रवीश कुमार ने लिखा कि आतंकवादियों से क्या नाता रहा डीएसपी देवेंदर सिंह का। उन्होंने लिखा, “दरअसल हैरानी इसलिए कि बार-बार मना करने के बाद भी बहुत लोग आतंकवाद को मजहब की निगाह से देखते हैं।” तो किस निगाह से देखें रवीश जी। बिल्कुल मजहब है आतंक का। पूरी दुनिया में दिखता है कि बम फोड़ने से पहले कौन सा नारा लगता है? आईएसआईएस के झंडे पर कौन सा नारा लिखा हुआ है?
तो क्या आप एक देवेंदर सिंह, जो कि सिख हैं, के नाम पर तमाम उदाहरण को झूठला देंगे कि इस्लामी आतंक दुनिया या इस देश में नहीं है। सारे आतंकी मुसलमान निकल रहे हैं और एक अपवाद मिल गया है आपको तो आप उसे झूठा कह रहे हैं। भगवा आतंक के समय पर भी आपलोग यही थ्योरी लेकर आए थे।
यह अब कोई छुपी हुई बात नहीं रह गई है कि भारत में कुछ ‘पाक ऑक्युपाइड पत्रकार’ (POP) पकिस्तान के हितों के लिए काम करते हैं। समय-समय पर पाकिस्तान इन पत्रकारों की भारत को खराब छवि में पेश करने ले लिए तारीफ भी करता है। इसी क्रम में पकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने ‘मुस्लिम पत्रकार राणा अयूब’ की तारीफ ‘फासिस्ट मोदी सरकार का पर्दाफाश’ करने के लिए की है।
पकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने अपने आधिकारिक अकाउंट से लिखा है कि सूचना एवं प्रसारण में विशेष सहयोगी डॉक्टर फिरदौस आशिक अवान ने मोदी के फासिस्ट एजेंडा को बेनक़ाब करने वाली मुस्लिम महिला जर्नलिस्ट राणा अयूब की तारीफ की है।
डॉक्टर फिरदौस आशिक अवान ने लिखा है- “शोषण के खिलाफ आवाज उठाने वालों को इतिहास के सुनहरे पन्नों में याद रखा जाता है। जो साहस भारतीय मुस्लिम जर्नलिस्ट ने अपनी ड्यूटी में दिखाया है वह तारीफ के लायक है।”
بہادر لوگوں کا ظلمت اور جبر کےخلاف آواز حق بلند کرنا اور اسے للکارنا تاریخ کا ہمیشہ سے روشن اور یادگار باب رہا ہے۔ بھارتی مسلمان خاتون صحافی رانا ایوب نے جس دلیری سے اپنے پیشہ ورانہ فرائض انجام دئیے، وہ لائق تحسین ہے۔ 3/1 pic.twitter.com/1ETwriKhMG
कश्मीर को ‘इंडियन ऑक्युपाइड कश्मीर’ बताते हुए फिरदौस आशिक ने राणा अयूब की तारीफ की है।
फिरदौस आशिक अवान द्वारा शेयर किए गए वीडियो की शुरुआत मुहम्मद अली जिन्ना और नेल्सन मंडेला की शोषण के विरुद्ध संघर्ष की तारीफ से शुरू होती है। इसके बाद वो राणा अयूब को मुहम्मद अली जिन्ना की लिस्ट में शामिल करते हुए आगे बढ़ती हैं और बताती हैं वर्तमान में ही ऐसा उदाहरण शोषण से लड़ने वाली एक पत्रकार ने पेश किया है।
इसमें फिरदौस कश्मीर और नागरिकता संशोधन अधिनियम की ओर इशारा करते हुए कहती हैं कि कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निरस्त करना और CAA, जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसे दमनकारी इस्लामी देशों से उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का प्रयास करता है, आधुनिक विश्व में भारत के दमनकारी राज्य का उदाहरण पेश करते हैं।
इसके बाद वीडियो में बताया जाता है कि पाकिस्तान जैसे एक आतंक के पर्याय देश द्वारा ‘बहादुर मुस्लिम पत्रकार’ की तारीफ क्यों की जा रही है। हाल ही में, विवादास्पद पत्रकार राणा अय्यूब ने जम्मू-कश्मीर के भारतीय केंद्र शासित प्रदेश में एक विदेशी पत्रकार को अनुच्छेद-370 हटाने के बाद घाटी में मौजूदा स्थिति पर रिपोर्ट करने के लिए नियुक्त किया था। पत्रकार डेक्सटन फिल्किंस ने ‘न्यू यॉर्कर’ पर अपने लेख में बेशर्मी से स्वीकार किया था कि अयूब द्वारा उसे अवैध रूप से कश्मीर में घुसाया गया था।
फिल्किंस लिखते हैं कि उन्हें राणा अयूब द्वारा मुंबई आमंत्रित किया गया था, जहाँ से वे कश्मीर में विदेशी संवाददाताओं पर प्रतिबंध लगाने के भारत सरकार के आदेश की अवहेलना करने की कोशिश करने वाले थे। इसमें लिखा गया है कि राणा अयूब ने उसे स्कार्फ की एक जोड़ी सौंपी और उससे कहा कि वह एक कुर्ता, ठेठ भारतीय अंगरखा खरीदे, जिससे वह खुद को भारतीय समझ सके।
राणा अयूब का बयान लिखते हुए फिल्किंस ने लिखा है- “मुझे निन्यानबे प्रतिशत यकीन है कि आप पकड़े जाएँगे, लेकिन आपको वैसे भी आना ही चाहिए। लेकिन अपना मुँह मत खोलना।”
फिल्किंस ने लेख में आगे उल्लेख किया है कि जब वे श्रीनगर हवाई अड्डे पर उतरे थे, तो राणा अयूब ने उन्हें ‘विदेशियों के लिए पंजीकरण’ डेस्क पर दाखिला दर्ज किए बिना ही दूर ले गई। हवाई अड्डे पर पुलिसकर्मियों और हंगामे का फायदा उठाते हुए, फिल्किंस और राणा श्रीनगर के लिए निकल गए।
इस पूरे प्रकरण में राणा अयूब और फिल्किंस के इस कृत्य ने भारत सरकार द्वारा अनिवार्य कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन किया है। ‘विदेशियों के लिए आदेश, 1958‘ के अनुसार, विदेशी नागरिकों, पर्यटकों के साथ-साथ पत्रकारों को, ‘प्रतिबंधित क्षेत्रों’ या ‘संरक्षित क्षेत्रों’ में प्रवेश करने के लिए उन्हें सरकार की अनुमति की आवश्यकता होती है।
पाकिस्तान द्वारा जारी वीडियो में आगे कहा गया है- “भारत में ब्राह्मण हिंदुओं के इतिहास को देखते हुए, ‘CJ पोस्ट’ राणा अयूब की जान की सुरक्षा को लेकर आशंकित है।” ब्राह्मण और हिन्दुओं से घृणा, पाकिस्तान और उसकी राणा अयूब जैसी बहनों के लिए कोई नया विषय नहीं है। हालाँकि, पाकिस्तान का यह प्रोपेगंडा आखिर में यही साबित करता है कि भारत में CAA जैसे कानून क्यों जरुरी हैं।
यह स्पष्ट है कि राणा अयूब और पाकिस्तान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हिन्दू ब्राह्मणों से कितनी नफरत है। वास्तव में, पाकिस्तान ने राणा अयूब को ‘ब्राह्मण हिंदुओं’ से डरे हुए ‘मुस्लिम पत्रकार’ के रूप में संदर्भित किया, जो खुद उनकी बेशर्मी की ओर इशारा करता है।
दिलचस्प बात यह है कि, राणा अयूब की विवादास्पद पुस्तक- ‘गुजरात फाइल्स’, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मनगढ़ंत, बताते हुए कहा था कि सबूत के तौर इसकी कोई कीमत नही है, ने भी शुद्ध झूठ के आधार पर नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था। पाकिस्तान और राणा अयूब के बीच कम से कम यह बात तो कॉमन है। मुस्लिम भीड़ द्वारा एंटी-सीएए दंगों के बाद, राणा अय्यूब एक समाचार चैनल पर लाइव प्रसारण में झूठ भी बोला था कि समुदाय विशेष के लोग शांति से विरोध कर रहे थे। इस प्रकार, पाकिस्तान और राणा अयूब के बीच एक और समानता उजागर होती है। यानी, उम्माह की खातिर झूठ।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में CAA के ख़िलाफ शुरू हुआ विरोध-प्रदर्शन योगी-मोदी, अमित शाह और हिन्दुत्व की कब्र खोदने, पुलिस से आज़ादी, आरएसएस से आज़ादी की माँग करते हुए आज तिरंगे के नीचे एक दूसरी आज़ादी की माँग तक पहुँच गया है। इस माँग को अब तक एएमयू के छात्र उठा रहे थे, लेकिन अब इस आज़ादी की माँग को उन शिक्षकों ने दोहराया है, जिनके ऊपर विश्वविद्यालय के छात्रों को उज्ज्वल भविष्य की राह दिखाने की जिम्मेदारी है। अब इस आज़ादी के मायने क्या हैं? तो ज़रा आप भी जान लीजिए।
एएमयू में पिछले करीब एक महीने से विश्वविद्यालय के छात्र CAA के विरोध में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी क्रम में बाबे सैयद गेट पर 32वें दिन ज़ारी धरने के बीच गुरुवार दोपहर को विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने एक विरोध मार्च निकाला, जिसमें छात्रों ने सीएए और बीजेपी के ख़िलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही छात्रों ने एएमयू के वीसी तारिक मंसूर और रजिस्ट्रार को अपने निशाने पर रखा और उनके ख़िलाफ भी जमकर नारेबाजी करते हुए ऐलान किया कि जब तक वीसी अपना त्यागपत्र नहीं देंगे तब तक हम कक्षाओं का बहिष्कार करेंगे। इस दौरान छात्रों ने वीसी मुर्दाबाद के भी नारे लगाए।
यह विरोध यहीं खत्म नहीं हुआ। इस विरोध को अपना समर्थन देते हुए शिक्षकों ने भी एक मार्च निकालकर इस विरोध को आगे बढ़ाया। अलीगढ़ मुस्लिम टीचर्स एसोसिएशन के सचिव प्रोफेसर नजमुल इस्लाम की अनुवाई में एएमयू के शिक्षकों ने CAA के विरोध में एक तिरंगा यात्रा निकाली। इस यात्रा के दौरान शिक्षकों ने हाथों में तख्तियाँ लेकर नारेबाजी की और कहा कि जो देश पूर्वजों ने बनाया था, अब हम उस देश के वासी नहीं रहे। नया कानून हिन्दुओं और समुदाय विशेष को बाँटने वाला है। इतना ही नहीं शिक्षकों ने छात्रों की तरह ही रास्ते में तिरंगे के नीचे आज़ादी के नारे लगाए।
एएमयू में शिक्षकों ने लगाए आज़ादी के नारे। दैनिक जागरण में प्रकाशित ख़बर की कटिंग
अब आप जान लीजिए कि इस आज़ादी का मतलब एएमयू में खुलकर विरोध प्रदर्शन करने से नहीं बल्कि उस आज़ादी से है, जिस आज़ादी जिक्र अक्सर कश्मीर में होता है और वहाँ के प्रदर्शनों में अक्सर माँगी जाती है, जिस आज़ादी को दिल्ली के जेएनयू और जामिया में सीएए के खि़लाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हाथों में पोस्टर लेकर माँगा गया था। इन दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथों में तिरंगा तो जरूर दिखाई दिए, लेकिन किसी ने भी ‘भारत माता की जय’ तक नहीं बोला। बोला भी तो क्या हमें चाहिए ‘जिन्ना वाली आज़ादी।’
इतनी ही नहीं इस दौरान एक नहीं बल्कि सैकड़ों हिन्दूघृणा से लबरेज पोस्टर प्रदर्शनकारियों के हाथों में देखे गए, जिनके माध्यम से हिंदुओं को कैलाश भैजने की बात कही गई, कहीं ख़िलाफ़त 2.0 को काली स्याही से दीवार पर लिख दिया गया। जोर-जोर से ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ के नारे लगे और पूरी दुनिया में ‘ऊँ’ के चिन्ह को अपमानित करते हुए पोस्टरों में ‘फक हिंदुत्व’ लिखा गया। इसके अलावा इन प्रदर्शनों में हिंदू राष्ट्र को रेपिस्ट कहा गया। साथ ही ‘फक हिंदू राष्ट्र’ जैसे नारे लड़कियों के गाल पर लिखे देखे गए। इन नारे और पोस्टरों के माध्यम से बहुसंख्यक हिंदू की भावनाओं को तो आहत किया ही गया बल्कि इन नारों ने इन प्रदर्शनकारियों की मंशाओं को उजागर कर दिया।
सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शन के नाम पर इन दिनों सोशल मीडिया पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर वामपंथी गिरोह और कट्टरपंथी समुदाय लगातार आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहा है। इस बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर और वायरल हुई है। जिसमें एक मौलवी दिग्गज़ नेताओं और भाजपा-आरएसएस कार्यकर्ताओं को सरेआम धमकी देता नजर आ रहा है। हालाँकि, ये वीडियो कहाँ की है, इसका पता नहीं चल पाया है। लेकिन, इस वीडियो में मौलवी को मुस्लिम समुदाय के लोगों से कहते हुए सुना जा सकता है, “जिन मुस्लिमों ने खतना नहीं करवाया, वो भी मोदी सरकार से नहीं डरता। और जो सुसु भी नहीं करना जानता वो भी नहीं डरता।”
मौलवी को वीडियो में केंद्र सरकार और अमित शाह के ख़िलाफ़ बयान देते साफ सुना जा सकता है। वो पहले कहता है कि वे बाबा अम्बेडकर की इज्जत करते हैं और यहाँ उनके संविधान को बचाने के लिए बैठे हैं। लेकिन आगे अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहता हैं, “वो आटे का थैला अमित शाह बोलता है कि मुस्लिमों को डरने की जरूरत नहीं है। अमित शाह तुम्हें पता होना चाहिए कि जिन मुस्लिमों का खतना भी नहीं हुआ वो भी तुमसे नहीं डरता और जिसकी सुसु भी नहीं होती, वो भी तुमसे नहीं डरता। मुस्लिम तुमसे नहीं डरते।”
गौरतलब है कि मौलवी ने यहाँ गृहमंत्री अमित शाह द्वारा 11 दिसंबर को संसद में दिए बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी। मौलवी ने भले ही यहाँ सीएए को लेकर लोगों को और मुस्लिम समुदाय को सुनिश्चित किया कि इस कानून से उनका कुछ नहीं बिगड़ने वाला, लेकिन साथ ही उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और यूपी सीएम योगी को लेकर बहुत आपत्तिजनक बातें की। इस्लामिक साफे को सर पर बाँध वीडियो में मौलवी ने भाजपा और आरएसएस के कार्यकर्ताओं को धमकाया।
मौलवी ने वीडियो में दावा किया कि अगर भाजपा और आरएसएस के ख़िलाफ़ मुस्लिम लोग सड़कों पर उतर आए, तो उनके कपड़े तक खुल जाएँगे। मौलवी को वीडियो में कहते सुना जा सकता है, “हम तुम्हें असली तस्वीर दिखाएँगे। इंशाल्लाह। हिंदुस्तान के झंडे तिरंगे में मौजूद तीन अलग-अलग रंग हैं। जो देश में अलग-अलग धर्मों (हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई) को दर्शाता है। उसमें से ये लोग मुस्लिमों को निकालने के चक्कर में हैं। लेकिन, जरा अमित शाह, मोदी, योगी नीचे झाँक कर देखें, झंडे के नीचे डंडा है। डंडे से हम ऐसा मारते हैं कि भाजपा और आरएसएस की चड्ढी खुल जाती है।”
इसके बाद इस वीडियो में मौलवी को भाजपा, आरएसएस को नीचा दिखाने के लिए ये भी कहते हुए सुना जा सकता है कि उनकी चड्ढी से बड़ी मुस्लिमों की जेब रहती है और अगर मुस्लिम अपनी पगड़ी खोल दे, तो 25 चड्ढियाँ बन जाएँ।
इस वीडियो को देखने के बाद अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसी मजहब के पैरोकार मोदी-शाह से नफरत करते-करते भाषाई स्तर इतने गलीच हो चुके हैं कि अब उन्हें खुद ही नहीं मालूम रह गया कि उन्हें क्या बोलना है और क्या नहीं। इससे पहले भी भारत के मुस्लिमों में डर फैलाने के लिए कई बार इस तरह की धमकियाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री को दी जा चुकी है। इनके अलावा ऐसे ही नफरत भरे भाषण देकर समुदाय विशेष के लोगों को भड़काया जाता रहा है।
जामिया, JNU से चले आजादी के नारे शाहीनबाग़ तक आते-आते इस्लामिक नारों, हिन्दू विरोधी नारों और गृह युद्ध की धमकियों में तब्दील हो गए और तुरंत इस पूरे अभियान की पोल खुल गई। यही वजह है कि NRC और CAA के विरोध में बताए जा रहे इस पूरे विरोध और हंगामे को अब किसी ने भी गंभीरता से लेना छोड़ दिया है। लेकिन इस विरोध प्रदर्शन का तरीका और इसकी रणनीतियाँ बिलकुल भी नजरअंदाज कर देने लायक नहीं लगती हैं।
लिबरल होने का अभिनय करते आ रही यह भीड़ अब बच्चों के जरिए अपने वामपंथ के जहर और अपने प्रोपेगेंडा को हवा दे रहा है। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो शेयर किए जा रहे हैं जो शाहीन बाग़ में चल रहे कथित CAA-NRC विरोध प्रदर्शन के दौरान बनाए गए हैं। कथित इसलिए क्योंकि CAA-NRC का विरोध तो बस बहाना है।
इन वीडियो में ‘लिबरल्स’ की भीड़ बच्चों को कन्धों पर बिठाकर और उनके पास माइक देकर जो नारे लगवा रही है, वो स्पष्ट करता है कि इस सारे हंगामे का कारण कोई कानून नहीं बल्कि कुछ ऐसे लोगों का सत्ता में होना है जिनके हाथ में देश की कमान देखकर बुर्जुआ कॉमरेड को आपत्ति है। वीडियो में बच्चा नारे लगाते हुए कहता है- ‘हम ले के रहेंगे आज़ादी, तेरा बाप भी देगा आज़ादी, तेरी माँ भी देगी आज़ादी।’ जो विचारधारा इस देश में कॉन्ग्रेस का नमक खाकर तंदुरुस्त हुई है वो उसकी भक्तिधारा में चंद नारे तो लगा ही सकती है।
“Tera baap bhi dega – Azadi! Teri maa bhi degi – Azadi!”
वहीं, एक दूसरे वीडियो में हरे लिबास में एक मौलवी किसी सार्वजानिक सभा को भाषण देते हुए गृह मंत्री अमित शाह को आटे का थैला बताते हुए धमकी दे रहा है। इस वीडियो में मौलवी ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह के साथ ही उनके समर्थकों को डंडे से पीटने की बात कही है जिस पर एक उन्मादी भीड़ भी खूब तालियाँ बजा रही है और वाह-वाही दे रही है।
मौलवी का कहना है कि अगर मुस्लिम को भगाने की बात कही तो तिरंगे के डंडे से वो यहाँ मौजूद लोगों को पीटेंगे। वीडियो में हरे लिबास पहने मौलवी ने यह भी स्पष्ट किया है कि हिन्दुओं से वो मुस्लिम भी नहीं डरता है जिसका कि अभी तक ख़तना भी नहीं हुआ है।
CAA-NRC के विरोध के नाम पर हिन्दुओं की महिलाओं को बुर्का पहनाए जाने से लेकर स्वस्तिक के चिन्हों को कुचलने और फ़क़ हिंदुत्व जैसे सन्देश सार्वजानिक रूप से दिए जा रहे हैं। मोदी सरकार के 2014 में सत्ता में आने के बाद से ही अक्सर मीडिया और कुछ उदारवादी विचारकों ने स्टूडियो में बैठकर ‘डर का माहौल’ जैसे नारे दिए। इन्हीं का एक बड़ा समर्थक वर्ग है जो इस नारे पर यकीन करता हुआ इसे आगे बढ़ाता रहा।
क्या उस वर्ग को ये वीडियो और सार्वजानिक सभाएँ शांति का संदेश नजर आती होंगी? या सिर्फ वो इसलिए इस पर चुप रह जाते हैं क्योंकि वो जानते हैं कि वास्तव में डर किन लोगों से होना चाहिए?
अपने विरोध प्रदर्शन में बच्चों का इस्तेमाल मजहबी और अश्लील नारे लगाने तक के लिए यह शाहीन बाग़ की भीड़ तैयार हो चुकी है। नैतिकता के मामले में तो वामपंथ से कभी कोई उम्मीद थी भी नहीं लेकिन अब वो अपने ही उस आवरण से बाहर आ चुके हैं जिस ‘उदारवादी’ नक़ाब के पीछे वो खुद को वर्षों तक छुपाते आए थे। इस विरोध प्रदर्शन के पूरे किस्से ने बता दिया है कि वामपंथ और कट्टरपंथियों की इस मिलीभगत का वास्तविक मर्म जनता नहीं बल्कि इस विचारधारा की लाश कंधे पर ढो रहे कुछ चुनिंदा लोग ही हैं।
दुष्यंत कुमार ने तो कहा था कि सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, लेकिन अब हम देख सकते हैं कि कि एक भीड़ ऐसी भी है, जिसका मकसद सिर्फ और सिर्फ हंगामा खड़ा करना ही हो सकता है। क्योंकि यही तो उनके अस्तित्व का कारण भी है।
आप भी NRC और CAA के विरोध के नाम पर चल रहे इन युद्व घोषों को वीडियो में जरूर सुनिए-
दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने 70 विधानसभा सीटों में से 57 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। बीजेपी दिल्ली चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि 57 उम्मीदवारों में 11 उम्मीदवार अनुसूचित जाति और चार महिलाएँ शामिल हैं। बता दें कि गुरुवार को भाजपा मुख्यालय में क़रीब ढाई घंटे तक बीजेपी के केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा गृह मंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा के अलावा अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
Bharatiya Janata Party announces names of 57 candidates out of 70 for upcoming Delhi assembly elections. pic.twitter.com/eJEYYPm5X3
दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और दिल्ली इकाई के पूर्व अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को भाजपा ने रोहिणी सीट से उतारा है, वो इसी सीट से विधायक हैं। बीजेपी ने आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक कपिल मिश्रा को मॉडल टाउन सीट से उम्मीदवार बनाया है। इस सूची में पूर्व मेयरों रविंद्र गुप्ता और योगेंद्र चंदोलिया के भी नाम हैं।
वहीं, आम आदमी पार्टी ने भी विधानसभा चुनाव के लिए सभी 70 सीटों पर उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। आप पार्टी ने मौजूदा 46 विधायकों को टिकट दिया है, तो वहीं दूसरी तरफ 15 विधायकों के टिकट काटे हैं और आठ महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली सीट और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पटपटगंज से चुनाव लड़ेंगे।
ग़ौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने दिल्ली में विधानसभा चुनाव का ऐलान करते हुए कहा था कि चुनाव सिंगल फेज में होगा और नॉमिनेशन की अंतिम तिथि 21 जनवरी होगी। वहीं, नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 24 जनवरी रखी गई है।
वर्तमान दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल 22 फरवरी को खत्म होगा। पिछले विधानसभा में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी ने 70 सीटों में से 67 सीटें अपने हिस्से में दर्ज की थीं। इस बार दिल्ली में 13,750 पोलिंग बूथ पर करीब 1.46 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
साल 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को 70 में से 67 सीटें मिली थीं। भाजपा ने 3 सीटें जीती थीं, वहीं कॉन्ग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी। 2015 में चुनाव आयोग ने 12 जनवरी को दिल्ली चुनाव की घोषणा की थी और 7 फरवरी को मतदान हुआ था जिसका 10 फरवरी को नतीजा आया था।
क्या आपने कभी सोचा है कि देश में आतंकवाद शब्द के इस्तेमाल पर भी सबसे पहले प्रतिक्रिया देने वालों में एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ही क्यों होते हैं? मुद्दा चाहे इस्लामिक चरमपंथ का हो, मजहबी नारे लगाते हुए भीड़ द्वारा किसी मंदिर को अपवित्र करने का हो या फिर बच्चों को कट्टर बनाने वालों का हो, सबसे पहले बौखलाने वाला नाम असदुद्दीन ओवैसी का ही होता है।
ओवैसी के दुःख का नया कारण सीडीएस जनरल बिपिन रावत का कट्टरता और चरमपंथ को रोकने वाला बयान है। या ये कहें कि एक बार फिर ओवैसी ने उड़ता हुआ तीर ले लिया है। रायसीना डायलॉग के दौरान CDS जनरल बिपिन रावत ने कहा कि कश्मीर में 10 साल से कम उम्र के लड़के-लड़कियों को कट्टरपंथी बनाया जा रहा है। जनरल रावत ने कहा कि ऐसे बच्चों को शांतिवार्ता से कट्टरपंथी बनाए जाने की ऐसी मुहिम से अलग कर सकते हैं।
इसके बाद ओवैसी को खबरों में आने की एक और वजह मिल गई और उन्होंने सवाल किया है कि जनरल बिपिन किस-किस को डिरेडिकलाइज़ करेंगे? साथ ही सीडीएस जनरल रावत को सलाह दी है कि उन्हें नीतियाँ नहीं बनानी चाहिए। यहाँ तक कि ओवैसी ने सीडीएस बिपिन रावत के बयान की तुलना कनाडा में अंग्रेज हुकुमत के द्वारा किए गए जुल्म से कर डाली है।
हालाँकि, इस्लामिक पत्थरबाजों और हर दूसरे दिन 72 हूरों की ख्वाहिश लिए ISIS से जुड़ने वाले युवाओं की तुलना ओवैसी आज तक किसी से नहीं कर पाए हैं। हो सकता है कि वो जानते हों कि किसी और से इस जिहादी विचारधारा की तुलना करना कितना हास्यास्पद और अतार्किक है।
जनरल बिपिन रावत बेवजह ही नीति और योजना बनाने की परेशानी मोल लेते हैं। जबकि, ओवैसी जानते हैं कि नीतियाँ तो सिर्फ वही हैं जो आसमानी किताब में दी गई हैं और उसके अलावा दूसरी कोई नीति होती ही नहीं है ना ही किसी को बनाने पर विचार करना चाहिए।
‘रावत किस-किस का डिरेडिकलाइज़ करेंगे?’ वाला ओवैसी का सवाल भी एकदम सही है। जिस ओवैसी के खुद अपने ही घर में हिन्दुओं को 15 मिनट में सबक सिखाने जैसे भाषण देने वाला भाई हो, उसकी जुबान से ऐसा सवाल पूछना वाजिब लगता है। देखा जाए तो सबसे पहला जवाब तो ओवैसी बंधुओं के अपने घर में मौजूद अकबरुद्दीन ओवैसी है, जिसे शायद अभी भी ठीक से डि-रेडिकलाइज़ किया जाना बाकी है। हालाँकि, इसमें तथ्यात्मक त्रुटि इतनी जरूर हो सकती है कि अकबरुद्दीन की वास्तविक उम्र 10 साल से ज्यादा ही है। लेकिन उनकी मानसिक उम्र नीचे जा सकता है कि वो फिर भी इस पैरामीटर में एकदम फिट बैठते हैं।
एक ओर पूरे देश के मुस्लिमों में असदुद्दीन ओवैसी नागरिकता रजिस्टर (NRC) पर लोगों को डिटेंशन कैम्प भेज दिए जाने जैसी भ्रामक बातों से डराकर उन्हें सरकार के खिलाफ उकसाते हैं, और दूसरी तरफ वही ओवैसी, आतंकवाद से निपटने की सरकार और तंत्र की रणनीतियों में अपनी कट्टरपंथी विचारधारा का नैरेटिव जोड़ देते हैं।
कश्मीर से लेकर हैदराबाद और केरल तक अक्सर छोटे बच्चों को कट्टरपंथियों द्वारा अपने मिशन का हिस्सा बनाया जाता रहा है। खबरें पढ़ने को मिलती हैं कि फलाँ जगह पर ISIS युवाओं से सम्पर्क कर अपनी कार्यशाला चला रहा था। महीने में कम से कम 2 ख़बरें तो ऐसी होती हैं जिनमें स्पष्ट रूप से किसी बच्चे को इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा ब्रेनवाश किए जाने की घटना शामिल होती है।
अक्सर यह भी देखा गया है कि इस्लाम में दीनी शिक्षा के पहले चरण यानी, मदरसे में ही आतंकवाद और ट्रेनिंग का केंद्र बनाया गया है। वर्ष 2018 में शिया सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड ने भी पीएम नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया था कि देश में मदरसों को बंद कर दिया जाए। बोर्ड ने आरोप लगाया था कि ऐसे इस्लामी स्कूलों में दी जा रही शिक्षा छात्रों को आतंकवाद से जुड़ने के लिए प्रेरित करती है।
CAA-NRC के विरोध में बच्चों का इस्तेमाल
हाल ही में सेव चाइल्ड इंडिया NGO ने नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) में इस बात को लेकर अपनी शिक़ायत भी दर्ज करवाई है कि नागरिकता कानून के खिलाफ हो रहे विरोध-प्रदर्शनों में बच्चों का इस्तेमाल किया जा रहा है। NGO का कहना है कि यह बच्चों के अधिकारों का घोर उल्लंघन है और यह बाल शोषण की श्रेणी में आता है। इन बच्चों का इस्तेमाल दिल्ली के शाहीनबाग में CAA और NRC के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध-प्रदर्शन में भड़काऊ नारे लगाने के लिए किया जा रहा है।
आज ही एक SIT जाँच में खुलासा हुआ है कि मुजफ्फरनगर में एंटी-सीएए विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प में बच्चों को पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंकने के लिए उकसाया था। जाँच एजेंसी ने आरोपितों पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 की धाराएँ लगाईं हैं।
जिस सरकार और तंत्र की दुहाई ओवैसी जनरल बिपिन रावत के बयान के विरोध में कह रहे हैं उन्हें यह भी याद रहना चाहिए कि अगस्त 2016 में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के आह्वान को याद करते हुए इस बात पर खेद प्रकट किया था कि कश्मीरी युवकों के हाथ में पत्थर नहीं, लैपटॉप होने चाहिए।
एक रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2019 में भी एक घटना सामने आई थी जिसमें गृह मंत्रालय ने लोक सभा में एक सवाल के लिखित जवाब में कहा था कि बांग्लादेशी आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन-बांग्लादेश द्वारा कट्टरता फैलाने और युवाओं की भर्ती गतिविधियों के लिए बंगाल के बर्धवान और मुर्शिदाबाद स्थित कुछ मदरसों का इस्तेमाल कर रहा है।
अब स्वयं ओवैसी बताएँ कि उन्होंने अपने स्तर पर कितने हिन्दू-मुस्लिम युवाओं को नई शिक्षा पद्दति से जोड़ने के प्रयास किए? मैंने कभी भी ओवैसी को मदरसे में चली आ रही परम्परागत गैर-वैज्ञानिक शिक्षा के खिलाफ बोलते हुए नहीं सुना। ना ही वो कभी इस बात की वकालत करते हैं कि मुस्लिम बच्चों को भी मुख्यधारा की शिक्षा पद्दति से जुड़ने की जरूरत है ताकि वो भी सीबीएससी और एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम से जुड़ सकें।
युवाओं को कट्टरपंथी बनाने की ऐसी ही तमाम घटनाओं को यदि असदुद्दीन ओवैसी जैसों के लिए नजरअंदाज भी कर दिया जाए तो कश्मीर घाटी के पत्थरबाज, जो अब अक्सर दिल्ली जैसे मेट्रो शहर और देहरादून जैसे कस्बाई परम्परा वाले छोटे शहरों में भी देखे गए हैं उन्हें किस तरह से भुलाया जा सकता है? क्या ये युवा एक ही दिन में सरकार और सेना के खिलाफ पत्थर उठाने के लिए तैयार हो गए? जवाब है- नहीं।
ये लोग बचपन से ही संस्थागत तरीके से तैयार किए जाने वाले लोग होते हैं जिन्हें ओवैसी जैसे लोग ही अपनी मानसिकता के जहर के लिए इस्तेमाल करते हैं क्योंकि ओवैसी जानते हैं कि अगर इस तरह के कट्टरपंथी समर्थक ही नहीं रहेंगे तो उनकी दकियानूसी विचारधारा पर वाहवाही कौन करेगा?
जामा मस्जिद पर प्रदर्शन के दौरान एकत्रित भीड़ को उकसाने और आदेशों का उल्लंघन करने के आरोप में 20 दिसंबर को गिरफ्तार हुए भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद उर्फ़ रावण को गुरुवार को सशर्त जमानत पर तिहाड़ जेल से निकला था। दिल्ली छोड़ने से पहले शुक्रवार को वह फिर जामा मस्जिद पहुँचा। चूँकि शर्तें उसके जेल से रिहा होने के 24 घंटे बाद प्रभावी होने थे तो उसने उसका बखूबी इस्तेमाल किया।
जामा मस्जिद पहुँच रावण ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और NRC के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा लिया। उसने हाथ में संविधान की कॉपी ले राखी थी और संविधान की प्रस्तावना पढ़ी।
दिल्ली: भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने जामा मस्जिद में संविधान की प्रस्तावना पढ़ी। pic.twitter.com/5e7PJSa2wO
भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर ने कहा, “मैं अपने साथियों से निवेदन करता हूँ कि वो इस मुल्क के संविधान की ताकत को समझें। आज मुझे जो रिहाई मिली है और हमारे भाइयों को जो रिहाई मिल रही है वो इस मुल्क के संविधान की ताकत के वजह से मिली है।”
भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद : मैं अपने साथियों से निवेदन करता हूं कि वो इस मुल्क के संविधान की ताकत को समझे, आज मुझे जो रिहाई मिली है और हमारे भाईयों को जो रिहाई मिल रही है वो इस मुल्क के संविधान की ताकत के वजह से मिली है। https://t.co/bLhWc2OcEM
प्रदर्शन जारी रखने का आह्वन करते हुए कहा, “हमारा संघर्ष जारी रहेगा क्योंकि हमारा विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण है। आप इस प्रदर्शन से मुल्क को बताए कि अब हमारे मुल्क को कोई खतरा नहीं और न ही हमारी एकता को कोई खतरा है।”
भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद :हमारा संघर्ष जारी रहेगा क्योंकि हमारा शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन है। आप इस प्रदर्शन से मुल्क को बताए कि अब हमारे मुल्क को कोई खतरा नहीं और न ही हमारी एकता को कोई खतरा है https://t.co/rGlj93ntvVpic.twitter.com/Lmb4zidoRd
इस दौरान रावण ने अन्य समुदाय के लोगों को लुभाते हुए अपने प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कहा। 24 घंटे में दिल्ली छोड़ने से पहले उसने जामा मस्जिद पर कहा, “मुस्लिम भाइयों से ज्यादा हमारे सिख भाई और ओबीसी भाई और वो लोग जो समाज के संविधान के साथ खड़े हैं वे सब मिलकर इस प्रदर्शन को और मज़बूत करें। झूठ फैलाया जा रहा है कि मुस्लिम प्रदर्शन कर रहे हैं। ये झूठ भी बेनकाब होगा।”
भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद :मुसलमान भाईयों से ज्यादा हमारी सिख भाई और ओबीसी भाई और वो लोग जो समाज के संविधान के साथ खड़े हैं वो सब लोग इकट्ठा होकर इस प्रदर्शन को और मज़बूत करें ,और जो झूठ फैलाया जा रहा है कि मुसलमान प्रदर्शन कर रहे हैं ये झूठ भी बेनाकाब हो। https://t.co/3vPP1106se
गौरतलब है कि दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को जमानत दी थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कामिनी लाउ ने उन्हें कुछ शर्तों के साथ राहत दी थी। आजाद को जमानत देते हुए अदालत ने कहा था कि वह चार हफ्तों तक दिल्ली नहीं आ सकेंगे और चुनावों तक कोई धरना भी आयोजित नहीं करेंगे। इस दौरान अदालत ने ये भी कहा था कि सहारनपुर जाने से पहले आजाद जामा मस्जिद समेत दिल्ली में कहीं भी जाना चाहती है, तो पुलिस उन्हें एस्कॉर्ट करेगी। बता दें, इस दौरान अदालत ने उन्हें दिल्ली छोड़ने के लिए 24 घंटे का समय दिया था।
दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप केस के चारों दोषियों के खिलाफ नया डेथ वारंट जारी किया है। अब उन्हें 1 फरवरी सुबह 6 बजे फाँसी के फंदे पर लटकाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि उन्हें पहले 22 जनवरी को फाँसी दी जानी थी, लेकिन एक दोषी ने दया याचिका दायर की थी। उसकी दया याचिका खारिज होने के बाद प्रक्रिया के तहत नया डेथ वारंट जारी करना पड़ा और फाँसी की तारीख बढ़ानी पड़ी।
2012 Delhi gang-rape case: A Delhi court issues fresh death warrant for convicts for 1st February, 6 am pic.twitter.com/hHvXo6Av1d
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुरुवार (जनवरी 16, 2019) देर रात दया याचिका राष्ट्रपति के पास भेजी जिसके बाद राष्ट्रपति ने इसे खारिज कर दिया। इससे पहले तिहाड़ जेल के अधिकारियों ने शुक्रवार (जनवरी 17, 2019) को कोर्ट में दोषियों के खिलाफ मौत की सजा पर फिर से डेथ वारंट जारी करने की अपील की थी। न्यायाधीश ने पाया कि इस मामले में दोषी अपनी दया याचिका बारी-बारी से दायर कर रहे हैं। चारों को दया याचिका दायर करने का मौका दिया गया था, लेकिन इसमें से केवल एक दोषी ने दायर किया। उनका कहना था कि यह सजा में देर करने की चाल हो सकती है। उन्होंने पूछा कि आखिर यह कब तक चलेगा?
वहीं दया याचिका खारिज होने के बाद निर्भया के पिता का कहना है कि दिल्ली सरकार तब तक सोई रही, जब तक हम लोग आगे नहीं बढ़े। उन्होंने कहा कि आखिर दिल्ली सरकार ने जेल अथॉरिटी से पहले क्यों नहीं कहा था कि आप फाँसी के लिए नोटिस जारी करो।
साथ ही निर्भया की माँ आशा देवी ने दोषियों की फाँसी में हो रही देरी और डेथ वारंट जारी होने पर बीजेपी और आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो लोग 2012 में हाथ में तिरंगा लेकर इंसाफ के लिए सड़क पर उतरे थे, आज वही लोग राजनीति के लिए निर्भया के दोषियों की फाँसी टाल रहे हैं। कोई कह रहा है कि दिल्ली सरकार फाँसी में देरी कर रही है तो दिल्ली सरकार कह रही है कि दिल्ली पुलिस हमें दे दो।
बता दें कि इससे पहले निर्भया की माँ ने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में एक याचिका दायर कर दोषियों के डेथ वारंट की माँग की थी, जिस पर कोर्ट ने 7 जनवरी को निर्भया की माँ के हक में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने 2012 के निर्भया गैंगरेप दोषी मुकेश, पवन गुप्ता, विनय कुमार शर्मा और अक्षय कुमार सिंह के खिलाफ डेथ वारंट जारी करते हुए कहा था कि दोषियों को 22 जनवरी को सुबह 7 बजे तिहाड़ जेल में फाँसी दी जाएगी।
केरल में तिरुवनंतपुरम के डॉक्टर रंजीत विजयाहरि ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और केरल पुलिस के साइबर सेल में एक शिक़ायत दर्ज कराई है। अपनी शिक़ायत में उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का समर्थन करने के लिए ‘जिहादी तत्वों’ द्वारा निशाना बनाए जाने की बात कही है।
अपना दर्द बयाँ करने के साथ-साथ डॉ. विजयाहरि ने अपने अन्य साथी डॉक्टर्स को परेशान किए जाने का ज़िक्र भी किया है। उन्होंने कहा, “कई डॉक्टर्स ने अराजक तत्वों के इस गिरोह के हमले का सामना किया है। मुझे लगता है कि ये लोग ‘जिहादी’ हैं। इन्होंने कई राष्ट्रीय मुद्दों पर आतंकवादियों के समर्थन का रवैया अपनाया। उन्हें अफ़ज़ल गुरु, इशरत जहाँ का समर्थन करते और भारतीय सेना को गाली देते देखा-सुना जा सकता है।”
He says,” Several doctors have faced gang attack. Why I thought these people are ‘jihadis’ is their attitude on many national issues is same including support for terrorists. They can be seen supporting Afzal Guru, Ishrat Jahan & have been abusing Indian Army”. (2/2) #Kerala
इससे पहले भी डॉ. विजयाहरि ने दावा किया था कि CAA का समर्थन करने के चलते इस्लामी कट्टरपंथी उन्हें निशाना बना रहे हैं। सोशल मीडिया पर उन्होंने बताया था कि वे गेस्ट्रो सर्जन हैं और अपनी पत्नी के साथ हॉस्पिटल चलाते हैं। उन्होंने कुछ स्कीनशॉट भी शेयर किए थे, जिनमें दावा किया गया था कि चिकित्सा से जुड़े उनके दोस्तों को भी ‘प्रतिकूल राजनीतिक विचारों’ के लिए अनैतिक प्रथाओं और ‘क्रूर उपचार’ के आरोपों के साथ निशाना बनाया गया।
बता दें कि डॉ. विजयाहरि सेवा भारती के कार्यकर्ता रहे हैं और RSS से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कट्टरपंथियों का एक स्क्रीनशॉट शेयर किया। इसमें उनके और उनकी प्रैक्टिस को बदनाम करते हुए दावा किया गया कि “साम्प्रदायिक” होने के कारण वे सहानुभूति की उम्मीद नहीं रख सकते।
ग़ौरतलब है कि राज्य की वामपंथी सरकार नागरिकता संशोधन क़ानून के पारित होने बाद से ही इसके विरोध में खड़ी हुई है। यहाँ तक कि इस क़ानून को रद्द करने की माँग करते हुए केरल विधानसभा में एक प्रस्ताव भी पारित किया था, जिसे कॉन्ग्रेस ने भी समर्थन दिया था। केरल सरकार ने अब सर्वोच्च न्यायालय में CAA के ख़िलाफ़ मुकदमा भी दायर किया है।