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हैदराबाद में पुलिस के हत्थे चढ़ा सिमी आतंकी अजहर, 6 साल पहले किया था मंदिर में विस्फोट

प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन सिमी के एक आतंकी को रायपुर पुलिस ने हैदराबाद से गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि आरोपित आतंकी पिछले छ: साल से फरार था। बता दें यह सिमी वही संगठन है जिसने वर्ष 2013 में बिहार के बोधगया और पटना में हुए बम धमाकों की ज़िम्मेदारी ली थी। बिहार में बम धमाके की इस घटना को अंजाम देने के बाद सिमी के आतंकवादी छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में छिप गए थे।

पुलिस ने जिस आतंकवादी को गिरफ्तार किया है उसका नाम अजहरुद्दीन उर्फ़ अजहर केमिकल अली उर्फ़ बाबू खान है। 32 वर्षीय आतंकवादी अज़हर मूलत: रायपुर शहर के मौदहापारा इलाके का रहने वाला है जोकि सिमी के आतंकी संगठन के लिए प्रचार-प्रसार से लेकर बैठकें आयोजित करने का काम करता था। अजहर पर यह भी आरोप है कि उसने 2013 बम धमाके के बाद आतंकियों को रायपुर में छिपाने में बड़ी अहम् भूमिका निभाई थी।

बता दें कि 2013 के बम धमाकों के बाद आतंकवादियों को कुछ समय बाद रायपुर से गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस ने अबतक इस मामले में 17 आतंकियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार उन्हें आरोपित केमिकल अली के फ्लाईट से हैदराबाद आने की सूचना मिली थी जिसके बाद इसके लिए प्लान तैयार किया गया और पुलिस की एक टीम हैदराबाद भेजी गई ताकि आतंकवादी को पकड़ा जा सके। इसके बाद आतंकवादी को एयरपोर्ट पर ही घेराबंदी करके गिरफ्तार कर लिया गया। एसएसपी आरिफ शेख और सीएसपी त्रिलोक बंसल ने बताया कि 2013 में सिमी का प्रचार-प्रसार करने वालों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।

बता दें कि वर्ष 2013 में 7 जुलाई को बोधगया मंदिर और उसके निकट सिमी के आतंकवादियों ने नौ सिलसिलेवार बम धमाकों को अंजाम दिया था, इनमें से एक सिलेंडर बम भी था। इस घिनौनी हरकत आतंकवादियों ने पांच बम धमाके महाबोधि मंदिर के प्रांगण किये थे जहाँ करीब 200 बौद्ध प्रशिक्षु भिक्षुओं का निवास था। इसके अलावा 80 फुट की बुद्ध प्रतिमा और बस स्टैंड के पास भी बम धमाके किये गए थे।

मुस्लिम महिलाएँ मुजफ्फरनगर में बनवा रहीं ‘मोदी मंदिर’, कहा- पीएम ने बदल दी जिंदगी

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर ज़िले में मुस्लिम महिलाओं का एक संगठन प्रधानमंत्री मोदी को समर्पित एक मंदिर का निर्माण करवा रहा है। इस संगठन का नेतृत्व कर रही रूबी गज़नी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम महिलाओं की ज़िंदगी की बेहतरी के लिए कई काम किए हैं, इसलिए वे इस सम्मान के हक़दार हैं।

रूबी गज़नी ने कहा,

“तीन तलाक़ पर प्रतिबंध लगाकर प्रधानमंत्री हमारे जीवन में एक बहुत बड़ा बदलाव लाए हैं। उन्होंने हमें उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन दिलाए। घर भी मुहैया करवाया है। अब उनसे और कोई क्या चाहेगा।”

ख़बर के अनुसार, महिलाओं ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी को दुनिया भर में सम्मानित किया जा रहा है। ऐसे में उन्हें अपने देश में भी सम्मानित किया जाना चाहिए।” महिलाओं के संगठन ने ज़िलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर उनका मंदिर बनवाने के बारे में जानकारी दी है।

रूबी गज़नी ने बताया कि हम सब मुस्लिम महिलाएँ अपना पैसा इकट्ठा करके नरेंद्र मोदी जी का मंदिर बनवा रही हैं। हम यह संदेश देना चाहते हैं कि मुस्लिम महिलाएँ मोदी जी के साथ हैं। उन्होंने अच्छे-अच्छे काम किए हैं। जिन लोगों के पास घर नहीं था, उन्हें घर दिया है। लोगों के कच्चे मकान पक्के बनवाए हैं। जिनके पास सिलेंडर नहीं था उन्हें सिलेंडर दिए गए हैं और काफ़ी सारी योजनाएँ हैं जो मोदी जी ने मुस्लिम समाज के लिए की हैं।

इससे पहले भी मुस्लिम समाज की महिलाएँ प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों और उनके फ़ैसलों का समर्थन कर चुकी हैं। किसी ने उन्हें भाई का दर्जा देकर राखी भेजी तो कभी तीन तलाक़ को ख़त्म करने के उनके फ़ैसले को सराहा गया।

मई में, लखनऊ की रहने वाली एक 33 साल की मुस्लिम महिला ने तीन तलाक़ देने की वजह से अपने पति के ख़िलाफ़ कोर्ट केस किया था। यह पहला मौका था, जब उसने अपने परिवार की इच्छा के ख़िलाफ़ कोई फ़ैसला लिया था। ब्यूटीशियन का काम करने वाली इस महिला ने कहा था कि वो लोकसभा चुनाव 2019 में 6 मई को परिवार के ख़िलाफ़ जाकर बीजेपी को वोट देगी

गत वर्ष कॉन्ग्रेस के लिए प्रचार करने वाली इस महिला ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा था कि मोदी सरकार ने तीन तलाक़ की प्रथा के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की हिम्मत तो दिखाई, कोई दूसरी पार्टी तो इस बारे में बात तक नहीं करती।

19 साल बाद उठा बाल ठाकरे की गिरफ्तारी का मुद्दा, शिवसेना बोली- माफी माँगे अजित पवार

शिवसेना सांसद संजय राउत ने राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता अजित पवार से माफी माँगने के लिए कहा है। दरअसल एक दिन पहले पवार ने कहा था कि शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे को साल 2000 में गिरफ्तार करना एक ‘भूल’ थी। अजित पवार के इस बयान के बाद राउत ने उनसे माफी माँग करते हुए ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, ‘‘आपको इस बात का एहसास करने में लंबा वक्त लगा कि बाला साहब ठाकरे को गिरफ्तार करना एक भूल थी। अगर आपके आँसू सच्चे हैं तो आपको उनकी गिरफ्तारी पर माफी माँगनी चाहिए।’’

बता दें कि महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस-राकांपा की सरकार के दौरान शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में सांप्रदायिक घृणा की भावना को कथित तौर पर उकसाने के आरोप में ठाकरे को गिरफ्तार किया गया था। साल 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के विषय पर ठाकरे का कथित भड़काऊ लेख ‘सामना’ में प्रकाशित हुआ था, जिसके बाद मुंबई में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे जिसमें 300 से अधिक लोग मारे गए थे।

वहीं शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे की बात करें तो उन्होंने भी हाल ही में बाला साहब ठाकरे की गिरफ्तारी पर कॉन्ग्रेस- एनसीपी को घेरा था। उन्होंने अपने पिता की गिरफ्तारी पर बात करते हुए कहा था कि महाराष्ट्र ‘बदले और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित राजनीति’ का समर्थन नहीं करता है। उन्होंने मुंबई में शिवसेना के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि उनके पिता को भ्रष्टाचार या किसी अन्य अनियमितता के आरोप में गिरफ्तार नहीं किया गया था, बल्कि उन्हें तो 1992-93 के दंगों के दौरान मुंबई और महाराष्ट्र में हिंदुओं की रक्षा के लिए गिरफ्तार किया गया था।

हरामी नाला से 5 लावारिस Pak नावें मिलीं, जिहादियों के घुस आने की आशंका

गुजरात के हरामी नाला बॉर्डर से सीमा सुरक्षा बल (Border Security Force, BSF) ने पाँच लावारिस पाकिस्तानी नावें बरामद की हैं। मछली पकड़ने के लिए बनीं इन नावों (फिशिंग बोट) को लेकर आशंका जताई जा रही है कि कहीं इनका इस्तेमाल पाकिस्तान से जिहादी आतंकवादियों द्वारा हिंदुस्तान में घुसपैठ करने के लिए न किया गया हो। BSF ने तहकीकात शुरू कर दी है।

यह बरामदगी BSF की पेट्रोलिंग टीम ने कच्छ के समुद्र से की है। यह इस इलाके का पहला वाकया भी नहीं है। 5 अक्टूबर को कच्छ के ही सरक्रीक इलाके से 2 लावारिस पाकिस्तानी फिशिंग बोट बरामद हुईं थीं। हालाँकि उन नावों में मछली मारने के सामान के अलावा और कुछ बरामद नहीं हुआ था, लेकिन उस मामले में अभी भी BSF की जाँच चल रही है। इस ताज़ा मामले को लेकर भी सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं।

उसके पहले मई में भी BSF ने एक नाव बरामद की थी, जबकि उस पर सवार लोग निकल भागने में सफ़ल रहे थे। हालिया बरामदगी शुक्रवार रात 10.45 के करीब हुई। यह बात BSF ने प्रेस विज्ञिप्ति में कही है। पाँचों नावें एकल इंजन वालीं हैं

गुजरात के अलावा कश्मीर में भी जिहादियों के लॉन्च पैड माने जाने वाले इलाकों के पास से छोटी रबर की नावें बरामद हुईं थीं। उस समय गुरेज सेक्टर और किशनगंगा नदी के इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया गया था।

बाबा रामदेव खाएँगे अंडा तो बढ़ जाएगी डिमांड, धर्म समस्याओं की वजह: कॉन्ग्रेस नेता

पंजाब सरकार के पशुपालन मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने योगगुरु रामदेव को लेकर विवादित बयान दिया है। कॉन्ग्रेस नेता ने अंडे की सरप्लस उत्पादन के बावजूद खपत नहीं बढ़ने पर योगगुरु से अंडे खाने की अपील की है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंडा दिवस पर कहा कि यदि बाबा रामदेव सार्वजनिक रूप से टेलीवीजन पर अंडा खा लें तो उनके समर्थक भी उसे शाकाहारी मानकर खाने लगेंगे। इसके अलावा उनका मानना है कि भारत में धर्म कई समस्याओं की वजह है।

पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा अंतरराष्ट्रीय अंडा दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि अगर बाबा रामदेव टीवी पर अंडे बेचना शुरू कर दें तो लोग उसे जरूर खाना शुरू कर देंगे और इसकी इतनी सेल बढ़ जाएगी जिसका मुकाबला अमिताभ बच्चन भी नहीं कर पाएँगे।

उन्होंने इस कार्यक्रम में अंडे को प्रमोट करने के लिए कहा कि अंडा शाकाहारी है या मांसाहारी, इसे लेकर बहुत सी राय हैं। कई लोग इसे शाकाहारी मानते हैं तो कई लोग इसे मांसाहारी मानते हैं। भारत में धर्म कई समस्याओं की वजह हैं। देश में अंडे की मार्केटिंग सरप्लस है, लेकिन इसके बावजूद मार्केटिंग की समस्या है।

इसलिए, उन्होंने शंकराचार्य और अन्य हिन्दू धार्मिक नेताओं से अपील की है कि वो स्पष्ट करें कि अंडा शाकाहारी है या मांसाहारी। उनका कहना है कि ये लोग जैसा कहेंगे लोग वैसा ही मानेंगे।

कॉन्ग्रेस नेता का मानना है कि अंडे की प्रकृति स्पष्ट करने से काफी दिक्कतें दूर हो जाएँगी। बाजवा के अनुसार, बहुत से ऐसे लोग हैं जो अंडा खाना चाहते हैं, लेकिन वह इसको मांसाहारी समझकर नहीं खाते।

नई खोज का हवाला देते हुए उन्होंने ये भी बताया कि ये सिद्ध हो चुका है कि अंडे जीवित सैल में नहीं आते। उन्होंने मुर्गी पालकों को इस दौरान भरोसा भी दिलाया कि वो अंडे को मिड डे मील का हिस्सा बनाने संबंधी अपील को राज्य के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह के समक्ष रखेंगे।

इस कार्यक्रम में आए सभी लोगों द्वारा अंडे पर विचार प्रस्तुत किए गए, लेकिन जब पशुपालन मंत्री को इस पर बोलने के लिए बुलाया गया तो उन्होंने योगगुरू बाबा रामदेव और धर्म को लेकर विवादित बयान दे डाला।

लड़कियों से देह व्यापार कराने वाली रजिया खातून समेत 6 गिरफ्तार, 4 लड़कियाँ बचाई गईं

तेलंगाना के मलकजगिरी जोन की स्पेशल ऑपरेशन टीम (एसओटी) ने गुरुवार (अक्टूबर 10, 2019) की रात को एक अंतर्राज्यीय मानव तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया। ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने एक महिला समेत छ: लोगों को गिरफ्तार किया, जो कथित तौर पर राचकोंडा में नेरेडमेट पुलिस स्टेशन की सीमा के अंतर्गत आने वाले एक क्षेत्र में कोठा चलाते थे। पुलिस ने इस दरम्यान चार पीड़िताओं को भी बचाया।

पकड़े गए आरोपितों की पहचान 35 वर्षीय रजिया खातून, 53 वर्षीय सिराजुद्दीन, 33 वर्षीय शैक शैरीफ, 32 वर्षीय अब्दुल सरबर, 24 वर्षीय विट्ठल बलराज और 38 वर्षीय मोहम्मद शरीफ के रूप में हुई है।

पुलिस ने बताया कि रजिया खातून और उसके पति सिराजुद्दीन दोनों पश्चिम बंगाल के मूल निवासी हैं। पूछताछ के दौरान रजिया ने कबूल किया कि वो अपने पति सिराजुद्दीन के साथ हैदराबाद में देह व्यापार का धंधा करने के लिए आई थी। वो लोग पिछले छ: महीने से चोरी-छिपे रैकेट चला रहे थे।

पुलिस ने बताया कि उन्होंने एक रिहायशी इलाके में किराए पर एक घर लिया और पश्चिम बंगाल की चार युवतियों को अच्छे कमीशन का वादा करके लेकर आए और धंधा करना शुरू किया। ग्राहकों की माँग के आधार पर या तो इन महिलाओं को उनके बताए स्थानों पर भेजा जाता था या फिर वो ग्राहकों को ही चकले पर बुला लेते थे।

पुलिस ने उनके कब्जे से 6,580 रुपए, चार मोबाइल फोन और गर्भनिरोधक भी जब्त किए। पुलिस ने आईपीसी की धारा-370 और 370 (ए) के साथ ही पीआईटीए एक्ट के 3, 4 और 5 के तहत मामला दर्ज किया है।

बड़ा खुलासा: NCP नेता प्रफुल्ल पटेल दाऊद गैंग की कम्पनी में निवेशक, इक़बाल मिर्ची से जुड़े हैं तार

एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। आतंकी दाऊद इब्राहिम से उनके तार जुड़े होने की बात सामने आई है। शुक्रवार (अक्टूबर 11, 2019) को प्रवर्तन निदेशालय ने दाऊद इब्राहिम और उसके क़रीबी इक़बाल मिर्ची से जुड़े 2 लोगों को गिरफ़्तार किया। मुंबई में ऐसी कई सम्पत्तियाँ चिह्नित की गई हैं, जो इक़बाल मिर्ची और उसके परिवार के स्वामित्व में है।

इनमें से 2 सम्पत्तियाँ सबलिंक रेलटर्स और मिलेनियम डेवेलपर्स को बेची गई थीं। वर्ली के पॉश इलाक़े में स्थित संपत्ति सबलिंक को 2010-11 में बेची गई थी। 2006-07 में मिलेनियम डेवेलपर्स और इक़बाल मिर्ची ने मिल कर जिस 15 मंजिला कमर्शियल इमारत का निर्माण किया था, उसे अब सीजे हाउस के नाम से जाना जाता है।

जिस मिलेनियम डेवेलपर्स के साथ दाऊद इब्राहिम के क़रीबी इक़बाल मिर्ची के कारोबारी सम्बन्ध रहे, उसके शेयरहोल्डर्स में एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल का नाम भी शामिल है। यूपीए काल में केंद्रीय मंत्री रहे प्रफुल्ल पटेल ने इक़बाल मिर्ची से जुड़े मिलनिअम डेवेलपर्स प्राइवेट लिमिटेड में निवेश कर रखा है। एविएशन स्कैम केस में उनसे ED ने 8 घंटे पूछताछ की थी।

दाऊद के क़रीबी से जुडी कम्पनी में निवेशक हैं प्रफुल्ल पटेल

इसके अलावा खंडाला में 6 एकड़ की ज़मीन पर स्थित बँगले को वाइटवाटर लिमिटेड नाम पर दर्ज है, वो इक़बाल मिर्ची के दोनों बेटों के स्वामित्व में है। इसके अलावा वर्ली में एक बँगला इक़बाल मिर्ची की बीवी और बेटों के स्वामित्व में है। वर्ली में ही स्थित ‘समंदर महल’ इक़बाल की बहन और उसके परिवार के नाम पर है। पंचगनी में भी उसका एक बँगला है। इन सबके अलावा उसके नाम पर बाइकुला रोड में एक सिनेमा हॉल, क्रॉफ़ूड मार्किट में तीन दुकानें और जुहू तारा रोड में एक होटल में भी है।

उक्त सभी सम्पत्तियों की क़ीमत 500 करोड़ रुपए से भी अधिक है। जिन सम्पत्तियों को बेचा गया और उसे लेकर जो लेनदेन हुआ, उसके लिए चेन्नई के एक बैंक में खोले गए फेक अकाउंट का इस्तेमाल किया गया। इक़बाल मेनन उर्फ़ मिर्ची एक ड्रग डीलर, तस्कर और रंगदार था और राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुँचाने वाले कई अपराधों में संलग्न रहा था। अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट ने 2004 में उसे 10 विदेशी ड्रग सरगनाओं की सूची में शामिल किया था। हालाँकि, भारत ने उसके प्रत्यर्पण की कोशिश की थी लेकिन यूके कोर्ट ने इसे नकार दिया। इक़बाल की अगस्त 2013 में मृत्यु हो गई थी।

इक़बाल मिर्ची ने मुंबई में अवैध लेनदेन के आधार पर अकूत संपत्ति का अर्जन किया

उसने अवैध तरीके से कमाए गए रुपयों का इस्तेमाल करते हुए भारत से लेकर विदेशों तक अकूत संपत्ति जमा की। वह 1995 में भारत छोड़ कर भाग खड़ा हुआ था और तभी से दुबई से अपना सारा ग़लत कारोबार चला रहा था। उसकी कई सम्पत्तियों को जब्त भी किया गया था लेकिन उसने फेक डाक्यूमेंट्स और जालसाजी का ऐसा व्यूह रचा था कि भारतीय एजेंसियाँ लाचार हो गईं और उसकी सम्पत्तियों को छोड़ना पड़ा। अब उसकी सम्पत्तियों को लेकर कार्रवाई तेज़ हो गई है। इस सम्बन्ध में 18 लोगों से पूछताछ की जा चुकी है और कई ईमेल कन्वर्सेशन पुलिस के हाथ लगे हैं।

इक़बाल मिर्ची के 2 क़रीबी सहयोगियों गिरफ़्तार होने से कई राज़ खुलेंगे

मुंबई और बंगलौर में 11 ठिकानों पर पुलिस की रेड हुई। इस दौरान हारून युसूफ के नाम का भी खुलासा हुआ, जो इक़बाल मेनन के सारे फ़र्ज़ी लेनदेन और सम्पत्तियों की अवैध बिक्री में मदद करता था। रंजीत बिंद्रा नामक व्यक्ति ने मिर्ची और सबलिंक के बीच दलाल की भूमिका निभाई थी। इन दोनों को ही शुक्रवार को गिरफ़्तार किया गया। यूके में इक़बाल मिर्ची की कई सम्पत्तियों को चिह्नित किया गया है। लंदन में उसकी करोड़ों की सम्पत्तियाँ हैं।


एनसीपी ने प्रफुल्ल पटेल पर लगे आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सीजे हाउस को जिस ज़मीन पर बनाया गया, उसे ग्वालियर के महाराजा से ख़रीदी गई थी। इसके मालिकों के बीच विवाद के कारण 1978 से 2005 तक ये संपत्ति कोर्ट की कार्रवाई में फँसी रही। उस पार्टी ने कहा है कि उस दौरान कुछ लोग अवैध रूप से वहाँ रहने लगे थे, जिन्हें बाद में ईमारत के निर्माण के बाद तीसरे फ्लोर पर शिफ्ट किया गया। एनसीपी ने कहा कि ख़बरों में जिन्हें घसीटा जा रहा है, सीजे हाउस उनके स्वामित्व में नहीं है।

आपको हमारे कार्यक्रम में आना ही होगा: कमलनाथ ने की मिन्नतें तो अडानी ने कहा- प्रतिनिधि भेजूँगा

कॉन्ग्रेस हमेशा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उद्योगपति गौतम अडानी का नजदीकी बता कर उन पर निशाना साधती रही है। यह सही भी है कि गुजराती होने के कारण अम्बानी-अडानी ने गुजरात में अच्छा ख़ासा निवेश किया था और तब गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी उद्योगपतियों को रिझाने के लिए ‘वाइब्रेंट गुजरात’ सहित कई कार्यक्रम आयोजित करते थे। इससे राज्य में निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिला। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कहा था कि पीएम मोदी ने 35,000 एकड़ ज़मीन अडानी को सिर्फ़ 1 रुपए प्रति मीटर की दर से बेच डाली। पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने दावा किया था कि अडानी ने मोदी का चुनावी ख़र्चा उठाया।

अब कॉन्ग्रेस शासित मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ अरबपति कारोबारी गौतम अडानी को रिझाने में लग गए हैं। अडानी समूह कोयला से लेकर बिजली तक, कई प्रकार के कारोबार करती है। मध्य प्रदेश में 18 अक्टूबर को ‘मैग्नीफिसेंट एमपी ‘ कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश के विभिन्न उद्योगपतियों को बुला कर राज्य में निवेश करने को कहा जाएगा, जिससे रोजगार का सृजन हो। इसके लिए सीएम कमलनाथ ने भारत के दूसरे सबसे अमीर कारोबारी गौतम अडानी को भी इस समिट में आने के लिए न्योता दिया था।

हाल ही में इसी कार्यक्रम को लेकर आयोजित बैठक में जब कमलनाथ को पता चला कि गौतम अडानी ‘मैग्नीफिसेंट एमपी’ में नहीं आ रहे हैं, तो उन्होंने तुरंत अडानी को फोन लगा कर आग्रह किया कि वे किसी तरह समय निकाल कर मध्य प्रदेश आएँ। अडानी ने उन्हें बताया कि फ़िलहाल वह ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर हैं और ‘मैग्नीफिसेंट एमपी’ कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बन पाएँगे। हालाँकि, वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता और एमपी के सीएम कमलनाथ के आग्रह पर उन्होंने आश्वासन दिया कि वह अडानी समूह की तरफ़ से एक प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में भेजेंगे।

जनवरी 2019 में कमलनाथ ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित ‘वर्ल्ड इकनोमिक फोरम’ के इतर कई उद्योगपतियों से मुलाक़ात की थी, जिनमें गौतम अडानी भी शामिल थे। कमलनाथ रिलायंस समूह के चेयरमैन मुकेश अम्बानी से भी मिलने पहुँचे थे। मुकेश अम्बानी ने उन्हें मध्य प्रदेश में निवेश करने का आश्वासन दिया था। सवाल यह है कि जिस अम्बानी-अडानी को कॉन्ग्रेस ने चुनाव का मुद्दा बना दिया था, आज कॉन्ग्रेस नेता उन्हीं उद्योगपतियों के दर पर हाजिरी दे रहे हैं।

शीला दीक्षित की मौत के जिम्मेदार चाको: संदीप के आरोप के बाद कॉन्ग्रेस में उठी इस्तीफे की माँग

आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले दिल्ली पर करीब 15 साल तक शीला दीक्षित के नेतृत्त्व में राज करने वाली कॉन्ग्रेस की आतंरिक कलह अब सार्वजनिक हो गई है। एक ओर सभी दल चुनावों की तैयारी में जुट गए हैं तो वहीं दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस अपनी अंदरूनी कलह से निपटने की बजाय उसे सड़क पर ले आई है।

दरअसल दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की जुलाई में मृत्यु हो गई थी इसके बाद उनके बेटे संदीप दीक्षित ने दिल्ली में कॉन्ग्रेस के प्रभारी पीसी चाको को अपनी माँ शीला की मृत्यु का ज़िम्मेदार ठहराया था। इस मामले में संदीप ने पीसी चाको को एक कानूनी नोटिस भी भेज दिया है। संदीप ने चाको पर आरोप लगाते हुए कहा था कि उनकी पैदा की गईं राजनीतिक परिस्थितियों के चलते शीला तनाव में आई और उनकी मृत्यु हो गई। इसी सम्बन्ध में संदीप ने चाको को नोटिस भेजते हुए कानूनी कार्रवाई करने की भी बात कही है। हालाँकि, नोटिस को लेकर कॉन्ग्रेस नेता चाको का कहना है कि इस नोटिस में क्या है वह अभी कुछ कह नहीं सकते।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लोकसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस की हार के बाद समीक्षा के लिए एक कमिटी का गठन किया गया जिसकी रिपोर्ट को आधार बनाकर दिल्ली कॉन्ग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित ने सख्त कार्रवाई करते हुए दिल्ली में सभी जिला तथा ब्लाक स्तर की सभी कमिटियों को भंग कर दिया था। बताते हैं कि शीला के इस आदेश को पीसी चाको ने भंग कर पुरानी कमेटियों को बनाये रखने का आदेश दिया था जिसके बाद दोनों के बीच मतभेद गहरा गए थे।

बता दें कि इस पूरे घटनाक्रम के बीच कॉन्ग्रेस नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की तबियत ख़राब चल रही थी और वे अस्पताल में भर्ती थीं। हालाँकि, अस्पताल से छुट्टी मिलने के कुछ ही दिनों के भीतर शीला दीक्षित का निधन हो गया था। इस पूरे मामले में दिल्ली कॉन्ग्रेस के प्रभारी पीसी चाको ने मीडिया से बातचीत में संदीप की चिट्ठी मिलने की बात स्वीकारी है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस चिट्ठी को उन्होंने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी के पास भेज दिया है।

इसी मामले को लेकर पार्टी के कुछ नेताओं ने आनन-फानन में प्रेस कांफ्रेंस कर पीसी चाको के इस्तीफे की भी माँग की है, मगर इस पूरे मामले की जड़ यानी जिस चिट्ठी के चलते पूरा विवाद शुरू हुआ है उसमें ऐसा क्या लिखा है इस मुद्दे पर दोनों में से किसी ने भी अभी तक खुलकर कोई बात नहीं कही है। मामले में संदीप की चिट्ठी और आरोपों के पलटवार में दिल्ली कॉन्ग्रेस प्रभारी पीसी चाको ने अपना बचाव करते हुए कहा है कि संदीप ने उनपर जो आरोप लगाए हैं वो गंदे और बेहूदा हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक शीला दीक्षित ने अपनी मौत से ठीक एक दिन पहले कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष को चिट्ठी भेजी थी जिसमें उन्होंने लिखा था कि वह मानसिक तनाव में हैं, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो शीला ने इसमें लिखा था कि उन्हें लगातार पीसी चाको द्वारा परेशान किया जा रहा है, उनके हर राजनीतिक फैसले को पीसी चाको निरस्त कर देते हैं।

लहूलुहान बंगाल: मारे जा रहे BJP कार्यकर्ता, आखिर कब टूटेगी लिबरलों की चुप्पी

पश्चिम बंगाल में 1971 में कॉन्ग्रेस सत्ता में आई। मुख्यमंत्री बने सिद्धार्थ शंकर रे। इसके साथ ही बंगाल की राजनीति में एक ऐसा अध्याय शुरू हुआ जो किसी भी सभ्य और लोकतांत्रिक समाज का हिस्सा नहीं हो सकता।

राज्य में राजनीतिक हिंसा का दौर शुरू हुआ जो आज भी बदस्तूर जारी है। पहले कॉन्ग्रेस ने विपक्ष की आवाज दबाने के लिए इस हथियार का इस्तेमाल किया और कुछ सालों में खुद ही दफन हो गई। फिर आया वाम हिंसा का वो दौर जिसकी घटनाएँ आज भी रूह कॅंपा देती है। 1977 से 2011 के 34 साल के वामपंथी शासनकाल के राज्य में जितने नरसंहार हुए उतने शायद ही देश के किसी दूसरे राज्य में हुए हो।

इसके बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कॉन्ग्रेस सत्ता में आई तो लोगों को लगा कि राजनीतिक हिंसा का यह दौर अब समाप्त हो जाएगा। लेकिन, कुछ ही साल के भीतर तृणमूल भी इस हथियार का संगठित तरीके से इस्तेमाल करने लगी। खासकर, राज्य में बीजेपी के उभार के साथ।

बंगाल में राजनीतिक हिंसा में कितने बीजेपी कार्यकर्ता मारे गए हैं, इसका कोई आधिकारिक आँकड़ा नहीं है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार 2016 में बंगाल में सियासी हिंसा की कुल 91 घटनाएँ हुईं। 205 लोग इसका शिकार बने। 2015 में कुल 131 घटनाएँ हुईं थी, जिनमें कुल 184 लोगों को नुकसान पहुँचा। उससे पहले 2013 में सियासी झड़पों में कुल 26 लोगों की जानें गई थीं। गौर करने वाली बात है कि 2014 के लोकसभा चुनाव के साथ ही बंगाल में बीजेपी उभरती नजर आई थी।

इस साल हुए आम चुनावों में बीजेपी को बंगाल की 40 लोकसभा सीटों में से 18 सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी। नतीजों आने के चंद दिन के भीतर ही नॉर्थ परगना के काकीनाडा में भाजपा कार्यकर्ता चंदन शॉ की गोली मारकर हत्या कर दी। जून में 24 परगना में तीन बीजेपी कार्यकर्ताओं की गोली मार कर हत्या कर दी गई। आरोप टीएमसी कार्यकर्ताओं पर लगा। जून में ही कूचबिहार में भाजयुमो नेता आनंद पॉल की हत्या कर दी गई। जुलाई में भाजपा कार्यकर्ता काशीनाथ घोष की लाश नहर में मिली। ये तो चुनिंदा घटनाएँ हैं। असली हालात और भी भयावह है।

भाजपा महासचिव और पश्विम बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय के ट्विटर अकाउंट पर सरसरी नजर डालें तो ऐसी कई घटनाओं का ब्यौरा मिल जाता है। मसलन, विजयवर्गीय 12 अक्टूबर को ट्वीट कर बताते हैं कि हरलाल देबनाथ की टीएमसी के गुंडों ने गोली मार कर हत्या कर दी। 10 अक्टूबर को उन्होंने नादिया में पार्टी कार्यकर्ता सुप्रियो बनर्जी की हत्या को लेकर ट्वीट किया। इस ट्वीट के मुताबिक बीते 4 दिनों में बीजेपी के 8 कार्यकर्ताओं की टीएमसी के लोगों ने हत्या की थी। इससे एक दिन पहले 9 अक्टूबर को वीरभूम और नादिया में भाजपा कार्यकर्ता अनिमेष चक्रवर्ती और अहमद शेख की हत्या को लेकर उन्होंने ट्वीट किया था।

अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। अंदेशा जताई जा रही है कि हिंसा की यह आग और भड़क सकती है। फिर भी लिबरल मौन हैं। ममता बनर्जी सब कुछ ठीक होने का दावा कर रही। और भाजपा नेता ट्वीट कर आँकड़े गिना रहे हैं।