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CBI-ED ने किया चिदंबरम की याचिका पर SC में कैविएट दायर, कहा- हमें सुने बिना न दें कोई फैसला

सीबीआई (CBI) ने पी. चिदंबरम कि याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर किया है। इसमें चिदंबरम की याचिका पर एकपक्षीय आदेश नहीं जारी करने कि माँग की गई है। प्रक्रिया के मुताबिक, अब सुप्रीम कोर्ट से चिदंबरम को तत्काल गिरफ्तारी से संरक्षण मिलना मुश्किल है। सीबीआई का पक्ष जानने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट कैविएट दाखिल होने पर आदेश  जारी करता है।

CBI तथा प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पी चिदम्बरम की गिरफ्तारी से राहत माँगने वाली याचिका के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल किए हैं। अब कोर्ट कैविएट दायर करने वालों का पक्ष सुने बिना मामले में कोई फैसला नहीं सुना सकता है।

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम को दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार (अगस्त 20, 2019) को आईएनएक्स मीडिया मामले में गिरफ्तारी से राहत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आज, बुधवार को कहा कि कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम की वह अपील तत्काल सूचीबद्ध करने पर विचार के लिए प्रधान न्यायाधीश के समक्ष रखी जाएगी जिसमें उन्होंने आईएनएक्स मीडिया मामले में गिरफ्तारी से पूर्व जमानत के लिए दी गई अपनी याचिका खारिज करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी है। न्यायमूर्ति एन वी रमण ने चिदंबरम की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से कहा कि मामला प्रधान न्यायाधीश के समक्ष रखा जाएगा।

गौरतलब है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया मामले में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की गिरफ्तारी से किसी भी तरह का संरक्षण देने से मना कर दिया था।

आज ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पी चिदंबरम के खिलाफ लुक-आउट नोटिस जारी किया। इसके बाद कॉन्ग्रेस नेता संजय निरुपम ने सरकार पर चिदंबरम से चोर सरीखा व्यवहार करने का आरोप भी लगाया है। निरुपम ने लिखा- “पी चिदंबरम के लिए लुक आउट नोटिस! यह थोड़ा ज्यादा हो गया। देश के विद्वान राजनीतिज्ञ, पूर्व गृह मंत्री और वित्त मंत्री को एक चोर की तरह माना जा रहा है।”

चिदंबरम के वकीलों ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। मामले को अर्जेन्ट सुनवाई के लिए लिस्ट किया गया है। फिलहाल सीजेआई गोगोई राम मंदिर मामले की सुनवाई में व्यस्त हैं। उधर ईडी ने चिदंबरम के ख़िलाफ़ लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया है, जिसके बाद वह विदेश नहीं भाग पाएँगे।

न्याय प्रणाली में केवियट (Caveat) का अर्थ –

किसी व्यक्ति द्वारा अदालत से आप के विरुद्ध अचानक कोई आदेश लाने की आशंका होने पर कैवियट की अर्जी डाली जाती है, ताकि आपको पूर्व सूचना मिल सके कि आपके विरुद्ध क्या अर्जी डाली जा रही है, आपको आपके विरुद्ध डाली जा रही अर्जी की प्रति लिपि (copy) भी भेजी जाती है |

किसी व्यक्ति को इस तरह की भी आशंका हो सकती है कि किसी मामले को ले कर उस के विरुद्ध किसी न्यायालय में कोई वाद या कार्यवाही संस्थित करके अथवा पहले से संस्थित किसी वाद या कार्रवाई में उसकी अनुपस्थिति में कोई आवेदन प्रस्तुत कर कोई आदेश प्राप्त किया जा सकता है। उस स्थिति में अदालत में खुद व्यवहार प्रक्रिया संहिता की धारा 148-अ के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत किया जाता है। इस आवेदन को केवियट (caveat) कहा जाता है।

रिश्वत के पैसे से चिदंबरम ने खरीदे स्पेनिश टेनिस क्लब और विदेश में सम्पत्ति: ED

INX मीडिया घोटाले में ED (प्रवर्तन निदेशालय) का आरोप है कि पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम ने INX मीडिया घोटाले में मिले पैसे से देश-विदेश में कई अचल सम्पत्तियाँ खरीदी हैं। इनमें स्पेन में एक टेनिस क्लब और ब्रिटेन में घर शामिल हैं। इन्हीं के बारे में पूछताछ के लिए ED कॉन्ग्रेस नेता पी. चिदंबरम को हिरासत में लेना चाहती है।

₹54 करोड़ का है मामला

ED के अक्टूबर 2018 के अटैचमेंट ऑर्डर के अनुसार बार्सिलोना, स्पेन के टेनिस क्लब, ब्रिटेन के दो घरों और भारत के भीतर की संपत्तियों का कुल मूल्य करीब ₹54 करोड़ के आस-पास बैठता है। भारत के भीतर अटैच की गई सम्पत्तियों में उनका वर्तमान निवास, दिल्ली के जोर बाग स्थित ₹16 करोड़ का बंगला, भी शामिल हैं। बार्सिलोना स्थित टेनिस क्लब का मूल्य ₹15 करोड़ बताया जा रहा है।

जो लेन-देन हुआ ही नहीं, उसके बने डेबिट नोट

ED का दावा है कि INX मामले के दूसरे आरोपी पीटर मुखर्जी ने कार्ति चिदंबरम को ₹3.09 करोड़ डेबिट नोटों में हेरफ़ेर के ज़रिए दिए। इसके लिए ऐसे लेन-देन कागज़ों पर दिखाए गए, जो असल में हुए ही नहीं।

इसके अलावा कार्ति चिदंबरम से जुड़ी कंपनी Advantage Strategic Consulting Pvt Ltd (ASCPL) के वासन हेल्थ केयर में हिस्सेदारी भी इसी घोटाले के पैसे से खरीदने की बात मीडिया रिपोर्टों में कही जा रही है। साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि बाद में वासन हेल्थ केयर में ASCPL के शेयरों में से कुछ हिस्सा ₹41 करोड़ के मुनाफ़े पर बेच दिया गया।

बशीर ने बीवी को कुल्हाड़ी से काटा, समीरा की अम्मी-अब्बू से मॉंग रहा था 5 लाख रुपए

हैदराबाद में एक शख्स ने कुल्हाड़ी से काटकर अपनी बीवी की हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपित बशीर को गिरफ्तार कर लिया है।

आसिफ नगर के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस नरसिम्हा रेड्डी ने एएनआई (ANI) को बताया कि आरोपित बशीर ने 12 अगस्त को अपनी दूसरी बीवी समीरा पर कुल्हाड़ी से प्रहार किया। जिसमें समीरा के गले पर गंभीर चोट आई और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। इस वारदात को अंजाम देने के बाद बशीर वहाँ से फरार हो गया। हालाँकि, पुलिस ने 20 अगस्त को तोलीचौकी इलाके से बशीर को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

नरसिम्हा रेड्डी ने बताया कि बशीर ने 25 साल पहले समीरा की बड़ी बहन फहीमुन्निसा के साथ निकाह किया था। इसके 10 साल बाद उसने समीरा से निकाह किया। साल 2016 में समीरा ने बशीर को तलाक दे दिया। इसके बावजूद दोनों साथ-साथ ही रहते थे।

कमिश्नर ने बताया कि बशीर ने समीरा के माता-पिता से दहेज की माँग की थी। बशीर और उसके पिता ने
समीरा के माता-पिता से दहेज के तौर पर 5 लाख रुपए की माँग की थी। समीरा के परिवार वालों ने यह माँग कर दी तो फिर से 5 लाख रुपए की डिमांड कर दी। डिमांड पूरा नहीं करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी थी।  

बिहार: मेयर के बेटे ने मारी आँख, महिला पार्षद ने CM नीतीश से लगाई गुहार

बिहार के पटना में एक वार्ड पार्षद ने मेयर सीता साहू के बेटे पर बोर्ड मीटिंग के दौरान छेड़खानी का आरोप लगाया है। वार्ड पार्षद पिंकी देवी का आरोप है कि पटना नगर निगम की बोर्ड बैठक के दौरान मेयर सीता साहू का बेटा उन्हें लगातार आँख मार रहा था। उन्होंने आरोपी को ऐसा नहीं करने की सख्त हिदायत भी दी, लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। पिंकी देवी ने कहा कि शुरू में उन्होंने शिशिर की इस हरकत को नजरअंदाज किया। लेकिन वो रूका नहीं और उन्हें देखकर लगातार आँख मारता रहा।

पिंकी देवी का कहना है कि उन्होंने शिशिर को उसकी गंदी हरकत के लिए चेतावनी देते हुए कहा वो उसकी माँ से इसकी शिकायत करेंगी। इसके बाद भी उसके चेहरे पर कोई डर नहीं दिखा। उसने कहा कि वो जो चाहें करें। पिंकी का आरोप है कि उन्होंने मेयर सीता साहू से इस बात की शिकायत की तो उन्होंने उन्हें ही कसूरवार ठहराया और कहा कि वो वो लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचने के लिए ऐसे आरोप लगा रही हैं। सीता साहू अपने पुत्र को डाँटने की बजाय उन पर ही चिल्लाने लगी। इसके बाद स्थायी समिति सदस्य इंद्रदीप कुमार चंद्रवंशी और वार्ड पार्षद सतीश कुमार विरोध करने पहुँच गए। पिंकी कुमारी ने कदमकुआँ थाने में मेयर पुत्र के साथ-साथ इंद्रदीप कुमार चंद्रवंशी व सतीश कुमार के खिलाफ लिखित में शिकायत दर्ज कराई है।

प्रभात खबर में छपी खबर का स्क्रीनशॉट

पिंकी कुमारी ने कहा कि सिटी मैनेजर संजय कुमार पर भ्रष्टाचार का आरोप है, जिसके खिलाफ वो बोल रही थी। उनका यह बोलना मेयर के साथ-साथ मेयर पुत्र को अच्छा नहीं लग रहा था। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वो एफआईआर करावाएँगी और महिला आयोग के पास भी जाएँगी। साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है ताकि आगे ऐसी घटना न हों।

केले के रेशे से बना सैनिटरी पैड होगा 120 बार इस्तेमाल, जानें कितनी है कीमत? क्या है खास?

स्त्री जीवन में ‘माहवारी’ एक शाश्वत हकीकत है। इसे न झुठलाया जा सकता है और न इससे बचा जा सकता है। हर 28 दिन के चक्र में महिला को अपने शरीर में बदलते हॉर्मोन्स के कारण इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ये चक्र 11-12 वर्ष की आयु से शुरू होता है और अधिकतम 45-55 की उम्र तक चलता है। मतलब स्त्री जीवन का एक बहुत लंबा काल इस चक्र के साथ गुजरता है।

पुराने समय में महिला के जीवन में माहवारी को लेकर कई भ्रांतियाँ थी, लेकिन अब धीरे-धीरे समय बदल रहा है। पहले जहाँ लोग इस विषय पर बात करने से गुरेज करते थे, वहीं अब लोग इसपर खुलकर बात कर रहे हैं। महिला की स्वास्थ्य सुरक्षा अब समाज में एक अहम मुद्दा है। जिसके चलते शहर की तंग गलियों से लेकर गाँव-कस्बों तक की महिलाओं को सैनिटरी पैड को इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। लेकिन सवाल है कि क्या ये सैनिटेरी पैड वाकई सुरक्षित हैं? तो जवाब है, नहीं। महिलाओं के लिए बाजार में उपलब्ध सैनिटेरी पैड न महिलाओं के लिए सुरक्षित हैं और न ही प्रकृति के लिए।

जानकारी के मुताबिक इनका ज्यादा इस्तेमाल करने से इंफेक्शन तो होता ही है। इसके अलावा अधिकांश सैनिटरी पैड के सिंथेटिक सामग्री और प्लॉस्टिक से निर्मित होने के कारण इन्हें 50 से 60 साल सड़ने में लग जाते है। जो प्रकृति के लिए नुकसानदायक है।

आमतौर पर महिलाएँ इसका इस्तेमाल करती हैं और फिर इसे कूड़े में फेंक देती हैं। बाद में इन्हें या तो जला दिया जाता है या मिट्टी में दबा दिया जाता है। जिससे प्रकृति दूषित होती है। क्योंकि जब इन्हें जलाया जाता है तो इनमें डाइऑक्सिन के रूप में कार्सिनोजेनिक धुएँ का उत्सर्जन होता है, और वह वायु प्रदूषण का बहुत बड़ा कारक है।

इसलिए, महिलाओं की जरूरत का ख्याल रखते हुए और प्रकृति को होने वाले नुकसान से संरक्षित करने के लिए आईआईटी दिल्ली से जुड़े एक स्टार्टअप ने पहली बार ऐसा पैड बनाने का दावा किया है जो केले के रेशे से निर्मित है।

यह पैड न सिर्फ़ महिलाओं के लिए सुरक्षित है बल्कि इको फ्रेंडली भी है। इसको बनाने में केले में मौजूद फाइबर का इस्तेमाल किया गया है। इसकी कीमत 199 रुपए है और इसकी खास बात ये है कि इसे महिलाएँ 2 साल तक चला सकती हैं। इसे बनाने वाले लोगों ने दावा किया है कि इसका 120 बार इस्तेमाल किया जा सकता है।

इस पैड में केले के रेशे के अलावा टेरी, पॉलिस्टर पिलिंग और कॉटन का इस्तेमाल किया गया है। पैड की खासियत है कि महिलाओं को माहवारी के दौरान होने वाले गीलेपन से छुटकारा मिलेगा क्योंकि इसमें मौजूद विस्कोस और पॉलिस्टर अत्यधिक शोषक है।

आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर्स की मदद से ‘सैनफे’ द्वारा तैयार किए गए इस उत्पाद के लिए एक पेटेंट का आवेदन जमा कराया गया है। स्टार्टअप के संस्थापक अर्चित अग्रवाल की मानें तो इस पैड को लेकर थर्ड पार्टी लैबोरेट्री में प्रयोग किए जा चुके हैं। इससे साबित हो चुका है कि इस पैड में किसी प्रकार का बैक्टीरिया नहीं है। न ही इससे महिलाओं को किसी करह की जलन या फिर रैश होने का खतरा है।

अर्चित अग्रवाल की मानें तो इस पैड को जल्द ही आम दुकानों पर उपलब्ध करवाया जाएगा, लेकिन उससे पहले महिलाएँ इसे ऑनलाइन मँगवा कर इस्तेमाल कर सकती है।

बता दें महिलाओं की सुरक्षा और प्रकृति को बचाने के लिहाज से किए गए इस प्रयोग केन्या और तंजानिया जैसे देशों में भी अमल हो रहा है। अर्चित बताते हैं कि इन देशों में तौलिया बनाने के पदार्थों से पैड का निर्माण किया जाता है, क्योंकि सिर्फ़ रुई इसके लिए काफी नहीं होती। वे कहते हैं कि वो केले के रेशे से बना सैनिटरी पैड अन्य देशों में एक्सपोर्ट भी करेंगे, और इस काम के लिए वह दक्षिण भारत से केले के रेशे लेगें।

अर्चित की मानें तो सरकार और एनजीओ निरंतर ग्रामीण इलाकों में डिस्पोजल पैड बाँटने का काम करती हैं। हम उनसे भी अपील करेंगे कि वो इस रियूजेबल पैड को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाने में मदद करें।

केरल: रेप का विरोध करने वाली नन का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट, पादरी ने कहे अपशब्द

केरल में बलात्कार के आरोपित बिशप फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ प्रदर्शन में भाग लेने वाली नन लूसी कलपूरा ने एक पादरी पर सोशल मीडिया पर खुद को अपमानित करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कैथोलिक चर्च के मनंतवाडी डायोसिस क्षेत्र की पीआरओ टीम के सदस्य पादरी ने अपमानित करने के लिए कॉन्वेंट में उनसे मिलने आए पत्रकारों की सीसीटीवी वीडियो सोशल मीडिया पर डाली। 

कलपूरा ने अपने कॉन्वेंट में मीडिया से बात करते हुए कहा कि पुलिस की कार्रवाई के बाद उनकी छवि खराब करने के लिए चर्च फर्जी वीडियो फैला रहा है। उन्होंने कहा कि वीडियो में पादरी ने उन्हें अपमानित करने के लिए अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया है। लूसी ने कहा कि वह उन लोगों के खिलाफ कानूनी कदम उठाएगी, जो ये वीडियो पोस्ट कर रहे हैं। वो इसके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाएँगी।

डॉयसिस के पीआरओ जोस कोचरल ने इस बारे में बात करते हुए पीटीआई को बताया कि वीडियो में पादरी ने जो कुछ भी कहा है, वो उनके निजी विचार हैं। सोशल मीडिया पर इस तरह से वीडियो को पोस्ट करने से पहले उनसे किसी तरह की सलाह नहीं ली गई थी।

गौरतलब है कि, इससे पहले सोमवार (अगस्त 19, 2019) को नन लूसी कलपूरा को कॉन्वेंट में बंधक बनाने और प्रार्थना से रोके जाने का मामला सामने आया था। लूसी ने बताया था कि वह पिछले दो दिनों से कॉन्वेंट में नहीं थीं। रविवार (अगस्त 18, 2019) को लौटी। सोमवार की सुबह जब प्रार्थना के लिए तैयार हुई तो कॉन्वेंट से निकल नहीं पाई। उसे बाहर से बंद कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने स्थानीय पुलिस को सूचना दी। पुलिस के दखल के बाद कॉन्वेंट का गेट खोला गया। बिशप के खिलाफ कार्रवाई की माँग को लेकर विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा लेने की वजह से FCC की उच्चस्तरीय समिति ने 11 मई को लूसी को बर्खास्त कर दिया।

कश्मीरियों! पाकिस्तान पर भरोसा बंद करो, 72 साल से आपको धोखा दे रहा है: Pak नेता अल्ताफ हुसैन

मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) के संस्थापक अल्ताफ हुसैन ने कश्मीर के लोगों से पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तान सरकार के झाँसे में नहीं आने की अपील की है। उनका बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद से पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है।

लंदन में निर्वासित जीवन बिता रहे हुसैन ने कहा, “ईश्वर की खातिर आप सभी से अपील करता हूँ कि पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तान सरकार पर भरोसा करना बंद करें। दोनों पिछले 72 वर्षों से आपको धोखा दे रहे हैं और आज भी ऐसा ही चल रहा है। कुछ पाकिस्तानी सेना के लोग यह नारे लगा रहे हैं कि कश्मीर का पाकिस्तान में विलय कर देंगे और हम आजादी लेंगे, लेकिन आजादी का सही मतलब यह नहीं है। मैं हमेशा पाकिस्तान की कूटनीतिक और विदेशी मामलों की रणनीति पर मुखर रहा हूँ, क्योंकि पाकिस्तान हमेशा दिखाता रहा है कि उसने कश्मीर के लिए बहुत कुछ किया है।”

अल्ताफ ने कहा कि पाकिस्तान ने कश्मीर का समर्थन करने के लिए एक समिति भी बनाई, जिसके चेयरमैन ने कश्मीर मसले के नाम पर दुनिया भर में घूमकर विदेश यात्रा का आनंद लिया। इसके अलावा पाकिस्तान ने कश्मीर के मामले पर संयुक्त राष्ट्र में विशेष स्टाफ भी नियुक्त किया और अरबों खर्च करने के बावजूद कश्मीर के लिए कुछ हासिल नहीं कर पाया।

इतना ही नहीं, अल्ताफ ने पाकिस्तान पर तंज कसते हुए कुछ सवाल भी पूछे हैं। उन्होंने कहा, “पाकिस्तानी सेना के दावे कहाँ गायब हो गए हैं? पाकिस्तानी सेना भारत से आजादी के लिए कश्मीर के लोगों को अपनी जंग में शामिल करने से क्यों हिचक रही है? पाकिस्तानी सेना कायरता क्यों दिखा रही है और अब तक कश्मीर स्वतंत्र क्यों नहीं हो पाया है? कश्मीरियों को अंत तक समर्थन देने के दावे आखिर कहाँ गायब हो गए हैं?”

इसके साथ ही उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि ईश्वर बेहतर जानता है कि पाकिस्तानी सेना सैकड़ों मील दूर से क्या करेगी।

ड्राइवर और गाड़ी छोड़ भाग खड़े हुए पी चिदंबरम, फोन भी स्विच ऑफ, अंतिम लोकेशन लोधी रोड

पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम गिरफ़्तारी से बचने के लिए कहाँ छिपे हुए हैं, किसी को नहीं पता। उनका मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ हो गया है। कुछ नई जानकारियाँ आई हैं, जिनके मुताबिक पी चिदंबरम ने मंगलवार (अगस्त 19, 2019) को सुप्रीम कोर्ट के प्रांगण से निकलने के बाद अपने ड्राइवर को भी साथ नहीं लिया। अर्थात, वह अपने ड्राइवर को छोड़ कर ही भाग खड़े हुए। उनके फोन का अंतिम लोकेशन लोधी रोड के आसपास पाया गया है।

जिस कार से वह सुप्रीम कोर्ट पहुँचे थे, उन्होंने वह गाड़ी भी वहीं छोड़ दी। इसका मतलब यह है कि राज्यसभा सांसद चिदंबरम अपनी आधिकारिक गाड़ी से यात्रा नहीं कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा कि वर्षों तक केंद्रीय मंत्री रहे नेता का इस तरह से क़ानून की नज़रों से छिपना शोभा नहीं देता।

प्रवर्तन निदेशालय ने चिदंबरम के ड्राइवर से पूछताछ की लेकिन उसे भी नहीं पता कि चिदंबरम कहाँ छिपे हुए हैं। चिदंबरम के वकीलों ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। मामले को अर्जेन्ट सुनवाई के लिए लिस्ट किया गया है। फिलहाल सीजेआई गोगोई राम मंदिर मामले की सुनवाई में व्यस्त हैं। उधर ईडी ने चिदंबरम के ख़िलाफ़ लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया है, जिसके बाद वह विदेश नहीं भाग पाएँगे।

लंदन में PAK के रेल मंत्री शेख रशीद अहमद पर फेंके अंडे, पत्रकार से कैमरा छीनकर डिलीट किया वीडियो

पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख रशीद अहमद पर लंदन में अंडे फेंके गए। पाकिस्तानी पत्रकार नायला इनायत ने इस वाकये का वीडियो ट्विटर पर शेयर किया है।

इसके मुताबिक पाकिस्तानी रेल मंत्री लंदन एक अवॉर्ड समारोह में गए थे। वहीं, एक व्यक्ति ने ने उनके ऊपर अंडा फेंक दिया।

घटना 18 अगस्त की बताई जा रही है। साथ ही कहा जा रहा है कि जिस व्यक्ति ने उनपर अंडा फेंका वो कश्मीरी कार्यकर्ता था।

जानकारी के मुताबिक रशीद अहमद पर अंडा फेंकने के लिए वह कार्यक्रम स्थल के बाहर उनका इंतजार कर रहा था। जैसे ही वे पहुँचे उस व्यक्ति ने उनपर अंडा फेंक दिया। इसके बाद उसे पकड़ने की बहुत कोशिश की गई लेकिन वो किसी तरह वहाँ से भागने में सफल रहा।

दूसरे वीडियो में देखा जा सकता है कि जिस जगह पाकिस्तानी मंत्री पर हमला हुआ वहाँ अंडे फूटे पड़े हैं। अभी तक इस व्यक्ति की सही पहचान नहीं हो पाई है। न ही मालूम चला है कि पाकिस्तानी मंत्री पर इस तरह अंडा फेंकने के पीछे उसका क्या उद्देश्य था।

ट्विटर पर एक यूजर अहमद वकास गोराया ने बताया है कि इस पूरी घटना की वीडियो एक पत्रकार ने अपने कैमरे में कैद किया था। लेकिन पाक मंत्री के दोस्त ने उसका फोन छीन वीडियो डिलीट कर दी।

अब ये शख्स ट्विटर पर सवाल कर रहा है कि क्या यूके की सरकार पाक मंत्री और उनके साथियों द्वारा पत्रकार पर हमले की जाँच कराएगी?

अहमद का कहना है कि जिस समय ये सब हुआ उस समय कार्यक्रम को संचालन करने वाले अनिल मुसरत के मेहमान वसीम बदामी और इकरार उल हसन भी वहाँ मौजूद थे, जिन्होंने ये सब देखा।

हमाम में अकेले नंगे नहीं हैं चिदंबरम, सोनिया और राहुल गॉंधी सहित कई नेताओं पर लटक रही तलवार

आईएनएक्स मीडिया केस में पी चिदंबरम गिरफ़्तारी से बचने के लिए छिप गए हैं, लेकिन सीबीआई उनके आवास पर डटी हुई है। चिदंबरम के ख़िलाफ़ एयरसेल-मैक्सिस केस में एक अलग मामला भी चल रहा है, जहाँ कई बार अदालत द्वारा उन्हें गिरफ़्तारी से राहत प्रदान की जा चुकी है। लेकिन, चिदंबरम अकेले नहीं हैं। कॉन्ग्रेस के कई और बड़े नेताओं के खिलाफ भी भ्रष्टाचार के मामले चल रहे हैं।

यही कारण है कि जब से हाई कोर्ट ने चिदंबरम को राहत देने से इनकार किया है, कॉन्ग्रेस नेता केन्द्र की मोदी सरकार के खिलाफ हमलावर हो गए हैं। पार्टी महासचिव प्रियंका गाँधी ने तो चिदंबरम के तारीफों के पुल बाँधते हुए यहाँ तक कहा है कि सरकार उन्हें इसीलिए पकड़ना चाहती है क्योंकि वे सच बोलते हैं और सच्चाई मोदी सरकार को बर्दाश्त नहीं होती। उन्होंने चिदंबरम को देश के प्रति वफादार बताया।

जाहिर है कई नेताओं के फॅंसे होने के कारण सबको एक-दूसरे का समर्थन करने में ही भलाई नजर आ रही है।कल को दूसरों पर भी गिरफ़्तारी की तलवार लटक सकती है, इसलिए कॉन्ग्रेस नेता अभी से हंगामा खड़ा कर, राजनीतिक विरोधियों को फॅंसाने के आरोप बार-बार दोहराकर भ्रष्टाचार के मामलों से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश कर रहे हैं।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी सहित कई पूर्व केंद्रीय मंत्री के ख़िलाफ़ विभिन्न एजेंसियाँ जाँच कर रही हैं। आइए ऐसे नेताओं पर एक नज़र डालते हैं।

सोनिया गाँधी – राहुल गाँधी

लगातार 2 दशक तक कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष रहीं सोनिया गाँधी की एक बार फिर पार्टी के शीर्ष पद पर वापसी हुई है। उनके बेटे राहुल गाँधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। दोनों माँ-बेटे नेशनल हेराल्ड केस में आरोपित हैं और फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। दिसंबर 2015 में दिल्ली की एक अदालत ने दोनों को 50-50 हज़ार रुपए के पर्सनल बॉन्ड पर ज़मानत दी थी। सुब्रह्मण्यम स्वामी द्वारा दर्ज कराए गए इस मामले में आरोप है कि यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (YIL) ने एसोसिएट जर्नल प्राइवेट लिमिटेड (AJL) का अधिग्रहण किया, जिसमें कई अनियमितताएँ बरती गईं।

वाईआईएल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में सोनिया और राहुल भी शामिल हैं। स्वामी के शिकायत में कहा गया है कि वाईआईएल में सोनिया-राहुल की 76% हिस्सेदारी है और एजेएल को कॉन्ग्रेस पार्टी के फंड्स में से लोन दिए गए, जो ग़ैर-क़ानूनी है। कॉन्ग्रेस नेता मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडिस और सैम पित्रोदा भी इस मामले में आरोपित हैं।

अशोक चव्हाण

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रह चुके अशोक चव्हाण आदर्श सोसायटी घोटाले में आरोपित हैं। राज्यपाल ने 2016 में चव्हाण के ख़िलाफ़ अभियोग चलाने के लिए सीबीआई को मंजूरी दे दी थी। 2012 में सीबीआई ने इस मामले में 10,000 पेज की चार्जशीट फाइल की थी। आदर्श सोसायटी में कारगिल युद्ध में वीरगति को प्राप्त जवानों के परिवारों के लिए फ्लैट्स का निर्माण कराया गया था।

सीबीआई ने अपनी चार्जशीट ने कहा था कि सैनिकों के परिवारों की जगह तत्कालीन मुख्यमंत्री चव्हाण के रिश्तेदारों को अवैध रूप से फ्लैट्स दिए गए। इसी मामले में महाराष्ट्र के एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे भी आरोपित थे।

नवीन जिंदल

उद्योगपति नवीन जिंदल कॉन्ग्रेस पार्टी से 2 बार संसद रह चुके हैं। उनके ख़िलाफ़ कोयला घोटाले में आरोप तय किए जा चुके हैं। जिंदल पर धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और गलत दावे करने का मामला दर्ज है। उनकी कम्पनी ने मध्य प्रदेश कॉल ब्लॉक का आवंटन लेने के लिए कोयला मंत्रालय के सामने ग़लत तथ्य पेश किए थे। उन पर झारखण्ड अमरकोंडा कॉल ब्लॉक के आवंटन के मामले में एक अलग केस भी चल रहा है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया

ग्वालियर राजघराने से आने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया के ख़िलाफ़ ज़मीन कब्जाने का मामला चल रहा है। उनके ख़िलाफ़ 2014 में मध्य प्रदेश इकनोमिक ऑफिस विंग ने जाँच शुरू की थी। जुलाई 2019 में अदालत ने पीआईएल पर उनसे जवाब माँगा था। जवाब न देने पर अदालत ने 10,000 रुपए का आर्थिक दंड दिया था। उन पर आरोप है कि उनके ट्रस्ट ने सरकारी संपत्ति बिल्डर को बेच दिए। ये जमीनें ग्वालियर के चेतकपुरी में स्थित है।

सिद्दारमैया

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ लोकायुक्त के पास एक-दो नहीं बल्कि 50 शिकायतें विचाराधीन पड़ी हुई हैं और इनमें से कई पर कार्रवाई कभी भी शुरू हो सकती है। ये अपने आप में एक यूनिक किस्म का मामला है, जहाँ लोकायुक्त के पास किसी मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ 50 शिकायतें पेंडिंग पड़ी हों। 2017 में सीबीआई की विशेष अदालत ने उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने कुछ चुनिंदा माइनिंग कंपनियों को फेवर किया।

अशोक गहलोत

अशोक गहलोत के ख़िलाफ़ आरोप है कि उन्होंने पिछली बार मुख्यमंत्री रहते सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए ऐसी कंपनियों का चयन किया, जिनके लिंक्स उनके परिवार के सदस्यों से थे। उन्होंने मुख्यमंत्री रहते क़रीब 11,000 करोड़ रुपए के कॉन्ट्रैक्ट्स अपने क़रीबी कंपनियों को दिए। कई कंपनियों ने अशोक गहलोत की बेटी व उनके दामाद को फ्लैट्स और महँगी गाड़ी समेत कई गिफ्ट भी दिए, जिसके बाद यह मामला प्रकाश में आया।