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एसिड अटैक सर्वाइवर का दीपिका ने TikTok पर उड़ाया मजाक… JNU कांड के बाद फिर पड़ रही गाली

बीते कुछ दिनों से बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण का नाम सुर्ख़ियों में बना हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह उनकी फ़िल्म ‘छपाक’ है, जिसमें उन्होंने एसिड सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल के किरदार को निभाया। यह फ़िल्म एक 15 साल की नाबालिग बच्ची लक्ष्मी अग्रवाल पर हुए एसिड हमले से जुड़े एक दर्दनाक हादसे पर आधारित है, जिसका किरदार निभाकर दीपिका पादुकोण समाज को यह संदेश देना चाहती थीं कि एसिड हमले की शिकार महिलाओं को अपने जीवन में कभी हार नहीं माननी चाहिए और उन्हें हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए।

इतने गंभीर विषय पर फ़िल्म बनाना निश्चित तौर पर एक साहसिक काम है। साथ ही एसिड हमले की शिकार पीड़िता के किरदार को उसी गंभीरता से निभा ले जाना उससे भी बड़ी बात है। एक आम नागरिक होने के नाते मुझे यह बात जितनी अच्छी और न्यायसंगत लगती है, उतनी शायद छपाक फ़िल्म की हिरोइन दीपिका पादुकोण को नहीं लगती। इसकी वजह यह है कि सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो बड़ी तेज़ी से अपनी पहुँच बढ़ा रहा है। इस वीडियो में दीपिका पादुकोण अपनी एक साथी फेबी जोकि पेशे से मेकअप आर्टिस्ट हैं, उनके साथ एक मैकअप चैलेंज गेम खेलती नज़र आ रही हैं। इसमें दीपिका अपनी तीन फ़िल्मों का ज़िक्र करती हैं, जिनमें उनके द्वारा निभाए किरदार का मेकअप करके फेबी उस किरदार पर चुटकी लेती हैं।

इनमें दीपिका अभिनीत फ़िल्म- ओम शांति ओम, पीकू और छपाक शामिल हैं। एक-एक कर दीपिका की साथी फेबी फ़िल्म के किरदारों का मेकअप करती नज़र आती है। इसमें ग़ौर करने वाली बात यह है कि जब फ़िल्म छपाक के किरदार यानी कि एसिड हमले की शिकार लक्ष्मी अग्रवाल की बारी आती है तो फेबी अधजले चेहरे का मेकअप करती है, जो बेहद शर्मनाक़ है।   

इस वीडियो को देखकर शायद ही किसी के मन में यह सवाल नहीं उठेगा कि फ़िल्म ‘छपाक’ में एसिड हमले की शिकार हुई जिस लक्ष्मी अग्रवाल का किरदार दीपिका ने निभाया, उसे उन्होंने गंभीरता से लिया भी होगा या नहीं? 

वायरल हुए इस वीडियो में दीपिका के हँसी के ठहाके देखकर तो ऐसा बिल्कुल नहीं लगता, इससे तो ऐसा ही लगता है कि लक्ष्मी अग्रवाल का दर्द दीपिका के लिए सिर्फ़ पर्दे तक ही सीमित था। टिक-टॉक पर बने इस वीडियो की सच्चाई यह है कि फ़िल्मी दुनिया की दीपिका पर्दे पर कुछ और होती हैं और असल ज़िंदगी में कुछ और। अपनी असल ज़िंदगी में वो एसिड हमले की शिकार महिलाओं का मखौल उड़ा कर खीसे निपोरती हैं।  

कहने को तो यह फ़िल्म एक सामाजिक संदेश को लेकर सामने आई थी, लेकिन फ़िल्म की हीरोइन ख़ुद सोशल मीडिया पर जो सामाजिक संदेश देती नज़र आ रही हैं, वो उनके दिखावटी चेहरे को बड़े ही स्पष्ट तरीक़े से उजागर करता है। इस बनावटी चेहरे को लेकर वो न जाने कितने स्टंट करती नज़र आईं। सोशल कॉज़ की आड़ में फ़िल्म के प्रमोशन का दाँव खेलते हुए JNU हिंसा में उन वामपंथियों की साइड में जाकर भी खड़ी हो गईं, जिनके ख़िलाफ़ मामले दर्ज किए गए थे। 

मेरी दिली ख़्वाहिश है कि कोई दीपिका पादुकोण को यह ज़रूर बताए कि फ़िल्मी दुनिया के रुपहले पर्दे पर किसी विक्टिम के किरदार को निभाने में और उसे जीने में फ़र्क़ होता है। बेहतर तो यह होता कि लक्ष्मी जैसी पीड़िताओं के दर्द को महसूस कर दीपिका उन्हें आगे बढ़ने का हौसला देतींं। लेकिन, उनसे यह उम्मीद भला कैसे की जा सकती है, क्योंकि फ़िल्म निर्देशकों ने तो एसिड सर्वाइवर लक्ष्मी का केस लड़ने वाली वकील अपर्णा भट्ट को ही क्रेडिट नहीं दिया और मामला कोर्ट की चौखट तक जा पहुँचा। 

कहने को तो यह फ़िल्म सोशल कॉज़ पर बनी थी, लेकिन असल ज़िंदगी में फ़िल्म निर्माता से लेकर हिरोइन तक का सोशल कॉज़ से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। दीपिका पादुकोण को इस बात का अंदाज़ा भी नहीं है कि जब किसी पर एसिड अटैक होता है तो उसका दर्द भयावह होता है। शरीर के अंगों पर गिरा एसिड न सिर्फ़ उनके शरीर को झुलसाता है बल्कि उनके मन, उनके जीने की चाह, भविष्य से जुड़े सपनों तक को भी झुलसा देता है। दीपिका पादुकोण इस बात से बिल्कुल बेख़बर हैं कि खीसे निपोरता उनका यह वीडियो न जाने कितनी एसिड सर्वाइवर्स के चेहरे की हँसी को एक झटके में छीन लेगा और उन्हें ग़म में बदल देगा।

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ये कैसी सरकार, अपने भी लाचार: धरने पर कॉन्ग्रेस विधायक, कहा- वादे पूरे करें कमलनाथ

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस विधायक मुन्नालाल गोयल ने शनिवार (जनवरी 18, 2019) को अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने पार्टी पर घोषणा-पत्र में किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया है। शनिवार सुबह विधानसभा पहुँचे मुन्नालाल गोयल पहले परिसर के अंदर घुसने के लिए बैरिकेडिंग से कूदते हुए नजर आए। इसके बाद विधानसभा में लगी गाँधी प्रतिमा पर पहुँचकर उन्होंने माल्यार्पण करने के बाद परिसर के गेट पर ही दरी बिछाकर धरने पर बैठ गए।

मुन्नालाल गोयल ने कहा कि कमलनाथ सरकार में विधायकों की भी अनदेखी हो रही है। सरकार की बेरुखी से नाराज और सीएम को वादा याद दिलाने के लिए गोयल ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखा, लेकिन इस पर कुछ नहीं हुआ। मुन्नालाल गोयल ने कहा, “यह हमारे चुनाव घोषणा-पत्र में किए गए वादों की याद दिलाने के लिए है। मैंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है जिसमें उनसे वादों को पूरा करने के लिए कहा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। यही वजह है कि आज मैं यहाँ धरने पर बैठा हूँ।” वैसे यह पहली बार नहीं है जब कमलनाथ सरकार का विरोध पार्टी विधायक की कर रहे हैं।

मुन्नालाल गोयल का आरोप है कि कॉन्ग्रेस जिस घोषणा-पत्र के सहारे सत्ता पर काबिज हुई है, उन पर अब अमल नहीं कर रही। विधायक ने कॉन्ग्रेस के घोषणा-पत्र में शामिल झुग्गी वासियों को पट्टे देने के वचन को पूरा नहीं करने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र के 112 झुग्गी वासियों को कॉन्ग्रेस के घोषणा पत्र पर अमल का इंतजार है। उनकी सरकार से माँग है कि झुग्गी वासियों को जल्द से जल्द पट्टा दिया जाना चाहिए।

इससे पहले गोयल ने शुक्रवार (जनवरी 17, 2019) को मुख्यमंत्री कमलनाथ को चिट्ठी लिखकर धरने पर बैठने की घोषणा की थी। उन्होंने लिखा था कि सत्ताधारी दल का विधायक बनने के बाद अपने क्षेत्र के भूमिहीन परिवारों के आशियानों पर ठंड में बुल्डोजर चलते देख रहा हूँ। प्रशासन के अधिकारियों से कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता का अपमान होते देख रहे हूँ। अब वो इसे नहीं देख सकते हैं। विधायक का कहना है कि पिछले 6 महीने में मुख्यमंत्री से लेकर संबंधित मंत्रियों को वे कई बार पत्र लिख चुके हैं। लेकिन समस्याएँ जस की तस हैं।

इस मुद्दे को उन्होंने विधानसभा में 6 महीने पहले भी उठाया था, जिसमें सरकार के मंत्री ने जल्दी ही झुग्गी वासियों को पट्टे देने का ऐलान किया था। हालाँकि 6 महीने बीतने के बाद भी इस पर अमल नहीं होने वे खासे नाराज हैं। मुन्नालाल गोयल ने माँग की है कि कॉन्ग्रेस पार्टी के घोषणा-पत्र पर सरकार को तत्काल अमल करना चाहिए।

कॉन्ग्रेस विधायक ने कहा कि वे झुग्गी वासियों को पट्टे दिए जाने की माँग को लेकर कई बार मुख्यमंत्री को भी पत्र लिख चुके लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ है। इतना ही नहीं विधानसभा के विशेष सत्र में भी उन्होंने इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की थी लेकिन उनकी आवाज को सुना नहीं गया।

बीजेपी नेता गोपाल भार्गव ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया, “मध्यप्रदेश में गूंगी बहरी सरकार विपक्ष और जनता तो दूर अब अपने ही विधायकों की नहीं सुन रही। विधायक सुनीता पटेल और अब मुन्नालाल गोयल, मुख्यमंत्री कमलनाथ जी को वचन याद दिला रहे है। यह इस बात का प्रमाण है कि सरकार से, उसकी कार्यप्रणाली से उसके ही विधायक भी खुश नहीं है।” राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता शिवराज सिंह चौहान ने भी इस पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा है, “धीरे-धीरे कॉन्ग्रेस सरकार की कलई खुलने लगी है। सच्चाई सामने आने लगी है। अब तो इनके अपने ही मोर्चा खोलने पर मजबूर हो गए हैं। सच भी है, आखिर झूठ के पैबंद से कब तक सच्चाई की रोशनी को रोका जा सकेगा?”

एक दिन पहले कॉन्ग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी कहा था कि सरकार को आम लोगों की आवाज सुननी होगी। उन्होंने कहा था कि 15 साल बाद जब हमारी सरकार आई तो कार्यकर्ताओं की बात जरूर सुनी जानी चाहिए। जिन मुद्दों के सहारे कॉन्ग्रेस सत्ता पर काबिज हुई है, उन मुद्दों पर खरा उतरना सरकार की जिम्मेदारी है।

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‘सीरीज से बाहर बैठना कठिन… लेकिन मेरा परिवार डरा हुआ’: पाकिस्तान-बांग्लादेश क्रिकेट सीरीज खटाई में!

पाकिस्तान दौरे पर जाने से पहले बांग्लादेश कोचिंग टीम के 5 सदस्यों ने इस दौरे से अपने हाथ खींच लिए हैं। इसके बाद से बांग्लादेश क्रिकेट टीम का पाकिस्तान दौरा खटाई में पड़ता हुआ नज़र आ रहा है। वहीं इससे पहले बांग्लादेश के विकेटकीपर ने दौरे से अपने हाथ पीछे खींचते हुए कहा था, “मेरा परिवार पाकिस्तान में सुरक्षा के माहौल से डरा हुआ है।”

आतंकियों को पनाह देने वाले देश के रूप में कुख्यात हो चुके पड़ोसी देश पाकिस्तान में जाने से पहले किसी भी व्यक्ति को एक नहीं बल्कि हज़ार बार सोचना पड़ता है। अब इस कड़ी में उन हस्तियों का भी नाम जुड़ चुका है, जिनको सुरक्षा के नाम पर बहुत सी सुविधाएँ दी जाती हैं और पहले से ही सुरक्षा की गारंटी दी जाती है। लेकिन इस सबके बाद भी बांग्लादेश की पूरी क्रिकेट टीम पाकिस्तान दौरे के लिए सहमत नहीं है। अब ख़बर आ रही है कि बांग्लादेश के 5 कोचिंग स्टाफ ने पाकिस्तान दौरे से अपना नाम वापस ले लिया है।

दरअसल बोर्ड द्वारा सीरीज खेले जाने की हामी भरने के बाद से ही बांग्लादेश क्रिकेट टीम आपस में बँटती हुई नज़र आ रही है, जिससे बांग्लादेश का पाकिस्तान दौरा खटाई में पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

इससे पहले बांग्लादेश के विकेटकीपर बल्लेबाज पूर्व कप्तान मुशफिकुर रहीम अपने पाकिस्तान दौरे पर जाने से मना कर चुके हैं। उन्होंने दौरे से अपना नाम वापस लेते हुए कहा था, “मेरा परिवार पाकिस्तान की सुरक्षा के माहौल से डरा हुआ है। इस हालात में मैं पाकिस्तान नहीं जा सकता और वहाँ जाकर खेल नहीं सकता। बांग्लादेश क्रिकेट टीम से एक सीरीज के दौरान बाहर बैठना मेरे लिए हमेशा ही बहुत कठिन रहा है।”

आपको बता दें कि बांग्लादेश टीम को 24 जनवरी से पाकिस्तान दौरे पर तीन टी-20 मैच और दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है। वहीं दोनों देशों के बोर्ड के बीच हुई बातचीत के बाद तैयार हुए नए कार्यक्रम के मुताबिक दोनों टेस्ट मैचों के बीच एक वनडे मैच खेला जाएगा। इससे पहले बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के अध्यक्ष नजमुल हसन ने कहा था कि सरकार ने बोर्ड को बहुत संक्षिप्त समय के लिए टीम भेजने की अनुमति दी है।

₹10-10 हजार की पगार पर रखे गए थे आतंकी, BJP सांसद तेजस्वी सूर्या को मार गिराने का था प्लान

बेंगलुरु पुलिस ने आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर इस्लामी चरमपंथी संगठन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के 6 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन में 22 दिसंबर को निकली रैली में शामिल आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या का प्रयास किया था। बताया जाता है कि इनके निशाने पर बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या थे।

गिरफ्तार संदिग्धों की पहचान इरफान, सैयद अकबर, सैयद सिद्दीकी, अकबर बाशा, सनाउल्ला और सादिक अमीन उर्फ साउंड अमीन के तौर पर की गई है। ये सभी शहर के केजी हल्ली इलाके के रहने वाले हैं। बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर भास्कर राव ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आतंकी बड़ी साजिश रच रहे थे। गिरफ्तार सभी लोग SDPI से ताल्लुक रखते हैं। ये लोग CAA के समर्थन में आयोजित रैली में अव्‍यवस्‍था फैलाना चाहते थे और जानेमाने हिन्दू नेता की हत्या करना चाहते थे। कमिश्नर ने बताया कि इन सभी को अपने आकाओं (हैंडलर) से एजेंडा पूरा करने के लिए हर महीने 10,000 रुपए मिलते थे। अब इस मामले की जाँच एंटी टेरर स्क्वॉयड को सौंप दी गई है।

बता दें कि इस्लामी चरमपंथी के इन आतंकी के निशाने पर बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या और हिन्दू नेता थे। हालाँकि पुलिस की मुस्तैदी की वजह से वो इस वारदात को अंजाम न दे सके। पिछले दिनों टाउन हॉल में बेंगलुरु दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या और दक्षिणपंथी नेता चक्रवर्ती सुलीबेले की अध्यक्षता में CAA और NRC के समर्थन में रैली की गई थी।

एसडीपीआई के संदिग्ध चोरी की तीन बाइक से रैली स्थल पहुँचे थे। ये लोग रैली में मौजूद लोगों के बीच घुसकर हमला करना चाहते थे, लेकिन पुलिस बंदोबस्त के चलते ऐसा नहीं कर सके। इसके बाद ये लोग भीड़ पर पथराव कर भगदड़ की स्थिति उत्पन्न करना चाहते थे, ताकि भगदड़ के दौरान आसानी से हत्या कर सकें। हालाँकि इनके पत्थर अपना निशाना चूक गए।

दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में 18 जनवरी 2020 को प्रकाशित खबर

उन्होंने सम्मेलन में प्रमुख हिंदू नेता की हत्या करने के इरादे से एक आपराधिक साजिश रची और योजना बनाई थी। इन अभियुक्तों ने भी रैली में भाग लिया था और चूँकि पुलिस सुरक्षा कड़ी थी, इसलिए रैली के प्रमुख वक्ता और भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या को मारने की उनकी योजना विफल हो गई। इसके बाद उन्होंने कम से कम एक हिंदू कार्यकर्ता को मारने का फैसला किया और आरएसएस कार्यकर्ता वरुण पर हमला किया।

पुलिस ने बताया कि ये घटना कलसिपालिया में कुंभारगुंडी रोड के पास हुई। हमलावर दो बाइक पर थे। उन लोगों ने हत्या करने के इरादे से वरुण को बेरहमी से मारा। जख्मी वरुण के सिर, गर्दन और पीठ पर गंभीर चोटें आई। हालाँकि सही समय पर पुलिस और राहगीरों की मदद से अस्पताल पहुँचने की वजह से उनकी जान बच गई।

आरोपितों ने इस वारदात को गहरी साजिश के साथ अंजाम दिया था। इसके लिए उन्होंने पुख्ता इंतजाम किए थे। पहचान छुपाने के लिए हेलमेट पहन रखा था और एक के ऊपर एक करके लगभग 2-3 टी-शर्ट पहनी हुई थी। इन्होंने पास में मोबाइल फोन भी नहीं रखा था। मोबाइल फोन को घर पर ही छोड़ दिया था। इतना ही नहीं, इन्होंने अपने गाड़ियों की नंबर प्लेटों पर काली कालिख पोत दी थी, ताकि गाड़ी के नंबर का पता न चल सके।

आपराधिक वारदात को अंजाम देने के बाद उन्होंने पहनी हुई शर्ट को उतार दिया और बीच रास्ते में ही पेट्रोल डालकर उसे जला दिया। उन्होंने एंकल्याप के पास के एक झील में हथियार फेंक दिए और राममूर्तिनगर के पास एक तालाब में अपने हेलमेट उतार कर फेंक दिए। पुलिस ने बताया कि उन्होंने अपने जूते नाले में फेंक दिए थे और अपनी गाड़ियाँ भी छुपा दी थी। कमिश्नर भास्कर राव ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों के अंदर कट्टरपंथी सोच भरी गई और उनका काम अन्य कैडर की भर्ती करना, उन्हें प्रशिक्षण देना तथा कट्टर सोच भरना था ताकि वे शहर में तबाही फैलाने के लिए जाने-माने लोगों की हत्या कर सकें।

इस मामले में सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा, “SDPI एक संगठन है, जिसे अभी तक प्रतिबंधित नहीं किया गया है। अब यह संगठन इसलिए खतरनाक हो चुका है, क्योंकि तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इसके सदस्यों के खिलाफ मामले वापस ले लिए थे।” उन्होंने 6 SDPI सदस्यों की गिरफ्तारी को ऊँट के मुँह में जीरे की तरह बताया और कहा कि वह SDPI की गतिविधियों की जानकारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक पहुँचाएँगे।

CAA समर्थकों पर हमला करने वाले 6 गिरफ्तार, कट्टरपंथी इस्लामी संगठन SDPI से है रिश्ता

मस्जिद के अंदर नमाज़ अदा करते समय BJP नेता पर बेरहमी से हमला, इस्लामी चरमपंथी SDPI गुंडों की हरकत

CAA के विरोध के बहाने, आतंक समर्थक वामपंथी संगठन SDPI ने रोकी बीमार बेटे को ले जा रही कार

‘सरकार में आते ही दिल्ली की सभी 54 अवैध मस्जिद-मदरसे, कब्रिस्तान को गिराएगी BJP’

दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण कर बनाई गई मस्जिदों और कब्रिस्तानों का मसला एक बार फिर से उठा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने शनिवार (जनवरी 18, 2020) को बयान दिया है कि अगर भाजपा दिल्ली में सत्ता में आती है, तो शहर की सरकारी जमीनों को धार्मिक संरचनाओं के अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा।

‘कोई भी मंदिर या गुरुद्वारा सरकारी जमीन पर बना हुआ नहीं’

दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों के लिए मतदान फरवरी 08, 2020 को होगा और 11 फरवरी को चुनाव परिणाम की घोषणा होगी। BJP सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने ट्वीट में लिखा है, “दिल्ली में भाजपा की सरकार बनते ही उन सरकारी जमीनों को खाली कराया जाएगा, जिन पर धार्मिक स्थलों का निर्माण किया गया है। दिल्ली में 54 से ज्यादा मस्जिद, मदरसे सरकारी जमीन पर बने होने की शिकायत अभी तक आई है। सूची दिल्ली के उपराज्यपाल को पहले ही दी जा चुकी है।”

गत सोमवार को ही वर्मा ने कहा था कि अगर उन्हें दिल्ली में किसी भी मंदिर या गुरुद्वारा द्वारा सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किए जाने की शिकायत मिलेगी तो वह इस मामले को प्रशासन के समक्ष उठाएँगे। हालाँकि, उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में यह भी कहा, “लेकिन कोई भी मंदिर या गुरुद्वारा सरकारी जमीन पर बना हुआ नहीं मिला। सिर्फ मस्जिद ही सरकारी जमीन पर बने हुए मिले हैं।”

दिल्ली में 54 सरकारी जमीनों पर मस्जिद-कब्रिस्तान का अवैध कब्जा

लोकसभा चुनाव 2019 से ठीक पहले दिल्ली में केजरीवाल सरकार पर सरकारी जमीनों पर मस्जिद और कब्रिस्तानों को लेकर चुप्पी साधे रहने को लेकर दबाव बनाया गया था। दिल्ली से बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा ने जुलाई 11, 2019 को सरकारी जमीनों पर लगातार हो रहे अतिक्रमण को लेकर उपराज्यपाल अनिल बैजल से मुलाकात की थी।

इस दौरान 54 ऐसी सरकारी जमीनों की लिस्ट उपराज्यपाल को सौंपी गई थी, जिन पर अवैध रूप से मजार, मस्जिद और कब्रिस्तान बनाए गए हैं। उपराज्यपाल ने कहा था कि इन सभी जगहों की पड़ताल की जाएगी और अगर ऐसा कुछ पाया जाएगा तो उन कब्जों को हटाया जाएगा।

दिल्ली में सरकारी जमीनों पर बनी ‘अवैध’ मस्जिदों का टूटना निश्चित: BJP सांसद का दावा

‘मस्जिदों से ऐलान हुआ, पहले से पता था कि क्या करना है’ – दिल्ली में उपद्रव और दंगों के पीछे मुल्ला-मौलवी?

दिल्ली में 54 सरकारी जमीनों पर मस्जिद-कब्रिस्तान का अवैध कब्जा, BJP सांसद ने उपराज्यपाल को भेजी लिस्ट

किनके बच्चे आतंकी की ऊँगली थामते हैं, हाथों में पत्थर और जुबान जिहाद से रंगा होता है

कानपुर की एक मस्जिद के बाहर सादे कपड़ों में खड़े एसटीएफ अधिकारी ने जब आवाज दी- अंसारी चच्चा कैसे हो… तो एक बच्चा आतंकी जलीस अंसारी की ऊँगली थामे चल रहा था। ये बच्चा कौन था? किसका बच्चा था? इस बच्चे की पहचान जानने से ज्यादा जरूरी यह समझना है कि दूर-दूर तक इस बच्चे से जलीस अंसारी का कोई रिश्ता नहीं था।

फिर वो कौन सी बात होगी जिसने किसी को 50 से अधिक बम धमाकों में शामिल रहे, 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे, सिमी और हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकियों को बम बनाना सिखाने वाले जलीस अंसारी उर्फ डॉ. बम के हवाले अपना बच्चा कर देने को प्रेरित किया होगा। मीडिया रिपोर्टों से जाहिर है पुलिस की आँखों में धूल झोंकने के लिए ही जलीस मस्जिद से बच्चे को साथ लेकर निकला था।

परोल पर जेल से निकला जलीस मुंबई से गायब हुआ था। उसने बताया है कि वह कानपुर अपने दो दोस्तों की तलाश में आया था। उसने इनकी मदद से देश के बाहर निकलने के मंसूबे पाल रखे थे। लेकिन जब जलीस कानपुर पहुँचा तो उसे पता चला कि जिनकी तलाश में वह आया है उसमें से एक का इंतकाल हो चुका है। दूसरा कहीं और जा चुका है। फिर भी उसने मुंबई लौटने की नहीं सोची। उसे यकीन था कि अब भी वह अपने मंसूबे में कामयाब रहेगा। यह यकीन पैदा होता है एक अनजान शहर में ​अपनी पहचान छिपाने के लिए किसी का बच्चा हाथ लगने से।

आतंकियों और कट्टरपंथियों द्वारा इसी तरह बच्चों का इस्तेमाल किए जाने को लेकर पिछले दिनों चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत ने चिंता जताई थी। जनरल रावत ने रायसीना डायलॉग को संबोधित करते हुए कहा था, “हम देख रहे हैं कि छोटे बच्चों को कट्टरपंथी बनाया जा रहा है। उन्हें पहचानने की जरूरत है। उन्हें ऐसे सेंटर में डालने की जरूरत है जहॉं वो इस रास्ते से वापस आ सकें।” रावत ने यह बात कश्मीर के संदर्भ में कही थी।

लेकिन, खतरा कहीं ज्यादा पसरा है। यही कारण है कि एक अनजान शहर में ढाल बनाने के लिए जलीस को बच्चा मिल जाता है। मुजफ्फरनगर में पुलिस पर बच्चे पत्थरबाजी करते हैं। शाहीन बाग के प्रदर्शन में उनका इस्तेमाल होता है। इसी खतरे को भॉंप मुजफ्फरनगर पुलिस ने 33 लोगों पर बच्चों को उकसाने का मामला दर्ज किया है। भड़काऊ नारे लगाते बच्चों को देख गैर सरकारी संगठन सेव चाइल्ड इंडिया ने नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) का दरवाजा खटखटाया है। क्योंकि, ये बच्चे केवल किसी मदरसे में कट्टरपंथी नहीं बनाए जा रहे। न ही जहर भरने के लिए से सीमा पार भेजे जा रहे। उन्हें अपने घर में, आस-पड़ोस से कट्टरपंथ की ये ट्रेनिंग मिल रही है।

बच्चों को जिहादी रंग में रंगने वाला खतरा जब गली-गली पसर रहा है जनरल रावत की चिंता को मजहबी और सियासी रंग देने की कोशिशें भी शुरू हो गई है। इसी को ध्यान में रख हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि रणनीति बनाना प्रशासन का काम है। कोई जनरल कट्टरपंथ को लेकर रणनीति तय नहीं कर सकता। वे इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने कहा आप किस-किस को डी-रैडिकलाइज़ करेंगे? जुनैद, तबरेज, पहलू के हत्यारे को कौन डी-रैडिकलाइज़ करेगा? ओवैसी का ऐसा कहना न केवल मजहबी कट्टरपंथ पर पर्दा डालने की कोशिश है, बल्कि मॉब लिंचिंग से जोड़कर इसे सामान्य घटना की तरह पेश करना भी है। ताकि आप पैर पसार रहे इस खतरे को लेकर निश्चिंत हो जाएँ।

यकीनन, हत्या अपराध है, चाहे वह चोरी करते हुए पकड़े गए तबरेज की ही क्यों न हो। सभ्य समाज में किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जा सकती। लेकिन, तबरेज की हत्या की आड़ लेकर उन सैकड़ों-हजारों घटनाओं को दबाया नहीं जा सकता जब अल्लाहु अकबर का नाम लेते हुए कोई जुनैद दर्जनों लोगों के साथ खुद को उड़ा लेता है। जिसके नाम पर कोई कमलेश तिवारी का गला रेत जाता है। जिसके नाम पर संसद से लेकर स्कूली बच्चों के बसों तक को निशाना बनाया जाता है।

ये मजहबी कट्टरपंथ के सिलसिलेवार ट्रेनिंग से पैदा होता है। जनरल रावत ने भी कहा था, “यह स्कूलों, यूनिवर्सिटी, धार्मिक स्थलों हर जगह हो रहा है। ऐसे कुछ लोगों का समूह है, जो ये फैला रहे हैं। इस तरह के लोगों की पहचान कर दूसरे लोगों को धीरे-धीरे इनसे अलग करने की जरूरत है।” आखिर, 10 से 11 साल के बच्चे बिना किसी ट्रेनिंग के ‘जो हिटलर की चाल चलेगा, वो हिटलर की मौत मरेगा’ और ‘जामिया तेरे ख़ून से, इंकलाब आएगा’ जैसे नारे कैसे लगा सकते हैं? कोई बच्चा अपनों का इशारा पाए अनजान जलीस की ऊँगली भला क्यों थामेगा?

पुलिस और सेना आतंकवाद का सफाया कर सकती है। आतंकियों को उनके अंजाम तक पहुॅंचा सकती है। लेकिन, ये मजहबी कट्टरवाद तभी दफन होगा जब हम एक समाज के तौर पर इससे लड़ेंगे। तभी एक एमबीबीएस डॉक्टर जलीस अंसारी की पहचान डॉ बम से होनी रुकेगी। उनसे बच्चों को दूर करना होगा जो बचपन में कट्टरपंथ का बीज बोते हैं। यही बीज जब एएमयू पहुॅंचता है तो नारे हिंदुत्व से लेकर देश के प्रधानमंत्री की कब्र खोदने तक के में बदल जाता है। एक इंजीनियर जिहादी जॉन बन जाता है। इस खतरे से नहीं चेते तो आज का कोई अशफाक, मोइनुद्दीन आपके कमलेश का गला रेत जाएगा।

कॉन्ग्रेस का डबल स्टैंडर्ड: पंजाब में CAA के खिलाफ बिल, राजस्थान में पाक से आए हिंदुओं को रियायती जमीन

नागरिकता संशोधन कानून (CAA), नेशनल रजिस्टर आफ सिटिजन्स (NRC) और नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) को लेकर कॉन्ग्रेस का दोहरा मापदंड छिपा नहीं है। सत्ता में रहते हुए वह इन सब की पैरोकार थी। लेकिन, आज न केवल विरोध कर रही है, बल्कि विरोध के नाम पर हुई हिंसा में भी उसके कई नेता नामजद हुए हैं। इस मसले पर गोवा से लेकर मध्य प्रदेश तक कई नेता पार्टी स्टैंड का विरोध कर चुके हैं। यहॉं तक कि प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकारें भी इस मसले पर एकमत नहीं दिख रहीं।

कॉन्ग्रेस शासित पंजाब की सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा में CAA के खिलाफ प्रस्ताव पास किया था। CAA पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का मार्ग प्रशस्त करता है। दूसरी ओर, कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान की सरकार पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों को सहूलियत देने की बात कर रही है। गहलोत सरकार ने पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने के बाद अब रियायती दर पर जमीन आवंटित करने का ऐलान किया है।

गहलोत सरकार ने 100 हिंदू शरणार्थी परिवारों को करीब 50 फीसदी रियायत पर जमीन के कागज देगी। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यूटर्न लेते हुए पाकिस्तान से आकर भारत में बसे 100 हिंदू परिवारों को आधी कीमत पर जमीन देने का निर्णय लिया है। इससे पहले भी गहलोत के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने हिन्दुओं के लिए भारत छोड़कर पाकिस्तान चले जाने का आदेश निकाला था। मगर गृह मंत्रालय ने बड़ा क़दम उठाते हुए इस आदेश पर रोक लगा दी थी।

पाक से आए हिन्दू शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने में कॉन्ग्रेस ने सबसे ज्यादा रोड़े अटकाए और अब अशोक गहलोत हिन्दू शरणार्थियों को जमीन देने की बात कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि बीते दिनों जोधपुर में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की CAA के समर्थन रैली में उमड़ी भीड़ को देखकर अशोक गहलोत डर गए हैं। और अब अपने वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए राजस्थान की गहलोत सरकार ने पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों को अपना बनाने के लिए मुहिम शुरू की है।

इससे इनका डबल स्टैंडर्ड साफ-साफ दिख रहा है। अगर अशोक गहलोत वाकई में विस्थापितों की मदद करना चाहते हैं तो उन्हें अपने राज्य में विरोध बंद करवाकर सीएए को लागू करना चाहिए, ताकि नागरिकता पाने वाले को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। विपक्षी पार्टी बीजेपी ने भी गहलोत सरकार पर डबल स्टैंडर्ड का आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ राजस्थान सरकार नए संशोधित नागरिकता कानून का विरोध कर रही है और वही दूसरी तरफ राज्य में शरणार्थियों को सस्ती कीमतों पर जमीन दे रही है।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पुनिया ने कहा, “यह गहलोत सरकार का दूसरा यू-टर्न है। मुख्यमंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वो CAA का समर्थन कर रहे हैं या विरोध। उनकी बातें और काम एक दूसरे के विपरीत हैं।”

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5 साल तक केजरी तू घोड़े बेच कर सोया, मगरमच्छ के आँसू रोया: BJP का रैप सॉन्ग

दिल्ली विधानसभा की चुनावी जंग सबसे ज्यादा रोमांचक सोशल मीडिया पर देखने को मिल रही है। हाल ही में MEME (मीम्स) और ट्वीट्स के जरिए सोशल मीडिया पर एक दूसरे पर तंज करने वाली बीजेपी और आम आदमी पार्टी अब रैप सॉन्ग के जरिए युवाओं तक पहुँच रही है।

दिल्ली बीजेपी ने आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी पर हमला बोलते हुए एक रैप सॉन्ग रिलीज किया है। दिल्ली बीजेपी ने अपने ट्विवटर हैंडल पर एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में मास्क पहने हुए तीन युवक दिल्ली की सरकार से प्रश्न करते दिखाई दे रहे हैं, जो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की पार्टी को पलटू आदमी पार्टी बताया गया है।

दिल्ली का असली मालिक जनता को बताते हुए रैप सॉन्ग में ‘AAP’ पर कॉन्ग्रेस से गठबंधन करने को लेकर भी निशाना साधा गया है। बीजेपी ने इस रैप सॉन्ग का विडियो ट्वीट करते हुए लिखा है- “यह रैप सॉन्ग केजरीवाल के खराब गवर्नेंस को एक्सपोज करता है।”

‘पूरे पाँच साल सिर्फ तूने जनता को बनाया है…’ बोल वाले इस रैप सॉन्ग में अरविंद केजरीवाल पर 5 सालों में दिल्ली से किए वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया गया है। अन्ना का नाम लेकर सत्ता में आने और एक भी वादा पूरा न करने का आरोप लगाते हुए रैप सॉन्ग में कहा गया है कि अब पलटू राम केजरीवाल के जाने की बारी है।

वीडियो में ये तीन युवा कह रहे हैं कि पलटू राम ने दिल्ली की जनता का ‘काटा’ है। वीडियो में दिख रहा है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में पलटू आदमी पार्टी को वोट देकर फिर से अपना कटाएँ… 2 मिनट 10 सेकेंड के इस वीडियों में आम आदमी पार्टी के लिए कहा गया है कि पिछले पाँच सालों में अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने दिल्ली में कुछ भी नहीं किया है केवल दिल्ली की जनता को लूटा है। इसमें दिल्ली में गंदे पानी की शिकायत से लेकर कई अन्य ऐसी समस्याओं को उठाया गया है, जिन्हें पूरा करने में आम आदमी पार्टी पूरी तरह से विफल रही है।

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रच दिया नया इतिहास: पाकिस्तानी हिंदू महिला भारत में बनीं सरपंच, 5 महीने पहले ही मिली थी नागरिकता

राजस्थान के पंचायती चुनाव ने शुक्रवार (17 जनवरी) को एक नया इतिहास रच दिया। प्रदेश में ऐसा पहली बार हुआ है जब पाकिस्तान मूल की रहने वाली कोई महिला सरपंच बनी हो। पंचायत चुनाव के पहले चरण में टोंक के नटवाड़ा से पाकिस्तान के सिंध से भारत लौटीं नीता कँवर (36 वर्षीय) ने सरपंच का चुनाव जीत लिया है।

शुक्रवार को पहले चरण के लिए राजस्थान की 2726 ग्राम पंचायतों पर वोटिंग हुई। 17,000 प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे, लेकिन सभी की निगाहें पाकिस्तान की मूल निवासी नीता कँवर पर टिकी थीं। टोंक ज़िले की नटवाड़ा ग्राम पंचायत की उम्मीदवार नीता कँवर को 2,494 वोटों में से 1,073 वोट मिले। उन्होंने अपनी प्रतिद्वंदी सोना देवी को 362 वोटों से मात दी। बता दें कि टोंक ज़िले की नटवाड़ा ग्राम पंचायत में सात महिलाओं ने इस पद के लिए चुनाव लड़ा था।

दरअसल, नीता पाकिस्तान के सिंध प्रांत की निवासी थीं और पाँच महीने पहले ही उन्हें भारत की नागरिकता मिली। जीत दर्ज़ करने के बाद नीता ने कहा, “मैं सभी ग्रामीणों को धन्यवाद देना चाहती हूँ जिन्होंने मुझे सपोर्ट करके मुझे जीत दिलाई। मैं अपनी पूरी ईमानदारी के साथ काम करूँगी और पंचायत के विकास के लिए कड़ी मेहनत करूँगी।” इसके साथ उन्होंने अपने ससुर का भी धन्यवाद दिया क्योंकि उन्होंने इस चुनाव में उनका बहुत साथ दिया था।

बता दें कि नीता ने जिस सीट से मैदान में थीं उस पर उनके ससुर का क़ब्ज़ा था। वह टोंक जिले के उपखंड निवाई की पंचायत नटवाड़ा के एक राजपूत परिवार की बहू हैं। दैनिक भास्कर ने नीता के हवाले से बताया है की 2011 में उनकी शादी पुण्य प्रताप करण से हुई थी। उनके ससुराल की पृष्ठभूमि भी राजनीतिक रही है। राजनीति में आने की प्रेरणा उन्हें अपने ससुर ठाकुर लक्ष्मण करण से ही मिली थी।

ग़ौरतलब है कि भारत आने के 18 साल बाद नीता कंवर को पिछले साल सितंबर में नागरिकता मिली थी। वह 2001 में अपनी बड़ी बहन अंजना सोढा के साथ पाकिस्तान के सिंध के मीरपुर-खास से राजस्थान के जोधपुर आई थीं। उन्होंने 17 जनवरी को नामांकन दाखिल किया। उनका कहना है कि सीएए के जरिए भारत में अच्छा जीवन-यापन करने और अच्छी शिक्षा हासिल करने में मदद मिलेगी।

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‘…जो सावरकर का विरोध करते हैं, उन्हें 2 दिन के लिए अंडमान जेल भेजो, बलिदान का एहसास हो जाएगा’

शिवसेना सांसद संजय राउत ने वीर सावरकर को लेकर फिर एक बार कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो लोग वीर सावरकर का विरोध करते हैं वे किसी भी विचारधारा या पार्टी से हों, उन्हें दो दिन के लिए अंडमान के सेल्यूलर जेल में भेज दो। जहाँ सावरकर को बंधक बनाया गया था। तब उन्हें उनके बलिदान और उनके योगदान का अहसास होगा। बता दें कि कॉन्ग्रेस के सीनियर नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने एक दिन पहले ही यह बयान दिया था कि सावरकर के अंग्रेजों से माफी माँगने की बात मिटाई नहीं जा सकती है। ऐसे में अगर नरेंद्र मोदी सरकार सावरकर को भारत रत्न देती है तो पार्टी इसका विरोध करेगी

उल्लेखनीय है कि इससे पहले सावरकर को लेकर कॉन्ग्रेस के सेवा दल की किताब ‘वीर सावरकर कितने वीर’ में किए गए दावे पर भी संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। संजय राउत ने कहा था कि सावरकर महान थे और महान रहेंगे। जो लोग उनकी देशभक्ति पर सवाल उठा रहे हैं और उनकी आलोचना कर रहे हैं, उनके दिमाग में गंदगी भरी है।

उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश के भोपाल में कॉन्ग्रेस द्वारा चलाए जा रहे अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस सेवा दल के प्रशिक्षण शिविर में विनायक दामोदर सावरकर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर कॉन्ग्रेस द्वारा जारी की गई विवादित पुस्तिका में दावा किया गया था, “महात्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के साथ हिंदू महासभा के सह-संस्थापक का शारीरिक संबंध था।”

इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने कहा था कि ‘मेरा नाम राहुल सावरकर’ नहीं है। इस पर संजय राउत ने कहा था कि हिंदुत्व विचारक के प्रति श्रद्धा को लेकर कोई “समझौता” नहीं किया जा सकता। संजय राउत ने कहा था, “वीर सावरकर को लेकर राहुल गाँधी ने जो कुछ भी कहा, वो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के नेताओं से अपील करता हूँ कि वो वीर सावरकर के साहित्य को राहुल गाँधी को भेजें। महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के नेताओं को दिल्ली जाकर राहुल गाँधी को सावरकर की किताबें गिफ्ट करनी चाहिए, ताकि वो सावरकर को समझ सकें और उनकी गलतफहमी दूर हो सके। कॉन्ग्रेस नेताओं को राहुल गाँधी को यह भी बताना चाहिए कि वीर सावरकर ने अंग्रेजों के खिलाफ किस तरह संघर्ष किया था और लड़ाई लड़ी थी।”

संजय राउत ने ट्वीट करते हुए लिखा था, ‘‘वीर सावरकर न सिर्फ महाराष्ट्र, बल्कि पूरे देश के लिए आदर्श हैं। सावरकर का नाम राष्ट्र और स्वयं के बारे में गौरव को दर्शाता है। नेहरू और गाँधी की तरह सावरकर ने भी देश के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया। ऐसे प्रत्येक आदर्श को पूजनीय मानना चाहिए। इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता।”