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बाबरी मस्जिद गिराना साजिश नहीं, यह करोड़ों हिंदुओं की भावनाएँ दबाने का नतीजा: कल्याण सिंह

राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह ने मंगलवार (सितंबर 10, 2019) को लखनऊ में कहा कि 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को गिराए जाने की घटना किसी षडयंत्र का हिस्सा नहीं, बल्कि सदियों से करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को दबाए जाने का परिणाम था। बता दें कि, दिसंबर 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिराए जाने के समय कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट के विशेष जज सुरेंद्र कुमार यादव ने सीबीआई को कल्याण सिंह के मामले में रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था। इस पर सीबीआई ने एक आवेदन दायर किया था, जिस पर बुधवार (सितंबर 11, 2019) को सुनवाई होगी।

कल्याण ने कहा, “अभी तक मैं राजस्थान का राज्यपाल था और मुझे समन नहीं किया जा सकता था। लेकिन अब मुझसे पूछताछ की जाएगी। इसके लिए मैं कोर्ट में पेश होऊँगा। मैं वहाँ पर सभी सवालों का जवाब दूँगा।” उन्होंने कहा, “मैं कोर्ट का सम्मान करता हूँ। यदि सीबीआई मुझसे पूछताछ करना चाहती है तो मैं इसे स्वीकार करता हूँ। वे इसके लिए जब भी तारीख तय करते हैं, मैं उस दौरान हाजिर रहूँगा। यह मुद्दा अदालत में है और 12-13 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं। मैं कोर्ट को बताऊँगा कि इसमें कोई साजिश नहीं था।”

पूर्व राज्यपाल ने कहा कि अयोध्या करोड़ों भारतीयों की आस्था का केंद्रबिंदु है। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होता है तो इससे करोड़ों भारतीयों की इच्छा पूरी होगी। उन्होंने कहा कि वो राम मंदिर निर्माण का समर्थन करते हैं। यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। उन्होंने कहा, “हम लोग कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। फैसला आने के बाद केंद्र सरकार को इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। मेरा पक्ष इस मुद्दे पर पूरी तरह स्पष्ट है।”

इससे पहले, दोबारा बीजेपी का सदस्य बनने के बाद उन्होंने सभी राजनीतिक दलों को राम मंदिर मुद्दे पर अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए कहा था। उन्होंने कहा था कि सभी राजनीतिक दलों को बताना चाहिए कि वे अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के पक्ष में हैं या नहीं। उन्होंने सुझाव दिया कि मुस्लिम पक्ष को इस मामले में अपने दावे को वापस लेने के पक्ष में सोचना चाहिए। इससे देश की एकता और अखंडता सुनिश्चित होगी।

9/11 की 18वीं बरसी पर काबुल में अमेरिकी दूतावास पर हुआ रॉकेट से खतरनाक हमला

आज 9/11 की 18 वीं बरसी पर अफगानिस्तान के काबुल में अमेरिकी दूतावास पर रॉकेट से एक खतरनाक हमला हुआ। जिसकी तीव्रता काफ़ी ज्यादा बताई जा रही हैं। ये हमला बुधवार तड़के हुआ। हालाँकि, संतोषजनक बात ये है कि इस हमले से कोई घायल नहीं हुआ, जिसकी पुष्टि खुद अधिकारियों ने हमले के एक घंटे बाद की। लेकिन अफगान अधिकारियों द्वारा इस मामले पर कोई तत्काल टिप्पणी नहीं हुई हैं। नाटो मिशन का भी कहना है कि कोई कर्मी घायल नहीं हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो न्यूज एजेंसी शिनहुआ ने इस हमले की जानकारी दी और बताया कि अमेरिकी दूतावास पर हुआ हमला एक रॉकेट हमला था।

जानकारी के अनुसार इस हमले से काबुल में आधी रात धुआँ छा गया था और सायरन बजने की आवाजें आने लगीं थी। जिसके बाद दूतावास के अंदर कर्मचारियों को एक संदेश सुनाई दिया कि परिसर में रॉकेट से हमला हुआ हैं।

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा पिछले सप्ताह तालिबान के साथ शांति वार्ता समाप्त करने के बाद, अफगानिस्तान में ये पहला बड़ा हमला हुआ है, वो भी अमेरिकी दूतावास पर। इससे पहले तालिबान कार बमों के धमाकों ने काबुल को झकझोर के रख दिया था, जिसमें वहाँ के कई नागरिक और नाटो मिशन के 2 सदस्य मारे गए थे। इस धमाके के बाद ही ट्रंप ने अमेरिकी सेवा सदस्य की मौत का हवाला देकर अमेरिका-तालिबान शांति वार्ता को समाप्त किया था।

खैर, बता दें कि अभी तक इस हमले की जिम्मेदारी किसी भी आतंकी संगठन द्वारा नहीं ली गई हैं, लेकिन ये हमला उस समय हुआ है जब तालिबान पहले ही अमेरिका के सैनिकों के ख़़िलाफ़ बड़े हमले की धमकी दे चुका हैं। साथ ही यहाँ ये गौर करने वाली बात है कि इस हमले को 9/11 तारीख को अंजाम दिया गया है। ये वही दिन है जब साल 2001 में हमले के बाद अमेरिकी सेना ने 9/11 के मास्टरमाइंड और अलकायदा के खूँकार आतंकी को ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था।

23 पाकिस्तानी शरणार्थियों को महाराष्ट्र सरकार ने दी भारत की नागरिकता

महाराष्ट्र सरकार ने कल यानी मंगलवार (सितंबर 10, 2019) को पाकिस्तान के सिंध प्रांत से आए 23 प्रवासियों को प्रमाण पत्र के साथ देश की नागरिकता दी। जानकारी के मुताबिक ये लोग कई साल पहले लंबी अवधि के वीजा पर भारत आए थे।

महाराष्ट्र के गृह मंत्री दीपक केसारकर ने बताया कि जिन लोगों को नागरिकता के प्रमाण पत्र मुहैया करवाए गए हैं वे सभी पाकिस्तान के पंजाब और सिंध प्रांत में पैदा हुए लोग थे और बँटवारा होने के बाद भारत आ गए थे। ये लोग लंबी अवधि के वीजा पर जलगाँव में ही रह रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जिन लोगों को नागरिकता प्रदान की गई है। उनमें से अधिकतर सिंधी और पंजाबी समुदाय से संबंध रखते हैं। इन्हें केंद्र सरकार द्वारा हरी झंडी दिखाने के बाद ही नागरिकता के प्रमाण पत्र दिए गए हैं।

जानकारी के लिए बता दें कि इस फैसले से जलगाँव, औरंगाबाद, अमरावती व कोल्हापुर जिले में रहने वाले कई लोगों को लाभ मिला है। कई वर्षों से भारत में रह रहे इन लोगों ने भारतीय नागरिकता देने की माँग की थी। जिसे नागरिकता देने के चौथे चरण में पूरा कर दिया गया।

गृह राज्यमंत्री (शहर) डॉ रणजीत पाटील ने कहा कि पिछले कई साल पहले पाकिस्तान से भारत आए और अब यहीं रहने वाले नागरिकों (प्रवासी) द्वारा भारतीय नागरिकता की माँग की जा रही थी। जिसे पूरा करना उनके लिए खुशी की बात है।

लश्कर के टॉप आतंकी आसिफ को जम्मू-कश्मीर के सोपोर में सुरक्षाबलों ने किया ढेर

उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के सोपोर में बुधवार (सितंबर 11, 2019) को सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में लश्कर ए तैयबा के के टॉप आतंकी आसिफ को मार गिराया गया। सुरक्षाबलों को सोपोर में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी।

इसके तुरंत बाद सेना की 22 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर), सीआरपीएफ और पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) के जवानों द्वारा इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया गया। तभी इलाके में छिपे आतंकी ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में मुठभेड़ शुरू हो गई। 

पुलिस के अनुसार इसमें लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडरों में शामिल आतंकी आसिफ को मार गिराने में सफलता मिली। पुलिस ने उसके पास से हथियार व गोला बारूद बरामद किया है।

जानकारी के मुताबिक, आतंकी आसिफ सोपोर में कई नापाक गतिविधियों में शामिल रहा है। बता दें कि, आसिफ ने हाल में सोपोर में फायरिंग की थी, जिसमें फल विक्रेता के परिवार के तीन सदस्य घायल हो गए थे। इसमें आसमा जान नाम की एक बच्ची भी शामिल थी। इसके अवाला, आतंकी आसिफ सोपोर में प्रवासी मजदूर शफी अलाम को गोली मारने के लिए भी जिम्मेदार था।

गौरतलब है कि, इससे पहले सोपोर में पुलिस ने 9 सितंबर को लश्कर-ए-तैयबा के 8 आतंकियों को गिरफ़्तार किया था। ये सभी किसी बड़े आतंकी हमले की फ़िराक़ में थे। ये आतंकी राज्य के व्यापारियों को भी लगातार धमका रहे थे। वहीं, कुपवाड़ा के केरन सेक्टर में घुसपैठ कर रहे 5 पाकिस्तानी आतंकियों को भारतीय सेना ने मार गिराया था, जिसका वीडियो भी सेना ने जारी किया था।

‘आत्मकूरु’ को निकले चंद्रबाबू नायडू और बेटे नारा लोकेश नजरबंद, विरोध में बैठे भूख हड़ताल पर

आंध्र प्रदेश में तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू और उनके बेटे नारा लोकेश को पुलिस ने नजरबंद कर दिया है। बता दें कि, चंद्रबाबू नायडू ने वाईएसआर कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा टीडीपी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कथित हमलों के विरोध में ‘चलो आत्मकूरु’ नामक एक रैली का ऐलान किया था। जिसमें हजारों टीडीपी कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ कथित हमलों के पीड़ितों को भी बुलाया गया था।

पुलिस का कहना है कि टीडीपी ने इस राजनीतिक रैली के लिए प्रशासन से अनुमति नहीं ली थी। जिसके बाद
आंध्र प्रदेश पुलिस ने पार्टी को रैली की इजाजत दिए जाने से इनकार कर दिया और नरसरावपेटा, सत्तेनापल्ले, पलनाडू और गुराजला में धारा 144 लागू कर दी गई। पुलिस ने राज्य में टीडीपी के कई नेताओं को भी नजरबंद कर दिया।

टीडीपी चीफ चंद्रबाबू नायडू सुबह 9 बजे आत्मकूरु के लिए निकलने वाले थे लेकिन उन्हें रोक दिया गया। इसके विरोध में उन्होंने अपने घर पर ही सुबह 8 बजे से लेकर रात के 8 बजे तक, यानी कि 12 घंटे तक भूख हड़ताल का ऐलान किया। उन्होंने टीडीपी काडर से भी भूख हड़ताल रखने को कहा। इस ऐलान के बाद समर्थक नायडू के घर जा रहे थे, जिन्हें पुलिस ने रोक दिया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया है।

टीडीपी काडर ने रैली की इजाजत न देने और नायडू को नजरबंद किए जाने के बाद उनके घर पर जमकर नारेबाजी की। पुलिस के साथ कार्यकर्ताओं की झड़प भी हुई जिसके बाद टीडीपी युवा ईकाई के अध्यक्ष देविनानी अविनाश के साथ ही कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उधर, सीनियर टीडीपी नेता अय्यन्ना पत्रादू को विजयवाड़ा रेलवे स्टेशन पर हिरासत में ले लिया गया। विशाखापट्नम ईस्ट के विधायक वेलागपुडी रामकृष्ण बाबू और पूर्व विधायक पीला गोविंद को गिरफ्तार कर पुन्नामी गेस्ट हाउस भेज दिया गया।

विशाखापट्नम ईस्ट के विधायक वेलागपुडी रामकृष्ण बाबू और पूर्व विधायक पीला गोविंद को गिरफ्तार कर पुन्नामी गेस्ट हाउस भेज दिया गया। पूर्व मंत्री और टीडीपी नेता भूमा अखिला प्रिया को हिरासत में ले लिया गया।

पूर्व टीडीपी विधायक तांगिराला सौम्या को नंदिगामा और विधायक वाईवीबी राजेंद्र प्रसाद को भी उय्युरू में अपने घर में नजरबंद कर दिया गया।

वसीम ने नाबालिग की हत्या कर फार्महाउस में गाड़ा शव, पुलिस ने की हीलाहवाली, CCTV फुटेज से खुलासा

हरियाणा के फरीदाबाद में 16 साल की एक लड़की का वसीम नामक युवक द्वारा अपहरण करने के बाद गला घोंटकर हत्या कर दी गई और बाद में उसे फरीदाबाद के ही एक फार्महाउस में दफना दिया गया। लेकिन शिकायत होने के बावजूद भी पुलिस ने मामले की तफ्तीश करना उचित नहीं समझा।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो फरीदाबाद की एक लड़की पिछले 10 दिन से लापता चल रही थी। लेकिन पुलिस शिकायत होने के बावजूद भी सक्रियता नही दिखा रही थी और न ही शक के आधार पर उनके पड़ोसी आरोपित वसीम से पूछताछ कर रही थी।

ऐसे में बच्ची के परिवार ने खुद ही मामले की छानबीन करनी शुरू की। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज खँगाले और एक कार के नंबर के आधार पर वसीम को पुलिस के हवाले किया।

पूछताछ हुई तो वसीम ने अपहरण की बात कबूली। साथ ही ये भी बताया कि लड़की का अपहरण करते वक्त ही उसकी हत्या कर दी थी। वसीम ने बताया कि उसने हत्या के बाद लड़की के शव को जंगल में ले जाकर 3 फुट गहरे गड्ढे में दफनाया था। जिसके बाद वसीम की निशान देही पर परिजनों ने पुलिस की मदद से लड़की का शव यमुना किनारे से बरामद किया।

इस मामले में बता दें कि परिजनों के अलावा इलाके के विधायक ललित नागर भी पुलिस से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने बताया कि 10 दिनों में 5 बार उन्होंने इलाके के एसएचओ से बच्ची को ढूँढने की बात कही थी। लेकिन पुलिस फिर भी कोई कार्रवाई नहीं कर रही थीं।

उन्होंने कहा कि वह प्रदेश पुलिस डीजीपी तक इस मामले की शिकायत करेंगे और आरोपित पुलिसवालों के खिलाफ कार्रवाई करवाएंँगे। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में दो युवकों को हिरासत में लिया है और पूछताछ जारी है।

मुंबई कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह ने दिया इस्तीफा, Article-370 पर पार्टी के रुख से थे ख़फ़ा

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस को बड़ा झटका लगा है। कॉन्ग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व गृहराज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह ने मंगलवाार (सितंबर 10, 2019) को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। कृपाशंकर ने महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिलकार्जुन खड़गे को अपना इस्तीफा सौंपा। मल्लिकार्जुन खड़गे महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस प्रभारी हैं।

इस्तीफे की वजह बताते हुए कृपाशंकर सिंह ने कहा कि वह कश्मीर को लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी के रुख से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा, “मैंने कॉन्ग्रेस छोड़ दी है क्योंकि मैं जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने का विरोध करने संबंधी पार्टी के रूख से सहमत नहीं हूँ।” कृपाशंकर सिंह कॉन्ग्रेस की मुंबई इकाई के प्रमुख रह चुके हैं और वो 15 वर्षों तक कॉन्ग्रेस-एनसीपी गठबंधन सरकार में मंत्री भी रहे थे। 

बता दें कि, 3 सितंबर को जब कृपाशंकर ने अपने घर पर गणपति की स्थापना की थी तो दर्शन के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे कृपाशंकर के घर आए थे। ऐसे में सत्तारूढ़ दल के दो बड़े नेताओं का कॉन्ग्रेस के बड़े नेता के घर आना राजनीतिक गलियारे में चर्चा का विषय बन गया था। मंगलवार को कृपाशंकर के इस्तीफे ने इस चर्चा को और हवा दे दी है। हालाँकि, सिंह का कहना है कि उचित समय पर वो अपने राजनीतिक रुख का खुलासा करेंगे।

गौरतलब है कि, इससे पहले फिल्मों से राजनीति में आई उर्मिला मातोंडकर ने कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। उर्मिला मातोंडकर लोकसभा चुनाव के समय कॉन्ग्रेस से जुड़ी थीं और उत्तरी मुंबई सीट से चुनाव लड़ा था। हालाँकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। उर्मिला ने पार्टी छोड़ने की वजह पार्टी के भीतर की तुच्छ राजनीति को बताया। उन्होंने इस्तीफा देते हुए कहा था, “मेरी राजनीतिक और सामाजिक संवेदनशीलता का एक बड़े लक्ष्य पर काम करने के बजाय मुंबई कॉन्ग्रेस में कुछ लोग आपसी लड़ाई के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।”

दिग्विजय सिंह ने पहुँचाया मुहर्रम के ‘पावन अवसर’ पर सलाम, लोगों ने ‘राजाजी’ को बताया मुस्लिम परस्त

कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुहर्रम के मौक़े पर समुदाय विशेष के बंधुओं को सलाम पहुँचाया। हालाँकि, उनके सलाम देने का तरीका बिलकुल आम था लेकिन मुहर्रम के मौक़े को ‘पावन अवसर’ लिखने के कारण लोग सोशल मीडिया पर उनकी चुटकी लेने लगे और देखते ही देखते दिग्विजय सिंह केवल ट्विटर पर ही नहीं पूरे सोशल मीडिया पर ट्रोल होने लगे।

मंगलवार को मुहर्रम के मौक़े पर उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से लिखा,“सभी मुस्लिम भाईयो और बहनों को मुहर्रम के पावन अवसर पर हमारी सलाम।” दिग्विजय के इस ट्वीट के बाद लोगों ने उनका खूब मजाक उड़ाया और कुछ लोग तो इसे वोट की राजनीति तक बताने लगे। वहीं, कुछ लोगों ने समझाने का प्रयास किया कि पावन अवसर जैसे शब्दों का प्रयोग कब किया जाता है और मुहर्म क्या है?

किसी ने लिखा मुस्लिमों का दिल ऐसे जीतना संभव नहीं। जालीदार टोपियाँ लगाकर सेवईंयाँ बहुत खाईं हैं, अब खुद को कोड़े भी मारो तो जानें।

एक यूजर ने उन्हें कहा कि शहीद दिवस पर राजाजी पावन अवसर कैसे लिख सकते हो? तो उसके जवाब में दूसरे यूजर ने कहा कि राजाजी को मुस्लिम परस्ती का नशा है।

लोगों ने दिग्विजय सिंह को समझाया, “जब कोई मरता है तो उसे हर्षोल्लास से नहीं मनाया जाता, क्या तुम पावन अवसर कहकर इसे मनाना चाहते हो? दिग्गी तुम सेकुलर बनने के चक्कर में 10 कोड़े भी खा लोगे।”

एक यूजर ने तो उनकी इस गलती को उनके बुढ़ापे का असर बताया और कहा कि टोपी लगाकर रोजा खुलवाने जाने वालों को समुदाय विशेष के त्यौहार का भी मालूम नहीं है। ये पावन नहीं मातम है।

गौरतलब है कि इस्लाम के चार पवित्र महीनों में शुमार मुहर्रम को मातम का महीना कहा जाता है। लेकिन कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इसे पावन पर्व बताकर खुद ही आफत मोल ले ली। इसकी वजह से उन्हें लोगों की ऐसी तीखी प्रतिक्रिया झेलनी पड़ी। वास्तव में ये दिन कर्बला में मारे गए मुहम्मद के नवासो के बलिदान का दिन है। इस दिन शोक मनाया जाता है न कि सलाम किया जाता है।

POK को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाना, वहाँ तिरंगा लहराना हमारा अगला लक्ष्य: केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त करना मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के 100 दिनों की सबसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि सरकार का अगला एजेंडा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाना है। जितेंद्र सिंह ने मंगलवार (सितंबर 10, 2019) को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीओके के मुद्दे पर बात करते हुए कहा, “यह केवल मेरी या मेरी पार्टी की प्रतिबद्धता नहीं है, बल्कि यह 1994 में पीवी नरसिंह राव के नेतृत्व वाली तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा सर्वसम्मति से पारित संकल्प है। यह एक स्वीकार्य रुख है।” उन्होंने कहा कि सरकार का अगला लक्ष्य गुलाम कश्मीर में तिरंगा लहराना है।

इस दौरान उन्होंने मोदी सरकार की उपलब्धियों को बताते हुए पाकिस्तान को भी आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 निरस्त होने का राग अलापने वाला पाकिस्तान अब खुद पूरी दुनिया में एक्सपोज हो गया है। दुनिया भर के देशों में वो भारत का दुष्प्रचार करने में जुटा हुआ है, लेकिन हर बार उसे मुँह की खानी पड़ी है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ बुरा व्यवहार हो रहा है। भारत में अल्पसंख्यक सुरक्षित हैं। 

कश्मीर की तत्कालीन स्थिति के बारे में बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कश्मीर न तो बंद है और ना ही कर्फ्यू के साए में है, बल्कि वहाँ सिर्फ कुछ पाबंदियाँ लगी हुई हैं। सिंह ने पत्रकारों से कहा, “हमें ऐसे बयानों की निंदा करने की जरूरत है। कश्मीर बंद नहीं है। वहाँ कर्फ्यू नहीं है। अगर कर्फ्यू होता तो लोगों को ‘कर्फ्यू पास’ के साथ बाहर निकलना होता।”

इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्र विरोध गतिविधियों में शामिल होने वालों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें अब ये मानसिकता बदलनी होगी कि वो कुछ भी गलत करके निकल जाएँगे। अब इसके लिए उन्हें बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।

UNSC के बाद अब मानवाधिकार परिषद में भी पाकिस्तान की किरकिरी, विजय ठाकुर ने बखिया उधेड़ी

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया लेकिन वहाँ भारत ने क़रारा जवाब देकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने उसकी पोल खोल दी। सुरक्षा परिषद के बाद अब मानवाधिकार परिषद में भी पाकिस्तान की किरकिरी हुई है। भारतीय विदेश मंत्रालय के सचिव विजय ठाकुर ने कहा कि दुनिया ख़ूब समझती है कि जो देश आतंकवाद का मुख्य केंद्र है, वह ग़लत नैरेटिव फैलाता रहता है।

विजय ठाकुर ने साफ़ कर दिया कि जम्मू कश्मीर भारत का आंतरिक मुद्दा है और अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने का निर्णय भारत की संसद ने लिया। उन्होंने बताया कि जम्मू कश्मीर में मूलभूत सुविधाएँ सेवाएँ धीरे-धीरे और आसान की जा रही हैं। उन्होंने जानकारी दी कि भारत सरकार सामाजिक-आर्थिक बराबरी को बढ़ावा देने के लिए प्रगतिशील निर्णय ले रही है।

जेनेवा में यूएनएचआरसी के मुख्यालय में बोलते हुए ठाकुर ने स्पष्ट कर दिया कि ताज़ा निर्णय के बाद से सभी प्रगतिशील फैसले जम्मू कश्मीर और लद्दाख में भी समान रूप से लागू होंगे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जानकारी दी कि इससे लिंगभेद ख़त्म होगा, महिलाओं को उनके अधिकार मिलेंगे और शिक्षा-सूचना के क्षेत्र में उचित विकास होगा।

भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को याद दिलाया कि राज्य (पाकिस्तान) समर्थित आतंकवाद का भारत को काफ़ी नुकसान हुआ है। भारत ने कहा, “यह सही समय है जब सब मिल कर उन आतंकियों के ख़िलाफ़ सामूहिक रूप सें निर्णायक क़दम उठाते हुए कार्रवाई करें।” भारत ने साफ़ कर दिया कि जम्मू-कश्मीर पर जो भी निर्णय लिया गया है वो सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हुए लोकतान्त्रिक रूप से संवैधानिक दायरे में रह कर किया गया।