजिंस्की का एक बयान आया है। इसमें उन्होंने घुसपैठियों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने उनसे कहा है कि अगर वो अपना हित चाहते हैं तो पोलैंड की सीमा पर न आएँ।

डोमिनिक ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी अपने इस बयान को ट्वीट किया है। उन्होंने घुसपैठियों को चेताते हुए कहा कि अगर वो अपनी सलामती चाहते हैं, अगर वो चाहते हैं कि उन्हें गोली न मारी जाए या फिर गिरफ़्तार न किया जाए- तो वो पोलैंड की सीमा से दूर ही रहें, अंदर घुसने की चेष्टा भी न करें।

उन्होंने कहा कि वो सीधे शब्दों में घुसपैठियों को चेतावनी दे रहे हैं। डोमिनिक यूरोपियन कन्जर्वेटिव्स एंड रेफोर्मिस्टर्स (ECR) के उपाध्यक्ष हैं। वो घुसपैठियों के ख़िलाफ़ लगातार आवाज़ उठाते रहते हैं। वो पोलैंड की सत्ताधारी पार्टी के नेता हैं। उन्होंने कहा:

“अवैध घुसपैठियों तक मैं एक सन्देश पहुँचाना चाहता हूँ। अगर आप चाहते हैं कि आपको पीछे न धकेला जाए, अगर आप गिरफ़्तारी से बचना चाहते हैं और अगर आप गोलियों का शिकार नहीं बनना चाहते हैं- तो हमारी सीमाओं की तरफ़ न आएँ। पोलैंड की सीमाओं से दूर रहें। हमलोग या हमारी पुलिस आपको पीटने नहीं आई थी, तुमलोगों ने हमारे देश में घुस कर यहाँ की क़ानून-व्यवस्था का मखौल उड़ाया है। सुरक्षित रहना चाहते हो तो पोलिश सीमा से दूर रहो।”

उन्होंने पिछले महीने ही ये बयान दिया था, जो कई दिनों से वायरल हो रहा है। पोलैंड पर आरोप लगते रहे हैं कि वो ईसाई घुसपैठियों को तो ले लेता है लेकिन बाकी घुसपैठियों को भगा दिया जाता है। वहाँ अभी ‘लॉ एंड जस्टिस पार्टी’ सत्ता में है, जो दक्षिणपंथी विचारधारा की अगुवाई करती है। उसका नारा ‘पोलैंड फर्स्ट’ आने वाले आम चुनावों में भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है। प्रधानमंत्री मैतुसज मोरवीकी का स्पष्ट कहना है कि वो यूरोप को एक नया आकर देकर इसे ईसाइयत के रंग में ढालने के पक्षधर हैं।

मेरे साथ आतंकवादियों जैसा सलूक हो रहा है: जेल से पेशी के लिए लाए जाने पर बोले आजम खान

धोखाधड़ी के मामले में जेल में बंद सपा सांसद आजम खान, उनकी विधायक पत्नी तंजीन फातिमा और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को शनिवार (फरवरी 29, 2020) को सीतापुर जेल से रामपुर कोर्ट पेशी पर ले जाया गया। इस दौरान उन्‍होंने मीडिया से बातचीत में कहा, “मेरे साथ आतंकवादियों जैसा सलूक हो रहा है। इस सरकार में मेरे साथ अमानवीय व्यवहार हो रहा है।”

आजम खान के आतंकवादी वाले बयान पर सीतापुर के जेल अधीक्षक डीसी मिश्र ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “सांसद के साथ जेल में अच्छा व्यवहार किया जाता है। हम उन्हें जेल मैनुअल के हिसाब से ही सारी सुविधाएँ उपलब्ध करा रहे हैं।” साथ ही जेल अधीक्षक ने कहा कि वो बड़े व्यक्ति हैं, वह घर जैसी सुविधा सोचते होंगे तो वह सुविधा जेलों में उपलब्ध नहीं हो सकती।

इसके साथ ही नगर विकास राज्य मंत्री महेश चंद्र गुप्ता ने भी इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आजम खान ने अपने जमाने में लोगों को बहुत परेशान किया। आजम खान अपनी फटकार से लोगों को परेशान करते थे। आज उनके साथ जो हो रहा है, सच्चाई में न्याय हो रहा है। आजम के साथ आतंकवादी जैसा कोई बर्ताव नहीं हो रहा है। मंत्री ने कहा कि आजम जैसा करेंगे, वैसा भरेंगे। सपा के राज में बहन-बेटियाँ स्कूल भी सही ढंग से नहीं जा पाती थीं।

बता दें कि स्वार से विधायक रहे बेटे अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने में आरोपी सपा सांसद आजम खान ने पत्नी एवं शहर विधायक तजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम के साथ बुधवार (फरवरी 26, 2020) को कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था। जिसके बाद अदालत ने तीनों सपा नेताओं को 2 मार्च तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। उन पर आरोप है कि बार-बार कोर्ट के आदेश से लेकर मुनादी तक कराने के बाद भी वो कोर्ट में हाजिर नहीं हुए। इसके मद्देनजर स्पेशल कोर्ट ने मंगलवार (फरवरी 25, 2020) को सीआरपीसी की धारा-83 के तहत संपत्ति कुर्क करने के आदेश जारी किया था।

पिछले साल भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने गंज कोतवाली में मोहम्मद आजम खान, अब्दुल्ला आजम और तंज़ीन फातिमा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। साथ ही आरोप लगाया था कि अनुचित लाभ लेने के लिए सपा सांसद आजम खान और उनकी पत्नी तजीन फातिमा ने बेटे अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाण-पत्र बनवाए।