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सलमान ने अपनी ही बेगम की ‘गंदी’ फोटो और फोन नंबर डाल दिया फेसबुक पर, हुआ गिरफ्तार

मेरठ के रहने वाले सलमान पर आरोप है कि उसने बेगम से झगड़ा होने पर उसकी फेसबुक पर नकली आईडी बना कर अश्लील फोटो अपलोड कर दी। महिला द्वारा पुलिस से शिकायत करने पर सलमान और उसके परिवार के चार लोगों पर मुकदमा दर्ज कर सलमान को गिरफ्तार कर लिया गया है। सलमान पर आरोप आईटी एक्ट की गंभीर धाराओं के अंतर्गत लगे हैं।

दहेज एक्ट में पत्नी ने दर्ज कराया मुकदमा

शाहजहाँपुर निवासी पत्नी के आरोपों के अनुसार जून 2018 में सलमान से निकाह होने के बाद दोनों के बीच दहेज को लेकर विवाद होने लगा, जिसके बाद पत्नी ने सलमान के खिलाफ दहेज-निरोधी अधिनियम (498A) और घरेलू हिंसा अधिनियम का मुकदमा किठौर थाने में दर्ज कराया था। लेकिन सलमान को उच्च न्यायालय से से स्टे मिल गया। इसके बाद पत्नी जनवरी, 2019 में मायके आ गई।

इसी कालखंड में उसकी नकली फेसबुक आईडी बनी और उसकी अश्लील तस्वीर प्रोफाइल पिक्चर में लगा कर अनजान लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी गई। आईडी पर उसकी और भी अश्लील तस्वीरें डालीं गईं और उसका असली फ़ोन नंबर भी प्रदर्शित था। जब महिला को अनजान लोगों के फ़ोन आने लगे तो उसने पुलिस को इत्तला दी।

साइबर सेल ने किया गिरफ़्तार

पुलिस की साइबर क्राइम सेल ने मामले की तहकीकात शुरू की। पहले तो IP एड्रेस फेसबुक से प्राप्त कर जिस डिवाइस (मोबाइल) से यह आईडी बनी और तस्वीरें अपलोड हुईं, उसकी जानकारी निकलवाई गई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मोबाइल का IMEI नंबर मिलने के बाद पुलिस को पता चला कि इस मोबाइल में जो नंबर लगा है, वह शिकायतकर्ता के ही शौहर सलमान के नाम पर रजिस्टर्ड है।

साइबर क्राइम सेल और किठौर पुलिस ने जब सलमान को गिरफ्तार किया तो दावा किया कि उसके मोबाइल में शिकायतकर्ता पत्नी के और भी कई अश्लील फोटो मिले। सलमान को गिरफ्तार करने के साथ ही पत्नी की तहरीर पर जेठ कामरान, जेठानी हिना, बहन रिजवाना, ससुर उमरदराज के खिलाफ आईटी एक्ट सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। हालाँकि, पुलिस ने आश्वस्त किया है कि दोषी पाए जाने पर ही अन्य आरोपितों के खिलाफ वह कोई कार्रवाई करेगी।

चोटी काटो और 12000 रुपए इनाम में ले जाओ… मोईन सिद्दीकी (चोटी कटवा) हुआ गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश, बरेली के किला थाने में हुए हंगामे के बाद पुलिस ने ‘चोटी कटवा’ को गिरफ्तार कर लिया। चोटी कटवा मोईन सिद्दीकी नूरी ने शनिवार को प्रेस कॉफ्रेंस कर केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की बहन व मेरा हक फाउंडेशन की अध्यक्ष फरहत नकवी व निदा खान को तीन दिन के भीतर देश छोड़ देने की धमकी दी थी। इस बाबत उसने फतवा भी जारी किया था। वैसे यह पहली बार नहीं है। मोईन इससे पहले भी दोनों महिलाओं की चोटी काटने और पत्थर मारकर देश से बाहर निकालने का फतवा जारी कर विवादों में रह चुका है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बरेली में सिर कलम करने से लेकर कई ऊल जलूल बयान देने और वीडियो वायरल करने के आरोपित मोईन सिद्दीकी उर्फ चोटी कटवा इससे पहले भी दोनों महिलाओं की चोटी काटने और पत्थर मारकर देश से बाहर निकालने का फतवा जारी कर चुका है। मोईन वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी का सर कलम करने पर भी इनाम की घोषणा कर चुका है। वहीं, रविवार को किला थाने में केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की बहन और मेरा हक़ फाउंडेशन की अध्यक्ष फरहत नक़वी ने दर्जनों तलाक़शुदा महिलाओं के साथ मोईन सिद्धकी की गिरफ्तारी को लेकर धरना भी दिया था।

फरहत नकवी ने किला पुलिस को बताया था की उन्हें जान का खतरा है। उनके साथ कभी भी कोई अप्रिय घटना हो सकती है। बता दें कि मोईन सिद्दीकी ने एक साल पहले चोटी काटने पर 12 हजार रूपये का इनाम रखा था और जान से मारने की धमकी भी दी थी। तब से वह खुलेआम घूम रहा था। लेकिन फरहत नकवी द्वारा पुलिस की कार्यशैली की कार्यशैली पर सवाल खड़े करने पर किला पुलिस ने चोटी कटवा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर घर में दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया।

हालाँकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह भी कहा जा रहा है कि गिरफ्तार होने के बाद चोटी कटवा ने कहा कि मीडिया की सुखियाँ बनने के लिए फरहत नकवी और निदा खान ने षडयंत्र रचा था। उन्होंने विवादस्पद बयान देने के लिए रुपए देने का वायदा किया था। वे चाहती थीं कि तीन तलाक का मुद्दा उठाकर वह सरकार में मंत्री बन जाएँ। निदा फरहत महिलाओं को ठग रहीं हैं। देश और संविधान को बदनाम कर रहीं हैं। ऐसी महिलाओं से शासन और प्रशासन को सतर्क रहना चाहिए। मैं अपने बयान पर अडिग हूँ। मैंने देश से निकालने का कोई बयान नहीं दिया। किसी धर्म जाति और व्यक्ति से मेरी रंजिश नहीं है।

14411 हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर सुरक्षाबलों को गालियाँ दे रहे पाकिस्तानी

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के निरस्त किए जाने के बाद से सरकार वहाँ पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की पूरी कोशिश कर रही है। इसके मद्देनज़र सीआरपीएफ ने कश्मीर में आम जनता की सहायता के लिए मददगार हेल्पलाइन लॉन्च की, ताकि कश्मीर के बाहर रह रहे लोग अपने परिजनों का हाल-चाल जान सकें। मगर कुछ पाकिस्तानियों ने इसे भड़ास निकालने की जगह बना ली है।

बता दें कि इस हेल्पलाइन पर 11 अगस्त से 16 अगस्त के बीच 7,071 कॉल्स आईं। जिसमें से 171 कॉल्स भारत के बाहर से आईं और 2,700 कॉल्स राज्य में तैनात सुरक्षाकर्मियों के परिवारों से आईं। लोग हेल्पलाइन पर फोन कर अपने परिवार और रिश्तेदारों की खैरियत मालूम कर रहे थे। इस दौरान हेल्पलाइन पर कुछ कॉल्स पाकिस्तान की तरफ से भी आए। पाकिस्तान की तरफ से कॉल करने वालों में से कुछ कॉलर्स ने तो अपनों की खैरियत के बारे में पूछा मगर कुछ ने तो सुरक्षा बलों को ही खरी-खोटी सुना दी। पाकिस्तान से फोन करने वाले  कुछ लोगों ने सुरक्षा बलों को जमकर अपशब्द कहे और भड़ास निकाली।

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर का स्क्रीनशॉट

कुल 22 देशों से कश्मीर में अपनों का हाल जानने के लिए फोन आए। इनमें से 39 यूएई से, 12 कुवैत से, 8 इजरायल और मलयेशिया से, 7 रूस से, 6 यूएस और तुर्की से, 5 ऑस्ट्रेलिया से, 4 यूके, सिंगापुर और बांग्लादेश से, 3 फोन कॉल्स कनाडा, बहरीन, जर्मनी, फिलीपींस और थाइलैंड से फोन कॉल्स आए। इसके साथ ही, 2 ओमान, फ्रांस और बेल्जियम से जबकि 1 फोन कॉल चीन और एक कतर से आया। हेल्पलाइन नंबर पर अधिकतम कॉल (2,448) राज्य के बाहर रहने वाले कश्मीरियों के थे, जबकि 1,752 कॉल कश्मीर के बाहर गैर-कश्मीरियों द्वारा किए गए थे। हेल्पलाइन नंबर 14411 पर 11 अगस्त से 16 अगस्त के बीच सउदी अरब से 45 कॉल्स आईं हैं।

जम्मू-कश्मीर प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से हुई बातचीत में बताया कि उन्हें भी कई पाकिस्तानी नंबरों से फोन आए थे, कुछ सही मायने में कश्मीर में रिश्तेदारों की खैरियत के बारे में पूछताछ करते हैं, लेकिन कुछ पाकिस्तानी सिर्फ गालियाँ देने और अपशब्द कहने के लिए ही फोन करते हैं।

जहाँगीर ने 45 लड़कियों से किया रेप, पत्नी किरण वीडियो बनाकर बेचती थी एडल्ट वेबसाइट्स को

पाकिस्तान से बलात्कार की एक ऐसी घटना सामने आई है जिसमें पति और पत्नी दोनों मिलकर लड़कियों के यौन शोषण के अपराध में शामिल थे। कासिम जहाँगीर नामक इस आरोपित पर 45 लड़कियों का बलात्कार और यौन शोषण का आरोप है, जिसमें उसका साथ उसकी पत्नी देती रही।

जियो टीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के रावलपिंडी में रहने वाले इस कपल ने यह अपराध खुद स्वीकार किया है। पुलिस ने आरोपित कासिम जहाँगीर और उसकी पत्नी किरण महमूद को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों पति-पत्नी लड़कियों को बन्दूक दिखाकर बलात्कार और यौन शोषण करने के बाद उनके अश्लील फोटो और वीडियो बनाकर इंटरनेशनल ट्रेडर्स और एडल्ट वेबसाइट्स को बेच देते थे।

स्थानीय पुलिस अफसर (CPO) मोहम्मद फैसल राणा का कहना है कि इस कपल ने 10 पीड़ितों के अश्लील वीडियो बनाने की बात कबूली है और उनसे 1,000 से ज्यादा खींची हुई अश्लील तस्वीरें बरामद हुई हैं। अल्लामा इकबाल ओपन यूनिवर्सिटी की एक एमएससी की छात्रा की ओर से शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की है। ये पति-पत्नी इन वीडियो और तस्वीरों को पोर्न वेबसाइट्स को बड़ी रकम के बदले बेच दिया करते थे। इस कपल ने 8-10 साल की लड़कियों के साथ भी बलात्कार की बात कबूली है।

एमएससी में पढ़ने वाली एक पीड़िता शादीशुदा छात्रा ने शिकायत में बताया था कि उसे जॉर्डन कॉलेज के बाहर से चाकू दिखाकर किडनैप कर आरोपितों के घर ले जाया गया। इसके बाद जब कासिम जहाँगीर बन्दूक दिखाकर उसका बलात्कार करता रहा, उसी वक़्त जहाँगीर की पत्नी किरण महमूद वीडियो बनाती रही। इसके बाद पीड़िता को वीडियो और तस्वीरों के नाम पर ब्लैकमेल किया गया।

फिलहाल पुलिस ने कहा है कि लैपटॉप, हार्डडिस्क, 2 मोबाइल फोन जब्त कर के फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजा गया है। आरोपितों के घर से बेड शीट्स, टिश्यू पेपर और अन्य कागजात भी डीएनए जाँच के लिए भेजे गए हैं।

पत्नी किरण महमूद को अभी न्यायिक हिरासत में अदिआला जेल भेज दिया गया है, और उसके पति कासिम जहाँगीर को पुलिस रिमांड में रखा गया है। पुलिस अधिकारी ने कपल से जुड़ी घटनाओं के लिए अलग-अलग मामले दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

हाफिज सईद टेरर फंडिंग मामला: ₹2 करोड़ रिश्वत माँगने के आरोप में 3 NIA अधिकारियों का ट्रांसफर

एनआईए के 3 अधिकारियों को एजेंसी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है क्योंकि उन पर एक कारोबारी से 2 करोड़ रुपए रिश्वत माँगने का आरोप लगा है। टेरर फंडिंग की जाँच प्रक्रिया के दौरान इन अधिकारियों ने कारोबारी से घूस माँगा और उसका नाम न शामिल करने का भरोसा दिया। यह पूरा मामला हाफिज सईद की संस्था के ख़िलाफ़ जाँच से सम्बंधित है। इन अधिकारियों में समझौता ब्लास्ट जाँच के मुख्य अधिकारी भी शामिल हैं।

मुंबई हमलों का साज़िशकर्ता हाफिज सईद द्वारा संचालित संस्था फलाह-ए-इंसानियत के डेप्युटी चीफ शाहिद महमूद और अन्य लोगों के खिलाफ दिल्ली और हरियाणा में आतंकवादी नेटवर्क तैयार करने के आरोप में एनआईए ने पिछले वर्ष मामला दर्ज किया था। एनआईए ने इस मामले में शुरुआत में दिल्ली निवासी दो आरोपितों, मोहम्मद सलमान और मोहम्मद सलीम को गिरफ़्तार भी किया था। इसके बाद राजस्थान स्थित नागौर का रहने वाला मोहम्मद हुसैन एनआईए के शिकंजे में आया था।

इसके बाद एनआईए ने एक अन्य आरोपित मोहम्मद आरिफ गुलाम बशीर धरमपुरिया को यूएई से प्रत्यर्पित कर भारत लाने में सफलता पाई। इस मामले में हाफ़िज़ सईद के ख़िलाफ़ भी चार्जशीट दायर की जा चुकी है। हालाँकि, अभी तक एनआईए ने आरोप के सही होने की कोई पुष्टि नहीं की है और कहा है कि डीआईजी लेवल के अधिकारी के नेतृत्व में चल रही जाँच के बाद ही इस बारे में कुछ कहा जा सकेगा।

एनआईए को इस सम्बन्ध में एक महीने पहले ही शिकायत मिली थी। एनआईए ऐसी आरोपों को गंभीरता से लेता है और सबसे पहली कार्रवाई के रूप में अधिकारियों को एजेंसी से बाहर ट्रांसफर कर दिया जाता है। एनआईए ने कहा कि ट्रांसफर का मतलब यह नहीं होता कि आरोप सही हैं। अभी तक जाँच पूरी नहीं हुई है लेकिन किसी भी प्रकार की फिरौती लेने की बात को एनआईए ने खारिज कर दिया है।

200 पूर्व सांसदों को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस, कॉन्ग्रेस ने बताया मोदी का निष्ठुर फरमान

लोकसभा की हाउसिंग कमिटी ने सभी पूर्व सांसदों को सरकारी आवास खाली करने के लिए 7 दिनों की समय सीमा दी है। कमिटी की अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि जो पूर्व सांसद सरकारी आवास खाली करने में आनाकानी कर रहे हैं, उनके घर में बिजली और पानी की सप्लाई काट दी जाएगी। ऐसा करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दे दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, 200 ऐसे पूर्व सांसद हैं जो अभी भी सरकारी आवासों में जमे हुए हैं।

नियम के मुताबिक़, अगर कोई सांसद दोबारा नहीं चुना जाता है तो उन्हें पिछली लोकसभा भंग होने के एक महीने के भीतर सरकारी आवास खाली करना होता है। 16वीं लोकसभा भंग हुए लगभग 3 महीने हो चुके हैं लेकिन पूर्व सांसद अभी भी सरकारी आवासों में डेरा जमा कर बैठे हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू में सांसदों के लिए बने डुप्लेक्स फ्लैट्स का उद्घाटन करते हुए भी इस पर बात की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि नए सांसदों को दिल्ली पहुँचने के बाद आवास खोजने में काफ़ी समस्याएँ आती हैं। उन्होंने कहा कि अब इस समस्या के समाधान के लिए कोशिश हो रही है। पीएम ने कहा, “एक सांसद होने का अर्थ है कि आप किसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और उस क्षेत्र के लोग आपसे मिलने के लिए आते रहते हैं। ऐसे लोगों के लिए भी रहने की व्यवस्था करनी पड़ती है।“

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे आनंद शर्मा ने सांसदों को सरकारी आवास खाली करने वाली नोटिस को लेकर सीधा प्रधानमंत्री पर हमला बोला है। कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि ‘मोदी का यह निष्ठुर फरमान’ एक तरह की मनमानी है और भेदभाव करने वाला है। उन्होंने कहा कि एक पूर्व सांसद को क्लर्क ने भी कम वेतन मिलता है, जबकि केंद्रीय सचिवों को आवास खाली करने के लिए 6 महीने का लम्बा समय दिया जाता है।

सरकार ने एक लोकसभा पैनल का गठन किया था, जिसने पूर्व सांसदों को आवास खाली करने के लिए 7 दिनों की समय सीमा निर्धारित की। इसके बाद उन्हें हाउसिंग कमिटी की तरफ से नोटिस मिला।

महिला के साथ मारपीट: AAP विधायक मनोज कुमार को 7 दिन कैद की सजा

आम आदमी पार्टी के विधायक मनोज कुमार को दिल्ली की एक अदालत ने 2014 में महिला के साथ मारपीट के जुर्म में 7 दिन कैद की सजा सुनाई। अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल ने कहा, “विधायक एक लोकसेवक हैं, इसलिए यह उनका दायित्व है कि वह उन लोगों से निष्पक्षता और विनम्रता से मिलें जो उनके पास समस्याएँ लेकर आते हैं।”

प्रोबेशन पर छोड़े जाने की अपील ठुकराते हुए अदालत ने कहा कि विधायक को पहले भी एक अन्य मामले में दोषी ठहराया गया है और 3 महीने की कैद और 10 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। इसलिए, इस मामले में निवारण के लिए सजा देना जरूरी है। अदालत ने बताया कि मनोज कुमार को आईपीसी की धारा 352 के तहत 7 दिनों की साधारण कैद और 500 रुपए का जुर्माने की सजा सुनाई गई है।

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर का स्क्रीनशॉट

दोषी द्वारा सजा के खिलाफ अपील किए जाने की बात कहने के बाद अदालत ने मनोज कुमार को 10 हजार रुपए के निजी मुचलके और इतनी ही रकम की जमानत राशि पर 30 दिनों के लिए जमानत दे दी।

गौरतलब है कि, 2014 में एक महिला AAP विधायक के पास जलभराव की शिकायत लेकर गई थी। महिला का आरोप था कि विधायक ने उसके साथ अभद्रता और मारपीट भी की। इससे पहले कोंडली सीट से आम आदमी पार्टी के विधायक मनोज कुमार को 2013 में हुए विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया में बाधा डालने के मामले में दोषी पाया गया था।

चंद्रमा की कक्षा में चंद्रयान-2: दो सितंबर को अगली परीक्षा, 7 को साउथ पोल पर उतरेगा

भारत ने अंतरिक्ष में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। चंद्रयान- 2 मंगलवार (अगस्त 20, 2019) को चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कर गया। चंद्रयान-2 मंगलवार सुबह 9.02 बजे चंद्रमा की कक्षा में पहुँचा। 23 दिन पृथ्वी के चक्कर लगाने के बाद चंद्रमा की कक्षा में पहुँचने में इसे 6 दिन लगे।

चंद्रमा की कक्षा में पहुँचने के बाद यान 13 दिन तक चक्कर लगाएगा। 7 सितंबर को वह चंद्रमा के ‘साउथ पोल’ पर उतरेगा।

चंद्रयान- 2 के चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करने के तुरंत बाद इसरो के अध्यक्ष के सिवन ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि चंद्रयान -2 में चंद्रमा की कक्षा में भारत के चंद्रयान का प्रवेश 30 मिनट का तनावपूर्ण ऑपरेशन था। जैसे-जैसे समय निकल रहा था तनाव और चिंता बढ़ती जा रही थी, लेकिन यान के चंद्रमा कक्ष में सफलतापूर्वक प्रवेश करना राहत और खुशी की बात है। उन्होंने कहा, “हम एक बार फिर से चाँद पर जा रहे हैं।”इस यात्रा का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव दो सितंबर को आएगा।

इससे पहले सोमवार (अगस्त 19, 2019) को सिवन ने बताया था कि चाँद की कक्षा में आने के बाद चंद्रयान-2 चाँद की चार कक्षाओं से होकर गुजरेगा, जिसके बाद यह चाँद की अंतिम कक्षा में दक्षिणी ध्रुव पर करीब 100 किमी ऊपर से गुजरेगा। इसी दौरान 2 सितंबर को यान का विक्रम लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा। विक्रम चार दिन तक 30 गुणा 100 किमी के दायरे में चाँद का चक्कर लगाएगा। इसके बाद यह चाँद के दक्षिणी ध्रुव में सतह पर 7 सितंबर को प्रवेश करेगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक, चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग इसरो के लिए इस मिशन की सबसे बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि वहां हवा नहीं चलती और गुरुत्वाकर्षण बल भी हर जगह अलग-अलग होता है।

ममता दीदी के राज में बंगाल के बच्चे ‘मिड डे मील’ के नाम पर खा रहे नून-भात

ममता बनर्जी के राज में पश्चिम बंगाल के बच्चे मिड डे मील में चावल और नमक खाने को विवश हैं। हुगली के बालिका बानी मंदिर स्कूल में छात्रों को ‘मिड डे मील’ के नाम पर नून-चावल दिया जा रहा है। इसकी सूचना मिलते ही हुगली की सांसद व बंगाल भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष लॉकेट चटर्जी ने स्कूल का औचक निरीक्षण किया और ख़बर को सही पाया।

सांसद ने देखा कि न सिर्फ़ छात्रों को नून-चावल खिलाया जा रहा है, बल्कि बोर्ड पर मेनू में भी नून-चावल लिखा हुआ है। इस प्रकरण का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। स्कूल में कुल 1200 छात्र-छात्राएँ हैं, जिनमें से कक्षा पाँचवीं से आठवीं तक के 600 छात्र-छात्राओं को नमक-चावल खाने में दिया जा रहा है। चिनसुरा नगरपालिका के अध्यक्ष के अध्यक्ष टीएमसी नेता गौरीकान्त मुखर्जी उक्त स्कूल की मैनेजिंग कमिटी के अध्यक्ष हैं। भाजपा सांसद लॉकेट चटर्जी ने गौरीकान्त मुखर्जी पर सरकारी फंड्स के दुरूपयोग का आरोप लगाया है।

स्कूल में पिछ्ले एक हफ्ते से बच्चों को लंच में नमक-चावल दिया जा रहा था। स्कूल में टीचर इंचार्ज भी नहीं है, जिसके हस्ताक्षर के बाद मिड डे मील के लिए ज़रूरी सामान ख़रीदे जाते हैं। हुगली के डीएम ने कहा कि मामले की जाँच के लिए कमिटी गठित की गई है और जो भी दोषी पाए जाएँगे, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी। राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा कि इस तरह की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सांसद लॉकेट चटर्जी ने कहा कि सूचना मिली थी कि छात्रों के मिड डे मील के लिए 25,000 रुपए में 5000 अंडे ख़रीदे गए हैं लेकिन फिर भी छात्रों को खाने के लिए एक भी अंडा नहीं दिया गया। स्कूल में मिड डे मील के लिए रखा 257 किलो चावल गायब हो गया है। सांसद चटर्जी ने पूछा कि किस मंत्री या नेता ने बच्चों के खाने के साथ बेईमानी की है?

तृणमूल नेता गौरीकान्त मुखर्जी ने मिड डे मील इंचार्ज के रूप में जबरन अपने विश्वस्त शिक्षक को नियुक्त कर दिया था लेकिन अन्य शिक्षकों द्वारा उच्चाधिकारियों को शिकायत करने के बाद इस प्रक्रिया को रोकना पड़ा। इस वर्ष जून में सिर्फ़ 18 दिन ही बच्चों को मिड डे मील दिया गया। मुखर्जी ने आरोप लगाया है कि कुछ शिक्षकों ने एक योजना के तहत जानबूझ कर छात्रों को नून-चावल दिया ताकि भाजपा इसे एक मुद्दा बना सके।

केरल: रेपिस्ट पादरी के खिलाफ आवाज उठाने वाली नन को बंधक बनाया, प्रार्थना करने से रोका

केरल की सिस्टर लूसी कलपूरा को कॉन्वेंट में बंधक बनाने और प्रार्थना से रोके जाने का मामला सामने आया है। घटना सोमवार की है। कलपूरा को बंधक बनाने के आरोप में कॉन्वेंट के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है।

रेप के आरोपी बिशप फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ कोच्चि में हुए प्रदर्शनों में शामिल होने के कारण सिस्टर लूसी को पिछले दिनों चर्च की गतिविधियों से दूर कर कुराविलंगद कॉन्वेंट स्कूल छोड़ने के कहा गया था। उन्होंने इसके खिलाफ रोम के कैथोलिक चर्च में अपील कर रखी है।

लूसी ने बताया कि वह पिछले दो दिनों से कॉन्वेंट में नहीं थीं। रविवार को लौटी। सोमवार की सुबह जब प्रार्थना के लिए तैयार हुई तो कॉन्वेंट से निकल नहीं पाई। उसे बाहर से बंद कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने स्थानीय पुलिस को सूचना दी। पुलिस के दखल के बाद कॉन्वेंट का गेट खोला गया।

कैथोलिक क्रिश्चन सोसायटी फ्रासिस्कन क्लेरिस्ट कॉन्ग्रिगेशन (FCC) के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि संगठन से बर्खास्तगी के बाद उन्हें 17 अगस्त को कॉन्वेंट छोड़ देना चाहिए था। एफसीसी के अधिकारियों ने कलाप्पुरा की 85 वर्षीय माँ को भी फैसले से अवगत कराते हुए उन्हें वापस ले जाने के लिए कहा है।

लूसी का कहना है कि संगठन उन्हें कानूनी रूप से कॉन्वेंट छोड़ने के लिए नहीं कह सकता क्योंकि उन्होंने बर्खास्तगी फैसले के खिलाफ वेटिकन में अपील दायर कर रखी है।

गौरतलब है कि, सिस्टर लूसी ने दुष्कर्म के आरोपित बिशप के खिलाफ कार्रवाई की माँग को लेकर विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। उसके बाद FCC की उच्चस्तरीय समिति ने 11 मई को लूसी को बर्खास्त कर दिया। 7 अगस्त को उन्हें 10 दिनों के भीतर कॉन्वेंट खाली करने का फरमान सुनाया गया था।