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₹15000 की स्कूटी का ₹23000 चालान लेकिन आप बाइक छोड़कर भाग नहीं सकते, भरना ही पड़ेगा

नया मोटर वाहन संशोधन विधेयक-2019 के 1 सितंबर से लागू होन के साथ ही दिल्ली से सटे हरियाणा में गुरुग्राम पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है। बता दें कि लागू होने के तीन दिन के भीतर गुरुग्राम पुलिस ने यातायात नियमों के उल्लंघन में चार बड़े चालान काटे हैं। इनमें पहला चालान 23000 रुपए, दूसरा चालान 24000, तीसरा चालान 35500 रुपए तो अब मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चौथे चालान का भी पता चला है, जिसमें टैक्टर चालक का 59,000 रुपए का चालान काटा गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार (सितम्बर 3, 2019) देर रात ट्रैफिक पुलिस ने न्यू कॉलोनी मोड़ के पास ओवर लोड ट्रैक्टर-ट्राली के चालक को 59 हजार का चालान थमा दिया।

बता दें कि पहला भारी भरकम चालान जो मीडिया की सुर्खी बना उसमें गुरुग्राम कोर्ट के एक कर्मचारी पर 23 हजार का जुर्माना था। जबकि उसकी स्‍कूटी की मौजूदा समय में मार्केट वैल्यू ही 15 हजार रुपए ही है। इस खबर के आने के बाद सोशल मीडिया पर ऐसे हजारों मीम्‍स बन गए जिसमें कहा जा रहा है कि अगर 10000 की बाइक का चालान 15000 कटे तो उसे दरोगा जी को सप्रेम भेंट कर दें या जब्‍त हो जाए तो इसे छुड़वाएँ ही नहीं। बात काम की लग सकती है अगर आप भी ऐसा ही सोच रहें हैं तो आप गलत हैं। ऐसा करके आप और बुरी तरह कानून के चंगुल में फँस जाएँगे। आपकी गाड़ी तो आपकी नीलाम होगी ही, आप को जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।

ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों ने इस तरह के एक से बढ़कर एक तर्क तब देने शुरू किए जब सोमवार को स्कूटी सवार का 23 हजार और एक ऑटो चालक का 32 हजार 500 रुपए तक के चालान काटे गए। यह चालान गुरुग्राम के ब्रिस्टल चौक पर काटा गया। चालक के पास आरसी, डीएल, पॉल्युशन सर्टिफिकेट, इंश्योरेंस और नंबर प्लेट न होने का दोषी पाया। इससे पहले 23000 के चालान का सामना कर रहे, स्कूटी सवार का कहना है कि उसकी स्कूटी की कीमत की महज 15 हजार रुपए है ऐसे में वह चालान की राशि जमा नहीं करेगा।

चलिए जान लेते हैं कि कैसे स्कूटी का इतना भारी चालान काटा जा रहा है। दिल्ली की ट्रैफिक पुलिस ने यह चालान मोटर व्हीकल एक्ट 1988 सेक्शन 213 (5)(e) की कई धाराओं के मुताबिक काटा था। यह चालान कुछ इस प्रकार से था बिना हेलमेट 1000 रुपए, बिना ड्राइविंग लाइसेंस 5000 रुपए, बिना इंश्योरेंस के 2000 रुपए, बिना रजिस्ट्रेशन 5000 हजार रुपए, इसके अलावा एयर पॉल्यूशन और एनओसी न होने के चलते 10000 रुपए का और चालान काटा गया कुल मिलाकर चालान की रकम 23000 रुपए तक पहुँच गई।

जुर्माने की नई लिस्ट को आप नीचे देख सकते हैं-

साभार -oneindia

अब एक और चालान को देखते हैं कि कैसे ट्रैक्टर चालक का चालान 59000 तक पहुँच गया। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, मामला यूँ है कि, ट्रैक्टर चालक ने रेड लाइट जंप करने के चक्कर में एक मोटसाइकिल को टक्कर मार दी थी। पुलिस कर्मियों ने ट्रैक्टर रोककर चालक से कागजात माँगे तो वह कोई भी दस्तावेज नहीं दिखा सका। इसके बाद नए ट्रैफिक एक्ट के तहत ट्रैफिक पुलिस ने चालक लाइसेंस, आरसी, फिटनेस प्रमाण पत्र, इंश्योरेंस, खतरनाक सामान रखने तथा खतरनाक ड्राईविंग, ट्रैफिक नियम की अनुपालन नहीं करने, तथा रेड लाइट जंप करने, वाहन को हाईबीम में चलाने के आरोप में ट्रैक्टर चालक रामगोपाल को 59 हजार रुपए का चालान थमा दिया था। हालाँकि, बुधवार दोपहर को चालक ने कई दस्तावेज दिखा दिए तो अब उसे 13 हजार का ही भुगतान करना पड़ेगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 23000 के चालान के मामले में अधिवक्ता दुर्गेश पांडेय ने बताया कि अगर स्‍कूटी चालक ऐसा करता है तो इस स्थिति में कोर्ट तय समय सीमा पर वाहन चालक को नोटिस जारी करेगा, जिसमें उसका पेश होना अनिवार्य होगा। अगर वाहन चालक पेश नहीं होता तो कोर्ट की ओर से नियमों के उल्लंघन को देखते हुए वाहन की नीलामी के अलावा सजा देने का भी प्रावधान है।

लव जेहाद: हिंदू लड़की को गर्भवती किया, कहा- शादी करने के लिए इस्लाम अपनाओ, ISIS जाकर काम करो

केरल की 26 साल की हिंदू युवती को एक मुस्लिम युवक ने पहले प्रेम में फॉंसा। फिर दोनों साथ रहने लगे। जब युवती गर्भवती हो गई और शादी के लिए कहने लगी तो युवक ने उसके सामने इस्लाम कबूल करने की शर्त रखी। इतना ही नहीं आतंकी संगठन आईएसआईएस के शिविरों में जाकर काम कर पैसे कमाने को कहा। इनकार करने पर वह उसने उसे बुरी तरह प्रताड़ित किया।

मामला तब सामने आया जब पीड़िता ने शनिवार (31 अगस्त) को अपनी व्यथा केरल पुलिस के मुखिया लोकनाथ बेहरा को सुनाई। युवती की शिकायत के बाद पुलिस को आशंका है कि उसका प्रेमी लव जिहाद में शामिल हो सकता। पठानमथिट्टा ज़िले की पीड़िता के अनुसार उसने स्थानीय पुलिस से भी मामले की शिकायत की थी। लेकिन, कार्रवाई नहीं की गई।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार घटना तीन साल पहले की है। तब पीड़िता हैदराबाद के एक अस्पताल में काम कर रही थी। उसी अस्पताल में तेलंगाना के मिरियालगुडा का रहने वाला मुस्लिम युवक भी काम करता था। दोनों के बीच प्रेम हुआ।

युवती के अनुसार जब वह युवक से मिली थी तो वह ईसाई था। बाद में उसने इस्लाम क़बूल कर लिया। इसके बाद दोनों साथ रहने लगे और युवती गर्भवती हो गई। मुस्लिम युवक ने जबरन उसका गर्भपात करवा दिया। युवती ने जब शादी की बात की तो उसने इस्लाम क़बूल करने के लिए दबाव बनाया और उसे आईएसआईएस के शिविरों में जाकर नर्स के तौर पर काम करने को कहा ताकि ज्यादा कमाई हो सके।

युवती का कहना है कि उसके इनकार करने पर मुस्लिम युवक अक्सर उसे पीटने लगा। 2017 में वह उससे अलग हो गई। फ़िलहाल वह पठानमथिट्टा के रन्नी में रह रही है।

पठानमथिट्टा ज़िले के पुलिस प्रमुख जे जयदेव का कहना है कि युवती ने जब शिकायत की थी तब वे यहाँ तैनात नहीं थे। अब उसने सीधे राज्य के पुलिस प्रमुख को अपनी शिकायत दी है। उनसे मिले निर्देशों के अनुसार पुलिस आगे जाँच करेगी।

बीते कुछ सालों में केरल की महिलाओं समेत कई युवा आईएस में शामिल हो चुके हैं। श्रीलंका में ईस्टर पर हुए आतंकी हमलों में भी इनमें से कई वांछित हैं। आईएस से संदेह होने के शक में राज्य के कई युवाओं की गतिविधियों पर खुफिया एजेंसियों की भी निगाहें हैं।

बाबरी पक्षकार ने लगाया ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ का नारा तो नेशनल शूटर ने घर में घुस के कूटा

राम मंदिर मामले में मुस्लिम पक्षकार इक़बाल अंसारी ने नेशनल शूटर वर्तिका सिंह पर मारपीट का आरोप लगाया है। इक़बाल अंसारी ने कहा कि वर्तिका सिंह तीन तलाक़ सहित अन्य गंभीर मुद्दों पर चर्चा करने के लिए उनके घर आई थी। इसी दौरान दोनों के बीच गर्मागर्म बहस होने लगी और गुस्से में वर्तिका ने अंसारी पर हमला कर दिया। हालाँकि, वर्तिका ने कहा है कि बातचीत के दौरान अंसारी ने ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे लगाए।

पुलिस ने वर्तिका और उनके एक साथी को हिरासत में ले लिया है। पुलिस का कहना है कि वर्तिका से पूछताछ की जा रही है। इस दौरान वर्तिका सिंह ने एक वॉइस मैसेज के माध्यम से बताया कि पुलिस ने उन्हें किसी गेस्ट हाउस में रखा हुआ है। पुलिस ने कहा कि उन्हें लखनऊ ले जाकर छोड़ दिया जाएगा लेकिन अभी भी वे हिरासत में ही हैं।

इक़बाल अंसारी ने आरोप लगाया कि वर्तिका उन पर सुप्रीम कोर्ट से मामला वापस लेने का आरोप लगा रही थी। इक़बाल अंसारी के अनुसार, वर्तिका ने धमकी दी कि वह अंतरराष्ट्रीय शूटर हैं और बाबरी केस वापस न लेने पर उन्हें गोली मार देंगी। राजीव धवन ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में भी उठाया।

वर्तिका का कहना है कि बातचीत के दौरान इक़बाल अंसारी ने न सिर्फ़ पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाए बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को लेकर अपशब्द भी कहे। बता दें कि राम मंदिर की नियमित सुनवाई चल रही है और इक़बाल अंसारी बाबरी मस्जिद की तरफ से मुख्य पक्षकार हैं। वकील राजीव धवन मुस्लिम पक्ष की पैरवी कर रहे हैं।

हाल ही में चेन्नई के एक 88 वर्षीय प्रोफेसर ने राजीव धवन को पत्र लिख कर उन पर आस्था के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया था। प्रोफ़ेसर ने धवन से पूछा था कि वह ईश्वर के विरुद्ध कैसे जा सकते हैं? इस मामले में प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना नोटिस भी जारी किया है। वर्तिका सिंह ने बताया कि वह अयोध्या रामलला के दर्शन के लिए गई थीं। वह मूल रूप से प्रतापगढ़ की निवासी हैं।

शशि थरूर ने पार्टी को दी सलाह, कहा- कॉन्ग्रेस को सोचना पड़ेगा कि हमारे वोटर मोदी के साथ क्यों गए

कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ में दिए गए बयान पर सफाई दी है। तिरुवनंतपुरम के सांसद ने कहा कि वे मोदी की तारीफ़ नहीं कर रहे हैं बल्कि कॉन्ग्रेस को सलाह दे रहे हैं। थरूर ने कहा कि कॉन्ग्रेस को 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में महज 19% वोट मिले जबकि भाजपा को 2014 के लोकसभा में 31% वोट मिले और 2019 में यह आँकड़ा बढ़ कर 37% हो गया।

बकौल शशि थरूर, भाजपा के वोटरों में कई ऐसे लोग थे जो पहले कॉन्ग्रेस के वोटर थे लेकिन उन्होंने कॉन्ग्रेस से मुँह मोड़ लिया। थरूर ने अपनी पार्टी को इस बात पर विचार करने की सलाह दी कि आख़िर इन वोटरों ने कॉन्ग्रेस से नाता क्यों तोड़ लिया? पूर्व केंद्रीय मंत्री ने पूछा कि जब तक हम ये नहीं पता लगाएँगे कि हमारे वोटर हमें छोड़ कर क्यों चले गए, हम उन्हें वापस अपने पाले में लाने में कैसे कामयाब होंगे?

शशि थरूर ने कहा कि कॉन्ग्रेस को इस पर विचार करना चाहिए कि क्या-क्या सही किया गया, कहाँ ग़लतियाँ हुईं और कैसे उन ग़लतियों को सुधारा जा सकता है? कॉन्ग्रेस नेता ज़ोर देते हुए कहा कि पार्टी को पहले यह समझना पड़ेगा कि लोग मोदी के साथ क्यों गए? हाल ही में शशि थरूर ने अपनी पार्टी को सलाह दी थी कि सिर्फ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने से काम नहीं चलेगा और सरकार के अच्छे कार्यों की तारीफ भी की जानी चाहिए।

इसके बाद कई कॉन्ग्रेसी नेताओं ने थरूर पर निशाना साधा। पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने थरूर को पब्लिसिटी का भूखा तक कह दिया था। खुर्शीद ने कहा था कि थरूर कभी भी एक गंभीर नेता नहीं रहे हैं। थरूर के बयान को लेकर केरल कॉन्ग्रेस ने उनसे स्पष्टीकरण की माँग भी की थी। थरूर के अलावा जयराम रमेश और अभिषेक मनु सिंघवी ने भी अपनी पार्टी को पीएम मोदी की अत्यधिक आलोचना से बचने की सलाह दी थी।

कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया आपे से बाहर, अपने सहयोगी को सरेआम जड़ दिया जोरदार थप्पड़, देखें VIDEO

कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने ही सहयोगी को सरेआम थप्पड़ जड़ दिया है। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें देखा जा सकता है कि सिद्धारमैया मैसूर एयरपोर्ट के बाहर अपने सहयोगी को सबके सामने थप्पड़ मार रहे हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा जारी किए गए इस वीडियो में ये तो खुलासा नहीं हो पाया कि सिद्धारमैया ने अपने सहयोगी को थप्पड़ क्यों मारा? मगर इसे देखकर लगता है कि शायद दोनों किसी मुद्दे पर बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान सिद्धारमैया पीछे मुड़ते हैं और तड़ाक से सहयोगी के गाल पर चाँटा मार देते हैं। इससे पहले की वह कुछ समझ पाता उन्होंने उसे कंधे पर धक्का देकर आगे बढ़ा दिया।

इस वीडियो के सामने आने के बाद सिद्धारमैया के रवैए की हर तरफ आलोचना हो रही है। ऐसा माना जा रहा है कि कर्नाटक में हाल के सियासी घटनाक्रमों से सिद्धारमैया खुश नहीं हैं और इसी वजह से वह आपा खो बैठे। पहले कर्नाटक में जेडीएस-कॉन्ग्रेस की गठबंधन सरकार गिरी और फिर बीएस येदियुरप्पा की अगुआई में बीजेपी ने सरकार बना ली। इसके साथ ही कर्नाटक के कद्दावर कॉन्ग्रेसी नेता डीके शिवकुमार की गिरफ्तारी के बाद से भी कॉन्ग्रेस बौखलाई हुई है।

गौरतलब है कि, कुछ दिनों पहले सिद्धारमैया ने भाजपा के लिए वेश्या शब्द का इस्तेमाल किया था। इससे पहले इस साल जनवरी में भी सिद्धारमैया पर एक महिला से बदसलूकी करने का आरोप लगा था। सिद्धारमैया के पास एक महिला कुछ शिकायत लेकर पहुँची थी। जैसे ही उस महिला ने बात शुरू की, सिद्धारमैया भड़क गए और महिला के हाथ से माइक छीन लिया। इसी दौरान सिद्धारमैया का हाथ महिला के दुपट्टे पर चला गया और उन्‍होंने उसे नीचे की ओर झटक दिया था।

मैं कॉन्ग्रेस की बालिका वधू, CBI उत्तराखंड आए और मुझे हथकड़ी लगा कर ले जाए : पूर्व CM हरीश रावत

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने खुद को कॉन्ग्रेस की बालिका वधू बताया है। आईएनएक्स मीडिया मामले में पी चिदंबरम सीबीआई द्वारा गिरफ़्तार किए जा चुके हैं। कल गुरुवार (अगस्त 3, 2019) को प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में कर्नाटक कॉन्ग्रेस के कद्दावर नेता डीके शिवकुमार को भी गिरफ़्तार कर लिया। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री ने इस गिरफ़्तारियों की चर्चा करते हुए कहा कि अब वह भी जेल जाने को तैयार हैं।

अपनी उम्र का हवाला देते हुए 71 वर्षीय रावत ने कहा कि वह कॉन्ग्रेस की बालिका वधू हैं, उन्होंने किसी और पार्टी की तरफ कभी देखा तक भी नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर उनके बुढ़ापे में जेल जाने से उनकी पार्टी को फायदा होता है तो वह इसके लिए भी तैयार हैं। हरीश रावत उत्तराखंड कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। मनमोहन सरकार में वह केंद्रीय मंत्री भी रहे थे। सीबीआई के बारे में बात करते हुए रावत ने कहा:

“मैं जाँच में सीबीआई का सहयोग कर रहा हूँ और एजेंसी जब भी मुझे बुलाती है, मैं जाता हूँ। अगर मुझे गिरफ़्तार करना ही है तो सीबीआई उत्तराखंड आए और मुझे हथकड़ी लगा कर ले जाए। राज्य की जनता भी तो देखे कि मैंने कौन सा अपराध किया है कि पूरी सत्ता मेरे पीछे पड़ी हुई है। तभी तो जनता इन्साफ करेगी। हमारा मामला सीबीआई के दुरुपयोग का सबूत बन सकता है। मैं गिरफ़्तार होने के लिए तैयार हूँ।’

हरीश रावत ने ये सारी बातें आजतक से बातचीत में कही। रावत के ख़िलाफ़ अभी सीबीआई जाँच चल रही है। 2017 में विधायकों के ख़रीद-फरोख्त के आरोप में उन पर गिरफ़्तारी का संकट मँडरा रहा है। 2017 में उत्तराखंड में कॉन्ग्रेस की सरकार गिरने के बाद राज्यपाल की अनुमति के बाद रावत के ख़िलाफ़ सीबीआई जाँच शुरू की गई थी। नैनीताल हाईकोर्ट को सीबीआई ने बताया है कि प्रारंभिक जाँच पूरी होने के बाद अब वो हरीश रावत के खिलाफ मामला दर्ज करना चाहती है।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस नेता लगातार केंद्र सरकार पर बदले की राजनीति करने और सरकारी जाँच एजेंसियों का दुरुपयोग करने का आरोप लगा रहे हैं।

‘सेक्स एडिक्ट’ शाहिब आबिद अंसारी 6 साल के मासूम के रेप में गिरफ्तार, पहले से ही कई मामले दर्ज

मुंबई के ओशिवारा में कुछ ही दिन पहले जुडिशल कस्टडी से रिहा हुआ एक आदतन अपराधी 30 वर्षीय शाहिब आबिद अंसारी ने ओशिवारा से 6 साल की बच्ची का अपहरण करने के बाद रेप किया। DNA की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने उसे सेक्स एडिक्ट बताया है और कहा है कि अपनी दोनों पत्नियों से अत्यधिक सेक्सुअल डिमांड के कारण उसका दोनो से पहले ही तलाक़ हो चुका है।

पुलिस के रिकॉर्ड के हिसाब से भी आबिद अंसारी आदतन अपराधी है फिर भी कानून के लूपहोल्स का फायदा उठाकर बाहर घूम रहा था। उस पर अलग-अलग थानों में दर्जनों चोरी के मामले दर्ज है। दिल्ली में भी उस पर कई मामले दर्ज हैं। हाल ही में उसे मुंबई में भी 3 लाख के एक चोरी के मामले में गिरफ्तार भी किया था। उसकी तस्वीर लगभग सभी सम्बंधित थानों में होगी। लेकिन वह खुलेआम घूम रहा था।

31 अगस्त को ओशिवारा के BMC मैदान से एक 6 साल की बच्ची को चॉकलेट के बहाने फुसलाकर वह ऑटो से उसे एक निर्जन स्थान पर ले गया। जहाँ उसने उसका रेप किया और उसे वहीं जख्मी हालत में किसी को कुछ न बताने की धमकी देकर छोड़कर भाग गया। जैसे ही सड़क पर बदहवास दौड़ती उस बच्ची पर एक पुलिस वाले की नज़र पड़ी वह उसे थाने ले आया। जहाँ उसके माता-पिता पहले ही उसके गायब होने की रिपोर्ट लिखवा चुके थे।

पुलिस ने पीड़ित बच्ची का मेडिकल जाँच करवाई जहाँ उसके साथ बलात्कार की पुष्टि हुई। पुलिस ने मामले में कार्यवाही करते हुए CCTV की मदद से आबिद अंसारी की पहचान की।

DCP परमजीत दहिया ने मीडिया से कहा कि “CCTV में साफ पता चल रहा था कि एक लाल टी सर्ट पहना व्यक्ति एक छोटी लड़की के साथ टहल रहा है। जहाँ उसे देखकर पहले फूड डिलीवरी बॉय का संदेह हुआ क्योंकि उस एरिया में 10-15 की संख्या में रहते हैं। दूसरे फुटेज में उसके टी सर्ट पर लिखे शब्द ‘मैट्रिक्स इमेजिन’ पढ़ा जा सकता था, स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस ने अंसारी की पहचान की।”

मैं मुजाहिद्दीन का काम करता हूँ, लश्कर के साथ हूॅं: आतंकियों के कबूलनामे का वीडियो सेना ने जारी किया

भारतीय सेना के हाथों एक बड़ी क़ामयाबी लगी है। बुधवार (4 सितंबर) को सेना ने बताया कि पाकिस्तान के दो आतंकियों को जिंदा पकड़ने में कामयाबी मिली है। आतंकियों का संबंध लश्कर-ए-तैयबा से है। इनके कबूलनामे का वीडियो भी सेना ने जारी किया है।

सेना के कमांडर लेफ़्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लन और जम्मू-कश्मीर के पुलिस एडीजी मुनीर ख़ान ने बताया कि दोनों घाटी में अशांति फैलाने की फ़िराक में थे। दोनों को 21 अगस्त को गिरफ़्तार किया गया था।

सेना द्वारा जारी वीडियो में आप देख सकते हैं कि खलील स्वीकार करता है, “मैं मुजाहिद्दीन का काम करता हूँ, लश्कर-ए-तैयबा के साथ हूँ।” खलील ने बताया कि उसने काचरबेन में एक हफ़्ते की ट्रेनिंग ली थी। वीडियो में उसने अपने कई अन्य साथियों का भी नाम लिया जो लश्कर से जुड़े हैं।  

वहीं, दूसरे आतंकी ने अपना नाम नज़ीम बताया जो पाकिस्तान के रावलपिंडी का निवासी है। उसने भी क़बूला कि वो लश्कर से जुड़ा हुआ है। उसने बताया कि उसे और खलील को मिलकर पाकिस्तानी फ़ौज की मदद से भारत में घुसपैठ करनी थी। 

मीडिया को संबोधित करते हुए लेफ़्टिनेंट जनरल ने बताया,

“घाटी में शांति को बाधित करने के लिएपाकिस्तान आतंकवादियों की घुसपैठ कराने की कोशिश कर रहा है। 21 अगस्त को हमने दो पाकिस्तानी नागरिकों को गिरफ़्तार किया जो लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हैं।”

उन्होंने इस बात की भी जानकारी दी कि दोनों आतंकी लश्कर के एक बड़े ग्रुप की मदद के लिए घाटी में घुसे थे।

अपने आतंकी मंसूबों को पूरा करने के लिए पाकिस्तान नई साज़िश रच रहा है। घाटी और उसके बाहर भारत के अलग-अलग हिस्सों में रक्तपात की इस साजिश को अंजाम देने की फिराक में बदनाम खुफिया एजेंसी आईएसआई जुटा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जैश और लश्कर की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पोल खुलने के कारण आईएसआई ने एक नए नाम से आतंकी संगठन तैयार किया है। इसका नाम अल-उमर-मुजाहिद्दीन (AUM) है। इसका अगुआ मुश्ताक अहमद जरगर उर्फ मुश्ताक लातराम है।

सूत्र के हवाले से बताया गया है कि आईएसआई चाहता है कि भारतीय सेना मजबूर होकर निहत्थे लोगों पर गोली चलाए ताकि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के प्रोपगेंडा को मजबूती मिल सके। सूत्रों के मुताबिक इसी कड़ी में फेक तस्वीरें और न्यूजों को भी योजनाबद्ध तरीके से फैलाया जा रहा है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान के प्रोपगेंडा को अभी तक दुनिया में किसी ने समर्थन नहीं दिया है। सभी मुल्कों ने कश्मीर को भारत का आंतरिक मसला बताया है। इससे पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। इस बौखलाहट में उसके प्रधानमंत्री इमरान खान परमाणु जंग की धमकी भी दे चुके हैं।

अगर आपने तबरेज का नाम सुना है और रंजीत का नहीं तो जान लीजिए ‘उनका’ एजेंडा कामयाब रहा

मॉब लिंचिंग भी आजकल 2 तरह की हो गई है- ‘अच्छी’ लिंचिंग और ‘बुरी’ लिंचिंग। ‘अच्छी’ लिंचिंग वह है, जिसमें आरोपित हिन्दू हों और मृत व्यक्ति मुस्लिम। ‘बुरी’ लिंचिंग वह है, जिसमें इसका उल्टा हो। ‘अच्छी’ मॉब लिंचिंग पर हंगामा खड़ा किया जाता है, सरकार पर सवाल उठाए जाते हैं और ‘डर का माहौल’ साबित करने की कोशिश की जाती है। वहीं ‘बुरी’ मॉब लिंचिंग की ख़बर किसी कोने में पड़ी होती है, जिसे लेकर कोई आउटरेज नहीं होता।

मुंबई में एक ड्राइवर को सिर्फ़ इसीलिए मार डाला गया, क्योंकि साज़िश के तहत अफवाह फैलाया गया कि वह चोर है। यह साज़िश एक दूसरे बस के ड्राइवर ने की। इस मामले में अनवर, उसका भाई मिंटू सहित 4 लोग गिरफ़्तार किए गए हैं। यह घटना महाराष्ट्र के पालघर स्थित बोइसर की है। वहाँ एक बस ड्राइवर ने दूसरे ड्राइवर को लेकर हंगामा किया कि वह चोर है और उसके बस की बैटरी चुरा रहा था। इसके बाद कुछ लोगों ने उसे मार डाला।

मृतक का नाम रंजीत पांडेय है। रंजीत को जब मारा-पीटा जा रहा था तब वह काफ़ी मिन्नतें करता रहा, लेकिन किसी ने उसकी एक न सुनी। उसे 20 मिनट तक मारा-पीटा जाता रहा। उसके पेट और छाती पर लात-घूसों की बरसात कर दी गई। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई, लेकिन मरने से पहले उसने घटना को लेकर अपने परिवार वालों को सब कुछ बताया। आपने किसी मानवाधिकार संगठन, विपक्षी नेता, कथित एक्टिविस्ट या फिर मीडिया के लोगों से कहीं भी रंजीत का नाम सुना क्या? आपने नहीं सुना।

आपने इसीलिए रंजीत का नाम नहीं सुना, क्योंकि उसकी मॉब लिंचिंग को लेकर किसी ने आवाज़ ही नहीं उठाई। क्यों नहीं उठाई? क्योंकि आरोपितों में मुस्लिम शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपितों में से 2 के नाम अनवर और मिंटू है, जो भाई हैं। अगर इस पर आउटरेज किया जाएगा तो लोगों को यह भी बताना पड़ेगा कि आरोपितों में अनवर और उसका भाई है। अब यही मामला बिगड़ जाएगा। फिर ‘डर का माहौल’ वाला वातावरण कैसे साबित किया जाएगा?

‘डर का माहौल’ तो हिन्दुओं द्वारा किसी मुस्लिम की ‘मॉब लिंचिंग’ के बाद बनता है न? यही कारण है कि आपने रंजीत का नाम नहीं सुना है, लेकिब तबरेज का नाम सुना है। चोरी करने के आरोप में झारखण्ड में भीड़ ने
तबरेज को मारा था जिसके कारण कथित तौर पर उसकी मौत हो गई। तबरेज का बदला लेने के लिए कई शहरों में हंगामे हुए। झारखण्ड के सरायकेला में ओवैसी की पार्टी के कुछ नेता पहुँचे और उन्होंने खुलेआम गुंडागर्दी की। महिलाओं के साथ बलात्कार करने की धमकियाँ दी गईं। गाँव में दहशत का माहौल बनाया गया और पुरुष घर छोड़ कर पलायन करने को मजबूर हुए।

इसी तरह दंगा भड़काने की साज़िश के तहत कुछ लोगों ने टिक-टॉक वीडियो बना कर कहा कि तबरेज को मारे जाने के बाद अगर उसका बेटा आतंकवादी बन जाता है तो फिर किसी को ये पूछने का हक़ नहीं होगा कि मुस्लिम आतंकवादी क्यों बनते? अभिनेता एजाज़ ख़ान ने भी आरोपितों का साथ दिया। लेकिन, कहीं भी सोशल मीडिया पर आपने रंजीत पांडेय को लेकर कोई वीडियो देखा क्या, जिसमें उनकी हत्या को लेकर सवाल पूछे गए हों? नहीं। तबरेज के नाम में ऐसा क्या था जो रंजीत के नाम में नहीं है?

इसी तरह राँची के अरगोड़ा थाना क्षेत्र के हरमू फल मंडी के पीछे शेखर राम और बसंत राम को चार स्थानीय लोगों ने पकड़ा और उन्हें मज़हबी नारे लगाने को मजबूर किया। धार्मिक नारे न लगाने पर उन दोनों को चाकू मार कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। एक की गर्दन पर चाकू मारा तो दूसरे के हाथ को लहुलूहान कर दिया। ये घटना भी तबरेज की मॉब लिंचिंग का बदला लेने के लिए हुई। जब तबरेज की मॉब लिंचिंग बड़ी ख़बर बनी तो उसका बदला लेने के लिए जो वारदातें हुईं, वो ख़बर क्यों नहीं बनीं?

झारखण्ड में भीड़ द्वारा तबरेज अंसारी की हत्या के विरोध में मालेगाँव में 1 लाख मुस्लिम सड़कों पर उतरे। ये सभी मॉब लिंचिंग के ख़िलाफ़ कड़े क़ानून बनाने की माँग लेकर सड़कों पर उतरे थे। रैली के आयोजकों ने कहा था कि तबरेज का मारा जाना ‘फाइनल ट्रिगर’ है और अब विरोध का समय आ गया है। जहाँ तबरेज की हत्या के बाद सिर्फ़ एक क्षेत्र में 1 लाख लोग सड़कों पर उतरे, रंजीत पांडेय की लिंचिंग के ख़िलाफ़ कितनों ने धरना दिया? क्या सिर्फ़ उसी मॉब लिंचिंग के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें आरोपित हिन्दू हों?

तबरेज को शहीद का दर्जा तक देने की भी माँग की गई। मेरठ में भीड़ द्वारा मज़हबी टिप्पणियाँ की गईं और उन्मादी नारे लगाए गए। बदमाशों ने इंस्पेक्टर तक को नहीं छोड़ा। इंस्पेक्टर को सरेआम गिरेबान पकड़ कर धमकाया गया। इंस्पेक्टर का गला पकड़े जाने के बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा

लेकिन, रंजीत पांडेय की मॉब लिंचिंग को लेकर सवाल नहीं पूछे जाएँगे, क्योंकि आरोपितों में अनवर शामिल है। गिरोह विशेष का नैरेटिव यह कहता है कि अनवर नाम सिर्फ़ और सिर्फ़ पीड़ित हो सकता है, आरोपित नहीं। आरोपित तो वो होता है जिसके नाना के फूफा के नाती के साढ़ू का पोता बजरंग दल के किसी कार्यकर्ता के मौसेरा भाई के साले का भांजा हो। उनका नैरेटिव यह भी कहता है कि अनवर सिर्फ़ और सिर्फ़ ‘बेचारा’ हो सकता है। अगर वह आरोपित है तो उस ख़बर को किसी कोने में पटक दो।

JNU की रोमिला थापर से CV माँग कर गुनाह किया है इस क्रूर, घमंडी, तानाशाही सरकार ने

युद्धों के साथ जुड़ी कहानियाँ हमेशा से सभ्यता में सुनी-सुनाई जाती रही हैं। युद्ध का मतलब ही संघर्ष होता है, शायद मनुष्य की संघर्ष करने की प्रवृति, मनुष्यों के लिए संघर्ष की कथाओं को रोचक बना देती है। यहाँ यह भी याद रखना जरूरी है कि युद्ध से जुड़ी हर कहानी सच्ची नहीं होती। अक्सर एक पक्ष दूसरे पक्ष को अमानवीय और क्रूर दिखाने के लिए कहानियाँ गढ़ता भी है। अगर आपके पास अच्छा प्रचार तंत्र हो, कुछ अच्छे लेखक हों तो कोई मुश्किल नहीं कि आप विपक्षी को बिलकुल ही राक्षस बना दें।

ऐसी कहानियों का एक अच्छा नमूना वो कहानी है जिसमें एक परिवार को चिट्ठी मिलती है। चिट्ठी उनके बेटे की थी जो कि जर्मनी के किसी युद्ध बंदी कैंप में था। लड़ाई के समय शायद पकड़ लिया गया होगा। चिट्ठी में बेटा लिखता है कि वो जर्मन युद्ध बंदी कैंप में है, ठीक ठाक है। उसे खाना बढ़िया मिलता है, उसके साथ कोई मार-पीट नहीं होती। परिवार को चिंतित होने की जरूरत नहीं है। बेटे की चिट्ठी आने से परिवार थोड़ा निश्चिन्त होता है।

लेकिन चिट्ठी में एक अनोखी बात थी। ख़त के आखिर में जिक्र था कि सबसे छोटे बेटे “अल्फि” को स्टांप जमा करने का शौक है तो उसे शायद चिट्ठी पर लगा स्टांप पसंद आए। अनोखी बात इसमें ये थी कि अल्फि नाम का कोई छोटा बेटा तो घर में था ही नहीं! सबसे छोटा वाला ही तो जेल में था! हैरान परिवार के लोग थोड़ा दिमाग लगाते हैं कि शायद कोई गुप्त बात स्टांप के साथ जुड़ी है। वो स्टांप उखाड़ कर देखते हैं। वहाँ एक छोटा सा सन्देश था। बेटे ने लिखा था कि उसकी जबान काट ली गई है!

ये प्रोपगेंडा की कहानी क्यों है ? इसलिए क्योंकि युद्ध बंदियों के कैंप से ही नहीं, किसी भी जेल से भेजी गई चिट्ठी पर स्टांप नहीं चिपकाना पड़ता। जेल से आप मुफ्त में चिट्ठियाँ भेज सकते हैं। आम आदमी कभी जेल गया नहीं होता, उसे जेल से चिट्ठी नहीं आई होती, इसलिए उसे पता ही नहीं होता कि जेल की चिट्ठी पर डाक टिकट नहीं लगता। डाक टिकट के नीचे छुपे कूट सन्देश के नाम पर ज्यादातर लोगों को बरगलाना बहुत आसान है।

ऐसा नहीं है कि मिथ्या प्रचार किसी एक दौर में चला है। जब भी आम लोगों की सहानुभूति जुटा कर किसी विरोधी के खिलाफ उन्हें एकजुट किया जाता है, तो ऐसे प्रचार किए जाते हैं। ईसाइयों और समुदाय विशेष के क्रूसेड के समय से ही ये तरीका प्रचलन में है। अर्बन द्वित्तीय ने क्रूसेड के लिए लोगों को उकसाते हुए ऐसे प्रचार किए थे और हाल के दौर तक इसका इस्तेमाल होता दिखेगा।

कुछ दो दशक पहले यानी दस अक्टूबर, 1990 को एक कुवैती लड़की नायिराह अमेरिकी कॉन्ग्रेस समिति के सामने गवाही देने खड़ी हुई थी। उसने कई नरसंहारों का प्रत्यक्षदर्शी गवाह होने का दावा किया था। उसने बताया था कि उसने इराकी सैनिकों को, कुवैती बच्चों को अस्पताल के इनक्यूबेटर से खींच कर जमीन पर पटकते और मारते देखा है। ये ऐसा सनसनीखेज खुलासा था कि उस समय के लगभग हर समाचार-पत्र, हर रेडियो-टीवी कार्यक्रम में ये गवाही पूरे अमेरिका में दिखाई गई। तत्कालीन राष्ट्रपति बुश ने कई भाषणों में नायिराह की गवाही का जिक्र किया। बाद के, इराक पर, अमेरिकी हमले की कहानी सब जानते हैं।

थोड़े समय बाद जब CBC-TV ने अपने प्रोग्राम To Sell a War में इस गवाही की जाँच की तो अनोखी बातें पता चली। नायिराह की गवाही झूठी थी। वो युद्ध के समय कुवैत में नहीं थी। उसने इराकी सैनिकों को कोई नरसंहार करते नहीं देखा था। नायिराह दरअसल यूनाइटेड स्टेट्स में कुवैत के राजदूत की बेटी थी। कुवैती सरकार ने Hill & Knowlton नाम के पब्लिक रिलेशन संस्थान को युद्ध में अमेरिकी हस्तक्षेप के पक्ष में जनमत बनाने का ठेका दिया था। उसी के तहत ये झूठी गवाही दिलवाई गई थी।

मशहूर संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी इस गवाही को जम कर बेचा था। बाद में एमनेस्टी इंटरनेशनल के तत्कालीन प्रमुख जॉन हेअले ने, पोल खुलने पर पलटते हुए कहा कि ये अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकारों की मुहिम को कमजोर करने की साजिश है। ये बयान आने तक इराकी मानवाधिकारों को अमेरिकी पेट्रियट मिसाइलों ने चपटा कर दिया था।

प्रोपगेंडा के हथियारों को इसी रूप में इस्तेमाल होते देखना है तो आप आज के भारत में जरूर देखिए। जब भी किसी को नरभक्षी भेड़िया बताया जाता है तो यही किया जा रहा होता है। जब बार-बार किसी तथाकथित जुल्मों की दास्तान की पोल खुलने लगे तो यही इस्तेमाल हो रहा होता है। जब घटना के सत्य होने या ना होने पर सवाल उठाते ही आपको जालिमों-आततायियों का समर्थक घोषित किया जाए तो मान लीजिए कि असली पिशाचों का हमला हुआ है आप पर।

गौर कीजिए आसपास। किसी पर तेज़ाब से, किसी पर सरकारी तंत्र से हमले हो रहे हैं? क्या लोगों को आत्महत्या के लिए मजबूर किया जा रहा है? कहीं कोई तथाकथित इतिहासकार “शिक्षा के भगवाकरण” का शिकार होता तो नहीं सुनाई दे रहा? ऐसा होता दिखे तो सोचिएगा कि जहाँ कुछ ही दिन पहले प्रधानमंत्री से डिग्री दिखाओ जी कहा जा रहा था, वहाँ एक रिटायर हो चुके प्रोफेसर से, सीवी माँगना गलत क्यों है? अगर वो कहें कि ये ऐसी जगह है जहाँ डिग्री की जरूरत ही नहीं होती, तो ये भी पूछिएगा कि प्रधानमंत्री होने के लिए कौन सी शैक्षणिक योग्यताएँ जरूरी हैं?

बाकी इस बार जो शिक्षा के नाम पर किन्हीं कपोल-कल्पित जुल्मों की दास्तान सुनाई जा रही है, उस विधा को भी एट्रोसिटी प्रोपगेंडा (Atrocity Propaganda) कहते हैं। ऐसी चीज़ों को ध्यान से सीखिए, हम फोर्थ जेनेरशन (चौथी पीढ़ी) के युद्धों के दौर में हैं, यहाँ सूचना भी हथियार होती है।