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मदरसों में 1 महीने में तीसरी बार छापेमारी: यौन उत्पीड़न, घोर प्रताड़ना, 1000 छुड़ाए गए

इस्लामिक शिक्षा और नशामुक्ति के नाम पर नाइजीरिया के मदरसों में यौन उत्पीड़न का घिनौना खेल धीरे-धीरे उजागर होने लगा है। खबर है कि बुधवार (अक्टूबर 16, 2019) को उत्तरी नाइजीरिया के मदरसों में छापेमारी के दौरान पुलिस ने 500 बच्चों और पुरुषों को आजाद करवाया। इनमें से अधिकतर को जंजीरों से बाँधकर रखा गया था। इनका यौन शोषण किया जाता था। इनसे मारपीट की जाती थी। इसके अलावा इन्हें हर अकल्पनीय प्रताड़ना दी जाती थी।

बुधवार को कातसिना में हुई ये छापेमारी एक महीने में लगातार तीसरी छापेमारी है। जिसमें अब तक 1000 से ज्यादा पुरूष और बच्चे आजाद करवाए जा चुके हैं। इससे पहले 29 सितंबर को नाइजीरिया के कादुना में छापेमारी के दौरान 300 बच्चों और पुरुषों को आजाद करवाया गया था। उस समय भी खुलासा हुआ था कि बंधक बनाए लोगों को जंजीरों से बाँधकर हर तरीके से प्रताड़ना दी जा रही थी। उन्हें भूखा रखा जाता था। उनका शोषण होता था। उनकी स्थिति इतनी खराब थी कि आजाद होने के बाद भी उन्हें चलने के लिए मदद की जरूरत पड़ रही है।

लेकिन, बुधवार को प्रकाश में आए मामले में पुलिस के बयान का हवाला देकर कहा जा रहा है कि मुक्त कराए गए 500 में से 300 लोग ऐसे हैं जिन्हें नियमित तौर पर प्रताड़ित नहीं किया गया लेकिन 200 लोग ऐसे हैं जिनको प्रतिदिन प्रताड़ना दी गई।

पुलिस ने बताया कि मदरसे की दूसरा बिल्डिंग सबसे ज्यादा खतरनाक थी। वहाँ बच्चों का शोषण होता था। क्योंकि कई नए छात्रों और लोगों को पहले मदरसे में रखा जाता, फिर उन्हें उस दूसरी बिल्डिंग में भेज दिया जाता। जहाँ उनका यौन शोषण होता।

उल्लेखनीय है कि नाईजीरिया के उत्तरी इलाके में इस्लामिक स्कूलों को अलमाजिरिस कहा जाता है। ये मुस्लिम अधिकारों पर केंद्रित क्षेत्रीय संस्था होती है, जिसमें 10 लाख के करीब बच्चे जाते हैं। लोग अपने बच्चों को यहाँ शिक्षा लेने भेजते हैं, कुछ बुरे बर्ताव में सुधार के लिए भेजते हैं, और कुछ अपने बच्चों के अनुशासन में रहने के लिए भेजते हैं। लेकिन यहाँ इनके साथ क्या होता है, इसका खुलासा धीरे-धीरे हो रहा है।

बता दें है कि कातसिना के निवासी और नाइजीरिया के राष्ट्रपति मुहम्मद बुहारी ने जून में कहा था कि वह अलमाजिरिस को बैन करने की सोच रहे हैं, पर अभी वो ऐसा करेंगे नहीं। लेकिन, मंगलवार को उन्होंने पुलिस को निर्देश देते हुए कहा कि वे जाकर ऐसे सभी केंद्रो की तलाश करें और जहाँ भी ये हों, उन्हें बैन कर दिया जाए। प्राप्त जानकारी के मुताबकि ये आदेश सिर्फ़ उन्हीं जगहों पर लागू करने के लिए कहा गया है जहाँ धर्म के नाम पर लोगों से दुर्व्यवहार होता है। अन्य अलमाजिरिस पर नहीं।

वेटिकन ने नन के निष्कासन को सही ठहराया: बलात्कार आरोपित बिशप के विरोध का खामियाज़ा भुगतना पड़ा

कैथोलिक ईसाईयों की सबसे बड़ी संस्था वैटिकन चर्च ने बलात्कार के आरोपित बिशप फ्रैंको मुल्लकल के खिलाफ आवाज़ उठाने वाली नन के निष्कासन को सही ठहराते हुए उनकी अपील नामंजूर कर दी है। इसके पीछे कारण बताया गया कि उनकी जीवनचर्या “FCC नियमों के खिलाफ” थी, और नियमों के उललंघन का एक हिस्सा बिशप मुल्लकल के विरुद्ध सार्वजनिक रूप से बोलना भी था। FCC (फ्रैंसिस्कन क्लैरिस्ट कॉन्ग्रेगेशन) रोमन कैथोलिक चर्च का ही एक अंग है।

‘मेरी समझ के परे पत्र की भाषा, नहीं छोड़ूंगी हॉस्टल’

NDTV से बात करते हुए सिस्टर लूसी ने कहा कि वैटिकन के पत्र की अधिकाँश भाषा उनकी समझ के परे है, इसलिए वे इस इंतज़ार में हैं कि कॉन्ग्रेगेशन के वरिष्ठ सदस्य उन्हें अपनी ओर से उनकी समझ में आने वाली भाषा में पत्र लिखें। पत्र का केवल पहला हिस्सा अंग्रेजी में है, बाकी का पत्र चर्च की मूल भाषा लैटिन में है। उन्होंने उस पत्र में किसी द्वितीय अपील की संभावना और उसकी अंतिम तिथि की भी संभावना तो जताई, लेकिन साथ ही साफ़ किया कि वे क़ानूनी विकल्पों के संभावना भी तलाश रहीं हैं। “किसी भी परिस्थिति में मैं हॉस्टल छोड़ कर जाने की इच्छुक नहीं हूँ।”

गाने, किताबें प्रकाशित करना भी ‘गुनाह’

जीवन के छठे दशक में मौजूद सिस्टर लूसी कलाप्पुरा को निकालने का निर्णय उनका पक्ष सुने बिना ही लिए जाने की बात मीडिया में कही जा रही है। न्यूज़ 18 ने उनके हवाले से लिखा है, “अगर वे चाहते, तो मेरा पक्ष कम-से-कम फ़ोन पर सुन सकते थे। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। मेरे साथ इंसाफ नहीं हुआ है।”

अगस्त में किए गए उनके निष्कासन के पीछे जो आरोप हैं, उनमें बिशप फ्रैंको मुल्लकल पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली नन के पक्ष में सार्वजनिक बयान देने और उनका समर्थन करने के अतिरिक्त किताबों और गानों का प्रकाशन और उनसे कमाई, कार खरीदने और चलाने जैसे आरोप शामिल हैं।

यह साफ़ कर देना ज़रूरी है कि कैथोलिक चर्च के नन और पादरी गरीबी की शपथ (vow of poverty) अवश्य लेते हैं, जिसके आधार पर सिस्टर लूसी ने यदि पैसे कमाए या कार खरीदी हो तब तो उन पर मामला बनता है, लेकिन किताबों और गानों के महज़ प्रकाशन की बात करें, तो चर्च और चर्च के सदस्यों की मज़हबी प्रचार गतिविधियों का यह खुद हिस्सा है। इसी तरह, कैथोलिक चर्चों के कई पादरी कार चलाते हुए देखे जा सकते हैं।

फ़िलहाल सिस्टर लूसी वायनाड के कॉन्वेंट में रह रहीं हैं, जहाँ उन्हें अन्य ननों द्वारा सामाजिक रूप से बहिष्कृत किया जा चुका है। न केवल सामाजिक बहिष्कार, बल्कि उन्हें चर्च की मूल मज़हबी गतिविधियों, जैसे बाइबिल की शिक्षा और उसका प्रचार, चर्च में ईसा मसीह से प्रार्थना करना आदि, जोकि हर ईसाई के पंथिक अधिकार हैं, से भी रोक दिया गया है।

फ्रैंसिस्कन क्लैरिस्ट कॉन्ग्रेगेशन ने अगस्त में ही उनकी माँ को पत्र लिख कर उन्हें कॉन्वेंट से ले जाने को कह दिया था।

ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना ‘चर्च के नियमों’ का उल्लंघन?

कार चलाने के अलावा उन पर कार चलाना सीखने और लाइसेंस बनवाने का भी आरोप है। इसे चर्च ने ‘grave violations’ (गंभीर उल्लंघन’) की संज्ञा दी है। उन पर ऐसे ही कुल 14 आरोप लगाए गए हैं, जिन्हें उन्होंने जाबूझकर अपनी छवि खराब करने की साजिश के रूप में ख़ारिज कर दिया है।

मुख्य आरोप, बिशप फ्रैंको मुल्लकल के खिलाफ नन के समर्थन, के बारे में उनका कहना है, “मैंने केवल अपने कर्तव्य का निर्वहन किया। यह मेरा दायित्व था कि अपनी ईसाई यात्रा में ऐसा भयावह अनुभव झेलने वालीं असहाय सिस्टर्स को सांत्वना और सहायता देना। इसे विद्रोह के रूप में देखा और प्रस्तुत किया जाना गलत है।”

विपक्षी नेताओं को मोदी का चैलेंज: कश्मीर जाना है तो मुझे बताएँ, मैं करूँगा इंतजाम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के प्रचार में जोर-शोर से जुटे हुए हैं। आज मोदी ने बीड के परली में रैली को सम्बोधित करते हुए कॉन्ग्रेस व एनसीपी को कई मुद्दों पर घेरा। पीएम मोदी ने कहा कि युवा कॉन्ग्रेस-एनसीपी का साथ छोड़ रहे हैं और बुजर्ग वहाँ निराश हैं। इसके अलावा पीएम ने कश्मीर के मसले पर भी विपक्षी नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि अगर आपको कश्मीर जाना है तो मुझे बताइए, मैं इंतजाम करूँगा।

प्रधानमंत्री ने कश्मीर के मसले पर विपक्षी नेताओं को घेरते हुए कहा, “कॉन्ग्रेस के एक नेता ने कहा कि यह फैसला देश को बर्बाद कर देगा। 3 महीने हो गए हैं, क्या देश बर्बाद हो गया? एक और कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि 370 हटाकर हमने कश्मीर को खो दिया है। क्या हमने कश्मीर खो दिया है? पीएम मोदी ने विपक्षी नेताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर आप कश्मीर जाना चाहते हैं तो मुझे बताइए, मैं इंतजाम करूँगा।

पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस के एक नेता ने कहा कश्मीर से 370 को हटाने का फैसला किसी की हत्या करने जैसा है। मोदी ने कहा, “एक नेता ने कहा कि ये भारत की राजनीति का काला दिन है। एक नेता ने कहा कि ये लोकतंत्र के खिलाफ है, एक और बड़े नेता ने कहा कि भारत में लोकतंत्र की खत्म हो गया।”

मोदी ने यह भी कहा, “देश की एकता-अखंडता में कॉन्ग्रेस को हिन्दू मुस्ली नजर आता है और इतिहास में जब भी 370 की चर्चा होगी तो देशहित में किए गए निर्णय को विरोध करने वालों का, उनके बयानों का जिक्र जरूर होगा।”

पीएम मोदी ने रैली को सम्बोधित करते हुए कहा, “आज एकसाथ मुझे दो-दो भगवानों का दर्शन करने का सौभाग्य मिला है। यहाँ पहुँचते ही पहले बाबा वैद्यनाथ के चरणों में चला गया, उसके बाद इस विशाल जनता जनार्दन का दर्शन करने का मौका मिला, जनता भी भगवान का रूप होती है। बाबा भोलेनाथ का आशीर्वाद हम सभी पर बना हुआ है। सोमनाथ से लेकर वैद्यनाथ तक, काशी विश्वनाथ से लेकर केदारनाथ तक, सम्पूर्ण विश्व पर महादेव की कृपा बनी हुई है। बाबा वैद्यनाथ का आशीर्वाद पूरे बीड पर रहा है और बीड की जनता का आशीर्वाद और विश्वास हमेशा भाजपा पर रहा है। आपने बार-बार, हर बार यहाँ कमल खिलाया है। इस बार तो मुझे लगता है कि पहले के सारे रिकॉर्ड टूट जाएँगे।”

5 बीवियों वाले दिलशाद खान ने ठगा 50 महिलाओं को: AIIMS में नौकरी लगवाने का देता था लालच

मध्य प्रदेश में स्पेशल टास्क फोर्स ने एक गैंग का पर्दाफाश किया है। ये गैंग अब तक 50 से अधिक महिलाओं को एम्स में नौकरी दिलवाने के बहाने ठग चुका है। जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले मध्य प्रदेश में पुलिस को एक शिकायत मिली। इस शिकायत में था कि कुछ लोग मिलकर महिलाओं को नर्स की नौकरी का लालच देकर उनसे पैसे हड़प रहे हैं। बाद में ये मामला एसटीएफ को सौंपा गया।

जाँच हुई तो पता चला कि यह एक गैंग है, जिसके लीडर का नाम दिलशाद खान है और वह जबलपुर का निवासी है। जबकि उसका साथी आलोक कुमार भोपाल का रहने वाला है।

मीडिया से बातचीत में स्पेशल टास्क फोर्स के ADG अशोक अवस्थी ने बताया, “ये गैंग अब तक 50 से ज्यादा महिलाओं को AIIMS में बतौर नौकरी दिलाने का झाँसा दे चुका है।” जाँच में खुलासा हुआ है कि गैंग लीडर दिलशाद खान की पाँच बीवियाँ हैं और उसने उनके भारी खर्चें उठाने के लिए ही लोगों को छलना शुरू किया।

खान ने पूछताछ में बताया कि उसकी एक बीवी जबलपुर में एक प्राइवेट क्लिनिक चलाती है, जबकि दूसरे आरोपित आलोक कुमार की पत्नी सरकारी गर्ल्स हॉस्टल में सुप्रीटेंडेंट हैं। हालाँकि इन दोनों महिलाओं का अभी तक इस केस से कोई सीधा संबंध है या नहीं, इसका पता नहीं चला है। लेकिन फिर भी उनसे इस मामले के संबंध में पूछताछ करने की संभावना है।

एसटीएफ के अनुसार, ये गैंग उन पढ़ी लिखी महिलाओं को अपना शिकार बनाते थे, जिन्हें नौकरी की जरूरत होती थी। अब फिलहाल पुलिस गाँव और शहरों में उन महिलाओं को ढूँढने के लिए प्रयासरत हैं, जिन्हें इस गैंग ने बेवकूफ बनाया।

वायरल Video: दया की भीख माँगते गार्ड्स को सलीम ने जूते तले रौंदा, 4 साथियों समेत गिरफ़्तार

कर्नाटक के बेंगलुरु में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया बड़ी तेज़ी से वायरल हो रहा है। दरअसल, किसी मामूली सी ग़लती के कारण एक प्राइवेट कंपनी के मालिक सलीम ख़ान ने अपने दो कर्मचारियों को सज़ा देने के लिए क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। सज़ा देने को आतुर सलीम जूते समेत उनकी गर्दन-मुँह पर चढ़ गया और उन्हें अपने जूते के नीचे पूरी ताक़त से दबाने लगा। कथित तौर पर दोनों कर्मचारियों ने कोई ग़लती कर दी थी, जिसकी ये ख़ौफ़नाक सज़ा उन्हें भुगतनी पड़ी। 

इस घटना का वीडियो बड़ी तेज़ी से लोगों तक अपनी पहुँच बना रहा है। इसमें आप देख सकते हैं कि सलीम ख़ान अपने ओहदे और ताक़त का इस्तेमाल कर कितनी बेदर्दी के साथ अपने कर्मचारियों को सज़ा दे रहा है। पता चला है कि दोनों कर्मचारी सिक्योरिटी गार्ड के रूप में सलीम के यहाँ नौकरी करते हैं। इस दौरान दोनों कर्मचारी दया की भीख माँगते रहे, लेकिन हैवान बने उनके मालिक को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा। पता चला है कि सलीम ख़ान की फ़र्म का नाम बेंगलुरू सुरक्षा बल है, जोकि शहर के एचएसआर इलाक़े में स्थित है। 

बेहद गंभीर मुद्रा में ज़मीन पर पड़ा कर्मचारी पिटते हुए कहता है कि हम जीवन में दोबारा ऐसी ग़लती नहीं करेंगे, लेकिन सलीम उसकी इस गुहार को नज़रअंदाज़ करता हुआ उसकी गर्दन पर चढ़कर क्रूरता के साथ अपने जूते के नीचे उसे दबाए रहता है। ख़ुद को बचाने की कोशिश में कर्मचारी उसे हटाने की भरपूर कोशिश करता है, लेकिन वो नाक़ामयाब रहता है। वहीं, दूसरा कर्मचारी यह कहता दिख रहा है कि चाहे कितना भी पीट लो, लेकिन उसे इस बारे में कुछ नहीं मालूम’। इस तरह की घटना यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि भला ऐसी भी कौन-सी ग़लती इन कर्मचारियों से हो गई होगी जिसके लिए उनका मालिक इस हैवानियत पर उतर आया।

कहने को तो यह वीडियो क्लिप महज़ 1 मिनट 5 सेकंड की है, लेकिन ऐसी क्रूरता बर्दाशत करने के लिए लिए पीड़ितों को एक लम्हा… सौ सदियों के बराबर लगा होगा। छटपटाहट के उस क्षण की पीड़ा को उनसे बेहतर और कोई नहीं समझ सकता, ऐसी बर्बरता जानवरों से भी बदतर व्यवहार है। सलीम ख़ान जैसे लोग इस तरह की हरक़तों से अपनी विकृत मानसिकता को उजागर करते हैं। ऐसे लोग समाज के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं, जो किसी व्यक्ति के साथ इतना बुरा बर्ताव करते हों।

फ़िलहाल, बेंगलुरू पुलिस ने वीडियो वायरल होने के बाद मामला दर्ज कर सलीम ख़ान और उसके चार साथियों को गिरफ़्तार कर लिया है। घटना के बाद से ही दोनों सिक्योरिटी गार्ड ग़ायब हैं, जिनकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है।

BJP के विरोध में जिसने लड़ा चुनाव, उसी के बेटे को PM मोदी ने दिया आशीर्वाद: देखें Viral Video

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बॉलीवुड एक्ट्रेस गुल पनाग के बेटे निहाल को आज सुबह ट्विटर के जरिए आशीर्वाद भेजा। प्रधानमंंत्री ने गुल पनाग द्वारा शेयर की गई एक वीडियो को अपने अकॉउंट से रिट्वीट करते हुए निहाल के प्रति ये प्रेम दिखाया।

दरअसल, 16 अक्टूबर को यानी कल गुल पनाग ने अपने बेटे निहाल के साथ एक वीडियो ट्विटर पर डाली। इसके कैप्शन में उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “तो अब निहाल मैगजीन और न्यूजपेपर्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पहचानने लगा है। अधिकतर सुबह वह खुशी से मुझे उनकी तरफ इशारा करते बताता है। मैंने बड़ी मुश्किल से कैमरे के सामने उससे ऐसा करवाया।”

अब इसके बाद आज सुबह (17 अक्टूबर) पीएम मोदी ने इस वीडियो को रीट्वीट किया और लिखा कि उन्हें ये वीडियो बहुत प्यारा लगा। फिर उन्होंने निहाल को आशीर्वाद भी दिया। उन्होंने ट्वीट में लिखा,”बेहद प्यारा! निहाल को मेरा आशीर्वाद। वह भविष्य में जो भी करे, उसके लिए शुभकामनाएँ। मुझे पूरा विश्वास है कि उसे आपके रूप में एक अच्छा गुरु और गाइड मिलेगा।”

गुल पनाग अक्सर अपने बेटे निहाल के साथ सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियोज डालती रहती हैं। लेकिन इस वीडियो के वायरल होने के बाद उन्हें तरह-तरह की प्रतिक्रिया मिल रही हैं।

अधिकतर लोग निहाल की क्यूटनेस पर फिदा हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं, जो बॉलिवुड एकट्रेस की वीडियो के नीचे राजनीति से जुड़े प्रश्न करने से नहीं कतरा रहे। चूँकि गुल पनाग 2014 में AAP की ओर से चंडीगढ़ में चुनाव लड़ चुकी हैं, इसलिए लोगों का पूछना है कि आम आदमी पार्टी की नेता ऐसा क्यों कर रहे हैं? कहीं वो भाजपा से तो नहीं जुड़ने वाले?

वहीं दूसरे यूजर का कहना है कि उसे ऐसा महसूस हो रहा है कि गुल पनाग किसी भी वक्त भाजपा ज्वाइन कर सकती हैं।

खैर, गुन पनाग के बारे में बता दें कि वह सोशल मीडिया पर बहुत सक्रिय हैं और बीते दिनों वह अपनी 20 साल पुरानी तस्वीर शेयर करने के कारण चर्चा में आईं थी।

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गुल पनाग की बीस साल पुरानी तस्वीर

आने वाले में समय में वह 1 नवंबर को रिलीज होने वाली फिल्म ‘बायपास रोड’ में नजर आएँगी। जबकि अभी हाल ही में उन्हें ‘फैमिली मैन’ सीरीज में देखा गया था।

लखनऊ, गाजियाबाद, वाराणसी के हज हाउस का नाम बदलें: योगी सरकार के मंत्री का हज समिति को निर्देश

उत्तर प्रदेश सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण एवं हज राज्यमंत्री मोहसिन रज़ा ने योजना भवन में आयोजित बैठक में लखनऊ हज हाउस का नाम पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा। फ़िलहाल, हज हाउस का नाम मौलाना अली मियाँ के नाम पर है। इसके अलावा उन्होंने ग़ाज़ियाबाद और वाराणसी हज हाउस के नाम बदलने के लिए भी प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश हज समिति को दिया है।

इसकी जानकारी उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल के माध्यम से दी। इसमें उन्होंने लिखा, “लखनऊ में उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की बैठक में हज हाउस लखनऊ का नाम पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर रखने तथा ग़ाज़ियाबाद एवं वाराणसी हज हाउस के भी नाम बदलने के लिए हज समिति से प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।”

ख़बर के अनुसार, वाराणसी और ग़ाज़ियाबाद के हज हाउस का नाम शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खां और देश के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अब्दुल आज़ाद के नाम पर रखा जाएगा। राज्यमंत्री रज़ा का कहना है कि हज हाउस का नामकरण महापुरुषों के नाम पर होना चाहिए, जो पूरे देश में आदर्श हों। इन महापुरुषों के ज़रिए आम लोगों और युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है, उनसे प्रेरित होकर लोगों के मन में कुछ कर गुज़रने का जज़्बा पैदा होगा।  

उन्होंने कहा कि जहाँ लखनऊ के हज हाउस का नाम बदलने का प्रस्ताव तैयार हो गया है, वहीं वाराणसी और ग़ाज़ियाबाद के हज हाउस नए बने हैं। उनका नाम भी मशहूर हस्तियों के नाम पर रखने का फ़ैसला किया गया है। बता दें कि हज समिति का यह प्रस्ताव कैबिनेट में जाएगा। इस पर अंतिम मुहर कैबिनेट ही लगाएगी।

जानकारी के अनुसार, इस मामले में मुस्लिम धर्म गुरू मौलाना ख़ालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि हज हाउस के नामकरण में ऐसी प्रथा रही है कि जिस शख़्स ने जिस क्षेत्र में ख़्याति प्राप्त की हो, उसके नाम पर ही उस क्षेत्र के संस्थानों और इमारतों आदि का नाम रखा जाता है। मौलाना अली मियाँ नदवी के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक क्षेत्र में नदवी ने कई बड़े काम किए हैं, उनकी लिखीं तमाम धार्मिक किताबें आज भी संस्थानों में पढ़ाई जाती हैं। इस वजह से लखनऊ के हज हाउस का नाम उनके नाम पर रखा गया था।

मौलाना महली ने तर्क़ देते हुआ कहा कि लखनऊ हज हाउस का नाम पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर रखने की बजाए अच्छा होता अगर उनके नाम से कोई नया साइंटिफ़िक सेंटर बनाया जाता।

‘5 साल तक उस औरत की तरह अत्याचार झेला, जिसका पति शराबी होता है’ – कॉन्ग्रेस छोड़ने के बाद तंवर

हरियाणा विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही कॉन्ग्रेस पार्टी में चल रही गुटबाजी से परेशान होकर अशोक तंवर का आखिरकार पार्टी से मोहभंग हो गया। उन्होंने खुलेआम घोषणा कर दी कि वो कॉन्ग्रेस पार्टी को छोड़कर जेजेपी (जननायक जनता पार्टी) को समर्थन देने वाले हैं। हालाँकि उन्होंने इस दौरान ये भी साफ किया कि वो जेजेपी को सिर्फ़ समर्थन देंगे, पार्टी में शामिल होने का उनका कोई विचार नहीं हैं।

बुधवार (अक्टूबर 16, 2019) को अपने निवास स्थान पर एक प्रेस वार्ता के दौरान अशोक तंवर ने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों उन्हें पार्टी (कॉन्ग्रेस) के शीर्ष ने अध्यक्ष पद से हटाया, जो कि एक आसामान्य प्रक्रिया थी। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “5 साल पार्टी में उस औरत की तरह अत्याचार सहन किया, जिसका पति शराबी होता है, जो उसे पीटता है। मगर वो औरत जुल्म सहती रहती है क्योंकि उसे बच्चे पालने होते हैं। हमें भी अपने साथियों के भविष्य की खातिर वो जुल्म सहने पड़े।”

इस कॉन्फ्रेंस के दौरान जननायक जनता पार्टी के अध्यक्ष दुष्यंत चौटाला भी उनके साथ मौजूद रहे। चौटाला की उपस्थिति में तंवर ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा, “मैंने बड़े दुख के साथ कॉन्ग्रेस पार्टी को छोड़ा है। अब मैं दुष्यंत और उनकी पार्टी को समर्थन दूँगा”

तंवर की मानें तो उन्हें कॉन्ग्रेस पार्टी से कोई नाराजगी नहीं हैं, लेकिन पार्टी के भीतर कुछ बीमारियाँ है, जिनका इलाज होना चाहिए। उन्होंने टिकट वितरण का मुद्दा उठाते हुए कहा, “ इन चुनावों में टिकट बाँटते वक्त हमारे जुझारू नेताओं की अनदेखी हुई। अब आगे की लड़ाई में हम अच्छे साथियों व उम्मीदवारों को समर्थन देंगे।” तंवर के अनुसार जेजेपी पार्टी में टिकट वितरण बड़े सरीखे से हुआ है। उनके अनुसार इन चुनावों में कॉन्ग्रेस का घमंड चूर-चूर होने वाला है। वह प्रदेश में तीसरे व चौथे नंबर की लड़ाई लड़ रहे हैं।

तंवर ने इस वार्ता में साफ किया कि उन्होंने जेजेपी को ज्वाइन नहीं किया और न ही इस मामले को लेकर उनका फिलहाल कोई इरादा है। उनके मुताबिक आईएमएलडी व जेजेपी के टूटने से प्रदेश में वोट बिखर गए, वरना भाजपा का हरियाणा में कोई औचित्य नहीं था।

इसके बाद समर्थन में सवाल पूछे जाने पर उन्होंने जवाब दिया कि हालातों के अनुसार अपने साथियों से पूछकर इस पर जवाब देंगे। उनके मुताबिक उन्होंने जेजेपी को समर्थन देने का फैसला भी साथियों से पूछकर ही किया है।

बता दें कि इस वार्ता में शामिल हुए जेजेपी नेताओं के जाने बाद इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला भी तंवर के निवास स्थान पर पहुँचे। जिसके बाद अशोक तंवर मे ऐलानाबाद में अभय सिंह का समर्थन किया। इस दौरान तंवर को चौटाला ने 19 अक्टूबर को ऐलानाबाद में होने वाली जनसभा के लिए आमंत्रित भी किया।

अभय सिंह चौटाला के अनुसार तंवर ने कॉन्ग्रेस को मजबूत करने का काम किया। लेकिन जिस दिन तंवर ने कॉन्ग्रेस छोड़ी, मैंने उसी दिन इनका स्वागत किया। हम दोनों का मकसद कॉन्ग्रेस एवं भाजपा को सत्ता से दूर रखना है।

अयोध्या विवाद: केस लड़ते-लड़ते बिक गई मुस्लिम पक्षकार की 9 बीघा जमीन? करेंगे टैक्सी मरम्मत का काम

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद मामले की सुनवाई पूरी हो गई है। 6 अगस्त से शुरू हुई नियमित सुनवाई बुधवार (अक्टूबर 16, 2019) तक चली। कुल मिला कर देखें तो 40 दिन तक इस मामले की नियमित सुनवाई चली। दशकों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित राम मंदिर मसले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के लिए अब 23 दिन और इंतज़ार करना पड़ेगा।

इस मामले में संविधान पीठ ने फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले की सुनवाई पिछले 8 वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। 2011 में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया था, लेकिन इससे जुड़े संबंधित दस्तावेज़ों को निचली अदालत और इलाहाबाद हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचने में 3 साल का समय लग गया। इसके अलावा इस मामले से जुड़े 7 भाषाओं में हज़ारों पेज़ के दस्तावेज़ों का अंग्रेजी भाषा में अनुवाद न हो पाने की वजह से भी मामले की सुनवाई कई वर्षों तक अटकी रही। सुप्रीम कोर्ट को इस संदर्भ में 11 बार आदेश जारी करने पड़े, उसके बाद 8 साल में सभी दस्तावेज़ों का अंग्रेजी भाषा में अनुवाद हो सका। 

दैनिक भास्कर की ख़बर के अनुसार, मुस्लिम पक्ष के पैरोकार इक़बाल अंसारी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद वो फिर से टैक्सी मरम्मत का पुराना काम करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके बेटे भी वही काम कर रहे हैं। साथ ही कभी राजनीति में न आने की बात भी उन्होंने कही। बता दें कि इक़बाल के 5 बेटे और एक बेटी हैं। इक़बाल अंसारी को बाबरी मस्जिद की पैरोकारी उनके पिता हाशिम अंसारी की छोड़ी विरासत से मिली थी। इक़बाल की सुरक्षा में तैनात 3 सुरक्षा गार्ड उनके घर के बाहर अधूरे टिन शेड में रहते हैं। वहीं, हाजी महबूब भी बाबरी मस्जिद के पैराकार हैं। इन्हें भी पिता से पैरोकारी विरासत में मिली। महबूब का कहना है कि अब फ़ैसला आना तय है। इस मामले पर बहुतों ने बहुत कुछ बनाया, लेकिन मुझे पुरखों की ज़मीन से 9 बीघे ज़मीन इस केस के लिए बेचनी पड़ गई।

जहाँ एक तरफ़ अयोध्या विवाद मामले के फ़ैसले पर पूरे देश की नज़रें गड़ी हुईं हैं, वहीं मुस्लिम पैरोकार अपना दुखड़ा रोते नज़र आ रहे हैं… इनमें से एक अपना टैक्सी मरम्मत का काम फिर से शुरू करेंगे, तो दूसरे को पुरखों की ज़मीन बिक जाने का ग़म सता रहा है।

मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने बनाने के पूरा घटनाक्रम को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

ग़ौरतलब है कि ज़मीन विवाद का टाइटलसूट श्रीराम लला विराजमान के नाम है, जो पहले गोपाल सिंह विशारद के नाम से था। गोपाल के निधन के बाद उनके उत्तराधिकारी राजेंद्र सिंह पैरोकार हैं। लेकिन, 1989 से हाईकोर्ट में यह मामला श्रीराम लला विराजमान बनाम सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के नाम से चल रहा है। श्रीराम लला के दोस्त के रूप में केस के पक्षकार त्रिलोकीनाथ पांडेय का कहना है कि हाईकोर्ट की 3 जजों की बेंच ने 2010 में श्रीराम लला के पक्ष में फ़ैसला सुनाया था, लेकिन 2.77 एकड़ ज़मीन को 3 हिस्सों में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड व निर्मोही अखाड़ा के बीच बाँट दिया। 

राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट 23 दिनों के भीतर अपना फ़ैसला सुना देगा। सीजेआई रंजन गोगोई 18 नवम्बर को रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में पहले से ही कयास लगाए जा रहे थे कि वह रिटायरमेंट से पहले इस बहुप्रतीक्षित फ़ैसले की सुनवाई पूरी कर देंगे और फ़ैसला सुना देंगे।

वहीं, विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु सदाशिव काेकजे को उम्मीद है कि अयाेध्या मामले में सुप्रीम काेर्ट हिंदुओं के पक्ष में फ़ैसला सुनाएगा। उन्हाेंने कहा कि जिस तरीके से मुस्लिम पक्ष ने सुनवाई में व्यवधान डालने की कोशिश की, उसके मद्देनज़र 16 अक्टूबर का दिन ऐतिहासिक दिन होगा।

सामूहिक अपील वाले नेता कहाँ हैं पार्टी में? हमारे पास न नेता, न पैसा: दिग्गज कॉन्ग्रेसी नेता सुशील शिंदे

पूर्व केंद्रीय मंत्री और दिग्गज कॉन्ग्रेसी नेता सुशील कुमार शिंदे ने अपने एक बयान से राजनीतिक गलियारे में हलचल पैदा कर दी है। दरअसल, उन्होंने कहा है कि आने वाले समय में कॉन्ग्रेस और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) का विलय हो जाएगा। आपको बता दें कि शिंदे की बेटी प्रणति शिंदे सोलापुर शहर की सीट से तीसरी बार कॉन्ग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं।

इंडियन एक्सप्रेस के मनोज मोरे को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कई मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कई सवालों के जवाब दिए। इनमें से एक सवाल कॉन्ग्रेस और NCP के विलय का था, जिसे उन्होंने अपना निजी विचार बताया और कहा कि दोनों पार्टियों की विचारधाराएँ और सिद्धांत एक हैं। उन्होंने कहा कि जो नेता पार्टी (कॉन्ग्रेस) को छोड़कर जा चुके हैं अगर वे वापस आ जाएँ तो पार्टी देश की सबसे शक्तिशाली पार्टी बन जाएगी। कॉन्ग्रेस के लिए यह समय एकजुट होने का है।

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता शिंदे की इन निजी टिप्पणियों पर पूर्व पार्टी सदस्यों की क्या प्रतिक्रिया रही? इस पर उन्होंने कहा उनके पास कई पूर्व नेताओं का फोन आया और उन सबने उनकी प्रशंसा की। शिंदे ने बताया कि पूर्व सदस्यों ने उनकी बात का समर्थन करते हुए कहा कि अगर देश भर के पार्टी नेता एकजुट होंगे तो कॉन्ग्रेस मज़ूबत होगी।  

इस संदर्भ में NCP की क्या प्रतिक्रिया है, इस पर शिंदे ने कहा,

“मैंने एक बहस शुरू की है, देखते हैं कि क्या होता है… मैंने अब तक उनके (पवार) मुद्दे पर चर्चा नहीं की है। टिप्पणी करने के बाद उन्होंने मुझे फोन नहीं किया। मैं उनसे जल्द ही पंढरपुर में मिलूँगा। देखते हैं कि उस बैठक में क्या होता है।”

सुशील कुमार शिंदे से यह पूछे जाने पर कि उनके द्वारा की गई टिप्पणी से कॉन्ग्रेस पार्टी का कोई लेना-देना है कि नहीं, तो उन्होंने इंदिरा गाँधी के दौर का ज़िक्र करते हुए बताया कि उनके समय में भी कॉन्ग्रेस बुरे दौर से गुजरी थी। ग़रीब लोगों ने कॉन्ग्रेस का समर्थन किया और पार्टी को बुरे दौर से उबार दिया, इसके बाद पार्टी पहले से अधिक मज़बूत हुई। फ़िलहाल, पार्टी में केवल सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के रूप में दो मज़बूत नेता हैं। सामूहिक अपील वाले नेता कहाँ हैं? कॉन्ग्रेस के पास नेता या पैसा नहीं है… वहीं दूसरी तरफ़, भाजपा भावनात्मक रूप से लोगों को धर्म के नाम पर ब्लैकमेल कर रही है… राम मंदिर और अनुच्छेद-370 जैसे मुद्दों को उठा रही है।

साक्षात्कार में शिंदे से महाराष्ट्र की स्थिति के बारे में पूछा गया कि वहाँ कॉन्ग्रेस का बुरा हाल है, लोकसभा चुनाव 2019 में पार्टी ने केवल एक सीट जीती, इसके मद्देनज़र विधानसभा चुनाव से पार्टी को क्या उम्मीदें है? इस पर शिंदे ने भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि भाजपा ने धर्म के नाम पर वोट माँगे। उस समय VBA से प्रकाश आंबेडकर चुनावी मैदान में खड़े हुए, जिन्होंने जाति कार्ड खेला… लेकिन अब कॉन्ग्रेस में सुधार हो रहा है और हम इस चुनाव में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हमें (कॉन्ग्रेस-एनसीपी) 125 से 152 सीटें जीतने की उम्मीद है।

सीटों के लेकर किए गए शिंदे के दावे पर सवाल किया गया कि NCP के अजीत पवार ने तो कहा है कि गठबंधन 170 सीटें जीतकर सरकार बनाएँगे। इस पर शिंदे ने कहा,

“अगर अजीत पवार ऐसा कह रहे हैं, तो यह संभव हो सकता है। वह (शिंदे) महाराष्ट्र से बाहर हो गए हैं इसलिए वो (अजीत पवार) बेहतर जानते है। मैं ज़्यादा यात्रा नहीं कर पाया हूँ।”

पत्रकार ने उनसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री द्वारा भाजपा की रैलियों के संदर्भ में सवाल किया तो शिंदे ने बताया कि उन्हें महाराष्ट्र में चुनाव हारने का डर है। उनके मन में अभी भी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के चुनाव का असर है, इसलिए वो (भाजपा) इस शर्मिंदगी से बचने के लिए बाहर जा रहे हैं।

प्रकाश अंबेडकर को कॉन्ग्रेस अपने पाले में नहीं ला सकी, इसकी क्या वजह हो सकती है? इस पर शिंदे ने कहा कि यह बेहद दु:खद है कि उन्होंने बाबासाहेब अम्बेडकर द्वारा प्रचारित धर्मनिरपेक्षता के आदर्शों के ख़िलाफ़ व्यवहार किया। शिंदे ने खेद जताते हुए कहा कि प्रकाश अम्बेडकर धर्मनिरपेक्षता की हत्या कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान भी उनके रुख़ से कॉन्ग्रेस-NCP जैसी धर्मनिरपेक्ष दलों के 9-10 उम्मीदवारों की हार हुई। अंत में उनसे शरद पवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) से मिले नोटिस के बारे में पूछा गया, जिसे उन्होंने उत्पीड़न का नाम देते हुए पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया।