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मिलिट्री वर्ल्ड गेम्स से बाहर हुए चीनी चीटर: मेजबान चीनी टीम के एथलीटों ने की थी बेईमानी

चीनी सेना की एक स्पोर्ट्स टीम को अंतरराष्ट्रीय मिलिट्री वर्ल्ड गेम्स से बेईमानी के आरोप में डिसक्वालिफाई कर दिया गया। यही नहीं, आरोपित एथलीटों को और भी प्रतियोगिताओं में भाग लेने से भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। और मज़े की बात यह है कि ये गेम्स चीन के वुहान में ही आयोजित हुए थे। इनके प्रारम्भ के समारोह में अनावरण खुद राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने किया था।

इसी महीने (20 अक्टूबर, 2019 को) हुए ओरिएंटियरिंग नामक स्पर्धा की प्रतियोगिता में प्रतिभागी एथलीटों को केवल एक नक्शे और दिशा सूचक यंत्र (कम्पास) के ज़रिए मध्यम दूरी की दौड़ पूरी करनी थी। चीनी महिला एथलीटों को पहली, दूसरी और चौथी पोज़िशन प्राप्त हुई थी, वहीं चीनी पुरुष धावक दूसरे नंबर पर आया था। इन खेलों का आयोजन चीन में 18 अक्टूबर, 2019 से 27 अक्टूबर, 2019 के बीच हो रहा था।

लेकिन जल्दी ही पता चल गया कि मेजबान चीनी टीम के एथलीटों ने बेईमानी की थी- वह भी कई-कई तरीकों से। न केवल उन्होंने दर्शकों से स्पर्धा के दौरान अवैध सहायता प्राप्त की, बल्कि रास्ते में कई सारे छोटे निशान बने थे जिनके बारे में केवल वे जानते थे (अतः जिनके चलते वे अनुचित लाभ की स्थिति में थे)। इसके अलावा उन्होंने दौड़ के नियत ट्रैक से इतर छोटे रास्तों (शॉर्टकट) का इस्तेमाल किया था- इनके बारे में भी केवल उनकी टीम को ही पता था।

यह सब बातें बाहर आने के बाद उनके प्रतिद्वंद्वी टीमों ने इंटरनेशनल ओरिएंटियरिंग फेडरेशन, जिसके नियमों के अंतर्गत यह स्पर्धा हो रही थी, से शिकायत की। आईओएफ के अधिकारियों ने मामले की जाँच की और आरोपितों को दोषी पाया, जिसके बाद उनके नतीजे कैंसिल कर दिए गए। यही नहीं, दोषी पाए गए एथलीटों को बाकी रेसों में भाग लेने से भी रोक दिया गया। आयोजकों ने चीनी एथलीटों की अपील भी ख़ारिज कर दी।

ज़ाहिर तौर पर शर्मिंदा सरकार के द्वारा चलाए जाने वाले चीनी मीडिया ने इस मामले पर बहुत व्यापक रिपोर्टिंग नहीं की है। इसके उलट टीम की जीत का चीनी मीडिया में ज़ोर शोर से प्रचार हुआ था।

‘हरियाणा में खट्टर के साथ आए निर्दलीय विधायक, जल्द पेश कर सकते हैं सरकार बनाने का दावा’

हरियाणा चुनाव की स्थिति स्पष्ट होने के बाद स्थिति साफ़ हो गई है कि बहुमत किसी भी दल के पक्ष में नहीं है। यही वजह है कि तमाम दल अब निर्दलीय विधायकों से लेकर छोटे दलों को साधने में जुट गए हैं और इसी के साथ राज्य में जोड़-तोड़ की राजनीति शुरू हो गई है। परिणामों की ओर देखें तो यह एक त्रिशंकु विधानसभा है जहाँ किसी भी दल को पूर्ण रूप से अकेले सत्ता में आने का जनादेश नहीं मिला है। हालाँकि, राज्य में सरकार बनाने के लिए भाजपा अब अगले कदम की ओर बढ़त बना रही है। बता दें कि दो निर्दलीय विधायक रणजीत सिंह और गोपाल कांडा के भाजपा के संपर्क में आने से ही यह सुगबुगाहट तेज़ हो गई है कि राज्य में भाजपा सरकार बनाने का दावा जल्द पेश कर सकती है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर इस सम्बन्ध में हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण शर्मा से मुलाक़ात करेंगे। कयास लगाए जा रहे हैं कि इसके बाद वे सरकार बनाने का दावा पेश का सकते हैं। बता दें कि एक निजी टीवी चैनल को इंटरव्यू में गोपाल कांडा के भाई गोबिंद कांडा ने भाजपा को समर्थन देने की बात कही है। गोबिंद कांडा ने बताया कि गोपाल कांडा तीन-चार निर्दलीय विधायकों के साथ दिल्‍ली गए हैं। दूसरी ओर, अन्‍य निर्दलीय विधायकों के भी भाजपा के संपर्क में होने की चर्चा है। इन विधायकों की संख्‍या करीब पाँच बताई जा रही है।

इस चुनाव में जीतने वाले दो विधायक ऐसे भी हैं जोकि भाजपा के बागी हैं। दूसरी ओर, कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी दिल्‍ली रवाना हुए हैं तो वहीं खुदको किंगमेकर जता रहे जेजेपी नेता दुष्‍यंत चौटाला भी दिल्‍ली पहुँच रहे हैं। बता दें कि इससे पहले मुख्‍यमंत्री मनोहरलाल खट्टर भी दिल्‍ली रवाना हुए थे। चर्चा है कि वहाँ वे केंद्रीय गृहमंत्री व भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह से मिले हैं।

बृहस्पतिवार सुबह मतगणना शुरू होने के बाद जैसे ही शुरुआती रूझान आने शुरू हुए, अप्रत्याशित नतीजों को देखकर भाजपा और कॉन्ग्रेस दोनों पार्टियों के नेताओं की धड़कनें बढ़ गईं। दोपहर होने तक लगभग पूरी तस्वीर साफ हो हो गई कि प्रदेश में स्पष्ट बहुमत की सरकार नहीं बनेगी। इसके बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर केंद्रीय नेताओं से मुलाकात कर आगे की रणनीति पर मंथन करने दिल्ली रवाना हो गए।

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वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हरियाणा के लोगो को इन चुनाव परिणामों के लिए धन्यवाद दिया है। पीएम मोदी ने ट्वीट करके आभार जताते हुए कहा, “मैं हरियाणा के लोगों को हमें आशीर्वाद देने के लिए धन्‍यवाद देता हूँ। हम राज्‍य की उन्‍नति के लिए पहले की तरह ही समर्पण और जज़्बे से कार्य करेंगे। मैं भाजपा के कार्यकर्ताओं के कड़े परिश्रम और प्रयास के लिए भी सराहना करता हूँ। कार्यकर्ताओं ने हमारे विकास के एजेंडा से लोगों तक पहुँचाया।” केन्द्रीय गृहमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी चुनाव परिणाम के लिए जनता का आभार जताया और धन्यवाद दिया।

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बता दें कि पार्टी के हरियाणा प्रभारी डॉ. अनिल जैन ने चौटाला परिवार के नजदीकी और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल से संपर्क साधते हुए जजपा और भाजपा में मध्यस्थता कराने का दबाव बनाया है। वहीं, बताया जाता है कि कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने सरकार बनाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को खुली छूट दे दी है। वर्ष 2009 के विधानसभा चुनावों में हुड्डा ने कॉन्ग्रेस के 40 सीटों पर सिमटने के बावजूद न केवल हरियाणा जनहित कॉन्ग्रेस में सेंध लगाई, बल्कि निर्दलीय विधायकों की मदद से पूरे पाँच साल तक सरकार भी चलाई थी। यही वजह है कि कॉन्ग्रेस आलाकमान ने प्रदेश में अपनी पार्टी की सरकार बनाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा को आगे करने में देर नहीं लगाई।

मुस्लिम डिलीवरी बॉय से खाना लेने से इनकार तो FIR, इस्लामी संगठन ने जानकारी कर दी पब्लिक

हैदराबाद में मुस्लिम डिलीवरी बॉय से खाना लेने से इंकार करने पर एक आदमी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज की जा रही है। शाह अली बांदा पुलिस स्टेशन में शिकायतकर्ता 32 वर्षीय मुदस्सिर उमर है। पुलिस ने कहा है कि वह शिकायत की जाँच कर रही है, और अभी तक FIR नहीं लिखी गई है।

हैदराबाद के आलियाबाद में रहने वाले ग्राहक अजय कुमार ने सोमवार (21 अक्टूबर, 2019) की रात को स्विगी के ऍप के इस्तेमाल से शहर के फलकनुमा इलाके के ग्रैंड बावर्ची रेस्त्रां से चिकन-65 का ऑर्डर दिया था। आर्डर के लिए विशेष इंस्ट्रक्शन में अजय कुमार ने लिखा, “बहुत कम मसाले। और कृपया डिलीवरी करने वाले व्यक्ति के लिए हिन्दू का ही चयन करिएगा। सारी रेटिंग इसी के आधार पर होगी।” उन्होंने ऑर्डर का ऑनलाइन पेमेंट किया था।

लेकिन जब मुदस्सिर ने पूरा पता जानने के लिए फ़ोन किया तो नाराज़ अजय कुमार ने डिलीवरी लेने से इंकार कर दिया। उन्होंने खाना स्वीकार करने से इंकार कर दिया और ऑर्डर कैंसिल कर रिफंड माँगा। अपनी रिपोर्ट में हिंदुस्तान टाइम्स ने दावा किया है कि इसको लेकर उनकी स्विगी के कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव से बहस हुई, जिसे स्विगी के कस्टमर केयर सेंटर ने रिकॉर्ड कर लिया। इसके अनुसार कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव ने अजय कुमार को बताया कि उन्हें कैंसिलेशन चार्ज के तौर पर ₹95 भरने पड़ेंगे, जो उनके ऑनलाइन पेमेंट की राशि से काटे जाएँगे, और बाकी पैसा रिफंड होगा।

बकौल मीडिया रिपोर्ट्स, अजय ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि वे चार्ज झेल लेंगे, लेकिन खाना मुदस्सिर से नहीं लेंगे। इसके बाद अगले ही दिन (मंगलवार, 22 अक्टूबर, 2019 को) मुदस्सिर मामले को लेकर हैदराबाद के राजनीतिक दल मजलिस बचाओ तहरीक (एमबीटी) के पास चला गया।

इसके बाद एमबीटी के मुखिया अमज़दुलाह खान ने न केवल मुदस्सिर को अजय कुमार के खिलाफ “हिन्दुओं और मुस्लिमों में दूरी बढ़ाने” के लिए आपराधिक शिकायत पुलिस में करने की सलाह दी, बल्कि उन्होंने खुद ही मामले का राजनीतिकरण भी शुरू कर दिया। ट्विटर पर उन्होंने लिखा:

एडिटर्स नोट: हालाँकि यहाँ पर कस्टमर अजय कुमार की इस माँग का समर्थन या बचाव नहीं किया जा सकता है, लेकिन हर समय ‘पत्रकारिता के एथिक्स’ का रोना रोने वाले पत्रकारिता के समुदाय विशेष की भूमिका का विश्लेषण भी ज़रूरी है। न केवल मीडिया ने हिन्दू ग्राहक का नाम, उसका मोहल्ला आदि खुल कर बता दिए, बल्कि द न्यूज़ मिनट ने तो ग्राहक का कस्टमर केयर के साथ कथित वार्तालाप भी प्रकाशित कर दिया है।

पहली बात तो ऐसी संवेदनशील ही नहीं, गोपनीय और निजता कानून से प्रोटेक्टेड जानकारी TNM को मिली कहाँ से? अगर स्विगी ने दिया तो उसने ग्राहक की निजता का उललंघन किया, और अगर नहीं तो इसकी विश्वसनीयता क्या है? इसके अलावा इसके प्रकाशन से साम्प्रदायिक माहौल पर पड़ने वाले असर का भी मसला है।

देश का माहौल वैसे ही कमलेश तिवारी हत्याकांड के बाद से तनावपूर्ण है और एक बड़ी संख्या में हिन्दू असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। ऊपर से मसला हैदराबाद का है-उस अकबरुद्दीन ओवैसी का गढ़ है, जो हिन्दुओं के सामूहिक हत्याकांड की धमकी का आरोपित है। ऐसे में अगर कमलेश तिवारी की तरह इस हिन्दू ग्राहक के साथ कुछ हो जाए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?

टिकट मिला तो Tik-Tok पर बढ़े फ़ॉलोवर्स, चुनाव हारने पर अब रोने का वीडियो हुआ वायरल

हरियाणा के चुनाव परिणाम के बाद अब सभी दलों की स्थिति स्पष्ट हो गई है। राज्य में भाजपा और कॉन्ग्रेस की जंग अब परिणाम में सिमट कर रह गई है। जहाँ सभी को इंतजार है कि हरियाणा में सरकार बनाने के लिए सभी दलों का सत्ता समीकरण बनाने के लिए अगला कदम क्या होगा वहीं इस चुनाव में हार का मुँह देखने वाली एक प्रत्याशी के रोने की खूब चर्चा हो रही है।

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बता दें कि आदमपुर से कॉन्ग्रेस के कुलदीप बिश्नोई के खिलाफ चुनाव में उतरने वाली भाजपा प्रत्याशी सोनाली फोगाट का एक Tik-Tok वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। बता दें कि सोनाली फोगाट दरअसल एक एंड्राइड एप टिक-टॉक में बनाए अपने तरह तरह वीडियो के चलते सुर्ख़ियों में आई थीं।

एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वह टिक-टॉक पर बेहद लोकप्रिय चेहरा हैं और चुनाव का टिकट मिलने के बाद उनके फॉलोवर्स में काफी बढ़ोतरी हुई थी। यही वजह है कि उन्हें टिक-टॉक क्वीन भी कहा जाता है। मगर अपनी हार पर सोनाली कुछ इस तरह और इतना रोईं कि उनका वीडियो खूब देखा और शेयर किया जाने लगा। उन्होंने अपने साक्षात्कार में कहा था कि वह पहले अक्सर अपने टिक-टॉक में कुछ गैप दे दिया करती थीं मगर फॉलोवर्स के बढ़ने के बाद वह काफी एक्टिव रहेंगी।

सोनाली भले इस साल चुनावी मैदान में अपनी दावेदारी पेश करने उतरी हों मगर भाजपा और राजनीति से उनका पुराना नाता है। दरअसल साल 2013 में भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष ने सोनाली फोगाट को उनके गृह-प्रदेश हरियाणा में राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनाया था। इसी के बाद टिक-टॉक क्वीन नाम से मशहूर सोनाली फोगाट को भाजपा के महिला मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष भी बनाया गया था।

उत्तर प्रदेश के उप-चुनाव में भाजपा के हाथ लगी बड़ी जीत: 11 में से 8 BJP के खाते में

उत्तर प्रदेश में 11 सीटों पर हुए उपचुनाव में तमाम राजनीतिक दलों के संघर्ष के बाद आज नतीजों का एलान किया गया। कड़ी सुरक्षा के बीच हुई मतगणना के शुरुआती रुझानों में सुबह खबर आई कि 11 में से 6 सीटों पर भाजपा ने बढ़त बनाई हालाँकि आखरी परिणाम आते-आते स्थिति स्पष्ट हुई और कुल 11 में से 8 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। जबकि समाजवादी पार्टी के खाते में 3 सीटें आई हैं। मतगणना परिणामों के अनुसार प्रतापगढ़ सदर की सीट पर अपना दल ने जीत दर्ज की, बता दें कि अपना दल से अनुप्रिया पटेल केंद्र की मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में मंत्री भी रह चुकी हैं। वहीं उपचुनाव में पहली बार अपना दाँव अजमाने वाले बसपा को एक भी सीट न जीत पाने के चलते करारी हार का सामना करना पड़ा।

बता दें कि आंबेडकर नगर में जलालपुर सीट से बसपा प्रत्याशी छाया वर्मा लगातार निर्णायक बढ़त बनाए हुए थीं मगर एकाएक उन्हें हराकर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी सुभाष राय ने बसपा की छाया को 823 वोटों से पछाड़ते हुए जीत दर्ज की। जबकि कॉन्ग्रेस सहारनपुर की गंगोह सीट पर कोशिश ही कर पाई। बता दें कि इस इलाके में भाजपा के कीरत सिंह ने कॉन्ग्रेस पार्टी के नोमान मसूद को हराकर इस सीट पर बड़ी जीत हासिल कर दी। अपने प्रत्याशी को हारता देख प्रियंका गाँधी ने प्रदेश की योगी सरकार पर चुनाव में धाँधली के आरोप लगा दिए।

अलीगढ़ के इग्लास में भाजपा प्रत्याशी राजकुमार सहयोगी ने बसपा प्रत्याशी को कड़ी टक्कर दी और अंततः पछाड़ते हुए जीत दर्ज कर ली। हालाँकि, बसपा प्रत्याशी ने काफी समय से बढ़त बनाई हुई थी। कई राउंड होने के बाद बसपा प्रत्याशी इसे अंत तक बरक़रार नहीं रख पाए और हार गए। यूपी उप-चुनाव की एक और सीट से भी भाजपा को जीत मिली है, बता दें कि लखनऊ कैंट से बीजेपी के सुरेश तिवारी ने सपा के आशीष चतुर्वेदी को हराकर एक बार फिर कमल खिलाया है। दरअसल, भाजपा के लिए यह जीत इसलिए अहम है क्योंकि प्रयागराज से रीता बहुगुणा जोशी के सांसद चुने जाने के बाद यह सीट खाली हुई थी।

उत्तर प्रदेश के मऊ से भी कमल खिलने की खबर सामने आई है जहाँ विजय राजभर ने जीत हासिल की। बता दें कि पहली बार चुनाव लड़ने वाले विजय पहले से ही काफी सुर्खियों में थे। इस उपचुनाव में भाजपा की जीत की पताका फहराते हुए माणिकपुर से आनंद शुक्ला, बहराइच के बलहा से सरोज सोनकर, कानपुर के गोविंदनगर से सुरेन्द्र मैथानी ने जीत दर्ज की। बता दें कि रामपुर में सपा नेता और भू-माफिया आज़म खान के किले को भेदने में भाजपा असमर्थ रही। रामपुर की सीट पर सपा नेता आज़म खान की पत्नी तंजीम फातिमा ने जीत दर्ज की। वहीं जैदपुर में भी भाजपा की सीट पर समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की जहाँ सपा के गौरव कुमार ने भाजपा के अम्बरीश कुमार को 4165 मतों से शिकस्त दी।

ED की कृपा से चिदंबरम को जेल में जलानी पड़ेगी दिवाली की मोमबत्ती, अदालत ने बढ़ाई कस्टडी

अभी-अभी जानकारी आ रही है कि पूर्व वित्त मंत्री और INX मीडिया घोटाले के आरोपित कॉन्ग्रेस नेता को दीवाली जेल में ही मनानी पड़ेगी, क्योंकि उनकी ED कस्टडी अदालत ने 30 अक्टूबर तक बढ़ा दी है। मालूम हो कि पूर्व मंत्री पी. चिदंबरम वित्त मंत्री रहने के दौरान रिश्वत लेकर INX मीडिया को विदेशी निवेश की स्वीकृति देने के मामले में आरोपित हैं। उनके खिलाफ सीबीआई और ईडी दोनों की अलग-अलग जाँचें चल रहीं हैं, जिनमें चिदंबरम की कस्टडी दोनों एजेंसियों के बीच रोटेट हो रही है।

इसके पहले उन्हें सीबीआई द्वारा दायर केस में मिली थी और सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के मामले में उन्हें जमानत दे दी थी। लेकिन ईडी मामले में जमानत न मिलने के कारण वे तिहाड़ जेल में ही रहे। और अब इस साल घर पर दिवाली मना पाने की उनकी सारी रही सही उम्मीदें भी धड़ाम हो गईं हैं। उन्हें 22 अगस्त को जोरबाग स्थित निवास से गिरफ्तार किया गया था।

पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने INX मामले में चिदंबरम को जमानत देने से इंकार कर दिया था। जिसके बाद हाई कोर्ट के इस फैसले को चिदंबरम द्वारा सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। 18 अक्टूबर को सुनवाई के बाद उच्चतम न्यायालय ने इस फैसले को सुरक्षित रख लिया था और 22 अक्टूबर को उनकी जमानत संबंधी अपना फैसला सुनाया।

हरियाणा के रुझान बताते हैं कि कॉन्ग्रेस पार्टी को अब परिवारवाद की तिलांजलि दे देनी चाहिए

इसे एक विडम्बना ही कहा जाएगा कि जिस नेहरू-इंदिरा को लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी आज दंभ भरती है, उन्हीं के वंशजों को आने वाले समय में कहीं यह पार्टी पहचानने से इनकार न कर दे। इस परिवार की वर्तमान पीढ़ी ने तो कॉन्ग्रेस पार्टी की जड़ में इतनी तन्मयता के साथ मट्ठा डाला है कि आने वाले समय में यह पार्टी इनका नाम लेने से सम्मान जुटा पाएगी, इसके आसार फिलहाल तो नहीं दिखते।

दशकों से वंशवाद का आरोप झेल रही कॉन्ग्रेस पार्टी आजकल अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। सड़क से लेकर संसद के गलियारों तक इस बात से कोई भी व्यक्ति इनकार नहीं करेगा कि एक परिवार की निष्ठा में शीर्षासन करने वाली कॉन्ग्रेस पार्टी आज सियासी मैदान में लुढ़क कर गिरी जा रही है। आज हरियाणा चुनाव के तमाम रुझान एग्ज़िट पोल के नतीजों को टक्कर देने की स्थिति तक पहुँच रहे हैं। विलुप्त होने के कगार पर पहुँच रही कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए ऐसे रुझानों का आना ठीक वैसे ही है जैसी किसी डूबते को तिनके का सहारा मिलना। मगर सवाल यह उठता है कि क्या इसका श्रेय भी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को दिया जाना चाहिए जो पूरे चुनाव प्रचार के दौरान हरियाणा से लगभग नदारद रहा?

जवाब है नही!

हरियाणा चुनाव में बेशक कॉन्ग्रेस पार्टी बढ़त बनाती दिख रही हो मगर यह नहीं भूलना चाहिए कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस राज्य के चुनाव में कुछ नहीं किया। 18 अक्टूबर को पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी को हरियाणा में एक जनसभा को संबोधित करना था मगर बाद में पार्टी की ओर से सूचना आई कि कुछ अपरिहार्य कारणों के चलते वे नहीं आएँगी, उनकी जगह आए सम्पूर्ण कॉन्ग्रेस पार्टी के लाडले युवराज राहुल गाँधी। अपने भाषणों में आस्तीन चढ़ाकर, अजीबो-गरीब भाव-भंगिमा सहित कुछ भी बोल देने वाले राहुल गाँधी। जिनका ‘गाँधी’ सरनेम उनकी सबसे बड़ी योग्यता है। इन साहब ने भी राज्य में कोई ख़ास प्रदर्शन करने की ज़हमत नहीं उठाई, उनके यही तेवर पार्टी को अस्तित्व के संकट से थोड़ा बहुत ऊपर लाए हैं। मानो जैसे जनता के सबसे बड़े दुश्मन यही हों। सच कहें तो यह पार्टी अब वह बैल है जिसे खुद गाँधी भी नहीं हाँकना चाहेंगे।

‘गाँधी’ सरनेम की योग्यता से पार्टी की महासचिव बनीं प्रियंका गाँधी भले ही रुझानों पर कितनी ही ख़ुशी जताएँ मगर अंदरखाने वह इस बात को जानती हैं कि जनता उन्हें और उनके परिवार को सत्ता के लिए अब कितना योग्य समझती है और यह बताने के लिए लोकसभा चुनाव काफी थे। कॉन्ग्रेस पार्टी जिस प्रियंका गाँधी को फायरब्रांड नेता बताती है, हरियाणा में प्रचार को लेकर उनकी सुस्ती से मान लिया गया कि पार्टी के सर्वेसर्वा परिवार ने पहले ही अनहोनी को भाँपकर अपने हथियार डाल दिए थे। साथ ही आज हरियाणा के रुझानों से इतना तो तय हो ही गया कि अगर देश की सबसे पुरानी पार्टी को लोकतंत्र में अपने आस्तित्व को बचाए रखना है तो अब इस परिवार की तिलांजलि देने का वक़्त आ गया है।

लोकतंत्र में राजनीतिक दलों और संगठनों का ख़ासा महत्त्व होता है। इस तंत्र में हर एक दल किसी न किसी विचारधारा का प्रतिनिधित्व करने के लिए राजनीति में उतरते हैं। इन्हें समाज के विभिन्न विचारों की नुमाइंदगी करने वाले के रूप में देखा जाता है। ऐसा ही एक दल एक शताब्दी से भी लम्बा इतिहास समेटे आज अस्तित्व तलाशने में लड़खड़ा रहा है। इसमें कोई दो राय नहीं कि पिछले 10-15 सालों में जनता ने इस बात को बखूबी समझा है कि कॉन्ग्रेस पार्टी में सत्ता-सुख की लालसा रखने वाला केन्द्रीय नेतृत्व यानी गाँधी परिवार पर गाहे-बेगाहे भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहते हैं। आरोप लगने से लेकर इसकी सच्चाई आने तक जनता एक मतदाता के रूप में अपना काम कर चुकी होती है। क्यों, क्योंकि खून-पसीना एक कर टैक्स भरने वाली जनता और करे तो क्या करे? उसके खाते में तो बस टू-जी स्पेक्ट्रम, कोयला और कॉमनवेल्थ जैसे घोटालों की खबरें ही आती हैं जिसके बाद वह खुदको सिर्फ एक ठगा हुआ मतदाता महसूस करता है।

अगर कोई यह कहे कि अस्तित्व की इस लड़ाई में पार्टी को उम्मीद की किरण अध्यक्ष पद पर सोनिया के दोबारा आने से सक्रिय हुए ओल्ड-गार्ड्स (पुराने नेताओं) की बनाई नीति ने दी है तो इस बात का उल्लेख किया जाना बेहद ज़रूरी है कि इस नीति के तहत या तो परिवार को पंजाब के विधानसभा चुनाव से सीख लेकर इस चुनाव में थोड़ा दूर रहने की नसीहत दी गई थी (जिसका प्रभाव इलेक्शन में देखा गया) अन्यथा दूसरा विकल्प यही था कि ओल्ड-गार्ड उन्हें अटलजी की कविता ‘क्या हार में क्या जीत में’ सुना दें। जो लोग इस डूबती नैय्या के बाल-बाल बचने पर सोनिया गाँधी के सर क्रेडिट का ताज पहना रहे हैं उन्हें जानना चाहिए कि पंजाब में विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गाँधी पार्टी अध्यक्ष होकर भी सक्रिय नहीं थे। इस पर जनता ने पंजाब में कैप्‍टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस को इज्ज़त बक्शी थी और वे सरकार में आ गए। उस वक़्त भी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व यानी गाँधी परिवार राज्य के चुनाव से दूर था। लिहाज़ा हरियाणा और पंजाब के इन उदाहरणों से यह बात स्पष्ट होती है कि लगातार हार का मुँह देखकर जीवनयापन करने वाली कॉन्ग्रेस पार्टी बार-बार परिवार की छवि से अब खुदको धूमिल करना नहीं चाहेगी। हरियाणा और पंजाब दोनों राज्यों के चुनाव में जनता ने पुरखों की पार्टी लेकर इतराने वाले ‘गाँधी परिवार’ को आइना दिखाया है।

कश्मीर के पुंछ में सेना के कमांडर को ले जा रहे हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग: सभी अधिकारी सुरक्षित

जम्मू-कश्मीर के पुँछ जिले के पास आज (गुरुवार, 24 अक्टूबर, 2019 को) भारतीय सेना के एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच) की इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी है। चॉपर के सवारों में भारतीय सेना की उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह भी शामिल थे। ध्रुव नामक श्रेणी के इस चॉपर की लैंडिंग का कारण तकनीकी खराबी को बताया जा रहा है। सेना की उत्तरी कमांड ने एक बयान में कहा, “उत्तरी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह को ले कर जा रहे एक हेलीकॉप्टर को तकनीकी समस्या के चलते पुँछ के क्षेत्र में लैंडिंग करने के लिए मजबूर पड़ा है। चालक दल के सभी सदस्य और अधिकारी सुरक्षित हैं।” लैंडिंग पुँछ के मंडी इलाके में होने की बात मीडिया में कही जा रही है।

जब यह घटना हुई, तो लेफ्टिनेंट जनरल सिंह 16 कॉर्प्स एरिया ऑफ़ ऑपरेशन्स की एक फॉरवर्ड लोकेशन से वापिस लौट रहे थे। यह नियंत्रण रेखा (एलओसी) के बहुत ही पास का इलाका है।

लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह को 2016 में उड़ी हमले की जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हुई सीमित सैन्य कार्रवाई (सर्जिकल स्ट्राइक) का अहम हिस्सा माना जाता है। वही इस ऑपरेशन का चेहरा भी थे। इसके अलावा सेना के सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ साल पहले भी लेफ्टिनेंट जनरल सिंह से जुड़ा कोई हेलीकॉप्टर हादसा हो चुका है।

सेना के सूत्रों के मुताबिक चॉपर को उड़ाने वाले पायलट लेफ्टिनेंट कर्नल नाम्बियार थे। उनके को पायलट एक नेवी से सेना में डेपुटेशन पर आए अधिकारी थे जिनका नाम अभी तक पता नहीं चल पाया है। दोनों पायलटों में से एक को चोटें आने की बात कही जा रही है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में स्थानीय पुलिस के सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि पायलटों के अलावा एक सिविलियन भी घायल हुआ है।

हम तो हार गए, लेकिन हमें छोड़ने वाले भी नहीं जीते: NCP नेता शरद पवार

कॉन्ग्रेस और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (राकांपा) ने महाराष्ट्र के चुनावों में अपनी हार स्वीकार कर ली है। राकांपा के प्रमुख, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और यूपीए में केंद्रीय कृषि मंत्री रह चुके शरद पवार ने अपने-अपने क्षेत्रों में जीत हासिल करने वाले राकांपा नेताओं को बधाई देते हुए कहा कि उनकी पार्टी और कॉन्ग्रेस के गठबंधन ने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया है। साथ ही पार्टी छोड़ कर भाजपा कैम्प का रुख करने वालों पर तंज़ कसते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी से टूट कर उधर जाने वालों को वहाँ भी स्वीकारा नहीं जा रहा है। 80 साल के पवार महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस के संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के सबसे वरिष्ठ नेता हैं।

एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान पवार ने कहा, “विपक्ष ने बहुत मेहनत की, और कॉन्ग्रेस, एनसीपी और अन्य सहयोगियों के सभी सदस्यों ने अपना सर्वश्रेष्ठ समर्पित किया और नतीजा लाकर दिया। मैं उन सभी को धन्यवाद देता हूँ। पावर आती है, पावर जाती है लेकिन कॉज के प्रति डटे रहना ज़रूरी होता है और मैं सभी लोगों को उनके द्वारा बरसाए गए प्रेम के लिए आभार प्रकट करता हूँ।”

इसके बाद उन्होंने आगे जोड़ा, “एक ज़रूरी चीज़ जो देखने लायक है वह ये है कि जो लोग हमें छोड़ कर गए, उन्हें (वहाँ) स्वीकार नहीं किया जा रहा है। दल बदल उनके काम नहीं आई जो छोड़ कर गए थे।”

गौरतलब है कि चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में भी सतारा की एक रैली में शरद पवार ने पार्टी में हुई दलबदल का ज़िक्र किया था। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस आरोप कि वे (पवार) लोक सभा चुनाव मोदी के डर से नहीं लड़े, पवार ने यह माना था कि अपने पारम्परिक गढ़ सतारा में उन्होंने सही उम्मीदवार नहीं उतारा था। उनके निशाने पर चुनाव जीतने के बाद पार्टी छोड़ भाजपा में शामिल हो जाने वाले उदयराज भोंसले रहे थे।

पवार ने यह भी बताया कि उनकी पार्टी जल्दी ही चुनावों के बारे में कुछ चीज़ों पर विचार विमर्श करने के लिए एक बैठक का आयोजन करेगी और उसमें आगे की रणनीति और भविष्य की कार्ययोजना तय की जाएगी। दोपहर 2 बजे के समय तक, जब पवार की यह कॉन्फ़्रेंस हो रही थी, तब तक महाराष्ट्र से आ रहे रुझानों के मुताबिक भाजपा और शिव सेना का गठबंधन 162 सीटों पर आगे चल रहा था, जबकि कॉन्ग्रेस और एनसीपी के यूपीए ने 99 का आँकड़ा छू लिया था। अन्य 27 सीटों पर बढ़त लेते दिख रहे थे। 288 सीटों की विधानसभा में बहुमत का आँकड़ा 145 का है।

अमित शाह ने ट्वीट कर दिया है, हरियाणा में सरकार तो भाजपा की ही बनेगी

यूँ तो हरियाणा चुनावों में आज अभी तक किसी को पूर्ण बहुमत मिलने के आसार नहीं दिख रहे लेकिन केंद्रीय गृहमंत्री और ‘आधुनिक चाणक्य’ कहे जाने वाले अमित शाह ने ट्वीट करके कहा है कि हरियाणा में भाजपा की सरकार बनेगी।

उन्होंने लोगों को धन्यवाद देते हुए ट्वीट में लिखा, “गत 5 वर्षों में मोदी जी के केंद्रीय नेतृत्व में खट्टर सरकार ने हरियाणा की जनता के कल्याण के लिए हर संभव प्रयास किये। भाजपा को सबसे बड़ी पार्टी बनाकर पुनः सेवा का मौका देने के लिए जनता का अभिनंदन करता हूँ। मुख्यमंत्री श्री @mlkhattar, श्री @subhashbrala व सभी कार्यकर्ताओं को बधाई।”

अमित शाह के बारे में कहा जाता है कि वो हवा-हवाई बातें नहीं करते और जब वो बोलते हैं तो ज़िम्मेदारी से बोलते हैं। जहाँ JJP के दुष्यंत चौटाला स्वयं को किंगमेकर घोषित किए घूम रहे हैं, वहीं कुछ का मानना है कि निर्दलीय विधायक निर्णायक हो सकते हैं।

एक तरफ लंबे-चौड़े डील-डौल वाले जेजेपी के दुष्यंत चौटाला बड़े चौड़े होकर घूम रहे हैं। जीत की खुमारी के बाद यह स्वभाविक भी है। देश के उप-प्रधानमंत्री से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री तक की राजनीतिक विरासत जिसे मिली हो, जिसके पास सबसे युवा सांसद का तमगा रहा हो, उसके लिए यह जीत तब और ज्यादा मायने रखती है, जब पिता और दादा जेल में हों। खुद की बनाई पार्टी नई हो। लेकिन 10 सीटों पर जीत लगभग पक्की कर चुके दुष्यंत राजनीति की सबसे पुरानी लाइन भूल जाते हैं – कुछ भी संभव है यहाँ।

हरियाणा चुनाव के परिणाम लगभग स्पष्ट हो चुके हैं। BJP 46 के मैजिक आँकड़े से पीछे रह गई है। पीछे तो कॉन्ग्रेस भी रह गई है। लेकिन मामला अंतर का है, मामला गणित का है। अभी तक का गणित BJP को 40 जबकि कॉन्ग्रेस को 30 सीट दे रहा है। मतलब मैजिक आँकड़े तक पहुँचने के लिए BJP को चाहिए 6 विधायक जबकि कॉन्ग्रेस को चाहिए 16 विधायक।

वहीं एक दूसरे दिलचस्प समीकरण में भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ शोर शराबा सबसे अधिक करने वाली आम आदमी पार्टी और लेफ्ट पार्टियाँ ‘NOTA’ (None Of The Above, इनमें से कोई भी नहीं) से भी पीछे दिख रहीं हैं। यानि दिल्ली के मुख्यमंत्री के ‘घर’ में ही उनकी पार्टी की पूछ नोटा से भी कम हो गई है। गौरतलब है कि दिल्ली के बगल में ही स्थित हरियाणा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का गृह राज्य है। इसी तरह चुनाव आयोग की वेबसाइट पर मौजूद आँकड़ों के हिसाब से कम्युनिस्टों को भी NOTA से कम ही वोट मिले हैं।

चुनाव आयोग का डाटा बताता है कि NOTA का मत प्रतिशत (वोट शेयर) इन चुनावों के कुल मतों का 0.55% रहा। वहीं आम आदमी पार्टी को केवल 0.45% वोट ही मिले। कम्युनिस्टों की बदहाली का तो ये आलम है कि CPI और CPI(M) को महज़ 0.03% और 0.09% वोट ही मिले।