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Pak ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्ष को लिखा लेटर, जवाब मिला – No Comments

भारत द्वारा कश्मीर पर लिए फैसले के बाद से पाकिस्तान लगातार संयुक्त राष्ट्र (UN) तक मामले को ले जाने की बात कर रहा था। जिसके संबंध में उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्ष को दखल देने के लिहाज से पत्र भी लिखा, लेकिन UNSC की अध्यक्ष ने पाकिस्तान के इस पत्र पर कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया है।

जानकारी के मुताबिक UNSC की अध्यक्ष ने न्यूयॉर्क में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पाकिस्‍तान द्वारा अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के संबंध में लिखे गए पत्र पर पूछे गए सवाल को गंभीरता से सुनने के बाद ‘नो कमेंट्स’ में जवाब दिया। साथ ही यूएन ने पाकिस्तान को 1972 शिमला समझौते का रास्ता भी दिखाया।

वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने भी गुरुवार (अगस्त 8, 2019) को जम्मू और कश्मीर में मौजूदा स्थिति पर अधिकतम संयम बरतने की अपील की और कश्मीर के समाधान के लिए पाकिस्तान को द्विपक्षीय शिमला समझौते का निर्देश दिया।

इसके अलावा अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भी अपने जारी बयान में स्पष्ट किया कि कश्मीर मसले पर अमेरिका की नीतियों में कोई बदलाव नहीं होगा।

मंत्रालय की प्रवक्‍ता मॉर्गन ओर्टागस ने मीडिया से बातचीत में बताया वह कश्मीर मामले पर काफी नजदीक से नजर बनाए हुए हैं। और कई मुद्दों पर वह भारत और पाकिस्तान के साथ काफ़ी नजदीक से काम कर रहे हैं। उनकी मानें तो अमेरिकी विदेश मंत्रालय के उप-सचिव जल्द ही भूटान और भारत का दौरा करेंगे। जहाँ वह दोनों देशों के साथ अमेरिका के संबंधों को और अच्छा बनाने पर गौर करेंगे।

गौरतलब है कि अमेरिका द्वारा अलग-अलग तरीकों से पाकिस्तान की दरख्वास्त खारिज होने के बाद पाकिस्तान अब चीन की शरण भी ले सकता है। क्योंकि इन दिनों विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी चीन के दौरे पर हैं। जहाँ वे चीन के विदेश मंत्री वांग यी और अन्य नेताओं से मुलाकात करेंगे और मुमकिन है कि इस दौरान वे जम्मू-कश्मीर का मुद्दा प्रमुखता से उठाएँगे।

UNSC की अध्यक्ष द्वारा पाकिस्तान पर ‘नो कमेंट्स’ वाली टिप्पणी करने से पहले अमेरिका के दो नेता भी पाकिस्तान को भारत के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने से बचने की बात बोल चुके हैं और उन्हें कह चुके हैं कि वह अपनी सरजमीं पर पल रहे आतंकी गुटों से निबटने पर ध्यान दें।

इन सबके अतिरिक्त बता दें कि अभी तक पाकिस्तान ने जिन देशों ने भी इस मसले पर मदद की गुहार लगाई है, सबसे पाकिस्तान को निशारा ही हाथ लगी है। क्योंकि ज्यादातर देश इसे भारत का आंतरिक मामला ही मानते हैं।

‘जय श्री राम के दुष्परिणाम बताएँ’- बंगाल के स्कूल ने 10वीं की परीक्षा में पूछे अजीब सवाल

पश्चिम बंगाल में ‘जय श्री राम’ का नारा फिर से सुर्ख़ियों में लौट आया है। हुगली जिले के स्कूल में परीक्षा के दौरान छात्रों से इस नारे को लेकर ऐसे अजीब सवाल पूछे गए, जो हैरतअंगेज हैं। दसवीं की परीक्षा के दौरान छात्रों से पूछा गया– “जय श्री राम नारे से समाज को होने वाले दुष्परिणाम बताएँ“। यह स्कूल पोलबा क्षेत्र में स्थित है। हालाँकि, मामला प्रकाश में आने के बाद स्कूल के शिक्षक ने माफ़ी माँग ली है।

इसके अलावा ‘कट मनी’ को लेकर भी सवाल पूछे गए। बता दें कि बंगाल में ‘कट मनी’ एक बहुत बड़ा मसला है, जिसने एक तरह से खुलेआम भ्रष्टाचार को आम बना दिया है। यहाँ सरकारी परियोजनाओं को स्वीकृत करने के एवज में और लाभार्थियों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाने के एवज में कई तृणमूल नेता फंड में से अपना हिस्सा निकाल लेते हैं, जिसे ‘कट मनी’ नाम दिया गया है। जनता ने कई बार इसे लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया।

स्कूल के टेस्ट में पूछा गया- “कट मनी लौटाने के फायदे बताएँ।” तृणमूल सरकार बार-बार कह चुकी है कि ‘कट मनी’ लेने वाले जनप्रतिनिधियों व नेताओं को आरोपित बना कर उन पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, हुगली के स्कूल द्वारा ‘जय श्री राम’ और ‘कट मनी’ को लेकर पूछे गए सवाल सुर्ख़ियों में हैं।

इससे पहले दक्षिण 24 परगना जिले के विष्णुपुर थाना के अंतर्गत आने वाले बाखराहाट उच्च विद्यालय में बाहरी लोगों ने घुस कर छात्रों की सिर्फ़ इसीलिए पिटाई की थी क्योंकि उन्होंने ‘जय श्री राम’ बोला था। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि पुलिस को मौके पर पहुँच कर लाठीचार्ज करना पड़ा, तब जाकर बाहरी उत्पातियों को भगाया जा सका। इस मामले को लेकर छात्रों व अभिभावकों ने विरोध प्रदर्शन किया था।

मध्य हावड़ा स्थित श्रीरामकृष्ण शिक्षालय से भी एक गंभीर मामला सामने आया था। यहाँ कक्षा एक में पढ़ने वाले एक छोटे बच्चे की सिर्फ़ इसीलिए पिटाई की गई थी क्योंकि उसने ‘जय श्री राम’ कहा था। इस पिटाई के बाद वो बच्चा स्कूल जाने से डरने लगा।

‘अमर्यादित आजम खान को 45 साल पहले निकाल दिया गया था AMU से, लगा था प्रवेश पर आजीवन प्रतिबंध’

अपने विवादित बयानों और हरकतों के कारण सुर्खियाँ में रहने वाले सपा के भू-माफिया नेता आजम खान के नाम पर एक नया खुलासा हुआ है। दरअसल, भाजपा लघु उद्योग प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय संयोजक आकाश सक्सेना ने AMU की अनुशासन समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया है कि आजम खान को उनके अमर्यादित आचरण के कारण अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) से निकाला गया था।

हालाँकि भाजपा नेता के इस दावे पर आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम ने जवाब देने से मना किया है। वे कहते हैं कि वे इस तरह के तुच्छ आरोपों का जवाब देना उचित नहीं समझते। जबकि आकाश सक्सेना ने AMU की अनुशासन समिति की कॉपी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भेजी है। साथ ही उनसे माँग की है कि आजम खान की सदस्यता समाप्त की जाए।

भाजपा नेता आकाश का दावा है कि आजम खान रामपुर के लोगों को झूठी कहानी सुनाते हैं कि आपातकाल के आंदोलन में भाग लेने की वजह से उनके खिलाफ कार्रवाई की गई थी। जबकि हकीकत ये है कि साल 1973-74 में आजम खान को उनके अमर्यादित आचरण के कारण निष्कासित कर दिया गया था।

एएमयू से प्राप्त अनुशासन समिति की रिपोर्ट के आधार पर आकाश ने दावा किया है कि एएमयू के तत्कालीन वाइस चांसलर प्रोफेसर एएम खुसरो के नेतृत्व वाली 9 सदस्यीय कमिटी ने 26 सितंबर 1975 को आजम खान को दोषी करार देते हुए हमेशा के लिए विश्वविद्यालय में उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। उस दौरान आजम खान एलएलएम के छात्र थे।

गौरतलब है कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस 45 साल पुराने मसले पर आजम खान का पक्ष जानने की बहुत कोशिश की गई लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया, जबकि उनके बेटे ने इस सवाल को निरर्थक करार समझते हुए कहा कि वे इन जवालों के जवाब देना उचित नहीं समझते। इन पर कानूनी कार्रवाई होगी।

शत्रु संपत्ति मामले में आजम पर एक और मुकदमा दर्ज

बता दें कि समय के साथ भू-माफिया आजम खान की मुश्किलें कम होने की बजाए बढ़ती जा रही हैं। एक ओर जहाँ भाजपा नेता ने उनकी सदस्यता रद्द करने की माँग की है, वहीं रामपुर शहर कोतवाली में आजम खान समेत 4 के खिलाफ शत्रु संपत्ति के मामले में मुकदमा भी दर्ज हुआ है। इस बार उन पर आरोप है कि रामपुर के तत्कालीन एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (ईओ) ने आजम खान और उनके जौहर विश्वविद्यालय ट्रस्ट को फायदा पहुँचाने के लिए कागजों में हेराफेरी कर गलत नोटिस जारी किया था। आजम खान पर यह मुकदमा नायब तहसीलदार की तरफ से दर्ज कराया गया है।

जानकारी के मुताबिक रामपुर में सींगनखेड़ा इलाके में स्थित शत्रु संपत्ति को पहले इन लोगों ने मिलीभगत से वक्फ में दर्ज कराया और फिर उस संपत्ति के बारे में कब्जा जमा होने का नोटिस जारी कर दिया। जिसके बाद आजम खान ने इसे अपने ट्रस्ट में शामिल कर लिया।

‘J&K में 435 ध्वस्त किए गए मंदिरों का पुनर्निर्माण करे सरकार, न कर सके तो हमें सौंप दे यह कार्य’

अनुच्छेद 370 के अहम प्रावधानों के जाते ही जम्मू कश्मीर विशेष राज्य नहीं रहा और राज्य के पुनर्गठन का भी निर्णय लिया गया। अब जम्मू कश्मीर विधायिका सहित केंद्र शासित प्रदेश होगा वहीं लद्दाख विधायिका रहित केंद्र शासित प्रदेश होगा। 370 के पर कतरे जाने के बाद अब अखिल भारतीय संत समिति और विश्व हिन्दू परिषद सहित तमाम हिन्दू संगठन भी सक्रिय हो गए हैं क्योंकि सवाल राज्य में तोड़ डाले गए सैकड़ों मंदिरों व देवस्थानों का है।

दोनों ही संगठनों ने माँग की है कि जम्मू कश्मीर में ध्वस्त कर दिए गए 435 मंदिरों का पुनर्निर्माण किया जाना चाहिए। संत समाज ने माँग की है कि अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो सरकार यह कार्य उन्हें ही सौंप दे। साथ ही मंदिरों को नुकसान पहुँचाने वाले असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई करने की माँग भी की गई है। हिन्दू संगठनों ने कहा कि कश्मीरी पंडितों के पलायन के बाद वहाँ की कई मंदिरों को तोड़ डाला गया।

दोनों संगठनों ने सरकार को याद दिलाया कि विस्थापितों को राज्य में बसाना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। हिन्दू संगठनों ने कहा, “जो परिवार अपनी जन्मभूमि वापस नहीं जाना चाहते, उनकी संपत्ति का सरकार इस्तेमाल करे और ऐसे सभी परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। यह सब सरकार का दायित्व है।” संत समाज ने सरकार को अपने ही देश में शरणार्थी बन कर रह रहे कश्मीरी हिन्दुओं की याद दिलाते हुए उनकी भलाई के लिए काम करने को कहा।

राम मंदिर से सम्बंधित सुनवाई और अनुच्छेद 370 को लेकर शनिवार (अगस्त 10, 2019) को संत समाज की अहम बैठक भी होनी है, जिसमें महत्वपूर्ण मुद्दों व ताज़ा घटनाक्रम पर संगठन अपना रुख साफ़ करेगा। सम्मलेन में आगे की रणनीति भी तय जाएगी। संत समाज ने जनता को आश्वासन दिया कि राम मंदिर पर चल रही नियमित सुनवाई पर उसकी नजरें लगातार बनी हुई हैं।

MP: मुख्तयार खान ने 14 साल के लड़के से चटवाई टॉयलेट सीट, मोबाइल में रिकॉर्ड किया था Video

मध्य प्रदेश के भोपाल में जमीन हड़पने के मामले में पुलिस को आरोपित के मोबाइल से चौंकाने वाली वीडियो मिला। इसमें पुलिस ने पाया कि आरोपित पुलिस के सामने झूठी गवाही देने के लिए न केवल एक नाबालिग लड़के पर दबाव बना रहा है, बल्कि उसे जबरन टॉयलेट सीट चाटने पर मजबूर भी कर कर रहा है। आरोपित की पहचान 35 वर्षीय मुख्तयार खान के रूप में हुई है।

पुलिस ने गुरुवार (अगस्त 8, 2019) को इस वीडियो को देखने के बाद मुख्तयार पर मामला दर्ज कर लिया है। मीडिया खबरों की मानें तो एसएसपी रुचिवर्धन मिश्रा ने बताया कि उन्होंने स्थानीय कोर्ट के आदेश पर खान को जमीन खरीदने के लिए झूठे कागजात इस्तेमाल करने के मामले में गिरफ्तार किया था। लेकिन, जब जाँच के दौरान उसके मोबाइल को जाँचा गया, तो उसमें उन्होंने देखा कि मुख्तयार एक 14 साल के बच्चे पर अत्याचार कर रहा है। साथ ही उससे उसकी जीभ से टॉयलेट सीट साफ़ करवा रहा है।

एसएसपी के बयान के मुताबिक, खान और उसके साथी बच्चे को पुलिस के आगे झूठी गवाही देने के लिए मजबूर  कर रहे थे। वे चाहते थे कि 2 महीने पहले खान के बेटे पर हुए जानलेवा हमले के संबंध में नाबालिग पुलिस के सामने दो अमीर घरों के बच्चों पर भी आरोप लगाए। ताकि बाद में खान उन बच्चों के घरवालों से समझौते के नाम पर पैसे निकलवा सके।

एसएसपी मिश्रा का कहना है कि पुलिस ने खान के बेटे पर हुए हमले के मामले में पहले ही चार लोगों पर आईपीसी धारा 307 (हत्या की कोशिश) के तहत एफआईआर दर्ज कर लिया है। लेकिन अब इस हरकत के मालूम पड़ने के बाद पुलिस ने खान पर पॉक्सो एक्ट और आईपीसी IT एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। मामले में आगे की जाँच जारी है। मुख्यतार पुलिस की हिरासत में है।

‘The Wire’ ने J&K के कई हिस्सों को बताया ‘भारत के कब्जे वाला क्षेत्र’, Pak का भी यही रुख

प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द वायर’ ने इस बार खुल कर पाकिस्तानी अजेंडे को आगे बढ़ाया है। अनुच्छेद 370 के अहम प्रावधानों को निरस्त कर जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने और राज्य का 2 केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में पुनर्गठन करने वाले सरकार के निर्णय के बाद कई राजनीतिक दलों, नेताओं व मीडिया पोर्टल्स का असली चेहरा पूरी तरह से बेनक़ाब हुआ है। जहाँ अधीर रंजन चौधरी ने संसद में कश्मीर को भारत का आंतरिक मुद्दा मानने से इनकार कर दिया, वहीं संसद के बाहर वे अपने ही बयान से पलट गए।

‘द वायर’ के सिद्धार्थ वरदराजन ने अपने पोर्टल के यूट्यूब चैनल पर पोस्ट की गई एक वीडियो में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने की चर्चा की। इस वीडियो में जम्मू कश्मीर का नक्शा दिखा कर वहाँ की भौगोलिक स्थिति पर प्रकाश डाला गया और सभी क्षेत्रों की स्थिति का विवरण दिया गया। लेकिन, नक़्शे में साफ़ देखा जा सकता है कि श्रीनगर सहित जम्मू कश्मीर के कई अन्य क्षेत्रों को ‘Indian Occupied Part’ यानी ‘भारत के कब्जे वाला भाग’ कहा गया है।

पाकिस्तान भी यही मानता है। पाकिस्तान का रुख है कि जम्मू कश्मीर के इस हिस्से पर ‘भारत का कब्जा’ है। ‘द वायर’ के वीडियो में पाक के कब्जे वाले हिस्से को ‘आजाद कश्मीर’ लिखा गया है। नीचे दिए गए स्क्रीनशॉट में आप देख सकते हैं कि कैसे श्रीनगर सहित अन्य हिस्सों को ‘भारत के कब्जे वाला भाग’ बताया गया है। इस वीडियो में 5:31 से 5:35 तक बताया गया कि जम्मू कश्मीर का श्रीनगर सहित अन्य हिस्सा ‘भारत के कब्जे’ में है। ताज़ा सूचना मिलने तक ‘द वायर’ ने इस वीडियो को ट्रिम कर के इस नक़्शे वाले हिस्से को हटा दिया है। आपको बता दें कि यूट्यूब पर अपलोड करने के बाद भी वीडियो को एडिट किया जा सकता है।

‘द वायर’ के वीडियो का हमारे द्वारा लिया गया स्क्रीनशॉट (नक़्शे ने निचले हिस्से पर नीले घेरे में देखिए’)

आपको बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले ही साफ़ कर दिया है कि जब जम्मू कश्मीर की बात की जाती है तो जम्मू और लद्दाख के अलावा कश्मीर के उन हिस्सों की भी बात की जाती है जो पाकिस्तान और चीन के कब्जे में हैं। जब भारत सरकार का रुख साफ़ है कि पूरा का पूरा जम्मू कश्मीर देश का अभिन्न अंग है और यह हमारा आंतरिक मुद्दा है, ऐसे में इन प्रोपेगेंडा पोर्टल्स द्वारा पाकिस्तानी अजेंडे को आगे बढ़ाना कहाँ तक उचित है?

राम मंदिर के लिए ईंट-बजरी तोड़ने भेजे गए हैं कश्मीर से 72 से 2 कम खूँखार आतंकी: विशेष सूत्र

आर्टिकल-370 के पर कतरे जाने और जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद आज एक नई बात जो सामने आई है वो ये कि 70 खूँखार आतंकियों और पाकिस्तान समर्थित अलगाववादियों की घाटी में ‘क्षमता’ देखते हुए उन्हें आगरा के जेल में शिफ्ट किया गया है।

कश्मीर से सीधा उत्तर प्रदेश भेजे जाने पर दिमाग में सबसे पहले 2 बातें याद आती हैं। पहला, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दूसरा, उत्तर प्रदेश की पुलिस। ये वही पुलिस है जो मात्र ठाँय-ठाँय के भयानक स्वर से ही अपराधियों की हवा टाइट करने के लिए जानी जाती है।

ऑपइंडिया तीखी-मिर्ची सेल की ख़ुफ़िया रिपोर्ट्स की मानें तो इन आतंकियों को उत्तर प्रदेश पुलिस की निगरानी में मात्र ‘ठाँय-ठाँय’ के ही स्वर से जन्नत-ए-फ़िरदौस की पहली यात्रा ट्रायल के तौर पर करवाई जाएगी।

आतंकियों के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस जो करने वाली है, उसका प्रतीकात्मक चित्र –

आतंक की फैक्ट्री हूरों के ख्वाब पर ही चलती है। कुत्ते जैसी मौत के बाद आतंकियों को 72 हूरें नसीब होती हैं कि नहीं, रब जाने। लेकिन, आगरा भेजकर सरकार ने इतना तो इंतजाम कर दिया है कि वे कम से कम ताज का दीदार कर लें। शायद भू-माफिया आजम खान को पहले ही इस दिन का एहसास हो गया था, तभी तो वे कई बार ताजमहल को गिरा देने की गुहार सरकार से लगा चुके हैं।

हालाँकि, नाम न बताने की शर्त पर कुछ ख़ुफ़िया सूत्रों का कहना है कि इन आतंकियों को अयोध्या राम मंदिर निर्माण की ईंट-बजरी ढुलवाने से लेकर लोहा सरिया पिघलाने तक का काम गधों की तरह करवाया जाना है। प्रधानमंत्री मोदी जी का कहना है कि इस बारे में अभी कोई पूर्वसूचना नहीं है लेकिन रामदेव का कहना है कि आखिर हैं तो वो भी राम, कृष्ण और शिव के ही वंशज।

आखिर आतंकवादियों को राम मंदिर कार्य में सिर्फ पहाड़ तोड़कर पत्थर-बजरी बनाने तक ही क्यों सीमित रखा जा रहा? कुछ आतंकियों ने इसका जवाब देते हुए कहा- “यह शुभ कार्य मात्र राम-भक्तों के ही हाथों होना चाहिए।”

वहीं, इस कदम से पहले ही उत्तर प्रदेश में जनता ने पंचर टायर जमा करने शुरू कर दिए हैं। उनका मानना है कि सत्तर आतंकियों के उत्तर प्रदेश में आ जाने के बाद प्रदेश में टायरों के पंचर होने का प्रतिशत गिरने की सम्भावनाएँ बढ़ सकती हैं।

…अब J&K के 70 खूँखार आतंकियों को संभालेंगे योगी आदित्यनाथ, लोग शेयर करने लगे Memes

आर्टिकल-370 के पर कतरे जाने और जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद संभावित हिंसा को देखते हुए पूरे राज्य में सुरक्षाबलों को हाई अलर्ट पर रखा गया था। इससे पहले एहतियात के तौर पर राज्य के शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिया गया था। साथ ही मोबाइल और इंटरनेट कनेक्शन बंद कर धारा 144 लागू कर दी गई थी। हालाँकि अब हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगे हैं। लेकिन कुछ खूँखार आतंकियों और पाकिस्तान समर्थित अलगाववादियों की घाटी में ‘क्षमता’ देखते हुए उन्हें आगरा के जेल में शिफ्ट किया गया है।

लगभग 70 आतंकियों और पाकिस्तान समर्थित अलगाववादियों को भारतीय वायुसेना के स्पेशल प्लेन से कश्मीर से आगरा लाया गया। ऐसा करना आवश्यक था क्योंकि राज्य के सांबा जिला प्रशासन ने सामान्य स्थिति को देखते हुए आदेश दिया है कि शुक्रवार (9 अगस्त 2019) से सभी शैक्षणिक संस्थान खुल जाएँगे। ऐसे में प्रशासन वैसी किसी भी संभावना से बचना चाहता है, जिससे प्रोपेगेंडा के तहत विरोध का स्वर बढ़े और उसका असर शिक्षण संस्थानों पर पड़े।

इस खबर के बाद लोग सोशल मीडिया पर न जाने क्यों योगी आदित्यनाथ के मीम शेयर करने लगे।

आलू बोंडा नाम के ट्विटर यूजर ने तो यहाँ तक लिख दिया कि क्या इन्हें आगरा के पागलखाने ले जाया जाएगा?

किसी ने सिर्फ एक फोटो डाली और…

स्किन डॉक्टर नाम के एक यूजर ने किसी हिंदी फिल्म (मनोज वाजपेयी हीरो हैं इसमें) की फोटो डाल कर काम चलाया है।

चिरायु नाम के एक यूजर ने उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की फोटो डाली है।

रेसलर संगीता फोगाट बनेंगी नंबर वन पहलवान बजरंग पूनिया की दुल्हनिया

संगीता फोगाट दुनिया के नंबर वन पहलवान बजरंग पुनिया के साथ शादी करेंगी। संगीता कुश्ती की कई अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में पदक जीतने वाली फोगाट बहनों में तीसरे नंबर पर हैं। माना जा रहा है कि अगले साल होने वाले ओलंपिक के बाद दोनों सात फेरे लेंगे।

संगीता 59 किग्रा वर्ग में राष्ट्रीय चैंपियन रह चुकी हैं। संगीता से बड़ी बहन बबीता फोगाट का भी पहलवान विवेक सुहाग से रिश्ता पक्का हो चुका है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, बजरंग इस समय ओलंपिक की तैयारियों में जुटे हुए हैं। वहीं, संगीता राष्ट्रीय शिविर में चोट से उबर रही हैं। शादी की खबर की पुष्टि संगीता के पिता और कोच महावीर फोगाट ने की है।

फोगाट बहनें पहली बार चर्चा में 2017 के राष्ट्रमंडल खेलों से आईं थी। फोगाट बहनों में तीन सगी बहनें गीता फोगाट, रितु फोगाट, संगीता फोगाट और उनकी चचेरी बहन विनेश फोगाट शामिल हैं। गीता और विनेश की शादी पहले ही हो चुकी है।

पहली बार सही मायनों में देश के हर नागरिक को समान हक़ मिल रहे हैं: PM मोदी का पूरा भाषण

जम्मू-कश्मीर को दो भागों में बाँटने और अनुच्छेद-370के अधिकतर हिस्सों को हटाने के बाद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार आज देश को संबोधित कर रहे हैं। PM मोदी इस संबोधन में जम्‍मू-कश्‍मीर को लेकर उठाए गए कदमों के बारे में राष्‍ट्र को संदेश दे रहे हैं।

मुख्य बातें:

जो सपना सरदार पटेल का था, बाबा साहेब अंबेडकर का था, डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का था, अटल जी और करोड़ों देशभक्तों का था, वो अब पूरा हुआ है।

समाज जीवन में कुछ बातें, समय के साथ इतनी घुल-मिल जाती हैं कि कई बार उन चीजों को स्थाई मान लिया जाता है। ये भाव आ जाता है कि, कुछ बदलेगा नहीं, ऐसे ही चलेगा। अनुच्छेद 370 के साथ भी ऐसा ही भाव था। उससे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हमारे भाई-बहनों की जो हानि हो रही थी, उसकी चर्चा ही नहीं होती थी। हैरानी की बात ये है कि किसी से भी बात करें, तो कोई ये भी नहीं बता पाता था कि अनुच्छेद 370 से जम्मू-कश्मीर के लोगों के जीवन में क्या लाभ हुआ।

हमारे देश में कोई भी सरकार हो, वो संसद में कानून बनाकर, देश की भलाई के लिए काम करती है। किसी भी दल की सरकार हो, किसी भी गठबंधन की सरकार हो, ये कार्य निरंतर चलता रहता है। कानून बनाते समय काफी बहस होती है, चिंतन-मनन होता है, उसकी आवश्यकता को लेकर गंभीर पक्ष रखे जाते हैं। इस प्रक्रिया से गुजरकर जो कानून बनता है, वो पूरे देश के लोगों का भला करता है। लेकिन कोई कल्पना नहीं कर सकता कि संसद इतनी बड़ी संख्या में कानून बनाए और वो देश के एक हिस्से में लागू ही नहीं हों।

देश के अन्य राज्यों में सफाई कर्मचारियों के लिए सफाई कर्मचारी एक्ट लागू है, लेकिन जम्मू-कश्मीर के सफाई कर्मचारी इससे वंचित थे। देश के अन्य राज्यों में दलितों पर अत्याचार रोकने के लिए सख्त कानून लागू है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में ऐसा नहीं था। देश के अन्य राज्यों में अल्पसंख्यकों के हितों के संरक्षण के लिए माइनॉरिटी एक्ट लागू है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में ऐसा नहीं था। देश के अन्य राज्यों में श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए Minimum Wages Act लागू है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में ये सिर्फ कागजों पर ही मिलता था।

नई व्यवस्था में केंद्र सरकार की ये प्राथमिकता रहेगी कि राज्य के कर्मचारियों को, जम्मू-कश्मीर पुलिस को, दूसरे केंद्र शासित प्रदेश के कर्मचारियों और वहाँ की पुलिस के बराबर सुविधाएँ मिलें। जल्द ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में केंद्रीय और राज्य के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे स्थानीय नौजवानों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। केंद्र की पब्लिक सेक्टर यूनिट्स और प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों को भी रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

हमने जम्मू-कश्मीर प्रशासन में एक नई कार्यसंस्कृति लाने, पारदर्शिता लाने का प्रयास किया है। इसी का नतीजा है कि IIT, IIM, एम्स हो, तमाम इरिगेशन प्रोजेक्ट्स हो, पावर प्रोजेक्ट्स हों, या फिर एंटी करप्शन ब्यूरो, इन सबके काम में तेजी आई है।

आप ये जानकर चौंक जाएँगे कि जम्मू-कश्मीर में दशकों से, हजारों की संख्या में ऐसे भाई-बहन रहते हैं, जिन्हें लोकसभा के चुनाव में तो वोट डालने का अधिकार था, लेकिन वो विधानसभा और स्थानीय निकाय के चुनाव में मतदान नहीं कर सकते थे। ये वो लोग हैं जो बँटवारे के बाद पाकिस्तान से भारत आए थे। क्या इन लोगों के साथ अन्याय ऐसे ही चलता रहता?

हम सभी चाहते हैं कि आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर विधानसभा के चुनाव हों, नई सरकार बने, मुख्यमंत्री बनें। मैं जम्मू-कश्मीर के लोगों को भरोसा देता हूँ कि आपको बहुत ईमानदारी के साथ, पूरे पारदर्शी वातावरण में अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलेगा। जैसे पंचायत के चुनाव पारदर्शिता के साथ संपन्न कराए गए, वैसे ही विधानसभा के भी चुनाव होंगे। मैं राज्य के गवर्नर से ये भी आग्रह करूँगा कि ब्लॉक डवलपमेंट काउंसिल का गठन, जो पिछले दो-तीन दशकों से लंबित है, उसे पूरा करने का काम भी जल्द से जल्द किया जाए।

मुझे पूरा विश्वास है कि अब अनुच्छेद 370 हटने के बाद, जब इन पंचायत सदस्यों को नई व्यवस्था में काम करने का मौका मिलेगा तो वो कमाल कर देंगे। मुझे पूरा विश्वास है कि जम्मू-कश्मीर की जनता अलगाववाद को परास्त करके नई आशाओं के साथ आगे बढ़ेगी। मुझे पूरा विश्वास है कि जम्मू-कश्मीर की जनता, Good Governance और पारदर्शिता के वातावरण में, नए उत्साह के साथ अपने लक्ष्यों को प्राप्त करेगी।

दशकों के परिवारवाद ने जम्मू-कश्मीर के युवाओं को नेतृत्व का अवसर ही नहीं दिया। अब मेरे युवा, जम्मू-कश्मीर के विकास का नेतृत्व करेंगे और उसे नई ऊँचाई पर ले जाएँगे। मैं नौजवानों, वहाँ की बहनों-बेटियों से आग्रह करूँगा कि अपने क्षेत्र के विकास की कमान खुद सँभालिए।

जम्मू-कश्मीर के केसर का रंग हो या कहवा का स्वाद, सेब का मीठापन हो या खुबानी का रसीलापन, कश्मीरी शॉल हो या फिर कलाकृतियाँ, लद्दाख के ऑर्गैनिक प्रॉडक्ट्स हों या हर्बल मेडिसिन, इसका प्रसार दुनियाभर में किए जाने का जरूरत है। Union Territory बन जाने के बाद अब लद्दाख के लोगों का विकास, भारत सरकार की विशेष जिम्मेदारी है। स्थानीय प्रतिनिधियों, लद्दाख और कारगिल की डवलपमेंट काउंसिल्स के सहयोग से केंद्र सरकार, विकास की तमाम योजनाओं का लाभ अब और तेजी से पहुँचाएगी।

लद्दाख में स्पीरिचुअल टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म औरइकोटूरिज्म का सबसे बड़ा केंद्र बनने की क्षमता है। सोलर पावर जनरेशन का भी लद्दाख बहुत बड़ा केंद्र बन सकता है। अब वहाँ के सामर्थ्य का उचित इस्तेमाल होगा और बिना भेदभाव विकास के लिए नए अवसर बनेंगे। अब लद्दाख के नौजवानों की इनोवेटिव स्पिरिट को बढ़ावा मिलेगा, उन्हें अच्छी शिक्षा के लिए बेहतर संस्थान मिलेंगे, वहाँ के लोगों को अच्छे अस्पताल मिलेंगे, इंफ्रास्ट्रक्चर का और तेजी से आधुनिकीकरण होगा।

लोकतंत्र में ये भी बहुत स्वाभाविक है कि कुछ लोग इस फैसले के पक्ष में हैं और कुछ को इस पर मतभेद है। मैं उनके मतभेद का भी सम्मान करता हूँ और उनकी आपत्तियों का भी। इस पर जो बहस हो रही है, उसका केंद्र सरकार जवाब भी दे रही है। ये हमारा लोकतांत्रिक दायित्व है। लेकिन मेरा उनसे आग्रह है कि वो देशहित को सर्वोपरि रखते हुए व्यवहार करें और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख को नई दिशा देने में सरकार की मदद करें। संसद में किसने मतदान किया, किसने नहीं किया, इससे आगे बढ़कर अब हमें जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के हित में मिलकर, एकजुट होकर काम करना है।

मैं हर देशवासी को ये भी कहना चाहता हूँ कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों की चिंता, हम सबकी चिंता है, उनके सुख-दुःख, उनकी तकलीफ से हम अलग नहीं हैं।

अनुच्छेद 370 से मुक्ति एक सच्चाई है, लेकिन सच्चाई ये भी है कि इस समय ऐहतियात के तौर पर उठाए गए कदमों की वजह से जो परेशानी हो रही है, उसका मुकाबला भी वही लोग कर रहे हैं। कुछ मुट्ठी भर लोग जो वहाँ हालात बिगाड़ना चाहते हैं, उन्हें जवाब भी वहाँ के स्थानीय लोग दे रहे हैं। हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवाद और अलगाववाद को बढ़ावा देने की पाकिस्तानी साजिशों के विरोध में जम्मू-कश्मीर के ही देशभक्त लोग डटकर खड़े हुए हैं।

हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवाद और अलगाववाद को बढ़ावा देने की पाकिस्तानी साजिशों के विरोध में जम्मू-कश्मीर के ही देशभक्त लोग डटकर खड़े हुए हैं। जम्मू-कश्मीर के साथियों को भरोसा देता हूँ कि धीरे-धीरे हालात सामान्य हो जाएँगे और उनकी परेशानी भी कम होती चली जाएगी। ईद का मुबारक त्योहार भी नजदीक ही है। ईद के लिए मेरी ओर से सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।

सरकार इस बात का ध्यान रख रही है कि जम्मू-कश्मीर में ईद मनाने में लोगों को कोई परेशानी न हो। हमारे जो साथी जम्मू-कश्मीर से बाहर रहते हैं और ईद पर अपने घर वापस जाना चाहते हैं, उनको भी सरकार हर संभव मदद कर रही है। जम्मू-कश्मीर के लोगों की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाबलों के साथियों का आभार व्यक्त करता हूं। प्रशासन से जुड़े लोग, राज्य के कर्मचारी और जम्मू-कश्मीर पुलिस जिस तरह से स्थितियों को सँभाल रही है वो प्रशंसनीय है आपके इस परिश्रम ने मेरा ये विश्वास और बढ़ाया है कि बदलाव हो सकता है।

ये फैसला जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के साथ ही पूरे भारत की आर्थिक प्रगति में सहयोग करेगा। जब दुनिया के इस महत्वपूर्ण भूभाग में शांति और खुशहाली आएगी, तो स्वभाविक रूप से विश्व शांति के प्रयासों को मजबूती मिलेगी। मैं जम्मू-कश्मीर के अपने भाइयों और बहनों से, लद्दाख के अपने भाइयों और बहनों से आह्वान करता हूँ। आइए, हम सब मिलकर दुनिया को दिखा दें कि इस क्षेत्र के लोगों का सामर्थ्य कितना ज्यादा है, यहाँ के लोगों का हौसला, उनका जज्बा कितना ज्यादा है।

आइए, हम सब मिलकर, नए भारत के साथ अब नए जम्मू-कश्मीर और नए लद्दाख का भी निर्माण करें।