भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने बुधवार (अगस्त 21, 2019) को रूसी समकक्ष निकोलाई पेत्रुशेव से मुलाकात की। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर बातचीत हुई। यह मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले महीने रूस के दौरे के मद्देनजर हुई। पीएम मोदी यहाँ 4-6 सितंबर को आयोजित होने वाले ईस्टर्न इकॉनोमिक फोरम (EEF) में हिस्सा लेंगे।
Longstanding position of India & Russia on the importance of bilateral consultations & mutual support for principles of sovereignty & territorial integrity & non-interference of 3rd parties was reiterated. Russia backs Indian position on the Kashmir issue. pic.twitter.com/aC6jWHMYaY
जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल-370 को निष्क्रीय करने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेश में विभाजित करने से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। इस मुद्दे को पाकिस्तान ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में उठा चुका है। हालाँकि, वहाँ चीन के अलावा कोई अन्य देश उसका साथ नहीं दे रहा है।
जबकि संयुक्त राष्ट्र में रूस ने कश्मीर मुद्दे पर भारत का समर्थन किया था। संयुक्त राष्ट्र में रूस ने कहा था कि यह भारत का आंतरिक मामला है, इसमें किसी देश को दखल नहीं देना चाहिए। ऐसे में NSA डोभाल की यह यात्रा काफी अहम मानी जा रही है।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों देशों के एनएसए के बीच क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत हुई। इस दौरान दोनों देशों के बीच आतंकी गतिविधियों के खिलाफ आपसी सहयोग को लेकर भी चर्चा हुई।
सीबीआई की चार टीम चिदंबरम के घर पर मौजूद हैं। वहीं ईडी की भी 2 टीम पूर्व गृह मंत्री के घर पर मौजूद है। दिल्ली पुलिस के 20 जवान भी चिदंबरम के घर पर हैं। ईडी की टीम ने चिदंबरम से पूछताछ शुरू कर दी है। अगर चिदंबरम की आज गिरफ़्तारी होगी तो ईडी की टीम करेगी। क्योंकि सीबीआई की चार्जशीट में चिदंबरम का नाम नहीं है। खबर है कि सीबीआई के डायरेक्टर भी सीबीआई मुख्यालय पहुँच गए हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को उन्हें सीबीआई के स्पेशल जज अजय कुमार कुहार की अदालत में पी चिदंबरम को पेश किया जा सकता है।
CBI Sources: Congress leader P Chidambaram has been detained by Central Bureau of Investigation. pic.twitter.com/W3jQpMgLXQ
बता दें कि INX मीडिया केस में करीब 27 घंटे से फरार चल रहे पी चिदंबरम बुधवार रात अचानक से कॉन्ग्रेस मुख्यालय में मीडिया से रूबरू हुए। यहाँ उन्होंने अपनी बात रखी। इसके तुरंत बाद वहकपिल सिब्बल के साथ निकल गए। थोड़ी ही देर में सीबीआई की टीम भी वहाँ पहुँच गई। लेकिन यहाँ कॉन्ग्रेस नेताओं ने दरवाजे बंद कर लिए थे। बता दें कि प्रेस कांफ्रेंस में पी चिदंबरम के साथ कॉन्ग्रेस के 9 बड़े नेता मौजूद रहे।
#WATCH Congress leader P Chidambaram at AICC HQ says, “In INX Media case, I’ve not been accused of any offence nor any one else incl any member of my family. There is no charge sheet filed by either ED or CBI before a competent court.” pic.twitter.com/sIVltpVDIT
इसके बाद जैसे ही वह अपने घर पहुँचे, दिल्ली के जोरबाग स्थित पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के घर पर जमकर ड्रामा शुरू हो गया। सीबीआई की टीम भी जब जोरबाग पहुँची तो वहाँ सीबीआई अधिकारियों को अंदर नहीं जाने दिया गया। यहाँ भी गेट बंद कर दिया गया। इसके बाद सीबीआई की टीम चिदंबरम के घर की दीवार फाँदकर चिदंबरम के घर के अंदर पहुँची। थोड़ी ही देर में ED की टीम भी पहुँच चुकी है। चिदंबरम के साथ इस वक्त उनके घर पर कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी मौजूद हैं।
#WATCH Delhi: A Central Bureau of Investigation (CBI) official jumps the gate of P Chidambaram’s residence to get inside. CBI has issued a Look-Out Notice against him. pic.twitter.com/WonEnoAgR4
बता दें दिल्ली हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत अर्जी खारिज होने के बाद से पी चिदंबरम का पता नहीं चल रहा था। सीबीआई और ईडी की टीमें उन्हें गिरफ्तार करने के लिए कई बार उनके आवास का चक्कर लगा रही थीं, पर वे नहीं मिले।
चिदंबरम ने मीडिया से कहा कि इस मामले में उनके और परिवार के खिलाफ कोई चार्जशीट नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की बुनियाद आजादी है, चिदंबरम ने कहा कि अगर उन्हें जिंदगी और आजादी के बीच में चुनने कहा जाए तो वे आजादी चुनेंगे।
Karti Chidambaram on P Chidambaram apprehended by probe agencies: This is a totally politically motivated witchhunt. pic.twitter.com/il6hSIAd7E
पी चिदंबरम की गिरफ्तारी के बाद उनके बेटे कार्ति चिदंबरम ने कहा कि इस केस के कई साल बीतने के बाद भी सीबीआई के पास चार्जशीट में उनके पिता का नाम नहीं है। कार्ति ने कहा कि देश के कई बड़े मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए सरकार ने ये कदम उठाया है।
देश में एक ऐसा वर्ग है जो राष्ट्रवाद और भारतीय इतिहास से जुड़ी हर दूसरी गतिविधि पर प्रलाप और प्रपंच का सिलसिला शुरू कर देता है। इस बार लिबरल्स के प्रलाप का विषय है दिल्ली यूनिवर्सिटी में भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस और वीर सावरकर की मूर्ती की स्थापना। दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ चुनाव से पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने नॉर्थ कैंपस स्थित आर्ट फैकल्टी के गेट पर बिना इजाजत वीर सावरकर, सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह की प्रतिमा लगा दी।
इस प्रकरण के बाद सोशल मीडिया पर लिबरल्स का एक वर्ग तुरंत सक्रीय हो गया और उन्होंने भगत सिंह, बोस और वीर सावरकर की इस प्रतिमा का विरोध करना शुरू कर दिया। इस प्रपंच में कॉन्ग्रेस पार्टी भी शामिल थी और इन सबका मकसद था सिर्फ ट्विटर पर #gaddarsavarkar हैशटैग ट्रेंड कराया जाए।
By flouting DU’s rules, ABVP has reiterated their disregard for India’s institutions. Not only have they disrespected the Uni but by placing Savarkar in line with Bhagat Singh & Subhas Chandra Bose, they’ve disrespected the very freedom fighters in whose name they seek votes. https://t.co/sX2hVUfSYo
यह कॉन्ग्रेस का दुर्भाग्य ही हो सकता है कि एक ओर जहाँ कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता सर से पाँव तक घोटालों में पकड़े जा रहे हैं वहीं उनकी पार्टी का एकमात्र लक्ष्य आज सिर्फ सोशल मीडिया पर हैशटैग ट्रेंड करवाने तक सीमित हो चुका है। शायद अब कॉन्ग्रेस इन्हीं छोटी-छोटी खुशियों में अपना मनोबल तलाशने लगी है। स्वतन्त्रता संग्राम के जिन नायकों पर देश हमेशा गौरवान्वित रहा है, कॉन्ग्रेस अक्सर उनका अपमान करती आई है। और यह विरोध भी उसी का एक उदाहरण है।
इसी क्रम में मीडिया का एक ख़ास लिबरल वर्ग भी इस प्रतिमा के विरोध में कॉन्ग्रेस के साथ कदम से कदम मिलाकर चलता रहा।
Gaddar Savarkar was implicated in Mahatma Gandhi’s assassination. Gaddar Savarkar opposed Quit India movement. Gaddar Savarkar wrote mercy petitions, pledging allegiance to the British to be released from prison. 1/2
Savarkar’s bust placed in DU. NSUI doesn’t even squeak against it. I suggest @INCIndia to sack every single office bearer of their student union. What’s the point of @priyankagandhi ji & @RahulGandhi ji to speak so vehemently against the Sangh but have a party full of Sanghis?
#Savarkar was a terrorist and a coward ‘Gaddar’ who sided with the British regime. It’s despicable that his bust has been placed in #DelhiUniversity. The university administration should either remove the bust or face the wrath of the students. It’s a warning from a patriot!
Such Morons forget History that Smt. Indira Gandhi had issued Postal Ticket on #VeerSavarkar & gave money for Savarkar Smarak & recognize his contribution for Freedom Struggle. Both Bhagat Singh & #Netaji Bose were inspired by him.
➡Issued a commemorative stamp in Savarkar’s honour in 1970 ➡Gave private donation to his memorial fund ➡Hailed Savarkar’s “daring defiance of the British government” ➡Commissioned a Films Division documentary on him. https://t.co/N2X3IwSrp1
एबीवीपी नेतृत्व वाले छात्रसंघ के अध्यक्ष शक्ति सिंह का कहना है कि उन्होंने कई बार यूनिवर्सिटी प्रशासन से प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति माँगने के लिए संपर्क किया लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं आया। और उनकी चुप्पी की वजह से ही छात्रों ने यह कदम उठाया है।
DUSU अध्यक्ष शक्ति सिंह का कहना है कि डीयू कैंपस में एक तहखाना है, जहाँ भगत सिंह को ट्रायल के दौरान रखा गया था। छात्रों ने माँग की थी कि या तो भगत सिंह की प्रतिमा लगाई जाए या तहखाने को सार्वजनिक किया जाए, लेकिन डीयू प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बयान दिया है कि हिंदुस्तान अब सिंधु जल समझौते के तहत अपने हिस्से का पानी पाकिस्तान को और नहीं लेने देगा। बुधवार को ANI से बात करते हुए शेखावत ने कहा, “हिंदुस्तान के हिस्से के पानी में से काफी ज्यादा पाकिस्तान को चला जाता है। इनमें से कई नदियाँ रावी, व्यास और सतलज तंत्र की उपनदियाँ हैं, और इनके कैचमेंट एरिया (हौज़, जलग्रहण क्षेत्रों) में से पानी उस तरफ (पाकिस्तान को ) चला जाता है। हम इस पर तेज़ी से काम कर रहे हैं कि कैसे हमारे हिस्से का पानी जो पाकिस्तान में चला जाता है, उसे घुमा कर अपने किसानों, उद्योगों और लोगों के प्रयोग के लिए इस्तेमाल किया जा सके।”
उन्होंने इस योजना की तकनीकी और जलशास्त्रीय (हाइड्रोलॉजिकल) अनुकूलता पर शोध शुरू करने की भी बात कही। उनके अनुसार उन्होंने इस विषय पर अध्ययन जल्दी खत्म करने का निर्देश दिया है, ताकि योजना को अमली जामा पहनाया जा सके।
शेखावत की बातें 370 हटाने के बाद से पाकिस्तान पर लगातार कड़े होते जा रहे मोदी सरकार के रुख में एक और कड़ी हैं। और यह कोई नई योजना भी नहीं है। मई में तत्कालीन जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ने भी पाकिस्तान द्वारा जिहादियों को समर्थन में कमी न होने के चलते मोदी सरकार द्वारा पानी का बहाव रोकने पर विचार करने की बात कही थी।
1960 में नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान के बीच हुए सिंधु जल समझौते में हिंदुस्तान को रावी, व्यास और सतलज के पानी का पूरा अधिकार मिला था, जिसके बदले हमें पाकिस्तान को सिंधु, चेनाब और झेलम के पानी पर पूरा हक़ देना होता है।
ये हैरानी की बात है कि देश में इतना कुछ चल रहा है और इस सब के बीच एक ऐसे व्यक्ति का नाम कहीं गुम होता जा रहा है जो हर आम आदमी की पहली पसंद है। भले ही, पहली पसंद होने के कारण सबके व्यक्तिगत हो सकते हैं। वो सज्जन हैं दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी अध्यक्ष अरविन्द केजरीवाल। केजरीवाल ने एक ऐसे महत्वपूर्ण समय पर सीन में एंट्री की है, जब किसी को भी उनकी उम्मीद नहीं थी और एक ही झटके में फिल्म सुपरहिट हो गई।
दरअसल, पूरा मामला 2 दिन से कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम को लेकर है। चिदंबरम कल शाम को अचानक तब लापता हो गए जब सीबीआई और ED की टीम उनके घर जाँच के लिए पहुँची। चिदंबरम को ढूँढ निकालने की शर्त आपस में लगी ही थी कि एक फोन कॉल ने सब साफ़ कर दिया।
CBI के जाँच दल को एक अनजान नंबर से कॉल आया और उधर से एक बेहद करुण आवाज ये कहते हुए सुनाई दी- “हेलो, मैं अरविन्द केजरीवाल बोल रहा हूँ। फ़ोन मत काटना जी।”
इतना सुनते ही एक बार को तो सीबीआई को सन्देह हुआ कि शायद केजरीवाल उन्हें दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री मरहूम शीला दीक्षित के घोटालों की 370 पेजों की ऐतिहासिक फ़ाइल वाला सबूत देने के लिए कॉल कर रहे हों। लेकिन तुरंत केजरीवाल ने सस्पेंस को तोड़ते हुए पहली फुर्सत में बता दिया कि उन्हें पता है पी चिदंबरम कहाँ हैं।
अरविन्द केजरीवाल ने बताया कि जो 15 लाख CCTV कैमरे उन्होंने अपने वादे के मुताबिक़ दिल्ली की गली-गली और चप्पे-चप्पे में लगा रखे हैं, उनमें उन्होंने चिदंबरम को भागते हुए पकड़ लिया है।
दिल्ली की सड़कों पर भागते हुए पी चिदंबरम की CCTV फुटेज-
हालाँकि, सॉल्ट न्यूज़ ने इस इस CCTV फुटेज का फैक्ट चेक करते हुए पाया है कि केजरीवाल द्वारा सौंपा गया यह वीडियो पी चिदंबरम का ही है, लेकिन यह तब लिया गया था जब वो ऑनलाइन फ़ूड डिलीवरी कम्पनी जोमैटो से खाना मँगवाने पर मुस्लिम की जगह उन्हें एक हिन्दू युवक द्वारा खाना डिलीवर करवाया गया। सॉल्ट न्यूज़ ने इस वीडियो का भांडाफोड़ करते हुए स्पष्ट किया कि इस वीडियो में चिदंबरम हिन्दू युवक द्वारा खाना डिलीवर करवाए जाने पर अपना विरोध व्यक्त करने के लिए खान मार्केट की ओर दौड़ रहे हैं।
केजरीवाल ने यह सबूत केंद्र सरकार को बिना किसी शर्त के सौंपने का भी वायदा किया है। केजरीवाल का मानना है कि जिस तरह से वो चुनाव के दौरान कॉन्ग्रेस से लगातार गठबंधन की भीख माँगते रहे फिर भी उन्हें इसके लिए तड़पाया गया था, इसी क्रोध में वो कॉन्ग्रेस की ईंट से ईंट बजाने की प्रतिज्ञा ले चुके हैं। हालाँकि, एक समय अरविन्द केजरीवाल के करीबी रह चुके कवि कुमार विस्वास का कहना है कि केजरीवाल ने यह सबूत पहले उन्हें सौंपने की बात कही थी।
इसके बाद यह जानकारी भी सीबीआई के हाथ लगी है कि जब भी पी चिदंबरम केंद्र सरकार से सवाल करते थे कि आखिर नीरव मोदी और विजय माल्या देश से कैसे भाग गए? तो वास्तव में वो अपने लिए ट्रिक का जुगाड़ कर रहे होते थे और उनकी प्रैक्टिस अपने घर पर एक्सपर्ट्स के निर्देशन पर किया करते थे।
केजरीवाल ने यह CCTV फुटेज सीबीआई को सौंपकर एक बार पूरी की पूरी अटेंशन फिर से वापस हथिया ली है जिसके लिए उनकी तारीफ आम आदमी पार्टी कार्यालय से लेकर ध्रुव राठी कार्यालय तक हो रही है। और ख़ास बात यह रही कि इस पूरे प्रकरण में केजरीवाल को एक भी रैपट नहीं पड़ा। अपने वादे के अनुसार तय समय से पूर्व ही 15 लाख CCTV से दिल्ली में कैमरा का जाल बिछा देने के बाद अब केजरीवाल का अगला लक्ष्य दिल्ली को लंदन बना देने का है, ताकि पी चिदंबरम को यह विश्वास रहे कि वो भी भागकर विदेश ही पहुँचे हुए हैं।
मद्रास हाई कोर्ट में मंगलवार (21 अगस्त) को एक कस्टडी की लड़ाई और बच्ची पर पिता द्वारा यौन शोषण के मुकदमे ने ऐसा मोड़ लिया कि अदालत के जज को कहना पड़ गया, “इस मुकदमे ने अदालत के ज़मीर को हिला कर रख दिया है…” पता चला कि बलात्कार का आरोपित पिता न केवल निर्दोष है, बल्कि उस पर उसकी पत्नी, उसकी बेटी की माँ ने इसलिए ऐसा घिनौना इलज़ाम लगाया क्योंकि दम्पत्ति की दो बेटियों में से कोई भी मॉं के साथ नहीं रहना चाहती थी। अदालत ने माँ के खिलाफ पुलिस को तुरंत पॉक्सो एक्ट के तहत झूठी शिकायत करने पर होने वाली कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया है। जस्टिस आनंद वेंकटेश ने उम्मीद भी जताई कि यह निर्णय पॉक्सो एक्ट का दुरुपयोग करने की कोशिश करने वालों के लिए के नज़ीर होगा।
11 साल की बच्ची को बलात्कार से प्रेग्ननेंट करने का आरोप
2018 में पत्नी ने पति पर आरोप लगाया कि पति ने 2003 में विवाहित हुए दम्पत्ति की 11 साल की बेटी के साथ बलात्कार किया और उसे गर्भवती कर दिया। आगे पत्नी ने दावा यह भी किया कि उसने (पत्नी ने) वह गर्भ किसी ‘नेटिव मेडिसिन’ (देसी इलाज) से गिरा दिया। उसकी शिकायत के आधार पर पति के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
लेकिन उच्च न्यायालय द्वारा ‘पीड़िता’ बच्ची से पूछताछ के बाद आरोपित पिता को अग्रिम जमानत मिल गई। बच्ची ने पिता के द्वारा किसी भी प्रकार के अश्लील या यौन संबंध से इंकार किया। इसके बाद पिता ने अपने खिलाफ मुकदमे को पत्नी द्वारा निजी दुश्मनी से प्रेरित बताते हुए अदालत से मुकदमे को निरस्त करने की अपील की। मामले की और अधिक जाँच के पश्चात न्यायालय ने पिता की अपील स्वीकार कर ली।
‘दोनों बच्चियाँ पिता के साथ ही रहना चाहतीं हैं’
अपने आदेश में अदालत ने लिखा कि उसके (अदालत के) और 11-वर्षीया बच्ची के बीच हुई बात के आधार पर वह इस निष्कर्ष पर पहुँची है कि यह झूठा मुकदमा माँ ने उस बच्ची और उसकी डेढ़-वर्षीया बहन की कस्टडी के लिए दायर किया है। बच्ची ने अदालत के सामने किसी भी प्रकार के ‘देसी इलाज’ या किसी अस्पताल में ले जाकर गर्भपात किए जाने से भी इंकार किया है। और-तो-और, बच्ची ने जज को बताया कि वह और उसकी बहन, दोनों ही अपने पिता के साथ जाना चाहतीं हैं।
‘और भी हैं झूठे मुकदमे’
इसके आगे जस्टिस वेंकटेश ने जो कहा, वह इस केस विशेष से भी महत्वपूर्ण, इस पूरे प्रकरण का सबसे ज़्यादा गौर करने और याद रखने लायक वाक्य है। “कई बार ऐसा हुआ है कि अदालत का ध्यान इससे मिलते-जुलते मामलों की तरफ आकर्षित किया गया है, कि अकसर झूठा मुकदमा किया जाता है मानों पति ने पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध किया हो; और इस अदालत को यह सूचित किया गया है कि ऐसी सस्ती चालें फैमिली कोर्ट के मुकदमों में अपनाई जातीं हैं, ताकि पतियों को दबाव डाल कर लाइन पर लाया जा सके। (इस मामले को देखने के) पहले अदालत यह मानने को तैयार नहीं थी कि ऐसा भी हो सकता है (कि कोई माँ अपनी बेटी के बलात्कार का झूठा आरोप बच्ची के पिता पर ही लगा दे), और यह मुकदमा अदालत की आँखें खोल देने वाला है। इससे अदालत को यह समझ में आया कि पॉक्सो एक्ट का किस तरह दुरुपयोग हो सकता है।”
द न्यूज़ मिनट की रिपोर्ट के अनुसार अंत में जज ने घोषित किया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ मुकदमा एक मिनट और भी जारी नहीं रह सकता, और पुलिस को FIR तत्काल निरस्त करने का आदेश दिया। साथ ही जोड़ा कि झूठी शिकायत करने वाली महिला भी बचनी नहीं चाहिए। अदालत ने हिदायत दी कि उसे पति के खिलाफ झूठी शिकायत, वह भी बेटी के नाम पर, करने का परिणाम भुगतवाया ही जाना चाहिए।
“पुलिस को आदेश दिया जाता है कि द्वितीय प्रतिवादी (महिला) के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धारा 22 के तहत तुरंत मुकदमा झूठी शिकायत करने का दर्ज किया जाए, और उसके खिलाफ कानून के हिसाब से कार्रवाई की जाए। यह मुकदमा अपने निहित स्वार्थों के लिए इस कानून के प्रावधानों का दुरुपयोग करने वालों के लिए नज़ीर होना चाहिए।”
जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने वाले अनुच्छेद-370 के निरस्त होने के 15 दिन बाद बुधवार (अगस्त 21, 2019) को घाटी में कई सारे मदरसों को फिर से चालू कर दिया गया। इससे पहले राज्य के कई इलाकों में स्कूल-कॉलेजों को खोल दिया गया था। प्रशासन ने बुधवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर में दिन के समय में कोई पाबंदी नहीं रहेगी। साथ ही राज्य में माध्यमिक शैक्षणिक संस्थान भी खुले रहेंगे। प्रशासन ने कश्मीर के ज्यादातर शहरी क्षेत्र से पाबंदी हटा ली हैं। जम्मू में मदरसों को भी फिर से चालू कर दिया गया है।
वहीं, जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के निष्क्रिय होने के बाद राज्य के बारामूला में मंगलवार (अगस्त 20, 2019) देर रात आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ हुई। मुठभेड़ में एक आतंकी मारा गया। हालाँकि, इस ऑपरेशन के दौरान एक एसपीओ (स्पेशल पुलिस ऑफिसर) को भी अपनी जान गँवानी पड़ी। वैसे, आर्टिकल 370 के जम्मू-कश्मीर में निष्प्रभावी होने के बाद एनकाउंटर का यह पहला मामला था।
बता दें कि, राज्य प्रशासन ने प्रदेश के सभी स्कूलों-कॉलेजों और सरकारी दफ्तरों को पहले ही खोलने के निर्देश जारी किए थे। प्रशासन ने बताया था कि कुल 190 स्कूलों को खोला जाएगा। गौरतलब है कि, 5 अगस्त को राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा हटाए जाने की घोषणा करने से पहले ही सुरक्षा के मद्देनज़र प्रशासन ने कश्मीर में कर्फ्यू लगा दिया था। इसके बाद से ही स्कूल-कॉलेजों को बंद कर दिया गया था।
आईएनएक्स मीडिया केस (INX Media Case) में कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम को सुप्रीम कोर्ट से आज बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज होने के बाद आज जस्टिस रमन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच में सुनवाई हुई। केस में पी चिदंबरम की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम जमानत की अर्जी लगाई गई थी। लेकिन अदालत ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। बुधवार सुबह जस्टिस रमन्ना की कोर्ट में ये मामला गया। लेकिन उन्होंने इस केस को चीफ जस्टिस की कोर्ट में भेज दिया था।
चिदंबरम की अर्जी में कुछ खामियों की वजह से उसमें सुधार किया गया और एक बार फिर जस्टिस रमन्ना की अदालत में उनके वकीलों ने दलील दी। लेकिन दूसरी बार भी जस्टिस रमन्ना ने सुनवाई से इनकार कर दिया।
पी चिदंबरम पर प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई के कठोर रुख के बाद से कॉन्ग्रेस नेता पर लगातार गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई है। यही वजह है कि चिदंबरम कल शाम से ही गायब हैं और उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी कर दिया गया ताकि वो देश छोड़कर भाग न सकें। चिदंबरम के परिवार का और कानूनी मामलों का रिश्ता नया नहीं है।
एक नजर कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम से जुड़े कानूनी विवादों के इतिहास पर-
एयरसेल मैक्सिस मामलों में पूर्व केंद्रीय मंत्री चिदंबरम को पहली बार पिछले साल जुलाई में अंतरिम राहत मिली थी। इसके बाद समय-समय पर उनकी अंतरिम राहत की अवधि बढ़ाई जाती रही है।
पिछले साल 19 जुलाई को सीबीआई द्वारा दाखिल आरोप पत्र में चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम के नाम थे।
सीबीआई जाँच कर रही है कि UPA-1 के दौरान वर्ष 2006 में वित्त मंत्री के पद पर रहते हुए चिदंबरम ने एक विदेशी कंपनी को एफआईपीबी मंजूरी कैसे दे दी? क्योंकि ऐसा करने का अधिकार केवल आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) के पास ही होता है।
पी चिदंबरम के अलावा उनके बेटे कार्ति चिदंबरम के खिलाफ भी ये आरोप हैं कि उन्होंने आईएनएक्स मीडिया के खिलाफ संभावित जाँच को रुकवाने के लिए 10 लाख डॉलर की माँग की थी। इस मामले में कार्ति चिदंबरम को बीते साल 28 फरवरी को गिरफ्तार भी किया गया था।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) एयरसेल मैक्सिस प्रकरण में धनशोधन के एक अलग मामले की जाँच कर रहा है। इस मामले में एजेंसी चिदंबरम से पूछताछ कर चुकी है और उनकी अग्रिम जमानत याचिका लंबित है।
चिदंबरम 3,500 करोड़ रुपए के एयरसेल मैक्सिस सौदे तथा 305 करोड़ रुपए के आईएनएस मीडिया मामले की जाँच कर रही एजेंसियों के दायरे में हैं।
दोनों ही उपक्रमों को एफआईपीबी से मंजूरी UPA सरकार के पहले कार्यकाल में दी गई थी और तब चिदंबरम वित्त मंत्री थे।
आईएनएक्स मीडिया मामले में सीबीआई (CBI) ने मई 15, 2017 में FIR दर्ज की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि 2007 में जब चिदंबरम वित्त मंत्री थे तब 305 करोड़ रुपए की विदेशी धनराशि प्राप्त करने के लिए मीडिया समूह को दी गई विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) मंजूरी में अनियमितताएँ बरती गईं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस संबंध में 2018 में धनशोधन का एक मामला दर्ज किया।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चिदंबरम से एयर इंडिया से जुड़े एक खरीद मामले की जाँच में सहयोग करने को कहा था। इस मामले में चिदंबरम के पूर्व मंत्रिमंडलीय सहयोगी प्रफुल्ल पटेल से भी जाँच एजेंसी ने पूछताछ की थी।
पी चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम के खिलाफ सीबीआई (CBI) सारदा चिटफंड घोटाले में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। उन पर 1.4 करोड़ रुपए की कथित रिश्वत लेने का आरोप है। इस साल फरवरी में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उन्हें मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी थी।
इसके अलावा, मद्रास HC ने पी चिदंबरम, उनकी पत्नी नलिनी, बेटे कार्ति, कार्ति की पत्नी श्रीनिधि कार्ति चिदंबरम पर काला धन (अज्ञात विदेशी आय एवं परिसंपत्ति) तथा कर अधिनियम, 2015 के अधिरोपण के तहत मुकदमा चलाने के लिए पिछले साल नवंबर में आयकर विभाग द्वारा जारी मंजूरी संबंधी आदेश रद्द कर दिए थे।
उच्च न्यायालय के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई। फिलहाल यह मामला लंबित है।
इसके अलावा पी चिदंबरम के खिलाफ इशरत जहाँ मामले से जुड़े एक हलफनामे में कथित छेड़छाड़ करने से संबंधित शिकायत दिल्ली पुलिस में लंबित है। आरोप है कि जब हलफनामे में छेड़छाड़ की गई थी तब चिदंबरम गृह मंत्री थे।
गिरफ्तारी के डर से भागे-भागे फिर रहे वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी पूर्व केन्द्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम और मौजूदा केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच का फर्क जानना हो तो आपको वक्त को नौ साल पीछे ले जाना पड़ेगा। वह रविवार (जुलाई 25, 2010) का दिन था। सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में सीबीआई को गुजरात के गृह मंत्री की तलाश थी। उस व्यक्ति की जो राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद सरकार में सबसे ज्यादा रसूख रखने वाला शख्स माना जाता था। जिसके पास एक साथ 12 मंत्रालयों की जिम्मेदारी थी। ये शख्स थे अमित शाह।
सीबीआई को गुजरात पुलिस के आतंकरोधी दस्ते द्वारा नवंबर 2005 में सोहराबुद्दीन शेख को एक एनकाउंटर में मार गिराने के मामले में उनकी तलाश थी। अमित शाह उस दिन सबसे पहले गुजरात भाजपा के दफ्तर पहुँचे। उससे एक दिन पहले उन्होंने अपने ख़िलाफ़ चार्जशीट फाइल होने के बाद मोदी मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। वहाँ उन्होंने घोषणा किया कि वे भाजपा दफ्तर से सीधा सीबीआई दफ्तर जाकर आत्मसमर्पण करेंगे।
उन्होंने अपने ख़िलाफ़ सारे आरोपों को बनावटी और कॉन्ग्रेस की साज़िश करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस सोहराबुद्दीन एनकाउंटर के बहाने गुजरात की भाजपा सरकार का एनकाउंटर करना चाह रही है। साथ ही उन्होंने पूरे भरोसे के साथ कहा कि न्यायपालिका में यह मामला नहीं टिकेगा। आप भी उस प्रेस कॉन्फ्रेंस को देखिए, जिसमें अमित शाह ने आत्मसमर्पण से पहले अपनी बात रखी थी:
जुलाई 2010 में आत्मसमर्पण से पहले अमित शाह ने जो बातें कहीं, वो आज भी सुलगते हुए सवाल हैं
इसके बाद अमित शाह सीधे सीबीआई दफ़्तर पहुँचे, जहाँ से उन्हें मजिस्ट्रेट के पास पेश किया गया और फिर जेल भेज दिया गया। आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या देश के गृह मंत्री रह चुके पी चिदंबरम ऐसा करने का साहस रखते हैं? क्या वो मीडिया या सरकारी एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत होकर अपना पक्ष रखेंगे? या फिर वो इसीलिए भाग रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि उनके पास अपने बचाव में कहने को कुछ नहीं है? अमित शाह के पास था तो अपनी बात कह वे सीधे सीबीआईके पास पहुँच गए।
अमित शाह के ख़िलाफ़ क्या खेल रचा गया था, इसकी एक जरा सी बानगी देखिए। जुलाई 22, 2010 को अमित शाह को सीबीआई का समन मिला की वो दोपहर 1 बजे एजेंसी के समक्ष प्रस्तुत हों। यह समन उन्हें सिर्फ़ 2 घंटे पहले यानी 11 बजे दिया गया था। इसके बाद उनसे कहा गया कि वह 23 जुलाई को एजेंसी के सामने पेश हों। उसी दिन शाम 4 बजे चार्जशीट दाखिल कर दिया गया और उसके अगले दिन अमित शाह ने इस्तीफा दे दिया। लेकिन, इन सारे प्रकरण में अमित शाह की नाराज़गी केवल इस बात को लेकर थी कि एक तो उन्हें जवाब देने का समय नहीं दिया गया और फिर उनकी बात सुने बिना चार्जशीट दाखिल कर दिया गया।
चिदंबरम के मामले में ऐसा नहीं था। उन्हें अदालत से कई बार राहत मिली। अगर उनके ख़िलाफ़ चल रहे आईएनएक्स मीडिया केस और एयरसेल-मैक्सिस केस को मिला दें तो पाएँगे कई महीनों से अदालत से उन्हें गिरफ़्तारी से राहत मिल रही थी। बचाव के लिए उन्हें भरपूर समय मिला। अमित शाह के मामले में ऐसा नहीं था। उनका सवाल था कि किसी व्यक्ति को दोपहर 1 बजे पूछताछ के लिए बुलाया जाए और फिर 3 घंटे बाद ही 4 बजे हजारों पेज की चार्जशीट पेश कर दी जाए, तो उसका क्या मतलब निकाला जाए?
2010 में CBI ने सोहराबुद्दीन केस में अमित शाह को 3 महीने के लिए जेल में डाला और फिर 2 साल गुजरात में नहीं घुसने दिया. तब चिदंबरम गृहमंत्री थे…
अब अमित शाह गृहमंत्री हैं और चिदंबरम जेल जाते दिख रहे हैं…
अमित शाह के कहने का अर्थ यह था कि चार्जशीट पहले से तैयार कर के रखी गई थी, क्योंकि हजारों पेज की चार्जशीट 3 घंटे में तो नहीं ही तैयार की जा सकती है। चिदंबरम के पास कोई जवाब नहीं है? कोई दलील नहीं है? तभी तो वे अपनी गाड़ी और ड्राइवर को छोड़ कर भाग खड़े हुए हैं। क़ानून के शिकंजे का ऐसा खौफ कि फोन भी स्विच ऑफ कर लिया। क्या चिदंबरम के पास आज 2010 वाले अमित शाह जैसी हिम्मत है, जिससे वह आत्मसमर्पण कर सकें?
चिदंबरम राष्ट्रीय नेता है, बड़े वकील हैं और केंद्र में कई मंत्रालय संभाल चुके हैं। उनकी तुलना में 2010 वाले अमित शाह कहीं नहीं ठहरते। उस समय शाह वह भले गुजरात के शक्तिशाली नेता थे, लेकिन थे तो राज्य के ही नेता न। क्या आपको पता है सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस का निष्कर्ष क्या निकला? दिसंबर 2014 में सीबीआई की विशेष अदालत ने अमित शाह को इस केस से बरी कर दिया। उनके ख़िलाफ़ कोई भी आरोप सही साबित नहीं हुए।
जस्टिस एमबी गोसावी ने कहा कि उनके ख़िलाफ़ पूरा का पूरा मामला गवाहों के बयानों पर आधारित है, जो अफवाहों की तरह लग रहे हैं। अर्थात, यह खोदा पहाड़ निकली चुहिया वाली बात हो गई। अमित शाह ने गिरफ़्तारी के बाद 3 महीने जेल की सज़ा भुगती। उन्हें गुजरात से तड़ीपार करने का निर्देश दिया गया। केस को गुजरात से बाहर मुंबई ट्रांसफर कर दिया गया। 2012 तक वह गुजरात से बाहर ही रहे।
.@smritiirani की प्रेस कॉन्फ्रेंस: ये बीते 8 वर्ष अमित शाह ने प्रताड़ना के दौर में गुजारे हैं, उनके परिवार को भी लांछन झेलने पड़े, कांग्रेस ने CBI का दुरुपयोग करके सोहराबुद्दीन केस में अमित शाह को फंसाने की कोशिश की लेकिन हम न्यायपालिका के शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने न्याय दिया pic.twitter.com/TwTKPdrYkZ
शाह अकेले नेता नहीं थे जिसे उस समय की यूपीए सरकार ने घेरने की कोशिश की थी। उस समय कई भाजपा नेताओं व हिंदूवादी संगठनों से जुड़े लोगों को इसी तरह पकड़-पकड़ कर परेशान किया गया था।
भारतीय इतिहास में शायद ही ऐसी कोई बानगी मिले जहाँ किसी मुख्यमंत्री से 9 घंटे लगातार बैठा कर पूछताछ की गई हो। मार्च 2010 में एसआईटी ने ऐसा किया था। यह सब कुछ चिदंबरम के गृह मंत्री रहते हुआ था। इस मामले में भी मोदी दोषी साबित नहीं हुए और सरकारी एजेंसियाँ कुछ भी साबित नहीं कर पाई।
आज समय बदल गया है। चिदंबरम भाग रहे हैं और अमित शाह गृह मंत्री हैं। बस अंतर इतना है कि इस बार मामला भ्रष्टाचार का है, बना-बनाया नहीं है। इसके ख़िलाफ़ कॉन्ग्रेस नेताओं के पास भी कोई तर्क नहीं हैं सिवाय यह कहने के कि ‘मोदी बदला ले रहा है’।
चिदंबरम देश के सबसे बड़े वकीलों में से एक हैं। उनके पास दशकों का राजनीतिक व प्रशासनिक अनुभव है। ऐसे में, आज अगर वो ‘फरार’ हैं तो सवाल उठने लाजिमी हैं। अगर उन्होंने कुछ ग़लत नहीं किया है तो वह भाग क्यों रहे हैं? उनके पक्ष में कपिल सिब्बल और सलमान ख़ुर्शीद जैसे वकीलों की लाइन लगी हुई है, जो कल से ही सुप्रीम कोर्ट में जमे हुए हैं और हर पैंतरा आजमा रहे हैं। अमित शाह के मामले में ऐसा नहीं था। अगर आप निर्दोष हैं तो आपके पास लोगों के सम्मुख आकर सच्चाई कहने की ताक़त होनी चाहिए। कानून का सामना करने की हिम्मत चाहिए।
जब व्यक्ति निर्दोष होता है और उसे पता होता है कि उसे फँसाया जा रहा है, तो उसके पास क़ानून का सामना करने की हिम्मत होती है। जैसे उस समय अमित शाह ने कहा था कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है और उनका आत्मविश्वास ही था कि उन्होंने कहा था कि न्यायपालिका में यह बना-बनाया हुआ मामला टिकेगा ही नहीं।
वैसे आपको बता दें कि राफेल-राफेल चिल्लाने वाले और कश्मीर पर मोदी सरकार को कोसने वाले चिदंबरम का भगोड़ो से पुराना नाता रहा है। मार्च 2013 में माल्या ने चिदंबरम को पत्र लिख कर माँग की थी कि उन्हें एसबीआई से एनओसी दिलाया जाए। एसबीआई उस बैंक समूह का नेतृत्व कर रहा था, जिन्होंने माल्या की एयरलाइन्स को लोन दिए थे। मार्च 2013 में विजय माल्या और पी चिदंबरम की मुलाक़ात भी हुई थी। यूपीए सरकार के अंतिम दिनों में पी चिदंबरम ने सोना के आयात को लेकर बनी पॉलिसी में अहम बदलाव किए, जिससे नीरव मोदी सहित 13 व्यापारियों को काफ़ी फायदा पहुँचा।
देश की जनता आज चिदंबरम से एक ही बात पूछना चाह रही है। उन्होंने कभी आईएनएक्स मीडिया को एफडीआई के लिए फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड से क्लियरेंस दिलाने के लिए पीटर और इन्द्राणी मुखर्जी से अपने बेटे के व्यापार में मदद करने को क्यों कहा? रिश्वत क्यों माँगी?
सीबीआई ने प्रणय रॉय, राधिका रॉय और NDTV के पूर्व सीईओ विक्रम चंद्रा पर मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में नई FIR दर्ज की है। इसके अलावा एजेंसी ने विक्रम चंद्रा के घर पर छापा मारकर तलाशी अभियान भी चला रखा है। आरोप है कि उन्होंने FDI के नियमों का उल्लंघन किया है।
CBI says its teams are conducting searches at the premises of Vikramaditya Chandra, CEO and director of M/S NDTV Ltd. Raid conducted after registration of a fresh FIR against NDTV promoters and Chandra in case of alleged money laundering.
ऑपइंडिया के पास मौजूद FIR की प्रति के अनुसार यह टैक्स चोरी का मामला है, और आयकर विभाग के कुछ अधिकारियों की भी इसमें मिलीभगत है। आगे आरोप यह भी है कि आरोपितों ने पैसा घुमाकर फ़र्ज़ी लेनदेन के ज़रिए भारत लाने के लिए ‘टैक्स-हेवन’ देशों में सब्सिडरी इकाईयाँ बनाईं। NDTV में अज्ञात लोकसेवकों (जनप्रतिनिधि, नौकरशाह और सरकारी कर्मचारी) के पैसे का निवेश होने की भी बात FIR में कही गई है।
FIR के अनुसार NDTV ने Network PLC (NNPLC) को लंदन में 30 नवंबर, 2006 को स्थापित किया। FIR के अनुसार “NNPLC ने मेसर्स जेफ्फ्रीज़ इंटरनेशनल के ज़रिए 100 मिलियन डॉलर की राशि मई 2007 में step-up coupon convertible bonds के ज़रिए इकठ्ठा की। जेफ्फ्रीज़ इंटरनेशनल को इस काम के लिए 55 लाख डॉलर का कमीशन मिला। इसके बाद NNPLC ने भारत में NDTV ग्रुप की कई कंपनियों NDTV Group viz. NDTV imagine Ltd., NDTV LifeStyle Limited, NDTV Emerging Market BV, NDTV Convergence Ltd. और NDTV Labs Limited के खाते में ₹193,98,44,3251 ट्रांसफर किए।”
हॉलैंड (नीदरलैंड्स) में NDTV पर एक दूसरी कंपनी NDTV lnternational Holding BV 10 अप्रैल 2008 को शुरू करने का भी आरोप है। इसका इस्तेमाल अमेरिका की कम्पनी General Electric (GE) की सब्सिडरी कंपनी NBCU से $15 करोड़ का फंड इकठ्ठा करने के लिया गया। इस राशि का निवेश NDTV International Holding में करके, आरोप है कि, NBCU ने NNPLC में 26% अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी खरीद ली। FIR में आगे आरोप है कि यह राशि मॉरीशस और लंदन में खोली गईं NDTV Ltd. की सब्सिडरियों में से होते हुए आखिर में भारत में NDTV lmagine Ltd., NDTV Lifestyle, NDry Lab, NDTV convergence, NDTV NGEN and NDTV studio आदि भारत में NDTV की कंपनियों में बटोर ली गई।
साज़िश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार
FIR में NDTV के प्रमोटरों प्रणय रॉय, राधिका रॉय और विक्रम चंद्रा और मरहूम केवीएल नारायण राव पर अज्ञात लोकसेवकों के साथ FDI के रास्ते मनी लॉन्ड्रिंग की साज़िश को अंजाम देने का आरोप है। उनपर साज़िश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आपराधिक आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि NNPLC को FIPB बोर्ड की मंजूरी उस समय के FDI प्रावधानों को ताक पर रखकर दी गई। प्रणय रॉय, राधिका रॉय और विक्रम चंद्रा पर मुकदमा IPC की धारा 120-B, 420, और भ्रष्टाचार-निरोधी अधिनियम, 1988 की धारा 13(1) और 13(2) के अंतर्गत दर्ज किया गया है।