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आर्टिकल 370 पर फैसले के बाद कश्मीर में पहला Encounter, 1 आतंकी ढेर

जम्मू-कश्मीर के बारामूला में मंगलवार (अगस्त 20, 2019) देर रात आतंकवादियों और सुरक्षा बल के बीच मुठभेड़ हुई। मुठभेड़ में एक आतंकी मारा गया। एक एसपीओ (स्पेशल पुलिस ऑफिसर) को भी अपनी जान गँवानी पड़ी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आतंकियों के छिपे होने की खबर मिलते ही सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया। इसके बाद आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी।

जवाबी कार्रवाई में जवानों ने एक आतंकी को मौक़े पर ढेर कर दिया। सीआरपीएफ और एसओजी की संयुक्त टीम ने पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया।

बता दें आर्टिकल 370 के जम्मू-कश्मीर में निष्प्रभावी होने के बाद एनकाउंटर का यह पहला मामला है।

UP के बाबूराम यादव कैसे बने बाबूलाल गौर: मध्य प्रदेश के पूर्व CM का निधन

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर का बुधवार (अगस्त 20, 2019) को भोपाल में ह्रदय गति रुकने के कारण निधन हो गया। वह पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। उनके निधन का समाचार सुनते ही अस्पताल के बाहर भाजपा के कार्यकर्ता जुटने लगे। बाबूलाल गौर पिछले 15 दिनों से नर्मदा अस्पताल में वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। उनकी किडनी भी पूरी तरह काम नहीं कर रही थी। हाल ही में दिल्ली में भी उनका इलाज हुआ था। 1946 से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे गौर 1974 में जनता पार्टी के समर्थन से पहली बार निर्दलीय विधायक बने थे।

दिग्विजय सिंह के दूसरे मुख्यमंत्रित्व काल में बाबूलाल गौर मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे थे और राज्य भाजपा के प्रमुख के रूप में वे अपनी पार्टी का अहम चेहरा बने रहे। बाद में उमा भारती जब मुख्यमंत्री बनीं तो गौर ने कई अहम मंत्रालय संभाला। वो मुख्यमंत्री भी काफ़ी कठिन परिस्थितियों में बने थे। 1994 स्वतंत्रता दिवस के दौरान कर्नाटक के हुबली में स्थित ईदगाह मैदान में उमा भारती ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। उनके ख़िलाफ़ अदालत में मामला दर्ज किया गया था। बाद में कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने यह मामला फिर से खोल दिया, जिस कारण उमा भारती ने इस्तीफा दिया और गौर मुख्यमंत्री बने।

यह भी जानने लायक बात है कि बाबूलाल गौर का असली नाम बाबूराम यादव था और उनका जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ था। एक बार स्कूल में एक शिक्षक ने कहा कि जो भी लड़का उनकी बात ध्यान से सुनेगा, उसके नाम में ‘गौर’ लगा दिया जाएगा। बाबूराम ने शिक्षक के सवालों को ध्यान से सुन कर उनका जवाब दे दिया और शिक्षक ने उनका नाम बाबूराम गौर रख दिया क्योंकि उन्होंने शिक्षक की बात ‘गौर’ से सुनी थी। इसके बाद धीरे-धीरे लोग
बाबूराम की जगह बाबूलाल कहने लगे। बाद में उन्होंने मध्य प्रदेश को अपनी राजनीतिक कर्मभूमि बनाया। उनके निधन के बाद पीएम मोदी और केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह समेत तमाम नेताओं ने शोक जताया।

J&K: सुरक्षा परिषद में भद पिटवाने के बाद ICJ के देहरी पर Pak, पहले भी खा चुका है यहाँ ‘मार’

जम्मू-कश्मीर मामले में सुरक्षा परिषद में निराश होने के बाद पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का रुख किया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने इस आशय की जानकारी ARY न्यूज़ टीवी को दी। “कश्मीर का मुद्दा ICJ ले जाने का निर्णय सैद्धांतिक तौर पर ले लिया गया है।”

हिंदुस्तान ने पहले ही दे रखी है चेतावनी

हिंदुस्तान ने पहले ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह हिदायत दे दी थी कि कश्मीर उसका आंतरिक मसला है। अतः चाहे उसे पूर्ण राज्य से केंद्र-शासित प्रदेश में बदलना हो, या अनुच्छेद 370 के ज़रिए उसे मिले विशेष प्रावधानों को खत्म करना, हिंदुस्तान पूरे कश्मीर (POK और अक्साई चिन सहित) में किसी भी बाहरी शक्ति का हस्तक्षेप सहन नहीं करेगा। सुरक्षा परिषद में भी पाकिस्तान को किसी ने भाव नहीं दिया- सुरक्षा परिषद ने एक अनौपचारिक, अनाधिकारिक बैठक बुलाई, वह भी इसलिए कि हिन्दुस्तानी कार्रवाई लद्दाख में भी हुई, और लद्दाख पर चीन अपना दावा करता है। सुरक्षा परिषद की उस बैठक में भी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार स्थायी सदस्यों में 5 में से 4 और अस्थायी सदस्यों में 10 में से 9 ने हिंदुस्तान का पक्ष लिया।

कुलभूषण मामले में मुँह की खा चुका है इसी ICJ में

इसी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पाकिस्तान ने पूर्व नेवी अफसर कुलभूषण जाधव के मामले में हार का सामना किया था। ईरान से अगवा कर पाक कुलभूषण को रॉ एजेंट के तौर पर फाँसी पर चढ़ाना चाहता था, ताकि उनके और हिंदुस्तान के सर अपने अंदर फैले जिहाद का ठीकरा फोड़ा जा सके। लेकिन उस मामले में भी ICJ ने हिंदुस्तान का पक्ष सुनने के बाद जाधव की मौत की सज़ा पर पुनर्विचार करने और जाधव को हिंदुस्तानी कॉन्सुलेट से सम्पर्क का अधिकार (कॉन्सुलर एक्सेस) देने का आदेश दिया था।

अगर चपरासी पूर्व-सांसद से ज्यादा कमाते हैं, तो कॉन्ग्रेसी कब करियर बदल रहे हैं?

कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा फायर हैं, कि मोदी भला पूर्व सांसदों को एक हफ्ते में बंगले खाली करने को कह रहे हैं। उनके हिसाब से यह ‘harsh, Arbitrary and discriminatory’ है। शिकायत कर रहे हैं कि पूर्व सांसद को तो पेंशन एक चपरासी से भी कम मिलती है। और सरकार के सचिवों को मकान खाली करने के लिए 6 महीने का समय मिलता है।

आगे वह मामले को राजनीतिक से नैतिक चाशनी में लपेटने का प्रयास करते हुए पूछते हैं कि क्या मोदी चाहते हैं कि भारतीय सांसद अमीर और भ्रष्ट हो जाएँ? लोगों की बजाय कॉर्पोरेट और मल्टीनेशल कंपनियों के प्रतिनिधि बनें? ईमानदार वालों को परिवार की चिंता करनी होती है।

कॉन्ग्रेस की हाल-फ़िलहाल की पूरी राजनीति की तरह यह भी बोगस तर्कों का एक पुलिंदा है, जिसमें जान केवल इसलिए दिख रही है कि एक साथ 4-5 कुतर्कों और कमज़ोर तर्कों का पुलिंदा आपने साथ बाँध दिया है, इस उम्मीद में कि क्या पता, एक-आधा तीर अँधेरे में ही निशाने पर लग जाए!

पेंशन का झूठ

सांसदों की पेंशन के बारे में आनंद शर्मा जी अर्धसत्य बोल रहे हैं। ₹25,000 मासिक पेंशन सुनने में बिलकुल कम लगती है, लेकिन यह केवल पहली बार सांसद बन कर अगला चुनाव हार जाने वालों की है। उसके बाद दूसरे संसदीय कार्यकाल से इसमें ₹2000 प्रति महीना की वृद्धि होती है। यानि कोई व्यक्ति अगर तीन लोकसभाओं का कार्यकाल पूरा करके रिटायर हो तो उसकी कुल पेंशन होगी ₹25,000 + (अगली दो लोकसभाओं के कार्यकाल के 120 महीने का ₹2000 X 120 = ₹2,40,000) यानि ₹2,65,000।

अगर कोई दूसरे लोकसभा कार्यकाल में एक साल पूरा करके भी त्यागपत्र दे दे तो उसकी पेंशन ₹25,000 + (12 X ₹2000 = ₹24,000) = ₹49,000 होगी। महज़ 6 साल काम करके ₹49,000 की पेंशन किस चपरासी या किस सचिव को मिलती है?

अब ज़रा सांसदों के वेतन की बात करें। 2017 में इंडिया टुडे पर प्रकाशित एक आकलन के मुताबिक एक सांसद को केवल मूल वेतन ₹16,80,000 सालाना था; और सारे खर्चे मिलाकर सरकारी खजाने से ₹35,02,000 सालाना प्रति सांसद का खर्चा था। आनंद शर्मा जी बताएँगे नौकरी के पहले ही साल से ₹35,02,000 किस चपरासी या कितने सचिवों को मिल जाती है? देश के सबसे ‘तगड़े पैकेज’ वाली MBA के बाद की कॉर्पोरेट नौकरी में भी पहले साल से ही ₹35 लाख सालाना पाने वाले महज़ 5-10% होते हैं।

और एक बात, 7 दिन का यह नोटिस दिए जाने के पहले पूर्व सांसदों को चुनाव हारे लगभग 2 महीने बीत चुके हैं। कम होते हैं 2 महीने बोरिया-बिस्तर समेटने के लिए? या पूर्व-सांसद संसद से ‘एग्जिट’ करते समय कोई कसम खाते हैं, जैसे घुसने के समय शपथ ली जाती है संविधान की, कि आखिरी नोटिस, आखिरी धक्का खा के ही खाली करेंगे?

ईमानदारी सांसदों की बपौती नहीं होती

इसके अलावा आनंद शर्मा अपने अगले ट्वीट में जो एजेंडा धकेलने की कोशिश करते हैं ईमानदार “बनाम” कॉर्पोरेट का, वही कॉन्ग्रेस के गर्त में गिरते जाने का सबसे बड़ा कारण है- खुद चुनिंदा अमीरों के साथ मिलकर 2G, कोयला घोटाला से लेकर उनकी पार्टी के किए हुए घोटालों की परतें अभी तक उखड़ रही हैं, और इस देश में सबसे बड़े आयकरदाता कॉर्पोरेट जगत को वह बेईमान घोषित करना चाहते हैं। उन्हें यह पता होना चाहिए कि न केवल मुट्ठी भर कंपनियों द्वारा दिया जाने वाला कॉर्पोरेट टैक्स सरकार के राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत है, बल्कि कॉर्पोरेट हवा या मंगल ग्रह से नहीं आते- उन्हीं लाखों-करोड़ों आम शेयरधारकों से बनते हैं, जिनका प्रतिनिधित्व करने का कॉन्ग्रेस पार्टी दावा करती है।

आनंद शर्मा यूपीए में उद्योग और वाणिज्य मामलों के मंत्री थे। उद्योग जगत की समस्याएँ सुलझाने के लिए कॉन्ग्रेस सरकार ने उन्हें रखा था; जब वह कॉर्पोरेट जगत के लोगों से मिलते थे तो क्या ऐसे मिलते थे जैसे कोई थानेदार किसी चोर से मिलता है?

अगर आनंद शर्मा जी को सच में लगता है कि एक सांसद की आर्थिक स्थिति किसी चपरासी से खराब होती है रिटायरमेंट के बाद, तो वे अपने बच्चों या अपने जानने वालों के बच्चों को “राजनीति में आने की बजाय चपरासी बनना बेहतर है” का चूरन चटाएंगे? और कोई नहीं, तो वे अपने भूतपूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को क्यों नहीं कहते कि वे सांसदी-वांसदी छोड़ कर चपरासी ही बन जाएँ?

विंग कमांडर अभिनंदन को प्रताड़ित करने वाले पाक कमांडो अहमद खान को सेना ने किया ढेर

भारतीय वायुसेना के जाबांज पायलट विंग कमांडर अभिनंदन वर्थमान का बदला भारतीय सेना के जवानों ने पाकिस्तान से ले लिया है। पाकिस्तान में अभिनंदन के पकड़े जाने के बाद उन्हें प्रताड़ित करने वाले पाक कमांडो अहमद खान को सेना के जवानों ने मार गिराया है।

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटने के बाद से ही पाकिस्तान किसी भी तरह से जम्मू-कश्मीर की शांति को भंग करने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए वह आतंकियों की एक बड़ी खेप भारतीय सीमा में भेजने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इसी कड़ी में पाकिस्तानी कमांडो अहमद खान नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ कराने की कोशिश कर रहा था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी सेना के विशेष सेवा समूह के सूबेदार अहमद खान को भारतीय सेना ने 17 अगस्त को एलओसी के नैकल सेक्टर में मार गिराया था, जब वह भारत में घुसपैठियों को दाखिल कराने का प्रयास कर रहा था। बता दें कि बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद एक दूसरे ऑपरेशन में 27 फरवरी को विंग कमांडर अभिनंदन के मिग-21 क्रैश होने के पश्चात उन्हें पाकिस्तान द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था।

27 फरवरी को पाक द्वारा अभिनंदन को कब्जे में लेने के बाद पाकिस्तान द्वारा जारी तस्वीरों में दाढ़ी वाले अहमद खान को IAF अधिकारी के पीछे देखा जा सकता है। अभिनंदन ने पाकिस्तान के एफ-16 विमान को मार गिराया था, लेकिन उनका मिग-21 बाइसन पाकिस्तान द्वारे दागे गए मिसाइल से क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद उन्हें इजेक्ट करना पड़ा था। इजेक्ट करके वो पाक-सीमा में चले गए थे, जहाँ उन्हें बंधक बना लिया गया था। पाकिस्तान द्वारा करीब 60 घंटे बाद उन्हें वाघा बॉर्डर से रिहा किया गया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अहमद खान ने कश्मीर में आतंकवादियों की घुसपैठ के लिए फारवर्ड पोस्ट पर जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षित आतंकवादियों को इकट्ठा किया था। 17 अगस्त को घुसपैठ कराने के लिए पाकिस्तान की सेना ने पुंछ के कृष्णाघाटी सेक्टर में मोर्टार से हमला किया। भारतीय सेना ने जिसका मुँहतोड़ जवाब देते हुए जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तानी कमांडो अहमद खान को मारा गिराया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले अहमद खान नौशेरा, सुंदरबनी और पल्लनवाला सेक्टरों में आतंकवादियों की भारत में घुसपैठ कराता रहा है। बताया जा रहा है कि घुसपैठ कराने के लिए पाकिस्तानी सेना ने उसे विशेष रूप से तैनात और प्रशिक्षित किया था। पाकिस्तान कश्मीर में एक बार से अपने आतंकी मॉड्यूल को सक्रिय करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है लेकिन मुस्तैद भारतीय सेना उसे हर मोर्चे पर खदेड़ रही है।

INX घोटाला: CBI के बाद अब ED की टीम पहुँची चिदंबरम के घर, HC ने बताया मुख्य साजिशकर्ता

आईएनएक्स मीडिया घोटाले (INX Media Scam) से संबंधित भ्रष्टाचार और मनी-लॉन्ड्रिंग मामलों में कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार शाम को दिल्ली के जोरबाग स्थित पी चिदंबरम के घर सीबीआई के 6 अधिकारियों की टीम पहुँची, लेकिन चिदंबरम घर पर नहीं थे और टीम वापस लौट गई। कुछ ही देर बाद ED (प्रवर्तन निदेशालय) की भी एक टीम चिदंबरम की तलाश में उनके घर पहुँची।

इससे पहले मंगलवार (अगस्त 20, 2019) को ही दिल्ली हाईकोर्ट चिदंबरम को ‘किंगपिन’ बताते हुए उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। HC ने चिदंबरम के मामले को मनी लॉन्ड्रिंग का ‘क्लासिक उदाहरण’ बताते हुए कहा कि ऐसे केस में यदि आरोपित को जमानत दी जाती है, तो इससे समाज में बेहद खराब संदेश जाएगा। 

सुप्रीम कोर्ट ने भी चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका पर तुरंत सुनवाई से मना कर दिया है। अब चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच बुधवार (अगस्त 21, 2019) को इस मामले की सुनवाई करेगी।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यह मामला वर्ष 2007 का है, जब वह यूपीए-1 के कार्यकाल में वित्त मंत्री थे। इस दौरान एफआईपीबी ने दो उपक्रमों को मंजूरी दी थी। INX मीडिया मामले में सीबीआई ने मई 15, 2017 को FIR दर्ज की थी। इसमें आरोप लगाया गया कि वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान 2007 में 305 करोड़ रुपए की विदेशी धनराशि प्राप्त करने के लिए मीडिया समूह को दी गई एफआईपीबी मंजूरी में अनियमितताएँ हुईं थीं। इसके बाद ED ने पिछले साल इस संबंध में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था। 

J&K: सत्यपाल मालिक ने बचाई 70 कर्मचारियों की नौकरी, अब 2000 लोगों को देंगे रोजगार

जम्मू कश्मीर में एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी (MNC) द्वारा निकाल दिए जाने के बाद वहाँ के राजयपाल सत्यपाल मालिक ने रोजगार दिया है। 5 अगस्त से ही घाटी में अनुच्छेद 370 निष्क्रीय करने के बाद AEGIS BPO ने बिजनेस क्लाइंट्स न मिलने के कारण अपना ऑफिस बंद करना पड़ा।

इसके बाद जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने तुरंत इस BPO को डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन का काम सौंप दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, अगले 18 महीने में यहाँ लगभग 2,000 लोगों की नौकरी लगेगी। जिस MNC में ये लोग कार्य कर रहे थे, वहाँ करीब 500 लोगों के काम करने की जगह है।

कश्मीर प्रशासन को इन कर्मचारियों को निकालने की सूचना मिलते ही डॉक्टर शाहिद इक़बाल, डिप्टी कमिश्नर श्रीनगर ने संज्ञान लिया और गत शनिवार को AEGIS BPO पहुँचकर इन 70 कर्मचारियों को 3 महीने की सेलेरी दिलवाई।

BPO ने फिलहाल काम करने वाले सभी कर्मचारियों को तीन महीने तक सैलरी देने की बात कही है। जम्मू कश्मीर प्रशासन का कहना है कि उनका मकसद सभी लोगों की नौकरी को सुरक्षित रखना है और इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाये जाएँगे। राज्य प्रशासन फिलहाल BPO को सरकार का काम देगा। इसके अलावा कंपनी के लिए क्लाइंट खोजने का भी काम करेगा। श्रीनगर के डिप्टी कमिश्नर ने खुद BPO सेंटर का दौरा किया और सभी कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि उनकी हर संभव मदद की जाएगी।

मस्जिद बनाने के लिए तोड़ा गया था राम मंदिर – रामलला विराजमान के वकील ने पेश किए सबूत

सर्वोच्च न्यायालय में अयोध्या विवाद को लेकर लगातार सुनवाई जारी है। आज मंगलवार (अगस्त 20, 2019) को लगातार 8वें दिन इस मामले की सुनवाई हुई। रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने मामले के पक्ष में बात रखते हुए दलीलें दी। उन्होंने कहा कि विवादित जमीन पर मस्जिद बनाने के लिए मंदिर ढहाया गया था।

उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की खुदाई में मिली चीजों का हवाला देते हुए दावा किया कि मंदिर वहीं था जहाँ मस्जिद बनाया गया। रामलला विराजमान की ओर से वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने इस दौरान कहा कि एएसआई की रिपोर्ट में मगरमच्छ और कछुए का जिक्र किया गया है, जो मुस्लिम संस्कृति का हिस्सा नहीं हैं।

उन्होंने एएसआई की रिपोर्ट के आधार पर कई अन्य पुरातात्विक सबूतों को न्यायालय के सामने पेश करते हुए कहा कि विवादित स्थल पहले एक हिंदू मंदिर था।

रामलला के वकील ने 12वीं सदी के शिलालेख का हवाला दिया और कहा कि साकेत मंडल के राजा गोविन्द चंद्र ने ग्यारहवी शताब्दी मे अयोध्या मे विष्णु हरि का सुन्दर मंदिर बनवाया था जिसकी पुष्टि वहाँ से मिले एक शिलालेख से होती है जिसमें इसका पूरा वर्णन है।

वैद्यनाथ के मुताबिक खुदाई से मिले अवशेष और वैज्ञानिक पड़ताल के बाद एएसआई की रिपोर्ट और मौक़े से मिले सबूतों के बाद कोई शंका या गुंजाइश नहीं रह जाती कि वहाँ पहले मंदिर था और 11 शताब्दी में वहाँ मस्जिद का निर्माण हुआ।

गौरतलब है कि सोमवार को पाँच जस्‍टिस वाले बेंच में से एक न्यायधीश जस्‍टिस बोबडे के अस्‍वस्‍थ होने के कारण कोर्ट सुनवाई नहीं हो पाई थी। जबकि बीते कुछ दिनों से कोर्ट इस मामले मे रोज़ाना सुनवाई कर रहा है।

इस मामले की सुनवाई चीफ जस्‍टिस रंजन गोगोई की अध्‍यक्षता में पाँच जस्‍टिस की बेंच कर रही है। चीफ जस्‍टिस गोगोई के अलावा, जस्‍टिस बोबडे, जस्‍टिस डी वाइ चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एस एस नजीर मामले की सुनवाई कर रहे हैं।

’14 अगस्त से गायब मेरी बेटी का आकिल और राशिद ने कराया धर्म परिवर्तन, पुलिस साथ देती तो…’

हरियाणा के मेवात में मुस्लिम युवक और हिन्दू युवती की शादी की खबरें सामने आने के बाद हिन्दूवादी संगठनों ने जमकर हंगामा किया। दरअसल, मेवात के फिरोजपुर झिरका गाँव में आकिल खान नाम के युवक ने हिन्दू युवती के साथ शादी कर ली। पीड़ित युवती के पिता ने पुलिस से की गई शिकायत में आकिल खान और उसके दोस्त राशिद के ऊपर युवती का धर्म परिवर्तन करवाने का आरोप लगाया है।

उन्होंने बताया कि उनकी बेटी 14 अगस्त को कॉलेज से ही गायब हो गई थी। जिसके बाद उन लोगों ने उसकी तलाश करनी शुरू की। काफी खोजबीन के बाद पता चला कि बिलाकपुर (छोटी सिधरावट) गाँव के आकिल खान ने अपने साथी राशिद के साथ उनकी बेटी का अपहरण किया है और उसे चंडीगढ़ में रखा है। इसी बीच आकिल खान और युवती का एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में युवती कहती दिखाई दे रही है कि उन लोगों ने अपनी मर्जी से शादी की है। उस पर किसी भी तरह का कोई दबाव नहीं है।

पीड़ित युवती के पिता ने आरोप लगाया है कि आरोपितों ने उस पर जादू टोना करवाकर उसे व उसके परिवार को जान से मारने की धमकी देकर उसका धर्म परिवर्तन करवाया है। इसी दहशत की वजह बेटी ने उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया है। 

इससे नाराज हिन्दूवादी संगठनों ने बाजार बंद करा दिए। शहर के नेताओं के पोस्टर उतारकर आग लगा दिए। इस सबकी वजह से तकरीबन 11 घंटे तक दिल्ली-अलवर रोड जाम रहा। युवती के पिता ने पुलिस से अपहरणकर्ताओं के चंगुल से बचाकर उनकी बेटी को छुड़ाकर लाने की माँग की है। साथ ही उन्होंने उसका मेडिकल कराने और पूर्ण रूप से स्वस्थ होने के बाद ही पूरी सुरक्षा के बीच उससे पूछताछ की बात कही है।

पीड़िता के परिवार ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि अगर पुलिस ने उनका साथ दिया होता, तो आज उनकी बेटी उनके पास होती। वो लोग लगातार युवती की बरामदगी की माँग कर रहे हैं। वहीं, पुलिस ने आकिल और राशिद के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर तलाश शुरू कर दी है।

कहानी Zomato के लालच और जबरदस्ती की: ‘डार्क किचन’ से लेकर रेस्टॉरेंट्स का बेड़ा गर्क करने तक

पिछले कुछ दिनों में जोमैटो को लेकर तरह-तरह के विवाद चल रहे हैं और कम्पनी ग़लत कारणों से सुर्ख़ियों में लगातार बनी हुई है। हलाल फ़ूड से लेकर मुस्लिम डिलीवरी बॉय तक, जोमैटो का विवादों से एक नाता सा जुड़ गया है। अब कई रेस्टॉरेंट्स जोमैटो से दूर हो रहे हैं। पक्षपात, मोनोपोली और डीप डिस्कॉउंटिंग के कारण डिलीवरी प्लैटफॉर्म्स और रेस्टॉरेंट्स के बीच खींचातानी चल रही है।

बिजनेस प्लान

जब जोमैटो की शुरुआत हुई, तब यह रेस्टॉरेंट्स की ऑनलाइन लिस्टिंग का कार्य करता था। एक पीले रंग के पेज खुलता था, जिसमें लोग विभिन्न रेस्टॉरेंट्स को रेटिंग दिया करते थे। वे अपने अनुभव शेयर करते थे कि खाना कैसा था, अनुभव कैसा रहा, माहौल कैसा था, स्टाफ कैसे थे इत्यादि। बाजार के बदलते समीकरणों और नए खिलाड़ियों के प्रतिस्पर्धा में उतरने के बाद जोमैटो ने नवंबर 2018 में ख़ुद को एक फ़ूड डिलीवरी एप्लीकेशन के रूप में बदल दिया।

क्या आपको पता है कि फ़ूड डिलीवरी के लिए जोमैटो रेस्टॉरेंट से कितने रुपए लेता है? जितने का बिल बनता है, उसका 18-25% जोमैटो उस रेस्टॉरेंट से ले लेता है। डिलीवरी फी के रूप में ग्राहकों को भी थोड़ा-बहुत ख़र्च करना पड़ता है। हालाँकि, यह कई अन्य चीजों पर भी निर्भर करता है। जोमैटो प्रचार के लिए ‘क्लिक पर व्यू’ का प्रयोग भी करता है, यानी किसी भी रेस्टॉरेंट को अपने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दिखाना। इसका मतलब यह हुआ कि उस रेस्टॉरेंट को होमपेज पर खास जगह दी जाती है।

किस क्षेत्र में रेस्टॉरेंट्स को फ़्लैश किया जाएगा, यह पहले से ही निर्धारित होता है। इसके अलावा कम्पनी ‘जोमैटो गोल्ड’ की भी सुविधा देती है, जिसमें कुछ रेस्टोरेंट्स के द्वारा एक पर एक फ्री जैसी सुविधाओं का लाभ ग्राहकों को दिया जाता है। इसके लिए रेस्टॉरेंट्स से भी रुपए लिए जाते हैं। कितने रुपए लिए जाते हैं, यह रेस्टॉरेंट की लोकप्रियता, मोलभाव की क्षमता और लोकेशन के आधार पर तय किया जाता है। ग्राहकों को ‘गोल्ड’ की वार्षिक सदस्यता के लिए चार्ज किया जाता है।

रेटॉरेंट्स ग्राहकों की संख्या बढ़ाने के लिए ‘जोमैटो गोल्ड’ की सदस्यता लेते हैं। इसके तहत नियम है कि डिस्काउंट का लाभ उठाने के लिए रजिस्टर्ड यूजर के साथ कम से कम एक और व्यक्ति होना चाहिए। रेटॉरेंट्स भी सारी फ़ूड आइटम्स पर ऑफर का लाभ नहीं देते।

डार्क किचन

जोमैटो और स्विगी, दोनों ही भोजन की डिलीवरी करते हैं। डिलीवरी करने वाले कर्मचारी ग्राहकों को रेस्टॉरेंट्स से खाना पहुँचाते हैं और साप्ताहिक रूप से ग्राहकों द्वारा दिए गए रुपयों को रेस्टॉरेंट्स को ट्रांसफर करते हैं। लेनदेन रेस्टॉरेंट और ग्राहक के बीच होता है, जबकि जोमैटो और स्विगी एक मध्यस्थ की भूमिका निभाते हैं। इसीलिए ग्राहकों का डेटा भी रेस्टॉरेंट्स द्वारा ही लिया जाता है। लेकिन, जोमैटो और स्विग्गी ने यहीं से गड़बड़ियाँ शुरू कर दीं।

दोनों कंपनियों ने न सिर्फ़ ग्राहकों का डेटा चुराया बल्कि उसका इस्तेमाल करते हुए कई इलाक़ों में अपने ‘डार्क किचन’ स्थापित किए हैं। यह ग्राहकों के विश्वास के साथ धोखा है और उनकी प्राइवेसी का भी हनन है। संसद में एक ऐसा बिल भी इंट्रोड्यूस हो चुका है, जिसमें प्राइवेसी को किसी भी नागरिक का मूलभूत अधिकार बताया गया है और यह पास हुआ तो ऑनलाइन पोर्टल्स द्वारा ग्राहकों के डेटा का ग़लत उपयोग अपराध की श्रेणी में आ जाएगा।

अभी का विवाद क्या है?

हाल के कुछ दिनों में जोमैटो, स्विगी, उबेरीट्स और फ़ूडपांडा ने अपने-अपने प्लैटफॉर्म्स पर ग्राहकों की संख्या बढ़ाने के लिए पूरा ज़ोर लगा दिया है। कुछ ने भारी डिस्काउंट के जरिए ग्राहकों को लुभाने का प्रयास किया है। इन्होने कई ऐसे रस्टॉरेंट्स को इस ऑफर में शामिल किया, जो इंडस्ट्री में तरफदारी को बढ़ावा देता है। ऑनलाइन प्लैटफॉर्म्स पर मिल रहे ऑफर्स का लाभ उठाने के लिए लोगों ने भी रेस्टोरेंट्स में जाना कम कर दिया। अतः, इससे बिजनेस लाइन के ऊपर और नीचे, दोनों पायदानों को नुकसान पहुँचाया।

जनवरी 2019 में कई छोटे व मँझोले रेस्टॉरेंट्स ने प्रधानमंत्री कार्यालय को शिकायत देकर इस अनुचित व प्रतिबंधक ट्रेड प्रैक्टिस के बारे में सूचित किया और उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया। ‘उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग’ ने इन कंपनियों के अधिकारियों को इस मामले पर बात करने के लिए तलब भी किया। इस बैठक के बाद जोमैटो ने अपने सभी ‘गोल्ड’ रेस्टॉरेंट्स को बता दिया कि अगस्त 14, 2019 को इसके तहत फिलहाल मिलने वाले सारे ऑफर्स ख़त्म हो जाएँगे और ‘गोल्ड’ का लाभ अब सिर्फ़ रेस्टॉरेंट जाकर खाने वालों को नहीं बल्कि ऑनलाइन ऑर्डर करने वालों को भी मिलेगा।

जोमैटो की O2 स्कीम के तहत, रेस्टॉरेंट ग्राहकों के पसंद का एक फ़ूड आइटम उन्हें मुफ्त में देगा और नेट बिल का 18-25% कमीशन भी पे करेगा। इससे रेस्टॉरेंट को ग्रॉस इनवॉइस का 38-42% हिस्सा ही मिलेगा। जोमैटो से रेस्टॉरेंट्स को दिक्कत यह है कि कम्पनी ने अपना कमीशन कम नहीं किया और डिस्काउंट का कोई भी हिस्सा वहन करने से मना कर दिया। अब रेस्टॉरेंट्स खफा हैं और जोमैटो के ख़िलाफ़ ‘लॉगआउट’ अभियान चला रहे हैं।

अब जोमैटो ने इन सभी रेस्टॉरेंट्स को लीगल नोटिस भेज दिया है। चूँकि, लॉगआउट करने के लिए 45 दिनों के नोटिस पीरियड की समयावधि तय थी, जोमैटो ने इन सबके ख़िलाफ़ अदालत जाने की धमकी दी है।

अभी की स्थिति क्या है?

लीगल नोटिस मिलने के बाद रेस्टॉरेंट्स और भी ज्यादा उग्र हो गए हैं और जोमैटो के ख़िलाफ़ अभियान चला रहे हैं। अब जोमैटो इस स्थिति को किसी तरह संभालने के लिए रेस्टॉरेंट्स को बातचीत करने के लिए कह रहा है। जोमैटो के सीईओ ने ट्वीट कर बातचीत के लिए कहा लेकिन उन्होंने लगे हाथ रेस्टॉरेंट्स को कॉस्ट घटाने और अच्छे तरीके से प्रबंधन करने की सलाह दे डाली। रेस्टॉरेंट्स के मालिकों में इससे ग़लत सन्देश गया।

जोमैटो: लालच की एक नई कहानी

जोमैटो व उसकी प्रतिस्पर्धी कंपनियों ने फ़ूड सेक्टर को इतना नुकसान पहुँचाया है कि अब सब कुछ सामान्य नहीं रहा। अगले राउंड की फंडिंग के चक्कर में इन्होने रेस्टॉरेंट्स की ऐसी की तैसी कर दी है। ख़ासकर छोटे व मँझोले रेस्टॉरेंट्स खाना और प्रबंधन का खर्च अपने उत्पाद बेच कर ही निकालती है। दीपेंद्र गोयल इस मामले में एकदम विफल साबित हुए हैं।

छोटे रेस्टॉरेंट्स को लगातार धमकाने में लगे जोमैटो ने बड़ी चालाकी से अपनी कॉन्ट्रैक्ट पॉलिसी में भी इच्छित बदलाव कर दिया। एक तरफ रेस्टॉरेंट्स से भी रुपए लेना और फिर ग्राहकों से भी वसूलना, दोनो हाथों में लड्डू रख कर व्यापार करने के लिए जोमैटो ख़ुद के लाभ के लिए कुछ भी करता जा रहा है।

(अंकुर पांडेय और चंद्रभूषण जोशी द्वारा OpIndia में लिखे अंग्रेजी लेख का हिंदी अनुवाद अनुपम के सिंह ने किया है।)