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रंग कुमारी पर बुरी नजर डाली तो बादशाह अकबर की जूतों से हुई पिटाई: इतिहास जो आपसे छिपाया गया

सिखों के दसवें गुरु गोविन्द सिंह युद्धनीति में भी पारंगत थे और उनका मानना था कि कला-संस्कृति के साथ-साथ लोगों को युद्धकला का भी प्रशिक्षण मिलना चाहिए। वे खालसा के लिए ऐसे लोग चाहते थे, जो अपना जीवन क़ुर्बान करने में भी नहीं हिचकें। सिखों के पवित्र पुस्तकों में से एक ‘दशम ग्रन्थ’ के रचयिता भी गुरु गोविन्द सिंह को माना गया है। ‘चरित्रोपाख्यान’ इसी दशम ग्रन्थ का एक भाग है, जिसमें कई ऐतिहासिक और पौराणिक कहानियाँ हैं। इन कहानियों में एक ऐसी कहानी है, जो 16वीं सदी में हिंदुस्तान पर राज़ करने वाले अकबर से जुड़ी है।

इन कहानियों से सीख मिलती है। सिख धर्म-ग्रंथों के ज्ञाता प्रीतपाल सिंह बिंद्रा ने ‘चरित्रोपाख्यान’ को अंग्रेजी में अनुवादित किया था। भारत और लंदन के स्कूलों में पढ़ाने वाले बिंद्रा ने पंजाब यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा किया था। पुरानी पवित्र पुस्तकों को पढ़ने में उनकी इतनी रूचि थी कि उन्होंने अपने व्यापार को बेच कर इन पुस्तकों का अध्ययन और अनुवाद को ही अपने जीवन का ध्येय बना लिया।

अब बात ‘शहंशाह’ अकबर की। नरमुंडों का पहाड़ खड़ा कर के दिल्ली की गद्दी पर बैठने वाले अकबर को सेक्युलर इंडिया का नायक बताया जाता है। हमें पढ़ाया गया है कि कैसे अकबर के दरबार में कई हिन्दू विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काबिज थे। अब यह सच में अकबर की विचारधारा थी या फिर चतुर नीति, इस पर बहस होती रही है। लेकिन, अकबर से जुड़ी कई बातें छिपाई भी गई हैं। चित्तौड़ पर अकबर के आक्रमण से लेकर महिलाओं के प्रति उसके रवैये तक, कई बातें आज भी छिपा कर रखी गई हैं।

सिख ग्रन्थ ‘श्री चरित्रोपाख्यान’ में ऐसी-ऐसी कहानियाँ हैं, जिसे पढ़ने के बाद व्यक्ति दूसरों की ग़लतियों से सीख सकता है। 404 कहानियों के इस सेट की सिख धर्म में काफ़ी मान्यता है। इसमें अकबर से जुड़ी जो कहानी है उससे अकबर के ठरकपन और चरित्र के बारे में पता चलता है। अब चूँकि आपको इस बारे में न के बराबर पता होगा, हम आपके लिए इस कहानी को पेश कर रहे हैं। यह ‘चरित्रोपाख्यान’ की 185वीं कहानी है।

चरित्रोपाख्यान: अकबर और रंग कुमारी की कहानी

आगरा स्थित अकबराबाद में एक साहूकार रहा करता था। रंग कुमारी उसी की बेटी थी। कहते हैं उसका सौंदर्य ऐसा था कि जो भी एक बार देख ले मोहित हो जाता। उस समय आगरा अकबर की राजधानी थी और वह वहीं से शासन चलाया करता था। वह फतेहपुर सीकरी में अपना दरबार लगाया करता था। अकबर को शिकार का शौक था और वह अक्सर शिकार खेलने जाया करता था।

एक बार शिकार खेलने के दौरान ही अकबर की नज़र रंग कुमारी पर पड़ी और वह तुरंत ही उस पर मोहित हो गया। अकबर उसे हर हाल में पाना चाहता था। अकबर के बारे में पुस्तक लिख चुके डर्क कोलियर कहते हैं कि अकबर के महल में कम से कम 5000 महिलाएँ होती ही होती थीं। बेल्जियम के लेखक के अनुसार, अकबर अनगिनत महिलाओं के साथ सो चुका था और यह सब तभी शुरू हो गया था जब वह काफ़ी कम उम्र का था। इतिहासकारों की मानें तो अकबर की 300 के क़रीब पत्नियाँ थीं।

अकबर ने कई राजपूत राजघरानों की लड़कियों से शादी कर रखी थी। ख़ैर, वापस रंग कुमारी की कहानी पर आएँ तो अकबर ने अपनी एक दासी को उसके पास भेजा। वह दासी अकबर का सन्देश लेकर रंग कुमार के पास गई। सन्देश यही था कि अकबर ने रंग कुमारी को अपने महल में बुलाया है। रंग कुमारी चालाक महिला थीं। उन्होंने अकबर के पास जाना स्वीकार नहीं किया, लेकिन वह जानती थीं कि वह एक शक्तिशाली बादशाह है। इसीलिए, रंग कुमारी ने अकबर को अपने घर पर बुलाया।

दासी ने अकबर को जाकर रंग कुमारी का सन्देश कहा। जब अकबर रंग कुमारी के पास पहुँचा तो वह बिस्तर लगा रही थी। फिर क्या था, अकबर की ख़ुशी का ठिकाना न रहा। उसे लगा कि वह अपने उद्देश्य में सफल हो रहा है। लेकिन, रंग कुमारी भी पतिव्रता हिन्दू महिला थीं। रंग कुमारी ने अकबर को काफ़ी इज्जत दी। बिस्तर लगाने के बाद अकबर से कहा कि वह शौचालय से निपट कर आना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि वह जल्दी ही आ जाएँगी।

‘चरित्रोपाख्यान’ के अंग्रेजी अनुवाद का अंश (अनुवादक: प्रीतपाल सिंह बिंद्रा )

शौचालय जाने के बहाने निकली रंगा कुमारी ने दरवाजा तेज़ी से बंद कर दिया और इस तरह से अकबर अंदर कमरे में ही क़ैद हो गया। इसके बाद कुमारी अपने पति को लेकर उस कमरे में आ गईं। अपनी पत्नी के साथ छेड़छाड़ से क्रुद्ध रंग कुमारी के पति ने गुस्से में न सिर्फ़ अकबर के ताज को ज़मीन पर पटक कर अपने पैरों तले रौंद डाला बल्कि अपना जूता निकाल कर अकबर को कई जूते लगाए भी।

बादशाह अकबर अपनी इज्जत और प्रतिष्ठा के डर से यह सब बर्दाश्त करता रहा। कहीं न कहीं उसके मन में यह एहसास भी हो गया कि उसने ग़लत किया है। लज्जा के मारे वह चुपचाप खड़ा रहा। इसके बाद रंग कुमारी और उसके पति ने मिल कर अकबर को एक भू-गर्भित कालकोठरी में क़ैद कर दिया। हिंदुस्तान का बादशाह होकर औरतों पर ग़लत नज़र डालने वाले अकबर की ये कहानी शायद ही कहीं और पढ़ी-पढ़ाई गई हो।

अगले दिन की सुबह होते ही पति-पत्नी अकबर को लेकर शहर के क़ाज़ी के पास पहुँचे। न्यायालय में रंग कुमारी और उसके पति ने अकबर के कुकृत्यों को बताने के बाद कहा, “यह एक संत है, चोर है, साहूकार है या फिर बादशाह है, आप ख़ुद पता कर लीजिए।” इतना कह कर निकल गए। लज्जा के मारे अकबर का सिर ऊपर उठ ही नहीं रहा था। पूरे प्रकरण के दौरान वह सिर झुकाए खड़ा रहा।

‘चरित्रोपाख्यान’ में पूछा गया है कि अगर कोई व्यक्ति इस तरह से पराई स्त्री पर नज़र डालता है और उसके घर में घुस जाता है, क्या उसे दण्डित नहीं किया जाना चाहिए? बादशाह अकबर को इस घटना के बाद अच्छी सीख मिली और उसके बाद उसने किसी पराई स्त्री के घर में घुसना बंद कर दिया। उपर्युक्त कहानी सिख ग्रन्थ ‘चरित्रोपाख्यान’ में वर्णित है, जिसके रचयिता गुरु गोविन्द सिंह माने गए हैं।

अब सवाल यह उठता है कि प्राचीन पुस्तकों में जब अकबर के बारे में ऐसा वर्णित है तो इस बारे में कोई चर्चा क्यों नहीं करता? अकबर ‘महान’ के कथित सेक्युलर चरित्र का गुणगान करते हुए उसे भारत का नायक के रूप में पेश करने वाले वामपंथी इतिहासकारों ने अकबर के नेगेटिव पक्ष को इस तरह से छिपाया, जैसे उसे सीधा मर्यादा पुरुषोत्तम राम के समकक्ष खड़ा करने की कोशिश की जा रही हो। ऐसे गिरोह विशेष के इतिहासकारों को ‘दीन-ए-इलाही’ मज़हब अपनाकर फतेहपुर सिकरी में नंगा नाचना चाहिए, शायद अकबर उन्हें भी अपने पास बुला ले।

FACT CHECK: अमेज़न जंगल में लगी आग को लेकर अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने शेयर की सालों पुरानी तस्वीरें

हाल ही में अमेज़न जंगल में लगी आग को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने पर्यावरण को लेकर चिंता जताई। कई सेलेब्रिटीज ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक से एक फोटो शेयर कर बताया कि अमेज़न दुनिया की 20% ऑक्सीजन की सप्लाई करता है और वहाँ आग लगना दुःखद है। सेलेब्रिटीज के कूदने से उन फोटोज को लोगों ने भी हाथोंहाथ शेयर किया। टाइम्स पत्रिका ने साफ़-साफ़ कहा है कि हालिया आग का कारण क्लाइमेट चेंज नहीं है।

वैज्ञानिक डेनियल नैप्स्टड (Daniel Nepstad) ने अमेज़न के जंगलों पर ख़ासा अध्ययन किया है। वे अमेज़न द्वारा दुनिया की 20% ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली बात को बेहूदगी बताते हैं। डेनियल नैप्स्टड के अनुसार, ये पेड़ जितनी मात्रा में ऑक्सीजन की सप्लाई करते हैं, रेस्पिरेशन के तहत उतनी ही मात्रा में ऑक्सीजन का प्रयोग भी कर लेते हैं। रेस्पिरेशन वह प्रक्रिया है, जिसके तहत पेड़-पौधे मिटटी में स्थित नुट्रिएंट्स को ऊर्जा में बदलते हैं। फोटोसिंथेसिस के बारे में भी पढ़ा है, जिसके तहत पेड़-पौधे सूर्यकिरण को केमिकल एनर्जी में बदलते हैं।

अगर हम अमेज़न में आग लगने की बात करें तो यह हर साल होता रहा है। इस बार लगे आग की बात करें तो सैटेलाइट द्वारा प्राप्त आँकड़ों के अध्ययन से पता चलता है कि यह राष्ट्रीय औसत से 7% ही ज्यादा है। नीचे संलग्न किए गए ग्राफ में आप देख सकते हैं कि 2005 और 2010 में स्थिति कही गुना ज्यादा भयावह थी:

सैटेलाइट द्वारा प्राप्त आँकड़ों के अध्ययन से पता चलता है कि विश्व ने तब ध्यान नहीं दिया, जब स्थिति सही में भयावह थी

अब आते हैं उन सेलेब्रिटीज पर, जिन्होंने ग़लत फोटो शेयर किया। महानतम फुटबॉल खिलाड़ियों में से एक क्रिस्टिआनो रोनाल्डो ने अमेज़न जंगल में लगी आग के बारे में ट्वीट करते हुए जो फोटो शेयर किया, वो काफ़ी पुरानी है। वो फोटो दक्षिण ब्राजील के टैम इकोलॉजिकल गार्डन में लगी आज की फोटो है जिसे 2013 में ही क्लिक किया गया था। यह इलाक़ा भी अमेज़न जंगल से बहुत दूर है।

इसी तरह ऑस्कर विजेता अभिनेता लियोनार्डो डी कैप्रियो ने जो फोटो शेयर की, वह 20 वर्ष पुरानी है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुअल मैक्रॉन ने भी इसी फोटो को शेयर किया। जबकि, इस फोटो को क्लिक करने वाले फोटोग्राफर की 2003 में ही मृत्यु हो चुकी है। स्टॉकफोटो वेबसाइट के अनुसार, उस फोटोजर्नलिस्ट ने इस फोटो को काफ़ी पहले क्लिक किया था। अब जाहिर है उन्होंने मृत्यु के बाद लौट कर 2019 में तो या फोटो नहीं ही क्लिक की।

ऑस्कर विजेता अभिनेता ने शेयर की 20 वर्ष पुरानी तस्वीर

इसी तरह गायिका मैडोना ने भी काफ़ी पुरानी तस्वीर शेयर की

मैडोना ने भी शेयर की पुरानी तस्वीर

मैडोना ने जिस तस्वीर को 2019 में अमेज़न के जंगल में लगी आग की बता कर शेयर किया, वह तीन दशक पुरानी है। इसी तरह कई अंतरराष्ट्रीय सेलेब्रिटीज व नेताओं ने अमेज़न जंगल में लगी आग को लेकर पुरानी तस्वीरों को शेयर किया।

हैलो, अब्दुल बोल रहा… मोदी के खिलाफ प्रोटेस्ट ज्वाइन कर सकता हूँ… 5 डॉलर दूँगी

अलग-अलग मुल्कों में पाकिस्तान किस तरह पैसे खर्च कर भारत विरोधी प्रदर्शन करवा रहा है इसकी पोल दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता तेजिंदर बग्गा ने खोल दी है। उन्होंने सोशल मीडिया में एक ऑडियो पोस्ट किया है जिसमें पेरिस में भारत विरोधी प्रदर्शन के नाम पर एक पाकिस्तानी महिला पैसे देने की बात कबूल कर रही है।

ऑडियो में आप सुन सकते हैं कि बग्गा अब्दुल बनकर फ्रांस की एक महिला को फोन करते हैं जो भारत विरोधी प्रदर्शन की आयोजक है। मोदी इस समय जी7 सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए पेरिस में ही हैं।

ऑडियो में बग्गा लाहौर का अब्दुल बनकर बात करते हैं। महिला भी खुद को पाकिस्तानी बताती है। अब्दुल कहता है कि उसे पता चला है कि महिला मोदी विरोधी प्रदर्शन निकालने वाली है और वह उसमें शामिल होना चाहता है। जवाब में महिला कहती है कि वह चाहती है कि अधिक से अधिक लोग प्रदर्शन में शामिल हों। इसके बाद अब्दुल पूछता है कि क्या उसे प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पैसा मिलेगा।

शुरुआत में तो महिला पैसे देने से इनकार करती है। आने पर खाना देने की बात कहती है। लेकिन जब अब्दुल कहता है कि उसके एक पाकिस्तानी दोस्त ने बताया कि इस तरह के प्रदर्शन में भाग लेने के लिए पैसे मिलते हैं तो महिला उसे 2 डॉलर देने को राजी हो जाती है। अब्दुल इसके बाद पैसा बढ़ाने के लिए जोर डालता है और महिला 5 डॉलर तक देने को तैयार हो जाती है।

बग्गा इससे पहले भी पाकिस्तान परस्त लोगों को अपने अनोखे अंदाज में बेनकाब करते रहे हैं। ताजा ऑडियो से साफ़ है कि अनुच्छेद-370 के निरस्त होने के बाद भारत-विरोधी और मोदी-विरोधी प्रदर्शनों को कैसे अंजाम दिया जा रहा है। भारत को वैश्विक मंच पर शर्मिंदा करने के लिए पाकिस्तान इसे प्रायोजित तरीके से अंजाम दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा अलग-थलग किए जाने के बावजूद वो अपनी हरकत से बाज नहीं आ रहा।

‘मुस्लिमों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाना चाहती है BJP सरकार, हम क्यों बने सेकुलरिज्म के कुली?’

विवादित बयानों के कारण अक्सर चर्चा में रहने वाले हैदराबाद के सांसद और AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने एक कार्यक्रम के दौरान एक बार फिर से भाजपा पर निशाना साधा है। इस कार्यक्रम में उन्होंने मुस्लिम समुदाय को कई तरह की हिदायतें दी हैं।

उन्होंने कहा, “बीजेपी की सरकार भारत के मुस्लिमों को सेकंड क्लास नागरिक बनाना चाहती है और भारत के मुस्लिम इस बात का एहसास नहीं करते। भारत के मुस्लिमों को इस बात का एहसास होना चाहिए कि हम बहुत समय तक सेकुलरिज्म के कुली नहीं बन सकते तो हमारा वोट सेक्युलर पार्टियों के पास क्यों जाना चाहिए? मुस्लिमों को अपने समुदाय में राजनीतिक नेतृत्व खोजना चाहिए। यह इकलौता ऐसा रास्ता है जिससे यह सुनिश्चित होगा कि हमें संवैधानिक अधिकार दिए गए हैं।”

ओवैसी ने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार भारत के मुस्लिमों को सेकंड क्लास सीटिजन्स बनाना चाहती है और मुस्लिम समुदाय यह बात समझ नहीं रहा है।

मुस्लिम समुदाय को चेताते हुए ओवैसी ने कहा कि वो अपना नेतृत्व बनाएँ, अपने आपको बदलें, क्योंकि ऐसा करने के लिए कोई आसमान से नीचे नहीं उतरेगा जो आपको जन्नत ले जाएगा। मुस्लिम समुदाय को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि सभी को मेहनत करनी होगी और इस बात को अच्छे से समझना होगा कि लोकतंत्र में वोट का काफ़ी महत्व है।

भारत की लोकतंत्र व्यवस्था का संदर्भ लेते हुए ओवैसी ने मुस्लिमों को चेताया कि लोकतंत्र में केवल वोट देने का ही नहीं बल्कि चुनाव में खड़े होने का भी अधिकार है। ओवैसी ने ज़ोर देते हुए कहा कि चुनाव भले ही कोई भी हो, उसमें भागीदारी ज़रूरी है। उन्होंने कहा, “इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि वह आज हारे हैं या कल हारेंगे लेकिन मुस्लिमों को अपने संवैधानिक अधिकारों का आक्रामक तरीके से प्रयोग करना आना चाहिए।”

अशफ़ाक ने काट खाई सास की नाक, उसके पिता ने काट डाले कान: दहेज़ न मिलने से बौखलाए थे पिता-पुत्र

उत्तर प्रदेश के बरेली से रविवार (25 अगस्त) को एक चौंका देने वाली ख़बर सामने आई है। इस ख़बर के अनुसार दहेज न दिए जाने पर अशफ़ाक ने अपनी सास की नाक काट खाई और अशफ़ाक के पिता ने उनका कान काट दिया। आरोपित के ख़िलाफ़ बरेली छावनी पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा-323 (स्वेच्छा से चोट पहुँचाना), 326 (स्वेच्छा से किसी ख़तरनाक हथियार से चोट पहुँचाना) और 504 (जानबूझकर विश्वास भंग करने के इरादे से अपमान करना) के तहत FIR दर्ज की गई है।

गंभीर रूप से घायल महिला को ज़िला अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ उसे सर्जरी के लिए दिल्ली रेफर कर दिया गया। ख़बर के मुताबिक़, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, गन्था रहमान ने अपनी बेटी चाँद बी का निक़ाह लगभग एक साल पहले बरेली के एक प्रॉपर्टी डीलर मोहम्मद अशफ़ाक से करवाया था।

दूल्हे के परिवार ने रुपए की माँग की थी। निक़ाह के समय दहेज के रूप में 10 लाख रुपए दहेज के तौर पर दिए गए थे। लेकिन, चाँद बी द्वारा एक बेटी को जन्म दिए जाने के बाद ससुराल वालों ने उसके घर से अतिरिक्त 5 लाख रुपए की माँग की। रहमान ने इस राशि के भुगतान से इनकार कर दिया। इसके बाद उसकी बेटी के साथ ससुराल वालों ने मार-पिटाई शुरू कर दी।

इस बारे में जब पिता को पता चला तो वो अपनी बीवी गुलशन के साथ बेटी के ससुराल पहुँचे। लेकिन जल्द ही आपसी बातचीत मारपीट में तब्दील हो गई। अशफ़ाक ने अपनी सास की नाक काट खाई, जबकि अशफ़ाक के पिता इज़हार ने चाकू से उसका कान काट दिया। पुलिस को सूचना दिए जाने के बाद, बाप-बेटे की यह जोड़ी गुलशन को बेहोश हालात में छोड़कर फ़रार हो गई। बाद में पुलिस ने उन्हें अस्पताल पहुँचाया।

स्टेशन हाउस अधिकारी अवनीश सिंह यादव ने कहा, “घटना की जानकारी मिलने पर, हम पीड़िता को अस्पताल ले गए और उन्हें प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध करवाई। पाँच परिचितों और एक अज्ञात व्यक्ति के ख़िलाफ़ FIR दर्ज की गई है और जल्द ही आरोपितों को गिरफ़्तार कर लिया जाएगा।”

मलेशिया में 519 आतंकी गिरफ़्तार: भगोड़े जाकिर नाइक के बोलने पर पहले ही लगा चुका है पाबन्दी

आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला जाकिर नाइक जहाँ मलेशिया में शरण लिए हुए है। ऐसे में मलेशिया के गृह मंत्री ने बयान दिया है कि 519 लोगों को जुलाई तक आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के संदेह में गिरफ्तार किया गया है। इनमें मलेशियाई नागरिक भी शामिल हैं और विदेशी नागरिक भी, लेकिन सोमवार (26 जुलाई) को यह बयान देते हुए हालाँकि गृह मंत्री मुहयिद्दीन यासीन ने विदेशियों और मलेशियाईयों की संख्या अलग-अलग नहीं बताई।

बता दें कि आतंकी गतिविधियों के आरोप में भारत में वांछित इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाइक के बारे में भी मलेशिया के गृहमंत्री एम. यासीन ने कहा है कि वह कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा, कोई भी कानून से ऊपर नहीं है, डॉ. जाकिर नाइक भी नहीं।  इससे पहले मलेशिया की सरकार ने जाकिर नाइक के भाषण देने पर रोक लगा दी थी। जाकिर भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोपित है, और काफी लम्बे समय से फरार होकर मलेशिया में शरण लिए हुए है।

“इन्हें स्थापित कानूनों के अंतर्गत ही हिरासत में लिया गया है, चाहे वह Prevention of Terrorism Act 2015 (POTA) हो या फिर Security Offences (Special Measures) Act 2012 (SOSMA) हो।” यासीन कुआलालम्पुर में एक प्रेस वार्ता को सम्बोधित कर रहे थे। “इन लोगों को ऐसी गतिविधियों में संलिप्त पाया गया है जिन्हें हम कानूनी रूप से आतंकी मानते हैं, और इन गतिविधियों का प्रभाव (आतंकवाद का ) खतरा बढ़ाने वाला होता है।” यासीन ने इनमें से कुछ लोगों के पहले भी पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार विभिन्न अपराधों के दोषी करार दिए जाने का दावा भी किया।

चैनल न्यूज़ एशिया के अनुसार मलेशियाई पुलिस के इंस्पेक्टर-जनरल अब्दुल हमीद बडोर ने आतंकरोधी छापों के दौरान बरामद पिस्तौलों और कुछ अन्य हथियारों और आतंकी सामग्रियों का प्रदर्शन भी किया। इस साल मई में मलेशिया पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने इस्लामिक स्टेट (आईएस) के विघटन के बाद अलग हुए तीन ‘लोन वुल्फ़’ जिहादियों को गिरफ़्तार कर लिया है, जो एक बड़े ‘लोन वुल्फ़’ जिहादी गुट का हिस्सा थे। मलेशिया पुलिस के अनुसार इस गुट के बाकी जिहादियों को उन्होंने पहले ही धर-दबोचा था, और केवल यही तीनों मई तक उनसे बचते फिर रहे थे। उनके अनुसार यह गुट मलेशिया की राजधानी कुआलालाम्पुर स्थित क्लांग घाटी में बड़े पैमाने पर हिंसा और राजीनीतिक हत्याएँ करने की योजना बना रहा था।

मालूम हो कि आईएस का केंद्रीय संगठन इराक-सीरिया में नाटो, रूस, सीरिया सरकार, यज़ीदी विद्रोहियों आदि के हमले में ध्वस्त होने के बाद जो जिहादी मारे जाने या पकड़े जाने से बच निकले, वे अपने-अपने देशों को लौट गए हैं, जिहाद फ़ैलाने के आईएस और उसके सरगना बगदादी के संदेश के साथ। केवल मुशरिकों, काफिरों आदि को मारने की हिंसक विचारधारा ही इनका एक मात्र समान-सूत्र (common thread) है; इसके अलावा इनका न कोई आका या स्थानीय नेटवर्क है, न एक-दूसरे से जान-पहचान या सम्पर्क। इसलिए कोई अनहोनी होने से पहले इनकी पहचान करना, उन्हें पकड़ना या मार गिराना बेहद मुश्किल है।

मई के ही आखिर में मलेशियाई अधिकारियों ने तीन और आतंक के संदिग्धों को पकड़ने की घोषणा की थी, जिनमें से एक मलेशियाई ठेकेदार था, जिसे कुआलालाम्पुर के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मिस्र के रास्ते सीरिया जाने की फ़िराक में पकड़ लिया गया।

वहीं दक्षिण-पूर्व एशिया के एक दूसरे पोर्टल नाम न्यूज़ नेटवर्क (NNN) ने मलेशियाई गृह मंत्री मुहयिद्दीन के ही हवाले से यह दावा भी किया है कि एक ऐसे बच्चे और उसके माता-पिता के देश और घर लौटने का प्रार्थनापत्र उन्हें मिला है, जो सीरिया में आईएस के जिहाद में हिस्सा लेने के शक में गिरफ़्तार हैं।

#Metoo में फँसा इस्लामिक स्कॉलर तारिक रमादान अब महिला पत्रकार के साथ गैंगरेप में घिरा

इस्लामिक स्कॉलर तारिक रमादान पर अब एक महिला पत्रकार के साथ गैंगरेप में शामिल होने का आरोप लगा है। दो महिलाओं के साथ बलात्कार को लेकर उन पर पहले से ही फ्रांस में मुकदमे चल रहे हैं। फ्रांस की न्यायिक सेवा से जुड़े सूत्रों के हवाले से यह खबर सामने आई है।

अरब न्यूज के मुताबिक सूत्रों ने यूरोप 1 रेडियो और ला जर्नल डे डिमांशे की उस खबर की पुष्टि की है जिसमें एक 50 वर्षीय महिला पत्रकार ने 56 साल के रमादान पर अपने स्टाफ के साथ मिलकर गैंगरेप का आरोप लगाया है। यह घटना तब हुई जब महिला पत्रकार रमादान का इंटरव्यू लेने मई 2014 में लियोन के एक होटल में गई थी।

महिला पत्रकार का कहना है कि रमादान ने पुलिस में रिपोर्ट नहीं दर्ज कराने की धमकी भी दी थी। महिला के अनुसार तारिक ने जनवरी में मेसेंजर के जरिए उससे संपर्क किया था और कहा था, “तुम जानती नहीं हो मैं कितना पॉवरफुल हूँ।”

रमादान एक शादीशुदा आदमी है और उसके चार बच्चे भी हैं। साल 2017 तक वह ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हुआ करता था। लेकिन मीटू मूवमेंट के दौरान 2 महिलाओं ने उस पर रेप का आरोप लगाया था, जिसके बाद उसे वहाँ से निकाल दिया गया।

उल्लेखनीय है कि इस दौरान तारिक पर 2009 में एक दिव्यांग महिला और 2012 में एक फेमिनिस्ट कार्यकर्ता से रेप का आरोप लगा था। 2018 में बेल न मिलने के कारण 9 महीने उसे कस्टडी में रखा गया था।

तेलंगाना: महात्मा गाँधी की प्रतिमा पर कालिख पोती, पाक समर्थित नारों की माला पहनाई

तेलंगाना के निज़ामाबाद जिले में रविवार (अगस्त 25, 2019) को कुछ अज्ञात लोगों ने महात्मा गाँधी की प्रतिमा कालिख पोत दी। साथ ही पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाते हुए गाँधी प्रतिमा को पाकिस्तान के जयकारे वाले नारों से लिखे पेपर की माला पहना दी।

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना निज़ामाबाद जिले के गुंडाराम गाँव की है। इस घटना के बाद से इलाके में सनसनी फैल गई है। जानकारी के अनुसार, पुलिस को संदेह है कि यह एक विशेष समुदाय से संबंधित एक नए उभरे हुए संगठन की करतूत हो सकती है। इस संगठन ने जिले के कुछ अल्पसंख्यक क्षेत्रों में गरीब बच्चों को शिक्षित करने और फिटनेस पर जागरूकता प्रदान करने के नाम पर गतिविधियाँ शुरू की थी।

हाल ही में पुलिस ने इस समूह से जुड़े 3 लोगों को नगरपालिका अधिकारियों की शिकायत पर गिरफ्तार किया था। शिकायत में कहा गया था कि उन्होंने अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए अवैध शेड का निर्माण किया था।

पुलिस मुख्यालय के सर्किल इंस्पेक्टर आर रघु ने कहा कि पुलिस जिला मुख्यालय निज़ामाबाद से कुछ किलोमीटर दूर स्थित गाँव में पहुँचकर अपराधियों की पहचान करने के लिए जाँच शुरू कर दी है।

उन्होंने कहा कि वो इस बात की जाँच कर रहे हैं कि जिस आउटफिट के बारे में पहले मेंशन किया गया था, उसका गाँधी की प्रतिमा के साथ की गई अपमानजनक कृत्य से कोई संबंध है या नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि चूँकि यह एक गंभीर मुद्दा है, इसलिए सभी एंगल से इसकी पूछताछ की जा रही है।

ऑपइंडिया ने निज़ामाबाद पुलिस स्टेशन में बात की। लेकिन पुलिस अधिकारी इस शर्मनाक कृत्य के आरोपितों के बारे में किसी तरह की जानकारी देने से बचते रहे।

सिंधु को बधाई ट्वीट में लिखा ‘अपने देश को गौरवान्वित किया’, यूजर्स ने पूछा- कॉन्ग्रेस इटली से है क्या?

स्टार शटलर पीवी सिंधु ने विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप जीत अपने आलोचकों को करारा जवाब दिया है। उनकी इस सफलता का पूरा देश जश्न मना रहा है। प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति से लेकर तमाम लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं। लेकिन, उन्हें बधाई देने की जल्दी में कॉन्ग्रेस ने एक ऐसी भूल कर दी कि उसकी सोशल मीडिया में क्लास लग गई। बधाई ट्वीट के बाद यूजर्स ने ‘कॉन्ग्रेस किस देश से’, पूछने में देरी नहीं की।

सिंधु ने स्विट्जरलैंड के बासेल में आयोजित 2019 बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप जापान की नोजोमी ओकुहारा को हराकर जीता। कॉन्ग्रेस ने उन्हें बधाई देते हुए ट्वीट किया, “वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बनने पर पीवी सिंधु को बधाई। आपने अपने देश को गौरवान्वित किया।”

ट्वीट में कॉन्ग्रेस का ‘अपने देश’ लिखना लोगों को रास नहीं आया। वैसे भी इस वक़्त अपने बयानों से जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तानी प्रोपगेंडा को हवा देने का कारण कॉन्ग्रेस और उसके नेता पहले से ही निशाने पर हैं।

सोशल मीडिया पर यूज़र्स ने कॉन्ग्रेस से तुरंत सवाल करने शुरू कर दिए। पूछा कि कॉन्ग्रेस किस देश से है। यूज़र्स को इस बात ने काफ़ी अश्चर्यचकित कर दिया कि कॉन्ग्रेस ने पी वी सिंधु को बधाई देने के लिए जिन शब्दों का इस्तेमाल किया है, उससे यह झलकता है कि शायद वो भारत को अपना राष्ट्र नहीं मानते।

ट्विटर पर कई यूज़र्स ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी पाकिस्तान या इटली को ही अपना राष्ट्र मानती है, भारत को नहीं।


10 साल बाद संजय दत्त की राजनीति में वापसी, BJP की सहयोगी पार्टी में हो सकते हैं शामिल

बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त लगभग 10 साल बाद राजनीति में फिर से आने के लिए तैयार हैं। ऐसी ख़बर सामने आई है कि वे अब महाराष्ट्र में बीजेपी की सहयोगी राष्ट्रीय समाज पार्टी (RSP) में शामिल होंगे।

ख़बर के अनुसार, संजय दत्त, जो कभी समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे, महाराष्ट्र के एक मंत्री के अनुसार, राजनीति में फिर से प्रवेश करने के लिए तैयार हैं। पार्टी के संस्थापक और कैबिनेट मंत्री, महादेव जानकर ने रविवार (25 अगस्त) को कहा, 60 वर्षीय संजय दत्त आगामी 25 सितंबर तक RSP में शामिल हो सकते हैं। RSP महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ बीजेपी का एक सहयोगी दल है।

महादेव जानकर ने कहा कि RSP अपनी पार्टी का विस्तार करने के लिए फ़िल्म उद्योग की हस्तियों को पार्टी में शामिल कर रही है। बता दें कि RSP पार्टी मुख्य रूप से ‘धनगर’ या ‘चरवाहा’ समुदाय का प्रतिनिधित्व करती है।

महाराष्ट्र सरकार में पशुपालन और डेयरी विकास मंत्री महादेव जानकर ने कहा, “हमने अपनी पार्टी का विस्तार करने के लिए फिल्म क्षेत्र में काम करना शुरू कर दिया है। 25 सितंबर को अभिनेता संजय दत्त भी राष्ट्रीय समाज पार्टी में शामिल हो रहे हैं।”

इस कार्यक्रम के दौरान एक पहले का रिकॉर्ड किया हुआ वीडियो दिखाया गया, इसमें अभिनेता संजय दत्त RSP और जानकर का अभिवादन करते हुए उन्हें ‘भाई’ कहकर संबोधित किया था।

ख़बर के मुताबिक़, संजय दत्त आगामी महाराष्ट्र चुनावों में केवल RSP के लिए प्रचार करेंगे। फ़िलहाल, संजय दत्त की ओर से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, क्योंकि उन्होंने अभी तक इस संदर्भ में कोई बयान जारी नहीं किया है।

ग़ौरतलब है कि संजय दत्त के स्वर्गीय पिता सुनील दत्त ने पाँच बार कॉन्ग्रेस पार्टी से मुंबई उत्तर-पश्चिम निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। उन्होंने अपनी मृत्यु से पहले मई 2004-2005 के दौरान यूपीए-1 सरकार में युवा मामलों और खेल मंत्री के रूप में भी कार्य किया था। संजय दत्त की बहन प्रिया दत्त मुंबई से कॉन्ग्रेस की पूर्व सांसद हैं।