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पंजाब: सिद्धू के पूर्व मंत्रालय से अमरिंदर सिंह से जुड़ी लुधियाना सिटी सेंटर घोटाले की फाइल गायब

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने मंत्री पद से नवजोत सिंह सिद्धू का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। लेकिन, सिद्धू के पूर्व महकमे से महत्वपूर्ण फाइलें गायब होने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि इनमें से एक फाइल मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह से जुड़ी 1,144 करोड़ रुपए के लुधियाना सिटी सेंटर घोटाले से संबंधित है।

लोकल गवर्नमेंट डिपार्टमेंट से गायब हुई दूसरी फाइल लुधियाना में कृषि भूमि पर अनाधिकृत निर्माण से सम्बंधित है। वैसे, विजलेंस ब्यूरो पहले ही अमरिंदर सिंह, उनके बेटे रनिंदर सिंह व अन्य को लुधियाना सिंटी सेंटर घोटाले में क्लीन चिट दे चुकी है।

खबरों के अनुसार स्थानीय निकाय विभाग के नए मंत्री ब्रहम मोहिंद्रा ने गायब फाइलों के लिए विभागीय जांच का आदेश दिया है, जिसमें लुधियाना में लक्जरी अपार्टमेंट परियोजना को मंजूरी दिए जाने की भी फाइल है। मुख्यमंत्री ने भी मुख्य सचिव और विभागीय सेक्रेट्री से फाइलों का पता लगाने को कहा है।

गौरतलब है गायब हुई फाइलों में सबसे महत्तवपूर्ण फाइल सिटी सेंटर घोटाले की है। यह मामला अमरिंदर सिंह के पहले कार्यकाल से जुड़ा है। बादल सरकार ने इस मामले की विजिलेंस जाँच के आदेश दिए थे।

अमरिंदर सिंह के दोबारा सत्ता में आने के बाद विजिलेंस ने इसपर क्लोजर रिपोर्ट दे दी।

मीडिया खबरों की मानें तो इन फाइलों के गायब होने के बाद दो तरह की बहस छिड़ गई है कि क्या सिटी सेंटर घोटाले से संबंधित फाइल सचमुच नवजोत सिंह सिद्धू के पास है या उनके इस्तीफ़े की आड़ में उसे गायब कर दिया गया। लोगों का कहना है कि इस बहस का जवाब सिर्फ़ सिद्धू दे पाएँगे, लेकिन वे पिछले डेढ़ महीने से मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं। उनसे कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन मुमकिन नहीं हो पाया।

आपको बता दें नवजोत सिंह सिद्धू को 6 जून को लोकल सरकार व संस्कृति मामले के पोर्टफोलियों से हटा दिया गया था। कैबिनेट में फेरबदल करके उन्हें बिजली व नव एवं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत मंत्रालय दिया था। लेकिन, मतभेदों के चलते 14 जुलाई को सिद्धू ने मंत्रालय से इस्तीफ़ा दे दिया, जिसे मुख्यमंत्री ने अब स्वीकार किया है।

सोनभद्र नरसंहार: पीड़ितों से मिलने पर प्रियंका अड़ीं, एयरपोर्ट पर रोके गए TMC नेता

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में जमीन विवाद में 10 लोगों की हत्या के मामले में सियासत गरम है। कॉन्ग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गॉंधी चुनार गेस्ट हाउस में कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठी हैं। उन्होंने कहा है कि जब तक प्रशासन उन्हें पीड़ितों से मिलने की इजाजत नहीं देता वे यहीं डटी रहेंगी।

इधर, शनिवार को सोनभद्र जाने की कोशिश कर रहे टीएमसी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने वाराणसी एयरपोर्ट पर ही रोक दिया। इससे नाराज सांसद डेरेक ओ ब्रायन, सुनील मंडल, अबीर रंजन बिस्वास और उमा सरेन एयरपोर्ट पर ही धरने पर बैठ गईं। घटना के बाद से ही सोनभद्र में धारा 144 लागू है।

प्रियंका को शुक्रवार को जब सोनभद्र जाने से रोका गया तो वह सड़क पर ही बैठ गईं और जोर देने लगीं कि उन्हें आगे जाने की इजाजत दी जाए। इसके बाद वहां मौजूद अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया और उन्हें चुनार गेस्ट हाउस ले जाया गया। प्रशासन के आला अधिकारी उन्हें लगातार मनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वह पीड़ित परिवारों से मिलने देने या फिर जेल भेजने की बात पर अड़ी हुईं हैं।

उन्होंने वारदात में मारे गए लोगों के परिजन को 25-25 लाख रुपये का मुआवजा और जमीन पर मालिकाना हक दिए जाने की भी मांग की।

सोनभद्र के घोरावल इलाके में बुधवार को जमीन पर कब्जे को लेकर ग्राम प्रधान और उसके लोगों ने गोंड आदिवासियों पर फायरिंग की थी। इस घटना में 10 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 18 अन्य घायल हो गए थे।

हिरासत में लिए जाने के बाद प्रियंका गाँधी के तेवर और तेज हो गए। उन्होंने ट्विटर के माध्यम से बीजेपी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को निशाने पर लिया है। उन्होंने लिखा, “उत्तर प्रदेश सरकार की ड्यूटी है अपराधियों को पकड़ना। मेरा कर्तव्य है अपराध से पीड़ित लोगों के पक्ष में खड़े होना। भाजपा अपराध रोकने में तो नाकामयाब है, मगर मुझे मेरा कर्तव्य करने से रोक रही है। मुझे पीड़ितों के समर्थन में खड़े होने से कोई रोक नहीं सकता।”

प्रियंका ने एक और ट्वीट करते हुए लिखा कि उन्होंने न तो कोई कानून तोड़ा है और न ही कोई अपराध किया है। उनका कहना है कि उन्होंने ये भी कहा था कि प्रशासन चाहे तो वो वो अकेली उनके साथ पीड़ितों के परिवार से मिलने के लिए आदिवासियों के गाँव जाने के लिए तैयार हैं। प्रियंका गाँधी ने कहा कि प्रशासन कह रहा है कि उन्हें 50,000 की जमानत देनी होगी,नहीं तो उन्हें 14 दिन के लिए जेल की सज़ा दी जाएगी, मगर वो उन्हें सोनभद्र नहीं जाने देंगे ऐसा उन्हें (पुलिसवालों को) ऊपर से ऑर्डर है।

प्रियंका को पुलिस द्वारा रोके जाने का विरोध करते हुए राहुल गाँधी ने ट्वीट किया कि जब वो सोनभद्र जिले में हुए खूनी संघर्ष के पीड़ितों से मिलने जा रही थी, तो उन्हे गैरकानूनी रूप से गिरफ्तार किया गया। राहुल ने उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता का मनमाना इस्तेमाल उनकी बढ़ती असुरक्षा को उजागर करता है।

कॉन्ग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए लिखा गया कि सोनभद्र हत्याकांड के पीड़ितों से मिलने जा रही कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी की गिरफ्तारी अजय सिंह बिष्ट सरकार की तानाशाही का निकृष्टतम उदाहरण है।

पूरा मामला: उत्तर प्रदेश: आदिवासियों की जमीन पर कब्जे के लिए 3 महिलाओं समेत 11 की हत्या

Video: 50,000 लोगों के सामने पादरी ने कहा, ‘मोटी महिलाओं को नहीं मिलता स्वर्ग’, महिला ने स्टेज से धकेला

ब्राजील में ‘मोटी’ महिलाओं के ख़िलाफ़ टिप्पणी करना एक पादरी को महंगा पड़ गया। यहाँ 50,000 से ज्यादा लोगों को उपदेश दे रहे पादरी की बात पसंद नहीं आने पर एक महिला ने उनको स्टेज से धक्का दे दिया।

जानकारी के मुताबिक ये घटना ब्राजील के साओ पाउलो में हुए धार्मिक समारोह के दौरान की है। जहाँ मशहूर पादरी मार्सेलो रॉसी ने उपदेश देते हुए मोटी महिलाओं पर विवादस्पद बयान दिया। दरअसल पादरी ने 50,000 लोगों की भीड़ में कहा, “मोटी महिलाओं को स्वर्ग नहीं मिलता।”

पादरी के इस बयान के बाद दर्शक दीर्घा में बैठी एक महिला को गुस्सा आ गया और वह मंच पर आ गई। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होते वीडियो में देखा जा सकता है कि 32 साल की ये महिला तेजी से पादरी की ओर दौड़ी और उन्हें जोर से धक्का मार दिया।

अचानक हुए इस हमले में धक्के के कारण पादरी मंच से नीचे गिर गए, लेकिन उन्हें ज्यादा चोटें नहीं आईं। मौक़े पर मौजूद मेडिकल स्टॉफ ने उनकी जाँच की और बाद में उन्होंने वापस स्टेज पर आकर अपना उपदेश दिया।

जानकारी के अनुसार महिला को उसकी हरकत के लिए गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन पादरी ने उस पर किसी तरह के आरोप नहीं लगाए। जिसके कारण उसे बाद में रिहा कर दिया गया। महिला की दोस्तों का कहना है कि वो मानसिक परेशानी से जूझ रही है।

32 घंटे में भक्तों ने किया वृंदावन का पुनर्निर्माण, ‘खजाना खोजी’ बदमाशों ने की थी तोड़फोड़

कर्नाटक के हम्पी के करीब स्थित 16वीं सदी के संत व्यासराज स्वामी के वृंदावन का पुनर्निर्माण स्थानीय भक्तों और स्वयंसेवकों ने केवल 32 घंटे में कर दिया। संत व्यासराज विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय के राजगुरु थे। वृंदावन में हाल ही में पवित्र स्थल पर बदमाशों ने तोड़फोड़ की थी। पुलिस ने इसके पीछे ‘खजाना खोजी’ बदमाशों का हाथ होने की आशंका जताई थी।

नव-वृंदावन में गुरुवार (18 जुलाई, 2019) को आषाढ़ एकादशी के मौक़े पर अज्ञात बदमाशों ने तोड़फोड़ की थी। पवित्र स्थल की खुदाई और तोड़फोड़ से पहले बदमाशों ने कुछ कर्मकांड भी किया था।

ख़बर के अनुसार, पुनर्निर्माण के बाद माधव सम्प्रदाय के स्वामियों ने अनुष्ठान भी किए।

सोशल मीडिया यूजर्स ने बताया कि स्वयंसेवकों ने वृंदावन के पुनर्निमाण का काम करने के बाद जश्न भी मनाया। कई संतों और विद्वानों की देखरेख में विभिन्न स्थानों के 5000 से अधिक स्वयंसेवकों ने पुनर्निर्माण गतिविधि में हिस्सा लिया। साइट पर लगातार मंत्र जाप के बीच उन्होंने इस काम को अंजाम दिया।

दक्षिण बेंगलुरु के भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्य ने शुक्रवार को इस मुद्दे को संसद में भी उठाया था। उन्होंने उपद्रवियों की तुरंत गिरफ्तारी की माँग की थी। इसके अलावा उन्होंने अतिरिक्त सुरक्षा उपायों जैसे सीसीटीवी कैमरे लगाने की भी सलाह दी थी।

वृंदावन हम्पी के पास अनेगुंडी में स्थित है, जो यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल है। नव वृन्दावन में माधव परंपरा के 9 संतों की समाधियाँ हैं। इस परंपरा के मानने वाले लोग ब्राह्मण हैं, जो तमिलनाडु और कर्नाटक से लेकर गोवा तक बसे हुए हैं।

हम्पी में इस तरह की यह पहली घटना नहीं हैं। इससे पहले फरवरी 2019 में, एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें तीन लोगों को 14वीं शताब्दी के विष्णु मंदिर के खंभों को तोड़ते हुए दिखाई पड़े थे।

इस्लामिक शासन स्थापित करने के लिए भारत को दहलाने की योजना नाकाम, 16 एनआईए की ​हिरासत में

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने तमिलनाडु समेत भारत के कई हिस्सों में आंतकी हमले की साजिश को नाकाम करते हुए 16 लोगों को हिरासत में लिया। इनमें से 14 की पहचान कर ली गई है। ये सभी लोग तमिलनाडु से हैं।

एनआईए के मुताबिक भारत में आतंकी हमले के लिए ये लोगों की भर्ती कर रहे थे। अपने समर्थकों को वीडियो और अन्य प्रोपेंगेंडा मटेरियल मुहैया करवाते थे। साथ ही हमले के लिए विस्फोटक, जहर, चाकू और गाड़ियों के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दे रहे थे।

जानकारी के मुताबिक ये संदिग्ध वाहदत-ए-इस्लामी हिंद (तमिलनाडु का कट्टरपंथी संगठन) के सदस्य हैं। आतंकवादी संगठनों ISIS/दाएश, अल-कायदा और सिमी (स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) के प्रति झुकाव के कारण भारत के भीतर और बाहर हमले की साजिश रच रहे थे और आतंकवादी गिरोह ‘अंसारुल्ला’ का गठन करके भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की तैयार कर रहे थे।

एनआईए द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक इस मामले में आईपीसी की धारा 12बी, 121ए और 122 के साथ गैरकानूनी गतिविधियों की धारा 17, 18, 18बी और 39 के तहत 9 जुलाई को मामला दर्ज किया गया है। एनआईए की मानें तो खुफिया जानकारी के आधार पर इस मामले में छापेमारी की गई थी। जिसमें उन्हें 15 सिमकार्ड, 7 मेमोरी कार्ड, 3 लैपटॉप, 5 हार्डडिस्क, 6 पेन ड्राइवर, 2 टैबलेट, 3 सीडी/डीवीडी, दस्तावेज, मैगजीन, बैनर, नोटिस, पोस्टर और पुस्तकें बरामद हुए थे। इस दौरान उन्होंने हसन अली और हरीश मोहम्मद नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया था।

दोनों ने पूरे नेटवर्क का खुलासा करते हुए बताया था कि इस्लामिक शासन स्थापित करने के मकसद से वे आतंकी हमले को अंजाम देने की फ़िराक में थे। इसके लिए उन्होंने पैसे की व्यवस्था और अन्य तैयारियाँ भी की थी। 

गौरतलब है इस मामले में अन्य संदिग्धों को कुछ दिन पहले दुबई से भारत को सौंपा गया था। जिसके बाद इन्हें विशेष फ्लाइट से चेन्नई लाया गया और बाद में एनआईए की अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने इन्हें 25 जुलाई तक एजेंसी की हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

दुबई से निकाले गए 14 लोगों की पहचान 58 वर्षीय मोहम्मद इब्राहिम,रफी अहमद (55), मोहिदीन सेनी शाहुल हमीद (59), उमर बरोक (48), मीरान गनी (33), गुलाम नबी असथ(37), मुंतशिर (39), फ़ारूक (26), मोहम्मद शेख मैथीन (40) , अहमद अजरुद्दीन (27), तौफीक अहमद (27), मोहम्मद इब्राहिम (36), मोहम्मद अफज़र (29), और फैज़ल शरीफ(44) के तौर पर की गई है।

दलित युवक की बाइक से मुस्लिम महिला को लगी टक्कर, उमर ने इतना मारा कि हो गई मौत

राजस्थान के अलवर जिले में एक दलित युवक को इस कदर पीटा गया कि दिल्ली में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। युवक का कसूर केवल इतना था कि उसके बाइक से एक मुस्लिम महिला को टक्कर लग गई थी।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक झिवाना गाँव निवासी हरीश जाटव मंगलवार (जुलाई 16, 2019) को अलवर जिले के चौपांकी थाना इलाके में फसला गाँव से गुजर रहा था। इसी दौरान उसकी बाइक से हकीमन नाम की महिला को टक्कर लग गई।

कथित तौर पर हादसे के बाद मौके पर मौजूद भीड़ ने हरीश की पिटाई शुरू कर दी। गंभीर हालत में उसे स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ से उसे दिल्ली रेफर कर दिया गया। सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। पोस्टमॉर्टम के बाद शुक्रवार (जुलाई 19, 2019) को शव परिवार वालों को सौंपा गया।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार घटना की सूचना मिलने पर पुलिस जब भिवाड़ी चोपांकी रोड पहुँची तो हकीमन और हरीश सड़क पर पड़े मिले। हकीमन को उसके घरवाले अस्पताल लेकर गए, जबकि हरीश को पुलिस ने हॉस्पिटल पहुँचाया। साथ ही उसके घरवालों को भी इस घटना की खबर दी। पुलिस ने बताया कि हरीश ट्रक ड्राइवर था। परिवार में उसकी पत्नी और चार बेटियों के अलावा पिता हैं जो देखने में समर्थ नहीं हैं।

हरीश की मौत के बाद उसके गाँव के भिवाड़ी सर्किल में पुलिस अलर्ट पर है। दोनों पक्षों की तरफ़ से गुरुवार (जुलाई 18, 2019) को बाइक से टक्कर और युवक की पिटाई को लेकर मामला दर्ज करवाया गया।

जाटव के परिजनों का कहना है कि उमर शेर नाम के शख्स ने हरीश को मार-मार के अधमरा कर दिया। आईपीसी की धारा 323, 343 और एससी/एसटी के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। वहीं, हकीमन के पति जमालुद्दीन ने भी आईपीसी धारा 279 के तहत एफआईआर करवाई है। उसने आरोप लगाया है कि बाइक चलाते वक़्त हरीश शराब के नशे में था। पुलिस ने बताया कि मामले की जाँच की जा रही है। कुछ रिपोर्टों में हरीश को मॉब लिंचिंग का शिकार बताया गया है, जिससे पुलिस ने इनकार किया है।

मुजफ्फरनगर दंगा: अखिलेश ने किए थे हिंदुओं पर 40 केस, दूसरे मजहब पर 1, सारे हिंदू बरी

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में 2013 में हुए दंगों के सिलसिले में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार ने हिंदुओं पर 40 मुकदमे लादे थे। समुदाय विशेष को केवल एक मामले में आरोपित बनाया गया था। अदालत ने सभी हिंदुओं को बरी कर दिया है, जबकि एकमात्र मामले में आरोपी बनाए गए समुदाय विशेष को दोषी पाया है।

जिस एक मामले में सत्र अदालत ने इस साल 8 फरवरी को सजा सुनाई थी, वह 27 अगस्त 2013 को कवल गॉंव में सचिन और गौरव नामक दो भाइयों की हत्या से जुड़ी है। इस मामले में अदालत ने मुज़म्मिल, मुजस्सिम, फुरकान, नदीम, जहॉंगीर, अफज़ल और इकबाल को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक हिंदुओं पर जो मुकदमे किए गए थे उसमें आरोपित बनाए गए सभी लोगों को अदालतों ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक हत्या से जुड़े 10 मामलों की सुनवाई जनवरी 2017 से इस साल फरवरी तक चली। इन मामलों में 53 लोग आरोपित बनाए गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक अभियोजन पक्ष के पाँच गवाह अदालत में इस बात से मुकर गए कि अपने संबंधियों की हत्या के वक्त वे मौके पर मौजूद थे। 6 अन्य गवाहों ने अदालत को बताया कि पुलिस ने जबरन खाली कागजों पर उनके हस्ताक्षर लिए थे। 5 मामलों में हत्या में इस्तेमाल हुए हथियार को पुलिस कोर्ट में पेश ही नहीं कर पाई।

इसके अलावा सामूहिक बलात्कार के 4 और दंगों के 26 मामलों के आरोपितों को भी अदालत ने बेगुनाह माना। रिपोर्ट में सरकारी वकील के हवाले से बताया गया है कि आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट गवाहों के बयानों पर आधारित थे। अदालत में गवाहों के मुकरने के बाद अब राज्य सरकार रिहा आरोपितों के संबंध में कोई अपील नहीं करेगी।

गौरतलब है कि मुजफ्फरनगर दंगों में 65 लोग मारे गए थे। सभी मुकदमे पूर्व की सपा सरकार के कार्यकाल में दायर किए गए थे। इनकी जाँच भी अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई थी।

राजस्थान: दलित महिला ने 9 पुलिसकर्मियों पर लगाया गैंगरेप और देवर की हत्या का आरोप

राजस्थान के चूरू जिले में सरदारशहर पुलिस स्टेशन के निलंबित पुलिस निरीक्षक के अलावा आठ पुलिसवालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिसवालों पर आरोप है कि उन्होंने एक दलित महिला को बंधक बनाकर रखा और उसके साथ बलात्कार किया।

35 वर्षीय दलित महिला, जो कि चार बच्चों की माँ है ने 9 पुलिसकर्मियों पर उसके साथ पुलिस स्टेशन में ही गैंगरेप का आरोप लगाया है। पीड़ित महिला का आरोप है कि पुलिस ने चोरी के एक मामले में उसके देवर को 6 जुलाई को पकड़ा था। पुलिसवालों ने महिला के देवर को हिरासत में इतना प्रताड़ित किया कि उसकी मौत हो गई थी। महिला का आरोप है कि उसे भी अवैध तरीके से थाने में हिरासत में रखा गया और बलात्कार किया गया। अधिकारियों ने महिला के देवर की हिरासत के मौत मामले में न्यायिक जाँच के आदेश दिए हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जयपुर के सवाई मान सिंह हॉस्पिटल में भर्ती दलित महिला ने पुलिस को अपने बयान दर्ज कराए हैं। सरदारशहर के वर्तमान थानाधिकारी महेन्द्र दत्त शर्मा ने बताया कि शनिवार को महिला के बयान के आधार पर तत्कालीन थानाधिकारी और अन्य छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ रविवार को एफआईआर दर्ज की गई। मामले की जाँच सीआईडी-सीबी द्वारा की जा रही है।

महिला ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उसके नाखून उखाड़ डाले और उसे प्रताड़ित करने के साथ उससे सामूहिक दुष्कर्म किया। महिला के अनुसार, जब उसने पुलिसवालों को रोकने का प्रयास किया तो उसे बिजली के झटके दिए गए और पेट्रोल डालकर जला देने की धमकियाँ देकर डराया गया। उसे इतना पीटा गया कि उसकी आँखों, गले और हाथों से खून बहने लगा।

वहीं इस मामले में चुरू के एसपी राजेंद्र कुमार को हटा दिया गया है और डीएसपी भवंर लाल को भी सस्पेंड कर दिया गया है। डीएसपी के खिलाफ भी विजिलेंस की जाँच बिठाई गई है।

कॉन्ग्रेस MLA ने आरोपों को बताया झूठ

इस घटना के प्रकाश में आने पर बदनामी के डर से राजस्थान में सत्तारूढ़ कॉन्ग्रेस पार्टी के MLA ने पीड़ित महिला के आरोपों को झठ और साजिश बताया है। MLA भंवरलाल शर्मा का कहना है कि महिला द्वारा लगाए गए आरोप झूठे हैं।

‘भारत दुनिया की शरणार्थी राजधानी नहीं बन सकता’: केंद्र ने की SC से NRC डेडलाइन बढ़ाने की माँग

असम में आई बाढ़ के बीच केन्द्र और राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से फाइनल NRC के लिए डेडलाइन 31 जुलाई से बढ़ाने की माँग की है। केन्द्र ने शुक्रवार (जुलाई 19, 2019) को कोर्ट से आग्रह किया कि वह NRC की समय-सीमा के लिए कोई नई तारीख दे।

असम एनआरसी (NRC) के मुद्दे पर केन्द्र और असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- “हमें एनआरसी में शामिल लोगों के लिए नमूना सत्यापन की प्रक्रिया पर फिर से विचार करने की जरूरत है।” केन्द्र सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा कि अवैध घुसपैठियों को हर हाल में अपने देश वापस जाना ही होगा। केंद्र ने कहा कि हम भारत को विश्व की रिफ्यूजी कैपिटल (शरणार्थी राजधानी) नहीं बना सकते। पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई तक वेरिफिकेशन के काम को निपटाने के लिए कहा था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, केन्द्र ने कहा कि असम में एनआरसी में गलत तरीके से कुछ लोगों को शामिल किए जाने और कुछ लोगों को उससे बाहर रखे जाने का पता लगाने के लिए 20% नमूना सर्वेक्षण के सत्यापन की अनुमति दी जाए। NRC मामले में केन्द्र सरकार ने कहा कि कोऑर्डिनेटर ने इस मामले में अच्छा काम किया है, लेकिन हम लाखों लोगों के मामले में काम कर रहे हैं। सरकार ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि लिस्ट में कुछ सुधार और कुछ नामों को जोड़े जाने की आवश्यकता है।

दरअसल, पता चला है कि बांग्लादेश के बॉर्डर के पास लाखों लोग गलत तरीके से NRC में आ गए हैं। जिन लोगों का नाम शामिल हुआ है, वे अवैध घुसपैठिए हैं। केन्द्र सरकार ने कहा कि 31 जुलाई को सप्लिमेंटरी लिस्ट जारी कर देंगे, लेकिन फाइनल लिस्ट जारी करने में अभी और समय लगेगा। असम में अभी बाढ़ भी आई हुई है। इसके बाद कोर्ट ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई 23 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी।

कर्नाटक: अब सोमवार को विश्वासमत पर मतदान, ‘लव लेटर’ पर सुप्रीम कोर्ट पहुॅंचे सीएम

कर्नाटक की 14 महीने पुरानी सरकार पर जारी उठा-पठक अब संवैधानिक संकट में तब्दील हो गया है।लगातार दूसरे दिन एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस-जदएस सरकार के विश्वास मत पर मतदान हुए बिना ही सदन कार्यवाही स्थगित कर दी गई। अब सोमवार यानी 22 जुलाई को बहुमत का परीक्षण होगा।

इससे पहले शुक्रवार को भी सदन के भीतर और बाहर सियासी ड्रामा चलता रहा। मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने भी शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर कर कहा है कि राज्यपाल वजूभाई वाला विधानसभा को निर्देशित नहीं कर सकते कि विश्वास मत प्रस्ताव किस तरह लिया जाए।

उन्होंने कहा,”मैं गवर्नर का सम्मान करता हूॅं। लेकिन, उनके दूसरे लव लेटर से मैं आहत हुआ हूॅं।” उनका आशय राज्यपाल के उस पत्र को लेकर था जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री को शुक्रवार शाम छह बजे तक बहुमत साबित करने के लिए कहा था।

राज्यपाल ने गुरुवार को भी विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर विश्वासमत की प्रक्रिया पूरी कराने को कहा था। इसके बावजूद कार्यवाही स्थगित कर दी गई। आज फिर राज्यपाल ने बहुमत साबित करने के लिए शुक्रवार 1.30 बजे तक की समय-सीमा निर्धारित की। सदन में समय-सीमा के भीतर विश्वासमत प्रस्ताव पर मत विभाजन नहीं हो सका, जिसके बाद राज्यपाल ने समय-सीमा को फिर से निर्धारित कर इसे शाम के छह बजे कर दिया।

गौरतलब है कि करीब दो हफ्ते पहले सत्तारूढ़ गठबंधन के 15 बागी विधायकों के इस्तीफे से राज्य में राजनीतिक संकट पैदा हुआ था। बागी विधायकों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 17 जुलाई को निर्देश दिया था कि इन विधायकों को विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिये बाध्य नहीं किया जा सकता।

इस फैसले पर स्पष्टीकरण की मांग करते हुए मुख्यमंत्री कुमारस्वामी और कांग्रेस की कर्नाटक इकाई ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इसमें उन्होंने दावा किया है कि न्यायालय का आदेश विधानसभा के चालू सत्र में अपने विधायकों को व्हिप जारी करने में बाधक बन रहा है।

कुमारस्वामी ने विश्वास मत की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए राज्यपाल द्वारा एक के बाद एक निर्धारित की गई समय-सीमा पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के निर्देश शीर्ष अदालत के पूर्व के फैसले के पूरी तरह विपरीत हैं।

अपनी याचिका में उन्होंने कहा कि जब विश्वास प्रस्ताव पर कार्यवाही पहले से ही चल रही है तो राज्यपाल वजुभाई वाला इस पर कोई निर्देश नहीं दे सकते। उन्होंने कहा कि विश्वास प्रस्ताव पर बहस किस तरह से हो इसे लेकर राज्यपाल सदन को निर्देशित नहीं कर सकते।

विधानसभा के आज दोपहर डेढ़ बजे तक विश्वास मत प्रक्रिया पूरी करने में विफल रहने के बाद राज्यपाल ने कुमारस्वामी को दूसरा पत्र लिखा। उन्होंने विधानसभा में जारी विचार-विमर्श से विश्वास मत पारित होने में देरी की ओर इशारा किया। वाला ने विधायकों की खरीद-फरोख के व्यापक आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि यह संवैधानिक रूप से अनिवार्य है कि विश्वास मत प्रक्रिया बिना किसी विलंब के शुक्रवार को ही पूरी हो।

वाला ने कुमारस्वामी को दूसरे पत्र में कहा, “जब विधायकों की खरीद-फरोख्त के व्यापक स्तर पर आरोप लग रहे हैं और मुझे इसकी कई शिकायतें मिल रही हैं, यह संवैधानिक रूप से अनिवार्य है कि विश्वास मत बिना किसी विलंब के आज ही पूरा हो।”

कुमारस्वामी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें ‘दूसरा प्रेम पत्र’ मिला है और इससे वह आहत हैं। इससे पहले समय सीमा के करीब आने पर सत्तारूढ़ गठबंधन ने ऐसा निर्देश जारी करने को लेकर राज्यपाल की शक्ति पर सवाल उठाया।