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दो दिन चला एससीओ का सैन्य कॉन्फ्रेंस, पाकिस्तान के कमांडर केवल खाने पहुॅंचे

पाकिस्तान के नेता हों या सैनिक खुद की किरकिरी कराने का कोई मौका नहीं छोड़ते। ऐसा ही एक कारनामा पाकिस्तानी सैन्य कमांडरो ने दिल्ली में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सम्मेलन में कर दिखाया। मिलिटरी मेडिसिन पर दो दिन चले इस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान ने शिरकत नहीं की लेकिन दूसरे दिन उसके प्रतिनिधि डिनर करने पहुॅंच गए।

सूत्रों ने बताया, “पाकिस्तान के प्रतिनिधियों ने शंघाई सहयोग संगठन के दो दिवसीय मिलिटरी मेडिसिन कॉन्फ्रेंस में हिस्सा नहीं लिया और सिर्फ गुरुवार को आयोजित में डिनर में पहुँचे। इस सम्मेलन के पहले दिन 27 विदेशी और 40 भारतीय अधिकारियों ने हिस्सा लिया था।”

नस्लीय और धार्मिक कट्टरपंथ से निपटने और व्यापार-निवेश को बढ़ाना देना एससीओ का मकसद है। भारत सहित आठ देश इसके सदस्य हैं। इनमें चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, तजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और पाकिस्तान शामिल है। कुछ मुल्क ऑब्जर्वर देश और कुछ डायलॉग सहयोगी के तौर पर भी इससे जुड़े हैं।

उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से ही पाकिस्तान बौखलाहट भरी प्रतिक्रिया दे रहा है। इसके बावजूद एससीओ के कॉन्फ्रेंस में उसे आमंत्रित किया गया था। सम्मेलन की शुरुआत करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जैव आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए क्षमताओं को बढ़ाने पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि आज यह वास्तविक खतरा है सशस्त्र बलों तथा उनकी चिकित्सा सेवाओं को इससे मुकाबले के लिए आगे रहने की जरूरत है।

भीमा-कोरेगॉंव मामला: गौतम नवलखा पर चलेगा मुकदमा, नक्सलियों से संपर्क होने की बात मानी

भीमा-कोरेगॉंव हिंसा और नक्सलियों से संपर्क रखने के आरोप में कथित सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा के खिलाफ मुकदमा चलेगा। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी है। नवलखा ने अदालत से अपने खिलाफ दर्ज मामला खत्म करने की गुहार लगाई थी।

अदालत ने पहली नजर में मामले में तथ्य पाए जाने की बात कहते हुए याचिका खारिज की। जस्टिस रंजीत मोरे और भारती डांगरे की पीठ ने कहा, “मामला भीमा-कोरेगॉंव की हिंसा तक ही सीमित नहीं है। इसमें कई और पहलू हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए हमें लगता है कि पूरी छानबीन जरूरी है।” पीठ ने कहा कि यह बिना आधार और सबूत वाला मामला नहीं है।

इस मामले में नवलखा के खिलाफ पुणे पुलिस ने जनवरी 2018 में प्राथमिकी दर्ज की थी। उस पर नक्सलियों से संबंध रखने, भीमा-कोरेगॉंव में हिंसा भड़काने और केंद्र सरकार का तख्तापलट करने की साजिश रचने के आरोप हैं। पुलिस ने अदालत को बताया कि मामले के सह अभियुक्त रोना विल्सन और सुरेंद्र गाडलिंग के लैपटॉप से बरामद कुछ दस्तावेजों से पता चलता है कि नवलखा और उससे जुड़े समूहों की हिज्बुल नेताओं से बातचीत हुई थी। नवलखा के खिलाफ यूएपीए कानून के तहत मामला दर्ज है। उसके अलावा वरवरा राव, अरुण फरेरा, वर्नोन गोंजाल्विस और सुधा भारद्वाज भी आरोपी हैं।

याचिका खारिज होने के बाद नवलखा के वकील युग चौधरी ने गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देने की अपील अदालत से की। अदालत ने इससे सहमति जताते हुए तीन हफ्ते के लिए गिरफ्तारी से छूट प्रदान की। चौधरी ने अदालत में नवलखा का पक्ष रखते हुए कहा कि उनके मुक्विल सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक है। हिंसा प्रभावित क्षेत्रों के विशेषज्ञ हैं।

उन्होंने कहा, “पूर्व में नक्सलियों ने जब छह पुलिसकर्मियों को अगवा कर लिया था तो भारत सरकार ने उन्हें मध्यस्थ नियुक्त किया था। वह नक्सलियों से संपर्क में थे, लेकिन केवल अपने किताब और तथ्यान्वेषी शोध के लिए। इस तरह के संपर्क के लिए यूएपीए के तहत कैसे मामला दर्ज किया जा सकता है।”

‘कॉन्ग्रेस नेता शिवकुमार के पास 317 बैंक खाते, 800 करोड़ की बेनामी संपत्ति’, कोर्ट ने 17 Sep तक ED को दी कस्टडी

कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता और पार्टी के लिए संकटमोचक कहे जाने वाले डीके शिवकुमार को दिल्ली की अदालत से शुक्रवार को झटका लगा है। कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 17 सितंबर तक उन्हें ईडी की हिरासत में भेज दिया है।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अदालत को बताया कि शिवकुमार की कई संपत्तियाँ बेनामी हैं और 317 बैंक खातों के जरिए धन शोधन किया गया है। ईडी ने कहा कि शिवकुमार के खिलाफ जाँच के अनुसार, शोधित धन 200 करोड़ रुपए से अधिक है और करीब 800 करोड़ रुपए मूल्य की बेनामी संपत्ति है ।

अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय से सवाल लिया कि क्या शिवकुमार अगले 5 दिन में सवालों के जवाब नहीं देंगे, आपको उन्हें हिरासत में लेने की क्या जरूरत है? इस पर ED ने शिवकुमार की हिरासत अवधि 5 दिन तक और बढ़ाने की माँग करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में दस्तावेज बरामद किए गए हैं, जिनसे आरोपित शिवकुमार को रूबरू कराने की जरूरत है। साथ ही, ED ने कहा कि शिवकुमार ऐसी सूचना नहीं दे रहे हैं, जिसकी जानकारी सिर्फ उनके पास ही है।

ममता बनर्जी के करीबी अफसर पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार को गिरफ्तार करने पहुँची CBI

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले IPS अधिकारी और कोलकाता पुलिस के पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार को गिरफ्तार करने CBI की टीम उनके घर पहुँची है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राजीव CBI दल को घर पर नहीं मिले हैं।

राजीव के परिजनों ने CBI की टीम से कहा कि वह छुट्टी पर हैं। कोलकाता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को उनकी गिरफ्तारी से संरक्षण देने सम्बन्धी याचिका से रोक हटा दी थी। इसलिए अब केंद्रीय जाँच एजेंसी (CBI) को यह अधिकार है कि वह उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। हाईकोर्ट ने राजीव कुमार का यह तर्क खारिज कर दिया कि उन्हें जानबूझ कर निशाना बनाया जा रहा है। इसके बाद से राजीव कुमार की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है।

राजीव कुमार पर CBI ने आरोप लगाया है कि शारदा पोंजी चिट फंड घोटाला मामले में राजीव कुमार ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ की थी। राजीव कुमार घोटाले की जाँच कर रही SIT के प्रमुख थे। इसके साथ ही, CBI ने यह भी आरोप लगाया है कि राजीव कुमार ने कुछ आरोपितों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDRs) CBI को नहीं सौंपे और बाद में जो रिकॉर्ड्स हैंडओवर किए भी, उनसे छेड़छाड़ की गई थी।

राजीव कुमार पर शारदा घोटाले के सबूतों से छेड़छाड़ का गंभीर आरोप है। CBI के अधिकारियों का कहना है कि राजीव कुमार ने सारदा समूह के मालिक सुदीप्त सेन की लाल रंग की एक डायरी व पेन ड्राइव छुपा रखी है और उन्होंने फोन के काल लिस्ट को भी छे़ड़ा था।

सीबीआई के मुताबिक, शारदा चिंट फंड घोटाले में निवेशकों का (1983 करोड़ रूपए का) बड़ा नुकसान होने के बावजूद राजीव कुमार ने रोज वैली जैसा दूसरा पोंजी चिट फंड घोटाला होने दिया।

CBI की टीम 3 फरवरी 2019 को उनके घर पर पूछताछ के लिए पहुँची थी। इस दौरान पुलिस ने CBI अफसरों को हिरासत में ले लिया था। पश्चिम बंगाल की CM ममता उस वक़्त CBI की कार्रवाई के विरोध में धरने पर बैठी थीं। इस मामले में CBI ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने राजीव कुमार को CBI के सामने पेश होने और ईमानदारी से जाँच में सहयोग करने का निर्देश दिया था।

तिहाड़ से निकलने की चिदंबरम की ख्वाहिश नहीं हुई पूरी, ईडी के सामने सरेंडर करने की याचिका खारिज

आईएनएक्स मीडिया स्कैम में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने सरेंडर करने की पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की याचिका दिल्ली की एक अदालत ने खारिज कर दी है। चिदंबरम फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं। याचिका खारिज होने के कारण उन्हें अब 19 सितंबर तक जेल में ही रहना होगा।

विशेष न्यायाधीश अजय कुमार की अदालत में चिदंबरम का पक्ष रखते हुए वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि ईडी 20 और 21 अगस्त को पूर्व वित्त मंत्री को गिरफ्तार करने उनके घर गई थी। अब उन्हें हिरासत में लेने से बचने की दलीलें दे रही है।

इससे पहले सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि चिदंबरम को हिरासत में लेकर पूछताछ करने से पहले कुछ पहलुओं की जॉंच जरूरी है। चिदंबरम को हिरासत में लेने से पहले एजेंसी छह अन्य लोगों से पूछताछ करना चाहती है।

उन्होंने कहा कि 21 अगस्त से पहले और आज भी चिदंबरम को गिरफ्तार करने की जरूरत के कई कारण हैं। लेकिन, अब न्यायिक हिरासत में होने के कारण वह साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने की स्थिति में नहीं हैं। चिदंबरम को हिरासत में लेने के बाद एजेंसी उनका सामना जुटाए गए साक्ष्यों से करना चाहेगी।

गौरतलब है कि पॉंच सितंबर को सीबीआई अदालत ने चिदंबरम को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में 19 सितंबर तक भेजने का आदेश दिया था। इसी दिन उनकी सरेंडर की याचिका पर ईडी को नोटिस जारी किया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट अग्रिम जमानत देने से पहले ही इनकार कर चुकी है।

आईएनएक्स मीडिया समूह को 2007 में 305 करोड़ रुपए की विदेशी रकम हासिल करने के लिए नियमों से परे जाकर एफआईपीबी की मंजूरी दी गई थी। उस वक्त चिदंबरम वित्त मंत्री थे। सीबीआई ने 15 मई 2017 को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। बाद में ईडी ने भी इस संबंध में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था।

आधार को सोशल मीडिया AC से जोड़ने की केंद्र की योजना का परीक्षण करने को तैयार SC, सरकार से माँगा जवाब

आधार कार्ड को सोशल मीडिया अकॉउंट से जोड़ने के मामले में सर्वोच्च न्यायालय परीक्षण करने को तैयार हो गया है। जिसके चलते SC ने केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या सरकार सोशल मीडिया पर नियंत्रण पाने के लिए कोई नीति बनाने पर विचार कर रही हैं।

न्यायालय ने शुक्रवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि सोशल मीडिया प्रोफाइलों को आधार से जोड़ने के मुद्दे पर तत्काल फैसला लेने की आवश्यकता हैं। इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार को जवाब तलब करने को कहा है और साथ ही मामले की अगली तारीख 24 सितंबर तय की हैं।

पीठ ने केंद्र सरकार से कहा , “अगर आप भविष्य में इसे लेकर कोई कदम उठाने जा रहे हैं तो फिर हम इसे दूसरे नजरिए से देखें। इसलिए आप हमें जानकारी दें।”

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरूद्ध बोस की पीठ ने कहा, ‘‘इस समय हमें नहीं मालूम कि क्या हम इस मुद्दे पर निर्णय कर सकते हैं या हाई कोर्ट फैसला करेगा।’’

पीठ ने यह भी कहा कि वह इस मामले के गुण दोष पर गौर नहीं करेगी और सिर्फ मद्रास, बंबई और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में लंबित ऐसे मामलों को शीर्ष अदालत में ट्रांसफर करने की फेसबुक की याचिका पर फैसला करेगी। जिसपर केंद्र सरकार ने जवाब देते हुए कहा है कि तीन उच्च न्यायलयों में लंबित मामलों को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं हैं।

गौरतलब है कि पिछले महीने 20 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय ने फेसबुक की ट्रांसफर याचिका पर गूगल, ट्विटर, फेसबुक व अन्य सोशल मीडिया संस्थानों के अलावा केंद्र सरकार और तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी कर 13 सितंबर तक जवाब माँगा था। जिसमें जस्टिस दीपक गुप्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने मद्रास हाई कोर्ट को मामले पर सुनवाई जारी रखने की अनुमति दे दी थी, लेकिन साथ ही ये भी निर्देश दिया कि वो इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं करेंगे।

इस मामले में फेसबुक और व्हाट्सऐप की ओर से कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी ने पीठ के समक्ष दलील रखी कि इस फैसले से पूरे राष्ट्र की निजता प्रभावित होगी।

लेकिन, जानकारी के लिए बता दें कि केंद्र पहले से ही इस मामले के की जाँच कर रहा कि यदि व्यक्ति यूट्यूब की प्रतिलिपी बनाता है और व्हाट्सएप संदेश के रूप में भेजता है तो उसका पता लगाना संभव नहीं है, जोकि बहुत बड़ी समस्या है, इसलिए उनका मानना है कि उच्च न्यायालयों के समक्ष सभी लंबित मामले न्यायालय को कोर्ट में ट्रांसफर कर देना चाहिए। जबकि तमिलनाडु की ओर से इसका विरोध हुआ था और कहा गया था कि हाईकोर्ट में इस मामले पर सुनवाई काफ़ी आगे बढ़ चुकी है लेकिन सुप्रीम कोर्ट के 20 अगस्त के आदेश की वजह से उसने उन याचिकाओं पर सुनवाई टाल दी थी।

वामपंथी प्रदर्शनकारियों ने मचाया उत्पात, ममता बनर्जी की पुलिस को मारे पत्थर

राजनीतिक हिंसा के लिए बदनाम पश्चिम बंगाल में अब वामपंथी संगठन का उत्पात देखने को मिला है।रोजगार एवं अन्य मुद्दे पर राज्य की ममता बनर्जी सरकार को घेरने के लिए वामपंथी संगठन की ओर से प्रदर्शन किया गया। हावड़ा से सचिवालय तक के इस प्रदर्शन में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। वामपंथी प्रदर्शनकारियों ने जमकर उत्पात मचाते हुए पुलिस पर पत्थरबाजी की।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोले और वॉटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। कई लोग जख्मी हो गए। पूरा इलाका घंटो तक हिंसक माहौल की चपेट में रहा। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया है।

प्रदर्शन स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) की ओर से आयोजित किया गया था। इसमें लेफ्ट विंग के यूथ और स्टूडेंट संगठनों ने भाग लिया था।

इनका इरादा राज्य के सचिवालय तक मार्च करना था। लेकिन इलाके में धारा 144 लगने से इन्हें प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी गई। जिसके बाद इन्होंने जबरन वहाँ से रास्ता निकालकर जाने का प्रयास किया। कुछ ने सुरक्षाबल पर ईंट और पत्थर से हमले भी किए। इसके कारण कुछ जवान गंभीर रूप से घायल हो गए।

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ पर फिर ABVP का कब्जा, अध्यक्ष समेत 3 सीटें जीती

दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन के चुनाव में आरएसएस से जुड़े छात्र संगठन एबीवीपी ने परचम लहराया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव के पदों पर जीत हासिल हुई है। ABVP की तरफ से अध्यक्ष पद पर अक्षित दहिया जीते हैं। उपाध्यक्ष पद पर एबीवीपी के प्रदीप तंवर और जॉइंट सेक्रेटरी पर शिवांगी खरवाल ने कब्ज़ा जमाया है।

दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस से जुड़े छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) को केवल सचिव पद पर सफलता मिल पाई है।

किसे कितने वोट मिले –

  • एबीवीपी की तरफ से अध्यक्ष पद पर अक्षित दहिया को  29,685 वोट मिले।
  • उपाध्यक्ष पद पर एबीवीपी के उम्मीदवार प्रदीप तंवर को 19,858 वोट मिले।
  • एबीवीपी के उम्मीदवार जॉइंट सेक्रेटरी पर शिवांगी खरवाल  को 17,234 वोट मिले।
  • एनएसयूआई को सचिव पद आशीष लांबा को 20,934 वोट मिले।

एबीवीपी ने अध्यक्ष पद पर अग्रसेन कॉलेज के अक्षित दहिया को मैदान में उतारा था, जबकि एनएसयूआई ने महिला कैंडिडेट पर दाँव लगाते हुए चेतना त्यागी को मौका दिया था। वामपंथी संगठन आइसा से दामिनी काइन चुनावी मैदान में थीं, जबकि AIDSO से रोशनी ने चुनाव लड़ा था।

छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज और NCP सांसद उदयनराजे भोसले BJP में होंगे शामिल

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) को एक बड़ा झटका लगने जा रहा है। शनिवार (सितंबर 14, 2019) को एनसीपी के कद्दावर नेता और छत्रपति शिवाजी के वंशज उदयनराजे भोसले बीजेपी का दामन थाम लेंगे। इससे पहले वह लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को संसद की सदस्यता से अपना इस्तीफा सौंपेंगे।

पिछले कई दिनों से अटकलें लगाई जा रही थीं कि सतारा लोकसभा सीट से NCP के सांसद उदयनराजे भोसले पार्टी का साथ छोड़ने वाले हैं। हाल में NCP और कॉन्ग्रेस के कई बड़े नेता बीजेपी में शामिल हुए हैं।

समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार, NCP से लोकसभा सांसद और शिवाजी महाराज के वंशज शनिवार को दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने जा रहे हैं। उदयनराजे भोसले बीते दिन NCP अध्यक्ष शरद पवार के आवास पर उनसे मुलाकात करने भी पहुँचे थे।

हालाँकि, NCP की ओर से बताया गया था कि आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर चर्चा के लिए दोनों नेताओं ने मुलाकात की है। इस दौरान NCP ने उदयनराजे भोसले के बीजेपी में शामिल होने की बात को खारिज कर दिया था और आरोप लगाया था कि भारतीय जनता पार्टी के लोग जानबूझकर ऐसी अटकलों को हवा दे रहे हैं, ताकि कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाया जा सके।

वहीं, महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फड़नवीस ने पिछले महीने कहा था कि अगर भोसले सत्तारूढ़ दल में शामिल होते हैं तो भाजपा को ख़ुशी होगी।

मुहर्रम के कारण ममता की पुलिस ने नहीं दर्ज किया बलात्कार का मामला, SP से लगानी पड़ी गुहार

पश्चिम बंगाल में मंगलवार (सितंबर 10, 2019) को एक महिला का उसके पड़ोसी ने बलात्कार किया। लेकिन, महिला जब अपने पति के साथ पुलिस के पास शिकायत करने पहुँची, तो पुलिस ने उसे ये कहकर वापस भेज दिया कि अभी मुहर्रम चल रहा है। बाद में दंपत्ति को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए एसपी के पास जाना पड़ा।

जानकारी के मुताबिक, महिला का पति एक मंदिर का पुजारी है और वे लोग बंगाल के मिदनापुर के खेजुरी इलाके के निवासी हैं। महिला मंगलवार की सुबह अपने घर से थोड़ी दूरी पर स्थित तालाब में स्नान करने गई थी, जब पड़ोस का एक युवक, जिसका नाम सुदीप्तो है वो उसको सीटी मारके छेड़ने लगा। तो उसने विरोध किया और नहाकर अपने घर वापस आ गई। जिस समय महिला घर पर लौटी तब घर पर कोई नहीं था। वो कपड़े बदल ही रही थी कि तभी सुदीप्तो ने उसपर कहीं से छलांग लगाई।

महिला के मुताबिक, सुदीप्तो ने पहले उसके चेहरे और प्राइवेट पार्ट्स पर चाकू रखकर उसे धमकाया और उसके मुँह में रुमाल भर दिया। बाद में उसे उसकी ही साड़ी से बाँध दिया और फिर उसका रेप किया। बलात्कार करने के बाद सुदीप्तो ने घर से निकलने से पहले उसे फिर धमकाया कि अगर उसने किसी को कुछ बताया तो वो उसे बिजली का करंट देकर मार देगा।

लेकिन, जब महिला का पति घर लौटा, तो उसने अपने साथ हुई सारी घटना के बारे में उसे बताया। पूरा वाकया जानने के बाद पहले तो उन्होंने शर्म से मर जाने की सोची। लेकिन, इस दौरान एक पड़ोस की महिला ने उन्हें बात करते सुन लिया था और जिसने जाकर बाकी गाँव वालों को सब बता दिया। बाद में गाँव वालों के सुझाव पर ही दोनो पति-पत्नी खेजुरी पुलिस थाने शिकायत कराने पहुँचे, जहाँ पुलिस ने मुहर्रम का हवाला देकर मामले में एफआईआर दर्ज करने से ही मना कर दिया। दोनों पति-पत्नी शिकायत दर्ज कराने की गुहार लगाते रहे, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई।

इस कारण उन्हें एक वकील से संपर्क करना पड़ा और वकील के सुझाव मुताबिक उन्होंने एसपी से मिलकर अपनी शिकायत दर्ज करवाई। जिसके बाद पुलिस ने जाँच शुरू की। हालाँकि आरोपित सुदीप्तों अभी फरार चल रहा है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हैं। लेकिन पुलिस ने दंपत्ति द्वारा केस दर्ज न करने के मामले को खारिज कर दिया है और बताया है कि किसी ने भी कोई शिकायत नहीं की थी। यहाँ दंपत्ति और उनका वकील इस बात पर अड़ा हुआ है कि वो थाने गए थे लेकिन पुलिस ने मुहर्रम के कारण शिकायत को लिखा ही नहीं और उन्हें एसपी के पास जाना पड़ा।