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महिलाओं की पुकार सुने जुडिशरी: RS प्रसाद की सलाह के बाद बोले CJI बोबडे- न्याय तुरंत नहीं हो सकता

केंद्रीय क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भारतीय न्यायपालिका को सलाह दी है कि वो पीड़ित महिलाओं की आवाज़ सुने और उनकी उम्मीदों पर खरा उतरे। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इस देश की महिलाएँ काफ़ी गहरे दर्द में हैं और वो न्याय के लिए तड़प रही हैं। प्रसाद ने कई गणमान्य जजों व बड़े वकीलों की उपस्थिति में बोलते हुए कहा कि न्यायपालिका को इन पीड़ित महिलाओं की पुकार सुननी चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था से वो इसके लिए निवेदन कर रहे हैं।

रविशंकर प्रसाद ने आँकड़े गिनाते हुए कहा कि देश में घृणित अपराधों के लिए 704 फ़ास्ट ट्रैक अदालतें हैं और ऐसी कई अदालतें स्थापित की जाने की प्रक्रिया में हैं। उन्होंने बताया कि पॉस्को (बाल यौन अपराध संरक्षण क़ानून) के अंतर्गत आने वाले मामलों के लिए अलग से 1123 फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की प्रक्रिया चल रही है। साथ ही न्यायपालिका में अमूल-चूल बदलाव की ओर इशारा करते हुए केंद्रीय न्याय एवं विधि मंत्री ने कहा कि अब ‘ऑल इंडिया जुडिशल सर्विसेज’ का समय आ गया है क्योंकि भारत के कई लॉ स्कूलों से काफ़ी सारे प्रतिभावान छात्र-छात्राएँ निकल कर सामने आ रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री ने जुडिशरी को सलाह देते हुए कहा कि हमें प्रतिभा को आकर्षित करने की ज़रूरत है। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले साढ़े पाँच वर्षों में 469 हाईकोर्ट जजों को बहाल किया गया है। उन्होंने बताया कि नियुक्तियों को और तेज़ किया जाएगा। कॉलेजियम सिस्टम की चर्चा करते हुए प्रसाद ने कहा कि किस जज की नियुक्ति होनी चाहिए, ये कॉलेजियम को ही तय करना है। साथ ही उन्होंने जोड़ा कि जजों की नियुक्ति के समय ऐसे लोगों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए, जिनके परिवार का कोई भी सदस्य लीगल या जुडिशल सिस्टम का हिस्सा नहीं रहा हो।

केंद्रीय मंत्री ने ये बातें राजस्थान हाईकोर्ट के नए भवन के उद्घाटन के मौके पर कही। इस अवसर पर देश के नए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शरद अरविन्द बोबडे भी मौजूद थे। सीजेआई बोड़बे ने इस दौरान कहा कि न्याय अपना चरित्र खो देता है, जब यह बदले का रूप ले लेता है। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता कि न्याय त्वरित रूप से किया जा सकता है या फिर ऐसा होना चाहिए। 2018 में सरकार के ख़िलाफ़ हुए जजों के प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बोलते हुए जस्टिस बोबडे ने कहा कि न्यायिक सुधार की प्रक्रिया जुडिशरी ख़ुद करेगी और इसे सार्वजनिक रूप से करना है या नहीं, इसपर बहस हो सकती है।

नई तकनीक पर बात करते हुए सीजेआई बोबडे ने कहा कि न्यायपालिका में आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रयोग को बढ़ावा मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि पिछले महीने शुरू हुई ‘ट्रांसलेशन सर्विस’ में एआई का प्रयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ऐसा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की सलाह के बाद किया गया।

‘1,000 से ज्यादा फ़ास्ट ट्रैक अदालतें, 1 साल में होगा 1,66,882 बलात्कार-पॉक्सो मामलों का निपटारा’

देश में बलात्कार के मामलों की बढ़ती संख्या और इनमें न्याय की धीमी प्रक्रिया को देखते हुए मोदी सरकार ने देश भर में 1023 फ़ास्ट ट्रैक अदालतों के गठन का निर्णय लिया है। इनमें केवल पॉक्सो और बलात्कार के मामलों की सुनवाई होगी। इसके ज़रिए सरकार एक साल में लंबित 1,66,882 रेप और पॉक्सो मामलों का निपटारा कर देना चाहती है

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सरकार ने हर एक राज्य और हाई कोर्ट से इनके गठन और संचालन के लिए हाँ या न इसी साल 31 दिसंबर तक कर देने के लिए कहा है। इनके लिए सुझाव अगले वित्त आयोग (2020-25) की रिपोर्ट में भी होने की उम्मीद है।

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राज्य सभा में बताया कि 16 राज्यों ने केंद्र सरकार को इसके लिए हाँ कर दिया है। इसके अलावा 704 फ़ास्ट -ट्रैक अदालतों का गठन हो चुका है और उनमें न्यायिक काम चल रहा है।

भाजपा सांसद राजकुमारी दीया कुमारी ने इस निर्णय का स्वागत किया है।

उन्नाव मामले में भी उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मामले को फ़ास्ट ट्रैक अदालत के हवाले करने की घोषणा कर दी है

ठोक दिया, ठीक किया, दिल को बड़ा सूकून मिला: हैदराबाद एनकाउंटर पर ‘दंगल गर्ल’ बबीता फोगाट

शुक्रवार (दिसंबर 6, 2019) की सुबह हैदराबाद में वेटनरी डॉक्टर के साथ गैंगरेप के चारों आरोपितों के एनकाउंटर की खबर आई। इस खबर से पूरे देश में हलचल मच गई और हर तरफ से इसको लेकर प्रतिक्रिया आने लगी। इसको लेकर अधिकतर लोगों ने खुशी जताई है। अंतरराष्ट्रीय पहलवान बबीता फोगाट और गीता फोगाट ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

बबीता फोगाट ने इसको लेकर एक के बाद एक तीन ट्वीट किए। पहले ट्वीट में उन्होंने लिखा, “सुबह उठते ही सबसे पहले आज जो खबर मिली उस खबर से दिल को बड़ा सुकून मिला। हैदराबाद पुलिस ने गैंगरेप के चारों आरोपितों को एनकाउंटर में मार गिराया। पुलिस ने बड़ा ही साहसिक निर्णय लिया है और मैं पुलिस के इस निर्णय के साथ हूँ।”

दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा, “हैदराबाद पुलिस के इस निर्णय से आज पूरा देश खुशी मना रहा है। देश की महिलाओं में आज एक अलग तरह की सकारात्मक ऊर्जा का उदय हुआ है।” एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, “ठोक दिया, ठीक किया।”

पहलवान गीता फोगाट ने भी हैदराबाद पुलिस को सलाम करते हुए ट्वीट किया, “हैवानों का एनकाउंटर।”  इसके अलावा पहलवान योगेश्वर दत्त और भारतीय बैडमिंटन स्टार सायना नेहवाल ने भी इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए हैदाराबाद की पुलिस के सलाम किया। सायना नेहवाल ने लिखा, “Great work #hyderabadpolice ..we salute u”

वहीं ओलिंपिक मेडलिस्ट रेसलर योगेश्वर दत्त ने भी इस कदम के लिए हैदराबाद पुलिस की सराहना करते हुए ट्वीट किया, “सुप्रभात! आज सुबह-सुबह दिल को सुकून पहुँचाने वाली खबर मिली। हैदराबाद में यह एनकाउंटर हमारे कानून के रक्षकों की समाज के राक्षसों पर शानदार विजय है। पुलिस विभाग को कोटि-कोटि नमन। निर्णय का तरीका चाहे जो रहा हो, परंतु इसमें लिया गया समय काबिले-तारीफ है।”

एक अन्य ट्वीट में योगेशेवर दत्त ने लिखा, “जो भी हुआ बहुत अच्छा हुआ देश के दिल को थोड़ा सा सकुन मिला आज। राक्षसों से कोई हमदर्दी नहीं।”

राज्यपाल ने औरंगज़ेब के साथ की CM ममता बनर्जी की तुलना, कहा- बंगाल में लोकतंत्र ख़त्म

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तुलना क्रूर इस्लामिक शासक औरंगज़ेब से की है। सीएम ममता ने कुछ दिनों पहले धनखड़ को तुगलक की संज्ञा दी थी। इसपर प्रतिक्रिया देते हुए धनखड़ ने कहा कि ममता बनर्जी के सारे काम उन्हें मुग़ल आक्रांता औरंगज़ेब की याद दिलाते हैं। उन्होंने कहा कि वो ममता को औरंगज़ेब नहीं कह रहे हैं, लकिन ‘बंगाल की आयरन लेडी’ उसी की तरह काम कर रही हैं। उन्होंने समानांतर सरकार चलाने के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि अगर ये सच होता तो ये सब होता ही नहीं लेकिन आरोप लगते रहते हैं।

राज्यपाल ने तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार की कार्यशैली पर चिंता जताते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र पूरी तरह ख़त्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि वीसी रूम बंद कर दिया जाता है और विधानसभा के गेट को बंद कर दिया जाता है। राज्यपाल ने बताया कि जब वो शहरों के दौरे पर जाते हैं तो उन्हें वहाँ कोई नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि उनके साथ वही हो रहा है, जो औरंगज़ेब ने छत्रपति शिवाजी के साथ किया था। उन्होंने कहा कि सरकार में पाँच-छह ऐसे मंत्री हैं जो उन्हें लगातार परेशान कर रहे हैं। राज्यपाल ने आरोप लगाया कि उन्हें सूचित किए बिना ही विश्वविद्यालयों में वीसी की नियुक्ति कर दी जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के साथ मिल कर लोकल टीवी चैनल व स्थानीय मीडिया भी उन्हें लगातार परेशान कर रहा है। राज्यपाल ने कहा कि ‘मिशन मोड पर चलने वाली’ मुख्यमंत्री के इशारे पर स्थानीय अख़बार उनका नाम उछालते हैं। ‘इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट’ में बोलते हुए राज्यपाल धनखड़ ने कहा:

“मैं एक संवैधानिक पद पर हूँ। मुझे पश्चिम बंगाल के लोगों की सेवा करनी है। लेकिन, मुख्यमंत्री लोगों से मेरे बारे में कुछ भी उलटा-सीधा कहते रहती हैं। अगर वो राज्यपाल की इज्जत नहीं करेंगी तो फिर कैसे चलेगा? एससी-एसटी बिल को लेकर मेरे पास फाइल आई तो मैंने 3 दिन इंतज़ार करने के बाद बताया कि ये क़ानून तो पहले से ही है। इसका उनके पास कोई जवाब नहीं। लिंचिंग वाले बिल पर मैंने सभी को टेक्स्ट भेजने को कहा लेकिन मेरे द्वारा भेजा गया टेक्स्ट विपक्षी नेताओं को मिला ही नहीं। “

राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा कि ममता बनर्जी लड़ाई कर रही हैं और उनका निशाना वो हैं। उन्होंने बताया कि ममता बनर्जी को चाय पर बुलाने के बावजूद वो नहीं पहुँचीं। हालाँकि, राज्यपाल ने ये भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वो कनेक्ट नहीं हैं। उन्होंने बताया कि राज्यपाल बनने के बाद वो पीएम से मिले थे।

‘राजीव गाँधी से तत्काल वापस लिए जाएँ भारत रत्न, 1984 में सेना बुलाई होती तो न होतीं हजारों सिखों की हत्याएँ’

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने माँग की है कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी को 1991 में मरणोपरांत दिया गया ‘भारत रत्न’ तत्काल वापस लिया जाए। शुक्रवार (दिसंबर 6, 2019) को चंडीगढ़ में मीडिया से बात करते हुए बादल ने कहा कि नए खुलासे से साफ हो जाता है कि राजीव गाँधी ने नरसंहार को रोकने के लिए सेना को इजाजत नहीं दी थी। उन्होंने राजधानी दिल्ली में सिखों के नरसंहार को रोकने के लिए सेना की तैनाती नहीं होने दी थी क्योंकि इस नृशंस घटना के पीछे उनके परिवार का हाथ था।

सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह का बयान भी इस आरोप की पुष्टि करता है कि अगर राजीव गाँधी ने कॉन्ग्रेस नेताओं के नेतृत्व में किए जा रहे दंगे को रोकने के लिए सेना को बुलाने की अपील पर ध्यान दिया होता तो 1984 के सिख नरसंहार को रोका जा सकता था। दंगाई सिखों और उनकी संपत्ति को निशाना बना रहे थे। बादल ने कहा कि मनमोहन सिंह के बयान के अलावा केंद्रीय गृह मंत्रालय के रिकॉर्ड से भी साबित होता है कि राजीव गाँधी की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में सेना को नहीं बुलाने का निर्णय लिया गया था।

उन्होंने आगे कहा, “पूरा सिख समुदाय इस बात से आक्रोशित है कि एक व्यक्ति, जिसने हजारों सिखों के दमन की योजना बनाई और उसकी देखरेख में इसे रोकने की अपील को नजरअंदाज किया गया, उसे देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार दे दिया गया। इस अन्याय को सुधारा जाना चाहिए। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करता हूँ कि राजीव गाँधी से तत्काल इस सम्मान को वापस लिया जाए।”

सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि राजीव गाँधी और उन सभी लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया जाना चाहिए, जिन्होंने कॉन्ग्रेस के गुंडों द्वारा लूटमार को रोकने के लिए सेना को दिल्ली में आने से रोका था। राजनीतिक नेताओं और उन अफसरों को, जो इस अपराध के लिए जिम्मेदार हैं, को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। इससे भविष्य की पीढ़ी के सामने ऐसी बर्बरता करने वालों के प्रति सबक पेश किया जा सकेगा।

इसके अलावा शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष ने केंद्र सरकार से सड़कों, संस्थाओं और योजनाओं आदि से राजीव गाँधी का नाम हटाने की माँग करते हुए कहा कि सभी सड़कों, एयरपोर्ट्स, संस्थाओं और सरकारी योजनाओं से राजीव गाँधी का नाम तत्काल हटाया जाए।

उनका कहना है कि देश किसी ऐसे व्यक्ति का सम्मान नहीं कर सकता जिसने कसाई का काम किया है। उन्होंने कहा कि शहीद भगत सिंह और शहीद उधम सिंह जैसे शहीदों को सम्मानित करने के लिए सभी स्थलों और योजनाओं का नाम बदला जा सकता है, जो इस सम्मान के वास्तव में हकदार हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी कदम सिख समुदाय की भावनाओं के अनुरूप हैं और 1984 के नरसंहार के पीड़ितों की पीड़ा को कम करने में मददगार होंगे।

इस दौरान उन्होंने पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आखिर क्यों वो अभी तक इस मामले पर चुप हैं और गाँधी परिवार को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जबिक पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान से खुलासा हो गया है कि कॉन्ग्रेसी गुंडों के नेतृत्व में किए जा रहे नरसंहार को रोकने के लिए राजीव गाँधी ने सेना को इजाजत नहीं दी थी। आगे बादल ने अमरिंदर सिंह को निशाने पर लेते हुए कहा, “यह दिखाता है कि आपके लिए गाँधी परिवार की गुड बुक्स में रहना और अपनी कुर्सी को बचाना, अपने समुदाय के साथ खड़े होने और इसके खिलाफ नरसंहार करने वालों के लिए कठोर सजा की माँग करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है।”

प्रियंका गाँधी पहुँचीं उन्नाव, UP पुलिस की लाठीतोड़ पिटाई के बाद भागे प्रदर्शनकारी कॉन्ग्रेसी

इधर कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी उन्नाव गैंगरेप पीड़िता के परिवार से मिलने पहुँचीं, उधर यूपी में कॉन्ग्रेसी भी योगी सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करते हुए सड़कों पर निकल गए। लेकिन उत्तर प्रदेश विधानसभा के बाहर कॉन्ग्रेस के झंडे लेकर पहुँचे कार्यकर्ताओं ने तब भागना शुरू कर दिया, जब यूपी पुलिस ने लाठियों से उन्हें जम कर पीटा। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी वायरल हो गया। इसमें देखा जा सकता है कि पुलिस ने जम कर लाठिया भाँजते हुए प्रदर्शनकारी कॉन्ग्रेसियों की बखिया उधेड़ दी। अफरातफरी के बीच सभी कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता अपनी पार्टी का झंडा-बैनर लिए पुलिस से बचते हुए भाग निकले।

बता दें कि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी विधानसभा में ही धरने पर बैठे हुए हैं। उनका आरोप है कि अपराध कम करने का दावा करने वाली योगी सरकार ‘उन्नाव की बेटी’ को नहीं बचा पाई। उन्नाव गैंगरेप पीड़िता को उन्हीं 5 लोगों ने जला कर मार डाला, जिन पर उसके साथ बलात्कार का आरोप था। सुनवाई के लिए रायबरेली कोर्ट जा रही पीड़िता बचने के लिए 1 किलोमीटर तक भागती रही और पुलिस को फोन तक किया लेकिन आरोपितों ने केरोसिन तेल डाल कर उसे जला डाला। मरने से पहले पीड़िता ने कहा था कि वो गुनहगारों को मौत की सज़ा मिलते देखना चाहती हैं।

चूँकि पीड़िता का शरीर 90% जल चुका है, उसके भाई ने कहा है कि अंतिम क्रियाकर्म के लिए जलाने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कुछ बचा ही नहीं है। इसीलिए, परिजनों ने उसे दफनाने का फ़ैसला लिया है। इधर प्रियंका गाँधी ने उन्नाव पहुँच कर परिजनों से मुलाक़ात करने के बाद कहा कि यूपी में क़ानून-व्यवस्था विफल रही है। वहीं उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी सज़ा दिलाने का भरोसा दिया। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा:

“ये एक बहुत ही निंदनीय घटना है। यह काला दिन है। भाजपा सरकार के आने के बाद होने वाली यह इस तरह की पहली घटना नहीं है। सीएम योगी ने विधानसभा में कहा था कि अपराधियों को ठोक दिया जाएगा लेकिन वो एक बेटी को नहीं बचा पाए। जब तक यूपी के मुख्यमंत्री, डीजीपी और गृह सचिव इस्तीफा नहीं देते, तब तक इस मामले में न्याय नहीं हो सकता। उन्नाव वारदात को लेकर कल सभी जिलों में सपा शोक सभा आयोजित करेगी।”

बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी इस घटना को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि इस किस्म की दर्दनाक घटनाओं को यूपी सहित पूरे देशभर में रोकने हेतु राज्य सरकारों को चाहिए कि वे लोगों में कानून का खौफ पैदा करे। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र भी ऐसी घटनाओं को मद्देनजर रखते हुये दोषियों को निर्धारित समय के भीतर हीफाँसी की सख़्त सज़ा दिलाने का क़ानून ज़रूर बनाए।

मैं अपनी बहन को दफनाऊँगा क्योंकि जलाने के लिए कुछ बचा ही नहीं है: उन्नाव पीड़िता का भाई

‘हैदराबाद के जैसा दौड़ा-दौड़ाकर गोली मारी जाए…’ – उन्नाव में जला कर मार दी गई बेटी के पिता का छलका दर्द

समाज एनकाउंटर पर जश्न मनाता है, तो उसका कारण है: उन्नाव की बेटी भी कल मर गई

9 दिसंबर तक शवों को ना तो जलाया-दफनाया जाए, ना ही घर वालों को सौंपा जाए: हाई कोर्ट का आदेश

सरदार पटेल के स्टैच्यू ऑफ यूनिटी ने तोड़ डाला अमेरिका के स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी का रिकॉर्ड

अपने अनावरण के साल भर बाद ही स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को प्रतिदिन देखने आने वाले पर्यटकों की संख्या अमेरिका के 133 साल पुराने स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के पर्यटकों से अधिक हो गई है। गुजरात स्थित इस स्मारक को देखने औसतन 15000 से अधिक पर्यटक रोज पहुँच रहे हैं।

सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड ने एक बयान में कहा है, ”पहली नवंबर, 2018 से 31 अक्टूबर, 2019 तक पहले साल में रोजाना आने वाले पर्यटकों की संख्या में औसतन 74 फीसदी वृद्धि हुई है और अब दूसरे साल के पहले महीने में पर्यटकों की संख्या औसतन 15036 पर्यटक प्रतिदिन हो गई है।”

बयान में कहा गया, ”सप्ताहांत के दिनों में यह 22,430 हो गई है। अमेरिका के न्यू यॉर्क में स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी को देखने रोजाना 10000 पर्यटक पहुँचते हैं।” स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर ऊँची प्रतिमा है। यह दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा है।

यह प्रतिमा गुजरात में केवड़िया कॉलोनी में नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध के समीप है। भारतीय मूर्तिकार राम वी सुतार ने इसका डिजायन तैयार किया था। पहली बार वर्ष 2010 में इस परियोजना की घोषणा की गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अक्टूबर, 2018 को उसका अनावरण किया था।

सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड के बयान में कहा गया है कि इस स्मारक के पर्यटकों की संख्या में वृद्धि का श्रेय जंगल सफारी, बच्चों के न्यूट्रीशन पार्क, कैक्टस गार्डन, बटरफ्लाई गार्डन, एकता नर्सरी, नदी राफ्टिंग, बोटिंग आदि जेसे नये पर्यटक आकर्षणों को दिया है। बयान के अनुसार, ”इन अतिरिक्त पर्यटक आकर्षणों से नवंबर, 2019 में पर्यटकों की रोजाना संख्या में इज़ाफ़ा हुआ है।” इसके अलावा इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि इस साल 30 नवंबर तक केवडिया में 30,90,723 पर्यटक पहुँचे, जिससे कुल 85.57 करोड़ रुपए की आय हुई है।

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NDTV की इंटरनेशनल बेइज्जती: ओबामा को लेकर छापा था फेक न्यूज, अमेरिका में उड़ाया गया मजाक

मीडिया संस्थान NDTV को एक ऐसे चैनल के रूप में जाना जाता है, जिसका बेहूदा और बेशर्म तरीके से झूठ फैलाने का एक लंबा इतिहास रहा है। चैनल ने पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर इस तरह से बेशर्म कारनामे करने में काफी कामयाबी हासिल की है। इसमें वित्तीय धोखाधड़ी से लेकर पाकिस्तान के एजेंडे को हवा देना, भारत को नीचा दिखाना और 26/11 के आतंकी हमले के दौरान लोगों के जान को खतरे में डालना शामिल है। हालाँकि हमें इनके ‘कारनामे’ के बारे में कम ही पता था। जानकारी के मुताबिक NDTV अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी बेइज्जती करवा चुका है। बता दें कि 2012 में एक अमेरिकी टीवी शो ‘द न्यूज़रूम’ में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका मजाक उड़ाया गया था।

हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ है। जिसे एडवोकेट जे साई दीपक ने ट्विटर पर शेयर किया। इसमें 2012 में सीजन 1 के एपिसोड 4 में ‘द न्यूज़रूम’ का एक वीडियो दिखाया गया है। वीडियो में NDTV द्वारा फैलाए जा रहे झूठ के एक भाग को दिखाया गया है।

इस कड़ी के सेगमेंट में, विल मैकऑन ने जेफ डेनियल की भूमिका निभाई, जो न्यूज नाइट के एंकर और मैनेजिंग एडिटर हैं। वह समाचार प्रस्तुत करते हुए इस बात पर चर्चा करते हैं कि कैसे झूठ को दुनिया भर में फैलाया जाता है।

‘द न्यूजरूम’ सीरीज के एपिसोड का स्क्रीनशॉट

इस दौरान एंकर ने उस झूठ के बारे में बात करते हुए 2010 के NDTV के एक लेख का उल्लेख किया। जिसमें तत्कालीन राष्ट्रपति ओबामा भारतीय प्रधानमंत्री के साथ व्यापार संबंधों को मजबूत करने के लिए मुंबई, भारत का दौरा करने वाले थे। एंकर का कहना था कि इस तरह की यात्राओं में आम तौर पर प्रति दिन 5 मिलियन डॉलर खर्च होते हैं। फिर एंकर ने NDTV के एक लेख को उद्धृत किया, जिसमें गुमनाम स्रोतों के हवाले से कहा गया था कि इस यात्रा के लिए प्रति दिन $200 मिलियन खर्च होंगे। इसके बाद एपिसोड में यह बताया गया कि कैसे अमेरिकी मीडिया ने बगैर हकीकत का पता लगाने की कोशिश किए इसे प्रसारित किया। जबकि व्हाइट हाउस ने एक बयान जारी करते हुए इसे गलत बताया था।

‘द न्यूजरूम’ जैसे अमेरिकी टीवी शो में NDTV के नाम का मजाक उड़ाया जाना एक ऐसा कारनामा था, जिसने लोगों का काफी ध्यान खींचा, NDTV का भी। इसके बाद NDTV का वापस से प्रतिष्ठा हासिल करना असंभव सा लगता है। बता दें कि NDTV ने 2010 में जो लेख प्रकाशित की थी, वह मूल रूप से पीटीआई एजेंसी फीड थी।

2010 में NDTV द्वारा प्रकाशित लेख

पीटीआई एजेंसी फीड में कहा गया था, “महाराष्ट्र सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि सुरक्षा, ठहरने और राष्ट्रपति के दौरे के अन्य पहलुओं पर लगभग $200 मिलियन की भारी-भरकम राशि खर्च की जाएगी।” इसमें आगे कहा गया कि गुप्त सेवा एजेंटों, अमेरिकी सरकारी अधिकारियों और पत्रकारों सहित लगभग 3,000 लोग राष्ट्रपति के साथ होंगे। व्हाइट हाउस और अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के कई अधिकारी पिछले एक सप्ताह से हेलीकॉप्टर, एक जहाज और उच्च सुरक्षा वाले सुरक्षा उपकरणों के साथ यहाँ पहले से ही मौजूद हैं।

हालाँकि, इस खबर को उस समय अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से नकार दिया था। लेकिन जैसा कि नकली-समाचार आउटलेट NDTV की प्रकृति है, यूएस की प्रतिक्रिया को लेख में कभी नहीं जोड़ा गया। बता दें कि ‘द न्यूजरूम’ एक अमेरिकी टेलीविजन राजनीतिक ड्रामा सीरीज है, जिसे मुख्य रूप से आरोन सोरकिन द्वारा लिखा गया है, जिसका 24 जून, 2012 को एचबीओ पर प्रीमियर हुआ था और 14 दिसंबर 2014 को समाप्त हुआ था। ये सीरीज 3 सीजन में दिखाया गया। जिसमें 52 से 73 मिनट के 25 एपिसोड थे।

हैदराबाद एनकाउंटर पर रवीश कुमार के प्राइम टाइम की स्क्रिप्ट हुई लीक, NDTV में मचा हड़कम्प

NDTV की एंकर फैला रही थी फेक न्यूज़, वो भी भारत विरोधी… रक्षा विशेषज्ञ ने लगाई क्लास

NDTV ने मॉंगी माफी: असम के अविवाहित CM को बताया था 6 बच्चों का बाप

काले जादू से बच्चे की मौत, जिम्मेदार था मुस्लिम आलिम… NDTV और मीडिया गिरोह ने लिखा तांत्रिक

वीरप्पन को मार गिराने के बाद 450 Km पैदल चल मंदिर में करवाया था मुंडन, अब बने शाह के सलाहकार

पूर्व आईपीएस अधिकारी के विजय कुमार को केंद्रीय गृह मंत्रालय में बतौर सलाहकार नियुक्त किया गया है। विजय कुमार को कई राज्यों की पुलिस की नाक में दम कर के रखने वाले खूँखार डाकू एवं तस्कर वीरप्पन को मार गिराने के लिए जाना जाता है। उन्हें गृह मंत्रालय में वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल 1 वर्ष का होगा। 1975 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे विजय कुमार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जम्मू कश्मीर और वामपंथी आतंकवाद से पीड़ित राज्यों के मुद्दे पर सलाह देंगे। 67 वर्षीय कुमार की नियुक्ति को लेकर 3 दिसंबर को सरकार ने नोटिफिकेशन जारी किया

के विजय कुमार इससे पहले कई बड़े पदों पर रह कर अपनी क्षमता का परिचय दे चुके हैं। उन्हें जम्मू कश्मीर मामलों का सलाहकार इसीलिए बनाया गया है क्योंकि वो पहले भी वहाँ के राज्यपाल के सलाहकार रह चुके हैं और उन्हें राज्य की स्थितियों का का अच्छा अनुभव है। वो सीआरपीएफ के डायरेक्टर जनरल रह चुके हैं। उन्होंने हैदराबाद में स्थित नेशनल पुलिस अकादमी में बतौर डायरेक्टर काम किया है। वो 2012 में सीआरपीएफ के डीजी से रिटायर हुए थे।

के विजय कुमार को बहुचर्चित चन्दन तस्कर वीरप्पन को मार गिराने के लिए जाना जाता है। उन्होंने तमिलनाडु पुलिस की उस स्पेशल टास्क फ़ोर्स का नेतृत्व किया था, जिसने सालों तक कई राज्यों की पुलिस को छकाने वाले वीरप्पन को 2004 में मार गिराया था। वीरप्पन जंगलों में छिपा रहता था और उसे पूरे जंगल की एक-एक जगह की जानकारी रहती थी। इस कारण उसे पकड़ने के लिए पुलिस जब भी जंगलों में जाती तो पुलिस फ़ोर्स को भारी क्षति होती थी। इसके बाद पुलिस ने किसी तरह वीरप्पन को जंगल से बाहर निकालने की योजना बनाई थी।

के विजय कुमार के बारे में एक और जानने लायक बात ये है कि वीरप्पन के ख़ात्मे के बाद एक मंदिर में उन्होंने अपना मुंडन करवाया था। ‘ऑपरेशन कोकून’ के नायक विजय कुमार ने सत्यमंगलम में स्थित बन्नारी अम्मान मंदिर में अपने सिर का मुंडन करवाया था। उस मंदिर में जाकर बाल मुँड़वाने के लिए उन्होंने चेन्नई से 450 किलोमीटर का सफर चल कर तय किया था। 4 दशकों तक पुलिस का सिरदर्द बने वीरप्पन को मार गिराने के लिए पूरे देश में उनकी ख़ासी वाहवाही हुई थी।

वीरप्पन को पकड़ने के लिए 1992 में भी स्पेशल टास्क फ़ोर्स का गठन किया गया था। कर्णाटक और तमिलनाडु की सरकारों ने एसटीएफ का गठन किया था। वीरप्पन के आपराधिक कारनामों का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने कन्नड़ सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार कहे जाने वाले वरिष्ठ अभिनेता डॉक्टर राजकुमार का अपहरण कर लिया था। इससे तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच तनाव व्याप्त हो गया था और पूरे कर्नाटक में हिंसा भड़क गई थी। उसने कर्नाटक के मंत्री नागप्पा का भी अपहरण किया था। आख़िरकार वीरप्पन को 2004 में विजय कुमार ने नेतृत्व वाली एसटीएफ ने मार गिराया।

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सऊदी एयर फोर्स के मो. सईद ने अमेरिका के नौसेना अड्डे पर की गोलीबारी: हमलावर समेत 4 की मौत, 8 घायल

अमेरिका के फ्लोरिडा में शुक्रवार (6 दिसंबर) को नौसेना के अड्डे में सऊदी वायु सेना का एक शूटर घुस आया और उसने अमेरिकी नौसेना स्टेशन में आग लगा दी। फ्लोरिडा के अधिकारियों ने बताया कि इस दौरान तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि आठ लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने इस घटना को आतंकवादी हमले की संभावना करार दिया है।

एसकैम्बिया काउंटी के शैरिफ कार्यालय ने ट्विटर पर एक संदेश जारी किया। इस संदेश में कहा गया है कि पेनसाकोला में स्थित नौसेना अड्डे में अब कोई सक्रिय शूटर नहीं है। अमेरिकी नौसेना ने पुष्टि की कि हमलावर के अलावा एक व्यक्ति को गोलीबारी में मार दिया गया है साथ ही घायलों को इलाज के लिए ले जाया गया है। गोलीबारी के बाद घायलों को पास के अस्पतालों में भेज दिया गया।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस घटना पर शोक व्यक्त करते हुए कहा वो नौसेना एयर स्टेशन पेनासाकोला में व्यक्तिगत रूप से स्थिति पर नज़़र रखते हैं, जहाँ 16,000 से अधिक सैन्यकर्मी और 7,400 नागरिक कार्यरत थे।

ख़बर के अनुसार, शूटर का नाम मो. सईज अलशमरानी है। वह सऊदी अरब का नागरिक है। इस घटना के बाद ट्रम्प ने अपने ट्वीट में लिखा कि उन्हें फ्लोरिडा में एनएएस पेनासाकोला में दु:खद शूटिंग पर पूरी ब्रीफिंग से अवगत कराया गया और इस घटना के बारे में फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डेसेंटिस से बात हुई। उन्होंने कहा, “इस कठिन समय में मेरी प्रार्थनाएँ पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ हैं। हम स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं, जाँच प्रक्रिया अभी जारी है।”

ट्रम्प ने शुक्रवार दोपहर एक ट्वीट में कहा कि सऊदी अरब के राजा सलमान ने भी इस घटना पर शोक व्यक्त किया है और हमले में मारे गए लोगों और घायलों के परिजनों व दोस्तों के के प्रति सहानुभूति व्यक्त की है।

NBC समाचार ने बताया कि संदिग्ध शूटर की पहचान सऊदी के मोहम्मद सईद अलशमरानी के रूप में की गई है। एस्कामिया काउंटी शेरिफ डेविड मॉर्गन के अनुसार, वह कथित तौर पर अमेरिका में प्रशिक्षण पर था और उसने हमला करने के लिए एक हैंडगन का इस्तेमाल किया था।

इस मामले की जाँच FBI के नेतृत्व में की जा रही है क्योंकि फ्लोरिडा के अधिकारियों ने इसे आतंकवादी हमला होने की संभावना से इनकार नहीं किया। स्थानीय क़ानून प्रवर्तन अधिकारियों के अनुसार, यह सब सुबह 6.50 बजे शुरू हुआ जब नौसैनिक अड्डे पर गोलाबारी की ख़बरें आईं और दो काउंटी शेरिफ डिपो घटनास्थल पर पहुँच गए।

दो लोग आग लगने से घायल हो गए और एक के हाथ में गोली लग गई, वहीं एक अन्य के पैर में चोट लग गई। दो घायलों की सर्जरी करनी पड़ी। इनके अलावा छ: अन्य लोग भी घायल हो गए।

Dailymail ने NBC के हवाले से लिखा कि सऊदी नागरिक मोहम्मद सईद अलशरामनी के रूप में पहचाने जाने वाले इस शख्स ने शुक्रवार तड़के पेनसाकोला के नेवल एयर स्टेशन में एक क्लासरुम के अंदर आग लगा दी। पुलिस ने तुरंत घटना का जवाब दिया और उसे गोली मार दी। इस बीच छ: अन्य सऊदी नागरिकों को हमले के तुरंत बाद बेस के पास से गिरफ़्तार कर लिया गया। शूटर ने शुक्रवार सुबह 7 बजे से कुछ देर पहले एक क्लासरुम की इमारत में आग लगा दी। हमले में हमलावर समेत चार लोगों की मौत हो गई और आठ अन्य घायल हो गए।

एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स के दौरान, फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डेसेंटिस (Ron DeSantis) ने इस बात की पुष्टि की कि शूटर सऊदी अरब का था, जो लंबे समय से अमेरिका के सैन्य अधिकारियों को प्रशिक्षित कर रहा था। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “ज़ाहिर तौर पर इस व्यक्ति के विदेशी नागरिक होने, सऊदी वायु सेना का हिस्सा होने और फिर हमारी धरती पर प्रशिक्षण देने के बारे में कई सवाल उठ रहे होंगे।” डेसेंटिस ने कहा कि सऊदी अरब सरकार को इस हमले में घायल हुए पीड़ितों की बेहतरी के लिए ठोस क़दम उठाने चाहिए।  

ग़ौरतलब है कि एक दिन पहले ही अमेरिका के एक सैन्य अड्डे पर्ल हार्बर नेवल शिपयार्ड में गोलीबारी हुई थी। स्थानीय समयानुसार शाम 2.30 बजे इस जॉइंट बेस पर्ल हार्बर-हिकम में गोलीबारी शुरू हुई थी। पर्ल हार्बर या ‘पर्ल बंदरगाह’ हवाई द्वीप में हॉनलूलू से दस किमी उत्तर-पश्चिम, संयुक्त राज्य, अमेरिका का प्रसिद्ध बंदरगाह एवं नौसैनिक अड्डा है। इस बंदरगाह के 20 वर्ग किलोमीटर की परिधि में सैकड़ों जहाजों के ठहरने का स्थान है। हाल के दिनों में अमेरिका के वाशिंगटन डीसी, टेक्सास, ओहियो और फ्लोरिडा समेत कई जगहों पर गोलीबारी की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं।

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