Home Blog Page 5161

‘राजीव गाँधी के साथ जान गँवाने वाले 13 लोगों के परिजनों की तरफ से सोनिया गाँधी कैसे फैसला ले सकती हैं’

21 मई 1991 को जब तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में एक आत्मघाती बम हमले में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की हत्या कर दी गई थी, तब उनके साथ-साथ 13 अन्य लोगों की भी जान चली गई थी। और जब कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी सहित राजीव गाँधी के परिवार ने दोषियों को ‘माफ’ कर दिया और कहा कि हत्यारों को रिहा करने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, तो राजीव गाँधी के साथ मरने वालों के परिजन उनके इस कदम से खुश नहीं थे। राजीव गाँधी के साथ जान गँवाने वालों 13 लोगों के परिजनों की तरफ से सोनिया गाँधी या उनके बच्चे कैसे फैसला ले सकते हैं?

बता दें कि जब तमिलनाडु सरकार ने 2018 में मामले में सात आजीवन दोषियों को रिहा करने की सिफारिश की, तो परिवार के सदस्यों ने तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित से मुलाकात की और उनसे सहमति न देने का आग्रह किया। 

एस अब्बास, जिनकी माँ की मौत राजीव गाँधी के साथ विस्फोट में हुई थी, ने 2018 में द न्यूज मिनट से बात करते हुए कहा था, “हम सभी को मेरी माँ के टुकड़े खून से सने कंबल में लिपटे हुए मिले थे। राजीव गाँधी पर हमले ने मुझे और मेरे भाई-बहनों को अनाथ कर दिया। 12 अन्य परिवार भी इसके शिकार हुए। लेकिन राजनेता इस आघात को उस तरह से नहीं देखते, जिस तरह से हम देखते हैं। वे हत्यारों को अपने राजनीतिक लाभ के लिए रिहा करना चाहते हैं और हम सभी इस बात की निंदा करते हैं।”

राजीव गाँधी की हत्या के दौरान मारे गए अलग-अलग परिवारों के दर्द को आप राजनीतिक नजरिए से नहीं देख सकते। सोनिया गाँधी या राजीव गाँधी के परिवार के सदस्यों ने पूर्व प्रधानमंत्री के उन हत्यारों पर फैसला लिया, जिन्होंने उसी विस्फोट में अन्य 13 लोगों को भी मार डाला। उन्होंने ये फैसला लेकर दिखा दिया कि कैसे नेहरू-गाँधी परिवार के सदस्यों के लिए आम आदमी की भावनाएँ मायने नहीं रखतीं। उन्होंने भले ही पूर्व प्रधानमंत्री के हत्यारों को माफ कर दिया हो, लेकिन उन परिजनों का क्या, जिन्होंने इस आत्मघाती बम धमाके में अपनी जान गँवाईं? उनका क्या, जिन्हें विस्फोट में अपनों को खोने के बाद सालों तक संघर्ष करना पड़ा?

अब, सुप्रीम कोर्ट की वकील इंदिरा जयसिंह ने आग्रह किया है कि 16 दिसंबर, 2012 को दिल्ली सामूहिक बलात्कार पीड़िता निर्भया की माँ को भी सोनिया गाँधी के नक्शेकदम पर चलना चाहिए और बलात्कारियों को क्षमा करना चाहिए, जिन्होंने उसकी बेटी के साथ क्रूरता से बलात्कार किया।

दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप केस के चारों दोषियों के खिलाफ नया डेथ वारंट जारी किया है। अब उन्हें 1 फरवरी सुबह 6 बजे फाँसी के फंदे पर लटकाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि उन्हें पहले 22 जनवरी को फाँसी दी जानी थी, लेकिन एक दोषी ने दया याचिका दायर की थी। उसकी दया याचिका खारिज होने के बाद प्रक्रिया के तहत नया डेथ वारंट जारी करना पड़ा और फाँसी की तारीख बढ़ानी पड़ी। जिसके बाद निर्भया की माँ आशा देवी ने कहा कि किस तरह से राजनेताओं के लिए उनकी बेटी के साथ हुआ बलात्कार एक राजनीतिक हथकंडा बन गया है। जिसके बाद जयसिंह ने मौके का फायदा उठाते हुए उन्हें नैतिकता का पाठ पढ़ाया।

ईसाई से हिंदू बने रूसी बिजनसमैन, चर्च के आक्रामक कट्टरपंथी दे रहे लगातार धमकी

रूस एक ऐसा देश है जिसकी जनसंख्या 144,000,000 से अधिक है। इस बर्फीले देश में रहने वाले भारतीयों की कुल संख्या 10,000 है जो यह स्पष्ट रूप से दिखा देता है कि रूस में बसने की चाह रखने वाले भारतीयों के लिए यह पसंदीदा नहीं। इतनी छोटी संख्या की तुलना में अमेरिका में रहने वाले 3.2 मिलियन भारतीयों की आबादी चौंका देने वाली और अकल्पनीय है। रूस में इस तरह की नीरस तस्वीर का कारण यह तथ्य है कि यह देश अभी भी दूर-दराज़ के लोगों को पूरे दिल से गले लगाने की राह पर नहीं है।

जब हम धर्म के बारे में बात करते हैं तो चीजें और भी दिलचस्प हो जाती हैं। यह एक विडंबना है कि रूस में हिन्दुओं की संख्या भारतीय नागरिकों की संख्या से 14 गुना अधिक है। यह वास्तव में अद्भुत आँकड़ा है। हम इस तस्वीर को देखते हैं क्योंकि इनमें से 92 प्रतिशत हिन्दू रूसी हैं। लगभग 1,40,000 रूसी खुद को हिन्दू कहते हैं। अगर रूस या दोनों देशों की सरकारें इन लोगों को नज़रंदाज़ करती हैं तो यह एक बड़ी ग़लती होगी। 2018 की घटनाएँ जो अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में सुर्ख़ियों में थीं, उनमें से रूस में हिन्दू धर्मगुरू- श्री प्रकाश जी के साथ होने वाले अत्याचार को दर्शाती हैं।

ऊपर दिए गए आर्टिकल में अलेक्जेंडर ड्वोर्किन से जुड़े आक्रामक कट्टरपंथी ईसाई समूह का उल्लेख है। ड्वोर्किन एक रूसी पंथ विरोधी कार्यकर्ता है, जो ऑर्थोडॉक्स ईसाई धर्म को छोड़कर सभी सम्प्रदायों को दूषित समझता है और उन्हें सेक्ट और कल्ट कहता है। वह हर उस चीज़ की निंदा करता है, जिसका संबंध हिन्दू धर्म से जुड़ा हो। वर्ष 2011 में वह भगवदगीता की पवित्र पुस्तक पर प्रतिबंध लगाने वाला था। हाल ही में वर्ष 2017 की शुरुआत में श्री प्रकाश जी के परिवार पर हमला करने के लिए दिल्ली में रूसी दूतावास के सामने ड्वोर्किन का पुतला जलाया गया था। इस मामले पर संयुक्त राष्ट्र और ओएससीई में भी चर्चा हुई।

डेनिस स्टेपानोव (Denis Stepanov) नाम के एक रूसी का हालिया मामला, ड्वोर्किन और उसके संगठन के अलग-अलग और बहुत ही अनछुए पहलुओं को दर्शाता है। डेनिस रूस के मास्को में पैदा हुए थे और अब 35 वर्ष की आयु में एक युवा, ऊर्जावान और होनहार एंटरप्रेन्योर हैं। वह एक मेडिकल फर्म के मालिक हैं जो भारत और रूस के बीच व्यापार संबंधों को बेहतर बनाने की तर्ज़ पर काम करती है। चार साल पहले जब कुछ नहीं बदला था, तब उन्हें बहुत कम उम्र में सफलता मिली। डेनिस आधिकारिक रूप से एक हिन्दू बन गए लेकिन कुछ ही समय में उनकी ज़िंदगी बुरे दौर में प्रवेश कर गई। डेनिस के लिए यह सब भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म के प्रति रुचि रखने के कारण हुआ।

वर्ष 2016 में वह हिन्दू शास्त्रों के सम्पर्क में आए, जो रूसी भाषा में उपलब्ध थे। उसके बाद उसी वर्ष के अंत में उन्होंने समर्पित रूप से हिन्दू धर्म के अनुसार जीवन के मार्ग पर चलने का फ़ैसला किया। रूस में अल्पसंख्यक धर्मों की कठोर वास्तविकता को जानते हुए डेनिस ने कहा था, “यह मेरे जीवन का सबसे ख़ूबसूरत क्षण था। उस समय मुझे यह पता था कि यह मेरे काम और मेरे व्यवसाय को प्रभावित कर सकता है।” अगले साल की शुरुआत में डेनिस के व्यापार में तेजी आई। हालाँकि इससे जुड़ी बुरी ख़बर बहुत जल्द सामने आने वाली थी। धार्मिक घृणा और साम्प्रदायिक हिंसा में डूबे अपने नुकीले पंजे दिखाने से पहले उन्हें 4 महीने तक डॉर्किन और उनके लोगों ने अपने रडार पर रखा था। डेनिस कहते हैं, “वो मेरा पीछा 2017 के फरवरी के शुरुआत से कर रहे थे। यह लगभग 3-4 महीने तक जारी रहा और फिर उन्होंने मेरे घर आकर मुझे धमकाना शुरू कर दिया।”

यह सब इस लेख के पाठकों को विचित्र लग सकता है, लेकिन यह रूस के अल्पसंख्यकों की दुखद वास्तविकता है। बात यहीं नहीं रुकी, डेनिस के लिए बुरा समय अभी बस शुरू ही हुआ था। नवंबर के महीने में डेनिस के पास मास्क पहने और बंदूक रखने वाले लोग आए। ये कोई आम गुंडे नहीं थे और उन्होंने ख़ुद को पुलिस अधिकारियों के रूप में पेश किया।

इसके अलावा, उन्होंने डेनिस को बताया कि वो RATSIRS नाम के एक संगठन से जुड़े हैं और अगर उन्होंने हिन्दू धर्म नहीं छोड़ा, तो वे व्यवसायों से निपटने वाली सरकारी संस्थाओं में उनके ख़िलाफ़ झूठी कम्प्लेंट दर्ज करा देंगे। पुलिस की वर्दी पहने गुंडों ने उनके कार्यालय में तबाही मचाई और यहाँ तक ​​कि डेनिस पर शारीरिक हमला भी किया। उन्होंने डेनिस को RATSIRS के खातों में पैसा ट्रांसफर करने का आदेश दिया। ऐसा करने से जब डेनिस ने इनकार कर दिया, तो उन्होंने डेनिस को उनके जीवन पर ख़तरा मँडराने की चेतावनी दे डाली।

जो पाठक रूसी प्रणाली से थोड़ा कम परिचित हैं, उनके लिए इस तथ्य का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि रूसी रूढ़िवादी चर्च के लिए काम करने वाले ड्वोर्किन को हिन्दुओं से लड़ने के लिए पदक भी मिल चुके हैं। ड्वोर्किन के कई ऐसे सहयोगी हैं जो पुलिस विभाग, मंत्रालय और एंटी मनॉपली ब्यूरो में काम करते हैं।

डेनिस का दावा है, “मैंने अपना शोध किया था और कुछ ही दिनों में मुझे पता चल गया था कि मेरे आसपास क्या हो रहा है।” ड्वोर्किन RATSIRS का आधिकारिक अध्यक्ष है, यह वो संगठन है जो हिन्दुओं का शोषण करने से जुड़े सभी कामों में लिप्त रहता है। डेनिस यह बात अच्छी तरह से जानते थे कि उन्हें इस अत्यातार के ख़िलाफ़ सबसे पहले पुलिस में शिक़ायत दर्ज करनी थी। डेनिस ने जिन यातनाओं का सामना किया, वो इतनी भयंकर थीं कि उस सबका उल्लेख कर पाना संभव नहीं है। उन्हें एसएमएस और कॉल के ज़रिए धमकाया व प्रताड़ित किया गया। डेनिस अब उन एंटरप्रेन्योर्स की कतार में शामिल हो गए, जिनका एकमात्र दोष हिन्दू धर्म चुनना था। इसके अलावा, भारत और रूस के बीच स्वस्थ व्यापार का निर्माण करने की कोशिश करना भी इस दोष का हिस्सा था।

डेनिस को भरोसा है कि ड्वोर्किन इस धर्मयुद्ध की शुरुआत इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वो नहीं चाहते हैं कि हिन्दू आर्थिक रूप से एक ऐसे देश में मजबूत हो सकें, जहाँ की बहुसंख्यक आबादी रूढ़िवादी ईसाई धर्म का पालन करती हो। डेनिस जैसे युवा एंटरप्रेन्योर को परेशान करने का उद्देश्य रूसी रूढ़िवादी चर्च के खजाने की ओर नकदी प्रवाह को निकालना है। यदि रूस में हिन्दू धर्म या उससे जुड़े लोग सफल हो जाएँगे, तो यह चर्च की नीति के सन्दर्भ में एक नकारात्मक संदेश का संचार करेगा। डेनिस को 2019 के दौरान ही इस बात का पता चल गया था।

डेनिस ने बताया था, “ड्वोर्किन ने हाल ही में रूस के संघीय एंटीमोनोपॉली ब्यूरो के श्रमिकों को मेरी आजीविका पूरी तरह से नष्ट करने के लिए रिश्वत दी थी।” डेनिस के लिए यह विपरीत स्थिति काफ़ी मुश्किल हो चुकी है, लेकिन वह अभी भी अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। ब्यूरो उन्हें ईसाई धर्म में परिवर्तित होने की धमकी दे रहा है और यदि वो ऐसा करने से मना करते हैं, तो वो (ब्यूरो) उनसे धन उगाही करेंगे। सोशल मीडिया में इस मामले को लेकर सार्वजनिक रूप से हंगामा मचा हुआ है क्योंकि एक अन्य रूसी हिन्दू कार्यकर्ता सर्गेई केवशिन ने अपने पत्रों में डेनिस के मामले को उजागर किया था।

डेनिस ने ड्वोर्किन के संगठन के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने का वादा किया है। वह रूस के राष्ट्रपति पुतिन को शिक़ायती पत्र और याचिकाएँ लिखेंगे। ब्यूरो के साथ अदालत की सुनवाई 21 जनवरी 2020 को होने वाली है। जब डेनिस ने हिन्दू धर्म अपनाया था, तब उन्हें हिन्दू नाम ‘हरदास’ दिया गया। वह इस नाम को रखना चाहते हैं। यह वह नाम है जो धर्म की स्वतंत्रता का एक प्रतीक है, यह वह नाम है जो डेनिस के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इससे उन्हें अपना संघर्ष जारी रखने की ताक़त भी मिलती है।

रूस में कट्टरपंथियों के निशाने पर हिन्दू आश्रम, PM मोदी से मदद की आस

कृष्ण स्वयं शैतान, गोपियाँ मूल रूप से उनकी वेश्याएँ: रूस में ईसाई कट्टरपंथियों के निशाने पर हिंदू धर्म

पूर्वजों की आत्मा को शांति प्रदान करने के लिए आई हूँ: रूसी महिलाओं ने गया में किया पिंडदान

‘जिन्हें नहीं मालूम कि उनके माता-पिता कौन हैं, वो कर रहे CAA का विरोध, दूसरे की जेब पर निर्भर रहते हैं ये चाटूकार’

पश्चिम बंगाल के भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) का विरोध करने वाले बुद्धिजीवियों को ‘जीव, शैतान और चाटूकार’ करार दिया। दरअसल, उनका यह बयान पश्चिम बंगाल में CAA और NRC के विरोध में बुद्धिजीवियों के सड़कों पर उतरने के फ़ैसले के बाद आया है।

दिलीप घोष को उनके विरोधियों के खिलाफ कड़े रुख़ के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा,

“कोलकाता की सड़कों पर बुद्धिजीवियों नामक कुछ जीव बाहर आ गए हैं। ये चाटूकार बुद्धिजीवी, जो दूसरे की जेब पर निर्भर करते हैं और उनके पैसों का लाभ उठाते हैं, जब  बांग्लादेश में उनके पूर्ववर्तियों को यातनाएँ दी गई थीं, तब वे कहाँ थे?”

ख़बर के अनुसार, कोलकाता की सड़कों पर रंगमंच की हस्तियों द्वारा निकाले गए एक विरोध मार्च का उल्लेख करते हुए घोष ने उन्हें, “हमारे भोजन पर रहने वाले और हमारा विरोध करने वाले शैतान” कहा।

इसके आगे उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन क़ानून का इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि उन्हें नहीं मालूम कि उनके माता-पिता कौन हैं। उन्होंने कहा, “यही कारण है कि वे कहते हैं कि वे अपने माता-पिता का जन्म प्रमाण पत्र नहीं दिखा सकते हैंं।” उन्होंने कहा कि तृणमूल कॉन्ग्रेस के शासनकाल के दौरान पश्चिम बंगाल “देशद्रोहियों के केंद्र” के रूप में उभर रहा है।

उनके बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, रंगमंच के दुलाल मुखर्जी ने इस बात पर हैरानी जताई कि बंगाल में एक बंगाली इस तरह से कैसे बात कर सकता है। उन्होंने कहा कि बंगाल ने हमेशा लड़ाई लड़ी और जीती है, और दिखाया है कि अपने अधिकार के लिए कैसे लड़ना पड़ता है।

ग़ौरतलब है कि शुक्रवार (17 जनवरी) को घोष ने CAA के बारे में जानकारी देते हुए कहा था कि आधार और पैन कार्ड नागरिकता के प्रमाण नहीं हैं। उन्होंने शरणार्थियों से आग्रह करते हुए कहा था कि वो CAA के प्रावधानों के तहत भारत की नागरिकता प्राप्त करें। CAA के समर्थन में आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए घोष ने कहा था कि लोग पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कॉन्ग्रेस के अन्य नेताओं के जाल में न फँसे।

‘चाय पर चर्चा’ के लिए निकले पश्चिम बंगाल BJP अध्यक्ष दिलीप घोष पर हमला, 2 कार्यकर्ता घायल

कॉन्ग्रेस और लेफ्ट गंदी राजनीति कर रहे, मैं उनके साथ नहीं: CAA-NRC पर ममता बनर्जी ने विपक्ष को मारी ‘लात’

ममता बनर्जी को झटका: कलकत्ता हाईकोर्ट ने CAA-NRC संबंधी विज्ञापनों को हटाने के दिए निर्देश

रेप के बाद लड़कियों-औरतों को गुलाम बनाने का फतवा दिया था ‘मोटे आतंकी’ ने, ट्रक में लादकर ले जाना पड़ा जेल

हाल ही में इराक के मोसुल में एक छापे के दौरान रेप और धर्म के नाम पर सफाया (कत्लेआम) करने का समर्थन करने वाले एक बेहद मोटे आईएसआईएस कट्टरपंथी मुफ्ती को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार करने के बाद पुलिस उसे एक फ्लैटबेड ट्रक पर लाद कर ले गई, क्योंकि वह पुलिस की गाड़ी में फिट नहीं हो रहा था।

बताया जा रहा है कि इसका वजन 130 किलोग्राम था। इसे ट्रक में बिठाकर ले जाने की तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं। मुफ्ती अबू अब्दुल बारी, जिसे शिफा अल-नीमा के नाम से भी जाना जाता है, को मोसुल शहर में नौवें रेजिमेंट की एक स्वाट पुलिस टीम द्वारा गुरुवार (जनवरी 16, 2019) को गिरफ्तार किया गया था।

इराकी पुलिस का कहना है कि मुफ्ती को ISIS गिरोह के टॉप नेताओं में से एक माना जाता है। बताया जा रहा कि कई हत्या, बलात्कार और अपहरण के पीछे मुफ्ती का हाथ था। इसके साथ ही मुफ्ती ने मोसुल के धार्मिक विरासत स्थलों को भी नष्ट करने का आदेश दिया था।

इराकी पुलिस ने अपने एक बयान में कहा कि मुफ्ती अबू अब्दुल बारी फतवे जारी करने के लिए जिम्मेदार था, जिसके कारण विद्वानों और मौलवियों की हत्या हुई। जानकारी के मुताबिक मुफ्ती ने अपने अनुयायियों को हत्या करने, रेप करने, गुलाम बनाने जैसे सभी गंदे कामों को अंजाम देने के लिए फतवा दिया था। मुफ्ती पर 2014 में मोसुल में पैगंबर यूनुस के मकबरे को नष्ट करने का आदेश देने का भी आरोप है।

मैकर गिफोर्ड, जो सीरिया में ISIS के खिलाफ लड़ रहे हैं और फिलहाल ‘मानवाधिकार कार्यकर्ता और आईएसआईएस विरोधी प्रचारक’ हैं, ने मुफ्ती की गिरफ्तारी पर खुशी जाहिर करते हुए ट्वीट किया है। उन्होंने अपने ट्वीट में इसे पुरुष, महिलाओं और बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया और लिखा कि इस जानवर ने बलात्कार किया और हत्या कर दी। ब्रिटिश कार्यकर्ता और काउंटर-चरमपंथी थिंक-टैंक के संस्थापक मौजिद नवाज ने भी इस गिरफ्तारी का स्वागत किया।

वो ISIS आतंकी जिसने की थी इंदिरा गाँधी से लव मैरिज, जिहाद के लिए दिया तलाक… क्योंकि वो हिंदू थी

डाक्यूमेंट्स जला दो पर सरकार को मत दिखाओ, रोज़ 10 मुस्लिमों को बताओ: हिंसक प्रदर्शन में ‘ISIS का हाथ’

900 ISIS आतंकियों ने अफ़ग़ानिस्तान में किया सरेंडर, 10 महिलाएँ-बच्चे केरल से: रिपोर्ट

जाहिल पाकिस्तानियों ने मगरमच्छों को भी नहीं छोड़ा, Zoo में ‘अत्याचार’ से इनके शरीर को कर देते हैं लाल

फोटो देखकर आप चौंक सकते हैं! आपको लगेगा कि मगरमच्छों के शरीर पर खून कैसे? लेकिन यह खून नहीं जाहिल पाकिस्तानियों की सोच है, जो इन मूक जानवरों के शरीर पर पीक-थूक बन कर गिर रही है। द न्यूज में प्रकाशित पान और गुटखे की पीक से सने दो मगरमच्छों की एक फ़ोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस फ़ोटो को देखकर इस बात का अंदाज़ा बख़ूबी लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान में बेज़ुबान जानवरों के साथ कितना बुरा व्यवहार किया जाता है।

पत्रकार जिया उर रहमान ने प्रकाशित फ़ोटो पर कैप्शन के साथ ट्वीट किया कि कराची चिड़ियाघर का यह एक खेदजनक दृश्य है, जहाँ आने वाले आगंतुक मगरमच्छों पर पान और गुटखे की पीक थूकते हैं। इस दौरान मगरमच्छों के शरीर पर लाल रंग के धब्बे पड़ जाते हैं।

सांसद और पीपीपी नेता शेरी रहमान ने भी टिप्पणी की कि वह “यह देखकर शर्मिंदा हैं।”

पत्रकार सनम मैहर और अंबर शम्सी ने भी ट्विटर पर अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए लिखा कि कैसे जाहिल लोग हैं जो चिड़ियाघर के जानवरों पर पान-गुटखे की पीक थूकते चलते हैं।

पाकिस्तान में पशुओं के साथ क्रूरता भरा व्यवहार किए जाने की यह कोई नई ख़बर नहीं है। चिड़ियाघर में जानवरों को टॉर्चर करना और उन्हें परेशान करके मज़े लेना वहाँ के लोगों की आम बात है।

पिछले साल, एक्टिविस्ट और वकील जिब्रान नासिर ने एक लड़के की तस्वीरें ट्वीट की थीं, जिसने बिल्ली के बच्चे को प्रताड़ित करते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया था।

संसद चाहे तो PoK वापस लेने को हैं तैयार: सेना प्रमुख ने पाकिस्तान की नींद उड़ाई

UNSC में कश्मीर पर पाकिस्तान को फिर झेलनी पड़ी शर्मिंदगी, चीन ले सबक: रवीश कुमार

कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन ने कहा- हाँ, मैं पाकिस्तानी हूँ, आप जो करना चाहते हैं कर सकते हैं

‘अपनी बेटी के बलात्कारियों को माफ कर दो’ – निर्भया की माँ ने SC की वरिष्ठ महिला वकील को इस सलाह पर लताड़ा

दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार (17 जनवरी) को निर्भया के दोषियों के लिए नए सिरे से डेथ वारंट जारी कर दिया। कोर्ट के आदेश के मुताबिक़, चारों दोषियों को 1 फरवरी को सुबह 6 बजे फाँसी दी जाएगी। निर्भया केस में राष्ट्रपति ने दोषी मुकेश की दया याचिका ख़ारिज कर दी थी, जिसके बाद तिहाड़ जेल की तरफ से दिल्ली की अदालत को जानकारी दी गई थी कि राष्ट्रपति ने दोषी मुकेश की दया याचिका ख़ारिज कर दी है। सरकारी वकील ने फाँसी की नई तारीख और वक्त बताने का आग्रह किया था। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने निर्भया की माँ से दोषियों को माफ़ करने का अनुरोध किया है।

निर्भया की माँ आशा देवी ने दिल्ली की अदालत द्वारा दोषियों की फाँसी की अगली तारीख तय करने पर अपनी निराशा व्यक्त की थी, इस पर इंदिरा जयसिंह ने ट्वीट कर कहा, “मैं आशा देवी के दर्द को अच्छी तरह से समझती हूँ, मैं उनसे आग्रह करती हूँ कि वह सोनिया गाँधी के उदाहरण का अनुसरण करें। उन्होंने नलिनी को माफ़ कर दिया था और कहा था कि वह उसके लिए मौत की सज़ा नहीं चाहती हैं। हम आपके साथ हैं लेकिन मौत की सज़ा के ख़िलाफ़ हैं।”

इंदिरा जय सिंह के इस ट्वीट पर निर्भया की माँ ने अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करते हुए कहा, “मुझे ऐसा सुझाव देने वाली इंदिरा जयसिंग कौन हैं? पूरा देश चाहता है कि दोषियों को फाँसी दी जाए। सिर्फ़ उनके जैसे लोगों की वजह से बलात्कार की पीड़िताओं के साथ न्याय नहीं हो पाता है।”

बता दें कि 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की हत्या में शामिल होने के लिए नलिनी को गिरफ़्तार किया गया था और अदालत ने उसे दोषी ठहराया था। दरअसल, शुक्रवार को निर्भया की माँ चारों दोषियों की फाँसी में हो रही देरी को लेकर राजनीतिक पार्टियों के आरोप-प्रत्यारोप के दौर से नाराज़ थीं और उन्होंने इसको लेकर अपना ग़ुस्सा जाहिर किया था। वहीं, कोर्ट द्वारा फाँसी की तारीख बढ़ाए जाने पर उन्होंने कहा था कि मुजरिम जो चाहते थे, वही हो रहा है, फिर से तारीख पर तारीख मिल रही है।

निर्भया गैंगरेप: नया डेथ वारंट जारी, अब 1 फरवरी को फाँसी पर लटकाए जाएँगे चारों दोषी

निर्भया की माँ ने केजरीवाल को लताड़ा: कहा- जो काम दिल्ली सरकार को करना था, वो हमने किया

निर्भया गैंगरेप के दोषी की दया याचिका ख़ारिज: पीड़िता के पिता ने कहा- केजरीवाल ने सत्ता के लिए किया इस्तेमाल

‘…अब तो मैं जिंदा घर नहीं जा पाऊँगी’ – शाहीन बाग से जान बचाकर भागी लड़की की आपबीती

दिल्ली के शाहीन बाग में पिछले एक महीने से नागरिकता संशोधन कानून(CAA) और ‘अदृश्य’ राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी सड़क छोड़कर हटने को तैयार नहीं है। पुलिस इस तथाकथित धरना को खत्म करने की अपील कर रही है, लेकिन ये लोग हटने का नाम नहीं ले रहे हैं। इससे स्थानीय लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रदर्शनकारियों पर आरोप लगाया है कि वो लोग यहाँ पिकनिक मना रहे हैं।

इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जो इन ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों’ से जान बचा कर भाग कर आई एक लड़की की है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में जो लड़की दिख रही है, उनका नाम डॉ दीपा शर्मा है। दीपा जयपुर की रहने वाली हैं और पेशे से डॉक्टर हैं। दीपा ने खुद ट्विटर पर वीडियो शेयर करते हुए आपबीती बयाँ की है। उन्होंने बताया कि वो जयपुर ऑफिस जा रही थीं, लेकिन फिर वो शाहीन बाग में CAA और NRC के खिलाफ विरोध प्रदर्शन देखकर रुक गईं। उन्होंने सोचा कि वो खुद जाकर देखेंगी कि विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहा है। वो लोगों से सीधा बात करेंगी।

डॉक्टर दीपा ने आगे बताया कि वो उनके विचार जानना चाहती थीं और साथ ही ये भी जानना चाहती थीं कि अखबारों में जो दिखाया जा रहा है कि वहाँ पर पीसफुल प्रोटेस्ट हो रहा है, उसकी सच्चाई कितनी है। वो प्रदर्शनकारियों की आवाज लोगों तक पहुँचाना चाहतीं थीं, लेकिन उन्हें खुद ही वहाँ से जान बचाकर भाग निकलना पड़ा।

उन्होंने आपबीती बयाँ करते हुए उन्होंने कहा, “मैं मेट्रो लेकर वहाँ पहुँची थी। सब लोगों ने मुझे काफी मना किया था कि वहाँ पर नहीं जाना है, वहाँ खतरा है। फिर भी मैंने सोचा कि एक बार जाकर तो देखा जाए… हो सकता है कि लोगों ने अफवाहें फैला रखी हों। मैं वहाँ पर पहुँची और फिर वहाँ पर एक बुजुर्ग से परमिशन लेकर एक वीडियो बनाया। मैंने उनसे पूछा कि वो प्रोटेस्ट क्यों कर रहे हैं? और वो जो भी बात बोलना चाह रहे थे, मैं बस उसे कैप्चर कर रही थी। इसी बीच में वहाँ की भीड़ ने मुझे घेर लिया और बोला कि कौन से चैनल से हो? मैंने कहा कि मैं बस एक स्टूडेंट हूँ और मैं आपकी आवाज जनता तक पहुँचाने के लिए आई हूँ। फिर वो लोग मुझसे कार्ड के बारे में पूछने लगे।”

आगे दीपा ने बताया, “मैंने कहा कि मेरे पास कार्ड नहीं है। तो उन लोगों ने कहा कि तुरंत के तुरंत इस वीडियो डिलीट कर। वरना जाने नहीं देंगे। मैंने कहा कि मैंने कुछ भी नहीं किया है। मैंने बस इनसे पूछकर एक वीडियो बनाया है। मैं अभी-अभी यहाँँ आई हूँ तो उन्होंने कहा कि जब तक वीडियो डिलीट नहीं करोगी, जाने नहीं देंगे। फिर उन्होंने औरतों-लड़कियों को बुला लिया और सभी लड़कों ने आकर मुझे घेर लिया। उस समय मुझे वाकई ऐसा लगा कि आज मेरी जान चली जाएगी, मैं घर पर जिंदा नहीं पहुँच पाऊँगी।”

फिर दीपा कहती हैं, “असल में मैंने वहाँ जाने के बारे में अपने घर पर किसी को भी नहीं बताया था, क्योंकि मुझे पता था कि अगर मैं उन्हें बताऊँगी तो वो लोग मुझे मना करेंगे। इस बीच कुछ लड़कियाँ मुझे कहीं और ले जाने लगीं तो मैंने कहा कि मुझे पता है कि रास्ता किधर है, मैं अपने आप चली जाऊँगी। वे लोग लगातार बोल रहे थे कि वीडियो डिलीट करवाओ, वीडियो डिलीट करवाओ और इस बीच…।” इस डॉक्टर की आपबीती से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि शाहीन बाग का विरोध प्रदर्शन कितना शांतिपूर्ण है।

शाहीन बाग के लोगों ने पोस्टर से मंशा बता दी: हिन्दू स्त्रियों पर है इनका ध्यान, पहले कन्वर्जन फिर…

मोदी जी बने रहे, शाहीनबाग सजा रहे: आजादी के मजे ले रही सबा नक़ली और इकतरफा ख़ानम

स्वास्तिक से छेड़छाड़: ‘इस्लामी राज्य’ का सपना पाले, हिंदू घृणा से सना है शाहीन बाग का नया पोस्टर

रेप केस में जमानत पर आए महबूब, जमील, फिरोज सहित 6 ने पीड़िता की माँ को सबके सामने मार डाला, Video Viral

उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक नाबालिग से रेप की कोशिश की जाती है। जब पीड़िता की माँ इसके लिए पुलिस में बयान दर्ज करने के अपने फैसले से पीछे नहीं हटती है, तो उन्हें सबके सामने बेरहमी से मारा जाता है, इतना मारा जाता है कि वो मर जाती हैं। आरोपितों के नाम भी जान लीजिए – आबिद, मिंटू, महबूब, चाँद बाबू, जमील और फिरोज।

दरअसल, नाबालिग से बलात्कार का यह मामला 2018 का है। तब इन आरोपितों ने दिन-दहाड़े 13 साल की लड़की को अगवा कर लिया था और उसके साथ रेप की कोशिश की थी। पुलिस ने इस मामले में महबूब समेत उसके पाँच साथियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था। इनमें आबिद, मिंटू, महबूब, चाँद बाबू, जमील और फिरोज शामिल हैं। हाल ही में आरोपितों को ज़मानत मिली थी। पुलिस के अनुसार, रिहा होते ही 9 जनवरी को ये सारे आरोपित पीड़िता के घर में जबरन घुसे और फिर उन पर केस वापस लेने का दबाव बनाया।

बलात्कार के प्रयास मामले में पीड़िता की माँ मुख्य गवाह थीं। पीड़िता की माँ ने जब केस वापस लेने से इनकार कर दिया तो बबलू, मिंटू और महबूब समेत आधा दर्जन लोगों ने मिलकर चापड़ व डंडों से पीड़िता की माँ और मौसी को इतनी बुरी तरह से पीटा कि वो दोनों अधमरी हो गईं। इस हमले में पीड़िता की माँ रूबी की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि मौसी रुखसाना गंभीर रुप से घायल हैं, जिनका इलाज अभी जारी है।

पीड़िता के परिजनों की शिक़ायत पर थाना चकेरी में आरोपितों के ख़िलाफ़ छेड़छाड़, जान से मारने के प्रयास समेत कई धाराओं में मामला दर्ज हुआ है। पीड़िता की माँ की मौत के बाद इलाक़े में तनाव की स्थिति बनी हुई है। हालात पर नियंत्रण रखने के लिए मृतका के घर के बाहर और पूरे क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती की गई है। यह मामला चकेरी थाना क्षेत्र का है। आरोपितों में से चार को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है।

सोशल मीडिया पर हमलावरों का एक वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि पीड़िता की माँ को कितनी बुरी तरह से मारा जा रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि आरोपी अपने जूतों से पीड़िता का माँ का सिर कुचल देता है।

ख़बर के अनुसार, वर्ष 2018 में 13 साल की नाबालिग लड़की के साथ आरोपितों ने बलात्कार करने की कोशिश की थी। इस सन्दर्भ में थाना चकेरी में आईपीसी की धारा- 323, 336, 354ख और 11/12 पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में पुलिस ने चार्जशीट भी दाखिल की थी। कुछ महीनें जेल में सज़ा काटने के बाद जब वो ज़मानत पर बाहर आए थे। फ़िलहाल, पुलिस ने फ़रार आरोपितों की धड़-पकड़ के लिए पाँच टीमों का गठन किया है।

कानपुर छेडख़ानी की शिकायत करने गई युवती के साथ अभद्रता करने वाला पुलिसकर्मी निलंबित

मुंबई से नमाज पढ़ने निकला था ‘डॉ. बम’, कानपुर की मस्जिद से निकलते धराया

‘सभी मूर्तियों को हटा दिया जाएगा… केवल अल्लाह का नाम रहेगा’: IIT कानपुर में जाँच कमिटी गठित, 15 दिन में रिपोर्ट

‘2024 में दोबारा राहुल गाँधी को चुनने की गलती न करें’ – PM मोदी के कट्टर आलोचक ने खुद कही यह गंभीर बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आलोचक माने जाने वाले इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने कहा कि लोकसभा चुनाव में वायनाड से राहुल गाँधी को चुनकर केरल के लोगों ने विनाशकारी काम किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने राहुल गाँधी का कोई भविष्य नहीं है। केरल साहित्य महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार (17 जनवरी, 2019) को ‘राष्ट्र भक्ति बनाम अंधराष्ट्रीयता’ विषय पर बोल रहे रामचंद्र गुहा के सुर बदले-बदले से रहे। उन्होंने कहा कि ‘खानदान की पाँचवी पीढ़ी’ के राहुल गाँधी के पास भारतीय राजनीति में ‘कठोर परिश्रमी और खुद मुकाम बनाने वाले’ नरेंद्र मोदी के सामने कोई मौका नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं निजी तौर पर राहुल गाँधी के खिलाफ नहीं हूँ। वह सौम्य और सुसभ्य व्यक्ति हैं लेकिन युवा भारत एक खानदान की पाँचवी पीढ़ी को नहीं चाहता। अगर आप (मलयाली लोग) साल 2024 में भी दोबारा राहुल गाँधी को चुनने की गलती करेंगे तो आप नरेंद्र मोदी को फायदा पहुँचाएँगे।’’ वहाँ मौजूद केरल वासियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि केरल ने भारत के लिए कई बेहतरीन काम किए हैं, लेकिन उन्होंने संसद के लिए राहुल गाँधी को चुनकर एक विनाशकारी कार्य किया है।

अपनी बात को विस्तार से समझाते हुए रामचंद्र गुहा ने कहा कि नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वो राहुल गाँधी नहीं हैं। नरेंद्र मोदी और राहुल गाँधी के बीच अंतर समझाते हुए इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने कहा, “नरेंद्र मोदी ने अपनी शख्सियत खुद बनाई है। उन्होंने खुद यह मुकाम हासिल किया है। वे सेल्फमेड हैं। उन्होंने 15 वर्षों तक एक राज्य को चलाया है। उनके पास प्रशासनिक अनुभव है। वे जबर्दस्त रूप से परिश्रमी हैं और कभी यूरोप में छुट्टियाँ मनाने नहीं जाते। विश्वास करें, मैं ये बातें पूरी गंभीरता के साथ कह रहा हूँ।”

गुहा ने कहा कि आजादी के दौरान ‘महान पार्टी’ रही कॉन्ग्रेस अब ‘दयनीय पारिवारिक कंपनी’ बन चुकी है। हिंदुत्व और अंधराष्ट्रवाद के विकास का यह भी एक महत्वपूर्ण कारण है। गुहा ने कहा कि अगर राहुल गाँधी ‘ज्‍यादा समझदार, ज्‍यादा मेहनती होते और कभी यूरोप में छुट्टियाँ नहीं मनाते’ तो भी वह पाँचवीं पीढ़ी के शासक के नाते, अपनी मेहनत से आगे बढ़ने वाले मोदी के आगे फायदेमंद नहीं रहते। इतिहासकार ने सोनिया गाँधी पर भी निशाना साधा। गुहा ने कहा कि सोनिया गाँधी उन्‍हें ‘खत्‍म हो चुके मुगल वंश’ की याद दिलाती हैं जो अपने साम्राज्‍य की स्थिति से अंजान थे।

गुहा ने कहा, ‘भारत लोकतांत्रिक बन रहा और सामंतवाद कम हो रहा है और गाँधी परिवार इसे अभी समझ नहीं रहा है। आप (सोनिया गाँधी) दिल्‍ली में हो, आपका साम्राज्‍य लगातार सिकुड़ रहा है लेकिन आपके चमचे आपको अभी भी बता रहे हैं आप अभी भी बादशाह हो।’ 

उन्‍होंने गाँधी-नेहरू परिवार के बारे में कहा कि आपके गलतियों की सजा आने वाली सात पीढ़‍ियों को भुगतना होगा। गुहा ने कहा कि राहुल गाँधी की वजह से नरेंद्र मोदी जवाहर लाल नेहरू का मुद्दा उठाते हैं और कहते हैं कि नेहरू ने ‘चीन में यह किया, कश्‍मीर में यह किया, तलाक में यह किया।’ उन्‍होंने कहा कि अगर राहुल गाँधी राजनीतिक परिदृश्‍य से गायब हो जाते हैं तो मोदी को अपनी नीतियों और उनकी असफलता के बारे में मजबूरन बात करना ही होगा।

दरबारी लेखक रामचंद्र गुहा कॉन्ग्रेस की हार से नाराज, माँगा ‘युवराज’ राहुल का इस्तीफा

नींद से जागे ‘उपन्यासकार’ रामचंद्र गुहा, कहा अब तो कॉन्ग्रेस में वंशवाद ख़त्म करो

रामचंद्र गुहा को मुक्का किसने मारा? पुलिस ने धमकी दी या मार दिया? – शशि थरूर के Viral वीडियो का सच

AMU के छात्र नेताओं ने जूता दिखाकर प्रोफ़ेसर को कहा- ‘दल्ला’, VC ने कहा- सरकार हमें 1100 करोड़ देती है…

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में CAA के ख़िलाफ पिछले 32 दिनों से धरना दे रहे छात्रों का गुस्सा शक्रवार को सातवें आसमान पर पहुँच गया। छात्रों का वीसी के ख़िलाफ गुस्सा कुछ इस कदर फूटा कि उन्होंने प्रॉक्टर प्रोफेसर को पहले तो जूता दिखाया और फिर “दल्ला” कहकर अपने पास बुलाया। इस दौरान छात्रों की प्रॉक्टर टीम के साथ जमकर नोंकझोंक हुई।

एएमयू में 32 दिनों से CAA के ख़िलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है और न ही इस विरोध के कम होने के आसार दिखाई दे रहे हैं। यही कारण है कि धरने पर बैठे छात्रों का गुस्सा अब फूट-फूट कर बाहर आने लगा है। शुक्रवार को कुछ ऐसा ही हुआ, कि धरना-प्रदर्शन कर रहे छात्रों की प्रॉक्टर टीम के साथ नोंकझोंक हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि गुस्साए आंदोलनकारी छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रोफेसर को ‘दल्ला’ कह दिया। इसके जवाब में प्रोफेसर अफीफुल्लाह ख़ान ने कहा कि “हाँ मैं दलाल हूँ।”

इस बीच छात्र नेताओं ने वीसी और रजिष्ट्रार को अपने निशाने पर लेते हुए कहा कि कैंपस में पिछले कई महीनों से दो सिपाही अवैध रूप से रह रहे हैं। तो ऐसे में सवाल उठता है कि कैंपस में असामाजिकतत्व छात्र हैं या फिर कि ये दोनों? इतना ही नहीं छात्रों ने एएमयू के कुलपति तारिक मंसूर को जनरल डायर तक कह दिया। छात्रों ने आगे कहा कि इन लोगों का बॉयकॉट होना बहुत ही जरूरी है। क्यों कि हम पुलिसिया कार्रवाई में अपने एक छात्र का हाथ खो चुके हैं।

वहीं महीनों में चल रहे आंदोलनकारी छात्रों के धरने में गुरुवार शाम को अचानक से एएमयू कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर पहुँच गए। उन्होंने जाते ही छात्रों को सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक पोस्ट से सम्बन्धित कागज को दिखाते हुए नाराजगी जताई, जिसके जवाब में छात्रों ने कहा कि वायरल हो रही खबर के कारण हम 32 हजार छात्रों को कटघरें में खड़ा नहीं कर सकते।

वहीं वीसी तारिक मंसूर ने कहा कि कैंपस में जो भी कुछ हुआ उसके लिए मुझे अफ़सोस है, मैंने कभी सोचा भी नहीं था। मैं यहाँ मगरमच्छी आँसू बहाने नहीं आया। हमदर्दी है, इसलिए आया हूँ। रही बात एसएसपी को पत्र लिखने की तो सरकार हमें 1100 करोड़ रुपए हर साल देती है। अग़र कोई बड़ा हादसा हो गया तो सरकार हमसे पूछेगी। वहीं वीसी ने इसके इतर मीडिया को बयान ज़ारी करते हुए कहा कि पुलिस को केवल शाँति व्यवस्था बनाने की अनुमति दी थी, पुलिस को किसी भी हॉस्टल में प्रवेश नहीं करना चाहिए था।

दैनिक जागरण द्वारा प्रकाशित ख़बर की कटिंग

एएमयू वीसी तारिक मंसूर के अचानक छात्रों के बीच धरने में पहुँचने पर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक निगरानी समिति के सदस्य मानवेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि वीसी का छात्रों के बीच धरने पर जाना उनका दोहरा चरित्र दर्शाता है। एक तरफ़ वह पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाते हैं औऱ दूसरी ओर आंदोलनकारी छात्रों को धरने पर समर्थन देने के लिए पहुँचते हैं। यह धरने को संचालन करने की ही एक नीति है। इस सम्बन्ध में केन्द्रीय मानव विकास मंत्रालय को अवगत कराया जाएगा। साथ ही हम सरकार से माँग करेंगे कि यहाँ सेना के अधिकारी को इनके स्थान पर वीसी नियुक्त किया जाए।