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पिछले 70 सालों में कुछ नहीं हुआ, पूरा सिस्टम नष्ट कर दिया: राहुल गाँधी; देखें ‘मनोरंजक’ VIDEO

पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार के दौरान ऐसी-ऐसी बातें कही, जो तुरंत मजाक की विषय-वस्तु बन गई। लोगों ने उनके बयानों को हाथों-हाथ लिया और वे सोशल मीडिया पर वायरल भी होने लगे। कई लोगों ने तो यहाँ तक कहा कि राहुल गाँधी ने बैंकॉक से लौटते ही चुनाव प्रचार अभियान संभाल लिया है और अब भाजपा को जीतने से कोई नहीं रोक सकता। महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को चुनाव होने हैं और 24 अक्टूबर को मतगणना के साथ ही चुनाव परिणाम भी आ जाएँगे। प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी ने भी महारष्ट्र में रैली की। आइए आपको राहुल गाँधी के भाषण के कुछ मनोरंजक अंश से रूबरू कराते हैं।

सबसे पहले तो राहुल गाँधी ने भारत के स्पेस प्रोग्राम की महत्ता को ही नकार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए युवाओं को ‘चाँद देखने’ के लिए कह रही है। इससे उनका आशय चंद्रयान-2 कार्यक्रम से था, जिसमें पूरे भारत की जनता ने उत्साहित होकर इसरो वैज्ञानिकों की हौसला-आफजाई की। उन्होंने साथ ही यह भी याद दिलाया कि कॉन्ग्रेस ने इसरो की स्थापना की थी। कुल मिला कर पुराने राग को रागा ने नए अंदाज में और मजाकिया तरीके से छेड़ा।

सबसे ज्यादा मजा तो लोगों ने राफेल पर उनके बयान का लिया। राहुल गाँधी का कहना था कि राजनाथ सिंह फ्रांस में जाकर राफेल को औपचारिक रूप से प्राप्त करने इसीलिए गए क्योंकि भाजपा नेताओं को राफेल ‘चुभता’ है। ये बेतुका है क्योंकि कोई चीज अगर किसी को चुभती है तो वो उस चीज से दूर भागेगा न? लोकसभा चुनाव 2019 में राफेल मुद्दा फेल हो चुका है। फिर भी, राहुल यह कहना नहीं भूले कि राफेल में चोरी हुई है। उन्होंने दावा किया कि रक्षा मंत्रालय ने लिख कर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राफेल मामले में टाँग अड़ाई है।

पूरे भाषण बेहद मनोरंजक कहकर इसे टुकड़ों में शेयर किया जा रहा है। आप यहाँ मजा ले सकते हैं

महाबलिपुरम में भारत-चीन के बीच अनौपचारिक समिट को खूब मीडिया कवरेज मिला और मोदी-जिनपिंग ने कई प्राचीन भारतीय कला प्रस्तुतियों का आनंद लिया। राहुल गाँधी ने आरोप लगाया कि ‘मेड इन चीन’ से भारतीय युवाओं का रोजगार छिन रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चीनी कम्पनियाँ भारत में घुस आई हैं, जिससे यहाँ के लोगों को नुकसान होता है। जब कोई विदेशी कम्पनी किसी अन्य देश में इंडस्ट्री सेट करती है तो उस देश को फायदा होता है लेकिन राहुल का अलग ही अर्थशास्त्र चलता है। खैर, मजे के लिए यही सही है।

क्या किसी पार्टी का पूर्व अध्यक्ष और सर्वेसर्वा ऐसा कह सकता है कि उसकी पार्टी ने कुछ नहीं किया? राहुल गाँधी कह सकते हैं। उन्होंने महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार के दौरान कहा कि जनता ने अब बहुत देख लिया है और पिछले 70 सालों में कुछ नहीं हुआ। इन 70 सालों में उन्होंने 5 दशक से भी कॉन्ग्रेसी शासन को भी लपेटे में ले लिया। भाई, अगर 70 सालों में कॉन्ग्रेस ने कुछ नहीं किया तो अब लोग क्यों वोट देंगे? राहुल ने यह भी कहा कि पूरे सिस्टम को नष्ट कर दिया गया। उनके इस बयान का समर्थन ख़ुद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी किया।

उन्होंने राजस्थान और मध्य प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकारों का उदाहरण दिया। दोनों ही राज्यों में क़ानून-व्यवस्था की पोल खुल चुकी है। उन्होंने हास्यास्पद दावा किया कि दोनों ही राज्यों में कॉन्ग्रेस सरकारों ने क़र्ज़माफ़ी की प्रक्रिया पूरी कर दी है। जहाँ मध्य प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई और कॉन्ग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह ने क़र्ज़माफ़ी को नकार दिया, राजस्थान में किसानों ने कई प्रदर्शन किए। राहुल गाँधी के ताज़ा भाषण में अगर मनोरंजन में कोई कमी रह गई होगी तो शायद अगली रैली में पूरी हो जाए।

गुजरात प्रश्नपत्र विवाद: गाँधी की बीड़ी, आत्महत्या की कोशिश और धतूरे की कहानी

गुजरात में ‘सुफलाम शाला विकास संकुल’ द्वारा संचालित एक विद्यालय ने 9वीं कक्षा के इंटरनल परीक्षा में पूछा गया कि महात्मा गाँधी ने आत्महत्या करने के लिए क्या किया था? जब मीडिया में इसे लेकर हंगामा मचाया गया, तभी हमें लगा कि कुछ गड़बड़ है क्योंकि कोई भी स्कूल ऐसा सवाल क्यों पूछेगा? यह भी संभावना थी कि मीडिया ने सवाल को ग़लत तरीके से पेश किया हो क्योंकि गुजराती से अंग्रेजी अनुवाद में दिक्कत आ सकती है। गुजरात सरकार ने स्कूल को नोटिस भेजने के साथ-साथ प्रश्नपत्र सेट करने वाले शिक्षक के ख़िलाफ़ भी जाँच बिठा दी है। क्या गुजरात सरकार ने सिर्फ़ मीडिया रिपोर्ट्स को आधार बना कर कार्रवाई कर दिया?

असल में जब प्रश्नपत्र में हमारी नज़र पड़ी तो पता चला कि सच में ऐसा पूछा गया था। हालाँकि, ये बताने की ज़रूरत नहीं है कि महात्मा गाँधी ने आत्महत्या नहीं की थी, उनकी हत्या हुई थी। स्कूल ने अपना बचाव करते हुए कहा कि गुजरात की सरकारी पुस्तकों में इसका विवरण है कि कैसे गाँधी ने कभी आत्महत्या करने की ‘सोची’ थी और इसीलिए इस प्रश्न को पूछा गया। स्कूल के ट्रस्ट संयोजन ने कहा कि उक्त सवाल में कुछ भी ग़लत नहीं है और गाँधीजी ने अपनी आत्मकथा में भी इस बात का जिक्र किया है कि उन्होंने कैसे आत्महत्या करने का प्रयास किया था?

महात्मा गाँधी अपनी आत्मकथा ‘सत्य के साथ मेरे प्रयोग’ में इस बात का जिक्र किया है कि कैसे उन्होंने एक बार आत्महत्या की सोची थी और इसका प्रयास भी किया था। पढ़िए उनकी पुस्तक का वो अंश उनकी ही शब्दों में:

“अपने एक रिश्तेदार के साथ मुझे बीड़ी पीने का शौक लगा। हमारे पास पैसे नहीं थे। हम दोनों में से किसी का यह ख्याल तो नहीं था कि बीड़ी पीने में कोई फायदा है। पर गंध में भी आनंद नहीं आता था। हमें लगा सिर्फ धुआँ उड़ाने में ही कुछ मजा है। मेरे काकाजी को बीड़ी पीने की आदत थी। उन्हें और दूसरों को धुआँ उड़ाते देखकर हमें भी बीड़ी फूकने की इच्छा हुई।”

“गाँठ में पैसे तो थे नहीं, इसलिए काकाजी पीने के बाद बीड़ी के जो ठूँठ फेंक देते, हमने उन्हें चुराना शुरू किया। पर बीड़ी के ये ठूँठ हर समय मिल नहीं सकते थे और उनमें से बहुत धुआँ भी नहीं निकलता था। हमने इसलिए नौकर की जेब में पड़े दो-चार पैसों में से एकाध पैसा चुराने की आदत डाली। हम बीड़ी खरीदने लगे। पर सवाल यह पैदा हुआ कि उसे संभाल कर रखे कहाँ? हम जानते थे कि बड़ों के देखते तो बीड़ी पी ही नहीं सकते। जैसे-तैसे दो-चार पैसे चुराकर कुछ हफ्ते काम चलाया। इसी बीच सुना कि एक पौधा होता है जिसके डंठल बीड़ी की तरह जलते हैं। फूँके जा सकते हैं। हमने फिर उन्हें खोजा और फूँकने लगे।

“हमें दुख इस बात का था कि बड़ों की आज्ञा के बिना हम कुछ भी नहीं कर सकते। हम उब गये। हमने आत्महत्या करने का फैसला कर किया। पर आत्महत्या कैसे करें? जहर कौन दे? हमने सुना कि धतूरे के बीज खाने से मृत्यु हो जाती है। हम जंगल में जाकर बीज ले आए। शाम का समय तय किया।”

“केदारनाथजी के मंदिर की दीपमाला में घी चढ़ाया, दर्शन किए और एकांत खोज लिया। पर जहर खाने की हिम्मत न हुई। अगर तुरंत ही मृत्यु न हुई तो क्या होगा? मरने से लाभ क्या? क्यों न ये सब सह ही लिया जाए? फिर भी दो-चार बीज खाए। अधिक खाने की हिम्मत ही ना हुई। दोनों मौत से डरे… यह निश्चय किया कि रामजी के मंदिर जाकर दर्शन करके शांत हो जाएँ और आत्महत्या की बात भूल जाएँ।”

इस घटना के बाद से महात्मा गाँधी और उनके मित्र ने स्मोकिंग छोड़ दी। महात्मा गाँधी को आगे जाकर देशसेवा के लिए काफ़ी-कुछ करना था और नियति को भी यही मंजूर था। आज गुजरात के उक्त स्कूल के सवाल पर बवाल मचा हुआ है, इस प्रकरण को याद करना ज़रूरी है।

हम शरीयत से चलते हैं: गोमूत्र के कारण ‘हलाल इंडिया’ ने पतंजलि को नहीं दिया ‘Veg हलाल’ सर्टिफिकेट

आपने माँस ख़रीदते समय ‘हलाल’ और ‘झटका’ शब्दों के बारे में ज़रूर सुना होगा। हाल ही में इसे लेकर विवाद भी हुआ था, जब प्रसिद्ध फ़ूड-चेन मैकडॉनल्ड्स ने बताया कि वह सिर्फ़ हलाल मीट ही उपलब्ध कराता है। कई लोगों ने सवाल खड़ा किया कि जो ‘झटका’ मीट खाना चाहें, उनके लिए क्या? इसपर आगे बात करेंगे लेकिन पहले बात ‘वेज हलाल’ की। जी हाँ, अगर आप समझते हैं कि ‘हलाल’ का प्रयोग सिर्फ मीट इंडस्ट्री तक ही सिमित है तो आप शायद इस बात से अनजान हैं कि शाकाहारी उत्पादों को भी ‘हलाल’ सर्टिफिकेट दिया जाता है। इस सम्बन्ध में ऑपइंडिया ने ‘हलाल इंडिया’ से भी बातचीत की।

ताज़ा विवाद शुरू हुआ एक ट्वीट के साथ। एक महिला ने ट्वीट के माध्यम से इसे प्रकाश में लाया। उन्होंने एक भारतीय ग्रोसरी स्टोर से एक उत्पाद ख़रीदा, जिसपर ‘हलाल इंडिया’ का ठप्पा लगा हुआ था। इसका अर्थ यह कि ये प्रोडक्ट ‘हलाल सर्टिफाइड’ है। इसमें मुस्लिमों के लिए ऐसा कुछ भी नहीं है, जो ‘हराम’ हो। लेकिन, सवाल यह है कि एक मैदे के पैकेट पर ‘हलाल सर्टिफिकेट’ का क्या तुक? क्या सिर्फ़ माँस ही नहीं बल्कि शाकाहारी चीजें भी ‘हलाल सर्टिफाइड’ होती हैं? इसका उत्तर है- हाँ। कोई भी वस्तु, चाहे वो शाकाहार हो या माँसाहार- वो ‘हलाल सर्टिफाइड’ हो सकता है।

इस सम्बन्ध में हमने ‘हलाल इंडिया’ के उच्चाधिकारी से बात की। उन्होंने अपनी बातचीत में हमारे सवालों का जवाब दिया। उन्होंने ‘हलाल सर्टिफाइड मैदा’ को लेकर ‘हलाल इंडिया’ का पक्ष रखते हुए ऑपइंडिया को बताया कि ‘हलाल’ का अर्थ होता है ‘Permissible’, अर्थात वो चीज जिसका सेवन करने की अनुमति हो। उन्होंने कहा कि लोग ऐसा समझते हैं कि ‘हलाल’ सिर्फ़ जबह करने की प्रक्रिया से ही जुड़ी हुई चीज है जबकि यह एक ग़लतफ़हमी है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए जो भी चीज नुक़सानदेहक न हो, उसे ‘हलाल सर्टिफिकेट’ दिया जाता है। अर्थात, वो चीजें जिन्हें खाने-पीने से शरीर को कोई हानि न पहुँचे।

लेकिन, यहाँ सवाल यह है कि ऐसा कौन तय करता है? क्या आयुर्वेदिक नियमों के अनुसार ऐसा तय किया जाता है या फिर वैज्ञानिक आधार पर इसका मूल्यांकन होता है कि कौन सी वस्तु ‘हलाल सर्टिफाइड’ होनी चाहिए या नहीं अथवा उसके सेवन से शरीर को हानि होगी या नहीं। अपनी संस्था का पक्ष रखते हुए ‘हलाल इंडिया’ के अधिकारी ने बताया कि यह सब इस्लामिक क़ानून के हिसाब से तय किया जाता है। उन्होंने साफ़ कर दिया कि ‘हलाल’ एक अरबी शब्द है, जिससे यह साफ़ हो जाना चाहिए कि यहाँ चीजें ‘शरिया क़ानून’ के नियमों के आधार पर तय की जाती है। अर्थात, ‘इस्लामिक शरिया क़ानून’ तय करता है कि कौन सा खाद्य पदार्थ शरीर के लिए हानिकारक है और कौन सा नहीं।

‘हलाल इंडिया’ के अधिकारी ने आगे अपनी बात को समझाने के लिए ‘हल्दीराम’ का उदाहरण दिया। ‘हल्दीराम’ कम्पनी के प्रोडक्ट्स की बात करते हुए उन्होंने दावा किया कि कम्पनी क़रीब 600 उत्पाद बनाती है लेकिन लोगों को उसके कुछेक उत्पादों के बारे में ही जानकारी होती है। उन्होंने बताया कि ‘हल्दीराम’ के सारे उत्पाद ‘हलाल इंडिया’ से मान्यता प्राप्त है। जैसे, ‘हल्दीराम’ चिप्स बनाने के लिए आलू का उपयोग करती है। आलू खेतों में उगाया जाता है, वहाँ से वह फैक्ट्री में जाता है और उसमें तमाम तरह की अन्य सामग्रियाँ मिला कर चिप्स बनाई जाती है। फिर, इसमें ‘हलाल सर्टिफिकेशन’ का क्या किरदार?

‘हलाल इंडिया’ के अधिकारी ने कहा कि ऐसे चिप्स प्रोडक्ट्स में ‘कलर इंग्रेडिएंट्स’ भी मिलाए जाते हैं, जो इन्हें एक ख़ास रंग देते हैं। ये ‘कलर इंग्रेडिएंट्स’ सिंथेटिक हो सकते हैं या फिर ऐसी जगह से लाए गए हो सकते हैं, जो ‘हलाल’ के नियम-क़ायदों के अनुसार सही नहीं माने जाते हों। अधिकारी ने कहा कि फ्लेवर देने के लिए ‘फ्लेवरिंग एजेंट्स’ भी मिलाए जाते हैं, हो सकता है कि वो भी ऐसे ही हों। ‘हलाल इंडिया’ मानती है कि हिन्दुओं और मुस्लिमों, दोनों के लिए ही सूअर का माँस खाना मना है, इसीलिए जिस भी उत्पाद में जरा सा भी पॉर्क (सूअर का माँस) हो, उसे कभी भी ‘हलाल सर्टिफिकेट’ नहीं दिया जा सकता है।

संस्था का यह भी मानना है कि सूअर का माँस या उससे निकाले गए उत्पाद वगैरह किसी अन्य खाद्य पदार्थ को बनाने में इस्तेमाल किए जा सकते हैं, इसीलिए उन खाद्य पदार्थों को भी ‘हलाल’ का सर्टिफिकेट नहीं दिया जा सकता है। शाकाहारी खाद्य पदार्थों को ‘हलाल सर्टिफिकेट’ देने की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए ‘हलाल इंडिया’ के अधिकारी ने बताया कि उनके अधिकारी फैक्ट्रियों तक जाते हैं और ये भी पता करते हैं कि रॉ-मैटेरियल्स कहाँ से आते हैं। यहाँ हमारा सवाल था कि जो लोग पॉर्क खाते हैं, उनका क्या? भारत में विभिन्न धर्मों, समुदायों और जनजातियों के लोग रहते हैं और उनके अलग-अलग खान-पान के तरीके हैं।

उत्तर-पूर्व के बारे में बड़ा दावा करते हुए ‘हलाल इंडिया’ के अधिकारी ने बताया कि उत्तर-पूर्व के लोग साँप-बिच्छू और यहाँ तक कि कुत्ते को भी खा जाते हैं। उन्होंने बताया कि सप्तभगिनी राज्यों के लोगों के खान-पान को लेकर ‘हलाल इंडिया’ विचार नहीं करता क्योंकि ‘वो लोग कुछ भी खा लेते हैं’। उन्होंने कहा कि सूअर के माँस से तेल निकाल कर दवाओं में भी इस्तेमाल किया जाता है लेकिन उन्हें भी ‘हलाल’ का सर्टिफिकेट नहीं दिया जा सकता। आयुर्वेदिक उत्पादों के बारे में ‘हलाल इंडिया’ के अधिकारी ने बताया:

“पतंजलि भी अपने उत्पादों के लिए ‘हलाल सर्टिफिकेशन’ प्राप्त करने हेतु हमारे पास आया था लेकिन कुछ चीजों के कारण बाबा रामदेव की ‘पतंजलि’ को ये सर्टिफिकेट नहीं दिया जा सका। उसके प्रोडक्ट्स सही हैं लेकिन एक-दो प्रोडक्ट्स को लेकर हमें आपत्तियाँ थीं। इस्लामिक नियम-क़ायदें कहते हैं कि किसी भी जानवर के पेशाब अगर किसी उत्पाद में हो तो उसे ‘हलाल सर्टिफिकेट’ नहीं दिया जा सकता। पतंजलि के कुछ उत्पादों में गोमूत्र मिला हुआ था और इसीलिए ‘हलाल इंडिया’ ने उन्हें मान्यता नहीं दी। अगर वो लोग गोमूत्र वाले प्रोडक्ट्स की प्रोसेसिंग अलग फैक्ट्री में करें तो बाकि प्रोडक्ट्स को ‘हलाल सर्टिफिकेट’ दिया जा सकता है।”

साथ ही ‘हलाल इंडिया’ के अधिकारी ने यह भी बताया कि ऊँट के मूत्र वाले प्रोडक्ट्स को भी ‘हलाल सर्टिफिकट’ नहीं दिया जा सकता। फिर सवाल यह उठता है कि मुस्लिमों की भावनाओं का ख्याल रखने के लिए ही ‘हलाल इंडिया’ काम करता है? इस सवाल के जवाब में संस्था के अधिकारी ने बताया कि भारत में जैन धर्म के लोग भी रहते हैं और खान-पान को लेकर उनके भी कई नियम-क़ानून हैं। उन्होंने कहा कि जैन लोग प्याज-लहसुन नहीं खाते और इस चीज को ध्यान में रख कर भी खाद्य पदार्थों को सर्टिफाय करने के लिए अलग ‘रेगुलेशन अथॉरिटी’ है। बकौल अधिकारी, ऐसे ही ‘हलाल इंडिया’ मुस्लिमों के लिए करता है।

‘हलाल इंडिया’ सारी प्रक्रिया ‘शरिया बोर्ड’ की निगरानी में पूरी करता है। उसका कहना है कि अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ भी उसके द्वारा मान्यता प्राप्त खाद्य पदार्थों व उत्पादों को अपने-अपने देशों में मान्यता देती है। सिंगापुर, दुबई और सऊदी सहित कई देशों के साथ ‘हलाल इंडिया’ का MoU (करार) है। यह अपनेआप को भारत सरकार से सम्बद्ध संस्था बताता है।

‘हलाल इंडिया’ भले ही तमाम तरह के दावे करता हो कि वो ‘स्वास्थ्य’ को देख कर, खाद्य पदार्थों से शरीर को हानि होती है या नहीं ये देख कर या फिर अन्य नुक़सानदेहक कारणों को देख कर ‘हलाल’ की मान्यता देता है लेकिन उसके दावे एक जगह आते ही फुस्स हो जाते हैं। अगर कोई वस्तु हानिकारक नहीं हो लेकिन इस्लामिक नियम-क़ायदें उसे हराम मानते हों, तो क्या होगा? इसके सीधा उत्तर है- ‘हलाल इंडिया’ उसे मान्यता नहीं देगा। भले ही वो उत्पाद लाभदायक हो, अन्य धर्मों के लोग उसका इस्तेमाल करते हों लेकिन इस्लाम के अनुसार ही यह तय किया जाएगा कि वो ‘हलाल’ है या फिर ‘हराम’।

ऑपइंडिया ने पतंजलि से भी संपर्क किया। पतंजलि के दफ्तर में फोन करने पर एक महिला अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की कि वे ‘हलाल सर्टिफिकेट’ के लिए ‘हलाल इंडिया’ के पास गए थे। उन्होंने कहा कि उनके जिन भी प्रोडक्ट्स में गोमूत्र का इस्तेमाल होता है, उसपर साफ़-साफ़ लिख दिया जाता है। ऑपइंडिया ने इसी मुद्दे पर ‘डॉक्टर झटका’ से भी विस्तृत बातचीत की थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि व्यावहारिक बराबरी तो दूर की बात, सैद्धांतिक रूप से भी सरकार झटका माँस के साथ सौतेला व्यवहार करती है।

विश्व हिन्दू परिषद दिवाली पर अयोध्या जन्मभूमि परिसर में जलाना चाहती है दिए, कोर्ट ने नहीं दी अनुमति

विश्व हिंदू परिषद (VHP) की अगुवाई वाले संगठनों ने सोमवार (14 अक्टूबर) को माँग की कि उन्हें 27 अक्टूबर को अयोध्या में विवादित स्थल पर “हज़ारों दीपकों” की रोशनी करने और ‘पूजा’ करने की अनुमति दी जाए। विभागीय आयुक्त (डीसी), मनोज मिश्रा ने, बताया कि कथित तौर पर उन्हें अनुमति नहीं दी गई। 

अयोध्या और VHP के प्रवक्ता शरद शर्मा के एक प्रतिनिधिमंडल ने डीसी से मुलाक़ात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने तर्क़ दिया कि यह हिन्दुओं की “धार्मिक भावनाओं को आहत” करता है कि वे दीपावली के अवसर पर “जन्मभूमि परिसर” में दीपक नहीं जला सकते। हिन्दू धर्म में मान्यता ​​है कि लंका में रावण को हराने के बाद भगवान के अयोध्या लौटने के प्रतीक के रूप में पूरे भारत में दिवाली का त्योहार मनाया जाता है।

प्रतिनिधिमंडल में संत समिति अयोध्या के अध्यक्ष महंत कन्हैयादास; मणिरामदास चानवी के महंत कमलनयन दास; श्री रामचरित्रमण भवन के महंत अवधबिहारी दास; और स्थानीय भाजपा नेता वैश्य विनोद जायसवाल शामिल थे।

जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) अनुज कुमार झा ने बताया कि फ़िलहाल अयोध्या में 10 दिसंबर तक धारा 144 के तहत प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह प्रतिबंध 12 अक्टूबर से लागू होगा। दो-पृष्ठ के आधिकारिक आदेश के अनुसार, संबंधित प्राधिकरण की अनुमति के बिना अयोध्या पैरामीटर में ड्रोन और मानव रहित हवाई वाहनों की उड़ान की अनुमति नहीं है। अयोध्या की सीमा के भीतर नावों के ओवरलोडिंग पर भी प्रतिबंध है। दिवाली पर पटाखों के निर्माण और बिक्री की अनुमति संबंधित मजिस्ट्रेट से अनुमति प्राप्त करने के बाद ही दी जाएगी।

डीएम झा ने रविवार देर रात ट्विटर पर कहा, “यह आदेश अयोध्या की सुरक्षा और यहाँ आने वालों के लिए सरकार की चिंता का विषय है।”

दरअसल, दशहरे की हफ़्ते भर की छुट्टी के बाद सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले की सोमवार यानी आज से (14 अक्टूबर) अंतिम दौर की सुनवाई शुरू हो गई। इसके मद्देनज़र अयोध्या में धारा-144 लागू कर दी गई है और ज़िले को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। 10 दिसंबर तक ज़िले में धारा-144 लागू रहेगी। इसका मतलब है कि दिवाली, चेहल्लुम और कार्तिक मेले के दौरान भी निषेधाज्ञा लागू रहेगी। ज़िले में भारी संख्या में सुरक्षाबल की तैनाती का फ़ैसला भी लिया गया है। 

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पाँच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने मध्यस्थता प्रक्रिया नाकाम होने के बाद मामले में 6 अगस्त से प्रतिदिन की सुनवाई शुरू की थी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2014 के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट 14 अपीलों पर सुनवाई कर रहा है।

PMC बैंक घोटाला: दोबारा निकाह करने के लिए MD जॉय थॉमस बना जुनैद ख़ान, पुणे में 10 सम्पत्तियाँ

पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव (पीएमसी) बैंक स्कैम मामले में बैंक के एमडी जॉय थॉमस को 4 अक्टूबर को गिरफ़्तार किया गया था। अब पता चला है कि थॉमस और उसकी दूसरी पत्नी के नाम पुणे में 10 सम्पत्तियाँ हैं। दोनों ने इस्लाम अपनाकर दूसरी शादी की थी। इस्लाम अपना कर जॉय थॉमस ने अपना नाम जुनैद खान कर लिया था। पुणे के कोंढवा में थॉमस उर्फ़ जुनैद की 9 दुकानें हैं और एक फ्लैट है। मामले की जाँच कर रही इकोनॉमिक ऑफेंस विंग को पता चला है कि इन सभी सम्पत्तियों को 2012 में ख़रीदा गया था।

जाँच एजेंसियाँ पता लगाने में जुटी हैं कि इन सम्पत्तियों को ख़रीदने के लिए उसके पास पैसे कहाँ से आए। उसका ‘सोर्स ऑफ इनकम’ क्या था? अभी इस बात का भी पता लगाया जा रहा है कि पीएमसी बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर जॉय थॉमस उर्फ़ जुनैद ख़ान और उसकी दूसरी पत्नी की इन सम्पत्तियों में कितने प्रतिशत की हिस्सेदारी है। मियाँ-बीवी द्वारा संयुक्त रूप से स्वामित्व रखने के कारण पुलिस के लिए इन सम्पत्तियों को अटैच करना मुश्किल साबित हो रहा है।

पुलिस ने बताया कि जैसे ही पता चल जाए कि इन सम्पत्तियों को अवैध रुपयों से ख़रीदा गया है, इन्हें अटैच करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। थॉमस का एक फ्लैट ठाणे में भी है। इन सबके अलावा उसके पास एक कमर्शियल संपत्ति भी है, जो उसकी और उसकी पहली पत्नी के बेटे के नाम पर है। जॉय थॉमस ने दूसरी शादी जिस महिला से की, वह उसकी असिस्टेंट हुआ करती थीं। जॉय थॉमस ने पुणे में सम्पत्तियाँ जुनैद ख़ान के नाम से ही खरीदीं। उसकी पत्नी ने तलाक़ के लिए आवेदन दाखिल कर रखा है, जो कोर्ट में लंबित है।

प्रवर्तन निदेशालय ने पीएमसी बैंक की 2100 एकड़ की संपत्ति अटैच की है, जिनकी कुल क़ीमत 3,500 करोड़ रुपए आँकी गई है। पीएमसी बैंक स्कैम को लेकर जाँच चल रही है और इस सम्बन्ध में और कई राज़ खुलने बाकी है। यह भी पता चला है कि जॉय थॉमस ने जुनैद ख़ान बन कर अपनी दूसरी पत्नी से पूरे इस्लामिक रीति-रिवाज के साथ निकाह किया।

कॉन्ग्रेस को ‘NYAY’ योजना पर सलाह देने वाले भारतीय मूल के अभिजीत बनर्जी को मिला अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार

भारतीय मूल के अभिजीत बनर्जी, उनकी पत्नी एस्थर डुफ्लो और माइकल क्रेमर को साल 2019 के लिए अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिया गया है। यह पुरस्कार, वैश्विक स्तर पर ग़रीबी उन्मूलन के लिए किए गए कामों के लिए दिया गया है। नोबेल समिति के सोमवार (14 अक्टूबर) को जारी एक बयान में तीनों को 2019 का अर्थशास्त्र का नोबल पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई।

घोषणा के अनुसार, “इस साल के पुरस्कार विजेताओं का शोध वैश्विक स्तर पर ग़रीबी से लड़ने में हमारी क्षमता को बेहतर बनाता है। मात्र दो दशक में उनके नए प्रयोगधर्मी दृष्टिकोण ने विकास अर्थशास्त्र को पूरी तरह बदल दिया है। विकास अर्थशास्त्र वर्तमान में शोध का एक प्रमुख क्षेत्र है।” इससे पहले, 1998 में अमर्त्य सेन को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिया गया था।

2019 के चुनावों के दौरान, अभिजीत बनर्जी ने कहा था कि कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए को सत्ता में आना चाहिए, और NYAY योजना को नए करों के साथ लागू करना चाहिए। उन्होंने कहा था कि वर्तमान में भारत का राजकोषीय घाटा इतना बड़ा है कि यह योजना बिना करों को बढ़ाए नहीं टिक सकती। तत्कालीन कॉग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने ‘फ्री मनी’ योजना के बारे में अपनी छाती पीटते हुए कहा था कि इस कल्याणकारी योजना को लागू करने के लिए कोई नया कर नहीं लगाया जाएगा।

अभिजीत बनर्जी ने कहा था कि कई मौजूदा योजनाओं का कोई उद्देश्य नहीं है और किसी को नहीं पता कि उनके उद्देश्य क्या हैं, और उन्हें कॉन्ग्रेस के NYAY द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि उर्वरक, बिजली, पानी आदि के लिए प्रदान की जाने वाली सब्सिडी विकृति वाली सब्सिडी है, और उन्हें हटा देना चाहिए। उन्होंने कहा था कि ये सब्सिडी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी नहीं हैं।

2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान कॉन्ग्रेस ने अपने प्रमुख चुनावी वादे “न्याय योजना’ के लिए अभिजीत समेत दुनियाभर के अर्थशास्त्रियों से राय ली थी। इसके तहत तब कॉन्ग्रेस अध्यक्ष रहे राहुल गाँधी ने वादा किया था कि हर ग़रीब के खाते में साल में 72 हज़ार रुपए डाले जाएँगे, यानि 6 हजार रुपए/ महीना। यह योजना गरीबों को मिनिमम इनकम की गारंटी देगी। हालाँकि, वादा में की गई धनराशि राहुल गाँधी की हर रैली के साथ बदलती रही। कभी-कभी यह ₹72,000 वार्षिक हो जाता था, कभी-कभी यह 72,000 मासिक हो जाता था।

अभिजीत बनर्जी के बारे में बता दें कि वो अमेरिकी में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं। उन्होंने ने संयुक्त रूप से अब्दुल लतीफ़ ज़मील पॉवर्टी एक्शन लैब की स्थापना की थी। उनका जन्म 21 फ़रवरी 1961 में कोलकाता में हुआ था। इनकी माता निर्मला बनर्जी कोलकाता के सेंटर फॉर स्टडीज इन सोशल साइंसेज में प्रोफेसर थीं और पिता दीपक बनर्जी प्रेसीडेंसी कॉलेज में इकोनॉमिक्स की प्रोफेसर थे।

2015 में अभिजीत बनर्जी ने एस्थर डुफ्लो से शादी की। एस्थर इकोनॉमिक्स के नोबेल के लिए चुनी गई सबसे युवा और दूसरी महिला अर्थशास्त्री हैं। अर्थशास्त्र के लिए एलिनोर ऑस्टार्म को 2009 में भी नोबेल दिया गया था। वे इंडियाना विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थीं। उन्हें इकोनॉमिक गवर्नेंस के लिए सम्मानित किया गया था। एस्थर डुफ्लो ने कहा, “एक महिला के लिए सफल होना और सफलता के लिए पहचान बनाना संभव है। मुझे उम्मीद है कि इससे कई अन्य महिलाएँ अच्छा काम जारी रखने के लिए और पुरुष उन्हें उचित सम्मान देने के लिए प्रेरित होंगे।”

बालाकोट में फिर सक्रिय जैश आतंकी: सुरक्षाबलों को निशाना बनाने के लिए 40-50 फिदायीन ले रहे ट्रेनिंग

IAF की एयरस्ट्राइक के 6 महीने बाद पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी एक बार फिर से सक्रिय हो गए हैं। जानकारी के अनुसार जैश-ए-मोहम्मद के 40 से 50 आतंकवादी इस समय वहाँ ट्रेंनिंग ले रहे हैं, जिनमें फिदायीन हमलावर भी शामिल हैं। इन्हें सुरक्षाबलों को निशाना बनाने के लिए बालाकोट भेजा गया है। जिनके ट्रेनिंग कैंप पर टेक्निकल सर्विलांस के जरिए बराबर नजर रखी जा रही है।

उल्लेखनीय है कि भारतीय वायुसेना द्वारा एयरस्ट्राइक के बाद से बालाकोट में आतंकियों का ये कैंप बंद था। लेकिन अब तकरीबन 6 महीने बाद इसे खोल दिया गया। जिससे यहाँ आतंकी गतिविधियाँ दोबारा से चालू होने की खबर है।

बता दें कि पिछले महीने सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि पाकिस्तान के बालाकोट में जैश ए मोहम्मद के आतंकवादी फिर से सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने कहा था कि करीब 500 आतंकवादी इस समय घुसपैठ के इंतजार में हैं और पाक सेना उन्हें बॉर्डर पार से फायरिंग करके मदद करने की कोशिश कर रही है।

लेकिन इस दौरान उन्होंने ये भी आश्वासन दिया था कि किसी भी प्रकार की घुसपैठ को रोकने के लिए भारतीय सेना के जवान अलर्ट पर हैं।

सेनाध्यक्ष ने सरहद पर जारी तनाव के संदर्भ में कहा था कि हमारी उत्तर-पश्चिम की सीमाओं पर तनाव की स्थिति है। हर देश को अपनी सीमाओं को सुरक्षित करना होगा। उन्होंने इस दौरान कहा था। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि देश में किसी भी तरह से घुसपैठ न होने पाए। पाकिस्तान का नाम लिए बिना सेनाध्यक्ष ने बयान दिया था कि हमारा पश्चिमी पड़ोसी राज्य प्रायोजित आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है और जम्मू-कश्मीर में हिंसा फैलाने की कोशिश कर रहा है।

ग़ौरतलब है कि पुलवामा में आतंकी हमले के बाद 26 फरवरी को भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान स्थित बालाकोट में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी। भारतीय वायु सेना की इस एयरस्ट्राइक में जैश के ट्रेनिंग कैम्प ध्वस्त हो गए थे। वायु सेना की रिपोर्ट के अनुसार बालाकोट में उनके 80% निशाने सही लगे।

‘कमल’ का बटन दबाना मतलब पाकिस्तान पर ऑटोमैटिकली परमाणु बम गिराना: महाराष्ट्र में UP के डिप्टी सीएम

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने यहाँ एक चुनावी सभा में कहा कि भाजपा के पक्ष में वोट देने का मतलब ‘‘पाकिस्तान पर परमाणु बम गिराना’’ होगा। उन्होंने कहा, “अगर लोग कमल के चिन्ह को दबाते हैं, तो इसका मतलब होगा कि पाकिस्तान पर परमाणु बम ऑटोमैटिकली गिर गया है। कृपया बीजेपी को वोट दें और महाराष्ट्र राज्य में एक बार फिर से अपनी पार्टी को जीत दिलाएँ। मेरा मानना ​​है कि आगामी चुनावों में कमल जरूर खिलेगा।”

साथ ही उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान हटाने के बाद देश में होने वाले यह पहले चुनाव हैं।

महाराष्ट्र के ठाणे जिले में भायंदर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार नरेन्द्र मेहता की चुनावी सभा को संबोधित कर रहे मौर्य ने कहा, ‘‘कमल का बटन दबाने पर आप ना केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और नरेन्द्र मेहता को वोट देंगे बल्कि इसका मतलब यह होगा कि पाकिस्तान पर परमाणु बम गिरा है।’’

भाजपा नेता ने कहा कि पूरा विश्व इन दो राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव पर नजर गड़ाए हुए है क्योंकि यह भारतीयों की सच्ची देशभक्ति का संकेत देंगे। उन्होंने कहा, ‘‘अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान समाप्त किए जाने के बाद देश में यह पहला चुनाव हैं, इसलिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसके नतीजे लोगों की राष्ट्र भक्ति दिखाएँगे।’’

उन्होंने कहा कि सही निर्णय लेने के लिए लोगों का अपने मताधिकार का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है। मौर्य ने कहा, ‘‘आपका मत केवल नरेन्द्र मेहता के लिए नहीं होगा, बल्कि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री फडणवीस के नेतृत्व के लिए भी होगा।’’

केशव प्रसाद मौर्य ने वोट के लिए अपील करते हुए कहा कि भाजपा को वोट दें और पार्टी को फिर से महाराष्ट्र में जीत दिलाएँ। इसी बीच उन्होंने विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा, “देवी लक्ष्मी हथेली, साइकिल या घड़ी पर नहीं बैठतीं, बल्कि वह कमल पर बैठती हैं। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 कमल के फूल के कारण ही निरस्त हुआ। कमल विकास का प्रतीक है।” वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राहुल गाँधी पर तंज कसते हुए कहा कि महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार अभियान के लिए कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की मौजूदगी का मतलब है कि बीजेपी ‘100 प्रतिशत’ जीतने जा रही है।

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शिवसेना के साथ गठबंधन किया है। राज्य की 288 सीटों में से भाजपा 150 सीटों पर जबकि शिवसेना 125 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। राज्य में 21 अक्टूबर को मतदान होना है जबकि नतीजे 24 को आएँगे।

संन्यासी बनकर नहीं मोड़ सकते घरवालों से मुँह, कोर्ट ने बेटे को दिया परिवार को ₹10000 मासिक देने का आदेश

गुजरात के एक फैमिली कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि अगर कोई शख्स संन्यासी बनने का रास्ता चुनता है तो वह अपने माता-पिता की जिम्मेदारी से नहीं भाग सकता। एक मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अपना ये फैसला सुनाया। अदालत ने संन्यास ले चुके 27 वर्षीय धर्मेश गोल नामक शख्स को अपने माता-पिता को 10 हजार रुपए मासिक गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है और कहा है कि वो संन्यासी बनकर अपने माता पिता की जिम्मेदारियों से नहीं भाग सकता।

जानकारी के मुताबिक साल 2015 में नौकरी छोड़ने के बाद धर्मेश संन्यासी बना था। उसने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च से फार्मेसी की हुई है और वे छोटी उम्र में ही गोल इंटरनेशनल सोसॉयटी ऑफ कृष्णा कॉन्शसनेस की गतिविधियों से प्रभावित हुआ।

उसने समाज त्यागकर अक्षय पात्र, टच स्टोन और अन्नपूर्णा नाम की एनजीओ का संचालन शुरू किया और अपनी माँ भीखीबैन और पिता लीलाभाई से हर प्रकार का रिश्ता तोड़ लिया।

माँ-बाप ने अपने बेटे को इस दौरान मनाने की बहुत कोशिश की। लेकिन बेटे ने एक नहीं सुनी। थक-हारकर उन्होंने पुलिस से भी गुहार लगाई, लेकिन जब बेटा घर नहीं लौटा, तो माता-पिता ने उसके ख़िलाफ़ अहमदाबाद फैमिली कोर्ट में उन्हें 50 हजार रुपए का गुजारा भत्ता देने का मुकदमा दायर कर दिया।

याचिका में माता-पिता ने अपनी सभी परेशानियों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वे शारीरिक रूप से अक्षम हैं और उनके पास आय का भी कोई साधन नहीं है।

लड़के के पिता लीलाभाई ने बताया कि वो 4 वर्ष पूर्व नौकरी से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उन्होंने अपनी सारी जमा पूँजी बेटे को उच्च शिक्षा देने में खर्च कर दी। उन्हें अपने बच्चे से बड़ी उम्मीद थी कि वो बुढ़ापे में उनकी देखभाल करेगा, लेकिन उसने 4 साल पहले संन्यास ले लिया और उन्हें अकेला छोड़ दिया।

पिता का दावा है कि उन्होंने धर्मेश की शिक्षा पर 35 लाख रुपए खर्च किए थे। लेकिन पढ़ाई पूरी होने के बाद उसने 60,000 प्रति माह की नौकरी करने से मना कर दिया। पिता का कहना है कि उनका बेटा एक पुजारी के बहकावे में आकर एनजीओ चलाने लगा और अब वह एक लाख रुपए कमाता है।

हालाँकि, इस मामले में धर्मेश ने अपनी ओर से कोई दलील नहीं दी। इसलिए कोर्ट इस फैसले पर पहुँचा कि बेटे ने बिना किसी कारण के अपने माता-पिता को छोड़ा है। कोर्ट ने कहा कि परिजनों ने काफी मशक्कत के साथ बच्चे का पालन-पोषण करते हुए उसकी जरूरतों को पूरा किया।

अदालत ने आगे कहा, “न्याय का यह सिद्धांत है कि बेटे को कमाने के बाद अपने परिजनों की देखभाल करनी चाहिए।” कोर्ट ने धर्मेश की न्यूनतम आय 30 से 35 हजार रुपए मासिक आँकते हुए माता-पिता को 10 हजार रुपए मासिक गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया।

इसके अलावा कोर्ट ने ये भी कहा कि गुजारे भत्ते की रकम इतनी ज्यादा नहीं होनी चाहिए की बेटे के लिए सजा बन जाए। और इतनी कम भी नहीं होनी चाहिए कि माता-पिता अपना भरण-पोषण न कर पाएँ। हालाँकि, बता दें कि कोर्ट का फैसले आने के बाद भी परिजन इस भत्ते की रकम से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि वो इसके इजाफे के लिए हाई कोर्ट में अपील करेंगे।

गौ संरक्षण में अनियमितता बरतने में योगी सरकार ने DM समेत 5 बड़े अधिकारियों को किया निलंबित

गौ संरक्षण और संवर्धन को लेकर बेहद संवेदनशील उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने महराजगंज जिले में गौ संरक्षण में अनियमितता पाए जाने पर बड़ी कार्रवाई की है। मामले की जाँच के बाद योगी सरकार ने महराजगंज के डीएम और दो एसडीएम समेत 5 बड़े अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। गोवंश को लेकर होने वाले खर्चों का सही जवाब न दे पाने पर यह कार्रवाई की गई है। पशुधन विभाग के प्रमुख सचिव आर के तिवारी ने इसकी जानकारी दी है।

मुख्य सचिव आर के तिवारी ने बताया कि गौशाला प्रकरण की जाँच में पता चला कि गौशाला के अंदर ढाई हजार गोवंश होना चाहिए था, जबकि केवल 954 गोवंश वहाँ पाए गए। ये एक गंभीर अनियमितता है। उन्होंने बताया कि जाँच में ज़िला स्तरीय अधिकारियों की अनियमितता पाई गई है। गोवंश की संख्या को लेकर ज़िले के अधिकारी सही जवाब नहीं दे सके। गोवंश को लेकर होने वाले ख़र्चों का सही जवाब अधिकारी नहीं दे पाए, ये एक बड़ी वित्तीय अनियमितता है। इससे यह लगता है कि संख्या जानबूझकर अधिक बताई गई। संख्या कम होने के बावजूद यहाँ पर चारा या अन्य व्यय में कोई कमी नहीं थी।

ख़बर के अनुसार, यहाँ पर अभिलेख भी सही नहीं पाया गया। पशुपालन विभाग का यहाँ 500 एकड़ ज़मीन पर कब्जा था जबकि समिति ने ग़ैर क़ानूनी ढंग से 380 एकड़ ज़मीन निजी व्यक्ति को लीज़ पर दे दी। इसकी ना किसी से अनुमति ली गई ना ही कोई विधिक प्रक्रिया अपनाई गई। यह भी एक गंभीर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है।

मुख्य सचिव ने बताया कि इस मामले में ज़िलाधिकारी महराजगंज अमरनाथ उपाध्याय, तत्कालीन एसडीएम देवेंद्र कुमार, वर्तमान एसडीएम सत्यम मिश्र के अलावा मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी राजीव उपाध्याय और पशु चिकित्सा अधिकारी वीके मौर्य तल्काल निलंबित किया गया है। गोवंश मामले में कार्रवाई के बाद महराजगंज जिले में नई तैनाती की गई है। उज्जवल कुमार को महराजगंज का ज़िलाधिकारी बनाया गया है।