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मंत्री के घर कचरा फेंकने जा रहे थे पप्पू यादव, ट्रैफिक पुलिस ने काटा 5000 रुपए का चालान

जन अधिकार पार्टी (JAP) के नेता और पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव पर बिना वैध लाइसेंस कूड़े से भरा ट्रैक्टर चलाने के मामले में जुर्माना लगाया गया है। पुलिस ने बताया कि पप्पू यादव ने इस कूड़े को राज्य सरकार के मंत्री सुरेश शर्मा के घर के सामने फेंकने की धमकी दी थी।

दरअसल, पप्पू यादव ने गुरुवार (अक्टूबर 17, 2019) को अपने कार्यकर्ताओं के साथ पटना के कई इलाकों में सफाई अभियान चलाया और कचरे को लादकर बिहार के नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा के सरकारी आवास पर फेंकने जा रहे थे। इसकी सूचना मिलते ही मंत्री सुरेश शर्मा के आवास की सुरक्षा बढ़ा दी गई और सचिवालय डीएसपी सहित कई पुलिस बल को वहाँ तैनात किया गया।

पुलिस ने पप्पू यादव के ट्रैक्टर को आशियाना मोड़ पर रोक दिया और उसके बाद पप्पू यादव और उनके समर्थकों को राजीव नगर थाना पुलिस अपने साथ ले गई। जब पप्पू यादव का ड्राइविंग लाइसेंस चेक किया गया तो वह टू व्हीलर का निकला, जो 2017 में ही एक्सपायर हो चुका था। पुलिस ने बताया कि पप्पू यादव को रोक कर 5000 रुपए का जुर्माना लगाया गया क्योंकि उनके पास हल्के वाहन चलाने का लाइसेंस था, जिसकी वैधता 2017 में ही समाप्त हो गई थी।


इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पप्पू यादव ने कहा, ‘‘मुझे विरोध दर्ज कराने के मौलिक अधिकारों से वंचित किया गया। मेरे पास लाइसेंस है लेकिन बहुत ही कमजोर आधार पर चालान किया गया कि मैं भारी वाहन चलाने की योग्यता नहीं रखता।”

वहीं मंत्री सुरेश शर्मा के घर के बाहर गंदगी फेंकने की बात पर उन्होंने कहा कि उन्हें मंत्री के घर के सामने गंदगी फेंकने से कोई खुशी नहीं होती। वो तो बस इतना चाहते थे कि मंत्री को भी उस नारकीय स्थिति का एहसास हो, जिसमें शहर के लोग रह रहे हैं।

पूर्व सांसद पप्पू यादव ने आगे कहा, ‘‘इस सरकार की प्राथमिकताएँ गलत हैं। सरकार अरबों रुपए प्रचार पर खर्च कर रही है लेकिन अस्पतालों को प्लेटलेट चढ़ाने की किट के लिए पैसे नहीं मिल रहे हैं। हालाँकि, इस असंवेदनशील सरकार के खिलाफ किसी भी तरह से आवाज उठाता रहूँगा। मैं अपने संसाधन से प्लेटलेट चढ़ाने की किट खरीद कर पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान को दान करूँगा।’’

ED ने कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी के ख़िलाफ़ आरोप-पत्र दायर किया, ₹8,000 करोड़ के गबन का लगाया आरोप

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी और उनकी कंपनी मोजरबियर के ख़िलाफ़ कथित मनी लॉन्ड्रिंग और बैंक धोखाधड़ी मामले में आरोप पत्र दायर किया। जानकारी के अनुसार, गुरुवार (17 अक्टूबर, 2019) को दायर की गई ED की चार्जशीट में कहा गया है कि पुरी और उनकी कंपनी ने 8,000 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की है।

ख़बर के अनुसार, ED की चार्जशीट में उल्लेख किया गया है कि पुरी, जो मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ के भांजे हैं, और उनके सहयोगियों ने लगभग 30 बैंकों और वित्तीय संस्थानों से व्यवसाय के लिए लगभग 8000 करोड़ रुपए की धनराशि का दुरुपयोग किया।

आपको बता दें कि ED द्वारा उल्लिखित राशि उनके पिछले अनुमानों से अधिक है। मोजरबियर की कुल देनदारियों को 7979 करोड़ रुपए बताया गया है।


विशेष न्यायाधीश संजय गर्ग ने कथित तौर पर चार्जशीट को संज्ञान में लिया और दस्तावेज़ों की जाँच के लिए 25 नवंबर की तारीख़ तय की है। ED ने पुरी को 20 अगस्त को गिरफ़्तार किया था। इसके बाद उन्हें 17 अक्टूबर तक अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। ED के अलावा CBI और आयकर विभाग भी पुरी और उनकी कंपनी मोजरबियर की जाँच कर रहे हैं।

इसके अलावा रतुल पुरी पर अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी चॉपर घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप है। इस मामले में उसकी अग्रिम ज़मानत पहले ही ख़ारिज कर दी गई थी। ED ने यह भी आरोप लगाया है कि वीवीआईपी चॉपर घोटाले में गवाह की हत्या के लिए रतुल पुरी ज़िम्मेदार हैं।

रतुल पुरी, उनके पिता दीपक पुरी और उनकी माँ नीता पुरी (कमलनाथ की बहन) को सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा दर्ज किए गए बैंक धोखाधड़ी के मामले में ED द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) मामले में आरोपी के तौर पर दर्ज किया गया था। पुरी के ख़िलाफ़ ED का मामला 17 अगस्त की CBI की FIR पर आधारित था।

पुरी परिवार के अलावा, अन्य व्यक्तियों, संजय जैन और विनीत शर्मा को भी CBI ने कथित आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, जालसाज़ी और भ्रष्टाचार के लिए जाली और मनगढ़ंत दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करने के लिए मामला दर्ज किया था। इन जाली दस्तावेज़ों का उद्देश्य मोजरबियर कंपनी के लिए बैंकों से फंड प्राप्त करना था।

HC की फटकार के बाद लाइन में आई केजरीवाल सरकार, देना पड़ा हिन्दू बच्चों को स्कूल में दाखिला

दिल्ली हाईकोर्ट की सख्ती के बाद केजरीवाल सरकार पाकिस्तान से आए तीनों हिन्दू बच्चों को स्कूल में दाखिला देने के लिए मान गई। 17 अक्टूबर को मामले में सुनवाई के बाद न्यायधीश राजीव शकधर ने बच्चों के तुरंत दाखिले के आदेश दिए। कुछ दिन पहले बड़ी उम्र का हवाला देकर स्कूल से अचानक निकाल दिए गए संजिना बाई, मूना बाई और रवि कुमार को भाटी माइन्स के सरकारी स्कूल में कक्षा नौंवी में दाखिला मिला।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के जुल्मों सितम से परेशान होकर दिल्ली आए इन हिन्दू बच्चों को महीनों से तालीम के अधिकार के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा था। लेकिन कुछ दिन पहले बच्चों के पिता गुलशेर ने सुप्रीम कोर्ट के वकील अशोक अग्रवाल की मदद से दिल्ली हाइकोर्ट में याचिका दायर करवाई। जिसके बाद न्यायधीश राजीव शकधर ने इस पर संज्ञान लिया और 11 अक्टूबर को दिल्ली सरकार को नोटिस भेजा।

नोटिस में दिल्ली सरकार से पूछा गया कि आखिर उन्हें बच्चों को दाखिला देने में क्या दिक्कत है? इस दौरान कोर्ट ने दिल्ली सरकार को जवाब देने का समय और अगली सुनवाई की तारीख 17 अक्टूबर तय की।

17 तारीख को मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील रमेश सिंह ने न्यायधीश से कहा कि वो अपने आदेश में इस दाखिले को ‘इंसानियत के आधार पर (humanitarian ground )’ पर लिया फैसला बताएँ, लेकिन बच्चों के अधिकार की लड़ाई लड़ रहे वकील अशोक अग्रवाल ने कहा, “कौन सी इंसानियत के आधार पर? हम भिखारी नहीं हैं, हम अपने अधिकारों की माँग कर रहे हैं? राज्य कभी दान नहीं करता, यह संविधान के अनुसार काम करता है।

इसके बाद न्यायधीश शकधर ने वकील अशोक अग्रवाल की बात से सहमत होते हुए कहा, “मिस्टर अग्रवाल सही बोल रहे हैं, राज्य कभी दान नहीं देता, संविधान के तहत यह बच्चों का अधिकार है।”

बता दें कि 14 मई को पाकिस्तान से दिल्ली आए ये बच्चे छतरपुर के भाटी माइन्स में अपने पिता गुलशेर के साथ रहते हैं। बीते दिनों आगे की शिक्षा जारी रखने के लिए इन्हें कई तरह की परेशानियों से होकर गुजरना पड़ा। स्कूल ने पहले दाखिला दिया भी, लेकिन फिर बड़ी उम्र का हवाला देकर स्कूल से कुछ ही दिन में निकाल दिया। बच्चों के पिता इस बीच दिल्ली सरकार के कई अधिकारियों से मिले, लेकिन उनकी गुहार अनसुनी ही रही। अंत में उन्होंने थक हारकर वकील अशोक अग्रवाल की मदद से न्यायपालिका की ओर रुख किया। जिसके बाद दिल्ली सरकार को उन्हें दाखिला देने के लिए मानना ही पड़ा।

पूरा मामला जानने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- ऑपइंडिया एक्सक्लूसिव: पाकिस्तान से आए हिंदू बच्चों को स्कूल ने निकाला, केजरीवाल सरकार में अनसुनी फरियाद

स्कूल के एक कमरे में बंद कर दिए 17 गाय, सभी की मौत: MP की घटना, कमलनाथ ने कहा – दुखद

मध्य प्रदेश में गोरक्षा और गोसेवा के दावे और वादे के साथ सत्ता में आई कमलनाथ सरकार के राज में ग्वालियर जिले में 17 गायों को बंद करके रखने के चलते मौत हो जाने का मामला सामने आया है। मामला डबरा सिटी थाना अंतर्गत समूदन गाँव का है, जहाँ सरकारी स्कूल के एक छोटे से कमरे में 17 गायों को पिछले कुछ दिनों से बंद कर बिना चारा-पानी के भूखे-प्यासे मरने के लिए छोड़ दिया गया था। 

जानकारी के मुताबिक, कमरे के अंदर से बदबू आने पर बुधवार (अक्टूबर 16, 2019) की रात कुछ अज्ञात लोग जेसीबी से गड्ढा खोदकर मृत गायों को दफना रहे थे। जिसकी सूचना बजरंगदल, विश्व हिंदू परिषद और गोसेवकों को लग गई थी। सूचना मिलते ही हिंदू संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता रात को मौके पर पहुँचे। जिनको देखकर जेसीबी चालक सहित अन्य लोग भाग गए। हिंदूवादी संगठनों से इसको लेकर हंगामा करना शुरू कर दिया।

बाद में मौके पर एसडीएम राघवेंद्र पांडे, एसडीओपी उमेश सिंह तोमर अपले के साथ पहुँचे। जहाँ मौके पर जेसीबी जब्त की गई। राघवेंद्र पांडे ने पुलिस की मदद से गड्ढों से 17 मृत गायों को बाहर निकलवाया और फिर इनका पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया। राघवेंद्र पांडे ने नाराज गोसेवकों को मामले की जाँच कराए जाने का आश्वासन दिया। मामले को लेकर सिटी थाने में गोसुरक्षा अधिनियम के तहत अज्ञातों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

नई दुनिया में प्रकाशित खबर का स्क्रीनशॉट

एसडीएम राघवेंद्र पांडे का कहना है कि शुरुआती जाँच में गायों की मौत की वजह उन्हें अवैध रूप से कई घंटों तक कमरों में बंद करके रखना माना जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि भूख-प्यास से गायों की मौत हुई होगी। वहीं, हिन्दूवादी संगठनों का कहना है कि गायों की हत्या की गई है। एसडीएम ने इस बाबत जिला अधिकारी, जनपद पंचायत सीईओ और डबरा के लोक निर्माण विभाग को नोटिस जारी कर मामले की जाँच 3 दिन में प्रतिवेदन भेजने का निर्देश दिया है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गायों की मौत पर दुख प्रकट करते हुए कहा, “ग्वालियर के डबरा के समूदन  में 17 गायों की मृत्यु की ख़बर बेहद दुखद। इस घटना की निष्पक्ष जाँच के निर्देश। जाँच में जिसका दोष सामने आए, उस पर कड़ी कार्यवाही हो। हम गौमाता की रक्षा व संवर्धन के लिये निरंतर प्रयासरत व बचनबद्ध। ऐसी घटनाएँ बर्दाश्त नहीं की जा सकती है।”

17 गायों की मौत पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ को और हर पंचायत में गोशाला खोलने की उनकी योजना को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा, “कॉन्ग्रेस ने अपने वचन पत्र में गौशाला बनाने का वचन दिया था। अगर शासन-प्रशासन गाय को गोशाला में ले जाता, तो वो किसी कमरे में बंद नहीं होती और मौत का शिकार नहीं होती। वचन देकर मुकरना, फिर गाय का मर जाना, ये गौ हत्या जैसा पाप है। शासन को पहल करनी चाहिए, ताकि ऐसे गोमाता न मरें।” उन्होंने आगे कहा, “कॉन्ग्रेस ने गोमाता को वोट प्राप्ति का साधन बना लिया है। ये गोमाता की रक्षा की बजाय अपने हितों को साधने का काम कर रहे हैं। मैं आग्रह करता हूँ कि गोमाता पर ऐसे खेल बंद होना चाहिए। सरकार तत्काल गौशालाएँ खोलें, उसमें गायों को भेजें, ताकि ये अकाल मृत्यु का शिकार न हों।”

गौरतलब है कि हाल ही में दिग्विजय सिंह ने भी सड़कों पर मौजूद गायों को गोशाला में भेजने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ से कहा था कि आप सच्चे गोभक्त तभी कहलाएँगे जब गोमाता के लिए गोशाला खोलेंगे। दिग्विजय सिंह की प्रतिक्रिया पर कमलनाथ ने ट्वीट कर बताया कि वो जिस मामले पर उनका ध्यान केंद्रित करवा रहे हैं, उस पर काम करने के लिए वे पहले से प्रयासरत हैं।

‘वाजपेयी नहीं करते थे किसी को नाराज़… जबकि फ़ैसले को कठोरता से लागू करने की क्षमता है मोदी के पास’

महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है, ऐसे में सियासी घमासान तेज़ होना लाज़मी है। इस दौरान बयानबाज़ी का दौर भी अपने चरम पर है। ऐसे में राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष शरद पवार ने भी कुछ ऐसा कह डाला, जो शायद उनकी खुद की पार्टी के लिए उल्टा पड़ जाए। दरअसल, उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तुलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की। और ऐसा करते हुए उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जब कोई फ़ैसला लेते थे, तो वे इस बात का ध्यान रखते थे कि उस फ़ैसले से किसी को कोई समस्या न हो, यानी कोई उनके फ़ैसले से नाराज़ न हो। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी की बात करें तो वो किसी भी फ़ैसले के क्रियान्वयन के मामले में प्रभावी और कठोर हैं।

2017 में, पीएम मोदी के प्रथम कार्यकाल के दौरान पद्म विभूषण पुरस्कार पाने वाले शरद पवार ने पीटीआई को दिए साक्षात्कार में कहा, “वाजपेयी एक भद्र पुरूष थे, जबकि किसी कार्यक्रम के क्रियान्वयन के मामले मेंं मोदी एक प्रभावी व्यक्ति हैं। कोई फ़ैसला ले लेने के बाद उसे कठोरता से लागू करने की मोदी के पास क्षमता है।” उन्होंने कहा कि भाजपा के दिग्गज़ नेता स्वर्गीय वाजपेयी के प्रति लोगों के बीच काफ़ी सम्मान था। बता दें कि अटल बिहारी वाजपेयी जब प्रधानमंत्री के पद पर थे, उस दौरान उन्होंने पवार को आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का उपाध्यक्ष नियुक्त किया था।

इसके अलावा, पवार ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस पर भी निशाना साधा और कहा कि उन्होंने राज्य में किसानों और उद्योगों की समस्याओं को हल करने के लिए कोई पहल नहीं की। उन्होंने कहा कि फडणवीस नतीजे देने वाले और प्रभावी मुख्यमंत्री नहीं माने जाते हैं।

पिछले कुछ समय में कुछ पूर्व मंत्रियों और विधायकों ने NCP को छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया, इस सवाल पर पवार ने कहा कि इससे उनकी पार्टी को युवा चेहरों को चुनावी मैदान में उतारने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि NCP इन दल-बदलू नेताओं को हराने के लिए अपनी पूरी ताक़त लगा देगी। इस दौरान उन्होंने उस धारणा को भी ख़ारिज कर दिया कि कॉन्ग्रेस की छवि धूमिल हो गई है। उन्होंने संकेत दिया कि राज़्य में दोनों पार्टियाँ मिलकर लड़ेंगी।

BSP नेता मुख्तार अंसारी के बेटे के घर में छापेमारी, 6 विदेशी बंदूकों सहित 4431 कारतूस बरामद

उत्तर प्रदेश के बहुजन समाजवादी पार्टी के नेता मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी के दिल्ली स्थित घर पर लखनऊ पुलिस ने गुरुवार (अक्टूबर 17, 2019) को छापेमारी करके 6 बंदूक और 4,431 कारतूस बरामद किए।

बरामद हथियारों की कीमत लाखों में बताई जा रही है। इनमें इटली, ऑस्ट्रिया और स्लोवेनिया मेड रिवॉल्वर, बंदूक और कारतूस शामिल हैं। इसके अलावा अब्बास के पास से मैंग्नम की रायफल, अमेरिका मेड रिवॉल्वर, ऑस्ट्रिया की स्लाइड और ऑटो बोर पिस्टल भी इस छापेमारी में जब्त हुई है।

जानकारी के मुताबिक अभी हाल ही अब्बास पर एक लाइसेंस पर एक से ज्यादा हथियार खरीदने के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ था। जिसे यूपी पुलिस ने महानगर कोतवाली में दर्ज किया था। इसके अलावा उस पर फर्जी तरीके से आर्म्स लाइसेंस को दिल्ली ट्रांसफर कराने का भी मुकदमा दर्ज था।

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इन शिकायतों के आधार पर ही लखनऊ पुलिस ने अब्बास के दिल्ली में वसंत कुंज स्थित घर पर छापेमारी की और विदेशी हथियारों के साथ 4,431 के करीब कारतूसें बरामद कीं। इसके अलावा कई अन्य प्रकार के संदिग्ध उपकरण भी अब्बास के घर से बरामद हुए हैं।

मामले से संबंधित जारी प्रेस नोट के अनुसार पुलिस ने मुख्तार अंसारी के बेटे पर धारा 420, 467, 468, 471, और 30 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इन नोट में हथियार बरामदगी के संबंधित सभी जानकारी दी गई हैं।

इसके अनुसार पुलिस ने इस छापेमारी में इटली से लाई गई एक 12 बोर की डबल बैरल, स्लोवेनिया से लाई गई 12 बोर सिंगल बैरल गन, इंडियन आर्म्स कॉर्प लखनऊ से खरीदी हुई 300 बोर रायफल, दिल्ली से खरीदी हुई 12 बोर डबल बैरल गन, शस्त्रागार मेरठ से खरीदी गई 357 बोर रिवॉल्वर Ruger, GP100 भी शामिल है।

पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट

यहाँ बता दें कि उत्तर प्रदेश पुलिस के अनुसार अब्बास अंसारी ने साल 2012 में लखनऊ से ही डबल बैरल बंदूक का लाइसेंस प्राप्त किया था। इसके बाद उसने इसी के आधार पर अन्य हथियारों का भी सौदा किया और पुलिस को सूचित किए बिना दिल्ली पहुँच गया।

लेकिन शिकायत दर्ज होने के बाद अब्बास के ख़िलाफ कार्रवाई करने के लिए विभिन्न टीमें गठित की गई और जानकारी के आधार पर अब्बास के निवास स्थान पर छापेमारी हुई। जिसमें अब्बास पर लगाए आरोप सही मिले।

‘अयोध्या में भगवान राम का जन्म हुआ था, न कि पैगंबर मुहम्मद का… मुस्लिम समुदाय यह जानती है’

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में देश की सर्वोच्च अदालत ने सुनवाई पूरी कर ली है और फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुप्रीम कोर्ट जल्द ही इस पर अपना फैसला सुनाएगी। इस बीच योग गुरू बाबा रामदेव ने राम मंदिर निर्माण को लेकर बात करते हुए कहा कि पूरी दुनिया और मुस्लिम समुदाय जानती है कि अयोध्या में भगवान राम का जन्म हुआ था, न कि पैगंबर मुहम्मद का। यही सत्य है और अदालत का फैसला सत्य पर आधारित होता है।

एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए रामदेव ने कहा कि अयोध्या मामला जल्द ही सुलझने वाला है। विवादित स्थल पर राम मंदिर का निर्माण किया जाना चाहिए। बाबा रामदेव ने कहा कि इस देश में पैदा हुए सभी लोगों के पूर्वज राम हैं। राम मंदिर का निर्माण लोगों की आस्था से जुड़ा है। हर कोई यह जानता है कि अयोध्या में राम पैदा हुए थे। इसके बाद भी राजनीतिक स्वार्थवश इसे विवाद का विषय बना दिया गया।

इसके साथ ही रामदेव ने महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी को अपना समर्थन देते हुए कहा कि राज्य और केंद्र में एक स्थिर सरकार की जरूरत है। उन्होंने कहा, “हमें यह सोचना होगा कि भारत अगले 10-15 वर्षों में संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और यूरोप के मुकाबले कहाँ खड़ा है। हमें स्थिर राजनीति और शासन के लिए एक मजबूत पार्टी को सशक्त बनाना है।”

रामदेव ने कहा कि लोगों को हरियाणा और महाराष्ट्र में एक अच्छी सरकार का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की तारीफ करते हुए कहा कि वो ईमानदार व्यक्ति हैं, उनके पास कोई अर्जित संपत्ति नहीं है। उनका कहना है कि मनोहर लाल खट्टर एक अच्छे इंसान हैं और वह भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह की जोड़ी हर कार्य को मुमकिन करने में सक्षम है। इन दोनों ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 एक ही झटके में हटाकर यह साबित कर दिया है। इसके अलावा भी कई ऐसे फैसले लिए गए हैं, जिसके बारे में पिछली सरकारों ने सोचने तक भी हिम्मत नहीं की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा अनुच्छेद 370 के अधिकतम प्रावधानों के निष्क्रिय किए जाने की प्रशंसा करते हुए कहा कि सरदार पटेल के बाद पीएम मोदी और अमित शाह ‘एक राष्ट्र, एक संविधान और एक ध्वज’ के साहस के साथ सामने आए। रामदेव ने कहा, “इससे नरेंद्र मोदी-अमित शाह सरकार पर लोगों का भरोसा मजबूत हुआ है। सभी राजनीतिक और सामाजिक बाधाएँ केवल अमित शाह और पीएम मोदी दूर कर सकते हैं।”

आगे उन्होंने देश में नफरत फैलाने वालों को निशाने पर लेते हुए कहा, “इस देश में वैचारिक आतंकवाद चल रहा है। दलितवादी, मार्क्सवादी और कुछ तथाकथित समाजवादी हमारे पूर्वजों के खिलाफ नफरत फैलाते रहे हैं। इसे मिटाने की जरूरत है। कुछ लोग देश की एकता को तोड़ने के लिए नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं। हमें इसके खिलाफ लड़ने के लिए और भी कानूनों की जरूरत है।” साथ ही उन्होंने हरियाणा और महाराष्ट्र के लोगों से विधानसभा चुनाव में मतदान करने की अपील की।

27 पूर्व सांसद नहीं छोड़ रहे घर, दिल्ली पुलिस बिजली पानी बंद करा कर बाहर करेगी

सरकार के लिए लम्बे समय से पूर्व सांसदों से निवास खाली करने की समस्या विकट बनी हुई थी। मगर अब इस काम में तेज़ी आ सकती है क्योंकि अब सांसदों से उनके आवास खाली करने के लिए सरकारी तंत्र की मदद में दिल्ली पुलिस पूर्व सांसदों से उनके आवास खाली करवाने उतरेगी। बता दें कि सभी चिह्नित सांसद आवासों की बिजली, पानी और गैस की सुविधा को काटने का भी खाका तैयार कर लिया है।

संसद के निचले सदन लोकसभा में निर्वाचित सांसदों को जो आवास रहने के लिए दिए जाते हैं उनके लिए यह नियम है कि संसद सदस्यता समाप्त होने के एक महीने के भीतर उन्हें यह आवास खाली करना होता है। मगर कई ऐसे महानुभाव हैं जो इन आवासों को जागीर समझकर बैठ जाते हैं और अपनी हनक के चलते इसे छोड़ने के वक़्त आना-कानी करते हैं।

लम्बे समय से देखा जाता रहा है कि कई नेता इस तरह की हरकतों की वजह से चर्चाओं में आते हैं। ऐसे ही एक मामले में सबसे पहले नाम उछला था मुलायम सिंह यादव का, जिन्होंने लखनऊ में पूर्व मुख्यमंत्रियों के बंगले खाली करने के कोर्ट के आदेश के बावजूद बंगला खाली करने में बड़ी आना-कानी की थी। यही हाल अब संसद निवास का हो रहा है।

हाल ही में 2019 के लोकसभा चुनाव संपन्न हुए हैं। इसके बाद सभी नवनिर्वाचित सांसदों को बंगले अलॉट किये जाने हैं। आवास खाली करने को लेकर देरी का एक मुख्य कारण यह भी है कि पूर्व सांसद अपना टर्म ख़त्म होते ही आवास खाली करने में बगलें झाँकने लगते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस कार्रवाई के पीछे असल कारण है कि अगस्त में अनधिकृत रूप से रह रहे सांसदों को जब आवास खाली करने को कहा गया तो करीब 200 लोग ऐसे थे जिन्होंने आवास नहीं छोड़े थे। यही वजह है कि नवसारी से गुजरात भाजपा के सीआर पाटिल की अध्यक्ता वाली इस कमिटी ने यह निर्णय लिया।

मंदिर की जगह स्कूल एक वामपंथी प्रपंच: अजीत भारती के विचार | Ajeet Bharti on School Over Ram Mandir

मोहम्मद आसिफ खान नाम का एक मुसलमान ट्वीट करते हुए कहता है कि अयोध्या में एक 500 साल पुरानी मस्जिद थी, जिसे आतकंवादियों ने 6 दिसम्बर को ढहा दिया था। उन आतकंवादियों पर केस चलना चाहिए और उस जगह पर सरकारी खर्चे से एक मस्जिद बननी चाहिए और वहाँ पर एक स्मारक भी बनना चाहिए। यही न्याय होगा। वहीं कुछ लोग कह रहे हैं कि सामाजिक सौहार्द के लिए मंदिरों की जगह स्कूल और अस्पताल ही बनवा देना चाहिए।

सोशल मीडिया पर कुछ भी बकवास करने वाले लोग भूल जाते हैं कि न तो भारत देश का इतिहास सिर्फ़ 500 साल पुराना है और न ही स्कूल और अस्पताल सनातन धर्म के धार्मिक स्थलों की जगह ले सकते हैं। स्कूलों और अस्पतालों का अपना महत्व है लेकिन इसे धार्मिक स्थलों की जगह पर ही बनवाने का लॉजिक एक वामपंथी प्रपंच से बढ़कर कुछ नहीं है।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक कर के देखें

अयोध्या मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील ने की समझौते की पुष्टि, कहा- करना पड़ सकता है बाबरी पर समझौता

हिंदुस्तान के इतिहास में सबसे संवेदनशील मामले को लेकर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सारी सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित कर लिया। कई लोग कई तरह के कयास लगा रहे हैं। दोनों पक्षों में मध्यस्तता करने की कई कोशिशें की गईं मगर हर बार उनके विफल होने की ही खबरें सामने आईं। सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील ने पुष्टि की है कि मध्यस्था पैनल के माध्यम से हिन्दू पक्षों के सामने एक समझौते का मसौदा पेश किया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भूमि विवाद को सुलझाने के लिए पैनल ने अपनी ओर से एक रिपोर्ट दायर की थी जिसमें समझौता सम्बन्धी कुछ दस्तावेज़ हैं। मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से अधिवक्ता शाहिद रिज़वी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा था कि ‘आप उन कामों को करना चाहते हैं जो कभी नहीं कर सकते तो आप उन्हें अंत समय में भी कर सकते हैं। अदालत के बहार दोनों पक्षों ने अपनी अपनी शर्तों के साथ अपनी बात रखी हैं’।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की पाँच जजों वाली संविधान पीठ ने 40 दिन तक लगातार सुनवाई करने के बाद बुधवार को सुनवाई पूरी करते ही अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। चूँकि, मामला आपराधिक नहीं बल्कि सिविल है इसलिए फैसले की घोषणा से पहले समझौता भी हो सकता है।

दरअसल मामले में निर्वाणी अखाड़ा, राम-जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति और कुछ अन्य हिन्दू पक्ष भी इस मामले में भूमि विवाद के निपटारे के पक्ष में हैं। जबकि मामले में प्रमुख वादी विश्व हिन्दू परिषद के समर्थन वाला रामजन्मभूमि न्यास और रामलला विराजमान सहित 6 अन्य पक्षकार हैं।