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युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लिए मुहम्मद मंसूर ने जिहाद की अरबी किताब का मलयालम में किया अनुवाद

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को कोंडोट्टी मूल के एक ऐसे शख़्स के बार में पता चला है, जिसने जिहाद पर मलयालम में एक अरबी पुस्तक का अनुवाद किया था। इसका इस्तेमाल इस्लामिक स्टेट (IS) के ऑपरेटर्स द्वारा केरल में युवाओं का ब्रेनवॉश करने के लिए किया गया था। 

प्रमुख जाँच एजेंसी को पता चला है कि 34 वर्षीय मुहम्मद मंसूर उर्फ़ ​​अबू हनिया अल कोंडोट्टी, मलप्पुरम का निवासी है, उसने जिहाद पर 14वीं शताब्दी के विद्वान इब्न नुबा द्वारा लिखित पुस्तक का मलयालम में अनुवाद किया था। सीरिया जाने से पहले वो अपने परिवार के साथ अक्टूबर 2015 तक बहरीन में काम कर रहा था। गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, 2016 में मंसूर ने सीरिया में IS के लिए काम करते हुए किताब का अनुवाद किया।

अधिकारी के अनुसार, “जिहाद की पुस्तक केरल में कमज़ोर युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लिए IS के संचालकों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला मुख्य दस्तावेज़ था। पीडीएफ प्रारूप में पुस्तक का उपयोग ऑनलाइन प्रचार के लिए किया गया था। NIA ने राज्य में दर्ज IS से जुड़े अन्य मामलों में गिरफ़्तार IS के गुर्गों से हार्ड कॉपी के साथ-साथ सॉफ्ट कॉपी भी बरामद की।”

ख़बर के अनुसार, मुहम्मद मंसूर का पता लगाने के लिए एक इंटरपोल ब्लू-कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था; मंसूर निट्टूरवेटिल उर्फ़ ​​अबू हज़र; शहलाद उर्फ़ ​​अबू यासर, कन्नूर; कोज़ंडी, कोझीकोड का फ़ाज़िद हम्सा उर्फ़ ​​अबू मुहम्मद; पेरुम्बावूर का रहमान उर्फ़ ​​अबू हसन; और मलप्पुरम के वांडूर का मुकादिस पूलट। ये सभी वांडूर IS मामले के आरोपित हैं, जिन्होंने 2017 में वांडूर में एक गुप्त बैठक आयोजित की थी। NIA, कोझीकोड के कोडीवली के शिबू निहार वी के उर्फ़ ​​अबू मरियम को गिरफ़्तार कर सकती है, जो कई प्रयासों के बावजूद सीरिया नहीं पहुँच सका था।

हाल ही में, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने कोच्चि में अदालत में एक आरोप पत्र दाखिल किया था। जाँच में पता चला कि आरोपित व्यक्ति बहरीन के अल अंसार केंद्र में आयोजित कक्षाओं में भाग लेता था, जिसके लिंक केरल के सलाफी स्कॉलर से भी थे।

2014 में IS के गठन के बाद, कन्नूर का निवासी हम्ज़ा, वालपत्तनम IS मामले का आरोपित था, जिसने समूह को सीरिया की ओर पलायन करके IS में शामिल होने की सलाह दी थी।

राहुल गाँधी की रैली में नहीं पहुँचे मिलिंद देवड़ा, संजय निरूपम ने पूछा- निकम्मा क्यों नहीं आया

महाराष्ट्र में एक तरफ जहाँ कॉन्ग्रेस सत्ता में वापसी के लिए जोर लगा रही है, वहीं पार्टी के भीतर मचा घमासान उसके लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। पूर्व मुंबई कॉन्ग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम बागी तेवर अपनाए हुए हैं। अब उन्होंने ट्वीट के जरिए एक बार फिर कॉन्ग्रेस के लिए फजीहत की स्थिति पैदा कर दी है। इस ट्वीट में निरुपम ने लिखा कि राहुल गाँधी की रैलियों में वह निकम्मा क्यों अनुपस्थित था? हालाँकि उन्होंने ट्वीट में किसी नेता के नाम का जिक्र नहीं किया है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि संजय के इस ट्वीट का सीधा इशारा मिलिंद देवड़ा की तरफ था।

दरअसल संजय निरूपम ने राहुल गाँधी की रैली में न पहुँचने का कारण बताते हुए एक ट्वीट किया। इस दौरान देवड़ा को निशाना बनाना नहीं भूले। संजय निरुपम ने अपने ट्वीट में लिखा, “राहुल गाँधी की मुंबई में हुई रैली के दौरान मेरी गैर हाजिरी को लेकर जो अफवाहें फैलाई जा रही हैं और जो संदेह किया जा रहा है वह बेमतलब है। जरूरी पारिवारिक समारोह की वजह से मैं पूरे दिन व्यस्त था और इसकी जानकारी मैंने राहुल गाँधी को पहले ही दे दी थी। वो (राहुल गाँधी) मेरे नेता हैं और मेरे लिए हमेशा रहेंगे। लेकिन निकम्मा क्यों अनुपस्थित था?”

गौरतलब है कि संजय निरुपम और मिलंद देवड़ा दोनों नेताओं के बीच पिछले कुछ दिनों से ठीक नहीं बन रही है और दोनों की अनबन लगातार खुलकर सामने आ रही है। संजय निरूपम हाल ही में हुई मुंबई में राहुल गाँधी की रैली में उपस्थित नहीं हुए थे। संजय निरूपम ने पिछले दिनों प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कॉन्ग्रेस पार्टी के कुछ नेताओं पर सवाल खड़े कर दिए थे। संजय निरूपम टिकट बँटवारे को लेकर काफी नाराज थे और आरोप लगा रहे थे कि उनकी मर्जी के किसी भी उम्मीदवार को टिकट नहीं सौंपा गया है। संजय निरूपम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कॉन्ग्रेस नेताओं पर सवाल खड़े किए थे और साथ ही पार्टी छोड़ने तक की बात कह दी थी। उन्होंने विधानसभा चुनाव में प्रचार ना करने की बात कही थी।

127 आतंकियों का कबूलनामा: ISIS में शामिल होने के लिए जाकिर नाइक के भाषणों ने उकसाया

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी द्वारा आयोजित एटीएस प्रमुखों की बैठक में आज एनआईए ने कई चौंकाने वाला खुलासे किए। इसमें उन्होंने जाकिर नाइक से जुड़े तथ्य के बारे में भी खुलासा खिया। उन्होंने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पकड़े गए ISIS के 127 संदिग्ध आतंकियों में से कई लोगों ने इस बात को स्वीकारा है कि वे सभी कट्टरपंथी इस्लामिक स्पीकर जाकिर नाइक के भाषणों से प्रेरित हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार NIA के निदेशक ने बताया कि आईएसआईएस को ज्वॉइन करने वाले आतंकी और उनके सहानुभूति रखने वाला हर शख्स जाकिर नाइक के भाषणों से प्रेरित था।

इसके बाद योगेश चंद्र मोदी ने पुलिस अधिकारियों के समक्ष देश में बढ़ते आतंकी खतरे को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि बांग्लादेशी आतंकी संगठन जमात उल मुजाहिद्दीन अपने पैर बिहार, महाराष्ट्र, केरल और कर्नाटक में पसार रहा है।

वहीं, बता दें कि आईजी आलोक मित्तल ने बैठक को संबोधित करते हुए बताया कि अब तक आईएसआईएस से संबंधित मामलों में 127 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। जिनमें तमिलनाडु के 33, उत्तरप्रदेश के 19, केरल के 17 और तेलंगाना के 14 लोग शामिल हैं।

उनके अनुसार तो तमिलनाडु और केरल के तीन मामलों में, आरोपितों ने इस बात को स्वीकारा कि उन्हें इस राह पर चलने के लिए जहरान हाशिम की वीडियो ने उकसाया। जहरान वही शक्स है जो श्रीलंका में ईस्टर पर हुए धमाकों का मास्टरमाइंड है। 

यहाँ जाकिर नाइक के बारे में बता दें कि जाकिर नाईक भारत में नफरत फैलाने वाले अपने भाषणों से युवाओं को आतंकवादी गतिविधयों के लिए उकसाने और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों का आरोपित है। जिसपर भारत में एनआईए जाँच चल रही है। जाँच एजेंसी ने आतंकरोधी कानून के तहत 2016 में सर्वप्रथनम नाईक के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था। इसके अलावा बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुए हमले को लेकर भी नाईक पर जाँच चल रही है।

नसीरुद्दीन ने कश्मीर दौरे के बाद भारत को मुस्लिमों के लिए बताया बेहतर देश, कहा- नहीं हुआ मानवाधिकार उल्लंघन

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद वहाँ के हालातों का जायजा लेने के लिए सूफी डेलिगेशन जम्मू कश्मीर पहुँचा हुआ है। डेलीगेशन के साथ गए नसीरुद्दीन चिश्ती का बड़ा बयान सामने आया है। बता दें कि अजमेर शरीफ दरगाह के नसीरुद्दीन चिश्ती की अध्यक्षता में अखिल भारतीय सूफी सज्जादानशी परिषद का प्रतिनिधिमंडल तीन दिवसीय यात्रा पर था।

चिश्ती ने कहा, “भारत मुस्लिमों के रहने के लिए सबसे बढ़िया देश है। पाकिस्तानी पीएम इमरान खान द्वारा जेहाद की बात कहना बेहद शर्मनाक है। अगर पाकिस्तान की दिलचस्पी है तो उसे चीन और फिलिस्तीन में जाकर लड़ाई लड़ना चाहिए। हमें पाकिस्तान के मशविरे की जरुरत नहीं है।”

इसके साथ ही चिश्ती ने कहा कि कश्मीर में किसी भी तरह के मानव अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया गया है। नसीरूद्दीन चिश्ती ने कहा, “हम यहाँ स्थानीय लोगों से मिले और किसी भी व्यक्ति ने मानव अधिकारों का उल्लंघन होने की बात नहीं कही। पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा झूठा था। हाँ, यहाँ मूलभूत सेवाएँ जैसे फोन पर प्रतिबंध लगा था। लेकिन जब बड़े कदम उठाए जाते हैं तो इस तरह के निर्देश जारी किए जाते हैं।”

बता दें कि कश्मीर घाटी में सोमवार (अक्टूबर 14, 2019) को सभी नेटवर्क की पोस्टपेड मोबाइल सेवा बहाल कर दी गई। पाबंदियों की वजह से बीते 72 दिन से यह सेवा ठप पड़ी थी। सोमवार को दोपहर तक करीब 40 लाख मोबाइल फोन पर पोस्टपेड सेवा काम करने लगी। उल्लेखनीय है कि जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा केंद्र सरकार द्वारा खत्म किए जाने और प्रदेश को दो केंद्र शासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित करने के बाद पाँच अगस्त से यहाँ पाबंदियाँ लगा दी गई थी।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के बाद से ही लगातार पाकिस्तान दुनिया के सामने यह झूठ फैलाने की कोशिश कर रहा है कि कश्मीर के लोगों के ऊपर भारत में अत्याचार हो रहा है।

कोर्ट में स्वामी को देख भड़के मुस्लिम पक्षकार, जज से कहा- सिर्फ़ मेरे से सवाल पूछते हैं, हिन्दू पक्ष से नहीं

राम मंदिर पर सोमवार (अक्टूबर 14, 2019) को सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्षकार राजीव धवन भड़क गए। जब उन्होंने वकीलों वाली जगह पर सुब्रह्मण्यम स्वामी को देखा, तब उन्होंने नाराजगी जताई। धवन ने अदालत से कहा कि एक व्यक्ति को तवज्जो दी जा रही है और ये सही नहीं है। सीजेआई गोगोई ने धवन को कहा कि वो इस मामले को देखेंगे। राजीव धवन ने दलीलों की शुरुआत करते हुए कहा कि रीती-रिवाज कोई माइंडगेम नहीं है। उन्होंने दावा किया कि हिन्दू पक्ष ने जिन भी अदालती फ़ैसलों को आधार बनाया है, वे सभी तथ्यात्मक आधार पर सही नहीं हैं।

उन्होंने बड़ा दावा करते हुए सुप्रीम कोर्ट में कहा कि एएसआई को भी इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि इस स्थल पर मंदिर को तबाह किया गया था। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष हमेशा से इस जगह का स्वामित्व रखता आया है और हिन्दुओं ने काफ़ी बाद में इसे अपना बताना शुरू किया। हालाँकि, उन्होंने स्वीकार किया कि हिन्दुओं के पास इस जगह का अधिकार नहीं था लेकिन वे यहाँ प्रार्थना कर सकते थे, उन्हें प्रार्थना का अधिकार था। जस्टिस बोड़बे ने धवन से पूछा कि अगर हिन्दुओं को यहाँ प्रार्थना का अधिकार है तब तो मुस्लिम पक्ष के एकाधिकार वाली माँग ख़त्म नहीं हो जाती?

मुस्लिम पक्षकार राजीव धवन ने जस्टिस बोड़बे के सवाल का जवाब देते हुए एक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अगर उनके स्वामित्व वाली ज़मीन पर कोई हाथ धोने का आग्रह करता है और वह इजाजत दे देते हैं तो इसका अर्थ ये नहीं कि ये ज़मीन उनकी ही हो जाए। हालाँकि, जस्टिस बोड़बे के सवालों से राजीव धवन नाराज़ भी हो गए। उन्होंने कहा- “सुनवाई के दौरान मैंने इस बात पर ध्यान दिया है कि जजों के सारे सवाल मुझसे ही पूछे जाते हैं। हिन्दू पक्ष से कोई सवाल नहीं किया जाता।” हिन्दू पक्ष ने इस पर आपत्ति जताई।

सुनवाई के दौरान हिन्दू पक्ष द्वारा समय-समय पर क़ुरान की आयतों का जिक्र किए जाने पर आपत्ति जताते हुए राजीव धवन ने कहा कि वो लोग क़ुरान के एक्सपर्ट नहीं हैं। धवन ने कहा कि हिन्दू पक्ष के वकील क़ुरान में से कुछ भी उठा कर उसका जिक्र कर देते हैं जबकि इस्लामिक नियम-क़ानून का दायरा इससे भी बहुत अधिक है।

जमात के आतंकी बिहार, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में हुए सक्रिय, 125 की लिस्ट तैयार: NIA

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आज सोमवार को एटीएस के प्रमुखों के साथ बैठक करते हुए आतंकी गतिविधियों से संबंधित कई अहम खुलासे किए। इस दौरान कॉन्फ्रेंस में, राज्य गृह मंत्री जी कृष्णन रेड्डी राष्ट्रीय सलाहकार अजित डोभाल, एनआईए के आईजी आलोक मित्तल, और डीजी योगेश चंद्र मोदी जैसी हस्तियाँ भी मौजूद रहे। बैठक में बताया गया कि बांग्लादेशी कट्टरपंथियों का आतंकी संगठन जेएमबी देश में सक्रिय है और बांग्लादेश का जेएमबी आतंकी नेटवर्क भारत को दहलाने के लिए दक्षिण भारत को बेस बना रहा है।

इस बैठक को संबोधित करते हुए एनआईए के डीजी योगेश चंद्र मोदी ने बताया कि उन्हें ज्ञात हुआ है कि बांग्लादेशी आतंकी संगठन जमात उल मुजाहिद्दीन ने बिहार, महाराष्ट्र, केरल और कर्नाटक में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। जिसके संबंध में एनआईए ने 125 लोगों की लिस्ट तैयार करके संबंधित राज्यों से शेयर कर दी है।

वहीं, एनआईए के आईजी आलोक मित्तल ने इस संबंध में बताया कि 2014 से 2018 के बीच जेएमबी ने बेंगलुरु में 20 से 22 ठिकाने स्थापित किए और दक्षिण भारत में अपने पैर पसारने की कोशिश की। उन्होंने कहा, ‘‘जेएमबी ने कर्नाटक सीमा के पास कृष्णागिरी हिल्स में ‘रॉकेट लॉन्चर्स’ का परीक्षण भी किया।’’ आईजी ने सूचित किया कि म्यांमार में रोहिंग्याओं की हालत के बदले जेएमबी बौद्ध मंदिरों पर भी हमला करना चाहता था।

इसके अलावा उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में टेरर फंडिंग के अभियुक्त संगठनों के प्रमुखों और शीर्ष अलगाववादी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है, साथ ही उनके ख़िलाफ़ आरोपपत्र दाखिल कर दिया गया है। उनके मुताबिक इन सभी गिरफ्तार लोगों में अब तक किसी को भी जमानत नहीं मिली है। इन्हें प्रेषण और हवाला हस्तांतरण के माध्यम से पाकिस्तान उच्चायोग द्वारा फंड किया जा रहा था।

उन्होंने कहा कि सीमा पार से लगातार कोशिश की जा रही है कि पंजाब में दोबारा आतंकी गतिविधियों को शुरू किया जा सके। अभी हाल ही में जन हानि के मामलो में एजेंसियों ने 16 लोग गिरफ्तार किए हैं, जिनकी जाँच में पता चला कि खालिस्तानी दोबारा सक्रिय हो रहे हैं। उन्हें यूके, इटली, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया द्वारा फंड दिया जा रहा है।

इसके बाद आईजी आलोक मित्तल ने बताया कि अब तक आईएसआईएस से संबंधित मामलों में 127 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। जिनमें तमिलनाडु के 33, उत्तरप्रदेश के 19, केरल के 17 और तेलंगाना के 14 लोग शामिल हैं।

उनकी मानें तो तमिलनाडु और केरल के तीन मामलों में, आरोपितों ने इस बात को स्वीकारा कि उन्हें इस राह पर चलने के लिए जहरान हाशिम के वीडियो ने उकसाया। जहरान वही शक्स है जो श्रीलंका में ईस्टर पर हुए धमाकों का मास्टरमाइंड है।

उल्लेखनीय है कि इस सम्मेलन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी एटीएस प्रमुखों को संबोधित किया। इस बैठक में आतंकवाद के खिलाफ विस्तृत कार्य योजना बनाने और विभिन्न राज्यों की एटीएस के बीच सहयोग बढ़ाने पर बातचीत हो रही है। क्योंकि बता दें जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद से ही राज्य में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों की तरफ से हमले करने का खतरा बढ़ गया है।

कॉन्ग्रेस की महिला मंत्री ने कहा- महिला ठीक हो तो गुंडा-मवाली पुरुष भी गलती नहीं करता

अपने विवादित बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाली मध्य प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी ने हनी ट्रैप मामले में अजीबोगरीब बयान दिया है। हनीट्रैप मामले में शामिल महिलाओं पर हुई कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी महिलाओं की तरफदारी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक महिला गलती नहीं करती कोई पुरुष गलती नहीं कर सकता। चाहे वह कोई गुंडा या मवाली ही क्यों न हो।

इस तरह का बयान देकर वो एक तरह से पुरुषों का समर्थन करती नज़र आईं। रविवार (अक्टूबर 13, 2019) को इंदौर में इमरती देवी ने कहा कि ऐसे मामलों में महिलाओं की गलती होती है और पुरुषों को दोषी मान लिया जाता है। मैं ऐसी महिलाओं की तरफदारी नहीं करती। इस मामले में पुरुषों पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, बल्कि महिलाओं के खिलाफ ही कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि अक्सर इन मामलों में महिलाओं की गलती होती है, लेकिन तब भी पुरुषों को ही दोषी माना जाता है। उन्होंने कहा कि अगर पुरुष को गलत तरीके से फँसाया जाए तो हमें ऐसी महिलाओं की तरफदारी नहीं करनी चाहिए।

बता दें कि मध्य प्रदेश के हनी ट्रैप कांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। इस मामले की जाँच में एक के बाद एक परतें उघड़ती जा रही हैं और जो तस्वीर उभर रही है, वह और ज्यादा चौंकाने वाली है। इस मामले में पकड़ी गईं महिलाओं के मोबाइल, लैपटॉप और पेन ड्राइव सहित बड़ी संख्या में वीडियो क्लिपिंग मिली हैं।

उल्लेखनीय है कि इमरती देवी इससे पहले भी कई विवादित बयान दे चुकी हैं। अभी कुछ दिन पहले महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी ने कहा था कि डॉक्टर्स के ट्रांसफर में पैसे लगते हैं इसलिए उनका ट्रांसफर न कराकर सस्पेंड कर देते हैं। इससे पहले शिवपुरी के एक स्कूल में शौचालय के अंदर बच्चों के लिए खाना पकाए जाने के मामले में उन्होंने कहा था कि इसमें समस्या क्या है। शौचालय की सीट और चूल्हे के बीच पार्टिशन है।

पलटू राजन: कॉन्ग्रेस की ‘न्याय योजना’ का किया था समर्थन, अब कह रहे- वेलफेयर पर ख़र्च न करे मोदी सरकार

भारतीय रिजर्व बैंक के गर्वनर रहे रघुराम राजन का नया बयान आया है, जो उनके ही पुराने बयान के उलट है। यूपीए काल में आरबीआई के गवर्नर रहे रघुराम राजन ने कहा है कि लोकतंत्र में एक ही व्यक्ति द्वारा सारे फ़ैसले लेना घातक सिद्ध हो सकता है। साथ ही उन्होंने चेताया कि सरकार जन-कल्याणकारी योजनाओं पर कुछ ज्यादा ही रुपए ख़र्च कर रही है। रघुराम राजन ने कहा कि भारत का वित्तीय घाटा एक ऐसी स्थिति की तरफ इशारा कर रहा है, जो भविष्य में भयावह हो सकती है। अब जरा राजन के ही पुराने बयान को याद करते हैं।

आपको याद होगा कि लोकसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस ने ‘न्याय योजना’ का बढ़-चढ़ कर प्रचार-प्रसार किया था और पार्टी को उम्मीद थी कि लोग इस योजना के लागू होने की आस में उसे वोट देंगे। कॉन्ग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गाँधी ने घोषणा की थी कि इस योजना के तहत ग़रीब परिवारों को ‘न्यूनतम आमदनी’ के रूप में प्रतिवर्ष 72,000 रुपए दिए जाएँगे। साथ ही पार्टी ने यह भी कहा था कि इसके लिए किसी अन्य सरकारी योजना का आवंटन कम नहीं किया जाएगा। इसका अर्थ था कि कॉन्ग्रेस की सरकार बनने पर 7 लाख करोड़ रुपए सिर्फ़ सब्सिडी पर ही ख़र्च किए जाते।

खैर, इस योजना में कई लोच थे और इसके विभिन्न पहलुओं पर चर्चाएँ हुई थीं। कॉन्ग्रेस और उसके साथी दलों की बड़ी हार के साथ योजना पर चर्चा भी खत्म हो गई। अभी सरकारी ख़र्चों पर नियंत्रण के लिए जन-कल्याणकारी योजनाओं पर ख़र्च कम करने की बात करने वाले राजन ने तब 3.6 लाख करोड़ रुपए के बजट वाली ‘न्याय योजना’ का न सिर्फ़ समर्थन किया था, बल्कि इसे कारगर भी बताया था। मनमोहन काल में मुख्य वित्तीय सलाहकार रहे राजन ने 2019 लोकसभा चुनाव से पहले कहा था कि ‘न्याय योजना’ के लिए कॉन्ग्रेस ने उनसे विचार-विमर्श भी किया था।

सवाल यह है कि अगर चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस द्वारा प्रस्तावित इतनी भारी बजट वाली योजना जायज थी तो चुनाव के बाद मोदी सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाएँ ‘ज्यादा ख़र्चीली’ कैसे हो गईं? उत्साहित रघुराम राजन ने तो कॉन्ग्रेस की ‘मिनिमम इनकम गारंटी योजना’ को क्रन्तिकारी तक बता दिया था। अपने ताज़ा बयान में रघुराम राजन ने मोदी सरकार के 2 बड़े आर्थिक सुधार वाले क़दम नोटबंदी और जीएसटी की भी आलोचना की। उनका कहना है कि इन दोनों फ़ैसलों से भारतीय अर्थव्यवस्था की कमर टूट गई।

सोशल मीडिया पर भी लोगों ने रघुराम राजन को उनके पुराने बयान की याद दिलाई, जब उन्होंने कॉन्ग्रेस की ‘न्याय योजना’ की तारीफ़ की थी और अब अब सवाल खड़े कर रहे हैं कि मोदी सरकार जनता पर इतने रुपए क्यों ख़र्च कर रही है?

झाबुआ में जीते तो बदल देंगे मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री: कैलाश विजयवर्गीय

मध्य प्रदेश की झाबुआ विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियॉं तेज है। भाजपा महासचिव और पूर्ववर्ती शिवराज सिंह चौहान की सरकार में मंत्री रहे कैलाश विजयवर्गीय ने उपचुनाव को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि झाबुआ से यदि भाजपा उम्मीदवार जीता तो प्रदेश का मुख्यमंत्री बदल जाएगा।

उन्होंने कहा, “यदि जनता झाबुआ उपचुनाव में हमें जीत दिलाती है तो मैं राज्य का मुख्यमंत्री बदल देने की गारंटी देता हूॅं।” वे रविवार (13 अक्टूबर) को झाबुआ में पार्टी प्रत्याशी भानु भुरिया के पक्ष में रैली को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह उपचुनाव प्रदेश की राजनीति के लिए अहम है, क्योंकि यह राज्य की कमलनाथ सरकार का भविष्य तय करेगा। राज्य की कमलनाथ सरकार की तकदीर का फैसला करने का जिम्मा यहाँ के मतदाताओं के हाथों में है।

बीते साल हुए विधानसभा चुनाव में इस सीट से जीएस डामोर जीते थे। इसके बाद हुए आम चुनावों में वे रतलाम-झाबुआ सीट से सांसद चुन लिए गए। इसी वजह से यहॉं उपचुनाव हो रहा है।

रैली को संबोधित करते हुए विजयवर्गीय ने कहा कि यहाँ की जनता अगर भाजपा को जीत दिलाती है तो वो राज्य की कमलनाथ सरकार को हटाने का ज़िम्मा लेते हैं। उन्होंने कमलनाथ सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि उसने अपने वादे को नहीं निभाया और किसानों का कर्ज़ माफ़ नहीं किया। राहुल गाँधी के बयान को याद दिलाते हुए भाजपा नेता ने कहा कि उन्होंने 10 दिनों में दो लाख रुपए तक की कर्ज़माफ़ी का वादा किया था और ऐसा न होने पर मुख्यमंत्री को बदलने की बात कही थी।

किसानों की कर्ज़माफ़ी अभी तक नहीं हुई है, यह बात ख़ुद उन्हीं की पार्टी के ज्योतिरादित्य सिंधिया और कॉन्ग्रेसी नेता भी कह रहे हैं। इससे पहले जून में मध्य प्रदेश में किसान रैली को संबोधित करते हुए भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने ख़ुलासा करते हुए कहा था कि कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया और सुरेश पचौरी ने उनसे कमलनाथ सरकार को गिराने के लिए सम्पर्क किया था।

रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था,

“दिग्विजय सिंह और उनके दो विधायकों ने मुझे संपर्क किया और कहा कैलाश जी, अगर आप चाहें तो सरकार गिराई जा सकती है। इस पर मैंने जवाब दिया कि मैं सरकार गिराना नहीं चाहता। इसके बाद सिंधिया जी के लोगों ने मुझसे संपर्क किया कि वो प्रदेश में जालसाज़ कमलनाथ की सरकार गिराना चाहते हैं। उन लोगों ने कहा कि हम आपके साथ हैं। फिर, सुरेश पचौरी के लोगों ने मुझसे संपर्क किया कि वो सरकार को गिराना चाहते हैं।”

बलिदानी जवानों के 100 बच्चों का गौतम गंभीर ने उठाया ज़िम्मा, कहा- बेटियों को बनाएँगे सशक्त

क्रिकेटर से राजनेता बने गौतम गंभीर ने घोषणा की है कि उनका एनजीओ जीजी फाउंडेशन देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले बहादुरों के 100 बच्चों की देखभाल करेगा। गंभीर ने ट्वीट कर बताया, “इन बच्चों के चेहरे पर मुस्कुराहट लाना मेरे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। जीजी फाउंडेशन को बधाई! हम बलिदानी जवानों के 100 बच्चों की देखभाल करेंगे, इस बात पर हमें गर्व है। उनके पिता ने देश के लिए अपना बलिदान दे दिया और अब हमारी बारी है।”

जीजी फाउंडेशन का उद्देश्य बलिदानी जवानों के बच्चों का सहारा बनना है और उन्हें पोस्ट-ट्रॉमा काउंसलिंग प्रदान करना है। साथ ही बच्चों की शिक्षा का 100 प्रतिशत ख़र्च उठाना है। एनजीओ का लक्ष्य किशोर लड़कियों (15-18 वर्ष) का सामाजिक-आर्थिक स्तर पर विकास कर उन्हें सशक्त बनाना है। इस लक्ष्य की पूर्ति उनके चहुमुखी विकास के ज़रिए होगी। इसमें उन्हें शिक्षित बनाने से लेकर पोषित आहार उपलब्ध कराना शामिल है।

गौतम गंभीर इस साल हुए लोकसभा चुनाव में जीत हासिल कर पहली बार लोकसभा पहुॅंचे हैं। भाजपा के टिकट पर उन्होंने पूर्वी दिल्ली सीट से तीन लाख से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी। सलामी बल्लेबाज़ रहे 37 वर्षीय गंभीर ने कॉन्ग्रेस के अरविंदर सिंह लवली और AAP की आतिशी मार्लेना को पटखनी दी थी।

गंभीर ने भारत के लिए 147 वनडे, 58 टेस्ट मैच और 37 टी-20 मैच खेले। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 9,000 से अधिक रन उनके नाम है। वे 2011 विश्व कप फाइनल मैच में श्रीलंका के ख़िलाफ़ सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी थे और 28 साल के अंतराल के बाद भारत को ट्रॉफी दिलाने में 97 रनों की अहम पारी खेली थी। देश से जुड़े मसलों पर अपने दो टूक ​विचारों के लिए भी वे जाने जाते हैं।