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शरद यादव के मंच पर आने से पहले कार्यकर्ताओं ने छोड़ा सभागार, कुर्सी को देते रहे भाषण

पटना में शनिवार (अक्टूबर 12, 2019) को लोहिया की पुण्यतिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम में बहुत ही अजीब नजारा देखने को मिला। लोकतांत्रिक जनता दल पार्टी के संस्थापक और जदयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव द्वारा मंच संभालने से पहले ही पूरा सभागार खाली होने लगा और लोग अपनी सीट छोड़-छोड़कर बाहर चले गए। इससे भी अधिक हैरानी की बात तब हुई जब माइक पर आने के बाद शरद यादव समाजवाद और संविधान बचाने का पाठ खाली कुर्सियों को सुनाते रहे।

जानकारी के अनुसार जिस समय शरद यादव बोल रहे थे, उस समय सभागार में मौजूद लोगों से अधिक संख्या मंच पर बैठे महागठबंधन के नेताओं को पीछे बैठे पार्टी के कार्यकर्ताओं की थी। बताया जा रहा है शरद यादव के बोलने से कुछ देर पहले ही आयोजक उपेंद्र कुशवाहा महागठबंधन का प्रस्ताव पढ़ने लगे, लेकिन इस दौरान सभी कार्यकर्ता सभागार से बाहर निकलने लगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन कार्यकर्ताओं को देखकर लग रहा था जैसे उन्हें शरद यादव को सुनने की कोई जिज्ञासा ही नहीं। इसलिए उन्होंने समय गवाने से अच्छा सभागार के बाहर निकलना उचित समझा। गौरतलब है कि शरद यादव 2016 तक जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे और 2014-17 के बीच राज्यसभा के सदस्य भी। वे जदयू की ओर से लोकसभा में 7 बार और राज्यसभा में 3 बार चुने जा चुके हैं। लेकिन साल 2018 में जनता दल से अपना नाता तोड़ कर अपनी पार्टी का गठन कर लिया था। ऐसे में आयोजन में खाली सभागार की बात मीडिया में आते ही जदयू पूर्व प्रवक्ता डॉ. अजय आलोक ने इसको लेकर शरद यादव पर तंज कसा।

उन्होंने लिखा, “अपनी हालत के ज़िम्मेदार ख़ुद हैं माननीय शरद जी, समय की बात है राजनीति में बदलते वक़्त को भाँपने में उम्रदराजों से ग़लती हो जाती है। हालाँकि, नीतीश जी ने समझाया था। सम्मानपूर्वक घर बैठिए सर, आपको यूँ देख अच्छा नहीं लगता।” यहाँ बता दें कि शनिवार को डॉ राम मनोहर लोहिया की पुण्यतिथि के अवसर पर पटना के बापू सभागार में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जिसमें तेजस्वी यादव, उपेंद्र कुशवाहा, मुकेश सहनी, जीतन राम मांझी और शरद यादव समेत कई नेता शामिल हुए थे।

PM मोदी ने विपक्ष को दी चुनौती, कहा- है हिम्मत तो कहो J&K में फिर से लगाएँगे 370

महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे ठीक एक हफ्ते पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के जलगाँव से अपने चुनाव प्रचार का आगाज किया। कॉन्ग्रेस सहित तमाम विपक्षी दलो को अनुच्छेद 370, 35A, तीन तलाक जैसे मुद्दों पर घेरते हुए चुनौती दी कि यदि उनमें हिम्मत है तो वे जनता से इन मुद्दों पर लिए गए फैसले वापस लेने का वादा करके दिखाएँ।

उन्होंने कहा, “आज मैं विरोधियों को चुनौती देता हूँ कि आपमें अगर हिम्मत है तो इस चुनाव में भी और आने वाले चुनावों में भी अपने चुनावी घोषणा पत्र में ये ऐलान करें कि हम अनुच्छेद 370 को वापस लाएँगे। 5 अगस्त के निर्णय को हम बदल देंगे। वर्ना ये घड़ियाली आँसू बहाना बंद करें।”

पाकिस्तान का नाम लिए बगैर उन्होंने कॉन्ग्रेस पर पड़ोसी देश की भाषा बोलने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आज दुर्भाग्य के साथ कहना पड़ रहा है कि हमारे देश के कुछ राजनीतिक दल, कुछ राजनेता, राष्ट्रहित में लिए गए इस निर्णय पर राजनीति करने में जुटे हैं। पीएम ने भाषण की शुरुआत में ही कहा कि नए भारत का नया जोश दुनिया देख रही है और मजबूती से सुन भी रही है। दुनिया का हर देश आज भारत के साथ खड़ा है, हमारे साथ मिलकर आगे बढ़ने के लिए उत्साहित है।

पीएम ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख सिर्फ जमीन का एक टुकड़ा नहीं है। माँ भारती का शीश है। वहाँ का कण-कण भारत की शक्ति को मजबूत करता है। उन्होंने कहा, “आप ये जानकार हैरान हो जाएँगे कि 70 साल तक जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हमारे वाल्मीकि भाइयों को मानवाधिकारों से भी वंचित कर दिया गया था। आज मैं भगवान वाल्मीकि के चरणों में नमन करते हुए कहता हूँ कि आज मुझे अपने उन भाइयों को गले लगाने का सौभाग्य मिल रहा है।”

इस दौरान उन्होंने महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार के कामकाज का जिक्र करते हुए कहा, “बीते 5 वर्षों के हमारे काम से यहाँ विपक्षी भी हैरान और परेशान हैं। हमारे विरोधी भी आज ये मान रहे हैं कि भाजपा-शिवसेना गठबंधन का नेतृत्व कर्मशील भी है और ऊर्जावान भी। जब यहाँ की गरीब बहनों के जीवन में आए बदलाव के बारे में सुनते हैं, तो हमें संतोष होता है। आज महाराष्ट्र की करीब 10 लाख बहनें हमारी सरकार की आवास योजना की वजह से अपने पक्के घर में अपने परिवार की देखभाल कर रही हैं।”

उन्होंने कहा, “बीते कुछ समय से हम लगातार चुनौतियों को चुनौती दे रहे हैं। आज नया भारत ठान चुका है कि उसे अतीत के अनावश्यक बंधनों में बंधकर नहीं रहना है। आज नया भारत खुद के वर्तमान को मजबूत करने के साथ खुद का भविष्य भी तय कर रहा है।”

सोमवार से FATF की बैठक: टेरर फंडिंग पर लगाम न कसने पर पाकिस्तान की बढ़ी टेंशन, ब्लैकलिस्ट होना तय!

14 अक्टूबर यानी कल से पेरिस में शुरू होने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की बैठक पर पूरी दुनिया की नजर है। कहा जा रहा है पाक के लिए ये 24 घंटे तनावभरे होंगे। क्योंकि, मुमकिन है कल की बैठक के बाद उसे आतंकियों को पनाह देने के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया जाए।

अगर उसे FATF के इस फैसले से बचना है तो साबित करना होगा कि उसने आतंकी फंडिग और मनी लॉन्ड्रिंग के साथ आतंकियों और उनके संगठनों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए। अगर वह ये सब चीजें बैठक में साबित करने में नाकाम रहता है तो उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि गत वर्ष जून 2018 में FATF ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाला था। इस दौरान उसे 27 बिंदुओं के एक्शन प्लान पर काम करने के लिए एक साल का समय दिया गया था। इन बिंदुओं में धन-शोधन और आतंकी संगठनों की फाइनेंस को बैंकिंग एवं नॉन बैंकिंग, कॉरपोर्रेट व नॉन कॉर्पोरेट सेक्टरों से रोकने के उपाय करने थे। अब बैठक में इसकी अनुपालन रिपोर्ट को ही पाक के आर्थिक मामलों के मंत्री हम्माद अजहर के सामने जाँचा जाएगा। जिसकी जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार खुद सूत्रों ने दी है।

FATF के मुताबिक अगर पाकिस्तान 27 बिंदुओं के प्लॉन को लागू करने में नाकाम रहता है तो उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। यहाँ जानने वाली बात है कि अगस्त 2019 में एशिया पैसिफिक जॉइंट ग्रुप ने पाकिस्तान को इन बिंदुओं पर काम करने में फेल पाया था। लेकिन फिर भी पाकिस्तान अपने मीडिया रिपोर्टों में दावा कर रहा है कि उनका मुल्क ब्लैकलिस्ट होने से बच जाएगा।

मीडिया खबरों के अनुसार पाकिस्तान बैंकॉक की बैठक को लेकर गंभीर तनाव में हैं। क्योंकि इसमें वह 27 बिंदुओं के एक्शन प्लॉन में से केवल 6 पर ही खरा उतरा है। इसलिए उसपर ब्लैकलिस्ट होने का खतरा और गहरा गया है। वहीं बता दें कि तकनीकी अनुपालन ने भी पाकिस्तान को 40 में से 10 प्वॉइंट्स में संतोषजनक पाया था। लेकिन 30 में पाकिस्तान जीरो था तो वहीं 10 महत्तवपूर्ण मानकों पर पाकिस्तान की स्थिति सो-सो थी।

आदिवासियों की जिंदगी नहीं बदली, लेकिन सोरेन परिवार के पास आ गई सैकड़ों एकड़ जमीन: रघुवर दास

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने शनिवार (12 अक्टूबर) को जोहार जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) पर प्रदेश को लूटने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सोरेन परिवार कैसे सीएनटी और एसपीटी एक्ट के उल्लंघन कर देवघर, दुमका, रांची, धनबाद, गालूडीह, बोकारो, पाकुड़िया समेत अन्य शहरों में करोड़ो रुपए की सैकड़ों एकड़ ज़मीन का मालिक बन गया?

यात्रा के दौरान लोगों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सोरेन परिवार के पास इतना रुपया आख़िर आया कहाँ से, जिससे उन्होंने सैकड़ों एकड़ ज़मीन ख़रीद ली? उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने राज्य को जमकर लूटा है। उन्होंने कहा झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता अफ़वाह फैलाकर आदिवासी समाज को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। आपको इनसे सावधान रहना है, आपको इन्हें अपने क्षेत्र से बाहर निकालना है।

उन्होंने कहा ये झारखंड के विकास के लिए नहीं, अपने विकास के लिए राजनीति कर रहे हैं। अब झारखंड में न जातिवाद की राजनीति चलेगी, न वंशवाद की राजनीति चलेगी। अब झारखंड में सिर्फ़ विकास की राजनीति चलेगी। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि झामुमो आदिवासियों के विकास की बात नहीं करती। एक भी काम आदिवासी हित में नहीं किया, लेकिन हमने किसी की भी एक इंच ज़मीन नहीं ली। उन्होंने कहा कि झामुमो से क्या एक भी ग़रीब आदिवासी की जिंदगी में बदलाव आया है। वर्षों से आदिवासी समाज के विकास के नाम पर झामुमो ने सिर्फ़ अपनी राजनीति को ही चमकाया है।

दास ने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यही हमारा मूल-मंत्र है। जितनी योजनाएँ हमारे द्वारा शुरू की गईं, वो गाँव और ग़रीबों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने करोड़ों महिलाओं की पीड़ा को समझा और शौचालय निर्माण को जन-आन्दोलन बनाया। आज झारखंड के घर-घर में शौचालय है। महिलाएँ सम्मान और सुरक्षा की ज़िंदगी जी रही हैं।

उन्होंने कहा, “मेरा लक्ष्य ग़रीबी मिटाना है। राज्य में गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों की संख्या कम हो रही है। सखी मंडलों से महिलाएँ सशक्त हो रही हैं। हमने पलायन रोका है। योजनाओं का ज़्यादा से ज़्यादा प्रसार करना है।” साथ ही उन्होंने बीजेपी की रणनीतियों से लेकर कई मुद्दों पर बेबाक विचार रखे।

‘कॉन्ग्रेस अवारा पार्टी, परेशान हैं तो पार्टी छोड़ दें ज्योतिरादित्य सिंधिया’

मध्य प्रदेश की अपनी ही सरकार पर कॉन्ग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया के हमले के बाद बीजेपी नेता गोपाल भार्गव ने उन्हें पार्टी छोड़ने की सलाह दी है। ज्योतिरादित्य ने 10 अक्टूबर को कमलनाथ सरकार को क़र्ज़ माफ़ी के मसले पर घेरा था।

भिंड में एक रैली में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था, “अभी सभी किसानों की कर्जमाफी नहीं की गई है। सिर्फ 50 हजार रुपए का कर्ज माफ किया गया, जबकि हमने दो लाख रुपए तक का कर्ज माफ करने का वादा किया था। किसानों के दो लाख रुपए तक के कर्ज माफ किए जाने चाहिए। हमने अपने वादे पर पूरी तरह से अमल नहीं किया है और वादा पूरा करना चाहिए।”

अब इस मामले में बीजेपी ने भी दखल देते हुए कहा है कि कॉन्ग्रेस नेता ने अपने बयान से कमलनाथ को आईना दिखाने का काम किया है। सिंधिया की टिप्पणी को लेकर राज्य विधानसभा में नेता विपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा, “यदि कॉन्ग्रेस सरकार की वादाखिलाफी से सिंधिया परेशान हैं तो फिर उन्हें पार्टी छोड़ देनी चाहिए। सिंधिया ने सही कहा कि कॉन्ग्रेस ने वादा किया था वह सत्ता में आने के 10 दिन के भीतर ही कर्ज माफ कर देगी।”

इस बीच, गोसेवा पर कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह तथा सीएम कमलनाथ के बीच ट्विटर पर हुई बयानबाजी को लेकर भी भाजपा ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा है कि “असल में कॉन्ग्रेस आवारा पार्टी है।”

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अपने वचनपत्र में किसानों का दो लाख रुपए तक का कर्ज माफ करने का वादा किया था। कमलनाथ ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही एक घंटे के भीतर किसान कर्जमाफी के आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इस योजना की प्रक्रिया शुरू हुई और किसानों से तीन अलग-अलग रंग के फॉर्म भरवाए गए थे। सरकार ने 55 लाख किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया था।

मालपुरा में दुर्गा विसर्जन जुलूस पर हुए पथराव के बाद लगे कर्फ़्यू के दौरान आगजनी, जाँच शुरू

राजस्थान के मालपुरा शहर से आगजनी की घटना सामने आ रही है। दशहरे के शुभ अवसर पर मालपुरा कस्बे में अराजक तत्वों ने जुलूस पर पथराव किया था, जिसके बाद स्थिति बेहद तनावपूर्ण बन गई थी। इस घटना से दुखी होकर, कस्बे के लोग मालपुरा पुलिस स्टेशन के बाहर धरने पर बैठ गए थे। उन्होंने माँग की थी कि जब तक अराजक तत्वों की गिरफ़्तारी नहीं होगी तब तक रावण दहन नहीं किया जाएगा। गतिरोध का कोई अंत नहीं होता देख, ज़िला प्रशासन ने बुधवार (9 अक्टूबर) को सुबह रावण के पुतलों को जलाया और क्षेत्र में धारा-144 लगा दी थी।

शुक्रवार (11 अक्टूबर) को स्थानीय प्रशासन ने लोगों के लिए कर्फ़्यू प्रतिबंधों में ढाई घंटे की छूट दी गई लेकिन इंटरनेट सेवा बंद रखी। यह छूट सुबह 8:30 बजे से 10:30 तक दी गई। इसकी जानकारी कलेक्टर केके शर्मा ने दी। शांति समिति की बैठक के बाद इसकी घोषणा की गई। इस दौरान लोगों को दोपहिया वाहन के इस्तेमाल पर छूट दी गई थी। इस दौरान लोंगों ने रोजमर्रा के सामान की ख़रीदारी की।

10:30 बजे सायरन बजते ही दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद करनी शुरू कर वहीं बाज़ारों में सन्नाटा छा गया। वहीं, दोपहर बाद ख्वासजी के कटले से ट्रक स्टैंड जाने वाले मार्ग पर आपसी झड़प के चलते दो मनिहारी की केबिनों में आगजनी की घटना होने से प्रशासन में अफ़रा-तफ़री मच गई। इसके बाद कुछ लोगों ने मोहल्ले में पुलिस अधिकारियों का घेराव करके आगजनी की घटना पर ग़ुस्सा व्यक्त किया।

आगजनी की घटना की जानकारी मिलते ही अजमेर पुलिस के महानिरीक्षक संजीव निर्जारी, पुलिस अधीक्षक आदर्श सिद्धू, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गोरधन लाल स्थिति का जायज़ा लेने के लिए घटनास्थल पर पहुँचे। अधिकारियों ने लोगों के बीच बढ़ते ग़ुस्से को भाँपते हुए उन्हें उचित कार्रवाई किए जाने का आश्वासन दिया। पुलिस ने इलाक़े के कुछ युवकों को पूछताछ के लिए हिरासत में भी लिया।

अलगाववादियों और आतंकियों ने 370 को ढाल बनाकर J&K को ‘आतंक का नर्क़’ बना दिया था: नक़वी

केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नक़वी ने शनिवार (2 अक्टूबर) को अनुच्छेद-370 को लेकर अलगाववादियों और आतंकवादियों पर हमला बोला। मुंबई में उन्होंने कहा कि अनुच्छेद-370 को ढाल बनाकर अलगाववादियों और आतंकवादियों ने पृथ्वी के स्वर्ग कश्मीर को ‘आतंक का नर्क़’ बना दिया था। अनुच्छेद- 370 हटने के बाद अब कश्मीर का विकास होगा। मोदी सरकार की सराहना करते हुए अल्पसंख्यक कार्य मंत्री ने कहा कि इस क़दम ने आतंकवाद की कमर तोड़ दी है।

बलाकोट हवाई हमले पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने देश के दुश्मन को उसी के घर में घुसकर मारा, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक मिसाल है। अंधेरी मुंबई में शिवसेना उम्मीदवार के प्रचार के लिए बुद्धिजीवियों, उद्यमियों, डॉक्टरों, व्यापारियों और अन्य लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की तारीफ़ की। प्रचार के दौरान उन्होंने कहा कि कुछ ‘सत्ता के ठेकेदार’ ने अनुच्छेद 370 को ‘संवैधानिक अनिवार्यता’ के रूप में चित्रित किया था, हालाँकि यह एक ‘अस्थाई व्यवस्था’ थी। साथ में उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर कहा कि भाजपा और शिवसेना गठबंधन की 21 अक्तूबर को पूर्ण बहुमत से सरकार बनेगी।

नक़वी के हवाले से एक बयान में कहा गया है, ”अलगाववादियों और आतंकवादियों ने अनुच्छेद-370 का एक ढाल के रूप में इस्तेमाल करके ”धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर को ”आतंक के नर्क” में बदल दिया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के सपने को साकार कर दिखाया है। जम्मू-कश्मीर से 370 को हटाकर मोदी सरकार ने जम्मू, कश्मीर, लद्दाख को 370 समस्याओं से मुक्ति दिलाई है।

प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी एवं गृह मंत्री और @BJP4India के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री @AmitShah जी ने “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के सपने को साकार कर दिखाया है। जम्मू-कश्मीर से 370 को हटाकर मोदी सरकार ने जम्मू, कश्मीर, लद्दाख को 370 समस्याओं से मुक्ति दिलाई है। pic.twitter.com/o4VoH4UGaj— Mukhtar Abbas Naqvi (@naqvimukhtar) October 12, 2019

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार के लिए “बिना भेदभाव के विकास”, “राष्ट्रनीति” और समाज के हर ज़रूरतमंद का सशक्तिकरण ”राष्ट्रधर्म” है।

PM श्री @narendramodi जी की सरकार के लिए “बिना भेदभाव के विकास”, “राष्ट्रनीति” और समाज के हर जरूरतमंद का सशक्तिकरण “राष्ट्रधर्म” है। श्री @narendramodi जी, सरदार पटेल के मजबूत राष्ट्रवादी इक्छाशक्ति और महात्मा गाँधी के सबका विकास के संकल्प के साथ काम कर रहे हैं। @BJP4India pic.twitter.com/C9Rh5Zat7Q— Mukhtar Abbas Naqvi (@naqvimukhtar) October 12, 2019

ग़ौरतलब है कि इससे पहले केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नक़वी ने देश में अवैध घुसपैठियों पर महत्वपूर्ण बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि देश में अवैध घुसपैठियों की पहचान प्रक्रिया में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होगा। लोगों को अपनी नागरिकता प्रमाणित करने का अवसर मिलेगा। देश के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा हर हाल में होनी चाहिए और अवैध घुसपैठियों की पहचान की जानी चाहिए। कोई भी देश अवैध घुसपैठियों के जनसंख्या विस्फोट को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता।

2013 से सुप्रीम कोर्ट के आदेश और निगरानी में यह प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा था कि एनआरसी की पूरी प्रक्रिया तय पैमानों के आधार पर हो रही है।

प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के नेतृत्व में भारत “विश्व गुरु” बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ में अपने भाषण से मोदी जी ने एहसास कराया कि भारत दुनिया का सबसे मजबूत और बड़ा लोकतंत्र है। @BJP4India pic.twitter.com/8uNJIA8j1F— Mukhtar Abbas Naqvi (@naqvimukhtar) October 12, 2019

रामपुर की जनता के सामने आए आजम खान, कहा- खुशियों का ऐसा पहाड़ टूटा कि 22 किलो वजन घट गया

रामपुर से सपा सांसद आजम खान आगामी उपचुनावों के मद्देनजर अपनी पत्नी के लिए चुनाव प्रचार करने मैदान में उतर गए हैं। लेकिन उनकी हालत देखकर लगता है कि वो अपने ऊपर चल रहे मुकदमों के सदमे से बाहर नहीं निकल पा रहे।

कल रामपुर की जनता के बीच आजम खान अपने ऊपर लगे मुकदमों के बारे में बात करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने भर्राए गले से अपनी स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि उनके ऊपर खुशियों का ऐसा पहाड़ टूटा है कि उनका 22 किलो वजन घट गया।

उन्होंने मंच से जनता को संबोधित करते हुए कहा, “जिंदगी का इतना लंबा सफर गुजारने के बाद तुम्हारा यह साथी 1 किलो वजन बढ़ाकर नहीं बल्कि 22 किलो वजन घटाकर आज तुम्हारे सामने खड़ा है। बस यही तो मिला आपसे संसद का चुनाव जीतने के बाद।”

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि वे अभी तक लोकसभा चुनाव में मिली जीत की कीमत अदा नहीं कर पाएँ हैं। इसके लिए न जाने उन्हें कितनी कीमत अदा करनी होगी।

उन्होंने पेड़ का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर 100 साल के बूढ़े पेड़ पर डकैती के 100 मुकदमों की तस्वीर चस्पा कर दी जाएगी, तो वह टूट के गिर जाएगा। सपा सांसद ने चुनाव प्रचार की रैली में भावुक स्पीच देने के बाद कहा कि इस लड़ाई से वे न पीछे हट सकते हैं और न ही मैदान छोड़कर भाग सकते हैं।

गौरतलब है कि आजम खान पर फिलहाल 80 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हो रखे हैं और उनके ख़िलाफ़ स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम की जाँच भी चल रही हैं। जिस कारण वे अक्सर रामपुर से अब तक गायब ही दिखते थे, लेकिन पत्नी के चुनावी मैदान में उतरते ही वो दोबारा से रामपुर लौटे हैं और तंजीन फातिमा के लिए आयोजित कार्यक्रमों में पहुँचे। यहाँ वे अपने ऊपर सभी मामलों का हवाला देकर रौंधी आवाज से बोले, “आखिर मेरी गलती क्या है, मुझे इंसाफ दो।” उन्होंने लोगों से कहा मेरे माथे पर लिखी बदनसीबी आप लोग पढ़ने की कोशिश करो।↵

मुझे लोग ख़ूब गालियाँ दे रहे हैं, खुलेआम घृणा से व्यथित हूँ: नसीरुद्दीन शाह का ‘मॉब लिंचिंग गिरोह’ को समर्थन

वरिष्ठ फ़िल्म अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने एक बार फिर से विवादित बयान दिया है। इससे पहले भी कई बार अपने विवादित बयानों से सुर्ख़ियों में रहे नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि ‘खुलेआम घृणा के माहौल’ से वह विक्षुब्ध हैं। बता दें कि हाल ही में कला और साहित्य से जुड़े 49 हस्तियों ने पीएम मोदी को पत्र लिख कर ‘मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं’ पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद एक वकील ने उन सभी के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मुक़दमा दायर किया गया था। मीडिया ने इसे मोदी सरकार की कार्रवाई बता कर दुष्प्रचारित किया था। हालाँकि, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने साफ़ कर दिया कि इसमें मोदी सरकार का कोई हाथ नहीं है।

इसके बाद 180 हस्तियों ने फिर से एक पत्र जारी करते हुए इस एफआईआर की भर्त्सना की। उन 180 लोगों में नसीरुद्दीन शाह का नाम भी शामिल है, जिन्होंने कहा कि वे 49 हस्तियों द्वारा पीएम को लिखे गए पत्र का पूर्ण रूप से समर्थन करते हैं। पत्र लिखने वालों की सूची में निर्देशक अनुराग कश्यप, कथित इतिहासकार रामचंद्र गुहा और अभिनेत्री अपर्णा सेन शामिल थीं। नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि उन्हें इन हस्तियों का समर्थन करने के लिए काफ़ी गालियाँ पड़ीं लेकिन इन सबका उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शाह से जब पूछा गया कि क्या उनकी विचारधारा और बयानों से फ़िल्म इंडस्ट्री में उनके कामकाज पर असर पड़ा है, तो उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री के साथ उनका सम्बन्ध कभी भी क़रीबी सम्बन्ध नहीं था क्योंकि उन्हें कभी ज्यादा फ़िल्में मिली ही नहीं। उन्होंने बताया कि उन्हें जो बात कहने की ज़रूरत होती है, वो वही बोलते हैं। उन्होंने कहा कि वो अपने सभी बयानों पर अभी भी क़ायम हैं। उन्हें अपनी राय जाहिर करने के लिए ख़ूब गालियाँ पड़ती हैं लेकिन उनका कोई असर नहीं होता।

नसीरूद्दीन शाह ने कहा कि वो समाज में ”खुलेआम हिंसा से बहुत व्यथित हैं। नसीरुद्दीन शाह ने जिस पत्र पर हस्ताक्षर किया है, उसमें पूछा गया है कि क्या मॉब लिन्चिग के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना राष्ट्रद्रोह है? इस पत्र में कथित लिबरल हस्तियों ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अदालत का दुरूपयोग कर रहे हैं। नसीरुद्दीन शाह सहित 180 हस्तियों ने लिखा कि वे 49 लोगों द्वारा पीएम को लिखे पत्र के एक-एक शब्द का समर्थन करते हैं। साथ ही लोगों की आवाज़ दबाने का भी आरोप लगाया है।

‘विश्व में सबसे ज्यादा सुखी मुस्लिम भारत में मिलेगा, परसियन की पूजा-मूल धर्म केवल यहीं सुरक्षित, क्योंकि हम हिंदू हैं’

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार (अक्टूबर 12, 2019) को भुवनेश्वर में बुद्धिजीवियों की एक सभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ को किसी से नफरत नहीं है। आरएसएस का उद्देश्य भारत में परिवर्तन के लिए सभी समुदायों को संगठित करने का है, न कि सिर्फ हिंदू समुदाय को। भागवत ने कहा, “राष्ट्रवाद लोगों को डराता है क्योंकि वह तुरंत इसे हिटलर और मुसोलिनी से जोड़ देते हैं। लेकिन भारत में राष्ट्रवाद ऐसा नहीं है क्योंकि यह राष्ट्र अपनी सामान्य संस्कृति से बना है।”

भारत की विविधता की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि पूरा देश एक सूत्र से बँधा हुआ है। यहाँ के लोग विविध संस्कृति, भाषा और भौगोलिक स्थानों के बावजूद खुद को भारतीय मानते हैं। इस अद्वितीय अहसास के कारण मुस्लिम, पारसी या अन्य मजहबों में विश्वास रखने वाले लोग खुद को यहाँ सुरक्षित समझते हैं। उन्होंने कहा, “यहूदी मारे-मारे फिरते थे अकेला भारत है, जहाँ उनको आश्रय मिला। परसियन (पारसी) की पूजा और मूल धर्म केवल भारत में सुरक्षित हैं। विश्व के सर्वाधिक सुखी मुस्लिम भारत में मिलेंगे। ये क्यों है? क्योंकि हम हिंदू हैं।”

संघ प्रमुख का कहना है कि समाज में बदलाव की दिशा में सही तरीका यह है कि ऐसे उत्कृष्ट इंसान तैयार किए जाएँ, जो समाज को बदलने के साथ ही देश की कायापलट में अहम भूमिका निभा सकें, क्योंकि 130 करोड़ लोगों को एक साथ बदलना मुमकिन नहीं है। भागवत ने कहा कि समाज में बदलाव लाना जरूरी है ताकि देश का भाग्य बदले। इसके लिए ऐसे लोगों को तैयार करना होगा, जिनका चरित्र साफ सुथरा हो, जो प्रत्येक सड़क, गाँव और शहर में नेतृत्व रखने की क्षमता रखें।

आगे उन्होंने कहा, “हमारी किसी के प्रति कोई घृणा नहीं है। एक बेहतर समाज बनाने के लिए हमें एक साथ आगे बढ़ना चाहिए जो देश में बदलाव ला सकें और उसे विकास में मदद दे सकें। यह हमारी इच्छा है कि आरएसएस ठप्पा हट जाए और आरएसएस और समाज मिलकर एक समूह के तौर पर काम करे और इसका श्रेय भी समाज को ही दिया जाए। हम कोई श्रेय नहीं लेना चाहते।”

उल्लेखनीय है कि संघ प्रमुख शनिवार (अक्टूबर 12, 2019) को नौ दिन के दौरे पर ओडिशा पहुँचे। यहाँ वो अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की पहली बैठक में शिरकत करेंगे। इस दौरान उनके साथ भैयाजी जोशी भी होंगे। उन्होंने बताया कि आरएसएस कार्यकारिणी समिति की बैठक एक निजी विश्वविद्यालय में 16 से 18 अक्टूबर तक होगी।