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‘The Wire’ ने J&K के कई हिस्सों को बताया ‘भारत के कब्जे वाला क्षेत्र’, Pak का भी यही रुख

प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द वायर’ ने इस बार खुल कर पाकिस्तानी अजेंडे को आगे बढ़ाया है। अनुच्छेद 370 के अहम प्रावधानों को निरस्त कर जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने और राज्य का 2 केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में पुनर्गठन करने वाले सरकार के निर्णय के बाद कई राजनीतिक दलों, नेताओं व मीडिया पोर्टल्स का असली चेहरा पूरी तरह से बेनक़ाब हुआ है। जहाँ अधीर रंजन चौधरी ने संसद में कश्मीर को भारत का आंतरिक मुद्दा मानने से इनकार कर दिया, वहीं संसद के बाहर वे अपने ही बयान से पलट गए।

‘द वायर’ के सिद्धार्थ वरदराजन ने अपने पोर्टल के यूट्यूब चैनल पर पोस्ट की गई एक वीडियो में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने की चर्चा की। इस वीडियो में जम्मू कश्मीर का नक्शा दिखा कर वहाँ की भौगोलिक स्थिति पर प्रकाश डाला गया और सभी क्षेत्रों की स्थिति का विवरण दिया गया। लेकिन, नक़्शे में साफ़ देखा जा सकता है कि श्रीनगर सहित जम्मू कश्मीर के कई अन्य क्षेत्रों को ‘Indian Occupied Part’ यानी ‘भारत के कब्जे वाला भाग’ कहा गया है।

पाकिस्तान भी यही मानता है। पाकिस्तान का रुख है कि जम्मू कश्मीर के इस हिस्से पर ‘भारत का कब्जा’ है। ‘द वायर’ के वीडियो में पाक के कब्जे वाले हिस्से को ‘आजाद कश्मीर’ लिखा गया है। नीचे दिए गए स्क्रीनशॉट में आप देख सकते हैं कि कैसे श्रीनगर सहित अन्य हिस्सों को ‘भारत के कब्जे वाला भाग’ बताया गया है। इस वीडियो में 5:31 से 5:35 तक बताया गया कि जम्मू कश्मीर का श्रीनगर सहित अन्य हिस्सा ‘भारत के कब्जे’ में है। ताज़ा सूचना मिलने तक ‘द वायर’ ने इस वीडियो को ट्रिम कर के इस नक़्शे वाले हिस्से को हटा दिया है। आपको बता दें कि यूट्यूब पर अपलोड करने के बाद भी वीडियो को एडिट किया जा सकता है।

‘द वायर’ के वीडियो का हमारे द्वारा लिया गया स्क्रीनशॉट (नक़्शे ने निचले हिस्से पर नीले घेरे में देखिए’)

आपको बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले ही साफ़ कर दिया है कि जब जम्मू कश्मीर की बात की जाती है तो जम्मू और लद्दाख के अलावा कश्मीर के उन हिस्सों की भी बात की जाती है जो पाकिस्तान और चीन के कब्जे में हैं। जब भारत सरकार का रुख साफ़ है कि पूरा का पूरा जम्मू कश्मीर देश का अभिन्न अंग है और यह हमारा आंतरिक मुद्दा है, ऐसे में इन प्रोपेगेंडा पोर्टल्स द्वारा पाकिस्तानी अजेंडे को आगे बढ़ाना कहाँ तक उचित है?

राम मंदिर के लिए ईंट-बजरी तोड़ने भेजे गए हैं कश्मीर से 72 से 2 कम खूँखार आतंकी: विशेष सूत्र

आर्टिकल-370 के पर कतरे जाने और जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद आज एक नई बात जो सामने आई है वो ये कि 70 खूँखार आतंकियों और पाकिस्तान समर्थित अलगाववादियों की घाटी में ‘क्षमता’ देखते हुए उन्हें आगरा के जेल में शिफ्ट किया गया है।

कश्मीर से सीधा उत्तर प्रदेश भेजे जाने पर दिमाग में सबसे पहले 2 बातें याद आती हैं। पहला, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दूसरा, उत्तर प्रदेश की पुलिस। ये वही पुलिस है जो मात्र ठाँय-ठाँय के भयानक स्वर से ही अपराधियों की हवा टाइट करने के लिए जानी जाती है।

ऑपइंडिया तीखी-मिर्ची सेल की ख़ुफ़िया रिपोर्ट्स की मानें तो इन आतंकियों को उत्तर प्रदेश पुलिस की निगरानी में मात्र ‘ठाँय-ठाँय’ के ही स्वर से जन्नत-ए-फ़िरदौस की पहली यात्रा ट्रायल के तौर पर करवाई जाएगी।

आतंकियों के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस जो करने वाली है, उसका प्रतीकात्मक चित्र –

आतंक की फैक्ट्री हूरों के ख्वाब पर ही चलती है। कुत्ते जैसी मौत के बाद आतंकियों को 72 हूरें नसीब होती हैं कि नहीं, रब जाने। लेकिन, आगरा भेजकर सरकार ने इतना तो इंतजाम कर दिया है कि वे कम से कम ताज का दीदार कर लें। शायद भू-माफिया आजम खान को पहले ही इस दिन का एहसास हो गया था, तभी तो वे कई बार ताजमहल को गिरा देने की गुहार सरकार से लगा चुके हैं।

हालाँकि, नाम न बताने की शर्त पर कुछ ख़ुफ़िया सूत्रों का कहना है कि इन आतंकियों को अयोध्या राम मंदिर निर्माण की ईंट-बजरी ढुलवाने से लेकर लोहा सरिया पिघलाने तक का काम गधों की तरह करवाया जाना है। प्रधानमंत्री मोदी जी का कहना है कि इस बारे में अभी कोई पूर्वसूचना नहीं है लेकिन रामदेव का कहना है कि आखिर हैं तो वो भी राम, कृष्ण और शिव के ही वंशज।

आखिर आतंकवादियों को राम मंदिर कार्य में सिर्फ पहाड़ तोड़कर पत्थर-बजरी बनाने तक ही क्यों सीमित रखा जा रहा? कुछ आतंकियों ने इसका जवाब देते हुए कहा- “यह शुभ कार्य मात्र राम-भक्तों के ही हाथों होना चाहिए।”

वहीं, इस कदम से पहले ही उत्तर प्रदेश में जनता ने पंचर टायर जमा करने शुरू कर दिए हैं। उनका मानना है कि सत्तर आतंकियों के उत्तर प्रदेश में आ जाने के बाद प्रदेश में टायरों के पंचर होने का प्रतिशत गिरने की सम्भावनाएँ बढ़ सकती हैं।

…अब J&K के 70 खूँखार आतंकियों को संभालेंगे योगी आदित्यनाथ, लोग शेयर करने लगे Memes

आर्टिकल-370 के पर कतरे जाने और जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद संभावित हिंसा को देखते हुए पूरे राज्य में सुरक्षाबलों को हाई अलर्ट पर रखा गया था। इससे पहले एहतियात के तौर पर राज्य के शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिया गया था। साथ ही मोबाइल और इंटरनेट कनेक्शन बंद कर धारा 144 लागू कर दी गई थी। हालाँकि अब हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगे हैं। लेकिन कुछ खूँखार आतंकियों और पाकिस्तान समर्थित अलगाववादियों की घाटी में ‘क्षमता’ देखते हुए उन्हें आगरा के जेल में शिफ्ट किया गया है।

लगभग 70 आतंकियों और पाकिस्तान समर्थित अलगाववादियों को भारतीय वायुसेना के स्पेशल प्लेन से कश्मीर से आगरा लाया गया। ऐसा करना आवश्यक था क्योंकि राज्य के सांबा जिला प्रशासन ने सामान्य स्थिति को देखते हुए आदेश दिया है कि शुक्रवार (9 अगस्त 2019) से सभी शैक्षणिक संस्थान खुल जाएँगे। ऐसे में प्रशासन वैसी किसी भी संभावना से बचना चाहता है, जिससे प्रोपेगेंडा के तहत विरोध का स्वर बढ़े और उसका असर शिक्षण संस्थानों पर पड़े।

इस खबर के बाद लोग सोशल मीडिया पर न जाने क्यों योगी आदित्यनाथ के मीम शेयर करने लगे।

आलू बोंडा नाम के ट्विटर यूजर ने तो यहाँ तक लिख दिया कि क्या इन्हें आगरा के पागलखाने ले जाया जाएगा?

किसी ने सिर्फ एक फोटो डाली और…

स्किन डॉक्टर नाम के एक यूजर ने किसी हिंदी फिल्म (मनोज वाजपेयी हीरो हैं इसमें) की फोटो डाल कर काम चलाया है।

चिरायु नाम के एक यूजर ने उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की फोटो डाली है।

रेसलर संगीता फोगाट बनेंगी नंबर वन पहलवान बजरंग पूनिया की दुल्हनिया

संगीता फोगाट दुनिया के नंबर वन पहलवान बजरंग पुनिया के साथ शादी करेंगी। संगीता कुश्ती की कई अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में पदक जीतने वाली फोगाट बहनों में तीसरे नंबर पर हैं। माना जा रहा है कि अगले साल होने वाले ओलंपिक के बाद दोनों सात फेरे लेंगे।

संगीता 59 किग्रा वर्ग में राष्ट्रीय चैंपियन रह चुकी हैं। संगीता से बड़ी बहन बबीता फोगाट का भी पहलवान विवेक सुहाग से रिश्ता पक्का हो चुका है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, बजरंग इस समय ओलंपिक की तैयारियों में जुटे हुए हैं। वहीं, संगीता राष्ट्रीय शिविर में चोट से उबर रही हैं। शादी की खबर की पुष्टि संगीता के पिता और कोच महावीर फोगाट ने की है।

फोगाट बहनें पहली बार चर्चा में 2017 के राष्ट्रमंडल खेलों से आईं थी। फोगाट बहनों में तीन सगी बहनें गीता फोगाट, रितु फोगाट, संगीता फोगाट और उनकी चचेरी बहन विनेश फोगाट शामिल हैं। गीता और विनेश की शादी पहले ही हो चुकी है।

पहली बार सही मायनों में देश के हर नागरिक को समान हक़ मिल रहे हैं: PM मोदी का पूरा भाषण

जम्मू-कश्मीर को दो भागों में बाँटने और अनुच्छेद-370के अधिकतर हिस्सों को हटाने के बाद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार आज देश को संबोधित कर रहे हैं। PM मोदी इस संबोधन में जम्‍मू-कश्‍मीर को लेकर उठाए गए कदमों के बारे में राष्‍ट्र को संदेश दे रहे हैं।

मुख्य बातें:

जो सपना सरदार पटेल का था, बाबा साहेब अंबेडकर का था, डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का था, अटल जी और करोड़ों देशभक्तों का था, वो अब पूरा हुआ है।

समाज जीवन में कुछ बातें, समय के साथ इतनी घुल-मिल जाती हैं कि कई बार उन चीजों को स्थाई मान लिया जाता है। ये भाव आ जाता है कि, कुछ बदलेगा नहीं, ऐसे ही चलेगा। अनुच्छेद 370 के साथ भी ऐसा ही भाव था। उससे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हमारे भाई-बहनों की जो हानि हो रही थी, उसकी चर्चा ही नहीं होती थी। हैरानी की बात ये है कि किसी से भी बात करें, तो कोई ये भी नहीं बता पाता था कि अनुच्छेद 370 से जम्मू-कश्मीर के लोगों के जीवन में क्या लाभ हुआ।

हमारे देश में कोई भी सरकार हो, वो संसद में कानून बनाकर, देश की भलाई के लिए काम करती है। किसी भी दल की सरकार हो, किसी भी गठबंधन की सरकार हो, ये कार्य निरंतर चलता रहता है। कानून बनाते समय काफी बहस होती है, चिंतन-मनन होता है, उसकी आवश्यकता को लेकर गंभीर पक्ष रखे जाते हैं। इस प्रक्रिया से गुजरकर जो कानून बनता है, वो पूरे देश के लोगों का भला करता है। लेकिन कोई कल्पना नहीं कर सकता कि संसद इतनी बड़ी संख्या में कानून बनाए और वो देश के एक हिस्से में लागू ही नहीं हों।

देश के अन्य राज्यों में सफाई कर्मचारियों के लिए सफाई कर्मचारी एक्ट लागू है, लेकिन जम्मू-कश्मीर के सफाई कर्मचारी इससे वंचित थे। देश के अन्य राज्यों में दलितों पर अत्याचार रोकने के लिए सख्त कानून लागू है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में ऐसा नहीं था। देश के अन्य राज्यों में अल्पसंख्यकों के हितों के संरक्षण के लिए माइनॉरिटी एक्ट लागू है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में ऐसा नहीं था। देश के अन्य राज्यों में श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए Minimum Wages Act लागू है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में ये सिर्फ कागजों पर ही मिलता था।

नई व्यवस्था में केंद्र सरकार की ये प्राथमिकता रहेगी कि राज्य के कर्मचारियों को, जम्मू-कश्मीर पुलिस को, दूसरे केंद्र शासित प्रदेश के कर्मचारियों और वहाँ की पुलिस के बराबर सुविधाएँ मिलें। जल्द ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में केंद्रीय और राज्य के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे स्थानीय नौजवानों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। केंद्र की पब्लिक सेक्टर यूनिट्स और प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों को भी रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

हमने जम्मू-कश्मीर प्रशासन में एक नई कार्यसंस्कृति लाने, पारदर्शिता लाने का प्रयास किया है। इसी का नतीजा है कि IIT, IIM, एम्स हो, तमाम इरिगेशन प्रोजेक्ट्स हो, पावर प्रोजेक्ट्स हों, या फिर एंटी करप्शन ब्यूरो, इन सबके काम में तेजी आई है।

आप ये जानकर चौंक जाएँगे कि जम्मू-कश्मीर में दशकों से, हजारों की संख्या में ऐसे भाई-बहन रहते हैं, जिन्हें लोकसभा के चुनाव में तो वोट डालने का अधिकार था, लेकिन वो विधानसभा और स्थानीय निकाय के चुनाव में मतदान नहीं कर सकते थे। ये वो लोग हैं जो बँटवारे के बाद पाकिस्तान से भारत आए थे। क्या इन लोगों के साथ अन्याय ऐसे ही चलता रहता?

हम सभी चाहते हैं कि आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर विधानसभा के चुनाव हों, नई सरकार बने, मुख्यमंत्री बनें। मैं जम्मू-कश्मीर के लोगों को भरोसा देता हूँ कि आपको बहुत ईमानदारी के साथ, पूरे पारदर्शी वातावरण में अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलेगा। जैसे पंचायत के चुनाव पारदर्शिता के साथ संपन्न कराए गए, वैसे ही विधानसभा के भी चुनाव होंगे। मैं राज्य के गवर्नर से ये भी आग्रह करूँगा कि ब्लॉक डवलपमेंट काउंसिल का गठन, जो पिछले दो-तीन दशकों से लंबित है, उसे पूरा करने का काम भी जल्द से जल्द किया जाए।

मुझे पूरा विश्वास है कि अब अनुच्छेद 370 हटने के बाद, जब इन पंचायत सदस्यों को नई व्यवस्था में काम करने का मौका मिलेगा तो वो कमाल कर देंगे। मुझे पूरा विश्वास है कि जम्मू-कश्मीर की जनता अलगाववाद को परास्त करके नई आशाओं के साथ आगे बढ़ेगी। मुझे पूरा विश्वास है कि जम्मू-कश्मीर की जनता, Good Governance और पारदर्शिता के वातावरण में, नए उत्साह के साथ अपने लक्ष्यों को प्राप्त करेगी।

दशकों के परिवारवाद ने जम्मू-कश्मीर के युवाओं को नेतृत्व का अवसर ही नहीं दिया। अब मेरे युवा, जम्मू-कश्मीर के विकास का नेतृत्व करेंगे और उसे नई ऊँचाई पर ले जाएँगे। मैं नौजवानों, वहाँ की बहनों-बेटियों से आग्रह करूँगा कि अपने क्षेत्र के विकास की कमान खुद सँभालिए।

जम्मू-कश्मीर के केसर का रंग हो या कहवा का स्वाद, सेब का मीठापन हो या खुबानी का रसीलापन, कश्मीरी शॉल हो या फिर कलाकृतियाँ, लद्दाख के ऑर्गैनिक प्रॉडक्ट्स हों या हर्बल मेडिसिन, इसका प्रसार दुनियाभर में किए जाने का जरूरत है। Union Territory बन जाने के बाद अब लद्दाख के लोगों का विकास, भारत सरकार की विशेष जिम्मेदारी है। स्थानीय प्रतिनिधियों, लद्दाख और कारगिल की डवलपमेंट काउंसिल्स के सहयोग से केंद्र सरकार, विकास की तमाम योजनाओं का लाभ अब और तेजी से पहुँचाएगी।

लद्दाख में स्पीरिचुअल टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म औरइकोटूरिज्म का सबसे बड़ा केंद्र बनने की क्षमता है। सोलर पावर जनरेशन का भी लद्दाख बहुत बड़ा केंद्र बन सकता है। अब वहाँ के सामर्थ्य का उचित इस्तेमाल होगा और बिना भेदभाव विकास के लिए नए अवसर बनेंगे। अब लद्दाख के नौजवानों की इनोवेटिव स्पिरिट को बढ़ावा मिलेगा, उन्हें अच्छी शिक्षा के लिए बेहतर संस्थान मिलेंगे, वहाँ के लोगों को अच्छे अस्पताल मिलेंगे, इंफ्रास्ट्रक्चर का और तेजी से आधुनिकीकरण होगा।

लोकतंत्र में ये भी बहुत स्वाभाविक है कि कुछ लोग इस फैसले के पक्ष में हैं और कुछ को इस पर मतभेद है। मैं उनके मतभेद का भी सम्मान करता हूँ और उनकी आपत्तियों का भी। इस पर जो बहस हो रही है, उसका केंद्र सरकार जवाब भी दे रही है। ये हमारा लोकतांत्रिक दायित्व है। लेकिन मेरा उनसे आग्रह है कि वो देशहित को सर्वोपरि रखते हुए व्यवहार करें और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख को नई दिशा देने में सरकार की मदद करें। संसद में किसने मतदान किया, किसने नहीं किया, इससे आगे बढ़कर अब हमें जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के हित में मिलकर, एकजुट होकर काम करना है।

मैं हर देशवासी को ये भी कहना चाहता हूँ कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों की चिंता, हम सबकी चिंता है, उनके सुख-दुःख, उनकी तकलीफ से हम अलग नहीं हैं।

अनुच्छेद 370 से मुक्ति एक सच्चाई है, लेकिन सच्चाई ये भी है कि इस समय ऐहतियात के तौर पर उठाए गए कदमों की वजह से जो परेशानी हो रही है, उसका मुकाबला भी वही लोग कर रहे हैं। कुछ मुट्ठी भर लोग जो वहाँ हालात बिगाड़ना चाहते हैं, उन्हें जवाब भी वहाँ के स्थानीय लोग दे रहे हैं। हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवाद और अलगाववाद को बढ़ावा देने की पाकिस्तानी साजिशों के विरोध में जम्मू-कश्मीर के ही देशभक्त लोग डटकर खड़े हुए हैं।

हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवाद और अलगाववाद को बढ़ावा देने की पाकिस्तानी साजिशों के विरोध में जम्मू-कश्मीर के ही देशभक्त लोग डटकर खड़े हुए हैं। जम्मू-कश्मीर के साथियों को भरोसा देता हूँ कि धीरे-धीरे हालात सामान्य हो जाएँगे और उनकी परेशानी भी कम होती चली जाएगी। ईद का मुबारक त्योहार भी नजदीक ही है। ईद के लिए मेरी ओर से सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।

सरकार इस बात का ध्यान रख रही है कि जम्मू-कश्मीर में ईद मनाने में लोगों को कोई परेशानी न हो। हमारे जो साथी जम्मू-कश्मीर से बाहर रहते हैं और ईद पर अपने घर वापस जाना चाहते हैं, उनको भी सरकार हर संभव मदद कर रही है। जम्मू-कश्मीर के लोगों की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाबलों के साथियों का आभार व्यक्त करता हूं। प्रशासन से जुड़े लोग, राज्य के कर्मचारी और जम्मू-कश्मीर पुलिस जिस तरह से स्थितियों को सँभाल रही है वो प्रशंसनीय है आपके इस परिश्रम ने मेरा ये विश्वास और बढ़ाया है कि बदलाव हो सकता है।

ये फैसला जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के साथ ही पूरे भारत की आर्थिक प्रगति में सहयोग करेगा। जब दुनिया के इस महत्वपूर्ण भूभाग में शांति और खुशहाली आएगी, तो स्वभाविक रूप से विश्व शांति के प्रयासों को मजबूती मिलेगी। मैं जम्मू-कश्मीर के अपने भाइयों और बहनों से, लद्दाख के अपने भाइयों और बहनों से आह्वान करता हूँ। आइए, हम सब मिलकर दुनिया को दिखा दें कि इस क्षेत्र के लोगों का सामर्थ्य कितना ज्यादा है, यहाँ के लोगों का हौसला, उनका जज्बा कितना ज्यादा है।

आइए, हम सब मिलकर, नए भारत के साथ अब नए जम्मू-कश्मीर और नए लद्दाख का भी निर्माण करें।

‘हम मुस्लिम हैं, डर शब्द हमारी डिक्शनरी में नहीं, 27 फरवरी को याद रखा जाए’

अनुच्‍छेद-370 (Article-370) को निष्प्रभावी कर जम्‍मू-कश्‍मीर को दो केंद्रशासित राज्‍यों में बाँटने के मोदी सरकार के फैसले से बौखलाया पाकिस्‍तान बयानबाजी से बाज नहीं आ रहा। बृहस्पतिवार (अगस्त 08, 2019) को इस मसले पर प्रेस कॉन्फ़्रेंस करते हुए पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फ़ैसल ने कहा कि भारत अपने नागरिकों के मानवाधिकारों का हनन और संयुक्त राष्ट्र संघ की उपेक्षा कर रहा है।

मोहम्मद फ़ैसल ने कहा कि भारत ने ऐसा कर दक्षिण एशिया की स्थिरता और शांति को जोखिम में डाल दिया है। एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते उन्होंने कहा, “भारत ने ऐसा कर दक्षिण एशिया की स्थिरता और शांति को जोखिम में डाल दिया है। यह लगातार जारी रहने वाली प्रक्रिया है और दुनिया भर से लोग बोल भी रहे हैं। इसके लिए लंबा संघर्ष करना होगा, ये सात दशक का क़िस्सा है कोई दो-चार बरस की बात नहीं है। मामला तो अभी चलेगा और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर नोटिस ले रहा है।”

कश्मीर में भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती और युद्ध की आशंका को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में मोहम्मद फ़ैसल ने कहा, “हम मुस्लिम हैं और डर शब्द हमारी डिक्शनरी में नहीं है। इसको निकाल दें। हम डरते नहीं। 27 फ़रवरी को याद रखा जाए, फिर डर की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी। हिन्दुस्तान जो भी करना चाहता है उसका जवाब पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति और संसद ने बुधवार को दे दिया है।’

बालाकोट में भारतीय वायुसेना की कार्रवाई के बाद 27 फ़रवरी को जब पाकिस्तान ने भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश की थी तो भारतीय मिग ने उसके विमानों को खदेड़ दिया था। इस दौरान एक मिग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और पाकिस्तान ने भारतीय पायलट अभिनन्दन को अपने क़ब्ज़े में ले लिया था।

‘सैन्‍य कार्रवाई पर विचार नहीं’

पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री एसएम कुरैशी ने कहा कि पकिस्तान सरकार भारत के साथ बने मौजूदा हालात से निपटने के लिए कूटनीतिक विकल्‍पों पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा अनुच्‍छेद-370 हटाने के खिलाफ कानूनी विकल्‍पों पर भी विचार किया जा रहा है। उन्‍होंने स्‍पष्‍ट किया कि पाकिस्‍तान सैन्‍य कार्रवाई के बारे में विचार नहीं कर रहा है।

370 पर फैसले के अगले ही दिन पाकिस्‍तान के नेताओं ने भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की धमकी भी दी थी। लेकिन, भारत के रुख से डरा पाकिस्‍तान अब कूटनीति के जरिए हालात से निपटने की बातें कर रहा है। इमरान खान और नरेंद्र मोदी सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र में भाग लेंगे और संभावना है कि दोनों नेता अपने संबोधन में कश्मीर को प्रमुखता देंगे।

जम्मू-कश्मीर: कल से खुलेंगे स्कूल-कॉलेज, कर्मचारियों को काम पर लौटने का आदेश

जम्मू-कश्मीर में हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगे हैं। राज्य के मुख्य सचिव ने श्रीनगर स्थित सचिवालय सहित डिस्ट्रिक्ट और डिविजनल लेवल के सभी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से काम पर लौटने को कहा है।

सांबा जिला प्रशासन ने कहा है कि शुक्रवार से सभी शैक्षणिक संस्थान खुल जाएँगे। इनमें निजी और सरकारी दोनों तरह के शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं।

गौरतलब है कि आर्टिकल 370 को निष्प्रभावी करने से पहले राज्य के शैक्षणिक संस्थानों को एहतियातन बंद कर दिया गया था। मोबाइल और इंटरनेट कनेक्शन बंद कर धारा 144 लागू कर दी गई थी। सुरक्षा कारणों से अतिरिक्त जवानों की भी तैनाती की गई है। हालॉंकि फिलहाल सुरक्षा बलों की तैनाती में कटौती के कोई संकेत नहीं मिले हैं। कई जगहों पर अब भी आंशिक प्रतिबंध लागू हैं। शुक्रवार से राहत दिए जाने की उम्मीद है।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल सुरक्षा हालात की समीक्षा के लिए खुद घाटी में हैं। उनका एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें वे कश्मीरियों के साथ खाना खाते और बतियाते नजर आ रहे हैं। लेफ्टिनेंट जनरल रणवीर सिंह ने भी बुधवार को कुपवाड़ा और बारामूला सेक्टर में सुरक्षा हालात का जायजा लिया था।

अमेरिका ने पाक को चेताया: भारत को न दिखाओ तेवर, आतंकियों पर कसो नकेल

कश्मीर में आर्टिकल 370 के निष्प्रभावी होने से बौखलाए पाकिस्तान को हर मोर्चे पर मात ही मिल रही है। वह पहले दिन से ही मसले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने की बात कह रहा। उसे उम्मीद थी कि शायद कुछ अंतरराष्ट्रीय सहानुभूति मिल जाए। लेकिन, अमेरिका ने उसे नसीहत देते हुए कहा है कि भारत को तेवर दिखाने की बजाय वह अपनी जमीन पर पल रहे आतंकियों पर नकेल कसे।

जानकारी के मुताबिक इस संबंध में अमेरिका के 2 बड़े नेताओं ने पाकिस्तान से कहा है कि वह भारत के ख़िलाफ़ जवाबी कार्रवाई से बचे और अपनी सरजमीं पर चलने वाले आंतकी गुटों के ख़िलाफ़ सख्त एक्शन ले। दरअसल, अनुच्छेद 370 निष्क्रिय किए जाने के विरोध में पाकिस्तान ने कल (अगस्त 7, 2019) भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया को वापस भेज दिया और भारत के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को सीमित कर लिया था। जिसके बाद अमेरिकी सांसद रॉबर्ट मेनेनडेज और इलियट इनजेल ने बयान जारी कर पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की है।

रॉबर्ट मेनेनडेज सीनेट की फॉरेन रिलेशंस कमेटी के सदस्य हैं, वहीं इलियट इनजेल हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के अध्यक्ष हैं।


रॉबर्ट मेनेंडेज(बाएँ) और इलियट इनजेल (दाएँ)

दोनों नेताओं ने कहा है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के पास मौक़ा है कि वह अब दिखाए कि उसके लिए सभी नागरिक महत्वपूर्ण हैं और वह उनके अधिकारों की रक्षा करेंगे। इन अधिकारों में दोनों नेताओं ने विधानसभा की स्वतंत्रता का अधिकार रखने का भी जिक्र किया।

जनसत्ता की रिपोर्ट की मानें तो अमेरिकी नेताओं ने कहा है, “पारदर्शिता और राजनीतिक भागीदारी लोकतंत्र का स्तंभ है और हमें उम्मीद है कि भारत सरकार इन सिद्धांतों का पालन करेगी।”

उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर अन्य देशों की सहायता माँगने के मद्देनजर पाकिस्तान ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान से भी फोन पर बात की थी।

जब कश्मीरी बैंड की लड़कियों को रेप की धमकी मिलती रही, CM अब्दुल्ला पलट कर कठमुल्लों की गोद में बैठ गए

श्रीनगर के राजबाग में एक स्कूल है, प्रेजेंटेशन कॉन्वेंट, जिसके कॉन्वेंट नाम से अंदाजा हो गया होगा कि इसे इसाई मिशनरी चलाते हैं। यह कोई इतिहास में प्रसिद्ध, 19वीं शताब्दी का स्कूल हो ऐसा नहीं है। 2009 तक यह सेकेंडरी स्कूल था, उसके बाद ही हायर सेकेंडरी स्कूल बना है। अब आप कह सकते हैं कि मेरी आज की कहानी इतिहास में बहुत पीछे नहीं जाती। जब मिशनरी स्कूल है तो जाहिर है इसके अन्दर व्यवस्था उतनी कट्टरपंथी नहीं थी, जितना कि लड़कियों के लिए बाकी के कश्मीर में होता था। यहाँ लड़कियाँ संगीत भी सीख सकती थीं।

इसी स्कूल में नोमा, अनीका और फराह हसन ने मिलकर एक म्यूजिक बैंड शुरू कर रखा था। ये लोग अक्सर रॉक म्यूजिक गाते-सुनते थे। रॉक की ख़ास बात ही यही होती है कि वो सत्ता का विरोधी भी होता है। इस लिहाज से सोचा जाए तो प्रगाश नाम के उनके इस बैंड को अलगाववादी ताकतों का समर्थन मिलना चाहिए था। लेकिन, हकीकत की जमीन पर ऐसा कुछ हुआ नहीं। जब 2012 में इस रॉक बैंड ने अपना पहला सार्वजनिक प्रदर्शन किया तो वो श्रीनगर का ही “बैटल ऑफ़ बैंड्स” का आयोजन था। ये रॉक का एक खास आयोजन होता है जिसमें जनता की आवाज से जीत हार का फैसला होता है।

10 दिसम्बर 2012 को जब प्रगाश ने इस मुकाबले में हिस्सा लिया तो मौजूद श्रोताओं ने एक स्वर से इसकी जीत घोषित की। अफ़सोस की लड़कियों का जीतना कठमुल्लों को रास नहीं आया। धमकियाँ मिलने लगीं। चोट पहुँचाने या कत्ल की नहीं, ये किशोरियों को दी जा रही बलात्कार की धमकियाँ थीं। आखरी खलीफा ऑट्टोमन के दौर में हर राज्य के लिए एक मुफ़्ती का जो इस्लामिक चलन आया था उसके हिसाब से बने राज्य के मुख्य मुफ़्ती ने लड़कियों के खिलाफ फतवा जारी कर दिया। जब 370 लागू हो तो लड़कियाँ राज्य से भागकर भी कहाँ जातीं? भागती भी तो पूरा खानदान लेकर भागती क्या?

3 फ़रवरी 2013 को जारी किए गए इस इस्लामिक फतवे के बाद लड़कियों की आवाज़ पर बूट पड़ गई थी। उस दौर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुरू में तो किशोरियों के समर्थन की बात की थी मगर बाद में वो कायरों की तरह पलट गए और प्रगाश के समर्थन के अपने ट्वीट भी डिलीट कर डाले। शुरुआत में इस मामले में बलात्कार की धमकियाँ देने के लिए तीन लोगों की गिरफ्तारियाँ हुई थी। मगर बाद में उमर अब्दुल्ला को याद आया कि वो मजहबी पहले और मुख्यमंत्री बाद में हैं। जब सरकार ने सुरक्षा देने से भी इनकार कर दिया हो तो लड़कियाँ कितनी देर टिकती? इस्लामिक कट्टरपंथ से संगीत हार गया और बैंड चुपचाप, खामोश हो गया।

इस दौर में कश्मीर में कोई म्यूजिक बैंड नहीं होता था ऐसा बिलकुल नहीं है। कम से कम दर्जन भर म्यूजिक बैंड रहे होंगे तभी तो “बैटल ऑफ़ बैंड्स” में मुकाबला हो रहा था। उन्हें दिक्कत लड़कियों के बैंड से थी। आखिर नोमा नज़ीर गिटार बजा कर गाएगी क्यों? आखिर फराह दीबा ड्रम कैसे बजा सकती है? आखिर अनीका खालिद गिटार क्यों बजाए? उमर अब्दुल्ला के ट्वीट डिलीट करने और कठमुल्लों के फतवे, बलात्कार की धमकियों से जो दसवीं की लड़कियों का बैंड बंद हुआ था, उसके नाम प्रगाश का मतलब भी “रौशनी” ही होता है।

कश्मीर में जब तक 370 था तबतक लड़कियों की शादी 18 वर्ष की आयु के बाद ही हो, ऐसा कोई कानून नहीं चलता था। बाल विवाह भी होता था इसलिए करीब दस साल पहले दसवीं में पढ़ने वाली ये बच्चियाँ आज कहाँ होंगी ये तो पता नहीं। संभव है कि कठमुल्लों के खौफ़ से इनके परिवारों ने जल्दी-जल्दी इनकी शादी करके कहीं और भेज दिया हो। आज इनका जिक्र इसलिए क्योंकि कभी-कभी कुछ दोमुँहे, जो इनकी आवाज दबाए जाने पर चुप रह गए थे, वो पूछते हैं कि तुम्हें जो डल झील में छठ मनाने की छूट मिल गयी, उसके बदले में कश्मीरियों को क्या मिला?

ऐसे दोमुँहों को हम याद दिला दें कि हम बिहार में रहते हैं। यह वो राज्य है जहाँ मैथली ठाकुर जैसी बच्चियों के गाने पर उन्हें जबरन चुप कराने के कोई फतवे नहीं दिए जाते। संगीत के लिए यहाँ कोई बलात्कार की धमकी दे, तो उसे सुधारने के लिए शुद्ध “गांधीवादी” तरीके ही इस्तेमाल किए जाएँगे। अगर हमारे पास वहाँ जाने का अधिकार है तो बदले में हम भी प्रगाश को बिहार आकर गाने का आमंत्रण देते हैं। इतने वर्षों में “प्रगाश” की छूटी हुई म्यूजिक प्रैक्टिस, रियाज़ से क्या हुआ होगा उससे कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ता। गाने के बोल समझ में आए न आए। टूटे फूटे उच्चारण पर हमने लद्दाख वाले सांसद के लिए तालियाँ तो बजाई ही हैं न? आपके गाने पर इससे ज्यादा बजाई जाएँगी।

बाकी आमंत्रण सिर्फ प्रगाश के लिए हो ऐसा भी नहीं है, वादी की सभी बच्चियों के लिए लागू होगा। लड़कों के गाने पर उन्हें वैसे भी दिक्कत नहीं थी, लड़कियों को अगर कट्टरपंथियों से दिक्कत हो तो वहाँ गाने के बदले यहाँ आकर गाना। यहाँ हम तारीफ ही करेंगे।

राम मंदिर पर नवंबर तक फैसला संभव, अब सुप्रीम कोर्ट में हफ्ते के पॉंचों दिन सुनवाई

अयोध्या मामले में पिछले तीन दिनों से सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट (SC) ने फैसला लिया है कि संविधान पीठ अब से इस मामले की सप्ताह के पाँचो दिन सुनवाई करेगी। आमतौर पर संविधान पीठ सिर्फ़ तीन (मंगलवार, बुधवार और गुरुवार) दिन मामले की सुनवाई करती है। लेकिन, इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने परंपरा से हटते हुए यह फैसला लिया है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही कि 17 नवंबर को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के रिटायर होने से पहले इस मामले में फैसला आ सकता है।

इससे पहले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पाँच सदस्यीय संविधान पीठ ने राम लला विराजमान की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता के. परासरन से जानना चाहा कि इस मामले में एक पक्षकार के रूप में क्या ‘राम जन्मस्थान’ कोई वाद दायर कर सकता है। पीठ ने जानना चाहा, “क्या जन्म स्थान को कानूनी व्यक्ति माना जा सकता है। जहां तक देवताओं का संबंध है तो उन्हें कानूनी व्यक्ति माना गया था।”

पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एसए बोबडे, न्यायमूर्ति धनंजय वाई चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं। पीठ के सवाल के जवाब में परासरन ने कहा, “हिन्दू धर्म में किसी स्थान को उपासना के लिए पवित्र स्थल मानने के लिए वहॉं मूर्तियों का होना जरूरी नहीं है। नदी और सूर्य की भी पूजा होती है और जन्म स्थान को भी कानूनी व्यक्ति माना जा सकता है।”

इस दौरान जस्टिस बोबडे ने उत्तराखंड के हालिया फैसले का हवाला दिया उत्तराखंड उच्च न्यायालय के एक फैसले का भी जिक्र किया जिसमे पवित्र गंगा नदी को एक कानूनी व्यक्ति माना गया है जो मुकदमे को आगे बढ़ाने की हकदार है।

उल्लेखनीय है कि इस मामले में कि निर्मोही अखाड़ा की ओर से सुशील जैन ने सुनवाई के दूसरे दिन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पाँच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के सामने बड़ी रोचक दलीलें रखी थी। सुनवाई के दूसरे दिन सर्वोच्च न्यायालय ने जब निर्मोही अखाड़ा से अयोध्या में रामजन्मभूमि पर कब्जे के सबूत माँगे तो इस पर हिंदू परिवार ने दावा किया कि उसने 1982 में की एक डकैती में पैसों के साथ उन रिकॉर्डों को खो दिया है। अब उनके पास काेई रिकाॅर्ड नहीं है।

इसके बाद जब मुख्य न्यायाधीश गोगोई ने फिर पूछा कि अगर आपके पास इस मुद्दे से जुड़े कोई दूसरे सबूत हैं तो वे पेश करें। इस पर निर्मोही अखाड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सुशील जैन ने कहा कि राम जन्मभूमि देवताओं की भूमि बन गई है। यह स्थान हिंदुओं के लिए पूजा स्थल बन गया है। इसके साथ ही कहा कि वाल्मीकि रामायण में तीन स्थानों पर उल्लेख है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था। 

सुशील कुमार जैन ने सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि पूजा और प्रार्थना में बाधा ने उन्हें सिविल सूट दायर करने के लिए मजबूर किया। यह मालिकाना हक नहीं बल्कि कब्जे की लड़ाई है।