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Video Viral: पाक की शह पर हुर्रियत नेता करवाते हैं पत्थरबाजी, अलगाववादी नेत्री का खुलासा

कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है। लेकिन पाकिस्तान हमेशा से ही धरती के इस स्वर्ग को नरक बनाने पर तुला रहा है। इस बात की पुष्टि कश्मीर की अलगाववादी नेता और वीमेन एक्टिविस्ट तनवीर फ़ातिमा ने की है। दरअसल, सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है। 57 सेकेंड के इस वीडियो में तनवीर ने पाकिस्तान के आला अधिकारियों और हुर्रियत के कई बड़े नेताओं को बेनकाब कर दिया है। उन्होंने कहा है कि भारत में अस्थिरता फैलाने के लिए पाकिस्तान कश्मीर में पत्थरबाजी करवाता है।

इस वीडियो में तनवीर फ़ातिमा ने हुर्रियत नेता सैय्यद अली शाह गिलानी, अलगाववादी नेता यासिन मलिक और मीर वाइज़ का भी नाम लेते हुए कहा है कि ये लोग बच्चों को गुमराह करते हैं। उन्हें आज़ादी के सपने दिखा पत्थरबाज़ी की राह पर ले जाते हैं। ये नेता सिर्फ़ अपने स्वार्थ के लिए बच्चों का इस्तेमाल करते हैं।

इस वीडियो में तनवीर फ़ातिमा भावुक होते हुए कह रही हैं कि हालात बेहद ख़राब हैं। उन्होंने कहा कि वो अपने बुज़ुर्ग माता-पिता से मिल नहीं पा रही हैं। आज पिछले 30 वर्षों से आज़ादी के नाम पर हमारे क़रीब 2-2.5 लाख जवान शहीद हो गए हैं।

उन्होंने कहा है कि हुर्रियत और अलगाववादियों ने आज़ादी के नाम पर हमारे बच्चों से पत्थरबाज़ी करवाई, बंदूकें चलवाई जो कि अच्छी बात नहीं थी। इस वजह से हम दुनिया की नज़र में एक अलग क़ौम बन गए जबकि हम पढ़ी-लिखी क़ौम है। हममें तहज़ीब है, हमारा इस्तेमाल पत्थरबाजी और बंदूकें चलाने के लिए किया गया।

MP में बनेगी 100 हाईटेक गोशाला, गोबर व मूत्र संग्रह के लिए लगा रहेगा फिल्टरेशन प्लांट

मुख्यमंत्री कमलनाथ की पहल पर बिड़ला ग्रुप के कुमार मंगलम बिड़ला ने मध्य प्रदेश में 100 हाईटेक गो-शालाओं का निर्माण करने पर अपनी सहमति दे दी है। ये गो-शालाएँ अगले 18 महीनों में बिड़ला ग्रुप की सामाजिक ज़िम्मेदारी निधि से बनाई जाएँगी। मध्य प्रदेश में निवेश के लिए उद्योगपतियों का भरोसा फिर से हासिल करने की मुहिम में जुटे कमलनाथ ने गुरुवार (8 अगस्त) को दूसरे दिन बिड़ला ग्रुप, महिंद्रा एड महिंद्रा, शापूरजी पालोनजी समेत अन्य औद्योगिक समूहों के प्रमुखों के साथ राउंड टेबल चर्चा की।

चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि बिड़ला ग्रुप ने मध्य प्रदेश में गोवंश के लिए बड़े पैमाने पर गोशाला खोलने का काम अपने हाथ में लिया है। बिड़ला ग्रुप ने प्रदेश परियोजना को सराहते हुए 100 हाईटेक गोशाला (व्यवस्थित शेड, घूमने के लिए अलग स्थान, चारा देने से लेकर गोबर व मूत्र संग्रह के लिए फिल्टरेशन प्लांट) का निर्माण करने की ज़िम्मेदारी अपने हाथों ली है।

इसके अलावा कमलनाथ सरकार को इस काम के लिए अन्य ग्रुप और दानदाताओं से भी उम्मीद है कि वो भी आगे आएँगे और गोवंश के लिए इस काम में अपना सहयोग देंगे। मीटिंग के दौरान मुख्यमंत्री कमलनाथ ने रोज़गार निर्माण के लिए नए उद्योगों में निवेश संभावनाओं को रेखांकित किया। कमलनाथ ने कहा कि निवेश और विश्वास परस्पर एक-दूसरे पर निर्भर हैं। इस संदर्भ में उन्होंने बताया कि हर क्षेत्र के लिए अलग से निवेश नीति बनाई जाएगी। साथ ही ड्राई पोर्ट, सैटेलाइट शहर, उच्चस्तरीय कौशल विकास केंद्र और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में मध्य प्रदेश को तेज़ी से आगे बढ़ाना है।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के प्रबंध संचालक पवन गोयनका से ई-रिक्शा और ई-ऑटो निर्माण की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के लिए आवास उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वहीं, ख़बर यह भी है कि देश के अन्य राज्यों में इस दिशा में हुए कामों का अध्ययन कर मध्य प्रदेश के लिए एक आदर्श नीति बनाई जाएगी।

एयरसेल-मैक्सिस केस: चिदंबरम पिता-पुत्र की गिरफ्तारी पर 23 अगस्त तक रोक

दिल्ली की एक विशेष अदालत ने पूर्व केन्द्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम की गिरफ्तारी पर 23 अगस्त तक रोक लगा दी है। मामला एयरसेल-मैक्सिस केस से जुड़ा है। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी सरकारी एजेंसियाँ इस मामले की जाँच कर रही हैं। इससे पहले भी कई बार चिदंबरम पिता-पुत्र को गिरफ़्तारी से अदालत राहत दे चुकी है। अदालत ने इस मामले में जमानत के लिए 23 अगस्त और संज्ञान लेने के लिए 6 सितम्बर की तारीख मुक़र्रर की है।

पी चिदंबरम पर आरोप है कि उन्होंने वित्त मंत्री रहते विदेशी निवेशकों के साथ मिल कर मनी लॉन्डरिंग को अंजाम दिया। चिदंबरम पर प्रवर्तन निदेशालय ने अपने पद और पावर के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। चिदंबरम ने 2006 में केंद्रीय वित्त मंत्री रहते मॉरीशस की एक कम्पनी को निवेश हेतु FIPB (Foreign Investment Promotion Board) क्लियरेंस दिया था।

ईडी ने कहा है कि चिदंबरम ने ऐसा करने के लिए एफडीआई के तमाम नियमों को ताक पर रख दिया। इस केस में चिदंबरम के पुत्र कार्ति चिदंबरम पर अनुचित लाभ हासिल करने का आरोप है। कार्ति को आईएनएक्स मीडिया से जुड़े एक अन्य मामले में मार्च 2018 में गिरफ़्तार भी किया गया था। पिछले वर्ष अदालत ने दोनों पिता-पुत्र को 1 नवम्बर तक गिरफ़्तारी से राहत प्रदान की थी। उसके बाद से कई मौकों पर इसे बढ़ाया गया है।

राम मंदिर पर जल्द फैसले की राह में नई अड़चन, दूसरे पक्ष के पैरोकार ने कहा- 5 दिन सुनवाई न करे SC

अयोध्या मामले में जल्द फैसले की राह में बाधा डालने की कोशिश शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट में लगातार चौथे दिन शुक्रवार (अगस्त 9, 2019) को इस मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान दूसरे मजहब के पक्षकारों के वकील राजीव धवन ने मामले की सप्ताह में पॉंच दिन सुनवाई करने के फैसले पर आपत्ति जताई।

उन्होंने कोर्ट से पाँच दिन सुनवाई पर स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा अगर इतनी तेज सुनवाई हुई तो उनके लिए न्यायालय में पैरवी कर पाना संभव नहीं होगा।

धवन ने कहा, “यदि इस मामले पर कोर्ट में हफ्ते में पाँच दिन सुनवाई होती है तो यह अमानवीय होगा।” उनके मुताबिक हमें दिन रात अनुवाद के कागज पढ़ने और अन्य तैयारियां करनी पड़ती हैं। ऐसे में रोजाना सुनवाई में दलीलें रखने में वे असमर्थ हैं। उन्होंने बताया कि इस स्थिति में वह अदालत की तेजी के साथ तालमेल नहीं बिठा पाएंगे और वे केस छोड़ने को मजबूर होंगे।

अदालत ने उनसे कहा, “हमने आपकी बात सुन ली है, हम आपको जल्द ही सूचित कर देंगे “

गौरतलब है कि सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली इस पीठ में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एसए नजीर शामिल हैं।

बीते दिन पीठ ने अयोध्या मामले में रोजाना सुनवाई का फैसला लिया था। इससे पहले परंपरा के अनुसार मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को ही मामले की सुनवाई तय की गई थी। लेकिन गुरुवार को कोर्ट ने तय किया कि इस केस की सुनवाई हफ्ते के पाँचों दिन होगी। इससे उम्मीद बॅंधी थी कि नवंबर में सीजेआई गोगोई के रिटायर होने से पहले इस मामले में फैसला आ सकता है। इससे पहले सुनवाई के दूसरे और तीसरे दिन निर्मोही अखाड़े की ओर से राममंदिर के पक्ष में दलीलें रखी गई थी।

15 दिन में मौत की सजा: सोते माँ-बाप के बीच से उठाकर 9 महीने की बच्ची का किया था रेप-मर्डर

तेलंगाना की एक अदालत ने वारंगल जिले में 9 महीने की बच्ची के साथ पहले बलात्कार और बाद में हत्या करने के आरोप में दोषी को 2 महीने के भीतर मौत की सजा मुकरर्र कर दी। पुलिस के मुताबिक मामले की सुनवाई 24 जुलाई को शुरू हुई थी और वारंगल के प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के. जयकुमार ने 2 सप्ताह के अंदर ही मामले में फैसला सुना दिया।

मीडिया खबरों की मानें तो न्यायाधीश ने बृहस्पतिवार (अगस्त 8, 2019) को अभियोजन और बचाव पक्ष की आखिरी दलीलें सुनने के बाद आरोपित पी प्रवीण को बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या का दोषी ठहराया। और बाद में उसे मौत की सजा सुना दी।

जानकारी के अनुसार दोषी को आईपीसी की धारा 302 और धारा 376 के अलावा पॉक्सो अधिनियम के तहत मौत की सजा सुनाई गई है। साथ ही उस पर 20,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।

पुलिस की मानें तो 19 जून की देर रात हनामकोंडा में बच्ची के माता-पिता ने घर की छत पर उसे अपने पास सुला रखा था, जब प्रवीन उसे उठाकर सुनसान जगह पर ले गया। उसने पहले बच्ची के साथ बलात्कार किया और फिर उसकी हत्या कर दी। घटना का पता उस समय चला जब बच्ची की माँ की नींद खुली और उसने मासूम को अपने करीब नहीं पाया। तलाश हुई तो प्रवीण बच्ची को तौलिए में लपेटकर ले जाते देखा गया। जैसे ही प्रवीण ने बच्ची के माँ-बाप को देखा वह उसे फेंक कर भागने लगा। लेकिन स्थानीय लोगों ने उसे दबोच लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। बच्ची के मिलने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया।

मामले की जाँच के बाद पुलिस ने प्रवीण को गिरफ्तार कर लिया और बाद में न्याययिक हिरासत में भेज दिया। मामले की सुनवाई कोर्ट में 24 जुलाई को पहुँची और 6 कामकाजी दिनों के भीतर गवाहों से उनकी गवाही ली गई। और फिर, कोर्ट की ओर से सराहनीय फैसला आया।

बता दें कि वारंगल के पुलिस आयुक्त वी रविन्द्र ने अदालत द्वारा कम समय में दोषी को सुनाई गई सजा को उत्कृष्ट निर्णय बताया है। साथ ही कहा कि उन्होंने गवाहों की गवाहियों और वैज्ञानिक तथा चिकित्सीय साक्ष्यों के आधार पर मामले की जाँच की गई।

गुजरातियों का इलाज नहीं करूँगी: सरकारी अस्पताल की डॉक्टर ने स्थानीय लोगों से की बदसलूकी

गुजरात में पदस्थापित एक डॉक्टर ने गुजरातियों का इलाज करने से मना कर दिया। यह हैरान कर देने वाली ख़बर नवसारी के बिलिमोरा में स्थित एक सरकारी अस्पताल से आई है। यहाँ की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉक्टर स्मिता तिवारी ने स्थानीय मरीजों का इलाज करने से मना कर दिया। एक महिला अपने 10 वर्षीय बच्चे के साथ 1 घंटे तक डॉक्टर के केबिन के बाहर इन्तजार करती रहीं लेकिन स्मिता ने बुखार से पीड़ित उस बच्चे का इलाज नहीं किया।

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, बीमार बच्चे की माँ सारे केस पेपर्स के साथ इन्तजार करती रहीं। ऐसा नहीं था कि डॉक्टर तिवारी किसी अन्य मरीज को देख रही थीं या अस्पताल के कार्यों में व्यस्त थीं। जब बीमार बच्चे की माँ व अन्य महिलाओं ने उनकी केबिन में जाकर देखा तो वह फोन पर किसी से बात कर रही थीं। जब महिलाओं ने डॉक्टर तिवारी से मरीजों का इलाज करने का आग्रह किया, तब उन्होंने अजीबोगरीब जवाब दिया। डॉक्टर ने कहा,

“मैं यहाँ गुजरातियों का इलाज करने के लिए नहीं आई हूँ। मैं केवल यूपी-बिहार के मरीजों का ही इलाज करूँगी। तुम गुजरातियों ने मुझे और मेरे पिता को प्रताड़ित किया था।”

इतना कहने के बाद डॉक्टर स्मिता तिवारी से निवेदन करने आई सभी महिलाओं को अपने चैंबर से तुरंत बाहर चले जाने को कहा। घटना की सूचना मिलने पर बिलिमोरा नगरपालिका भाजपा अध्यक्ष मुकेश नाइक नगरपालिका की कुछ अन्य महिलाओं के साथ अस्पताल पहुँचे। डॉक्टर स्मिता तिवारी ने उन सभी के साथ दुर्व्यवहार किया। इसके बाद डॉक्टर तिवारी के ख़िलाफ़ जाँच बिठाई गई। जाँच समिति ने मरीजों व अस्पताल के कर्मचारियों से बातचीत कर डॉक्टर तिवारी के ख़िलाफ़ रिपोर्ट सौंपी।

दोषी पाए जाने के बाद डॉक्टर स्मिता तिवारी को छुट्टी पर भेज दिया गया है। अस्पताल के अन्य डॉक्टरों ने भी कहा कि वह ठीक से काम नहीं करती थीं और उनका व्यवहार भी अजीबोगरीब था।

जाँघों पर हाथ फेरा, Kiss किया, प्राइवेट पार्ट्स भी… चर्च गई बच्चियों के साथ पादरी की हरकत

चर्च में फेस टू फेस कनफेशन के दौरान पादरी रेव अर्बनो वाज़केज़ ने दो बच्चियों के साथ छेड़छाड़ की थी। इस सिलसिले में आरोपित पादरी रेव अर्बनो वाज़केज़ को पिछले साल गिरफ्तार किया गया। उसके ऊपर बच्ची के साथ यौन शोषण का आरोप है, जिसमें दोनों बच्चियों के साथ किए गए दुर्व्यवहार और यौन उत्पीड़न भी शामिल हैं। दोनों पीड़ित बच्चियों ने अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी कोर्ट में आकर अपनी आपबीती बताई।

घुटने के ऊपर हाथ फेरा, फिर चूमने लगा

पीड़िता ने उस दिन की घटना बताते हुए कहा कि ये घटना 2015 की है। घटना वाले दिन के कुछ ही सप्ताह बाद उसका 14वाँ जन्मदिन आने वाला था। वो चर्च में कनफेशन के लिए गई थी। इस दौरान, रेव अर्बनो वाज़केज़, जो कि वॉशिंगटन के सैक्रेड हार्ट चर्च में सहायक पादरी था, उसने उसका एक कमरे में फेस टू फेस कनफेशन किया। कनफेशन करते समय पादरी ने अपना हाथ पीड़िता के घुटने के ऊपर रखा और सहलाने लगा। पीड़िता का कहना है कि उन्हें ये बहुत ही असहज लगा, लेकिन उन्होंने इसे रोका नहीं, क्योंकि उसे लगा था कि वो गलत समझ रही है। पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि उसे लगा कि हो सकता है कि वो जो महसूस कर रही है, वो गलत हो, क्योंकि वो एक पादरी था और एक पादरी से उसने ऐसा कुछ करने की उम्मीद नहीं की थी।

पीड़िता ने अपनी गवाही के तीसरे दिन कोर्ट को एक और घटना के बारे में बताया और कहा कि उसके साथ एक और बेहद शर्मनाक घटना घटी और इस दौरान उसे किसी तरह की कोई गलतफहमी नहीं थी। वर्तमान समय में 20 वर्षीय पीड़िता ने मंगलवार (6 अगस्त 2019) को बताया कि जब वो 16 साल की थी, तब पादरी ने एक बार फिर से उसके साथ बदसलूकी की और उसके मुँह पर चुंबन लिया था। यहीं नहीं, पीड़िता ने अपनी माँ को बताया कि 2015 के मई की शुरुआत में वो चर्च के ऑफिस में बैठकर फोन पर वीडियो देख रही था, तभी वहाँ पर पादरी आया और उसकी शर्ट के ऊपर हाथ रखा और उसके साथ बदतमीजी करने लगा। उसने पादरी को रोकने की कोशिश की, लेकिन वो फिर भी घिनौनी हरकत करता रहा।

बार-बार चूमता रहा

इसके साथ ही बुधवार (7 अगस्त 2019) को एक दूसरी 12 वर्षीय पीड़िता ने बताया कि जब वो 9 या 10 साल की थी, तभी उस पादरी ने उसके मुँह को बार-बार चूमा था और महीनों तक उसके प्राइवेट पार्ट्स के साथ छेड़खानी करता रहा था।

मदरसों में छात्र और मौलाना भगवा पहनेंगे तो उनकी ज़िंदगी में उजाला आएगा: मंत्री मोहसिन रज़ा

उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री मोहसिन रज़ा ने मुस्लिमों को भगवा पहनने की सलाह दी है। उन्होंने भगवा रंग को प्रकाश का प्रतीक बताया और कहा कि यह रंग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की देन नहीं बल्कि अल्लाह की देन है। उनका कहना है कि अगर मदरसों के मौलाना और छात्र भगवा रंग के वस्त्र पहनेंगे तो उनकी ज़िंदगी में उजाला आ जाएगा।

ख़बर के अनुसार, मोहसिन रज़ा ने चिश्तिया समुदाय के बारे में बताते हुए कहा कि इस सम्प्रदाय के लोग दरगाह आदि पर होते हैं। मुसलमान पहले से ही भगवा पहनते हैं, ख़्वाज़ा मोइनुद्दीन चिश्ती को मानने वाले चिश्तिया सिलसिले के सूफ़ी हमेशा से ही भगवा पहनते हैं। जो चिश्तियाँ हैं उनसे पूछें कि वो भगवा क्यों पहनते हैं? इसलिए मुस्लिमों को भगवा पहनने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। मोहसिन रज़ा ने मुस्लिमों को भगवा पहनने की सलाह देने के साथ-साथ RSS के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की निस्वार्थ सेवा करने वालों के संघ को ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कहते हैं।अगर RSS अच्छा काम कर रहा है तो इससे किसी को कोई परेशानी क्यों होती है? उन्होंने कहा कि RSS ने कोई पर्सनल लॉ बोर्ड नहीं खोल रखा है, वो तो राष्ट्र के सेवक हैं।

ख़बर के अनुसार, मोहसिन रज़ा ने इस बात पर भी चिंता जताई कि समाज में दो मज़हबों के मतभेदों में रंग तक बँट गए। लेकिन जिस मुसलमान के मन में ही मैल हो, उसे भगवा रंग पसंद नहीं आएगा।   

हाल ही में यूपी में एडवाइज़री जारी हुई है कि वे 15 अगस्त को तिरंगा फहराएँ, राष्ट्रगान गाएँ और महापुरुषों के बारे में बताएँ। इसके अलावा एक नए सरकारी नियम के मुताबिक़ अब ग़ैर उर्दू भाषी भी मदरसे में शिक्षक बन सकेंगे। हालाँकि, मदरसे वाले इस नियम को बीजेपी की चाल बता रहे हैं।

राज्य मंत्री ने अपने एक अन्य बयान में मदरसा बोर्ड की एडवाइज़री का समर्थन किया है। राज्य मंत्री मोहसिन रज़ा ने ट्रिपल तलाक़ बिल के पास होने पर प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। इतना ही नहीं उन्होंने इस बिल के पास होने पर पारिवारिक महिलाओं के साथ ख़ुशियाँ भी मनाई थी।

प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न: कार्यक्रम से नदारद रहे राहुल-सोनिया, बधाई के लिए एक ट्वीट तक नहीं

जिस नेता ने एक पार्टी को अपना पाँच दशक दे दिया और हमेशा चट्टान की तरह उसके साथ खड़े रहे, आज उसी पार्टी का नेतृत्व उस नेता से दूरी बना रहा है। प्रणब मुखर्जी हमेशा कॉन्ग्रेस के लिए संकटमोचक बने रहे। हर अच्छी-बुरी स्थिति में पार्टी के लिए निरंतर कार्य करते रहे। हाँ, उन्होंने राजीव गाँधी काल में 5 वर्षों के लिए अलग पार्टी ज़रूर बनाई लेकिन बाद में अपनी पार्टी का कॉन्ग्रेस के साथ विलय कर दिया। देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुँचे और राष्ट्रपति के रूप में भी उनका कार्यकाल यादगार रहा। उससे पहले यूपीए सरकार में उन्होंने रक्षा, वित्त और विदेश जैसे कई अहम मंत्रालय संभाले।

जैसा कि मीडिया में कल गुरुवार (अगस्त 8, 2019) को पूरे दिन छाया रहा- पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, असम के गायक भूपेन हजारिका और आरएसएस के सामाजिक कार्यकर्ता नानाजी देशमुख को भी भारत रत्न से नवाजा गया। हजारिका और देशमुख को यह सम्मान मरणोपरांत मिला। प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भारत रत्न से सम्मानित किया। कार्यक्रम में कई हस्तियाँ मौजूद थीं लेकिन गाँधी परिवार का कोई भी सदस्य नहीं दिखा। ऐसे में सवाल यह उठता है कि यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी या पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी इस समारोह से नदारद क्यों थे?

83 वर्षीय प्रणब मुखर्जी देश के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं। दशकों से कई नेताओं द्वारा उनकी योग्यता और संविधान को लेकर उनके ज्ञान की प्रशंसा की जा चुकी है। जून 2018 में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यक्रम में शिरकत की थी, जिसके बाद उनकी अपनी ही पार्टी कुछ लोगों ने उनकी आलोचना भी की। आपको बता दें कि राहुल गाँधी ने प्रणब मुखर्जी को बधाई देने के लिए यहाँ तक कि एक ट्वीट भी नहीं किया है। हाल ही में एनडीटीवी के पत्रकार रवीश कुमार को मैगसेसे अवॉर्ड मिला था, तब राहुल ने उन्हें ट्वीट कर बधाई दी थी।

सोनिया-राहुल ने उस कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया जिसमें प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न से सम्मानित किया गया। राहुल गाँधी को कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए आमंत्रित भी किया गया था। सवाल तो यह भी पूछा जाएगा कि क्या कॉन्ग्रेस का शीर्ष नेतृत्व आज प्रणब मुखर्जी के योगदानों को भूल गया है? यह भी कहा जाता है कि सोनिया गाँधी को राजनीति में लाने व उनका मागर्दर्शन करने वाले प्रणब मुखर्जी ही थे। कई दलों में मुखर्जी की पैठ व नेताओं से उनके प्रगाढ़ संबंधों का फायदा कॉन्ग्रेस को हमेशा मिला।

तलाक पेपर पर हस्ताक्षर नहीं किया तो मोहम्मद अफजल ने 2 बच्चों सहित बीवी को बनाया बंधक

तीन तलाक के ख़िलाफ़ केंद्र सरकार ने क़ानून तो बना दिया लेकिन जबरन तलाक के मामले अभी भी सामने आ रहे हैं। बिहार में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी व बच्चों को सिर्फ़ इसीलिए बंधक बनाए रखा क्योंकि वह अपनी बीवी से तलाक चाहता था। आरोपित की पत्नी ने तलाक सम्बंधित कागजात पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उसने अपने बीवी-बच्चों को ही बंधक बना लिया। मामला बिदुपुर थाना के अंतर्गत आने वाले दिलावरपुर का है।

पीड़िता ने बताया कि तलाक वाले कागजात पर हस्ताक्षर न करने से बौखलाए उसके पति मोहम्मद अफजल ने मारपीट भी की। उसने पीड़िता को अपने 2 बच्चों सहित कई दिनों तक घर में बंद कर के रखा। पीड़िता ने किसी तरह से इस घटना की सूचना पड़ोसियों के माध्यम से अपनी बहन को दी, जिसके बाद उसे आजाद कराया जा सका। महिला को सदर अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।

पीड़िता ने बताया कि उसका पति पटना की किसी महिला के साथ प्रेम में है और उससे निकाह करना चाहता है। इसीलिए उसने तलाक सम्बंधित दतावेज पर हस्ताक्षर कराने के लिए जबरदस्ती की। पीड़ित महिला ने अपने पति पर प्रताड़ना का आरोप भी लगाया। विरोध किए जाने पर उसके पति मोहम्मद अफजल ने उसे कई दिनों तक प्रताड़ित किया। पीड़िता ने थाने में शिकायत दर्ज कराने की बात भी कही है।

तलाक पेपर पर हस्ताक्षर कराने के लिए पति ने प्रताड़ित किया (वीडियो साभार: लाइव हिंदुस्तान)

पीड़िता की बहन ने आरोप लगाया कि मोहम्मद अफजल और उसका पूरा परिवार मिल कर उसकी बहन को प्रताड़ित करता था। उसने न सिर्फ़ पीड़िता को बंधक बनाया बल्कि 4 दिनों तक खाना-पीना भी नहीं दिया। पुलिस ने कहा कि अभी तक पीड़ित पक्ष की तरफ से कोई मामला नहीं दर्ज कराया गया है और मामला दर्ज होते ही कार्रवाई की जाएगी।