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उन्नाव रेप केस के आरोपित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर बीजेपी से निलंबित

चर्चित उन्नाव रेप मामले और अब रोड एक्सीडेंट के बाद हत्या और हत्या के प्रयास में भी आरोपित बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को पार्टी ने निलंबित कर दिया है। रेप केस में आरोपों में घिरे कुलदीप सिंह सेंगर को लेकर पार्टी की काफी फजीहत हो रही थी और विपक्षी राजनीतिक दलों की तरफ से भी दबाव बनाया जा रहा था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने बताया कि सेंगर पहले से ही पार्टी से निलंबित चल रहे हैं और आगे भी निलंबित रहेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी कभी भी सेंगर को बचाने के पक्ष में नहीं रही है। इसलिए उन्नाव रेप केस की जाँच सीबीआई को सौंपी गई थी।

बीजेपी की इस कार्रवाई से पहले कल ही उन्नाव रेप केस की पीड़िता के रायबरेली के गुरबख्शगंज में एक ट्रक के पीड़िता की कार को टक्कर मारने के मामले में उनके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और आपराधिक साजिश जैसी कई धाराओं में केस दर्ज किया गया था। रोड एक्सीडेंट के मामले में भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर, उनके भाई मनोज सिंह सेंगर और 8 अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

फिलहाल, सेंगर और उनका भाई मनोज पहले से ही जेल में हैं। रेप पीड़िता के चाचा की तहरीर पर कुलदीप सिंह सेंगर समेत 10 नामजद और 15-20 अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 307, 506, 120B के तहत यह मुकदमा दर्ज किया गया है। FIR में कुलदीप सिंह सेंगर, मनोज सिंह सेंगर, विनोद मिश्र, हरिपाल मिश्र, नवीन सिंह, कोमल सिंह, अरुण सिंह, ज्ञानेन्द्र सिंह, रिंकू सिंह और एडवोकेट अवधेश सिंह समेत 15-20 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज हो चुका है।

अमेठी के ‘राजा’ राज्यसभा सांसद ने छोड़ी कॉन्ग्रेस, भाजपा में हो सकते हैं शामिल

अमेठी के भूतपूर्व राजपरिवार के सदस्य और कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह कॉन्ग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने आज (मंगलवार, 30 जुलाई) को पार्टी और राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है। उन्होंने दावा किया कि वह कल भाजपा में शामिल होंगे

जमानत नहीं बचा पाए थे मोदी लहर में

अमेठी के राजपरिवार के सदस्य संजय सिंह ने इस लोक सभा चुनाव में सुल्तानपुर सीट से दावा ठोंका था। लेकिन मोदी लहर में वह अपनी ज़मानत भी नहीं बचा पाए थे। उनका परिवार पारम्परिक रूप से कॉन्ग्रेस समर्थक माना जाता है, हालाँकि उनकी पहली पत्नी गरिमा सिंह भाजपा से अमेठी की विधायक हैं।

भाजपा में बनेगी ‘असहज स्थिति’?

संजय सिंह की विधायक पत्नी गरिमा सिंह और उनके बच्चों का अमेठी राजघराने की लड़ाई में भाजपा ने संजय सिंह और उनकी दूसरी पत्नी अमीता सिंह के खिलाफ समर्थन किया था। पिछले विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी जहाँ अमीता सिंह थीं, वहीं भाजपा ने अमेठी की जनता में संजय सिंह की पहली पत्नी गरिमा के प्रति स्थानीय जनता की सहानुभूति और गरिमा को राजमहल से बेदखल करने से उपजे आक्रोश पर दाँव लगाते हुए गरिमा को टिकट दिया था। राजपरिवार के पारम्परिक भूपति भवन पर 2014 में गरिमा के दावे का भी स्थानीय लोगों ने इकट्ठे होकर समर्थन किया था, जिसमें पुलिस को फायरिंग करनी पड़ गई थी। 2017 में पूर्व प्रधानमंत्री और राजा मांडा वीपी सिंह की रिश्तेदार गरिमा की जीत को भाजपा ने पारिवारिक ड्रामे में संजय सिंह के खिलाफ जनता का जनादेश बताया था। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि अब राजपरिवार के विवाद पर भाजपा का क्या स्टैंड होगा।

मस्जिदों की डिटेल पर J&K में हलचल: कोई PM से मिलेगा, किसी ने राजनीतिक विरोधी से मिलाया हाथ

जम्‍मू कश्‍मीर में 10 हजार अति‍र‍िक्‍त जवानों की तैनाती के बाद प्रशासन ने मस्‍ज‍िदों की जानकारी माँगी है। इसके बाद से ही घाटी में आशंका का माहौल शुरू हो गया है। श्रीनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) हसीब मुगल की ओर से जारी आदेश में पाँच जोन के पुलिस अधीक्षकों से कहा गया है कि वो अपने संबंधित क्षेत्रों की मस्जिदों और उनके प्रबंधन की पूरी जानकारी एक बंद लिफाफे में जल्द से जल्द मुहैया कराएँ, ताकि उसे उच्च अधिकारियों तक पहुँचाया जा सके।

एसएसपी हसीब मुगल ने इसे रुटीन एक्सरसाइज बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल थानों की बेसिक बीट बुक को अपडेट करने के लिए किया जा रहा है। ऐसा समय-समय पर किया जाता है। हालाँकि, उन्होंने ये भी कहा कि इस पत्र को जारी करने का सही समय नहीं है। उनका कहना है कि घाटी में अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती के आदेश से लोग पहले ही सशंकित हैं और इस चिट्ठी से उनकी चिंताएँ बढ़ सकती हैं।

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर का स्क्रीनशॉट

वहीं, गृह मंत्रालय द्वारा जारी इस आदेश के बाद घाटी में राजनीतिक पार्टियों के बीच हलचल काफी बढ़ गई है, उनके ट्वीट और बयान को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि इनकी बेचैनी कितनी ज्यादा बढ़ी हुई है। घाटी में आशंका का माहौल शुरू हो गया है। कहा जा रहा है कि बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार प्रदेश को लेकर कोई अहम फैसला ले सकती है। वहाँ की सियासी पार्टियों ने केंद्र सरकार से पूरी स्थिति साफ करने की माँग की है। नैशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात का वक्त भी माँगा है। 

दरअसल, सेना की अतिरिक्त तैनाती के बाद ये अफवाह फैली कि सरकार राज्य से 35A को खत्म करने वाली है। जिसके बाद से पिछले कुछ दिनों से कश्मीर में सियासी पार्टियों के बीच काफी घबराहट की स्थिति है। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने अनुच्छेद 35A की रक्षा के लिए अपने धुर राजनीतिक विरोधी फारूक अब्दुल्ला से साथ देने का आग्रह किया है। महबूबा मुफ्ती ने सोमवार (जुलाई 29, 2019) को कहा कि उन्होंने प्रदेश के विशेष दर्जे की रक्षा के लिए फारूक अब्दुल्ला से सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया है।

इस बीच, जम्मू कश्मीर की मस्जिदों को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे मैसेज पर राज्यपाल सत्यपाल मलिक के सलाहकार विजय कुमार ने एएनआई से बात करते हुए कहा, “अगर कोई व्यक्ति सोशल मीडिया पर अफवाह फैला रहा है, तो इसका जवाब देना जरूरी नहीं है। इस अफवाह का सोर्स क्या है? मेरे लिए यह उचित नहीं होगा कि मैं हर बार इसका जवाब दूँ।”

वहीं, सरकार के फैसले पर आग उगलने वालों को जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सूबे में 10,000 अतिरिक्त जवानों को सिक्यॉरिटी ड्रिल के तहत तैनात किया गया है। उन्होंने कहा कि इसका कोई विशेष मकसद नहीं है, लेकिन जनाधार खोने से डरे नैशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी बेवजह शोर मचा रहे हैं।

कुरैशी की हत्या के बाद उसके भाई रहीस को मारने आरिफ पहुँचा अस्पताल, पुलिस ने किया गिरफ्तार

कुछ दिन पहले दिल्ली के पंजाबी बाग इलाके में बाइक सवार बदमाशों ने कार सवार मीट कारोबारी की गोली मार कर हत्या कर दी थी। मीट कारोबारी सलीम कुरैशी की गोली मारकर हत्या करने के आरोप में पुलिस ने आरिफ को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित आरिफ के खिलाफ पहले से ही 43 मामले दर्ज हैं।

17 जुलाई को पंजाबी बाग के रोहतक रोड के ट्रैफिक जंक्शन पर अपनी कार में बैठे कुरैशी की दो मोटरसाइकिल सावर लोगों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। हत्या करने वाला आरिफ, सलीम कुरैशी की बगल वाली सीट पर बैठे उसके भाई रहीस को भी मारना चाहता था, लेकिन वो बचा गया। स्थानीय पुलिस ने घटनास्थल से लगभग सौ मीटर की दूरी पर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से दोनों हत्यारों की पहचान की थी और रविवार (जुलाई 28, 2019) को स्पेशल सेल ने आरिफ को फरीदाबाद से गिरफ्तार किया।

DCP मनीषी चंद्र के मुताबिक, आरिफ ने पुलिस को बताया कि सलीम कुरैशी की हत्या करने के बाद वो उसके भाई रहीस को मारने के लिए पश्चिमी दिल्ली के पश्चिम विहार के एक निजी अस्पताल में गया था, लेकिन रहीस यहाँ भी बच गया, क्योंकि हत्यारे आरिफ को वो हॉस्पिटल में नहीं मिला।

डीसीपी ने कहा कि आरिफ आपराधिक प्रवृत्ति (Repeat Offender) का है। जिसके खिलाफ पहले से ही 43 केस दर्ज हैं। उसके खिलाफ हत्या के 6 मामले दर्ज हैं और वह गाजीपुर और नांगलोई में अवैध बूचड़खानों से जबरन वसूली में भी शामिल है। साथ ही, हत्या का आरोपित आरिफ बाहरी दिल्ली के नांगलोई और सुल्तानपुरी में कथित रूप से सट्टेबाजी का रैकेट चलाता है। डीसीपी का कहना है कि रहीस माँस व्यापारियों से जबरन पैसा वसूलना चाहता था और इसी वजह से आरिफ और रहीस के बीच दुश्मनी बढ़ गई।

आपसी मुठभेड़ थी सलीम को मारने की वजह

इसके आगे डीसीपी ने बताया कि आरिफ ने कथित तौर पर 25 जून को रहीस पर हमला किया, लेकिन उस दिन वो बच निकला था। इसके बाद उसी दिन रहीस और सलीम ने अपने 20 साथियों के साथ आरिफ के रिश्तेदारों के साथ मारपीट की। रहीस ने इसकी सूचना पुलिस को नहीं दी थी।

हालाँकि, उस दिन एक पुलिस मामला दर्ज किया गया था। आरिफ ने उसी दिन अपने रिश्तेदारों पर हुए हमले का बदला लेने का फैसला कर लिया था। आरिफ की दुश्मनी मुख्य रुप से रहीस से थी, मगर उसने उसके भाई सलीम को भी इस हमले में शामिल पाया। जिसके बाद आरिफ ने दोनों को मारने का फैसला किया। रहीस के भाई सलीम की तो उसने हत्या कर दी, लेकिन रहीस बच गया।

MLA अब्दुल्ला ने फर्जी दस्तावेजों से बनवाया पासपोर्ट, भू माफिया आजम खान से है ‘खास कनेक्शन’

हाल ही में भू माफिया घोषित हो चुके समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के विधायक बेटे अब्दुल्ला आजम खान के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। अब्दुल्ला आजम खान पर गलत और कोडेड दस्तावेंजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने का आरोप लगा है। यह FIR उत्तर प्रदेश के रामपुर, सिविल लाइन्स थाने में बीजेपी नेता आकाश सक्सेना की शिकायत पर दर्ज है।

अलग-अलग दस्तावेजों में अलग है जानकारी

पुलिस के अनुसार, अब्दुल्ला आजम खान पर FIR भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420, 467, 468, 471 और पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12 के तहत मामला दर्ज किया गया है। बीजेपी नेता आकाश सक्सेना ने शिक्षण दस्तावेजों और पासपोर्ट में अलग-अलग जन्मतिथि दर्ज करवाने की शिकायत की है।

आजम खान के बेटे अब्दुल्ला अचानक से तब सुर्खियों में आ गए थे जब उन्होंने जया प्रदा को लेकर निशाना साधा था। अब्दुल्ला आजम ने एक बयान देते हुए कहा था- “अली भी हमारे हैं, बजरंगबली भी हमारे हैं। हमें अली भी चाहिए और बजरंगबली भी चाहिए, लेकिन अनारकली नहीं चाहिए।” भू माफिया आजम खान लगातार महिला विरोधी बयानों के कारण चर्चा में बने रहते हैं।

गत बृहस्पतिवार को लोकसभा में तीन तलाक बिल पर चर्चा के दौरान भी आजम खान ने भाजपा सांसद रमा देवी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। जिसके बाद उन्हें माफ़ी माँगनी पड़ी है।

चलती ट्रेन का TikTok वीडियो बनाते हुए ट्रेन से टकराने के कारण 18 साल के छात्र की दर्दनाक मौत

TikTok पर वीडियो बनाने के कारण आए दिन नए हादसे जन्म ले रहे हैं। ताजा प्रकरण बिहार के वैशाली जिले का है। तेज रफ्तार से आ रही ट्रेन का टिकटॉक वीडियो बनाने के चक्कर में मंगलवार (जुलाई 30, 2019) को हाजीपुर में एक युवक की जान चली गई। बिहार के 18 साल के इस युवक के लिए टिकटॉक वीडियो बनाना जानलेवा साबित हुआ। वीडियो बनाने में मशगूल युवक को यह तक पता नहीं चला कि ट्रेन एकदम करीब आ गई है और जब तक वह संभलता, तब तक ट्रेन के झटके से उसकी मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

मृतक 18 वर्षीय विवेक कुमार हाजीपुर नगर थाना क्षेत्र के बागमली मोहल्ले के निवासी रामप्रवेश सिंह का इकलौता पुत्र था। वह इंटर का छात्र था। घटना के बाद उसके घर में कोहराम मच गया है। घटना मंगलवार सुबह करीब 9 बजे के आसपास की है।

जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, विवेक प्रतिदिन सोनपुर स्थित पुराना गंडक पुल रोड में सुबह-सुबह दौड़ने जाता था। आज, मंगलवार को भी वह अपने कुछ मित्रों के साथ सोनपुर पुराना पुल रोड में दौड़ने गया था। इसी दौरान वह हाजीपुर से पटना जा रही पैसेंजर ट्रेन का टिकटॉक वीडियो बनाने लगा और इसी दौरान ट्रेन से उसके सिर में चोट लगी और उसकी जान चली गई।

घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुँच गए और उसे सदर अस्पताल ले गए। अस्पताल में डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। टिकटॉक की दीवानगी में मौत की ये पहली घटना नहीं है। हाल ही में बिहार के दरभंगा जिले में टिकटॉक वीडियो के लिए बाढ़ के पानी में खतरनाक स्टंट करने के दौरान एक युवक की मौत हो गई थी।

आजम खान ने लग्जरी रिसॉर्ट ‘हमसफर’ के लिए सरकारी जमीन कब्जाया, नोटिस जारी

आज़म खान की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। उनके कारनामों की लिस्ट काफी बड़ी होती जा रही है। सपा सांसद आज़म खान पर जमीन हथियाने के 26 नए मामलों के बाद अब एक और करोड़ों रुपए के जमीन घोटाले में नाम सामने आया है। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने आजम खान को रामपुर में लग्जरी रिसॉर्ट हमसफर के लिए सरकारी जमीन कब्जाने को लेकर नोटिस जारी किया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जिला प्रशासन ने सरकारी जमीन के एक बड़े हिस्से को कब्जाने का आरोप लगाया है। इस जमीन पर लक्ज़री गेस्ट हाउस का निर्माण किया गया है। सपा सांसद आजम खान के खिलाफ सरकारी और किसानों की कृषि योग्य भूमि हथियाने के सिलसिले में लगातार मामले दर्ज किए जाने के बाद उनको भूमाफिया घोषित कर दिया गया है।

प्रवर्तन निदेशालय भी आजम खान के निजी विश्वविद्यालय के खाते में विदेशों से दान मिलने से संबंधित कथित धनशोधन के आरोपों की भी जाँच कर रहा है। ईडी ने रामपुर पुलिस से आजम खान के खिलाफ दर्ज मामलों की सूची पूरी सूची माँगी है। खबर ये भी है कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने आजम खान के स्टाफ को मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से संबंधित जमीन के सभी सौदों का ब्योरा देने के लिए तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस अधीक्षक (रामपुर) अजय पाल शर्मा ने बताया कि पुलिस ने राजस्व रिकॉर्ड, भुगतान रसीद और जिनसे जमीन ली गई है उन पक्षों के साथ जमीन के करार का सभी ब्योरा माँगा गया है। खरीदी गई जमीन का मूल्य कई सौ करोड़ रुपए बताया जा रहा है।

पुलिस अधीक्षक अजय पाल शर्मा ने यह भी कहा, “हमें बिक्री अभिलेख की जाँच करने की जरूरत है और असली विक्रेता से इसका सत्यापन करना है। साथ ही हम उन खातों की भी जाँच करना चाहते हैं जिनसे भुगतान हुआ है। जिन पक्षों ने भुगतान प्राप्त किया है उनका सत्यापन करना है।”

जानकारी के मुताबिक उनके ऊपर पहले ही इस मामले से सम्बंधित 26 शिकायतें दर्ज हो चुकी थीं लेकिन पिछले दिनों की खबर है कि सपा सांसद और उनके करीबियों पर फिर 8 नई शिकायतें दर्ज हुई हैं।

इस मामले के मद्देनजर रामपुर पुलिस ने बुधवार (जून 24, 2019) को जज के सामने उन किसानों के बयान भी दर्ज करवाए थे जिनकी जमीनें जौहर यूनिवर्सिटी बनाने के लिए कब्जाई गई। इन पीड़ित किसानों के बयानों को जुलाई 25, 2019 न्यायधीश के सामने दर्ज करवाया गया था।

वहीं, बता दें जमीन कब्जाने के पिछले मामले में पीड़ित किसानों में से कुछ किसानों के परिवारवालों ने बीते रविवार को राजभवन पहुँचकर राज्यपाल से न्याय की गुहार लगाई थी। जिसके बाद राज्यपाल राम नाईक ने भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर जौहर यूनिवर्सिटी का अधिग्रहण करने की बात कही थी।

उन्होंने अपने पत्र में उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अल्पसंख्यक विभाग के उपाध्यक्ष फैसल खान का जिक्र करते हुए कहा था कि वे कई बार जौहर यूनिवर्सिटी में कई अनियमितताओं की शिकायत कर चुके हैं। इस मामले के मद्देनजर फैसल 8 जुलाई को राज्यपाल से भी मिले थे और उन्होंने राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा था।

जिसमें उनका कहना था कि ‘यूनिवर्सिटी में 80 प्रतिशत जमीन सरकार और किसानों से कब्जाई गई है और 20 प्रतिशत जमीन चंदे के पैसे से खरीदी गई है। बावजूद इसके वहाँ बच्चों से मोटी फीस वसूली जाती है। जिसकी कमाई जौहर ट्रस्ट को जाती है और ये जौहर ट्रस्ट आजम खान के घर का निजी ट्रस्ट है।’

उन्नाव रेप मामला: राजनीति के चक्कर में प्रियंका गाँधी ने सोशल मीडिया पर डाला रेप पीड़िता का नाम

उन्नाव रेप केस मामले में प्रियंका गाँधी एक बड़ी गलती कर बैठीं। ‘सबसे तेज’ चैनल की तरह वो ‘सबसे तेज’ नेता बनना चाह रही थीं लेकिन दाँव उल्टा पड़ गया। दरअसल उन्होंने उन्नाव रेप केस मामले में दर्ज हुई एफआईआर की हालिया कॉपी को अपने ट्विटर पर ट्वीट कर दिया। इस FIR कॉपी में पीड़िता के नाम का भी उल्लेख है।

ऐसी घटना पर गुस्सा और नाराजगी जायज है लेकिन चुनावों में महिलाओं को उनके अधिकारों से रू-ब-रू करवाने वाली प्रियंका गाँधी ये भूल गईं कि किसी भी रेप पीड़िता का नाम उगाजर करना न केवल मना है बल्कि कानूनन यह एक जुर्म भी है। प्रियंका गाँधी को एक राजनेता के तौर पर विपक्षी पार्टी पर हमला करते हुए, राजनीतिक पॉइंट बटोरते हुए यह ख्याल रखना चाहिए कि कहीं इससे किसी की निजता या सम्मान को ठेस न पहुँचे। लेकिन शायद अभी इन बातों से ये कोसों दूर हैं!

प्रियंका गाँधी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट (उस हिस्से को काला कर दिया गया है, जहाँ पीड़िता का नाम लिखा है, यही काम प्रियंका गाँधी को भी करना चाहिए था।)

एक ओर जहाँ प्रियंका गाँधी को उनकी पार्टी के शीर्ष नेता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के लिए सबसे बेहतर दावेदार बता रहे हैं तो वहीं सरेआम एक रेप पीड़िता का नाम सोशल मीडिया पर उछालकर उन्होंने गैर-जिम्मेदाराना परिचय दिया है।

उन्होंने अपने ट्वीट में कुलदीप सेंगर जैसे लोगों को मिलने वाली राजनैतिक ताकतों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “हम क्यों कुलदीप सेंगर जैसे लोगों को राजनैतिक ताकत और सुरक्षा दे देते हैं और पीड़िता को पूरी जिंदगी लड़ने के लिए अकेला छोड़ देते हैं।”

उन्होंने पीड़िता के नाम वाली प्राथमिकी को शेयर करते हुए हवाला दिया कि ये एफआईआर स्पष्ट बता रही है कि पीड़िता के परिवार वालों को धमकाया और डराया गया। साथ ही इसमें योजनाबद्ध दुर्घटना की संभावना का भी उल्लेख है।

अपनी गलती का अहसास होने पर प्रियंका गाँधी ने ट्वीट डिलीट कर दिया लेकिन तब तक स्क्रीनशॉट और उनके पूरे ट्वीट का वीडियो बनाया जा चुका था।

भोजपुरी हीरोइन रेशमा के शौहर मुदस्सिर ने 100 रुपए के स्टाम्प पेपर पर भेजा ‘तलाक-ए-बाईन’

एक तरफ जहाँ आज तीन तलाक बिल को केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद राज्यसभा में पेश कर रहे हैं वहीं तीन तलाक से जुड़ा एक और मामला सामने आया है। इंदौर में एक भोजपुरी फिल्म अभिनेत्री रेशमा ने अपने शौहर मुदस्सिर पर यह आरोप लगाया कि उसके शौहर ने 100 रुपए के स्टाम्प पेपर पर तलाकनामा भेजा है। दरअसल, रेशमा शेख उर्फ अलीना नाम की भोजपुरी अभिनेत्री ने पहले अपने शौहर के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी।

अभिनेत्री ने बताया, “मेरे पति मुदस्सिर बेग (34) जो जूते-चप्पल का कारोबार करते हैं, ने मुझे 17 जुलाई को 100 रुपए का स्टाम्प पेपर भिजवाया। जिस पर तलाक-ए-बाईन (शरीयत के हिसाब से तलाक़ का एक प्रकार) छपा है। जिस पर लिखा था कि मैं तंग आ चुका हूँ। अपना रिश्ता यहीं खत्म करता हूँ। तुम भी आगे की जिंदगी अपने तरीके से जी सकती हो। यह पहला तलाक है। दो और भेज दूँगा।” हालाँकि, अभिनेत्री रेशमा ने इसे एकतरफा फैसला बताते हुए इसे मानने से साफ इनकार कर दिया है।

अलीना का आरोप है कि अब्दुल्ला और उसके परिजन ने झाँसे में लेकर उससे शादी की है। शादी के पहले लाखों रुपए भी ले लिए थे। साथ रखने का वादा कर इंदौर बुलाया और छोड़ दिया। अलीना के मुताबिक वह मुंबई में 10 साल तक भोजपुरी फिल्म और धारावाहिकों में सक्रीय रही हैं।

बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता के साथ रेशमा

बता दें कि अलीना ने पाँच साल पहले 2016 में मुदस्सिर से प्रेम विवाह किया था। अलीना ने बताया, “अपनी शादी की  खातिर मैंने अभिनय करना भी छोड़ दिया है। हमारा दो महीने का बच्चा है और मैं अपने शौहर के साथ ही रहना चाहती हूँ।” अलीना का कहना है कि वह न्याय की आस लिए चंदन नगर पुलिस थाने और कुछ आला पुलिस अफसरों के दफ्तरों के चक्कर काट चुकी है लेकिन, इसका कोई फायदा नहीं हुआ।

वहीं मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए चंदन नगर पुलिस थाने के प्रभारी राहुल शर्मा ने कहा कि यह पति पत्नी का आपसी मामला है। अलीना के पति मुदस्सिर बेग का पक्ष सुनने के लिए उनसे संपर्क करने की कोशिश की जा रही है। हमने बहुत प्रयास किया लेकिन, उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। अलिना के मुताबिक तीन तलाक का यह तरीका गलत है। इससे कई लड़कियों की जिंदगी खराब हो रही है। उन्हें न्याय का पूरा भरोसा है। अब देखना ये है कि उनके इस मामले में क्या होता है। यह मामला नया नहीं है ट्रिपल तलाक़ ने ऐसी न जाने कितनी मुस्लिम महिलाओं का जीना हराम कर दिया है। ऐसे में तलाक़ पर कानून की आस लगभग हर मुस्लिम महिला को है। लोकसभा में बिल के पास होने पर बहुत सारी मुस्लिम महिलाओं ने इस पर अपनी ख़ुशी जाहिर की थी।

रसगुल्ले की यात्रा: भुवनेश्वर के पास ‘पहला’ नाम के गाँव से बना ‘पहला रसगुल्ला’

‘The Holy Cow’ टाइप कहावत ऐसे ही शुरू नहीं हुई। गाय से जुड़ी हर चीज़ को पवित्र माना जाता है। जाहिर है ऐसे में दूध भी पवित्र होता है। अगर दूध से जुड़ी परम्पराएँ भी देखेंगे तो ये नजर आ आएगा। बिहार के मिथिला या पश्चिम बंगाल के इलाकों में दूध फाड़ने, यानी छेना बनाने वाले को परिवार तोड़ने वाला बर्ताव माना जाता है, वहीं दही ज़माने को परिवार को एक जुट रखने से जोड़ा जाता है। मतलब अगर कोई महिला अच्छी दही नहीं जमा सकती तो ये उनके पाक कला पर ही नहीं बल्कि बर्ताव के तरीके पर भी बड़ा सा सवालिया निशान लगा देता है।

परिवार को तोड़ने वाला लक्षण माना जाएगा तो दूध फाड़ा नहीं जाएगा, यानी कोई पनीर नहीं बनेगा, कोई छेना नहीं होगा, कोई रसगुल्ला भी नहीं बनेगा! अब ये सुनने में आश्चर्य हो लेकिन 1850 से पहले तक कहीं भी रसगुल्ले का जिक्र नहीं आता। जी हाँ, कई फ्रेंच, पुर्तगाली, चीनी यात्री जो इस से पहले तक आए थे उन्होंने खाने पीने की चीज़ों का जिक्र तो जम कर किया है, लेकिन बंगाल में लम्बा समय गुजारने के बाद भी किसी ने रसगुल्ले का जिक्र नहीं किया है।

बंगाल में पहली बार रसगुल्ले बनने का जिक्र 1868 का है। ये वो समय था जब पुर्तगालियों ने चटगाँव में अपनी पहली फैक्ट्री लगा ली थी। विदेशियों की आबादी उस इलाके में पाँच हज़ार से ज्यादा हो गई थी। पुर्तगाली पनीर के बड़े शौक़ीन थे, इसी वजह से दूध से पनीर बनना शुरू हुआ। जब पनीर बनने लगा तो धीरे धीरे उस से रसगुल्ला पनपा। नोबिन चन्द्र दास ने बाग़ बाजार की अपनी दुकान से पहली बार बंगाल में रसगुल्ला बेचना शुरू किया। इसी रसगुल्ले जैसी चीज़ लगभग उसी दौर में ओड़िसा के जगन्नाथ मंदिर में भी पनपी।

वहाँ इसे खीर मोहन कहते हैं, ये रसगुल्ले से थोड़ी सी अलग है। माना जाता है कि भगवान कृष्ण जब मंदिर से नौ दिन की रथ यात्रा पर निकले तो उन्होंने देवी लक्ष्मी को इस बारे में बताया ही नहीं। बिना इजाज़त निकलने का नतीजा ये हुआ कि जब वो लौटे तो गुस्से गुस्से में लक्ष्मी जी जय विजय नाम का दरवाजा बंद कर के बैठ गई। जब भगवान जगन्नाथ ने उन्हें खीर मोहन से मनाया तब जाकर वो मानी। रथ यात्रा के बाद यानी नीलाद्रि बीजे के एक भाग में ये बचनिका नाम की परंपरा आज भी मनाई जाती है। तीन सौ साल से पुराने कई दस्तावेजों में मंदिर के इस खीर मोहन का जिक्र है। माना जाता है कि भुवनेश्वर के पास “पहला” नाम के गाँव में दूध की बर्बादी होते देखकर मंदिर के पुजारियों ने ही उन्हें रसगुल्ला बनाने और दूध को बचा लेने की विधि सिखाई। इस तरह ओडिशा में “पहला रसगुल्ला” के नाम से ये प्रसिद्ध हुआ।

ऐसा नहीं है कि नोबिन चन्द्र दास ने पहला रसगुल्ला बनाया हो। उसी दौर में कोलकाता की और दुकानों में भी रसगुल्ला बनने लगा था। भगवानदास बागला नाम के एक व्यापारी ने इसे नोबिन चन्द्र दास से लेकर काफी दूर तक फैलाया। 1930 में नोबिन चन्द्र दास के पुत्र कृष्ण चन्द्र दास ने इसे वैक्यूम पैक करना शुरू कर दिया और इस तरह ये पूरे भारत में, और विदेशों में भी प्रचलित हुआ। वैसे देखेंगे तो आज जो स्पंज रसगुल्ला मिलता है वो और भी नया अविष्कार है। दरअसल भैंस के दूध से उसे बनाया नहीं जा सकता। गाय के दूध को फाड़कर उस से छेना बनाना बाद में शुरू हुआ इसलिए स्पंज रसगुल्ला भी बाद में बना।

पहली और गोल चीजों की बात हो तो बंगाल पहले बम गोले के लिए भी प्रसिद्ध रहा है। बाघा जतिन जैसे लोग भी यहीं के थे। बाकि बंगाल के जैसे हालात हैं, ऐसे में क्या बनाना और परोसना है, ये बंगाल के बुद्धिजीवी खुद ही सोच लेंगे। रसगुल्ला है, बम भी है ही।