UAPA कानून में बदलाव: आखिर व्यक्ति विशेष को आतंकवादी क्यों घोषित करना चाहते हैं अमित शाह?

यह बिल व्यक्ति विशेष को आतंकवादी घोषित करने और उसकी संपत्ति जब्त करने का अधिकार देता है। सरकार का दावा है कि यह संशोधन सुरक्षा एजेंसियों को आतंकवादियों से चार कदम आगे रखेगा।

मोदी सरकार लगातार यह दोहराती रही है कि आतंकवाद को लेकर उसकी नीति जीरो टॉलरेंस की है। इसी कड़ी में सरकार गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) संशोधन विधेयक 2019 लेकर आई है। आम बोलचाल में इसे UAPA बिल भी कहते हैं।

लोकसभा से 24 जुलाई को पारित यह बिल व्यक्ति विशेष को भी आतंकवादी घोषित करने और उसकी संपत्ति जब्त करने का अधिकार देता है। सरकार का दावा है UAPA कानून में यह संशोधन सुरक्षा एजेंसियों को आतंकवादियों से चार कदम आगे रखेगा।

संशोधन की खास बातें

  • आतंकी गतिविधियों में संलिप्त होने की आशंका पर व्यक्ति विशेष को आतंकवादी घोषित किया जा सकेगा।
  • जो आतंकियों को आर्थिक और वैचारिक मदद देते हैं या आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले विचारों का प्रचार-प्रसार करते हैं, उन्हें आतंकवादी घोषित किया जा सकेगा।
  • राष्ट्रीय जॉंच एजेंसी (एनआईए) के इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी भी आतंकवाद के मामलों की जॉंच कर सकेंगे।
  • एनआईए महानिदेशक को ऐसी संपत्तियों को जब्त करने और उनकी कुर्की का अधिकार होगा जिनका आतंकी गतिविधि में इस्तेमाल हुआ हो।

बदलाव क्यों?

बिल पर चर्चा के दौरान लोकसभा में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने इस कानून में संशोधन की जरूरत को बिंदुवार स्पष्ट किया। इसके मुताबिक;

  • UAPA या किसी अन्य कानून में व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने का प्रावधान नहीं है। ऐसे में जब किसी आतंकवादी संगठन पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो उसके सदस्य नया संगठन बना लेते हैं।
  • आतंकी गतिविधियों, उसके लिए धन मुहैया कराने वालों या उसका प्रचार-प्रसार करने वाले व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करना जरूरी है।
  • आतंकवाद व्यक्ति की मंशा से जुड़ा मसला है न कि संगठन का। इसलिए ऐसी गतिविधियों में संलिप्त लोगों को आतंकवादी घोषित करने के प्रावधान की बेहद जरूरत महसूस की जा रही है।
  • मौजूदा UAPA कानून की धारा 25 के अनुसार आतंकी गतिविधियों से जुड़ी संपत्ति जब्त करने का अधिकार केवल सम्बन्धित राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को है।
  • कई बार आतंकी विभिन्न राज्यों में अपनी संपत्ति रखते हैं। ऐसे मामलों में अलग-अलग राज्यों के डीजीपी की मंजूरी लेना बहुत मुश्किल हो जाता है। देरी के कारण आतंकियों के लिए अपनी संपत्ति दूसरों के नाम ट्रांसफर करना आसान हो जाता है।
  • मौजूदा UAPA कानून की धारा 43 के सेक्शन IV और VI के अनुसार डीएसपी या समकक्ष पद से नीचे के अधिकारी जॉंच नहीं कर सकते। एनआईए में डीएसपी की कमी है, जबकि उसके इंस्पेक्टर भी इस तरह के मामलों की जॉंच में पारंगत हैं।

संशोधन से क्यों सहमा विपक्ष?

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लोकसभा में बिल के विरोध में केवल 8 वोट ही पड़े। इसका यह मतलब कतई नहीं है कि विपक्ष इस कानून में संशोधन के पक्ष में है। बिल पर वोटिंग के दौरान कॉन्ग्रेस सहित कई विपक्षी पार्टियों ने सदन का बहिष्कार किया था। विपक्ष इस बिल को जन विरोधी और संविधान विरोधी बता रहा है। यहां तक कि विपक्ष ने सत्ताधारी दल पर बहुमत के नाम पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप भी लगाया।

विपक्ष का कहना है कि अब सिर्फ़ संदेह के आधार पर ही किसी को आतंकवादी घोषित कर ऐसे व्यक्तियों की संपत्ति जब्त की जा सकेगी। विपक्ष और आलोचकों का यह भी कहना है कि इसका इस्तेमाल विरोधियों को फँसाने के लिए किए जाने का खतरा है। विपक्ष को डर है कि इससे एनआईए की मनमानी बढ़ेगी और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

शंका का समाधान

विपक्ष के संदेहों को दूर करने की कोशिश करते हुए अमित शाह ने कहा कि सरकार इस विचार से कतई सहमत नहीं है कि आतंकवाद पर काबू आतंकियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की बजाए उनसे बातचीत कर पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि संशोधनों का मकसद तेजी से जॉंच है। उनके अनुसार;

  • संशोधन में कानून का दुरुपयोग रोकने के लिए बहुत सारी सावधानियॉं रखी गई हैं।
  • यह संशोधन व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित करने की इजाजत तभी देता है जब कानूनन पर्याप्त साक्ष्य हो।
  • गिरफ्तारी या जमानत प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है, इसलिए यह स्पष्ट है कि किसी भी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं होगा।
  • विभिन्न स्तरों पर एनआईए में केस का रिव्यू होता है, इसलिए इंस्पेक्टर स्तर पर जॉंच से किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी।

कॉन्ग्रेस राज में बना कानून, तीन बार संशोधन भी

UAPA कोई नया कानून नहीं है। आज भले कॉन्ग्रेस इस कानून में संशोधन का विरोध कर रही हो, लेकिन 1967 में इंदिरा गाँधी की सरकार ही इस बिल को पहली बार लेकर आई थी। कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल में तीन मौकों पर 2004, 2008 और 2011 में भी इस कानून में संशोधन किया गया था।

ऐसे समझे नुकसान

कानून में व्यक्ति को आतंकी घोषित करने का प्रावधान नहीं होने के कारण हो रहे नुकसान को आप इस तरह समझ सकते हैं। यासीन भटकल इंडियन मुजाहिद्दीन से जुड़ा था। इंडियन मुजाहिद्दीन आतंकवादी संगठन घोषित है। लेकिन, भटकल आतंकवादी घोषित नहीं किया जा सका। इसका फायदा उठा उसने 12 आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया।

व्यक्ति को आतंकी घोषित करने की प्रक्रिया

केन्द्रीय गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार किसी व्यक्ति को आतंकवादी तभी घोषित किया जा सकेगा जब गृह मंत्रालय ऐसा करने की सहमति देगा। आतंकी घोषित व्यक्ति केन्द्रीय गृह सचिव के समक्ष अपील कर सकेगा। वे इस पर 45 दिनों के भीतर फैसला करेंगे। मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समीक्षा समिति का गठन होगा। इसमें भारत सरकार के कम से कम दो सेवानिवृत्त सचिव होंगे। कोई व्यक्ति खुद को आतंकवादी घोषित करने के खिलाफ यहॉं भी सीधे अपील कर सकेगा।

हाफिज सईद, मसूद अजहर पर कसेगा शिकंजा

प्रस्तावित संशोधनों के लागू होने के बाद सबसे पहला शिकंजा हाफिज सईद और मसूद अजहर पर कसने की तैयारी है। हाफिज सईद साल 2008 के मुंबई आतंकी हमले का मास्टरमाइंड है, जबकि मसूद अजहर साल 2001 में संसद पर हमले में मोस्ट वॉन्टेड है।

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