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सलमान ‘दांत टूटा’ फ्लाइट से जाकर करता था चोरी, गर्लफ्रेंड के लिए कुछ भी कर गुजरता था – हुआ गिरफ्तार

दिल्ली में पुलिस की स्पेशल सेल ने 33 मामलों के आरोपित और 1 लाख रुपए के ईनामी सलमान उर्फ़ ‘दांत टूटा’ को कल अक्षरधाम के पास से पकड़ा। जानकारी के मुताबिक इस साल सलमान पुलिस की कस्टडी से फरार हो गया था। जिसके बाद से पुलिस उसकी तलाश में थी।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बताया जा रहा है कि सलमान फ्लाइट से मेट्रो शहरों में जाकर स्नैंचिंग की घटनाओं को अंजाम देता था और अपनी गर्लफ्रेंड के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार था। पुलिस के मुताबिक उसने अलग-अलग शहरों में अपनी गैंग बनाई हुई है और अपने अपराधों के कारण दिल्ली से लेकर यूपी, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में लूट और स्नैचिंग के लिए कुख्यात है। उसकी आपराधिक प्रवृति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उस पर मकोका के तहत भी केस दर्ज हैं।

उसके ख़िलाफ़ दिल्ली में 29 केस, यूपी में 1 केस और हैदराबाद में 4 मामले चल रहे हैं। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक डीसीपी कुशवाहा ने पूछताछ में बताया कि सलमान के फरार होने के बाद से भी एसीपी अतर सिंह की देखरेख में इंस्पेक्टर शिव कुमार और ईश्वर सिंह की टीम लगातार उसे ट्रेस कर रही थी। ऐसे में एक सूचना के आधार पर उसे अक्षरधाम के पास से पकड़ा गया। उसने सेल को गुमराह करने के लिए अपना नाम अलीजान बताया, लेकिन जैसे ही उसने मुँह खोला पुलिस को उसकी पहचान करने में समय नहीं लगा, उसका टूटा दांत देखकर उसकी असलियत सामने आ गई।

पुलिस के मुताबिक सलमान पर 1 लाख का ईनाम था, उसे इस साल जून में दिल्ली पुलिस 6 जवानों के साथ पेशी के लिए हैदराबाद लेकर गई थी लेकिन जब 12 जून को उसे दक्षिण एक्सप्रेस से वापस लाया जाने लगा तो सभी पुलिस कर्मियों की आँख लग गई। दुबला-पतला होने के कारण उसने हथकड़ी से अपने हाथ निकाले और आगरा से पहले ट्रेन की रफ्तार कम होने पर उतर गया। इसके बाद वह छिपते-छिपाते NH2 पहुँचा। उसके बाद लिफ्ट लेकर गुड़गाँव आया और अपने साथियों से मिला। तब से लेकर अब तक वो अपने दोस्तों की मदद से दिल्ली के पास खोड़ा इलाके में किराए के कमरे में पहचान छिपाकर रहता था। और अपने दोस्त दानिश, हसन सोहेल के साथ बंदूक की नोक पर लूट और स्नैचिंग की वारदात की।

दिल्ली के भजनपुरा थाने में उसके ख़िलाफ़ 17 साल से मुकदमे चल रहे हैं। वह पहली बार 2003 में गिरफ्तार हुआ था। उस पर डकैती, लूट, स्नैचिंग, हत्या की कोशिश, आर्म्स एक्ट के कई मामले दर्ज हैं।

हाँ, हमने ही तैयार किए आतंकी और अब मजबूरी में उन्हीं से लड़ना पड़ रहा: Pak PM इमरान खान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने रशिया टुडे को दिए इंटरव्यू में स्वीकारा है कि 1980 में अफगानिस्तान में जिहाद की आग फ़ैलाने वाले मुजाहिदीनों को पैसा भले CIA से मिला हो, लेकिन उन्हें खाद-पानी देकर सींचने का काम इस्लामाबाद ने ही किया था। और इस खुलासे के बाद भी उन्होंने अफगानिस्तान के हालात की किसी भी तरह से ज़िम्मेदारी लेने से इंकार कर दिया है। उनके अनुसार अमेरिका का अपने अफगानिस्तान अभियान में नाकाम होने के लिए पाकिस्तान को दोष देना “गलत” है।

“मुजाहिदीनों से लड़ना ‘पड़ा’ क्योंकि अमेरिका ने उन्हें आतंकी कहा”

दिन-ब-दिन किसी जिहादी कठमुल्ला की तरह होते जा रहे पाकिस्तानी पीएम के सुर इसी पर नहीं थमे। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान को (मजबूरी में) अपने ही पाल-पोसकर बड़े किए हुए मुजाहिदीनों से लड़ना ‘पड़ा’- क्योंकि अमेरिका ने उन्हें आतंकी करार दे दिया था। गौरतलब है कि सोवियत-अफगान युद्ध के समय सोवियत रूस के दुश्मन अमेरिका से पैसा लेकर पाकिस्तान ने सोवियत नियंत्रण वाले अफगानिस्तान में कहर ढाने के लिए जिहादी तैयार किए थे।

सच्चाई से मुकर रहे हैं इमरान

इमरान खान अपना ‘दुखड़ा’ सुनाते हुए बताते हैं कि “अमेरिका की” इस लड़ाई में पाकिस्तान ने 70,000 लोगों की जान और $100 अरब गँवाए हैं। जबकि सच्चाई यह है कि इस लड़ाई को पाकिस्तान ने शुरू से ही तन-मन से अपना जिहाद बनाकर लड़ा है।

इमरान मजबूरी में एक तथ्य (पाकिस्तान ही अफगानिस्तान के आतंकी हालात के लिए ज़िम्मेदार है) को स्वीकार कर भी पूरे सच से मुकरने की कोशिश कर रहे हैं। सच्चाई यह है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में मरने-मारने के लिए जिहादी इसीलिए तैयार कर पाया क्योंकि पाकिस्तान में इस तरह के जिहाद को करने के लिए वैचारिक और मज़हबी उर्वर ज़मीन पहले ही तैयार थी।

CIA ने इसके लिए पैसे और हथियार बेशक ‘सहयोग राशि’ के तौर पर दिए होंगे, लेकिन ज़मीनी तौर पर यह जंग लड़ रहा आम जिहादी पैसे के लिए नहीं, अपनी कट्टरता के लिए लड़ रहा था। उसे ट्रेनिंग कैम्पों में अमेरिका संविधान या अंतरराष्ट्रीय राजनीति की बातें बता कर नहीं तैयार किया गया था, न ही केवल पैसे का लालच देकर भेजा गया था- उसे इस्लामी कट्टरपंथ की घुट्टी पिलाई गई थी, और पिलाने वाले पाकिस्तानी ही थे।

इसके अलावा इन्हीं तालिबानों का कार्ड खेल कर पाकिस्तान ने अमेरिका को दशकों तक गुलाम कश्मीर की गुलामी पर अपना समर्थन करने के लिए मजबूर किया था। यही नहीं, खुद इमरान खान को तालिबान-समर्थक होने के लिए पाकिस्तान में ‘तालिबान खान’ के रूप में जाना जाता है।

‘लुटियंस’ की शक्ल बदलने को तैयार मोदी सरकार: राजपथ, संसद फिर से बनेंगे

मोदी सरकार ने ‘लुटियंस’ दिल्ली की शक्ल बदलने के लिए कमर कस ली है- हालाँकि इस बार इरादा इसकी ताकत के केंद्र बदलने का नहीं, एडविन लुटियंस के बनाए हुए इलाकों का भौतिक नक्शा बदलने का है। इसके लिए केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्लूडी) ने राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक के 2.5 किलोमीटर लम्बे राजपथ के दोनों ओर के 4 वर्ग किलोमीटर (4 km square) में आमूलचूल बदलाव लाने के लिए निविदा आमंत्रित की है। निविदा फ़िलहाल इसका मास्टर प्लान बनाने के लिए फर्मों और कंसल्टेंट्स को भेजी गईं हैं।

200 साल की विरासत करनी है तैयार, 2024 के पहले

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर के अनुसार सरकार ऐसे नए ढाँचे खड़े करना चाहती है, जो नए भारत की आशाओं और उसके मूल्यों के प्रतीक हों, और उनकी जड़ें भारत की पुरातन सभ्यता की संस्कृति और व्यक्तिगत विकास में निहित हों। मास्टर प्लान में ऐसे नए भवनों की परिकल्पना की बात की गई है, जो आने वाले 150-200 सालों के लिए प्रतिष्ठा का विषय हों। गौरतलब है कि ब्रिटिश सरकार की ताकत के चरम-काल (1920 से 1940 का दशक) के मध्य में बने लुटियंस को भी लगभग 100 साल होने जा रहे हैं, और यह इलाका और इसके भवन किसी भी अन्य स्थान से अधिक दिल्ली के प्रतीक और पहचान माने जाते हैं।

प्लान में भव्य इमारतों को बनाने और अब जर्जर हो चुकी इमारतों के सुरक्षित ध्वस्तीकरण के अलावा सार्वजनिक सुविधाओं, जैसे पीने का पानी, पार्किंग स्पेस और हरित कवर (पेड़-पौधे) भी बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया है। सरकार ने इसके लिए अंतिम तिथि 2024 तय की है। डेक्कन हेराल्ड के मुताबिक तो 2022 के अगस्त में शुरू होने जा रहा उस वर्ष का संसदीय मानसून सत्र भी नए संसद भवन में हो सकता है।

म्यूज़ियम बनेंगे नॉर्थ, साउथ ब्लॉक?

फ़िलहाल केंद्रीय सचिवालय के नॉर्थ और साउथ ब्लॉक दो-दो कद्दावर मंत्रालयों (क्रमशः वित्त-गृह, और विदेश-रक्षा)के अलावा दर्जनों अन्य कई महत्वपूर्ण सरकारी अफसरों के बसेरे हैं। इनमें NSA और कैबिनेट सचिव से लेकर पीएमओ तक शामिल हैं। लेकिन मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जब नई सचिवालय इमारत में यह सभी दफ्तर स्थानांतरित हो जाएंगे, तो इन ब्लॉकों को संग्रहालय में तब्दील किया जा सकता है।

नई इमारतों का निर्माण पर्यावरण को लेकर संवेदनशील ‘ग्रीन बिल्डिंग प्लान’ के मुताबिक ही होगा। साथ ही यह इमारतें भूकंप-रोधी भी होंगी।

इमरान ने कहा – कश्मीर मामले पर हमारे साथ 58 देश, लेकिन UNHRC में अभी तक नहीं दी है सूची

कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की उम्मीदें इन दिनों लगातार दम तोड़ रही हैं। हर जगह से फजीहत और निराशा के सिवा उन्हें कुछ हासिल नहीं हो रहा। वैश्विक पटल पर इस मुद्दे को लगातार उठाने के बाद भी सिर्फ़ एक चीन ही ऐसा देश रहा, जिसने पाक की आवाज सुनी। बाकी सभी देशों ने मोदी सरकार के फैसले का समर्थन किया और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान सिर्फ़ हँसी का पात्र बने रहे। हालाँकि, उनके गृह मंत्री ने खुद इस बात को स्वीकारा है कि कोई देश उनका साथ नहीं दे रहा, लेकिन फिर भी इमरान खान दुनिया के आगे झूठ बोलने से बाज नहीं आ रहे। इसका अभी सबसे हालिया उदाहरण देखें तो इमरान खान ने कश्मीर मुद्दे पर कथित समर्थन के लिए 58 देशों को शुक्रिया कहा।

जी हाँ। दरअसल, इमरान खान ने गुरुवार को ट्वीट किया, “मैं उन 58 देशों की सराहना करता हूँ, जिन्होंने 10 सितंबर को मानवाधिकार परिषद में पाकिस्तान का साथ देकर विश्व समुदाय की माँग को मजबूती दी कि भारत कश्मीर में बल प्रयोग रोके, प्रतिबंध हटाए, कश्मीरियों के अधिकारों की रक्षा हो और संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव के मुताबिक कश्मीर मुद्दे का समाधान किया जाए।” हालाँकि इमरान खान ने खुद से या उनके किसी भी मंत्रालय या UNHRC (United Nations Human Rights Council, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद) में उनके डिप्लोमेट ने भी इन देशों की सूची अभी तक नहीं दी है।

UNHRC में स्थित पाकिस्तानी डिप्लोमेट ने बताया कि उन्हें चीन के अलावा 57 देशों का समर्थन प्राप्त है। ये 57 देश ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) से संबंधित हैं। हालाँकि इस पाकिस्तानी डिप्लोमेट के बयान में भी झोल नजर आता है क्योंकि ना तो इन्होंने अभी तक वो सूची दी है ना ही IOC के सदस्य देश इंडोनेशिया वगैरह ने अपनी सहमति जताई है।

गौरतलब है कि इमरान खान के इस ट्वीट पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने भी चुटकी ली है। जानकारी के मुताबिक जब उनसे इमरान खान के बयान पर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अगर इमरान खान को समर्थन मिला होता तो अब तक ये सबको पता चल चुका होता, क्योंकि वो UNHRC की कोई गुप्त बैठक नहीं थी। रवीश कुमार के मुताबिक, “जहाँ तक मैंने जॉइंट स्टेटमेंट के बारे में सुना है, जिसकी सूची वो जारी करने वाले हैं ये दावा करते हुए कि उन देशों ने पाकिस्तान का समर्थन किया। मुझे लगता है कि आपको इसके बारे में उन्हीं से पूछना होगा। हमारे पास ऐसी कोई सूची नहीं है।”

कश्मीर पर प्रोपगेंडा फैलाने वाले लिबरल 31 महीने से जारी इंटरनेट शटडाउन पर चुप, लाशें मिल रहीं पर होठ सिले

सवाल कश्मीर में लॉकडाउन के बहाने प्रोपगेंडा फैलाने वालों से है। इस्लाम के नाम पर बने पाकिस्तान से भी। समुदाय विशेष और मानवाधिकार के हमदर्द होने का स्वांग रचने वाले मुल्कों और संस्थाओं से भी। क्या उन्हें रत्ती भर भी समुदाय विशेष की चिंता है? क्या उन्हें उनके जीने-मरने से वाकई फर्क पड़ता है? या फिर वे इस्लाम के नाम पर हंगामा केवल सेकुलर मुल्कों में मचाते हैं। राजनीतिक रोटियॉं सेंकने के लिए उनका इस्तेमाल करते हैं। या फिर मजहब के नाम पर माहौल बिगाड़ने की साजिश वहीं रची जाती है, जहॉं की व्यवस्था और उनके अगुआ असल मायनों में मानवाधिकारों और इंसानियत की कद्र करते हैं।

यदि ऐसा नहीं है तो आपने केच का नाम क्यों नहीं सुना। क्या आपको पता है सुरक्षा कारणों का हवाला देकर इस जिले में फरवरी 2017 से ही मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद है? क्या आपको पता है कि इस जिले में करीब नौ लाख लोग रहते हैं? क्या आपको पता है कि सेना का डेथ स्क्वायड यहॉं आए दिन लोगों की हत्या करता है?

केच बलूचिस्तान का एक जिला है। प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर बलूचिस्तान, जहॉं 72 साल से पाकिस्तानी सेना की बर्बरता जारी है। जहॉं से प्रताड़ना के वीडियो हर रोज सामने आ रहे हैं। लोगों को अगवा कर मार डालने की ख़बरें रोज आती हैं।

बलूचिस्तान पाकिस्तान के चार प्रांतों में क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ा और आबादी के हिसाब से सबसे छोटा है। 2017 की जनसंख्या के अनुसार यहॉं की आबादी करीब सवा करोड़ है।

इस्लाम के नाम पर जिन्ना ने छला

बलूचिस्तान को 1948 में हथियार के दम पर पाकिस्तान ने खुद में मिलाकर खान ऑफ कलात मीर अहमद यार खान को जेल में डाल दिया था। मीर अहमद यार खान उन लोगों में से थे, जो इस्लाम के नाम पर अलग पाकिस्तान के पैरोकार थे। जिनके मुहम्मद अली जिन्ना दोस्त थे। जिन्होंने ब्रिटेन के सामने अपना पक्ष रखने के लिए जिन्ना को कानूनी सलाहकार बनाया था। जिसने मुस्लिम लीग को खूब पैसा दिया। 11 अगस्त 1947 को मुस्लिम लीग ने जिनके साथ साझा घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए। इसमें कहा गया था कि कलात एक भारतीय राज्य नहीं है। उसकी अपनी अलग पहचान है। मुस्लिम लीग कलात की स्वतंत्रता का सम्मान करती है।

ब्रिटिश राज में बलूचिस्तान

कलात, खारान, लॉस बुला और मकरान पर ब्रिटिश साम्राज्य का सीधा शासन नहीं था। इनके पास भारत और पाकिस्तान में से किसी एक में मिलने या फिर खुद को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित करने का अधिकार था। कैबिनेट मिशन के सामने 1946 में अपना पक्ष रखते हुए कलात ने कहा था कि उसकी संधि ब्रिटेश इंडिया साम्राज्य के साथ नहीं, बल्कि ब्रिटिश क्राउन के साथ है। 4 अगस्त 1947 को दिल्ली में एक राउंड टेबल मीटिंग में तय किया गया कि 5 अगस्त 1947 को कलात ब्रिटिश साम्राज्य से स्वतंत्र होगा। खारान, लॉस बुला, मारी और बुग्ती इलाके कलात में शामिल होंगे, ताकि पूरा बलूचिस्तान कलात का हिस्सा बन जाए।

कलात का कानूनी दर्जा भी अन्य भारतीय रियासतों से अलग था। 1876 की संधि के अनुसार ब्रिटेन उसके आतंरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता था। वह चेंबर ऑफ प्रिंसली स्टेट्स का सदस्य भी नहीं था। इसके कारण वह भारत या पाकिस्तान में से किसी एक में शामिल होने के लिए मजबूर नहीं था।

पाकिस्तान बनने के अगले दिन मीर अहमद खान ने कलात को एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित किया। कलात की नेशनल असेंबली की बैठक में यह फैसला किया गया कि वह एक स्वतंत्र राष्ट्र होगा और पाकिस्तान से उसके दोस्ताना ताल्लुक रहेंगे।

फिर कुरान की कसम खा ठगा

अप्रैल 1948 में पाकिस्तानी सेना ने कलात पर हमला किया। मीर अहमद यार खान ने आत्मसमर्पण कर विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दिए। बावजूद बलूचिस्तान की आजादी की हसरत ने दम नहीं तोड़ा। खान के भाई प्रिंस अब्दुल करीम के नेतृत्व में विद्रोह हुआ। उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया। 1954 में पाकिस्तान ने ईस्ट पाकिस्तान और वेस्ट पाकिस्तान नाम से यूनिट बनाने का फैसला किया। वेस्ट पाकिस्तान के सभी स्टेट्स, प्रोविंसिज और कबिलाई इलाकों को मिलाकर वेस्ट पाकिस्तान बनाया गया। इन इलाकों के सारे अधिकार और स्वायत्ता छीन ली गई। बलूचिस्तान ने इसका जबरदस्त विरोध किया। अक्टूबर 1958 में अयूब खान ने पाकिस्तानी आर्मी को बलूचिस्तान में भेज कलात के खान और उनके सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया।

लेकिन, खान के सहयोगी नवाब नवरोज खान ने संघर्ष जारी रखा। कहते हैं कि 1959 में कुरान की कसम खाकर पाकिस्तानी कमांडर ने नवरोज खान को आत्मसमर्पण के लिए राजी किया। लेकिन, हथियार डालते ही उनके बेटों, भतीजों और रिश्तेदारों को गिरफ्तार कर फॉंसी दे दी गई। खान की करीब 90 साल की उम्र में 1962 में जेल में ही मौत हो गई।

इसके बाद 70 के दशक में फिर बलूच आंदोलन ने जोड़ पकड़ा। 1971 के चुनाव में बलूचिस्तान और नॉर्थ-वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस में नेशनल अवामी पार्टी की जीत हुई जो नेशनलिस्ट बलूचों की पार्टी थी। बलूचों पर आरोप लगाया गया कि वे ईरान के साथ मिलकर बड़े संघर्ष की तैयारी कर रहे हैं। सरकार को बर्खास्त कर बलूचिस्तान को सैनिकों से पाट दिया गया। बलूचों पर हवाई हमले तक किए गए।

इसके बाद से बलूचिस्तान में नरसंहार का सिलसिला जारी है। वहाँ के हजारों लोग गायब हैं। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग की एक रिपोर्ट भी जुलाई 2010 से मई 2011 के बीच लापता 140 लोगों की लाशें मिलने की पुष्टि करती है। डिप्लोमेट की एक रिपोर्ट बताती है कि पूरे बलूचिस्तान में कुछ-कुछ किलोमीटर पर साजो-सामान से लैस पाकिस्तानी सेना की सुरक्षा चौकियॉं हैं।

वकील शकील जमुरानी के मुताबिक केच में इंटरनेट शटडाउन को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। लेकिन, सुनवाई पूरी होते नहीं देख उन्होंने मामला वापस ले लिया। वे बताते हैं कि कुछ लोग सादे कपड़ों में उनके पास आए और कहा कि मोबाइल इंटरनेट पर पाबंदी के खिलाफ सवाल उठाकर वे राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनौती दे रहे हैं। समझा जा सकता है कि बलूचिस्तान में सुरक्षा का खतरा कैसा है।

अब याद करिए उन शोरों को जो सीमा पार आतंकवाद से जूझ रहे कश्मीर में लॉकडाउन पर मचा है। याद करिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला दे सेना पर प्रताड़ना के झूठे आरोप लगाने वाले बयान और सोशल मीडिया के पोस्ट को। याद करिए कथित अल्पसंख्यकों को दबाने का, उनकी आवाज कुचलने का मोदी सरकार पर लगे आरोपों को।

ऐसे लोगों को यदि इस मजहब की वाकई फिक्र होती तो केच में इंटरनेट शटडाउन और बलूचिस्तान में नरसंहार पर भी इनकी आवाजें आपको सुनाई देती। सच्चाई तो यह है कि बलूच लोगों के संघर्ष को, दर्द को जिस शख्स ने सार्वजनिक तौर पर पहली बार आवाज दी वह नरेंद्र मोदी ही हैं। याद करिए 15 अगस्त 2016 को लाल किले से दिए गए मोदी के संबोधन को। और यही कारण है कि बलूच राष्ट्रवादी आाज पाकिस्तानी प्रताड़ना से मुक्ति के लिए भारत की तरफ देख रहे हैं।

कमलनाथ के MP में रिश्वत के बदले अधिकारी को भैंस देने पहुँचा किसान

कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ के मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के सिरौंज में एक किसान कथित तौर पर रिश्वत माँगे जाने से इतना परेशान हुआ कि अपनी भैंस तहसील कार्यालय में नायब तहसीलदार की गाड़ी से जाकर बाँध आया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ग्राम पथरिया निवासी भूपत रघुवंशी ने आरोप लगाया कि जमीन के बँटवारे को लेकर विगत लगभग 7 माह से वह तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहा है, लेकिन नायब तहसीलदार द्वारा बँटवारा करने के लिए 25 हजार रूपयों की रिश्वत की माँग की जा रही है।

इसके बाद जब किसान रिश्वत की राशि एकट्ठा करने में सफल नहीं हुआ तो वह अपनी भैंस लेकर तहसील कार्यालय पहुँच गया और रिश्वत के रूपयों के बदले नायब तहसीलदार को भैंस देने की बात कही। हालाँकि, नायाब तहसीलदार ने इसे किसान की पब्लिसिटी के लिए की गई हरकत बताया है।

इस मामले में सिरोंज SDM संजय जैन ने बताया कि अधिकारी पर किसान द्वारा आरोप लगाया गया है जिसको प्रमाणित करने की बात किसान से कही गई। वहीं, दूसरी ओर नायब तहसीलदार, सिद्धार्थ सिंघला ने आरोपों को नकारते हुए बताया कि किसान के बँटवारे का प्रकरण है, जिसके तहत अभी पटवारी द्वारा वारिजों की जानकारी आना बाकी है और प्रकरण की सुनवाई पेशी 18 सितम्बर को होनी है।

इस घटना के बाद किसान ने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा है और कार्रवाई की माँग की है। फिर वे अपनी भैंस लेकर चले गए।

वीडियो इस लिंक पर देख सकते हैं

https://www.facebook.com/watch/Camera24-Vidisha-103755004305251/

नाबालिग से गैंगरेप के दोषी अजरुद्दीन, बशारत, असरूद्दीन, समसू खान को 20-20 साल कठोर कारावास की सजा

राजस्थान के अलवर जिले के किशनगढ़ बास थाना इलाके में एक 7वीं कक्षा की छात्रा के साथ हुए सामूहिक बलात्कार केस में 4 साल बाद बृहस्पतिवार (सितंबर 12, 2019) को दोषियों को सजा सुनाई गई। News18 की रिपोर्ट के अनुसार, जिला पॉक्सो संख्या 4 अलका शर्मा की अदालत ने नाबालिक पीड़िता से सामूहिक बलात्कार के 4 आरोपितों को 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

किशनगढ़ बास थाना क्षेत्र के मुसा खेड़ा गाँव की इस घटना में सातवीं कक्षा में गाँव के ही सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली एक नाबालिक बच्ची को आरोपित उसके घर से उठाकर ले गए थे। एक रात बच्ची अपनी दादी के पास सो रही थी, तभी 3 जुलाई 2015 रात्रि को उसे घर से उठाकर ले गए और कार से किशनगढ़ बास में ले जाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया।

एक बार सामूहिक बलात्कार करने के बाद नाबालिग पीड़िता को धमकाते हुए उसे आरोपित अजरुदीन ने 15 जुलाई 2015 की रात्रि को फिर उसके घर से बुलाया। इस घटना के बाद वह अलवर गई और अलवर से अजमेर चली गई थी। इसके बाद नीमच मध्यप्रदेश चली गई, जहाँ पुलिस वालों ने उसे बैठे देखकर पूछताछ की थी।

इस पूछताछ के बाद बच्ची से यौन हिंसा का पता चलने पर उसके परिजनों और अलवर पुलिस से सम्पर्क किया गया। इसके बाद बच्ची की शिकायत थाने में दर्ज कराई गई थी। बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार करने के मामले में चारों आरोपितों में अजरुद्दीन, बशारत खान, असरूद्दीन और समसू खान को जाँच के बाद कोर्ट ने दोषी माना है।

पॉक्सो कोर्ट (POCSO COURT Alwar) ने जेल के साथ इन चारों रेप के दोषियों पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। विशेष आदालत (POCSO) के इस निर्णय के बाद पीड़िता के परिजनों ने देर से ही सही न्याय मिलने पर खुशी जाहिर की है।

बेसबॉल बैट से पिटाई मामले में AAP विधायक सोम दत्त को भेजा गया तिहाड़ जेल

दिल्ली में सत्तारुढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) को विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की एक अदालत ने सदर बाजार से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक सोमदत्त को मारपीट के मामले में बृहस्पतिवार को 6 महीने के लिए तिहाड़ जेल भेजा है। सदर विधानसभा से विधायक सोमदत्त की याचिका को खारिज करते हुए दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें जेल भेजने का आदेश दे दिया।

यह मामला जनवरी 2015 का है। अदालत ने सोम दत्त को तिहाड़ भेजने के साथ ही मुख्य मेट्रोपालिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल के उन्हें इस मामले में दोषी ठहराए जाने के खिलाफ की गई अपील को भी खारिज कर दिया। उन्हें 2015 के इस मारपीट के मामले में पहले 6 महीने की जेल की सजा सुनाई गई थी।

मजिस्ट्रेट विशाल ने 29 जून को दिए फैसले में सोम दत्त को दोषी ठहराया था और फैसले को चुनौती देने की अनुमति दी थी। शिकायतकर्ता संजीव राणा ने सोमदत्त पर मारपीट का आरोप लगाया था। उन्होंने पुलिस को बताया था कि सोम दत्त गुलाबी बाग स्थित उनके घर में अपने 50-60 समर्थकों के साथ गया और उनके साथ मारपीट की थी।

अभियोजक पक्ष ने आरोप लगाया था कि AAP विधायक ने बेसबॉल से शिकायतकर्ता संजीव राणा के पैर में मारा था। जबकि समर्थक शिकायतकर्ता को घसीटकर सड़क पर लाए थे और उनकी पिटाई की थी। वहीं, सोमदत्त के वकील ने दलील की थी कि सोमदत्त व उनके समर्थक शांतिपूर्ण तरीके से प्रचार कर रहे थे और शिकायतकर्ता ने ही सोमदत्त के साथ झगड़ा शुरू किया था।

पूरा मामला

पीड़ित संजीव की शिकायत के मुताबिक 10 जनवरी 2015 को वह अपने फ्लैट में थे। तभी 50-60 लोग उनके दरवाजे पर पहुँचकर, घर की घंटी बजाने लगे। जब संजीव ने इसका विरोध किया तो नाराज़ सोमदत्त ने बेसबॉल बल्ले से उनके पैर पर मार दिया। इसके बाद वह उसे खींचकर सड़क पर ले गए और वहाँ उन्हें लात-घूँसों से मारना शुरू कर दिया। इसके बाद पीड़ित के भाई ने पुलिस बुलाई और पीसीआर वैन ही उन्हें हिंदूराव अस्पताल लेकर गई।

सोशल मीडिया के साथ सड़क पर उतरकर संघर्ष करें- सोनिया का कार्यकर्ताओं को आदेश

कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने पार्टी के महासचिवों, राज्यों के प्रभारियों और प्रदेश अध्यक्षों के साथ बैठक की। कॉन्ग्रेस मुख्यालय में हुई इस बैठक पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, गुलाम नबी आजाद, केसी वेनुगोपाल और एके एंटनी समेत पार्टी के तमाम बड़े नेता शामिल हुए। इस बैठक को आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों और पार्टी में जरूरी निर्देशों के लिए बुलाया गया था, हालाँकि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष इस पार्टी से नदारद रहे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मौके पर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने के साथ ही सड़क पर उतरकर संघर्ष करें और जनता से सीधा संपर्क स्थापित करें।

इस बैठक में सोनिया ने पार्टी के महासचिवों-प्रभारियों, प्रदेश अध्यक्षों, मुख्यमंत्रियों और विधायक दल के नेताओं के समक्ष देश की अर्थव्यवस्था की मौजूदा हालात पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने केंद्र सरकार पर संस्थाओं को कमजोर करने के भी आरोप लगाए।

सोनिया गाँधी ने कहा कि विरोध करने वाले लोगों की आवाज को दबाया जा रहा है। साथ ही, उन्होंने कहा कि हम ऐसे वक्त मिल रहे हैं, जब प्रतिशोध की राजनीति अपने चरम पर है और यह वो समय है जब सत्ता के खिलाफ आवाज उठाने वालों को धमकी दी जा रही है।

‘हमें सड़कों पर उतरना होगा’

सोनिया गाँधी ने कहा- “लोकतंत्र को इतना खतरा कभी नहीं रहा जितना आज है। मैंने कुछ हफ्ते पहले भी कहा था कि सत्ता का बहुत ही खतरनाक ढंग से दुरुपयोग किया जा रहा है। देश उन ताकतों का मुकाबले करने को तैयार है जो महात्मा गाँधी, सरदार पटेल और बीआर अम्बेदकर के संदेशों को गलत तरीके से पेश कर रहा है। हमें इनका मुकाबला करने के लिए सड़कों पर उतरना होगा, गाँव-कस्बों और शहरों में लोगों तक पहुँचना होगा।”

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सिर्फ सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना या इस पर आक्रामक रहने से कुछ नहीं होने वाला है। उसकी अपेक्षा सीधे जनता तक पहुँचना ज्यादा महत्वपूर्ण है। हाल ही में कई कॉन्ग्रेस नेताओं के पार्टी छोड़ने के संदर्भ में सोनिया ने कहा- “लोग समय आने पर अपना रंग दिखा ही देते हैं, यह अवसरवादी चरित्र को दर्शाता है। हम जल्द ही तीन राज्यों में चुनावों का सामना करने जा रहे हैं। हालात चुनौतीपूर्ण हैं और अगर हम सिर्फ पार्टी हित को ऊपर रखें तो फिर से अपनी खोई जमीन वापस पा सकते हैं।”

कॉन्ग्रेस जनता के बीच घट रही अपनी लोकप्रियता के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में, आम जनता की नजरों में कॉन्ग्रेस पार्टी की गिरती हुई छवि को सुधारने के लिए पार्टी ने अब अपनी कार्यप्रणाली और विचारधारा के प्रचार के लिए ‘प्रेरक’ रखने का निर्णय लिया है। ये प्रेरक कॉन्ग्रेस के खिलाफ चल रही नकारात्मक ख़बरों के खिलाफ जमीनी स्तर पर पार्टी हित में काम करेंगे।

ये प्रेरक कार्यकर्ताओं को पार्टी की विचारधारा और इतिहास के बारे में ‘प्रेरित और सूचित’ करेंगे, इसके अलावा उन्हें नियमित आधार पर जनता के साथ जुड़ने के लिए तैयार किया जाएगा।

संकट में है कॉन्ग्रेस

कॉन्ग्रेस इस समय बहुत बड़े संकट की स्थिति से गुजर रही है। हाल ही में अनुच्छेद 370 को लेकर जहाँ राष्ट्रीय स्तर के नेताओं पर आपसी मतभेद उभरकर सामने आए, तो वहीं राज्यों में भी आपस में तालमेल नहीं बैठ पा रहा है। एक ओर मध्य प्रदेश में सीएम कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच टकराव जारी है, तो दूसरी ओर राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच मनमुटाव भी साफ दिखाई दे रहा है। इस सबके बीच कॉन्ग्रेस पार्टी छोड़कर बीजेपी के साथ जा रहे हैं नेताओं ने पार्टी को अलग से सरदर्द दे रखा है।

जैश आतंकी उबेद, जहाँगीर, सबील अहमद हथियारों-विस्फोटकों के साथ कठुआ में गिरफ्तार

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आज (सितंबर 12, 2019) पंजाब से कश्मीर घाटी की ओर AK-47 और विस्फोटक लेकर आते 3 आतंकियों को कठुआ में गिरफ्तार किया। इलाके के एसएसपी श्रीधर पाटिल ने इस गिरफ्तारी की सूचना देते हुए बताया कि ये तीनों आतंकी जैश-ए मोहम्मद के हैं। इनके पास से 4 AK-56, 2 AK-47, 6 मैग्जीन और 180 लाइव राउंड के साथ 11,000 रुपए नकद बरामद किए गए हैं। जिसके बाद अब पंजाब बॉर्डर पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जम्मू के आईजी मुकेश सिंह ने बताया है कि ये गिरफ्तार हुए संदिग्ध आतंकी कश्मीर के रहने वाले हैं। इनकी पहचान पुलवामा निवासी उबेद-उल-इस्लाम, बड़गाम निवासी जहाँगीर अहमद पारे और पुलवामा निवासी सबील अहमद बाबा के रूप में हुई हैं।

जानकारी के अनुसार इन आतंकियों की सूचना पुलिस को सुरक्षाबल द्वारा मिली थी कि हथियारों से भरा ट्रक लेकर ये अमृतसर के रास्ते आ रहे हैं।

इसके बाद ही कठुआ में नाकेबंदी के दौरान ट्रक में रखे सेब के कार्टन से ये हथियार और विस्फोटक चीजें बरामद हुईं और ट्रक में बैठे इन तीनों संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया गया। अब फिलहाल इनसे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ये हथियार इन्हें कहाँ पर पहुँचाने थे और कहाँ से लाए जा रहे थे।