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कमलेश तिवारी के हत्यारों को हर जिले में मिली मदद: बरेली, शाहजहाँपुर, पीलीभीत से नेपाल तक टेरर फंडिंग का खेल

सभी की निगाहें कमलेश तिवारी की हत्या के बाद इस बात पर टिकी हैं कि हत्यारे कब पकड़े जाएँगे। कई साज़िशकर्ता पुलिस की गिरफ़्त में आ चुके हैं और अब उन दोनों हत्यारों की तलाश जारी है, जिन्हें भगवा कपड़ों में देखा गया था। उन दोनों का नाम अशफाक और मोईनुद्दीन है। पुलिस ने दोनों के ऊपर ढाई-ढाई लाख रुपए का इनाम रखा है और उनकी फोटो भी सार्वजनिक कर दी गई है। कुल मिला कर अभी तक तीन राज्यों से गिरफ्तारियाँ हुई हैं। गुजरात के सूरत, महाराष्ट्र के नागपुर और उत्तर प्रदेश के बिजनौर और बरेली से गिरफ्तारियाँ की गई हैं। बिजनौर से उन दोनों मौलानाओं को गिरफ़्तार किया गया, जो पहले से ही कमलेश तिवारी की हत्या की बातें करते रहते थे।

अब ताज़ा सूचना ये आई है कि कमलेश तिवारी की बेरहमी से हत्या करने के दौरान उनमें और हत्यारों में अच्छी-ख़ासी हाथापाई भी हुई थी। ये हाथापाई तब हुई होगी, जब कमलेश तिवारी ने बचने के लिए संघर्ष किया होगा। इस हाथापाई में हत्यारे घायल भी हो गए थे। इसके बाद उन्होंने बरेली में इलाज कराया था। इलाज कराने के बाद हत्यारों की लोकेशन बरेली के बाद लखीमपुर में मिली। पुलिस का कहना है कि अब वो उनके क़रीब पहुँच चुकी है और वे बच कर भाग नहीं पाएँगे। हालाँकि, अब तक के लोकेशन के आधार पर यही पता चला है कि हत्यारे नेपाल भागने की फ़िराक़ में थे। फ़िलहाल शाहजहाँपुर में एसटीएफ की टीम डेरा डाले हुए है और उनकी तलाश जारी है।

पता चला है कि बरेली के प्रेमनगर में हत्यारों ने एक मुफ़्ती से मुलाक़ात की थी। तहकीकात के बाद पुलिस ने मुफ़्ती कैफ अली नामक व्यक्ति को हिरासत में ले लिया। मुफ़्ती से मिलने के बाद ही उन हत्यारों ने कमलेश तिवारी हत्याकांड की सूचना सूरत और फिर दुबई तक दी। हालाँकि, जिस मुफ़्ती को हिरासत में लिया गया, उसने इन आरोपों से इनकार किया है। इस केस का दुबई कनेक्शन पुलिस के लिए सरदर्द बना हुआ है। पुलिस का कहना है कि अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन के ख़िलाफ़ कई अहम सबूत और सुराग उसके हाथ लगे हैं।

वहीं अगर कमलेश तिवारी के परिवार की बात करें तो अंतिम संस्कार के बाद परिवार ने अस्थियों का विसर्जन किया। सोमवार (अक्टूबर 21, 2019) की रात वाराणसी के दसाश्वमेध घाट पर उनकी अस्थियों का विसर्जन किया गया। कमलेश तिवारी की माँ कुसुम तिवारी और छोटे पुत्र मृदुल ने रात के वक़्त काशी पहुँच कर अस्थि-विसर्जन की प्रक्रिया संपन्न की। हाल ही में परिवार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाक़ात की थी और उसके बाद सरकार से 11 माँगे रखी थीं। ख़बर आई थी कि सरकार ने परिवार की अधिकतर माँगें मान ली है।

हत्याकांड के बाद हत्यारों का लोकेशन ट्रेस किए जाने की प्रक्रिया में एक बहुत ही अजीब और खतरनाक ट्रेंड ये देखने को मिला है कि वो जहाँ भी, जिस भी इलाक़े में पहुँचे, वहाँ किसी न किसी परिचित ने उनकी मदद की। उपर्युक्त राज्यों के अलावा हरियाणा, दिल्ली और कर्नाटक तक से भी इस हत्याकांड के तार जुड़ने की सम्भावना है, जिसके लिए यूपी पुलिस इन राज्यों के उच्चाधिकारियों से सम्पर्क बनाए हुए है। सूरत, बरेली, लखीमपुर, शाहजहाँपुर, पीलीभीत और लखनऊ तक, हर जगह हत्यारों को कोई न कोई मदद करने वाला मिला। आरोपितों ने लखीमपुर के पलिया में एक टैक्सी चालक से मोबाइल माँग कर एक स्थानीय वकील को कॉल किया। फोन पर उन्होंने आत्मसमर्पण करने के बारे में बात की। वकील ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी।

उधर एक अन्य ख़बर यह है कि नेपाल सीमा से लगे गुलरिया गाँव के पूर्व प्रधान सहित क़रीब 14 ऐसे लोग हैं, जो एटीएस की निगाह पर आए हैं। कई राज्यों तक फैले तार से इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि देश में या तो कोई नया संगठन खड़ा हो गया है जो इस तरह की वारदात को अंजाम दे रहा है, या फिर किसी बड़े आतंकी नेटवर्क का फायदा इन हत्यारों को मिला है। पूर्व प्रधान से एटीएस ने पूछताछ भी की है। हालाँकि, ये मामला लखीमपुर और बरेली का ही है लेकिन इसका कमलेश तिवारी की हत्या से जोड़ कर देखे जाने की बात सामने नहीं आई है। यह दिखाता है कि इस क्षेत्र में टेरर फंडिंग का भी एक नया जंजाल पैदा हो रहा है।

दोनों हत्यारोपित पलिया में भी काफ़ी देर रुके थे। वहाँ उन्होंने ई-रिक्शा का भी इस्तेमाल किया था। उसी ई-रिक्शे से वो इनोवा गाड़ी तक गए थे। उस गाड़ी के ड्राइवर तौहीद ने पुलिस को बताया कि उसके मालिक का एक दोस्त गुजरात में रहता है, जिसके कहने पर उसने 5 हज़ार रुपए में बुकिंग की थी। पलिया में रुक कर हत्यारों ने जानकारियाँ जुटाई थीं। इस पूरे प्रकरण में पुलिस ने समय-समय पर कुल 7 लोगों को हिरासत में लिया है। कार चालक के अलावा बरेली से 4 और पीलीभीत से एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया। पीलीभीत से जिस युवक को गिरफ़्तार किया गया, वह भी फोन पर हत्यारों के संपर्क में बना हुआ था। पुलिस ने शनिवार (अक्टूबर 19, 2019) को ही हत्यारों को धर-दबोचा होते लेकिन शाहजहाँपुर में पुलिस के उस लोकेशन पर पहुँचने से पहले ही वो लोग भाग निकले।

उधर उत्तर प्रदेश के क़ानून मंत्री बृजेश पाठक ने कहा है कि आरोपितों को 6 महीने के ट्रायल में ही सज़ा-ए-मौत दिलाने के लिए कोर्ट से डे-टू-डे सुनवाई का आग्रह किया जाएगा। उन्होंने पीड़ित परिजनों से भी मुलाक़ात की। उधर बिजनौर के दोनों मौलानाओं से जानकारी के बाद कुछ अहम जानकारियाँ हाथ लगने की बात कही जा रही है। दोनों से किसी गोपनीय जगह पर पूछताछ की गई।

शाहजहाँपुर से आए अपडेट के मुताबिक हत्यारे दिल्ली भागना चाहते थे लेकिन कड़ी चौकसी के कारण मुरादाबाद से आगे नहीं बढ़ पाए। सभी जिलों में हत्यारों के कनेक्शन और उन्हें मिल रही मदद के कारण यह साफ़ हो गया है कि उन्होंने अच्छी-खासी तैयारी कर रखी थी। शाहजहाँपुर के मस्जिदों और मुसाफ़िरख़ानों पर पुलिस नज़र बनाए हुए है। लोकल पुलिस ऐसे लोगों पर भी नज़र रख रही है जो गुजरात से सम्बन्ध रखते हैं क्योंकि आशंका है कि हत्यारे किसी गुजराती के यहाँ ही ठहरे हुए हैं, जिसका घर रेलवे स्टेशन के नजदीक हो। फ़िलहाल ये हत्यारे आगे-आगे भाग रहे हैं और पुलिस उनके पीछे है। एक तरह से चूहे-बिल्ली का खेल चल रहा है और उनकी गिरफ़्तारी कब तक संभव होगी, यह चर्चा का विषय है।

हत्यारे अशफाक ने किसी के आधार कार्ड में अपनी फोटो चिपका रची थी कमलेश तिवारी के मर्डर की प्लानिंग

कमलेश तिवारी की हत्या में शामिल मुख्य संदिग्ध हत्यारा अशफाक शेख ने उनकी हिन्दू समाज पार्टी में शामिल होने के लिए फर्जी आधार कार्ड बनाया था। अशफाक ने कमलेश तिवारी की हत्या करने से पहले अपने एक सहकर्मी रोहित कुमार सोलंकी के नाम से फर्जी आधार कार्ड और फेसबुक अकाउंट बना लिया था। इसी झूठी पहचान के आधार उसने कमलेश तिवारी से फेसबुक पर दोस्ती की और फोन पर भी संपर्क किया। इसके बाद उसने हिंदू समाज पार्टी के संगठन से जुड़ने की इच्छा भी जताई थी। फिर 3 जून 2019 को उसने पार्टी ज्वाइन की। इसके बाद उसे सूरत के वरछा वार्ड में आईटी सेल के प्रचारक के तौर पर नियुक्त किया गया था।

अशफाक शेख और मोइनुद्दीन पर कमलेश तिवारी की हत्या का संदेह है। फिलहाल दोनों फरार हैं। पुलिस संदिग्ध आरोपितों को पकड़ने की पूरी कोशिश कर रही है। बता दें कि रोहित कुमार सोलंकी दवा कंपनी में मेडिकल प्रतिनिधि (MR) के तौर पर काम करता है। अशफाक शेख इस कंपनी में टीम लीडर और मैनेजर के पद पर था। अशफाक ने अपने सहकर्मी रोहित के आधार कार्ड का दुरूपयोग किया। उसने रोहित के आधार कार्ड में उसकी फोटो की जगह अपनी फोटो लगा दी और बाकी की सारी जानकारी वही रहने दी। उसने फोटो के अलावा कोई बदलाव नहीं किया।

आधार कार्ड किसी और का, फोटो हत्यारे अशफाक का (साभार: इंडियन एक्सप्रेस)

वहीं रोहित सोलंकी इन सब बातों से अनजान था। उसने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा कि पिछले ढाई साल से अशफाक शेख के साथ काम कर रहा है और उसे इस बात की जानकारी नहीं थी। उसने कहा कि उसे रविवार (अक्टूबर 20, 2019) को सोशल मीडिया के माध्यम से पता चला कि उनके आधार कार्ड का दुरुपयोग किया गया था। उसने बताया कि अशफाक सभी चिकित्सा प्रतिनिधियों का दस्तावेज अपने पास रखता था। सोलंकी ने कहा कि उसने इसकी शिकायत वरछा पुलिस स्टेशन में दर्ज करवाई है।

हिंदू समाज पार्टी के मुताबिक सोलंकी के रूप में अशफाक शेख जून के अंतिम सप्ताह में कमलेश तिवारी से मिला था और फिर पिछले सप्ताह सूरत जाने से पहले उसने कथित तौर पर उन्हें फोन किया था। उसने कहा था कि वो सूरत में पार्टी के विस्तार की योजनाओं पर चर्चा करने के लिए लखनऊ में उनसे मिलेंगे। 17 अक्टूबर को लखनऊ पहुँचने के बाद उसने कथित तौर पर कमलेश तिवारी को फिर से फोन किया और कहा कि वह अगले दिन उनसे मिलेंगे।

हिंदू समाज पार्टी के गुजरात अध्यक्ष जैमिन दवे ने रविवार को फेसबुक पर पोस्ट किया, “हम अपने रिकॉर्ड में रखने के लिए अपनी पार्टी में शामिल होने वाले इच्छुक लोगों के आधार कार्ड और तस्वीरें जमा करते हैं। आधार कार्ड के आधार पर हमने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष, गुरुजी (कमलेश तिवारी) से अनुमति ली, और बाद में हमारे संगठन के सदस्य के रूप में रोहित कुमार सोलंकी (अशफाक शेख) को नियुक्त किया। जब अशफाक ने मुझे फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी, तो कई हिंदू समाज पार्टी के कार्यकर्ता पहले से ही उसके दोस्तों की सूची में थे।”

दवे ने आगे कहा कि इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अशफाक को पार्टी का सदस्य बनाया था। उनका कहना है कि इस दौरान सभी कानूनी प्रक्रिया को अपनाया गया था लेकिन अब उन्हें पता चल रहा है कि उसने जाली आधार कार्ड जमा किया था। जिसके बाद उन्होंने शनिवार (अक्टूबर 19, 2019) को इस जाली कार्ड की एक प्रति समेत सभी दस्तावेज गुजरात एटीएस को सौंप दिए गए। 

गुजरात एटीएस इस मामले में मौलाना मोहसिन शेख, राशिद अहमद पठान और फैजान शेख को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान तीनों ने इस बात का खुलासा किया कि राशिद के भाई अशफाक और मोइनुद्दीन ने हत्या के वारदात को अंजाम दिया है।

वहीं अशफाक की बीबी मेहनाज का कहना है कि उसने कहा था कि वो जॉब इंटरव्यू के लिए चंडीगढ़ जा रहा है। मेहनाज ने भी साथ चलने की बात कही, तो उसने मना कर दिया। बुधवार की सुबह अशफाक ने बताया कि वो अपने दोस्त मोइनुद्दीन के साथ जा रहा है। बुधवार की रात वो लोग चले गए। मेहनाज का कहना है कि उसने गुरूवार को उससे बात करने की कोशिश की, लेकिन उसका फोन ऑफ आ रहा था। शुक्रवार की रात मोइनुद्दीन के भाई ने अशफाक से उसकी बात करवाई थी। इसके बाद मेहनाज ने उसी नंबर पर कॉल करने की कोशिश की, लेकिन फोन स्विच ऑफ आ रहा था। इसके साथ ही मामले में एक और संदिग्ध सैयद आसिम अली को नागपुर से गिरफ्तार किया गया है।

जमीन घोटालों के आरोपित रॉबर्ट वाड्रा अस्पताल में भर्ती: पीठ-पैर में है दर्द, रात भर साथ रहीं प्रियंका

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा को पीठ और पैर में दर्द की शिकायत के बाद नोएडा के मेट्रो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी पत्नी और कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी भी रात भर उनके साथ रहीं। दर्द की शिकायत के बाद वह सेक्टर 11 में स्थित मेट्रो हॉस्पिटल पहुँचे, जहाँ उन्हें डॉक्टरों की सलाह के बाद भर्ती कर लिया गया। वाड्रा के वहाँ भर्ती होने की सूचना के बाद प्रियंका गाँधी भी शाम को क़रीब 7.30 बजे अस्पताल पहुँचीं और डॉक्टरों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी लीं।

हालाँकि, प्रियंका गाँधी थोड़ी देर के बाद ही हॉस्पिटल से निकल गईं लेकिन रात के क़रीब 10.30 बजे उन्होंने फिर से हॉस्पिटल का रुख किया। इसके बाद से वह रात भर अपने पति के साथ ही रहीं। रात में क़रीब 9 घंटे तक प्रियंका गाँधी मेट्रो अस्पताल में ही थीं। रॉबर्ट वाड्रा और प्रियंका गाँधी की मौजूदगी के कारण पूरे हॉस्पिटल को एसपीजी ने अपने सुरक्षा घेरे में ले लिया है। हॉस्पिटल के वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन वाड्रा की पीठ और पैर में दर्द का इलाज कर रहे हैं।

जिस दिन वाड्रा अस्पताल में भर्ती हुए, उसी दिन महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हुआ। शाम को आए एग्जिट पोल में कॉन्ग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों की बुरी हार होती दिख रही है। भाजपा दोनों ही राज्यों में फिर से प्रचंड बहुमत से सरकार बनाती दिख रही है। शाम को जब प्रियंका गाँधी अस्पताल में पहुँचीं, उसी समय विभिन्न न्यूज़ चैनलों पर एग्जिट पोल्स में कॉन्ग्रेस की बड़ी हार का अनुमान लगाया जा रहा था। नतीजे 24 अक्टूबर को आने वाले हैं।

रॉबर्ट वाड्रा पहले ही ही कई ज़मीन विवादों में सरकारी जाँच एजेंसियों के रडार पर हैं। उन्हें अदालत से विदेश जाने की अनुमति मिली थी, जिसके बाद उन्होंने स्पेन के पवित्र ईसाई स्थलों का दौरा किया था। वहाँ उन्होंने ब्लैक मडोना का दर्शन किया था। वाड्रा के बारे में हॉस्पिटल प्रशासन ने अभी अधिक जानकारी नहीं दी है। अस्पताल में स्थानीय कॉन्ग्रेस नेताओं के अलावा दिल्ली से भी कई कॉन्ग्रेस नेता पहुँच कर उनका हालचाल ले रहे हैं।

अयोध्या, मथुरा, काशी सहित मंदिर तोड़ कर बनाई गई 11 मस्जिदें हिन्दुओं को लौटाओ: वसीम रिजवी

शिया सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने राम मंदिर को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि अयोध्या की विवादित ज़मीन हिन्दुओं को दे दी जानी चाहिए। शिया वक़्फ़ बोर्ड के चेयरमैन रिजवी ने कहा कि न सिर्फ़ अयोध्या बल्कि मथुरा और कशी सहित उन सभी 11 मस्जिदों को हिन्दुओं को सौंप दी जानी चाहिए, जो मुग़ल बादशाहों ने मंदिर तोड़ कर बनवाए थे। इसमें दिल्ली की क़ुतुब मीनार परिसर में स्थित मस्जिद सहित गुजरात की मस्जिदें भी शामिल हैं। रिजवी के इस बयान से सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को तगड़ा झटका लग सकता है, जो अयोध्या मामले में मुस्लिमों की तरफ़ से केस लड़ रहा है।

ये इसीलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को भी इस बात का डर है कि अयोध्या में हिन्दुओं के हक़ में फ़ैसला जाने के बाद अब अन्य मस्जिदों को लेकर भी विवाद खड़ा हो सकता है, जहाँ इस्लामी आक्रांताओं ने मंदिरों को तोड़ कर मस्जिदें बनाईं। भारत के कई बड़े मस्जिदों के बारे में पता चलता है कि उनको बनवाने के लिए वहाँ स्थित मंदिर को तबाह कर दिया गया। इसीलिए, सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने जिन शर्तों के आधार पर राम मंदिर वाली ज़मीन पर दावा छोड़ने की बात कही थी, उसमें एक शर्त ये भी थी कि हिन्दू पक्ष बाकी के मस्जिदों पर दावा नहीं ठोकेंगे।

वसीम रिजवी ने दावा किया कि अयोध्या की विवादित ज़मीन सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की संपत्ति है ही नहीं, वो शिया वक़्फ़ बोर्ड की संपत्ति है। इसके पीछे तर्क देते हुए उन्होंने कहा कि बाबर के जिस सेनापति ने इस मस्जिद को बनवाया था, वो एक शिया मुसलमान था। यूपी सेंट्रल शिया वक़्फ़ बोर्ड ने भी विवादित ज़मीन पर दावा किया था लेकिन बाद में उसने राम मंदिर के पक्ष में अपना दावा वापस ले लिया। अब बोर्ड ने फिर से वहाँ पर राम मंदिर बनवाए जाने की वकालत की है। यूपी में संपत्ति और आय के स्रोत के मामले में शिया और सुन्नी, दोनों ही बोर्ड योगी सरकार की रडार पर है।

रिजवी ने बताया कि शिया बोर्ड की तरफ़ से सारे काग़ज़ात सुप्रीम कोर्ट को सौंपे जा चुके हैं। वर्ष 2010 में इलाहबाद हाईकोर्ट ने विवादित ज़मीन को तीन हिस्सों में बाँटने का आदेश दिया था। इसमें रामलला विराजमान, निर्मोही अखाडा और मुस्लिम पक्ष के बीच ज़मीन बाँटने को कहा गया था। शिया बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि जो ज़मीन मुस्लिमों के पक्ष में आई है, वो शिया वक़्फ़ बोर्ड को नहीं चाहिए। एक प्रार्थना पत्र के माध्यम से बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि ये ज़मीन हिन्दुओं को दे दी जाए।

राम मंदिर मामले में 6 अगस्त को शुरू हुई नियमित सुनवाई अब ख़त्म हो चुकी है और सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय पीठ ने फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है। 16 अक्टूबर को सुनवाई ख़त्म होने के बाद कहा गया था कि 23 दिनों के भीतर फ़ैसला सुनाया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई नवंबर में रिटायर होने वाले हैं, अतः नियमानुसार उन्हें रिटायरमेंट से पहले ही फ़ैसला सुनाना होगा। जहाँ हिन्दुओं को फ़ैसला अपने पक्ष में आने की उम्मीद है, मुस्लिम पक्ष ने पहले ही धमकी भरे अंदाज़ में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट फ़ैसला देते समय भविष्य का भी ध्यान रखे।

कमलेश तिवारी हत्याकांड: चौथा आरोपित लड़ चुका है गडकरी के ख़िलाफ चुनाव, सुन्नी यूथ फोर्स का है उपाध्यक्ष

कमलेश तिवारी हत्याकांड के चौथे आरोपित की गिरफ्तारी के बाद बड़े खुलासे हुए हैं। मालूम हुआ है कि सैयद आसिम अली नामक शख्स कमलेश तिवारी के हत्यारों के साथ केवल हत्या की प्लॉनिंग में ही शामिल नहीं था बल्कि उन्हें फरार करवाने में भी उसकी अहम भूमिका रही है। इसके अलावा खुलासा हुआ है कि नागपुर से गिरफ्तार सैयद आसिम अली नागपुर में एमडीपी पार्टी की नगर ईकाई का अध्यक्ष है और साथ ही सुन्नी यूथ फोर्स संस्थान का उपाध्यक्ष भी। वह लोकसभा चुनाव में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के ख़िलाफ लोकसभा चुनाव भी लड़ चुका है और मुस्लिमों में अपनी पैठ बनाने के लिए एक यूट्यूब चैनल भी चलाता है।

गौरतलब है कि 21 अक्टूबर को नागपुर से सैयद आसिम अली की गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ में कई महत्वपूर्ण बिंदु सामने आए। नागपुर एटीएस अध्यक्ष अनिल लोखंडे ने 29 वर्षीय सैयद आसिम अली के बारे में बताया है कि अली सुन्नी यूथ फोर्स नामक संस्थान का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष है और साथ ही माइनॉरिटी डेमॉक्रेटिक पार्टी की नगर ईकाई का अध्यक्ष भी।

हालाँकि, एटीएस अध्यक्ष ने हत्याकांड में अली की भूमिका के बारे में कुछ भी बताने से इंकार किया, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बात का पता चला है कि आसिम अली शुरू से अंत तक हत्यारों के संपर्क में था। इतना ही नहीं, ये भी मालूम चला है कि आसिम ने हत्यारों को अपने संपर्कों की मदद से कर्नाटक में छिपने के लिए आश्रय भी दिलवाया।

सैयद अली की फेसबुक टाइमलाइन खँगालने पर भी बहुत चीजों का खुलासा होता है। हत्या की प्लॉनिंग से लेकर हत्यारों के फरार होने तक में अहम भूमिका निभाने वाला सैयद आसिम अली लगातार फेसबुक पर कश्मीर मुद्दे पर लोगों को भड़काने का काम कर रहा था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि आसिम अली लोकसभा चुनावों में केंद्रीय मंत्री गड़करी के ख़िलाफ़ नागपुर से चुनाव भी लड़ चुका है। ये बात और है कि उसे इन चुनावों में करारी शिकस्त मिली थी। मात्र दसवीं पास आसिम अली को लोकसभा चुनावों में केवल 673 वोट मिले थे।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार अली के बारे में बताया गया है कि इसने 2 महीने पहले मुस्लिम युवाओं को मॉब लिंचिंग से बचने के लिए आत्म सुरक्षा के नाम पर लाठियाँ बाँटी थी। इसके अतिरिक्त मुस्लिम युवाओं में अपनी पैठ बनाने के लिए सैयद आसिम अली अपना यूट्यूब चैनल भी चलाता है। इन विडियो में इसे कमलेश तिवारी के ख़िलाफ़ बोलते भी सुना जा सकता है।

बता दें कि कमलेश तिवारी हत्याकांड में चौथे आरोपित अली की गिरफ्तारी के बाद उसे सोमवार को नागपुर कोर्ट में पेश किया गया और बाद में यूपी पुलिस को उसकी रिमांड सौंप दी गई। इस हत्याकांड में आरोपितों को पकड़ने के प्रयासों के दौरान खुलासा हुआ था कि आसिम अली का पूरे हत्याकांड में बहुत महत्वपूर्ण रोल रहा। उसके मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स से पता लगा कि हत्या करने के बाद राशिद ने उसको फोन किया था और उसने ही दोनों हत्यारों की भागने में मदद की।

हे संजय! सच-सच बतलाना: तुम इतनी बेशर्मी, इतना बड़बोलापन लाते कहाँ से हो?

लीडर वो होता है जो रास्ता जानता है, रास्ते पर चलता है और रास्ता दिखाता है।
-जॉन सी मैक्सवेल, अमेरिकी लेखक

मैक्सवेल ने जब यह बात कही होगी तो रास्ते से उनका आशय उस प्रक्रिया से रहा होगा, जिसके जरिए एक नेता अपने लोगों को नई ऊॅंचाइयों तक ले जाता है। सीधी जुबान में कहें तो जनता का जीवन आसान बनाना ही नेता का काम है। लेकिन, ऐसे नेताओं को क्या कहेंगे जो ‘ब’ के लिए जिम्मेदार हों, पर उसे गटर में छोड़ ‘द’ के फेर में दुबले हो रहे हों।

कॉन्ग्रेस के एक प्रवक्ता हैं संजय झा। उनके हमनाम संजय कुमार झा जदयू के विधान पार्षद और बिहार सरकार में मंत्री हैं। दोनों बड़बोले दावों के उस्ताद हैं। इतने बड़े कि उनके बयान से शब्द भी शर्मा जाए। पर इन्हें शर्म आती नहीं।

आज बात बिहार के मंत्री संजय कुमार झा की। बुधवार यानी 23 अक्टूबर को दिल्ली में जदयू कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण शिविर होना है। मुख्य अतिथि होंगे बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, जिनका सुशासन अभी कुछ दिनों पहले बारिश के पानी में उतरा रहा था। राज्य के जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा बतौर विशिष्ट अतिथि इस कार्यक्रम की शोभा होंगे।

सोमवार को इस कार्यक्रम को लेकर जदयू और संजय कुमार झा की ओर से कई ट्वीट किए गए। इन्हें पढ़कर आपको लगेगा कि बिहार में तो साक्षात राम राज्य है और सारी समस्याओं ने दिल्ली में डेरा डाल रखा है। संजय
कुमार झा का एक ट्वीट है, “दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष खुद मुख्यमंत्री के होने के बावजूद दिल्ली भीषण जल संकट के दौर से गुजर रहा है। वहीं, बिहार जैसा राज्य गॉंवों में बसे लोगों के लिए योजनाएँ बना कर उसे जमीनी स्तर पर क्रियान्वित कर रहा है। प्रशिक्षण शिविर में इन सभी मुद्दों पर हम चर्चा करेंगे।”

दिमाग पर जोर डालने की भी जरूरत नहीं है। बिहार नाम लेते ही आपके दिमाग में मुजफ्फरपुर शेल्टर कांड, गर्मी आते ही पानी के लिए मचा हाहाकार, चमकी बुखार, बाढ़ और बारिश से डूबी राजधानी पटना अपने आप कौंध जाती है। बावजूद इसके बिहार के एक मंत्री का दिल्ली के जल संकट के लिए चिंतित होना बताता है कि वह कितने मजबूत कलेजे का होगा!

संजय कुमार झा वही नेता हैं जिन्होंने इसी साल 14 जुलाई को एक साक्षात्कार में दावा किया था कि बिहार सरकार इस बार बाढ़ के हालात से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। दो ही दिन बाद जब बिहार डूब गया और सरकार के सारे दावे बह गए तो उन्होंने कहा, ‘बांध से जब पानी बहेगा तो कोई क्या करेगा।’ वैसे, दावे करना इनकी पुरानी फितरत है। लोकसभा चुनाव से पहले मार्च में इन्होंने एक निजी विमान कंपनी के स्थानीय अधिकारियों के हवाले से बताया था कि 1 अगस्त से दरंभगा से हवाई सेवा शुरू हो जाएगी। टिकट की बुकिंग 1 मई से शुरू होगी। इस ऐलान के साथ दरभंगा में उन्होंने अपने बड़े-बड़े पोस्टर भी लगवाए थे।

मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना उड़ान के तहत दरभंगा से विमानों का परिचालन शुरू होना है। इस दिशा में वहॉं तेजी से काम हो रहा है। लेकिन, तारीख को लेकर आज तक मोदी सरकार ने भी कोई ऐलान नहीं किया है। पर संजय कुमार झा ने जिस वक्त यह घोषणा की थी, उस वक्त वे न मंत्री थे और न ही विधान पार्षद। उनकी पहचान पूर्व विधान पार्षद और जदयू के राष्ट्रीय महासचिव तक सीमित थी। असल में, उस वक्त ऐसी चर्चा थी कि झा को जदयू दरभंगा से लोकसभा चुनाव लड़वा सकती है। लेकिन, न यह सीट जदयू के खाते में गई और न झा लोकसभा चुनाव लड़े। उससे पहले 2014 के आम चुनावों में वे दरभंगा में जदयू के टिकट पर बुरी तरह हारे थे।

बिहार की राजनीति में संजय कुमार झा का उदय भी दिलचस्प है। जब बिहार में सुशासन आया तो वे बीजेपी के विधान पार्षद हो दिल्ली से पटना लैंड हुए थे। कहते हैं कि उनकी पैरवी दिवंगत हो चुके भाजपा के एक बड़े नेता ने की थी। फिर वे नीतीश के करीब हो गए। विधान पार्षद का कार्यकाल पूरा होने के बाद जुलाई 2012 में बीजेपी छोड़ जदयू का दामन थाम लिया। इस साल लोकसभा चुनाव के बाद जदयू उन्हें विधान परिषद में लेकर आई और वफादारी का ईनाम देते हुए नीतीश ने उन्हें अपने कैबिनेट में शामिल कर लिया।

जिस तरीके से सुशासन की पोल खुली है उसमें बतौर मंत्री झा के प्रदर्शन को उनका हनीमून पीरियड मानकर भूलना ही बेहतर होगा। लेकिन, उनके दावों के पीछे का गणित नजरंदाज नहीं किया जा सकता। वैसे भी बिहार में पर्दे के पीछे भाजपा और जदयू बीच खींचतान चल रही है। सो लगे हाथ प्रशिक्षण शिविर के बहाने अप्रत्यक्ष तौर पर भाजपा को भी लपेटने की कोशिश हो रही है। जरा जदयू के इस ट्वीट पर गौर करिए, “दिल्ली में अभी तक जिनकी भी सरकार बनी है, सबने दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने का वादा किया, लेकिन एक बार सत्ता में आने के बाद वे यह वादा भूल गए..! हमारी नीति और निष्ठा राज्य को पूरा अधिकार दिलाने में है..!!”

मैक्सवेल ने भले यह न बताया हो कि नेतृत्व गुमराह हो, जिम्मेदारियों को भूल जाए तो क्या करें। पर लोकतंत्र हर पॉंच साल में भूल सुधार का मौका देता है। दिल्ली के बाद ही सही, अगले साल बिहार में भी चुनाव होने हैं। सो, संजय झा के हर दावे को याद रखिएगा। शायद ऐसे ही नेताओं के लिए मैथिली में कहा गया है, “जे भोज नै करे, से दाइल बड्ड सुरके।”

केजरीवाल और मंत्रियों के इलाज में लुटाए ₹50 लाख: विज्ञापन में मोहल्ला क्लिनिक, ख़ुद का इलाज प्राइवेट में

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और उनके मंत्रिमंडल के साथियों के इलाज के लिए पिछले 4 सालों में सरकारी खजाने से 50 लाख रुपए ख़र्च किए गए हैं। भाजपा ने एक आरटीआई के माध्यम से ये जानकारी निकाली। आरटीआई से यह भी पता चला है कि अकेले सीएम केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के परिजनों के इलाज पर 25 लाख रुपए ख़र्च किए गए हैं। इस जानकारी के सामने आने के बाद भाजपा ने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा है। भाजपा ने पूछा है कि मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिकों की तारीफ करते नहीं थकते लेकिन ख़ुद अपने परिजनों का इलाज महँगे प्राइवेट अस्पतालों में क्यों कराते हैं?

दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने बताया कि अकेले सीएम केजरीवाल के इलाज पर 12 लाख रुपए से भी अधिक ख़र्च किए गए। उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के परिजनों के इलाज पर 13.25 लाख रुपए से भी अधिक ख़र्च किए गए। ये सारा ख़र्च सरकारी खजाने से हुआ। सिसोदिया ने 4 सालों में 35 बार अपने परिजनों का इलाज कराया और हरेक बार सरकारी खजाने से रुपए ख़र्च किए गए। सबसे कम 60 हज़ार रुपए मंत्री सत्येंद्र जैन और उनके परिजनों पर ख़र्च किए गए। एक अन्य मंत्री कैलाश गहलोत के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है।

दिल्ली सरकार में मंत्री गोपाल राय और उनके परिजनों के इलाज पर 7.22 लाख रुपए ख़र्च किए गए, वहीं इमरान हुसैन और उनके परिजनों के इलाज पर 2.46 लाख रुपए ख़र्च हुए। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि किसी को कोई भी बीमारी हो सकती है और पार्टी इलाज कराने के ख़िलाफ़ नहीं है। साथ ही उन्होंने पूछा कि सीएम और डिप्टी सीएम सहित दिल्ली सरकार के मंत्रियों को क्या बीमारियाँ हुई थीं और उसके लिए कहाँ-कहाँ इलाज कराया गया, ये ब्यौरा सार्वजानिक होना चाहिए। प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा;

“दिल्ली सरकार के अस्पतालों में मिलने वाली सुविधाओं का ढिंढोरा पिटवाने के लिए महँगे विज्ञापनों पर करोड़ों ख़र्च करने वाले केजरीवाल जनता को वास्तविकता से रूबरू क्यों नहीं कराते? क्या केजरीवाल को अपने राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं पर भरोसा नहीं है? एक तरफ वो अपना और अपने परिवार का इलाज महँगे अस्पतालों में करवा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली को खस्ताहाल मोहल्ला क्लीनिकों के भरोसे छोड़ रखा है। अगर मोहल्ला क्लिनिक और दिल्ली के सरकारी अस्पताल इतने ही अच्छे होते तो केजरीवाल और उनके मंत्री अपना और अपने परिवार का इलाज निजी अस्पतालों में नहीं करवाते। मुख्यमंत्री जनता की स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।”

आरटीआई से हुए खुलासे के बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने केजरीवाल पर दागे सवाल

बता दें कि सिर्फ़ दिल्ली ही नहीं बल्कि भारत के अन्य राज्यों के अख़बारों में भी आम आदमी पार्टी और दिल्ली सरकार का विज्ञापन आता है, जिसमें दिल्ली के अस्पतालों में मिलने वाली सुविधाओं का जिक्र किया जाता है। इन विज्ञापनों में बताया जाता है कि किस तरह आप सरकार ने दिल्ली की स्वास्थ्य सुविधाओं को बदल कर रख दिया है। साथ ही मोहल्ला क्लिनिक कितने ‘क्रन्तिकारी’ हैं, इस पर भी कई विज्ञापन आते हैं। ऐसे में केजरीवाल और उनके मंत्रियों का परिजनों सहित निजी अस्पतालों में सरकारी खजाने से इलाज करवाना पार्टी के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। दिल्ली में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव भी होने हैं।

मध्य-प्रदेश के कॉन्ग्रेस विधायक आरिफ मसूद पर लव-जिहाद का लगा आरोप

मध्यप्रदेश के भोपाल में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक सुरेंद्र नाथ सिंह की बेटी के लापता होने और बाद में बेटी द्वारा अपने ही परिजनों पर आरोप लगाने की खबरों के बीच इस मामले में एक नया मोड़ आ गया है। मामले में आया नया मोड़ इतना गंभीर है कि इसमें अब लव-जिहाद का ज़िक्र हो रहा है। पूर्व विधायक सुरेन्द्र सिंह ने इस मामले में सीधा कॉन्ग्रेस के विधायक पर आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर कॉन्ग्रेस विधायक ने पूरी घटना से इनकार किया है।

बता दें कि पूर्व विधायक सुरेंद्रनाथ ने कमलानगर थाने में 17 अक्टूबर को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी 26 वर्षीय बेटी भारती 13 अक्टूबर से लापता है। इसमें उन्होंने बेटी का मानसिक स्वास्थ्य ठीक न होने का भी हवाला दिया था। अपनी जाँच के दौरान पुलिस भारती को खोज ही रही थी कि इसी बीच शनिवार को सोशल मीडिया पर उसका एक वीडियो वायरल हुआ और जबलपुर उच्च न्यायालय में उसने सुरक्षा की गुहार लगाते हुए याचिका भी दायर की।

पूर्व विधायक की बेटी का मामला सियासी रंग लेता चला जा रहा है, सुरेन्द्र सिंह ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए आरोप लगाया, “भोपाल में कॉन्ग्रेस विधायक आरिफ मसूद इस लव जिहाद में शामिल हैं। मेरी बेटी की तबीयत ठीक नहीं है, उसका चार साल से इलाज चल रहा है।”

पूर्व विधायक सुरेन्द्र के आरोप पर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद का कहना है, “सुरेंद्रनाथ की बेटी मेरे लिए बेटी के समान है। मुझे उनके आरोपों पर कुछ नहीं कहना। मैं इसे ऊपर वाले पर छोड़ता हूँ।”

जहाँ एक तरफ पूर्व विधायक ने कॉन्ग्रेस विधायक पर गंभीर आरोप लगाए हैं तो वहीं दूसरी ओर बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने मामले पर आक्रोश ज़ाहिर किया है। पूर्व विधायक द्वारा बेटी भारती के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराए जाने के बाद भारती ने खुद शनिवार को एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें उसने अपने परिजनों पर काफी गंभीर आरोप लगाए हैं।

एक वायरल वीडियो में विधायक की बेटी भारती अपने पिता के इस दावे को झुठलाती नजर आ रही हैं कि उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। वीडियो में वह कह रही हैं कि घर छोड़ने के बाद वह ‘सुरक्षित और खुश’ थीं, घर पर उसे अपने परिवार द्वारा परेशान किया जा रहा था।

भारती का कहना है कि वह फिलहाल एक फिटनेस सेंटर में काम कर रही हैं और पुणे में न्यूट्रीशियन का कोर्स कर रही हैं। उन्होंने जबलपुर उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर सुरक्षा के लिए गुहार लगाई है।

ये रहे कमलेश तिवारी के हत्यारे अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन, पुलिस ने फोटो जारी कर रखा ₹5 लाख का इनाम

कमलेश तिवारी की हत्या करने वाले दोनों आरोपितों की तस्वीर पुलिस ने जारी कर दी है। इन दोनों पर ढाई-ढाई लाख रुपए का इनाम भी रखा गया है। ये दोनों वही हत्यारे हैं, जो सीसीटीवी फुटेज में भगवा वस्त्र पहने दिख रहे हैं। इन दोनों ने ही कमलेश तिवारी के घर पर पहले तो चाय पी और फिर उनकी हत्या कर दी। उनके शरीर पर चाकू से 15 वार किए गए थे। हिन्दू समाज पार्टी के अध्यक्ष रहे कमलेश तिवारी की हत्या के बाद पूरे देश में आक्रोश का माहौल बन गया है। दोनों हत्यारों का नाम पठान मोईनुद्दीन अहमद और शेख अशफ़ाक़ हुसैन है।

शुक्रवार (अक्टूबर 18, 2019) को दिनदहाड़े हुए इस हत्याकांड के बाद यूपी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई लोगों को गिरफ़्तार किया है। सूरत से 3 साज़िशकर्ताओं को गिरफ़्तार किया गया है। वहीं के एक होटल से इन लोगों ने मिठाई ख़रीदी थी और फिर इसी मिठाई के डब्बे में हथियार रख कर कमलेश तिवारी के घर के भीतर ले जाया गया था। उत्तर प्रदेश के बिजनौर से दो मौलानाओं को गिरफ़्तार किया गया है, जिन्होंने 2015 में कमलेश तिवारी की हत्या की धमकी दी थी। दोनों की भूमिकाओं की जाँच की जा रही है।

वहीं ये भी पता चला है कि अशफ़ाक़ ने कमलेश तिवारी से परिचय बनाने के लिए पहले उनसे दोस्ती की। अशफ़ाक़ ने कमलेश तिवारी से दोस्ती बनाने के लिए एक फ़र्ज़ी फेसबुक अकाउंट बनाया था। ख़ास बात यह है कि उसने ये फेसबुक अकाउंट अपने नाम से नहीं बल्कि एक रोहित सोलंकी के नाम से बनाया था। जब हमने उस संभावित फेसबुक प्रोफाइल को खंगाला तो पाया कि उसके प्रोफाइल पिक्चर में ‘हिन्दू राज’ और भगवा ध्वज लगा हुआ था।

पुलिस ने इन हत्यारों की तलाश के लिए शाहजहाँपुर के कई मदरसों व मुसाफ़िरख़ानों में भी छापेमारी की है। ये हत्यारे लखीमपुर जिले के पलिया से एक इनोवा गाड़ी बुक कर के शाहजहाँपुर पहुँचे थे। पुलिस ने ड्राइवर से भी पूछताछ की है, जिसने बताया कि उसके मालिक का एक दोस्त गुजरात में रहता है, जिसके कहने पर उसने 5000 रुपए में बुकिंग की। एसटीएफ अभी भी शाहजहाँपुर में डेरा जमाए हुए है। पुलिस को इस बात की भी आशंका है कि ये दोनों सीमा पार कर के पाकिस्तान भागने की फ़िराक़ में लगे हुए हैं।

हत्यारोपितों ने कानपुर के रेलवे मार्किट से सिम कार्ड ख़रीदा था। पुलिस ने उस मोबाइल स्टोर को भी ढूँढ निकाला है। इस सूचना के बाद कानपुर एसटीएफ भी सक्रिय हो गई है। उधर नागपुर से भी सैयद आसिम अली नामक आरोपित को गिरफ़्तार किया गया है। अभी तक तीन राज्यों से इस हत्याकांड के तार जुड़ रहे हैं। बिजनौर, सूरत और नागपुर से गिरफ्तारियाँ हुई हैं। सैयद ने एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें उसने कमलेश तिवारी की हत्या को जायज ठहराया था क्योंकि ‘उन्होंने पैगम्बर मुहम्मद का अपमान किया है।’ सैयद हत्यारों से लगातार संपर्क में था।

भारतीय खाद्य तेल कंपनियों ने किया बहिष्कार तो गिड़गिड़ाया मलेशिया: Pak का किया था कश्मीर पर समर्थन

तुर्की के बाद अब मलेशिया को भी पाकिस्तान के समर्थन का खमियाजा भुगतना पड़ रहा है। मलेशिया ने भी तुर्की की ही तरह एफएटीएफ में पाकिस्तान का समर्थन किया था और संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली में जम्मू कश्मीर को लेकर भारत-विरोधी रुख अपनाया था। अब भारत के एडिबल ऑइल इंडस्ट्री की प्रमुख संस्था ने एक एडवाइजरी जारी करके कहा है कि वो मलेशिया से पाम ऑइल का इम्पोर्ट न करें। ‘साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन’ के अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी ने बताया कि सभी सदस्यों को आगाह कर दिया गया है कि पाम ऑइल के इम्पोर्ट के लिए मलेशिया का रुख न करें

संस्था ने कहा है कि मलेशिया के गड़बड़ रवैये और भारत के साथ उसके तनावपूर्ण रिश्ते को देखते हुए ऑइल इंडस्ट्री ने ये फ़ैसला लिया है क्योंकि इससे पहले भारी मात्रा में एडिबल ऑइल वहाँ से इम्पोर्ट किया जाता रहा है। संस्था ने कहा है कि मलेशिया के प्रधानमंत्री के जम्मू कश्मीर पर दिए गए बयान को हमारे देश ने गंभीरता से लिया है और सरकार ज़रूर इसका सही जवाब देगी। अब जब तक भारत और मलेशिया के रिश्ते स्थित नहीं हो जाते, भारत वहाँ से पाम ऑइल नहीं ख़रीदेगा।

भारतीय ऑइल इंडस्ट्री के इस फ़ैसले के बाद मलेशिया के बाजार पर ख़ासा नुकसान पड़ा है और अब वहाँ की सरकार डैमेज कण्ट्रोल में जुट गई है। मलेशिया ने ऑफर दिया है कि वह भारत से भारी मात्रा में चीनी और भैंस का माँस ख़रीदेगा। नवंबर और दिसंबर के शिपमेंट के लिए कई भारतीय कम्पनियाँ पाम ऑइल के लिए मलेशिया की जगह अब इंडोनेशिया का रुख कर रही हैं। हालाँकि, भारत को मलेशिया और इंडोनेशिया, दोनों ही देशों से पाम ऑइल ख़रीदने की ज़रूरत पड़ती है लेकिन भारत सरकार जल्द ही इस सम्बन्ध में कोई बड़ा निर्णय लेगी।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 दिन के दौरे पर तुर्की जाने वाले थे लेकिन वहाँ के राष्ट्रपति द्वारा संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली में अनुच्छेद 370 निरस्त करने के ख़िलाफ़ दिए गए बयान को भारत ने गंभीरता से लिया क्योंकि यह भारत का आंतरिक मामला है। इसके साथ ही पीएम मोदी ने अपना तुर्की दौरा रद्द कर दिया। तुर्की द्वारा जम्मू कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को समर्थन दिए जाने के बाद भारत ने अपनी विदेश नीति में बड़ा बदलाव करते हुए तुर्की की आलोचना की थी।