Home Blog Page 5382

हाफिज सईद के बेटे ने शुरू किया आतंकी ट्रेनिंग कैंप: डर से ISI ने करवाया था बंद

पाकिस्तान के मीरपुर और सियालकोट में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का ट्रेनिंग कैंप फिर से शुरू हो गया है। अंतरराष्ट्रीय दबाव के डर से पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई ने कुछ समय पहले इसे बंद कर दिया था। दोबारा से इसे शुरू तलहा सईद ने किया है। वह आतंकी सरगना और मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का बेटा है।

खुफिया रिपोर्टों के आधार पर इंडिया टुडे ने यह जानकारी दी है। खबर के मुताबिक लश्कर के लिए खोला गया यह कैंप मीरपुर के मांगला और सियालकोट के हेड मराल में है। लश्कर ने इन कैंपों के लिए आतंकियों की भर्ती भी शुरू कर दी है। भर्ती स्वात घाटी के पास पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा से सटे कबीलाई इलाकों, पेशावर, क्वेटा और इलाका-ए-घैर में की जा रही है।

बीते दिनों आईएसआई और आतंकी संगठनों के बीच कई बैठकें भी हुईं थी। इनमें POK में सक्रिय कई आतंकी संगठनों के कमांडरों ने हिस्सा लिया था। इसके बाद तय किया गया कि ‘कश्मीरी जिहाद’ के कंट्रोल रूम पीओके और पाक-अफगान सीमा पर बनाए जाएँगे। साथ ही आतंकियों की नई भर्ती पर भी जोर दिया जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान अपने संसाधनों को अफगान सीमा से सटे कबीलाई इलाकों को हटा कर जम्मू-कश्मीर की ओर फोकस कर रहा है। साथ ही एलओसी पर भी पाकिस्तानी सेना गतिविधि बढ़ाने में लगी है। अभी हाल ही में इन सबके मद्देनजर जम्मू-कश्मीर में कई जगहों पर आतंकी ग्रुपों की बड़ी हरकत नोटिस की गई थी।

जानकारी के अनुसार ISI के निर्देश पर पाकिस्तान में आर्मी यूनिट्स के बीच ही आतंकियों के लिए बंकर बनाए जा रहे हैं। जिन्हें ’10 बलूच’ की ओर से तैयार किया जाना है। आईएसआई ने ‘कूरियर एंड गाइड’ को रेकी करने, नक्शे तैयार करें और आतंकियों की घुसपैठ के लिए रूट तैयार करने को कहा है।

Odd-Even पर केजरीवाल सरकार को हाईकोर्ट का नोटिस, कहा- 5 नवंबर से पहले करें इन याचिकाओं का निस्तारण

राजधानी दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए 4 नवंबर से 15 नवंबर तक ऑड-इवन स्कीम लागू की जाएगी। इसे रोकने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में कई जनहित याचिकाएँ डाली गई थीं। शुक्रवार (1 नवंबर) को इन याचिकाओं को सुनने से हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया। कोर्ट का कहना है कि याचिकाकर्ता अपनी बात लेकर दिल्ली सरकार के पास जाएँ। 

कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वो ऑड-इवन स्कीम के ख़िलाफ़ याचिकाओं पर विचार करे और इन याचिकाओं का 5 नवंबर से पहले क़ानून के अनुसार निपटारा करे। हालाँकि, सभी याचिकाकर्ता अगर दिल्ली सरकार से संतुष्ट नहीं हुए तो वो दोबारा कोर्ट का रुख़ कर सकते हैं। 

दरअसल, इन याचिकाओं में से कुछ याचिकाएँ ऑड-इवन नियम को लागू होने से रोकने के लिए डाली गई थी। साथ ही कुछ याचिकाएँ CNG कारों को इस नियम से छूट न दिए जाने ख़िलाफ़ थी। इसके अलावा याचिकाकर्ताओं ने यह दलील भी दी थी कि महिला चालकों को छूट देकर समानता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन किया गया है। इस पर शाश्वत भारद्वाज द्वारा याचिका में कहा गया कि लिंग के आधार पर नियम में भेदभाव करना समानता के अधिकार का उल्लंघन है, इसलिए यह योजना अदालत को रद्द कर देनी चाहिए क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद-14 का उल्लंघन है।

बता दें कि पहले की तरह इस बार भी दोपहिया वाहनों को को ऑड-इवन नियम में छूट दी गई है, लेकिन 5 लाख CNG वाहनों को दिल्ली सरकार ने छूट नहीं दी है। CNG गाड़ियों को छूट नहीं देने के साथ अन्य माँगों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में कई जनहित याचिकाएँ दायर की गई थीं। इन याचिकाओं पर कोर्ट आगे सुनवाई करेगा।

नगालैंड: शांति बहाली की उम्मीदें बढ़ीं, अलग संविधान पर नरम पड़ा एनएससीएन (आईएम)

नगालैंड में शांति बहाल होने की उम्मीदें बढ़ गई है। वार्ता के आखिरी दिन सरकार और एनएससीएन (आईएम) के बीच जारी गतिरोध टूटने की खबर है। केंद्र सरकार के वार्ताकार और नगालैंड के राज्यपाल के साथ एनएससीएन (आईएम) तथा अन्य 7 नगा राजनीतिक समूहों के बीच सिलसिलेवार वार्ता नई दिल्ली में गुरुवार (31 अक्टूबर 2019) को समाप्त हुई। कहा जा रहा है कि इस दौरान शांति प्रक्रिया को लेकर एक आम सहमति कायम करने में कामयाबी मिल गई है।

हालॉंकि आधिकारिक तौर पर अभी तक कोई घोषणा नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि एनएससीएन (आईएम) अलग संविधान और ग्रेटर नगालिम बनाने की अपनी मॉंग को फिलहाल ठंडे बस्ते में रखने को राजी हो गया। हालॉंकि अलग झंडे के इस्तेमाल को लेकर कुछ शर्तों के साथ इजाजत दी गई है।

सूत्रों के मुताबिक नगा अपने कार्यक्रमों में खुद के झंडे का इस्तेमाल कर सकेंगे। लेकिन, सरकारी कार्यक्रमों और इमारतों में यह नहीं लगाया जाएगा। इस संबंध में बाद में बातचीत होगी।

वार्ता के सफल समापन की घोषणा नगालैंड के सीएम नैफिउ रिओ ने की। इसके अलावा राज्य के विपक्ष के नेता ने भी इसकी पुष्टि ट्विटर पर की है।

गौरतलब है कि एनएससीएन (आईएम) नगाओं का सबसे बड़ा और ताकतवर हथियारबंद समूह है। गवर्नर आरएन रवि ने पहले ही कह दिया था कि नगालैंड को खुद का झंडा या संविधान नहीं मिलेगा। साथ ही कहा था कि वार्ता प्रक्रिया समय सीमा (31 अक्टूबर, 2019) के आगे नहीं बढ़ेगी। इसके बाद नगालैंड की सरकार ने सभी नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों की छुट्टियाँ रद्द कर दीं थी।

इसके बाद एनएससीएन (आईएम) के 17 सदस्य नगा नेशनल पोलिटिकल ग्रुप्स (एनएनपीजी) में शामिल हो गए थे। यह विभिन्न नगा राजनीतिक संगठनों का एक समूह है। एनएससीएन (आईएम) छोड़ने वालों में हुकावी येपुतोमि भी थे। वे एनएससीएन (आईएम) की समानांतर सरकार में गृह मंत्री रहे हैं। केंद्र सरकार और गवर्नर आरएन रवि से शांति वार्ता करने वाली टीम में भी वे शामिल थे।

AAP विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी लाखों के फर्जी मेडिकल बिल और दंगे फैलाने के आरोप में गिरफ्तार

आम आदमी पार्टी के विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अखिलेश पर 2013 में दंगा फैलाने का आरोप है। साथ ही अखिलेश पर अपने माता-पिता के नाम पर फर्जी मेडिकल बिल पास कराने का भी आरोप है।

बता दें कि दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने अखिलेश पति त्रिपाठी के खिलाफ दोनों मामलों में गैर-जमानती वारंट जारी किया था। कोर्ट की तरफ से यह वारंट अखिलेश पति त्रिपाठी के कोर्ट में नहीं पेश होने पर जारी किया गया था। इस केस में कोर्ट ने शुक्रवार (नवंबर 1, 2019) को सुनवाई की तारीख दी थी। जैसे ही अखिलेश पति त्रिपाठी कोर्ट पहुँचे, पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

विधायक पर आरोप है कि उन्होंने दंगे भड़काने की कोशिश की। जिसमें 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उस वक्त आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने एक डेड बॉडी को रखकर विरोध प्रदर्शन किया था। मामले में दिल्ली पुलिस की तरफ से कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई थी। दंगे फैलाने के मामले मे पुलिस की तरफ से तीन एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें गवाहों के अपने बयान से पलट जाने के बाद एक केस मे अखिलेश पति त्रिपाठी को कोर्ट ने बरी कर दिया था।

बता दें कि 2013 में दंगा फैलाने के मामले में स्पेशल जज अजय कुमार कुहार की कोर्ट में अभियोजन पक्ष की गवाही होनी थी। लेकिन सुनवाई के दौरान अखिलेश पति त्रिपाठी न तो पेश हुए और न ही उनके वकील की तरफ से पेशी से छूट की माँग की गई। 

सुनवाई के दौरान इसी मामले के और दो आरोपित राहुल कुमार और संजीव कोर्ट में पेश नहीं हुए। तब कोर्ट ने तीनों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया। वहीं अखिलेश त्रिपाठी को मेडिक्लेम घोटाले में भी पटियाला हाउस कोर्ट मे पेश होकर जमानत लेनी पड़ी थी। उन पर आरोप है कि उन्होंने नकली बिल बनाकर धोखाधड़ी से लाखों रुपए के फर्जी बिल पास करवाए।

भारतीय श्रद्धालु बिना पासपोर्ट के जा सकेंगे करतारपुर: एक वैध पहचान पत्र की ज़रूरत, दो दिन शुल्क मुक्त यात्रा

गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शनों के लिए जाने वाले सिख श्रद्धालुओं के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने नियमों में छूट दी है। इसकी जानकारी उन्होंने ट्विटर के जरिए दी। खान ने लिखा, “भारत से करतारपुर आने वाले सिखों के लिए दो बातें जरूरी हैं। पहला उन्हें पासपोर्ट की जरूरत नहीं है केवल एक वैध पहचान पत्र चाहिए और दूसरा उन्हें 10 दिन पहले रजिस्ट्रेशन कराने की कोई आवश्यकता नहीं है।”

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि करतारपुर के उद्घाटन के दिन और गुरू नानक देव के 550वें प्रकाश पर्व के दिन कोई शुल्क नहीं लगेगा। बता दें कि इमरान ख़ान करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन 9 नवंबर को करेंगे। श्रद्धालुओं के पहले जत्थे में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी शामिल होंगे।

ख़बर के अनुसार, पाकिस्तान ने कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू को करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन में शामिल होने के लिए ख़ास न्योता दिया है। इस न्योते को स्वीकार करते हुए सिद्दू ने इमरान ख़ान को धन्यवाद कहा है। इस पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स के दौरान पूछे गए एक सवाल के जबाव में कहा कि जिन भारतीयों को पाकिस्तान करतारपुर कॉरिडोर उद्घाटन समारोह में बुलाना चाहता है, उन्हें राजनीतिक मंजूरी लेनी होगी। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने उद्घाटन जत्था में शामिल 480 श्रद्धालुओं की सूची पाकिस्तान को दे दी गई है और पाकिस्तान से इसकी मंज़ूरी का इंतज़ार किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 नवंबर को पंजाब के बटाला में डेरा बाबा नानक में बने करतारपुर कॉरिडोर पैसेंजर टर्मिनल भवन (PTB) का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही कॉरिडोर औपचारिक रूप से खुल जाएगा। इसके बाद वह सुल्तानपुर लोधी में गुरू नानकदेव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर आयोजित समारोह में शिरक़त करेंगे। 

ग़ौरतलब है कि सिखों के अटूट आस्था के प्रतीक करतारपुर साहिब को भारत से जोड़ने के लिए एक कॉरिडोर का निर्माण किया गया है। यह कॉरिडोर भारत और पाकिस्तान दोनों की तरफ़ से बनाया जा रहा है, जिसे पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित किया जाएगा। करतारपुर कॉरिडोर के निर्माण के लिए भारत की तरफ़ से 26 नवंबर 2018 को नींव रखी गई थी, वहीं पाकिस्तान में यह नींव 28 नवंबर 2018 को रखी गई थी।  

श्रीकांत भाऊ बनना चाहते हैं सीएम, शिवसेना सांसद ने कहा- साहिब! मत पालिए अहंकार

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे आए हफ्ते भर से ज्यादा हो चुके हैं। लेकिन, अब तक नई सरकार का गठन नहीं हो पाया है। इसकी वजह मुख्यमंत्री पद को लेकर शिवसेना की जिद्द है। उसकी जिद्द ने राज्य में कई और लोगों के मन में मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जगा दी है। इनमें केवल नेता ही नहीं हैं। बीड जिले के किसान श्रीकांत वी गदले ने भी सीएम पद पर दावा ठोंका है।

उन्होंने राज्यपाल को पत्र लिख कर कहा है कि जब तक सीएम पद का मामला नहीं सुलझता है, तब तक उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री बना देना चाहिए। गदले ने किसानों की मुश्किलों का जिक्र करते हुए यह मॉंग की है। 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा को सबसे ज्यादा 105 सीटें मिली है। उसकी गठबंधन सहयोगी शिवसेना के पास 56 सीटें है। लेकिन, भाजपा को अपने दम पर बहुमत नहीं मिलने के बाद से शिवसेना ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद मॉंग रही है। हालॉंकि उसके दावे को खारिज करते हुए भाजपा ने देवेंद्र फडणवीस को फिर से विधायक दल का नेता चुन लिया है। शिवसेना के नहीं मानने की सूरत में भाजपा निर्दलीय और अन्य छोटे दलों के साथ अल्पमत सरकार का गठन कर सकती है।

इस बीच, शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा है कि मुख्यमंत्री उनकी पार्टी से ही होगा और सरकार गठन को लेकर अभी भाजपा से कोई बात नहीं हुई है। उन्होंने ट्वीट किया है, “साहिब…मत पालिए, अहंकार को इतना, वक्त के सागर में कई,सिकन्दर डूब गए!” एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार से मुलाकात करने वाले राउत ने कहा है कि भाजपा-शिवसेना को जनादेश “50:50 फॉर्मूले” के आधार पर सरकार बनाने के लिए मिला है।

शिवसेना की इस कवायद से एनसीपी के रुख में कोई बदलाव आता नहीं दिख रहा है। पार्टी नेता नवाब मलिक ने फिर से दोहराया है कि भाजपा शिवसेना गठबंधन को सरकार बनाने का जनादेश मिला है और उन्हें सदन में बहुमत साबित करना चाहिए। एनसीपी विधायक दल के नेता अजीत पवार ने भी विपक्ष में बैठने की बात कही है। ​54 सीटें जीतने वाली एनसीपी के मुखिया पवार ने नतीजों के बाद ही विपक्ष में बैठने का ऐलान कर दिया था।

राजस्थान के CM गहलोत ने भाजपा नेता पर दिया विवादित बयान, कहा- नया मुल्ला

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दिल्ली प्रवास के दौरान प्रेस वार्ता में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया पर विवादित बयान दिया है। उन्होंने भाजपा नेता को नया मुल्ला कहकर बुलाया है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पूनिया को आदेश दिया है कि वे मुख्यमंत्री को टारगेट करें।

अपनी बात को प्रेस वार्ता में आगे बढ़ाते हुए गहलोत ने इस दौरान कहा कि सतीश पूनिया को उन्हें (गहलोत को) समझने में समय लगेगा। वे नए-नए मुल्ला हैं, जो नया मुल्ला होता है, वो जोर से बांग देता है। उनकी अभी वहीं स्थिती बनी है। उन्हें अमित शाह और नरेंद्र मोदी के इशारे मिले हैं।

हालाँकि इस बयान पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने भी पलटवार किया है। उन्होंने जवाब दिया है कि मुख्यमंत्री खुद की ही अपनी पार्टी के नेताओं को नहीं पचा पा रहे। इसलिए वे दूसरे नेताओं के बारे में बयानबाजी कर सकते हैं, ये उनका फ्रस्टेशन है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने स्टेट हाईवे पर फिर से टोल वसूली को लेकर एक दिन पहले कहा था कि दीपावली के तोहफे के लिए जनता तैयार रहे, राजकीय टोल नाकों पर फिर से लगेगा टोल!! राजकीय राजमार्गों पर निजी वाहनों का टोल माफ नहीं होगा। उन्होंने इस फैसले को जन विरोधी फैसला बताते हुए सरकार को जनता विरोधी करार दिया था।

जिस पर जवाब देते हुए ही गहलोत ने कहा है कि पूनिया अभी उन्हें समझ नहीं रहे, क्योंकि वे नए मुल्ला है। उनका कहना है कि वसुंधरा राजे की सरकार में लिया गया ये फैसला मेरिट के आधार पर नहीं था। इससे सरकार पर बहुत भार आ रहा था। टोल कंपनी की शर्तों को बिना चर्चा के बदल दिया गया था।

अपने इस फैसले पर गहलोट ने निजी वाहन चलाने वालों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राइवेट गाड़ी चलाने वाले सभी लोग सक्षम हैं, इसलिए वो उम्मीद करते हैं कि प्राइवेट कार चलाने वाले लोग इस फैसले का स्वागत करें ।

गौरतलब है कि इस फैसले से पहले गहलोत सरकार राज्य के सभी दफ्तरों में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की तस्वीर लगाने को भी अनिवार्य कर चुकी है। जिसके लिए खुद मुख्य सचिव ने बाकायदा सभी विभागों को पत्र लिखकर बापू की फोटो लगाने के आदेश दिए हैं। इस कदम के पीछे राजस्थान की वर्तमान सरकार का कहना है कि वे महात्मा गाँधी के आदर्श सिद्धांतों पर चलती है न कि गोडसे या वीर सावरकर के कदमों पर। बता दें कॉन्ग्रेस के इस कदम पर भाजपा ने कॉन्ग्रेस को नसीहत दी थी कि वे ऐसे फरमानों को जारी करने के बजाए काम करने पर ध्यान दें।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की फोटो देख भड़के कमलनाथ: कॉन्ग्रेस ने वापस मँगाया निमंत्रण पत्र

एक नवंबर को मध्य प्रदेश का स्थापना दिवस है। इस मौके पर राज्य के होशंगाबाद में कुछ कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इसी बीच कॉन्ग्रेस ने उन निमंत्रण पत्रों को वापस ले लिया है जिन पर दीन दयाल उपाध्याय की तस्वीर छपी है। कॉन्ग्रेस ने उनकी तस्वीर छापे जाने का विरोध किया है। पहले से वितरित पत्रों के स्थान पर नए पत्र बाँटे गए।

दरअसल, होशंगाबाद में होने वाले राज्य स्थापना दिवस के कार्यक्रम के लिए छपे निमंत्रण कार्ड में दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर छप गई। जिसका कॉन्ग्रेस ने विरोध किया और इस विरोध के बाद नया निमंत्रण कार्ड छपवाया गया।

मध्‍य प्रदेश स्‍थापना दिवस समारोह के लिए छपवाए गए ये कार्ड अतिथियों में बाँट दिए थे पर कॉन्ग्रेस के विरोध के बाद इन्‍हें वापस लिया गया और नए कार्ड बाँटे गए। नए कार्ड में कार्यक्रम की जानकारी और बाकी चीजें भी वही है, सिर्फ पंडित दीन दयाल उपाध्याय की तस्वीर को हटा दिया गया है।  

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेसियों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संगठनकर्ता और भारतीय जनसंघ के पूर्व अध्यक्ष पंडित दीन दयाल के प्रति नापसंदगी प्रदर्शित किया है। इससे पहले पिछले साल राजस्थान में कॉन्ग्रेस की सरकार के सत्ता में आने पर अशोक गहलोत ने राज्य के स्कॉलरशिप टेस्ट में से भी पंडित दीन दयाल उपाध्याय का नाम हटा दिया था। 

इसी तरह छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की कॉन्ग्रेस सरकार ने राज्य की सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में से दीन दयाल उपाध्याय का नाम हटाकर उनकी जगह राजीव गाँधी और इंदिरा गाँधी का नाम दे दिया।

इमरान खान की सत्ता मुश्किल में: जुमे की नमाज के बाद बज सकती है खतरे की घंटी, लाखों पहुँचे इस्लामाबाद

पाकिस्तान में इमरान सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। पाकिस्तान में तख्ता पलट की आशंका बढ़ती जा रही है और आज का जुमा इमरान के लिए बुरी खबर लेकर आ सकता है। दरअसल, इमरान खान का इस्तीफा माँगने के लिए आजादी मार्च आज इस्लामाबाद पहुँच चुका है। इसकी अगुवाई पाकिस्तान के सबसे बड़े धार्मिक गुट जमीयत-उल-इस्लाम पाकिस्तान के प्रमुख फजलुर्रहमान कर रहे हैं।

बता दें कि फजलुर्रहमान की अगुवाई में पाकिस्तान के कराची समेत सभी बड़े शहरों से 27 अक्टूबर को आजादी मार्च की शुरुआत हुई, जिसका पिछले 5 दिनों में पाकिस्तान में बड़ा असर देखने को मिला। अलग अलग शहरों से लोग इस आजादी मार्च में शामिल होकर इस्लामाबाद की ओर कूच करने लगे।

मौलाना फजलुर्रहमान के नेतृत्व में सरकार विरोधी आजादी मार्च गुरुवार (अक्टूबर 31, 2019) को राजधानी इस्लामाबाद पहुँचा। यहाँ शुक्रवार (नवंबर 1, 2019) की नमाज के बाद एक रैली होगी। यह रैली पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ गुरुवार को होने वाली थी, लेकिन लाहौर ट्रेन हादसे के कारण एक दिन के लिए टाल दी गई थी। अब यह रैली शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद होगी।

बता दें कि इमरान खान को पाकिस्तान की सत्ता संभाले सिर्फ 14 महीने हुए हैं और उनको सत्ता से हटाने के लिए पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों के साथ आम आवाम सड़कों पर उतर आई है। बेरोजगारी, गरीबी, महँगाई ने पाकिस्तान की आवाम को सड़क पर ला खड़ा किया है। पाकिस्तान में अब इमरान की विदाई के नारे लग रहे हैं।

इस मार्च में कई विपक्षी पार्टियाँ हिस्सा ले रही हैं। जिसमें पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएल-एन), पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और अवामी नेशनल पार्टी शामिल हैं। इनकी माँग है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान अपना इस्तीफा दें क्योंकि वह इस पद पर बने रहने के लायक नहीं है। 

मौलाना फजलुर्रहमान ने इमरान पर 2018 के आम चुनाव जीतने के लिए धांधली का आरोप लगाया है और इस्तीफे की माँग कर रहे हैं। रहमान ने इमरान खान पर आर्थिक कुप्रबंधन, अक्षमता और खराब शासन के चलते आम लोगों की जिंदगी को कठिनाईयों से भरा बनाने का भी आरोप लगाया है। जेयूआई-एफ के वरिष्ठ नेता अकरम दुर्रानी ने कहा कि इस्लामाबाद की रैली अब जुमे की नमाज के बाद शुरू होगी और विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता रैली को संबोधित करेंगे।

इसके साथ ही इमरान खान को सेना की कठपुतली भी कहा जा रहा है, जिसे खुद सेना ने गद्दी पर बैठाया है। मौलाना फजलुर्रहमान का मानना है कि पीएम इमरान खान आर्थिक मामलों में काफी पीछे हैं और उनमें शासन चलाने की काबिलियत नहीं है। इस आजादी मार्च के कारण इमरान खान पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

गौरतलब है कि शुक्रवार (25 अक्टूबर) को मौलाना ने कहा था कि उनकी पार्टी की केंद्रीय समिति के सदस्यों और प्रांतीय नेताओं के घरों पर देश भर में छापेमारी की जा रही है। उन्होंने कहा था, “यदि बैरिकेड्स और अन्य व्यवधानों के साथ हमारे मार्ग पर बाधाएँ उत्पन्न करने का प्रयास किया गया, तो इससे टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। चाहे एक महीने के लिए ही राष्ट्रीय राजमार्गो को बंद क्यों ना कर दिया जाए, इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, हम इस्लामाबाद जाएँगे।” उनका कहना था कि इमरान ख़ान झूठ के सहारे पाकिस्तान में सत्ता में आए।

जम्मू-कश्मीर में इस ‘साहसिक’ कदम के लिए अमेरिकी कॉन्ग्रेस के सांसद ने की मोदी की सराहना

एक प्रभावशाली अमेरिकी सासंद ने जम्मू-कश्मीर में संविधान के अस्थायी अनुच्छेद के प्रावधानों को रद्द करने के ‘साहसी कदमों’ के लिए गुरुवार (31 अक्टूबर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की।

गुरुवार को, एक सरकारी अधिसूचना के ज़रिए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दो केंद्र शासित प्रदेश अस्तित्व में आ गए। 5 अगस्त 2019 को राज्य को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने वाले अनुच्छेद-370 को हटाने की घोषणा की गई थी। इसके बाद दो जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था।

सांसद जॉर्ज होल्डिंग ने गुरुवार को सदन में कहा,

“प्रधानमंत्री मोदी और संसद ने जो कदम उठाए हैं उनकी आवश्यकता थी, वे क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थायित्व के लिए जरूरी हैं और इनकी सराहना की जानी चाहिए।”

रिपब्लिकन सांसद ने कहा कि भारतीय संसद ने जम्मू-कश्मीर का दर्जा बदलने का कानून पारित करने के साथ ही उन प्रावधानों में भी बदलाव किया है जो “आर्थिक विकास में बाधक थे और अलगाववाद की भावना को बढ़ावा देने वाले लगते थे।”

होल्डिंग ने आगे कहा, “हाल तक, कश्मीर अनुच्छेद-370 से चलता था, जो एक पुराना कानून था जिसे भारतीय संविधान ने अस्थायी तौर पर मान्यता दी थी। अनुच्छेद-370 उन लोगों के लिए भले ही अच्छा हो जिनके राजनीतिक संपर्क थे, लेकिन यह लोगों को आर्थिक अवसर उपलब्ध नहीं कराता था।”

होल्डिंग ने कहा कि भारतीय संविधान के अस्थायी प्रावधान ने ‘ध्रुवीकरण का माहौल’ बनाया जिसका राजनीतिक दोहन किया गया और पिछले कुछ दशकों में हजारों लोगों ने आतंकवादी हमलों में अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान स्थित कई समूह सीमा पार आतंकवाद फैलाने में सक्षम रहे जिससे यहाँ के लोगों और उनके परिवारों को काफी कुछ झेलना पड़ा और अर्थव्यवस्था हमेशा कमजोर रही।”

होल्डिंग ने कहा कि इन्हीं सबके चलते मोदी सरकार को यह फैसला लेना था कि पुरानी नीति के साथ ही चला जाए या फिर क्षेत्र के वैधानिक दर्जे में बदलाव कर प्रगति के रास्ते पर बढ़े। होल्डिंग ने कहा, “मैडम स्पीकर, जम्मू-कश्मीर के लोग बेहतर के हकदार हैं और स्थिति को देखते हुए साहसी कदम उठाकर प्रधानमंत्री मोदी ने सही किया। जम्मू-कश्मीर के दर्जे में बदलाव को संसद द्वारा दो-तिहाई बहुमत से पारित किया गया जो सुधारों की आवश्यकता की जरूरत पर आम सहमति को दर्शाता है।”

उन्होंने कहा कि इन बदलावों के बाद भी यहाँ अशांति चाहने वाले लगातार हिंसा को बढ़ावा देने में लगे हैं।

होल्डिंग ने कहा, “पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों ने हाल ही में आम नागरिकों को बाहर निकलने, काम करने या सार्वजनिक स्थलों पर न जाने की चेतावनी देते हुए पोस्टर लगाए।”

उन्होंने कहा कि ये समूह सीमापार आतंकवाद में लिप्त हैं और इन्होंने नागरिकों तथा बच्चों पर हमले भी किए हैं। इन आतंकवादी समूहों ने सेब के कारोबार से जुड़े व्यापारियों और मजदूरों को भी निशाना बनाया।