पाकिस्तान में 19 साल की लड़की को अगवा कर आतंकी हाफिज सईद के शागिर्द से निकाह कराए जाने के बाद अब एक हिंदू लड़की को अगवा करने का मामला सामने आया है। रेणुका कुमारी को 29 अगस्त को सिंध प्रांत के सुक्कुर स्थित उसके कॉलेज से अगवा कर जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया। बताया जाता है कि लड़की को सियालकोट में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी के कार्यकर्ता मिर्जा दिलावर बेग के घर पर रखा गया है।
ऑल पाकिस्तान हिंदू पंचायत ने फेसबुक पोस्ट कर इस घटना की जानकारी दी है। इसमें बताया गया है कि लड़की सुक्कुर के इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की बीबीए की छात्रा है। इस पोस्ट के मुताबिक बीते दो महीने में पाकिस्तान में इस तरह की यह तीसरी घटना है।
फेसबुक पर लड़की के लापता होने की FIR कॉपी शेयर की गई है।
हालॉंकि कुछ मीडिया रिपोर्टों में लड़की के भाई विनेश के हवाले से दावा किया गया है कि उसकी बहन अपने सहपाठी बाबर अमान के साथ रिलेशनशिप में थी। लेकिन, सूत्रों का कहना है कि रेणुका को भी जबरन उसी तरह इस्लाम कबूल करवाया गया है जैसे पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों के साथ होता रहा है। पुलिस इस मामले में अमान के भाई को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
इससे पहले पाकिस्तान में ननकाना साहिब गुरुद्वारा तंबी साहिब के एक ग्रन्थि (सिख पुजारी) की 19 साल की बेटी को गुंडों ने उसके घर से उठा लिया था। इसके बाद जबरन इस्लाम क़बूल करवाकर उसका निकाह हाफ़िज सईद के आतंकी संगठन के जमात-उद-दावा के मोहम्मद हसन से करवा दिया गया था।
यह मामला सामने आने के बाद एक वीडियो जारी कर दावा किया गया कि लड़की ने अपनी मर्जी से इस्लाम कबूल किया है। बाद में लड़की के घर लौटने की भी खबर आई थी जिसका उसके भाई ने खंडन किया था।
पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों को अगवा कर इस्लाम कबूल करवाने का सिलसिला पुराना है। ऐसे ज्यादातर मामलों में पुलिस भी कोई कार्रवाई नहीं करती। बीते दिनों खबर आई थी कि इसके कारण पाकिस्तान में सिखों की आबादी 15 साल में 40 हजार से घटकर 8 हजार हो गई है।
दुनिया में जितने भी ब्रांड्स हैं, सबको अपना व्यापार चलना है। हाँ, व्यापार व कारोबार का रूप अलग हो जाता है। कारोबार चलाने के लिए मैनेजमेंट क्षेत्र से कई लोग हायर किए जाते हैं जो कम्पनी के प्रोडक्ट्स को बेचने के लिए नई-नई रणनीतियाँ बनाते रहते हैं। ‘एक पर एक फ्री’ से लेकर ‘मुफ्त में कंघी, साबुन’ तक, कम्पनियाँ अपने प्रोडक्ट्स बेचने के लिए तरह-तरह की रणनीति बनाती रही हैं। लेकिन, अब माल बेचने का एक नया चलन चला है। पर्व-त्योहारों पर बुरा हिन्दू और अच्छा ‘शांतिप्रिय’ पेश करने का चलन। नैतिकता के भारी डोज़ के साथ माल बेचने का चलन।
कुछ उदाहरण देखते हैं। हाल में सोशल मीडिया पर रेड लेबल चाय के एक ऐड को लेकर आपत्ति जताई गई। इसमें एक हिन्दू श्रद्धालु गणेश जी की मूर्ति ख़रीदने के लिए मुस्लिम मूर्तिकार के पास जाता है। न तो दर्शकों और न ही उस व्यक्ति को पता होता है कि मूर्तिकार का मज़हब क्या है? लेकिन, हिंदुस्तान यूनिलिवर लिमिटेड को यही तो हाइलाइट करना है। मज़हब। मूर्तिकार का मज़हब। जैसा कि दिखाया गया है, गणेश पूजा करने वाले व्यक्ति को अपने धर्म के बारे में, गणेश जी के बारे में, उनके मूषक के बारे में जानकारियाँ नहीं होतीं।
वहीं दूसरी तरफ, मुस्लिम मूर्तिकार को सब पता होता है। उसके ज्ञान पर हिन्दू व्यक्ति को आश्चर्य होता है। लेकिन, तभी वह समय आ जाता है जब वीडियो में जो दिखाना है, वह दिखता है। अजान का समय होता है और वह बूढा मुस्लिम मूर्तिकार इस्लाम वाली स्कल कैप लगा लेता है, जिसे देख कर ‘असहिष्णु’ हिन्दू ग्राहक चौंक जाता है। वह बिना मूर्ति ख़रीदे वापस जाने लगता है क्योंकि हिन्दू तो असहिष्णु होते हैं न? वे मुस्लिम मूर्तिकार से पूजा के लिए मूर्ति क्यों ख़रीदेंगे? बस, यहीं पर कम्पनी का प्रोपगेंडा सफल हो जाता है। इस ऐड का वीडियो यहाँ है:
रेड लेबल चाय का ऐड जो सितम्बर 2018 में आया
फिर हिन्दू ग्राहक को अहसास होता है कि वह ग़लत था और वह अपनी ‘असहिष्णुता’ त्याग मूर्ति ख़रीद लेता है। क्या आप भी ऐसे हैं? क्या आप भी फूल-मालाएँ, पूजा के सामान से लेकर अगरबत्ती और दीपक ख़रीदने दुकानों पर निकलते हैं तो आपको भी दुकानदार का धर्म और मज़हब जानने की उत्सुकता रहती है? अगर आप बिहार से हैं तो क्या आप छठ से पहले बाजार में ऊँख और गागर निम्बू ख़रीदने जाते हैं तो क्या उस भीड़-भाड़ में आपको इससे मतलब होता है कि बेचने वाला/ वाली मुस्लिम है या ईसाई? नहीं न।
तो फिर आपको ऐसा क्यों दिखाया जा रहा है? ये कम्पनियाँ आपको आपकी किस ग़लती का एहसास करा रही हैं? आपको किस बात के लिए प्रायश्चित करने को कह रही है? रेड लेबल के ऐड में वो हिन्दू ग्राहक, जो कम्पनी के हिसाब से आपका प्रतिनिधि है, एक बूढ़े मुस्लिम को सामने देखते ही वहाँ से भागने क्यों लगता है? अगर हिन्दू कोई भी व्यवसाय कर रहा है तो वह पैसे के लिए करता है, लेकिन एक मुस्लिम कोई कारोबार कर रहा है तो वह इबादत क्यों है? इसका जवाब जानने से पहले कुछ और उदाहरण देखने पड़ेंगे।
रेड लेबल का एक और ऐड आया था। अगर आपको नहीं याद है तो याद कीजिए। उस दौरान प्रयागराज में कुम्भ चल रहा था और वह वीडियो भी कुम्भ के इर्द-गिर्द ही था। इसमें दिखाया गया था कि कुम्भ के मेले में लोग इसलिए जाते हैं ताकि वे अपने वृद्ध पिता को वहीं छोड़ आ सकें। ध्यान दीजिए, हज के दौरान ऐसा कभी नहीं होता। कुम्भ के दौरान ही होता है। इसी तरह ‘असहिष्णुता’ भी गणेश चतुर्थी के दौरान ही आती है, मुहर्रम के दौरान नहीं। कुम्भ वाले वीडियो में भी नालायक हिन्दू श्रद्धालु को अपनी ग़लती का एहसास होता है और वह अपने पिता को वापस ले आता है।
आपलोगों में से कइयों ने कुम्भ के दौरान पवित्र स्नान किया होगा। पूजा-पाठ किया होगा। कइयों ने अपने माता-पिता, सगे-सम्बन्धियों व मित्रों के साथ कुम्भ-स्नान किया होगा। बस एक सवाल है आप सभी से। आप में से कितनों ने अपने माता-पिता को कुम्भ में धक्का दे दिया? आप में से कितनों ने कुम्भ की योजना इसलिए बनाई ताकि घर के बुजुर्गों को वहाँ पर छोड़ कर आ सकें और फिर चैन की ज़िंदगी जी सकें? कुम्भ वाले वीडियो में, जो बेटा है, जो कम्पनी के हिसाब से आपका प्रतिनिधित्व करता है, उसे श्रद्धा या पूजा-पाठ से कुछ लेना-देना नहीं होता। उसे बस अपने बूढ़े बाप को धोखे से त्यागना है। वीडियो देखें:
आप कुम्भ क्यों जाते हैं? घर के बुजुर्गों को धोखे से त्यागने के लिए?
पहला वाला वीडियो सितम्बर 2018 में आया। या तो हिन्दुओं ने विरोध-प्रदर्शन नहीं किया या फिर उनके विरोध का कोई असर ही नहीं हुआ और 6 महीने बाद ही मार्च 2019 में उसी प्रकार का वीडियो बना कर हिन्दुओं को नीचा दिखाया गया। इसके कई कारण हो सकते हैं। हो सकता है हिंदुस्तान यूनिलिवर विरोध करने वाले हिन्दुओं को अशिक्षित मानती है। या फिर हो सकता है कि कम्पनी को लगता हो चंद लोग विरोध कर के भी क्या उखाड़ लेंगे। या यह भी हो सकता है कि कम्पनी ने हिन्दू ग्राहकों को ग्रांटेड लिया हो- उन्हें जूते से मारो फिर भी प्रोडक्ट तो हमारा ही ख़रीदेंगे।
कुम्भ जैसे सफल आयोजन, जो जनसँख्या, व्यवस्था और भागीदारी के हिसाब से संसार में सबसे अव्वल है- उसकी बदनामी कर अपना प्रोडक्ट बेचना कहाँ तक उचित है? हिन्दुओं की मानसरोवर यात्रा से जम्मू-कश्मीर के मुस्लिमों को रोज़गार मिलता है, जो पहाड़ी चढ़ने के लिए लाठियों से लेकर भोजन तक बेचते हैं। वे इंतज़ार करते हैं यात्रा का ताकि उनकी कमाई हो। वो इबादत के लिए नहीं, पेट के लिए ऐसा करते हैं। कितने हिन्दू हैं जो उनसे चीजें ख़रीदने से मना कर देते हैं?
यह आजकल का नया चलन है। हमने सर्फ एक्सेल का ऐड भी देखा था। उसमें एक हिन्दू लड़की एक मुस्लिम लड़के को नमाज पढ़ने के लिए ले जाती है। अपने मुस्लिम मित्र को ‘होली के दाग’ और रंगों से बचाते हुए वह ऐसा करती है। हिन्दुओं के बाद अब मुस्लिमों से भी सवाल पूछा जा सकता है। कितने मुस्लिम ऐसे हैं जो होली के दिन डर के मारे नमाज पढ़ने नहीं जा सकते? एक हिन्दू लड़की को हस्तक्षेप करना होता है तब वो ‘बेचारा’ मुस्लिम लड़का नमाज़ पढ़ने जा पाता है। होली ‘दागों’ वाला त्योहार है और नमाज पवित्र इबादत है। ये वीडियो भी देखें:
होली ‘दागदार’ लेकिन नमाज ‘पवित्र’
उपर्युक्त वीडियो फ़रवरी 2019 में आया था। सितम्बर 2018, फ़रवरी 2019 और फिर मार्च 2019- दिखाता है कि हिंदुस्तान यूनिलिवर को हिन्दुओं की भावनाओं, विरोध और विचारों से घंटा फ़र्क़ नहीं पड़ता। रत्ती भर भी नहीं। अगर ऐसा होता तो हिन्दुओं की भावनाओं का अपमान करने, उन्हें ‘असहिष्णु’ दिखाने और होली को ‘दागदार’ बताने की हिमाकत वह 6 महीने में 3 बार नहीं करते। यही वो सारे वीडियोज हैं, जिससे मैक्डोनाल्ड्स को मुस्लिम हितों को ध्यान में रखते हुए केवल ‘हलाल मीट’ उपलब्ध कराने को विवश कर देते हैं।
ऐसा नहीं है कि मुस्लिम त्योहारों को लेकर ऐड नहीं बनाए जाते। वीडियो बनते हैं। ख़ूब बनाते हैं। रमजान के समय भी सर्फ एक्सेल का वीडियो बना था। उस दौरान उनके मज़हबी भावनाओं का पूरा ख्याल रखा जाता है। रमजान के दाग बुरे नहीं होते। रमजान के कारण किसी हिन्दू को अपने घर से निकलने में परेशानी नहीं होती। रमजान के दौरान कोई बेटा अपने बाप को भीड़ में नहीं छोड़ देता। रमजान के दौरान ताजिया बनाने वाले को हिन्दू देख कर कोई मुस्लिम भागता नहीं। क्यों? क्योंकि वह सहिष्णु है। यह सब तो होली और कुम्भ में होता है न। कितना सम्मान करते हैं न ये हमारा, हमारे धर्म का और हमारे त्योहारों का?
इन सबका जवाब यह है कि हिन्दू समाज आज अपनी ही संस्कृति, दर्शन और इतिहास का मज़ाक बनाने वालों का पोषक बना हुआ है। जरा सोचिए कि वेटिकन में यीशु को लेकर ऐसा कोई वीडियो बनता है तो क्या होगा? सऊदी में पैगम्बर मुहम्मद को लेकर कुछ इस प्रकार का वीडियो बना तो क्या होगा? सऊदी और वेटिकन छोड़िए, दुनिया के किसी भी प्रान्त में ऐसा हुआ तो क्या होगा? भारत में मुहम्मद पर टिप्पणी करने पर कमलेश तिवारी को जेल होती है। चार्ली हैब्दो में पैगम्बर को लेकर कार्टून भर छप जाने से 12 लोगों को मार डाला जाता है। केरल में पादरी के यौन-शोषण पर इनामी कार्टून बनाने वाले को मिले पुरस्कार पर पुनर्विचार करने को मजबूर होना पड़ता है।
यह क्या दिखाता है? सहिष्णु कौन। अपने मज़हब, पैगम्बर और समाज पर एक टिप्पणी भर से जानें ले लेने वाले सहिष्णु। अपने पैगम्बर पर टिप्पणी भर से किसी व्यक्ति को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में भी जेल भिजवा देने वाले सहिष्णु। अपने बलात्कार आरोपित पादरी के ख़िलाफ़ कार्टून भर बन जाने से सरकार को हिला डालने वाले सहिष्णु। और हाँ, असहिष्णु कौन? अपने त्योहार को ‘दागदार’ बताने वालों का प्रोडक्ट ख़रीदने वाला असहिष्णु। ख़ुद की इमेज ‘असहिष्णु’ दिखाए जाने के बावजूद ट्विटर पर चूँ भर कर चुप हो जाने वाला असहिष्णु। ख़ुद को बुजुर्गों को भगा देने वाला नालायक वंश बताने पर भी सिर्फ़ देखते रहने वाला असहिष्णु।
मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार में नेशनल कराटे प्लेयर के साथ बलात्कार का मामला सामने आया है। बलात्कार का आरोप कराटे के कोच फुजैल अली पर लगा है। फुजैल पर आरोप है कि उसने शादी का झाँसा देकर कराटे प्लेयर के साथ रेप किया। पीड़िता की शिकायत पर भोपाल के कमला नगर थाने में रेप का मुकदमा दर्ज कर कोच को हिरासत में ले लिया गया है।
दरअसल, ये घटना 4 महीने पहले की है। तब पीड़िता नेपाल कराटे प्रतियोगिता में हिस्सा लेने गई थी। उसी दौरान उसकी दोस्ती फुजैल अली से हुई थी। जिसके बाद दोनों के बीच में लगातार बातें होने लगी। कुछ दिन बाद फुजैल अली ने उससे शादी का वादा किया और फिर भोपाल के न्यू मार्केट इलाके में बने एक फ्लैट में ले जाकर उसके साथ रेप किया। पीड़िता ने जब इसका विरोध किया तो आरोपित फुजैल ने उसे यह कहकर चुप करा दिया कि वह उससे शादी करना चाहता है।
पीड़िता का आरोप है कि आरोपित फुजैल अली इसके बाद शादी का झाँसा देकर लगातार शारीरिक संबंध बनाता रहा। और जब 26 अगस्त 2019 को उसने फुजैल से शादी की बात की, तो वह मुकर गया और बोला कि वह उससे शादी नहीं करना चाहता।
पीड़िता ने बताया कि जब उसने शादी का दबाव बनाया तो फुजैल ने उसे धमकाते हुए कहा कि वह उसे जानता नहीं है। साथ ही पीड़ित खिलाड़ी का आरोप है कि फुजैल ने उसके घरवालों को मारने की भी धमकी दी। इसके बाद पीड़िता ने जहाँगीराबाद थाने में माता-पिता के साथ जाकर आरोपित फुजैल के खिलाफ रेप का मामला दर्ज कराया। फिलहाल, पुलिस मामले की जाँच कर रही है।
कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का बीजेपी और ISI पर दिए बयान से कॉन्ग्रेस ने पल्ला झाड़ लिया है। दिग्विजय ने बजरंग दल के तार ISI से जुड़े होने की बात कही थी। कॉन्ग्रेस पार्टी उनके इस बयान के समर्थन में नज़र नहीं आ रही है। कॉन्ग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पीएल पुनिया ने यह साफ़ कर दिया है कि यह दिग्विजय सिंह के व्यक्तिगत विचार हो सकते हैं और अगर उन्हें ऐसा लगता है कि तो उन्हें इस सन्दर्भ में सबूत पेश करने चाहिए।
दिग्विजय सिंह के इस बयान को गंभीरता से लेते हुए कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय संयोजक सोहन सोलंकी ने दिग्विजय के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई करने तक की चेतावनी दे डाली है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि वो उनके इस बयान की कड़ी निंदा करते हैं और उनके (दिग्विजय) दावों का खंडन करते हुए उन्होंने कहा कि बजरंग दल के कार्यकर्ता देश-विरोधी गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकते।
बजरंग दल के सन्दर्भ में सोलंकी ने कहा कि यह देश में सबसे बड़ा युवा संगठन है और इससे देशभर के क़रीब 40 लाख युवा जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह इस बात को समझने में असमर्थ हैं क्योंकि उनके दिल में हिंदू-विरोधी मानसिकता वर्षों से जमी हुई है।
दरअसल, दिग्विजय सिंह ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा था कि बीजेपी और बजरंग दल के लोग पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से पैसा लेते हैं। साथ ही कहा था कि ISI के लिए जासूसी मजहब विशेष वाले कम और दूसरे धर्म वाले ज़्यादा कर रहे हैं।
इसके जवाब में शिवराज सिंह ने ट्वीट किया,
“दिग्विजय सिंह जानबूझकर ऐसी बयानबाज़ी करते हैं। वह और उनके नेता पाकिस्तान की भाषा बोलते हैं। उनकी विश्वसनीयता बची नहीं है। मैं उनके बयान को इसलिए गंभीरता से नहीं लेता, क्योंकि सारा देश संघ और भाजपा की देशभक्ति से परिचित है, हमें दिग्विजय सिंह के प्रमाण की ज़रूरत नहीं है। दिग्विजय सिंह, ओसामा जी और हाफीज़ जी कहने वाले नेता हैं। वह विवादित बयान इसलिए देते हैं, ताकि सुर्खियों में बने रहें। वे और उनके नेता जो पाकिस्तान चाहता है, वो बोलते हैं। ऐसे नेता को मैं गंभीरता से नहीं लेता और न देश लेता है।”
वेटिकन में बिजली जाने से पोप फ्रांसिस 25 मिनट तक लिफ्ट में फँसे रहे। स्थिति ऐसी हो गई कि उन्हें लिफ्ट से निकालने के लिए दमकलकर्मियों को बुलाना पड़ा। लिफ्ट से सकुशल निकाले जाने के बाद ईसाईयों के सर्वोच्च धर्मगुरु ने दमकलकर्मियों का आभार जताया। रविवार (सितम्बर 1, 2019) को सेंट पीटर्स स्क्वायर में अपने साप्ताहिक भाषण के दौरान पॉप ने आपबीती सुनाई।
पोप ने बिल्डिंग के अन्य लोगों को भी दमकलकर्मियों का धन्यवाद करने को कहा। बताया जा रहा है कि बजली जाने की वजह से लिफ्ट 25 मिनट तक रुकी रही। इस कारण पोप भी कार्यक्रम में देरी से पहुँचे। मुस्कुराते हुए पोप ने वहाँ मौजूद लोगों से देरी के लिए माफ़ी माँगी।
कॉन्ग्रेस नेता सलमान निज़ामी ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर एक बार फिर से पार्टी लाइन से हटकर बयान दिया है। जहाँ कॉन्ग्रेस आलाकमान, गुलाम नबी आज़ाद, अधीर रंजन चौधरी जैसे नेता मोदी सरकार को घेरने में लगे हैं, वहीं निज़ामी ने केंद्र को अप्रत्यक्ष रूप से क्लीन चिट देते हुए कश्मीर के ही स्थानीय नेतृत्व को कटघरे में खड़ा किया है। इस बार उनके निशाने पर पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती हैं।
लाशों का गिनाया हिसाब
निज़ामी ने केंद्र/राष्ट्रपति शासन और मुफ़्ती-अब्दुल्ला शासन के समय हुई बड़ी अशान्तियों में मारे गए लोगों की संख्या की तुलना की है। ट्विटर पर उन्होंने लिखा, “उमर अब्दुल्ला के समय फैली अशांति में 200 लोग मारे गए, महबूबा मुफ़्ती के समय फैली अशांति में 260 लोग मारे गए, 2019 की अशांति में शून्य मारे गए।”
निज़ामी आगे लिखते हैं, “स्थानीय नेता कश्मीर के असली शत्रु हैं, ताकत के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं। हमने अनुभव किया है, हमने झेला है। अब आत्मविवेचन का समय है।”
“पूरे हिंदुस्तान में किसी ने कश्मीरी मुस्लिमों को हाथ भी नहीं लगाया”
इसके पहले भी सलमान निज़ामी ने कश्मीरियों को आईना दिखाया था। जम्मू-कश्मीर से 370 के पर कुतरने और इसे कट्टरपंथियों के बीच जिहादी मानसिकता को बढ़ावा दे रहे लोगों द्वारा ‘हिन्दू सरकार की गुंडागर्दी’ के रूप में दिखाने की कोशिशों के बीच निज़ामी ने ट्वीट कर इस तथ्य की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित किया कि जहाँ बाकी पूरे देश में कश्मीरी मुस्लिम सुरक्षित हैं, वहीं खुद कश्मीर में 370 खत्म होने के बाद से दो बेग़ुनाह मुस्लिमों को जान से मारा जा चुका है।
Lets talk abt present- In last 22 days, Kashmir is undr Curfew. Pak sponsored Militants killed a Gujjar (Muslim), Stone pelters killed a Kashmiri (Muslim) driver.
Not a Single Kashmiri Muslim ws assaulted across India. Now, blame Hindus? NO. We are wrong hre. Accept the reality!
कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने मोदी सरकार पर निशाना साधने के लिए अपनी ही पार्टी के नेताओं के बयानों के खिलाफ़ जाकर बयान दिया। खुर्शीद ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके काम में अच्छाई ढूँढना भूसे के ढेर में सुई को ढूँढने जैसा है। इसके अलावा उन्होंने देश के हालातों पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस देश को लेकर बहुत चिंतित है।
खुर्शीद के इस बयान के साथ उल्लेखनीय है कि अभी बीते दिनों कॉन्ग्रेस के नामी नेता कहते नजर आए थे कि अगर प्रधानमत्री कुछ अच्छा करते हैं तो उनके काम की तारीफ़ होनी चाहिए। उनके प्रशासनिक मॉडल में सब कुछ खराब नहीं हो सकता। हमें उनके किए कार्यों को स्वीकार करना चाहिए, क्योंकि उनकी आलोचना करते रहने से कुछ नहीं होगा।
His remarks come days after Jairam Ramesh said Modi’s governance model is not a ‘complete negative story’ and demonising him is not going to help. Shashi Tharoor and Abhishek Manu Singhvi had also backed these remarks. https://t.co/Q2tOjuJ8k8
खुर्शीद के बयान और कॉन्ग्रेस के अन्य नेताओं बयानों को एक साथ पढ़कर स्पष्ट है एक ही पार्टी में मौजूद नेता अब मोदी के कार्यों पर टिप्पणी करने के कारण बँटने लगे हैं।
जहाँ जयराम रमेश, शशि थरूर और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे नेताओं का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यों के लिए उनकी तारीफ़ होनी चाहिए वहीं खुर्शीद का कहना है उनकी पार्टी के ये नेता सीधे-सीधे जवाब नहीं देना चाहते क्योंकि उससे और भी भ्रम पैदा होगा।
खुर्शीद के अनुसार रमेश और बाकी नेताओं ने वह कहा जो वो कहना चाहते थे। वो कहते हैं, “हम सभी चीजों को उसी हिसाब से देखते हैं जो हमारे लिए सही होता है जैसा कि मैंने कहा, मेरे लिए मोदी के काम में अच्छाई खोजना ‘भूसे के ढेर में सूई खोजने’ जैसा होगा। “
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुहर्रम और गणेश चतुर्थी को लेकर अहम ऐलान किए हैं। मुहर्रम के दौरान ताजिया निकाले जाने को लेकर सीएम लोगों को सलाह दी कि ताजिया को सड़कों पर घुमाने की बजाय अपने परिसर में ही रखें। मुख्यमंत्री ने प्रशासन को निर्देश दिया कि ताजिया की ऊँचाई भी तय की जाए। पुलिस व प्रशासन को कई निर्देश देते हुए योगी आदित्यनाथ ने सुरक्षा व्यवस्था के कड़े बंदोबस्त रखने और अफवाहों को रोकने के किए सख्त क़दम उठाने को कहा है।
सीएम योगी ने कहा कि गणेश चतुर्थी और मुहर्रम के दौरान कोई भी काम परंपरा के विरुद्ध नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पूजा-पंडालों व ताजिया रखे जाने वाले स्थानों के आसपास साफ़-सफाई रखने की बात कह स्वच्छता पर भी ज़ोर दिया। स्वच्छता, सुरक्षा और सुव्यवस्था का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने पुलिस को असामाजिक तत्वों पर कड़ी नज़र रखने का निर्देश दिया।
सीएम योगी ने पुलिस को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि त्योहारों के दौरान लोग अस्त्र-शस्त्रों का प्रयोग न करें। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिया कि खेतों व सड़कों पर कोई भी निराश्रित गाय घूमती न मिले, इसका ख़ास ध्यान रखा जाए। उन्होंने पुलिस को गो-तस्करी के ख़िलाफ़ कड़ाई से क़दम उठाने का निर्देश देते हुए अवैध बूचड़खानों पर कार्रवाई करने को कहा।
मुख्यमंत्री ने डीजे बजाने को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए। योगी आदित्यनाथ ने पुलिस इस बात का ध्यान रखने को कहा कि लोग सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप ही डीजे का इस्तेमाल करें। सीएम योगी ने सभी थानों की पुलिस को समय रहते शांति समिति की बैठक कर लेने का निर्देश दिया। उन्होंने पुलिस को लगातार पेट्रोलिंग करने को कहा।
पाकिस्तान में परमाणु ऊर्जा संयंत्र में काम करने वाले लगभग 200 चीनी नागरिकों को डेंगू हो गया है। शनिवार को आई एक मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। पाकिस्तान की समाचार वेबसाइट डेली जंग के अनुसार, कराची शहर के हॉक्स बे के तटीय क्षेत्र के पास परमाणु ऊर्जा संयंत्र में काम कर रहे 200 से अधिक चीनी लोग डेंगू वायरस के शिकार हो गए।
सिंध प्रांत के स्वास्थ्य मंत्री अज़रा फजल का हवाला देते हुए, रिपोर्ट में कहा गया है कि परमाणु ऊर्जा संयंत्र में काम कर रहे लगभग 200 चीनी डेंगू वायरल संक्रमण से पीड़ित हैं। वायरस से प्रभावित सभी व्यक्तियों का इलाज चल रहा है और वो फिलहाल खतरे से बाहर हैं।
एक आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल सिंध प्रांत में डेंगू की वजह से 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1200 लोगों को जाँच में डेंगू होने की पुष्टी हुई है। इसके अलावा सिंध प्रांत में घातक टिक-जनित वायरल कॉन्गो बुखार भी फैला हुआ है, जिसमें अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है।
डेंगू बरसात के मौसम और उसके फौरन बाद के महीनों, यानी जुलाई से अक्टूबर में सबसे ज्यादा फैलता है, क्योंकि इस मौसम में मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ होती हैं।
भारत से चल रहे तनाव के बावजूद पाकिस्तान कुलभूषण जाधव को काउंसलर एक्सेस देने को मज़बूर हो गया है। पाकिस्तान ने निर्णय लिया है कि जाधव को वियना संधि के तहत काउंसलर एक्सेस दी जाएगी। बता दें कि इससे पहले पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने भारत द्वारा काउंसलर एक्सेस की तमाम माँगों को खारिज करते हुए जाधव को मौत की सज़ा सुना दी थी। इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय न्यायलय में पाकिस्तान को तगड़ा झटका लगा और उसे जाधव को काउंसलर एक्सेस देने को कहा गया।
पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने रॉ एजेंट और भारतीय जासूस बताते हुए आतंकवादी होने तक का आरोप लगाया। हालाँकि, यहाँ स्पष्ट कर देना ज़रूरी है कि पाकिस्तान ने अवैध रूप से जाधव का अपहरण किया और ग़लत चार्ज फ्रेम किए। कुलभूषण जाधव को सोमवार (सितम्बर 2, 2019) को काउंसलर एक्सेस मुहैया कराया जाएगा। ये रहा पाक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल के ट्वीट्स:
Consular access for Indian spy Commander Kulbhushan Jadhav, a serving Indian naval officer and RAW operative, is being provided on Monday 2 September 2019, in line with Vienna Convention on Consular relations, ICJ judgement & the laws of Pakistan.
ऐसा पहली बार हो रहा है जब भारत को कुलभूषण जाधव को काउंसलर एक्सेस देने की अनुमति मिली है। इससे पजल पाकिस्तान हमेशा से भारत के रिक्वेस्ट को टालता रहा था। अंतरराष्ट्रीय न्यायलय ने पाकिस्तान को जाधव की सज़ा पर पुनर्विचार करने का भी आदेश दिया था। हालाँकि, पाक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि ऐसा पाकिस्तान के क़ानून के तहत किया जा रहा है। उन्होंने लिखा कि वियना संधि, अंतररष्ट्रीय न्यायलय के आदेश और पाकिस्तानी क़ानून के तहत ऐसा किया जा रहा है।
पाकिस्तान को इस बात का भी जवाब देना चाहिए कि पाकिस्तान का यह क़ानून इससे पहले कहाँ था? बैकफुट पर आने और अंतरराष्ट्रीय न्यायलय में किरकिरी होने से पहले ऐसा क्यों नहीं किया गया?