भड़काऊ इस्लामी प्रचारक ज़ाकिर नाइक ने एक बार फिर भारत के खिलाफ ज़हर उगला है। इस बार उसके निशाने पर कश्मीर से अनुच्छेद 370 का हटाया जाना है। इसे नाइक ने “भाजपा सरकार का मुस्लिमों के खिलाफ जंग का ऐलान” करार दिया है।
कश्मीर मुस्लिम-बहुल था, इसीलिए किया
नाइक का दावा है कि भाजपा सरकार ने 370 हटाने का काम समुदाय को मज़हबी तौर पर निशाना बनाते हुए किया है। उसके मुताबिक यह भारत की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी के खिलाफ ‘act of war’ है, जिसे केवल इसलिए किया गया, क्योंकि कश्मीर के बहुसंख्यक मुस्लिम थे। उसने लिबरल-गैंग के ‘कश्मीरी लड़कों को हिरासत में लेकर गायब किया जा रहा है’, ‘उन्हें यातनाएँ दी जा रहीं हैं’ के झूठ को भी दोहराया। नाइक का प्रोपेगंडा इस हद तक पहुँच गया कि उसने कश्मीर की स्थिति की तुलना फिलिस्तीन से कर दी।
मलेशिया-कूटनीति से बौखलाया है
ज़ाकिर नाइक भारत में जिहाद के लिए युवाओं को उकसाने, आतंक के लिए मनी-लॉन्ड्रिंग जैसे कई संगीन मामलों में वांछित है। ढाका की एक बेकरी में 2016 में हुए जिहादी हमले से भी उसके तार जुड़ते हुए पाए गए थे। इसी सिलसिले में भारत मलेशिया पर, जहाँ नाइक फ़िलहाल छिपा बैठा है, उसे भारत प्रत्यर्पित करने के लिए कूटनीतिक दबाव बना रहा है। इसीलिए नाइक बौखला गया है। उसके मलेशिया में इस्लाम का प्रचार करने पर पहले ही पाबंदी लगाई जा चुकी है।
नीरव मोदी को लगातार भारत लाने की कोशिशों की कड़ी में अहम खबर आई है कि इंटरपोल ने उनके भाई नेहाल मोदी के ख़िलाफ़ पीएनबी से कथित तौर 13, 600 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी मामले में सबूत मिटाने के आरोप में रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है।
जानकारी के मुताबिक इस साल की शुरुआत में ईडी ने इंटरपोल से अनुरोध किया था कि वह नीरव की मदद करने के आरोप में नेहाल के ख़िलाफ़ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करें। अब इस नोटिस के जारी होने के बाद इसकी जानकारी अधिकारियों ने खुद शुक्रवार को दी। इससे पहले नीरव की बहन पूर्वी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस पहले ही जारी हो चुका है।
अधिकारी ने बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में बेल्जियम की नागरिकता रखने वाले 40 वर्षीय नेहाल दीपक मोदी के खिलाफ ग्लोबल अरेस्ट वारंट जारी किया गया है। जिसकी जाँच प्रवर्तन निदेशालय कर रही है। माना जा रहा है नेहाल इस समय अमेरिका में हैं।
पीएनबी घोटाला मामले में नीरव मोदी के भाई के खिलाफ कसता जा रहा है शिकंजा…https://t.co/ajFdcR5WNd
यहाँ बता दें कि इससे पहले लंदन की एक अदालत नेहाल मोदी को लेकर इस बात के संकेत दे चुकी है कि नीरव मोदी अपने अंमेरिका में रह रहे भाई नेहाल का इस्तेमाल ‘गंदे काम’ के लिए कर रहा था।
जबकि, ईडी ने बताया था कि पीएनबी घोटाले के खुलासे के बाद नेहाल ने दुबई और हॉन्गकॉन्ग में स्थित नीरव की कंपनियों के डमी निदेशकों के मोबाइल फोन नष्ट किए थे और उन्हें दूसरे देश पहुँचाने की व्यवस्था की थी।
धान को गेहूँ बताकर चर्चा में आने वाले एबीपी न्यूज के पत्रकार अभिसार शर्मा सोशल मीडिया ट्रोल बनकर ‘व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी’ का काम कर रहे हैं। मेनस्ट्रीम मीडिया को त्यागने के बाद अभिसार शर्मा यूट्यूब और ट्विटर पर खूब सक्रीय हैं, और इसमें भी सबसे ज्यादा सक्रीय हैं फर्जी खबर फैलाने में।
ट्विटर पर अभिसार शर्मा का एक वीडियो शेयर किया जा रहा है जिसमें वो विश्व में एक्सपोर्ट किए जा रहे बीफ के आँकड़ो पर बात करते हुए देखे जा रहे हैं। हालाँकि, दुर्भाग्यवश जिस बीफ को अभिसार शर्मा गाय का माँस बता रहे हैं उसके आगे स्पष्ट शब्दों में ‘Buffalo Meat’ यानी भैंस का माँस लिखा हुआ है, फिर भी अभिसार शर्मा इसे गाय का माँस बताकर लोगों को गुमराह करते हुए देखे जा रहे हैं।
यह जानना आवश्यक है कि बीफ आवश्यक रूप से गाय का माँस नहीं होता है, बल्कि यह बीफ शब्द भैंस की विभिन्न नस्लों के माँस के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन सच्चाई से बिलकुल हटकर अभिसार शर्मा जैसे ‘पत्थरकार’ अक्सर यह बात लोगों को पता तक नहीं चलने देते हैं।
विभिन्न देशों द्वारा बीफ एक्सपोर्ट की रैंकिंग हम इस लिंक पर देख सकते हैं। यहाँ स्पष्ट शब्दों में दिया गया है कि भारत द्वारा एक्सपोर्ट किया जाने वाला बीफ Carabeef है ना कि गाय का माँस। इसका आशय ‘रेड मीट’ से होता है ना कि गाय के माँस से।
इस वीडियो में अभिसार शर्मा सरकार के कथित ‘दोहरे मापदंड को एक्सपोज’ करते हुए नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि एक ओर यह सरकार गाय की बात करती है जबकि दूसरी ओर बीफ एक्सपोर्ट का यह आँकड़ा हमारे सामने है। इसके बाद अभिसार शर्मा एक सूची के जरिए ये बताते नजर आ रहे हैं कि बीफ एक्सपोर्ट में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है। अभिसार शर्मा द्वारा भाजपा सरकार के ‘दोहरे मापदंड को एक्सपोज’ करने वाले इस कथित वीडियो में दिखाई गई ‘रिपोर्ट’ वर्ष 2016 की है।
सबसे मजेदार बात यह है कि इस रिपोर्ट में बीफ के आगे स्पष्ट शब्दों में Buffalo Meat लिखा गया है, जिसे अभिसार शर्मा बहुत चालाकी से या तो पढ़ नहीं पाए या फिर उन्होंने इसे बताना जरूरी नहीं समझा। अभिसार शर्मा यह भी बताते हैं कि ब्राजील ने कुछ ही समय पहले भारत से आगे स्थान बनाया है वर्ना कुछ साल पहले तक हमारा देश इसमें पहले स्थान पर था।
अभिसार शर्मा मेनस्ट्रीम मीडिया में रहते हुए भी अक्सर इस तरह की गलतियाँ करते आए हैं। उनका सबसे ज्यादा विवादास्पद और चर्चित वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जाता है जिसमें वो धान को गेहूँ बताते नजर आए थे। सोशल मीडिया पर यह भी कहा जा रहा है कि जिस अभिसार शर्मा को धान और गेहूँ में ही अंतर पता न हो, उससे बीफ, गाय का माँस और बफ़ेलो यानी, भैंस के मांस में अंतर पता होने की उम्मीद करना बेवकूफी है।
अभिसार शर्मा यूट्यूब से लेकर अपने ट्विटर अकाउंट पर फर्जी खबरों की फैक्ट्री चला रहे हैं। हाल ही में ISRO के चंद्रयान-2 मिशन के दौरान भी अभिसार शर्मा ने एक फर्जी खबर को सच मानकर एक वीडियो बनाकर न्यूज़ चैनल आज तक (Aaj Tak) और उसकी पत्रकार चित्रा त्रिपाठी पर हमला करते हुए देखे गए थे। हालाँकि, इसमें भी वो फोटोशॉप तस्वीर के साथ फर्जी खबर चलाते हुए रंगे हाथ पकड़े गए थे और इसके लिए ट्विटर यूजर्स ने उन्हें जमकर लताड़ भी लगाई थी।
मोदी विरोध में इतना गिर जायेंगे अभिसार @abhisar_sharma इसकी उम्मीद नहीं थी.
वैसे धान से गेहूँ निकालने वाला इंसान गर्त की पत्रकारिता ही कर सकता है.
गधों की तरह बोलने के पहले फ़ैक्ट चेक करते की जो तस्वीर आप वायरल कर रहे हैं उसकी हक़ीक़त क्या है?
इस फर्जी वीडियो को शेयर करने के बाद जब अभिसार शर्मा सोशल मीडिया पर फटकारे गए तो उन्होंने अपना ट्वीट और वीडियो दोनों डिलीट कर दिए थे। उन्होंने वीडियो के इस हिस्से को एडिट करके फिर से अपलोड भी किया, लेकिन उन्होंने अपनी इस फर्जी खबर के लिए लोगों से माफी अभी तक नही माँगी है।
बीती रात बॉलीवुड के किंग खान ने अपने इंस्टाग्राम पर गणपति की तस्वीरें शेयर करते हुए गणपति विसर्जन पर सबको शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने लिखा- पूजा हो गई, विसर्जन हो गया, गणपति बप्पा मोरया!! दुनिया की अपार खुशियाँ हर घर और परिवार में जाएँ।
हालाँकि, उनके शुभकामना देने के तरीके को देखकर साफ़ था कि वो इस पर्व पर बहुत खुश हैं, लेकिन शायद उनकी ये खुशी कुछ कट्टरपंथियों से देखी नहीं गई। उन्होंने तुरंत शाहरुख के पोस्ट पर मजहब के नाम पर पोस्ट डालने शुरू कर दिए।
शाहरुख के इंस्टाग्राम पर फोटो
किसी ने उन्हें लिखा, “मैं आपसे प्यार करता हूँ, लेकिन ये सब क्यों? सच में, मैं आपके लिए दुखी हूँ।” एक टीनीअब्बसी नाम के अकॉउंट से तो शाहरुख को ये कहा गया, “मुझे यकीन नहीं हैं, इन्हें गैर मुलसमान से ज्यादा हिदाया (मार्गदर्शन) की जरूरत है।” इस दौरान उन्हें समझाया भी गया, “जिंदगी बहुत छोटी है…और याद रखो, बिन अल्लाह तुम कुछ भी नहीं।”
कट्टरपंथियों ने उनसे कमेंट में ये भी पूछा कि क्या वो सिर्फ़ नाम के ही हैं। उन्हें गणपति को पूजने के लिए कहा, “ये बहुत शर्मनाक है कि एक मु##म को एक बुत की पूजा करते देखना, जिसे खुद इंसान ने बनाया हैं। शर्म आनी चाहिए।” इस दौरान कुछ लोगों ने शाहरुख को गाली भी दी और उन्हें अनफॉलो करने की बात करने लगे।
खैर, किसी देवी-देवता की पूजा करते हुए देखना इस्लामिक कट्टरपंथियों को हमेशा से अखरा है। सिर्फ़ शाहरुख खान ही नहीं, इन नफरत भरी टिप्पणियों का कई नामी लोग शिकार हुए हैं।
बीते दिनों सारा अली खान को भी सोशल मीडिया पर ऐसी टिप्पणियों को झेलना पड़ा था, जब उन्होंने गणेश चतुर्थी पर गणपति के साथ अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर डाल दी थी। इसके अलावा पिछले साल भी खुद शाहरुख को इसी तरह शुभकामनाएँ देने पर ट्रोल किया गया था। फेसबुक पर नुसरत जहाँ का दुर्गापूजा में शामिल होना अनुचित बताया गया था और मोहम्मद कैफ को क्रिसमस मनाने पर ट्रोल किया गया था और क्रिकेटर इरफान पठान को भी कट्टरपंथियों ने बताया था कि रक्षा बंधन इस्लाम के ख़िलाफ़ है।
30 साल पहले बंगाल की यूथ कॉन्ग्रेस नेत्री ममता बनर्जी का सिर फोड़ने का आरोप जिन लालू आलम पर था, उन्हें अलीपुर सेशंस कोर्ट के जज पुष्पल सतपति ने अब रिहा कर दिया है। आलम को बरी करने का कारण मुकदमे के फैसले में हो रही देरी और कई गवाहों का इस बीच मर जाना बताया जा रहा है। यहाँ तक कि खुद ममता बनर्जी ने पिछले महीने अदालत के समन पर कहीं और तात्कालिक व्यस्तता व सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पेशी से मना कर दिया था।
माकपा नेता के भाई
आरोपित लालू आलम को माकपा नेता बादशाह आलम का भाई बताया जा रहा है। 16 अगस्त 1990 को घायल होने के बाद ममता बनर्जी को काफी वक्त अस्पताल में गुज़ारना पड़ा था, हालाँकि इसके बाद उनकी माकपा से सड़कों पर जूझने वाली नेत्री के तौर पर प्रसिद्धि आसमान छूने लगी थी। जब ममता 2011 में सत्ता में आईं, तो ‘लालू’ ने उनसे माफ़ी की गुज़ारिश की थी।
लोक अभियोजक राधा कांत मुखर्जी ने ममता बनर्जी के अदालत में आने से मना करने के बाद अदालत को सूचित किया कि जज अब अपने स्वविवेक के अनुसार मामले को चलाते रहने या बंद करने पर निर्णय ले सकते हैं। लेकिन मुखर्जी ने साथ ही जस्टिस सतपति से प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत को ध्यान में रखने की भी गुज़ारिश की थी। ममता बनर्जी हालाँकि वीडियो कॉन्फ्रेंस के लिए तैयार थीं, लेकिन इसके लिए ज़रूरी सुविधाएँ अलीपुर कोर्ट में नहीं थीं। इसके पहले वह 1994 में इस अदालत में बतौर गवाह हाज़िर हुईं थीं।
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति के बारे में बात करते हुए गुरुवार को UNPO (यूनाईटिड नेशन एंड पीपुल्स ऑर्गानाइजेशन) के महासचिव राल्फ बुनचे ने यूरोपीय संघ से पाकिस्तान को धार्मिक स्वतंत्रता का हनन करने वाले देशों की सूची में डालने के लिए गुहार लगाई।
उन्होंने जेनेवा में बैठक के दौरान ये आग्रह पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की बुरी स्थिति को लेकर किया। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा काफी समय से उठता आ रहा है और ये बहुत ही महत्तवपूर्ण हैं। उन्होंने एएनआई से बातचीत में बताया, “आज मैं पाकिस्तान में (खासकर सिंध में) धार्मिक स्वतंत्रता के बारे में बोल रहा था। मैंने इस बात पर प्रकाश डाला कि पाकिस्तान में धर्म की स्वतंत्रता का बहुत महत्वपूर्ण और लंबा मुद्दा रहा है।”
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राफेल ने कहा, “पिछले साल नबंवर में अमेरिकी गृह विभाग ने पाकिस्तान को धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियमों के तहत विशेष चिंता वाले देश के रूप में नामित किया था। जो इसे धार्मिक स्वतंत्रता के लिहाज से भयानक देशों की श्रेणी में शामिल करता है। इसलिए पाकिस्तान में धार्मिक अतिवाद से पैदा होने वाले उत्पीड़न को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। “
R Bunche: Last Nov US Dept of State designated Pak as a country of particular concern under Int’l Religious Freedom Acts which puts it in company of some horrible states in terms of religious freedom & says you can’t ignore problems with religious extremism & persecution in Pak. https://t.co/vLzSJYVPco
गौरतलब है कि इस बैठक में पाकिस्तान की उसके मुल्क में अल्पसंख्यकों पर जुल्म करने के लिए अंतराष्ट्रीय स्तर पर निंदा की गई। स्पष्ट रूप से बताया गया कि इस्लामाबाद में भी धार्मिक अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ कभी हिंसा, नरसंहार, असाधारण हत्या, अपहरण, बलात्कार, धर्म परिवर्तन जैसे मामलों के रूप में भेदभाव होता हैं। जिनमें पाकिस्तानी हिंदू, ईसाई, सिख, अहमदिया और शिया उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों में से एक हैं। इसके अलावा बुनचे ने इस बैठक में यूरोपियन संघ पर भी सवाल उठाए और कहा कि पाकिस्तान से जुड़े इस मामले में वह इस दिशा में काम नहीं कर रहे हैं, बल्कि वो किसी और ही राह पर जा रहे हैं। उनके मुताबिक यूरोपीय संघ पाकिस्तान को लेन-देन करने का मौक़ा दे रहा है।
महासचिव बुनचे ने इस बैठक के बाद उम्मीद जताते हुए ये भी कहा, “UNPO को आशा है कि यूरोपीय संघ इस मामले में अमेरिका से एक कदम आगे बढ़कर पाक को अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता मानकों के भारी उल्लंघनकर्ता के रूप में मान्यता देगा। साथ ही कार्रवाई कर यह सुनिश्चित करेगा कि उसे सामान्य हालात में दी जाने वाली आर्थिक मदद पर अंकुश लगाया जा सके।”
दिल्ली में पुलिस की स्पेशल सेल ने 33 मामलों के आरोपित और 1 लाख रुपए के ईनामी सलमान उर्फ़ ‘दांत टूटा’ को कल अक्षरधाम के पास से पकड़ा। जानकारी के मुताबिक इस साल सलमान पुलिस की कस्टडी से फरार हो गया था। जिसके बाद से पुलिस उसकी तलाश में थी।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बताया जा रहा है कि सलमान फ्लाइट से मेट्रो शहरों में जाकर स्नैंचिंग की घटनाओं को अंजाम देता था और अपनी गर्लफ्रेंड के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार था। पुलिस के मुताबिक उसने अलग-अलग शहरों में अपनी गैंग बनाई हुई है और अपने अपराधों के कारण दिल्ली से लेकर यूपी, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में लूट और स्नैचिंग के लिए कुख्यात है। उसकी आपराधिक प्रवृति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उस पर मकोका के तहत भी केस दर्ज हैं।
उसके ख़िलाफ़ दिल्ली में 29 केस, यूपी में 1 केस और हैदराबाद में 4 मामले चल रहे हैं। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक डीसीपी कुशवाहा ने पूछताछ में बताया कि सलमान के फरार होने के बाद से भी एसीपी अतर सिंह की देखरेख में इंस्पेक्टर शिव कुमार और ईश्वर सिंह की टीम लगातार उसे ट्रेस कर रही थी। ऐसे में एक सूचना के आधार पर उसे अक्षरधाम के पास से पकड़ा गया। उसने सेल को गुमराह करने के लिए अपना नाम अलीजान बताया, लेकिन जैसे ही उसने मुँह खोला पुलिस को उसकी पहचान करने में समय नहीं लगा, उसका टूटा दांत देखकर उसकी असलियत सामने आ गई।
पुलिस के मुताबिक सलमान पर 1 लाख का ईनाम था, उसे इस साल जून में दिल्ली पुलिस 6 जवानों के साथ पेशी के लिए हैदराबाद लेकर गई थी लेकिन जब 12 जून को उसे दक्षिण एक्सप्रेस से वापस लाया जाने लगा तो सभी पुलिस कर्मियों की आँख लग गई। दुबला-पतला होने के कारण उसने हथकड़ी से अपने हाथ निकाले और आगरा से पहले ट्रेन की रफ्तार कम होने पर उतर गया। इसके बाद वह छिपते-छिपाते NH2 पहुँचा। उसके बाद लिफ्ट लेकर गुड़गाँव आया और अपने साथियों से मिला। तब से लेकर अब तक वो अपने दोस्तों की मदद से दिल्ली के पास खोड़ा इलाके में किराए के कमरे में पहचान छिपाकर रहता था। और अपने दोस्त दानिश, हसन सोहेल के साथ बंदूक की नोक पर लूट और स्नैचिंग की वारदात की।
दिल्ली के भजनपुरा थाने में उसके ख़िलाफ़ 17 साल से मुकदमे चल रहे हैं। वह पहली बार 2003 में गिरफ्तार हुआ था। उस पर डकैती, लूट, स्नैचिंग, हत्या की कोशिश, आर्म्स एक्ट के कई मामले दर्ज हैं।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने रशिया टुडे को दिए इंटरव्यू में स्वीकारा है कि 1980 में अफगानिस्तान में जिहाद की आग फ़ैलाने वाले मुजाहिदीनों को पैसा भले CIA से मिला हो, लेकिन उन्हें खाद-पानी देकर सींचने का काम इस्लामाबाद ने ही किया था। और इस खुलासे के बाद भी उन्होंने अफगानिस्तान के हालात की किसी भी तरह से ज़िम्मेदारी लेने से इंकार कर दिया है। उनके अनुसार अमेरिका का अपने अफगानिस्तान अभियान में नाकाम होने के लिए पाकिस्तान को दोष देना “गलत” है।
“मुजाहिदीनों से लड़ना ‘पड़ा’ क्योंकि अमेरिका ने उन्हें आतंकी कहा”
दिन-ब-दिन किसी जिहादी कठमुल्ला की तरह होते जा रहे पाकिस्तानी पीएम के सुर इसी पर नहीं थमे। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान को (मजबूरी में) अपने ही पाल-पोसकर बड़े किए हुए मुजाहिदीनों से लड़ना ‘पड़ा’- क्योंकि अमेरिका ने उन्हें आतंकी करार दे दिया था। गौरतलब है कि सोवियत-अफगान युद्ध के समय सोवियत रूस के दुश्मन अमेरिका से पैसा लेकर पाकिस्तान ने सोवियत नियंत्रण वाले अफगानिस्तान में कहर ढाने के लिए जिहादी तैयार किए थे।
सच्चाई से मुकर रहे हैं इमरान
इमरान खान अपना ‘दुखड़ा’ सुनाते हुए बताते हैं कि “अमेरिका की” इस लड़ाई में पाकिस्तान ने 70,000 लोगों की जान और $100 अरब गँवाए हैं। जबकि सच्चाई यह है कि इस लड़ाई को पाकिस्तान ने शुरू से ही तन-मन से अपना जिहाद बनाकर लड़ा है।
इमरान मजबूरी में एक तथ्य (पाकिस्तान ही अफगानिस्तान के आतंकी हालात के लिए ज़िम्मेदार है) को स्वीकार कर भी पूरे सच से मुकरने की कोशिश कर रहे हैं। सच्चाई यह है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में मरने-मारने के लिए जिहादी इसीलिए तैयार कर पाया क्योंकि पाकिस्तान में इस तरह के जिहाद को करने के लिए वैचारिक और मज़हबी उर्वर ज़मीन पहले ही तैयार थी।
CIA ने इसके लिए पैसे और हथियार बेशक ‘सहयोग राशि’ के तौर पर दिए होंगे, लेकिन ज़मीनी तौर पर यह जंग लड़ रहा आम जिहादी पैसे के लिए नहीं, अपनी कट्टरता के लिए लड़ रहा था। उसे ट्रेनिंग कैम्पों में अमेरिका संविधान या अंतरराष्ट्रीय राजनीति की बातें बता कर नहीं तैयार किया गया था, न ही केवल पैसे का लालच देकर भेजा गया था- उसे इस्लामी कट्टरपंथ की घुट्टी पिलाई गई थी, और पिलाने वाले पाकिस्तानी ही थे।
इसके अलावा इन्हीं तालिबानों का कार्ड खेल कर पाकिस्तान ने अमेरिका को दशकों तक गुलाम कश्मीर की गुलामी पर अपना समर्थन करने के लिए मजबूर किया था। यही नहीं, खुद इमरान खान को तालिबान-समर्थक होने के लिए पाकिस्तान में ‘तालिबान खान’ के रूप में जाना जाता है।
मोदी सरकार ने ‘लुटियंस’ दिल्ली की शक्ल बदलने के लिए कमर कस ली है- हालाँकि इस बार इरादा इसकी ताकत के केंद्र बदलने का नहीं, एडविन लुटियंस के बनाए हुए इलाकों का भौतिक नक्शा बदलने का है। इसके लिए केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्लूडी) ने राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक के 2.5 किलोमीटर लम्बे राजपथ के दोनों ओर के 4 वर्ग किलोमीटर (4 km square) में आमूलचूल बदलाव लाने के लिए निविदा आमंत्रित की है। निविदा फ़िलहाल इसका मास्टर प्लान बनाने के लिए फर्मों और कंसल्टेंट्स को भेजी गईं हैं।
200 साल की विरासत करनी है तैयार, 2024 के पहले
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर के अनुसार सरकार ऐसे नए ढाँचे खड़े करना चाहती है, जो नए भारत की आशाओं और उसके मूल्यों के प्रतीक हों, और उनकी जड़ें भारत की पुरातन सभ्यता की संस्कृति और व्यक्तिगत विकास में निहित हों। मास्टर प्लान में ऐसे नए भवनों की परिकल्पना की बात की गई है, जो आने वाले 150-200 सालों के लिए प्रतिष्ठा का विषय हों। गौरतलब है कि ब्रिटिश सरकार की ताकत के चरम-काल (1920 से 1940 का दशक) के मध्य में बने लुटियंस को भी लगभग 100 साल होने जा रहे हैं, और यह इलाका और इसके भवन किसी भी अन्य स्थान से अधिक दिल्ली के प्रतीक और पहचान माने जाते हैं।
प्लान में भव्य इमारतों को बनाने और अब जर्जर हो चुकी इमारतों के सुरक्षित ध्वस्तीकरण के अलावा सार्वजनिक सुविधाओं, जैसे पीने का पानी, पार्किंग स्पेस और हरित कवर (पेड़-पौधे) भी बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया है। सरकार ने इसके लिए अंतिम तिथि 2024 तय की है। डेक्कन हेराल्ड के मुताबिक तो 2022 के अगस्त में शुरू होने जा रहा उस वर्ष का संसदीय मानसून सत्र भी नए संसद भवन में हो सकता है।
म्यूज़ियम बनेंगे नॉर्थ, साउथ ब्लॉक?
फ़िलहाल केंद्रीय सचिवालय के नॉर्थ और साउथ ब्लॉक दो-दो कद्दावर मंत्रालयों (क्रमशः वित्त-गृह, और विदेश-रक्षा)के अलावा दर्जनों अन्य कई महत्वपूर्ण सरकारी अफसरों के बसेरे हैं। इनमें NSA और कैबिनेट सचिव से लेकर पीएमओ तक शामिल हैं। लेकिन मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जब नई सचिवालय इमारत में यह सभी दफ्तर स्थानांतरित हो जाएंगे, तो इन ब्लॉकों को संग्रहालय में तब्दील किया जा सकता है।
नई इमारतों का निर्माण पर्यावरण को लेकर संवेदनशील ‘ग्रीन बिल्डिंग प्लान’ के मुताबिक ही होगा। साथ ही यह इमारतें भूकंप-रोधी भी होंगी।
कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की उम्मीदें इन दिनों लगातार दम तोड़ रही हैं। हर जगह से फजीहत और निराशा के सिवा उन्हें कुछ हासिल नहीं हो रहा। वैश्विक पटल पर इस मुद्दे को लगातार उठाने के बाद भी सिर्फ़ एक चीन ही ऐसा देश रहा, जिसने पाक की आवाज सुनी। बाकी सभी देशों ने मोदी सरकार के फैसले का समर्थन किया और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान सिर्फ़ हँसी का पात्र बने रहे। हालाँकि, उनके गृह मंत्री ने खुद इस बात को स्वीकारा है कि कोई देश उनका साथ नहीं दे रहा, लेकिन फिर भी इमरान खान दुनिया के आगे झूठ बोलने से बाज नहीं आ रहे। इसका अभी सबसे हालिया उदाहरण देखें तो इमरान खान ने कश्मीर मुद्दे पर कथित समर्थन के लिए 58 देशों को शुक्रिया कहा।
जी हाँ। दरअसल, इमरान खान ने गुरुवार को ट्वीट किया, “मैं उन 58 देशों की सराहना करता हूँ, जिन्होंने 10 सितंबर को मानवाधिकार परिषद में पाकिस्तान का साथ देकर विश्व समुदाय की माँग को मजबूती दी कि भारत कश्मीर में बल प्रयोग रोके, प्रतिबंध हटाए, कश्मीरियों के अधिकारों की रक्षा हो और संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव के मुताबिक कश्मीर मुद्दे का समाधान किया जाए।” हालाँकि इमरान खान ने खुद से या उनके किसी भी मंत्रालय या UNHRC (United Nations Human Rights Council, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद) में उनके डिप्लोमेट ने भी इन देशों की सूची अभी तक नहीं दी है।
UNHRC में स्थित पाकिस्तानी डिप्लोमेट ने बताया कि उन्हें चीन के अलावा 57 देशों का समर्थन प्राप्त है। ये 57 देश ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) से संबंधित हैं। हालाँकि इस पाकिस्तानी डिप्लोमेट के बयान में भी झोल नजर आता है क्योंकि ना तो इन्होंने अभी तक वो सूची दी है ना ही IOC के सदस्य देश इंडोनेशिया वगैरह ने अपनी सहमति जताई है।
I commend the 58 countries that joined Pakistan in Human Rights Council on 10 Sept reinforcing demands of int community for India to stop use of force, lift siege, remove other restrictions, respect & protect Kashmiris’ rights & resolve Kashmir dispute through UNSC resolutions.
गौरतलब है कि इमरान खान के इस ट्वीट पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने भी चुटकी ली है। जानकारी के मुताबिक जब उनसे इमरान खान के बयान पर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अगर इमरान खान को समर्थन मिला होता तो अब तक ये सबको पता चल चुका होता, क्योंकि वो UNHRC की कोई गुप्त बैठक नहीं थी। रवीश कुमार के मुताबिक, “जहाँ तक मैंने जॉइंट स्टेटमेंट के बारे में सुना है, जिसकी सूची वो जारी करने वाले हैं ये दावा करते हुए कि उन देशों ने पाकिस्तान का समर्थन किया। मुझे लगता है कि आपको इसके बारे में उन्हीं से पूछना होगा। हमारे पास ऐसी कोई सूची नहीं है।”