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J&K का पहला BDC चुनाव: घाटी के 18 ब्लॉक में खिला कमल, जम्मू में 52 पर मारी बाजी

जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा हटाने और जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के फैसले के बाद पहली बार हुए बीडीसी (ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल) चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 280 ब्लॉकों में से 81 ब्लॉकों पर ही संतोष करना पड़ा। बता दें कि कुल 316 ब्लॉक में से 307 ब्लॉक पर चुनाव होना था। चूँकि 27 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे, इसलिए 280 ब्लॉक पर ही मतदान हुआ।

गुरुवार (अक्टूबर 24, 2019) देर शाम चुनाव परिणाम की घोषणा हुई। जम्मू और कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी शैलेंद्र कुमार ने श्रीनगर में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य में पहले बीडीसी चुनाव में 98.3 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। उन्होंने कहा कि लगभग 26,000 पंचों और सरपंचों ने वोट डाला। 

शैलेंद्र कुमार ने कहा, “कुल 307 ब्लॉकों में से निर्दलीय ने 217 ब्लॉक जीते, जबकि भाजपा को 81 ब्लॉक मिले। 1 ब्लॉक कॉन्ग्रेस के खाते में आए। वहीं 8 ब्लॉक पर जम्मू और कश्मीर नेशनल पैंथर्स (JKNPP) पार्टी ने जीत दर्ज की।”

बीजेपी जम्मू में एक तिहाई ब्लॉक पर जीत हासिल कर सकी। पार्टी को 148 ब्लॉक में से 52 ब्लॉक पर सफलता मिली। वहीं नेशनल पैंथर्स पार्टी ने 8 ब्लॉक पर जीत हासिल की और शेष 88 बीडीसी सीटों पर निर्दलीय अध्यक्ष चुने गए। उल्लेखनीय है कि भाजपा ने 2014 के चुनावों में जम्मू की 37 में से 25 सीटें जीती थीं। बीजेपी ने कश्मीर घाटी में 137 में से 18 ब्लॉक जीते हैं।

जम्मू के कठुआ जिले के 19 ब्लॉक में से बीजेपी ने 9 ब्लॉक पर सीट दर्ज की। बाकी 10 सीटों पर निर्दलीय ने सफलता हासिल की। बता दें कि 2014 के विधानसभा चुनाव में इन सभी सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी। उधमपुर जिले में 17 ब्लॉक में से बीजेपी के खाते में 4 सीटें आईं। रजौरी जिले के 19 ब्लॉक में से बीजेपी ने 8 सीटों पर जीत दर्ज किया, वहीं पार्टी पूंछ जिले में खाता भी नहीं खोल सकी। 

राज्य का विशेष दर्जा हटाए जाने के बाद पहली बार हुए बीडीसी चुनावों में अपने नेताओं की नजरबंदी के कारण कॉन्ग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी ने इससे दूरी बनाए रखी। बता दें कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के बेअसर किए जाने के बाद से विपक्ष के अधिकतर नेता जिनके बयान से राज्य में माहौल खराब होने की आंशका थी, उन्हें नजरबंद रखा गया है। पार्टी नेताओं की नजरबंदी से नाराज विपक्षी दलों ने बीडीसी चुनाव का बहिष्कार किया था। इसके पीछे पार्टी का कहना था कि दिग्गज नेताओं की अनुपस्थिति में प्रचार करना मुश्किल होगा।

जो CM है अविवाहित, उसे बताया 6 बच्चों का बाप: BJP सरकार को बदनाम करने के लिए NDTV का प्रोपेगेंडा

राज्य की जनसंख्या वृद्धि दर को स्थिर करने के लिए, असम मंत्रिमंडल ने 1 जनवरी 2021 के बाद राज्य में दो से अधिक बच्चों को सरकारी नौकरी न देने का फ़ैसला किया। पंचायती राज और नगर निकाय चुनाव के लिए राज्य में पहले से ही दो-बच्चे का मानक लागू था, और अब उसी मानक को राज्य स्तर की सरकारी नौकरियों तक बढ़ाया गया है। इस फ़ैसले को लेकर समाचार पढ़ते हुए, NDTV की एंकर सोनल मेहरोत्रा ​​कपूर ने असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को बदनाम करने के लिए झूठ बोलने और फ़र्ज़ी ख़बरें फैलाने का विकल्प चुना। यह हम नहीं कह रहे, खुद NDTV का वीडियो इसका जीता-जागता प्रमाण है।

NDTV की एंकर सोनल मेहरोत्रा ​​कपूर ने असम में सरकारी नौकरियों के लिए दो-बच्चे से संबंधित खबर को पढ़ते हुए दावा किया कि दो से अधिक बच्चे वाले लोग असम में सरकारी नौकरी पाने के पात्र नहीं होंगे, जबकि असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के ख़ुद 6 बच्चे हैं।

बड़े ही नाटकीय अंदाज़ में, सोनल मेहरोत्रा ​​कपूर ने अपने दर्शकों को बताया कि दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री के ख़ुद के 6 बच्चे हैं, लेकिन उन्होंने इस दो-बाल नीति को लागू करने का फ़ैसला किया है।

इस वीडियो को NDTV ने माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर भी शेयर किया था लेकिन, अब लगता है कि इसे NDTV ने डिलीट कर दिया है। लेकिन तकनीक के इस दौर में अगर वीडियो शेयर करने और डिलीट करने का ऑप्शन है तो समय रहते डाउनलोड करने का अवसर भी इसी तकनीक ने दिया है। ऊपर आप उसी डाउनलोड किए वीडियो को देख सकते हैं।

दरअसल, NDTV की एंकर सोनल मेहरोत्रा ख़ुद सच्चाई से कोसों दूर हैं क्योंकि उन्हें नहीं मालूम कि असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के 6 बच्चे नहीं हैं। वास्तव में, असम के मुख्यमंत्री अविवाहित हैं और एकल जीवन जीते हैं।

NDTV द्वारा किया गया ट्वीट, जिसे अब हटा दिया गया है

बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब NDTV के एंकर्स ने झूठ फैलाने में कोई दिलचस्पी ली हो।

इससे पहले 2018 में, NDTV ने अपने सोशल चैनल्स पर हेडिंग के साथ एक न्यूज़ अपलोड और शेयर की थी – ‘असम बीजेपी विधायक के भतीजे, ‘नागरिक सूची में नहीं हैं, ऐसा भी होता है’ इस फ़र्ज़ी ख़बर में बीजेपी सांसद बिजोया चक्रवर्ती और जयदीप फुकन की फ़ोटो थी, जो गुवाहाटी के निवासी थे। तब जयदीप ने ट्विटर पर यह दावा किया था कि उनका नाम वास्तव में NRC सूची में है और वह भाजपा सांसद के भतीजे नहीं हैं।

जयदीप ने NDTV को एक आधिकारिक मेल भी लिखा था, जिसमें उन्हें उनके द्वारा प्रकाशित अप्रासंगिक न्यूज़ से उनकी फ़ोटो को तुरंत हटाने के लिए कहा था।

आंतकियों के निशाने पर हैं हिन्दू नेता, RSS के पदाधिकारी: ख़ुफ़िया विभाग का ख़ुलासा

हिन्दू महासभा के पूर्व अध्यक्ष और हिन्दू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे कमलेश तिवारी की हत्या की तरह अन्य हिन्दू नेता और राजनेता पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के निशाने पर हैं। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि पैसे देकर और जेहादी बनाकर आरएसएस नेताओं पर हमला किया जा सकता है। 

ख़बर के अनुसार, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को क़रीब दो दिन पहले ख़ुफ़िया विभाग से इस तरह की जानकारी मिली है। जानकारी मिलने के बाद हिन्दू नेताओं, आरएसएस के पदाधिकारियों और राजनेताओं की सुरक्षा की समीक्षा शुरू कर दी गई है। इस मामले में गृह मंत्रालय के आदेश पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने समीक्षा शुरू कर दी है।

स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि कमलेश तिवारी की हत्या में आतंकी संगठन ISIS के कनेक्शन का पता लगाया जा रहा है। जिन नेताओं ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 को हटाए जाने का समर्थन करते हुए हिन्दुओं का समर्थन किया था, वे आतंकी संगठन ISIS के निशाने पर बने हुए हैं। ऐसे नेताओं को आतंकी संगठनों के स्लीपर सेल द्वारा मरवाया जा सकता है। 

कमलेश तिवारी हत्या मामले में भी ख़ुलासा हुआ था कि वो ISIS के निशाने पर थे। 2017 में गुजरात एटीएस ने ISIS के उबैद मिर्ज़ा और क़ासिम को गिरफ़्तार किया था। तब गुजरात एटीएस के अलावा सेंट्रल एजेंसी ने भी दोनों आतंकियों से पूछताछ की थी। उन्होंने पूछताछ में कमलेश तिवारी का नाम लिया था। इससे पता चलता है कि कमलेश तिवारी पर आतंकी संगठन की बहुत पहले से नज़र थी।

मीडिया में आई ख़बरों के अनुसार, कमलेश तिवारी की हत्या के बाद अन्य नेताओं को जान से मारने की धमकियाँ मिल रही थीं। इस संदर्भ में हिन्दूवादी संगठनों के कई नेताओं ने सरकार से सुरक्षा की माँग भी की थी। इनमें साध्वी प्राची, पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ, अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के यूपी अध्यक्ष राजीव कुमार और उत्तर प्रदेश नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष अमित जानी के नाम शामिल हैं। 

ग़ौरतलब है कि लखनऊ में नाका क्षेत्र स्थित हिन्दू महासभा कार्यालय में कमलेश तिवारी को बदमाशों ने गला रेतकर व गोली मारकर हत्या कर दी थी। शुक्रवार (18 अक्टूबर 2019) को हत्या की वारदात को अंजाम देकर हमलावर वहाँ से फ़रार हो गए थे। गंभीर हालत में तिवारी को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी।

जामिया में वामपंथियों ने लहराया फिलिस्तीन का झंडा: यूनिवर्सिटी ने कहा- इज़राइली कैम्पस में होंगे प्रतिबंधित

दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में फिलिस्तीन के समर्थन में झंडे लहराए गए हैं। एक विरोध प्रदर्शन में लहराए गए इन झंडों के बाद पहले तो 5 छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ, लेकिन बाद में घुटने टेकते हुए यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने न केवल नोटिस वापिस ले ली बल्कि भारत की यूनिवर्सिटी में हुए हुड़दंग के लिए एक तरह से पूरे इज़राइल देश को दंडित करते हुए यूनिवर्सिटी में इज़राइल से जुड़ा कोई भी कार्यक्रम करने पर प्रतिबंध भी लगा दिया गया। इसे विरोध प्रदर्शन का आयोजन कर झंडा लहराने वालों की जीत के तौर पर देखा जा रहा है, जो आइसा के सदस्य बताए जा रहे हैं।

जामिया के फैकल्टी ऑफ़ आर्किटेक्चर एंड एकिस्टिक्स ने इज़राइल को अपना कंट्री पार्टनर चुनते हुए “ग्लोबल हेल्थ ज़ेनिथ: कोन्फ़्लुएन्स ’19” नामक कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम के आयोजन के खिलाफ कुछ छात्रों ने (कथित तौर आइसा आदि वामपंथी संगठनों के सदस्य) इज़राइल के दुश्मन माने जाने वाले फिलिस्तीन के झंडे लहराने शुरू कर दिए, जिस पर उन्हें यूनिवर्सिटी की ओर से नोटिस जारी हुआ। लेकिन न केवल नोटिस को बाद में वापिस ले लिया गया, बल्कि यूनिवर्सिटी, विश्वविद्यालय और देश के गेस्ट्स का अपमान करने वाले हुड़दंगियों के ही तुष्टिकरण पर उतर आई। “हम आपको दिलासा देते हैं कि अगर कोई इज़राइली प्रतिनिधिमंडल किसी कार्यक्रम में भाग लेना चाहेगा तो हम नहीं लेने देंगे।”

उस विरोध प्रदर्शन के बीच में कुछ छात्रों के बीच की आपसी झड़प भी हो गई, जिसे वामपंथियों ने “यूनिवर्सिटी प्रशासन ने हमें पीटने के लिए गुंडे बुलाए” का स्पिन भी देने की कोशिश की थी।

लेकिन ऑपइंडिया ने जब मौके पर मौजूद रहे छात्रों से बात की तो उलटी ही सच्चाई निकल कर बाहर आई। नाम न छपने की शर्त पर प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आपसी मारपीट प्रदर्शन में हुई तो थी, लेकिन उसका प्रशासन से कोई लेना देना दूर दूर तक नहीं था। उन चश्मदीदों ने यह भी बताया कि यूनिवर्सिटी द्वारा नोटिस वापिस लिए जाने का आश्वासन मिलने के बाद भी प्रदर्शनकारियों ने हुड़दंग बंद नहीं किया।

उस के पीछे की कहानी और ही कुछ है। 22 अक्टूबर को प्रदर्शनकरी छात्रों ने यूनिवर्सिटी के वीसी के दफ्तर का घेराव किया और किसी को कैम्पस से निकलने नहीं दिया। इस दौरान अंदर कुछ मेहमान उपस्थित थे, जिनमें कई बूढ़े और बीमार भी थे- यहाँ तक कि मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित भी। उनकी हालत सुनकर भी प्रदर्शनकारी नहीं पसीजे। अंत में एक बूढ़ी महिला रोने लगीं और अपनी सेहत का हवाला देकर जाने देने की भीख माँगने लगीं।

तब वामपंथियों में से ही कुछ का दिल पसीजा और उन्होंने अपने साथियों से बीमारों को निकलने देने की बात की। तब उन्मादी कम्युनिस्टों की भीड़ ने अपने ही साथियों पर हमला कर दिया और मॉब की स्थिति पैदा होने लगी। तब हमले के पीड़ितों ने भी सेल्फ-डिफेंस में हाथ चलाया। उस हाथापाई में दोनों ही गुटों को चोट आई और कई को अस्पताल ले जाना पड़ा।

लड़ने वाले दोनों ही गुट आइसा आदि कम्युनिस्टों के थे, लेकिन लड़ाई कराने का जिम्मा प्रशासन पर डाला गया। कहा गया कि उन्हें यूनिवर्सिटी ने मारपीट करने का आदेश दिया था। उसके बाद 23 को कैम्पस में पुलिस आई। प्रशासन के आगे प्रदर्षनकारी जो भी माँगें रखते गए, उन्हें माना जाता गया। लेकिन माँग करने वालों ने एक भी माँग घायलों की किसी भी तरह की सहायता की नहीं रखी। इससे खिसियाए हुए एक गुट ने अपना प्रदर्शन जारी रखा।

हमारे सूत्रों के हिसाब से इसी गुट ने बाद में रात को हॉस्टल में भी हिंसा की। इसके अलावा ऑपइंडिया की तफ्तीश में पता चला है कि हिंसा का एक कारण यह भी था कि वामपंथियों में ही इस प्रदर्शन को लेकर मतभेद था। प्रदर्शनकारियों में से कई फिलिस्तीन के झंडे के खिलाफ थे क्योंकि यह अतिरेक था, और जामिया आखिरकार सरकार के पैसे से चलता है।

हमारे सूत्रों के विवरण की तस्दीक प्रशासन से भी होती है। बकौल यूनिवर्सिटी के पीआरओ अहमद अज़ीम, वीसी के ऑफिस का घेराव करने वाले छात्रों को कुछ छात्रों संगठनों का उकसावा मिला हुआ था। उन्होंने यूनिवर्सिटी के मेहमानों को निकलने देने में प्रदर्शनकारियों के हस्तक्षेप और डेलीगेट्स की मदद करने पर अपने ही सहपाठियों पर प्रदर्शनकारियों के हमले की बात की भी पुष्टि की।

काशी विश्वनाथ धाम, ‘घर की लक्ष्मी’, स्थानीय खरीदारी पर जोर सहित PM मोदी ने दीवाली से पहले दिया यह सन्देश

दीपावली के उपलक्ष्य पर वाराणसी के भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने उनसे कई विषयों पर चर्चा की, इसी के साथ मोदी ने उनसे भारत की लक्ष्मी के आह्वान की भी बात कही। पीएम ने अपनी बात रखते हुए बड़ी ही सहजता के साथ कहा कि हम सबको अपने आसपास रहने वाली बालिका को ज़रूर सम्मानित करना चाहिए। पीएम की इस अनोखी पहल को सुनने वालों ने भी इस बात को स्वीकार किया। पीएम मोदी ने दिवंगत कार्यकर्ता कामेश्वर नारायण सिंह को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद उन्होंने कार्यकर्ताओं को दीपावली की शुभकामना देने के साथ ही कई मुद्दों पर बातचीत की। मोदी ने अपने संवाद के दौरान कार्यकर्ताओं की दुविधाओं का भी निराकरण किया। इस दौरान काशी विश्वनाथ धाम पर एक सवाल के जवाब में पीएम मोदी ने बताया कि सब भोलेनाथ की ही कृपा है। उन्होंने कहा कि, “बाबा भोलेनाथ के आशीर्वाद से, काशीवासियों से जो संकल्प लिया उससे न सिर्फ भक्तों को आसानी होगी बल्कि अध्यात्मिक सुख भी प्राप्त होगा।”

उन्होंने आगे बताया कि “आप इन ऐतिहासिक गलियों के गवाह हैं, इनकी अपनी ख़ूबसूरती है और महत्व भी। बेशक यह काशी की यह गलियाँ शहर का अभिमान हैं मगर आपको यह भी देखना होगा कि बाबा भोलेनाथ के दर्शन में कितनी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।”

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन तमाम परिवारों के प्रति विशेष आभार प्रकट किया जिन्होंने स्वेच्छा से अपना घर सरकार को बेच दिया ताकि सरकार की योजना में उनकी ओर से किसी तरह का कोई विघ्न सामने न आए। पीएम मोदी ने कहा कि, “मंदिर केवल पूजा करने का स्थान भर नहीं है, ये हमारी आस्था और समर्पण का केंद्र हैं। मंदिर चाहे काशी-विश्वनाथ का हो या फिर कोई अन्य मंदिर, वहाँ जाने वाले व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। “

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कार्यकर्ताओं से दीपवाली पर स्थानीय कारीगरों की बनाई वस्तुओं को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि, “प्रयत्न कीजिए कि हम 2022 तक स्थानीय कारीगरों की बनाई वस्तुओं और छोटे कारीगरों से सामान खरीदने की आदत डाल लें। हम निश्चय कर लें कि अगर कोई सामान हमारे गाँव में बनता है तो हम वह बाहर से नहीं खरीदेंगे। अगर गाँव नहीं तो अपने ब्लॉक, जिला या राज्य तक प्रयास करेंगे। मगर प्राथमिकता अपने आसपास के कारीगरों के बनाए सामान को देंगे।” उन्होंने अपने संबोधन में ‘भारत की लक्ष्मी’ की भी बात कही, उनके मुताबिक़ इसके ज़रिए सब लोग अपने आसपास की बेटियों को सम्मानित करें ताकि भारत की बेटियों को सम्मान दिया जाए।

पीएम ने कार्यकर्ताओं से यह भी कहा कि वे सरकार की योजनाओं का ज्यादा से ज्यादा प्रचार करें जिससे देश में अधिक से अधिक लोग इसका फायदा उठा सकें। अपने संबोधन में उन्होंने यह भी सन्देश दिया कि लोग इस दिवाली सब लोग ऐसी पहल करें कि कुछ भी बर्बाद न हो। किसी चीज़ को बर्बाद करने से अच्छा है कि वह हम किसी ज़रुरतमंद को दें।

40 सीटें ला 2009 में हुड्डा बने थे सीएम, आज 40 वाले खट्टर की बारी

  • खट्टर की खाट खड़ी हो गई।
  • जेजेपी ने बीजेपी की वाट लगा दी।
  • यह बीजेपी की हार की शुरुआत है।
  • नतीजों से बीजेपी को लगा झटका।

जैसे-जैसे दिन चढ़ा और हरियाणा तथा महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे स्पष्ट होने लगे, सोशल मीडिया की प्रतिक्रियाएँ, वेब पोर्टल की हेडलाइन और राजनीतिक टीकाकारों का टिप्पणियाँ ऊपर की चंद पंक्तियों के इर्द-गिर्द सिमटने लगी। इसमें कोई दो मत नहीं कि महाराष्ट्र और हरियाणा, दोनों राज्यों में 2014 की तुलना में बीजेपी की सीटें गिरी हैं। लेकिन, इसी आधार पर इन नतीजों का आकलन करना तथ्यों को अपने ही चश्मे से देखना है।

हरियाणा के परिणाम को 2009 के विधानसभा चुनाव के नतीजों से तौले तो तस्वीर कुछ और ही दिखने लगती है। महाराष्ट्र में तो 47 साल बाद इतिहास खुद को दोहराने जा रहा है। यानी इन नतीजों को बीजेपी के खिलाफ जनादेश तो नहीं माना जा सकता।

हरियाणा की 90 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा को 40 सीटें मिली है। यानी बहुमत से 6 कम। 10 सीटों के साथ दुष्यंत चौटाला की जेजेपी किंगमेकर बताई जा रही। 31 सीटों के साथ कॉन्ग्रेस का दावा है कि यह जनादेश भाजपा के खिलाफ है। 10 साल तक राज्य के सीएम रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है कि इनेलो, जेजेपी, बसपा सबको कॉन्ग्रेस के साथ आना चाहिए, क्योंकि सब भाजपा के खिलाफ लड़े थे। उनका यह भी आरोप है कि जो लोग निर्दलीय जीते हैं उन्हें बीजेपी सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग से साधने की कोशिश कर रही है।

यह सब बोलते हुए हुड्डा शायद 2009 भूल गए। उस समय हुए विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस को 40 सीटें ही मिली थी। उस वक्त इनेलो ने 31 सीटें जीती थी। इनेलो से ही टूटकर 10 महीने पहले जेजेपी बनी है जो आज किंगमेकर कही जा रही। लेकिन, 2009 में हुड्डा को जनादेश कॉन्ग्रेस के खिलाफ नहीं लगा। उन्होंने न केवल जोड़तोड़ से सरकार बनाई बल्कि पॉंच साल चलाई भी।

2009 विधानसभा चुनाव के नतीजे

आज हुड्डा जो कह रहे हैं तो क्या यह नहीं माना जाना चाहिए कि 2009 में कॉन्ग्रेस ने जनादेश का अपमान किया था। उस चुनाव में भी जो अन्य 50 लोग जीते थे वे भी तो कॉन्ग्रेस के खिलाफ ही लड़े थे। उस समय भी तो पॉंच साल से हरियाणा में और केंद्र में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए की सरकार चल रही थी। तो क्या उस वक्त निर्दलीय सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल से ही साधे गए थे? भले ही सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप आज लग रहा हो, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को ‘पिंजरे में बंद तोता’ उसी जमाने में बताया था।

दिलचस्प यह है कि 2005 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस को 67 सीटें मिली थी। 2009 में 40 पर लुढ़क कर भी हुड्डा किंग थे। नतीजे कॉन्ग्रेस की हार की शुरुआत नहीं थे। 6 सीटें जीत हरियाणा जन कॉन्ग्रेस ने उस समय कॉन्ग्रेस की वाट नहीं लगाई थी। नतीजों से कॉन्ग्रेस को झटका नहीं लगा था।

लेकिन, पॉंच साल में बीजेपी की 7 सीटें क्या गिरी, खट्टर की खाट खड़ी हो गई! यहॉं तक कि आज कॉन्ग्रेस जिस इनेलो और जेजेपी को साथ आने का न्योता दे रही है वह भी अतीत में बीजेपी के ही सहयोगी रहे हैं। इनेलो हरियाणा में बीजेपी के साथ सरकार चला चुकी है तो 2014 का लोकसभा चुनाव जीतने के बाद दुष्यंत चौटाला ने बिना मॉंगे मोदी सरकार को समर्थन दिया था। सो, इनके लिए भी भाजपा के साथ आना घर वापसी जैसा ही है। नैतिक तौर पर सही भी।

2019 विधानसभा चुनाव के नतीजे

आज जिनको दुष्यंत चौटाला में किंगमेकर नजर आ रहा है, उन्हें फरवरी 2005 में हुए बिहार विधानसभा के नतीजों को याद कर लेना चाहिए। उस समय ऐसे ही रामविलास पासवान किंगमेकर बनकर घूम रहे थे। सत्ता की चाबी कब गुम हुई पता ही नहीं चला।

मिलिट्री वर्ल्ड गेम्स से बाहर हुए चीनी चीटर: मेजबान चीनी टीम के एथलीटों ने की थी बेईमानी

चीनी सेना की एक स्पोर्ट्स टीम को अंतरराष्ट्रीय मिलिट्री वर्ल्ड गेम्स से बेईमानी के आरोप में डिसक्वालिफाई कर दिया गया। यही नहीं, आरोपित एथलीटों को और भी प्रतियोगिताओं में भाग लेने से भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। और मज़े की बात यह है कि ये गेम्स चीन के वुहान में ही आयोजित हुए थे। इनके प्रारम्भ के समारोह में अनावरण खुद राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने किया था।

इसी महीने (20 अक्टूबर, 2019 को) हुए ओरिएंटियरिंग नामक स्पर्धा की प्रतियोगिता में प्रतिभागी एथलीटों को केवल एक नक्शे और दिशा सूचक यंत्र (कम्पास) के ज़रिए मध्यम दूरी की दौड़ पूरी करनी थी। चीनी महिला एथलीटों को पहली, दूसरी और चौथी पोज़िशन प्राप्त हुई थी, वहीं चीनी पुरुष धावक दूसरे नंबर पर आया था। इन खेलों का आयोजन चीन में 18 अक्टूबर, 2019 से 27 अक्टूबर, 2019 के बीच हो रहा था।

लेकिन जल्दी ही पता चल गया कि मेजबान चीनी टीम के एथलीटों ने बेईमानी की थी- वह भी कई-कई तरीकों से। न केवल उन्होंने दर्शकों से स्पर्धा के दौरान अवैध सहायता प्राप्त की, बल्कि रास्ते में कई सारे छोटे निशान बने थे जिनके बारे में केवल वे जानते थे (अतः जिनके चलते वे अनुचित लाभ की स्थिति में थे)। इसके अलावा उन्होंने दौड़ के नियत ट्रैक से इतर छोटे रास्तों (शॉर्टकट) का इस्तेमाल किया था- इनके बारे में भी केवल उनकी टीम को ही पता था।

यह सब बातें बाहर आने के बाद उनके प्रतिद्वंद्वी टीमों ने इंटरनेशनल ओरिएंटियरिंग फेडरेशन, जिसके नियमों के अंतर्गत यह स्पर्धा हो रही थी, से शिकायत की। आईओएफ के अधिकारियों ने मामले की जाँच की और आरोपितों को दोषी पाया, जिसके बाद उनके नतीजे कैंसिल कर दिए गए। यही नहीं, दोषी पाए गए एथलीटों को बाकी रेसों में भाग लेने से भी रोक दिया गया। आयोजकों ने चीनी एथलीटों की अपील भी ख़ारिज कर दी।

ज़ाहिर तौर पर शर्मिंदा सरकार के द्वारा चलाए जाने वाले चीनी मीडिया ने इस मामले पर बहुत व्यापक रिपोर्टिंग नहीं की है। इसके उलट टीम की जीत का चीनी मीडिया में ज़ोर शोर से प्रचार हुआ था।

‘हरियाणा में खट्टर के साथ आए निर्दलीय विधायक, जल्द पेश कर सकते हैं सरकार बनाने का दावा’

हरियाणा चुनाव की स्थिति स्पष्ट होने के बाद स्थिति साफ़ हो गई है कि बहुमत किसी भी दल के पक्ष में नहीं है। यही वजह है कि तमाम दल अब निर्दलीय विधायकों से लेकर छोटे दलों को साधने में जुट गए हैं और इसी के साथ राज्य में जोड़-तोड़ की राजनीति शुरू हो गई है। परिणामों की ओर देखें तो यह एक त्रिशंकु विधानसभा है जहाँ किसी भी दल को पूर्ण रूप से अकेले सत्ता में आने का जनादेश नहीं मिला है। हालाँकि, राज्य में सरकार बनाने के लिए भाजपा अब अगले कदम की ओर बढ़त बना रही है। बता दें कि दो निर्दलीय विधायक रणजीत सिंह और गोपाल कांडा के भाजपा के संपर्क में आने से ही यह सुगबुगाहट तेज़ हो गई है कि राज्य में भाजपा सरकार बनाने का दावा जल्द पेश कर सकती है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर इस सम्बन्ध में हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण शर्मा से मुलाक़ात करेंगे। कयास लगाए जा रहे हैं कि इसके बाद वे सरकार बनाने का दावा पेश का सकते हैं। बता दें कि एक निजी टीवी चैनल को इंटरव्यू में गोपाल कांडा के भाई गोबिंद कांडा ने भाजपा को समर्थन देने की बात कही है। गोबिंद कांडा ने बताया कि गोपाल कांडा तीन-चार निर्दलीय विधायकों के साथ दिल्‍ली गए हैं। दूसरी ओर, अन्‍य निर्दलीय विधायकों के भी भाजपा के संपर्क में होने की चर्चा है। इन विधायकों की संख्‍या करीब पाँच बताई जा रही है।

इस चुनाव में जीतने वाले दो विधायक ऐसे भी हैं जोकि भाजपा के बागी हैं। दूसरी ओर, कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी दिल्‍ली रवाना हुए हैं तो वहीं खुदको किंगमेकर जता रहे जेजेपी नेता दुष्‍यंत चौटाला भी दिल्‍ली पहुँच रहे हैं। बता दें कि इससे पहले मुख्‍यमंत्री मनोहरलाल खट्टर भी दिल्‍ली रवाना हुए थे। चर्चा है कि वहाँ वे केंद्रीय गृहमंत्री व भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह से मिले हैं।

बृहस्पतिवार सुबह मतगणना शुरू होने के बाद जैसे ही शुरुआती रूझान आने शुरू हुए, अप्रत्याशित नतीजों को देखकर भाजपा और कॉन्ग्रेस दोनों पार्टियों के नेताओं की धड़कनें बढ़ गईं। दोपहर होने तक लगभग पूरी तस्वीर साफ हो हो गई कि प्रदेश में स्पष्ट बहुमत की सरकार नहीं बनेगी। इसके बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर केंद्रीय नेताओं से मुलाकात कर आगे की रणनीति पर मंथन करने दिल्ली रवाना हो गए।

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वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हरियाणा के लोगो को इन चुनाव परिणामों के लिए धन्यवाद दिया है। पीएम मोदी ने ट्वीट करके आभार जताते हुए कहा, “मैं हरियाणा के लोगों को हमें आशीर्वाद देने के लिए धन्‍यवाद देता हूँ। हम राज्‍य की उन्‍नति के लिए पहले की तरह ही समर्पण और जज़्बे से कार्य करेंगे। मैं भाजपा के कार्यकर्ताओं के कड़े परिश्रम और प्रयास के लिए भी सराहना करता हूँ। कार्यकर्ताओं ने हमारे विकास के एजेंडा से लोगों तक पहुँचाया।” केन्द्रीय गृहमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी चुनाव परिणाम के लिए जनता का आभार जताया और धन्यवाद दिया।

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बता दें कि पार्टी के हरियाणा प्रभारी डॉ. अनिल जैन ने चौटाला परिवार के नजदीकी और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल से संपर्क साधते हुए जजपा और भाजपा में मध्यस्थता कराने का दबाव बनाया है। वहीं, बताया जाता है कि कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने सरकार बनाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को खुली छूट दे दी है। वर्ष 2009 के विधानसभा चुनावों में हुड्डा ने कॉन्ग्रेस के 40 सीटों पर सिमटने के बावजूद न केवल हरियाणा जनहित कॉन्ग्रेस में सेंध लगाई, बल्कि निर्दलीय विधायकों की मदद से पूरे पाँच साल तक सरकार भी चलाई थी। यही वजह है कि कॉन्ग्रेस आलाकमान ने प्रदेश में अपनी पार्टी की सरकार बनाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा को आगे करने में देर नहीं लगाई।

मुस्लिम डिलीवरी बॉय से खाना लेने से इनकार तो FIR, इस्लामी संगठन ने जानकारी कर दी पब्लिक

हैदराबाद में मुस्लिम डिलीवरी बॉय से खाना लेने से इंकार करने पर एक आदमी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज की जा रही है। शाह अली बांदा पुलिस स्टेशन में शिकायतकर्ता 32 वर्षीय मुदस्सिर उमर है। पुलिस ने कहा है कि वह शिकायत की जाँच कर रही है, और अभी तक FIR नहीं लिखी गई है।

हैदराबाद के आलियाबाद में रहने वाले ग्राहक अजय कुमार ने सोमवार (21 अक्टूबर, 2019) की रात को स्विगी के ऍप के इस्तेमाल से शहर के फलकनुमा इलाके के ग्रैंड बावर्ची रेस्त्रां से चिकन-65 का ऑर्डर दिया था। आर्डर के लिए विशेष इंस्ट्रक्शन में अजय कुमार ने लिखा, “बहुत कम मसाले। और कृपया डिलीवरी करने वाले व्यक्ति के लिए हिन्दू का ही चयन करिएगा। सारी रेटिंग इसी के आधार पर होगी।” उन्होंने ऑर्डर का ऑनलाइन पेमेंट किया था।

लेकिन जब मुदस्सिर ने पूरा पता जानने के लिए फ़ोन किया तो नाराज़ अजय कुमार ने डिलीवरी लेने से इंकार कर दिया। उन्होंने खाना स्वीकार करने से इंकार कर दिया और ऑर्डर कैंसिल कर रिफंड माँगा। अपनी रिपोर्ट में हिंदुस्तान टाइम्स ने दावा किया है कि इसको लेकर उनकी स्विगी के कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव से बहस हुई, जिसे स्विगी के कस्टमर केयर सेंटर ने रिकॉर्ड कर लिया। इसके अनुसार कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव ने अजय कुमार को बताया कि उन्हें कैंसिलेशन चार्ज के तौर पर ₹95 भरने पड़ेंगे, जो उनके ऑनलाइन पेमेंट की राशि से काटे जाएँगे, और बाकी पैसा रिफंड होगा।

बकौल मीडिया रिपोर्ट्स, अजय ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि वे चार्ज झेल लेंगे, लेकिन खाना मुदस्सिर से नहीं लेंगे। इसके बाद अगले ही दिन (मंगलवार, 22 अक्टूबर, 2019 को) मुदस्सिर मामले को लेकर हैदराबाद के राजनीतिक दल मजलिस बचाओ तहरीक (एमबीटी) के पास चला गया।

इसके बाद एमबीटी के मुखिया अमज़दुलाह खान ने न केवल मुदस्सिर को अजय कुमार के खिलाफ “हिन्दुओं और मुस्लिमों में दूरी बढ़ाने” के लिए आपराधिक शिकायत पुलिस में करने की सलाह दी, बल्कि उन्होंने खुद ही मामले का राजनीतिकरण भी शुरू कर दिया। ट्विटर पर उन्होंने लिखा:

एडिटर्स नोट: हालाँकि यहाँ पर कस्टमर अजय कुमार की इस माँग का समर्थन या बचाव नहीं किया जा सकता है, लेकिन हर समय ‘पत्रकारिता के एथिक्स’ का रोना रोने वाले पत्रकारिता के समुदाय विशेष की भूमिका का विश्लेषण भी ज़रूरी है। न केवल मीडिया ने हिन्दू ग्राहक का नाम, उसका मोहल्ला आदि खुल कर बता दिए, बल्कि द न्यूज़ मिनट ने तो ग्राहक का कस्टमर केयर के साथ कथित वार्तालाप भी प्रकाशित कर दिया है।

पहली बात तो ऐसी संवेदनशील ही नहीं, गोपनीय और निजता कानून से प्रोटेक्टेड जानकारी TNM को मिली कहाँ से? अगर स्विगी ने दिया तो उसने ग्राहक की निजता का उललंघन किया, और अगर नहीं तो इसकी विश्वसनीयता क्या है? इसके अलावा इसके प्रकाशन से साम्प्रदायिक माहौल पर पड़ने वाले असर का भी मसला है।

देश का माहौल वैसे ही कमलेश तिवारी हत्याकांड के बाद से तनावपूर्ण है और एक बड़ी संख्या में हिन्दू असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। ऊपर से मसला हैदराबाद का है-उस अकबरुद्दीन ओवैसी का गढ़ है, जो हिन्दुओं के सामूहिक हत्याकांड की धमकी का आरोपित है। ऐसे में अगर कमलेश तिवारी की तरह इस हिन्दू ग्राहक के साथ कुछ हो जाए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?

टिकट मिला तो Tik-Tok पर बढ़े फ़ॉलोवर्स, चुनाव हारने पर अब रोने का वीडियो हुआ वायरल

हरियाणा के चुनाव परिणाम के बाद अब सभी दलों की स्थिति स्पष्ट हो गई है। राज्य में भाजपा और कॉन्ग्रेस की जंग अब परिणाम में सिमट कर रह गई है। जहाँ सभी को इंतजार है कि हरियाणा में सरकार बनाने के लिए सभी दलों का सत्ता समीकरण बनाने के लिए अगला कदम क्या होगा वहीं इस चुनाव में हार का मुँह देखने वाली एक प्रत्याशी के रोने की खूब चर्चा हो रही है।

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बता दें कि आदमपुर से कॉन्ग्रेस के कुलदीप बिश्नोई के खिलाफ चुनाव में उतरने वाली भाजपा प्रत्याशी सोनाली फोगाट का एक Tik-Tok वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। बता दें कि सोनाली फोगाट दरअसल एक एंड्राइड एप टिक-टॉक में बनाए अपने तरह तरह वीडियो के चलते सुर्ख़ियों में आई थीं।

एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वह टिक-टॉक पर बेहद लोकप्रिय चेहरा हैं और चुनाव का टिकट मिलने के बाद उनके फॉलोवर्स में काफी बढ़ोतरी हुई थी। यही वजह है कि उन्हें टिक-टॉक क्वीन भी कहा जाता है। मगर अपनी हार पर सोनाली कुछ इस तरह और इतना रोईं कि उनका वीडियो खूब देखा और शेयर किया जाने लगा। उन्होंने अपने साक्षात्कार में कहा था कि वह पहले अक्सर अपने टिक-टॉक में कुछ गैप दे दिया करती थीं मगर फॉलोवर्स के बढ़ने के बाद वह काफी एक्टिव रहेंगी।

सोनाली भले इस साल चुनावी मैदान में अपनी दावेदारी पेश करने उतरी हों मगर भाजपा और राजनीति से उनका पुराना नाता है। दरअसल साल 2013 में भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष ने सोनाली फोगाट को उनके गृह-प्रदेश हरियाणा में राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनाया था। इसी के बाद टिक-टॉक क्वीन नाम से मशहूर सोनाली फोगाट को भाजपा के महिला मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष भी बनाया गया था।