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अयोध्या: मुस्लिम पक्षकार का ‘मोल्डिंग ऑफ रिलीफ’ मीडिया में लीक होने पर नाराज हुए CJI, पूछा ये सवाल

अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में मुस्लिम पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला अपने पक्ष में झुकाने की कोशिशों में सोमवार (अक्टूबर 21, 2019) को ‘मोल्डिंग ऑफ रिलीफ’ पर हलफनामा दायर किया। इस हलफनामे में अपील की गई कि न्यायालय इस मुद्दे पर अपना फैसला सुनाते समय इस बात को ध्यान में रखे कि इससे आने वाली पीढ़ियाँ काफी प्रभावित होंगी। साथ ही इस फैसले से राज्यव्यवस्था पर भी फर्क़ पड़ेगा।

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट को ये हलफनामा एक बंद लिफाफे में दिया गया, लेकिन जब तक ये सीजेआई की टेबल पर पहुँचा, तब तक मीडिया में इसकी एक कॉपी पहुँच चुकी थी। दायर याचिका में मौजूद हर बिंदु मीडिया हाउस के पास था। जिसपर सफाई देते हुए मुस्लिम पार्टियों ने बताया कि उन्होंने पहले इस नोट को बंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को दिया, लेकिन बाद में इसे हर पार्टी में बाँट दिया।

हालाँकि, इस दाखिले से पहले मीडिया में लीक जानकारी पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई नाखुश दिखे। उन्होंने पूरे हलफनामे के मीडिया में लीक होने पर कहा, “ये हलफनामा मेरे टेबल पर बंद लिफाफे में हैं और यही इंडियन एक्स्प्रेस के मुख्य पेज पर भी। इसलिए इसे वहीं रहने दीजिए।”

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई ने इस दौरान मुस्लिम पक्षकारों से पूछा कि क्या उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को इसकी हलफनामे की कॉपी दी है? जिसपर उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले इस संबंध में अदालत में नोट जमा करवाया था, लेकिन बाद में इसकी एक कॉपी याचिकाकर्ताओं को दी गई।

यहाँ उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने हर पार्टी को तीन दिन का वक्त दिया था कि वे सील बंद लिफाफे में मोल्डिंग ऑफ रिलीफ पर अपना पक्ष दायर करवा सकते हैं। जिसके मद्देनजर निर्मोही अखाड़े ने नोट दाखिल कर मोल्डिंग ऑफ रिलीफ पर आपत्ति जताई थी। इसी के बाद मुस्लिम पक्ष ने रविवार को अपनी याचिका सार्वजनिक कर दी।

यहाँ बता दें कि मोल्डिंग ऑफ रिलीफ का मतलब एक प्रकार का सांत्वना पुरस्कार होता है। इस मामले में इस हलफनामे का मतलब है कि याचिकाकर्ता ने जो माँग कोर्ट से की है अगर वो नहीं मिलती तो विकल्प क्या हो जो उसे दिया जा सके।

दिवाली के दिन कश्मीर पर भारत विरोधी मार्च निकालने की तैयारी: खुद पाक मूल के मेयर ने जताई आपत्ति

ब्रिटेन की राजधानी लंदन में पाकिस्तान समर्थित समूहों और कुछ पाकिस्तानी नेताओं ने कश्मीर मुद्दे पर अगले रविवार (अक्टूबर 27, 2019) यानी दिवाली के दिन भारत विरोधी मार्च निकाले जाने की योजना बनाई है। जानकारी के मुताबिक ये विरोध मार्च 27 अक्टूबर को ब्रिटिश प्रधानमंत्री के आवास डाउनिंग स्ट्रीट के पास रिचमंड टेरेस से शुरू होकर भारतीय उच्चायोग भवन के बाहर इकट्ठा होना है।

कथित तौर पर बर्टन क्षेत्र में पाकिस्तान समर्थित समूहों और मस्जिदों ने मार्च में भाग लेने वाले लोगों को मुफ्त में मार्च स्थल तक ले जाने के लिए कोचों को किराए पर लिया है। उन्होंने जानबूझकर 27 अक्टूबर को हिन्दुओं द्वारा मनाए जाने वाले पर्व दिवाली को ‘कश्मीरियों के लिए काला दिवस’ बताने के लिए यह योजना बनाई है। बताया जा रहा है कि विरोध मार्च के दौरान भारतीय उच्चायोग के बाहर 5000 से 10000 लोगों के इकट्ठा होने की उम्मीद है, जहाँ भारतीय प्रवासी दल के सदस्य रोशनी का पर्व दिवाली मनाने के लिए एकजुट होंगे।

ब्रेंट के भारतीय मूल के सांसद नवीन शाह ने इस विरोध प्रदर्शन को लेकर संभावित हिंसक स्थितियों को लेकर लंदन के मेयर सादिक खान के समक्ष अपनी चिंता व्यक्त की थी। जिसके बाद 18 अक्टूबर को मेयर सादिक खान ने पत्र लिखकर कहा कि वो दिवाली के अवसर पर किए जाने वाले विरोध प्रदर्शन की निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के विरोध से ब्रिटेन की राजधानी लंदन में बँटवारा और तेज होगा। इसके साथ उन्होंने आयोजकों और इसमें शामिल होने वाले प्रदर्शनकारियों से विरोध मार्च रद्द करने की अपील की है।

लंदन के मेयर सादिक खान का पत्र

सादिक खान ने लिखा है, “मैं पूरी तरह से लंदन में भारतीय उच्चायोग के आसपास के क्षेत्र में दिवाली के शुभ दिन पर विरोध मार्च की योजना की निंदा करता हूँ।” खान ने आगे कहा कि मार्च के दौरान किसी तरह की हिंसा को रोकने के लिए उनका कार्यालय पुलिस के साथ मिलकर काम कर रहा है। इस पत्र में उन्होंने स्वतंत्रता दिवस और उसके बाद भी कई बार विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा का भी उल्लेख किया है।

हालाँकि, खान ने विरोध प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाने में असमर्थता जताई है। उन्होंने कहा कि केवल गृह सचिव ही विरोध पर प्रतिबंध लगा सकते हैं। इसलिए उन्होंने पत्र की एक प्रति गृह सचिव प्रीति पटेल और मेट्रोपॉलिटन पुलिस कमिश्नर क्रेसिडा डिक को भेज दी है। बताया जा रहा है कि इस भारत विरोधी मार्च में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कथित राष्ट्रपति सरदार मसूद खान और प्रधानमंत्री राजा मुहम्मद फारूक हैदर खान भी शामिल हो सकते हैं। गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 के निरस्त होने के बाद पाक समर्थकों ने कई बार विरोध प्रदर्शन और हिंसा की घटना को अंजाम दिया है।

लाइन में लगी बुजुर्ग महिलाओं को धक्का देकर पूर्व CM हुड्डा ने डाला वोट, ‘VVIP’ रवैये पर उठे सवाल

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वह वोट डालने के लिए अपनी बारी का इंतज़ार करने की बजाय आम नागरिको को हटाते दिख रहे हैं। दरअसल, आज हरियाणा में विधानसभा चुनाव हो रहा है, जहाँ सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कॉन्ग्रेस के बीच मुख्य मुक़ाबला है। माना जा रहा है कि कॉन्ग्रेस की तरफ से हुड्डा ही प्रमुख चेहरा हैं, वहीं भाजपा वर्तमान मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही है। हरियाणा विधानसभा चुनाव का परिणाम गुरुवार (अक्टूबर 24, 2019) को जारी किया जाएगा। इस बीच हुड्डा के वायरल हुए वीडियो से उनकी किरकिरी हो रही है।

इस वीडियो में दिख रहा है कि पोलिंग बूथ पर जब वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता हुड्डा वोट डालने पहुँचे, तब पहले से ही कई महिलाएँ वोट डालने के लिए कतार में लगी हुई थीं और अपनी बारी का इंतजार कर रही थी। हुड्डा ने उन महिलाओं को धक्के देकर किनारे किया और ख़ुद अपनी बारी का इंतजार करने की बजाय कतार में आगे आकर वोट डाला। वहाँ उपस्थित कुछ अन्य लोग, जो अधिकारी प्रतीत हो रहे हैं- हुड्डा का सहयोग करते हुए नियमों की अवहेलना कर रहे हैं।

लोगों ने सोशल मीडिया पर चुनाव आयोग को टैग कर पूछा कि क्या कॉन्ग्रेस नेताओं को वीवीआईपी ट्रीटमेंट देने की छूट दी गई है? लोगों ने हुड्डा पर नियमों की अवहेलना करने के लिए कार्रवाई करने की माँग की है। भूपिंदर सिंह हुड्डा ने जिस तरह से बुजुर्ग महिलाओं को किनारे कर के ख़ुद को कतार में आगे किया, उससे लोग उनके ‘वीवीआईपी’ वाले रवैये से नाराज़ हैं। वहीं मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कतार में लग कर अपनी बारी का इंतजार किया और फिर अपना वोट डाला।

हरियाणा में कई ओपिनियन पोल्स में भाजपा को कॉन्ग्रेस से काफ़ी आगे बताया जा रहा है। सभी सर्वे में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की फिर से सरकार बनती दिख रही है। चुनाव से ऐन वक़्त पहले हुड्डा ने बगावती तेवर अपना लिया थे, जिससे कॉन्ग्रेस असहज हो गई थी। उसके बाद कॉन्ग्रेस ने कुमारी शैलजा को प्रदेश अध्यक्ष बना कर हुड्डा को महत्वपूर्ण भूमिका दी। उस समय प्रदेश अध्यक्ष रहे अशोक तँवर और हुड्डा के बीच काफ़ी खींचतान चल रही थी, जिससे पार्टी परेशान थी। तँवर ने आलाकमान पर कॉन्ग्रेस को बर्बाद करने का आरोप लगाया है।

बिप्लव का अकाउंट हैक कर शरीफ़ और इमोन ने की पैगंबर पर टिप्पणी, मुस्लिमों के उत्पात में 4 मरे

बांग्लादेश में एक फेसबुक पोस्ट को लेकर हुए विवाद में चार लोगों की मौत और 50 के घायल होने की ख़बर है। दरअसल, एक हिन्दू व्यक्ति ने कथित रूप से फेसबुक पर ईश-निंदा (मुहम्मद पैगंबर पर) करने वाली पोस्ट की थी, जिसके विरोध में रविवार (20 अक्टूबर) को मुस्लिम लोगों ने प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में अचानक हिंसा भड़क गई, जिसके बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बांग्लादेश पुलिस ने गोलीबारी शुरू कर दी। इस गोलीबारी में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हो गए।

यह हिंसा ढाका से 116 किलोमीटर दूर भोला ज़िले में हुई है। ‘तौहिदी जनता’ के बैनर तले आयोजित हो रहे विरोध-प्रदर्शन में सैकड़ों मुस्लिमों ने हिन्दू व्यक्ति पर कार्रवाई किए जाने की माँग की। 

ढाका ट्रिब्यून की ख़बर के अनुसार, फेसबुक पोस्ट करने वाले शख़्स जिसकी पहचान बिप्लव चंद्र के रूप में हुई है उसने शुक्रवार (18 अक्टूबर) को पुलिस स्टेशन पहुँचकर दावा किया कि उसका फेसबुक अकाउंट हैक कर लिया गया था और विवादित पोस्ट उसने नहीं की। जिस समय बिप्लव पुलिस स्टेशन में अपनी शिक़ायत दर्ज करवा रहा था, उसी दौरान उसके पास हैकर्स का फोन भी आया और उससे रुपयों की माँग की। पुलिस ने मामले की कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए बिप्लव का फेसबुक अकाउंट चेक किया।

बिप्लव का फेसबुक अकाउंट चेक करते समय पुलिस ने पाया कि हैकर्स ने बिप्लव को धमकी भरे मैसेज किए थे। इसमें हैकर्स ने लिखा था कि अगर उसे उसका फेसबुक अकाउंट वापस चाहिए तो उसके लिए पैसे देने होंगे। पुलिस ने पटुआखली और बोहरानुद्दीन से दोनों हैकर्स को हिरासत में लिया है। दोनों हैकर्स की पहचान शरीफ़ और इमोन के रूप में हुई है, उनसे पूछताछ जारी है। इसके बाद पुलिस ने बिप्लव को भी हिरासत में ले लिया।

जानकारी के अनुसार, इस मामले में बारिसल डिवीजन पुलिस ने पाँच-जाँच समितियों का गठन किया है, जिसके नेतृत्व में बारिसल रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) ने घटना में पुलिस की भूमिका पर ग़ौर किया। समिति को सात कार्य दिवसों के भीतर एक रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा गया है। सर्बदोलिया मुस्लिम ओइक्या परिषद (ऑल पार्टी मुस्लिम यूनिटी काउंसिल) नामक एक स्थानीय मंच ने रविवार की दोपहर भोला प्रेस क्लब के सामने सुबह की घटना के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया, जिसमें उन्होंने छ: माँगें रखीं। इनमें फेसबुक पोस्ट करने वाले हिन्दू युवक को मृत्युदंड देने की सज़ा भी शामिल थी।

पुलिस ने बताया कि कहा कि बोहरानुद्दीन अपज़िला में स्थिति उस समय नियंत्रण से बाहर हो गई जब कुछ पुलिस कर्मियों को कमरे में बंधक बना लिया गया। स्थिति को क़ाबू में रखने के लिए इलाक़े में बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) की टुकड़ियों की तैनाती की गई।

भोला के पुलिस अधीक्षक सरकार एमडी कैसर ने चार लोगों की मौत की पुष्टि की है। इनमें मदरसा छात्र महबूब (14 वर्षीय), कॉलेज छात्र शाहीन (23 वर्षीय), महफूज़ (45 वर्षीय) और मिज़ान (40 वर्षीय) शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया है कि जो लोग मारे गए थे, वे उन्हीं के आदमी थे।

कॉन्ग्रेस नेता पर ‘ममता’: बंगाल पुलिस ने 14 घंटे तक नहीं दिया पानी, अंधेरे कमरे में स्टूल पर 9 घंटे बिठाए रखा

हाल ही में साइबर एक्ट के तहत गिरफ्तार किए गए कॉन्ग्रेस नेता सनमॉय बंदोपाध्याय को जमानत मिल गई है। उन्होंने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके सांसद भतीजे अभिषेक बनर्जी के निर्देश पर पुलिस हिरासत में अमानवीय यातनाएँ दिए जाने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि ‘बुआ-भतीजे’ के निर्देश पर उन्हें प्रताड़ित किया गया, क्योंकि सत्ताधारी टीएमसी की कारगुजारियों के खिलाफ वे लगातार सोशल मीडिया में पोस्ट कर रहे थे।

सनमॉय के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि बार-बार मॉंगने के बावजूद उन्हें 14 घंटे तक एक बूँद पानी नहीं दिया गया। अंधेरे कमरे में उन्हें 9 घंटे तक एक स्टूल पर बिठाकर रखा गया है। इस दौरान 40-50 डंडे भी उन्हें मारे गए।

कॉन्ग्रेस नेता ने आपबीती सुनाते हुए कहा, “मैंने उनसे बहुत बार पानी माँगा। मुझे दिख रहा था कि वो सब पानी पी रहे हैं, लेकिन मुझे 14 घंटे तक पानी नहीं दिया। मुझे एक स्टूल पर बैठाए रखा गया। सुबह 4:50 पर वे मुझे बाहर लेकर आए और गाड़ी में डाल दिया, लेकिन बार-बार पूछने पर भी ये नहीं बताया कि वे मुझे कहाँ लेकर जा रहे हैं।“

उन्होंने कहा, “अगर मैंने कुछ गलत लिखा, वे मुझपर मानहानि का केस कर सकते थे। लेकिन ये सब क्या है? मैं कॉन्ग्रेस नेता नेपाल महतो का ऋणी हूँ। अगर वे या पार्टी का कोई नेता यहाँ नहीं होता, तो मैं नहीं जी पाता। हिरासत के दौरान कई बार मुझे लगा कि मैं मर जाऊँगा।” उन्होंने जेल से निकलने के बाद कहा, “उन्होंने मुझे परेशान करने के लिए पुलिस का इस्तेमाल क्यों किया? मुझे नहीं पता कि ऐसी चीजें हिटलर और मुसोलिनी के शासन में भी होती थीं क्या?“

उल्लेखनीय है कि पत्रकार से राजनेता बने कॉन्ग्रेस के सनमॉय बंधोपाध्याय जून से लगातार ही यूट्यूब पर ममता सरकार की आलोचना करते हुए वीडियो डाल रहे थे। उन्हें 17 अक्टूबर को उनके निवास स्थान उत्तरी 24 परगना जिले के सोडेपुर से गिरफ्तार किया गया था। लेकिन अदालत के आदेश के बाद उन्हें पुलिस हिरासत से रिहा कर दिया गया। लोकसभा में कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि ममता सरकार ने टीएमसी सरकार की आलोचना में पोस्ट करने के कारण सनमॉय को गिरफ्तार किया। उन्होंने इसे असहिष्णुता का नायाब उदाहरण बताया।

कमलेश तिवारी मर्डर: हत्यारों पर ₹2.5 लाख ईनाम, तलाश में मदरसे और मुसाफिरखानों पर छापे

हिन्दू महासभा के पूर्व अध्यक्ष कमलेश तिवारी के संदिग्ध हत्यारे अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन की तलाश में यूपी पुलिस ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है। यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने दोनों पर ढाई-ढाई लाख रुपए के ईनाम का ऐलान किया है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में संदिग्ध हत्यारों के नेपाल भाग जाने की भी आशंका जताई गई है।

पुलिस ने दोनों की तलाश में यूपी के शाहजहॉंपुर में मुसाफिरखानों और मदरसों पर छापेमारी की है। ख़बर के अनुसार, पुलिस को एक होटल के सीसीटीवी से दोनों आरोपियों का फुटेज मिला है। दोनों की पहचान तिवारी के कार्यालय के बाहर लगे कैमरे और लखनऊ के खालसा होटल के कैमरों के सीसीटीवी फुटेज से हुई है। ये आरोपी शाहजहाँपुर में रुके थे लेकिन एसटीएफ के पहुँचने के भनक मिलते ही लापता हो गए।

एसटीएफ ने आरोपितों की कार के ड्राइवर को अरेस्‍ट किया है और उससे पूछताछ कर रही है। दोनों आरोपी इसी होटल में ठहरे थे। वे जिस कमरे में रुके थे वहॉं से खून लगा भगवा कुर्ता और बैग भी पुलिस ने बरामद किया था। डीजीपी ओपी सिंह ने दोनों के बारे में सूचना देने वालों को ढाई लाख रुपए का ईनाम दिया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार पुलिस की कई टीमें दोनों संदिग्धों की तलाश में यूपी के पड़ोसी राज्यो में डेरा जमाए हुए है। डीजीपी ने कहा है कि पुलिस इस मामले में काफी बारीकी से काम कर रही है। सभी पहलुओं की पड़ताल कर आगे बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि हम सभी राज्य के पुलिस प्रमुख के संपर्क में हैं। रविवार को कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात के डीजीपी से बात की थी। उन्होंने कहा कि इस हत्या में यूपी का भी कनेक्शन है और बाहर का भी। हम सभी सूचनाओं का विश्लेषण कर रहे हैं किसी पहलू से इनकार नहीं किया जा सकता। बिजनौर के मौलानाओं से भी लगातार पूछताछ चल रही है।

बताया जा रहा है कि संदिग्ध हत्यारे कानपुर स्टेशन पर उतरने के बाद सड़क के रास्ते लखनऊ पहुंचे थे। कानपुर रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी से इसकी पुष्टि हुई है। कमलेश तिवारी की हत्या के बाद हरदोई, बरेली और पीलीभीत में उनका लोकेशन मिला था। हत्या को अंजाम देने के बाद दोनों ने बरेली में रात बिताई थी। हत्या के दौरान मोइनुद्दीन के दाहिने हाथ में चोट लगी थी और उसने बरेली में इसका उपचार कराया। पीलीभीत के एक नंबर पर भी हत्यारों ने बात की थी।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, होटल से निकलने के दौरान अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन ने बाबा हजरत अब्बास की दरगाह और इमामबाड़ा का पता पूछा था। दोनों ने कहा था कि उन्हें जगह पर घूमने जाना है। बताया जा रहा है कि दोनों हत्यारों ने होटल के कर्मचारियों से बरेली जाने वाली ट्रेन के समय के बारे में भी पूछताछ की थी।
यह भी कहा जा रहा है कि लखनऊ, सीतापुर, कानपुर, बरेली, गाजियाबाद, दिल्ली एनसीआर और अंबाला में भी हत्यारों के सहयोगी मौजूद हैं।

साथ ही ये आशंका जताई जा रही है कि संदिग्ध हत्यारे अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन नेपाल भाग गए हैं। हालाँकि जाँच की जा रही है और इसके मद्देनजर सुरक्षाबलों को अलर्ट कर दिया गया है। वहीं गुजरात एटीएस द्वारा सूरत से गिरफ्तार तीनों आरोपितों मौलाना मोहसिन शेख, फैजान और राशिद अहमद पठान को हवाई मार्ग से गुजरात के अहमदाबाद से लखनऊ लाया जा रहा है।

पुलिस ने मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए रविवार (अक्टूबर 20, 2019) को राशिद की माँ और अशफाक की पत्‍नी से भी पूछताछ की। राशिद की माँ शेरिन फातिमा का कहना है कि वो उन दोनों के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानती। पूछताछ में खुलासा हुआ कि कमलेश तिवारी की नृशंस हत्‍या को मौलाना मोहसिन ने शरियत कानून के कत्‍ल ए वाजिब के सिद्धांत के तहत जायज ठहराया था। उसने राशिद के भाई  मोईनुद्दीन और अशफाक को इसके लिए तैयार किया। तिवारी की 18 अक्टूबर को उनके कार्यालय में हत्या कर दी गई थी।

1 लाख रोहिंग्याओं को बांग्लादेश भेज रहा ऐसी जगह जिसके चारों ओर है पानी ही पानी

रोहिंग्याओं को बांग्लादेश अपने तट से दूर एक बाढ़ग्रस्त द्वीप पर भेजना शुरू करेगा। बताया जा रहा है कि कई हजार शरणार्थी इसके लिए तैयार भी हो गए हैं। बांग्लादेश के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। कॉक्स बाज़ार में स्थित शरणार्थी शिविरों में भारी भीड़ का हवाला दे बांग्लादेश करीब 1,00,000 शरणार्थियों को यहॉं से भेजना चाहता है। फ़िलहाल, शरणार्थी शिविरों में म्यामांर से आए 10 लाख से अधिक लोग रह रहे हैं।

ख़बर के अनुसार, कॉक्स बाज़ार में स्थित राहत और प्रत्यावर्तन आयोग के प्रमुख महबूब आलम तालुकर ने कहा, “हम अगले महीने की शुरुआत तक पुनर्वास शुरू करना चाहते हैं।” उन्होंने न्यूज़ एजेंसी रायटर्स को बताया, “शरणार्थियों को विभिन्न चरणों में स्थानांतरित किया जाएगा।”

उन्होंने कहा, “हमारे अधिकारी उन शरणार्थियों की सूची तैयार कर रहे हैं जो वहाँ जाने के इच्छुक हैं।” अधिकारी ने बताया कि शनिवार तक 7,000 शरणार्थियों ने वहाँ स्थानांतरित होने की सहमति दी थी। ख़बर के अनुसार, चार बच्चों के 50 वर्षीय पिता नूर हुसैन ने कहा, “मैं जाने के लिए तैयार हूँ। यहाँ (लेडा शिविर में) बहुत भीड़भाड़ है। भोजन और आवास की समस्याएँ हैं।”

फ़िलहाल, इस मसले पर संयुक्त राष्ट्र की टिप्पणी नहीं आई है। लेकिन, बांग्लादेशी अधिकारियों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि अगले कुछ हफ्तों में एक प्रतिनिधिमंडल द्वीप का दौरा करेगा। वहीं, कुछ मानवाधिकार समूहों ने बांग्लादेश की इस योजना पर चिंता व्यक्त की है, क्योंकि द्वीप दूरस्थ है और चक्रवात से तबाही का ख़तरा है। इसके अलावा, कई शरणार्थी सरकार के इस क़दम का विरोध कर रहे हैं, जिससे किसी नए संकट के पैदा होने की आशंका है।

जनवरी में दौरा करने वाले संयुक्त राष्ट्र के एक मानवाधिकार अन्वेषक ने कहा कि अगर रोहिंग्याओं को द्वीप पर ले जाया जाता है तो उनके जीवन को ख़तरा हो सकता है। म्यांमार में मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष संबंध यांगहे ली ने कहा, “मेरी यात्रा के बाद भी कई चीजें हैं जो मेरे दौरे के बाद भी अज्ञात हैं, उनमें से प्रमुख यह है कि द्वीप वास्तव में रहने योग्य है या नहीं।”

जेल में बैठकर J&K में लोगों को बंदूक उठाने के लिए भड़का रहे हैं नेता: राम माधव

जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 के निष्क्रिय होने के बाद पहली बार घाटी का दौरा करने पहुँचे भाजपा महासचिव राम माधव ने श्रीनगर में पार्टी के एक कार्यक्रम के दौरान अराजकता फैलाने वालों को आगाह किया। उन्होंने कहा, जो कोई भी जम्मू-कश्मीर में शांति व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास करेगा उसे जेल भेज दिया जाएगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने उन नेताओं पर निशाना साधा, जो घाटी में जनता को भ़ड़काने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “कुछ नेता जेल में रहकर लोगों को संदेश भेज रहे हैं कि ‘बंदूक उठाकर अपने आपको बलिदान करो।’ ऐसे नेताओं से लोगों को कहना चाहिए कि वे खुद आगे आए और पहले अपना बलिदान दें।”

भाजपा महासचिव ने कहा कि अब तक जम्मू-कश्मीर में सब कुछ कुछ परिवारों और चुनिंदा राजनेताओं के लिए किया जाता रहा। लेकिन अब जो भी होगा वह राज्य के लाखों परिवारों के हित को ध्यान में रखकर होगा। बीजेपी नेता ने कहा, “अब जम्मू-कश्मीर में ‘शांति और विकास’ 2 ही रास्तों पर चलकर कार्य होंगे और जो कोई भी इस मार्ग पर बाधा डालने का प्रयास करेगा। उससे सख्ती से निबटा जाएगा।”

राम माधव ने बताया कि प्रदेश में शांति-व्यवस्था को नुकसान पहुँचाए बिना कोई भी अपने राजनैतिक कार्यों को कर सकता है। लेकिन जो इसे बिगाड़ेगा वह जेल में जाएगा। अब तक घाटी के लोगों का अपने राजनैतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करने वाले नेताओं पर भी राम माधव ने निशाना साधा। उन्होंने कहा, “पहले राजनेता लोगों को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब हम ऐसा नहीं होने देंगे।” उनकी मानें तो अगर प्रदेश में विकास और शांति के लिए 200-300 लोगों को जेल में भी भेजना पड़ा, तो वे उसके लिए भी तैयार हैं।

उन्होंने कहा, “आर्टिकल 370 के खत्म होने के बाद से कहा जा रहा है कि प्रदेश की नौकरियाँ बाहरी राज्यों के लोगों को मिल जाएँगी, लेकिन मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि जम्मू-कश्मीर में उत्पन्न होने वाली हर एक नौकरी यहाँ के स्थानीय लोगों को ही दी जाएगी।”

गोवा की युवती से गैंगरेप: 4000 लोगों से पूछताछ के बाद DPS में पढ़ा अब्दुल खालिद पकड़ा गया

पिछले महीने दिल्ली के आईपी पार्क के पास गोवा की एक लड़की से गैंगरेप किया गया था। मामले का मुख्य आरोपित अब्दुल खालिद पकड़ा गया है। करीब 4 हजार लोगों से पूछताछ और जाँच के बाद उसकी गिरफ्तारी हुई है। साउथ-ईस्ट दिल्ली के डीसीपी चिन्मय बिश्वाल ने यह जानकारी दी।

मामले में एक अन्य आरोपित मुन्ना फिलहाल फरार है। पुलिस ने बताया आरोपित अब्दुल सराय काले खॉं इलाके में छिपा था। करीब चार हजार लोगों से पूछताछ के बाद पुलिस उस तक पहुॅंचने में कामयाब हो पाई।

जानकारी के मुताबिक अब्दुल ने ईडब्ल्यूएस कैटिगरी के तहत मथुरा रोड स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल से 10वीं तक की पढ़ाई की थी। लड़की के साथ रेप करने के बाद पुलिस को चकमा देने लिए उसने अपनी दाढ़ी साफ़ करवा ली थी। पुलिस अब अब्दुल के दूसरे साथी मुन्ना की तलाश कर रही है।

बता दें कि गैंगरेप की वारदात 16 सितम्बर की है। गोवा से दिल्ली आई युवती घूमने रात के वक्त सराय काले खॉं के पास स्थित इंद्रप्रस्थ पार्क बस स्टॉप पर बस का इंतजार कर रही थी। इसी दौरान अब्दुल खालिद और मुन्ना उसे खींचकर बस स्टॉप के पीछे की झाड़ियों में ले गए और उसके साथ रेप किया। विरोध करने पर आरोपितों ने पीड़िता की पिटाई भी की।

पीड़िता की आवाज सुन एक बाइक सवार मौके पर पहुॅंचा। उसे देख आरोपित फरार हो गए। बाइक सवार ने फोन कर घटना की सूचना पुलिस को दी। सामूहिक दुष्कर्म और पिटाई की वजह युवती बुरी तरह से घायल हो गई थी। डीसीपी चिन्मय बिश्वाल ने बताया कि मौके से पीड़िता के फटे कपड़े, चप्पल और गमछा (तौलिया) बरामद किया गया था। खालिद ने कबूल किया है कि ये गमछा उसका ही था।

सास शाहीन के साथ लिव इन में था शाहरुख ख़ान, आपसी विवाद के बाद गला रेत फरार

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक शख्स ने रविवार (20 अक्टूबर) की सुबह तड़के अपनी लिव इन पार्टनर की गला रेतकर हत्या कर दी। दोनों के बीच सास और दामाद का रिश्ता बताया जाता है। घटना की सूचना पाते ही मौक़े पर पहुँची पुलिस ने शव को क़ब्ज़े में लेकर पोस्टमार्टम के लिए हमीदिया अस्पताल भिजवा दिया। घटना भोपाल के अशोका गार्डन इलाक़े की है।

पुलिस ने बताया कि अशोक विहार कॉलोनी में शाहीन (42 वर्षीय) नाम की एक महिला शाहरुख ख़ान उर्फ़ कालू (26 वर्षीय) के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी। शनिवार (19 अक्टूबर) को रात के समय शाहीन और शाहरुख़ के बीच झगड़ा हो गया। झगड़े की वजह शाहीन का देह व्यापार करना बताया गया।

शाहरुख ने शाहीन को देह व्यापार नहीं करने और उसे इस दलदल से बाहर आने के लिए कई बार कहा था। लेकिन शाहीन को शाहरुख की यह बात हमेशा नागवार गुज़रती थी और वो उसकी बात मानने से इनकार कर देती थी। रविवार को इसी मुद्दे पर विवाद इतना बढ़ गया कि शाहरुख ने शाहीन की गला रेत कर हत्या कर दी। पुलिस के मुताबिक शाहीन को पिछले साल ही देह व्यापार के आरोप में गिरफ़्तार भी किया गया था। फ़िलहाल, पुलिस फ़रार शाहरुख की तलाश में जुटी हुई है।

ख़बर के अनुसार, एएसपी साहू ने बताया कि आरोपित शाहरुख ने मृतका की बेटी से निक़ाह किया था। एक साल में ही दोनों का तलाक़ हो गया था। इसके बाद शाहीन की बेटी अपनी नानी के साथ ऐशबाग में रहने लगी थी। वहीं शाहरुख अपनी सास के साथ लिव इन में रहने लगा। एक माह पहले ही वे अशोक विहार इलाक़े में रहने पहुँचे थे। महिला की माँ और पिता से ज़्यादा बातचीत नहीं थी।