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भगवा चोगा-रुद्राक्ष की माला में बिशप की तस्वीरों से बवाल, हिन्दुओं को गुमराह करने का आरोप

बेलगाम डायसिस (Belgaum diocese) के बिशप डेरेक फर्नांडीस की वो तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिनमें उन्होंने भगवा वस्त्र पहनकर सिंदूर का टीका लगा रखा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर विवाद का कारण बनती जा रही हैं। दरअसल, डेरेक पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि इस भगवाकरण के जरिए उनका उद्देश्य हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन करवाना है।

इन तस्वीरों में डेरेक के साथ कुछ और भी लोग वैसे ही कपड़ों में नजर आ रहे हैं। कुछ ने रुद्राक्ष की माला भी पहनी है। तस्वीरों से ऐसा संकेत मिला है कि ये परम प्रसाद ग्रहण करने के संस्कार की हैं।

डेरेक को पोप फ्रांसिस ने बेलगावी के छठे बिशप के तौर पर 1 मई को नियुक्त किया था। ये तस्वीरें सामने आने के बाद लोग डेरेक पर हिंदुओं को गुमराह कर के उनका धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगा रहे हैं और इस वजह से डेरेक के इस रूप का विरोध किया जा रहा है। कई ईसाइयों ने ट्विटर पर बिशप की ऐसी गतिविधियों को लेकर चेतावनी दी और कुछ ने इसे ईशनिंदा भी करार दिया।

हालाँकि, बेलगाम डायसिस के पदाधिकारी फिलिप कुट्टी ने बताया कि ये तस्वीरें 29 अगस्त को बिशप के दूशनूर की एक चर्च के दौरे पर ली थीं। उन्होंने कहा- “पहले यह चर्च विरक्त मठ था। ईसाई पादरी वहाँ करीब 40 साल पहले गए और भगवा चोगा पहनने की जैसी परंपराओं को अपनाया। यहाँ तक कि जो तंबू बनाया गया था, वह भी शिवलिंग के आकार में था।”

डायसिस के एक पादरी फादर नेल्सन पिंटो के अनुसार, जब सबसे पहले पादरी देशनूर गए तो उन्होंने स्थानीय संस्कृति को अपना लिया। उस इलाके में मुख्यत: लिंगायत समुदाय के लोग रहते थे। पिंटो ने बताया कि पादरी शाकाहारी भी हो गए।

उन्होंने स्पष्टीकरण दिया कि पादरियों ने लोगों का धर्म परिवर्तन करने की कोशिश नहीं की है। आर्कबिशप फिलिप नेरी फराओ ने भी कहा कि यह ऐसी ही परंपरा की तस्वीरें लग रही हैं, जिसमें स्थानीय संस्कृति को अपनाया जाता है।

एक ओर जहाँ चर्च विवाद पर सफाई दे रहा है, वहीं तस्वीरें पोस्ट करने वाले ऐक्टिविस्ट सैवियो रॉड्रिग्ज को धमकियाँ मिल रही हैं। बिशप की ये तस्वीरें ट्वीट करने के कारण रॉड्रिग्ज को एक ट्विटर यूजर Adv Don Vaz ने रॉड्रिग्ज की तस्वीर लगाकर उनका चेहरा काला कर जूतों की माला पहनाने वाले को 50,000 रुपए देने का वादा तक कर दिया।

एक अन्य यूजर ने रॉड्रिग्ज के एक ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा- “हे सेविओ, आप जो कोई भी हैं, कृपया हमारे धर्म के खिलाफ कुछ मत लिखिए। तुम्हें हमारे धर्म के खिलाफ बात करने का कोई अधिकार नहीं है।”

‘प्रेरक’ लगता है RSS के ‘प्रचारक’ जैसा: सोनिया गाँधी के कहने पर कॉन्ग्रेस ने ड्रॉप किया शब्द

कॉन्ग्रेस के पुराने और नए नेताओं के बीच गुरुवार को एक असहमति की खाईं दिखाई दी। दरअसल, हुआ यूँ कि कॉन्ग्रेस की विचारधारा का प्रचार-प्रसार करने के लिए जिस ट्रेनिंग दल का गठन किया जा रहा है, उसका नाम पहले प्रेरक सुझाया गया था। लेकिन नेताओं की बैठक में कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल ने इस पर सवाल खड़े कर दिए और कहने लगे कि प्रेरक शब्द आरएसएस के प्रचारक शब्द जैसा लगता है। जिसके बाद सोनिया गाँधी ने इसे खारिज कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो राहुल गाँधी के करीबी सचिन राव ने गुरुवार को पार्टी के कार्यकर्ता एवं नेताओं को प्रशिक्षण दिए जाने वाले विशेष दल के नामकरण का जिक्र किया और पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गाँधी की उपस्थिति में चल रही बैठक में ही उन्हें ‘प्रेरक’ शब्द से संबोधित करने की बात कही।

अपने सुझाव के साथ उन्होंने पार्टी की सदस्यता कैंपेन और विचारधारा के विस्तार के संपूर्ण खाके को समझाने का प्रयास किया। लेकिन तभी अहमद पटेल ने इस शब्द पर आपत्ति जाहिर कर दी। उनके बाद पंजाब कॉन्ग्रेस कमेटी के प्रमुख सुनील जाखड़ ने भी समान विचार रखे और फिर सोनिया गाँधी ने भी मान लिया कि ये शब्द आरएसएस के प्रचारक जैसा लगा रहा है। इसलिए इस प्रोग्राम के आइडिया को बरकरार रखा जाएगा, लेकिन शब्द को ड्रॉप कर दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि कल (सितंबर 12, 2019) खबर आई थी कि आम जनता की नजरों में कॉन्ग्रेस पार्टी की गिरती हुई छवि को सुधारने के लिए पार्टी ने अब अपनी कार्यप्रणाली और विचारधारा के प्रचार के लिए ‘प्रेरक’ रखने का निर्णय लिया है। ये प्रेरक कॉन्ग्रेस के खिलाफ चल रही नकारात्मक ख़बरों के खिलाफ जमीनी स्तर पर पार्टी हित में काम करेंगे।

पाकिस्तानी संसद में जमकर चले लात-घूसे, महिला सांसदों को भी नहीं छोड़ा, लगे ‘गो नियाजी गो’ के नारे

एक ओर पाकिस्तान भारत को परमाणु की धमकी दे रहा है, दूसरी ओर उसके खुद के मुल्क की संसद में नेता आपस में लात-घूसे चला रहे हैं और साथ में इमरान सरकार के ख़िलाफ़ नारे भी लगा रहे हैं। इस घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। जिसके बाद पाकिस्तानी लोग नेताओं को खूब भला बुरा बोल रहे हैं और उनका मजाक भी उड़ा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इमरान खान सरकार के एक साल पूरा होने पर बुलाए गए संयुक्त अधिवेशन में राष्ट्रपति आरिफ अल्वी के भाषण के दौरान सदन में इमरान खान के ख़िलाफ़ ही नारेबाजी शुरू हो गई। जैसे ही राष्ट्रपति अल्वी ने इमरान सरकार को एक साल पूरा करने पर बधाई दी, कि तभी संसद में हंगामा शुरू हो गया।

विपक्ष के नेता इमरान की विदेश नीतियों पर सवाल उठाने लगे, कश्मीर मामले पर फजीहत होने के लिए इमरान सरकार को कोसने लगे और ‘गो नियाजी गो’ के नारे लगते रहे, यहाँ उल्लेखनीय है कि इमरान खान का नाम इमरान अहमद खान नियाजी हैं। जिसके कारण विपक्षी उनकी तुलना इस नारे के बहाने जेनरल नियाजी से कर रहे थे। वो नियाजी, जिनकी अगुआई में पाकिस्तान को भारत से मुँह की खानी पड़ी थी।

संसद में हुए इस पूरे घटनाक्रम के दौरान वहाँ पर पाक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री इमरान खान और सेनाध्यक्ष बाजवा भी मौजूद थे। लेकिन विपक्ष के नेता लगातार अपनी ऊँची आवाज में इमरान सरकार को आर्थिक, रक्षा और विदेशी मामलों समेत सभी मोर्चों पर फेल बताते रहे।

विपक्षी पार्टियों को नारेबाजी करते देख सत्ताधारी पार्टी पीटीआई के सांसद भी आक्रामक हो गए और वह नारेबाजी कर रहे सांसदों के साथ धक्का-मुक्की करने लगे। इस दौरान महिला सांसद के साथ भी धक्का-मुक्की की बात सामने आई। इसके बाद ये हंगामा थमने की बजाए और भी ज्यादा बढ़ गया। गो नियाजी गो से पाकिस्तानी संसद गूँजती रही, मार्शलों को भी मामला शांत करवाने के लिए बुलवाया गया, लेकिन नेता अपने काबू से बाहर होकर एक दूसरे पर लात-घूसा चलाते रहे।

घर के बाहर भाजपा का झंडा दिखा तो दिन में तारे दिखा दूँगा: कॉन्ग्रेस MLA

महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के नेता सुनील केदार ने अपने क्षेत्र के लोगों को भाजपा के झंडे लगाने पर हिंसा की धमकी दी है। केदार का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ ज़ोर पकड़ रहीं हैं।

पार्टी में टूट रोकने का यह है तरीका?

टाइम्स नाउ के मुताबिक केदार ने यह बयान उस समय दिया जब वह नागपुर में अपनी पार्टी के नेताओं और जनप्रतिनिधियों के बीच पार्टी छोड़ने की भगदड़ रोकने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने अपने क्षेत्र के एक गाँव में कहा, “अगर मैंने भाजपा का झंडा तुम्हारे घर के बाहर देखा, तो दिन में तारे दिखा दूँगा।”

गौरतलब है कि राकांपा-कॉन्ग्रेस गठबंधन से बड़े नेता लगातार भाजपा-शिव सेना गठबंधन की ओर जा रहे हैं। 2019 लोकसभा चुनाव के बाद इस दलबदल की शुरुआत कॉन्ग्रेस नेता और विधानसभा के नेता विपक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल से हुई थी। उनके पहले उनके बेटे सुजय को भाजपा के टिकट पर अहमदनगर से सफलता मिल चुकी थी। राधाकृष्ण को जून में पार्टी में शामिल होने के बाद फडणवीस ने राज्य सरकार में काबीना मंत्री बनाया है। उसके बाद जुलाई में 7 बार के MLA कालीदास कोलंबकर ने जुलाई में, और हर्षवर्धन पाटिल ने हाल में कॉन्ग्रेस छोड़कर भगवा पार्टी का दामन थामा है।

370 हटाकर भाजपा सरकार ने मुस्लिमों के खिलाफ किया जंग का ऐलान: ज़ाकिर नाइक

भड़काऊ इस्लामी प्रचारक ज़ाकिर नाइक ने एक बार फिर भारत के खिलाफ ज़हर उगला है। इस बार उसके निशाने पर कश्मीर से अनुच्छेद 370 का हटाया जाना है। इसे नाइक ने “भाजपा सरकार का मुस्लिमों के खिलाफ जंग का ऐलान” करार दिया है।

कश्मीर मुस्लिम-बहुल था, इसीलिए किया

नाइक का दावा है कि भाजपा सरकार ने 370 हटाने का काम समुदाय को मज़हबी तौर पर निशाना बनाते हुए किया है। उसके मुताबिक यह भारत की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी के खिलाफ ‘act of war’ है, जिसे केवल इसलिए किया गया, क्योंकि कश्मीर के बहुसंख्यक मुस्लिम थे। उसने लिबरल-गैंग के ‘कश्मीरी लड़कों को हिरासत में लेकर गायब किया जा रहा है’, ‘उन्हें यातनाएँ दी जा रहीं हैं’ के झूठ को भी दोहराया। नाइक का प्रोपेगंडा इस हद तक पहुँच गया कि उसने कश्मीर की स्थिति की तुलना फिलिस्तीन से कर दी।

मलेशिया-कूटनीति से बौखलाया है

ज़ाकिर नाइक भारत में जिहाद के लिए युवाओं को उकसाने, आतंक के लिए मनी-लॉन्ड्रिंग जैसे कई संगीन मामलों में वांछित है। ढाका की एक बेकरी में 2016 में हुए जिहादी हमले से भी उसके तार जुड़ते हुए पाए गए थे। इसी सिलसिले में भारत मलेशिया पर, जहाँ नाइक फ़िलहाल छिपा बैठा है, उसे भारत प्रत्यर्पित करने के लिए कूटनीतिक दबाव बना रहा है। इसीलिए नाइक बौखला गया है। उसके मलेशिया में इस्लाम का प्रचार करने पर पहले ही पाबंदी लगाई जा चुकी है।

नीरव मोदी के भाई नेहाल के खिलाफ इंटरपोल ने जारी किया रेड कॉर्नर नोटिस, सबूत मिटाने का आरोप

नीरव मोदी को लगातार भारत लाने की कोशिशों की कड़ी में अहम खबर आई है कि इंटरपोल ने उनके भाई नेहाल मोदी के ख़िलाफ़ पीएनबी से कथित तौर 13, 600 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी मामले में सबूत मिटाने के आरोप में रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है।

जानकारी के मुताबिक इस साल की शुरुआत में ईडी ने इंटरपोल से अनुरोध किया था कि वह नीरव की मदद करने के आरोप में नेहाल के ख़िलाफ़ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करें। अब इस नोटिस के जारी होने के बाद इसकी जानकारी अधिकारियों ने खुद शुक्रवार को दी। इससे पहले नीरव की बहन पूर्वी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस पहले ही जारी हो चुका है।

अधिकारी ने बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में बेल्जियम की नागरिकता रखने वाले 40 वर्षीय नेहाल दीपक मोदी के खिलाफ ग्लोबल अरेस्ट वारंट जारी किया गया है। जिसकी जाँच प्रवर्तन निदेशालय कर रही है। माना जा रहा है नेहाल इस समय अमेरिका में हैं।

यहाँ बता दें कि इससे पहले लंदन की एक अदालत नेहाल मोदी को लेकर इस बात के संकेत दे चुकी है कि नीरव मोदी अपने अंमेरिका में रह रहे भाई नेहाल का इस्तेमाल ‘गंदे काम’ के लिए कर रहा था।

जबकि, ईडी ने बताया था कि पीएनबी घोटाले के खुलासे के बाद नेहाल ने दुबई और हॉन्गकॉन्ग में स्थित नीरव की कंपनियों के डमी निदेशकों के मोबाइल फोन नष्ट किए थे और उन्हें दूसरे देश पहुँचाने की व्यवस्था की थी।

गाय कह कर भैंस का आँकड़ा: क्योंकि अभिसार शर्मा सिर्फ गेहूँ को ही धान नहीं कहता

धान को गेहूँ बताकर चर्चा में आने वाले एबीपी न्यूज के पत्रकार अभिसार शर्मा सोशल मीडिया ट्रोल बनकर ‘व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी’ का काम कर रहे हैं। मेनस्ट्रीम मीडिया को त्यागने के बाद अभिसार शर्मा यूट्यूब और ट्विटर पर खूब सक्रीय हैं, और इसमें भी सबसे ज्यादा सक्रीय हैं फर्जी खबर फैलाने में।

ट्विटर पर अभिसार शर्मा का एक वीडियो शेयर किया जा रहा है जिसमें वो विश्व में एक्सपोर्ट किए जा रहे बीफ के आँकड़ो पर बात करते हुए देखे जा रहे हैं। हालाँकि, दुर्भाग्यवश जिस बीफ को अभिसार शर्मा गाय का माँस बता रहे हैं उसके आगे स्पष्ट शब्दों में ‘Buffalo Meat’ यानी भैंस का माँस लिखा हुआ है, फिर भी अभिसार शर्मा इसे गाय का माँस बताकर लोगों को गुमराह करते हुए देखे जा रहे हैं।

यह जानना आवश्यक है कि बीफ आवश्यक रूप से गाय का माँस नहीं होता है, बल्कि यह बीफ शब्द भैंस की विभिन्न नस्लों के माँस के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन सच्चाई से बिलकुल हटकर अभिसार शर्मा जैसे ‘पत्थरकार’ अक्सर यह बात लोगों को पता तक नहीं चलने देते हैं।

विभिन्न देशों द्वारा बीफ एक्सपोर्ट की रैंकिंग हम इस लिंक पर देख सकते हैं। यहाँ स्पष्ट शब्दों में दिया गया है कि भारत द्वारा एक्सपोर्ट किया जाने वाला बीफ Carabeef है ना कि गाय का माँस। इसका आशय ‘रेड मीट’ से होता है ना कि गाय के माँस से।

इस वीडियो में अभिसार शर्मा सरकार के कथित ‘दोहरे मापदंड को एक्सपोज’ करते हुए नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि एक ओर यह सरकार गाय की बात करती है जबकि दूसरी ओर बीफ एक्सपोर्ट का यह आँकड़ा हमारे सामने है। इसके बाद अभिसार शर्मा एक सूची के जरिए ये बताते नजर आ रहे हैं कि बीफ एक्सपोर्ट में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है। अभिसार शर्मा द्वारा भाजपा सरकार के ‘दोहरे मापदंड को एक्सपोज’ करने वाले इस कथित वीडियो में दिखाई गई ‘रिपोर्ट’ वर्ष 2016 की है।

सबसे मजेदार बात यह है कि इस रिपोर्ट में बीफ के आगे स्पष्ट शब्दों में Buffalo Meat लिखा गया है, जिसे अभिसार शर्मा बहुत चालाकी से या तो पढ़ नहीं पाए या फिर उन्होंने इसे बताना जरूरी नहीं समझा। अभिसार शर्मा यह भी बताते हैं कि ब्राजील ने कुछ ही समय पहले भारत से आगे स्थान बनाया है वर्ना कुछ साल पहले तक हमारा देश इसमें पहले स्थान पर था।

अभिसार शर्मा मेनस्ट्रीम मीडिया में रहते हुए भी अक्सर इस तरह की गलतियाँ करते आए हैं। उनका सबसे ज्यादा विवादास्पद और चर्चित वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जाता है जिसमें वो धान को गेहूँ बताते नजर आए थे। सोशल मीडिया पर यह भी कहा जा रहा है कि जिस अभिसार शर्मा को धान और गेहूँ में ही अंतर पता न हो, उससे बीफ, गाय का माँस और बफ़ेलो यानी, भैंस के मांस में अंतर पता होने की उम्मीद करना बेवकूफी है।

अभिसार शर्मा यूट्यूब से लेकर अपने ट्विटर अकाउंट पर फर्जी खबरों की फैक्ट्री चला रहे हैं। हाल ही में ISRO के चंद्रयान-2 मिशन के दौरान भी अभिसार शर्मा ने एक फर्जी खबर को सच मानकर एक वीडियो बनाकर न्यूज़ चैनल आज तक (Aaj Tak) और उसकी पत्रकार चित्रा त्रिपाठी पर हमला करते हुए देखे गए थे। हालाँकि, इसमें भी वो फोटोशॉप तस्वीर के साथ फर्जी खबर चलाते हुए रंगे हाथ पकड़े गए थे और इसके लिए ट्विटर यूजर्स ने उन्हें जमकर लताड़ भी लगाई थी।

इस फर्जी वीडियो को शेयर करने के बाद जब अभिसार शर्मा सोशल मीडिया पर फटकारे गए तो उन्होंने अपना ट्वीट और वीडियो दोनों डिलीट कर दिए थे। उन्होंने वीडियो के इस हिस्से को एडिट करके फिर से अपलोड भी किया, लेकिन उन्होंने अपनी इस फर्जी खबर के लिए लोगों से माफी अभी तक नही माँगी है।

शाहरुख खान के गणपति बप्पा मोरया कहने पर ‘शांतिदूतों’ नाराज

बीती रात बॉलीवुड के किंग खान ने अपने इंस्टाग्राम पर गणपति की तस्वीरें शेयर करते हुए गणपति विसर्जन पर सबको शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने लिखा- पूजा हो गई, विसर्जन हो गया, गणपति बप्पा मोरया!! दुनिया की अपार खुशियाँ हर घर और परिवार में जाएँ।

हालाँकि, उनके शुभकामना देने के तरीके को देखकर साफ़ था कि वो इस पर्व पर बहुत खुश हैं, लेकिन शायद उनकी ये खुशी कुछ कट्टरपंथियों से देखी नहीं गई। उन्होंने तुरंत शाहरुख के पोस्ट पर मजहब के नाम पर पोस्ट डालने शुरू कर दिए।

शाहरुख के इंस्टाग्राम पर फोटो

किसी ने उन्हें लिखा, “मैं आपसे प्यार करता हूँ, लेकिन ये सब क्यों? सच में, मैं आपके लिए दुखी हूँ।” एक टीनीअब्बसी नाम के अकॉउंट से तो शाहरुख को ये कहा गया, “मुझे यकीन नहीं हैं, इन्हें गैर मुलसमान से ज्यादा हिदाया (मार्गदर्शन) की जरूरत है।” इस दौरान उन्हें समझाया भी गया, “जिंदगी बहुत छोटी है…और याद रखो, बिन अल्लाह तुम कुछ भी नहीं।”

कट्टरपंथियों ने उनसे कमेंट में ये भी पूछा कि क्या वो सिर्फ़ नाम के ही हैं। उन्हें गणपति को पूजने के लिए कहा, “ये बहुत शर्मनाक है कि एक मु##म को एक बुत की पूजा करते देखना, जिसे खुद इंसान ने बनाया हैं। शर्म आनी चाहिए।” इस दौरान कुछ लोगों ने शाहरुख को गाली भी दी और उन्हें अनफॉलो करने की बात करने लगे।

खैर, किसी देवी-देवता की पूजा करते हुए देखना इस्लामिक कट्टरपंथियों को हमेशा से अखरा है। सिर्फ़ शाहरुख खान ही नहीं, इन नफरत भरी टिप्पणियों का कई नामी लोग शिकार हुए हैं।

बीते दिनों सारा अली खान को भी सोशल मीडिया पर ऐसी टिप्पणियों को झेलना पड़ा था, जब उन्होंने गणेश चतुर्थी पर गणपति के साथ अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर डाल दी थी। इसके अलावा पिछले साल भी खुद शाहरुख को इसी तरह शुभकामनाएँ देने पर ट्रोल किया गया था। फेसबुक पर नुसरत जहाँ का दुर्गापूजा में शामिल होना अनुचित बताया गया था और मोहम्मद कैफ को क्रिसमस मनाने पर ट्रोल किया गया था और क्रिकेटर इरफान पठान को भी कट्टरपंथियों ने बताया था कि रक्षा बंधन इस्लाम के ख़िलाफ़ है।

30 साल से ‘लालू’ पर था ममता बनर्जी का सिर फोड़ने का आरोप, गवाहों की मौत के बाद अदालत ने किया रिहा

30 साल पहले बंगाल की यूथ कॉन्ग्रेस नेत्री ममता बनर्जी का सिर फोड़ने का आरोप जिन लालू आलम पर था, उन्हें अलीपुर सेशंस कोर्ट के जज पुष्पल सतपति ने अब रिहा कर दिया है। आलम को बरी करने का कारण मुकदमे के फैसले में हो रही देरी और कई गवाहों का इस बीच मर जाना बताया जा रहा है। यहाँ तक कि खुद ममता बनर्जी ने पिछले महीने अदालत के समन पर कहीं और तात्कालिक व्यस्तता व सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पेशी से मना कर दिया था।

माकपा नेता के भाई

आरोपित लालू आलम को माकपा नेता बादशाह आलम का भाई बताया जा रहा है। 16 अगस्त 1990 को घायल होने के बाद ममता बनर्जी को काफी वक्त अस्पताल में गुज़ारना पड़ा था, हालाँकि इसके बाद उनकी माकपा से सड़कों पर जूझने वाली नेत्री के तौर पर प्रसिद्धि आसमान छूने लगी थी। जब ममता 2011 में सत्ता में आईं, तो ‘लालू’ ने उनसे माफ़ी की गुज़ारिश की थी।

लोक अभियोजक राधा कांत मुखर्जी ने ममता बनर्जी के अदालत में आने से मना करने के बाद अदालत को सूचित किया कि जज अब अपने स्वविवेक के अनुसार मामले को चलाते रहने या बंद करने पर निर्णय ले सकते हैं। लेकिन मुखर्जी ने साथ ही जस्टिस सतपति से प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत को ध्यान में रखने की भी गुज़ारिश की थी। ममता बनर्जी हालाँकि वीडियो कॉन्फ्रेंस के लिए तैयार थीं, लेकिन इसके लिए ज़रूरी सुविधाएँ अलीपुर कोर्ट में नहीं थीं। इसके पहले वह 1994 में इस अदालत में बतौर गवाह हाज़िर हुईं थीं।

पाक को धार्मिक स्वतंत्रता भंग करने वाले देशों की सूची में डाला जाए, बंद हो आर्थिक मदद: EU में UNPO

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति के बारे में बात करते हुए गुरुवार को UNPO (यूनाईटिड नेशन एंड पीपुल्स ऑर्गानाइजेशन) के महासचिव राल्फ बुनचे ने यूरोपीय संघ से पाकिस्तान को धार्मिक स्वतंत्रता का हनन करने वाले देशों की सूची में डालने के लिए गुहार लगाई। 

उन्होंने जेनेवा में बैठक के दौरान ये आग्रह पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की बुरी स्थिति को लेकर किया। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा काफी समय से उठता आ रहा है और ये बहुत ही महत्तवपूर्ण हैं। उन्होंने एएनआई से बातचीत में बताया, “आज मैं पाकिस्तान में (खासकर सिंध में) धार्मिक स्वतंत्रता के बारे में बोल रहा था। मैंने इस बात पर प्रकाश डाला कि पाकिस्तान में धर्म की स्वतंत्रता का बहुत महत्वपूर्ण और लंबा मुद्दा रहा है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राफेल ने कहा, “पिछले साल नबंवर में अमेरिकी गृह विभाग ने पाकिस्तान को धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियमों के तहत विशेष चिंता वाले देश के रूप में नामित किया था। जो इसे धार्मिक स्वतंत्रता के लिहाज से भयानक देशों की श्रेणी में शामिल करता है। इसलिए पाकिस्तान में धार्मिक अतिवाद से पैदा होने वाले उत्पीड़न को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। “

गौरतलब है कि इस बैठक में पाकिस्तान की उसके मुल्क में अल्पसंख्यकों पर जुल्म करने के लिए अंतराष्ट्रीय स्तर पर निंदा की गई। स्पष्ट रूप से बताया गया कि इस्लामाबाद में भी धार्मिक अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ कभी हिंसा, नरसंहार, असाधारण हत्या, अपहरण, बलात्कार, धर्म परिवर्तन जैसे मामलों के रूप में भेदभाव होता हैं। जिनमें पाकिस्तानी हिंदू, ईसाई, सिख, अहमदिया और शिया उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों में से एक हैं। इसके अलावा बुनचे ने इस बैठक में यूरोपियन संघ पर भी सवाल उठाए और कहा कि पाकिस्तान से जुड़े इस मामले में वह इस दिशा में काम नहीं कर रहे हैं, बल्कि वो किसी और ही राह पर जा रहे हैं। उनके मुताबिक यूरोपीय संघ पाकिस्तान को लेन-देन करने का मौक़ा दे रहा है।

महासचिव बुनचे ने इस बैठक के बाद उम्मीद जताते हुए ये भी कहा, “UNPO को आशा है कि यूरोपीय संघ इस मामले में अमेरिका से एक कदम आगे बढ़कर पाक को अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता मानकों के भारी उल्लंघनकर्ता के रूप में मान्यता देगा। साथ ही कार्रवाई कर यह सुनिश्चित करेगा कि उसे सामान्य हालात में दी जाने वाली आर्थिक मदद पर अंकुश लगाया जा सके।”