मध्यप्रदेश के उज्जैन जिला न्यायलय ने प्रतिबंधित संगठन सिमी के सरगना आतंकी सफदर नागौरी और उसके साथी मोहम्मद मुनीर को धार्मिक भावना भड़काने के आरोप में शनिवार को 3-3 साल की सजा सुनाई। दोनों पर अदालत ने एक-एक हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। उज्जैन के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट अफजल खान ने शनिवार को धारा 153 में इन दोनों आतंकियों को दोषी करार दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों आतंकी भोपाल के रहने वाले हैं। दोनों ने करीब 21 साल पहले अपने एक और साथी के साथ उज्जैन के तोपखाना क्षेत्र में सभा को संबोधित करते हुए दूसरे मजहब वालों के ख़िलाफ़ युवाओं की धार्मिक भावना भड़काने वाले भाषण दिए थे। मामले में तीसरे आरोपित सैयद सलाउद्दीन की मौत हो चुकी है।
नागौरी फ़िलहाल अहमदाबाद की जेल में बंद है। वहीं, मुनीर फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार उपसंचालक अभियोजन डॉ. साकेत व्यास ने बताया कि 5 नवंबर 1998 को तोपखाना में धार्मिक भावना भड़काने वाले भाषण देने पर महाकाल थाना पुलिस ने सफदर नागौरी, मुनीर और सैयद सलाउद्दीन के खिलाफ मामला दर्ज किया था। भाषण की ऑडियो जाँच के बाद तीनों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए गए थे।
इसके बाद पुलिस ने अपनी जाँच में नागौरी के आतंकवादी संगठनों से संबंधों का भी खुलासा किया था। पुलिस ने नागौरी को पीथमपुर से आतंकी साथियों के साथ एक कमरे में आतंकी गतिविधियों में लिप्त पाकर गिरफ्तार किया था।
यूॅं तो गॉंधी परिवार को वह फेविकोल माना जाता है जिसके सहारे पूरी पार्टी चिपकी रहती है। यही वजह है कि आम चुनावों के बाद जब राहुल गॉंधी ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया तो कॉन्ग्रेसियों ने परिवार के बाहर से अपना नेता चुनने की बजाए फिर से सोनिया गॉंधी के ही हाथों में कमान सौंप दी, जबकि इस्तीफा देते वक्त राहुल ने साफ किया था कि पार्टी का अगला अध्यक्ष परिवार से नहीं होना चाहिए।
लेकिन, अब लगता है कि गॉंधी परिवार के भीतर भी सब कुछ सही नहीं चल रहा है। राहुल के इस्तीफे के बाद उनकी बहन प्रियंका ने भाई की भावनाओं की अनदेखी कर अध्यक्ष बनने के लिए पर्दे के पीछे से किस तरह से लॉबिंग की थी, इसकी खबरें पहले भी सामने आ चुकी है। हालॉंकि आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद बदले माहौल के कारण उन्होंने आखिरी क्षणों में अपने पॉंव पीछे कर लिए थे।
अब अचानक से राहुल गॉंधी के बैंकॉक जाने से परिवार के भीतर खटपट के कयासों को फिर से बल मिल गया है। राहुल ऐसे वक्त में बैंकॉक गए हैं, जब महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने में करीब दो हफ्ते का ही समय बचा है। दोनों जगहों पर चुनाव प्रचार के लिए स्टार प्रचारकों की लिस्ट में उनका नाम था।
राहुल के बैंकॉक जाने की खबर शनिवार देर शाम को आई। देखते ही देखते बैंकॉक ट्विटर पर टॉप ट्रेंड करने लगा। राहुल के बैंकॉक जाने पर तंज कसते हुए बीजेपी आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने ट्वीट किया, “क्या आप भी हैरान हैं कि बैंकॉक क्यों ट्रेड कर रहा है।” सोशल मीडिया में कई यूजर्स ने टिप्पणी की कि चुनाव में भाजपा अपने स्टार प्रचारक की कमी महसूस करेगी।
इस खबर के सामने आने से पहले तक कॉंन्ग्रेस की अंदरुनी लड़ाई सुर्खियों में थी। हरियाणा प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे अशोक तंवर ने यह कहते हुए पार्टी छोड़ दी कि राहुल के करीबी लोगों की राजनीतिक हत्या हो रही है। उनसे पहले मुंबई कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे संजय निरुपम ने भी कहा था कि पार्टी में उन नेताओं को किनारे लगाया जा रहा है जिन्हें राहुल ने आगे बढ़ाया था।
सोनिया ने अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर जब पार्टी की कमान संभाली थी तो उम्मीद की जा रही थी कि नेताओं के पार्टी छोड़ने का सिलसिला थमेगा और भीतरी कलह रुकेगी। लेकिन, हो ठीक इसके उलट रहा है। उनके नेतृत्व संभालने के बाद त्रिपुरा कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रद्योत देब बर्मन और झारखंड के अध्यक्ष अजय कुमार ने पार्टी को अलविदा कह दिया।
इसकी बड़ी वजह वे ओल्ड गार्ड बताए जाते हैं जिनसे अपने पूरे कार्यकाल राहुल भी जूझते नजर आए थे। दीगर है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की चेतावनियों के बावजूद राहुल ने तंवर को उनके पद से नहीं हटाया था। लेकिन, सोनिया के आते ही तंवर की छुट्टी हो गई और हुड्डा को आगे किया गया। इससे पहले ओल्ड गार्ड के कारण ही बीते साल मध्य प्रदेश और राजस्थान में राहुल अपने खास माने जाने वाले युवा नेताओं ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट को प्रदेश की कमान नहीं सौंप पाए थे।
कॉन्ग्रेस में ओल्ड गार्ड और न्यू गार्ड की लड़ाई 2007 में राहुल के पार्टी महासचिव बनने के बाद ही शुरू हो गई थी। 2014 के आम चुनावों से पहले राहुल ने युवाओं को पूरे जोर-शोर से आगे भी बढ़ाया था। इनमें मीनाक्षी नटराजन, अशोक तंवर, शनीमोल उस्मान, कनिष्क सिंह, अजय माकन, संजय निरुपम, दिव्या स्पंदना, सुष्मिता देव, शर्मिष्ठा मुखर्जी, मिलिंद देवड़ा, सचिन पायलट, जितेन प्रसाद, ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे कई नाम शामिल थे।
शुरुआत में लगा कि ओल्ड गार्ड से राहुल पार पाने में कामयाब भी हो गए। लेकिन, पंजाब में अमरिंदर सिंह के सामने उनके सरेंडर से ओल्ड गार्ड फिर से पार्टी में प्रभावी होने लगे। राजस्थान और मध्य प्रदेश में इसका नतीजा भी दिखा। 2019 के आम चुनावों में करारी शिकस्त के बाद ओल्ड गार्ड दोबारा मुखर हो गए। और अब सोनिया की वापसी के साथ ऐसा लगता है कि ओल्ड गार्ड राहुल के करीबियों से पुराना हिसाब चुकता करने में लग गए हैं।
इससे कॉन्ग्रेस की मुश्किलों में इजाफा होना तय है। जैसा कि तंवर ने इस्तीफे के बाद कहा, “वास्तव में कॉन्ग्रेस के भीतर ही कुछ लोग हैं जो भारत को कॉन्ग्रेस मुक्त करना चाहते हैं।”
उत्तर प्रदेश के रामपुर से सपा सांसद एवं कई आपराधिक मामलों के आरोपित आजम खान कल यानी शनिवार (अक्टूबर 5, 2019) को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम के सामने पूछताछ के लिए पेश हुए। 2 घंटे से ज्यादा उनसे पूछताछ की गई।
पूछताछ के बाद आजम खान ने बताया, “इन मामलों के संबंध में मुझसे 2 बार पहले भी पूछताछ हो चुकी है। हाल ही में मुझे 4 बार जाँच के लिए बुलाया गया। इसका मतलब है कि अब तक कुल 6 बार मेरी जाँच की जा चुकी है । अब बस बहुत हुआ।”
उन्होंने कहा, “मैंने अब तक कम से कम 3 बार उनके सवालों के जवाब लिखित में दिए हैं और साथ ही मैंने उपयुक्त दस्तावेज भी दिखाए हैं।”
Azam Khan is currently facing a slew of criminal cases in connection with land encroachments by the Mohammad Ali Jauhar University.https://t.co/UiwWH5x6ZX
बता दें कि शनिवार को रामपुर की कोर्ट से भी आजम खान को बड़ा झटका मिला। कोर्ट ने आजम खां की आठ मामलों में अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। दलीलें सुनने के बाद आजम खान की याचिका को खारिज कर दिया गया। इसमें सभी मामले शहर कोतवाली से संबंधित हैं।
इससे पहले आजम खान 2 अक्टूबर को अपने परिवार के साथ जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले के संबंध में बयान दर्ज करवाने के लिए एसआईटी के सामने पेश हुए थे। इस दौरान जाँच टीम ने सपा सांसद से 150 सवाल पूछे थे। जिसके बाद उन्होंने बयान दिया था कि उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।
वे निगम भर्ती घोटाले मामले में एसआईटी जाँच के बाद भी मीडिया से पूछते हुए नजर आए थे कि क्या ऐसा हो सकता है कि चार बार मंत्री और 9 बार विधायक रह चुका इंसान बकरी चुराता फिरे। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके ऊपर दर्जनों मुकदमे पिछला लोकसभा चुनाव जीतने के बाद से ही लादे जा रहे हैं, जबकि योगी सरकार तो ढाई साल से है।
गौरतलब है कि इसी गुरुवार (अक्टूबर 3, 2019) को रामपुर की जिला अदालत ने आजम खान, उनकी पत्नी तन्जीन फातिमा और बेटे अब्दुल्लाह आजम पर फर्जी जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने के मामले में जमानती वारंट जारी किया है। जिसकी सुनवाई अब 29 अक्टूबर को होगी।
कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी और बजरंग दल पर निशाना साधते हुए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के लिए जासूसी करने का बड़ा आरोप लगाया है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि बीजेपी और बजरंग दल के लोग पैसा लेकर आईएसआई के लिए जासूसी करते रहे हैं।
एक कार्यक्रम में बोलते हुए दिग्विजय ने कहा, “ऐसे कुछ लोग जो कि बजरंग दल और बीजेपी के पदाधिकारी थे और आज भी हैं। आईएसआई के लिए जासूसी करते हुए पकड़े गए थे। भाजपा के राज में उनकी जमानत हो गई। ये जमानत कैंसिल होना चाहिए। उन पर मुकदमा चलना चाहिए। देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए।”
#WATCH Digvijaya Singh, Congress: Aise kuch log jo ki Bajrang Dal aur BJP ke pad-aadhikari the, aaj bhi hain, ISI ke liye jasoosi karte huye pakde gaye the, unki zamanat hogai, un par mukadma chalna chaiye. Deshdroh ka mukadma chalna chahiye… pic.twitter.com/S7eI9v36Um
दिग्विजय ने आगे कहा, “एक तरफ बीजेपी पाकिस्तान के खिलाफ जंग की बात कहते हुए रोज हमें राष्ट्रवाद का संदेश देती है। ये आखिर कैसा राष्ट्रवाद है कि उन्हीं के लोग ISI से पैसा लेकर भारत के लिए जासूसी करें। इसका स्पष्टीकरण उन्हें देना चाहिए।”
उल्लेखनीय है कि दिग्विजय सिंह ने हाल ही में बीजेपी-RSS पर कई हमले बोले हैं। बीते दिनों दिग्विजय सिंह ने एक बयान में कट्टर हिंदुत्व को खतरनाक बताया था। उन्होंने कहा था, “पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस्लामोफोबिया और कट्टरता का जिक्र किया था। हिंदुओं की भी कट्टरता मुस्लिमों की कट्टरता की तरह ही खतरनाक है।” उन्होंने कहा था कि अगर बहुसंख्यक जनसंख्या का सांप्रदायीकरण होता है तो देश को इससे बचाना मुश्किल होगा।
इसके साथ ही उन्होंने भगवा वस्त्र पर निशाना साधते हुए यहाँ तक कह डाला था कि भगवा वस्त्र पहनकर लोग मंदिरों के अंदर बलात्कार कर रहे हैं। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा था, “आज भगवा वस्त्र पहनकर लोग चूरन बेच रहे हैं, भगवा वस्त्र पहनकर बलात्कार हो रहे हैं, मंदिरों में बलात्कार हो रहे हैं। क्या यही हमारा धर्म है? हमारे सनातन धर्म को जिन लोगों ने बदनाम किया है, उन्हें ईश्वर माफ़ नहीं करेगा।”
बीते दिनों दिल्ली में जैश के 4 आतंकियों के घुसने की सूचना मिलने के बाद से राष्ट्रीय राजधानी अलर्ट पर है। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं। खुफिया एजेंसियों ने खुलासा करते हुए बताया है कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने दिल्ली दहलाने के लिए लश्कर-ए-तैयबा और हरकत-उल-मुजाहिद्दीन के साथ गठजोड़ कर लिया है।
खबर के अनुसार लश्कर और हरकत के स्लीपर सेल के साथ मिल जैश काम कर रहा है। इनकी अगुआई जैश कमांडर अबु उस्मान कर रहा है। उसने ही बीते सप्ताह इस संबंध में जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा इलाके के मीर मोहल्ले में सेब के बाग में एक बैठक की थी। इस दौरान उसने जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकियों को तबाही मचाने का आदेश दिया था। जिसकी सारी जानकारी खुफिया इकाइयों ने दिल्ली पुलिस और बाकी सुरक्षा एजेंसियों को मुहैया कराई थी। बताया गया था कि बैठक में आतंकी अबू उस्मान ने आतंकी हमलावरों से कहा कि कश्मीर के लोगों को जल्द अच्छी खबर सुनने को मिलेगी और ये अच्छी खबर जम्मू एवं दिल्ली में बड़े धमाकों के साथ आएगी।
दिल्ली में आतंकी गतिविधि को अंजाम देने के लिए गुप्त योजना पाँच दिन पहले क़रीब 900 किलोमीटर दूर कश्मीर में सेब के बाग में तैयार हुई। इसका खाका आतंकी संगठन जैश के जम्मू-कश्मीर कमांडर अबु उस्मान ने तैयार किया और इस गुप्त योजना को नाम दिया ‘डी’।https://t.co/3aiBGd7tvn
उल्लेखनीय है कि इस सूचना के मिलने के बाद से ही दिल्ली में छापेमारी चल रही है। जैश के इस मॉड्यूल से जुड़ी हर तरह की सूचना जुटाई जा रही है।
खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद IB ने दिल्ली पुलिस को NCR में आतंकी हमलों को लेकर अलर्ट किया
# रिपोर्ट में कहा गया है कि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के साथ अल-उमर-मुजाहिदीन ISI का नया पोस्टर बॉय है और घाटी के बाहर आतंकी हमले करने में सक्षम है pic.twitter.com/JgLZG1AWsI
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की 18 टीम के 105 पुलिसकर्मियों इस मिशन में लगे हैं। दिल्ली में अब तक 53 जगहों पर छापेमारी की गई है। 69 संदिग्धों से पूछताछ की गई है। इनमें 7 लोगों के फोन और उनके जु़ड़े दस्तावेजों की भी बारीकी से जाँच हुई है। पुलिस को संदिग्धों की गतिविधि पर शक है। इसलिए पिछले 3 दिनों में 5 बार इनसे पूछताछ हुई है। पुलिस ने करीब 12 मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल्स भी निकाली है, जबकि कुछ मोबाइल नंबरों को निगरानी पर लगाया गया है।
ख़ुफ़िया इनपुट्स के मुताबिक जैश के कमांडर अबू उस्मान के नेटवर्क से जुड़ा मॉड्यूल दिल्ली के घनी आबादी वाले इलाके में घुसकर अपने मनसूबों को अंजाम देने की फिराक में है। इनका मकसद त्योहारों में भीड़भाड़ वाले इलाके में तबाही मचाने का है। इनके निशाने पर दिल्ली में चार प्रमुख बाजार हैं। इनमें दक्षिणी दिल्ली का एक, मध्य दिल्ली का 2 और यमुनापार का एक बाजार शामिल है।
आतंकियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने अब तक सीलमपुर और उत्तर पूर्वी दिल्ली के 2 स्थानों एवं जामिया नगर और सेंट्रल दिल्ली के पहाड़गंज स्थित 2 जगहों पर छापेमारी की है। इसके अलावा 2 लोगों को पूछताछ के लिए भी हिरासत में लिया गया है।#Delhihttps://t.co/FkRaXkfsBG
उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में बेटी के सामने ही परिवारवालों ने दामाद को जलाकर मार डाला। घटना मेरठ के थाना लिसाड़ी गेट की है। फरहीन नाम की युवती के शौहर इंतजार को ससुरालवालों ने कथित तौर पर मिट्टी का तेल छिड़क आग लगा दी। इंतजार की चीख-पुकार सुनकर इलाके के लोग मौके पर पहुँचे और आग बुझा उसे अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस वारदात को अंजाम देने के बाद से इंतजार के ससुराल वाले घर से फरार हैं। उन्होंने बताया कि इंतजार इंडियन गैस एजेंसी में गाड़ी चलाने का काम करता था। नगर पुलिस अधीक्षक एएन सिंह ने शुक्रवार (अक्टूबर 4, 2019) को इस घटना के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि मेरठ के थाना इचौली क्षेत्र निवासी युवक इंतजार का निकाह तकरीबन 3 साल पहले लिसाड़ी गेट निवासी फरहीन नाम की युवती से हुआ था। इनके बीच आपस में कुछ ठीक नही चल रहा था। 3 अक्टूबर को फरहीन के परिजन इंतजार के घर पहुँचे और उसे अपने साथ ले आए। फरहीन के पीछे-पीछे इंतजार भी ससुराल पहुँच गया और फिर 4 अक्टूबर को संदिग्ध परिस्थितियों में जलने के कारण उसकी मौत हो गई।
Uttar Pradesh: बेटी के सामने ही घरवालों ने दामाद को जला कर मार डाला, वारदात के बाद हुए फरार https://t.co/FgS7OvLKqu
इंतजार के परिजनों ने फरहीन के परिजनों पर आरोप लगाया है कि बीबी को घर वापस ले जाने को लेकर इंतजार की कहासुनी हो गई। इसके बाद फरहीन के सामने ही ससुरालवालों ने इंतजार पर मिट्टी का तेल छिड़क उसे आग लगा दी। आग लगने से चिल्लाता हुआ इंतजार गली में आ गिरा, मोहल्ले के लोगों ने उसकी आग बुझाई और पुलिस को भी मामले की सूचना दी। मामले में परिजनों ने थाना लिसाड़ी गेट में पत्नी और साले के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है। नगर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पुलिस मामले की जाँच कर रही है।
लंदन के ‘स्कूल ऑफ ओरिएण्टल एंड अफ्रीकन स्टडीज (SOAS)’ यूनिवर्सिटी में कविता कृष्णन सहित कई वामपंथी कार्यकर्ताओं को उस समय बेइज्जती का सामना करना पड़ा, जब ‘Gay For J&K’ का बैनर लिए कुछ लोगों उनके कार्यक्रम में घुस आए। इन लोगों ने वामपंथी एक्टिविस्ट्स के कार्यक्रम को रोक दिया और उनका विरोध किया। वामपंथी कार्यकर्ताओं ने ये कार्यक्रम मोदी सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के विरोध में आयोजित किया था, जहाँ वे लोगों को बता रहे थे कि कैसे ‘भारत सरकार का निर्णय ग़लत है और कश्मीर पर अत्याचार हो रहा है।’
‘गे फॉर जेके’ के कार्यकर्ताओं ने कविता कृष्णन सहित अन्य वामपंथियों को आइना दिखाते हुए उन्हें बताया कि भारत का संविधान उन्हें मान्यता देता है कि जम्मू कश्मीर के संविधान में उनके लिए कोई जगह नहीं थी। अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के निरस्त होने के साथ ही ‘एक देश – दो संविधान’ वाला मसला भी ख़त्म हो गया और राज्य में भारतीय संविधान पूर्णरूपेण प्रभावी हो गया। वामपंथियों को ‘गे फॉर जेके’ के कार्यकर्ताओं के तर्कों का कोई जवाब ही नहीं सूझा।
??? @NitashaKaul@dibyeshanand@SAsiaSolidarity & I are homophobic and fascist – but BJP leader @Swamy39 who advocates curtailment of Muslim citizenship rights, & says homosexuality is a disease, is not?! Tell me when these so called activists protested Swamy & BJP? https://t.co/HANfGbyl83
बाद में सोशल मीडिया पर भी लोगों ने कविता कृष्णन को होमोफोबिक (समलैंगिक विरोधी) करार दिया, जिसके बाद वह तिलमिला गईं। बौखलाई वामपंथन कविता ने ट्विटर पर पूछा कि ‘गे फॉर जेके’ के कार्यकर्ता सुब्रह्मण्यम स्वामी का विरोध क्यों नहीं करते? कविता ने दावा किया कि भाजपा नेता स्वामी समलैंगिकता को बीमारी मानते हैं। हालाँकि, वह कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों का कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाईं।
जब समलैंगिक कार्यकर्ता वामपंथियों के कार्यक्रम में घुसे, तब वामपंथी उन्हें कहते रहे कि वे समलैंगिकों के समर्थन में हैं। उन्होंने यह कह कर उन्हें शांत कराने की कोशिश की कि वे सभी समलैंगिक अधिकारों का समर्थन करते हैं। इन सबके बावजूद ‘गे फॉर जेके’ के बैनर के साथ आए समलैंगिक कार्यकर्ताओं ने न सिर्फ़ नारे लगाए बल्कि अपने पैम्फलेट भी वितरित किए।
Hey @News18@sanjaysuri88 – are you an RSS mouthpiece? This wasn’t an “anti India” meeting, it was in support of Indians + Kashmiris oppressed by fascists. + these were masked Sanghis masquerading as LGBTQ activists! They rang a fire alarm. But thanks to them more ppl heard us https://t.co/JiRE1wqU6q
न्यूज़ चैनल न्यूज़ 18 ने कविता कृष्णन सहित अन्य वामपंथियों द्वारा आयोजित कार्यक्रम को भारत-विरोधी कार्यक्रम बताया, जिसके बाद कविता कृष्णन ने न्यूज़ 18 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुखपत्र करार दिया। कविता कृष्णन ने दावा किया कि ये भारत-विरोधी बैठक नहीं थी। उन्होंने कहा कि ये ‘फासिस्ट सरकार द्वारा सताए गए भारतीयों व कश्मीरियों’ के समर्थन में आयोजित कार्यक्रम था। उन्होंने अपने कार्यक्रम में घुसे समलैंगिक कार्यकर्ताओं को भी संघी करार दिया।
एक स्थानीय चैनल से बात करते हुए अन्नाद्रमुक नेता सी पोन्नैयन ने मानवीयता के सभी तक़ाज़ों को ताक पर रखते हुए एक इंजीनियर की मौत पर शर्मनाक बयान दिया है। पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक पोन्नैयन का कहना है कि होर्डिंग अपने ऊपर गिरने से हुई सॉफ्टवेयर इंजीनियर सुभाश्री रवि की मौत के लिए होर्डिंग अवैध रूप से लगाने वाला नहीं, बल्कि गिराने वाली हवा ज़िम्मेदार है। अगर FIR करनी है, तो हवा पर की जानी चाहिए। चार बार विधायक रह चुके पोन्नैयन ने कहा, “सुभाश्री की मौत इसलिए हुई क्योंकि बैनर हवा से गिर पड़ा। बैनर लगाने वाले व्यक्ति ने उसे गिरा कर सुभाश्री को नहीं मार डाला। अगर किसी के ख़िलाफ़ FIR करनी है तो हवा के खिलाफ होनी चाहिए।”
उल्लेखनीय है कि मद्रास हाई कोर्ट ने राज्य में सार्वजनिक स्थलों पर बैनर-होर्डिंग लगाने को प्रतिबंधित कर दिया है।
गिरी होर्डिंग, चढ़ा टैंकर
23-वर्षीया सुभाश्री की गत 12 सितंबर को टैंकर अपने ऊपर चढ़ जाने से दर्दनाक मौत हो गई थी। वह टैंकर के आगे सड़क पर तब गिर पड़ीं जब सड़क किनारे लगा अवैध बैनर उनकी स्कूटी पर अचानक गिर गया और उनका संतुलन बिगड़ गया। अपने बेटे की शादी के लिए अवैध होर्डिंग लगाने वाले सोशल मीडिया पर घटना को लेकर बवाल के बाद भी अन्नाद्रमुक नेता सी राजगोपाल को गिरफ़्तार करने में पुलिस को 15 दिन लग गए। उन पर, मीडिया खबरों के अनुसार, अवैध होर्डिंग लगाने के लिए IPC की दफ़ा 326 और Tamil Nadu Open Places Act के दफ़ा 3 के अलावा लापरवाही से किसी की मौत का कारण बनने की धारा 304A भी लगाई गई है।
द्रमुक नेता: होर्डिंग लगाओगे तो मैं नहीं आऊँगा
इस मामले में जनता की नाराज़गी को देखते हुए द्रमुक प्रमुख एमके स्टालिन ने ऐलान कर दिया था कि अगर किसी समारोह में अवैध होर्डिंग या बैनर लगे होंगे तो वे उसमें हिस्सा नहीं लेंगे। वे जनता को तक़लीफ़ पहुँचाने के सख्त खिलाफ हैं, और उनकी पार्टी में ऐसा करने वालों पर कड़ी कार्रवाई वे खुद करेंगे।
यही नहीं, मद्रास उच्च न्यायालय ने भी सुभाश्री के परिवार को ₹5,00,000 मुआवजा देने के आदेश के अलावा राज्य सरकार के अमले को भी आड़े हाथों लिया। अदालत ने पूछा, “अभी सड़कों को कितने और खून से रंगा जाना बाकी है?” इसके अलावा राज्य के मुख्यमंत्री पलानिस्वामी और उप-मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम ने भी संयुक्त बयान जारी कर पार्टी सदस्यों से होर्डिंग-बैनर न लगाने सहित जनता को तकलीफ़ देने वाले कदम उठाने से बाज आने की सलाह दी थी।
जब पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती मना रहा था और तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही थी, उसी समय एक बड़ी ख़बर आई। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में स्थित मेमोरियल में से महात्मा गाँधी की चिता की राख चोरी कर ली गई। इतना ही नहीं, चोरों ने उनके पोस्टर पर ‘राष्ट्रद्रोही’ भी लिख दिया। बापू के चिता की राख को लक्ष्मण बाग स्थित बापू भवन में रखा गया था, जहाँ ये घटना हुई। बापू भवन का निर्माण 1948 में किया गया था और तब से ही लक्ष्मण बाग ट्रस्ट इसकी देखभाल करता रहा है।
महात्मा गाँधी के 150वें जन्मदिवस के मौके पर जब बुधवार (अक्टूबर 2, 2019) को कॉन्ग्रेस नेता रामकृष्ण शर्मा सहित कई अन्य नेता श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए पहुँचे, उन्होंने पाया कि वहाँ रखी गई गाँधी से जुड़ी चीजें गायब थीं और गाँधी के पोस्टर पर काले स्केच से लिखा गया था- ‘राष्ट्रदोही’। इन नेताओं ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। अज्ञात आरोपितों के ख़िलाफ़ 153-बी (राष्ट्रीय अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले लांछन, प्राख्यान), धारा 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) और धारा 505 (जानबूझकर अफवाह फैलाने की कोशिश) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
कॉन्ग्रेस नेता गुरमीत सिंह उर्फ़ मंगू की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। लक्ष्मण बाग़ ट्रस्ट दशकों से कई मंदिरों, गोशाला और बगीचों का सञ्चालन करता रहा है। यह रीवा महाराज द्वारा स्थापित सबसे पुराने ट्रस्टों में से एक है। बापू भवन की देखभाल करने वाले मंगलदीप तिवारी ने बताया कि गाँधी जयंती के दिन उन्होंने सुबह ही भवन का दरवाजा खोल दिया था। जब वह दोपहर 11 बजे लौटे तो उन्होंने पाया कि गाँधीजी से जुड़ी चीजें गायब थीं।
देशभर में 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाई गई, उसी दिन मध्यप्रदेश के रीवा शहर के बापू भवन में लगी महात्मा गांधी की तस्वीर पर अज्ञात लोगों ने ‘राष्ट्रदोही’ लिखने के साथ-साथ वहां रखे उनके अस्थिकलश को चुरा लिया।https://t.co/JGN82R8Det
महात्मा गाँधी के पार्थिव शरीर की अंतिम क्रिया के बाद उनके चिता की राख को पूरे भारत में स्थित कई मेमोरियल्स में भेजा गया था और रीवा का बापू भवन उनमें से एक था। 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने उनकी हत्या कर दी थी। नाथूराम गोडसे को 15 नवम्बर 1949 को अम्बाला सेन्ट्रल जेल में फाँसी दे दी गई थी।कॉन्ग्रेस ने दोषियों की गिरफ़्तारी जल्द न होने पर व्यापक विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। मध्य प्रदेश में फ़िलहाल मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की ही सरकार चल रही है।
इतिहासविद् और लेखिका मीनाक्षी जैन ने ऑपइंडिया संपादक अजीत भारती से बातचीत में अयोध्या के रामजन्मभूमि विवाद को लेकर कई ऐतिहासिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी कॉलेज में इतिहास की एसोसिएट प्रोफ़ेसर और भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (Indian Council of Historical Research, ICHR) की सदस्या डॉ. जैन ने अयोध्या विवाद पर दो किताबें Rama and Ayodhya (2013) और The Battle for Rama: Case of the Temple at Ayodhya (2017) लिखीं हैं। उन्होंने जन्मभूमि स्थल पर राम मंदिर के लिए इतिहास और पुरातत्व के स्पष्ट समर्थन के अलावा इस मामले में डीएन झा, रोमिला थापर जैसे वामपंथी इतिहासकारों की भूमिका, अंग्रेज़ों द्वारा उस स्थल को जन्मभूमि मान लिए जाने के बाद ऐतिहासिक, सरकारी दस्तावेज़ों से छेड़छाड़ जैसे मुद्दों पर विस्तार से बात की। नीचे प्रस्तुत है उनके साक्षात्कार का सारांश:
ASI पर सवाल उठाना हास्यास्पद, हिन्दू-मुस्लिम पक्ष की मौजूदगी में खुदाई
पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) पर मुस्लिम पक्ष के वकीलों से लेकर वामपंथी इतिहासकारों द्वारा उठाए गए सवालों को जैन ने सिरे से ख़ारिज कर दिया। उन्होंने साफ़ किया कि कमल का फ़ूल, वराहमूर्ति, संस्कृत में दीवारों पर शिलालेख आदि से साफ़ तौर पर उस स्थल के हिन्दू होने को प्रमाणित करते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि न तो ASI के खुदाई और सर्वेक्षण कार्य में कोई कमी थी, न ही उनकी रिपोर्ट में। साथ ही, उनकी खुदाई इलाहबाद उच्च न्यायालय के आदेशानुसार हिन्दू और मुस्लिम पक्षों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में की गई थी। खुदाई में मिली एक-एक चीज़ का हिसाब उसी दिन रजिस्टर में लिखा गया, और उस दिन के अंत में दोनों पार्टियों ने उस पर हस्ताक्षर किए हैं।
उस खुदाई में मिली चीज़ों के महत्व पर भी वे प्रकाश डालतीं हैं। उनके मुताबिक खुदाई में मिले साक्ष्यों से यह साफ़ है कि न केवल मस्जिद मंदिर तोड़कर बनी, बल्कि यह स्थल मस्जिद के सैकड़ों, हज़ारों साल पहले से धार्मिक स्थल यानि मंदिर रहा है। उस स्थान पर लगातार किसी-न-किसी मंदिर के उपस्थित होने के सबूत ASI की खुदाई ने दिए हैं।
बाबरी ध्वंस के ही समय मिल गया था मंदिर का प्रमाण
मीनाक्षी जैन ने यह भी बताया कि 1992 में हुए बाबरी ध्वंस के समय ही उस स्थान पर मंदिर होने का प्रमाण मिल गया था। उसी समय वहाँ बाबरी के मलबे में मस्जिद के पूर्ववर्ती मंदिर पर लगा हुआ ‘विष्णु हरि’ शिलालेख गिरा। 5 फुट X 2 फुट के इस शिलालेख में साफ़ तौर पर 12वीं सदी में उस जगह पर मंदिर होने की बात लिखी गई थी, जिससे “लेकिन बाबर ने तो खाली जगह देख कर मस्जिद बनाई थी” का ‘क्यूट’ प्रोपेगंडा, जो आगे जाकर आज अदालत में दलील भी बन गया है, ध्वस्त होने का खतरा पैदा हो गया था।
ऐसे में ‘मदद’ को आए वामपंथी इतिहासकार इरफ़ान हबीब। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में उस समय कार्यरत हबीब ने खटराग अलापना शुरू किया कि यह शिलालेख एक ‘निजी संग्रह’ का हिस्सा है, जिसे बाबरी ध्वंस के समय गुपचुप वहाँ ‘तस्करी कर’ लाया गया, और मलबे के बीच रख दिया गया। मीनाक्षी जैन बतातीं हैं कि जब हबीब से सवाल पूछा गया कि वह शिलालेख आखिर किस व्यक्ति के ‘निजी संग्रह’ का हिस्सा है, तो उन्होंने रंग बदल कर इसे ‘त्रेता के ठाकुर’ नामक अयोध्या में ही स्थित एक दूसरे मंदिर से मिला शिलालेख बता दिया। (‘त्रेता के ठाकुर’ मंदिर हालाँकि अयोध्या में ही स्थित है,लेकिन उसका जन्मभूमि से कोई सरोकार नहीं है। यह औरंगज़ेब द्वारा तोड़ा गया एक दूसरा मंदिर है/) उनके मुताबिक लखनऊ संग्रहालय से ‘त्रेता के ठाकुर’ शिलालेख को जन्मभूमि स्थल पर लाया गया, और मलबे में ‘विष्णु हरि’ शिलालेख के नाम से ‘प्लांट’ कर दिया गया।
लेकिन उनका यह प्रोपेगंडा भी उनके दुर्भाग्य और हिन्दुओं के अच्छे कर्मों से तब ध्वस्त हो गया, जब किशोर कुणाल नामक एक संस्कृत विद्वान और रिटायर्ड आईपीएस ने लखनऊ के संग्रहालय में से वह शिलालेख खोज निकाला और उसकी तस्वीर प्रकाशित कर दी। ‘त्रेता के ठाकुर’ शिलालेख बेहद टूटा-फूटा और क्षतिग्रस्त है, जिसमें से बमुश्किल 2-3 शब्द पढ़े जा सकते हैं। वहीं ‘विष्णु हरि’ शिलालेख न केवल स्पष्ट और ठीक-ठाक हालत में है, बल्कि उसका अधिकाँश भाग पूरी तरह सुरक्षित और पठनीय भी है।
ब्रिटिश रिकॉर्ड किसने बदले?
मीनाक्षी जैन कुछ चौंकाने वाले खुलासे भी करतीं हैं। वह बतातीं हैं कि 1857 के विद्रोह के बाद बने ब्रिटिश राजस्व रिकॉर्डों में विवादित स्थल को केवल ‘जन्मभूमि’ के नाम से दर्ज किया गया था, जो बाद में (अदालत में रिकॉर्ड मँगाए जाने पर?) बदला गया। जहाँ-जहाँ पुराने रिकॉर्ड में केवल जन्मभूमि का उल्लेख था, वहाँ “*” लगाकर ऊपर की ओर “और बाबरी मस्जिद” लिखा गया, ताकि यह दिखाया जा सके कि मुस्लिमों का भी उस भूभाग पर दावा उतना ही पुराना रहा है, जितने समय पहले से हिंदू इसे मंदिर स्थल बताते हैं।
“Big Four” का प्रपंच
वामपंथी इतिहासकारों की भूमिका पर भी डॉ. मीनाक्षी जैन ने तफ़सील से बात की। उन्होंने बताया कि न केवल वामपंथी इतिहासकारों ने ही मुस्लिमों को झूठा “तुम ये मुकदमा जीत सकते हो” का दिलासा देकर सुलझते-सुलझते मामले को दोबारा उलझा दिया, बल्कि उन्होंने अदालत को भी अपनी ‘राय’ को तथ्य बताकर बरगलाने की कोशिश की। हाई कोर्ट के पास समय की कमी नहीं थी, क्योंकि उस समय मामला ‘गर्म’ नहीं था- इसलिए उच्च न्यायालय ने उन्हें आराम से सुनकर ख़ारिज कर दिया, और वहीं सुप्रीम कोर्ट ने समय की कमी के चलते उन्हें दो टूक किनारे कर दिया।
इसके अलावा वे 1947 के बाद के भारतीय इतिहास लेखन के “Big Four” माने जाने वाले रोमिला थापर, इरफ़ान हबीब, आर एस शर्मा और डी एन झा के प्रपंच की भी पोल-पट्टी खोली। उन्होंने बताया कि कैसे ये चारों खुद अदालत में अपने झूठ की लानत-मलालमत से बचने के लिए अपने छात्रों को भेजते रहे, और खुद ‘निष्पक्षता’ का चोला ओढ़कर अख़बारों के कॉलम से लेकर किताबें तक लिख-लिख कर बिना पाँव के झूठ की पालकी ढोते रहे।
मथुरा, काशी पर भी किताब, गैर-वामपंथी इतिहासकार होना आसान नहीं
एक ट्विटर यूज़र के सवाल के जवाब में डॉ. जैन ने यह भी बताया कि वह अयोध्या की ही तरह मथुरा और काशी पर भी वह अध्ययन कर रहीं हैं। इन मामलों पर भी वे किताब लिखेंगी। इसके अलावा एक दूसरे सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि हालाँकि तथाकथित ‘दक्षिणपंथ’ ने राजनीतिक लड़ाई जीत ली है, लेकिन भाजपा की सरकार में भी अकादमिक जगत जस-का-तस है। आज भी बौद्धिक वर्ग पर कब्ज़ा वामपंथियों का है, और दक्षिणपंथी या हिंदूवादी होना तो दूर, उनसे भिन्न, गैर-वामपंथी मत वाला तक होना आज भी अकादमिक जगत में मुश्किल है।
इस साक्षात्कार हेतु प्रश्नों की तैयारी एवं बाकी शोध मृणाल प्रेम स्वरुप श्रीवास्तव ने किया।