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दो बार UP के कार्यवाहक CM रहे कॉन्ग्रेसी नेता रिज़वी BJP में शामिल, PM मोदी की कार्यशैली से हैं प्रभावित

कॉन्ग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता और उत्तर प्रदेश में दो बार कार्यवाहक मुख्यमंत्री रह चुके डॉ अम्मार रिज़वी ने बुधवार (23 अक्टूबर) को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का हाथ थाम लिया। उन्होंने बीजेपी महासचिव अरुण सिंह की मौजूदगी में दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में सदस्यता ग्रहण की। बीजेपी में शामिल होते ही रिजवी ने प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि वो प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली से काफी प्रभावित रहे हैं। अपना अनुभव साझा करते हुए रिजवी ने कहा कि जब वो हज यात्रा पर जा रहे थे, तब सऊदी अरब में लोग पीएम मोदी की ख़ूब तारीफ़ कर रहे थे।

बीजेपी पार्टी की सदस्यता प्राप्त करने के दौरान उन्होंने कहा, “अल्पसंख्यकों में बीजेपी के बारे में एक प्रकार की ग़लतफ़हमी और भ्रम पैदा करने का काम किया जा रहा है। हमें बीजेपी को लेकर इस प्रकार के भ्रम को दूर करना है।” उन्होंने याद दिलाया कि उनके ऑल इंडिया माइनोरिटी फॉर डेमोक्रेसी ने लोकसभा चुनाव में राजनाथ सिंह का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि वो बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और पार्टी के कार्यकारी उपाध्यक्ष जेपी नड्डा के मार्गदर्शन में काम करेंगे।

बता दें कि मूल रूप से सीतापुर के रहने वाले डॉ अम्मार रिज़वी यूपी में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं और यूपी में दो बार कार्यवाहक मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। उन्होंने इस साल अप्रैल में कॉन्ग्रेस पार्टी के नेतृत्व पर दल-बदलुओं को तरजीह और कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए प्रांतीय संगठनों के सभी पदों से इस्तीफ़ा दे दिया था। हिन्दू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी की हत्या की भरसक निंदा करते हुए रिजवी ने कहा था कि हिंसा किसी भी समस्या का हल नहीं है। कमलेश तिवारी के परिवार के प्रति उन्होंने गहरी संवेदना व्यक्त की थी।

ग़ौरतलब है कि बुधवार को झारखंड में विपक्ष के 6 विधायक भी बीजेपी में शामिल हुए थे। इनमें से तीन विधायक झामुमो के और दो कॉन्ग्रेस के हैं। एक अन्य विधायक नौजवान संघर्ष मोर्चा के भानु प्रताप शाही हैं। झामुमो छोड़ने वाले विधायक में कुणाल षाड़ंगी, जेपी पटेल और चमारा लिंडा थे। वहीं, कॉन्ग्रेस से सुखदेव भगत और मनोज भगत ने भाजपा का दामन थामा। इनके अलावा पूर्व डीजीपी डीके पांडेय और पूर्व आईएएस सुचित्रा सिन्हा ने भी भाजपा की सदस्यता ली।

राँची में महामिलन समारोह के दौरान मुख्यमंत्री रघुवर दास की मौजूदगी में सभी छ: विपक्षी विधायकों ने बीजेपी की औपचारिक रूप से सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान मुख्यमंत्री के अलावा नंद किशोर यादव, लक्ष्मण गिलुवा के साथ तमाम दिग्गज नेता भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

सुभाष चोपड़ा दिल्ली कॉन्ग्रेस के नए अध्यक्ष, कीर्ति आजाद को कैंपेन कमेटी की कमान

दिल्ली कॉन्ग्रेस प्रदेश कमिटी को नए अध्यक्ष के रूप में सुभाष चोपड़ा को ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। 72 वर्षीय सुभाष चोपड़ा को यह पद मिलने से पहले अस्थायी तौर पर भाजपा छोड़कर कॉन्ग्रेस में आए कीर्ति आज़ाद को दिया गया था। बता दें कि 20 जुलाई 2019 को दिल्ली की पूर्व सीएम और कॉन्ग्रेस पार्टी की कद्दावर महिला नेता शीला दीक्षित के निधन के बाद यह पद खाली था। हालाँकि, अब कीर्ति आज़ाद महज़ चुनाव प्रचार समिति के प्रमुख बनकर ही काम करेंगे। बुधवार को पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के बयान के मुताबिक कॉन्ग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने ही सुभाष चोपड़ा और कीर्ति आज़ाद की नियुक्ति की है।

बता दें कि सुभाष चोपड़ा 1968 में छात्र राजनीति से शुरुआत करने के बाद कॉन्ग्रेस की ओर झुकाव लेकर सक्रिय राजनीति में आए। 1970-71 में वे दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ के अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित हुए। इसके बाद सुभाष दिल्ली कॉन्ग्रेस के सचिव, खजांची और महासचिव के अलावा उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। साथ ही सुभाष 16.6.2003 तक दिल्ली प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे। सुभाष चोपड़ा 1968 में चौथे मेट्रोपोलिटन काउंसिल के सदस्य और 1998 व 2003 में विधायक बने। जून 2003 से दिसंबर 2003 तक विधानसभा के स्पीकर रहे। 2008 में वे फिर विधायक बने।

बता दें कि कॉन्ग्रेस पार्टी में फ़िलहाल तीन कार्यकारी अध्यक्ष पद सम्भाले हुए हैं। इनमें हारुन युसूफ, देवेन्द्र यादव और राजेश लिलोठिया शामिल हैं। दिल्ली में अगले वर्ष अगस्त की शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव होने को हैं। बता दें कि दिल्ली में तकरीबन 70 विधानसभा सीटे हैं। 2015 के विधानसभा चुनाव में अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की 70 सीटों में से 67 पर जीत दर्ज की थी। इसी के बाद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बने। बता दें कि इसी चुनाव में 15 साल दिल्ली पर राज करने वाली कॉन्ग्रेस पार्टी का खाता तक नहीं खुल पाया था। हालाँकि दिल्ली की जनता का ऐसा मानना है कि मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने चुनाव को जीतने के लिए कुछ ज्यादा ही वादे कर डाले। इन्हें असल रूप में निभा पाना और अपने किए हुए वादों पर खरा उतरने का तो संभव नहीं लेकिन आने वाले वक़्त में यह जनता की जेब के लिए टैक्स के रूप में नई चुनौतियाँ खड़ी कर सकता है।

टेरर फंडिंग मामला: यासीन मलिक सहित अन्य अलगाववादी नेताओं के खिलाफ चार्जशीट मंजूर

दिल्ली के एक कोर्ट ने जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के सरगना और आतंकवादी यासीन मलिक और अन्य नामजदों के ख़िलाफ़ एनआईए की चार्जशीट को स्वीकृति दे दी है। इसके अलावा अदालत ने सभी आरोपितों की न्यायिक हिरासत भी बढ़ा कर अगली सुनवाई की तारीख 17 नवंबर, 2019 तक कर दी है। इसके अलावा अदालत ने एनआईए को आदेश दिया है कि चार्जशीट की कॉपी आरोपितों को मुहैया कराई जाए।

एनआईए की चार्जशीट के मुताबिक आरोपितों में यासीन मलिक के अलावा जम्मू कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी के संस्थापक और अध्यक्ष शब्बीर शाह, दुख्तरान ए मिल्ल्त की प्रमुख आसिया अंद्राबी, ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के महासचिव मसर्रत आलम और पूर्व विधायक रशीद इंजीनियर हैं। इन सभी पर टेरर फंडिंग का मुकदमा अनलॉफुल (एक्टिविटीज़) प्रिवेंशन एक्ट के तहत दर्ज किया गया है। एजेंसी ने इन सब पर आतंकी गतिविधियों के लिए पैसा मुहैया कराने और घाटी में भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा बलों पर पथराव की गतिविधियाँ आयोजित करने का इलज़ाम लगाया है।

सभी इलज़ाम एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट में लगाए गए हैं। इस महीने की शुरुआत में ही एनआईए ने उपरोक्त आरोपितों के खिलाफ एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट फाइल की थी। इसमें आरोपितों पर सीमा रेखा के उस पार पाकिस्तान में बैठे आतंकी मास्टरमाइंडों जैसे जमात उद दावा और लश्कर ए तैय्यबा का हाफिज मोहम्मद सईद और हिज़्बुल मुजाहिदीन के सैयद सलाहुद्दीन से तार जुड़े होने का आरोप लगाया गया था। इस सप्लीमेंट्री चार्जशीट में जोड़े गए सबूत सोशल मीडिया वार्तालापों, कॉल रिकॉर्ड्स, मौखिक और दस्तावेज़ी सबूतों के तौर पर हैं।

2017 के टेरर फंडिंग मुकदमे में एनआईए ने पाकिस्तान में छिपे बैठे आतंकियों और उनके समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इनमें सात चोटी के अलगावादी, 2 हवाला के ज़रिए पैसा इधर से उधर करने वाले बिचौलिए और जम्मू कश्मीर के कुछ पत्थरबाज़ी करने वाले लोग शामिल हैं।

एनआईए को इस साल के मध्य (अप्रैल 2019) में यासीन मलिक की हिरासत 12 दिन के लिए टेरर फंडिंग के मामले में ही मिली थी। उस कस्टडी के पूरा होने के बाद उसे तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। एनआईए के मीडिया सूत्रों के मुताबिक एनआईए की हिरासत के दौरान यासीन मलिक ने स्वीकार किया था कि उसने जम्मू कश्मीर के अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के दोनों धड़ों (सैयद अली शाह गीलानी और मीरवाइज़ उमर फारूख) को साथ लाने में अहम भूमिका अदा की थी। इसी के चलते जॉइंट रेजिस्टेंस लीडरशिप (जेआरएल) बनी, जिसने 2016 में कश्मीर में हिंसक पथराव और अन्य वारदातों में अग्रिम पंक्ति से भाग लिया था। इस सबसे घाटी में 4 महीनों तक सब कुछ ठप रहा था।

अवैध कालोनियों में रहने वालों को दिवाली पर मोदी की बड़ी सौगात: 40 लाख को मिलेगा घर का मालिकाना हक़

दिवाली से ठीक पहले केंद्र सरकार ने दिल्ली वासियों को बड़ा तोहफा देने का एलान किया है। बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में केंद्र सरकार ने यह फैसला किया है कि दिल्ली में फैली अनधिकृत कालोनियों में रह रहे लोगों को घर का मालिकाना हक देगी। बता दें कि दिल्ली की ऐसी कालोनियों में इस वक़्त तकरीबन 40 लाख लोग रहते हैं।

केन्द्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने प्रेस वार्ता में बताया कि कैबिनेट की बैठक में दिल्ली की सभी अनधिकृत कालोनियों को नियमित कर उनमें रह रहे लोगों को घर का अधिकार देने का फैसला किया है। बता दें कि दिल्ली में अनधिकृत कालोनियों की संख्या करीब 1797 है जिसके चलते करीब 40 लाख लोगों को घर का मालिकाना हक मिल जाएगा। मीडिया को संबोधित करते हुए पुरी ने यह भी बताया कि सरकार के इस आदेश के बावजूद तीन ऐसी कालोनियाँ हैं जो नियमित नहीं की जाएँगी। इनमें सैनिक फार्म, महेन्द्रू एन्क्लेव और अनंतराम डेयरी शमिल हैं। उन्होंने बताया कि यह कालोनियाँ सरकारी ज़मीन, खेती की ज़मीन पर बनी हुई हैं इसलिए इनको नियमित नहीं किया जाएगा।

सरकार की ओर से बात रखते हुए पुरी ने यह बताया कि कैसे इन अनधिकृत कालोनियों में रहने वले लोगों को केंद्र सरकार के इस एक फैसले के बाद घर का मालिकाना हक मिलने से बहुत फायदा पहुँचेगा। उन्होंने कहा कि इन कालोनियों में रह रहे लोगों को ऋण लेने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सरकार के इस फैसले से उन्हें बैंकों से ऋण लेने में समस्या नहीं आएगी।

इस मौके पर केन्द्रीय मंत्री पुरी ने दिल्ली सरकार पर भी निशाना साधा, उन्होंने दिल्ली सरकार पर हमला बोलते हुए कहा-

“आज दिल्ली-एनसीआर की आबादी 2 करोड़ से अधिक है। ग्यारह साल पहले 2008 में भी कोशिश हुई थीं मगर तब दिल्ली सरकार काम लटका रही थी। तब हमें लगा कि इस पर हमे ही कदम बढाने होंगे ये दिल्ली के लिए क्रांतिकारी कदम है। मालिकाना हक दिया जाएगा, भले ही ये कालोनी सरकारी या निजी जमीन पर बनी हो। इन कालोनी मे रहने वाले लोगो को बहुत मामूली शुल्क देना होगा। 1797 कॉलोनी हैं, कुछ पॉश कॉलोनी जैसे सैनिक फार्म, अनंत राम डेरी जैसी, कोर्ट में जिस तरह दिल्ली सरकार ने 2021 तक समय माँगा तो हमें लगा कि केंद्र सरकार को कदम उठाना चाहिए। इसके लिए जिस कंपनी को अधिकृत करना था दिल्ली सरकार को उन्होंने अभी तक किया ही नहीं। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मालिकाना हक़ दिया जाएगा।”

इस घोषणा के बाद दिल्ली बीजेपी ने जश्न मनाया। उनका कहना है कि केजरीवाल सालों से केवल भरमा रहे थे लेकिन अब केंद्र ने लाखों दिल्ली वालों को उनका हक़ दे दिया है।

नहीं होगा ईसाई बहुल नागालैंड का खुद का संविधान: 22 वर्षों से चले आ रहे समझौते को ख़त्म करने के आसार

नागालैंड की सरकार ने सभी नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों की छुट्टियाँ रद्द कर दीं हैं, और उन्हें ड्यूटी पर वापिस आने का आदेश दिया है। ऐसा नगा शांति वार्ता के समापन की तारीख पास आने और शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के आभास में किया गया है। यह कदम सरकार की ओर से वार्ताकार और नगालैंड के गवर्नर आरएन रवि के उस बयान के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने दो टूक कह दिया था कि न ही नगालैंड को अपना खुद का झंडा या संविधान मिलेगा, और न ही अलगाववादियों के साथ हो रही वार्ता को समय सीमा (31 अक्टूबर, 2019) के आगे खींचा जाएगा। नगा अलगाववादी संगठन NSCN-IM के साथ सरकार की वार्ता 1997 से, यानि 22 वर्षों से चली आ रही है, लेकिन अब सरकार ने तय कर लिया है कि और आगे ऐसा नहीं चल सकता।

परसों (सोमवार, 21 अक्टूबर, 2019 को) नगालैंड के डीजीपी ने एक वायरलेस संदेश के ज़रिए पुलिस कर्मियों की सभी प्रकार की छुट्टियों को रद्द किए जाने का संदेश जारी किया। मुख्य सचिव के ऑफ़िस ने ऐसा ही संदेश सभी डिप्टी कमिश्नरों और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए जारी किया। मुख्य सचिव के आदेश में सभी अधिकारियों को अपनी ड्यूटी पर तैनात रहने और छुट्टी पर गए अधिकारियों को वापिस बुलाए जाने की बात कही है। इसके अलावा नगालैंड के मुख्यमंत्री नाइफीउ रिओ के कार्यालय ने भी सभी जिलों के जिला मजिस्ट्रेटों को जिला मुख्यालय किसी भी हालत में न छोड़ने के कठोर आदेश जारी किए हैं।

National Socialist Council of Nagaland (Isak-Muivah faction) के नाम से जाने वाले इस अलगाववादी संगठन से हालाँकि सरकार बातचीत और जारी न रखने के निश्चय पर अडिग रहती दिखाई दे रही है, लेकिन NSCN (IM) भी अलग झंडे और संविधान को लेकर अड़ता ही लग रहा है। ऐसे में संभावना शांति समझौते पर हस्ताक्षर बिना NSCN (IM) के ही होने की सूरत बनती दिख रही है। इसके चलते कानून व्यवस्था के लिए खतरा उत्पन्न हो सकता है।

सरकार की शांति वार्ता सात नगा संगठनों के साथ चल रही है, और NSCN (IM) के अलावा बाकी सभी वार्ता खत्म कर शांति समझौते पर हस्ताक्षर के पक्ष में बताए जा रहे हैं। NSCN (IM) के नेता भी सरकार के साथ पहले ही ‘Framework Agreement’  पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। जहाँ सरकार ‘Framework Agreement’ के दायरे में झंडा और संविधान के मुद्दों के न आने की बात कर रही है, वहीं NSCN (IM) ‘Framework Agreement’ में इन दोनों का वादा किए जाने की बात कह रही है।

आयशा के रिश्तेदारों ने राजीव गौतम को चलती ट्रेन से धक्का देकर मार डाला

बहन के घर से लौट रहे आजमगढ़ के एक युवक राजीव गौतम को ट्रेन में सवार कुछ मुसलमानों ने मार पिटाई कर चलती ट्रेन से बाहर धक्का दे दिया। जिसके बाद राजीव की मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना मंगलवार को गाज़ीपुर के हुर्मुज़पुर हॉल्ट के पास हुई।

32 वर्षीय मुबारकपुर का रहने वाले राजीव गौतम अपने रिश्तेदार श्रीकांत के साथ पैसेंजर ट्रेन में मऊ जा रहे थे। श्रीकांत के मुताबिक मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक वाला एक व्यक्ति अपने ही जैसे दर्जनों साथियों के साथ सआदत रेलवे स्टेशन से ट्रेन में चढ़ा और ट्रेन के आगे बढ़ते ही उसके साथ वाले युवकों ने ट्रेन में यात्रा कर रहे राजीव को घेर लिया। सुबह तकरीबन 10 बजे गाजीपुर जिले के बहरियाबाद थाना क्षेत्र में पड़ने वाले हुर्मुज़पुर हॉल्ट के पास उन लोगों ने मार पीट की और इसके बाद उन्होंने राजीव गौतम को बोगी की आपातकालीन खिड़की से धक्का मारकर बाहर फेंक दिया।

श्रीकांत ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान उनकी बड़ी तादाद के चलते ट्रेन में एक भी व्यक्ति ने उनकी इस हरकत के खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं दिखाई और न ही किसी ने उनकी इस करतूत का विरोध किया। जब ट्रेन जखनिया स्टेशन पर रुकी तो हमलवार ट्रेन से उतरकर भाग गए। इस घटना में श्रीकांत भी ज़ख़्मी हो गए, बाद में उन्होंने इस मामले की शिकायत स्टेशन ऑफिसर से की, साथ ही मृत राजीव के परिवारजनों को भी इस समबन्ध में सूचित कर दिया।

घटनास्थल पर पहुँची बहरियाबाद थाने की पुलिस ने रेलवे के अधिकारियों से इस सम्बन्ध में जानकारी ली। रिश्तेदारों के मुताबिक राजीव गौतम आजमगढ़ गझरा गाँव के रहने वाले हैं। बता दें कि राजीव की शादी आजमगढ़ के भिखा गाँव की रहने वाली निशा से हुई थी। इसके बाद राजीव गौतम की आयशा खातून से दूसरी शादी हुई। दोनों स्त्रियों ने आपसी सहमती से एक दूसरे के साथ रहने का फैसला किया। इससे पहले राजीव की पहली पत्नी निशा उनके पैतृक गाँव गझरा में ही रहती है जबकि आयशा खातून मुबारकपुर के इस्लामपुर इलाके में एक किराए के मकान में अपनी पति के साथ रहा करती।

राजीव के परिवार वालों ने आरोप लगाया है कि उसके हत्यारों का ताल्लुक सीधे आयशा के परिवार और उसके समुदाय से है। उन्होंने बताया कि वे लोग (हत्यारे) आयशा के जानने वाले थे और अक्सर उसके घर आया करते थे।

विधायक खरीदने के मामले में फँसे कॉन्ग्रेस नेता पूर्व CM हरीश रावत, FIR दर्ज

केंद्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ हॉर्स ट्रेडिंग से जुड़े मामले में FIR दर्ज कर ली है। पिछले महीने के अंत में (30 सितंबर, 2019 को) उसे उत्तराखंड के हाई कोर्ट ने इस मामले में कॉन्ग्रेस के नेता के खिलाफ FIR की इजाज़त दे दी थी। उसके बाद से ही सीबीआई के अगले कदम पर सबकी निगाहें टिकीं थीं। इसके पहले एजेंसी ने रावत के खिलाफ प्राथमिक जाँच कर उसकी रिपोर्ट अदालत में जमा की थी।

2016 में रावत का एक विवादस्पद वीडियो सामने आया था, जो सोशल मीडिया पर ख़ासा चर्चित हुआ था। उसकी वजह से कॉन्ग्रेस को भी शर्मिंदगी और असहजता का सामना करना पड़ा था। इसमें रावत अपनी कुर्सी बचाने के लिए विधायकों का समर्थन ‘खरीदते’ देखे जा सकते थे। वे विधायकों का समर्थन पाने के लिए उनसे ‘डील’ कर रहे थे। ये वह विधायक हैं जो उनकी पार्टी से विधानसभा चुनाव जीतने के बाद पाला बदलकर भाजपा में शामिल हो गए थे।

सीबीआई ने अपनी FIR में हरीश रावत के अलावा जिन लोगों को नामजद किया है वे हैं पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक रावत, और समाचारपत्र ‘समाचार प्लस’ के सम्पादक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) उमेश शर्मा। इसके अलावा केंद्रीय जाँच ब्यूरो ने तहरीर में कुछ अन्य ‘अनाम’ लोगों को भी सूचित किया है।

हरीश रावत के खिलाफ सीबीआई की FIR का अंश

यह वीडियो उस समय बाहर आया था जब रावत की कॉन्ग्रेस राज्य सरकार फ्लोर टेस्ट में असफल रही थी। इसके बाद राज्य को राष्ट्रपति शासन के अंतर्गत डाल दिया गया था। कालांतर में हरीश रावत एक बार फिर मुख्यमंत्री बने और उन्होंने अपने खिलाफ चल रहे मामले को खत्म करने की कोशिश की। उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार को प्रस्ताव भेजा कि उनके खिलाफ चल रही सीबीआई स्तर की जाँच वापिस ले ली जाए। उन्होंने बदले में राज्य पुलिस के विशेष जाँच दल (SIT) से अपनी जाँच शुरू कराने के लिए प्रस्तुत होने की भी बात कही। लेकिन मोदी सरकार ने इस प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया था।

2 को मारा, 80 घायल: POK में उठी आज़ादी की माँग, पाकिस्तानी सेना ने बरपाया कहर

पाकिस्तान ने अब भारत के बाद अपनी खुद की गुलामी में पड़े पाकिस्तान ऑक्युपाइड कश्मीर (POK) में भी हिंसा और दमन का चक्र शुरू कर दिया है। POK के मुज़फ़्फ़राबाद में पाकिस्तान के अवैध कब्जे के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन पर पाकिस्तान के सशस्त्र सुरक्षा बलों ने भयंकर हिंसा की है। दो लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है, और 80 लोग घायल हो गए हैं। गौरतलब है कि POK में 22 अक्टूबर की तारीख को ‘काला दिवस’ (‘Black Day’) मनाया जाता है। उस ही तारीख को 1947 में पाकिस्तानी सेना ने महाराज हरी सिंह के जम्मू और कश्मीर राज्य पर हमला किया था।

पाकिस्तान से आजादी पाने के लिए POK में सक्रिय सभी राजनीतिक पार्टियों के गठबंधन All Independent Parties Alliance (AIPA) ने इस रैली का आयोजन किया गया था। इसका मकसद पाकिस्तान के अवैध कब्ज़े के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था।

POK और गिलगित बाल्टिस्तान के लोग आज के दिन इकट्ठे होकर अपना विरोध प्रदर्शन करते हैं। इस साल पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकर्ताओं के ऊपर न केवल आँसू गैस से हमला कर दिया, बल्कि लाठीचार्ज भी किया।

और यह हमला किया भी उस समय गया जब पाकिस्तान का विदेश कार्यालय पत्रकारों और विदेशी राजनयिकों का एक प्रतिनिधिमंडल ले कर भारत के खिलाफ प्रोपेगंडा करने उन्हें POK के पास दौरे पर ले कर गया था।

इसके अलावा पाकिस्तान ने POK में आम जनता और नेताओं के अलावा पत्रकारों पर भी हमला किया और उनके साथ हिंसा की। मुज़फ़्फ़राबाद के प्रेस क्लब में Jammu Kashmir People’s National Alliance (JKPNA) नामक पार्टी मीडिया ब्रीफिंग कर रही थी। पुलिस ने उस पर भी हमला बोल कर लाठीचार्ज किया और पत्रकारों के साथ मारपीट करने के अलावा उनके रिकॉर्डिंग इक्विपमेंट भी तोड़ दिए।

इसके बाद बिफरे पत्रकारों ने भी पाकिस्तान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

राफ़ेल म्यूज़ियम में घुसा, अपने कपड़े फाड़ डाले और अरबी में लिखी धमकी…

फ़्रांस के दक्षिणी हिस्से के शहर नीस के पास संत राफ़ेल कस्बे में स्थित संत राफ़ेल म्यूज़ियम में एक खलबली वाली स्थिति आज पैदा हो गई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक एक व्यक्ति ने म्यूज़ियम में घुस कर दीवारों को गंदा करने के लिए अरबी भाषा में धमकी वाले संदेश लिखने शुरू कर दिए। चार घंटे तक चली जद्दोजहद के बाद ही उसे गिरफ़्तार किया जा सका है।

मेडिटेरेनियन समुद्र के पास स्थित कस्बे संत राफेल के इस म्यूज़ियम में यह घुसपैठिया बताया जा रहा है कि रात को घुस आया था। जब पुलिस ने भवन को घेर लिया, तब भी उसने पुलिस की बातों का जवाब देने से इंकार कर दिया था। स्थानीय पुलिस के एक अनाम अधिकारी के हवाले से टाइम्स ऑफ़ इज़राइल ने बताया कि पुलिस इस संभावना के लिए भी तैयार थी कि उसका कोई दूसरा साथी भी हो सकता है। पुलिस ने उसकी तलाश में साइट की पूरी तलाशी भी ली।

गिरफ्तार व्यक्ति ने म्यूज़ियम की दीवारों पर अरबी भाषा में जो संदेश लिखे, उनमें से अब तक एक का ही अनुवाद होने की बात मीडिया में आ रही है। रिपोर्टों के अनुसार उस अनुवादित संदेश में लिखा था, “म्यूज़ियम ज़हन्नुम में जाएगा।” लिखने वाला मानसिक रूप से बीमार बताया जा रहा है।

हालाँकि, न ही आरोपित ने किसी को बंधक बनाया और न ही किसी तरह की गोलीबारी या हिंसा की नौबत आई, लेकिन पुलिस हर परिस्थिति के लिए तैयारी के साथ आई थी। बम निरोधी दस्ते (बॉम्ब डिस्पोज़ल स्क्वॉड) को भी मौके पर ही मौजूद रखा गया था। पुलिस ने ट्वीट कर लोगों से म्यूज़ियम के आस-पास के इलाकों से दूर रहने की अपील भी की थी।

संत राफेल म्यूज़ियम एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्मारक है। यहाँ एक मध्य युगीन पत्थर का बना चर्च है। इसके अलावा इलाके के रोमन साम्राज्य से जुड़े इतिहास की कहानी कहतीं विभिन्न प्रकार के ग्रीक और रोमन एम्फोरा (दोनों तरफ़ हैंडल वाले जार या जग) समेत कई कलाकृतियाँ म्यूज़ियम में हैं। यह फ़्रांस-इटली की सीमा के पास स्थित है। इसके एक तरफ सेंट टोपेज़ है और दूसरी तरफ़ अपने फिल्म फेस्टिवल के लिए जाना जाने वाला कांस।

आतंकी फंडिंग के लिए पीएम आवास योजना के खातों का इस्तेमाल: धरे गए फहीम और सिराजुद्दीन

देश के सभी नागरिको को 2022 तक रहने के लिए छत मिल सके इस उद्देश्य से शुरू की गई योजना में भी दहशत फ़ैलाने वाले जिहादियों ने अब आतंकवाद को बढ़ावा देने का रास्ता ढूंढ लिया है। टेरर फंडिंग के मामले में प्रधानमंत्री आवास योजना के खातों के दुरूपयोग का मामला सामने आया है।

दरअसल मामला बरेली का है जहाँ पीएम आवास योजना के लिए खोले गए खातों से आतंक के आकाओं तक रुपया-पैसा पहुँचाने के लिए पूरा प्लान तैयार किया गया। इसके लिए आतंकवादियों के एक हमदर्द गिरोह ने उनको फंड पहुँचाने के लिए महिलाओं के खातों का भी इस्तेमाल किया।

टेरर फंडिंग की इस पूरी योजना में सोची समझी साजिश के तहत आवास योजना की सब्सिडी लेने वाले लोगों के खाते उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक में खुलवाए गए, और उन सबके एकाउंट एसबीआई में खुलवाए गए। प्रत्येक व्यक्ति को ढाई-लाख की सब्सिडी देने वाली इस योजना के इन सभी एकाउंट्स के ज़रिए करीब 50 लाख का लेनदेन किया गया।

महिलाओं को जब इस बात की भनक लगी कि उनके एकाउंट इस तरह की गतिविधि के लिए उपयोग किए जा रहे हैं तो उन्होंने खाता खुलवाने वाले लोगों से इसका विरोध किया। महिलाओं की बात सुनने की बजाय उनलोगों ने महिलाओं को मुँह बंद रखने की धमकी दी कि घटना का ज़िक्र पुलिस में करने पर सीधे जान से मारने की धमकी दे डाली। आरोपितों ने खाताधारकों को धमकी देते हुए यह कहा कि वे लोग विदेश में लेन-देन करते हैं और उनकी पहुँच बहुत ऊपर तक है। पैसे को लेकर तमाम घटनाओं को सुनने के बाद सभी में थोड़ी हिम्मत जागी और उन्होंने कोतवाली में शिकायत कर दी। इसके साथ ही उन्होंने उस गिरोह में से एक व्यक्ति को पुलिस के हवाले भी कर दिया।

खाताधारकों ने कहा कि वे लोग काफी गरीब हैं, किराए के मकान में रहते हैं। आरोपितों ने उन्हें झांसा दिया था कि उनके इस काम में मदद करने पर सभी को ढाई-ढाई लाख रुपए दिए जाएँगे। वहीं जब मामले में संलिप्त बैंक के मैनेजर से बात की गई तो मालूम चला कि उनके बैंक में इस प्रकार के पाँच एकाउंट खोले गए थे जिसमें 5 लाख से 7 लाख का लेनदेन हुआ है।

मैनेजर ने बताया कि उनसे पूछताछ करने आईबी के अधिकारी आए थे और उनकी माँगी हर डिटेल मैनेजर ने उन्हें दे दी। इस घटना में कोतवाली में तहरीर मिलने के बाद एसपी सिटी अभिनंदन सिंह ने बताया, “मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है, जाँच चल रही है, अभी आतंकी फंडिंग को लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा जा सकता। एसपी के मुताबिक मामले की जाँच में अन्य जाँच एजेंसियां भी लगी हुई हैं। गौरतलब है कि एटीएस ने लखीमपुर से उम्मीद, एजाज, समीर सलमानी और संजय अग्रवाल को भी गिरफ्तार किया था, बाद में इन्ही लोगों की निशानदेही पर एटीएस ने सिराजुद्दीन और फहीम नाम के दो लोगों को बरेली से टेरर फंडिंग में संलिप्त होने के आरोप में गिरफ्तार किया था।