पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन, हेमंत सोरेन और उनके परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा अवैध तरीके से सीएनटी एक्ट के दायरे में आने वाली जमीन की खरीदारी के मामले की अब जाँच होगी। भाजपा के राज्यसभा सदस्य समीर उरांव समेत अन्य नेताओं की ओर से दिए गए शिकायती पत्र के बाद मुख्य सचिव ने राजस्व विभाग को कार्रवाई के लिए निर्देश दिया है। गुरुवार (अक्टूबर 24, 2019) को राज्य सरकार ने इस संबंध में राँची, जमशेदपुर और बोकारो के उपायुक्तों को आदेश दिया।
झारखंड में विधानसभा चुनाव की घोषणा से ठीक पहले भाजपा की रघुवर दास सरकार ने सोरेन परिवार पर शिकंजा कस दिया है। उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पूर्व भाजपा के राज्यसभा सदस्य समीर उरांव ने मुख्य सचिव से मिलकर इस संबंध में शिकायत की थी। शिकायत में उन्होंने सोरेन परिवार द्वारा आदिवासियों की जमीनें गलत तरीके से खरीदने की बात कही थी।
इसके अलावा मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी कई बार खुले मंच से सीएनटी और एसपीटी एक्ट का उल्लंघन कर आदिवासियों की जमीन खरीदने के आरोप सोरेन परिवार पर लगाए हैं। रघुवर दास ने शनिवार (12 अक्टूबर) को जोहार जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) पर प्रदेश को लूटने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता अफ़वाह फैलाकर आदिवासी समाज को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता भी लगातार इस मामले को लेकर झामुमो अध्यक्ष और उनके परिवार पर तीखे बयान देते रहे हैं।
वहीं, सरकार द्वारा दिए गए जाँच के आदेश पर झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य का कहना है कि जाँच के आदेश निंदनीय हैं। उन्होंने कहा, “यह भाजपा के विरोधियों को डराने के लिए है। उन्होंने देश भर में ऐसा ही किया है। हालाँकि, हम डरने वाले नहीं हैं और इससे हमारी चुनावी संभावनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।”
2015 में AAP सदस्य जसलीन कौर द्वारा दिल्ली ट्रैफिक सिग्नल पर उत्पीड़न, अश्लील टिप्पणी और छेड़छाड़ के आरोपित सर्वजीत सिंह को आखिरकार अदालत ने बरी कर दिया है। सिंह ने एक फेसबुक पोस्ट के माध्यम से यह ख़बर शेयर की और उन लोगों को धन्यवाद दिया, जिन्होंने उस पर विश्वास किया और उसके साथ खड़े रहे, जब पूरे सोशल मीडिया ने उसे कौर के शब्दों के आधार पर अपराधी घोषित कर दिया था।
एक्टिविस्ट दीपिका भारद्वाज ने सर्वजीत सिंह के पोस्ट को शेयर किया और कहा कि सर्वजीत को अदालत ने चार साल की लंबी सुनवाई के बाद सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
Four years. Endless dates. Endless humiliation & suffering for him & his family by media & society.
सर्वजीत सिंह पिछले चार साल से ट्रायल कोर्ट में पेश हो रहे थे। जसलीन कौर तीन साल तक ट्रायल में पेश नहीं हुईं। जसलीन ने 14 मुक़दमों की तारीखों के बाद पिछले साल दिसंबर में कोर्ट में अपनी पहली उपस्थिति दर्ज कराई। इसके लिए उन्होंने तर्क दिया था कि वह कनाडा में ‘अकादमिक ज़िम्मेदारियों’ के चलते कोर्ट में हाज़िर नहीं हो सकीं।
क्या था मामला
23 अगस्त, 2015 को दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज की छात्रा और AAP सदस्य जसलीन कौर ने ट्रैफिक सिग्नल पर सिंह की एक तस्वीर पोस्ट की थी और दावा किया था कि सिंह ने उन पर अश्लील टिप्पणी करने के साथ-साथ फ़ोटों न क्लिक करने की धमकी दी थी।
कौर का यह फेसबुक पोस्ट कुछ ही घंटों के भीतर वायरल हो गया। हालाँकि, सर्वजीत सिंह ने कौर की फ़ोटो पर वायरल पोस्ट में ख़ुद की पहचान बताने वाली टिप्पणी की थी और कहा था कि वह निर्दोष है क्योंकि धमकी देने वाली ख़ुद जसलीन थी जिसने उसे तब धमकी दी थी जब उसने ट्रैफिक सिग्नल को पार करने के लिए जसलीन के निर्देशों का पालन करने से इनकार कर दिया था।
इस मामले में सिंह को जल्द ही पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया। इस मामले को एक उदाहरण के तौर पर यह कहकर ख़ूब उछाला गया कि दिल्ली की लड़कियों को हर दिन कितनी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जसलीन के इस कारनामे पर सेलिब्रिटी और राजनेताओं ने एक बहादुर युवा महिला के रूप में उन्हें ख़ूब बधाइयाँ दी। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी जसलीन की सराहना की थी।
अरविंद केजरीवाल का ट्वीट, साभार: इंडिया टुडे
रातों-रात कौर एक सेलिब्रिटी बन गईं। इंडिया टुडे की ख़बर के अनुसार, दिल्ली पुलिस कमिश्नर बीएस बस्सी ने कौर को उनकी ‘बहादुरी’ के लिए इनाम देने की घोषणा की थी।
चश्मदीद का दावा
सर्वजीत की गिरफ़्तारी और चश्मदीद गवाहों की जाँच के तुरंत बाद, मामला ठंडा होने लगा। घटना-स्थल पर मौजूद विश्वजीत सिंह ने बताया कि सर्वजीत निर्दोष था और वास्तव में, जसलीन जिसने सर्वजीत के साथ मौखिक रूप से दुर्व्यवहार और ग़लत व्यवहार किया था। कौर ने फिर से सोशल मीडिया पर दावा किया कि वह सही थीं और चश्मदीद गवाह झूठ बोल रहा है।
परीक्षण
लंबे समय से सर्वजीत सिंह ने उत्पीड़न का शिकार रहा। 2016 में, उन्होंने सोशल मीडिया फिर से एक पोस्ट के माध्यम से लोगों से अपील की। इसमें उन्होंने विवरण देते हुए कि लिखा कि किसी व्यक्ति पर उत्पीड़न का झूठा आरोप लगाना कितना आसान होता है और एक व्यक्ति दोषी न होते हुए भी दोषी बन जाता है। दूसरे व्यक्ति का सिर्फ़ उसके लिंग के आधार पर किसी का उत्पीड़ित करना ग़लत है।
अपने विवरण में सिंह ने यह तक लिखा कि इस उत्पीड़न मामले में उनका चेहरा इतना बदनाम हो गया था कि उन्हें कई नौकरियाँ तक गँवानी पड़ीं। साथ ही एक यह मानसिक प्रताड़ना थी कि वो पुलिस को बिना बताए दिल्ली से बाहर नहीं जा सकते थे।
मीडिया प्रचार और परिणाम
लगभग सभी मीडिया चैनल ने एक विकृत और अपराधी के रूप में सर्वजीत को दिखाया। सोशल मीडिया यूज़र्स ने भी जसलीन के पोस्ट और अन्य संबंधित पोस्ट को बड़े धड़ल्ले से शेयर किया, इससे लोगों के मन में सर्वजीत की ख़राब छवि बन गई। जैसे-जैसे सच्चाई सामने आने लगी, वैसे-वैसे उन मीडिया चैनल्स की भी सच्चाई सामने आने लगी, जिन्होंने सर्वजीत सिंह का ग़लत चित्रण किया। टाइम्स नाउ को भी आदेश दिया गया था कि वह एनबीएसए द्वारा अदालतों के समक्ष दोषी के रूप में सर्वजीत को ग़लत तरीके से पेश करने के मामले में लगातार कवरेज के लिए माफी माँगे और ज़ुर्माना अदा करे।
जम्मू कश्मीर में संचार माध्यमों की बहाली के बाद से जारी दहशत और खूँरेजी का दौर बदस्तूर जारी है। जिहादी आतंकियों ने कश्मीर के शोपियाँ इलाके में कश्मीर से सेबों का ट्रांसपोर्टेशन करने आए दो ट्रक ड्राइवरों की गोली मारकर नृशंस हत्या कर दी है। यही नहीं, उनके ट्रकों को भी आग के हवाले कर दिया गया है। एक तीसरा ड्राइवर भी उसी हमले में घायल हो गया है।
यह ताज़ा हमला तीन दिनों के अंदर कश्मीर में हत्या की तीसरी घटना है। इस्लामी आतंकवादियों ने इसके पहले एक फल बागान से ट्रक लेकर जा रहे राजस्थान के आदमी और एक मजदूर की भी हत्या की थी। इसके अलावा शोपियाँ में ही पिछले हफ्ते जिहादियों ने एक सेब विक्रेता की भी गोली मारकर जान ले ली थी।
जम्मू कश्मीर पुलिस का कहना है कि ये हत्याएँ जिहादियों की हताशा से उपजीं हैं। वे कश्मीर घाटी में फलों के ट्रांसपोर्टेशन के ज़ोर पकड़ने से बौखला गए हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए कहा, “यह (दो ट्रक ड्राइवरों की हत्या का मामला) एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। वे ट्रक ड्राइवर इलाके के अंदरूनी हिस्से में बिना सुरक्षा बलों को सूचना किए चले गए थे।” पुलिस अधिकारी ने यह भी बताया कि मारे गए ड्राइवरों की लाशें पुलिस ने बरामद कर लीं हैं, और एक अन्य घायल को इलाज के लिए श्रीनगर के अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। पुलिस टीमें आरोपितों की गिरफ़्तारी के लिए कोशिशों में लगा दी गईं हैं।
मारे गए ड्राइवरों में से एक की पहचान राजस्थान के अलवर निवासी मोहम्मद इलियास के रूप में हुई है। दूसरे मृत ड्राइवर की पहचान पता करने की कोशिश हो रही है। इसके अलावा घायल ड्राइवर की शिनाख्त पंजाब के होशियारपुर के रहने वाले जीवन के रूप में हुई है।
पुलिस के सूत्रों के अनुसार जिहादी जम्मू कश्मीर में राज्य के बाहर से आने वाले प्रवासी मजदूरों को निशाना इसलिए बना रहे हैं ताकि उनमें डर बिठाया जा सके। इससे वे राज्य की व्यापर व्यवस्था को नुकसान पहुँचाना चाहते हैं।
जम्मू कश्मीर में केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त कर दिया था। साथ ही राज्य का पूर्ण राज्य का दर्जा खत्म कर उसे विधानसभा युक्त केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था। लेकिन उससे लद्दाख को अलग कर दशकों पुरानी माँग के मुताबिक उसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था। उसके बाद इसी तरह के जान माल के नुकसान से बचने के लिए सरकार ने मोबाइल व्यवस्था बंद कर रखी थी जिसे हाल ही में पोस्टपेड उपभोक्ताओं के लिए चालू किया गया था।
हरियाणा चुनाव में खुद बहुमत से दूर रहने के बाद भी भाजपा सरकार बनाने के लगातार करीब पहुँचती जा रही है। कल देर रात रानिया सीट से निर्दलीय विधायक और ओमप्रकाश चौटाला के छोटे भाई रणजीत सिंह चौटाला ने समर्थन का ऐलान कर ही दिया था। उनके अलावा 4 और निर्दलीय भारतीय जनता पार्टी और मनोहरलाल खट्टर के समर्थन में दिख रहे थे। अब 46 के पूर्ण बहुमत की जरूरत के लिए भाजपा को 2 और विधायकों का समर्थन मिलता दिख रहा है, और खुद भाजपा की 40 सीटें तो हैं ही।
निर्दलीय विधायक गोपाल कांडा को मिलाकर अब भाजपा के पास 47 विधायक हो गए है। आज तक की खबर के हिसाब से सातों निर्दलीय विधायकों ने भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा और हरियाणा बीजेपी के प्रभारी से मुलाकात कर भाजपा को समर्थन देने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा 5 अन्य विधायक कल रात नड्डा और हरियाणा भाजपा के प्रभारी एवं महासचिव अनिल जैन से मिले थे, जिनमें रणजीत सिंह चौटाला भी शामिल थे।
अब भाजपा को समर्थन करने वाले 7 विधायकों की सूची कुछ ऐसी है:
1) रणधीर गोलन- पुंडरी
2) बलराज कुंडू- महम
3) रणजीत सिंह- रानियां
4) राकेश दौलताबाद- बादशाहपुर
5) गोपाल कांडा – सिरसा
6) सोमवीर सांगवान- दादरी
7) धर्मपाल गोंदर- नीलोखेड़ी
आपको बता दें कि रानिया से जीते रणजीत सिंह 31 साल बाद एक बार फिर से विधानसभा की सीढ़ियाँ चढ़ेंगे। रणजीत सिंह का एक वीडियो सामने आया है। इसमें रणजीत सिंह कहते हैं, “मैं बीजेपी को अपना समर्थन दे रहा हूँ। मैं रानिया विधानसभा से एमएलए चुनकर आया हूँ। मैं मोदी जी की नीतियों को ध्यान में रखते हुए बीजेपी को अपना समर्थन दे रहा हूँ।”
हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष सुभाष बराला ने भी कहा था कि निर्दलीय विधायक बीजेपी के साथ हैं और राज्य में मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में बीजेपी फिर से सरकार बनाने जा रही है। उन्होंने कहा, “जनता का जनादेश बीजेपी को मिला है। हालाँकि इस बात की हम समीक्षा भी करेंगे कि हमें इस बार पिछली बार की तुलना में सात सीटें कम क्यों मिलीं। पार्टी और मुझे स्वयं इस चुनाव के परिणामों से सीखने को मिलेगा। हम राज्य में पार्टी को मजबूत करने के लिए कदम उठाएँगे।” वहीं सरकार बनाने की बात पर उन्होंने कहा, “हरियाणा के निर्दलीय विधायक बीजेपी के साथ हैं। मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में सरकार बनेगी। वो आज चर्चा के लिए दिल्ली आ रहे हैं।”
#Haryana BJP President Subhash Barala: People have given a mandate to BJP. However, we will introspect on why did the party get 7 seats less this time. Both the party & I will learn from results of these elections. We’ll take steps to strengthen the party in the state. pic.twitter.com/VJDNkDJG7q
Haryana Bharatiya Janata Party President Subhash Barala: Independent candidates have come with BJP. The government will be formed under the leadership of ML Khattar Ji. He is coming to Delhi today to hold discussions. pic.twitter.com/iDY0xrfj19
उत्तरप्रदेश के बिजनौर में 5 साल पहले तक मोटर बाइंडिंग का काम करने वाले मैकेनिक अबरार नाम के शख्स के ख़िलाफ जाँच करने के लिए पुलिस ने ईडी को पत्र लिखा है। दरअसल, अबरार को लेकर पुलिस ने अपनी जाँच में पाया है कि उसकी गतिविधियाँ संदिग्ध हैं और उसके संबंध पाकिस्तान के एक मज़हबी संगठन से हैं। पुलिस का कहना है कि अबरार इस संगठन का भारत में चोरी-छिपे प्रचार प्रसार करता है और अब तक हैसियत से ज्यादा धन अर्जित कर चुका है। उसके नाम कई अरबों की बेनामी संपत्ति का भी पुलिस को मालूम चला है
43 वर्षीय अबरार धामपुर के गाँव हर्रा का रहने वाला है। जिसके कारण धामपुर के सीओ महावीर सिंह रजावत और अभिसूचना ईकाई ने अबरार की जाँच की है। इस पूरी जाँच में खुलासा हुआ है कि केवल 4-5 साल के अंदर अबरार ने सैकड़ों गुणा संपत्ति अपने नाम कर ली है। जो उसकी हैसियत से भी ज्यादा है। जाँच में पुलिस ने बताया है कि अबरार के पास अरबों रुपए की बेनामी संपत्ति भी है। जो कि उसके पाकिस्तान से लौटने के बाद बढ़ी।
पुलिस के अनुसार अबरार कुछ समय पहले पाकिस्तान गया था और वहाँ एक मज़हबी संगठन दाव-ए-इस्लाम से जुड़ गया। इसके बाद अबरार की संपत्ति में अथाह बढ़ोतरी हुई। अब पुलिस चाहती है कि ईडी आरोपित के ख़िलाफ़ जाँच करें। इसके मद्देनजर एसपी संजीव त्यागी ने प्रवर्तन निदेशालय लखनऊ को पत्र भी लिखा है, जिसमें उन्होंने अबरार के ख़िलाफ़ जाँच की माँग उठाई है।
पुलिस की मानें तो उन्होंने अपनी जाँच में पाया कि अबरार संदिग्ध तौर पर पाकिस्तान आता जाता रहता है और उसके घर में भी संदिग्धों का आना-जाना है। इसके अलावा वह पाक के एक संगठन का भारत में प्रचार-प्रसार करके पैसे कमाता है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने जाँच में पाया कि अबरार ने 19 फरवरी 2014 को मोहल्ला पुराना धामपुर हुसैनपुर में 111.77 गज का प्लॉट, 5 फरवरी 2014 को 86.44 गज का प्लॉट, इसी दिन 90.63 गज का प्लॉट, 30 जून 2014 को 129.66 गज का प्लॉट, 27 जनवरी 2015 को गाँव जलालपुर हर्रा में आधा बीघा जमीन, 10 अप्रैल 2017 को 71.2 गज का प्लॉट नई बस्ती धामपुर में, 29 अगस्त 2017 को अपनी पत्नी खातूना के नाम से नहटौर मार्ग पर मौजमपुर जैतरा में 180.44 गज का प्लॉट, गाँव नसीरपुर में दस से 15 बीघा जमीन खरीदी।
इसके अलावा भी पाकिस्तान से लौटने के बाद कई अन्य सम्पत्तियाँ अबरार द्वारा खरीदी गई। जाँच के अनुसार 2019 में अबरार ने एक ट्रैक्टर और 14 लाख रुपए कीमत की हाइड्रा मशीन की भी खरीद की। इस दौरान उसने धामपुर में दोमंजिला मकान बनाया, जिसकी कीमत करीब 50 लाख रुपए है।
रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने बताया है कि अबरार पाँच वर्ष पहले एक जमात के साथ पाकिस्तान गया था, लेकिन कुछ दिन बाद बाकी सभी लोग लौट आए और वो पाकिस्तान में ही रुका रहा। जब लौटा तो पाक के मज़हबी संगठन दाव-ए-इस्लाम के लिए प्रचार-प्रसार करने लगा।
यहाँ बता दें दाव-ए-इस्लाम को पाक का एक धार्मिक संगठन बताया जाता है और कहा जाता है कि वहाँ इन संगठनों की आड़ में ही आतंक का खेल चलता है। ऐसे में अब अबरार का पर्दाफाश होने के बाद पुलिस उसके अन्य साथियों की जाँच करने में भी जुटी है। एसपी संजीव त्यागी ने बताया है कि अबरार के जुड़े सभी लोगों का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है, बाकी लोगों की भी संपत्ति की जाँच होगी।
ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोल्सनारो ने भारत और चीन के लोगों को तोहफा दिया है। उन्होंने कहा है कि उनकी सरकार इन दोनों देशों के पर्यटकों और व्यापारियों के लिए वीजा जरूरत को खत्म करेगी। यानी अब ब्राजील जाने के लिए वीजा की भाग-दौड़ से दोनों देशों के नागरिकों को छुटकारा मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष चुनाव जीतकर राष्ट्रपति बने बोल्सनारो ने अपनी नीतियों को शुरू में ही स्पष्ट किया था। उन्होंने उसी दौरान कहा था कि उनकी सरकार विकासशील देशों के लिए वीजा की जरूरतों को खत्म करेगी।
लेकिन, भारत और चीनी नागरिकों के लिए ये घोषणा उन्होंने अपने बीजिंग के आधिकारिक दौरे से ठीक पहले की। बता दें कि इस योजना के अंतर्गत ये पहली बार है किसी विकासशील राष्ट्र के लिए ब्राजील ने अपने वीजा नियमों में बदलाव किया हो।
भारतीयों को ब्राजील जाने के लिए वीजा की आवश्यकता नहीं होगी- राष्ट्रपति बोल्सोनारो – दैनिक जागरण (Dainik Jagran) https://t.co/pMARKC75EU via @GoogleNews
— पल्लवी राजपूत Pallavi Rajpoot (@Pallavi_1991) October 25, 2019
यहाँ बता दें कि इस साल की शुरुआत में ब्राजील की सरकार ने अमेरिका, कनाडा, जापान और ऑस्ट्रेलिया के यात्रियों और व्यापार से जुड़े लोगों के लिए वीजा आवश्यकताओं को समाप्त किया था, लेकिन इन देशों ने ब्राजील के नागरिकों के लिए अपनी वीजा जरूरतों को खत्म नहीं किया था।
अब भारत के नागरिकों के लिए इस फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स समिट में राष्ट्रपति बोल्सोनारो से मिलेंगे। ये समिट ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया में 13-14 नवंबर को आयोजित होगी। जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हिस्सा लेंगे। कहा जा रहा है प्रधानमंत्री और ब्राजील के राष्ट्रपति इस दौरान कई अहम मुद्दों पर समझौता कर सकते हैं। इससे पहले दोनों जी-20 समिट के दौरान मिले थे। जहाँ दोनों के बीच व्यापार और कूटनीतिक सहयोग बढ़ाने की बात हुई थी।
जेएनयू देशद्रोह से जुड़े मामले में केजरीवाल सरकार ने अब भी कन्हैया कुमार और अन्य आरोपितों के ख़िलाफ देशद्रोह का मुकदमा दायर करने के लिए अनुमति नहीं दी है। शुक्रवार (अक्टूबर 25, 2019) को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई के दौरान इस बात की जानकारी खुद सरकारी वकील ने दी। वकील ने बताया कि दिल्ली सरकार से अब भी जेएनयू मामले में देशद्रोह का मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं मिली है। जिसके बाद कोर्ट ने केस की अगली सुनवाई 11 दिसंबर कर दी।
गौरतलब है कि इस मामले के संबंध में पुलिस ने सरकारी अनुमति के बिना ही साल की शुरुआत में 14 जनवरी को कन्हैया कुमार व अन्य के ख़िलाफ देशद्रोह की धाराओं के आरोप पत्र दाखिल किया था, लेकिन उस समय जज मनीष खुराना के समक्ष पुलिस ने कहा था कि दिल्ली सरकार की ओर से ये मुकदमा दायर करने की अनुमति उन्हें नहीं मिली है। उसमें समय लगेगा।
JNU sedition case: The public prosecutor informed Delhi’s Patiala House Court that the matter regarding grant of sanction is pending. The court has summoned the investigation officer and kept the matter for further hearing on December 11.
हालाँकि, इसके बाद कोर्ट ने कई बार केजरीवाल सरकार को इस मामले में फैसला जल्दी लेने के लिए हड़काया भी, लेकिन उन्होंने एक नहीं सुनी। अभी हाल में अदालत ने जब मामले की धीमी रफ़्तार को लेकर पुलिस से सवाल पूछा तो दिल्ली पुलिस ने मनीष खुराना की अदालत को बताया कि कन्हैया कुमार और अन्य के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी के लिए किया गया अनुरोध दिल्ली सरकार के गृह विभाग के समक्ष लंबित है। इस मामले में पुलिस अपना काम कर चुकी है और अब वह सरकार के निर्णय का इंतजार कर रही है।
यहाँ बता दें कि फरवरी 2016 में जेएनयू परिसर में कथित तौर पर राष्ट्रविरोधी नारे लगाए गए थे। जिस पर अपनी जाँच पूरी करके दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इसी साल जनवरी में 1,200 पन्नों की चार्जशीट दायर की थी। उस चार्जशीट में सैयद उमर ख़ालिद, कन्हैया कुमार और अनिर्बन भट्टाचार्य के अलावा 7 कश्मीरी छात्रों का नाम भी शामिल है।
उत्तर प्रदेश में बागपत के बड़ौत कोतवाली क्षेत्र के लुहारी गाँव के पास गोकशी को लेकर हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया। लापरवाही बरतने की वजह से एसपी ने बोहला चौकी पर तैनात 5 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। इस घटना की जाँच-पड़ताल के लिए तीन टीमों का गठन किया गया है। इसके अलावा, पुलिस ने कई मीट विक्रेताओं और मांसाहार परोसने वाले होटलों में छापा मारकर 13 संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।
ख़बर के अनुसार, पुलिस ने बताया कि संदिग्ध लोग यह नहीं बता पाए कि वो लोग मीट कहाँ से लाए और उन्हें कौन बेचता है। एसपी ने कार्रवाई करते हुए गोवंश के सैंपल जाँच के लिए लैब में भेज दिए हैं।
दरअसल, बुधवार (23 अक्टूबर) को सुबह गाँव के खेतों के पास लोगों ने गोवंश के अवशेष देखे। इसके थोड़ी देर बाद वहाँ हिन्दू संगठन के कार्यकर्ता पहुँचे और कार्रवाई की माँग को लेकर उन्होंने जमकर हंगामा किया। सूचना पाते ही इंस्पेक्टर समेत सीओ और एसडीएम भी घटना-स्थल पर पहुँचे। वहाँ उन्होंने उचित कार्रवाई किए जाने का आश्वासन देकर गोवंश के अवशेषों को उठाने की कोशिश की, लेकिन लोग भड़क गए और डीएम और एसपी को बुलाने पर अड़ गए। इस दौरान बड़ौत के भाजपा विधायक केपी मलिक भी वहाँ पहुँचे।
भाजपा विधायक मलिक ने गोकशी पर अंकुश लगाने की बात कही और ऐसा करने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई किए जाने की माँग की। इसके बाद एसपी प्रताप गोपेंद्र और डीएम शकुंतला गौतम घटना-स्थल पर पहुँचे, जहाँ उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि आरोपितों को 48 घंटे के भीतर पकड़ लिया जाएगा।
वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि यह घटना पुलिस की लापरवाही से हुई है और इसलिए बोहला पुलिस चौकी पर तैनात पूरे स्टाफ़ को निलंबित किया जाना चाहिए। इस पर एसपी ने बताया कि लापरवाही सामने आने पर बोहला पुलिस चौकी पर तैनात दरोगा, एक हेड कॉन्स्टेबल और तीन सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है।
बता दें कि गोवंश की हत्या की यह घटना कोई पहली घटना नहीं है। इस साल में अब तक 23 घटनाएँ हो चुकी हैं, कई मामलों में दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई भी हुई है। कुल 89 लोगों को जेल भेजा जा चुका है। आईजी आलोक सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा है कि जिन थाना क्षेत्र में गोवंश की हत्या होगी, वहाँ के थानाध्यक्ष के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने इस बात की भी जानकारी दी कि दोषी पाए जाने पर गोकशी करने वालों के ख़िलाफ़ रासुका के तहत कार्रवाई की जाएगी।
पाकिस्तानी महिला अधिकार कार्यकर्ता गुलालाई इस्माइल ने एक बार फिर से अपने ही देश का चेहरा बेनकाब कर दिया है। गुलालाई इस्माइल का आरोप है पाकिस्तान की एजेंसियाँ वहाँ की उन औरतों में डर पैदा करना चाहती हैं जो अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने की हिम्मत दिखाती हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान ऐसे लोगों को निशाना बना रहा है, जो अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं।
इस्माइल ने दावा किया है कि उनके पिता को गुरुवार (अक्टूबर 24, 2019) को ‘मिलिट्री पोशाक’ पहने लोगों ने पेशावर हाइकोर्ट से बाहर से किडनैप कर लिया। वो कहती हैं कि पाकिस्तानी एजेंसियों ने ऐसा इसलिए किया है ताकि उनकी आवाज को दबाया जा सके। गुलालाई इस्माइल ने ट्वीट करते हुए लिखा कि उनके पिता का अपहरण कर पाकिस्तान उन महिलाओं को आतंकित करने की कोशिश कर रहा है, जिन्होंने उनके पिता का समर्थन किया और पाकिस्तान से असहमति जताई। अब पाकिस्तान ऐसे लोगों को आतंक के नाम पर डराने की कोशिश कर रहा है।
Abduction of my father attempt to terrorise Pakistanis who dare to use ‘conditional rights’: Gulalai Ismail
गुलालाई इस्माइल ने एक पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता के ट्वीट का जवाब देते हुए यह बात कही, जिन्होंने उनके पिता को जेल में यातनाएँ दिए जाने को लेकर चिंता व्यक्त की थी। गुलालाई इस्माइल फिलहाल अमेरिका में राजनीति शरण की माँग कर रही हैं। बता दें कि इस्माइल पर पाकिस्तान में राजद्रोह का आरोप लगाया गया था। जिसके बाद सितंबर में वह पाकिस्तान छोड़कर अमेरिका चली गई थीं।
U.S State department is concerned about the detention of my father. By persecuting citizens for exercising their human rights Pakistan is damaging its own reputation. https://t.co/TVCZDO2kbc
पिछले महीने न्यू यॉर्क में मीडिया के साथ बातचीत के दौरान भी इस्माइल ने इस्लामाबाद में अपने माता-पिता की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की थी। न्यू यॉर्क की सड़कों पर इस्लामाबाद के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने वाले अल्पसंख्यकों के लिए इस्माइल उम्मीद का नया चेहरा बन गई हैं। पिछले महीने इस्माइल को न्यू यॉर्क की सड़कों पर देखा गया था, जो पाकिस्तान में दशकों से अल्पसंख्यकों का सामना कर रहे दुर्दशा और शोषण को उजागर करता है। इस्माइल ने कहा था, “पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान द्वारा खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में तानाशाही है।”
गौरतलब है कि एक पाकिस्तानी अदालत ने राष्ट्रीय संस्थानों को खराब करने से संबंधित एक मामले में इस्माइल के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। इस्माइल ने इस गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट को देश की खुफिया एजेंसी आईएसआई के समक्ष तुष्टिकरण के समान माना था। उन्होंने इस गौर-जमानती वारंट का जवाब देते हुए लिखा था, “ISI को ख़ुश करने के लिए पाकिस्तान की अदालतें यही सब करती हैं।” अदालत की रिपोर्ट में कहा गया था कि अगर 21 अक्टूबर को इस्माइल अदालत के समक्ष पेश नहीं होती है, तो उसे ‘घोषित अपराधी’ घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
कॉन्ग्रेस के एक युवा तुर्क हैं दीपेंदर सिंह हुड्डा। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे। तीन बार लोकसभा के सांसद रहे हैं जूनियर हुड्डा। कुछ दिनों पहले तक पिता के साथ बगावती तेवर में थे। नाराज थे कि राहुल गॉंधी उनके पिता की मान, अशोक तंवर को हरियाणा प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद से नहीं हटा रहे। राहुल की जगह जैसे ही सोनिया आईं उन्होंने हुड्डा पिता-पुत्र की मुराद पूरी कर दी। विधानसभा चुनावों से ठीक पहले तंवर बुझे मन से कॉन्ग्रेस से चले गए।
जाते-जाते तंवर छोड़ गए थे वो मेहनत, जो उन्होंने बतौर प्रदेश अध्यक्ष संगठन को फिर से खड़ा करने की कोशिश में की थी। इसका नतीजा 24 अक्टूबर को आए हरियाणा विधानसभा के चुनावी नतीजों में भी दिखा। कॉन्ग्रेस को 31 सीटें मिली। सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद भाजपा अकेले दम पर बहुमत के आँकड़े से पीछे रह गई।
नतीजों के बाद सीनियर हुड्डा ने सबसे पहले काम किया तंवर के पसीने की कमाई को अपने जलवे के तौर पर पेश करने का। फिर वे सरकार बनाने की कोशिशों में जुट गए। निर्दलीय और अन्य विपक्षी दलों को साथ आने का न्योता दिया। लगे हाथ भाजपा पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप भी मढ़ दिया। हुड्डा के पास 2009 में इसी तरह सरकार बनाने का अनुभव था। लेकिन, वे भूल गए थे कि यह 2019 है। इसलिए उनका दॉंव नाकाम रहा और किसी ने कॉन्ग्रेस के समर्थन का ऐलान नहीं किया।
अब जबकि राज्य में एक बार फिर भाजपा की ही सरकार बनती दिख रही है, जूनियर हुड्डा फट पड़े हैं। भाजपा को समर्थन देने वाले विधायकों को धमकाते हुए दीपेंदर हुड्डा ने कहा है, “जो निर्दलीय विधायक खट्टर सरकार का हिस्सा बनने जा रहे हैं, वे अपनी राजनीतिक कब्र खोद रहे हैं। वे जनता के विश्वास को बेच रहे हैं। हरियाणा की जनता ऐसा करने वालों को कभी माफ नहीं करेगी। जनता उन्हें जूतों से पीटेगी।”
DS Hooda,Congress: Independent MLAs who are going to be a part of the Khattar government are digging their own political grave. They are selling the trust of people. People of Haryana will never forgive those who do so. People will thrash them with shoes. pic.twitter.com/VDjpZSBmzL
राजनीतिक वंशवाद के प्रतीक दीपेंदर अतीत में 24 इंच का आलू भी उगा चुके हैं। दिसंबर 2012 में लोकसभा में एफडीआई पर बहस चल रही थी। उस समय केंद्र में मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली सरकार थी और नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे। दीपेंदर हुड्डा ने बहस में भाग लेते हुए मैकडॉनल्डस को न्योता दिया किया वे हरियाणा आएँ और उन्हें अंबाला के किसान 24 इंच का आलू पैदा करके देंगे।
उस समय विपक्ष की नेता रहीं सुषमा स्वराज ने दीपेंदर को आईना दिखाते हुए कहा था, “उन्होंने मैकडॉनल्ड्स को दावत दे दी हम 24 इंच का आलू यानी 2 फीट का आलू उन्हें उगा कर देंगे। वो कहते हैं कि मैं किसान का बेटा हूॅं। अरे बेटा, किसान के बेटे हो, लौकी और आलू का अंतर तो समझ लो।” वैसे, जिस अंबाला के भरोसे दीपेंदर ने आलू उत्पादन में चमत्कार कर देने का दावा दिया था, वहॉं की जनता ने इस चुनाव में भी कॉन्ग्रेस पर यकीन नहीं जताया है। अंबाला सिटी और अंबाला कैंट दोनों विधानसभा सीटों पर कॉन्ग्रेस उम्मीदवार बड़े अंतर से हारे हैं।
ऊपर के वीडियो में सुषमा स्वराज का वह जवाब आप भी सुन सकते हैं – 11 से 12 मिनट के बीच।